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सांसों पर संकट! दिल्ली-NCR में प्रदूषण रोकने को GRAP में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली  दिल्ली एनसीआर और आसपास के इलाकों के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) में बड़े बदलाव किए हैं। CAQM ने प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को एक स्टेज पहले कर दिया है। यानी, जो पाबंदियां पहले सबसे खराब हवा होने पर लगती थीं, अब वे उससे थोड़ी बेहतर हवा होते ही लागू हो जाएंगी। इस आदेश के मुताबित ग्रैप IV के तहत 'गंभीर' एक्यूआई के लिए लागू किए जाने वाले उपाय ग्रैप 3 के तहत लागू किए जाएंगे।  सीएक्यूएम की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक GRAP IV के तहत उपाय अब GRAP III के तहत लागू होंगे, इसलिए एनसीआर राज्य सरकारें यह तय करेंगी कि क्या सरकारी, नगर निगम और प्राइवेट ऑफिसों में 50 फीसदी कर्मचारियों को घर से काम (Work From Home) करने को कहा जा सकता है। वहीं केंद्र सरकार, केंद्र सरकार के ऑफिसों में कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति देने पर निर्णय ले सकती है। इस बीच, GRAP की समय-सारिणी में बदलाव का निर्देश देते हुए, वर्तमान में GRAP चरण II के तहत उपाय GRAP चरण I के अंतर्गत किए जाएंगे। अब GRAP I के तहत, बिजली की सप्लाई बिना रुकावट के सुनिश्चित की जाएगी ताकि लोग जनरेटर न चलाएं। ट्रैफिक जाम कम करने के लिए सिग्नल पर ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात होंगे और पब्लिक ट्रांसपोर्ट (बस/मेट्रो) बढ़ाए जाएंगे। इसी तरह GRAP III के उपाय GRAP II के तहत लागू किए जाएंगे। नए GRAP II में, दिल्ली सरकार और एनसीआर राज्य सरकारें दिल्ली और गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जिलों में सरकारी ऑफिसों और नगर निकायों के समय में बदलाव करेंगी। राज्य सरकारें एनसीआर के अन्य क्षेत्रों में सराकरी कार्यालयों और नगर निकायों के समय में बदलाव करने का निर्णय ले सकती हैं।  

‘धान बेचने में कोई समस्या नहीं’-किसान सेत राम

किसानों की सुविधा के लिए केंद्रों में माइक्रो एटीएम सहित सभी व्यवस्थाएँ उपलब्ध रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार राज्य के सभी 33  जिले के धान खरीदी केंद्रों में धान खरीदी का कार्य सुचारू, व्यवस्थित और तेज़ी से जारी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी पंजीकृत किसानों का धान प्राथमिकता से खरीदा जाए, ताकि किसी किसान को असुविधा न हो।         जशपुर के किसान सेत राम आज कुनकुरी विकासखंड के ग्राम नारायणपुर धान खरीदी केंद्र पहुँचे और अपना टोकन कटवाकर 42 क्विंटल धान की बिक्री की। उन्होंने खरीदी केंद्र की व्यवस्थाओं पर संतुष्टि व्यक्त करते हुए कहा कि “धान बेचने में किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं आई। इस वर्ष पूरी व्यवस्था पहले से अधिक सुव्यवस्थित है।” टोकन जारी करने की ऑनलाइन व्यवस्था         किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए केंद्रों में टोकन जारी करने की ऑनलाइन व्यवस्था, माइक्रो एटीएम सुविधा, पर्याप्त बारदाना, शुद्ध पेयजल, बैठने की व्यवस्था और अन्य सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। माइक्रो एटीएम सुविधा—किसानों के लिए बड़ी राहत          छत्तीसगढ़ सरकार ने धान उपार्जन केंद्रों में माइक्रो एटीएम की सुविधा उपलब्ध कराई है, जिसके माध्यम से किसान 2,000 रुपये से 10,000 रुपये तक की राशि तुरंत निकाल सकते हैं। इस सुविधा से किसानों को बैंक जाकर कतार में लगने की आवश्यकता नहीं पड़ती और धान बेचने के तुरंत बाद आवश्यक नकद उपलब्ध हो जाता है।

