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कलेक्टर्स से मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अपील: स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करें

कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस कलेक्टर्स स्वास्थ्य सेवाओं में गुणात्मक सुधार लाएं और हॉस्पिटल का करें सतत विजिट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वास्थ्य एवं पोषण पर कलेक्टर्स के साथ हुआ व्यापक संवाद कलेक्टर्स ने साझा किये अपने जिलों के नवाचार भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में अनेक नई सुविधाए प्रारंभ की गई हैं। कलेक्टर्स स्वास्थ्य सेवाओं में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित करें और हॉस्पिटल में सतत् विजिट करें, जिससे हॉस्पिटल की कमियों को दूर किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला कलेक्टर्स से कहा कि आयुष्मान कार्ड धारकों को पूरा लाभ दिलाएं और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं पहुंच को आसान बनाया जाये, जिससे आमजन को सहज रूप से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किये जा रहे हैं। पीपीपी मॉडल पर भी अनेक कॉलेज प्रारंभ हुए हैं। वर्तमान में तीस से अधिक मेडिकल कॉलेज हैं। शीघ्र इनकी संख्या 50 हो जाएगी। प्रदेश के लगभग प्रत्येक जिले के नागरिकों को मेडिकल कॉलेज की सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो रहा है। जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि आवंटन की कार्यवाही प्रचलन में है, उसे अंतिम रूप देकर भूमि आवंटन का कार्य पूर्ण किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में नागरिकों के हित में सर्वाधिक अनुकूल वातावरण निर्मित किए जाने का प्रयास है।‍ मुख्यमंत्री डॉ. यादव कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के प्रथम दिन द्वितीय सत्र 'स्वास्थ्य एवं पोषण' को संबोधित कर रहे थे। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य  संदीप यादव ने राज्य में स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति को सुदृढ़ करने कलेक्टर्स के साथ विस्तृत चर्चा की। सत्र में मातृ-शिशु स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोग (एनसीडी), क्षय उन्मूलन और सिकल सेल उन्मूलन के लिए ठोस रणनीति पर विमर्श किया गया। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य  यादव ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की दिशा में एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत शिशुओं, किशोरियों, गर्भवती और धात्री महिलाओं की नियमित हीमोग्लोबिन जांच सुनिश्चित की जाए। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (VHSND) में गुणवत्तापूर्ण जांच, टीकाकरण और ANMOL 2.0 पर सटीक डेटा एंट्री की व्यवस्था की जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, उपचार और बर्थ वेटिंग होम्स में सुरक्षित प्रसव की अनिवार्यता पर जोर दिया। प्रमुख सचिव  यादव ने कहा कि पोषण ट्रैकर के प्रभावी उपयोग, छह माह तक केवल स्तनपान, मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्द्धन कार्यक्रम (MMBASK) के अंतर्गत कुपोषित बच्चों के प्रबंधन तथा आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा गृह आधारित सेवाओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और प्रसूति सहायता योजनाओं के भुगतान में समयबद्धता बनाए रखना सुनिश्चित करें। गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की रोकथाम के लिए प्रमुख सचिव  यादव ने उच्च रक्तचाप, मधुमेह, फैटी लीवर और तीन प्रमुख कैंसर की स्क्रीनिंग को अनिवार्य बताया। उन्होंने एनसीडी पोर्टल पर सभी प्रविष्टियों की अद्यतन स्थिति बनाए रखने, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, ईट राइट अभियान, तेल की खपत में 10 प्रतिशत कमीं, फिट इंडिया और योग जैसी गतिविधियों के माध्यम से जनजागरूकता बढ़ाने पर बल दिया। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने कहा कि क्षय उन्मूलन के लिए एक्स-रे और अन्य मशीनों से जांच की जाए, निक्षय पोर्टल पर सभी प्रकरणों की सूचना दर्ज हो, उपचार और फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाए तथा निक्षय मित्रों के माध्यम से पोषण सहायता और डीबीटी समय पर प्रदान की जाए। इसी प्रकार, सिकल सेल उन्मूलन अभियान के अंतर्गत स्क्रीनिंग, कार्ड वितरण, हाइड्रोक्सीयूरिया दवा की उपलब्धता, न्यूमोकोकल वैक्सीनेशन और सिकल मित्र पहल के माध्यम से जनभागीदारी और काउंसलिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभागों के बीच संयुक्त कार्ययोजना बनाकर समन्वय को सशक्त करें। VHSND के गुणवत्तापूर्ण आयोजन, उपकरणों के सार्थक उपयोग, e-KYC और DBT सक्षमता, PMSMA संचालन, नवजातों के गृह आधारित फॉलो-अप, मातृ एवं शिशु मृत्यु की शत-प्रतिशत रिपोर्टिंग, ईट राइट, फिट इंडिया, योग और खेलकूद के माध्यम से जन-जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि सुपोषित ग्राम पंचायतों के लिए स्थानीय खाद्य विविधता को प्रोत्साहित करने, आंगनवाड़ी केंद्रों के नियमित संचालन, डेटा सत्यापन, और सिकल मित्र तथा निक्षय मित्र के माध्यम से फूड बास्केट वितरण जैसी गतिविधियों को परिणाममुखी बनाया जाये। उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिलों ने दीं अपनी प्रस्तुतियाँ बालाघाट ने शिशु एवं मातृ मृत्यु दर नियंत्रण पर, झाबुआ ने स्वास्थ्य एवं पोषण सुधार प्रयासों और मंदसौर ने सम्पूर्ण स्वास्थ्य मॉडल पर प्रेजेन्टेशन देते हुए अपने अनुभव साझा किए।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया आग्रह – किसान अपनाएं प्राकृतिक और जैविक खेती

