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पेपर कप में चाय पीना है हानिकारक, IIT खड़गपुर ने किया खतरनाक माइक्रोप्लास्टिक रिसर्च में खुलासा

भोपाल  लोगों को ऐसा लगता है कि पेपर कप का हमारी सेहत पर कोई असर नहीं होता, लेकिन डॉक्टर्स ऐसा नहीं मानते. बता दें की पेपर कप्स को बनाने में मोम या प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है और जब इसमें गर्म चीज डाली जाती है, तो इसमें कैमिकल्स मिल जाते हैं. ऐसे में अगर आप भी इन कप का इस्तेमाल करते हैं, तो सावधान हो जाइए. आइए पेपर कप से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से जानते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, एक व्यक्ति जो दिन में तीन कप चाय पीता है, वह हर दिन लगभग 75,000 सूक्ष्म प्लास्टिक कण निगल रहा है। जो न केवल शरीर के लिए हानिकारक हैं, बल्कि कैंसर, हार्मोनल और नर्वस सिस्टम से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इस रिसर्च के सामने आने के बाद भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे मिट्टी (कुल्हड़), स्टील या कांच के कप का इस्तेमाल करें और अपनी सेहत को इन ‘साइलेंट टॉक्सिन्स’ से बचाएं। अब जानते हैं शोध में क्या बताया गया… हाइड्रोफोबिक फिल्म है हानिकारक– आईआईटी खड़गपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुधा गोयल और उनके शोध सहयोगी वेद प्रकाश रंजन और अनुजा जोसेफ द्वारा किए गए इस अध्ययन में यह साबित किया गया कि पेपर कप की भीतरी परत में इस्तेमाल होने वाली पतली हाइड्रोफोबिक फिल्म, जो तरल को कप में रोकने के लिए लगाई जाती है। गर्म तरल के संपर्क में आते ही टूटने लगती है। यह फिल्म पॉलीइथिलीन या अन्य को-पॉलिमर से बनी होती है और जब इसमें गर्म पानी (85–90°C) डाला जाता है, तो 15 मिनट के भीतर यह सूक्ष्म कणों में बदलकर पेय पदार्थ में घुल जाती है। गंभीर बीमारी का बनते हैं कारण- रिसर्च के अनुसार, हर 100 मिलीलीटर गर्म तरल में लगभग 25,000 माइक्रो प्लास्टिक कण मिल जाते हैं। ये इतने छोटे होते हैं कि आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन शरीर में जाकर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रिसर्च में पाया गया कि ये कण भारी धातुओं जैसे पैलेडियम, क्रोमियम और कैडमियम के वाहक के रूप में काम करते हैं। जब ये शरीर में प्रवेश करते हैं, तो वे अंगों में जमा होकर हार्मोन असंतुलन, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर और इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं। पेपर कप के नुकसान  पेपर कप बनाने में केमिकल्स और माइक्रोप्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है. ये कप गर्म चीज के संपर्क में आकर घुल जाते हैं, जिससे थायरॉइड और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है. इन कप में बिसफेनोल और बीपीए केमिकल भारी मात्रा में मौजूद होते हैं. जब इनमें गर्म चाय या कॉफी डाली जाती है, तो उसमें मौजूद केमिकल इनमें घुलने लगते हैं और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं पेपर कप न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक हैं. इन्हें डिस्पोज करना मुश्किल होता है और जलाने पर ये हार्मफुल केमिकल्स छोड़ते हैं.  