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10-15 करोड़ की आमदनी का रास्ता: जानें कैसे बनेगा झारखंड ‘सीड हब’

रांची झारखंड में वन विभाग ग्रामीणों को परिपक्व बीजों के चयन और सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित करेगा, जिससे करंज, साल, शीशम और बांस के बीजों से 10-15 करोड़ की आमदनी होगी। जनवरी से मार्च का महीना राज्य से जंगलों में इमारती लकड़ियों के बीज संग्रहण का होता है। वन क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीण अपने स्तर से बीज संग्रहित करते हैं और इसे वन विभाग की संबंधित संस्था को सौंप देते हैं। वन विभाग ने परिपक्व बीजों को चुनने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए लोगों को प्रशिक्षण देगा। प्रशिक्षण पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से होगा, जिससे बीज संरक्षण में मदद मिलेगी और बर्बादी कम होगी। उनकी सहयोग समितियां भी बनाई गई हैं। बीज संवर्धन संस्थान के निदेशक रहे रामाश्रय प्रसाद ने बताया कि राज्य के वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों को इससे पहले केंदू पत्ते के संग्रहण का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जानकारी के अभाव में लोग साठ प्रतिशत बीजों को नष्ट कर देते हैं। पुष्ट बीजों से रहने से किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी। बांस के बीज, खासकर अफ्रीकी देशों में, निर्यात किए जाते हैं, जिससे राज्य ‘सीड हब’ बन सकता है। राज्य में मुख्य रूप से तीन प्रकार के बांस पाए जाते हैं,  डेंड्रोकैलामस स्ट्रिक्टस (लाठी बांस), बम्बूसा नूटन्स (सामान्य बांस), बम्बूसा तुलदा (पानी बांस)। साल, शीशम, बांस, करंज के बीजों को चुनने और उन्हें संरक्षित रखने के लिए लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा। राज्य के बांस बीजों की विदेशों खासकर अफ्रीकी देशों तक में बिक्री की जाती है। झारखंड के बांस के बीजों की मांग विशेष रूप से अफ्रीकी देशों में बहुत अधिक है। हां के बांस की आनुवंशिक विविधता और कठिन परिस्थितियों में पनपने की क्षमता।  यदि ग्रामीण सही तरीके से बीजों का संग्रहण करें, तो झारखंड ‘सीड हब’ बन सकता है। बीजों की बिक्री से 10-15 करोड़ रुपये की वार्षिक आय का अनुमान है। केवल बीज ही नहीं, बल्कि बांस से बने फर्नीचर, हस्तशिल्प, और बांस के ‘करील’ की खाद्य बाजार में भारी मांग है। वन क्षेत्र में पाए जाने वाले वृक्षों के बीज पर पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय ने शोध कार्य किया है। इसमें बीजों के चयन पद्धति, उनके संरक्षण के उपायों की जानकारी दी गई है। लोगों को प्रशिक्षित करने में यहां के विशेषज्ञों का सहयोग लिया जाएगा।

मार्च 2026 तक गोरखपुर में फोरलेन सड़कों से जुड़ी पांच महत्वपूर्ण परियोजनाएं हो जाएंगी पूर्ण

इसी अवधि तक चार ओवरब्रिज-फ्लाईओवर भी बनकर हो जाएंगे तैयार गोरखपुर, नए साल में गोरखपुर में फोरलेन सड़कों और फ्लाईओवर का विशाल संजाल नजर आएगा। मार्च 2026 तक फोरलेन सड़कों से जुड़ी पांच महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूर्ण हो जाएंगी। इसी अवधि तक चार ओवरब्रिज-फ्लाईओवर भी बनकर हो तैयार हो जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की जा रही मॉनिटरिंग और समीक्षा से निर्माण कार्यों में तेजी आई है। अगले तीन-साढ़े तीन माह में पूरी होने वाली रोड कनेक्टिविटी से जुड़ी फोरलेन और ओवरब्रिज-फ्लाईओवर की परियोजनाओं से शहर के आंतरिक और वाह्य आवागमन को सुगम कर देंगी। देवरिया बाईपास इनमें सबसे पहले बनकर तैयार होने वाली फोरलेन सड़क होगी। देवरिया बाईपास रोड का फोरलेन में चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य मार्च 2023 में शुरू हुआ था और जनवरी 2026 के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। कुल 9.50 किमी लंबी सड़क को फोरलेन में परिवर्तित करने में 399.24 करोड़ रुपये की लागत आएगी। वर्तमान में निर्माण कार्य की भौतिक प्रगति 95 फीसद है। पैडलेगंज से फिराक गोरखपुरी चौक होते हुए बेतियाहाता चौराहे तक 1.80 किमी सड़क को भी फोरलेन बनाने का तेजी से हो रहा है। 277.78 करोड़ रुपये की लागत वाली इस फोरलेन सड़क परियोजना के मार्च 2026 तक पूरी तरह बन जाने की उम्मीद है। 11.60 किमी की लंबाई में भटहट से बांसस्थान मार्ग को 689.35 करोड़ रुपये की लागत से फोरलेन बनाया जा रहा है। इसका निर्माण मार्च 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके पूरी तरह बन जाने से आयुष विश्वविद्यालय आने-जाने वालों की यात्रा काफी आसान हो जाएगी। नौसढ़ से पैडलेगंज की सड़क शहर की ऐसी पहली सड़क होगी जिसे सिक्सलेन में तब्दील किया जा रहा है। 5.10 किमी लंबे इस मार्ग पर करीब 94 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके निर्माण पर 297.29 करोड़ रुपये की लागत आएगी। कार्य मार्च 2026 तक पूरा किया जाना लक्षित है। जिला जेल बाईपास मार्ग को भी फोरलेन में चौड़ीकृत-सुदृढ़ीकृत करने का काम जारी है। 8.56 किमी लंबी इस सड़क को फोरलेन बनाने में 369.04 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। वर्तमान में निर्माण की भौतिक प्रगति 96 प्रतिशत है और मार्च 2026 तक इसे पूर्ण किया जाना है। इन सड़कों में से देवरिया बाईपास का निर्माण कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड द्वारा जबकि भटहट-बांसस्थान, नौसढ़-पैडलेगंज, जिला जेल बाईपास और पैडलेगंज-फिराक गोरखपुरी चौक मार्ग का लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड तीन द्वारा कराया जा रहा है। मार्च 2026 तक ये फ्लाईओवर व ओवरब्रिज बनकर हो जाएंगे तैयार -बरगदवा चौराहा से नकहा जंगल-मानीराम स्टेशनों के मध्य समपार संख्या 5ए पर ओवरब्रिज, लागत 152.19 करोड़ रुपये, पूर्ण करने का लक्ष्य जनवरी 2026, भौतिक प्रगति 97 प्रतिशत से अधिक। -चौरीचौरा-भोपा बाजार में समपार संख्या 147बी पर रेल ओवरब्रिज, लागत 49.22 करोड़ रुपये, पूर्ण करने का लक्ष्य फरवरी 2026, भौतिक प्रगति सेतु निगम भाग 98 प्रतिशत। -खजांची चौराहा पर फ्लाईओवर, लागत 96.50 करोड़ रुपये, पूर्ण करने का लक्ष्य जनवरी 2026, भौतिक प्रगति 98.84 प्रतिशत। -नौसढ़-पैडलेगंज मार्ग पर सिक्सलेन फ्लाईओवर तथा देवरिया बाईपास कनेक्टिंग फ्लाईओवर, लागत 429.49 करोड़ रुपये, पूर्ण करने का लक्ष्य जनवरी 2026, भौतिक प्रगति करीब 80 प्रतिशत।

