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बिहार में हवाई सफर का विस्तार: मुजफ्फरपुर एयरपोर्ट के लिए शुरू हुई प्रक्रिया

रांची बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को बताया कि मुज़फ्फरपुर हवाई अड्डे के विकास और उन्नयन की एक महत्वपूर्ण परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गयी है। सम्राट चौधरी ने बयान जारी कर बताया कि इस परियोजना के तहत मौजूदा हवाई अड्डे को कोड-2बी श्रेणी के विमानों के संचालन योग्य बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत प्री-फैब स्टील संरचना आधारित टर्मिनल भवन, प्री-इंजीनियडर् एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) टावर, प्री-इंजीनियडर् अग्निशमन केंद्र तथा अन्य सहायक भवन और सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। यह संपूर्ण कार्य इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर संपन्न किया जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत 28.58 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। निर्माण कार्य की अवधि 11 माह तय की गई है, एयरपोट्र्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने इस परियोजना के लिए ऑनलाइन ई-टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। क्षेत्रीय संपर्क, निवेश और पर्यटन को मिलेगी नई गति उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि मुज़फ्फरपुर हवाई अड्डे का उन्नयन उत्तर बिहार में हवाई सेवा का विस्तार है। इससे क्षेत्रीय संपर्क, निवेश और पर्यटन को नई गति मिलेगी। साथ ही उत्तर बिहार के लोगों को आधुनिक और बेहतर हवाई सेवा, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम बिहार को विमानन क्षेत्र में नई ऊंचाई प्रदान करेगा और राज्य के आर्थिक तथा सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि केंद्र की नरेन्द्र मोदी और प्रदेश में नीतीश कुमार के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार, बिहार में हवाई सेवा को विश्वस्तरीय बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हाल में ही पटना के लोक नायक जयप्रकाश नारायण हवाई अड्डा का जहां कायाकल्प हुआ है, वहीं गया हवाई अड्डा को भी अपग्रेड किया गया है। सूबे में उड़ान योजना के तहत दरभंगा और पूर्णिया हवाई अड्डा से देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए हवाई सेवा का लाभ बिहार के लोगों को मिल रहा है। और अब इसी कड़ी में मुज़फ्फरपुर हवाई अड्डा का विकास इसे नई उंचाई पर पहुंचाएगा।

17 अक्टूबर: रांची में आदिवासियों का शोर, कहा – कुछ समाज खुद को आदिवासी दिखा रहे हैं

  रांची झारखंड में कुरमी समुदाय को आदिवासी सूची में शामिल करने की मांग को लेकर गहराता विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। इसके विरोध में राज्यभर के आदिवासी संगठनों ने 17 अक्तूबर को राजधानी रांची के प्रभात तारा मैदान में आदिवासी हुंकार महारैली आयोजित करने का एलान किया है। इस महारैली में लाखों की संख्या में आदिवासियों के जुटने की संभावना है। शनिवार को सिरम टोली सरना स्थल पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा और पूर्व मंत्री देवकुमार धान समेत कई आदिवासी नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन आदिवासियों के अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। गीताश्री उरांव ने कहा कि कुरमी समाज आदिवासियों के संवैधानिक हक, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आरक्षण, जमीन और गौरवशाली इतिहास पर कब्जा करने की साजिश रच रहा है। कल तक हमें असभ्य और जाहिल कहने वाले आज खुद को आदिवासी साबित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। लेकिन सभी ऐतिहासिक प्रमाण, मानवशास्त्रीय अध्ययन, डीएनए शोध और लोकुर कमेटी की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि कुरमी जाति आदिवासी/अनुसूचित जनजाति नहीं है। नेताओं ने आरोप लगाया कि कुरमी समाज अपने आपको आदिवासी दिखाने के लिए ऐतिहासिक विद्रोहों में झूठे तरीके से अपने नेताओं को जोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि चुआड़ विद्रोह में रघुनाथ महतो, कोल विद्रोह में बुली महतो और संथाल विद्रोह में चान्कू महतो जैसे नामों को जबरन आदिवासी इतिहास में घुसाया जा रहा है, जबकि यह ऐतिहासिक सच्चाई के साथ छल है। केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि 17 अक्तूबर की रैली आदिवासी समाज की एकता और ताकत का प्रदर्शन होगी। उन्होंने मांग की कि एसटी आरक्षण की पात्रता की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित की जाए ताकि कोई भी समुदाय फर्जी इतिहास गढ़कर आदिवासी अधिकारों पर अतिक्रमण न कर सके। आदिवासी संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि कुरमी को आदिवासी सूची में शामिल करने का हर प्रयास आदिवासी समाज को हाशिए पर डालने की साजिश है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 17 अक्टूबर को रांची में होने वाली यह हुंकार महारैली आदिवासी एकजुटता और अस्तित्व की बड़ी परीक्षा मानी जा रही है।

