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फैशन डिजाइनिंग आधारित स्टार्टअप प्रशिक्षण 30 अक्टूबर से

28 तक कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन भोपाल मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकास्ट) द्वारा युवाओं को फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में स्टार्टअप, उद्योग, और स्वरोजगार स्थापित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। छह सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम 30 अक्टूबर से महिला पॉलीटेक्निक के सहयोग से भोपाल में निःशुल्क होगा। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रवर्तित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षणार्थियों को फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में उपयुक्त प्रोजेक्ट का चयन करने और उसे सफलतापूर्वक संचालित करने में सक्षम बनाना है। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को सैद्धांतिक और व्यवहारिक ज्ञान प्रदान किया जाएगा जिससे वे अपने स्टार्टअप को प्रभावी ढंग से शुरू और संचालित कर सकें। प्रशिक्षण में विभिन्न विषयों पर सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक जानकारी भी दी जाएगी। प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए आवेदक की योग्यता विज्ञान या इंजीनियरिंग में स्नातक, पॉलीटेक्निक डिप्लोमा या पीजीडीसीए होना अनिवार्य है। आवेदक की अधिकतम आयु 35 वर्ष निर्धारित की गई है।महिलाओं को आयु में विशेष छूट दी जाएगी। इच्छुक युवक और युवतियां 28 अक्टूबर तक मेपकास्ट की आधिकारिक वेबसाइट www.mpcost.gov.in पर उपलब्ध आवेदन पत्र के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। प्रशिक्षण से संबंधित किसी भी स्पष्टीकरण या अतिरिक्त जानकारी के लिए इच्छुक व्यक्ति मोबाइल नंबर 9926923001 पर संपर्क कर सकते हैं।प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं के लिए फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में अपने करियर को नई दिशा देने और स्वरोजगार के अवसरों को तलाशने का अवसर प्रदान करेगा।  

अंबाला स्टेशन पर छठ पूजा स्पेशल सर्विस: यात्रियों के लिए इंतजाम पूरी तरह तैयार

अंबाला  छठ पूजा के अवसर पर यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए अंबाला रेल प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। अंबाला रेल मंडल ने विशेष रूप से अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई अतिरिक्त इंतजाम किए हैं।रेल मंडल प्रबंधक विनोद भाटिया ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि त्योहार के दौरान ट्रेनों में भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए ट्रेन को तीन मिनट तक का अतिरिक्त ठहराव दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की प्रतीक्षा कर रहे यात्रियों के लिए टेंट की व्यवस्था की गई है ताकि उन्हें धूप या अन्य असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके अलावा प्लेटफॉर्म पर 150 अतिरिक्त बेंच भी लगाई गई हैं ताकि यात्रियों को बैठने में परेशानी न हो। डीआरएम भाटिया ने बताया कि छठ पर्व पर घर लौट रहे यात्रियों की सुविधा के लिए तीन स्पेशल ट्रेनें चंडीगढ़ से चलायी गई हैं, जो बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश जाने वाले यात्रियों को आसानी से गंतव्य तक पहुंचाएंगी। इनमें चंडीगढ़–कटिहार और चंडीगढ़–पटना के बीच विशेष ट्रेनें शामिल हैं। इसके अलावा पटियाला से भी आज शाम एक विशेष ट्रेन रवाना की जाएगी। उन्होंने बताया कि फिरोजपुर मंडल से भी कुछ विशेष गाड़ियां चलाई गई हैं, जिनकी सूची अंबाला रेल मंडल को प्राप्त हो चुकी है। इन ट्रेनों में भी यात्री आसानी से अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। रेल प्रबंधक ने यात्रियों से अपील की कि वे भीड़ के दौरान अफरा-तफरी न मचाएं और रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा कि “अंबाला रेल मंडल कई दिनों से छठ पर्व की तैयारियों में जुटा हुआ था और अब सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं।” रेल प्रशासन ने कहा कि वह यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और सुचारु आवागमन सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार और सतर्क है।

