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मशरूम और महुआ कारोबार से आत्मनिर्भर बनीं बबली, योजनाओं से मिली नई उड़ान

फोटो कॉपी, मशरूम और महुआ व्यवसाय ने बदली बबली की जिंदगी बिहान से मिली उड़ान, साय सरकार की योजनाओं से मजबूत हुआ आत्मविश्वास  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के विजन की दिख रही जमीनी तस्वीर रायपुर, कभी परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित साधनों पर निर्भर रहने वाली ग्राम पंचायत चुकतीपानी की श्रीमती बबली यादव आज अपने हुनर, मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी अलग पहचान बना रही हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर उन्होंने एक नहीं, बल्कि कई आजीविका गतिविधियों को अपनाया। फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी जैसे अलग-अलग कामों से उन्होंने अपनी आय का मजबूत आधार तैयार किया है। आज उनकी कहानी गांव की उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो अपने पैरों पर खड़ा होकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का सपना देखती हैं। श्रीमती बबली यादव जागृति महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने उपलब्ध अवसरों का उपयोग करते हुए स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया। समूह के माध्यम से ऋण प्राप्त कर उन्होंने कंप्यूटर खरीदा और अपने घर से ही फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर संबंधी कार्य शुरू किया। शुरुआत भले ही छोटे स्तर से हुई, लेकिन मेहनत और निरंतर प्रयास ने इस काम को उनकी नियमित आय का जरिया बना दिया। बबली की मेहनत का लाभ केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहा। गांव में ही फोटो कॉपी, प्रिंटिंग और कंप्यूटर से जुड़े काम की सुविधा मिलने लगी। पहले जिन छोटे-छोटे कामों के लिए ग्रामीणों को बाहर जाना पड़ता था, वे अब स्थानीय स्तर पर ही पूरे होने लगे। इस तरह उनका स्वरोजगार ग्रामीणों के लिए सुविधा और उनके परिवार के लिए आय का माध्यम बन गया। मशरूम की खेती से बढ़ी आमदनी, महुआ खरीदी से जुड़ा नया अवसर श्रीमती बबली यादव ने अपनी आय को एक ही साधन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने मशरूम उत्पादन की शुरुआत की। कम जगह में शुरू किए गए इस कृषि आधारित व्यवसाय से उन्हें अतिरिक्त आमदनी मिलने लगी। मशरूम उत्पादन ने उन्हें यह विश्वास दिया कि स्थानीय संसाधनों और उपलब्ध अवसरों का सही उपयोग कर गांव में रहते हुए भी आय के नए रास्ते बनाए जा सकते हैं। इसके साथ ही वे पीजी समूह के माध्यम से महुआ खरीदी के कार्य से भी जुड़ी हैं। इस गतिविधि के जरिए वे स्वयं आय अर्जित करने के साथ ग्रामीण महिलाओं को भी रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। इस तरह फोटो कॉपी से लेकर मशरूम और महुआ तक, बबली ने अपनी आजीविका को कई आय स्रोतों से जोड़ा है। लगभग 10 हजार रुपये मासिक आय से मजबूत हुआ परिवार श्रीमती बबली यादव बताती हैं कि फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी जैसी गतिविधियों से उनकी मासिक आय लगभग 10 हजार रुपये तक हो जाती है। इस अतिरिक्त आय से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है। पहले जहां परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए आय के सीमित साधन थे, वहीं अब उनके पास अपनी मेहनत से कमाई का नियमित माध्यम है। उनके लिए यह बदलाव केवल आमदनी बढ़ने तक सीमित नहीं है। आर्थिक आत्मनिर्भरता ने उनके भीतर निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ाया है। आज वे अपने परिवार की जरूरतों में सहयोग देने के साथ अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार और समूह आधारित गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। बिहान ने दिया अवसर, साय सरकार की योजनाओं से मिली आगे बढ़ने की राह छत्तीसगढ़ में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में इन प्रयासों को आगे बढ़ाया जा रहा है। बबली यादव की कहानी इसी व्यवस्था का स्थानीय उदाहरण है, जहां समूह से जुड़ाव, ऋण की सुविधा और आजीविका के अवसर ने एक ग्रामीण महिला को अपने पैरों पर खड़े होने का रास्ता दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ और महिला नेतृत्व वाले विकास के विजन से जुड़ी कहानी श्रीमती बबली यादव की सफलता उस व्यापक सोच से भी जुड़ती है, जिसमें ग्रामीण महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों की सक्रिय भागीदार बनाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को विकसित भारत की मजबूत कड़ी बताते हुए ‘लखपति दीदी’ के माध्यम से महिलाओं की आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया है। केंद्र सरकार के दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को वित्तीय, तकनीकी और बाजार से जुड़ी सहायता के माध्यम से आजीविका मजबूत करने पर जोर दिया जाता है। मिशन में ग्रामीण महिलाओं को सामुदायिक संस्थाओं के माध्यम से संगठित कर ऋण और अन्य संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। यही सोच गांव की महिलाओं के जीवन में धीरे-धीरे बदलाव ला रही है। बबली यादव ने समूह से मिली ताकत को अपने स्थानीय ज्ञान और मेहनत से जोड़ा और अलग-अलग गतिविधियों को अपनी आजीविका का आधार बनाया। आवास और महतारी वंदन से मिला सामाजिक-आर्थिक संबल श्रीमती बबली यादव को प्रधानमंत्री आवास योजना और महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिला है। इन योजनाओं से मिले सहयोग ने उनके परिवार की बुनियादी जरूरतों को मजबूत आधार दिया है। एक ओर जहां आवास ने परिवार को सुरक्षित आश्रय का संबल दिया, वहीं दूसरी ओर नियमित आर्थिक सहायता ने घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सहयोग किया। बबली कहती हैं कि शासन की योजनाओं और बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला। उनके अनुसार, यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, समूह का साथ और आर्थिक गतिविधि शुरू करने का अवसर मिले तो वे न केवल अपने परिवार को संभाल सकती हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार और प्रेरणा का माध्यम बन सकती हैं। छोटी शुरुआत से बड़ी पहचान तक बबली यादव की कहानी बताती है कि आत्मनिर्भरता के लिए हमेशा बड़े कारोबार से शुरुआत करना जरूरी नहीं है। एक कंप्यूटर और फोटो कॉपी मशीन से शुरू हुआ काम, … Read more

