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उज्जैन सिंहस्थ महापर्व की तैयारी तेज: प्रयागराज मॉडल से सीखेंगे बिजली प्रबंधन के गुर

इंदौर  उज्जैन में वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ महापर्व के सफल आयोजन के लिए बिजली वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में ठोस प्रयास शुरू हो गए हैं। इसी क्रम में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान बिजली प्रबंधन का अनुभव रखने वाले अधिकारियों का एक दल मध्य प्रदेश के इंदौर और उज्जैन के दौरे पर आया है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य सिंहस्थ के दौरान निर्बाध, सुरक्षित और प्रभावी विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अपने अनुभव साझा करना और स्थानीय अधिकारियों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना है। इंदौर और उज्जैन में बिजली वितरण व्यवस्था का होगा अवलोकन मंगलवार को मध्यांचल विद्युत वितरण निगम, लखनऊ के वरिष्ठ अधिकारियों का दल इंदौर पहुंचा। यह दल पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों के साथ मिलकर इंदौर और उज्जैन में बिजली वितरण से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं का अवलोकन करेगा। साथ ही सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान संभावित चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इन अधिकारियों के सुझावों और तकनीकी मार्गदर्शन के आधार पर पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देगी। इंदौर और उज्जैन में कार्यशालाओं का आयोजन भी करेंगे उल्लेखनीय है कि पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों का एक दल पहले ही प्रयागराज जाकर महाकुंभ के दौरान की गई बिजली व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष अध्ययन कर चुका है। अब उसी अनुभव को व्यवहार में लाने के लिए प्रयागराज से आए विशेषज्ञ अधिकारी चार दिवसीय दौरे के दौरान इंदौर और उज्जैन में कार्यशालाओं का आयोजन भी करेंगे। इन कार्यशालाओं में वे अधिकारी शामिल होंगे, जिन्होंने महाकुंभ जैसे विशाल आयोजन में विद्युत आपूर्ति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई थी।  

उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा कदम: अब पेट्रोल और डीजल पंप खोलने के लिए 10 विभागों की NOC की जरूरत नहीं

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में पेट्रोल पंप खोलना अब पहले की तुलना में आसान होने जा रहा है. प्रदेश सरकार ने कारोबारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है. अब पेट्रोल और डीजल पंप खोलने के लिए पहले की तरह कई विभागों से एनओसी लेने की जरूरत नहीं होगी. सरकार के नए फैसले के तहत अब पेट्रोल पंप स्थापित करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वन विभाग समेत चार विभागों की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) अनिवार्यता खत्म कर दी गई है. इस संबंध में खाद्य एवं रसद विभाग ने आदेश जारी कर दिया है. नहीं लेनी पड़ेगी 10 विभागों की एनओसी अब तक पेट्रोल और डीजल पंप के लाइसेंस के लिए जिलाधिकारी को 10 विभागों राजस्व, एनएसएआई, लोक निर्माण विभाग, विकास प्राधिकरण या नगर निकाय, जिला पंचायत, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पुलिस, वन विभाग, विद्युत सुरक्षा और बिजली विभाग से एनओसी लेनी पड़ती थी. इस प्रक्रिया में काफी समय लगता था, जिससे आवेदकों को अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ता था. नई व्यवस्था के तहत अब पेट्रोल पंप खोलने के लिए मुख्य रूप से राजस्व, बिजली, लोक निर्माण विभाग और विकास प्राधिकरण-आवास विकास परिषद- औद्योगिक विकास प्राधिकरण से ही एनओसी ली जाएगी. शेष विभागों के लिए आवेदक का स्वघोषणा पत्र ही मान्य होगा. ऑनलाइन उपलब्ध होगी एनओसी इसके साथ ही जिलाधिकारी की ओर से डिजिटल हस्ताक्षरित एनओसी आवेदक के यूजर लॉग-इन पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध कराई जाएगी. आवेदक अपने आवेदन की स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक भी कर सकेगा. यह कदम प्रदेश में निवेश और कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