मंत्री राम विचार नेताम ने शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमा स्थापना हेतु किया भूमिपूजन

जनजातीय समाज के विकास के लिए सरकार तत्पर किसानों को एकीकृत खेती के लिए प्रोत्साहित करें रायपुर, जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य पर आज 18 दिसम्बर को तहसील कार्यालय के समीप महासमुंद में शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमा स्थापित किए जाने हेतु भूमिपूजन कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। आदिवासी समाज के परंपरागत पूजा पाठ से भूमिपूजन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम आदिम जाति विकास एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ।कार्यक्रम की अध्यक्षता महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने की। कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ जिला महासमुंद, 52 गढ़ गोंड समाज महासमुंद एवं आदिवासी समाज महासमुंद के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में चंद्रहास चंद्राकर, राज्य बीज विकास निगम के अध्यक्ष,रूप सिंह मंडावी, अनुसूचित जनजाति आयोग उपस्थित रहे। विशेष अतिथि के रूप में भीखम सिंह ठाकुर उपाध्यक्ष जिला पंचायत, दिशा रामस्वरूप दीवान अध्यक्ष जनपद पंचायत, आर.एन. ध्रुव प्रांताध्यक्ष छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ, कमलेश ध्रुव अध्यक्ष केन्द्रीय गोंड महासभा धमधागढ़, आर एन ध्रुव, ऐतराम साहू , देवीचंद राठी उपाध्यक्ष , थानसिंह दीवान, एस पी ध्रुव, श्रीमती राधेश्याम त्रिलोकी, इश्वरी भोई उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि आज गुरु घासी दास जयंती आज पूरे देश में मनाया जा रहा है और ऐसे विशेष अवसर में जनजातीय गौरव दिवस मना रहे हैं। यह गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि ये देश के लिए अमृत काल का समय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंशानुरूप यहां जनजातीय गौरव के लिए अनेक कार्य किया जा रहा है। नया रायपुर में 50 करोड़ रुपए की लागत से आदिवासी समाज के योगदान को अमिट बनाने भव्य म्यूजियम बनाया गया है। जिसे देश भर के लोग देखने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में 80 हजार करोड़ की लागत से जनजातीय उत्थान और विकास के लिए बजट दिया गया है। राज्य में धरती आबा और पी एम जनमन योजना संचालित किया जा रहा है।जिसमें आदिवासी गांवो में सड़क, बिजली, पानी और नौकरी की समुचित व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि समाज को आगे बढ़ाने में कृषि विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। किसानों को एकीकृत कृषि आधारित खेती करने प्रोत्साहित करें। गाय पालन भी करें। युवाओं को दिल्ली में निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था की गई है। प्रयास स्कूल के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ लेने कहा। उन्होंने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह केवल आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध सबसे पहले संगठित संघर्ष कर देशभक्ति, साहस और त्याग का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी प्रतिमा की स्थापना आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास, संस्कृति और स्वाभिमान से जोड़ने का कार्य करेगी। राज्य शासन जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। अध्यक्षीय उद्बोधन में महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने कहा कि महासमुंद की पावन धरती पर शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमा स्थापित होना गर्व का विषय है। यह प्रतिमा जनजातीय समाज के संघर्ष, बलिदान और आत्मसम्मान की प्रतीक बनेगी। उन्होंने कहा कि समाज के महापुरुषों को सम्मान देना ही सच्ची श्रद्धांजलि है और ऐसे आयोजनों से समाज में एकता और जागरूकता बढ़ती है। उन्होंने अंचल में विकास को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार किसानों की आय दुगुना करने संकल्पित है। इसी कड़ी में सिंचाई क्षमता को बढ़ाने जिले में 3200 करोड़ की लागत से सिकासेर बांध गरियाबंद से शहीद वीर नारायण सिंह जलाशय कोडार में पानी लाने की व्यवस्था कर रहे है। श्री सिन्हा ने बताया कि 650 करोड़ की लागत से सिरपुर बैराज भी बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां के लोग स्वाभिमानी है और अन्याय के खिलाफ नहीं झुकते।आदिवासी समाज किसी से पीछे नहीं है।आज हमारे मुख्यमंत्री भी आदिवासी समाज से है। विकसित भारत के निर्माण में महासमुंद की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। समारोह को संबोधित करते हुए अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूप सिंह मंडावी ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस हमारे नायकों को स्मरण करने और उनके आदर्शों को आत्मसात करने का दिन है। छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज एक अलग ही पहचान रखता है। उन्होंने समाज के क्रमिक विकास और विस्तार के संदर्भ में जानकारी दी। समाज के पदाधिकारी एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री भीखम सिंह ठाकुर ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह ने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाकर समाज को दिशा दी। उनकी शहादत हमें सिखाती है कि अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष करना आवश्यक है। समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी श्री कमलेश ध्रुव एवं आर एन ध्रुव ने भी संबोधित किया। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा और शहीद वीर नारायण सिंह के शहादत पर अपने प्रेरक विचार रखे। इन्होंने कहा कि दोनों वीर अंग्रेजी हुकूमत और प्रतिकूल परिस्थिति के खिलाफ उठ खड़े हुए।कार्यक्रम के दौरान विधिवत पूजा-अर्चना के साथ भूमिपूजन सम्पन्न किया गया। इस अवसर पर समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, परिक्षेत्र एवं बड़ी संख्या में समाज जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकता के संदेश के साथ हुआ।

