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तेजस्वी यादव ने 17 नवंबर को बुलाई समीक्षा बैठक, चुनावी हार पर करेंगे मंथन

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को करारी हार का सामना करना पड़ा। वहीं, चुनाव में खराब प्रदर्शन के लिए RJD अब महामंथन करने जा रही है। दरअसल, तेजस्वी यादव ने सोमवार को अपने सरकारी आवास पर पार्टी विधायकों और सभी राजद उम्मीदवारों की अहम बैठक बुलाई है। सुबह 11 बजे होगी बैठक बताया जा रहा है कि एक पोलो रोड स्थित सरकारी आवास पर सुबह 11 बजे बैठक हो सकती है। इधर, बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की करारी हार तथा पार्टी के महज 25 सीटों पर सिमट जाने के बाद लालू परिवार की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं और अब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को किडनी दान करने वाली उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने परिवार से नाता तोड़ने के साथ राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया है। रोहिणी आचार्य ने एक चौंकाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज़ ने मुझसे यही करने को कहा था। मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।' रोहिणी की सोशल मीडिया पोस्ट लालू प्रसाद यादव के राजद परिवार में कथित मतभेदों की ओर इशारा करती है। इसी साल 25 मई को लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को एक महिला को लेकर उठे विवाद के बाद पार्टी और परिवार दोनों से निकाल दिया था। इस कार्रवाई के लिए तेज प्रताप ने अपने छोटे भाई राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव के करीबी संजय यादव को जिम्मेदार ठहराया था। बाद में तेज प्रताप यादव ने अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल बनाई और चुनाव लड़ा, हालांकि महुआ विधानसभा क्षेत्र से लगभग 50 हजार वोटों से हार गए, वहीं महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी प्रसाद यादव कड़े मुकाबले के बाद अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे।  

देश के अन्य राज्यों को पीछे छोड़कर उत्तर प्रदेश विकास के क्षेत्र में बना अग्रणी राज्य