संभल की सोनपापड़ी और हॉर्न-बोन क्राफ्ट की वैश्विक पहचान, UPITS-2026 में दिखेगा हुनर

यूपीआईटीएस-2026: संभल के हॉर्न-बोन क्राफ्ट और सोनपापड़ी का दुनिया में बजेगा डंका, सात फर्मों को मिले स्टॉल ओडीओपी और ओडीओसी योजना के तहत वैश्विक पटल पर चमकेगा संभल का हुनर, एमएसएमई हॉल में भी दिखेगी जिले की मजबूत धमक संभल  प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और स्थानीय दस्तकारी को सात समंदर पार पहचान दिलाने की दिशा में प्रदेश सरकार का महत्वाकांक्षी आयोजन 'यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो' 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित होने जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय महामंच पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संभल जनपद के हुनर का जलवा बिखरेगा। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'एक जनपद-एक उत्पाद', 'एक जनपद-एक व्यंजन' तथा एमएसएमई नीति के तहत संभल की सात प्रमुख औद्योगिक इकाइयों व दस्तकारों को विभिन्न हॉल में स्टॉल आवंटित कर दिए गए हैं। कुल 1.10 लाख वर्ग मीटर से अधिक के विशाल प्रदर्शनी क्षेत्र में आयोजित होने वाले इस पांच दिवसीय मेले में 2,400 से अधिक प्रदर्शक भाग लेंगे, जिसमें संभल के विश्वविख्यात 'हॉर्न एवं बोन क्राफ्ट' और लजीज सोनपापड़ी का स्वाद अंतरराष्ट्रीय खरीदारों (बायर्स) के सामने पेश किया जाएगा। हॉल-9 में दिखेगी सींग व हड्डी की नायाब नक्काशी संभल का हॉर्न एवं बोन क्राफ्ट वैश्विक स्तर पर अपनी अनूठी पहचान रखता है। यूपीआईटीएस-2026 के हॉल नंबर 9 (ओडीओपी पवेलियन) में संभल के तीन प्रमुख दस्तकारों को स्थान दिया गया है। इनमें मोहम्मद आरिफ को स्टॉल नंबर एच9-0116/ और शाह आलम को स्टॉल नंबर एच9-02/72 आवंटित किया गया है, जो हॉर्न व बोन से बने हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। वहीं, अमेजिंग क्राफ्ट होम के विकास जैन को स्टॉल नंबर एच9-03/126, 127, 128 और 129 यानी चार स्टॉलों का बड़ा स्पेस मिला है, जहां वे काष्ठ शिल्प (वुडन हैंडीक्राफ्ट्स) का भव्य प्रदर्शन करेंगे। एमएसएमई और एक्सपोर्ट पवेलियन में भी संभल का दबदबा जिले के उद्यमियों ने केवल पारंपरिक ओडीओपी तक सीमित न रहकर आधुनिक कला और निर्यात क्षेत्र में भी कदम बढ़ाए हैं। हॉल नंबर 10 (एमएसएमई) में जुबैर उमर (फर्म: जुबैर उमर मिस्टर जुबैर) को स्टॉल नंबर एच10-08/457 मिला है, जहां वे हॉर्न-बोन के साथ रेजिन आर्ट और वुडन क्राफ्ट का अनूठा सम्मिश्रण प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा हॉल नंबर 14 (ओडीओपी) में हैंडीक्राफ्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले नीलकंठ ओवरसीज के कमल कौशल वार्ष्णेय को स्टॉल एच14-14/44 तथा शहादत हुसैन को स्टॉल एच14-14/42 आवंटित किया गया है। हॉल नंबर 11 में डेकोर वर्ल्ड एक्सपो के मोहम्मद आकिब यूपी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के तहत जिले के एक्सपोर्ट क्वालिटी उत्पादों को प्रदर्शित करेंगे। ओडीओसी में घुलेगी संभल की मशहूर सोनपापड़ी की मिठास हस्तशिल्प के साथ-साथ इस बार संभल के लजीज स्वाद को भी वैश्विक मंच दिया गया है। 'एक जिला, एक व्यंजन' योजना के तहत हॉल नंबर 16 में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए संभल के दक्ष स्वीट सेंटर के संचालक राजेंद्र कुमार को स्थान दिया गया है। यहां देश-विदेश से आने वाले मेहमानों और ट्रेडर्स को संभल की मशहूर सोनपापड़ी का मुरीद बनाया जाएगा।  वैश्विक बाजार में संभल के हुनर को मिलेगा नया मुकाम "यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो संभल के उद्यमियों और दस्तकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने उत्पादों की पहचान स्थापित करने का एक स्वर्णिम अवसर है। ओडीओपी और ओडीओसी योजना के तहत चयनित इकाइयों को वैश्विक मंच उपलब्ध कराने के लिए स्टॉल आवंटित किए जा चुके हैं। प्रशासन का पूरा प्रयास है कि हमारे पारंपरिक हॉर्न-बोन हस्तशिल्प और स्थानीय मिठास को देश-विदेश के बड़े खरीदारों से सीधे ऑर्डर्स मिलें, जिससे जिले के निर्यात को नई गति और कारीगरों को बेहतर आय मिल सके।" — मुकेश कुमार, उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र, संभल