प्राकृतिक एवं जैविक खेती को करें प्रोत्साहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषि एवं संबद्ध सेक्टर्स पर हुआ कॉन्फ्रेंस का पहला सत्र भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारा प्रदेश कृषि उपज पर आधारित है। इसलिए सरकार का मूल लक्ष्य प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना और कृषि फसलों की तुलना में उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ाना है। हमें इन क्षेत्रों में उद्यमिता के नए अवसर भी बनाने हैं। सभी कलेक्टर्स अपने-अपने‍ जिलों में किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्हें हरसंभव मदद भी मुहैया कराएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस-2025 के पहले सत्र 'कृषि एवं संबद्ध सेक्टर्स' को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे ग्रामीण युवा आने वाले समय में कृषि उद्यमी बनें, इसके लिए हमें मिल-जुलकर प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि खेती को जैविक खेती की ओर ले जाना एक बड़ी चुनौती है, पर हमें यह चुनौती भी पार करनी ही होगी। मुख्यमंत्री ने कहा‍ कि  अन्न अर्थात मिलेट्स को प्रोत्साहन देकर इनकी उपज को लगातार बढ़ाना भी हमारा लक्ष्य है, हमें इस दिशा में भी ठोस प्रयास करने होंगे। किसानों को परंपरागत खेती से शिफ्ट कर उद्यानिकी, दुग्ध उत्पादन एवं मत्स्य पालन जैसे आमदनी बढ़ाने वाले कार्यों की ओर लेकर जाना है। प्रदेश में केला, संतरा, टमाटर एवं अन्य उद्यानिकी की फसलें बड़ी मात्रा में होती हैं। हमें इनके स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण एवं बड़े बाजारों तक मार्केटिंग की व्यवस्था भी करनी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसलों में उर्वरक की खपत सिर्फ वैज्ञानिक आधार पर ही होनी चाहिए। यदि नहीं हो रही है तो इस पर नियंत्रण जरूरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स अपने-अपने जिलों में साप्ताहिक मार्केट, हाट बाज़ारों में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की उपज का विक्रय सुनिश्चित करें। साथ ही किसानों को नकद फसलों की खेती के लिए समझाइश देकर प्रोत्साहित करें। इसके लिए अभियान चलाएं। उन्होंने कहा‍ कि सभी कलेक्टर जिलों में 100-100 किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित कर उसका रिकार्ड रखें और उनकी प्राकृतिक खेती के लाभों का अध्ययन भी करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उद्यानिकी फसलों अर्थात् बागवानी को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने गुना जिले में गुलाब की खेती किए जाने की प्रशंसा करते हुए कहा कि वहां के किसानों ने बड़ा ही प्रगतिशील कदम उठाया है। प्रदेश के सभी धार्मिक शहरों में भी गुलाब की खेती को बढ़ावा दिया जाये, जिससे गुलाब उत्पादन की खपत स्थानीय स्तर पर किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी कलेक्टर कृषि उपज मंडी में सोयाबीन फसल की नीलामी रेट की सघन निगरानी भी रखें। भावान्तर योजना का करें प्रचार-प्रसार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भावान्तर योजना का भी व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करें। इस योजना का सर्वाधिक लाभ किसानों