ODOP के क्षेत्र में 3 करोड़ से अधिक व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त हुआ ODOP योजना के तहत 5 लाख से अधिक युवाओं को बैंकों से जोड़ा गया यूपी में लगभग 96 लाख MSME इकाइयाँ हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं GST रजिस्ट्रेशन वाले हर व्यापारी को ₹5 लाख का सुरक्षा बीमा कवर दिया जा रहा है उत्तर प्रदेश में मनरेगा के तहत महिलाओं की भागीदारी 42% तक पहुंची  'नमो ड्रोन दीदी योजना' की पहल से महिलाओं का सशक्तीकरण    लखनऊ उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले साढ़े 8 वर्ष में तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए विकास की नई इबारत लिखी है। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की गणना पिछड़े राज्यों में होती थी। युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करने के लिए मजबूर थे। पिछली सरकारों में माफियाराज, भ्रष्टाचार, परिवारवाद और अराजकता का बोलबाला था। सीएम योगी ने अपने कुशल नेतृत्व में लॉ एंड ऑर्डर की व्यवस्था स्थापित की और राज्य में निवेश और उद्यमियों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया। उत्तर प्रदेश आज वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनने की राह पर है।   उत्तर प्रदेश विकास के क्षेत्र में बना अग्रणी राज्य  उत्तर प्रदेश, भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है। लेकिन अब ये सिर्फ संख्या में नहीं बल्कि विकास की दिशा में भी अगुआ बनने की राह पर है। पिछले साढ़े 8 वर्षों में राज्य ने तीन बड़े क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। पहला, एक जिला, एक उत्पाद(ODOP) के तहत युवाओं को रोजगार देना। दूसरा, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) का तेजी से विकास। तीसरा, कृषि-टेक्नोलॉजी-महिलाओं पर विशेष फोकस। इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य को “परंपरा से प्रगति” की राह पर चलने वाला मॉडल बनाया है। ओडीओपी से युवाओं को रोजगार ODOP कार्यक्रम 2018 में लॉन्च हुआ था, जिसका उद्देश्य प्रत्येक जिले की विशिष्ट पारंपरिक उत्पाद हस्तशिल्प, हस्तनिर्मित वस्तुएँ, कृषि-उत्पाद को उचित मूल्य दिलाकर बाजार तक ले जाना था। ODOP सेक्टर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। ODOP योजना के तहत 5 लाख से अधिक युवाओं को बैंकों से जोड़ा गया है जो स्वरोजगार की गारंटी देता है। ODOP योजना की सफलता के कारण उत्तर प्रदेश निर्यात का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। 2016-17 में राज्य का निर्यात लगभग ₹80,000 करोड़ था, जो बढ़कर ₹1.56 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। ODOP उत्पादों का हिस्सा राज्य के निर्यात का करीब 70% तक पहुंच चुका है। ये आंकड़े केवल संख्या नहीं, बल्कि सीएम योगी की मजबूत इच्छाशक्ति का संकेत हैं। इसने युवाओं को रोजगार के  लिए पलायन की सोच से बाहर निकाला है। आज गांव-शहर की इकाइया, मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और डिजिटली जुड़ी मार्केटिंग मॉडल युवाओं को स्वरोजगार और नए रोजगार के अवसर दे रही हैं। एमएसएमई-इकोसिस्टम से लघु उद्योगों का विकास  उत्तर प्रदेश में लघु एवं मध्यम उद्योग ने विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य में लगभग 96 लाख MSME इकाइयाँ हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं। सूक्ष्म इकाइयों से लेकर छोटी विनिर्माण इकाइयां जिसमें रेल-मेनेटल, कपड़ा, हैंडीक्राफ्ट, खाद्य-प्रोसेसिंग हैं, रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार हर 1 करोड़ निवेश से लगभग 8 रोजगार उत्पन्न हो सकते हैं। इस प्रकार लघु उद्योगों ने स्थानीय स्तर पर विकास की नींव रखी है। जहा बड़े उद्योग दूर-दराज होते हैं, वहीं एमएसएमई ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता को गति प्रदान की है।  सरकार प्रदेश के 11 जिलों में 15 नए MSME औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित कर रही है, जो छोटे और मझोले उद्योगों को भूमि और आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करेंगे। MSME उद्यमियों के लिए 1,000 दिनों तक किसी भी प्रकार की NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) की आवश्यकता नहीं है। वे अपना आवेदन जमा करके उत्पादन शुरू कर सकते हैं, जिससे उद्योग लगाना आसान हुआ है। सुरक्षा और खरीद प्रोत्साहन के तहत राज्य सरकार के विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) द्वारा राज्य के MSME से 25% खरीद अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा, GST रजिस्ट्रेशन वाले हर व्यापारी को ₹5 लाख का सुरक्षा बीमा कवर भी दिया गया है। कृषि-तकनीक ने अर्थव्यवस्था को दी नई दिशा  उत्तर प्रदेश में कृषि और टेक्नोलॉजी ने विकास को बुलेट ट्रेन की रफ्तार से आगे बढ़ाया है। कृषि-उत्पादन में बढ़ावा देने के लिए फूड-प्रोसेसिंग क्लस्टर, फल-फूल निर्यात मंडल, कोल्ड-चेन इंफ्रा जैसी परियोजनाएँ चल रही हैं। मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेश में डिजिटल एग्रीकल्चर इकोसिस्टम विकसित करने हेतु नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज और बाजार तक सीधी पहुंच प्रदान करना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है। सरकार कृषि में शोध और विज्ञान के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। यह प्रयास है कि किसानों का जुड़ाव आधुनिक तकनीकों और अनुसंधान से बढ़े, जिससे वर्तमान कृषि भूमि से तीन गुना तक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। उत्तर प्रदेश के विकास में महिलाओं की अहम भागीदारी महिलाओं की भागीदारी ने भी राज्य की अर्थव्यवस्था को नया आयाम दिया है। 2025 में मनरेगा के तहत महिलाओं की भागीदारी 42% तक पहुंच गई है। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सामाजिक परिवर्तन का संकेत है। टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से महिलाओं को ई-मोबाइल तकनीक, स्मार्ट कृषि जानकारी, डिजिटल मार्केटिंग जैसे उपकरण मिले हैं, जिससे ग्रामीण महिला उद्यमिता को मदद मिली है। 