नर्मदा प्रगतिपथ से जुड़े 10 शहर, दो राज्यों को जोड़ेगा 867 किमी लंबा एक्सप्रेस वे

अमरकंटक मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से झाबुआ तक निर्माणाधीन नर्मदा एक्सप्रेस-वे (नर्मदा प्रगति पथ) नर्मदापुरम को प्रदेश के 10 शहरों से जोड़ देगा। इसके जरिए जिले की औद्योगिक विकास होने के साथ व्यापारिक गतिविधियां सुलभ होंगी। सीहोर के बाड़ी से बुदनी के बीच प्रगति पथ के फोरलेन सड़क का निर्माण शुरू किया है। नर्मदा नदी के किनारे 867 किमी के इस पथ का बाड़ी से बुदनी तक 64 और बुदनी से भैरुंदा तक 51 किमी का हिस्सा नर्मदापुरम की सीमा से गुजरेगा। मोहासा औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगा लाभ नर्मदापुरम के मोहासा औद्योगिक क्षेत्र और रिन्युएबल एनर्जी पार्क के चलते नर्मदा प्रगति पथ महत्वपूर्ण साबित होगा। इस पथ से उद्योगों को हवाई अड्डे से बंदरगाह तक का सफर आसान होगा। इसके अलावा प्रगति पथ पर्यटन को बढ़ाने में भी अहम साबित होगा। छवीसगढ़ की सीमा से गुजरात तक सफर आसान बनाने वाले इस प्रोजेक्ट से उद्योगों और पर्यटन में सकारात्मक परिणाम क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ाएंगे। 2026 तक पूरा होगा निर्माण एनएचएआइ के मुताबिक 2026 तक इस एक्सप्रेस वे को तैयार करने का लक्ष्य लेकर निर्माण किया जा रहा है। एनएचएआई देश के प्रमुख एक्सप्रेसवे की तरह नर्मदा प्रगति पथ को अत्याधुनिक बना रही है। इस पर सफर करने वाले राहगीरों, वाहन चालकों को हर जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। यह एक्सप्रेस-वे डिंडौरी, जबलपुर, बड़वाह, इंदौर, धार, सरदारपुर, झाबुआ से गुजरात सीमा तक जाएगा। छवीसगढ़ से गुजरात तक एक कनेक्टिविटि बनाएगा। प्रदेश के 10 जिले सीधे नर्मदापुरम से भी जुड़ जाएंगे। इससे बुदनी, शाहगंज, से बाड़ी बकतरा, रेहटी, नसरूल्लागंज तक आवागमन सुलभ होगा। नर्मदा प्रगति पथ का निर्माण शुरू बाड़ी से बुदनी तक नर्मदा प्रगति पथ का निर्माण शुरू हो गया है। इस फोरलेन सडक़ का निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे नर्मदा किनारे के 10 शहर आपस में जुडेंगे। – आकाश चौकसे, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआइ नर्मदापुरम

रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में नए घर में जाएंगे चीते, सागर और नौरादेही में दौड़ते दिखेंगे