को मिलना है और यह बात उन तक पहुंचनी भी चाहिए। भावान्तर योजना के समुचित क्रियान्वयन के लिये सभी कलेक्टर पूरी मेहनत और समर्पण से किसानों को इसका अधिकतम लाभ दिलाएं। पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर लगाएं सख्त अंकुश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पराली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा ‍कि प्रदेश में पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर सख्ती से अंकुश लगाएं। इसके लिए सक्रिय नियंत्रण तंत्र विकसित करें और ऐसी घटनाओं पर विशेष फोकस कर निगरानी भी बढ़ाएं। कलेक्टर्स कृषि विभाग का सहयोग लेकर किसानों को पराली/नरवाई न जलाने की समझाइश दें। किसानों को पराली निष्पादन के दूसरे विकल्पों के बारे में बताया जाए, जिससे वे पराली जलाने की ओर प्रवृत्त ही न हों। कृषि उत्पादन आयुक्त ने दिया प्रेजेंटेशन कृषि एवं संबद्ध सेक्टर्स सत्र का संचालन कृषि उत्पादन आयुक्त  अशोक वर्णवाल ने किया और प्रेजेंटेशन दिया। इस सत्र में प्राकृतिक खेती के प्रचार, जलवायु अनुकूल फसलों, उद्यानिकी फसलों के उत्पादन, उत्पादकता केंद्रित क्लस्टर, सूक्ष्म सिंचाई, मत्स्य पालन के लिए केज कल्चर और सेलेक्टिव ब्रीडिंग, फसल अवशेष प्रबंधन, खाद एवं बीज व्यवस्था, सोयाबीन के लिए भावांतर भुगतान योजना, दुग्ध उत्पादन और गौशाला प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। कृषि उत्पादन आयुक्त  वर्णवाल ने फसल अवशेष प्रबंधन (पराली निष्पादन नियंत्रण) को सरकार की विशेष प्राथमिकता बताते हुए इस प्रयोजन के लिए कलेक्टर्स को गांव-गांव कृषक संगोष्ठियों के आयोजन और हैप्पी सीडर, सुपर सीडर एवं बेलर जैसे उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देने को कहा। उन्होंने कहा कि जिलों में स्वीकृत कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं। सत्र में रबी 2025-26 के लिए उर्वरक व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। सत्र में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं सहकारिता (मत्स्योद्योग) विभाग के सचिवों ने भी अपनी विभागीय योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी। पांच जिलों में हो रहा कृषि एवं उद्यानिकी पर बेहतरीन काम सत्र में प्रदेश के 5 जिलों के कलेक्टर्स ने अपने-अपने जिलों में हो रहे उत्कृष्ट कार्यों का उल्लेख किया। गुना कलेक्टर ने गुलाब क्लस्टर डेवलपमेंट के बारे में बताया। हरदा कलेक्टर ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती के प्रोत्साहन किए गए प्रयासों की जानकारी दी। शाजापुर कलेक्टर ने खाद वितरण के लिए टोकन प्रणाली विकसित करने के बारे में बताया। श्योपुर कलेक्टर ने फसल अवशेष प्रबंधन (पराली निष्पादन नियंत्रण) की बेहतर व्यवस्था की जानकारी दी। खंडवा कलेक्टर ने जिले में सफलतापूर्वक गौशाला संचालन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कॉन्फ्रेंस के पहले सत्र के अंत में जिलों के कलेक्टर्स एवं कमिश्नर्स ने प्रदेश की कृषि उत्पादन नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सुझाव भी दिए। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़वानी जिले में 60 करोड़ के निर्माण कार्यों का वर्चुअली किया लोकार्पण और शिलान्यास

