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लॉरेंस गैंग की वापसी से हड़कंप: किसान के फार्महाउस में तोड़फोड़-आगजनी, मुख्य आरोपी शशांक पांडेय पकड़ा गया

पश्चिम चंपारण पश्चिम चंपारण जिले के मैनाटांड़ थाना क्षेत्र के चिउटाहा गांव में शनिवार को ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। पुरैनिया गांव के किसान जीशान जुल्फेकार का फार्महाउस उस समय तबाह हो उठा, जब लॉरेंस बिश्नोई गैंग का कुख्यात शूटर शशांक पांडेय अपने दर्जनों गुर्गों के साथ वहां धावा बोल दिया। घटना के दौरान फार्महाउस की बाउंड्री दीवार को तोड़ा गया और हथियारों से लैस भीड़ भीतर घुस पड़ी। अंदर प्रवेश के बाद तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी का ऐसा कोहराम मचा कि कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर मलबे और राख में तब्दील होने लगा। किसान जीशान के मुताबिक, करीब 200 लोग फार्महाउस में घुसे थे। कई के हाथों में धारदार हथियार थे, जबकि कई लोग पिस्टल लिए हुए थे। हमलावरों ने फार्महाउस के कमरों, स्टोर और शेड में रखे धान व गेहूं को लूट लिया, मवेशियों को भगा दिया और कई स्थानों पर आग लगा दी। इसी अफरातफरी के बीच कुख्यात शशांक पांडेय खुद जीशान के सामने पहुंचा और कनपटी पर पिस्टल सटाकर धमकी देते हुए बोला, "फार्महाउस मेरे नाम कर दो, नहीं तो यहीं खत्म कर दूंगा!" जब पड़ोसी महिला सहबुन खातून ने इस वारदात को रोकने की कोशिश की, तो शशांक ने उन्हीं पर पिस्टल तान दी। उसके बाद उसके साथी अविनाश मिश्रा ने लोहे की रॉड से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। हमलावर सहबुन खातून के घर में भी घुसे और वहां से जेवर व कीमती सामान लूटकर फरार हो गए। गांव का पूरा माहौल वारदात के दौरान खामोशी से जकड़ा रहा। दहशत ऐसी कि कोई भी आवाज़ उठाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और छापेमारी अभियान चलाकर शनिवार को शशांक पांडेय, उसके तीन साथियों अविनाश मिश्रा, हरिराज मांझी, और रघु मांझी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हालांकि गांव में दहशत का माहौल अभी भी कायम है और पुलिस लगातार कैंप कर रही है। कौन है शशांक पांडेय? शशांक कोई सामान्य अपराधी नहीं बल्कि लंबे समय से लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के लिए काम करता रहा है। हथियारों के साथ रील बनाकर सोशल मीडिया पर दहशत फैलाना उसकी पहचान मानी जाती है। इन्हीं वीडियो के जरिए वह गैंग के संपर्क में आया। बताया जाता है कि वह लॉरेंस के भाई अनमोल बिश्नोई और गैंगस्टर विक्रम बरार का करीबी है। नेपाल में बेस बनाना, नए युवकों की भर्ती करना और उन्हें धमकी व रंगदारी की ट्रेनिंग देना उसकी मुख्य भूमिका रही है। 2023 में मोतिहारी पुलिस उसे मेड-इन-इटली 9MM पिस्टल के साथ पकड़ चुकी है। उसका नाम सलमान खान फायरिंग केस में भी सामने आया था। अप्रैल 2024 में गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग में शामिल दोनों शूटर बेतिया के रहने वाले थे और उन्हें नेपाल में शशांक ने ही ट्रेनिंग दी थी। इसके अलावा वह अंबाला में AAP नेता से 50 लाख की रंगदारी मांगकर फायरिंग कर चुका है और जयपुर की एक ज्वेलरी दुकान से 1 करोड़ की लूट में भी शामिल था। सबसे चौंकाने वाली बात यह कि शशांक ने सिकटा विधानसभा क्षेत्र से एमएलए चुनाव लड़ने के लिए तेजप्रताप की पार्टी से नामांकन भी किया था, लेकिन बाद में उसका नामांकन रद्द कर दिया गया। एसडीपीओ जयप्रकाश सिंह ने बताया कि मामले में 17 ज्ञात तथा 100–200 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने शशांक पांडेय सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई तेज कर दी है।