सिवनी दुष्कर्म मामले में बड़ा फैसला, DNA रिपोर्ट के बाद सजा रद्द

जबलपुर   मानसिक रूप से असक्षम युवती के साथ दुष्कर्म के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. यहां सुनवाई के दौरान दुष्कर्म पीड़िता के बच्चे से आरोपी का डीएनए मिलान नहीं हुआ, जिसके बाद आरोपी को हाईकोर्ट से राहत मिली है. हाईकोर्ट जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने इस मामले में सुनवाई की।  मानसिक अक्षम युवती से दुष्कर्म के आरोप लखनादौन जिला सिवनी निवासी छोटू टेकाम पर पड़ोस में रहने वाली मानसिक रूप से असक्षम युवती के साथ दुष्कर्म के आरोप लगे थे. जिसके बाद उसे जिला न्यायालय द्वारा दस साल की सजा से दंडित किया गया था. इस सजा के खिलाफ आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी. अपील में कहा गया था कि अभियोजन के अनुसार युवती के माता-पिता कार्य के लिए नागपुर गए थे और जब नागपुर से लौटे तो उन्होंने पाया कि उनकी मानसिक रूप से अक्षम बेटी गर्भवती हो गई है।  आरोपी को हुई थी 10 साल की हुई थी सजा याचिका में बताया गया कि बेटी के गर्भवती होने पर उसके मां-बाप ने पड़ोसी होने के कारण आरोपी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी. युवती ने भी अपने बयान में उसके खिलाफ गवाही दी, जिसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया और जिला न्यायालय ने विभिन्न धाराओं के तहत अधिकतम दस साल की सजा से दंडित कर दिया. इस दौरान अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि पीड़ित द्वारा जन्म दिए गए बच्चे और आरोपी का डीएनए ही आपस में नही मिलता, जिससे स्पष्ट है कि वह उस बच्चे का जैविक पिता नही है।  पीड़िता के बच्चे से डीएनए मिलान नहीं हुआ, दोषमुक्त करार एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि डीएनए रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित व नवजात बच्चे का डीएनए आपस में मिलते है, लेकिन दुष्कर्म के आरोपी का डीएनए नवजात बच्चे के डीएनए से नहीं मिलता. ऐसे हाईकोर्ट जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने तकनीकी साक्ष्य नहीं होने के कारण अपीलकर्ता को संदेह के आधार पर दोषमुक्त करार दिया है. एकलपीठ ने वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं होने के कारण अपीलकर्ता को संदेह का लाभ देते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज वितरित करेंगे 3,567 नियुक्ति पत्र

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज मंगलवार यानी 22 सितंबर को 3,567 नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान करेंगे।लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित भव्य कार्यक्रम में प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को योग्य शिक्षक और कुशल प्रशासक मिलेंगे। चयनित अभ्यर्थियों में 319 प्रधानाचार्य, 258 प्रधानाध्यापक, 618 प्रवक्ता (पीजीटी) तथा 2372 सहायक अध्यापक (टीजीटी) शामिल हैं। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा पारदर्शी परीक्षा प्रणाली के माध्यम से अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के लिए चयनित इन अभ्यर्थियों को जुपिटर हॉल में आयोजित समारोह में नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी समेत अन्य नेता एवं अधिकारी मौजूद रहेंगे।   

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी विवाद कायम, 35 हजार से अधिक अवमानना केस लंबित