पेपर कप के इस्तेमाल से एसिडिटी और पेट की अन्य समस्याएं हो सकती हैं, क्योंकि गर्म चीज के संपर्क में आने पर ये छोटे-छोटे कणों में टूटकर घुल जाते हैं. क्या करें इस्तेमाल? अगर आप इन बीमारियों से दूर रहना चाहते हैं, तो पेपर कप के इस्तेमाल से बचें. इसकी बजाय आप चीनी मिट्टी या स्टेनलेस स्टील कप को इस्तेमाल कर सकते हैं. यह न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा होगा बल्कि अपके स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होगा. पेपर कप बढ़ाता है कैंसर की संभावना एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब कोई व्यक्ति कैंसर से ग्रसित पाया जाता है तो उसका सिर्फ कोई एक कारण नहीं होता है। व्यक्ति के शरीर में मौजूद रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट आना, खराब दिनचर्या, शरीर में टाक्सीसिटी का लेवल बढ़ाना, कैंसर कॉजिंग सेल्स की तेज ग्रोथ जैसे कई फैक्टर शामिल होते हैं। पेपर कप और प्लास्टिक कब से निकलने वाला माइक्रो प्लास्टिक इन्हीं फैक्टर को बढ़ावा देते हैं। जिससे कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। भोपाल स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी आईआईटी खड़गपुर की इस रिपोर्ट के बाद भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने नागरिकों से अपील की है कि वे पेपर कप में गर्म पेय पदार्थों का सेवन बंद करें। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए घर से अपना कप साथ लाएं। इसके अलावा बाजार में मिट्टी (कुल्हड़), कांच या स्टील के कप का उपयोग करें। प्लास्टिक या पेपर लाइनिंग वाले डिस्पोजेबल कप का उपयोग न करें। भोपाल में ही रोजाना 15 लाख पेपर कप इस्तेमाल होते पेपर कप का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। भोपाल के थोक विक्रेता रविकांत द्विवेदी के अनुसार राजधानी भोपाल में ही अकेले रोजाना लगभग 15 लाख पेपर कप यूनिट की खपत होती है। यह अनुमानित आंकड़ा है। दरअसल, चाय-दुकान, फूड कोर्ट, रेलवे स्टेशन आदि में होने वाला उपयोग अधिक हो सकता है। इन कप्स में इस्तेमाल होने वाली कोटिंग में 100% पेपर नहीं ये पेपर कप पूरी तरह पेपर के नहीं होते। उनके अंदरूनी हिस्से को लीक-रोधी बनाने के लिए एक प्लास्टिक फिल्म या वैक्स कोटिंग लगाई जाती है। यह भी पाया गया कि जब गर्म पेय पेपर कप में दिया जाता है, तो इस कोटिंग से माइक्रोप्लास्टिक और अन्य रसायन निकलते हैं। अब जानिए माइक्रोप्लास्टिक हमारे शरीर में कैसे असर डालते हैं? हाल के अध्ययनों से संकेत मिलता है कि पेपर कप से माइक्रोप्लास्टिक (छोटे-छोटे प्लास्टिक कण) पेय में मिल सकते हैं। पूर्व सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव बताते हैं कि शरीर में माइक्रोप्लास्टिक जमा होने से ऑक्सीडेटिव तनाव, जीन में बदलाव, सूजन (inflammation) आदि हो सकते हैं। जिससे कैंसर, न्यूरोलॉजिकल और हारमोंस से जुड़ी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है। प्लास्टिक और फोम कप भी खतरनाक प्लास्टिक कप ये सीधे प्लास्टिक सामग्री से बने होते हैं। इनमें BPA (Bisphenol-A), PFAS और अन्य रसायन पाए जाते हैं, जो गर्म पेय आने पर निकलकर हमारे शरीर में पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक इन रसायनों के संपर्क से हार्मोनल असंतुलन, लिवर-किडनी पर असर और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। यह कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। फोम कप ये कप Styrene नामक रसायन से बनते हैं, … Read more