चुनाव आयोग पर CM मान का हमला, SIR विवाद को लेकर उठाई त्वरित समाधान की मांग

चंडीगढ़  मुख्यमंत्री मान ने संवाददाताओं से कहा, “देश भर में आपत्तियां उठाई गई हैं… चुनाव आयोग को इन मुद्दों पर जवाब देना चाहिए.” उन्होंने सवाल उठाया, “भारत का चुनाव आयोग सबूत क्यों मांग रहा है? अगर आपत्तियां उठाई गई हैं, तो उनका जवाब देना आयोग की जिम्मेदारी है.” क्या है SIR प्रक्रिया? SIR एक प्रक्रिया होती है जिसमें मतदाता सूची को सही और साफ रखने के लिए लोगों की जानकारी की दोबारा जांच की जाती है. इसमें नाम, पता, उम्र आदि को लेकर लोग आपत्ति कर सकते हैं. कई राजनीतिक दल और नागरिक अभी इस प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों की शिकायत कर रहे हैं. मुख्यमंत्री मान ने कहा कि चुनाव आयोग को चाहिए कि वह इन आपत्तियों को जल्दी से निपटाए, ताकि मतदाता सूची को अंतिम रूप देने में किसी प्रकार की देरी न हो. उन्होंने कहा कि आपत्तियों का समाधान करना आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, न कि सबूतों की मांग करना. देश के कई हिस्सों में SIR को लेकर विवाद बढ़ रहे हैं, इसी वजह से मान ने चुनाव आयोग से सार्वजनिक हित में तुरंत कार्रवाई करने की अपील की.

कृषि मंत्री विश्व मात्स्यिकी दिवस पर आयोजित कृषक संगोष्ठी में हुए शामिल

रायपुर, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा मछलीपालन मंत्री रामविचान नेताम आज विश्व मात्स्यिकी दिवस पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित कृषि मंडपम सभागार में आयोजित एक दिवसीय मत्स्य कृषक संगोष्ठी में शामिल हुए। उन्होंने संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रति वर्ष 21 नवंबर को विश्व मात्स्किी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मत्स्य पालन के महत्व, मछुआ समुदाय के अधिकारों, आर्थिक आजिविका, खाद्य सुरक्षा, सांस्कृतिक विरासत एवं समुदाय सशक्तिकरण हेतु जागरूकता लाना है। श्री नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण कर रजत जयंती मना रहा है। राज्य में प्राकृतिक रूप से मछली पालन के स्त्रोत प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है। मत्स्य किसानों के विकास के लिए आवश्यकता है केवल नवीन तकनीक, मानव कौशल विकास, आर्थिक प्रोत्साहन एवं सहायता की। मत्स्य बीज उत्पादन में राज्य देश में 6 वें स्थान पर कृषि मंत्री नेताम ने बताया कि शासन ने राज्य निर्माण के पश्चात राज्य एवं केन्द्र की विभिन्न योजनाओं जैसे कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, नील काति, प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना आदि के माध्यम से मछली पालन विकास के सतत् प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य में कुल 1,30,001 जल स्त्रोत (2.039 लाख हेक्टेयर) उपलब्ध है जिनमें 98 प्रतिशत् में किसी न किसी रूप में मत्स्य पालन हो रहा है। 3571 किलोमीटर का नदीय जलक्षेत्र भी उपलब्ध है। सघन मत्स्य पालन हेतु अतिरिक्त जलक्षेत्र निर्मित किया जा रहा है, अब तक कुल 7580 हेक्टर जलक्षेत्र निजी क्षेत्र में अतिरिक्त निर्मित हो चुका है। मछली पालन हेतु गुणतत्ता युक्त मत्स्य बीज एक आधारभूत आवश्यकता है। राज्य को मत्स्य बीज के क्षेत्र में अग्रणी बनाने हेतु निरंतर प्रयास जारी है। अब तक कुल 82 नवीन हैचरी निर्मित कर 120 हैचरियों के माध्यम से 583 करोड़ मत्स्य बीज प्रति वर्ष उत्पादित हो रहा है, एवं राज्य देश में 6 वें स्थान पर है। हमारा राज्य मत्स्य बीज उत्पादन में न सिर्फ आत्मनिर्भर हुआ अपितु अन्य राज्यों को निर्यात भी हो रहा है। मंत्री नेताम ने कहा कि विपणन व्यवस्था को सुदृढ बनाने एवं उपभोक्ता तक ताजी मछली पहुंचाने के लिए 1008 मोटर साइकल, आईस बॉक्स, 10 थी व्हीलर एवं 05 इन्सुलेटेड ट्रक, 114 वाहन (लाइव फिश वेडिंग सेन्टर) वितरित किए गए। रायपुर दुर्ग बिलासपुर एवं जांजगीर में थोक मत्स्य बाजार की स्थापना की गई। मंत्री श्री नेताम ने इस मौके पर मछुआ संघ की ओर से हितग्राहियों को लाभांश राशि का चेक प्रदान किया। मत्स्य पालन बेरोजगारी दूर करने का सशक्त साधन कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ राज्य मछुआ बोर्ड के अध्यक्ष भरत मटियारा और रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू ने भी सम्बोधित किया। मछलीपालन पालन विभाग के संचालक एमएस नाग ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि भारत के मध्यस्थल पर स्थित प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में मत्स्य पालन विकास काफी प्रगति पर है। राज्य में उपलब्ध जल संसाधन की दृष्टि से मछली पालन एक विशिष्ट स्थान रखता है, राज्य की भौगोलिक एवं कृषि जलवायु स्थितियां भी मछलीपालन हेतु उपयुक्त है। यह ग्रामीण क्षेत्रों की बेरोजगारी दूर करने का सशक्त साधन है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी वर्ग के प्रगतिशील मछुआरों को मछलीपालन की आधुनिक तकनीकी पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 1840 प्राथमिक मत्स्य सहकारी समितियों के माध्यम से 63 हजार 280 सदस्य मत्स्य पालन कर रहे हैं। संगोष्ठी में मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. लखन लाल धीवर, छत्तीसगढ़ पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष नेहरू निषाद, मछुआ कल्याण बोर्ड के भूतपूर्व अध्यक्ष बसंत तारख और रामकृष्ण धीवर सहित बड़ी संख्या में मत्स्य किसान शामिल थे।

