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नवाचार की मिसाल: पीएम श्री स्कूल की छात्रा ने तैयार किया मल्टीपर्पज एआई रोबोट, बनेगा पढ़ाई का स्मार्ट सहायक

पिथौरा तकनीकी युग में जहां इंसान की निर्भरता मशीनों पर बढ़ती जा रही है, वहीं पिथौरा की प्रतिभावान छात्रा सृष्टि यदु ने अपने कौशल और जिज्ञासा से ऐसा अभिनव कार्य किया है जिसने क्षेत्र का गौरव बढ़ा दिया है। पीएम श्री विद्यालय पिथौरा की कक्षा 12वीं की छात्रा सृष्टि यदु ने अपने प्रभारी शिक्षक गौरव चंद्राकर के मार्गदर्शन में मल्टीपर्पज एआई रोबोट का निर्माण किया है। यह रोबोट एक साथ कई कार्य करने में सक्षम है। वॉइस कंट्रोल सिस्टम से संचालित यह रोबोट मौसम की जानकारी, गैस लीकेज की चेतावनी, बीपी और ऑक्सीजन लेवल की जांच जैसी सुविधाओं के साथ छात्रों को गणित, अंग्रेजी और अन्य विषयों से संबंधित प्रश्नों के उत्तर भी देता है। इसके अलावा यह शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, यातायात और कृषि से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। रायपुर संभाग में प्राप्त की प्रथम स्थान इस एआई रोबोट को हाल ही में राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद रायपुर एवं छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आयोजित रायपुर संभाग स्तरीय विज्ञान मेले जो शासकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय रायपुर में दिनांक 30 अक्टूबर को विज्ञान मेले प्रतियोगिता में प्रदर्शित किया गया था। जहां इस रोबोटिक मॉडल को पूरे संभाग स्तर पर उभरती हुई प्रौद्योगिकी विषय पर प्रथम स्थान दिया गया। अब सृष्टि यदु 10 से 13 नवंबर को आयोजित राज्य स्तरीय विज्ञान मेला में अपने इस प्रोजेक्ट का प्रदर्शन करेंगी। जहां इनका मॉडल उत्कृष्ट रहने पर राष्ट्रीय स्तर पर चयनित किया जाएगा। अद्भुत कार्य की हुई सराहना विज्ञान मेला के दौरान उपस्थित प्रोफेसर एम.एल. नायक वैज्ञानिक पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ने कहा कि हमारे समय में आईआईटी स्तर पर भी इस तरह की रोबोटिक्स तकनीक नहीं थी, लेकिन आज स्कूल स्तर पर ऐसे प्रयोग देखकर गर्व होता है। बच्चों और शिक्षकों ने मिलकर अद्भुत कार्य किया है, ऐसे बच्चे ही भविष्य में विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी खोजें करेंगे। मार्गदर्शक शिक्षक गौरव चंद्राकर का है अहम सहयोग सृष्टि यदु के साथ इस प्रोजेक्ट में विद्यालय के प्राचार्य एम.डी. प्रधान, व्याख्याता लखपति पटेल, मोनिका साहू एवं मॉडल निर्माण विशेष मार्गदर्शक गौरव चंद्राकर का महत्वपूर्ण योगदान रहा। गौरव चंद्राकर ने बताया कि रोबोट आर्डयूनो प्रोग्रामिंग सेंसर सिस्टम पर आधारित है, जो मोबाइल के ब्लूटूथ और एक विशेष ऐप से कनेक्ट होकर निर्देश प्राप्त करता है। कमांड मिलते ही यह रोबोट तय मार्ग पर चलता है और निर्धारित स्थान पर रुककर आवश्यक कार्य करता है। गौरव चंद्राकर ने आगे बताया कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। आने वाले समय में इस तकनीक को और मॉडिफाई करके ऐसे रोबोट तैयार किए जाएंगे जो शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि और मौसम पूर्वानुमान जैसे क्षेत्रों में उपयोगी साबित होंगे। छात्रा सृष्टि यदु ने बताया कि उन्होंने यह प्रोजेक्ट बनाने के लिए महीनों तक लगातार मेहनत की। स्कूल की प्रयोगशाला में सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने शिक्षकों और मार्गदर्शक की मदद से रोबोट को तैयार किया। सृष्टि का कहना है कि शुरुआत में कई बार तकनीकी दिक्कतें आईं, लेकिन हर बार असफलता से सीखकर उन्होंने अपने मॉडल को और बेहतर बनाया। उनका लक्ष्य आगे चलकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में शोध करना है। पिथौरा जैसे छोटे कस्बे से निकलकर इस स्तर की तकनीक विकसित करने वाली सृष्टि यदु अब क्षेत्र के अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। तथा जिला के साथ ही रायपुर संभाग में यह माडल चर्चा का विषय बन गया है।विद्यालय के प्राचार्य एम.डी. प्रधान ने कहा कि हमारे विद्यालय के लिए यह गौरव का विषय है कि हमारी छात्रा राज्य स्तर तक पहुँची है। सृष्टि जैसी प्रतिभाशाली छात्राओं को देखकर यह विश्वास और मजबूत होता है कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी आधुनिक तकनीकी क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर सकते हैं। इस उपलब्धि के लिए 2 नवंबर को आयोजित जिला स्तरीय 25 वां राज्योउत्सव कार्यक्रम मिनी स्टेडियम महासमुंद में अपने रोबोटिक मॉडल का प्रदर्शन बाल वैज्ञानिक सृष्टि यदु करेगी। संभाग स्तरीय विज्ञान मेले में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर बाल वैज्ञानिक सृष्टि यदु और उनके प्रभारी शिक्षकों को विजय लहरे जिला शिक्षा अधिकारी, रेखराज शर्मा डीएमसी महासमुंद, सम्पा बोस एटीसी, जिला नोडल प्रभारी जगदीश सिन्हा, हेमेंद्र आचार्य, लक्ष्मी चौधरी विकासखंड शिक्षा अधिकारी पिथौरा, नरेश पटेल बीआरसी पिथौरा, सीमा गौरव चंद्राकर संस्कार शिक्षण संस्थान संचालिका पिथौरा सहित पीएमश्री विद्यालय पिथौरा के शिक्षक शिक्षिकाओं ने बधाई दी है।  