बाढ़ राहत पैकेज जल्द शुरू! पंजाब में 10 से 15 अक्टूबर तक भुगतान का आदेश

लहरागागा मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज घोषणा की कि 10 से 15 अक्टूबर तक बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा देना शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार दिवाली से पहले ही लोगों को मुआवजा देने की शुरुआत कर देगी। इसके साथ ही उन्होंने घग्गर नदी के किनारे रहने वाले लोगों की मेहनत की भी बहुत सराहना की, जिन्होंने बांध को मजबूत बनाने के लिए कड़ी मेहनत की और घग्गर को ओवरफ़्लो नहीं होने दिया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज संगरूर के हल्का लहीरागागा के लोगों को कई बड़े तोहफे दिए। उन्होंने बिजली बोर्ड के कार्यालय का उद्घाटन किया। इसके अलावा इलाके में नए तहसील परिसर का उद्घाटन भी किया गया, जिसकी लागत 16 करोड़ रुपये है। इसके साथ ही एक फाउंडेशन द्वारा तैयार किए गए ‘सौरव कॉम्प्लेक्स’ कम्युनिटी हॉल को भी जनता के लिए समर्पित किया गया, जिसमें लोग विवाह-शादियों और अन्य कार्यक्रम करवा सकते हैं। उन्होंने पुरानी सब्जी मंडी में कम्युनिटी रसोई की भी शुरुआत की, जिसमें लोग केवल 10 रुपये में ढेर सारी रोटियां खा सकते हैं। इसके बाद उन्होंने जरूरतमंद परिवारों की 101 लड़कियों के सामूहिक विवाह समारोह में भी हिस्सा लिया। 

खजाने की हुई बरसात! माता टेकरी में भक्तों ने दिया दिल खोलकर दान, करोड़ों के रत्न और विदेशी नोट बरामद