प्रधानमंत्री मोदी के नशामुक्त भारत अभियान को सफल बना रहा है मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़वानी जिले में 60 करोड़ के निर्माण कार्यों का वर्चुअली किया लोकार्पण और शिलान्यास भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नशामुक्त भारत अभियान के माध्यम से लोगों को नशे से दूर करने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के संकल्प को सफल बनाने के लिए मध्यप्रदेश में नशामुक्ति अभियान का क्रियान्वयन हो रहा है। प्रदेश के 19 धार्मिक नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में मदिरा की दुकानों और बार का संचालन प्रतिबंधित किया गया है। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक जनजीवन में बाधा बनने वाले शराब दुकानों के अहाते बन्द कर दिए जाएंगे। मध्यप्रदेश नशामुक्त भारत अभियान के क्रियान्वयन में अग्रणी प्रदेश है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार की रात्रि मुख्यमंत्री निवास से बड़वानी में जिले 60 करोड़ रुपये की लागत के निर्माण कार्यों का वर्चुयली उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें 23 करोड़ लागत के दो विकास कार्य शामिल हैं। ग्राम पाटी में गोई नदी पर 19 करोड़ की लागत से उच्च स्तरीय पुल और पाटी में 4 करोड़ की लागत से जनजातीय सीनियर उत्कृष्ट बालक छात्रावास का निर्माण हुआ है। साथ ही 37 करोड़ की लागत से सिलावाद-पाटी मार्ग के उन्नयन सहित 7 विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिवपंथ सत्संग मेला बड़वानी के जनजातीय समुदाय का प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जो गुरु शिष्य परंपरा, आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक जागरुकता को बढ़ाने का प्रतीक है। शिवपंथ समुदाय की सहभागिता से नशामुक्ति और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है। यह समुदाय प्रकृति का संरक्षण भी है। युवाओं और महिलाओं को जोड़कर जनजातीय क्षेत्रों में नशामुक्ति अभियान संचालित है जिसमें मध्यप्रदेश सहित महाराष्ट्र के कई गुरुजन सत्संग और नशामुक्ति शिविर के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार और समाज की सहभागिता से ऐसे कार्य भी संभव हो जाते हैं जिन्हें असंभव माना गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सार्थक जीवन के लिए तैयार करने में यह अभियान महत्वपूर्ण है। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित सुरेखानंद जी महाराज और पहाड़ सिंह बापुजी सहित संतजन का अभिवादन किया। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, सांसद श्री गजेन्द्र सिंह पटेल और श्री सुमेर सिंह सोलंकी के अलावा जनजातीय आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अंतरसिंह आर्य, श्री अजय यादव, श्री प्रेम सिंह पटेल आदि उपस्थित थे।  

हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा – प्रेक्टिकल सेशन है तकनीकी शिक्षा की रीढ़, AICTE से संशोधन की मांग

चंडीगढ़ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इंजीनियरिंग में डिग्री या डिप्लोमा प्रदान करने वाली तकनीकी शिक्षा में सिद्धांत और व्यावहारिक दोनों शामिल होने चाहिए। पीठ ने कहा कि व्यावहारिक सत्र तकनीकी शिक्षा की रीढ़ हैं।  सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का हवाला देते हुए, जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा, प्रैक्टिकल्स ऐसी शिक्षा की रीढ़ हैं, जो एक व्यावहारिक दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां सैद्धांतिक सिद्धांतों को प्रदर्शकों या व्याख्याताओं की देखरेख में लागू किया जाता है। सैद्धांतिक कक्षाओं में दिए गए ज्ञान को व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से सुदृढ़ किया जाना चाहिए। इस प्रकार, व्यावहारिक कार्य तकनीकी शिक्षा प्रणाली का एक अभिन्न अंग हैं। संशोधन के लिए AICTI की स्वीकृति जरूरी इस मामले में अदालत की सहायता सीनियर एडवोकेट डीएस पटवालिया और राजीव आत्मा राम के साथ-साथ वकील गौरवजीत सिंह पटवालिया और बृजेश खोसला ने की। जस्टिस बराड़ ने स्पष्ट किया कि तकनीकी शिक्षा प्रणाली में प्रैक्टिकल अनिवार्य होने की स्थापित अवधारणा को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTI) की स्पष्ट स्वीकृति के बिना संशोधित या रिप्लेस नहीं किया जा सकता। डायरेक्शन का अभाव यदि इस स्थापित अवधारणा, जो तकनीकी शिक्षा प्रदान करने के लिए एक गुणात्मक मानदंड के रूप में कार्य करती है, को किसी भी स्थिति में डिस्टेंस एजूकेशन द्वारा संशोधित या रिप्लेस किया जाना है, तो एआईसीटीई को ऐसे संशोधन को स्पष्ट रूप से स्वीकार करना होगा। तकनीकी शिक्षा के रेगुलर पाठ्यक्रम को बदलने या संशोधित करने के लिए आवश्यक मानदंडों का निर्धारण पूरी तरह से एआईसीटीई के अधिकार क्षेत्र में है। जस्टिस बराड़ ने इस संबंध में कोई भी निर्णय स्पष्ट और सुस्पष्ट होना चाहिए और केवल दिशा निर्देशों के अभाव से इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता। पीठ ने कहा- छात्रों की सरकारी नौकरी प्रभावित होगी पीठ ने आगे कहा कि एआईसीटीई ने अपनी स्पष्ट स्थिति व्यक्त की है कि डिस्टेंस एजूकेशन के माध्यम से प्राप्त इंजीनियरिंग डिप्लोमा न तो स्वीकृत हैं और न ही मान्यता प्राप्त हैं। इन टिप्पणियों के छात्रों और संस्थानों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकते हैं। निर्णय स्पष्ट करता है कि एआईसीटीई की स्वीकृति के बिना डिस्टेंस एजूकेशन के जरिए से इंजीनियरिंग में प्रदान किए गए डिप्लोमा मान्य नहीं माने जाएंगे, जिससे छात्रों की सरकारी नौकरी और उच्च शिक्षा के लिए पात्रता प्रभावित होगी। कोर्ट ने एआईसीटीई सौंपी जिम्मेदारी यह आदेश अनधिकृत दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों, तकनीकी शिक्षा में तेज़ी से हो रही वृद्धि और नियामक निगरानी की कमी को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है। कोर्ट के निर्देश में एआईसीटीई को यह सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है कि केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने वाले वास्तविक संस्थानों को ही काम करने दिया जाए, जबकि छात्रों और आम जनता को गैर-अनुमोदित कार्यक्रमों से सावधान रहना होगा।

बारूद भरते समय खदान में विस्फोट, 10 घायल, 2 की हालत गंभीर

 सरगुजा छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले के चिरमिरी ओपन कास्ट कोयला खदान में ब्लास्ट होने से 10 लोग मलबे में दब गए। जो लोग दबे हैं उनमें से 4 ठेका मजदूर हैं जबकि वहीं 6 एसईसीएल के कर्मचारी हैं। घायल मजदूरों में दो की हालत गंभीर बनी हुई है। हादसे की जानकारी मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। मामला चिरमिरी थाना क्षेत्र का है। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि धमाका इतना तेज था कि मौके पर मौजूद बारूद वाहन और एक दूसरी गाड़ी पूरी तरह से डैमेज हो गई। जानकारी के मुताबिक, यह घटना उस समय हुई जब खदान में बारूद भरा जा रहा था। हादसे में घायल सभी मजदूरों को गोदरीपारा के रीजनल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। घायलों में दो महिला मजदूर भी शामिल हैं। घटना की सूचना मिलते ही चिरमिरी नगर निगम के महापौर राम नरेश राय और एसईसीएल के अधिकारी अस्पताल पहुंचे। स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में अस्पताल परिसर में मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि कोयला खदान में बारूद भरने समय बारुद में अचानक विस्फोट हो गया जिस कारण से वहां काम कर रहे मजदूर मिट्टी और पत्थरों के मलबे के नीचे दब गए। ब्लास्ट के बाद ओपन कास्ट माइंस के कई गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आ रही है।