मध्य प्रदेश में इतिहास रचा सुनीता ने किया नक्सली सरेंडर, जानें क्यों मिली 4 लाख रुपये

बालाघाट मध्य प्रदेश में नक्सल विरोधी अभियानों के लिए यह एक बहुत बड़ी सफलता है. 33 साल में पहली बार, राज्य में किसी नक्सली ने आधिकारिक तौर पर आत्मसमर्पण किया है. 31 अक्टूबर को बालाघाट में 23 साल की नक्सली सुनीता ने हॉक फोर्स (Hawk Force) के सामने हथियार डाल दिए.यह घटना इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि आखिरी ऐसा सरेंडर साल 1992 में हुआ था, जब छत्तीसगढ़ राज्य, मध्य प्रदेश का ही हिस्सा था. नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ बनने के बाद से अब तक मध्य प्रदेश में एक भी नक्सली ने आत्मसमर्पण नहीं किया था. महिला नक्सली ने सुरक्षा बलों के सामने अपने आप को समर्पित कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया. इस आत्मसमर्पण के बदले उसे कुल 4 लाख 10 हजार रुपये का इनाम दिया गया है.इससे पहले बालाघाट की पांच महिला नक्सलियों ने आत्मसमर्पण तो किया था, लेकिन उनमें से किसी ने भी हथियार नहीं सौंपे थे. इस बड़ी कामयाबी को हॉक फोर्स की बड़ी सफलता माना जा रहा है. वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी X पर पोस्ट कर जानकारी दी है कि आत्मसमर्पण नीति के तहत यह पहला नक्सली सरेंडर है. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बालाघाट के ग्राम चोरिया में स्थापित हो रहे नए हॉक फोर्स कैंप में 22 वर्षीय महिला नक्सली सनीला उर्फ सुनीता आयाम ने आत्मसमर्पण किया. सनीला वर्ष 2024 से नक्सल संगठन के एमएमसी जोन प्रभारी और सीसी मेंबर रामदेर की हथियारबंद गार्ड के रूप में सक्रिय थी. वह मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल थी. बताया जा रहा है कि सीसी मेंबर रामदेर पर तीनों राज्यों की ओर से मिलाकर लगभग 3 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है. ऐसे में उसकी गार्ड रही सनीला का आत्मसमर्पण नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. उसने आत्मसमर्पण के समय इंसास राइफल, तीन मैगजीन में 30 जिंदा कारतूस, एक बीजीएल और अन्य सामग्री पुलिस को सौंपी. कुल मिलाकर मिला 4 लाख का इनाम आत्मसमर्पण नीति के तहत, सुनीता को तुरंत 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई. इसके अलावा, इंसास राइफल के लिए साढ़े तीन लाख रुपये और तीन मैगजीन के लिए दस हजार रुपये का इनाम दिया गया है. इस तरह कुल मिलाकर उसे 4 लाख 10 हजार रुपये का इनाम मिला है. समाज के विकास में योगदान देना चाहती है पुलिस ने बताया कि सुनीता के पिता भी पहले छत्तीसगढ़ में नक्सल संगठन से जुड़े थे, जिन्होंने हाल ही में सितंबर 2025 में आत्मसमर्पण किया था. पूछताछ के दौरान सुनीता ने बताया कि वह राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहती थी. उसने यह भी कहा कि जंगलों में हिंसा और भय का जीवन छोड़कर अब वह समाज के विकास में योगदान देना चाहती है. इसके साथ ही सुनीता का कहना है कि वह अपने पिछले कल में लौटना नहीं चाहती न हीं उसे दोहराना. और भी नक्सली कर सकते हैं आत्मसमर्पण हॉक फोर्स के डीएसपी अखिलेश गौर ने महिला नक्सली से पूछताछ की जिसमें उसने बताया कि उसने कुछ हथियार जंगल में छिपा रखे हैं. इसके बाद सेनानी शियाज के नेतृत्व में सहायक सेनानी अखिलेश गौर और रूपेंद्र धुर्वे की टीम ने गोपनीय सर्च ऑपरेशन चलाकर जंगल से छिपाए गए हथियार बरामद कर लिए. इस प्रकार यह आत्मसमर्पण अभियान पूर्णतः सफल रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि सुनीता के सरेंडर के बाद बालाघाट क्षेत्र में सक्रिय अन्य नक्सली भी आने वाले दिनों में आत्मसमर्पण कर सकते हैं. इस सफलता के बाद पुलिस महानिरीक्षक संजय सिंह और पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने हॉक फोर्स की सराहना की और टीम को इनाम देने की घोषणा की. सीएम मोहन यादव ने किया एक्स पर पोस्ट इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अपने एक्स पर पोस्ट करते हुए इस आत्मसमर्पण की प्रशंसा की. उन्होंने लिखा- प्रभावी आत्मसमर्पण नीति के तहत पहला नक्सली सरेंडर है. यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राज्य नक्सल नियंत्रण के लक्ष्य की ओर अग्रसर है. मध्य प्रदेश पुलिस को नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण में लगातार सफलता मिल रही है. 1 नवंबर को बालाघाट जिले के लांजी थाने अंतर्गत चोरिया कैंप में 14 लाख की इनामी महिला नक्सली सुनीता ने हथियारों सहित आत्मसमर्पण किया. यह प्रदेश की प्रभावी आत्मसमर्पण नीति के तहत पहला समर्पण है. पूर्व में भी नक्सलियों के समर्पण और मुठभेड़ों में पुलिस को सफलता मिलती रही है. साल 2022 में जुड़ी थी माओवादी संगठनों से हॉक फोर्स के डीएसपी अखिलेश गौर ने बताया कि सशस्त्र हार्डकोर की 22 वर्षीय महिला नक्सली छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के गोमवेटा भैरमगढ की रहने वाली है. उसका नाम सलीना उर्फ सुनीता पिता बिसरु ओयाम है. यह महिला नक्सली एसीएम के पद पर रहते हुए सेंट्रल कमेटी के प्रमुख सदस्य सीसीएम रामदेर नक्सली की सुरक्षा गार्ड रह चुकी है. जो वर्ष 2022 में माओवादी संगठनों से जुड़ी थी, जिसने माड़ क्षेत्र में 06 महीने का प्रशिक्षण लिया और फिर सेंट्रल कमेटी के सदस्य रामदेर के सुरक्षा गार्ड के रूप में माड़ क्षेत्र में काम करना शुरू किया. ऐसे पहुंची आत्मसमर्पण के लिए सुनीता सुनीता, रामदेर की 11 सदस्यी टीम के साथ एमएमसी जोन दर्रेकसा क्षेत्र पहुंची जहां जीआरबी डिवीजन में सक्रिय थी और मलाजखंड दर्रेकसा दल में एसीएम के पद पर थी, जिस पर कुल 14 लाख का ईनाम घोषित था. सुनीता इंसास राइफल, विंडोरी बैग, पिट्ठू बैग और वर्दी के साथ दलम से अलग होकर निकल गई. इसके बाद उसने जंगल में इंसास राइफल, विंडोरी बैग, पिट्ठू बैग और वर्दी को डंप में छिपाया, फिर आत्मसमर्पण करने के उद्देश्य से पुलिस कैंप चौरिया पहुंची.