यमुनानगर में सीजन की पहली घनी धुंध, हाईवे पर वाहनों की रफ्तार थमी

यमुनानगर  यमुनानगर में सर्दी ने दस्तक दे दी है और इस सीजन की पहली घनी धुंध ने पूरे जिले को अपनी सफेद चादर में समेट लिया। गुरुवार सुबह लोगों ने जैसे ही घरों से बाहर कदम रखा, हवा में ठंडक और नमी ने साफ संकेत दे दिया कि मौसम अब पूरी तरह बदल चुका है। धुंध के कारण हाईवे सहित कई स्थानों पर विजिबिलिटी काफी कम रही, जिसके चलते वाहन चालकों को धीमी गति से सफर करना पड़ा। मौसम में बदलाव का अहसास सुबह के समय ठंडी हवा और गाढ़ी नमी ने लोगों को सर्दियों के आगमन का एहसास कराया। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है। धुंध के कारण सड़क हादसों की आशंका बढ़ने की वजह से प्रशासन ने भी वाहन चालकों से सावधानी बरतने की अपील की है। किसानों के लिए वरदान साबित हो रही धुंध  किसानों के लिए यह धुंध किसी वरदान से कम नहीं है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि धुंध से बनने वाली नमी रबी की फसलों—विशेषकर गेहूं और सरसों—के लिए काफी फायदेमंद है। इससे जमीन की नमी बरकरार रहती है और फसलों को प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है, जिससे उपज में सुधार की संभावना बढ़ जाती है। प्रदूषण स्तर में भी गिरावट धुंध और ठंडक के कारण प्रदूषण स्तर में भी हल्की गिरावट देखी गई है। नमी और ठंड हवा में मौजूद प्रदूषक कणों को नीचे बैठने में मदद करती है, जिससे वातावरण कुछ हद तक साफ महसूस होता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह अस्थायी सुधार है। शांत और सुकूनभरी शुरुआत कुल मिलाकर, यमुनानगर में पड़ी इस पहली घनी धुंध ने सर्दी के मौसम की शांत और सुकूनभरी शुरुआत कर दी है। जहां एक ओर यह लोगों को सावधानी बरतने का संदेश दे रही है, वहीं किसानों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आई है।  

यूपी के विभिन्न जिलों से आये 160 से अधिक उद्यमी स्वदेशी व ग्रामीण उत्पादों का कर रहे प्रदर्शन