देवास नवरात्र में माता टेकरी पर दर्शन करने पहुंचे लगभग दस लाख भक्तों की आस्था से भरी दान पेटियां शनिवार को खोली गईं। शनिवार को बड़ी माता मां तुलजा भवानी और छोटी माता मां चामुंडा के दोनों मंदिरों की कुल 24 दान पेटियों की गिनती सुबह 11 बजे शुरू हुई और शाम करीब 6 बजे तक चलती रही। दान पेटियों से लगभग 44 लाख रुपये प्राप्त हुए। इसके अलावा नवरात्र में माता को एवं दान पेटियों में कई आभूषण भी भक्तों ने अर्पित किए। नवरात्र पर लाखों भक्तों ने किए दर्शन नवरात्र के दौरान माता टेकरी पर देश-विदेश के लाखों भक्त दर्शन के लिए आए और भारी मात्रा में चढ़ावा चढ़ाया। नवरात्र समाप्त होने के बाद शनिवार को माता टेकरी पर स्थित मंदिरों की दान पेटियों को खोला गया। सुबह करीब 10 बजे से टेकरी पर मंदिरों में तहसीलदारों की निगरानी में पेटियों को खोला गया और दान की संपूर्ण राशि बोरियों में भरकर देव स्थान प्रबंध समिति कार्यालय में लाई गई। दान पेटियों से निकले दान के अलावा ऑनलाइन, क्यूआर व रसीद के माध्यम से भी भक्तों ने दान किया है।   नवरात्र के दौरान टेकरी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही बता दें कि पूरे नवरात्र के दौरान टेकरी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। इस दौरान व्यवस्था और सुरक्षा के लिए कलेक्टर ऋतुराज सिंह, एसपी पुनीत गेहलोद सहित सभी वरिष्ठ अधिकारी माता टेकरी पर मौजूद रहे। नवरात्र में करीब 800 सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर तैनात थे। कोटवार, पटवारी, आरआई व तीन तहसीलदार शामिल हैं। दान पेटियों से भगवान को अर्पित किए गए दानों में आभूषण और नेपाल, सिंगापुर सहित अन्य देशों के करेंसी नोट भी पाए गए। इस दौरान मंदिर समिति के सदस्य, पटवारी, कोटवार, राजस्व निरीक्षकों सहित 100 से अधिक कर्मचारी गिनती में शामिल रहे। साथ ही तहसीलदार सपना शर्मा, हरिओम ठाकुर ने भी गिनती में सहयोग के साथ निगरानी की। दान और पत्रों की संपूर्ण गिनती पारदर्शी तरीके से सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में की गई। 52 लाख 92 हजार 868 रुपये दान में आए इस नवरात्र में रसीद के माध्यम 3 लाख 61 हजार 280 रुपये और दान पेटियों में 43 लाख 91 हजार 588 रुपये प्राप्त हुए। बैंक बार कोड के माध्यम से 5 लाख 40 हजार रुपये नवरात्र में प्राप्त हुए। कुल 52 लाख 92 हजार 868 रुपये शारदीन नवरात्र में भक्तों ने दान दिया। इसके अलावा चांदी के 11 छत्र, एक चांदी का मुकुट, 5 जोड़ी बिछिया, 4 स्वास्तिक, 8 जोड़े पायल दान पेटियों से प्राप्त हुए। नवरात्र में कुछ दर्शनार्थियों ने माता को चांदी के हार भी चढ़ाए थे। साथ ही नवरात्र में छोटी माता जी को एक स्वर्ण मुकुट और एक जोड़े सोने के कंगन भी भक्तों ने अर्पित किए। पिछले साल 45 लाख 51 हजार रुपये प्राप्त हुए माता टेकरी प्रभारी तहसीलदार हरिओम ठाकुर ने बताया कि शनिवार को बड़ी माता मंदिर की 11 और छोटी माता मंदिर की 13 दान पेटियां खोली गईं। नवरात्र के पूर्व सभी पेटियां 19 सितंबर को खोली गई थी। सामान्यत: नवरात्र के पूर्व और नवरात्र के बाद सभी मंदिरों की दान पेटियां खोली जाती हैं। इसके अलावा तीन-चार माह के अंतर में नियमित रूप से दान पेटियां खोली जाती हैं। बता दें कि विगत वर्ष शारदीय नवरात्र में दान पेटियों से लगभग 45 लाख 51 हजार रुपये दान व आभूषण प्राप्त हुए थे।

