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देशविरोधी नारे और फर्जीवाड़ा! अल-फलाह यूनिवर्सिटी व अस्पताल में हुआ बड़ा खुलासा

फरीदबाद दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल का सेंटर पॉइंट बनी फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी को लेकर यहां के एक पूर्व नर्सिंग स्टाफ ने बड़ा खुलासा किया है। कर्मचारी ने दावा किया है कि यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में रोजाना 100 से लेकर 150 तक नकली मरीजों की फाइलें तैयार की जाती थी। आतंकी डॉ. मुजम्मिल शकील और सुसाइड बॉम्बर बने डॉ. उमर नबी के कहने पर ऐसा किया जाता था। जो कर्मचारी ऐसा नहीं करता था उसकी एबसेंट मार्क कर सैलरी काट दी जाती थी। उसने बताया कि रात के समय काम करने वाला कश्मीरी मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर ड्यूटी पर अक्सर पाकिस्तान की तारीफ करते थे। इतना ही नहीं, कई बार हंसी-मजाक में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे तक लगा दिए जाते थे। सूत्रों की मानें तो डॉ. शाहीन सईद अपने दोस्त और दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल से डॉ. मुजम्मिल के साथ एनआईटी मार्केट में विस्फोटक या अन्य सामान खरीदने जाती थी। सुरक्षा जांच एजेंसी अब दोनों के आने-जाने, कौन-कौन सा सामान खरीदा, मिलने-जुलने जैसी सारी जानकारी को जुटा रही है। बता दें कि राजस्थान के रहने वाले लक्ष्मण ने साल 2025 में 14 जुलाई को अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में जॉइन किया था। लेकिन 25 अक्तूबर को उसने नौकरी छोड़ दी। वह यहां पर नर्सिंग स्टाफ में काम करता था। मेडिकल कॉलेज में उसकी ड्यूटी अस्पताल के आईसीयू में होती थी। लक्ष्मण ने बताया कि रात के समय काम करने वाले स्टाफ से नकली फाइलें तैयार कराई जाती थी। हर कर्मचारी को 5 फाइल तैयार करने का टारगेट दिया जाता था। इन नकली फाइलों पर डॉक्टर के साइन पहले से ही होते थे। फाइल में केवल उनको मेडिकल चार्ट नोट्स बनाने होते थे। इन फाइलों में उन दवाइयों का रिकॉर्ड बनाया जाता, जो यूज ही नहीं होती थी। इन फाइलों को सुबह होते ही डॉक्टर अपने साथ ले जाते थे। फाइलों का क्या यूज होता था किसी भी स्टाफ के कर्मचारी को इसके बारे में नहीं बताया जाता था। लक्ष्मण ने बताया कि उनको लगता है कि इन फाइलों का उपयोग बाहर से गरीबों के इलाज के नाम पर फंड एकत्रित करने के लिए किया जाता था। रोजाना 100 से लेकर 150 तक फाइलों को तैयार किया जाता था। इतना ही नहीं, अगर कोई कर्मचारी फाइलें बनाने से मना करता था तो किसी की सैलरी होल्ड कर दी जाती है या फिर कटौती की जाती है। लेकिन कश्मीरियों के साथ ऐसा नहीं किया जाता है। लक्ष्मण के अनुसार अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग स्टाफ से जुड़े करीब 200 लोग काम करते हैं। यहां करीब 80 फीसदी मुस्लिम और 20 फीसदी हिंदू कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें भी करीब 30 से 35 फीसदी मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर कश्मीर से आते हैं। पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी लक्ष्मण ने दावा किया है कि रात के समय जो कश्मीरी मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर ड्यूटी करते हैं। वे अक्सर अपनी बातों में पाकिस्तान की तारीफ करते हुए नजर आते थे। कई बार एक दूसरे के साथ वह हंसी-मजाक करते हुए पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते थे। हर रोज कश्मीर को लेकर कुछ न कुछ चर्चा होती रहती थी। कश्मीरी स्टाफ आरोप लगाते हैं कि जम्मू-कश्मीर में सेना उनके भाइयों पर जुल्म करती है। सेना कश्मीरियों को स्पेशल टारगेट बनाती है। केंद्र और हरियाणा सीएम, मंत्री को भेजा मांग पत्र अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट के पेरेंट्स ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, मानव संसाधन मंत्री , हरियाणा सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, डीएमईआर, NMC को ईमेल के जरिए अपना मांग पत्र भेजा है। मांग पत्र में सभी को इस मामले में जल्दी से जल्दी शामिल होने की बात कही है। एक अभिभावक ने बताया कि उनके साथ 360 से अधिक अभिभावक आपस में जुड़ चुके हैं। इनमें अधिकांश, यूपी, बिहार, पंजाब, दिल्ली और एनसीआर के हैं। सभी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता में हैं। सरकार हाई लेवल कमेटी गठित करे पेरेंट्स की मांग है कि सरकार एक हाई लेवल कमेटी का गठन करे। कमेटी के अंदर स्वास्थ्य विभाग, NMC सहित दूसरे विशेषज्ञ और अभिभावकों को शामिल किया जाए। कमेटी यह सुनिश्चित करे कि स्टूडेंट्स की पढ़ाई, प्रैक्टिस, इंटर्नशिप, रजिस्ट्रेशन पर किसी प्रकार का कोई खतरा न आए। क्योंकि अभी तक उन्हें केवल मौखिक रूप से आश्वासन दिया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि यूनिवर्सिटी का आतंकवाद में नाम आने के बाद हर कोई उनके बच्चों को शक की नजर देख रहा है। ऐसे में उनके बच्चों को आगे परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उनके बच्चे डर के साये में न तो पढ़ाई कर पा रहे हैं, न ही रातों को सो पा रहे हैं।