खादी महोत्सव 2025 है स्वदेशी, नवाचार और सशक्तिकरण का उत्सव यूपी के विभिन्न जिलों से आये 160 से अधिक उद्यमी स्वदेशी व ग्रामीण उत्पादों का कर रहे प्रदर्शन खादी महोत्सव 2025 का विशेष आकर्षण हैं कौशल विकास कार्यशालाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम व आधुनिक उपकरणों का वितरण  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत दृष्टिकोण के तहत स्वावलंबन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खादी महोत्सव 2025 का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश की राजधानी में आयोजित दस दिवसीय खादी उत्सव 2025 में आधुनिक संदर्भ में स्वदेशी आंदोलन को पुनर्जीवित करने, स्वदेशी शिल्पकला, स्थानीय उद्यमिता और पारंपरिक कलाओं को एक बड़े पैमाने पर सर्व समावेशी मंच के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विशिष्टता को प्रदर्शित कर रहे हैं खादी के उत्पाद   राज्य के विभिन्न जिलों से 160 से अधिक उद्यमी इस महोत्सव में भाग ले रहे हैं, जो पारंपरिक उत्पादों की विविध श्रृंखला प्रस्तुत कर रहे हैं। हाथ से काती गई खादी के वस्त्रों से लेकर टेराकोटा कला, हर्बल उत्पादों, आभूषणों और पर्यावरण-अनुकूल वस्तुओं तक यह प्रदर्शनी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विशिष्टता और विविधता को प्रदर्शित करती है। खादी महोत्सव में जहां एक ओर प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट शिल्प को जानने व खरीदने का अवसर मिल रहा है, तो वहीं दूसरी ओर ग्रामीण व कुटीर के उद्यमियों को अपने उत्पाद आमजन तक पहुंचाने का मंच भी मिल रहा है।   ग्रामीण उद्यमियों को किया जा रहा आधुनिक उपकरणों का वितरण इस वर्ष खादी महोत्सव 2025 का एक प्रमुख आकर्षण लाभार्थियों को आधुनिक उपकरणों का वितरण किया जाना है। जिसके तहत दोना बनाने वाली मशीनें, पॉपकॉर्न यूनिट और इलेक्ट्रिक कुम्हार चाक शामिल हैं। यह पहल ग्रामीण व कुटीर उत्पादों की उत्पादकता बढ़ाने, महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों का समर्थन करने और ग्रामीण युवाओं के लिए सार्थक आजीविका के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। ऐसे कदम प्रदेश के परंपरागत व ग्रामीण के उद्योगों में तकनीकी उन्ययन व नवाचार को को बढ़ावा दे रहे हैं। जिससे न केवल उत्पादों की लागत में कमी आएगी बल्कि उनकी गुणवत्ता में भी सुधार होगा।  कौशल विकास, ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग और पैकेजिंग पर आधारित कार्यशालाओं का आयोजन बाजार स्थल और कौशल विकसित करने की जगह दोनों के रूप में डिजाइन किया गया यह खादी महोत्सव 2025 में कौशल विकास, ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग, पैकेजिंग और व्यवसाय प्रबंधन पर आधारित कार्यशालाओं का भी आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यशालाओं के माध्यम से खादी व ग्रामीण उत्पादों को स्थानीय बाजारों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक विस्तार करने एवं प्रदेश की अर्थव्यवस्था में स्वदेशी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। व्यवसाय और प्रशिक्षण गतिविधियों के साथ-साथ, सांस्कृतिक प्रदर्शन, लोक संगीत और पारंपरिक कला प्रदर्शनों ने आयोजन को जीवंतता प्रदान कर रहा है।  खादी महोत्सव 2025 स्वदेशी व ग्रामीण विकास के मंच के रूप में संचालित है, जहां परंपरा प्रौद्योगिकी से मिलती है, और ग्रामीण क्षमता आर्थिक शक्ति के रूप में परिवर्तित होने का अवसर मिलता है। खादी महोत्सव यह संदेश देता है कि स्वदेशी उद्योग न केवल भारत की परंपरागत व ऐतिहासिक पहचान हैं, बल्कि एक स्थायी, स्थानीय रूप से सशक्त और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

योगी सरकार की प्रभावी नीतियां खेती में डिजिटल तकनीकों को बढ़ावा देकर किसानों की आमदनी बढ़ाने का बन रही हैं जरिया