वैश्विक जिओपार्क की दिशा में कदम: धार के बाग को मिलने की उम्मीद अनुशंसा

 धार  यूनेस्को के वैश्विक जिओपार्क के कार्यकारी विज्ञानी डॉ. अलीरेजा (ईरान) एवं लखनऊ के विज्ञानी डॉ. सतीश त्रिपाठी और खोजेमा नजमी (भू-गर्भशास्त्र विशेषज्ञ) ने बाग क्षेत्र स्थित डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान का गुरुवार को निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने उद्यान में संरक्षित किए गए डायनासोर के जीवाश्म, विभिन्न प्रकार की चट्टानों, समुद्री जीवों के जीवाश्म और वानस्पतिक जीवाश्मों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। डॉ. अलीरेजा ने जीवाश्म की प्रचुर मात्रा को देख आश्चर्य व्यक्त किया एवं वनमंडल धार द्वारा जीवाश्म संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों को सराहा। डॉ. अलीरेजा ने डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान को वैश्विक जिओपार्क की मान्यता के लिए प्रस्तावित करने की अनुशंसा की बात कही। बाग गुफाओं का सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक स्तर पर अध्ययन करने पर विशेष जोर दिया गया है। जीवाश्मों का डिजिटल डाक्यूमेंटेशन डॉ. त्रिपाठी ने सभी जीवाश्मों की विशेषता बताई एवं शोध व संरक्षण की भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। वनमंडलाधिकारी धार विजयनंथम टीआर ने बताया कि डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान को आधुनिक जिओपार्क बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। समस्त जीवाश्मों का डिजिटल डाक्यूमेंटेशन भी किया जाएगा, जो इसे वैश्विक पहचान देगा। उपवनमंडलाधिकारी संतोष कुमार रनशोरे द्वारा बाग के आसपास स्थित समस्त जीवाश्म स्थलों एवं बाग की गुफाओं की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों के दल के साथ वन परिक्षेत्र अधिकारी डॉ. शैलेंद्र सोलंकी एवं सुनील बघेल व वेस्ता मंडलोई उपस्थित रहे। संपूर्ण डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण कराया गया एवं आज दिवस तक किए गए प्रयासों के बारे में जानकारी दी गई।

भोपाल का पर्यावरण फ्रेंडली इनोवेशन, दुर्गा पूजा में चढ़े नींबुओं से बनेगा प्राकृतिक क्लीनिंग स्प्रे

भोपाल  नवरात्रि के दौरान शहर में 5000 दुर्गा पंडाल बनाए गए थे। इन पंडालों में दुर्गा प्रतिमाओं पर नींबू चढ़ाए गए थे। अब ये नींबू बेकार नहीं जाएंगे। नगर निगम ने अनूठा कदम उठाते हुए इन नींबुओं का उपयोग पर्यावरण संरक्षण के लिए किया है। इन नींबूओं को इकट्ठा कर बायो एंजाइम तैयार किया जाएगा। यह तालाब और कुंडों की सफाई में इस्तेमाल होगा। दरअसल, शहर में 'वेस्ट टू वेल्थ' यानी बेकार चीजों से पैसे कमाने की दिशा में भोपाल में नवाचार किया जा रहा है। इसके लिए दुर्गा पूजा के बाद प्रतिमाओं को चढ़ाए गए नीबूओं को इकट्ठा किया गया है। इसमें अन्य सामग्री मिलाकर एक स्प्रे तैयार होगा। दुर्गा पंडालों से इकट्ठा हुए 2 टन नींबू नगर निगम के अफसरों का अनुमान है कि इस नवरात्रि में भोपाल में अलग-अलग दुर्गा जी की प्रतिमाओं से 2 टन से ज्यादा नींबू इकट्‌ठा हुए हैं। इन नीबूओं के उपयोग से 10 हजार लीटर स्प्रे तैयार किया जाना है। इस स्प्रे में संतरे के छिलके और सड़े गुड़ को भी मिलाया जाएगा। इसके बाद तालाब-कुंड में डाला जाएगा। इस एंजाइम से पानी साफ और स्वच्छ होगा। गणेशोत्सव से शुरू हुआ था प्रयोग गौरतलब है कि पिछले दिनों हुए गणेश उत्सव के दौरान भी बायो एंजाइम बनाने का प्रयोग किया गया था, जो कि सफल रहा था। हालांकि उस समय इतनी अधिक मात्रा में नींबू इकट्‌ठा नहीं हुए थे। लेकिन अब नवरात्रि के 9 दिनों में करीब 5 हजार पंडाल में निगम की निर्माल्य सामग्री इकट्ठा किया। इनमें से नींबू को अलग कर बायो इंजाइम बनाने की प्रक्रिया शुरू की। शुरूआती 6 दिनों में 2 टन नींबू जमा हुए, लेकिन आखिरी 3 दिन में ही नींबूओं की मात्रा 8 टन से ज्यादा हो गई। ऐसे बनता है बायो एंजाइम दुर्गा पंडालों में पूजन सामग्री में से नीबू को अलग इकट्ठा किया जाता है। नीबू को मशीन में डालकर रस निकाला जाता है। इसे केन के अंदर भरा जाता है। यह नींबू, संतरे के छिलकों, सड़े ‎गुड़ और पानी को मिलाकर बनाया‎ जाता है। 10 से 15 दिन में यह तैयार हो जाता है। यह है फायदा जिस जल में प्रदूषण के ‎कारण ऑक्सीजन की मात्रा‎ कम हो जाती है। वहां पर बायो एंजाइम को मिलाया जाता है। यह पानी ‎को प्राकृतिक तरीके से साफ करता ‎है। बायो इंजाइम एक प्राकृतिक, ‎गैर-विषैले और पर्यावरण के अनुकूल ‎क्लीनर का काम करता है। इसका ‎उपयोग कपड़े धोने के साथ बर्तन ‎और हाथ धोने के लिए भी किया जा ‎सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 5 अक्टूबर को असम में निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे; मध्य प्रदेश बना निवेश का प्रमुख केंद्र