जबलपुर  हाई कोर्ट में एक मुकदमे का आदेश होने के बाद भी विवाद समाप्त नहीं हो रहा है। आदेश का पालन नहीं होने पर वही पक्षकार दोबारा हाई कोर्ट पहुंच रहा है और अवमानना याचिका के रूप में उसी विवाद की दूसरी न्यायिक पारी शुरू हो रही है।अवमानना प्रकरणों की 35 हजार से अधिक संख्या ने न्यायालय के सामने लंबित मामलों के निराकरण की चुनौती को और जटिल बना दिया है। मूल याचिका में न्यायालय जहां अधिकार और विवाद का फैसला करता है, वहीं आदेश के बाद अवमानना याचिका में यह देखना पड़ता है कि संबंधित विभाग, अधिकारी या संस्था ने न्यायालय के निर्देश का पालन किया या नहीं। इस प्रक्रिया में नोटिस, जवाब, अनुपालन रिपोर्ट, व्यक्तिगत उपस्थिति और कई बार समय-सीमा तय करने जैसी न्यायिक कवायद करनी पड़ती है। हाई कोर्ट में पहले से ही लंबित मामलों का बड़ा बोझ हाई कोर्ट में पहले से ही लंबित मामलों का बड़ा बोझ है। मार्च 2025 के अंत में न्यायालय में लंबित प्रकरणों की संख्या 4.71 लाख से अधिक थी। ऐसे में आदेशों के समय पर पालन नहीं होने से उत्पन्न अवमानना प्रकरण न्यायालय के अतिरिक्त समय और संसाधनों की मांग करते हैं। इसका असर सीधे तौर पर मूल मामलों के निराकरण की गति पर पड़ने की स्थिति बनती है। हाल के मामलों में भी न्यायालय को अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना पड़ा है। न्यायालय ने नोटिस से आगे बढ़कर वारंट तक जारी किए कई मामलों में आदेश के बावजूद अनुपालन रिपोर्ट पेश नहीं होने अथवा संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति नहीं होने पर न्यायालय ने नोटिस से आगे बढ़कर वारंट तक जारी किए हैं। सितंबर में जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने एक अवमानना प्रकरण में तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व और सागर के तत्कालीन कलेक्टर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। आदेश के बाद भी खत्म नहीं होता मुकदमा अवमानना कानून का उद्देश्य न्यायालय के आदेश की गरिमा और प्रभावशीलता बनाए रखना है। इसलिए अवमानना याचिकाओं की आवश्यकता से इनकार नहीं किया जा सकता। असल समस्या उस स्थिति में पैदा होती है जब किसी आदेश के पालन के लिए बार-बार न्यायालय की निगरानी आवश्यक हो जाती है। यदि विभागीय स्तर पर आदेश मिलते ही उसकी अनुपालन प्रक्रिया शुरू हो और समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हो जाए तो बड़ी संख्या में अवमानना याचिकाओं की नौबत टाली जा सकती है।  

यूपी बना एक्सपोर्ट इंजन, आबकारी निर्यात नीति से खेत से विदेशी बाजार तक जुड़ी पूरी चेन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति 2026-29 का असर अब प्रदेश की पूरी एक्सपोर्ट चेन में दिखाई दे रहा है। खेतों में तैयार होने वाले गन्ने, शीरे और अनाज से लेकर फैक्ट्री, पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन तक आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में यूपी के आबकारी निर्यात में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 45.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान राष्ट्रीय वृद्धि 18.3 प्रतिशत रही। नई इकाइयों और पुराने प्लांट को मिला संबल निर्यात की संभावनाओं के साथ प्रदेश में नई औद्योगिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं। उन्नाव में यूनाइटेड ब्रुअरीज और हरदोई में माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। फर्रुखाबाद में वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने इकाई स्थापित की है। वहीं एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स ने मुरादाबाद की बंद इकाई को दोबारा शुरू किया है। गोरखपुर की कियान डिस्टिलरी ने एथेनॉल उत्पादन के साथ पेय आसवनी और ब्रुअरी के लिए आवेदन किया है। रैडिको खेतान भी अन्य राज्यों से सीतापुर और रामपुर संयंत्रों में निर्यात उत्पादन स्थानांतरित कर रही है। 10.2 से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई हिस्सेदारी अप्रैल-जून 2026 में देश से करीब 10.17 करोड़ अमेरिकी डॉलर का आबकारी निर्यात हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 127.8 लाख डॉलर रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 87.9 लाख डॉलर थी। इस तरह प्रदेश ने करीब 39.9 लाख डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि हासिल की। राष्ट्रीय निर्यात में यूपी की हिस्सेदारी भी 10.2 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई। प्रदेश इस अवधि में महाराष्ट्र और पंजाब के बाद तीसरे स्थान पर रहा। बस्ती का शीरा पहुंचा वैश्विक बाजार आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने बताया कि यूपी की बढ़ती एक्सपोर्ट चेन में कृषि आधारित उत्पाद भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। बस्ती से 25 हजार कुंतल शीरे का विदेश निर्यात किया गया, जिससे करीब पांच लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। शीरा अलग शुल्क वर्गीकरण में आता है, इसलिए यह राशि उपरोक्त आंकड़ों से अतिरिक्त है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रदेश के कृषि उत्पाद प्रसंस्करण के बाद वैश्विक बाजार की आपूर्ति श्रृंखला में शामिल हो रहे हैं। बोतलों की सप्लाई में भी आया बड़ा उछाल अप्रैल-जुलाई 2026 के बीच यूपी की इकाइयों ने अन्य राज्यों को पिछले वर्ष की समान अवधि से 1.64 करोड़ अधिक बोतलें भेजीं। यह करीब 45.7 प्रतिशत की वृद्धि है। आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि निर्यात बढ़ने का असर गन्ना, शीरा और अनाज से लेकर कांच की बोतल, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन तक पड़ता है। इस तरह त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति ने प्रदेश में खेत से फैक्ट्री और फैक्ट्री से विदेशी बाजार तक जुड़ी व्यापक एक्सपोर्ट चेन को गति दी है।

सेवा संकल्प अभियान में विकास का शंखनाद, अरुण साव ने ₹126.92 करोड़ के कार्यों की रखी आधारशिला