धान के कटोरे चंदौली में बाढ़ से तबाही, फसलें बर्बाद, जनजीवन अस्त-व्यस्त

चंदौली उत्तर प्रदेश के चंदौली और आसपास के इलाकों में पिछले तीन-चार दिनों से हो रही भारी बारिश और डैम से छोड़े गए पानी ने 'जल प्रलय' जैसे हालात पैदा कर दिए हैं. जिले की सड़कें डूब गई हैं, कच्चे मकान धराशाई हो रहे हैं और 'धान का कटोरा' कहे जाने वाले चंदौली में सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई है. लोग त्राहिमाम कर रहे हैं.  सड़कें जलमग्न, खेतों में डूबी धान की फसल चंदौली में लगातार बारिश से मिर्जापुर के जलाशय लबालब भर गए, जिससे उनका पानी रिलीज किया गया. यह पानी पहाड़ी नदियों के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में पहुंच गया. पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर से चकिया जाने वाली स्टेट हाईवे पर शिवनाथपुर गांव के पास डेढ़ से 2 फीट तक पानी भर गया, जिससे लोगों को जोखिम उठाकर सड़क पार करनी पड़ रही है. ग्रामीणों ने बताया कि डैम से अचानक पानी छोड़े जाने से हजारों बीघा धान की फसल डूब गई है और यदि पानी जल्द नहीं निकला तो फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी.  नियमताबाद में कच्चे मकान धराशाई लगातार बारिश और डैम के पानी से केवल खेत और सड़कें ही नहीं डूबी हैं, बल्कि आबादी के इलाके भी प्रभावित हुए हैं. नियमितबाद ब्लॉक के चंदाईत गांव में जलजमाव की वजह से कच्चे मकान धराशाई हो रहे हैं. गोपाल मौर्य का कच्चा मकान रात में अचानक भरभराकर गिर गया. राहत की बात रही कि परिवार के सदस्य बाल-बाल बच गए, लेकिन एक कमरे में बंधी दो गायें गंभीर रूप से घायल हो गईं. गोपाल मौर्य के भाई ओमप्रकाश ने बताया कि उनका खाने-पीने का सामान भी बर्बाद हो गया है. देखें ग्राउंड के हालात-  स्कूल-पंचायत भवन में भी भरा पानी चंदौली के हालात इतने गंभीर हैं कि गांव के सरकारी भवन भी सुरक्षित नहीं हैं. चंदाईत गांव में प्राइमरी स्कूल हो या पंचायत भवन, हर जगह पानी ही पानी भरा है. सुनील कुमार मौर्य ने बताया कि गांव के स्कूल में भी पानी भर गया है, जिसके चलते बच्चों के पठन-पाठन में भी समस्या आ रही है. स्थानीय निवासी रब्बु खान के मुताबिक, बारिश और पानी की वजह से गांव के 8 से 10 घर गिर गए हैं. प्रभावित ग्रामीण त्राहिमाम कर रहे हैं. 