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, आज रविवार 5 अक्टूबर को असम के गुवाहटी में पूर्वोत्तर राज्यों के निवेशकों सहित भूटान के प्रतिनिधियों से वन टू वन चर्चा करेंगे। सेशन को रॉयल भूटान काउन्सलेट के काउंसिल जनरल  जिग्मे थिनायल नामग्याल भी संबोधित करेंगे।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश के निवेश के प्रमुख सेक्टर और उद्योग-अनुकूल नीतियों की जानकारी देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की संकल्पबद्धता और राज्य की मजबूत नीतियां निवेशकों को भरोसा देती हैं कि उनके व्यवसाय के लिए प्रदेश में हर तरह के संसाधन और अवसर उपलब्ध हैं। यह अवसर पूर्वोत्तर और मध्यप्रदेश के उद्योगों के लिए साझी संभावनाओं का नया मार्ग खोलेगा।  मध्यप्रदेश की केन्द्रीय भौगोलिक स्थिति, विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा और बाजार तक आसान पहुंच इसे निवेशकों के लिए सर्वाधिक अनुकूल और एक अनूठा केंद्र बनाती है। मध्यप्रदेश ने उद्योग-अनुकूल नीतियां और क्लस्टर आधारित विकास मॉडल तैयार किए हैं, जिससे निवेशक अपनी नए उद्योग की योजना को तेजी से क्रियान्वित कर सकते हैं। राज्य के एग्रो और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में निवेशकों को कृषि उत्पादन और प्रोसेसिंग क्षमताओं का लाभ मिलता है। टेक्सटाइल्स और अपैरल सेक्टर राज्य की परंपरागत और आधुनिक क्षमता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिससे निर्यात और रोजगार दोनों में वृद्धि संभव होती है। फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में मध्यप्रदेश की ताकत निवेशकों को कच्चे माल, अनुसंधान एवं विकास और उत्पादन के अवसर प्रदान करती है। सीमेंट, मिनरल्स और इंजीनियरिंग, पेट्रोकेमिकल्स और केमिकल्स, टूरिज्म और वेलनेस, रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी इक्विपमेंट तथा प्लास्टिक्स और पॉलिमर्स जैसे सेक्टर राज्य को निवेश के लिए बहुआयामी विकल्प प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल से इन क्षेत्र में निवेश केवल व्यवसाय ही नहीं बल्कि आर्थिक विकास और स्थायी अवसरों का रास्ता बन रहा है। मध्यप्रदेश पूर्वोत्तर के उद्योगपतियों के लिए निवेश का आदर्श स्थल है। असम और अन्य राज्यों में फैले फार्मा हब, सीमेंट यूनिट्स, टी-रिसर्च और प्लांटेशन, लॉजिस्टिक केंद्र और पेट्रोकेमिकल्स जैसी सुविधाओं के साथ मध्यप्रदेश निवेशकों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक और भरोसेमंद वातावरण प्रदान करता है।  