रोड रेज का खौफनाक अंजाम: साइड देने को लेकर विवाद में DTC चालक की बेरहमी से हत्या

नई दिल्ली  दिल्ली के अमन विहार इलाके में शनिवार रात करीब 11:20 बजे लोगों के समूह ने एक DTC बस ड्राइवर को इतना बुरी तरह पीटा कि उसकी मौत हो गई। बताया जाता है कि डीटीसी बस ड्राइवर का शादी समारोह में आए एक अल्टो कार चालक से साइड देने को लेकर कहासुनी हो गई। इसके बाद अल्टो कार चालक ने अपने साथियों को बुला लिया। इन लोगों ने बस ड्राइवर को इतना बुरी तरह पीटा कि उसकी मौत हो गई।   प्राप्त जानकारी के मुताबिक, शनिवार रात को करीब 11:20 बजे एक बारात सड़क से गुजर रही थी। इसी दौरान डीटीसी बस ड्राइवर विकास वाहन लेकर गुजर रहा था। बारात के कारण संकरी सड़क पर रास्ता देने को लेकर बस ड्राइवर की कार चालक से कहासुनी हो गई। इसके बाद हालात तब बिगड़ गए जब कार ड्राइवर ने अपने रिश्तेदारों को भी मौके पर बुला लिया। देखते ही देखते बवाल बढ़ गया। कार ड्राइवर के गुट ने डीटीसी बस ड्राइवर विकास पर हमला बोल दिया। सभी बस ड्राइवर को बुरी तरह पीटने लगे। एक राहगीर सूरज ने बीच बचाव की कोशिश की तो भीड़ ने उस पर भी हमला कर दिया। उपद्रवी गुट के हमले में बस ड्राइवर विकास और राहगीर सूरज दोनों घायल हो गए। दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में विकास की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि उसे शनिवार रात करीब 11:20 बजे एक बारात के पास झगड़े की खबर मिली। कॉल अमन विहार थाने में रजिस्टर की गई। स्थानीय पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने पाया कि संकरी सड़क पर रास्ता देने को लेकर डीटीसी बस ड्राइवर और कार चालक में झगड़ा हुआ था। कार चालक के गुट ने बस ड्राइवर की बेरहमी से पिटाई की। हमलावरों ने बीच बचाव करने वाले को भी पीट दिया। दोनों को एसजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां से बाद में DTC ड्राइवर को सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया। बीच-बचाव करने वाले एक राहगीर सूरज को भी चोटें आईं। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। एक आरोपी राहुल को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी फरार हैं। उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं। कुल 4 आरोपियों की पहचान की गई है। कंडक्टर उमेश के बयान के आधार पर केस दर्ज किया गया है।  

शिक्षा भर्ती में बड़ा घोटाला: STF की जांच में 80 फर्जी शिक्षक निकले, मुकदमा कायम

इंदौर  डिप्लोमा इन एजुकेशन (डीएड) की फर्जी अंकसूची से नौकरी हासिल करने वालों में जिले के भी 80 शिक्षक हैं। इनमें से 20 के नाम एसटीएफ की जांच में सामने आ चुके हैं। लगभग 20 साल से चल रहे इस घोटाले में फर्जी अंकसूची से नौकरी पाने वाले ये लोग इंदौर और सांवेर की स्कूलों में नौकरी कर रहे हैं। ग्वालियर निवासी गौरीशंकर राजपूत ने कुछ शिक्षकों की जानकारी सूचना का अधिकार के तहत निकाली थी। उन्हें लगभग 130 लोग ऐसे मिले, जिनके रोल नंबर एक ही थे। इन रोल नंबर के आधार पर उन्होंने माध्यमिक शिक्षा मंडल से जानकारी ली तो पता चला कि मार्कशीट किसी और के नाम पर थी। उन्होंने फर्जी तरीके से नौकरी पाने वालों की शिकायत ग्वालियर पुलिस की एसटीएफ से की थी। एसटीएफ ने जांच के बाद एफआइआर दर्ज की है, जिसमें 34 शिक्षकों के फर्जी मार्कशीट से भर्ती होने की बात सामने आई है। इन 34 में से 20 इंदौर जिले के हैं। ये 20 शिक्षक इंदौर और सांवेर में पदस्थ बताए जा रहे हैं। गिरोह के रूप में होता है काम बताया जा रहा है कि फर्जी शिक्षकों की भर्ती के लिए दो दशक से गिरोह सक्रिय है। फर्जी अंकसूची से संविदा शिक्षक के रूप में पंचायतों के जरिए इन शिक्षकों की नियुक्ति की गई। तीन साल बाद इन फर्जी शिक्षकों का संविलयन शिक्षा विभाग में किया जाता रहा है। जिससे वे स्थायी शिक्षक बन जाते हैं। अफसरों की अनदेखी पंचायतों द्वारा संविदा के आधार पर नियुक्त शिक्षकों का शिक्षा विभाग में संविलयन जनपद सीईओ और जिला पंचायत सीईओ के जरिए होता है। संविलयन के दौरान पंचायत से प्रस्ताव के आधार पर शिक्षकों के संपूर्ण दस्तावेज बुलाए जाते हैं। जनपद पंचायत द्वारा दस्तावेजों की जांच के बाद ही संविलयन किया जाता है। अफसरों ने फर्जी दस्तावेजों की जांच नहीं की और सीधे संविलयन कर दिया। इससे ये शिक्षक वर्षों से नौकरी कर रहे हैं।   ’75 मीटर’ तक चौड़ी होंगी ’19’ सड़कें, जल्द शुरु होगा काम 130 फर्जी शिक्षकों में से इंदौर और सांवेर में पदस्थ 80 नाम थे। 20 की जानकारी दे दी थी। बचे हुए 60 के दस्तावेज जुटाने के बाद जल्द ही इनकी भी जानकारी एसटीएफ को सौंप देंगे। 6 माह से मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। अब हम इस मामले को हाईकोर्ट ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। गौरीशंकर राजपूत, व्हिसल ब्लोअर और शिकायतकर्ता हमारे पास जो नाम और जानकारी आई थी, उनकी अंकसूचियों की जानकारी हमने माध्यमिक शिक्षा मंडल से मांगी है। अब तक जानकारी नहीं आई है। जानकारी मिलने के बाद ही जांच या अन्य कार्रवाई कर पाएंगे। अभी हम इंतजार कर रहे हैं।- शांता सोनी, जिला शिक्षा अधिकारी, इंदौर

