samacharsecretary.com

सुप्रीम कोर्ट ने शराब घोटाले में अनवर ढेबर को दी अस्थायी राहत

रायपुर छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला मामले में जेल में बंद कारोबारी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. उनकी मां के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए 4 दिन की अंतरिम जमानत मंजूर कर दी गई है. पुलिस अभिरक्षा में 4 दिन मां के साथ रहने की इजाजत मिली है. दरअसल, कारोबारी अनवर ढेबर की ओर से सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मां की खराब स्वास्थ्य में समय में मिलने के लिए अपील की थी. मामले में सुनवाई के दौरान ढेबर के वकीलों ने कोर्ट में बताया कि उनकी मां की हालत गंभीर है. इस वक्त वह हॉस्पिटल में एडमिट हैं. जिस पर सुप्रीम कोर्ट कहा कि ऐसे संवेदनशील समय पर परिवार के ऐसे समय में इंसान को अपने करीबियों के साथ रहने का मौका मिलना चाहिए. चार दिन की मिली अंतरिम जमानत कोर्ट ने चार दिन की अंतरिम जमानत दे दी है. जिसमें साफ किया कि यह राहत सिर्फ उनकी मां की तबीयत को ध्यान में रखते हुए दी गई है. 4 दिनों तक अनवर ढेबर अपने परिवार के साथ रह सकेंगे. जमानत की तिथि खत्म होते ही उन्हें दोबारा जेल जाना होगा. 3200 करोड़ का घोटाला, 60 लाख से अधिक पेटियों की बिक्री EOW/ACB द्वारा अब तक की गई जांच और 200 से अधिक व्यक्तियों के बयान एवं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अनुमान है कि लगभग 60,50,950 पेटी बी-पार्ट शराब की अवैध बिक्री हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत 2174 करोड़ रुपये से अधिक है. पहले इस घोटाले का अनुमान 2161 करोड़ रुपये था, लेकिन नवीनतम आंकड़ों के अनुसार घोटाले की कुल राशि 3200 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है. लखमा, चैतन्य, टूटेजा, ढेबर समेत 15 जेल में इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, सेवानिवृत्त IAS अनिल टूटेजा और होटल व्यवसायी अनवर ढेबर समेत 15 लोग पहले से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं. ईओडब्ल्यू की जांच में अब तक कुल 70 लोगों को आरोपित बनाया गया है, जिसमें आठ डिस्टलरी संचालक भी शामिल हैं. अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है.

राजनीतिक विवाद: आदिवासी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर बाबूलाल मरांडी ने CM हेमंत सोरेन पर लगाए भेदभाव का आरोप