रायपुर सेवा संकल्प अभियान के तहत रायगढ़ में विकास कार्यों को गति देने सोमवार को संत पूज्य  प्रियदर्शी राम जी ऑडिटोरियम पंजरी प्लांट रायगढ़ में भूमिपूजन एवं लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव के मुख्य आतिथ्य में नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के कुल 126.92 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन-लोकार्पण हुआ। उप मुख्यमंत्री  साव ने शहर के विकास के लिए चार और बड़े कार्यों की घोषणा की। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक  ओ.पी. चौधरी दिल्ली से वर्चुअली कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को पूर्ण हो चुके आवासों की प्रतीकात्मक चॉबी भी सौंपी गई। रायगढ़ को विकसित जिला बनाने तेज गति से कार्य जारी – उप मुख्यमंत्री  साव  उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि रायगढ़ तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रायगढ़ जिले को विकसित जिला बनाने के लिए तेज गति से काम किया जा रहा है। सेवा संकल्प अभियान के तहत विकास कार्यों को गति देने के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रायगढ़ नगर निगम की ओर से लगभग 10 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की सूची उन्हें दी गई है। इन कार्यों के लिए शीघ्र स्वीकृति प्राप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि रायगढ़ के विकास के लिए राशि की कोई कमी नहीं होगी।                 उप मुख्यमंत्री  साव ने कहा कि शहर की जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने शहर के विकास के लिए चार अतिरिक्त कार्यों की घोषणा की। इनमें संजय मार्केट के निर्माण एवं उन्नयन के लिए 15.67 करोड़ रुपए, रामलीला मैदान के विकास, मंच एवं पवेलियन निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपए, तालाब के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के लिए 4.99 करोड़ रुपए तथा केवड़ाबाड़ी से मरीन ड्राइव तक सनलाईजेशन कार्य के लिए 9.97 करोड़ रुपए शामिल हैं।    उप मुख्यमंत्री  साव ने कहा कि रायगढ़ में सड़क, नाली, जल निकासी, बाजार, खेल और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रायगढ़ औद्योगिक गतिविधियों के साथ अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान के लिए भी जाना जाता है। विकास कार्यों के माध्यम से शहर की सुविधाओं को बेहतर बनाते हुए रायगढ़ को विकसित और सुव्यवस्थित शहर के रूप में आगे बढ़ाना है। उन्होंने निर्माण एजेंसियों से कहा कि विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जाए और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। औद्योगिक पहचान के अनुरूप विकसित हो रहा रायगढ़ –  ओ.पी. चौधरी वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक  ओ.पी. चौधरी ने दिल्ली से वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि रायगढ़ के विकास के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में रायगढ़ नगर निगम को विभिन्न योजनाओं के तहत 384.66 करोड़ रुपए के कार्यों की स्वीकृति मिली है। वहीं लोक निर्माण विभाग के माध्यम से जिले में सड़क, भवन और पुल सहित विभिन्न कार्यों के लिए 1426 करोड़ रुपए की स्वीकृति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रायगढ़ के रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। रायगढ़-घरघोड़ा फोरलेन तथा पूंजीपथरा-तमनार फोरलेन की दिशा में भी कार्य आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा तमनार-उरगा-लैलूंगा, तमनार बाईपास, कया-कमतरा- चरखापारा-ससकोबा-बंधनपुर और कोड़ातराई-पुसौर फोरलेन सहित विभिन्न सड़क परियोजनाओं का भी उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने रायगढ़ में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, संगीत महाविद्यालय भवन और वर्किंग वूमेन हॉस्टल जैसे कार्यों की जानकारी भी दी। वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि रायगढ़ की अधोसंरचना को उसकी औद्योगिक पहचान के अनुरूप मजबूत किया जा रहा है। लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम को लोकसभा सांसद  राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद  देवेंद्र प्रताप सिंह और महापौर  जीवर्धन चौहान ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती शिखा रवींद्र गबेल, सभापति  डिग्री लाल साहू,  अरूणधर दीवान,  गुरुपाल भल्ला,  सुभाष पाण्डेय,  कांत सोमावार,  विकास केडिया,  अनुपम पाल,  जतीन साव,  अरूण कातोरे,  पवन अग्रवाल, कलेक्टर  मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  शशिमोहन सिंह, डीएफओ रायगढ़  अरविंद पीएम, जिला पंचायत सीईओ  अभिजीत बबन पठारे, नगर निगम के पार्षदगण सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