प्रदूषण का नया गणित: पराली घटने पर भी क्यों नहीं सुधर रही हवा?

गुरदासपुर  इस साल गुरदासपुर जिले में खेतों में आग लगाने (स्टबल बर्निंग) के मामलों में करीब 57 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद हवा की गुणवत्ता अभी भी खराब बताई जा रही है। इस समय हवा का गुणवत्ता सूचकांक 134 के करीब है, जो सेहत के लिए ज्यादा अच्छा नहीं माना जाता। बेशक खेतों में आग कम लगी है, जिस कारण प्रदूषण के लिए खेतों में लगाई जाने वाली आग को कसूरवार नहीं ठहराया जा सकता। दूसरी ओर विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश न होने के कारण हवा का गुणवत्ता सूचकांक डगमगा रहा है। जानकारी के अनुसार, इस साल जिले के अंदर खेतों में आग लगाने के सिर्फ 86 मामले सैटेलाइट के माध्यम से रिपोर्ट हुए हैं। यह आंकड़ा पिछले साल 2024 के 199 मामलों से काफी कम है, जबकि 2023 में 359 केस सामने आए थे। इस प्रकार, इस बार खेतों में आग के मामलों में तकरीबन 57 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जोकि पराली प्रबंधन अभियान की कामयाबी की ओर इशारा करती है। अधिकारियों के मुताबिक, इस साल किसानों में जागरूकता अभियान, मशीनरी की उपलब्धता और प्रशासन की तरफ से निगरानी व सख्त कार्रवाई के कारण पराली जलाने के इन मामलों में बड़ी कमी आई है। हवा की गुणवत्ता में सुधार की बजाय गिरावट क्यों? हालांकि खेतों में आग कम लगी, पर दूसरी ओर गुरदासपुर में हवा का गुणवत्ता सूचकांक बेहतर होने की बजाय कई जगहों पर बढ़ता नजर आ रहा है। प्रदूषण विभाग के मुताबिक, हवा में प्रदूषण बढ़ा हुआ है, और इसका मुख्य कारण लंबे समय से बारिश न होना माना जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार पिछले कई हफ्तों से जिले में बारिश न होने के कारण हवा में मिट्टी और धूल के कण बड़ी मात्रा में मौजूद हैं। वाहनों की रोजाना आवाजाही और निर्माण कार्यों की धूल भी हवा में मिलकर प्रदूषण को बढ़ा रही है। आम तौर पर पराली जलाने का रुझान कम होने के कारण हवा की गुणवत्ता में सुधार आना चाहिए, लेकिन इस बार स्थिति विपरीत नजर आ रही है। कुछ दिनों से जिले का हवा सूचकांक 130 से 140 के आस-पास रिकॉर्ड हो रहा है, जो ‘पुअर ज़ोन' में आता है। डॉक्टरों के मुताबिक, प्रदूषित हवा के कारण बुजुर्गों, छोटे बच्चों और दमा के मरीजों के लिए स्थिति चिंताजनक है। खांसी, गले में जलन, आंखों में जलन और सांस संबंधी समस्याओं के मामले बढ़ने लगे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक

बॉन्ड वाले डॉक्टर्स की भर्ती नियम बदलेगी सरकार, जल्द ही कैबिनेट में लाया जाएगा प्रस्ताव अब प्रदेश में है शासकीय और निजी कुल मिलाकर 52 मेडिकल कॉलेज प्रदेश के एक जिले को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की तैयारी पन्ना, बैतूल, कटनी और धार में बनेंगे नए मेडिकल कालेज, भूमिपूजन जल्द ही भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में आमूलचूल परिवर्तन लाना ही सरकार की मंशा है। स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण और चिकित्सा शिक्षा के व्यापक विस्तार के लिए सरकार बहुस्तरीय सुधार लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अधिकाधिक नागरिकों को आयुष्मान योजना का लाभ दिलाया जाए। ऐसे अस्पताल या डॉक्टर आयुष्मान योजना के तहत इलाज नहीं करते हैं या इस योजना में इम्पैनल्ड नहीं है, उन्हें भी इस योजना से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टर्स की आपूर्ति के लिए विभाग भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाए। यह प्रयास किया जाए कि फील्ड में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के संचालन के लिए निजी चिकित्सकों की भी सेवाएं ली जाए। इसके लिए उन्हें कॉल पर बुलाने के अलावा अच्छा मानदेय (इन्सेंटिव) भी दिया जाए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा ग्रहण कर रहे ऐसे विद्यार्थी, जिनकी फीस सरकार द्वारा अदा की जा रही है, ऐसे बॉन्ड वाले डॉक्टर्स को मध्यप्रदेश में ही सेवाएं देने के लिए रोका जाए। ऐसे डॉक्टर्स को प्रदेश के जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए इन्हें भी आकर्षक मानदेय राशि दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में तेजी से नए मेडिकल कॉलेजेस स्थापित हो रहे हैं, ऐसे में अधिक संख्या में डॉक्टर्स की आवश्यकता होगी। बॉन्ड वाले डॉक्टर्स को प्रमोट कर, इनके मानदेय को रिवाईज़ कर सभी नए मेडिकल कॉलेजेस एवं फील्ड के अस्पतालों में इनकी सेवाएं ली जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सहित खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की योजनाओं, कार्यक्रमों और संचालित गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में उप मुख्यमंत्री लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री राजेन्द्र शुक्ल, राज्यमंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) श्री नीरज मंडलोई भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत पात्र हितग्राहियों तक इनका लाभ समय पर और प्रभावी रूप से पहुंचे, इसके लिए डिलेवरी सिस्टम को और मजबूती और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाए। मुख्यमंत्री ने फील्ड अमले की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि फील्ड स्तर पर संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही से ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि विभागीय सेवाओं का समन्वय और योजनाबद्ध क्रियान्वयन ही सरकार की लक्ष्य पूर्ति का वास्तविक माध्यम है। बैठक में बताया गया कि बॉन्ड वाले डॉक्टर्स को शासकीय डॉक्टर्स के रूप में भर्ती करने के लिए, इनके भर्ती नियम संशोधित किए जा रहे हैं। इसके लिए जल्द ही मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में तेजी से नए मेडिकल कॉलेजेस की स्थापना के लिए विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्राइवेट अस्पतालों में गर्भवती माताओं का बेवजह सीजेरियन आपरेशन करने की शिकायत आती रहती हैं, इस पर सख्ती से नियंत्रण किया जाए। उन्होंने कहा कि 108 एम्बुलेंस के चालकों द्वारा ज़बरदस्ती मरीजों को प्राइवेट हॉस्पिटल में ले जाने की शिकायत भी आती हैं, इसकी सख्ती से निगरानी करें और ऐसी प्रवृत्ति को रोकें। बताया गया कि बीते दो साल मे 84000 से अधिक कार्डियक सर्जरी शासकीय अस्पतालों में हुई है। प्राइवेट अस्पतालों की तुलना में शासकीय अस्पतालों में कार्डियक सर्जरी बहुत कम खर्चे में होती है। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय व्यवस्थाओं की सराहना की। बताया गया कि प्रदेश में देहदान करने वाले 38 मृतकों को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक बेहद अच्छी योजना है और पूरे समाज के बीच इसे बेहद प्रमुखता से प्रचारित किया जाना चाहिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया कि अगले तीन सालों में चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा सीएम-केयर योजना के सफल क्रियान्वयन को कार्य योजना में ले लिया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2028 की समाप्ति तक राजगढ़, मंडला, छतरपुर, उज्जैन, दमोह एवं बुधनी में निर्माणाधीन गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज प्रारंभ कर देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा पीपीपी मोड पर तैयार किए जाने वाले सभी मेडिकल कॉलेजेस का निर्माण कार्य भी इसी अवधि के दौरान पूरा कर लेने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा प्रदेश के एक जिले को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने का लक्ष्य लिया गया है। प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालय में कैथलैब की स्थापना भी वर्ष 2028 तक कर दी जाएगी। वर्ष 2028 तक मातृ मृत्यु दर 100 प्रति लाख जीवित जन्म करने का लक्ष्य लिया गया है। उन्होंने बताया कि खाद्य प्रशासन के सुदृढ़ीकरण के लिए FSSAI द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए 41.07 करोड़ रुपए की कार्य योजना मंजूर कर दी गई है। इसी प्रकार औषधि प्रशासन के सुदृढ़ीकरण के लिए 211 करोड़ रुपए की लागत से 5 साल की कार्य योजना बनाकर CDSCO को भेज दी गई है। इसमें उल्लेखित सभी पूंजीगत कार्य 3 साल की समय-सीमा में पूरे कर लिए जाएंगे।   प्रमुख बिन्दु     प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में आमूलचूल परिवर्तन लाना सरकार की मंशा।     स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण और चिकित्सा शिक्षा के व्यापक विस्तार के लिए सरकार बहुस्तरीय सुधार लागू कर रही।     प्रदेश में अधिकाधिक नागरिकों को आयुष्मान योजना का लाभ दिलाया जाए।     अस्पताल या डॉक्टर आयुष्मान योजना के तहत इलाज नहीं करते हैं या इस योजना में इम्पैनल्ड नहीं है, उन्हें भी इस योजना से जोड़ा जाए।     डॉक्टर्स की आपूर्ति के लिए विभाग भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाए।     चिकित्सा शिक्षा ग्रहण कर रहे ऐसे विद्यार्थी, जिनकी फीस सरकार द्वारा अदा की जा रही है, ऐसे बॉन्ड वाले डॉक्टर्स को मध्यप्रदेश में ही सेवाएं देने के लिए रोका।     डॉक्टर्स को प्रदेश के जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए इन्हें भी आकर्षक मानदेय राशि दी जाए।     बॉन्ड वाले डॉक्टर्स … Read more