पर्यावरण शिक्षा में नया अध्याय: यूपी में 500 करोड़ की लागत से बनेगी पहली फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश का पहला वानिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर के कैंपियरगंज में बनाने जा रही है। मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा करीब एक वर्ष पहले की थी। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) फाइनल हो गई है। इसे करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। जल्द ही डीपीआर कैबिनेट की बैठक में स्वीकृति के लिए रखी जाएगी। विश्वविद्यालय के अधिनियम का ड्राफ्ट भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। यह विश्वविद्यालय करीब 125 एकड़ में बनाया जाएगा। यहां वानिकी, कृषि वानिकी, सामाजिक वानिकी व औद्यानिकी की पढ़ाई कराई जाएगी। छह सितंबर 2024 को जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र के उद्घाटन के दौरान ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वानिकी विश्वविद्यालय की घोषणा की थी। बजट में भी 50 करोड़ रुपये की प्रविधान कर दिया गया था। जटायु संरक्षण केंद्र के पास ही 125 एकड़ जमीन चिह्नित कर प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, जिसे स्वीकृति भी मिल चुकी है। यहां वानिकी (फारेस्ट्री), कृषि वानिकी, सामाजिक वानिकी और औद्यानिक (हार्टिकल्चर) जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके साथ ही विभिन्न डिग्री व डिप्लोमा कोर्स भी चलाए जाएंगे। विश्वविद्यालय में 500 कमरों के छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास, प्रशासनिक भवन, क्लास रूम, ऑडिटोरियम, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और खेल का मैदान बनाया जाएगा। शिक्षकों के लिए आवास का भी निर्माण यहां होगा।   इस विश्वविद्यालय की स्थापना से जैव तकनीक का विकास होगा। वन्यजीवों तथा जलवायु परिवर्तन के संबंध में ज्यादा सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे प्रदेश ही नहीं बल्कि देश-विदेश से विद्यार्थी वन्यजीव एवं उनके संरक्षण पर शोध कर सकेंगे। साथ ही छात्र पारिस्थितिकी, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन एवं उद्यानिकी व वानिकी से संबंधित विषयों पर शिक्षण-प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। डीपीआर कैबिनेट से पास होने के बाद इसका टेंडर होगा और विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।  

नवनियुक्त पदाधिकारियों की पहली बैठक: जानिए CM भजनलाल और प्रदेशाध्यक्ष ने क्या कहा

जयपुर जयपुर में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर सुबह नवनियुक्त प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने संगठन के आगामी कार्यक्रमों, रणनीतियों और प्रदेश में विकास से जुड़े कार्यों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना और नई जिम्मेदारियों के अनुरूप कार्यों का समुचित वितरण सुनिश्चित करना था। CM ने पारदर्शी शासन और जनकल्याणकारी योजनाओं पर दिया जोर मुख्यमंत्री शर्मा ने पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी की नीतियों और प्रदेश सरकार के संकल्पों को घर-घर तक पहुंचाना प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पारदर्शी शासन, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और संगठनात्मक सक्रियता को मजबूती देने की बात कही। मुख्यमंत्री ने सभी पदाधिकारियों से एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। प्रदेशाध्यक्ष ने संगठन और कार्यकर्ताओं को बताया पार्टी की शक्ति प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई दी और कहा कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत संगठन और समर्पित कार्यकर्ता हैं। उन्होंने आने वाले महीनों में कार्यक्रमों को मजबूत स्वरूप देने तथा जनता से लगातार संवाद बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। सोशल मीडिया वॉरियर्स मीट में डिजिटल रणनीति पर मार्गदर्शन इसी क्रम में दोपहर 11:30 बजे कृषि अनुसंधान केंद्र, दुर्गापुरा में सोशल मीडिया वॉरियर्स मीट आयोजित हुई। इस सत्र में भी मुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष उपस्थित रहे। बैठक में सोशल मीडिया टीम को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी उपस्थिति, सही जानकारी जनता तक पहुंचाने और दुष्प्रचार का जवाब देने संबंधी रणनीतियों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया।