ग्वालियर बनेगा टेलीकॉम निवेश का नया केंद्र, CM यादव करेंगे निवेशकों से संवाद

बेंगलुरु में टेलीकॉम उद्योग के प्रमुख निवेशकों से संवाद करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन को निवेश का नया केंद्र बनाने की तैयारी 22 सितंबर को इन्वेस्टर्स राउंड टेबल में ग्वालियर टीएमजेड की संभावनाओं और नीतिगत सहयोग पर होगी चर्चा भोपाल  मध्यप्रदेश में टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को गति देने के लिए राज्य सरकार अब देश के प्रमुख तकनीकी केंद्र बेंगलुरु के उद्योग जगत से सीधे संवाद करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 22 सितंबर को बेंगलुरु में टेलीकॉम क्षेत्र के प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ इन्वेस्टर्स राउंड टेबल में ग्वालियर में विकसित किए जा रहे टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। ताज बेंगलुरु में होने वाले इस संवाद में मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों को ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में उपलब्ध निवेश अवसरों, राज्य की औद्योगिक नीतियों और निवेश के लिए राज्य सरकार की ओर से दिए जा रहे सहयोग की जानकारी देंगे। टेलीकॉम उपकरणों के विनिर्माण के साथ इस क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और इससे जुड़े उद्योगों के विस्तार की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। ग्वालियर में टेलीकॉम उद्योग के लिए तैयार हो रहा नया आधार इन्वेस्टर्स राउंड टेबल में ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की प्रमुख विशेषताओं और निवेशकों के लिए उपलब्ध प्रोत्साहनों का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई तथा दूरसंचार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी निवेशकों के सामने टीएमजेड से जुड़े अवसरों और नीति समर्थन की जानकारी रखेंगे। कार्यक्रम में टेलीकॉम उद्योग की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे। टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में निवेश के इच्छुक उद्योगों के साथ उनके प्रस्तावों और अपेक्षाओं पर भी चर्चा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों के प्रश्नों और सुझावों पर संवाद करते हुए मध्यप्रदेश में निवेश के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और उपलब्ध सहयोग की जानकारी देंगे। केंद्र और राज्य के समन्वय से टेलीकॉम विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा इन्वेस्टर्स राउंड टेबल में भारत सरकार के संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया भी शामिल होंगे। केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों तथा उद्योग जगत की सहभागिता से होने वाला यह संवाद ग्वालियर टीएमजेड के विकास और टेलीकॉम विनिर्माण क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा। बेंगलुरु के तकनीकी केंद्रों को भी देखेंगे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव बेंगलुरु प्रवास के दौरान टेलीकॉम और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े प्रमुख संस्थानों का अवलोकन भी करेंगे। वे क्वालकॉम के आरएंडडी सेंटर तथा सिग्नलचिप इनोवेशन और सिग्नलट्रॉन सिस्टम का दौरा करेंगे। इन केंद्रों पर अनुसंधान, नवाचार और टेलीकॉम तकनीक के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की जानकारी ली जाएगी। इसके माध्यम से बेंगलुरु के तकनीकी इकोसिस्टम और मध्यप्रदेश में विकसित किए जा रहे टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के बीच संभावित सहयोग के अवसरों को समझने का प्रयास होगा।  