पहले चरण की वोटिंग से पहले सियासी संग्राम थमा! Bihar Election 2025 में तेजस्वी-खेसारी के बीच मुकाबला रोचक

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पहले चरण में 6 नवंबर को होने वाले मतदान के लिए आज चुनाव प्रचार खत्म हो गया। पहले चरण में राज्य के कुल 121 विधानसभा सीटों पर मतदान होने वाले हैं। इसके लिए चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी कर ली है। पहले चरण के चुनाव प्रचार के आखिरी दिन सभी दलों ने जनता को अपने पक्ष में वोट करने के लिए अपील किया। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुख्य मुकाबला दो मुख्य गठबंधनों, एनडीए और महागठबंधन के बीच माना जा रहा है लेकिन प्रशांत किशोर की जन सुराज ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। एनडीए में जहां भाजपा, जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। वहीं महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस, वीआईपी, भाकपा, भाकपा-माले और माकपा साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं।    पहले चरण के प्रमुख विधानसभा क्षेत्र पहले चरण के लिए लिए अगर प्रमुख विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो तारापुर में उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (भाजपा) और राजद के अरुण कुमार के बीच के मुकाबले पर सबकी नजर रहेगी। वहीं इस चरण पूरे बिहार नजर  राजद के पारंपरिक गढ़ राघोपुर पर रहने वाली है। यहां से महागठबंधन के सीएम कैंडिडेट तेजस्वी यादव का मुकाबला भाजपा के सतीश कुमार यादव से होने वाला है।  इसके अलावा महुआ विधानसभा सीट पर भी सबकी निगाहें रहने वाली है। यहां मुख्य मुकाबला लालू यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के तेज प्रताप यादव और मुकेश कुमार रौशन के बीच माना जा रहा है। महुआ में तेजस्वी की रैली ने इस सीट पर परिवार की लड़ाई और तेज कर दी है। साथ ही अलीनगर और छपरा सीट पर सबकी नजरें रहने वाली है। अलीनगर से भाजपा की मैथिली ठाकुर तो छपरा से खेसारी लाल यादव चुनावी मैदान में हैं। पहले चरण के प्रमुख उम्मीदवार बिहार चुनाव के पहले चरण में कई दिग्गजों के किस्मत का फैसला होने वाला है। जिसमें  राजद नेता तेजस्वी यादव से लेकर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा का नाम शामिल है। इसके अलावा लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा नाम भी शामिल है। साथ ही भोजपुरी के ट्रेंडिंग स्टार खेसारी लाल यादव और मैथिली ठाकुर के भाग्य का फैसला भी पहले चरण में ही होने वाला है। चुनाव आयोग के आंकड़ों को देखें तो पहले चरण में कुल 1,314 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।   