मोकामा में राजनीति बनाम अपराध का मुकाबला, अनंत सिंह-दुलारचंद यादव की पुरानी अदावत फिर चर्चा में

पटना  बिहार का मोकामा विधानसभा क्षेत्र सुर्खियों में हैं। यहां गुरुवार दोपहर जन सुराज और जेडीयू समर्थकों के बीच हुई हिंसक झड़प में 75 साल के दुलारचंद यादव की मौत हो गई। दुलारचंद अलग-अलग समय में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और मोकामा के बाहुबली नेता अनंत सिंह तीनों के करीबी रह चुके थे। ताजा घटना उस समय हुई जब जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी और जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह के काफिले तरतार गांव के बसावनचक मोड़ पर आमने-सामने आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले पथराव हुआ और फिर गोलियां चलीं। इस दौरान दुलारचंद को गोली लगी और बाद में उन्हें वाहन ने कुचल दिया। करीब एक दर्जन लोग घायल हुए।   चुनाव आयोग ने घटना पर रिपोर्ट तलब की है। पुलिस ने चार एफआईआर दर्ज की हैं। उनमें से एक अनंत सिंह के खिलाफ दुलारचंद के परिजनों ने दर्ज कराई है, जबकि दूसरी एफआईआर अनंत समर्थकों ने जन सुराज कार्यकर्ताओं पर कराई है। मोकामा की राजनीति लंबे समय से अपराध, जाति और बाहुबल के संगम के लिए कुख्यात रही है। यह इलाका भूमिहार बाहुबलियों का गढ़ माना जाता है। दुलारचंद यादव इस क्षेत्र के कुछ गिने-चुने गैर-भूमिहार नेताओं में थे। उनके खिलाफ 1991 से लेकर 2010 तक 11 आपराधिक मामले दर्ज थे। उनमें हत्या, अपहरण, रंगदारी और अवैध हथियारों के मामले शामिल हैं। उनका नाम कांग्रेस कार्यकर्ता सीताराम सिंह की हत्या में आया था। उनके साथ आरोपी अनंत सिंह के भाई दिलीप सिंह और नीतीश कुमार भी थे। नीतीश और दुलारचंद को बाद में बरी कर दिया गया और जेडीयू सुप्रीमो और CM के खिलाफ केस को पटना हाई कोर्ट ने 2019 में खत्म कर दिया। दूसरी ओर अनंत सिंह, जिन्हें ‘छोटे सरकार’ कहा जाता है, 2005 से अब तक इस सीट पर प्रभाव बनाए हुए हैं। उनके खिलाफ 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। 2019 में यूएपीए मामले में उन्हें 10 साल की सजा हुई थी, हालांकि 2024 में पटना हाई कोर्ट ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया। 2015 में अनंत सिंह को किडनैपिंग और मर्डर के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी पुलिस के एक बड़े छापे के बाद हुई थी जिसमें 500 पुलिसकर्मी और दंगा रोकने वाली गाड़ियां शामिल थीं। बताया गया कि वहां से हथियार, बुलेटप्रूफ जैकेट और खून से सने कपड़े बरामद हुए थे। अब आरजेडी ने इस सीट से सुरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को उम्मीदवार बनाया है। सुरजभान भी भूमिहार समुदाय से हैं और उन पर भी 26 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, हालांकि वे फिलहाल चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित हैं। माना जा रहा है कि दुलारचंद और अनंत सिंह के बीच तनाव तब बढ़ा जब दुलारचंद ने इस बार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का साथ दे दिया था।  