धान तस्करी पर पुलिस की सख्ती: 210 बोरी बरामद, तीन वाहनों के चालक व मालिक बुक

बलरामपुर छत्तीसगढ़ में एक बार फिर धान खरीदी के समय बिचौलिए सक्रिय हो चुके हैं. पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से वाहनों में बड़ी मात्रा में धान का अवैध परिवहन किया जा रहा है. धान बिचौलियों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है. इसी कड़ी में वाड्रफनगर के चर्चरी गांव में तीन पिकअप वाहन से 210 धान बोरी पकड़ाया है. देर रात करीब 1:30 बजे खाद्य, मंडी और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने रेड मारकर यह कार्रवाई की है. मामले में सख्त एक्शन लेते हुए तीनों चालक और वाहन मालिक पर एफआईआर दर्ज की गई है. जानकारी के मुताबिक, गोपनीय सूचना के आधार पर वाड्रफनगर एसडीएम के निर्देश पर ग्राम चरचरी में अवैध धान परिवहन पर कार्रवाई की गई. रात लगभग 1:30 बजे. चरचरी में अवैध धान परिवहन करते तीन (03) पिकअप वाहनों को पकड़ा गया, जिसमें भारी मात्रा में धान लदा हुआ था. तीनों वाहनों में 70-70 बोरी लदे हुए थे. पूछताछ में वाहन चालक ने बताया गया कि उक्त धान उत्तर प्रदेश राज्य से अवैध रूप से छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में स्थित धान खरीदी केन्द्र में अधिक मूल्य पर विक्रय के उद्देश्य से लाया जा रहा था. रात के अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले वाहन चालक पूछताछ के दौरान तीनों पिकअप के वाहन चालक रात के अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए. तीनों वाहन को थाना रघुनाथनगर में लाया गया और सुरक्षित अभिरक्षा में रखने के लिए टीआई को सुपुर्द किया गया. फिलाहास वाहन मालिक और चालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है.

झारखंड ठंड से कांपा, मैकलुस्कीगंज का न्यूनतम पारा 6 डिग्री

रांची  झारखंड में ठंड का सितम देखने को मिल रहा है। नवंबर महीने में ही लोग स्वेटर और शाल में दिख रहे हैं। इसी महीने में ही लोगों का ठंड के कारण हाल बेहाल हो गया है। वहीं, मौसम विभाग के मुताबिक दिन-प्रतिदिन ठंड में इजाफा होगा। मैकलुस्कीगंज का पारा पहुंचा 6 डिग्री राज्य में ठंड का सितम जारी है। बीते शनिवार को मैकलुस्कीगंज का पारा 6 डिग्री तक पहुंच गया। यह इस ठंड का अब तक का सबसे कम तापमान के रूप में रिकॉर्ड है। वहीं कई जिलों के तापमान में 7 डिग्री तक की गिरावट देखी गई है। मौसम विभाग ने रांची सहित रामगढ़, बोकारो, गढ़वा, पलामू, चतरा, हजारीबाग, लातेहार लोहरदगा, गुमला, खूंटी और सिमडेगा में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है।  दरअसल, पहाड़ी इलाकों में समय से पहले बर्फबारी ने निचले राज्यों में ठंड बढ़ा दी है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटों में ठंड बढ़ने की सम्भावना है। ठंड के बढ़ने के कारण लोगों में सर्दी-जुकाम, बुखार जैसी हल्की बीमारियों के लक्षण भी बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से सर्दी से बचाव के लिए आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है।  