‘ग्राम 2026’: राजस्थान की खेती को स्मार्ट बनाने की सबसे बड़ी पहल शुरू

जयपुर शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी श्री राजन विशाल की अध्यक्षता में मंगलवार को पंत कृषि भवन के सभा कक्ष में ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट 2026 की अंतर विभागीय कोर ग्रुप और FICCI अधिकारियों के साथ बैठक का आयोजन किया गया।  बैठक में ग्राम 2026 के लिए संबंधित विभागों द्वारा नोडल अधिकारी नियुक्त करने, कार्यात्मक समितियों का गठन, समितियों के अधिकारियों का विभागवार नामांकन, अन्य विभागों की भूमिका और जिम्मेदारियों, विभागीय प्रदर्शनियों, सेमिनारों एवं बैठकों की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।  शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी ने बताया कि सभी विभाग ग्राम 2026 के आयोजन में अपनी अपनी जिम्मेदारियों को पूर्ण सतर्कता से समय पर पूरा करें एवं कार्यक्रम में आने वाले किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े। राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट 2026 का आयोजन भव्य रूप से जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर जेईसीसी सीतापुरा, जयपुर में किया जा रहा है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और निवेशकों को एक सांझा मंच पर ला कर कृषि क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी की प्रगति और निवेश को प्रोत्साहित करना है। शासन सचिव ने बताया कि ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट में प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों से 50 हजार किसान भाग लेंगे।  ग्राम 2026 में ग्रामीण एवं कृषि क्षेत्र में नवीन तकनीकी आधारित कृषि प्रणाली, मूल्य संवर्धन और निर्यातोन्मुख उत्पादन को बढ़ावा देना है इसके तहत किसानों को नवीनतम कृषि उपकरणों, फसल प्रबंधन और कृषि विपणन से संबंधित संपूर्ण जानकारियां साझा की जायेगी। राजस्थान के लिए कृषि क्षेत्र में उपयोगी विश्व स्तरीय तकनीकी हस्तानांतरण हेतु विदेशों में रोड शो आयोजित किये जायेंगे। 'किसान सशक्तीकरण ही ग्रामीण विकास की पूंजी है'। इसी ध्येय के साथ ग्राम एग्रीटेक मीट के माध्यम से राज्य सरकार खेती को व्यावसायिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने, कृषि निर्यात बढ़ाने और ग्रामीण युवाओं को कृषि उद्यमिता की ओर प्रेरित करने के लिए एक ठोस पहल है।  बैठक में आयुक्त कृषि एवं उद्यानिकी सुश्री चिन्मयी गोपाल, निदेशक जल गृहण विकास एवं भू-जल संरक्षण विभाग श्री मुहम्मद जुनैद पीपी, प्रबंध निदेशक राजस्थान राज्य बीज निगम लिमिटेड श्री अरविंद शर्मा, अतिरिक्त निदेशक कृषि (अनुसंधान) श्री अजय कुमार पचौरी सहित संबंध विभागों एवं FICCI के अधिकारी मौजूद रहे।

केशव मौर्य बोले: 2047 तक मोदी-योगी की जोड़ी अटूट, पीएम-सीएम की सीटें फुल!