मध्य प्रदेश का विकास रिकॉर्ड: 70 साल में आय 584 गुना, आबादी में पौने तीन गुना वृद्धि

भोपाल  राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के आधार पर मध्य प्रदेश का जन्म हुआ था। जनसंख्या, कृषि, उद्योग आदि विकास के मापदंडों की समीक्षा के बाद 1956 में इस नए राज्य का गठन किया गया था। निर्माण के बाद लगातार प्रदेश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से अलग होकर नया राज्य बनाना गया। इसके बाद भी मध्य प्रदेश क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का दूसरा बड़ा राज्य है। एक नवंबर को मध्य प्रदेश अपनी स्थापना का 70वां वर्ष मना रहा है। पांच वर्ष बाद यह अपने जन्म की 75वीं जयंती यानि हीरक जयंती मनाएगा। 70वें स्थापना दिवस पर प्रदेश के विकास का आकलन करें तो पाते हैं राज्य की प्रति व्यक्ति आय में 584 गुना बढ़ोतरी हुई तो आबादी में 2.78 गुना बढ़ोतरी हुई है। राज्य पुनर्गठन आयोग और मध्य प्रदेश आजादी के बाद 29 दिसंबर 1953 को भारत के राज्यों के पुनर्गठन के लिए जस्टिस सैयद फैसल अली की अध्यक्षता और हृदयनाथ कुंजरू, वल्लभ माधव पणिकर की सदस्यता में एक आयोग गठित हुआ था। इस आयोग ने 30 सितंबर 1955 को अपनी सिफारिश केंद्र सरकार को प्रस्तुत की थी। राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश द्वारा की गई अनुशंसाओं को अमल में लाने के लिए लोकसभा में 18 अप्रैल 1956 को संविधान में नवम संशोधन विधेयक पेश हुआ और अक्तूबर में राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद 1 नवंबर 1956 को यह पूर्ण रूप से अधिनियम बना। आयोग की सिफारिशों के आधार पर सेंट्रल प्रोविजंस एंड बरार में शामिल मराठी भाषी जिले महाराष्ट्र में शामिल हो गए और 43 जिलों के साथ नए मध्य प्रदेश का गठन किया गया। क्या कहा था नए प्रदेश के गठन के वक्त राज्य पुनर्गठन आयोग ने अपने प्रतिवेदन में नए मध्य प्रदेश के संबंध में तर्क दिया था कि यह बहुत ही समृद्ध कृषि वाला राज्य होगा, क्योंकि यहां गेहूं, चावल पैदा करने वाला संपूर्ण क्षेत्र इसमें शामिल है। हालांकि, वर्ष 2000 में चावल का कटोरा कहलाने वाला क्षेत्र छत्तीसगढ़ एक अलग राज्य के रूप में गठित हो गया।   पं. रविशंकर शुक्ल थे पहले सीएम 1956 की 31 अक्तूबर और 1 नवंबर की मध्य रात्रि को नए मध्य प्रदेश का गठन हुआ तब प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल ने अपने संदेश में नए मध्य प्रदेश को राष्ट्र के लिए शक्ति का अविरल स्त्रोत बताते हुए कहा था कि 'ऊपर लहलहाते खेत और नीचे भूमि रत्नगर्भा है'। वहीं, उनके बाद सीएम बने कैलाशनाथ काटजू ने कहा था प्रकृति ने इस भू-भाग के निवासियों को पुरस्कृत करने में अत्यंत उदारता से काम लिया है। मप्र शक्ति का अविरल स्रोत बना आज प्रदेश की स्थापना के 70 वर्ष पूर्ण होने के बाद यह आकलन किया जाए कि क्या मध्य प्रदेश राष्ट्र के लिए शक्ति का अविरल स्रोत बन सका? क्या प्रकृति की अत्यंत उदारता प्रदेश के निवासियों को पुरस्कृत कर सकी? प्रदेश ने आर्थिक विकास की रफ्तार और प्रगति की राह को चुना और प्रगति के नए सोपान तय किए हैं। प्रति व्यक्ति आय 261 रुपये से बढ़कर 1.52 लाख हुई मध्य प्रदेश ने बीते 70 वर्षों में कितनी प्रगति की है, इसकी झलक प्रदेश के नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय से मिलती है। 1956 में मध्य प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 261 रुपये थी, जो वर्तमान में 1.52 लाख रुपये है। राज्य की प्रगति के साथ प्रदेश के नागरिकों के जीवन स्तर में भी वृद्धि हुई है। तीसरा सबसे ज्यादा गेहूं उत्पादक राज्य कृषि के क्षेत्र में प्रदेश ने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं, देश के किसी भी राज्य को लगातार सात बार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त नहीं हुए यह खिताब मध्य प्रदेश ने हासिल किया है। गेहूं की पैदावार में मध्य प्रदेश देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल है। दलहन उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। कपास उत्पादन में देश में प्रदेश का पांचवा स्थान है। जाहिर है कृषि क्षेत्र में प्रदेश ने काफी उन्नति की है। सवा सात करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदेश में उप स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिलाकर 3,08,252 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसमें से 93,000 वर्ग किलोमीटर इलाका जनजाति क्षेत्र में है। ग्रामीण क्षेत्र 309505.59 वर्ग किलोमीटर है, शहरी क्षेत्र में 7746 वर्ग किलोमीटर है, इस प्रकार 97.49 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार है। इस तरह प्रदेश की 7.26 करोड़ जनसंख्या तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं। बजट बढ़कर कई गुना हुआ वर्ष 2000-2001 राज्य का बजट 1,06,393 करोड़ रुपये का था, जो वर्ष 2024-25 में 3,26,383 करोड़ रुपये का अनुमानित है। राज्य में वर्तमान में 8586 शाखाओं के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं प्रदान की जा रही है। जो 33 प्रतिशत ग्रामीण और 67 प्रतिशत नगरीय क्षेत्रों में है। इसके अतिरिक्त 38 जिला सहकारी बैंक 4536 प्राथमिक कृषि ऋण समिति भी कार्यरत है। निवेश के नए द्वार खुले उद्योग, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन जैसे कई क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने प्रगति की है। प्रदेश में निवेश के नए द्वार खोले हैं और नई सुविधाएं मुहैया करवाने की घोषणाए की हैं। प्रदेश में रोजगार पर्याप्त उपलब्ध करवाया जा रहा है। प्रदेश के युवकों को रोजगार मिले इसके लिए प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया गया, प्रदेश में निवेश के लिए इंवेस्टर समिट का लगातार आयोजन किया जा रहा है। इससे उद्योगों को उचित सुविधा देकर प्रदेश में आमंत्रित किया जा रहा है। परिवहन के क्षेत्र में प्रदेश ने नए आयाम स्थापित किए हैं। मध्य प्रदेश के गठन से आज तक की स्थिति एक नजर में… क्रमांक विवरण वर्ष 1956 वर्ष 2025 1 क्षेत्रफल (वर्ग किमी) 4,43,452 3,08,000 2 जिले (संख्या) 43 55 3 संभाग (संख्या) 8 10 4 प्रतिव्यक्ति आय (रुपये में) 261 1,52,615 5 जनसंख्या 2,60,71,637 7,26,26,809 (2011 जनगणना के अनुसार अनुमानित 2025) 6 साक्षरता प्रतिशत (%) 16.83 69.32 7 शिक्षण संस्थाएं (संख्या) 22,800 79,215 8 विश्वविद्यालय (संख्या) 1 16 9 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (संख्या) 100 1,440 10 स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय (करोड़ रुपये में) 10 15,744 11 सड़कें (कुल लंबाई किमी में) 28,173 80,875 12 रेलमार्ग (किमी में) 4,891 5,188 13 वन क्षेत्र (वर्ग किमी) 1,56,386 (छत्तीसगढ़ का भाग शामिल) 85,724 14 सिंचित कृषि क्षेत्र (लाख हेक्टेयर में) 8.24 55 15 प्रदेश का … Read more