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने बताया- बच्चों में सीखने की ललक बढ़ाने के लिये शिक्षक प्राप्त करते रहें नई-नई जानकारी

बच्चों को पोषण आहार मिलें इसके लिये जनभागीदारी को दें बढ़ावा बच्चों को मातृभाषा में पढ़ने के लिये करें प्रेरित भोपाल  केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा है कि बच्चों के व्यक्तित्व का बहुआयामी विकास हो, इसके लिये जरूरी है कि उन्हें मातृभाषा में पढ़ने के लिये प्रेरित किया जाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ाई गई बातें समझने में मातृभाषा ज्यादा कारगर होती है। नई शिक्षा नीति में मातृभाषा में अध्ययन को प्राथमिकता दी गई है। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रधान रविवार को भोपाल के शासकीय कमला नेहरू सांदीपनि विद्यालय टी.टी. नगर के निरीक्षण के बाद शिक्षकों से चर्चा कर रहे थे। इस मौके पर उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार और विधायक श्री भगवानदास सबनानी भी उनके साथ थे। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रधान ने सांदीपनि विद्यालय की कक्षाओं में जाकर बच्चों से संवाद किया। उन्होंने बच्चों की पाठ्यपुस्तकों को देखा और बच्चों से पढ़ाई के संबंध में बात की। मंत्री श्री प्रधान के विद्यालय पहुँचने पर छात्राओं ने बैंड की धुनों पर उनका स्वागत किया। उन्होंने आर्ट गैलरी, पुस्तकालय, बच्चों की मार्शल आर्ट 'वुशु' के अभ्यास को देखा और विद्यालय के म्यूजिक रूम का भ्रमण किया। उन्होंने बच्चों द्वारा देशभक्ति गीत पर प्रस्तुत धुनों को सुना और उसकी प्रशंसा की। मंत्री श्री प्रधान विद्यालय की अटल टिकरिंग लैब में भी गए। वहां उन्होंने बच्चों द्वारा बनाए गए साइंस मॉडल के बारे में जानकारी प्राप्त की। साइंस मॉडल और रोबोटिक्स लैब के उपकरणों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। मंत्री श्री प्रधान ने विद्यालय के ऑडिटोरियम को भी देखा और उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ विभिन्न खेलकूद, संगीत और साहित्यिक गतिविधियों के प्रति भी प्रेरित करें। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रधान ने कहा कि बच्चों को पोषण आहार मिले, इसके लिये जन-भागीदारी के प्रयास किये जायें। पालकों से संवाद मंत्री श्री प्रधान ने पालकों से भी संवाद किया। उन्होंने कहा कि पालक निरंतर स्कूल पहुँचकर बच्चों के बारे में जानकारी प्राप्त करते रहें। पालकों और शिक्षकों के समन्वय से ही बच्चों का सम्पूर्ण विकास हो सकेगा। उन्होंने शिक्षकों को प्रारंभिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों के शैक्षणिक अध्ययन पर गहन निगरानी रखने की समझाइश दी। मंत्री श्री प्रधान ने विद्यालय की विजिटर्स बुक पर लिखा कि अगले सत्र में इस विद्यालय की छात्राएं जेईई एवं नीट परीक्षा में चयनित हों इसके लिये शिक्षक सामूहिक रूप से प्रयास करें। ई-अटेंडेंस के मिल रहे हैं बेहतर परिणाम आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने बताया कि शिक्षा की गुणवत्ता के लिये प्रदेश में हमारे शिक्षक ऐप के माध्यम से ऑनलाइन ई-अटेंडेंस प्रारंभ की गई है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप 799 स्कूलों को मॉडल स्कूलों में बदला जा रहा है। उन्होंने पीएमश्री स्कूल और सांदीपनि विद्यलाय के बारे में भी जानकारी दी। आयुक्त श्रीमती गुप्ता ने बताया कि सांदीपनि विद्यालय के बच्चों को विद्यालय तक लाने के लिये नि:शुल्क परिवहन सेवा उपलब्ध कराई गई है। स्कूलों में बच्चों को डिजिटल शिक्षा दिये जाने की व्यवस्था की गई है। प्राचार्य कमला नेहरू श्रीमती संगीता सक्सेना ने बताया किविद्यालय की स्थापना 1958 में हुई थी। वर्तमान में इस विद्यालय में कक्षा अरूण (के.जी.-1) से लेकर कक्षा 12 तक करीब 1500 छात्राओं को उच्च स्तर की शिक्षा दी जा रही है। निरीक्षण के दौरान श्री राहुल कोठारी, पार्षद श्रीमती आरती अनेजा भी साथ थी।  

मुख्यमंत्री की उपस्थिति में 10 हार्डकोर नक्सलियों का हथियारों सहित ऐतिहासिक आत्मसमर्पण