हरियाणा में 1,200 सांख्यिकीय कर्मियों को लेकर सरकार की योजना, 18 लाख रुपए होंगे खर्च

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने राज्य में डेटा संग्रह, विश्लेषण और रिपोर्टिंग क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 1,200 सांख्यिकीय सहायकों और अधिकारियों के लिए एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम को मंज़ूरी दी है।  यह निर्णय  मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई “सांख्यिकीय सुदृढ़ीकरण हेतु सहयोग” (एस.एस.एस.) उप-योजना की राज्य कार्यान्वयन समिति की बैठक में लिया गया।  इस प्रशिक्षण पहल का उद्देश्य एक  सशक्त और समन्वित सांख्यिकीय तंत्र का निर्माण करना है, ताकि नीतिगत निर्णय सटीक और समयबद्ध डेटा पर आधारित हों। प्रदेश के हर जिले से लगभग 50 प्रतिभागियों को सांख्यिकीय तकनीकों, डिजिटल डेटा प्रबंधन और विश्लेषण पद्धतियों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम पर लगभग 18 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें प्रशिक्षण मॉड्यूल, लॉजिस्टिक व्यवस्था और विशेषज्ञ मानदेय शामिल हैं।  मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने कहा कि राज्य के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने  के लिए निरंतर क्षमता निर्माण और अंतर-विभागीय समन्वय बेहद जरूरी है।  वित्त विभाग के विशेष सचिव डॉ. जयेंद्र सिंह छिल्लर ने बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण सर्वेक्षण और अध्ययन किए जाएंगे। इनमें ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकायों से वित्तीय आँकड़ों का संकलन, ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों के लिए राज्य-विशिष्ट उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सी.पी.आई.) का संकलन, चारे की फसलों की लागत का आकलन तथा पशुधन उत्पादों के थोक मूल्य आँकड़ों का संकलन शामिल है।  राज्य सरकार शोध की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों का भी सहयोग ले रही है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक सर्वेक्षण की कार्यप्रणाली पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अर्चना चौधरी के साथ शुरुआती विचार-विमर्श भी किया जा चुका है।  आर्थिक एवं सांख्यिकीय कार्य विभाग (डी.ई.एस.ए.) इस योजना के क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। राज्य सरकार ने केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के साथ कुल 5.09 करोड़ रुपये की अनुदान राशि के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।  पहली किस्त के रूप में 55.73 लाख  रुपये की राशि से राज्य की सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली को आधुनिक बनाने हेतु कंप्यूटर, प्रिंटर और टैबलेट की खरीद की गई है। दूसरी किस्त के रूप में 13.99 लाख रुपये की राशि नवंबर 2024 में जारी की गई, जिससे डिजिटल अवसंरचना को और सुदृढ़ किया गया है।  मुख्य सचिव ने कहा कि इन प्रयासों से प्रदेश में एक आधुनिक, पारदर्शी और कुशल सांख्यिकीय अवसंरचना के निर्माण में मदद मिलेगी। एस.एस.एस. उप-योजना के अंतर्गत किए जा रहे इन उपायों से विभागों को विश्वसनीय और अद्यतन आँकड़ों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे नीतिगत निर्णयों की गुणवत्ता और जनसेवा की प्रभावशीलता में वृद्धि होगी।  बैठक में आर्थिक एवं सांख्यिकीय कार्य विभाग के निदेशक श्री मनोज कुमार गोयल, अतिरिक्त निदेशक श्री आर. के. मोर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 

हजारीबाग में भव्य पासिंग आउट परेड, BSF के 345 नए जवान हुए तैयार

हजारीबाग सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में शामिल हुए कुल 345 जवानों ने सोमवार को झारखंड के हजारीबाग जिले में आयोजित पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी। परेड का आयोजन मेरू स्थित बीएसएफ प्रशिक्षण केंद्र एवं स्कूल के रानी झांसी परेड ग्राउंड में किया गया। अधिकारी ने बताया कि ये 345 जवान सहायक प्रशिक्षण केंद्र (एसटीसी) के सातवें और आठवें बैच से हैं। उन्होंने 44 सप्ताह का प्रशिक्षण पूर्ण किया और राष्ट्र की सेवा की शपथ ली। बीएसएफ प्रशिक्षण केंद्र एवं स्कूल के निरीक्षक महानिरीक्षक (आईजी) धीरेंद्र संभाजी कुटे ने परेड की सलामी ली और जवानों को उत्कृष्ट परेड प्रस्तुति के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि जवानों ने अनुशासन और देश की सीमाओं की रक्षा के प्रति समर्पण का शानदार प्रदर्शन किया है।  