यूपी पुलिस एसआई एग्जाम डेट जारी: उम्मीदवार मार्च 2026 में दें तैयारी का बड़ा मुकाबला

लखनऊ  उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने सब-इंस्पेक्टर (SI) पद भर्ती परीक्षा की तिथि जारी कर दी है। आयोग की ओर से जारी नोटिस के अनुसार यूपी पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा का आयोजन 14 मार्च और 15 मार्च 2026 को किया जाएगा। जिन उम्मीदवारों ने भर्ती के लिए आवेदन किया है वे आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर जाकर परीक्षा तिथि नोटिस चेक कर सकते हैं। इस भर्ती प्रकिया के जरिए कुल 4543 पदों पर उम्मीदवारों की नियुक्ति होगी। जिसमें उप निरीक्षक नागरिक पुलिस पद, प्लाटून कमांडर पीएसी/उप निरीक्षक सशस्त्र पुलिस पद, प्लाटून कमाण्डर/उप निरीक्षक, विशेष सुरक्षा बल पद और महिला उप निरीक्षक ना.पु. (पीसी) पद शामिल हैं। वैकेंसी डिटेल्स- उप निरीक्षक नागरिक पुलिस- 4242 पद प्लाटून कमांडर पीएसी/उप निरीक्षक सशस्त्र पुलिस- 135 पद प्लाटून कमाण्डर/उप निरीक्षक, विशेष सुरक्षा बल- 60 पद महिला उप निरीक्षक ना.पु. (पीसी)- 106 पद लिखित परीक्षा लिखित परीक्षा ओएमआर शीट पर होगी। यह 400 अंकों की होगी। 2 घंटे का समय होगा। कुल प्रश्न 160 होंगे। सामान्य हिंदी, मूलविधि/संविधान/सामान्य ज्ञान, संख्यात्मक व मानसिक योग्यता परीक्षा, मानसिक अभिरुचि परीक्षा/ बुद्धिलब्धि परीक्षा/ तार्किक परीक्षा से 40-40 प्रश्न आएंगे। चारों सेक्शन 100-100 नंबर के होंगे।प्रत्येक विषय में 35 फी प्रदी अंक और कुल 50 प्रतिशत अंक प्राप्त न करने वाले अभ्यर्थी भर्ती के पात्र नहीं होंगे। फिजिकल टेस्ट शारीरिक दक्षता परीक्षा के संभावित नियम इस प्रकार है- पुरुषों के लिए – 4.8 किमी की दौड़ 28 मिनट में पूरी करनी होगी। महिलाओं को 16 मिनट में 2.4 किमी दौड़ना होगा। सफल तैयारी के लिए जरूरी टिप्स परीक्षा की तारीख अब तय हो गई है, इसलिए उम्मीदवारों को एक स्मार्ट स्ट्रैटिजी के साथ अपनी तैयारी करनी चाहिए। नियमित अभ्यास और टाईम मैनेजमेंट: सबसे पहले सभी विषयों को उनकी ताकत और कमजोरी के आधार पर विभाजित करते हुए एक स्टडी प्लान बनाएं। परीक्षा हॉल में टाईम मैनेजमेंट में महारत हासिल करने के लिए नियमित रूप से मॉक टेस्ट दें। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों पर ध्यान: परीक्षा के पैटर्न और कठिनाई स्तर को समझने के लिए कम से कम 5 से 10 पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को हल करें।  