एआई के माध्यम से कृषि क्षेत्र में बड़ी क्रांति की ओर उत्तर प्रदेश योगी सरकार की प्रभावी नीतियां खेती में डिजिटल तकनीकों को बढ़ावा देकर किसानों की आमदनी बढ़ाने का बन रही हैं जरिया एआई संचालित तकनीकों के अभिनव प्रयोगों से खेती में कुशलता, उत्पादन व लाभप्रदता में उल्लेखनीय वृद्धि लखनऊ  उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को तकनीकी दृष्टि से अत्याधुनिक बनाने की दिशा में लगातार सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश खेती के क्षेत्र में तकनीक आधारित अभिनव प्रयोगों के क्रियान्वयन एक अनुकरणीय मॉडल के तौर पर प्रस्तुत हो रहा है। राज्य में योगी सरकार ने पारंपरिक खेती को आधुनिक स्वरूप देने के उद्देश्य से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधानों का विस्तार किया है, जिससे न केवल उत्पादन बढ़ा है, बल्कि किसानों की आय में भी बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है। एआई के इस्तेमाल से मौसम, मिट्टी और फसल के अनुसार वैज्ञानिक परामर्श, कीट और रोग नियंत्रण, सिंचाई प्रबंधन तथा मार्केट एक्सेस के क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की गई है। स्मार्ट खेती की दिशा में तेजी से बढ़ रहा यूपी प्रदेश में एआई-संचालित ड्रोन, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली तथा डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म्स के कुशल क्रियान्वयन से कृषि कार्यों की पूर्ति और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है। डिजिटल कृषि मिशन के तहत लगभग 300 कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और प्रगतिशील किसान खेती को स्मार्ट बनाने के अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। एआई आधारित कीट एवं रोग निगरानी व्यवस्था के जरिए फसलों को होने वाले नुकसान में भारी कमी आई है, जिससे किसानों को राहत मिली है। मक्का की उपज 29 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाने तथा धान की उपज 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से अधिक करने की दिशा में भी प्रगति हो रही है। इससे प्रदेश तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर उच्च उत्पादकता वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल हो रहा है। किसानों के आर्थिक उत्थान में एआई की बड़ी भूमिका विश्व बैंक और गूगल साझेदारी के माध्यम से उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन चुका है जिसने एआई आधारित कृषि और शासन प्रणाली को बड़े पैमाने पर अपनाया है। यह प्रणाली किसानों को वास्तविक समय में मिट्टी, मौसम और फसल के अनुसार डिजिटल सलाह उपलब्ध करा रही है। ई-नाम जैसे प्लेटफॉर्मों ने किसानों को मार्केट एक्सेस आसान बनाया है, जबकि एआई ने ऋण, बीमा और सब्सिडी जैसी सेवाओं का लाभ भी तीव्र गति से उपलब्ध कराया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फोकस कृषि से जुड़े हर किसान को तकनीक से जोड़ने और गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर है, जिसके परिणामस्वरूप किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयास अब बड़े पैमाने पर सफल होते दिखाई दे रहे हैं। इन प्रयासों के जरिए उत्तर प्रदेश की एआई आधारित कृषि क्रांति न केवल राज्य के भविष्य को बदल रही है, बल्कि देश के लिए भी एक नए आदर्श मॉडल के रूप में उभर रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले से जुड़ी तैयारियों को लेकर की समीक्षा बैठक, फिर पत्रकारों को दी जानकारी