मध्यप्रदेश में महिला नेतृत्व के स्टार्टअप 47 प्रतिशत तक बढ़े

विशेष समाचार विनिर्माण इकाइयों की संख्या 4 लाख 26 हजार पहुंची महिला नेतृत्व के स्टार्टअप 47 प्रतिशत तक बढ़े एमएसएमई सेक्टर जीडीपी में दे रहा 30% का योगदान भोपाल मध्यप्रदेश में निवेश मित्र नीतियों और उद्योग समर्थित प्रावधानों के परिणाम स्वरूप पिछले तीन वर्षों में विनिर्माण इकाइयों की संख्या बढ़कर 4,26,230 तक पहुंच गई है। वर्ष 2022-23 में 67332 विनिर्माण एमएसएमई पंजीकृत हुई थी 2023-24 में 89,317 और 2024-25 में 1,13,696 हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में विनिर्माण क्षेत्र में नई इकाइयों की स्थापना को हर प्रकार से प्रोत्साहित कर रहे है। प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की संख्या भी बढ़ रही है। वर्तमान में प्रदेश में 20.43 लाख एमएसएमई इकाइयाँ है। इसमें 20.22 लाख सूक्ष्म उद्यम है, 19508 लघु उद्योग और 1178 मध्यम उद्यम हैं। एमएसएमई सेक्टर में 21% विनिर्माण श्रेणी की, 29% सेवा श्रेणी और 50% व्यवसाय श्रेणी की इकाइयां हैं। इस प्रकार एमएसएमई सेक्टर राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में 30% का योगदान दे रहा है। इस क्षेत्र में लगभग 66 हजार करोड रुपए से अधिक का निवेश वर्तमान में है। इनमें एक करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। बढ़ते स्टार्टअप मध्यप्रदेश की स्टार्टअप नीति के परिणामस्वरूप अब अधिमान्य स्टार्टअप की संख्या 6000 से अधिक हो गई है। इनमें से लगभग 2900 यानी 47% स्टार्टअप महिला उद्यमियों के हैं। इसके अलावा कुल इनक्यूबेटर की संख्या 100 से ज्यादा है। स्पष्ट है कि प्रदेश में स्टार्टअप परिस्थिति तंत्र में बहुत तेजी से सुधार हो रहा है। प्रदेश में स्मार्ट सिटी इनक्यूबेटर 7, अटल इनक्यूबेटर सेंटर 4, टेक्नोलॉजी बिजनेस इंटर इनक्यूबेटर दो, एक एपेरल इनक्यूबेटर ग्वालियर में, दो एग्री इनक्यूबेटर सेंटर ग्वालियर और जबलपुर में, तीन सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ग्वालियर, भोपाल और इंदौर में स्थापित है। RAMP (Raising and Accelerating MSME Performance) योजनांतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में इन्‍क्‍यूबेशन सेंटर स्‍थापित करने की योजना है। इनमें से 7 जिलों नर्मदापुरम्, विदिशा, हरदा, राजगढ़, रायसेन, अशोकनगर एवं भोपाल में एमएसएमई इन्‍नोवेशन-सह-इन्‍क्‍यूबेशन सेंटर की स्‍थापना की स्‍वीकृति प्रदान की गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विजन है कि स्टार्ट-अप को अधिक से अधिक प्रोत्साहन दें जिससे भारत के युवा नौकरी देने वाले बनें। मध्यप्रदेश में इस सोच को मूर्त रूप देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्टार्टअप अधोसंरचना को मजबूत बनाकर कार्य कर रहे हैं। नई स्टार्ट-अप नीति बन जाने से प्रदेश ग्लोबल स्टार्ट-अप हब बनने की ओर बढ़ रहा है। भविष्य में युवा उद्यमियों को ग्लोबल मंच मिलेगा और लाखों रोजगार सृजित होंगे। स्टार्टअप ईको सिस्टम राज्य की आर्थिक प्रगति और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। मध्यप्रदेश स्टार्टअप सीड फंड सहायता तथा 100 करोड़ रुपए का कैपिटल फंड स्टार्टअप्स के युवा उद्यमियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रारंभिक पूंजी की व्यवस्था करना होती है। इस बाधा को दूर करने के लिए प्रदेश के नए स्टार्टअप्स के लिये 30 लाख रुपये तक का सीड फंड अनुदान तथा 100 करोड़ रुपए के कैपिटल फंड का मध्यप्रदेश स्टार्टअप नीति 2025 में प्रावधान किया गया है। यह कोष उभरते स्टार्ट-अप्स को उनके शुरुआती चरणों