मुजफ्फरपुर  उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को महागठबंधन को निशाने पर लिया। उन्होंने दावा किया कि 2047 तक प्रधानमंत्री और बिहार में मुख्यमंत्री पद के लिए कोई वैकेंसी नहीं है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में हम देश की सेवा कर रहे हैं और बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम कर रहे हैं। इसलिए महागठबंधन अब ख्वाब देखना छोड़ दे। आईएएनएस से बातचीत में यूपी के डिप्टी सीएम ने कहा कि 14 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम आएंगे। एनडीए भारी बहुमत से फिर एक बार सरकार बनाएगा और नीतीश कुमार ही हमारे मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने तेजस्वी यादव के सीएम पद की शपथ लेने वाले बयान पर पलटवार किया और कहा कि सपने देखना अच्छी बात है, लेकिन यह सपने पूरे नहीं होंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि तेजस्वी यादव यही कहते रहते हैं कि बिहार की जनता उन्हें सीएम बनाना चाहती है। लेकिन 2020 में जो माहौल था, वह 2025 में आधा भी नहीं है। किस बलबूते जीतेंगे? मौर्य ने दावा किया कि 14 नवंबर को परिणाम आएंगे और नीतीश कुमार फिर मुख्यमंत्री बनेंगे। पहले चरण के मतदान से पहले अंतिम दिन चुनावी प्रचार को लेकर मौर्य ने दावा किया कि 6 नवंबर को पहले चरण के मतदान में एनडीए भारी अंतर से जीतेगा। महागठबंधन, राजद, कांग्रेस और कंपनी को करारी हार का सामना करना पड़ेगा, मुझे इसका पूरा विश्वास है। उन्होंने कहा कि समाज का हर वर्ग, चाहे गरीब हो या अमीर, किसान हो या नौजवान, महिला हो या पुरुष, गांव का निवासी हो या शहर का, सबका समर्थन एनडीए उम्मीदवारों के साथ है। पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार पर बिहार की जनता का अटूट भरोसा है। यही भरोसा जीत में बदल जाएगा। विकसित बिहार के विजन पर बोलते हुए मौर्य ने कहा कि विकसित बिहार बनाने, पलायन रोकने, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए एनडीए सरकार फिर से काम करेगी। बता दें कि पहले चरण की सीटों पर 6 नवंबर को मतदान होना है। 11 नवंबर को दूसरे चरण के लिए वोटिंग है और 14 नवंबर को चुनावी परिणाम घोषित किए जाएंगे।

दिल्ली सरकार सख्त: प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों और फैक्ट्रियों पर होगी ताबड़तोड़ कार्रवाई

नई दिल्ली  दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। उन्होंने प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। सीएम रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए दिल्ली सरकार ने ठोस और निर्णायक कदम उठाए हैं। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों और औद्योगिक इकाइयों पर सख्त कार्रवाई जारी है। कूड़ा जलाने की घटनाओं पर पूर्ण रोक के लिए विशेष निगरानी टीमें तैनात हैं और नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माने के साथ कठोर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि हॉटस्पॉट क्षेत्रों में वॉटर स्प्रिंकलिंग, धूल नियंत्रण और सड़क सफाई के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। सभी विभाग एकजुट होकर समन्वित प्रयास कर रहे हैं। दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त एक्शन प्लान बनाए हैं। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अतिरिक्त टीमों की तैनाती की गई है। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों एवं इंडस्ट्रीज पर सख्त कार्रवाई होगी। कूड़ा जलाने पर कड़ी निगरानी एवं जुर्माना लगेगा। हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर लगातार वॉटर स्प्रिंकलिंग और प्रदूषण नियंत्रण के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ साझा प्रयास जरूरी है। बता दें कि एक दिन पहले राजधानी में प्रदूषण की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को दिल्ली सचिवालय में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी। बैठक में मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों से प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए लगातार चल रहे उपायों पर बातचीत की और कहा कि अब अन्य उपाय भी किए जाने जरूरी हैं ताकि प्रदूषण नियंत्रण में तो आए ही, साथ ही उसमें बढ़ोतरी भी न हो सके। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को कई निर्देश जारी किए और कहा कि इन्हें तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। मुख्यमंत्री ने अफसरों को सख्त चेतावनी दी है कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर कहीं भी लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली को प्रदूषण से बचाना हमारी प्राथमिकता है और इसके लिए लगातार गंभीर व प्रभावी उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के लिए कई टीमों का गठन कर दिया गया है। इसके अलावा प्रदूषण के ‘हॉट स्पॉट’ को सामान्य बनाने के लिए लगातार अभियान चल रहा है।