पीएम मोदी पहुंचे सत्य साईं संजीवनी हॉस्पिटल, बाल हृदय रोगियों से की खास मुलाकात

रायपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रायपुर के एक दिवसीय दौरे पर हैं. एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद वे श्री सत्य साईं संजीवनी चाइल्ड हार्ट हॉस्पिटल पहुंचे. यहां वे “दिल की बात” कार्यक्रम में करी शिरकत. इस दौरान हृदय रोग का सफल ऑपरेशन करा चुके करीब 2500 बच्चों के साथ संवाद किया . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रायपुर पहुंचने से पहले सोशल मीडिया एक्स पर प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की बधाई दी है. उन्होंने पोस्ट करते हुए लिखा कि “छत्तीसगढ़ के अपने सभी भाई-बहनों को राज्य के स्थापना दिवस की 25वीं वर्षगांठ की अनेकानेक शुभकामनाएं. प्रकृति और संस्कृति को समर्पित यह प्रदेश आज प्रगति के नित-नए मानदंड गढ़ने में जुटा है. कभी नक्सलवाद से प्रभावित रहे यहां के कई इलाके आज विकास की प्रतिस्पर्धा कर रहे. मुझे भरोसा है कि यहां के मेहनती और हुनरमंद लोगों की लगन और उद्यम से हमारा यह राज्य विकसित भारत के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा. दोपहर में प्रधानमंत्री आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का उद्घाटन कर उसका भ्रमण करेंगे. इसके बाद वे नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव समारोह का शुभारंभ करेंगे. राज्योत्सव के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री शाम 4:20 बजे रायपुर हवाई अड्डे के लिए रवाना होंगे और 4:25 बजे विमान से दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे. छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक दिन छत्तीसगढ़ राज्य के लिए आज का दिन ऐतिहासिक महत्व रखता है. साल 2000 में इसी दिन यह राज्य मध्यप्रदेश से अलग होकर अस्तित्व में आया था. इस वर्ष राज्य स्थापना दिवस का उत्साह कई गुना बढ़ गया है, क्योंकि छत्तीसगढ़ अपने गौरवशाली 25 वर्ष पूरे कर चुका है. इस खास अवसर पर राज्योत्सव मैदान में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बॉलीवुड से लेकर स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समा बांधेंगे. पांच दिनों तक यह उत्सव पूरे जोश और उमंग के साथ मनाया जाएगा.