शांति और विकास की राह पर लौटे नक्सली नक्सलियों पर विभिन्न राज्यों में कुल 2 करोड़ 36 लाख रुपये का इनाम घोषित था भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शासन द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आत्मसमर्पण और पुनर्वास की नीति पर अमल के उत्साहजनक परिणाम लगातार सामने आने लगे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा लगातार नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने या कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी जा रही थी। इसी के परिणामस्वरूप आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में दस हार्डकोर, सशस्त्र और वर्दीधारी नक्सलियों ने भारत के संविधान पर विश्वास जताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के समक्ष आधुनिक हथियारों जैसे AK- 47, इंसास राइफल, SLR, वाकी टॉकी सेट आदि सहित आत्मसमर्पण किया। इन सभी नक्सलियों पर विभिन्न राज्यों में कुल दो करोड़ छत्तीस लाख रुपये का इनाम घोषित था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे नक्सलवाद के अंत की दिशा में एक निर्णायक कदम बताते हुए सुरक्षा बलों की दृढ़ता, निरंतरता और जनता के सहयोग की सराहना की। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री द्वारा शासन स्तर से निरंतर प्राप्त त्वरित सहयोग, सटीक इंटेलिजेंस, रणनीतिक सर्चिंग एवं लगातार जारी नक्सल विरोधी अभियानों और स्थानीय समुदाय के बढ़ते विश्वास के परिणामस्वरूप नक्सली गतिविधियाँ लगातार सिमट रही हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रदेश को नक्सलवाद-मुक्त बनाने का लक्ष्य तेज़ी से पूरा किया जा रहा है। पुलिस महानिदेशक ने इस उपलब्धि को हॉक फोर्स, जिला पुलिस, CRPF, कोबरा और स्थानीय प्रशासन के सुव्यवस्थित संयुक्त अभियानों का परिणाम बताया, जिसने मंडला–बालाघाट के सीमावर्ती क्षेत्र और कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के इलाकों को लगभग सशस्त्र नक्सली गतिविधियों से मुक्त कर दिया है। उल्लेखनीय है कि विगत 1 नवंबर 2025 को भी महाराष्ट्र–मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (एम.एम.सी.) जोन की एक हार्डकोर सशस्त्र महिला नक्सली—सुनीता पिता बिसरू ओयाम, निवासी गोमवेटा (छत्तीसगढ़)—ने शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति पर विश्वास जताते हुए बालाघाट जिले में इंसास राइफल तथा हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था। वह मलाजखंड–दर्रेकसा दलम में एसीएम थी और मध्यप्रदेश, गोंदिया एवं राजनांदगांव डिविजन में सक्रिय थी। सुनीता पर छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में कुल 14 लाख रुपये का इनाम घोषित था। यह मध्यप्रदेश आत्मसमर्पण, पुनर्वास सह राहत नीति-2023 के अंतर्गत पहला ऐसा आत्मसमर्पण था। इस प्रकरण ने प्रदेश में नक्सली ढांचे के कमजोर होने के संकेत पहले ही स्पष्ट कर दिए थे। हाल के महीनों में मध्यप्रदेश में सुरक्षा बलों का दबाव लगातार प्रभावी रहा है। महाराष्ट्र–मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (एमएमसी) जोन के प्रवक्ता अनंत उर्फ विकास नगपुरे पहले ही अपने दस सशस्त्र साथियों के साथ समर्पण कर चुके हैं, जिससे इस क्षेत्र में नक्सलियों का आधार और भी कमजोर हुआ है। वर्ष 2025 में अब तक बालाघाट जोन में सुरक्षा बलों ने सर्वाधिक दस हार्डकोर नक्सलियों को मुठभेड़ों में ढेर किया है, जिन पर रुपए 1 करोड़ 86 लाख का इनाम घोषित* था। प्रदेश पुलिस के बढ़ते दबाव के परिणामस्वरूप हाल ही में MMC जोन के लगभग 17 नक्सली सीमावर्ती राज्यों महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शासन की योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए 46 एकल सुविधा केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से 2,046 वनाधिकार पट्टा दावे अग्रेषित किए गए, 1,232 जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए तथा 748 आधार कार्ड अपडेट/वितरित किए गए। रोजगार मेलों के माध्यम से युवाओं को निजी कंपनियों में चयनित कर सिंगल क्लिक से नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे इन क्षेत्रों में स्थायी आजीविका के अवसर तेज़ी से बढ़े हैं। इन नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण 1. सुरेन्द्र उर्फ कबीर उर्फ सोमा सोडी पिता: उंगा सोढी , जाति गोंड, उम्र: 50 वर्ष निवासी पुलमपाढ, थाना गुल्लापल्ली, जिला सुकमा (छग) पद: MMC सचिव इनाम राशि: 62 लाख रुपये 2. राकेश ओडी उर्फ मनीष पिता: समरत ओडी,जाति गोंड, उम्र: 42 वर्ष निवासी ग्राम झंडेपार (बोटेकसा), थाना कोरची, जिला गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) पद: स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर (SZCM) इनाम राशि: 62 लाख रुपये 3. समर उर्फ समारू उर्फ राजू अतरम पिता सन्नु, माता सुमरी, जाति गोंड, उम्र: 32 वर्ष निवासी इंड्री, तहसील भैरमगढ़, जिला बीजापुर (छग) पद: एरिया कमेटी मेंबर (ACM) इनाम राशि: 14 लाख रुपये 4. सलीता उर्फ सावित्री अलावा पिता: लकमु | माता: चिको | जाति: गोंड | उम्र: 26 वर्ष निवासी: सीनागेलोर, थाना बासागुडा, तहसील हवापल्ली, जिला बीजापुर (छग) पद: एरिया कमेटी मेंबर (ACM) इनाम राशि: 14 लाख रुपये 5. विक्रम उर्फ हिडमा वट्टी पिता: तकमा | माता: पीसे | जाति: गोंड | उम्र: 30 वर्ष निवासी: मडपे दुल्लोड, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा (छग) पद: PM/ACM इनाम राशि: —14 लाख रुपए 6. लालसिंह मरावी उर्फ सींगा उर्फ प्रवीण पिता: भीमा | माता: उंगी | जाति: गोंड | उम्र: 30 वर्ष निवासी: छोटे गुडरा, थाना कटेकल्याण, जिला दंतेवाड़ा (छग) पद: सदस्य इनाम राशि: 14 लाख रुपये 7. शिल्पा नुप्पो पिता: जोगा | माता: भीमे | जाति: गोंड | उम्र: 26 वर्ष निवासी: बुडिया बड्डुम, थाना बासागुडा, तहसील हवापल्ली, जिला बीजापुर (छग) पद: एरिया कमेटी मेंबर (ACM) इनाम राशि: 14 लाख रुपये 8. जरीना उर्फ जोगी मुसाक पिता: अंदल | माता: कोशी | जाति: गोंड (मुडिया) निवासी: मुरंगा, थाना गंगलुर, जिला बीजापुर (छग) पद: एरिया कमेटी मेंबर (ACM) इनाम राशि: 14 लाख रुपये 9. जयशीला उर्फ ललिता ओयम पिता: समलु | माता: देवे | जाति: गोंड | उम्र: 26 वर्ष निवासी: तरैम, थाना बासागुडा, तहसील हवापल्ली, जिला बीजापुर (छग) पद: एरिया कमेटी मेंबर (ACM) इनाम राशि: 14 लाख रुपये 10. नवीन नुप्पो उर्फ हिडमा पिता: नंगा | माता: बीमे | जाति: गोंड | उम्र: 30 वर्ष निवासी: बोडकेल, तहसील कोंटा (जगरगुंडा), जिला सुकमा (छग) पद: एरिया कमेटी मेंबर (ACM) एवं राकेश का गार्ड इनाम राशि: 14 लाख रुपये आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली भोरमदेव एरिया कमेटी से सम्बद्ध हैं। कुल मिलाकर आज समर्पित नक्सलियों पर 2 करोड़ 36 लाख रुपए का इनाम घोषित था। डीजीपी श्री कैलाश मकवाणा के कुशल निर्देशन, विशेष पुलिस महानिदेशक (नक्सल विरोधी अभियान) श्री पंकज श्रीवास्तव, IG बालाघाट जोन श्री संजय सिंह, SP बालाघाट श्री आदित्य मिश्रा एवं अन्य पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में निरंतर चल रहे पुलिस अभियानों एवं आउटरीच प्रोग्राम का परिणाम है कि इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्य धारा में लौटने का निर्णय लिया। मध्यप्रदेश पुलिस आत्मसमर्पण, पुनर्वास … Read more