राजधानी रांची में बढ़ता वायु प्रदूषण, साफ हवा में बेंगलुरु-चेन्नई आगे

 रांची झारखंड की राजधानी रांची , जो कभी अपनी घने जंगलों, हरियाली और स्वच्छ हवा के लिए मशहूर थी, आज एयर Pollution की गंभीर समस्या से जूझ रही है। शहर के कई हिस्सों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) अनहेल्दी श्रेणी में पहुंच गया है, जिससे आम नागरिकों से लेकर बच्चों और बुजुर्गों तक के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। रांची में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर है. शहर के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषक मुख्य कारण हैं। विशेषज्ञों और नागरिकों ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है, और सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। इन दिनों में AQI का स्तर 150 से ऊपर बना हुआ है, और कुछ इलाकों में यह 180 के करीब दर्ज किया गया है। झारखंड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (JSPCB) ने क्लीन एयर प्लान को सख्ती से लागू करने का ऐलान किया है। रांची को इस संकट से निकालने के लिए सरकार, प्रशासन और नागरिकों का सहयोग जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तुरंत कदम उठाए गए तो 2026 तक सुधार संभव है। आंकड़ों के अनुसार रांची का औसत AQI अनहेल्दी (151-200) की श्रेणी में है। मुख्य प्रदूषक PM2.5 और PM10 हैं, जो सर्दियों में मौसमी स्थितियों के कारण और बढ़ जाते हैं। देश के कई बड़े शहरों, जैसे कि Bengaluru or Chennai की हवा अपेक्षाकृत साफ है। कांके रोड में रहने वाली सोशल एक्टिविस्ट रंजना कुमारी का कहना है, हरित क्षेत्र की कमी सबसे बड़ा कारण है। हमें तुरंत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करना होगा। अभी तक आपने सुन होगा कि राजधानी दिल्ली pollution का मार झेल रहा है। लेकिन अब रांची का शहर और इसका कस्बा भी प्रदूषण से अछूता नहीं रहा। प्रमुख पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. श्वेता कुमारी कहती हैं, रांची में बढ़ता PM2.5 स्तर फेफड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचा रहा है। बच्चों और अस्थमा रोगियों को बाहर निकलते समय N95 मास्क पहनना चाहिए। प्रशासन को ट्रैफिक और निर्माण धूल पर सख्ती बरतनी होगी। नागरिक अनावश्यक बाहर निकलने से बचें, मास्क पहनें और जागरूकता फैलाएं।