वोटों की हार और पार्टी की तकरार! AAP विधायक खुलकर बागी, केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ीं

नई दिल्ली दिल्ली की सत्ता जाने के बाद अपने सबसे बड़े गढ़ में आम आदमी पार्टी (आप) की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। पूर्व विधायक राजेश गुप्ता ने पार्टी छोड़ी, पटपड़गंज से चुनाव हारे अवध ओझा साथ छोड़ गए और अब एक मुस्लिम विधायक ने बागी तेवर अपना लिए हैं। मटियामहल से 'आप' विधायक आले मोहम्मद इकबाल ने पार्टी को एमसीडी चुनाव में मिले जख्म पर नमक रगड़ दिया है। ये वही आले मोहम्मद हैं जिन्हें अरविंद केजरीवाल ने डिप्टी मेयर का पद दिया था और फिर विधानसभा का टिकट दिया।   आले के पिता और दिग्गज नेता शोएब इकबाल ने पिछले महीने ही 'आप' छोड़ने का ऐलान कर दिया था और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के उम्मीदवार मोहम्मद इमरान के समर्थन में खुलकर काम करते हुए उनकी जीत में अहम भूमिका निभाई। अब आले ने इस पर खुशी जाहिर करके बड़ा संकेत दे दिया है। आले इकबाल के एक्स प्रोफाइल पर उनकी तस्वीर अब पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के संग नहीं बल्कि पिता शोएब इकबाल के साथ दिखती है। जिस पर लिखा है, 'हमारा काम ही हमारी पहचान।' पहले की तरह अब वह ना तो वह तस्वीरों में पार्टी सिंबल का इस्तेमाल कर रहे हैं और ना ही 'आप' की नीतियों, कामकाज और नेताओं के भाषणों को शेयर करते हैं। चादंनी महल में आप की हार और मोहम्मद इमरान की जीत के बाद आले मोहम्मद इकबाल ने जो प्रतिक्रिया दी उससे उनके बागी तेवर साफ हो गए हैं। उन्होंने लिखा, ‘यह जीत मेरे इलाके के शेरों की है। साजिश करने वाले हार गए। हक की जीत हुई, बातिल की हार हुई। जो काम करने वाले थे, वही जीतकर आए। शोएब इकबाल की मोहब्बत को सलाम- अहंकारी, पैसे वाले, शोहरत वाले, ताकतवर- सबके मुंह काले हो गए। शेर आ गया- अल्हमदुल्लिलाह!’ एक तरफ आले ने पिता शोएब इकबाल की मोहब्बत को सलाम लिखा तो दूसरी तरफ पूर्व विधायक शोएब इकबाल विजेता उम्मीदवार मोहम्मद इमरान के साथ जश्न मनाते, उन्हें गले लगाते दिखे। आम आदमी पार्टी की ओर से अभी इस प्रतिक्रिया नहीं आई है। माना जा रहा है कि पार्टी आले पर ऐक्शन ले सकती है। आले मोहम्मद इकबाल ने कहा- साजिश करने वाले हार गए। पूर्व विधायक शोएब इकबाल ने 9 नवंबर को 'आप' छोड़ने की घोषणा की थी। चांदनी महल वार्ड में पसंद के उम्मीदवार को टिकट नहीं दिए जाने से वह नाराज थे। शोएब इकबाल ने तब कहा था, ‘मैं आम आदमी पार्टी की नीतियों से नाखुश हूं। पार्टी एक आंदोलन से उपजी थी, लेकिन अब यह अपनी राह से भटक गई है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और अब कभी वापस नहीं लौटूंगा।’ उन्होंने चांदनी महल वार्ड के लिए पार्टी द्वारा चुने गए उम्मीदवार पर भी नाखुशी जताई। पार्टी ने इस क्षेत्र से मुद्दसिर उस्मान कुरैशी को मैदान में उतारा था। शोएब ने कहा, ‘मैं इस इलाके से छह बार विधायक रहा हूं। मेरा बेटा पार्षद था और सबसे ज्यादा मतों के अंतर से जीता था। जब उसने विधानसभा चुनाव लड़ा, तो सबसे ज्यादा अंतर से जीता। पार्टी ने (एमसीडी उपचुनाव के लिए) जिस उम्मीदवार को टिकट दिया है, उसे कोई नहीं जानता।’ शोएब इकबाल ने तब संकेत दिया था कि और लोग पार्टी छोड़ सकते हैं।