अब रोज़ मिलेगा कुछ नया! पंजाब के स्कूलों में मिड डे मील का मेन्यू बदला, बच्चे हुए खुश

लुधियाना पंजाब सरकार ने प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन के साप्ताहिक मेन्यू में बड़ा बदलाव किया है। नया मेन्यू 1 नवंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। सरकार का कहना है कि यह बदलाव बच्चों के पोषण स्तर को बेहतर करने और भोजन को अधिक स्वास्थ्यवर्धक बनाने के उद्देश्य से किया गया है। शिक्षा विभाग के नए निर्देश शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेशों के अनुसार सभी स्कूलों में भोजन बच्चों को लाइन में बैठाकर परोसा जाएगा। इसकी पूरी ज़िम्मेदारी मिड-डे मील इंचार्ज की होगी। सभी स्कूलों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार ही खाना तैयार करना होगा। सरकार ने साफ कहा है कि यदि किसी स्कूल में इन निर्देशों की अनदेखी या लापरवाही पाई जाती है तो उसकी ज़िम्मेदारी संबंधित स्कूल प्रबंधन की होगी। नया मिड-डे मील मेन्यू (1 से 30 नवंबर तक) दिन                   मेन्यू सोमवार            दाल और रोटी मंगलवार           राजमा-चावल और मौसमी फल   बुधवार             काले-सफेद चने (आलू के साथ) और पूरी/रोटी गुरुवार           कढ़ी (आलू और प्याज़ के पकौड़े के साथ) और चावल शुक्रवार          मौसमी सब्ज़ी के साथ रोटी शनिवार          साबुत मांह की दाल के साथ चावल और खीर सरकार का कहना है कि इस नए मेन्यू से बच्चों को संतुलित आहार, प्रोटीन, और विटामिन्स की पर्याप्त मात्रा मिलेगी। साथ ही, स्कूलों में भोजन वितरण की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर भी सख्त निगरानी रखी जाएगी।  

अफीम तस्करी पर ईडी का शिकंजा, चार राज्यों में एक साथ कार्रवाई

जयपुर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अंतरराज्यीय ड्रग रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए शनिवार को राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA)-2002 के तहत चंडीगढ़ जोनल ऑफिस द्वारा की गई। ईडी ने इस ऑपरेशन में गोपाल लाल अंजना (चित्तौड़गढ़, राजस्थान), छिंदरपाल सिंह उर्फ केवल (हरियाणा), उनके भतीजे यादविंदर सिंह और अन्य आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दी। तलाशी के दौरान एजेंसी को आपत्तिजनक दस्तावेज, संपत्ति रिकॉर्ड, और करोड़ों रुपये की कीमत वाली दो आवासीय संपत्तियों व कई कृषि भूमि के प्लॉट मिले, जिन्हें जब्त कर लिया गया। जांच में खुलासा हुआ कि यह नेटवर्क अवैध अफीम व्यापार से अर्जित धन को वैध दिखाने (ब्लैक मनी रूटिंग) का काम करता था। ईडी का दावा है कि जब्त संपत्तियां “अपराध की आय” हैं, जो मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित की गईं। यह कार्रवाई हरियाणा पुलिस की एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई, जिसमें गोपाल अंजना, छिंदरपाल, यादविंदर, भोला सिंह और हरजीत सिंह के खिलाफ चार्जशीट दायर है। एजेंसी की जांच में पता चला कि गोपाल अंजना ने अपने परिवार को मिले वैध अफीम लाइसेंस का दुरुपयोग कर अवैध अफीम सप्लाई चेन बनाई। छिंदरपाल और यादविंदर ने उससे अफीम खरीदी और आगे भोला सिंह, जसमीत सिंह और हरजीत सिंह को बेची। ईडी अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क कई वर्षों से सक्रिय था। छिंदरपाल सिंह पहले भी एनडीपीएस एक्ट की धारा 17 और 18 के तहत दोषी ठहराया जा चुका है। अब ईडी इस पूरे रैकेट की मनी ट्रेल और अंतरराज्यीय फंडिंग चैनल्स की जांच कर रही है।  