में वित्तीय सहायता प्रदान करेगा तथा उन्हें अपने व्यापार को आगे बढ़ाने में सहायता प्रदान करेगा। इससे वे अपने स्टार्टअप का विस्तार कर सकेंगे साथ ही विस्तार की चुनौतियों का सामना कर सकेंगे। मेगा इनक्यूबेशन सेंटर और नवाचार को बढ़ावा राज्य में मेगा इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किया जाएगा, जिसके सेटेलाइट सेंटर प्रदेश के अन्य उपयुक्त स्थानों में स्थापित किए जायेंगे। इनसे स्टार्टअप्स को आवश्यक संसाधन, मार्गदर्शन और ग्लोबल बाजार तक पहुंचने में मदद मिलेगी। बौद्धिक संपदा सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। इसके लिये घरेलू पेटेंट के लिए 5 लाख रुपये और अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट के लिए 20 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इससे स्टार्टअप्स को नवाचार करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बने रहने में मदद मिलेगी। महिला उद्यमिता को बढ़ावा नई नीति के अनुसार राज्य में 47% महिला-नेतृत्व वाले स्टार्ट-अप्स है तथा प्रदेश के स्टार्टअप ईकोसिस्टसम में महिलाओं का योगदान बढ़-चढ़ कर आ रहा है। महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश स्टार्टअप नीति में महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को विशेष सहायता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। स्टार्टअप परिचालन हेतु वित्तीय सहायता स्टार्ट-अप्स संचालन के खर्चों को कम करने के लिए किराया सहायता योजना भी लागू की गई है। स्टार्ट-अप्स को 50 प्रतिशत तक किराया भत्ता अधिकतम 10 हजार रुपए प्रति माह दिया जाएगा। साथ ही प्रोटोटाइप डेवलपमेंट, ऑनलाइन विज्ञापन आदि हेतु भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। नये क्षेत्रों में स्टार्ट-अप्स को प्राथमिकता नीति में कृषि, फूड प्रोसेसिंग, डीप टेक, बॉयोटेक और नवीनतम तकनीकों के क्षेत्र में स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। इससे राज्य में विविध और सशक्त स्टार्ट-अप ईको सिस्टम विकसित होगा, जिससे प्रदेश के आर्थिक विकास में सहायता मिलेगी। एंटरप्रेन्योर-इन-रेजिडेंस ईआईआर प्रोग्राम और कौशल विकास सहायता राज्य में स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित करने के लिए एंटरप्रेन्योर-इन-रेजिडेंस ईआईआर प्रोग्राम लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत नए स्टार्टअप्स को 10 हजार रुपए प्रति माह (अधिकतम एक वर्ष के लिए) की वित्तीय सहायता दी जाती है। स्टार्ट-अप एडवाइजरी कॉउंसिल और ऑन लाइन पोर्टल नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने और क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग के लिए "स्टार्ट-अप एडवाइजरी काउंसिल" का गठन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसके साथ ही स्टार्ट-अप्स के लिए एक समर्पित ऑन लाइन पोर्टल और हेल्प लाइन भी बनाई गई है। इससे उन्हें वित्तीय सहायता, सरकारी योजनाओं और अन्य संसाधनों की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। मध्यप्रदेश स्टार्टअप नीति में उत्पाद आधारित स्टार्टअप के लिए विशेष पैकेज की व्यवस्था है। इसके अलावा वित्तीय सहायता, पेटेंट, लीज रेंट, ईआईआर और आयोजनों में सहभागिता के लिए भी सहायता का प्रावधान है। मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर में एक समर्पित टीम कार्य कर रही है। राज्य स्टार्टअप पोर्टल को स्टार्टअप इंडिया पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है और वित्तीय सहायता के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई है।  