जशपुर के लिए मुख्यमंत्री का तोहफा: 4 प्रमुख सड़कों के लिए 12.69 करोड़ की मंजूरी

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के सर्वांगीण विकास को नई गति देने के लिए जिले की चार प्रमुख सड़कों के निर्माण के लिए कुल 12 करोड़ 69 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस निर्णय से ग्रामीण-शहरी संपर्क मजबूत होगा, आवागमन आसान बनेगा और क्षेत्र की आर्थिक प्रगति को बल मिलेगा। जशपुरवासियों ने मुख्यमंत्री के इस जनहितकारी फैसले पर उत्साह व्यक्त करते हुए श्री साय के प्रति गहरा आभार जताया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा स्वीकृत सड़क परियोजनाओं में 3 किमी लंबी कंडोरा से आराकोना पहुंच मार्ग के लिए 3 करोड़ 86 लाख रुपये, 3 किमी लंबी माडो से ढेंगनी पहुंच मार्ग के लिए 3 करोड़ 77 लाख रुपये, 1.9 किमी लंबी चराईडांड के मलेरिया बस्ती से एनएच-43 तक पहुंच मार्ग के लिए 2 करोड़ 20 लाख रुपये तथा 2.86 किमी लंबी बेहराखार अटल चौक से कुरूमढ़ोड़ा तक पहुंच मार्ग के लिए 3 करोड़ 76 लाख रुपये शामिल हैं। इन सड़कों के निर्माण से दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में यातायात सुगम होगा, जिससे व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी। दो वर्षों में 1000 करोड़ से अधिक की सड़क सौगात, ग्रामीण तस्वीर बदली उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने दो वर्ष के कार्यकाल में जशपुर जिले को सड़क निर्माण के लिए लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की है। इससे न केवल बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ है, बल्कि ग्रामीण अंचलों की समग्र विकास की गति तेज हो गई है। राज्य शासन की इस विकासोन्मुखी नीति से जशपुर जैसे आदिवासी बहुल जिलों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, जो छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस सौगात पर जशपुर के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद ज्ञापित किया है। लोगों का मानना है कि इन सड़कों से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि क्षेत्र की पर्यटन क्षमता भी मजबूत होगी। छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल राज्य के हर कोने तक विकास पहुंचाने के संकल्प को साकार कर रही है। विष्णुदेव साय सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ बुनियादी विकास के नए मानक गढ़ रहा है, जिससे लाखों नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं।

जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, 10 स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट बनाएगा निगम

रायपुर राजधानी में लगातार गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए नगर निगम ने जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाया है. शहर में भू-जल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा 10 स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट बनाए जाने की योजना तैयार की गई है. इस योजना के लिए लगभग 50 लाख रुपये का प्रस्ताव केंद्रीय जल आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजा गया है. नगर निगम के जल विभाग के अनुसार, प्रत्येक रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट पर करीब 5 लाख रुपये की लागत आएगी. इन पिटों के जरिए वर्षा जल को संग्रहित कर सीधे जमीन में पहुंचाया जाएगा, जिससे भू-जल का पुनर्भरण हो सके. फिलहाल शहर में उपयुक्त स्थानों का चिन्हांकन किया जा रहा है. कई इलाकों में काफी नीचे चला गया है जल स्तर नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक रायपुर में भू-जल स्तर तेजी से गिर रहा है. कचना, सड्डू और सेजबहार जैसे क्षेत्रों में जल स्तर 800 से 1000 फीट तक पहुंच गया है. इससे बोरवेल की गहराई बढ़ रही है और जल आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव भी लगातार बढ़ रहा है. 62 एकड़ क्षेत्र में पहले से विकसित है रेन वाटर हार्वेस्टिंग इससे पहले भी नगर निगम द्वारा दलदल सिवनी क्षेत्र में लगभग 62 एकड़ में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली विकसित की जा चुकी है. इंदिरा स्मृति वन के पास बनाए गए परकोलेशन टैंकों में मानसून के दौरान वर्षा जल को एकत्र कर जमीन में समाहित किया जाएगा. विशेषज्ञों के अनुसार इस व्यवस्था से करीब 21 करोड़ लीटर पानी का भंडारण संभव है. नगर निगम का मानना है कि वर्षा जल संरक्षण से भविष्य में जल संकट को काफी हद तक रोका जा सकता है. निगम आयुक्त विश्वदीप ने बताया कि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू किया जाएगा. साथ ही आने वाले समय में सरकारी भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं विकसित करने की योजना है.