भारत निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के 16 नगर पालिक निगम के आयुक्तों को बनाया अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 का देखेंगे कार्य भोपाल भारत निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के 16 नगर पालिक निगम आयुक्तों को अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी बनाया है। इस संबंध में आयोग द्वारा निर्देश भी जारी किए गए हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री संजीव कुमार झा ने बताया कि प्रदेश की 16 नगर पालिक निगम भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, मुरैना, रीवा, सतना, सिंगरौली, सागर, उज्जैन, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, रतलाम, कटनी और छिंदवाड़ा के आयुक्त को विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 की अवधि के लिए अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी बनाया गया है। श्री झा ने बताया कि प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 का कार्य शुरू हो गया है। ऐसे में अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी बनाए गए नगर पालिक निगम के आयुक्त एसआईआर में सहयोग करेंगे। उनकी नियुक्ति पदाधिकारी लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 13CC के अंतर्गत की गई है। 

ताजमहल में बाल विदुषी ने किया शिव तांडव पाठ, वायरल वीडियो पर मचा बवाल

आगरा विश्व धरोहर ताजमहल एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वायरल हो रहा है। जिसमें एक बाल विदुषी को ताजमहल के अंदर ‘शिव तांडव स्तोत्र’ का पाठ करते हुए नजर आ रही है। वहीं, वीडियो के वायरल होने के बाद ताजमहल की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई लोग इसे असली इतिहास का संदेश बताते हुए समर्थन कर रहे हैं, वहीं कुछ इसे विरासत स्थल के नियमों की अनदेखी मान रहे हैं। बॉलीवुड फिल्म द ताज स्टोरी के समर्थन में बाल विदुषी लक्ष्मी ने यह वीडियो बनाया है। जिसमें वह कहते हुए नजर आ रही है, ‘ताजमहल नहीं, तेजोमहालय है।’ वीडियो के वायरल होने के बाद एएसआई (Archaeological Survey of India) के अधिकारियों में भी हलचल है। ताजमहल परिसर में धार्मिक गतिविधि को लेकर सुरक्षा और नियमों की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल एएसआई ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि वीडियो कब और कैसे शूट किया गया। मेटा पर शेयर किया वीडियो बाल विदुषी लक्ष्मी ने युवती ने मेटा (फेसबुक) पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, ‘आप सभी लोग ज़्यादा से ज़्यादा फिल्म द ताज स्टोरी देखें और अपने इतिहास को जाने वर्तमान में जो ताजमहल है वो तेजोमहालय था, जिसकी सच्चाई सामने एक दिन ज़रूर आएगी बीते दिनों अपने जन्मदिन के अवसर पर जीवन में प्रथम बार मैं ताजमहल तेजोमहालय गई थी स्वास्थ्य खराब होने की वजह से ये वीडियो अपलोड नहीं कर पाई, अब मेरी आप सभी से यह अपील है कि इस फिल्म को ज़्यादा से ज्यादा देखें और हिट करवाएं!’ हिंदू संगठनों ने युवती का किया समर्थन ताजमहल के अंदर शिव तांडव पाठ को लेकर हिंदूवादी संगठनों, संत-साधु और धार्मिक नेताओं ने बाल विदुषी के समर्थन में किया है। वीडियो जारी करते हुए कई प्रमुख संतों ने इसे सनातन संस्कृति के जागरण की शुरुआत बताया है। महंत मोहिनी बिहारी शरण जी महाराज सहित कई संतों ने बाल विदुषी लक्ष्मी की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘एक नाबालिग बालिका ने भारत की असली पहचान को दुनिया के सामने रखा है।’ वहीं कुंवर अजय तोमर ने कहा, ‘बाल विदुषी ने सच्चाई का बिगुल बजाया है, अब इतिहास को छिपाया नहीं जा सकेगा।’

फेरे खत्म होते ही दूल्हे ने किया कुछ ऐसा कि सोशल मीडिया पर हो गया वायरल!