मध्यप्रदेश में 97% से अधिक गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन पूरा

15 और जिलों में 100%, 33 ने पार किया 90% से अधिक का लक्ष्य भोपाल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश श्री संजीव कुमार झा ने बताया कि प्रदेश में गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन का कार्य तेज गति से जारी है।अभी तक मध्यप्रदेश में लगभग 5करोड़ 57लाख गणना पत्रकों का डिजीटाइजेशन पूरा हो चुका है। जो कुल कार्य का 97% से अधिक है।15 जिलों अशोक नगर,नीमच, बैतूल, गुना,मंडला, डिंडोरी, शाजापुर, सीहोर, सीधी, उमरिया, बुरहानपुर, मंदसौर,सतना, टीकमगढ़ और अलिराजपुर में शत्-प्रतिशत डिजीटाइजेशन का काम हो चुका है। श्री झा ने सभी शासकीय सेवकों और नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित समयावधि से पूर्व यह उपलब्धि सभी के प्रयास और कर्तव्य निष्ठा से ही संभव हुई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री झा ने बताया कि प्रदेश के 19अन्य जिलों ने 99प्रतिशत से अधिक,12जिलों में 98%और 6जिलों मे90%से अधिक कार्य पूरा कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री झा ने डिजिटाइजेशन में लगे सभी शासकीय सेवकों, बीएलओ तथा सहयोगी नागरिकों के समन्वित प्रयास की सराहना की जिसके चलते निर्धारित समय से पहले ही कार्य पूर्णता की ओर है। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में शत-प्रतिशत कार्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा।  

मंदिर के दरवाज़े खुलते ही मचा हड़कंप, रहस्यमयी हालात देख पुलिस भी दंग

लुधियाना  पंजाब में बेअदबी के मामला थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। ऐसा ही एक मामला लुधियाना से सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार, थाना दुगरी की पुलिस ने इलाके में स्थित एक मंदिर में भगवान शिव व नंदी की मूर्तियों का अनादर करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने अर्बन एस्टेट दुगरी के रहने वाले सुरेंद्र पुरी के बयान पर अज्ञात को नामजद किया है। पुलिस को दी शिकायत में सुरेंद्र पुरी ने बताया कि वह हर रोज की तरह सुबह मोक्षद्वार श्री काशी विश्वनाथ शिव मंदिर श्मशान घाट फेस 2 दुगरी में गया तो वहां पर देखा कि भगवान शिव व नंदी की मूर्तियों का अनादर किया हुआ है। जिस पर उन्होंने पुलिस को शिकायत दी। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला तो पता चला किएक अज्ञात व्यक्ति ने रात को यह हरकत की है। जांच अधिकारी ने बताया कि मामले को लेकर कार्रवाई की जा रही है। फुटेज से आरोपी की पहचान की जा रही है। 

एमपी ट्रांसको के सब स्टेशनों में रात्रिकालीन औचक निरीक्षण की पहल से बढ़ी सजगता, मिले सकारात्मक परिणाम