सागर  वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वीडीटीआर) में चीता प्रोजेक्ट अब साकार होने की दहलीज पर है। लंबे समय से प्रशासनिक, तकनीकी और प्रक्रियात्मक कारणों से अटका यह प्रोजेक्ट 2026 में गति पकड़ेगा। शासन से बजट स्वीकृत होने के बाद तैयारियों को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि निर्माण कार्य मार्च तक पूर्ण होने की संभावना है। इसके बाद जुलाई तक चीतों की शिफ्टिंग हो सकेगी। 5.20 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत डिप्टी डायरेक्टर डॉ. एए अंसारी ने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत शासन द्वारा 5.20 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि से चीतों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा। चीता लाने से पहले टाइगर रिजर्व में अलग-अलग तरह की तैयारी भी की जानी है. इसके लिए टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के द्वारा 5 करोड़ रुपए भी दिए गए हैं इन पैसों से चार सॉफ्ट रिलीज बोमा बनाए जाएंगे साथ ही जल स्रोत के लिए तालाब भी खुदबाएं जाएंगे. 2026 में शिफ्ट होंगे चीते – 5.20 करोड़ मंजूर – मार्च 2026 तक पूरा होगा निर्माण कार्य  जुलाई 2026 तक चीतों की शिफ्टिंग की की उम्मीद -3 से 4 चीते शुरू में लाए जा सकते हैं चीतों के नए आवास में बनेंगे 8 बोमा एमपी के प्रोजेक्ट चीता के तहत मोहली क्षेत्र में 8 बोमा तैयार होंगे। इनमें 4 क्वारंटाइन बोमा 50-50 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होंगे। यहां चीतों को प्रारंभिक अवधि में रखा जाएगा। इसके अलावा 100-100 हेक्टेयर के 4 सॉफ्ट रिलीज बोमा भी बनेंगे। वीडीटीआर के अफसरों के अनुसार, बजट स्वीकृति के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। उम्मीद है कि 3 से 4 चीते रिजर्व में आएंगे।   वैज्ञानिकों ने किया निरीक्षण इसको लेकर पिछले हफ्ते भोपाल और कूनो से आए वैज्ञानिकों ने जो एरिया चीतों के लिए चिन्हित किया गया है उस जगह का निरीक्षण किया. यहां पर कुछ जरूरी चीजों पर ध्यान देने की निर्देश दिए गए हैं जो व्यवस्था को सुधारने के साथ दुरुस्त करेंगे. चीता आने लाने सबसे पहले बोमा की ही आवश्यकता होगी. इसके लिए सौ-सौ हेक्टेयर के 4 बोमा बनाए जाएंगे जो एक दूसरे से कनेक्ट रहेंगे. यानी की 1000 एकड़ का एरिया तार फेंसिंग के माध्यम से सुरक्षित किया जाएगा. जहां चीता लाकर छोड़ जाएंगे इनकी मॉनिटरिंग की जाएगी कि यहां पर उनका बिहेवियर कैसा है, अपने भोजन के लिए किस तरह की शिकार करते हैं रोजाना की एक्टिविटी क्या होगी और जब सब कुछ अनुकूल हो जाएगा तो इन्हें इसे रिलीज कर खुले जंगल में छोड़ दिया जाएगा ताकि यह अच्छे से सरवाइव कर सके. इसके साथ ही यहां पर सुरक्षा की दृष्टि से हाथियों से निगरानी होगी, 300 से अधिक वन कर्मी  इनकी हर एक एक्टिविटी पर नजर रखेंगे. चीता का बनेगा तीसरा घर टाइगर रिजर्व के अंदर तीन ऐसे एरिया चिन्हित किए गए हैं. जो बिल्कुल जंगल के बीचों बीच है. जहां शिकारियों की दृष्टि से भी यह बचे रहेंगे, क्योंकि वन विभाग को शिकारियो से बचाने की ही सबसे बड़ी चुनौती होती है. वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व की डिप्टी डायरेक्टर डॉ ए ए अंसारी बताते हैं कि इस अभ्यारण को चीतों का तीसरे घर के रूप में चिन्हित किया गया है. इस रूप में विकसित करने या उनके लिए किस तरह से सुरक्षित माहौल मिले उसको कैसे तैयार किया जाए इसके लिए फाइनल डीपीआर बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों के लिए भेज दी है उनसे अनुमति मिलने के बाद ही ग्राउंड स्तर पर काम शुरू कर दिया जाएगा. बनेगा पर्यटन का केंद्र नौरादेही में चीता आने के बाद यह एशिया का एकमात्र ऐसा टाइगर रिजर्व होगा जहां कैट फैमिली के तीन वन्य प्राणी होंगे. यहां पर्यटक तेंदुआ, टाइगर और चीता को देख सकेंगे, चीता आने के बाद इस टाइगर रिजर्व में पर्यटन के नए पंख लग जाएंगे, क्योंकि यहां जैसे जबलपुर सागर और दमोह जिले से बेहतर कनेक्टिविटी तो है ही साथ ही खजुराहो की चंदेल कालीन मंदिर पन्ना का टाइगर रिजर्व जबलपुर भेड़ाघाट और रायसेन का सांची स्तूप, के मध्य यह टाइगर रिजर्व है जिससे टूर प्लान में यह भी शामिल रहेगा.