रेल लाइन के लिए 16 सुरंगें, महू-खंडवा प्रोजेक्ट में 17 हजार पेड़ों की रक्षा का आश्वासन

इंदौर  महू-खंडवा रेलवे प्रोजेक्ट शुरू करने को लेकर कवायद तेज हो गई है। शुक्रवार को भोपाल में रीजनल इंपावरमेंट कमेटी (आरईसी) की बैठक में प्रोजेक्ट से जुड़े पर्यावरण मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें जंगल में बिछाई जाने वाली पटरी और निर्माण कार्यों पर सहमति बन चुकी है। गेज परिवर्तन के तहत इंदौर-बड़वाह वनमंडल की 454 हेक्टेयर वनभूमि आएगी, जिसमें एक लाख 52 हजार पेड़ चिह्नित किए गए हैं। हालांकि 17 हजार पेड़ों को बचाया जा सकेगा, क्योंकि इस पूरे रेल मार्ग पर 20 किमी लंबी 16 सुरंगें बनाई जाएंगी। इस कारण इन पेड़ों को काटा नहीं जाएगा। साथ ही रेलवे ने यह भी सुनिश्चित किया कि मार्ग में जगह-जगह अंडरपास बनाए जाएंगे, जिससे पेड़ों को बचा सकेंगे। हालांकि महीनेभर में प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल सकती है। इसके बाद रेलवे को राशि जमा करनी होगी। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक अगले कुछ महीनों में प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जाएगा। महू-खंडवा प्रोजेक्ट में इंदौर वनमंडल की 410 हेक्टेयर और बड़वाह वनमंडल की 44 हेक्टेयर वनभूमि इस्तेमाल की जाएगी। इंदौर के 410 हेक्टेयर क्षेत्र में एक लाख 30 हजार और 44 हेक्टेयर में 22 हजार पेड़ों को चिह्नित किया गया है। हालांकि सुरंग बनने से इनमें 17 हजार पेड़ बचाए जाएंगे। बड़िया से बेका के बीच 4.1, चोरल से मुख्तियार बलवाड़ा के बीच 2.2 और राजपुर में 1.6 किमी लंबी सुरंग रहेगी। शेष 12.1 किमी की 13 सुरंग बनाई जाएंगी। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक सुरंग के अलावा अंडरपास बनाए जाएंगे। ये सभी 30-30 मीटर होंगे। इससे भी काफी संख्या में पेड़ों को कटने से बचाया जा सकेगा। धार-झाबुआ में लगेंगे पौधे इंदौर-बड़वाह के जंगलों से कटने वाले पेड़ों की भरपाई की जाएगी, मगर इसके लिए इंदौर वनमंडल में वनक्षेत्र नहीं है। इसके चलते धार और झाबुआ में एक हजार हेक्टेयर में पौधे रोपे जाएंगे। वन अफसरों ने वनभूमि चिह्नित कर ली है। फिलहाल रेलवे भी इसके लिए राजी है। दक्षिण से बढ़ेगी कनेक्टिविटी महू-खंडवा प्रोजेक्ट से इंदौर को काफी फायदा होगा। गेज परिवर्तन होने से दक्षिण की ओर जाने वाली ट्रेन भी इंदौर होकर गुजरेगी। अभी दक्षिण से चलने वाली ट्रेन उज्जैन और खंडवा से डायवर्ट हो जाती है। 150 करोड़ रुपये वन विभाग को रेलवे देगा वनभूमि के एवज में रेलवे वन विभाग को 40 करोड़ रुपये देगा। साथ ही पौधों की नेट प्रेजेंट वैल्यू भी निकाली गई है। उसके लिए भी 40 करोड़ रुपये देने होंगे। जबकि 1000 हेक्टेयर में पौधे लगाए जाएंगे। इसका खर्च भी रेलवे ही उठाएगा। यह राशि लगभग 50 करोड़ रुपये आएगी। वहीं पेड़ों को काटने और परिवहन का खर्च भी वन विभाग रेलवे से वसूलेगा, जो चार से पांच करोड़ होगा। वन विभाग के मुताबिक प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद रेलवे को राशि जमा करनी होगी। उसके बाद रेलवे को काम करने की अनुमति दी जाएगी। अगले कुछ दिनों में मिलेगी अनुमति     वन व पर्यावरण मंत्रालय की कमेटी ने महू-खंडवा प्रोजेक्ट को लेकर बैठक ली थी, जिसमें वन विभाग ने कुछ आपत्तियां लगाई थीं। इसे लेकर रेलवे ने जवाब दिया है। अगले कुछ दिनों के भीतर कमेटी हरी झंडी देगी। इसके बाद रेलवे को आगे की प्रक्रिया करनी होगी। –प्रदीप मिश्रा, डीएफओ, इंदौर वनमंडल  