दिव्यता व भव्यता के साथ संपन्न करेंगे माघ मेलाः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले से जुड़ी तैयारियों को लेकर की समीक्षा बैठक, फिर पत्रकारों को दी जानकारी तीन जनवरी को पौष पूर्णिमा, 15 जनवरी को मकर संक्रांति, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या, 23 जनवरी को बसंती पंचमी, पहली फरवरी को माघ पूर्णिमा व 15 फरवरी को महाशिवरात्रि मेले को 800 हेक्टेयर में बसाने की हो रही कार्रवाईः मुख्यमंत्री माघ मेले के दौरान 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु करेंगे संगम पर स्नानः मुख्यमंत्री लगभग 20 से 25 लाख कल्पवासी एक माह तक मेले में प्रवास के साथ करते हैं मां गंगा की साधनाः मुख्यमंत्री बोले- गंगा-यमुना में सीवर के एक बूंद का भी नहीं होगा रिसाव   माघ मेले के दृष्टिगत सभी संबंधित विभागों को जोड़कर चल रही तैयारीः सीएम योगी 20-20 बेड के दो हॉस्पिटल बनाए जा रहे, 50 एंबुलेंस की भी रहेगी व्यवस्थाः मुख्यमंत्री 25 हजार शौचालय-3000 सफाईकर्मी रहेंगे तैनात, 17 थाने व 42 पुलिस चौकी होगी स्थापितः मुख्यमंत्री प्रयागराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को माघ मेले की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक की, फिर पत्रकारों को इसकी जानकारी दी। सीएम ने कहा कि मेले की प्रगति युद्ध स्तर पर है। कल्पवासियों व श्रद्धालुओं के साथ पूरे आयोजन को भव्यता-दिव्यता के साथ संपन्न करेंगे। उन्होंने बताया कि माघ मेले की तिथि 15 दिन पहले आ रही है। तीन जनवरी को पौष पूर्णिमा, 15 जनवरी को मकर संक्रांति, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या, 23 जनवरी को बसंत पंचमी, पहली फरवरी को माघ पूर्णिमा व 15 फरवरी को महाशिवरात्रि (छह प्रमुख स्नान) होंगे। तीन जनवरी से 1 फरवरी तक यहां कल्पवासियों की बड़ी संख्या रहेगी। लगभग 20 से 25 लाख कल्पवासी एक माह तक मेले में प्रवास कर मां गंगा की साधना व तपस्या करते हैं। इनके साथ ही मुख्य स्नान पर्वों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान करने आते हैं। अनुमान है कि लगभग डेढ़ महीने के दौरान प्रयागराज में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु संगम पर स्नान करेंगे। हर दिन लगभग 20-25 लाख कल्पवासियों के साथ ही देश-प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्र से भी लोग आएंगे। मेले को 800 हेक्टेयर में बसाने की कार्रवाई हो रही है। सात सेक्टर बनाए गए हैं। अलग-अलग रूट से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 42 स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था रहेगी। 2024 की तुलना में बढ़ाया गया दायरा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारी सरकार ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण का गठन किया था और मंडलायुक्त को इसका अध्यक्ष नामित किया था। मेला प्राधिकरण के नेतृत्व में महाकुम्भ के साथ-साथ अन्य आयोजन भी संपन्न होते हैं। माघ मेला 2026 की तैयारी प्रारंभ हो चुकी है। 2024 की तुलना में इसके दायरे को बढ़ाया गया है। यहां की टीम के सामने 2025 के महाकुम्भ का अनुभव है, जिसने देश-दुनिया में अमिट छाप छोड़ी थी और भारत की सनातन धर्म की परंपरा के प्रति लोगों के मन में नया उत्साह भरा था। माघ मेले के दृष्टिगत सभी संबंधित विभागों को जोड़कर चल रही तैयारी सीएम योगी ने बताया कि माघ मेले के दृष्टिगत यूपी सरकार के सभी संबंधित विभागों को जोड़ा गया है। सिंचाई विभाग बाढ़ निरोधक उपाय करने के साथ ही जल की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। यद्यपि आज संगम में 19-20 हजार क्यूसेक शुद्ध जल की उपलब्धता है, लेकिन उस समय भी 10 हजार क्यूसेक जल की उपलब्धता निरंतर बनी रहे, विभाग यह प्रयास कर रहा है। नमामि गंगे को जल की शुद्धता की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पावर कॉरपोरेशन नियमित विद्युत आपूर्ति के साथ-साथ इलेक्ट्रिक सेफ्टी की व्यवस्था करेगा। उप्र पावर कारपोरेशन द्वारा मेला क्षेत्र में 47 किमी. की एचटी व 360 किमी. की एलटी लाइन बिछाने और 25 अस्थायी सब स्टेशन बनाने का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। बोले-सीवर के एक बूंद का रिसाव भी गंगा-यमुना जी में नहीं होगा सीएम योगी ने बताया कि पीडब्ल्यूडी कनेक्टिंग मार्ग के साथ ही अंदर के मार्गों की भी व्यवस्था देखेगा। आवागमन में दिक्कत न हो, इसके लिए विभाग सात पांटून ब्रिज, लगभग 160 किमी. के दायरे में चकर्ड प्लेट बिछाएगा। उप्र जल निगम द्वारा 242 किमी. की पेयजल पाइप लाइन बिछाने का कार्य प्रारंभ हो गया है। 85 किमी. की सीवर लाइन बिछाने की कार्रवाई होगी, जिससे सीवर के एक भी बूंद का रिसाव गंगा-यमुना जी में न होने पाए। 20-20 बेड के दो हॉस्पिटल बनाए जा रहे, 50 एंबुलेंस की भी रहेगी व्यवस्था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रद्धालुओं के त्वरित उपचार के लिए 20-20 बेड के दो हॉस्पिटल बनाए जा रहे हैं। 12 पीएचसी प्राथमिक स्वास्थ्य हेल्प सेंटर के रूप में लोगों को सुविधा उपलब्ध कराएंगे। एक वेक्टर कंट्रोल यूनिट, पांच आयुर्वेदिक- पांच होमियोपैथिक चिकित्सालय की स्थापना, 50 एंबुलेंस की भी व्यवस्था रहेगी। 25 हजार शौचालय, 3000 सफाईकर्मी रहेंगे तैनात सीएम योगी ने बताया कि नगर विकास द्वारा पर्याप्त शौचालय, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था प्रारंभ कर दी गई है। मेले के दौरान 25 हजार शौचालय, 8 हजार डस्टबिन, 10 लाख से अधिक लाइनर बैग, 20 सक्शन गाड़ियां, 3000 सफाईकर्मी तैनात रहेंगे। 17 थाने व 42 पुलिस चौकी होगी स्थापित सीएम योगी ने कहा कि मेले को सकुशल संपन्न कराने के लिए यूपी पुलिस द्वारा पर्याप्त कार्मिक तैनात किए गए हैं। मेला पुलिस अधीक्षक के साथ ही पहले चरण में एडिशनल एसपी, सीओ, इंस्पेक्टर समेत अन्य पुलिसकर्मियों की तैनाती हो चुकी है। शेष की तैनाती प्रक्रिया कार्रवाई चल रही है। पुलिस लाइन के निर्माण कार्य को बढ़ाया जा चुका है। मेला क्षेत्र में 17 थाने, 42 पुलिस चौकी, 20 फायर टेंडर, 7 अग्निशमन चौकी, अग्निशमन के 20 वाच टावर, एक जल पुलिस थाना, एक जल पुलिस कंट्रोल रूम और 4 जल पुलिस सब कंट्रोल रूम स्थापित किए जाने हैं। 8 किमी. का डीप वाटर बैरिकेडिंग भी यूपी पुलिस द्वारा लगाया जाएगा। मेले के दौरान 3800 बसें करेंगी काम सीएम योगी ने बताया कि नगर विकास द्वारा सीसीटीवी व एआई युक्त 400 कैमरों के माध्यम से क्राउड मॉनीटरिंग-क्राउड डेंसिटी एनालिसिस व इन्सिडेंट रिपोर्टिंग (स्वच्छता व सुरक्षा निगरानी) भी होगी। उन्होंने बताया कि यातायात व भीड़ नियंत्रण के लिए भी अंतरजनपदीय व अंतरराज्यीय कार्ययोजना विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। यहां करीब 3800 बसें काम करेंगी। इसमें परिवहन निगम की 3000 बसें भी रहेंगी। 75 शटल बस मेला … Read more