बच्चों से लेकर रोमियो तक, 5 लाख फर्जी कॉल्स ने 108 एम्बुलेंस की सेवा बाधित की, FIR प्रक्रिया शुरू

भोपाल  भोपाल समेत पूरे मध्यप्रदेश में आपातकाली 108 एम्बुलेंस सेवा को लोगों ने मजाक बना दिया है. पिछले छह महीनों में 5.72 लाख से ज्यादा फर्जी कॉल्स आने से न केवल कॉल सेंटर का स्टाफ परेशान है, बल्कि करीब 1500 घंटे की एम्बुलेंस सेवा भी बर्बाद हो गई है. कई कॉलर गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप, अकेलापन या मस्ती के लिए एम्बुलेंस सेवा पर फोन करते हैं. इन फर्जी कॉल्स की वजह से जरूरमतमंद मरीजों को कई बार समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल पाती है. अब इन फर्जी कॉलर्स पर एक्शन लेने की तैयारी की जा रही है.  एम्बुलेंस बुलाकर समय खराब किया भोपाल के कोलार रोड इलाके में गुरुवार को एक व्यक्ति पर एम्बुलेंस सेवा पर कॉल किया और कहा कि उसकी तबीयत खराब है. एम्बुलेंस 15 मिनट में घर पहुंची, लेकिन वहां कोई बीमार नहीं मिला. जब ईएमटी ने कॉलर को फोन किया तो उसने कहा कि अब सब ठीक है, इसकी जरूरत नहीं. करीब 30 मिनट बर्बाद हो गए. इस तरह के सैकड़ों कॉल हर रोज आते हैं. इन फर्जी कॉल से निपटने की तैयारी की जा रही है. जय अंबे हेल्थकेयर के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि अब ऐसे कॉलर्स पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी.  जय अंबे हेल्थकेयर के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने मीडिया बताया कि अब ऐसे कॉलर्स पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इन कॉल्स के कारण कई बार जरूरतमंद मरीजों को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल पाती। 108 सेवा आपातकालीन है। इसे मजाक या टाइमपास के लिए इस्तेमाल करना अपराध है। जानकारी के अनुसार गुरुवार को भोपाल के कोलार रोड से एक व्यक्ति ने 108 पर कॉल किया कि उसकी तबीयत बहुत खराब है। एम्बुलेंस 15 मिनट में घर पहुंची, लेकिन न कोई बीमार मिला, न परिवारजन। जब ईएमटी ने कॉलर को फोन किया तो उसने कहा अब सब ठीक है, जरूरत नहीं। करीब 30 मिनट ऐसे ही बर्बाद हो गए। यह अकेला मामला नहीं, ऐसे हजारों कॉल रोज आते हैं। कॉल सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ कॉलर्स तो 150 से 200 बार बिना वजह फोन करते हैं। इनमें बच्चे, नशे में धुत युवक और रोमियो टाइप लोग शामिल हैं। कुछ कॉलर्स तो कॉल सेंटर में बैठी महिला स्टाफ से बातचीत करने या उन्हें परेशान करने के लिए बार-बार कॉल करते हैं। इन कॉलर्स के नंबर ट्रैक कर भविष्य में सीधा कानूनी एक्शन लिया जाएगा। इसके लिए कंपनी एक स्टडी कर रही है, जिससे इनकी पहचान की जा सके। 108 कॉल सेंटर की हर लाइन कुछ सेकेंड के लिए व्यस्त होती है। एक झूठे कॉलर के कारण असली मरीज की कॉल मिस हो जाती है। औसतन हर दिन एम्बुलेंस को 50-60 किलोमीटर तक झूठी सूचनाओं के चलते दौड़ लगानी पड़ती है। तरुण सिंह परिहार के मुताबिक, “एक झूठी कॉल किसी जरूरतमंद की मौत की वजह बन सकती है। क्योंकि जब तक हमारी एम्बुलेंस वापस लौटती है, किसी और को मदद की ज़रूरत पड़ जाती है।" पहले बुलाई एम्बुलेंस फिर कहा अब जरूरत नहीं गुरुवार को कोलार रोड के एक व्यक्ति ने 108 पर कॉल किया कि उसकी तबीयत बहुत खराब है। एम्बुलेंस 15 मिनट में घर पहुंची, लेकिन न कोई बीमार मिला, न परिवारजन। जब ईएमटी ने कॉलर को फोन किया तो उसने कहा अब सब ठीक है, जरूरत नहीं। करीब 30 मिनट ऐसे ही बर्बाद हो गए। यह अकेला मामला नहीं, ऐसे सैकड़ों कॉल रोज आते हैं। फर्जी कॉलर्स की पहचान के लिए हो रही स्टडी कॉल सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ कॉलर्स तो 150 से 200 बार बिना वजह फोन करते हैं। इनमें बच्चे, नशे में धुत युवक और रोमियो टाइप लोग शामिल हैं। कुछ कॉलर्स तो कॉल सेंटर में बैठी महिला स्टाफ से बातचीत करने या उन्हें परेशान करने के लिए बार-बार कॉल करते हैं। इन कॉलर्स के नंबर ट्रैक कर भविष्य में सीधा कानूनी एक्शन लिया जाएगा। इसके लिए कंपनी एक स्टडी कर रही है, जिससे इनकी पहचान की जा सके। कैसे फर्जी कॉल्स बिगाड़ रहे सिस्टम 108 कॉल सेंटर की हर लाइन कुछ सेकेंड के लिए व्यस्त होती है। एक झूठे कॉलर के कारण असली मरीज की कॉल मिस हो जाती है। औसतन हर दिन एम्बुलेंस को 50-60 किलोमीटर तक झूठी सूचनाओं के चलते दौड़ लगानी पड़ती है। तरुण सिंह परिहार के मुताबिक, “एक झूठी कॉल किसी जरूरतमंद की मौत की वजह बन सकती है। क्योंकि जब तक हमारी एम्बुलेंस वापस लौटती है, किसी और को मदद की ज़रूरत पड़ जाती है।”