सड़क और जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए नई पहल: MP हाइवे पर लाल सड़कें और सफेद शोल्डर लाइनें

 जबलपुर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सड़क सुरक्षा और जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है. मध्य प्रदेश के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (पूर्व में नौरादेही अभयारण्य) से गुजरने वाले नेशनल हाइवे पर भारत की पहली 'टेबल-टॉप रेड मार्किंग' की गई है. दुबई के फेमस शेख जायद रोड की तर्ज पर NHAI ने हाईवे के 2 किलोमीटर लंबे घाट पर सड़क की सतह को चमकीले लाल रंग में बदल दिया है. खतरे वाले क्षेत्र में सड़क के ऊपर 5 मिमी मोटी, गर्म करके लगाई गई थर्मोप्लास्टिक की लाल सतह की परत बिछाई गई है. चमकीला लाल रंग वाहन चलाने वालों को तुरंत सचेत करता है कि वे गति-प्रतिबंधित और वन्यजीव-संवेदनशील गलियारे में प्रवेश कर रहे हैं. इसकी हल्की उभरी हुई सतह से वाहन चालक को स्पर्श और ध्वनि का संकेत मिलता है, जिससे वह बिना झटके या अचानक ब्रेक लगाए स्वाभाविक रूप से गति कम कर लेता है. वन्यजीवों और इंसानों के लिए 'सुरक्षा कवच'     यह पहल पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन का बेहतरीन उदाहरण है.     पारंपरिक रंबल स्ट्रिप के मुकाबले यह कम शोर करती है, जिससे जंगल के जानवरों को कम परेशानी होती है.     1.96 किलोमीटर के हिस्से में 25 समर्पित अंडरपास बनाए गए हैं ताकि जानवर सुरक्षित रूप से सड़क के नीचे से गुजर सकें.     हाइवे के दोनों ओर ऊंची बाड़ लगाई गई है ताकि जानवर सीधे सड़क पर न आएं और अंडरपास का उपयोग करें.     पुलों पर लगे कैमरे वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं. NHAI की यह परियोजना यह साबित करती है कि आधुनिक इंजीनियरिंग के माध्यम से मानव जीवन और वन्यजीवों को एक साथ सुरक्षित रखा जा सकता है. यहां 'लाल सड़कें' खतरे का नहीं, बल्कि सुरक्षा और हरित इरादे का प्रतीक हैं. NHAI ने एक ऐसा समाधान पेश किया है जो हादसों को कम करके मानव जीवन बचाता है, वन्यजीवों को वाहनों की टक्कर से बचाता है, वन के इको-सिस्‍टम की अखंडता को संरक्षित करता है और सड़क से गुजरने वालों लिए सुगम, आरामदायक और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करता है.  