इंदौर-खंडवा सड़क परियोजना में तेजी: मार्च तक पूरा काम, सुरंगें और पुल 4 महीने में होंगे तैयार

खरगोन निमाड़-मालवा वालों के लिए खुशखबर यह है कि इंदौर-खंडवा रोड का काम मार्च तक पूरा हो जाएगा। इस रोड पर अक्टूबर तक मोरटक्का के नर्मदा ब्रिज और सिमरोल के वायडक्ट पर गर्डर लान्चिंग का काम आखिरी स्टेज में पहुंच गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के मुताबिक अगले चार महीने के भीतर तीनों सुरंग, नर्मदा पुल और वायडक्ट बनकर तैयार हो जाएंगे। एनएचएआई के मुताबिक, इंदौर-हैदराबाद कॉरिडोर के तहत तेजाजी नगर से बलवाड़ा तक छह लेन हाईवे बन रहा है। इसी हिस्से में सिमरोल टनल के बाद बनाए जा रहे वाया डक्ट पर 160 गर्डर की लॉन्चिंग पूरी हो चुकी है। यह कुल 450 मीटर का वायाडक्ट है, जिसमें 30-30 मीटर का एक-एक स्पान (हिस्सा) है। यहां 80 से 100 टन वजनी प्रत्येक गर्डर को दो क्रेन की मदद से खाई से 30 मीटर ऊपर बने दो पियर के बीच रखा गया। यह पूरी प्रक्रिया मार्च में शुरू हुई थी और पिछले सप्ताह ही पूरी हुई है। मार्च तक ट्रैफिक शुरू करने का दावा निर्माण कंपनी मेघा इंजीनियरिंग ने अगले साल मार्च तक इस हिस्से से ट्रैफिक शुरू करने का दावा किया है। इधर, नर्मदा नदी पर मोरटक्का में बन रहे ब्रिज का कार्य भी मार्च तक पूरा कराने का दावा किया गया है। इस ब्रिज के साथ ही बलवाड़ा से धनगांव के बीच बन रहा 45 किलोमीटर का फोरलेन भी कम्प्लीट होगा। खंडवा एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आशुतोष सोनी के मुताबिक, बलवाड़ा-धनगांव प्रोजेक्ट 45 किलोमीटर का है, जिस पर सड़क निर्माण लगभग पूरा हो गया है। एक रेलवे ब्रिज का काम अधूरा है और बाकी नर्मदा नदी का ब्रिज है। नर्मदा नदी पर चार स्पान बाकी हैं, जो पांचवां स्पान था, उसे पिछले महीने कम्प्लीट किया है। इंदौर-हैदराबाद के सफर में आठ घंटे बचेंगे 713 किमी की इस सड़क में अभी कई जगह स्टेट हाईवे हैं, जिन्हें एनएचएआई द्वारा नेशनल हाईवे की तर्ज पर बनाया जा रहा है। मौजूदा सड़क से अभी इंदौर-हैदराबाद के बीच 876 किमी का रास्ता है, जो हाईवे बन जाने के बाद 157 किमी कम हो जाएगा। इससे 18 घंटे का रास्ता 8 घंटे कम हो जाएगा और 10 घंटों में इंदौर से हैदराबाद पहुंचा जा सकेगा।

बिहार चुनाव की सरगर्मी में लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ीं, CBI ने दर्जनों गवाह किए पेश

पटना  बिहार विधानसभा चुनावों से पहले लालू परिवार पर संकट गहरा गया है। केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने IRCTC होटल मामले में करीब एक दर्जन गवाहों की सूची अदालत को सौंपी है, जो पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ मामले में उनकी कथित संलिप्तता के बारे में गवाही देंगे। CBI पहले ही इन गवाहों को औपचारिक नोटिस जारी कर चुकी है और उन्हें 27 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने को कहा है। उस दिन से इस मामले में ट्रायल शुरू होना है। सूत्रों के हवाले से ET की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि CBI इन गवाहों की गवाही बिना किसी सबूत के आधार पर जल्दी से पूरा करने की कोशिश करेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि उक्त गवाहों से पूछताछ के बाद, सीबीआई आरोपियों के खिलाफ अपने आरोपों को पुष्ट करने के लिए कुछ और गवाह भी पेश करेगी। इसी महीने आरोप तय हुए हैं बता दें कि इस महीने की शुरुआत में ही एक विशेष सीबीआई अदालत ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आईआरसीटीसी होटल मामले में उनकी कथित संलिप्तता के लिए आरोप तय किए हैं। अदालत ने लालू प्रसाद के खिलाफ भ्रष्टाचार (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत), आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और अन्य आरोप तय किए हैं। राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य पर षड्यंत्र और धोखाधड़ी सहित कई अपराधों का आरोप है। हालांकि, तीनों ने अदालत में खुद को निर्दोष बताया है। मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, आरोपी इस आदेश को चुनौती दे सकते हैं। लालू को पूरी प्रक्रिया की जानकारी थी 13 अक्टूबर को आरोप तय करते हुए विशेष सीबीआई कोर्ट के जज विशाल गोगने ने कहा था कि वे प्रथम दृष्टया इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि लालू को पूरी प्रक्रिया की जानकारी थी और उन्होंने होटलों के हस्तांतरण को प्रभावित करने के लिए हस्तक्षेप किया था। अपने आदेश में जज ने कहा, "निविदा प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए थे… यह स्पष्ट संभावना के रूप में सामने आया है कि बिक्री के समय, ज़मीन के टुकड़ों का कम मूल्यांकन किया गया था और फिर वे लालू के हाथों में आ गए।" न्यायाधीश ने 244 पृष्ठ के आदेश में मामले में “मिलीभगत’’ के पहलू को चिह्नित किया। अवैध भूमि हस्तांतरण में हेरफेर करने का आरोप बता दें कि सीबीआई ने यादव परिवार पर भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) की निविदाओं और अवैध भूमि हस्तांतरण में हेरफेर करने का आरोप लगाया था। लालू प्रसाद यादव पर रेल मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कोचर बंधुओं- विजय कोचर, विनय कोचर (दोनों मेसर्स सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक, होटल चाणक्य, पटना के मालिक) और अन्य के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप हैं, ताकि रांची और पुरी में रेलवे के बीएनआर होटलों को उप-पट्टे पर देने के लिए ठेके देने में फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाया जा सके। ठेके के बदले दिए भूखंड सीबीआई के आरोपपत्र के अनुसार, ठेके के बदले में कोचर ने कथित तौर पर पटना में एक प्रमुख भूखंड लालू प्रसाद के करीबी सहयोगी प्रेम चंद गुप्ता और उनके सहयोगियों द्वारा नियंत्रित एक कंपनी को बेच दिया और बाद में इस कंपनी को यादव के परिवार के सदस्यों ने अपने नियंत्रण में ले लिया और यह मूल्यवान संपत्ति मामूली कीमत पर उन्हें हस्तांतरित कर दी। न्यायाधीश द्वारा आरोप पढ़े जाने के बाद लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी ने निर्दोष होने की दलील दी और मुकदमे का सामना करने की बात कही।