बिहार चुनावी माहौल में गूंजा ‘मोदी-मोदी’, PM के वीडियो ने मचाया धमाल

मुजफ्फरपुर बिहार विधानसभा चुनाव के माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुजफ्फरपुर यात्रा ने नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है. शुक्रवार को जब पीएम मोदी का हेलिकॉप्टर मुजफ्फरपुर में उतरा, तो हजारों समर्थकों की भीड़ 'मोदी, मोदी' के नारों से गूंज उठी. तपती दोपहर में उमस भरे माहौल के बीच प्रधानमंत्री ने अपनी पहचान बन चुके मधुबनी प्रिंट वाले गमछे को लहराकर लोगों का अभिवादन किया. इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. करीब 30 सेकंड तक प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए गमछा लहराया और भीड़ की ओर हाथ हिलाते रहे. इसके बाद वे अपनी अगली जनसभा के लिए छपरा रवाना हो गए. यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी को बिहार में इस तरह गमछा लहराते देखा गया हो. अगस्त में भी उन्होंने औंटा-सिमरिया पुल का उद्घाटन करने के बाद इसी अंदाज में समर्थकों का अभिवादन किया था. पीएम मोदी की परंपरा रही है कि वे स्वतंत्रता दिवस जैसे मौकों पर भी पारंपरिक परिधानों, पगड़ियों और गमछों के ज़रिए स्थानीय संस्कृति को सम्मान देते हैं. गमछे के पीछे का संदेश राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में पीएम मोदी का गमछा लहराना एक प्रतीकात्मक संदेश है. बिहार और बंगाल जैसे गर्म और आर्द्र राज्यों में गमछा आम आदमी, खासकर किसानों और मजदूर वर्ग की पहचान माना जाता है. यह सिर्फ पसीना पोंछने का कपड़ा नहीं, बल्कि मेहनतकश वर्ग की जीवनशैली का हिस्सा है. खेतों में काम या रोजमर्रा के कामों में काम में आता है गमछा गमछा सिर पर बांधकर धूप से बचाव, खेतों में काम या रोजमर्रा के कामों में काम आता है. इसी कारण राजनीतिक दलों ने इसे जनसंपर्क के प्रतीक के रूप में अपनाया है. पीएम मोदी का गमछा लहराना उसी वर्ग से जुड़ाव का संदेश देता है – यह बताने के लिए कि वे किसानों और श्रमिकों के साथ खड़े हैं. आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, बिहार की करीब 53.2% आबादी कृषि क्षेत्र से जुड़ी है. इसके अलावा बड़ी संख्या में भूमिहीन मजदूर और प्रवासी कामगार हैं जो चुनावी समीकरणों को निर्णायक रूप से प्रभावित करते हैं.  