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा सब स्टेशनों की सुरक्षा एवं कार्यप्रणाली में सुधार के लिये शुरू की गई रात्रिकालीन औचक निरीक्षण की पहल लगातार सकारात्मक परिणाम दे रही है। इन निरीक्षणों के बाद सब स्टेशनों पर तैनात आउटसोर्स कर्मचारियों में कार्य के प्रति सजगता और अनुशासन का स्तर बढ़ा है, वहीं लापरवाही के मामलों में भी उल्लेखनीय कमी आई है। इस पहल से न केवल सुरक्षा में मजबूती आई है, बल्कि यार्ड संचालन एवं कार्य दक्षता में भी सुधार देखा गया है। सुरक्षा के साथ मेंटेनेंस मे भी मिला फायदा रात्रिकालीन औचक निरीक्षण की यह परंपरा पूर्व मुख्य अभियंता श्री प्रवीण गार्गव के कार्यकाल में प्रारंभ की गई थी। उस समय सब स्टेशनों के ट्रांसफॉर्मरों के न्यूट्रल से जुड़े अत्यंत संवेदनशील एवं बहुमूल्य तांबे की स्ट्रिप एवं आईसोलेटर के कापर ब्लेड चोरी की घटनाएँ सामने आती थीं। सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल अब तक प्रभावी सिद्ध हुई है। निरीक्षण के दौरान प्रत्येक अधिकारी को सब स्टेशन का फोटो व वीडियो प्रमाण सहित निरीक्षण विवरण विभागीय व्हाट्सऐप ग्रुप में साझा किये जा रहें है, जिससे सम्पूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो रही है। रात्रि में यार्ड निरीक्षण का लाभ भी रात्रिकालीन यार्ड निरीक्षण एक तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। अंधकार में यार्ड की जाँच के दौरान कई ऐसी सूक्ष्म गतिविधियाँ सामने आते हैं, जिन्हें दिन के उजाले में अक्सर देखा नहीं जा सकता। इससे उपकरणों में संभावित खराबी का समय रहते पता चल रहा है जिससे अचानक होने वाले ब्रेकडाउन या इमरजेंसी को टाला जा सका है,साथ ही मेंटेनेंस कार्य पहले से बेहतर ढंग से योजनाबद्ध हुआ है। अधिकारियों के साथ निरीक्षण के दौरान आउटसोर्स कर्मियों को भी रात्रिकालीन यार्ड निरीक्षण की बारीकियाँ सीखने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनकी तकनीकी दक्षता में बढ़ोतरी हो रही है। एमपी ट्रांसको की यह पहल न केवल सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे संपूर्ण पॉवर ट्रांसमिशन सिस्टम की गुणवत्ता एवं स्थिरता मजबूत हुई है, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति प्राप्त हो रही है। जूनियर इंजीनियर से लेकर अतिरिक्त मुख्य अभियंता तक सभी अधिकारियों को नियमित रूप से औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। समय-समय पर किए जा रहे ये निरीक्षण सब स्टेशनों की सुरक्षा, विश्वसनीयता और संचालन गुणवत्ता में निरंतर सुधार सुनिश्चित कर रहे हैं।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पूर्व मंत्री मलैया का कुशल क्षेम जाना

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने बुधवार को पूर्व मंत्री श्री जयन्त मलैया के निवास पहुँचकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने श्री मलैया के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विभिन्न विषयों पर श्री मलैया से चर्चा भी की।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- सहकारी संस्थाएं किसानों को सशक्त बनाने के लिए सभी आवश्यक प्रयास करें