कई करोड़ खर्च के बाद भी कान्ह नदी प्रदूषित, अब 250 करोड़ के बॉन्ड से सुधार की कोशिश

इंदौर  इंदौर की कान्ह नदी को साफ करने के लिए अब तक करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन कान्ह अभी भी प्रदूषित ही है। कान्ह को साफ करने के लिए जनभागीदारी के अलावा स्मार्ट सिटी, नमामि गंगे, अमृत प्रोजेक्ट के तहत 1200 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ को देखते हुए इसके पानी को टनल से निकालकर शिप्रा की जगह गंभीर नदी में शिफ्ट करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। वहीं इंदौर में कान्ह नदी के रीवर फ्रंट डेवलपमेंट पर भी काम होगा। इसकी डीपीआर को मंजूरी के लिए शासन को भेजा गया है। 19.385 किलोमीटर लंबी कान्ह नदी के लिए रीवर फ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत 510.32 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। यह पैसा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अर्बन चैलेंज फंड के तहत बाॅन्ड से पैसा जुटाया जाएगा। इसमें 25 फीसदी राशि केन्द्र और इतनी ही स्थानीय निकाय का प्राधिकरण को खर्च करना है। शेष 50 प्रतिशत पैसा बाॅन्ड या अन्य वित्तीय प्रावधानों से जुटाया जाएगा। इस योजना का मकसद शहरों में जल और स्वच्छता से जुड़ी चुनौतियों के लिए फंड उपलब्ध करवाना है। संजय सेतु तक आते-आते गुजरने पर कान्ह नदी की गंदगी और बढ़ जाती है। कृष्णपुरा छत्री के नजदीक होने के कारण यहां बने घाटों पर लोगों का बैठना मुश्किल हो जाता है। रीवर फ्रंट कॉरिडोर प्रोजेक्ट में यह सब होगा अब जो रिवर फ्रंट कॉरिडोर बनाया जाएगा। उसमें बाउंण्ड्रीवॉल, फाउंटेन, पार्किंग के साथ-साथ लैंड स्कैपिंग, हाट बाजार, फुट ओवरब्रिज, टॉयलेट, वॉल पेंटिंग, पाथ-वे सहित अन्य कार्य होंगे, ताकि नदी शुद्धिकरण के साथ-साथ उसके दोनों किनारों पर सौंदर्यीकरण के कार्य भी हो सकें। कृष्णपुरा छत्री पर होता है कान्ह-सरस्वती संगम सरस्वती नदी का एक हिस्सा राजीव गांधी स्थित नहर भंडार से होते हुए बद्री बाग तो दूसरा हिस्सा तेजपुर गड़बड़ी से अमितेश नगर होते हुए बद्री बाग में मिलता है। यह लालबाग पैलेस के पीछे छत्रीबाग, हरसिद्धि, कृष्णपुरा छत्री तक पहुंचता है। वहीं, कान्ह नदी तीन इमली से छावनी होते हुए कृष्णपुरा छत्री पर पहुंचती है, जहां दोनों का संगम होता है और फिर कबीटखेड़ी पहुंचती है।