1038.27 मेगावॉट क्षमता ने बढ़ाई ऊर्जा आत्मनिर्भरता की रफ्तार

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और स्पष्ट नीति निर्देशन का ही परिणाम है कि राज्य में सौर ऊर्जा के तीन लाख इंस्टॉलेशन (3,00654) का लक्ष्य पार कर लिया है। उत्तर प्रदेश ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में जो उपलब्धि हासिल की है वह ऐतिहासिक है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी सौर राज्यों में शामिल करती है और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस मामले में गुजरात और महाराष्ट्र ही उत्तर प्रदेश से आगे हैं ।  आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 983915 आवेदनों में से 300654 इंस्टॉलेशन पूरे किए जा चुके हैं। राज्य में सौर ऊर्जा की कुल इंस्टॉलेशन क्षमता 1038.27 मेगावॉट तक पहुंच चुकी है जिससे लाखों परिवारों को स्वच्छ और किफायती ऊर्जा प्राप्त हो रही है।  पिछले 8 वर्षों में योगी आदित्यनाथ सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सोलर रूफटॉप की पहुंच बढ़ाने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया डिजिटल मॉनिटरिंग और समयबद्ध इंस्टॉलेशन पर विशेष जोर दिया गया है। पीएम सूर्यघर योजना और राज्य की नई सौर नीति के जरिए बड़े पैमाने पर अवसंरचना तैयार की गई जिसने ऊर्जा क्षेत्र में विश्वास और सरलता का नया माहौल बनाया है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा की यह तेज प्रगति आने वाले वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगी। मौजूदा 1038.27 मेगावॉट क्षमता न सिर्फ बिजली की मांग को संतुलित कर रही है बल्कि अतिरिक्त ऊर्जा उत्पादन का मार्ग भी प्रशस्त कर रही है। इसका लाभ उद्योगों कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं को समान रूप से मिल रहा है जिससे प्रदेश की आर्थिक गति और तेज हो रही है। इस उपलब्धि का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। सोलर इंस्टॉलेशन से गांवों में बिजली बिलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई है। कई परिवार अतिरिक्त ऊर्जा ग्रिड को बेचकर सालाना आय भी बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि सौर ऊर्जा के लिए आवेदन संख्या लगातार बढ़ रही है और उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी बाजारों में तेजी से उभर रहा है। सरकारी आंकड़ों और जमीनी स्थितियों से यह स्पष्ट होता है कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में गति और पारदर्शिता दोनों को प्राथमिकता दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तीन लाख इंस्टॉलेशन का लक्ष्य पार करना केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि यह उस नए ऊर्जा ढांचे का प्रतीक है जिसकी ओर उत्तर प्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है। ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण के तीनों मोर्चों पर उत्तर प्रदेश ने जो उपलब्धि दर्ज की है वह आने वाले वर्षों में देश के नवीकरणीय ऊर्जा सेक्टर को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

प्रदेश में अवैध भण्डारण, परिवहन एवं विक्रय करते हुए लगभग 1 लाख 52 हजार क्विंटल धान जब्त

मार्कफेड ने जारी किए 1 नवंबर से 06 दिसम्बर तक के आंकड़े रायपुर  छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी प्रारम्भ होने के पूर्व से ही प्रदेश में अवैध धान के भण्डारण एवं परिवहन से आने वाले धान की कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पिछले एक नवंबर से 6 दिसम्बर तक प्रदेश के विभिन्न जिलों से एक लाख  51 हजार 809 क्विंटल धान जब्त किया गया है। इस बार मार्कफेड द्वारा राज्य में अवैध परिवहन के जरिए अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ आने वाले धान को रोकने के लिए राज्य के सीमावर्ती जिलों में चेकपोस्ट और कलेक्टर की अध्यक्षता में टॉस्कफोर्स भी बनाए गए हैं। इसके साथ ही मार्कफेड में स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था की सतत् निगरानी की जा रही है।  मार्कफेड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले एक नवंबर से 6 दिसम्बर के अवधि में मण्डी अंिधनियम 1972 के तहत  सीमावर्ती विभिन्न जिलों से छत्तीसगढ़ राज्य में अवैध परिवहन के माध्यम से आने वाले धान पर कार्यवाही की जा रही है। इनमें सर्वाधिक महासमुंद जिले में 25,718 क्विंटल धान जब्त किया गया है। इसी प्रकार धमतरी में 23,859 क्विंटल रायगढ़ जिले में 21,331 क्विंटल, राजनांदगांव 14,977 क्विंटल, बलरामपुर जिले में 9771 क्विंटल, बेमेतरा में 6490 क्विंटल, कवर्धा में 5734 क्विंटल, बालोद में 4595 क्विंटल, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 3770 क्विंटल, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 2868 क्विंटल, जशपुर जिले में 2771 क्विंटल, सूरजपुर जिले में 2650 क्विंटल, दुर्ग में 2350 क्विंटल, जांजगीर-चांपा में 2014 क्विंटल, बलौदाबाजार में 1855 क्विंटल, बीजापुर जिले में 1842 क्ंिवटल, रायपुर में 1679 क्विंटल, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 1583 क्विंटल, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 1500 क्विंटल, बस्तर जिले में 1560 क्विंटल, मोहला-मानपुर-चौकी में 1402 क्विंटल, गरियाबंद में 1393 क्विंटल, कोरबा में 1346 क्विंटल, सरगुजा में 1282 क्विंटल, कोरिया में 1237 क्विंटल, सक्ती में 1201 क्विंटल, कोण्डागांव जिले में 1148 क्विंटल, बिलासपुर में 1060 क्विंटल, कांकेर जिले में 1012 क्ंिवटल, मुंगेली में 917 क्विंटल, दंतेवाड़ा में 445 क्विंटल, नारायणपुर में 323 क्विंटल, सुकमा में 216 क्विंटल धान जब्त किए गए हैं।  उल्लेखनीय है कि सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाए जाने और त्वरित अलर्ट-रिस्पॉन्स सिस्टम की बदौलत अन्य राज्यों से धान की अवैध आमद को रोकने में प्रभावी सफलता मिल रही है।शासन ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता और अवैध गतिविधि को हर स्तर पर जीरो टॉलरेंस के साथ रोका जाएगा।खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मार्कफेड द्वारा धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए एकीकृत कंट्रोल सेंटर के माध्यम से रियल-टाइम निगरानी की जा रही है। साथ ही अवैध परिवहन के माध्यम से राज्य में आने वाले धान को रोकने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा सतत् निगरानी रखी जा रही है।