योगी सरकार की नीतियों से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग व डाटा सेंटर्स के हब के तौर पर हो रहा प्रदेश का विकास

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग व आईटी निवेश के ग्लोबल डेस्टिनेशन के तौर पर चमक रहा यूपी योगी सरकार की नीतियों से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग व डाटा सेंटर्स के हब के तौर पर हो रहा प्रदेश का विकास तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था बन रही युवाओं के लिए रोजगार सृजन का माध्यम, नए अवसर हो रहे उत्पन्न इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि, 2017 की तुलना में लगभग 11 गुना उछाल लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा तकनीक आधारित समावेशी विकास की मजबूत सोच ने उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग और डाटा सेंटर हब के रूप में विश्व पटल पर स्थापित करना शुरू कर दिया है। वर्तमान में, राज्य की उन्नति औद्योगिक रूप से अग्रणी कई राज्यों से भी अधिक तेज है। इसका सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिल रहा है, जिन्हें आईटी और नई तकनीक आधारित क्षेत्रों में रोजगार एवं कौशल विकास के सुनहरे अवसर प्राप्त हो रहे हैं। योगी सरकार की कुशल नीतियों के परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में निवेश निरंतर बढ़ रहा है और इससे 1.48 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की प्रबल संभावनाएं हैं। रणनीतिक बदलाव से बदला परिदृश्य पिछले पौने नौ वर्षों में राज्य सरकार ने पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ भविष्य आधारित डिजिटल अर्थव्यवस्था पर अपना विशेष फोकस किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2025 के माध्यम से उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीतने में सफल हुआ है। बेहतर कारोबारी माहौल, सरल प्रक्रियाएं, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और उत्कृष्ट लॉजिस्टिक्स नेटवर्क ने राज्य में सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स, हाई-वैल्यू इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी सेवाओं और डाटा आधारित उद्योगों की स्थापना को नए आयाम दिए हैं। इस क्रम में स्टार्टअप इकोसिस्टम भी मजबूती से विस्तृत हो रहा है और बड़े पैमाने पर युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। प्रमुख निर्यातक बनकर उभरा उत्तर प्रदेश राज्य से इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों के निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। 2017 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात जहां 3,862 करोड़ रुपये था, वहीं 2024-25 में बढ़कर 44,744 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी प्रकार आईटी निर्यात भी 55,711 करोड़ से 82,055 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। प्रदेश आज कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रमुख निर्यातक राज्य के रूप में उभर चुका है। सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2024 लागू होने के बाद इस क्षेत्र में बड़े निवेश की नई संभावनाएं खुल रही हैं। मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत को नई मजबूती उत्तर प्रदेश में वैश्विक कंपनियां एसेम्बली यूनिट, डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग, कंपोनेंट और प्रिसिजन इलेक्ट्रॉनिक्स प्लांट की स्थापना कर रही हैं, जिससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में देश में बनने वाले कुल मोबाइल फोनों का लगभग 55 प्रतिशत उत्पादन अकेले उत्तर प्रदेश में होता है। भूमि बैंक, प्रस्तावित सेमीकंडक्टर पार्क, बड़े पैमाने पर डाटा इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिक व्हीकल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश के साथ राज्य अब भविष्य की तकनीकी छलांग के लिए पूरी तरह तैयार है। निवेश का पसंदीदा गंतव्य बनकर उभर रहा यूपी कम लॉजिस्टिक्स लागत, बेहतर कानून-व्यवस्था, सिंगल विंडो सिस्टम और तकनीकी कौशल से लैस मजबूत युवा कार्यबल ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेशकों के लिए सबसे विश्वसनीय गंतव्यों में शामिल कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा, निवेश संरक्षण और इंडस्ट्रियल टाउनशिप आधारित अप्रोच ने यूपी के औद्योगिक विकास को गति दी है। भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और ऐसे में उत्तर प्रदेश का उभरना यह दर्शाता है कि देश का टेक्नोलॉजी और विनिर्माण भविष्य केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य सरकार विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों और योजनाओं के माध्यम से युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर अपनी जनसांख्यिकीय ताकत को एक वास्तविक आर्थिक संपदा में परिवर्तित कर रही है।