लाड़ली बहनों के खातों में जल्द आएंगे ₹1500, सीएम मोहन यादव ने दी बड़ी सौगात

भोपाल  मध्यप्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने योजना की राशि में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। अब लाड़ली बहना योजना के तहत हर पात्र बहन को 1250 नहीं, बल्कि 1500 रुपए हर महीने मिलेंगे। हालांकि, इस बार भाईदूज पर 250 रुपए अलग से ट्रांसफर नहीं किए जाएंगे। दरअसल, सरकार ने तय किया है कि अब से यह पूरी बढ़ी हुई राशि नवंबर माह से एकमुश्त दी जाएगी। यानी आने वाले महीने में ही सीएम मोहन यादव करोड़ों बहनों के खातों में 1500 रुपए ट्रांसफर करेंगे। 250 रुपये की बढ़ोतरी, नया पड़ाव पहले लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 1250 रुपये मिलते थे। अब भाईदूज से यह राशि बढ़कर 1500 रुपये हो गई है। सीएम ने कहा, "यह हमारी बहनों के लिए सम्मान और सशक्तिकरण का कदम है।" यह बढ़ोतरी लाखों महिलाओं के लिए आर्थिक सहारा मजबूत करेगी। भाईदूज की विशेष किस्त त्योहार को और खास बनाने के लिए सीएम ने लाड़ली बहनों के खातों में 1500 रुपये की अतिरिक्त राशि ट्रांसफर करने का ऐलान किया। यह राशि तत्काल प्रभाव से लाभार्थियों तक पहुंचेगी। सीएम ने भाईदूज की शुभकामनाएं देते हुए कहा, "यह योजना बहनों के आत्मविश्वास को बढ़ाने का हमारा वादा है।" भविष्य की योजना मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि सरकार का लक्ष्य इस राशि को भविष्य में 3000 रुपये तक ले जाना है। यह कदम महिलाओं को आर्थिक रूप से और सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम होगा। सूत्रों के मुताबिक, पहले की तरह यह भुगतान 10 से 15 नवंबर के बीच होगा। वहीं, 60 साल से अधिक आयु की महिलाएं इस बढ़ी हुई राशि का लाभ नहीं ले सकेंगी।सीएम मोहन यादव गुरुवार को सीएम हाउस में लाड़ली बहनों के साथ भाईदूज मनाएंगे। कार्यक्रम की जिम्मेदारी मंत्री निर्मला भूरिया और कृष्णा गौर को दी गई है। इस मौके पर मुख्यमंत्री बहनों को बढ़ी हुई राशि को भाईदूज का विशेष तोहफा बताएंगे। नवंबर से खाते में एक साथ आएंगे 1500 रुपए बता दें कि सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने ऐलान किया था कि लाड़ली बहना योजना के तहत जल्द ही लाड़ली बहनों को 1500 रुपए की राशि दी जाएगी। अपना वादा निभाते हुए सीएम ने अकटूबर से ही इस बढ़ी हुई राशि को देना शुरू कर दिया है। हालांकि इस महीने ये राशि दो बार में लाड़ली बहनों के खातों में भेजी गई है। जिसका एक हिस्सा 1250 रुपए दिया जा चुका है।  वहीं दूसरा हिस्सा 23 अक्टूबर को प्रदेश की लाड़ली बहनों के खाते (Ladli Behna Yojana 2025) में आएगा। वहीं नवंबर महीने से 1500 रुपए की राशि एक साथ लाड़ली बहना योजना के खातों में आएगी। 29वीं किस्त जारी करते हुए सीएम मोहन यादव ने घोषणा की थी कि अब धीरे-धीरे ये राशि बढ़ाई जाएगी। सिंहस्थ 2028 तक इस राशि को बढ़ाकर 3000 रुपए किया जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू की थी Ladli Behna Yojana लाड़ली बहना योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू की थी।  कहां से हुआ शुभारंभ –शुरुआत- 5 मार्च 2023, भोपाल से –क्यों शुरू की गई थी लाड़ली बहना योजना- महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना, परिवार में सम्मान दिलाना तथा पोषण सुधारना –पूर्व सीएम शिवराज की योजना को आगे बढ़ा रहे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मासिक आर्थिक सहायता — शुरुआत- 1000 रुपए –2023 अक्टूबर से – 1250 रुपए — 2025 नवंबर- 1500 रुपए का ऐलान — रक्षाबंधन पर बोनस- जुलाई 2025 की किस्त के साथ 250 रुपए का शगुन, पिछले साल भी मिला था बोनस, इस बोनस की शुरुआत भी शिवराज सिंह ने अपने शासनकाल में ही की थी। — दीपावली 2025 की भाईदूज पर भी 250 रुपए का शगुन: अब दीपावली की भाईदूज पर भी मोहन यादव ने लाड़ली बहनों (Ladli Behna Yojana 2025) को बोनस और शगुन के रूप में 250 रुपए भेजने की तैयारी कर ली है। — नवंबर 2025 से लाड़ली बहना योजना की राशि बढ़कर हुई 1500 रुपए- खाते में एक साथ आएगी ये राशि। लाड़ली बहना योजना की पात्र कौन? उम्र- 21-60 साल स्थिति- विवाहित, विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता निवास- मध्य प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य आय सीमा- सालाना पारिवारिक आय 2.5 लाख से कम परिवार में कोई आयकरदाता, सरकारी कर्मचारी या पेंशनर नहीं होना चाहिए। परिवार के नाम पर पांच एकड़ जमीन से कम कृषि भूमि और निजी चार पहिया वाहन नहीं होना चाहिए। महिला का खाता आधार कार्ड से लिंक होना चाहिए। कब आती है लाडली बहना योजना की किस्त? लाड़ली बहना योजना की किस्त हर महीने की 10-15 तारीख के बीच पात्र महिला के खाते में डायरेक्ट ट्रांसफर की जाती है।  