व्यावसायिक शिक्षा को बनाया गया छात्रों के व्यावहारिक कौशल के हिसाब से

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह का वक्तव्य भोपाल  स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विज़न-2047 की ओर बढ़ते हुए देश के अनुरूप मध्यप्रदेश को भी विकास की गति दी जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में विकसित मध्यप्रदेश के सपने को साकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में कक्षा-5वीं तक मातृभाषा पर जोर दिया गया है और व्यावसायिक शिक्षा को छात्रों के व्यावहारिक कौशल के हिसाब से बनाया गया है। प्रदेश में तकनीकी आधारित शिक्षा में प्रौद्योगिक डिजिटल शिक्षा को महत्व दिया गया है। मंत्री श्री सिंह बुधवार को विधानसभा में विशेष सत्र को संबोधित कर रहे थे। अतीत की चर्चा करते हुए मंत्री श्री सिंह ने बताया कि राज्य की स्थापना के समय साक्षरता दर 21.41 प्रतिशत हुआ करती थी, जो आज लगभग 75 प्रतिशत तक पहुँच गई है। यह किसी एक योजना के कारण नहीं, बल्कि पूर्ववर्ती सरकारों के लगातार शिक्षा गुणवत्ता में सुधार, निवेश और प्रतिबद्धता का स्पष्ट उदाहरण है। स्कूल शिक्षा विभाग स्कूल शिक्षा मंत्री ने सदन में जानकारी दी कि प्रदेश में वर्ष 2003-04 में 4495 हाई स्कूल और 4211 हायर सेकेण्डरी स्कूल थे, जिनमें कक्षा-9 से 12 तक 18 लाख 79 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत थे। आज वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 22.56 लाख हो चुकी है। पिछले दो दशकों में 4670 माध्यमिक शालाओं को हाई स्कूल में तथा 1991 हाई स्कूलों को हायर सेकेण्डरी में उन्नयन किया गया है। नि:शुल्क साइकिल योजना में वर्ष 2004-05 में लाभार्थियों की संख्या 34 हजार से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 4 लाख 90 हो गई है। लैपटॉप योजना में वर्ष 2009-10 में लाभार्थी 473 से बढ़कर आज 94 हजार 300 हो गये हैं। नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकों के वितरण में लाभार्थी एक लाख 20 हजार हुआ करते थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 21 लाख 70 हजार हो गयी है। मुख्यमंत्री स्कूटी योजना में वर्ष 2022-23 में 7832 विद्यार्थियों को लाभ दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर शून्य हो गई है। समग्र आईडी के माध्यम से 90 प्रतिशत बच्चों की ट्रेकिंग पूर्ण की जा चुकी है। बच्चों को दी जाने वाली सुविधाएँ स्कूल के सत्र शुरू होने के साथ ही दिये जाने के प्रयास किये गये हैं। प्रदेश में 30 हजार 281 शिक्षक पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। स्कूलों में 76,325 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। विभाग ने पहली बार 20 हजार से अधिक अतिशेष शिक्षकों का तर्कसंगत स्थानांतरण किया है। प्रदेश में बोर्ड परीक्षा परिणामों में भी सुधार हुआ है। कक्षा-10 का उत्तीर्ण प्रतिशत 56 प्रतिशत से बढ़कर 74.56 प्रतिशत तथा कक्षा-12 का 63 प्रतिशत से बढ़कर 76.22 प्रतिशत हो गया है। उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम में 42 लाख के लक्ष्य के विरुद्ध 62 लाख 80 हजार को साक्षर करने की उपलब्धि प्राप्त की गयी है। कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री श्री सिंह ने बताया कि प्रदेश में इस बार आईटीआई में 94.5 प्रतिशत एडमिशन हुआ है, जिसमें पिछले वर्ष से 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इन संस्थानों में प्रशिक्षण पाने वाली महिलाओं की संख्या 12179 हो गयी है। प्रदेश के आईटीआई में 8 राज्यों के विद्यार्थियों ने भी प्रवेश लिया है। उन्होंने बताया कि 20 वर्षों में प्रदेश में सरकारी आईटीआई की संख्या 133 से बढ़कर 290 हो गयी है। सीटों की संख्या भी बढ़कर 52 हजार 248 हो गयी है। आईटीआई में एक लाख बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री सिंह ने बताया कि डिप्लोमा पाठ्यक्रम को कक्षा-12वीं के समतुल्य घोषित किये जाने से शैक्षणिक सत्र वर्ष 2025-26 में पॉलीटेक्निक महाविद्यालय के प्रवेश में 21.38 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गयी है। मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना में वर्ष 2024-25 में 78 हजार 218 मेधावी विद्यार्थियों को 750 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गयी है। उच्च शिक्षा मंत्री श्री सिंह ने बताया कि शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है। उच्च शिक्षा वह शक्ति है, जो युवाओं को केवल रोजगार नहीं, बल्कि दृष्टि, दिशा और नेतृत्व प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में गुना, खरगौन और सागर जैसे क्षेत्रों में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई है। इन विश्वविद्यालयों ने जनजातीय ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के युवाओं के लिये उच्च शिक्षा के नये द्वार खोले हैं। पिछले 2 वर्षों में उच्च शिक्षा के लिये 1150 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की परिकल्पना ने प्रत्येक जिले में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को सुलभ बनाया है। नवाचार और अनुसंधान से हमारे महाविद्यालय केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले संस्थान बनते जा रहे हैं। प्रदेश के कॉलेजों में डिजिटल शिक्षा और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है। छात्राओं के लिये गाँव की बेटी और प्रतिभा किरण जैसी योजनाएँ हमारी सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाती हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री सिंह ने बताया कि आने वाले 3 वर्षों में उच्च शिक्षा में डिजिटल शिक्षा का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन किया जायेगा। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आईआईटी नई दिल्ली से टायअप कर प्लेसमेंट किया जा रहा है। आईआईटी बॉम्बे से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा एमओयू किया जा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग नई शिक्षा नीति के द्वितीय चरण में काम कर रहा है, जो ऐतिहासिक उपलब्धि है।  