रांची  झारखंड प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर आदिवासी धर्मस्थलों की सुरक्षा में भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया है। मरांडी ने कहा कि सरना स्थल, मसना स्थल, हड़गड़ी और जाहरथान जैसे आदिवासी धार्मिक स्थलों पर लगातार अतिक्रमण और हमले हो रहे हैं, परन्तु सरकार कोई प्रभावी सुरक्षा इंतजाम नहीं कर रही है। मरांडी ने सिमडेगा में चर्च की सुरक्षा को लेकर प्रशासन द्वारा ईसाई धर्मगुरुओं के साथ की जा रही बैठकों को भी विवादित बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्यों केवल चर्च को विशेष सुरक्षा दी जा रही है और क्या इसका उद्देश्य मतांतरण कराने वाले गिरोहों को संरक्षण देना है। मरांडी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स (पूर्व में ट्विटर) में लिखा कि पिछले कुछ वर्षों में झारखंड में कई जगह संतालों के ज़ाहिर थान, मांझी थान की जमीनों पर कब्जा एवं अतिक्रमण की घटनाएं हुई, विवाद हुआ और ये सब हो रहा है। आदिवासियों के सरना स्थल, मसना स्थल, हड़गड़ी के ज़मीनों के अतिक्रमण का विरोध और सुरक्षा को लेकर लोगों को आये दिन आंदोलन करना पड़ रहा है। झारखंड के मंदिरों पर हमले हुए हैं। मंदिरों पर कहीं बम फेंके गए, कहीं पथराव हुआ, तो कहीं देवी-देवताओं की प्रतिमाएं खंडित की गईं, लेकिन क्या कभी राज्य सरकार ने इनसबों की सुरक्षा को लेकर उन समाज के धर्मगुरुओं के साथ कोई बैठक की? जवाब है, नहीं!   मरांडी ने कहा कि अब सिमडेगा में चर्च की सुरक्षा के लिए खुद डीसी, एसपी और प्रशासनिक अधिकारी ईसाई धर्मगुरुओं के साथ बैठक करने जा रहे हैं। आखिर चर्च को ही विशेष सुरक्षा की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है? क्या यह उन मतांतरण कराने वाले गिरोहों को सुरक्षा देने की तैयारी है, जो ‘चंगाई सभा' के नाम पर भोले-भाले आदिवासियों को धर्मांतरण करा रहे हैं? चर्च की साजिश, ऐसे 'चर्च प्रेमी' अफसरों की कारगुजारी एवं चंगाई सभा में रोग भगाने जैसे अंधविश्वास को बढ़ावा देने के कारण ही सिमडेगा में आज लगभग 51 प्रतिशत आबादी का ईसाई धर्म में मतांतरण हो चुका है। ऐसे में सरकार प्रायोजित इस बैठक के पीछे छिपी मंशा को लेकर लोगों के मन में संदेह है। उन्होंने लिखा है हेमंत सोरेन जेएमएम जी, अगर सुरक्षा व्यवस्था करनी ही है, तो सिर्फ चर्च के लिए क्यों? सरना, मसना, हड़गड़ी स्थल, ज़ाहिर थान, मांझी थान, मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों की भी सुरक्षा की चिंता क्यों नहीं? सिमडेगा में होने वाली बैठक का मूल एजेंडा सार्वजनिक किया जाए, या फिर सभी धर्म/समाज के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर उनसबों के धर्मस्थलों के सुरक्षा पर चर्चा की जाए।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की घोषणा: बच्चों के किडनी संक्रमण के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी

किडनी संक्रमण से प्रभावित बच्चों के उपचार का पूरा व्यय शासन द्वारा किया जायेगा वहन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव नागपुर के अस्पतालों में की गई है बच्चों के उपचार की व्यवस्था भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किडनी संक्रमित बच्चों के उपचार के लिए संपूर्ण व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। छिंदवाड़ा और बैतूल जिले के बच्चों का उपचार नागपुर के चिकित्सा संस्थानों में हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किडनी संक्रमण से प्रभावित बच्चों का अच्छे से अच्छा उपचार हो इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। नागपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज सहित एम्स अस्पताल,कलर्स हॉस्पिटल, न्यू हेल्थ सिटी हॉस्पिटल और गेटवेल हॉस्पिटल में बच्चों का इलाज जारी है। कलेक्टर छिंदवाड़ा और बैतूल द्वारा बच्चों के परिवारों से सतत संपर्क रखते हुए आवश्यक सहायता दी जा रही है। भोपाल से भी बच्चों के उपचार और स्वास्थ्य लाभ की नियमित जानकारी प्राप्त की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 9 बच्चों के उपचार के लिए संपूर्ण राशि प्रभावित परिवारों को राशि उपलब्ध करवाने को कहा है। सहायता के लिए दल गठित मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर कलेक्टर छिंदवाड़ा ने नागपुर में उपचार करवा रहे बच्चों की सहायता के लिए तीन दल गठित किए हैं। इन दलों में कार्यपालक मजिस्ट्रेट सहित एक विशेषज्ञ चिकित्सक को दायित्व दिया गया है। इन दलों द्वारा प्रभावित परिवारों से सतत संपर्क किया जा रहा है जिससे उपचार में किसी तरह की कोई समस्या न हो।  

मंत्री सुश्री भूरिया ने उन्नत पशुपालन, पोषण और पशु स्वास्थ्य को लेकर दिए महत्वपूर्ण सुझाव