जोधपुर में तैनात होंगे AH-64E अपाचे, भारतीय सेना को मिली घातक शक्ति

जोधपुर भारत और अमेरिका के बीच तेजी से मजबूत होती मेजर डिफेंस पार्टनरशिप को एक और ठोस रूप देते हुए भारतीय सेना के लिए बोइंग निर्मित AH-64E अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर भारत पहुंच चुके हैं। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने आधिकारिक बयान में दी, जिसमें कहा गया कि यह डिलीवरी अमेरिकी राष्ट्रपति (POTUS) और भारत के प्रधानमंत्री (PMO India) के संयुक्त वक्तव्य में की गई प्रतिबद्धताओं को पूरा करती है। भारतीय सेना के सूत्रों के अनुसार, इन अत्याधुनिक अटैक हेलिकॉप्टरों का तकनीकी निरीक्षण, स्वीकृति परीक्षण और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद आने वाले कुछ दिनों में जोधपुर में तैनाती की जाएगी। अमेरिकी दूतावास का बयान: रणनीतिक भरोसे का संकेत अमेरिकी दूतावास ने अपने संदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि अपाचे हेलिकॉप्टरों का आगमन अमेरिका–भारत रक्षा साझेदारी की विश्वसनीयता और मजबूती को दर्शाता है। दूतावास के अनुसार, यह उपलब्धि अमेरिकी रक्षा सचिव और भारत के रक्षा मंत्रालय के बीच हुए समझौतों को भी पूरा करती है। बयान में यह भी रेखांकित किया गया कि यह सहयोग केवल हथियार आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें को-प्रोडक्शन, प्रशिक्षण, रखरखाव और उन्नत तकनीकी सहयोग जैसे महत्वपूर्ण आयाम भी शामिल हैं, जो दोनों देशों की क्षेत्रीय सुरक्षा की साझा दृष्टि को मजबूत करते हैं। AH-64E अपाचे: भारतीय सेना के लिए निर्णायक युद्ध शक्ति AH-64E अपाचे गार्जियन दुनिया के सबसे घातक और उन्नत अटैक हेलिकॉप्टरों में गिना जाता है। यह हेलिकॉप्टर एंटी-आर्मर ऑपरेशन, क्लोज एयर सपोर्ट, सटीक स्ट्राइक और आधुनिक नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है। अपाचे में अत्याधुनिक सेंसर, लॉन्गबो फायर-कंट्रोल रडार, हेलफायर मिसाइलें और भारी हथियार प्रणाली लगी होती है, जो इसे हर मौसम और हर भूभाग में प्रभावी बनाती हैं। रेगिस्तानी और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में इसकी सिद्ध क्षमता इसे भारत के पश्चिमी मोर्चे के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती है। सेना विमानन कोर को मिली नई धार अपाचे हेलिकॉप्टरों की तैनाती भारतीय सेना के आर्मी एविएशन कॉर्प्स के लिए एक रणनीतिक बदलाव का संकेत है। पहली बार भारतीय सेना के पास अपने नियंत्रण में पूरी तरह समर्पित अटैक हेलिकॉप्टर होंगे, जिससे ज़मीनी सैनिकों के साथ समन्वय और युद्धक्षेत्र में प्रतिक्रिया क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। यह कदम भारतीय सेना की संयुक्त युद्धक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला माना जा रहा है। और ये भी पढ़े जोधपुर में तैनाती: पश्चिमी मोर्चे पर निर्णायक बढ़त अपाचे हेलिकॉप्टरों की प्रस्तावित तैनाती जोधपुर में की जा रही है, जो भारत के पश्चिमी सेक्टर का एक प्रमुख सैन्य केंद्र है। यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है और यहां से त्वरित प्रतिक्रिया अभियानों की आवश्यकता रहती है। अपाचे की रेगिस्तानी इलाकों में उत्कृष्ट प्रदर्शन क्षमता इसे इस क्षेत्र के लिए आदर्श बनाती है, जिससे भारतीय सेना की डिटरेंस और ऑफेंसिव क्षमता को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। परिपक्व होती भारत–अमेरिका रक्षा साझेदारी का प्रतीक अपाचे हेलिकॉप्टरों की यह डिलीवरी केवल एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि भारत–अमेरिका संबंधों में बढ़ते रणनीतिक विश्वास का प्रतीक है। पिछले वर्षों में भारत ने अमेरिका से कई उन्नत सैन्य प्लेटफॉर्म प्राप्त किए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार गहरा हुआ है। इस सहयोग ने पारंपरिक खरीदार-विक्रेता संबंधों से आगे बढ़कर रणनीतिक साझेदारी का स्वरूप ले लिया है। प्रशिक्षण, रखरखाव और दीर्घकालिक सहयोग अपाचे कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय सेना के पायलटों और तकनीकी कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही लॉजिस्टिक सपोर्ट, स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस फ्रेमवर्क भी स्थापित किया गया है, जिससे प्लेटफॉर्म की दीर्घकालिक परिचालन क्षमता सुनिश्चित हो सके। यह सहयोग भारतीय सेना की तकनीकी आत्मनिर्भरता और परिचालन दक्षता को भी मजबूती प्रदान करता है। क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव अपाचे हेलिकॉप्टरों का आगमन ऐसे समय हुआ है जब क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। इन हेलिकॉप्टरों से भारतीय सेना की त्वरित प्रतिक्रिया और सटीक प्रहार क्षमता को मजबूती मिलेगी, जो स्थिरता और शांति बनाए रखने में सहायक होगी। निरीक्षण और औपचारिक प्रक्रियाओं के पूरा होते ही अपाचे हेलिकॉप्टर जल्द ही पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएंगे। यह न केवल भारतीय सेना की युद्धक क्षमता में वृद्धि करेगा, बल्कि भारत–अमेरिका रक्षा साझेदारी के भविष्य की दिशा भी स्पष्ट करता है।  