कबाड़ गोदाम में लगी आग से हड़कंप, हाईवे जाम; भारी आर्थिक नुकसान

अजमेर अजमेर जिले के बांदरसिंदरी से होकर गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर कल रात बड़ा हादसा टल गया, जब बड़गांव के समीप होटल सुप्रीमो के पीछे स्थित एक कबाड़ गोदाम में अचानक भीषण आग भड़क उठी। देर रात लगी इस आग ने कुछ ही मिनटों में पूरे गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। गोदाम से उठती तेज लपटें और काला धुआं दूर हाईवे से भी साफ दिखाई दे रहा था, जिससे हाईवे पर गुजर रहे वाहन चालक भी दहशत में आ गए। स्थानीय लोगों ने आग और धुएं को देख तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। सूचना पर किशनगढ़ से दो दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने की कार्रवाई शुरू की। आग इतनी भीषण थी कि दमकलकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। सिटी फायर टीम के अनुसार गोदाम में बड़ी मात्रा में कबाड़, प्लास्टिक, रबर और अन्य ज्वलनशील सामग्री मौजूद थी, जिसके कारण आग तेजी से फैल गई। आग ने देखते ही देखते गोदाम में रखे हजारों रुपए के सामान को जलाकर राख कर दिया। आग बुझाने के दौरान छोटे-छोटे विस्फोट भी सुनाई दिए, जिनकी वजह गोदाम में रखी ज्वलनशील वस्तुएं बताई जा रही हैं। कड़ी मेहनत के बाद दमकलकर्मियों ने आग पर पूरी तरह काबू पाया, जिससे आग आसपास के घरों और दुकानों तक फैलने से बच गई। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। एहतियात के तौर पर आसपास के लोगों को कुछ समय के लिए बाहर निकलना पड़ा। स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है, हालांकि शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य अनजाने कारण की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल पुलिस और फायर विभाग आगजनी के कारणों की विस्तृत जांच में जुटे हैं। घटना के बाद क्षेत्र के लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने और गोदामों में ज्वलनशील सामग्री के उचित प्रबंधन की मांग उठाई है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके।

अद्भुत प्रयास: सदर अस्पताल की मेडिकल टीम ने 24 साल के युवक को दिया नया जीवन

रांची  डाॅक्टरों को भगवान का रूप माना जाता है क्योंकि वे जीवन बचाने और दर्द दूर करने का काम करते हैं। भगवान हमें जीवन देता है, जबकि डॉक्टर उस जीवन को बचाने और बनाए रखने के लिए अथक प्रयास करते हैं, खासकर मुश्किल और जानलेवा बीमारियों में। ताजा मामला रांची सदर अस्पताल से आया है। अनगड़ा थाना क्षेत्र के जरगा गांव निवासी 24 वर्षीय मरीज को बेहद गंभीर हालत में सदर अस्पताल लाया गया था। उसका गला गहरी चोट के साथ सांस की नली तक कट चुका था। परिजन खून से भीगे गमछे में उसका गला लपेटकर पहुंचे थे। डॉक्टरों की टीम ने 15 मिनट बाद ही ऑपरेशन शुरू कर दिया। टीम ने मिलकर खून जांच, ABG और सेरोलॉजी जैसे सभी टेस्ट तुरंत पूरे किए। एनेस्थीसिया टीम ने तैयारी कर मरीज को बेहोश किया और ऑपरेशन शुरू हो गया। लगभग 2 घंटे तक यह ऑपरेशन चला। वहीं, फिलहाल मरीज आईसीयू में में है। आने वाले 72 घंटे उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं। यह पूरा ऑपरेशन निशुल्क किया गया।