हरियाणा के लिए राहत भरी खबर: लिंगानुपात में सुधार, सरकार ने रखा 920 का लक्ष्य

चंडीगढ़ हरियाणा में लिंगानुपात में निरंतर सुधार हो रहा है। पिछले साल 15 नवंबर को जहां लिंगानुपात 907 था, वहीं इस बार नौ अंक के सुधार के साथ यह 916 तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने अधिकारियों को 31 दिसंबर तक लिंगानुपात 920 तक पहुंचाने का लक्ष्य दिया है।  लिंगानुपात में सुधार के लिए गठित स्टेट टास्क फोर्स की साप्ताहिक बैठक में मंगलवार को स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि शहरों एवं कस्बों में माइग्रेटिड पापुलेशन वाले एरिया में सभी नवजात बच्चों का जन्म पंजीकरण करना सुनिश्चित करें। जिन स्लम क्षेत्रों में नवजात बच्चों का जन्म पंजीकरण कम है, उनमे कैंप लगाकर या लोगों को जागरूक करके जन्म पंजीकरण करवाना सुनिश्चित करें ताकि सरकार की तरफ से उन परिवारों को दी जाने वाली सुविधाओं को समय पर पहुंचाया जा सके।    

रेलवे का बड़ा निर्णय, ट्रेन में सफर करने वालों पर पड़ेगा सीधा असर

जालंधर एक रेलवे स्टेशन पर फर्जी अनारक्षित टिकट में बदलाव कर धोखाधड़ी का प्रयास करने का मामला सामने आया था जिसके बाद रेलवे द्वारा सर्तकता बढ़ाने का फैसला लिया है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि अनारक्षित रेल टिकटों में हेराफेरी की घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से विशेष टिकट चैकिंग अभियान शुरू किया गया है। डी.आर.एम. संजीव कुमार के दिशा-निर्देशों पर चैकिंग स्टॉफ को सर्तकता अपनाने को कहा गया। इन निर्देशों के अनुसार टिकट जांच कर्मचारियों को अनारक्षित टिकटों की गहन जांच करने और ऐसे मामलों की पहचान करने को कहा गया है, जिनमें यात्री संख्या में परिवर्तन करना, एक ही टिकट का एक से अधिक बार उपयोग करना अथवा किसी अन्य प्रकार की धोखाधड़ी शामिल हो। अधिकारियों ने कहा कि अभियान के दौरान टिकटों की सख्ती से जांच की जा रही है। प्रमुख ट्रेनों, स्टेशनों में चल रही चैकिंग के दौरान सभी टिकट जांच कर्मचारियों को प्रत्येक अनारक्षित टिकट की गहन जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह विशेष टिकट जांच सीनियर अधिकारियों की अध्यक्षता में संचालित किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। मंडल रेल प्रबंधक ने बताया कि अनारक्षित टिकटों में हेराफेरी रोकने के लिए यह सघन जांच अभियान शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यात्रियों के हितों की रक्षा करना, रेलवे राजस्व की सुरक्षा करना तथा रेलवे व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना है। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- प्रदेश में पशुधन विकास की अपार संभावनाएं मौजूद