अब एडवांस पेमेंट जरूरी! MP में सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों के आवासों की बिजली कट सकती है

भोपाल मंत्रियों के बंगले हों या सरकारी कार्यालय, यदि बिजली चाहिए तो अग्रिम भुगतान करना होगा। प्रदेश के सरकारी भवनों में अब प्री पेड मीटर लगाने पर बिजली तभी मिलेगी जब अग्रिम भुगतान कर रिचार्ज करवाया जाएगा। इसके लिए वल्लभ भवन मंत्रालय से लेकर तहसील स्तरीय सरकारी कार्यालयों तक में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय से मिले दिशा-निर्देशों के अनुपालन में यह कार्य किया जा रहा है। पारदर्शी बिलिंग, मीटर रीडिंग प्रणाली में सुधार और सटीक ऊर्जा लेखांकन के लिए केंद्र सरकार की आरडीएसएस (पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना) अंतर्गत स्मार्ट मीटर लगाने के कार्य किए जा रहे हैं।   वितरण कंपनियों द्वारा संभाग, जिला व ब्लाक मुख्यालयों के शासकीय कार्यालयों में भी स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। योजनांतर्गत प्रदेश में 45,191 शासकीय कार्यालयों के विद्युत कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिसमें से 18,177 कनेक्शनों पर प्रीपेड बिलिंग की सुविधा शुरू हो गई है। वल्लभ भवन, सतपुड़ा और विंध्याचल भवन के अलावा प्रीपेड स्मार्ट मीटर मंत्रियों के बंगलों में भी लगेंगे। 10 हजार रुपये का एक प्रीपेड स्मार्ट मीटर है। प्रदेश में कुल 55 लाख मीटर लगाए जाएंगे। इनमें घरेलू उपभोक्ता भी शामिल हैं। इस कार्य पर मप्र में 15 हजार करोड़ रुपये व्यय होंगे। इन प्रीपेड स्मार्ट मीटर से बिजली लेने के लिए मोबाइल की तरह पहले रिचार्ज करना होगा उसके बाद ही विद्युत सप्लाई मिलेगी।        मप्र में कुल 413 नगर निकाय हैं। यहां छह -छह माह से विद्युत बिल भुगतान लंबित रहता है।     कई बार तो साल भर का विद्युत बिल भुगतान न होने पर विद्युत वितरण कंपनियों को निकायों को नोटिस जारी करना पड़ता है।     निकायों को विद्युत बिल भुगतान के लिए चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि दी जाती है, लेकिन समय पर राशि न मिलने से कई बार बिल भुगतान लंबित रहता है।     निकायों के अलावा पंचायतों की भी यही स्थिति हैं। अब अगर समय पर बिल भुगतान नहीं किया तो विद्युत प्रवाह रोक दिया जाएगा।     नगरीय विकास एवं आवास विभाग, महिला बाल विकास विभाग एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का लगभग 800 करोड़ रुपये का बकाया है।     अन्य विभागों को मिलाकर कुल शासकीय विभाग का 1300 करोड़ रुपये का बिल भुगतान बकाया है।

BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल की मांग—दिल्ली का नाम बदला जाए, हो ‘इंद्रप्रस्थ’

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली को महाभारत कालीन नाम 'इंद्रप्रस्थ' से नवाजने की मांग तेज हो गई है। चांदनी चौक से बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर दिल्ली का नाम 'इंद्रप्रस्थ' करने का सुझाव दिया है। पत्र में उन्होंने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के आधार पर यह प्रस्ताव रखा, जिसमें महाभारत के पांडव काल से जुड़े प्रमाणों का उल्लेख किया गया है।  खंडेलवाल ने पत्र में कहा कि दिल्ली का वर्तमान नाम 'दिल्ली' मुगल काल से जुड़ा है, जबकि इसका प्राचीन नाम 'इंद्रप्रस्थ' है, जो पांडवों द्वारा स्थापित राजधानी के रूप में जाना जाता है। उन्होंने चार सुझाव दिए हैं..     दिल्ली का नाम 'इंद्रप्रस्थ' रखा जाए।     पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम 'इंद्रप्रस्थ जंक्शन' हो।     दिल्ली में मौजूदा हवाई अड्डे को 'इंद्रप्रस्थ एयरपोर्ट' नाम दिया जाए।     दिल्ली के प्रमुख स्थलों पर पांडवों की प्रतिमाएं लगाई जाएं। महाभारत की विरासत से जोड़ने की अपील खंडेलवाल ने पत्र में महाभारत के सन्दर्भों का हवाला देते हुए कहा कि इंद्रप्रस्थ (लगभग 3000 ईसा पूर्व) पांडवों की राजधानी थी, जो पुरातात्विक साक्ष्यों से सिद्ध है। उन्होंने मुगल प्रभाव वाले नामों को हटाने की वकालत की, ताकि शहर की 5000 वर्ष पुरानी हिंदू सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित किया जा सके। यह मांग कोई नई नहीं है। हाल ही में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने भी दिल्ली सरकार को इसी तरह का पत्र लिखा था, जिसमें इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलने की बात कही गई। 2021 में डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी और क्षत्रिय महासभा ने भी ऐसी मांगें उठाई थीं। हालांकि, विपक्षी दलों ने ऐसी पहलों को 'राजनीतिक स्टंट' बताकर खारिज किया है।