झाबुआ दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादन को दुगुना करने के विजन को धरातल पर उतारने के लिये ‘दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान’ के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने झाबुआ जिले के ग्राम कमलखेड़ा में पशुपालकों से घर जाकर सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने उन्नत पशुपालन, पोषण और पशु स्वास्थ्य को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। मंत्री सुश्री भूरिया ने पशुपालक श्री चावड़ा से उनके घर पहुँचकर संवाद किया। इस दौरान मंत्री सुश्री भूरिया ने उन्हें उन्नत नस्ल के पशुपालन, हरा चारा, और संतुलित पशु आहार के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और उच्च उत्पादकता वाले पशु ही दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सपना है कि प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जाए और इसी दिशा में यह अभियान एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि 2 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक चल रहे इस राज्यस्तरीय अभियान के अंतर्गत उन पशुपालकों से सीधी भेंट की जा रही है जिनके पास 10 या अधिक मादा पशु हैं। उन्होंने कहा कि दुग्ध समृद्धि केवल पशुपालन नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस पहल है। नोडल अधिकारी डॉ. मगनानी ने पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान, पशु पोषण और उपचार के विषय में तकनीकी जानकारी दी। उप संचालक पशुपालन डॉ. ए.एस. दिवाकर ने सेक्स सॉर्टेड सीमन तकनीक की जानकारी दी, जिससे 90% तक बछिया प्राप्त होने की संभावना होती है। उन्होंने पशुपालकों को संतुलित पशु आहार अपनाने और सांची दुग्ध संघ को दूध प्रदाय करने के लिए प्रेरित किया। ग्राम कमलखेड़ा के अन्य पशुपालक भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे और उन्होंने अभियान से जुड़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।  

देश के पहले भिक्षुक मुक्त शहर इंदौर में फिर न हो भिक्षावृत्ति, सूचना देने वालों को कलेक्टर का इनाम