हिरण्यगर्भा अभियान से नस्ल सुधार और टीकाकरण में मध्यप्रदेश ने रचा नया कीर्तिमान भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में पशुधन विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इन संभावनाओं को एक्सप्लोर करने के लिए पशुओं का नस्ल सुधार एक सशक्त माध्यम है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर हिरण्यगर्भा अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश में अगले पांच सालों में कृत्रिम गर्भाधान (आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन) का कवरेज 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत चालू वित्त वर्ष में कुल मादा पशुओं में से 28.04 लाख (लगभग 33 प्रतिशत) गौवंशीय एवं भैंस वंशीय पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अप्रैल से नवम्बर 2025 के बीच प्रदेश में 11.76 लाख से अधिक पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान कराकर उल्लेखनीय प्रगति हासिल की गई है। मध्यप्रदेश में पशुपालन को लाभ का व्यवसाय बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में हिरण्यगर्भा अभियान एक प्रभावशाली पहल बनकर उभरा है। हाल ही में हुई 20वीं पशु संगणना के अनुसार प्रदेश में कुल 290.57 लाख से अधिक गौवंशीय एवं भैंस वंशीय पशु उपलब्ध हैं। इनमें से 77.18 लाख पशु (लगभग 27 प्रतिशत) उन्नत नस्ल के हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पशुधन विकास की केन्द्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका में है। नेशनल एनिमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनएडीसीपी) के अंतर्गत फुट-एंड-माउथ-डिजीज (एफएमडी) टीकाकरण चलाया जा रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में हुए चौथे और पाचवें चरण में मध्यप्रदेश ने देश में सर्वाधिक पशुओं का टीकाकरण कर इसे ऑनलाइन दर्ज किया। वर्तमान में प्रदेश में इसका छठवां चरण संचालित है, जिसमें अब तक 154.16 लाख पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। इसके अलावा राष्ट्रीय पशुधन मिशन – उद्यमिता विकास कार्यक्रम के क्रियान्वयन में भी मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान पाकर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि पशु नस्ल सुधार के लिए चलाए जा रहे हिरण्यगर्भा अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना भी है। इसके अंतर्गत प्रदेश की 691 चयनित गौशालाओं में उपलब्ध प्रजनन योग्य गौवंश में भी कृत्रिम गर्भाधान किया जा रहा है। इससे गौवंश की नस्ल/गुणवत्ता में तो सुधार होगा ही, गौशालाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। संचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने बताया कि पशुपालकों के द्वार पर कृत्रिम गर्भाधान की घर पहुंच सेवा उपलब्ध कराने और ग्रामीण शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार देने की मंशा से वर्ष 2014-15 से हर पंचायत में बहुउद्देशीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) तैयार किए जा रहे हैं। वर्तमान वित्त वर्ष में 2399 मैत्री कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। साथ ही, ऐसे मैत्री जो किसी कारणवश निष्क्रिय हो गए थे, उन्हें भी पुनः सक्रिय करने के लिए रि-फ्रेशर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक ऐसे 1227 मैत्री कार्यकर्त्ता प्रशिक्षित किए जा चुके हैं। इस वित्त वर्ष में अब तक 1.28 लाख से अधिक पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि हिरण्यगर्भा अभियान और केन्द्रीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश पशुधन विकास एवं नस्ल सुधार के क्षेत्र में आदर्श राज्य(इमर्जिंग स्टेट) के रूप में ख्याति प्राप्त कर रहा है। इससे पशुपालकों की दैनिक आय बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नई मजबूती मिल रही है। पशुपालकों के जीवन में समृद्धि लाने के लिए विभाग द्वारा कई नवाचार भी किए जा रहे हैं।  