अयोध्या का वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी में बड़ा योगदान, सालाना कारोबार 4 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान

अयोध्या का वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी में बड़ा योगदान, सालाना 4 लाख करोड़ का होगा कारोबार    जनवरी-जून, 2025 के बीच लगभग 23 करोड़ पर्यटक आए, वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने में मिलेगी मदद   लखनऊ अयोध्या में ध्वजारोहण कार्यक्रम से रामनगरी का गौरव विश्व में अपने व्यापक स्वरूप में आलोकित होने लगेगा। श्रीराम मंदिर की ध्वजा पर भगवान सूर्यदेव विराजमान हैं। सूर्यवंशी प्रभु श्रीराम की नगरी में ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद पर्यटन में तेजी के संकेत मिल रहे हैं। आध्यात्मिकता, प्राचीनता और दैवीय गुणों को समेटे हुए ध्वज की छटा देखने के लिए विश्व से बड़ी संख्या में पर्यटक अयोध्या पहुंचेंगे। इससे अयोध्या के पर्यटन में पहले से ज्यादा उछाल आने वाला है पर्यटन से राजस्व के 4 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान  अयोध्या में जनवरी-जून 2025 के बीच करीब 23 करोड़ पर्यटक आए थे। दिसंबर 2025 तक करीब 50 करोड़ पर्यटकों के शहर पहुंचने की उम्मीद है। पर्यटकों की संख्या में वृद्धि से आने वाले कुछ वर्षों में अयोध्या का पर्यटन 4 लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 2029 तक उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने को लेकर एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रहे हैं। अयोध्या का पर्यटन सीएम योगी के इस मिशन को पूरा करने में  महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। अयोध्या उत्तर प्रदेश के जीएसडीपी में अभी 1.5% योगदान कर रहा है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से अयोध्या की हिस्सेदारी और बढ़ जाएगी।     अयोध्या बन रहा है पर्यटन का सबसे बड़ा हब श्रीराम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में पर्यटकों का तांता लगा रहता है। राम मंदिर और उससे जुड़े निर्माण कार्य में अब तक लगभग 2150 करोड़ रूपये खर्च किया जा चुका है। यहां के होटल, रेस्टोरेंट, दुकानें, टूर एंड ट्रैवेल्स, पूजा सामग्री और प्रसाद के कारोबार रिकॉर्डतोड़ कमाई कर रहे हैं। अयोध्या में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 76 से ज्यादा होटल खुल चुके हैं। निजी क्षेत्र की होटल कंपनियां आईएचसीएल, मैरियट, रैडीशन, कामट, लेमन ट्री बड़ी मात्रा में निवेश कर रही हैं। देश और दुनिया से आने वाले पर्यटकों की सुख-सुविधा का पूरा ध्याम रखा जा रहा है।  उत्तर प्रदेश के पर्यटन में अयोध्या की हिस्सेदारी में वृद्धि 2028 तक उत्तर प्रदेश का पर्यटन सेक्टर 70,000 करोड़ का उद्योग बन जाएगा। इसमें अकेले अयोध्या का योगदान लगभग 25% होगा। अगर इसी तरह की ग्रोथ पर्यटन क्षेत्र में आगे देखने को मिलती है तो 4 लाख करोड़ राजस्व का टारगेट आसानी से प्राप्त कर लिया जाएगा। अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद तीर्थयात्रा से जुड़े उ‌द्योगों का वार्षिक कारोबार दिनों दिन बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में केवल आर्थिक विकास ही नहीं हुआ, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिल रही है। उत्तर प्रदेश में मंदिर और उससे जुड़ी गतिविधियों ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में करीब ₹1.25 लाख करोड़ का योगदान किया है। आध्यात्म से आर्थिक विकास की यात्रा  अयोध्या केवल धार्मिक केंद्र न रहकर आर्थिक क्रियाकलापों का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। रामनगरी की पर्यटन वृद्धि केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक बहुआयामी आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की कहानी है। इससे अयोध्या विकास के नए मापदंड स्थापित कर रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के पहले से ही सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में हो रहे दीपोत्सव ने साल दर साल नया कीर्तिमान स्थापित किया और देश-विदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्या की तरफ आकर्षित किया। अब अयोध्या में होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे न केवल स्थानीय व्यापारियों के रोजगार में और वृद्धि होगी, बल्कि लघु उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के व्यापार को भी गति मिलेगी।