फतेहाबाद दहेज प्रथा के खिलाफ फतेहाबाद के रतिया उपमंडल में एक अनोखी और प्रेरणादायक मिसाल पेश की गई। यहां एक विवाह ऐसा हुआ, जिसमें दहेज नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सादगी का संदेश दिया गया। रतिया के एमिनेंट पर्सन, सीएम विंडो सदस्य, भाजपा जिला कार्यकारिणी सदस्य एवं धानक समाज उत्थान सभा हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील इन्दौरा ने अपनी बेटी अंजना रानी का विवाह यमुनानगर निवासी कमल सिंह खटक, पुत्र ईश्वर सिंह खटक के साथ सादगीपूर्ण रीति से संपन्न कराया। दहेज में मांगे सिर्फ एक रुपया और पांच पौधे शादी के दौरान जब दहेज की बात आई तो लड़के पक्ष ने कहा कि उन्हें दहेज में केवल एक रुपया और पांच पेड़-पौधे चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक यह परंपरा निभाई नहीं जाएगी, शादी संपन्न नहीं की जाएगी। इसके बाद दोनों परिवारों ने मिलकर पीपल, बरगद, नीम, अमरूद और अंजीर के पौधों को दहेज के प्रतीक रूप में ग्रहण किया। यह दृश्य उपस्थित लोगों के लिए प्रेरणादायक रहा। सादगी से हुई शादी, समाज को दिया संदेश  कमल सिंह खटक एमटेक डिग्रीधारक हैं और हनीवेल कंपनी में इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि अंजना रानी एमसीए हैं। शादी रतिया में पूर्ण सादगी के साथ सम्पन्न हुई, जिसमें कन्यादान मात्र एक रुपया और पांच पौधों के साथ किया गया। सुनील इन्दौरा ने कहा कि समाज को रूढ़िवादी परंपराओं से मुक्त कराने के लिए ऐसे उदाहरण अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि जब तक लड़के वाले दहेज लेना बंद नहीं करेंगे, तब तक दहेज प्रथा खत्म नहीं हो सकती। समाज में परिवर्तन लाने के लिए हमें खुद से शुरुआत करनी होगी।

मध्यप्रदेश की ग्रामीण सड़कों के रख-रखाव पर दें ध्यान : मंत्री पटेल

पहले चरण में निर्मित समस्त सड़कों में बने रपटे आवागमन के लिए हों बारहमासी मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की कार्यकारिणी समिति की हुई बैठक भोपाल  मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के तहत बनी प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़कों के रख रखाव पर प्राधिकरण पूरा ध्यान दे। योजना के पहले चरण में निर्मित समस्त सड़कों में बने रपटे में बारहमासी आवागमन सुनिश्चित रहे। यह निर्देश पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने मंगलवार को मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण समिति की 26वीं बैठक में दिये। बैठक में अपर मुख्य सचिव ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण श्री दीपक आर्य सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री श्री पटेल ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत निर्मित सड़कों के संधारण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभाग के इंजीनियर्स को गुणवत्तापूर्ण कार्यों के लिए मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क अकादमी में प्रशिक्षित भी किया जाए। नवीन तकनीक के उपयोग से उन्‍हें अवगत कराया जाए। बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत निर्मित सड़कों के संधारण का दायित्व प्राधिकरण को सौंपा गया है। प्राधिकरण द्वारा अब तक 88 हजार 517 किलोमीटर लंबाई के 25 हजार 331 मार्गों का निर्माण किया जा चुका है। प्राधिकरण द्वारा अभी तक कुल 66 हजार 292 किलोमीटर बिटुमिन नवीनीकरण किया गया है। इनमें से लगभग 15 हज़ार 900 किलोमीटर लंबाई का नवीनीकरण वेस्ट प्लास्टिक तकनीकी का उपयोग करते हुए किया गया है। संधारण के अंतर्गत स्व सहायता समूहों द्वारा 14 ज़िलों के 114 मार्गों पर संधारण कार्य किया जा रहा है। ख़ास बात यह है कि ऐसे 115 स्व-सहायता समूह में 1270 महिलाएँ भी कार्य कर रही है। बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री मजरा टोला सड़क योजना अंतर्गत सड़क सम्पर्कता प्रदान करने के लिए लगभग 30 हजार 900 किलोमीटर मार्ग निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसकी लागत 21 हजार 630 करोड़ रुपये है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क के चतुर्थ चरण का कार्य दिसंबर 2024 से प्रारंभ हुआ है। इसमें 868 सड़कों का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। इनकी कुल लंबाई 1849 किलोमीटर और लागत 1545 करोड़ रुपये है। इन सड़कों के बनने से ग्रामीण क्षेत्र की 878 बसाहटें लाभान्वित होंगी। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में भारी वाहनों के आवागमन से क्षतिग्रस्त सड़कों के उन्नयन पर ध्यान दिया जाए।