इंदौर स्वच्छता में देश भर में कीर्तिमान स्थापित करने के बाद इंदौर ने अब देश का पहला भिक्षुक मुक्त शहर होने का गौरव भी हासिल किया है। इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान को और भी सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने निर्देश दिए हैं कि शहर में कहीं भी भिक्षावृत्ति पाए जाने पर उसकी सटीक सूचना देने वाले व्यक्ति को 1000 रुपए का इनाम दिया जाएगा।  शहर को भिक्षुक मुक्त बनाए रखने के लिए कलेक्टर शिवम वर्मा ने भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान को और सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस अभियान के तहत, शहर में कहीं भी भिक्षावृत्ति की सूचना देने वाले को 1000 रुपये का इनाम दिया जाएगा। प्रशासन ने भिक्षावृत्ति रोकने के लिए एक विस्तृत रणनीति बनाई है और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष निगरानी रखने का निर्णय लिया है। भिक्षुओं के पुनर्वास और सहायता के लिए विशेष रेस्क्यू टीमें भी गठित की जाएंगी। कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठक कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में भिक्षावृत्ति रोकने के लिए विस्तृत रणनीति बनाई गई। उन्होंने निर्देश दिया कि शहर में किसी भी स्थान पर पुनः भिक्षावृत्ति शुरू न हो, इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाए। कलेक्टर वर्मा ने कहा कि इंदौर की स्वच्छता के साथ सामाजिक स्वच्छता भी हमारी प्राथमिकता है। भिक्षुक मुक्त इंदौर एक संवेदनशील और आत्मनिर्भर समाज की दिशा में बड़ा कदम है। इन इलाको में विशेष निगरानी बड़ा गणपति, रेलवे स्टेशन, सत्य साईं चौराहा, प्रमुख मठ-मंदिरों, आश्रमों और सार्वजनिक स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इन स्थानों पर यदि किसी को भिक्षुक दिखाई दें तो कोई भी तत्काल तय हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दे सकता है। सूचना सही पाए जाने पर सूचना देने वाले को 1000 रुपए का इनाम दिया जाएगा। भिक्षुकों के पुनर्वास के लिए योजना भिक्षुकों के पुनर्वास और सहायता के लिए भी जिला प्रशासन ने योजनाबद्ध कदम उठाए हैं। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग, नगर निगम, होमगार्ड, श्रम विभाग, राजकीय बाल संरक्षण आश्रम और विशेष पुलिस किशोर इकाई के अधिकारियों-कर्मचारियों को शामिल करते हुए विशेष रेस्क्यू टीम बनाई जाएगी। टीम बनाकर होगी कार्रवाई कलेक्टर ने कहा कि ऐसी दो-तीन टीमें शहर में अलग-अलग स्थानों पर लगातार कार्रवाई करें, ताकि कहीं भी भिक्षावृत्ति नहीं हो। भिक्षा मांगना भी अपराध है और भिक्षा देना भी इसी श्रेणी में आता है, जो लोग भिक्षावृत्ति की सूचना देते हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि भिक्षावृत्ति करने वालों को रोकना ही नहीं, उन्हें आजीविका से जोड़ने के लिए भी योजनाएं बनाई जाए। बैठक में इन तैयारियों पर भी चर्चा भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए रेस्क्यू करने वाली टीमें इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जिन लोगों ने पूर्व में भिक्षावृत्ति छोड़ दी क्या वे पुन: इसी क्षेत्र में वापस आ रहे हैं। नशा करने वाले किशोर और युवा भिक्षावृत्ति के क्षेत्र में संलिप्त हैं। वे आपराधिक प्रवृत्ति के हैं। ऐसे किशोर-युवाओं को सुधार गृह भेजकर उनकी काउंसलिंग कराई जाए। सार्वजनिक स्थानों पर लिखें 'बच्चों को भीख नहीं, सीख दीजिए', 'आओ मिलकर भिक्षावृत्ति मुक्त इंदौर बनाएं।' भिक्षावृत्ति रोकने के लिए गलियों, चौराहों पर नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से प्रचार किया जाए। इस काम में छात्र-छात्राओं एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं के युवाओं को जोड़ा जाए। रेस्क्यू टीम का किया गठन भिक्षुकों के पुनर्वास और सहायता के लिए भी जिला प्रशासन ने योजनाबद्ध कदम उठाए हैं। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग, नगर निगम, होमगार्ड, श्रम विभाग, राजकीय बाल संरक्षण आश्रम और विशेष पुलिस किशोर इकाई के अधिकारियों-कर्मचारियों को शामिल करते हुए विशेष रेस्क्यू टीम बनाई जाएगी। आजीविका से जोड़ने के लिए भी बनाएं योजना कलेक्टर ने कहा कि ऐसी दो-तीन टीमें शहर में अलग-अलग स्थानों पर लगातार कार्रवाई करें, ताकि कहीं भी भिक्षावृत्ति नहीं हो। भिक्षा मांगना भी अपराध है और भिक्षा देना भी इसी श्रेणी में आता है, जो लोग भिक्षावृत्ति की सूचना देते हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि भिक्षावृत्ति करने वालों को रोकना ही नहीं, उन्हें आजीविका से जोड़ने के लिए भी योजनाएं बनाई जाए। इन बातों का रखना होगा खास ध्यान भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए रेस्क्यू करने वाली टीमें इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जिन लोगों ने पूर्व में भिक्षावृत्ति छोड़ दी क्या वे पुन: इसी क्षेत्र में वापस आ रहे हैं। नशा करने वाले किशोर और युवा भिक्षावृत्ति के क्षेत्र में संलिप्त हैं। वे आपराधिक प्रवृत्ति के हैं। ऐसे किशोर-युवाओं को सुधार गृह भेजकर उनकी काउंसलिंग कराई जाए। सार्वजनिक स्थानों पर लिखें "बच्चों को भीख नहीं, सीख दीजिए", "आओ मिलकर भिक्षावृत्ति मुक्त इंदौर बनाएं'। भिक्षावृत्ति रोकने के लिए गलियों, चौराहों पर नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से प्रचार किया जाए। इस काम में छात्र-छात्राओं एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं के युवाओं को जोड़ा जाए। 800 भिक्षुओं का किया पुनर्वास बैठक में राजकीय बाल संरक्षण आश्रम के सुपरिटेंडेंट दिनेश मिश्रा ने बताया कि शहर में भिक्षावृत्ति रोकने के लिए जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग एक विशेष अभियान चलाया था। इसमें दल को विशेष सफलता मिली। दल ने पाया कि इंदौर में भिक्षावृत्ति करने वालों की संख्या 6500 से अधिक है। इसमें बच्चे, किशोर, युवाओं से लेकर वृद्धजन तक शामिल हैं। इसमें बड़ी संख्या महिलाओं की भी है। कुछ लोग आदतन भिक्षावृत्ति करते हैं, जबकि कुछ लोग दूसरों से भिक्षावृत्ति कराते हैं। टीम ने ऐसे सभी भिक्षुओं की काउंसलिंग की। इसमें से 4500 लोगों को रेस्क्यू किया गया। भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान में 800 लोगों को पुनर्वास किया गया। इनमें 115 बच्चे और किशोर थे। भीख मांगने वाले 172 बच्चों को विभिन्न स्कूलों में प्रवेश दिलाया गया है।  