पानी-सीवर लाइनों की जांच अब रोबोट से, MP में 40 रुपए प्रति मीटर खर्च

इंदौर  भागीरथपुरा में दूषित पानी की त्रासदी के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में पेयजल और सीवर नेटवर्क की स्थिति जांचने के लिए रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने प्रदेश के नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को 70 से 900 मिलीमीटर व्यास वाली पानी और सीवर पाइपलाइनों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए चेन्नई की विशेषज्ञ एजेंसी पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को सबसे कम बोली यानी L1 के आधार पर एम्पैनल किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पाइपलाइन निरीक्षण की दर 40 रुपए प्रति मीटर तय हुई है और इसके लिए एक साल का एग्रीमेंट किया गया है। भागीरथपुरा के बाद क्यों पड़ी रोबोटिक जांच की जरूरत? दिसंबर 2025 के आखिर में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से बड़े स्तर पर बीमारी फैली थी। शुरुआती सरकारी और NHRC रिकॉर्ड में दूषित पानी से मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने की पुष्टि हुई थी। NHRC ने जनवरी 2026 में मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी थी। बाद में न्यायिक जांच में 36 मौतों की जांच की गई। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक इनमें 24 मौतों को सीवर से दूषित पानी पीने से सीधे जोड़ा गया, जबकि 12 मामलों में दूषित पानी और मौत के बीच निर्णायक संबंध स्थापित नहीं हो सका। न्यायिक जांच में पाइपलाइन बदलने में देरी और शहरी जल नेटवर्क से जुड़े प्रशासनिक पहलुओं पर भी सवाल उठे हैं। इसी घटना के बाद सरकार का फोकस इस बात पर है कि प्रदेश में ऐसी पाइपलाइन क्रॉसिंग और लीकेज की पहले ही पहचान कर ली जाए, जहां सीवर का पानी पेयजल नेटवर्क को प्रभावित कर सकता है। पहले समझिए, सरकार को यह फैसला क्यों लेना पड़ा? दिसंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में इंदौर के भगीरथपुरा में दूषित पेयजल से 36 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में पीने के पानी में मानव मल से जुड़े बैक्टीरिया मिले। सीवर लाइन लीक होने से उसका पानी पेयजल लाइन में मिल गया था। अकेले भगीरथपुरा में ऐसे 260 पॉइंट्स मिले, जहां सीवर का पानी पेयजल में मिल रहा था। हादसे के बाद सरकार ने जीआईएस (GIS) प्लेटफॉर्म 'गरुड़' से पूरे प्रदेश की मैपिंग कराई। इसमें मध्य प्रदेश में 2.30 लाख से अधिक ऐसे पॉइंट्स मिले, जहां सीवर और पेयजल पाइपलाइनें एक-दूसरे को क्रॉस कर रही हैं। इनमें इंदौर में 30 हजार और भोपाल में 20 हजार से अधिक डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स हैं, जहां सीवर का पानी पेयजल में मिलने का खतरा है। दूषित पेयजल पीने से यहां 36 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में पानी में मानव मल से जुड़े बैक्टीरिया मिले थे। पता चला कि सीवर लाइन लीक होकर पेयजल लाइन में मिल रही थी। अकेले भागीरथपुरा में ऐसे 260 पॉइंट्स मिले थे। इस हादसे ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। इसी के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेने की तैयारी शुरू की। हादसे के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने जीआईएस (Geographic Information System) प्लेटफॉर्म गरुड़ से पूरे प्रदेश की मैपिंग कराई। इस मैपिंग में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। प्रदेश में 2.30 लाख से ज्यादा ऐसे पॉइंट्स मिले, जहां सीवर और पेयजल लाइनें एक दूसरे को क्रॉस कर रही हैं। इनमें से इंदौर में 30 हजार से ज्यादा डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स हैं। भोपाल में भी 20 हजार से ज्यादा ऐसे खतरनाक पॉइंट्स मिले हैं। इन जगहों पर सीवर का पानी पेयजल में मिलने का खतरा बना रहता है। अब रोबोट करेंगे जांच सरकार ने अब इन डेंजर पॉइंट्स की जांच के लिए रोबोट तकनीक अपनाने का फैसला किया है। यह जांच ट्रेंचलेस टेक्नोलॉजी से होगी। इसका मतलब है कि सड़क खोदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रोबोट को सीसीटीवी क्रॉलर सिस्टम से पाइपलाइन में उतारा जाएगा। इसे मौजूदा मैनहोल या एयर रिलीज वाल्व के जरिए भेजा जाएगा। रोबोट में हाई रिजॉल्यूशन कैमरा और सेंसर लगे होंगे। यह रोबोट करीब 300 मीटर लंबे केबल से जुड़ा रहेगा। पाइपलाइन के अंदर रोबोट लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग करेगा। साथ ही जरूरी डेटा भी दर्ज करता रहेगा। यह रोबोट 70 से 900 मिमी व्यास वाली पाइपलाइनों में काम करेगा। इसकी मदद से लीकेज, टूट फूट और अवैध कनेक्शन का पता चलेगा। इससे साफ हो जाएगा कि कहां कहां खतरा ज्यादा है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने सभी नगर निगमों को इसके निर्देश दिए हैं। नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को भी यह आदेश दिया गया है। सभी जगह इस तकनीक से जांच अनिवार्य कर दी गई है। एजेंसी को कैसे मिला काम इस काम के लिए विभाग ने टेंडर जारी किया था। इसकी अनुमानित लागत 1.50 करोड़ रुपए रखी गई थी। यह काम 365 दिन में पूरा करना तय हुआ है। टेंडर में तीन कंपनियों ने बोली लगाई। इनकी दरों में जमीन आसमान का फर्क देखने को मिला। डिजिटल सर्विलॉन्स ने 440 रुपए प्रति मीटर की दर रखी थी। फॉर्म डील ने 400 रुपए प्रति मीटर का रेट दिया था। लेकिन चेन्नई की पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज ने सिर्फ 40 रुपए प्रति मीटर की बोली लगाई। सबसे कम बोली होने के कारण इसी कंपनी को काम मिला है। कंपनी अप्रैल 2022 में रजिस्टर्ड हुई थी। इसके डायरेक्टर गणेशन और रेवती हैं। अब सभी नगरीय निकाय अपनी जरूरत के हिसाब से एस्टीमेट तैयार करेंगे। इसके बाद कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा। देश के कई राज्यों में पहले से इस्तेमाल मध्य प्रदेश में यह तकनीक पहली बार इस्तेमाल हो रही है। लेकिन देश के कई राज्यों में यह पहले से काम कर रही है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट में इसका जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 15 से ज्यादा राज्यों में रोबोटिक पाइपलाइन जांच हो रही है। इनमें तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी यह तकनीक इस्तेमाल हो रही है। इन राज्यों में चेन्नई की एक कंपनी के खास रोबोट काम कर रहे हैं। ये रोबोट हाई रिजॉल्यूशन कैमरों की मदद से जीआईएस मैपिंग करते हैं। साथ ही लीकेज की सटीक जानकारी भी देते हैं। पुराने तरीके से होती थी दिक्कत अब तक सीवर लाइनों की जांच पुराने तरीकों से होती थी। इसमें बड़े … Read more