हरियाणा को देश का ग्रोथ इंजन बताया, कैबिनेट मंत्री अरविंद शर्मा ने बीजेपी की स्वदेशी पहल पर जोर दिया

चंडीगढ़   सहकारिता, कारागार, निर्वाचन, विरासत व पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि हरियाणा देश का ग्रोथ इंजन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया, मेक फॉर वर्ल्ड संकल्प को सिद्ध करने में हरियाणा अन्य राज्यों के सामने उदाहरण पेश करेगा। आज स्वदेशी के लक्ष्य को पूरा करने के लिए भाजपा सरकार हर युवा को नौकरी करने वाला नहीं नौकरी देने वाला बनाने की दिशा में काम कर रही है। सहकारिता मंत्री सोमवार को आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान पर सिंचाई विश्राम गृह, गोहाना में पत्रकारवार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत निर्माण का जो लक्ष्य रखा है उसका मार्ग आत्मनिर्भरता से होकर जाता है। उन्होंने कहा कि वोकल फॉर लोकल का अभियान आज पूरे देश का मंत्र बन गया है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान जन आंदोलन का रूप ले रहा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती 25 सितंबर से शुरू होकर भारत रत्न भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती 25 दिसंबर तक चलने वाले इस अभियान में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। इस अवसर पर मार्केट कमेटी गोहाना चेयरमैन कृष्ण सैनी, शेर सिंह बेडवाल, भाजपा जिला महामंत्री जितेंद्र शर्मा व महेंद्र चिड़ाना, डॉ. ओमप्रकाश शर्मा, मंडल अध्यक्ष भूपेंद्र मुदगिल, सूरत सिंह, जगबीर जैन, कुलदीप कौशिक आदि उपस्थित रहे। 

आपात सेवा की बेरूखी ने ली जान: घायल युवक को समय पर नहीं मिली मदद, परिवार ने सड़क पर शव रखकर जताया गुस्सा

अंबिकापुर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले में स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था सामने आई है, जहां सड़क हादसे में घायल पहाड़ी कोरवा समाज के युवक को इलाज के लिए रायपुर ले जाने समय पर एंबुलेंस नहीं मिली, जिसके चलते युवक की मौत हो गई. मृतक के परिजनों ने कहा, मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 20 घंटे बाद भी एंबुलेंस नहीं आई, जिससे समय पर इलाज नहीं मिलने से युवक की मौत हो गई. मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल पुलिस चौकी के सामने शव रखकर चक्काजाम कर दिया है. उनकी मांग है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और मुआवजा दी जाए. कांग्रेस ने मृतक परिवार का समर्थन किया है. जानकारी के मुताबिक, बलरामपुर जिले के ग्राम ककना के मदेश्वरपुर के रहने वाले 34 वर्षीय गुड्डू कोरवा 4 अक्टूबर को बजल साय के साथ ग्राम घटगांव गया हुआ था. घटगांव से वापस लौटते समय उनकी बाइक ग्राम सिधमा के पास मिट्टी मुरुम के ढेर में चढ़ गई और दोनों सड़क पर गिर गए. हादसे में गुड्डू कोरवा के सिर में गंभीर चोटें आईं थी. उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे रायपुर रेफर किया, लेकिन एंबुलेंस समय पर नहीं मिल सकी। परिजनों का आरोप – प्रोटोकॉल का हवाला देकर नहीं दी एंबुलेंस परिजनों का आरोप है कि अधिकारी ने राज्यपाल रमेन डेका के प्रोटोकॉल का हवाला देकर उन्हें एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराया। पहाड़ी कोरवा परिवार के परिजनों ने सांसद चिंतामणि महाराज एवं मंत्री राजेश अग्रवाल को भी फोन किया, लेकिन एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सका। 26 घंटे बाद घायल को सोमवार शाम रायपुर के लिए भेजा गया है. तब तक युवक की हालत बहुत ज्यादा बिगड़ गई थी. रात करीब 10.30 बजे मरीज को रायपुर हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.