सचिन मित्तल बने जयपुर पुलिस कमिश्नर, 34 IPS अधिकारियों का हुआ बड़ा ट्रांसफर

जयपुर राजस्थान में 34 IPS के तबादले किए गए. 5 IPS को अतिरिक्त चार्ज दिया गया.  जयपुर पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ का तबादला हुआ. बीजू जॉर्ज जोसफ को ADG कार्मिक लगाया. IPS सचिन मित्तल जयपुर पुलिस कमिश्नर बने. IPS बीजू जॉर्ज जोसफ को ADG कार्मिक लगाया. IPS दिनेश MN को ADG AGTF & ANTF लगाया. IPS आनंद श्रीवास्तव DG स्पेशल ऑपरेशन लगाया.  IPS अनिल पालीवाल को DG ट्रेनिंग और ट्रैफिक लगाया. IPS गोविंद गुप्ता को DG ACB लगाया. IPS अशोक राठौड़ को DG जेल लगाया. IPS प्रशाखा माथुर को ADG आयोजना लगाया. IPS राहुल प्रकाश को विशेष ऑपरेशन आयुक्त जयपुर लगाया. IPS एस सैंगाथिर को ADG सतर्कता लगाया. IPS संजय अग्रवाल को DG लॉ एंड ऑर्डर लगाया. कार्मिक विभाग ने आदेश जारी किए. 34 IPS के तबादले:  -5 IPS को अतिरिक्त चार्ज  -जयपुर पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ का हुआ तबादला  -बीजू जॉर्ज जोसफ को लगाया  ADG कार्मिक 

सोन पापड़ी विवाद: दिवाली पर गुस्साए कर्मचारियों ने फैक्ट्री में ही किया हंगामा

चंडीगढ़  दिवाली के मौके पर मिलने वाले बोनस का इंतजार कर्मचारी पूरे साल करते हैं। ऐसे में जब हाल ही में जब एक कंपनी के कर्मचारियों को मन माफिक बोनस नहीं मिला, तो उन्होंने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जहां कंपनी की ओर से दिवाली के मौके पर सोन पापड़ी मिलने पर कर्मचारी बुरी तरह भड़क गए। कर्मचारियों ने विरोध जताने के लिए सोन पापड़ी के सारे डब्बे के फैक्ट्री के गेट पर फेंक डाले। कथित तौर पर यह वीडियो हरियाणा के सोनीपत की एक फैक्ट्री का है। वायरल क्लिप में कई कर्मचारियों को फैक्ट्री के गेट के बाहर सोन पापड़ी के डिब्बे फेंकते हुए देखा जा सकता है। लाइव हिन्दुस्तान वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। इस क्लिप में एक स्थानीय समाचार चैनल पर प्रसारित की जा रही एक रिपोर्ट में एंकर ने बताया कि वर्कर्स को दिवाली पर बोनस देने का वादा किया गया था। हालांकि दिवाली से कुछ दिन पहले, उन्हें नकद बोनस या गिफ्ट वाउचर की जगह उन्हें सोन पापड़ी के डिब्बे थमा दिए गए, जिससे कर्मचारियों का गुस्सा फुट पड़ा। वायरल वीडियो को सोशल मीडिया पर 6 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। वीडियो पर लोगों की मजेदार प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। जहां कुछ लोगों ने कर्मचारियों के प्रति सहानुभूति जताई है, वहीं कुछ लोग खाने की बर्बादी और अपमान के के लिए उनकी आलोचना भी कर रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “एक ही दिन होता है जब कर्मचारी उपहार का इंतजार करते हैं। ऐसी चिंदीचोरी नहीं करनी चाहिए।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “शर्म आनी चाहिए ऐसे मालिकों को क्योंकि वर्कर पूरे साल जीते तोड़ मेहनत करके काम करके देता है और दिवाली पर उम्मीद करता है एक अच्छी सी गिफ्ट जरूर देगा।” कुछ लोग तो बोनस देने के लिए कानून बनाने की मांग भी करने लगे। हालांकि कुछ लोगों ने कर्मचारियों के बर्ताव का कड़ा विरोध किया। एक यूजर ने लिखा, “दुखद! ऐसा रवैया नहीं होना चाहिए। यह सिर्फ एक दिखावा है, दिवाली पर कुछ पाने का हक नहीं। जो भी उपहार मिले उसे विनम्रता से स्वीकार करना चाहिए। अगर बोनस देना हो तो उस पर औपचारिक रूप से चर्चा की जा सकती है।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “काम करने के बदले वेतन दिया जाता है। बोनस बंधन नहीं है, ये खुशी बांटने की बात है। जरुरी नहीं कि बोनस में पैसे ही दिया जाए। चलाकर देखिये पता चलेगा कितना मुश्किल है, सभी कंपनियां करोड़ो अरबों नहीं कमाती। १४ साल में मुझे कभी एक रुपया बोनस नहीं मिला,मुझे कोई शिकायत भी नहीं थी।”