वर्ष 2026 को प्रदेश में कृषि एवं किसान वर्ष के रूप में मनाया जाएगा सहकारी समितियों का प्राथमिकता से किया जाए कंप्यूटराईजेशन पंचायत स्तर पर पैक्स स्थापित किए जाएं पैक्स के डिफॉल्टर किसानों को लाया जाएगा मुख्य धारा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की सहकारिता विभाग की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को सशक्त बनाना और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाना सहकारी संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य है। आगामी वर्ष 2026 को प्रदेश में कृषि एवं किसान वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। अतः किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलवाने और फसल चक्र के अनुसार उन्हें सुगमता से सुविधाऐं उपलब्ध कराने के लिए सहकारिता विभाग कृषि विपणन सहकारी समितियां को मजबूत बनाने बनाने पर विशेष ध्यान दे। सहकारी समितियों का प्राथमिकता के आधार पर कंप्यूटराईजेशन किया जाए, ताकि किसानों को सुगमता और पारदर्शिता के साथ आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समिति के पदाधिकारियों के लिए प्रतिवर्ष संपत्ति का वार्षिक विवरण आवश्यक रूप से देने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंचायत स्तर पर पैक्स स्थापित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में सहकारिता विभाग की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग ने अपेक्स बैंक की 4 करोड़ 27 लाख 4 हजार 190 रुपए अंश पूंजी का लाभांश चेक भेंट किया। बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता इस अवसर पर उपस्थित थे। बैठक में अल्पकालीन कृषि ऋण वितरण, खाद और बीज वितरण, कृषि उपज के समर्थन मूल्य पर उपार्जन, उचित मूल्य दुकानों के संचालन और सहकार से समृद्धि के अंतर्गत संचालित गतिविधियों के तहत पिछले 2 वर्ष में प्राप्त उपलब्धियों, नवाचारों का प्रस्तुतीकरण किया गया। बैठक में आगामी 3 वर्ष की कार्य योजना पर भी विचार विमर्श हुआ। विभाग की 2 वर्ष की उपलब्धियाँ     15 कमजोर जिला सहकारी बैंकों के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रत्येक जिला बैंक को 50-50 लाख रूपए की अंशपूंजी शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई।     मध्यप्रदेश एम-पैक्स के कम्प्यूटराईजेशन और ऑनलाईन ऑडिट में देश में सबसे आगे है।     कृषकों को उनके खातों के संबंध में जानकारी एस.एम.एस. से उपलब्ध कराई जा रही है।     पैक्स के सोसायटी मैनेजर के लिए कैडर व्यवस्था लागू।     राष्ट्रीयकृत बैंकों के मापदंड के अनुरूप सहकारी बैंकों में प्रबंधकों और बैंकिंग सहायकों की भर्ती तथा प्रशिक्षण की व्यवस्था।     पैक्स से बहुउद्देशीय गतिविधियों का संचालन आरंभ।     कुल 4460 कॉमन सर्विस सेंटर, 4518 प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केन्द्र, 63 जन औषधि केन्द्र, 59 जल कर वसूली केन्द्र, दो एग्री ड्रोन और 25 इफ्को आउटलेट की व्यवस्था।     अब तक पैक्स को 4060 तथा डेयरी समिति को एक माइक्रो एटीएम वितरित।     सहकारी कानूनों में जनसामान्य की सुविधा की दृष्टि से संशोधन किए गए हैं।     सहकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी से सहकारी समितियों को व्यवसाय के नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।     किसानों से पूसा बासमती धान क्रय करने के लिए किसानों का आर्थिक लाभ सुविधा सुनिश्चित करते हुए मैजिस्टिक प्रायवेट लिमिटेड से अनुबंध किया गया है।     पराली की समस्या के निराकरण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।     बीज संघ द्वारा बीज व्यवसाय को प्रोत्साहन देने के लिए एमपी चीता ब्रांड लांच किया गया है।     नवीन एम पैक्स, डेयरी सहकारी समिति और मत्स्य सहकारी समिति के तहत कुल 1,601 समितियों का गठन।     मध्यप्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अभिनव पहल CPPP के तहत 19 एम.ओ.यू का निष्पादन।     कंपनियों से 10,000 से अधिक विस्थापित लोगों की 350 सहकारी समितियां गठित कराकर विस्थापितों को सुरक्षा गार्ड, माली, श्रमिक जैसे कार्यों के लिये रोजगार दिया गया। आगामी तीन वर्षों की कार्य योजना     पैक्स के डिफॉल्टर किसानों को मुख्य धारा में लाया जाएगा।     रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और नेशनल पैमेंट कार्पोरेशन ऑफ इंडिया से आवश्यक अनुमति प्राप्त कर ग्राहकों को क्यूआर कोड की सुविधा उपलब्ध कराना।     समस्त जिला बैंकों में इंटरनेट बैंकिंग (व्यू फैसिलिटी) की सुविधा।     सहकारी क्षेत्र में युवाओं और महिलाओं के कौशल विकास के लिए कौशल इको सिस्टम को विस्तार दिया जाएगा।     प्रमुख बिन्दु     किसानों को सशक्त बनाना और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाना सहकारी संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य।     वर्ष 2026 को प्रदेश में कृषि एवं किसान वर्ष के रूप में मनाया जाएगा।     किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलवाने और फसल चक्र के अनुसार उन्हें सुगमता से सुविधाऐं उपलब्ध कराने के लिए सहकारिता विभाग कृषि विपणन सहकारी समितियां को मजबूत बनाने बनाने पर विशेष ध्यान दे।     सहकारी समितियों का प्राथमिकता के आधार पर कंप्यूटराईजेशन किया जाए।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंचायत स्तर पर पैक्स स्थापित किए जाएं।     सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग ने अपेक्स बैंक की 4 करोड़ 27 लाख 4 हजार 190 रुपए अंश पूंजी का लाभांश चेक भेंट किया।