एमएसएमई इकाइयों को त्वरित सुविधा देने पर मुख्यमंत्री का फोकस

मुख्यमंत्री का निर्देश, रेवेन्यू शेयरिंग आधारित लीज़ रेंटल नीति का प्रारूप तैयार करें लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए लैंड बैंक के विस्तार और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को त्वरित सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु प्लग एंड प्ले मॉडल को लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। शनिवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और सतत उपलब्ध भूमि सुनिश्चित करने के लिए लीज़ रेंटल मॉडल को रेवेन्यू शेयरिंग के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि यह मॉडल उत्तर प्रदेश के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है और इसी आधार पर विस्तृत नीति तैयार की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इस नीति का मुख्य फोकस एमएसएमई क्षेत्र पर हो, ताकि छोटे और मध्यम उद्योग बिना अतिरिक्त जटिलताओं के तुरंत उत्पादन शुरू कर सकें। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में औद्योगिक भूमि की दरें अपेक्षाकृत अधिक हैं और खासकर एनसीआर से जुड़े जिलों में यह दबाव अधिक महसूस होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि की लागत उद्योगों के विस्तार, तकनीकी उन्नयन और नई इकाइयों की स्थापना के मार्ग में प्रमुख बाधा है। इसी कारण एमएसएमई के लिए किफायती आकार के भूखंडों और तैयार औद्योगिक शेड उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नए मॉडल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा है कि उद्योग भूमि खरीद और निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं में समय और संसाधन खर्च करने के बजाय सीधे उत्पादन, मशीनरी स्थापना और रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्लग एंड प्ले मॉडल के अंतर्गत औद्योगिक विकास प्राधिकरण अपनी भूमि का स्वामित्व बरकरार रखते हुए उस पर तैयार औद्योगिक शेड विकसित करेंगे या सार्वजनिक निजी सहभागिता के माध्यम से निर्माण कराया जाएगा। इन शेडों को उद्योगों को पूर्वनिर्मित उपयोग योग्य परिसर के रूप में किराये पर उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मॉडल को पीपीपी की डीबीएफओटी संरचना के तहत लागू किया जा सकता है जिसमें निजी क्षेत्र डिज़ाइन, निर्माण, वित्त और संचालन की जिम्मेदारी संभालेगा जबकि भूमि स्वामित्व और नियामकीय नियंत्रण प्राधिकरण के पास रहेगा। उन्होंने कहा कि रेवेन्यू शेयरिंग आधारित लीज़ रेंटल व्यवस्था से प्राधिकरण को स्थायी आय सुनिश्चित होगी और उद्यमियों को बिना भूमि खरीद के चरणबद्ध तरीके से उद्योग विस्तार का अवसर मिलेगा। यह मॉडल एमएसएमई के वित्तीय जोखिम को कम करेगा और उन्हें व्यवसाय संचालन में अधिक लचीलापन प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रस्तावित नीति में उद्योग को दीर्घकालिक स्थिरता और स्पष्टता मिले जबकि भूमि का नियंत्रण राज्य के पास सुरक्षित रहे। रेवेन्यू शेयरिंग व्यवस्था सरल, पारदर्शी और औद्योगिक विकास के लिए सहायक होनी चाहिए ताकि राज्य की भूमि संपदा का अधिकतम और उचित उपयोग सुनिश्चित हो सके।

‘सेवा ही सर्वोच्च धर्म’ के सिद्धांत पर सशक्त युवा, विकसित भारत बनाने के उत्सव की मेजबानी करेगी उत्तर प्रदेश की सरकार