चेयरमैन बनने के लिए 13 सदस्य चाहिए, AAP की जीत पर भगवंत मान की जमकर सराहना

लुधियाना पंजाब के लुधियाना में जिला परिषद चुनाव में आम आदमी पार्टी ने अन्य पार्टियों से बेहतर प्रदर्शन तो किया लेकिन जिला परिषद का चेयरमैन बनाने के लिए जरूरी संख्या को वो भी हासिल नहीं कर सके। आम आदमी पार्टी ने जिला परिषद की 11 सीटें जीती हैं।  चेयरमैन बनाना आम आदमी पार्टी के लिए भी आसान नहीं होगा। आम आदमी पार्टी को अपना चेयरमैन बनाने का सारा दारोमदार अब विधायक मनप्रीत सिंह अयाली के हाथ में है। आम आदमी पार्टी को चेयरमैन बनाने के लिए दो सदस्यों की जरूरत है और मनप्रीत अयाली के पास तीन सदस्य हैं। कांग्रेस के पास 8 और शिअद के पास 3 सीटें कांग्रेस के पास 8 और शिअद के पास 3 सीटें हैं। कांग्रेस और शिअद आम आदमी पार्टी को समर्थन नहीं देंगे। अगर मनप्रीत अयाली ने आप को समर्थन नहीं दिया तो लुधियाना में जिला परिषद का चेयरमैन बनाने के लिए कांग्रेस में सेंधमारी करनी होगी। हालांकि इस समय कांग्रेस के सदस्य भी पार्टी नहीं छोड़ेंगे क्योंकि एक साल बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। अयाली ने समर्थन दिया तो विधानसभा चुनाव में होगी मुश्किल हलका दाखा में मनप्रीत सिंह अयाली का वर्चस्व लंबे समय से है। उनकी मेहनत से ही उनके समर्थकों ने शानदार जीत हासिल की। अयाली अगर चेयरमैन बनाने के लिए आप को समर्थन देते हैं तो आने वाले विधानसभा चुनाव में उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं क्योंकि 2027 में उन्हें फिर से विधानसभा चुनाव में उतरना है और सामने उनका मुकाबला आप के उम्मीदवार से होगा। मेरे समर्थक दो चेयरमैन के लिए समर्थन मनप्रीत अयाली को पता है कि उनके समर्थन के बिना जिला परिषद का चेयरमैन नहीं बन सकता। ऐसे में अयाली ने अब नया दाव चल दिया है। अयाली ने कहा कि उनके तीन समर्थक चुनाव जीते हैं उनमें से एक को चेयरमैन बनाने के लिए जो समर्थन देना चाहते हैं वो साथ आएं। हम पूरे जिले में विकास करके दिखाएंगे। हमारे पास विकास करवाने का पूरा अनुभव है। लुधियाना जिला परिषद के जीते उम्मीदवार ललहेड़ी से जतिंदर सिंह औजला (अकाली दल), बीजा से अवतार सिंह (आम आदमी पार्टी), मटण से जगरूप सिंह (AAP), नीलों कलां से हरजोत सिंह मंगत (अकाली दल), खिरनियां से बरिंदरदीप कौर (AAP), मत्तेवाड़ा से ज्ञानप्रीत कौर ग्रेवाल (AAP), चक सरवां नथ से हरजीत कौर (अकाली दल), कद्दों से गुरविंदर सिंह गिल (कांग्रेस), रामगढ़ सरदारां से अवतार सिंह (कांग्रेस) जीते हैं। किला रायपुर से सिकंदर सिंह (AAP)। नारंगवाल से जसवीर कौर (AAP), पक्खोवाल से राजविंदर कौर बराड़ (कांग्रेस), सुधार से सतवंत सिंह (कांग्रेस), हंसकलां से अमनदीप कौर रूमी (निर्दलीय), बिंजल से सुखभिंदर सिंह (कांग्रेस), मानूके से शहरीन कौर (AAP), सिधवां कलां से गुरप्रीत कौर (AAP), गालिब कलां से हरिंदरजीत सिंह चाहल (कांग्रेस), पुड़ैन से गुरमीत सिंह (निर्दलीय) जीत दर्ज की है। इसके साथ ही हंबड़ा से अजीतपाल कौर (AAP), मोही से प्रो. प्रदीप कौर लटाला (निर्दलीय), गिल से बलराज सिंह (AAP), धांधरा से लखवीर कौर (AAP), आलमगीर से हरजीवन कौर (कांग्रेस), मांगट से तजपरविंदर सिंह (कांग्रेस) ने जीत हासिल की। ब्लॉक समिति के नतीजों का गणित ब्लॉक समिति की कुल 2838 सीटों में से 352 पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे और 2486 जोन के लिए मतदान हुआ. अब तक कुल 2097 सीटों के नतीजे आधिकारिक तौर पर घोषित किए गए हैं. इनमें AAP ने 892 सीटों पर जीत और 339 निर्विरोध सीटों के साथ कुल 1231 सीटों पर कब्जा किया है. कांग्रेस को 419 जीत और 3 निर्विरोध सीटों के साथ 422 सीटें मिली हैं. अकाली दल को 253, बीजेपी को 49 और बसपा को 26 सीटें हासिल हुई हैं. निर्दलीय उम्मीदवारों ने कुल 116 सीटें जीती हैं. अंतिम आंकड़ों का इंतजार चुनाव परिणामों की अंतिम तालिका का अभी भी इंतजार किया जा रहा है. मतगणना जारी रहने के कारण बाकी सीटों के नतीजे धीरे-धीरे स्पष्ट हो रहे हैं. अब तक के रुझानों और नतीजों ने पंजाब की राजनीति में AAP के बढ़ते प्रभाव को साफ कर दिया है. बीजेपी और अन्य छोटी पार्टियों के लिए ये नतीजे चुनौतीपूर्ण रहे हैं. 6 निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जिला परिषद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है. अंतिम आंकड़े घोषित होने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी. जिला परिषद लुधियाना: पार्टी-वाइज कुल सीटें आम आदमी पार्टी: 11 कांग्रेस : 8 शिअद: 3 आजाद(मनप्रीत अयाली गुट): 3 कुल सीटें 25 2018 में कांग्रेस ने जीती थी 25 की 25 सीटें 2018 में हुए जिला परिषद चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने जिले की सभी 25 सीटों पर जीत हासिल करके अपना चेयरमैन बनाया था। तब पंजाब में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी और कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री थे। जिला परिषद का कार्यकाल 2023 में समाप्त हो गया था और तब से चुनाव नहीं करवाए गए। उससे पहले लुधियाना में अकाली दल का चेयरमैन रहा है। केजरीवाल ने की भगवंत मान की तारीफ आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब जिला पंचायत चुनाव पर में पार्टी की जीत के लिए मान सरकार की तारीफ की है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में निष्पक्ष चुनाव हुए। इससे ज्यादा निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकता है। निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी ने बढ़िया प्रदर्शन किया। पंजाब की भगवंत मान सरकार से जनता खुश है। जनता ने आप सरकार के काम पर मुहर लगाई है। कल देर रात तक डेटा के अनुसार, पंजाब में ज़िला परिषद चुनावों के नतीजे इस प्रकार हैं: आप: 145 कांग्रेस: 30 अकाली दल: 26 बीजेपी: 6 बीएसपी: 3 अन्य: 7  बठिंडा जिला परिषद पर अकाली दल का कब्जा बठिंडा में 137 ब्लॉक समिति सीटों में से SAD ने 79 सीटें जीतीं, उसके बाद AAP (35) रही। जिला परिषद चुनावों में, SAD ने इस जिले में 17 में से 13 सीटें जीतीं। इस तरह, इस जिले में अपने जिला परिषद चेयरमैन को चुनने पर नियंत्रण हासिल कर लिया, जो पारंपरिक रूप से अकाली दल का गढ़ रहा है। : अबोहर जिला परिषद पर बीजेपी का दबदबा राज्य बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ के निर्वाचन क्षेत्र अबोहर में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिला। उन्होंने इस विधानसभा क्षेत्र की दोनों जिला परिषद सीटों पर जीत हासिल की। ​​16 ब्लॉक समितियों में से बीजेपी ने 8 सीटें जीतीं, उसके बाद AAP और … Read more