2 साल 8 माह में बिकीं 7,650 संपत्तियां, बिक्री में 84% की बढ़ोतरी

विशेष लेख संपत्ति विक्रय में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने रचा नया कीर्तिमान 2 वर्ष 8 माह में 7,650 संपत्तियों का विक्रय, वार्षिक औसत में 84 प्रतिशत की बढ़ोतरी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पारदर्शी, सरल और हितग्राही-केंद्रित व्यवस्था को मिली नई गति 1,609.18 करोड़ रुपये की संपत्तियों का विक्रय, ओटीएस-2 से 1,584 संपत्तियों का हुआ निराकरण रायपुर,  छत्तीसगढ़ में आवासीय सुविधाओं के विस्तार और अधोसंरचना विकास को नई गति देने की दिशा में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने संपत्ति विक्रय के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा विकास कार्यों में गति, पारदर्शिता और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, विक्रय प्रक्रिया को सरल बनाने और हितग्राहियों की सुविधा को प्राथमिकता देने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। मंडल के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मात्र 2 वर्ष 8 माह की अवधि में 7,650 संपत्तियों का विक्रय किया गया है। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत लगभग 2,869 संपत्ति रहा है। यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों के प्रदर्शन की तुलना में मंडल की विक्रय क्षमता में आई उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। वर्ष 2019 से 2023 तक पांच वर्षों की अवधि में मंडल द्वारा कुल 7,793 संपत्तियों का विक्रय किया गया था। इस दौरान वार्षिक औसत लगभग 1,559 संपत्ति रहा। इसके मुकाबले वर्ष 2024 से अगस्त 2026 की वर्तमान अवधि में वार्षिक औसत बढ़कर लगभग 2,869 संपत्ति हो गया है। अर्थात पिछले पांच वर्षों की तुलना में वर्तमान अवधि में मंडल के वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय में लगभग 84 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। केवल संख्या नहीं, विक्रय मूल्य में भी बड़ी छलांग मंडल की उपलब्धि केवल संपत्तियों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि संपत्ति विक्रय से प्राप्त राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मंडल द्वारा कुल 1,609.18 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय किया गया है। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत लगभग 603 करोड़ रुपये रहा। वहीं वर्ष 2019 से 2023 तक पांच वर्षों में कुल 1,362.21 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय हुआ था। इस अवधि में वार्षिक औसत विक्रय मूल्य 272.44 करोड़ रुपये रहा। वर्तमान अवधि में यह औसत बढ़कर लगभग 603 करोड़ रुपये हो गया है। इस तरह मंडल के वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय मूल्य में पिछले पांच वर्षों की तुलना में दो गुने से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। ये आंकड़े बताते हैं कि मंडल द्वारा उपलब्ध संपत्तियों के प्रबंधन और विक्रय को लेकर अपनाई गई कार्ययोजना प्रभावी रही है। संपत्तियों के बेहतर उपयोग, मांग के अनुरूप विक्रय व्यवस्था, हितग्राहियों के लिए प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने तथा लंबित मामलों के निराकरण पर ध्यान देने से विक्रय गतिविधियों में तेजी आई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विकास और सुशासन पर जोर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ शासन की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। नागरिकों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध हों और सरकारी संस्थाओं की संपत्तियों का बेहतर उपयोग हो, इस दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गृह निर्माण मंडल की संपत्ति विक्रय में सामने आई यह वृद्धि इसी व्यापक दृष्टिकोण से जुड़ी हुई है। मंडल की संपत्तियों के प्रभावी उपयोग से एक ओर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों को आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां प्राप्त करने के अवसर मिल रहे हैं। वित्त एवं आवास मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में परिणामोन्मुख कार्यप्रणाली वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा विभागीय संस्थाओं में कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। गृह निर्माण मंडल की संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और विक्रय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए भी इसी दृष्टिकोण के अनुरूप कार्य किया जा रहा है। मंडल द्वारा उपलब्ध संपत्तियों के विक्रय में तेजी के साथ-साथ बकाया मामलों के निराकरण और हितग्राहियों को राहत देने के लिए विशेष योजनाओं को भी प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण वन टाइम सेटलमेंट-2 (ओटीएस-2) योजना है। ओटीएस-2 योजना से 1,584 संपत्तियों का निराकरण मंडल द्वारा बकाया राशि के मामलों के समाधान और संपत्तियों के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से लागू की गई वन टाइम सेटलमेंट-2 छूट योजना को भी व्यापक सफलता मिली है। योजना के अंतर्गत 1 मार्च 2025 से वर्तमान दिनांक तक 1,584 संपत्तियों का विक्रय एवं निराकरण किया गया है। इन संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 238.67 करोड़ रुपये है। ओटीएस-2 योजना के माध्यम से लंबे समय से लंबित बकाया मामलों के निराकरण का रास्ता आसान हुआ है। इससे हितग्राहियों को अपनी देनदारियों के समाधान का अवसर मिला, वहीं मंडल की संपत्तियों के प्रभावी उपयोग और वित्तीय प्रबंधन को भी मजबूती मिली है। हितग्राही-केंद्रित व्यवस्था बनी बदलाव का आधार गृह निर्माण मंडल की संपत्ति विक्रय में हुई वृद्धि के पीछे केवल अधिक संपत्तियों को बाजार में उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि हितग्राहियों की सुविधा को केंद्र में रखकर प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने का प्रयास भी महत्वपूर्ण है। आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के विक्रय में पारदर्शिता, सरलता और सुविधा पर जोर दिए जाने से नागरिकों के लिए संपत्ति खरीदने की प्रक्रिया अधिक सहज हुई है। मंडल द्वारा संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के साथ उनकी मांग, स्थान और उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए विक्रय प्रक्रिया को गति देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे मंडल की उपलब्ध संपत्तियों का उपयोग बढ़ा है और नागरिकों को अपनी आवश्यकता के अनुरूप संपत्ति प्राप्त करने के अवसर भी मिले हैं। आंकड़े बता रहे बदलाव की तस्वीर यदि पिछले पांच वर्षों और वर्तमान अवधि के प्रदर्शन की तुलना की जाए तो मंडल की उपलब्धि स्पष्ट रूप से सामने आती है। वर्ष 2019 से 2023 के दौरान जहां पांच वर्षों में 7,793 … Read more