कैंसर का अनदेखा कारण: शराब – हार्वर्ड के एक्सपर्ट्स ने बताया क्यों मॉडरेट ड्रिंकिंग भी सुरक्षित नहीं

नई दिल्ली  शराब पीने वाले अक्सर पीने का बहाना खोजते हैं। इतना ही नहीं उन्हें समझाना भी मुश्किल होता है। पीने वाले अक्सर यह लॉजिक देते हैं कि वह थोड़ी पीते हैं या ओकेजनल ड्रिंकर हैं। अब हार्वर्ड ट्रेन्ड गैस्ट्रोइंटेरोलॉजिस्ट ने बताया है कि शराब पीने का शरीर पर क्या असर होता है। उन्होंने बताया कि रोजाना शराब पीने से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी तक हो सकती है। महीने में एक बार पीने वालों पर खतरा हार्वर्ड और एम्स ट्रेंड गेस्ट्रो डॉक्टर सौरभ सेठी अपने इंस्टाग्राम पर लोगों को अवेयर करते रहते हैं। उन्होंने बताया कि शराब पीने के कैसे शरीर को नुकसान पहुंच सकता है, जो लोक कभी-कभी पीते हैं उनको भी। डॉक्टर ने बताया, जो लोग महीने में एक बार पीते हैं उनकी नींद की क्वॉलिटी खराब हो जाएगी। डिहाइड्रेशन होगा। वीकली पीने वालों पर असर हफ्ते में एक बार पीने से लीवर में दिक्कतें शुरू हो जाएंगी। नींद की क्वॉलिटी खराब हो जाएगी। जबरदस्त डिहाइड्रेशन होगा। हफ्ते में तीन-चार बार हफ्ते में तीन से चार बार पीने से स्ट्रेस हॉरमोन कॉर्टिसॉल बढ़ेगा। इंसुलिन रेजिस्टेंस के लक्षण बढ़ेंगे यानी डायबिटीज का खतरा बढ़ जाएगा। मेटाबॉलिजम धीमा पड़ेगा यानी पेट निकलेगा। चर्बी और मोटापा बढ़ने लगेगा और मेटाबॉलिजम से जुड़ी समस्याएं शुरू हो जाएंगी। रोजाना पीने वालों पर असर रोजाना पीने वालों का लीवर डैमज होगा। यहां तक कि लीवर फेल भी हो सकता है। मेटाबॉलिजम पूरी तरह से बिगड़ जाएगा। लीवर, पैंक्रिआज और ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना बढ़ जाएगी। एक बूंद से ही शुरू होता खतरा लैंसेट पब्लिक हेल्थ में WHO की रिपोर्ट में भी पहले यह बात छप चुकी है कि शराब की कोई भी मात्रा सेफ नहीं होती। आप कम मात्रा में पिएं या लंबे गैप पर यह आपके शरीर पर खराब असर डालती है। एल्कोहल कितना भी महंगा या कितने भी अमाउंट में हो यह कैंसर का खतरा बढ़ाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि शराब की एक बूंद से खतरा शुरू हो जाता है। जितनी ज्यादा मात्रा होगी खतरा उतना बढ़ जाएगा। कई तरह के कैंसर के अलावा शराब पीने से डायबिटीज और हार्ट अटैक का रिस्क भी बढ़ जाता है।