अगले तीन वर्षों में बदलेगा मध्यप्रदेश का सड़क मानचित्र: लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह

अगले तीन वर्षों में बदलेगा मध्यप्रदेश का सड़क मानचित्र : लोक निर्माण मंत्री सिंह विभाग की पत्रकार वार्ता में आगामी तीन वर्षों की महत्वाकांक्षी विकासात्मक कार्ययोजना की दी गई जानकारी भोपाल लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह ने गुरुवार को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश की सड़क अवसंरचना की वर्तमान स्थिति तथा आगामी तीन वर्षों (2025–2028) की महत्वाकांक्षी विकासात्मक कार्ययोजना की जानकारी प्रस्तुत की।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश की सड़कें अब केवल आवागमन का साधन नहीं रहीं, बल्कि आर्थिक विकास, निवेश आकर्षण और नए अवसरों की सुदृढ़ आधारशिला के रूप में स्थापित हो रही हैं। मंत्री सिंह ने कहा कि प्रदेश में अगले तीन वर्षों में 3,368 किलोमीटर लंबी छह प्रमुख एक्सप्रेस-वे एवं प्रगतिपथ परियोजनाओं का निर्माण किया जाएगा। इनमें नर्मदा प्रगतिपथ, विंध्य एक्सप्रेस-वे, मालवा–निमाड़ विकासपथ, अटल प्रगतिपथ, बुंदेलखंड विकासपथ और मध्य भारत विकासपथ शामिल हैं। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत ₹36,483 करोड़ है और अधिकांश परियोजनाओं को जून 2028 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इनके पूरा होने से यात्रा समय में कमी, सड़क सुरक्षा में सुधार तथा औद्योगिक, कृषि और पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी। राष्ट्रीय राजमार्गों के क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलावों की जानकारी देते हुए मंत्री सिंह ने बताया कि एनएचएआई द्वारा लगभग ₹28,000 करोड़ की लागत से 948 किलोमीटर नए राष्ट्रीय राजमार्ग विकसित किए जाएंगे। इससे प्रदेश की अंतर-राज्यीय कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स क्षमता और औद्योगिक निवेश को मजबूती मिलेगी। मंत्री सिंह ने 1,770 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और मेगा कॉरिडोर परियोजनाओं को प्रदेश की आर्थिक धारा को गति देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि ग्वालियर–नागपुर, इंदौर–भोपाल, जबलपुर–भोपाल जैसे रणनीतिक कॉरिडोर प्रदेश के विकास को नई दिशा देंगे। इसी क्रम में उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहाँ एनएचएआई के सहयोग से टाइगर कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना सड़क विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का अनूठा उदाहरण बनेगी। टाइगर कॉरिडोर की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए मंत्री सिंह ने बताया कि यह देश का पहला राज्य-स्तरीय मल्टी-नेशनल पार्क टाइगर कॉरिडोर है, जिसका विकास एनएचएआई और पीडब्लूडी के समन्वय से किया जा रहा है। इसमें वन क्षेत्रों में अंडरपास, स्लो-ट्रैफिक ज़ोन और वाइल्डलाइफ-सेफ डिज़ाइन को अपनाया जाएगा, जिससे टाइगर मूवमेंट, पर्यटन और स्थानीय कनेक्टिविटी के बीच संतुलन सुनिश्चित होगा। साथ ही इससे इको-टूरिज़्म और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। सड़क विकास निगम की परियोजनाओं पर चर्चा करते हुए मंत्री सिंह ने बताया कि अगले तीन वर्षों में HAM मॉडल के अंतर्गत अनेक परियोजनाएँ प्रस्तावित हैं। इनमें अगले छह महीनों में ही 285 किलोमीटर लंबाई की पाँच प्रमुख परियोजनाएँ शामिल हैं, जिनकी कुल अनुमानित लागत ₹15,000 करोड़ है। ये परियोजनाएँ क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स, कृषि और व्यापार को नई गति प्रदान करेंगी। ग्रामीण कनेक्टिविटी को प्राथमिकता देते हुए मंत्री सिंह ने कहा कि आने वाले तीन वर्षों में 11,310 किलोमीटर लंबी 822 नई ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया जाएगा, ताकि प्रदेश का हर गाँव राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों से जुड़ सके। मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सरकार का संकल्प गुणवत्तापूर्ण निर्माण, समयबद्धता और अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित है। लोक निर्माण विभाग की यह दूरदर्शी कार्ययोजना मध्यप्रदेश में गति, सुरक्षा और समृद्धि के नए युग की नींव रखेगी।  