सरकारी क्वार्टर्स में पालतू जानवरों पर रोक? जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा – आवास का उपयोग सिर्फ परिवार के लिए हो

जबलपुर  पालतू कुत्ते और बिल्लियां अब सिर्फ घर की खुशी का जरिया नहीं रह गई हैं, बल्कि कभी-कभी पड़ोसियों और परिवार के लिए कानूनी मुद्दा बन रही हैं। जबलपुर (Jabalpur) के व्हीकल फैक्ट्री में तैनात जूनियर वर्क्स मैनेजर (JWM) सैफ उल हक सिद्दीकी ने भी इसी कारण हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन शुक्रवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। मामला इस बात का है कि फैक्ट्री प्रशासन ने पड़ोसियों की शिकायत पर JWM को सरकारी क्वार्टर खाली करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी क्वार्टर परिवार के लिए है, और यदि डॉग पालने की जिम्मेदारी याचिकाकर्ता पर है, तो वह किराए के मकान में रहकर पालतू डॉग का पालन कर सकता है। पालतू डॉग्स और पड़ोसियों के बीच विवाद का कारण हाल ही में देखा गया है कि पालतू डॉग और बिल्लियां न केवल पति-पत्नी के बीच मतभेद का कारण बन रही हैं, बल्कि पड़ोसियों के साथ भी संबंधों को प्रभावित कर रही हैं। पड़ोसियों ने शिकायत की थी कि JWM के घर में कई पालतू कुत्ते और बिल्लियां रहने के कारण शोर और गंदगी बढ़ रही है। इस शिकायत के बाद फैक्ट्री प्रशासन ने सरकारी क्वार्टर खाली करने का आदेश जारी किया। JWM ने इसे अवैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्वार्टर आवंटन केवल परिवार के लिए होता है, और किसी भी पालतू जानवर को वहां रखने की जिम्मेदारी परिवार के अधिकार में नहीं आती। हाईकोर्ट का आदेश और तर्क जस्टिस विवेक जैन की अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि फैक्ट्री प्रशासन का आदेश सही है। सरकारी क्वार्टर परिवार के रहने के लिए है, न कि पालतू जानवरों के लिए। पड़ोसियों की शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और शांति बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि याचिकाकर्ता पालतू डॉग पालना चाहते हैं, तो वह किराए का मकान लेकर अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं। याचिकाकर्ता क्वार्टर का मालिक नहीं है, बल्कि इसे फैक्ट्री प्रशासन ने आवंटित किया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पालतू जानवरों के कारण उत्पन्न परेशानियों को प्रशासन और कानूनी तौर पर हल किया जा सकता है। देश-विदेश में पालतू जानवरों से जुड़े विवाद पालतू डॉग्स और बिल्लियों से जुड़े विवाद अब सिर्फ जबलपुर या किसी एक शहर तक सीमित नहीं रह गए हैं। यहां तक कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी 2023 में अपने पालतू डॉग की वजह से सामाजिक और कानूनी बहस का हिस्सा बन चुके हैं। भारत में भी कई परिवारों में पालतू जानवरों ने घर की शांति को चुनौती दी है, कभी पति-पत्नी के बीच तलाक की नौबत आई, तो कभी पड़ोसियों के साथ मतभेद और कानूनी याचिकाओं की झड़ी लग गई। इसलिए पालतू जानवर सिर्फ घर की खुशी का जरिया नहीं रहे, बल्कि वे अब सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारियों का भी हिस्सा बन गए हैं, जिनका पालन हर मालिक को सोच-समझकर करना पड़ता है। मिडिया और समाज पर प्रभाव इस मामले ने समाज में पालतू जानवरों और पड़ोसियों के अधिकार के बीच संतुलन की चर्चा शुरू कर दी है। मीडिया ने इसे बड़े पैमाने पर कवर किया, और सोशल मीडिया पर भी जब इस तरह के विषय उजागर होते हैं, तो लोग अपनी तरह-तरह की राय देने में पीछे नहीं रहते। अदालत के आदेश ने साफ कर दिया कि सरकारी आवास का उपयोग निजी जिम्मेदारी और पालतू जानवरों के लिए नहीं किया जा सकता। पड़ोसियों और मालिकों के बीच उत्पन्न विवाद अब प्रशासनिक और कानूनी दृष्टि से नियंत्रित किया जा सकता है।