मैथिली ठाकुर का राजनीतिक रुख साफ? BJP नेताओं से मुलाकात के बाद जताई चुनावी मंशा

जबलपुर   बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी हुई है। चुनावों के लिए कौन सी पार्टी किस दावेदार के साथ उतरेगी ये तमाम अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे ही एक दावे की चर्चा लोकप्रिय गायिका मैथिली ठाकुर को लेकर भी चल रही है। दावा किया जा रहा है कि मैथिली ठाकुर 2025 का विधानसभा चुनाव लड़ सकती हैं। मैथिली की बीजेपी के नेताओं से मुलाकात के बाद इस तरह की चर्चा होने लगी है। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान उनके पिता भी साथ में थे।   मैथिली बोलीं- देखते हैं क्या होता है वहीं, जबलपुर पहुंची भक्ति गायिका मैथिली ठाकुर ने अपने चुनाव लड़ने की खबरों पर कहा, "मैं भी टीवी पर ये सब देख रही हूं। हाल ही में मैं बिहार गई थी और मुझे नित्यानंद राय और विनोद तावड़े से मिलने का मौका मिला। हमने बिहार के भविष्य पर चर्चा की। अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। देखते हैं क्या होता है। मैं अपने गांव के निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहूंगी, क्योंकि मुझे उससे लगाव है" बिहार चुनाव में वह किसे समर्थन दे रही हैं, इस पर उन्होंने कहा, "मैं अभी इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती। मैं देश के विकास में हर संभव योगदान देने के लिए पूरी ताकत से खड़ी हूं"    ये है मामला दरअसल, विनोद तावड़े ने बीते रविवार को अपने एक्स हैंडल से तस्वीरें शेयर कर लिखा था, "वर्ष 1995 में बिहार में लालू राज आने पर जो परिवार बिहार छोड़कर चले गए, उस परिवार की बिटिया सुप्रसिद्ध गायिका मैथिली ठाकुर जी बदलते बिहार की रफ्तार को देखकर फिर से बिहार आना चाहती हैं। आज गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय जी और मैंने उनसे आग्रह किया कि बिहार की जनता के लिए और बिहार के विकास के लिए उनका योगदान बिहार का सामान्य आदमी अपेक्षित करता है और वे उनकी अपेक्षाओं को पूरा करें। बिहार की बिटिया मैथिली ठाकुर जी को अनंत शुभकामनाएं!" 