अब तक 22.25 लाख मीट्रिक टन धान की हो चुकी है खरीदी

4.39 लाख से अधिक किसानों ने बेचा धान इस वर्ष 27.30 लाख किसान पंजीकृत ‘टोकन तुंहर एप्प‘ से किसानों को मिल रही है सहुलियत किसानों को अब तक 8 लाख 97 हजार 779 टोकन जारी किए गए रायपुर राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का सिलसिला तेजी के साथ जारी हैं। पिछले माह के 14 नवंबर से शुरू हुए धान खरीदी महाअभियान में पांच दिसम्बर को सवेरे 10 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार 22 लाख 39 हजार 433 लाख मीट्रिक टन से  अधिक की धान की खरीदी हो चुकी है। अब तक 4 लाख 39 हजार 511 पंजीकृत किसानों ने धान बेचा है। धान खरीदी के एवज में किसानों को बैंक लिंकिंग व्यवस्था के तहत भुगतान हेतु मार्कफेड द्वारा 5277 करोड़ रूपए जारी किए गए है। चालू खरीफ सीजन के लिए इस वर्ष 27 लाख 30 हजार 96 किसानों ने पंजीयन कराया है, जिसमें 31 लाख 51 हजार 771 हेक्टेयर रकबा शामिल है।  राज्य में सभी जिलों में धान खरीदी जारी है। धान खरीदी से अब तक  महासमुंद जिला सर्वाधिक 15 लाख 19 हजार 650 क्विंटल धान खरीदकर पहले पायदान पर है। वहीं गरियाबंद जिले 6 लाख 73 हजार 495 क्विंटल धान खरीदकार दूसरे नम्बर पर है। इसी तरह बिलासपुर जिले 6 लाख 73 हजार 65 क्विंटल धान खरीदकर तीसरे स्थान हासिल की है। हांलाकि कांकेर जिला 6 लाख 15 हजार 431 क्विंटल धान खरीदी कर चौथे पायदान पर बने हुए है। पांच लाख क्विंटल से अधिक धान खरीदी वाले जिले में धमतरी और मुंगेली जिले शामिल हैं, वहीं  चार लाख क्विंटल से अधिक खरीदी वाले जिले सूरजपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, बेमेंतरा, बालोद और कोण्डागांव शामिल हैं।  किसानों को अब तक 8 लाख 97 हजार 779 टोकन जारी किए गए हैं। वहीं आगामी दिवस 8 दिसम्बर को धान खरीदी के लिए किसानों को 50 हजार 234 टोकन जारी हुए हैं।  इस वर्ष शुरू किए गऐ टोकन तुहर एप्प ऑनलाईन व्यवस्था से किसानों को काफी सहुलियत मिल रही है। किसान समितियों द्वारा की जा रही सभी आवश्यक व्यवस्थाओं से संतुष्ट हैं। राज्य शासन गठित राज्य और जिला स्तरीय दलों द्वारा प्रदेश सहित राज्य के सीमावर्ती इलाकों में अवैध धान परिवहन, भंडारण तथा विक्रय पर कड़ी निगरानी की जा रही है।  गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार धान खरीदी के साथ-साथ किसानों को समर्थन मूल्य का भुगतान भी शुरू कर दिया गया है। राज्य के किसानों से क्रय किए गए धान के मूल्य भुगतान के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने मार्कफेड को 26,200 करोड़ रूपए की बैंक गांरटी पहले से दे रखी है। किसानों को धान बेचने में किसी भी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए सभी केन्द्रों में पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई है। धान खरीदी की व्यवस्था पर निगरानी के लिए सभी केन्द्रों में अधिकारी तैनात किए गए हैं। राज्य स्तर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और जिला स्तर के अधिकारी लगातार दौरा कर धान खरीदी एवं केन्द्रों की व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं।  राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में किसी भी तरह की गड़बड़ी न होने पाए इसको लेकर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। बाहर से धान की आवक की रोकथाम के लिए चेकपोस्ट पर अधिकारी तैनात किए गए हैं। जगह-जगह मॉलवाहकों की औचक जांच भी की जा रही है।  किसानों का मानना है कि धान खरीदी के लिए राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई टोकन तुंहर एप्प की ऑनलाईन व्यवस्था से टोकन प्राप्त करने और धान बेचने में सहुलियत हो रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व और किसान हितैषी नीतियों के चलते किसानों को जहां उनकी मेहनत का वाजिम दाम मिला हैं, वहीं किसानों का सम्मान भी बढ़ा है। बता दें कि सरकार अपने घोषणा के अनुरूप प्रति एकड़ 21 क्विंटल समर्थन मूल्य एवं कृषि उन्नति योजना के तहत 31 सौ रूपए प्रति क्विंटल की भाव से धान खरीदी कर रही है।