मंत्री का सख्त संदेश: हरियाणा में 302 फेल खाद्य नमूने, त्योहारी सीजन में कोई ढील नहीं

चंडीगढ़ हरियाणा में आठ माह के भीतर खाद्य एवं औषध प्रशासन विभाग ने राज्य में खाद्य वस्तुओं के 1289 नमूने लिए हैं, जिनमें से 302 नमूने फेल निकले हैं। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि त्योहारी सीजन में आमजन को शुद्ध एवं सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि नकली एवं मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए और दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि त्योहारों के अवसर पर दूध, दूध से बने उत्पादों तथा मिठाइयों की मांग में वृद्धि हो जाती है। ऐसे में कुछ असामाजिक तत्व मिलावटखोरी करने से बाज नहीं आते, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। इस पर अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में औचक निरीक्षण करने होंगे, लेकिन साथ ही यह भी हिदायत दी कि जांच के नाम पर व्यापारियों व दुकानदारों को अनावश्यक तंग न किया जाए। आरती राव ने कहा कि मिठाई की दुकानों, डेयरियों, पैक्ड मिल्क प्रोडक्ट बनाने वाली फैक्ट्रियों एवं अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों पर नजर रखी जाएगी। अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वे नियमित अंतराल पर जांच करें, संदिग्ध खाद्य सामग्री के नमूने भरें और रिपोर्ट आने पर दोषी पाए जाने वाले विक्रेताओं को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं मिलावटी खाद्य पदार्थ की बिक्री होती दिखाई दे तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सूचना दें। खाद्य एवं औषध प्रशासन विभाग के आयुक्त ने जानकारी दी कि वर्ष 2025 में अब तक व्यापक स्तर पर निरीक्षण किए गए हैं। एक जनवरी 2025 से 31 अगस्त 2025 तक कुल 1289 नमूने लिए गए, जिनमें से 987 नमूने सही पाए गए जबकि 302 नमूने फेल पाए गए। इन फेल नमूनों पर संबंधित दुकानदारों एवं विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। आयुक्त ने यह भी कहा कि नियमित रूप से चलाए जा रहे इस अभियान के चलते प्रदेश में मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर कड़ा शिकंजा कसा जा रहा है।