योगी सरकार की सौगात 300 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा अमेठी का स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय

2026 में अमेठी को मिलेगा 550 बेड वाला आधुनिक मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य सेवाओं में होगा बड़ा विस्तार योगी सरकार की सौगात 300 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा अमेठी का स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय अब महानगरों का सफर खत्म, अमेठी में ही मिलेगा गंभीर से गंभीर बीमारी का इलाज 31 जनवरी 2026 तक 300 बेड का अस्पताल व क्रिटिकल केयर ब्लॉक होंगे हैंडओवर एमबीबीएस से लेकर डीएनबी तक, अमेठी मेडिकल कॉलेज बनेगा चिकित्सा शिक्षा का नया केंद्र नए साल में नर्सिंग कॉलेज समेत चिकित्सा सुविधाओं का होगा व्यापक विस्तार योगी सरकार की पहल से अमेठी बना उन्नत स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा का हब अमेठी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। अमेठी की तिलोई तहसील में स्थित स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा इस महाविद्यालय का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। वर्तमान में महाविद्यालय से संबद्ध 200 बेड वाले अस्पताल में सेवाएं संचालित हैं, जबकि 31 जनवरी 2026 तक 300 बेड का नया अस्पताल और 50 बेड का क्रिटिकल केयर ब्लॉक हैंडओवर किया जाएगा। इससे कुल बेड की संख्या 550 हो जाएगी, जिससे क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। साथ ही नर्सिंग कॉलेज का निर्माण भी इसी तिथि तक पूरा होने की उम्मीद है। योगी सरकार की यह पहल अमेठी सहित आसपास के जिलों के लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। क्षेत्रवासियों का लंबे समय से चला आ रहा मेडिकल कॉलेज का सपना अब साकार हो रहा है और 2026 तक यह संस्थान पूर्ण रूप से 500 प्लस बेड वाले आधुनिक चिकित्सा केंद्र के रूप में स्थापित हो जाएगा। शैक्षणिक सुविधाओं का तेजी से विस्तार राज्य स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। एमबीबीएस कोर्स में 100 सीटें स्वीकृत हैं। पैरामेडिकल क्षेत्र में 11 डिप्लोमा कोर्स चलाए जा रहे हैं, जिनमें कुल 230 सीटें हैं। इनमें एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर टेक्नीशियन, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, इमरजेंसी एवं ट्रॉमा केयर, लैब टेक्नीशियन, ऑपरेशन थियेटर टेक्नीशियन, एक्स-रे टेक्नीशियन जैसे महत्वपूर्ण कोर्स शामिल हैं। कई विभागों को मिल सकती है डीएनबी की सीटें आगामी सत्र 2026-27 से बीएससी नर्सिंग कोर्स में 60 सीटें शुरू होने की तैयारी है। पोस्टग्रेजुएट स्तर पर डीएनबी कोर्स में प्रसूति एवं स्त्री रोग, बाल रोग, एनेस्थीसिया में डिप्लोमा और मेडिसिन में डिग्री कोर्स स्वीकृत हैं। कुछ अन्य कोर्सों का निरीक्षण पूरा हो चुका है और परिणाम का इंतजार है। जानिए, अस्पताल में क्या क्या मिल रहीं चिकित्सा सुविधाएं महाविद्यालय से जुड़े अस्पताल में ओपीडी और इनडोर सेवाएं नियमित चल रही हैं। मेडिसिन, सर्जरी, गायनेकोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, ऑर्थोपेडिक्स, ईएनटी, डर्मेटोलॉजी समेत कई विभागों में रोजाना 1000 से ज्यादा मरीजों का इलाज हो रहा हैं।आपातकालीन सेवाएं वर्तमान में 10 बेड पर चल रही हैं, जो नए अस्पताल के शुरू होने पर 30 बेड तक बढ़ जाएंगी। अस्पताल में 7 मेजर और 5 माइनर ऑपरेशन थियेटर, 20 बेड का आईसीयू और एनआईसीयू की सुविधा उपलब्ध है। 24×7 डायग्नोस्टिक सेवाएं जैसे सीटी स्कैन, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी लैब, ब्लड स्टोरेज, फार्मेसी, ईकोकार्डियोग्राफी और ईसीजी भी मरीजों को मिल रही हैं। नए वर्ष पर चिकित्सा सुविधाओं में होगा विस्तार मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ रीना शर्मा ने बताया कि सरकार की मंशा के अनुसार न सिर्फ योजनाओं को लागू किया जा रहा है बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में भी वृद्धि की जा रही है। कार्यदाई संस्था लोक निर्माण विभाग कार्य करा रहा है। उम्मीद है कि हम नए वर्ष में नई किरणों के साथ चिकित्सकीय सुविधाओं में विस्तार करेंगे। निर्माण पूरा अब फिनिशिंग का कार्य चल रहा लोक निर्माण विभाग सीडी टू के अधिशासी अभियंता उमेश चंद्र ने बताया कि मेडिकल कालेज का भवन अब जी प्लस सिक्स हो गया है। अब सिर्फ फिनिशिंग का कार्य चल रहा है। इसके अलावा महाविद्यालय में डायरेक्टर रूम, नर्सिंग, हॉस्टल आदि का भी कार्य चल रहा है, जिसे सिडको करा रहा है। कुल मिलाकर लगभग 300 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट है।