डायमंड जुबली जंबूरी: जब एशिया-पैसिफिक के प्रतिनिधि चखेंगे बनारसी खाने का स्वाद और देखेंगे भारतीय हस्तकला परंपरा और तकनीक का संगम: 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी युवाओं में राष्ट्रीय सेवा और वैश्विक भाईचारे की भावना करेगी मजबूत सांस्कृतिक गौरव का उत्सव: लखनऊ में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स का महाकुंभ, 75वीं वर्षगांठ का भव्य समारोह लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ 61 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भारत स्काउट्स और गाइड्स के महाकुम्भ की मेज़बानी के लिए पूरी तरह तैयार है। योगी सरकार 23 से 29 नवंबर तक 19वें राष्ट्रीय जम्बूरी कार्यक्रम का आयोजन कर रही है, जो भारतीय संस्कृति और एकता में विविधता का एक भव्य उत्सव होगा। "सशक्त युवा विकसित भारत" थीम पर आधारित इस "डायमंड जुबली" कार्यक्रम में देश भर से लगभग 30,000 स्काउट-गाइड और यूनिट लीडर्स के साथ 1500 विदेशी प्रतिभागियों समेत कुल 33,000 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। यह आयोजन न केवल स्काउटिंग परंपरा का उत्सव है, बल्कि युवाओं में सेवा, अनुशासन और नेतृत्व कौशल को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच भी है। काशी के घाटों पर आस्था और संस्कृति का संगम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर, आयोजन स्थल को 'लघु भारत' का भव्य स्वरुप दिया जा रहा है, जहाँ देश के हर कोने की पहचान एक साथ जीवंत होगी। इस सांस्कृतिक समागम का मुख्य आकर्षण काशी के घाटों का प्रतिरूप होगा। विश्व भर से आए प्रतिभागियों के समक्ष सातों दिन काशी के घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती की शानदार प्रस्तुति की जाएगी। यह प्रस्तुति विश्व पटल पर भारत के आध्यात्मिक गौरव और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाएगी। देशभर के स्वाद और कला का अनुभव यह जम्बूरी 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को साकार करती हुई, प्रतिनिधियों को देश की विविधता का प्रत्यक्ष अनुभव कराएगी। वाराणसी के कंटीजेंट लीडर आशु कुमार वर्मा के अनुसार, फूड प्लाजा में न केवल बनारसी पान का स्टाल लगेगा, बल्कि बनारसी चाट, पूड़ी-कचौड़ी और जलेबी का स्वाद भी विश्वभर से आए मेहमान चख सकेंगे। इसके साथ ही, हस्तकला में वेस्ट मटेरियल से हस्तशिल्प और मिट्टी को आकार देकर कलाकृतियाँ बनाई जाएंगी, जो भारत की कलात्मक विरासत को प्रदर्शित करेंगी। नवाचार और भविष्य का नेतृत्व युवाओं में नवाचार और नेतृत्व कौशल को प्रोत्साहित करने के लिए, आयोजन स्थल पर एक विशेष आईटी एवं एआई हब स्थापित किया जा रहा है। यहाँ डिजिटल लर्निंग, इनोवेशन और लीडरशिप से जुड़े वर्कशॉप आयोजित होंगे। स्काउट्स को शिक्षा, रोबोटिक्स और साइंस एक्सपो के माध्यम से आधुनिक तकनीकों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, ताकि वे विकसित भारत के लिए सक्षम नेतृत्वकर्ता बन सकें। यह जम्बूरी युवाओं को "सेवा ही सर्वोच्च धर्म" के आदर्श से प्रेरित करेगी। 61 वर्षों के बाद उत्तर प्रदेश में हो रहा यह भव्य आयोजन, युवा नेतृत्व, अनुशासन और राष्ट्र सेवा की भावना का प्रतीक बनकर, देश और विदेश में एक अमिट छाप छोड़ेगा।

आजीविका मिशन की मदद से ग्रामीण महिलाओं का समूह तैयार कर रहा एलईडी बल्ब

झांसी में ग्रामीण महिलाओं का समूह एलईडी बल्ब बनाने और मार्केटिंग का खुद कर रहा काम झांसी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित कर रही है। महिलाओं के कई समूहों ने अभिनव पहल करते हुए प्रेरणा देने वाली मिसाल कायम की है। ऐसा ही एक उदाहरण प्रस्तुत किया है झांसी जिले के चिरगांव ब्लॉक के ग्राम जरियाई की जय मां रतनगढ़ वाली महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने। इन महिलाओं ने उद्यमिता की राह पर कदम बढ़ाते हुए एलईडी बल्ब बनाने का काम शुरू किया है। महिलाओं का समूह बल्ब बनाकर इस एलईडी बल्ब को अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में बिक्री करता है। जय मां रतनगढ़ वाली महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष अंजना के अनुसार ने उनके समूह से 12 महिलाएं जुड़ी हैं। लगभग 8 महीने पहले एलईडी बल्ब बनाने का काम उनके समूह ने शुरू किया है। महिलाओं के समूह ने इस काम को शुरू करने के लिए दस हजार रूपये जुटाए और उससे जरूरी सामान मंगवाए। समूह की महिलाओं ने लोन भी लिया। योगी सरकार ने महिलाओं को बल्ब निर्माण का प्रशिक्षण दिलाया। समूह की महिलाओं को बल्ब बनाने के लिए रॉ मैटेरियल प्रदान किया जाता है। महिलाएं इस मैटेरियल से एलईडी बल्ब बनाकर बिक्री का काम करती हैं। समूह की महिलाएं हर रोज 150 से अधिक बल्ब तैयार करती हैं और उसकी बिक्री की रणनीति भी खुद तैयार करती हैं।  चिरगांव ब्लॉक की बीएमएम कल्पना के अनुसार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को समूह का गठन कराने के बाद संबंधित काम का प्रशिक्षण दिलाया गया। इन उत्पादों की बिक्री के लिए प्रदर्शनियों और मेलों में सरकार की ओर से निशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराया जाता है। महिलाओं के समूह ने इस पहल के माध्यम से आजीविका अर्जित करने की ओर कदम बढ़ाया है।