‘बेटे को बढ़ाएं या बेटी को दें चांस’ – भाजपा ने लालू यादव पर साधा निशाना

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों के ऐलान के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने सोमवार 6 अक्टूबर को घोषणा की कि बिहार में 243 विधानसभा सीटों के लिए मतदान दो चरणों में 6 नवंबर और 11 नवंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को होगी। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के तुरंत बाद भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव पर निशाना साधा। त्रिवेदी ने कहा कि लालू यादव 'अपने बेटों और बेटियों के बीच दुविधा में हैं' और परिवार में 'संकट' की स्थिति है। उन्होंने महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में तेजस्वी यादव की दावेदारी पर भी सवाल उठाया। त्रिवेदी ने कहा, 'वे खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार पेश कर रहे हैं, लेकिन उनके गठबंधन के लोग ऐसा नहीं कह रहे। उन्होंने कई बार राहुल गांधी को प्रधानमंत्री कहा, लेकिन राहुल गांधी ने उन्हें (सीएम उम्मीदवार) नहीं कहा। अब स्थिति परिवार के भीतर भी अलग है।' त्रिवेदी ने बिहार में एनडीए की जीत का दावा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने कहा, 'बिहार और पूरे देश की जनता देख रही है कि केंद्र में पीएम मोदी और राज्य में सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में किस तरह सकारात्मक दिशा में बदलाव आया है।' भाजपा नेता ने कहा कि इसलिए हमें विश्वास है कि भाजपा-एनडीए के पक्ष में मजबूत और प्रभावी जनादेश मिलेगा। चुनाव आयोग के अनुसार पहले चरण में 121 सीटों पर और दूसरे चरण में 122 सीटों पर मतदान होगा। पटना सहित केंद्रीय और उत्तरी बिहार के जिले पहले चरण में मतदान करेंगे, जबकि सीमांचल और नेपाल सीमा से लगे जिले दूसरे चरण में मतदान करेंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस बार बिहार में 7.43 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 14 लाख पहली बार वोट डालेंगे। चुनाव प्रक्रिया 16 नवंबर तक पूरी कर ली जाएगी। राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो, एनडीए की अगुवाई मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कर रहे हैं, जबकि विपक्षी महागठबंधन का नेतृत्व तेजस्वी यादव कर रहे हैं।

सदर अस्पताल रांची में इतिहास: पहली बार बाएं तरफ की गॉल ब्लैडर स्टोन का सफल ऑपरेशन

रांची झारखंड के रांची के सदर अस्पताल में एक अनोखी और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में सफलता हासिल की गई है। पहली बार बाएं तरफ गॉल ब्लैडर स्टोन की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई, जो एक कंप्लीट सूट्स इनवर्सस केस था। इस दुर्लभ बीमारी में शरीर के अंग जैसे हृदय, पित्ताशय, आदि, अपने सामान्य स्थान की बजाय उल्टे हिस्से में होते हैं। यह स्थिति लगभग 10,000 से 20,000 मरीजों में एक बार ही देखने को मिलती है। इस सफल ऑपरेशन का नेतृत्व सदर अस्पताल के लेप्रोस्कोपिक सर्जरी विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अजीत कुमार ने किया। ऑपरेशन के दौरान डॉ. अजीत और उनकी टीम ने बेहद सावधानी से काम किया क्योंकि इस तरह के मरीजों का ऑपरेशन करना बहुत मुश्किल होता है। सर्जन को उल्टी तरफ खड़े होकर ऑपरेशन करना पड़ता है, जो सामान्य शल्य चिकित्सा के विपरीत होता है। मरीज बी. बाड़ा, जो बेड़ो थाना के ईंटा चिंद्ररी की रहने वाली हैं और फिलहाल मोराबादी में रहती हैं, पिछले दो-तीन महीनों से पेट दर्द से परेशान थीं। जांच में पता चला कि उन्हें गंभीर बीमारी एक्यूट पेनक्रिएटाइटिस है और उनके पित्ताशय में कई पत्थर हैं जो सामान्य के विपरीत बाएं तरफ स्थित हैं। इको और सीटी स्कैन से यह भी पता चला कि उनका हृदय दाहिनी बजाय बाएँ तरफ है, यह पूरी स्थिति कंप्लीट सूट्स इनवर्सस दर्शाती है। मरीज के पति जोसेफ उरांव जो खेती-किसानी करते हैं, ने अस्पताल प्रशासन और डॉ. अजीत की टीम को धन्यवाद दिया। उनका इलाज आयुष्मान योजना के तहत पूरी तरह नि:शुल्क किया गया। इस ऑपरेशन में एडवांस्ड लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. अजीत कुमार, एनेस्थेटिस्ट डॉ. वसुधा गुप्ता, डॉ. विकास बल्लभ, सिस्टर स्नेहलता, और ओटी स्टाफ सहित संदीप, संतोष, सृष्टि, सुरेश, अमन, विरंजन, कल्पना व नंदिनी की टीम शामिल थी।  