राष्ट्र नायकों को समर्पित ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ का 25 दिसंबर को उद्घाटन, सीएम योगी ने किया स्थलीय निरीक्षण

लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 दिसंबर को राष्ट्रीय प्रेरणा के प्रतीक राष्ट्र नायकों डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन करेंगे। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राष्ट्र प्रेरणा स्थल का दौरा कर उद्घाटन समारोह की तैयारियों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने उद्घाटन समारोह के लिए हो रही तैयारियों, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में संज्ञान लिया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।  मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान एलडीए वीसी प्रथमेश‌ कुमार, लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत और सुरक्षा व्यवस्था देख रहे पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र कुमार सेंगर उपस्थित रहे। राष्ट्र प्रेरणा स्थल के निरीक्षण के दौरान सीएम योगी ने संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम करने और दीवारों पर फेंसिंग को और ऊंचा करने के निर्देश दिए। उन्होंने उद्घाटन समारोह में किसी तरह की आवाजाही और ट्रैफिक की समस्या पैदा न हो इसके लिए चाक-चौबंद पार्किंग व्यवस्था को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पार्किंग की संख्या और लोगों के आने-जाने के मार्गों पर डायवर्जन और साइनेज की व्यवस्था को जल्द ही पूरा करने को कहा। म्यूजियम परिसर के निरीक्षण के दौरान उन्होंने क्यूरेशन और फिनिशिंग के कार्यों को जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा। निरीक्षण के दौरान सीएम योगी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर हो रहे पेंटिंग के कार्य के बारे में भी संज्ञान लिया। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया कि पेंटिंग का कार्य दो दिन में पूरा हो जाएगा, और क्यूरेशन का कार्य उद्घाटन समारोह के दो दिन पूर्व पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि लखनऊ नगर निगम उद्घाटन समारोह के दिन साफ-सफाई, अस्थायी टायलेट और पेयजल की व्यवस्था कर रहा है। मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान एलडीए वीसी ने उद्घाटन समारोह की सभी गतिविधियों से भी अवगत करवाया।  उन्होंने बताया कि उद्घाटन समारोह के दिन प्रधानमंत्री मोदी सबसे पहले राष्ट्र नायकों की प्रतिमाओं का अनावरण कर श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। इस अवसर पर राष्ट्रीयता की भावना के संचार के लिए तिरंगे गुब्बारे छोड़े जाएंगे। प्रतिमा अनावरण के बाद प्रधानमंत्री प्रेरणा स्थल में राष्ट्र नायकों को समर्पित म्युजियम का उद्घाटन करेंगे। यहां वो डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीन दयाल उपाध्याय और श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित गैलरियों और कोर्टयार्ड का अवलोकन करेंगे। पहली गैलरी के ओरियेंटेशन रूम में वीडियो और एवी के माध्यम से राष्ट्र नायकों के संक्षिप्त जीवन परिचय को दिखाया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री म्यूजियम परिसर में ही बने भारत माता कोर्टयार्ड, जन संघ के प्रतीक चिह्न दीपक कोर्टयार्ड, और सुदर्शन चक्र कोर्टयार्ड जाएंगे और राष्ट्र नायकों से जुड़ी हुई वस्तुओं का अवलोकन करने के लिए फर्स्ट फ्लोर पर बने कोर्टयार्ड जाएंगे। म्यूजियम से बाहर निकल कर प्रधानमंत्री प्रेरणा स्थल पर बने मंच से गणमान्य अतिथियों और उद्घाटन समारोह के साक्षी बनने वाले लाखों की संख्या में प्रत्यक्षदर्शियों को संबोधित करेंगे।