बिहार की राजनीति में नई हलचल: JDU के बिना सरकार गठन पर संजय झा ने क्या कहा?

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिली ऐतिहासिक जीत और 200 से अधिक सीटों का जादुई आंकड़ा पार करने के बाद राजनीतिक हलचल तेज है। इसबार के चुनावी आंकड़ों को देखने के बाद कयासों का बाजार भी गर्म है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बिहार की 243 सीटों में से सबसे ज्यादा बीजेपी ने 89 सीटें जीती हैं। वहीं सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड को 85 सीटें मिली हैं। सीटों की संख्या में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इसके बाद से कुछ लोगों का दावा है कि भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाएगी। हालांकि, जेडीयू ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू के दौरान ऐसे तमाम अटलकों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में एनडीए एकजुट है। भाजपा और जेडीयू के अलावा एनडीए में शामिल चिराग पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास ) को 19 सीटें मिली हैं। वहीं, जीतनराम मांझी की हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) को पांच सीटें, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा चार सीटें जीतने में सफल रही है। ऐसे में यह संख्या 202 तक पहुंच जाती है। इस चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा। लालू यादव की पार्टी को सिर्फ 25 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। वहीं सहयोगी दल कांग्रेस को छह सीटें मिली हैं। इसके अलावा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन को दो सीटें मिली हैं। असदुद्दीन औवेसी की पार्टी एआईएमआईएम पांच सीटें जीतने में कामयाब रही है। इसके अलावा इंडियन इन्क्लुसिव पार्टी (IIP), माकपा और बहुजन समाज पार्टी को एक-एक सीट मिली है। संख्या को देखते हुए कयासों का बाजार गरमाया हुआ है। नीतीश के बिना भाजपा के सरकार चलानी की अटकलें लगाई जा रही हैं। एक थ्योरी यह भी गढ़ी जा रही है कि नीतीश कुमार और विपक्ष के तमाम दलों के साथ सरकार बन सकती है। उसमें ओवैसी का भी साथ रहे। इन तमाम अटकलों को लेकर संजय झा से सवाल पूछे गए। उनसे पूछा गया कि क्या बिना जेडीयू के भी सरकार बना सकती है बीजेपी? क्या नीतीश ही पांच साल तक मुख्यमंत्री रहेंगे? संजय झा ने साफ शब्दों में जवाब देते हुए कहा, “मैं इस तरह की अटकलों पर टिप्पणी नहीं कर सकता। समय आने पर सब स्पष्ट हो जाएगा। एनडीए के भीतर किसी तरह का कोई भ्रम नहीं है।” एनडीए की अंदरूनी राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? इस सवाल के जवाब पर संजय झा ने कहा “डायनमिक्स वही रहेंगे। हम सब मिलकर काम कर रहे हैं और हमारे बीच बेहतरीन तालमेल है। इतनी बड़ी जीत के बाद हमारा फोकस सिर्फ यह है कि हम जनता के लिए डिलीवरी करें। केंद्र और राज्य के बीच संबंध पहले से ही बहुत अच्छे हैं।” उन्होंने कहा, “यह जीत एनडीए के एकजुट होकर लड़ने का नतीजा है। इसमें चिराग पासवान भी शामिल हैं। अगर सभी गठबंधन साझेदार एकसाथ नहीं होते, तो 200 का आंकड़ा पार करना संभव नहीं था।”