कब होगी धान खरीदी? 10 अक्टूबर को कैबिनेट बैठक में हो सकता है फैसला

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 को सुबह 11:30 बजे मंत्रालय (महानदी भवन) अटल नगर, नवा रायपुर में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक आयोजित होगी। साय कैबिनेट की इस बैठक में धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू करने पर फैसला लिया जा सकता है। इसके अलावा NHM कर्मचारियों और राज्योत्सव की तैयारियों पर चर्चा हो सकती है। इससे पहले पिछली बैठक 30 सितंबर को हुई थी। पिछली बैठक में लिए गए फैसले पिछली कैबिनेट बैठक में 100 स्पेशल एजुकेटर के पदों पर सीधी भर्ती का निर्णय लिया गया। मंत्रिपरिषद ने दिव्यांगजनों के हित में बड़ा फैसला करते हुए राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम (NDFDC) की बकाया ऋण राशि ₹24,50,05,457 (चौबीस करोड़ पचास लाख पांच हजार चार सौ सत्तावन रुपये) एकमुश्त वापस करने का निर्णय लिया गया था। मंत्रिपरिषद ने स्पेशल एजुकेटर के पदों पर सीधी भर्ती के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के भर्ती एवं पदोन्नति नियम-2019 के प्रावधानों में एक बार के लिए छूट देने का निर्णय लिया गया। यहां यह उल्लेखनीय है कि वित्त विभाग द्वारा शिक्षा विभाग को राज्य में 100 स्पेशल एजुकेटर की भर्ती की अनुमति दी गई। शिक्षा विभाग के भर्ती नियम-2019 को शिथिल करते हुए स्पेशल एजुकेटर के पदों पर सीधी भर्ती चयन परीक्षा के स्थान पर एक बार मेरिट के आधार पर करने का अनुमोदन मंत्रिपरिषद ने प्रदान किया था।

बागमती के बाद अब बूढ़ी गंडक: मुजफ्फरपुर में मंडराया बाढ़ का खतरा

मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर जिले में बागमती नदी के बाद अब बूढ़ी गंडक नदी भी उफान पर आ गई है। बागमती नदी जहां पहले से ही खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और तटवर्ती इलाकों में कटाव मचा रही है, वहीं अब शहर के बीच से गुजरने वाली बूढ़ी गंडक के जलस्तर में भी तेजी से इजाफा देखा जा रहा है। नेपाल और तराई क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण जिले की नदियों में पानी बढ़ गया है, जिससे बाढ़ का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। बताया जा रहा है कि बागमती नदी ने औराई, कटरा और गायघाट में रौद्र रूप धारण कर लिया है, जबकि अब बूढ़ी गंडक भी उफान पर है और आसपास के इलाकों में पानी फैलने लगा है। स्थिति को देखते हुए शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोगों में दहशत का माहौल है। विशेषकर मुजफ्फरपुर शहर क्षेत्र के शेखपुर ढाब, अखाड़ा घाट, नाजीरपुर, लकड़ी ढाई, चंदवारा, आश्रम घाट और सिकंदरपुर जैसे इलाकों में खतरा बढ़ गया है, क्योंकि ये क्षेत्र बूढ़ी गंडक नदी के किनारे बसे हैं। अगर जलस्तर में और वृद्धि हुई, तो शहर के निचले इलाकों में पानी घुसने की संभावना है। जिला प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अलर्ट मोड अपनाया है। संबंधित विभागों को तटबंधों की निगरानी और मरम्मत का निर्देश दिया गया है। जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन को लगातार मॉनिटरिंग के आदेश दिए गए हैं। इधर, बागमती नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जिले के तीन प्रखंडों के कई गांवों में नदी का पानी घुस चुका है। कई स्कूलों में जलभराव होने से पठन-पाठन कार्य बाधित है, जबकि सड़कों पर पानी बहने से आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन ने संबंधित प्रखंडों के अंचल अधिकारियों और जल संसाधन विभाग को अलर्ट रहने का निर्देश दिया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।