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राहुल गांधी के हाइड्रोजन बम बयान पर चिराग ने साधा निशाना, कहा- ‘आरोप लगाना गलत’

 पटना लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बुधवार को पलटवार किया है। चिराग ने कहा, 'जब वे धमाका करेंगे, तभी हमें पता चलेगा कि यह 'हाइड्रोजन बम' क्या है। लेकिन फिलहाल, जब भी वे आते हैं और बोलते हैं, तो सिर्फ उसी चीज़ पर जोर देते हैं जिससे SIR प्रक्रिया की शुरुआत हुई।' उन्होंने आगे कहा, 'वे बार-बार आकर मतदाता सूची में गड़बड़ियों की बात करते हैं। यही वजह है कि SIR लाया गया है। एक तरफ आप शिकायत करते हैं और दूसरी तरफ उस शिकायत के समाधान से समस्या जताते हैं। यह ठीक नहीं है। अगर इस सिस्टम से आपको दिक्कत है तो उसके लिए कानून मौजूद हैं। लेकिन सिर्फ आरोप लगाना गलत है।' गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार को लोकसभा में राहुल गांधी ने बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उन्होंने जिस हाइड्रोजन बम की बात कही थी, वह अभी आया नहीं है, बल्कि आने वाला है। जिस दिन आएगा, उस दिन सभी को सच्चाई का पता चल जाएगा। राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा संविधान को खत्म करना चाहती है। उन्होंने दावा किया, 'मैं भागीदारी के हिसाब से हिस्सेदारी के लिए गारंटी देता हूं। यह मेरी गारंटी है। क्योंकि, हम संविधान मानते हैं।'

PESA नियमावली पर अवमानना याचिका की सुनवाई: झारखंड सरकार ने बालू-खनन प्रतिबंध हटाने का किया आग्रह

रांची झारखंड हाईकोर्ट में आदिवासी बुद्धिजीवी मंच द्वारा दायर पेसा नियमावली लागू न होने पर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पेसा नियमावली का ड्राफ्ट तैयार कर कैबिनेट में भेजा जा चुका है। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कोर्ट ने बालू घाट की नीलामी के बाद अलॉटमेंट पर लगी रोक हटाने के लिए दायर हस्तक्षेप याचिका (आईए) को स्वीकार कर प्रार्थी को नोटिस जारी किया। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि यदि पेसा नियमावली लागू हो जाती है तो कोर्ट उचित आदेश पारित करेगा। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एक अहम आग्रह किया गया। सरकार ने अदालत से निवेदन किया कि बालू और लघु खनिजों के खनन पर जो अंतरिम रोक लगी है, उसे हटाया जाए। अवमानना याचिका पर अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार, महाधिवक्ता राजीव रंजन और अपर महाधिवक्ता जय प्रकाश कोर्ट में मौजूद थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार ने बहस की।  

धर्मेंद्र प्रधान को सौंपी गई बिहार की जिम्मेदारी, BJP ने बनाया चुनाव प्रभारी

नई दिल्ली बिहार चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने अपनी तैयारी तेज कर दी है. भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए अपनी चाल चल दी है. भारतीय जनता पार्टी ने बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे अहम सियासी राज्यों के लिए चुनाव प्रभारियों की नियुक्ति की घोषणा की है. भाजपा ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बिहार का चुनाव प्रभारी बनाया है. यह नियुक्ति बिहार में एनडीए की मजबूती को बढ़ावा देने के लिए अहम मानी जा रही है. बिहार में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव है. धर्मेंद्र प्रधान के साथ सह-प्रभारी के रूप में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और गुजरात BJP के पूर्व अध्यक्ष सीआर पाटिल को नियुक्त किया गया है. भाजपा के लिए धर्मेंद्र प्रधान का चयन इसलिए खास है क्योंकि वे ओडिशा से आते हैं और पहले भी उत्तर प्रदेश, कर्नाटक जैसे राज्यों में चुनावी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. भाजपा सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान की रणनीतिक क्षमता और संगठनात्मक कौशल बिहार में तेजस्वी यादव की अगुवाई वाले महागठबंधन को चुनौती देने में कारगर साबित होगा. हालांकि, बिहार में NDA पहले से सत्ता में है, मगर तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की यात्राओं से माहौल थोड़ा बदला है. ऐसे में भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है. यही वजह है कि अच्छा-खासा सियासी अनुभव रखने वाले धर्मेंद्र प्रधान को बिहार फतह करने की जिम्मेदारी दी गई है. बंगाल में किसे कमान? पश्चिम बंगाल के लिए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को चुनाव प्रभारी बनाया गया है, जबकि त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब सह-प्रभारी होंगे. पश्चिम बंगाल में टीएमसी की मजबूत पकड़ को तोड़ने के लिए BJP की यह रणनीति अगम है. वैसे भी अगले साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हैं. 2026 में होने वाले चुनावों में भूपेंद्र यादव की भूमिका अहम होगी. भूपेंद्र यादव के पास भी अच्छा खासा संगठनात्मक अनुभव है. वहीं, बिप्लब देब का अनुभव पूर्वोत्तर राज्यों से बंगाल की राजनीति को मजबूत करेगा. तमिलनाडु का प्रभारी कौन? तमिलनाडु के लिए BJP ने ओडिशा से सांसद बैजयंत पांडा को चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है, जबकि महाराष्ट्र से सांसद मुरलीधर मोहोल सह-प्रभारी होंगे. पश्चिम बंगाल की तरह तमिलनाडु में भी साल 2026 में विाधानसभा चुनाव हैं. अगले साल होने वाले चुनाव के लिए भाजपा DMK-AIADMK के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर काम कर रही है. पांडा की नियुक्ति दक्षिण भारत में भाजपा की विस्तार योजना का हिस्सा है. हाल ही में BJP की कोर कमिटी मीटिंग में 2026 चुनाव रणनीति पर चर्चा हुई, जिसमें जिला स्तर के प्रभारियों की नियुक्ति और गठबंधन वार्ता शामिल थी.

बस्तर में नक्सलियों की धरती पर बदलाव की बयार, CM साय बोले – 2026 तक खत्म करेंगे नक्सलवाद

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार की नवीन आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025 और नियद नेल्ला नार योजना ने दंतेवाड़ा सहित पूरे बस्तर अंचल में नया विश्वास जगाया है। माओवादी हिंसा के झूठे नारों से भटके लोग अब विकास और शांति की राह चुन रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर संभाग में चलाए जा रहे पूना मारगेम अभियान तथा दंतेवाड़ा जिले में चलाए जा रहे लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर हाल ही में 71 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 30 नक्सलियों पर 50 हजार से 8 लाख रुपये तक का कुल 64 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण हमारी नीतियों की प्रभावशीलता और जन-विश्वास का प्रत्यक्ष प्रमाण है। Cm  साय ने कहा कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को बेहतर जीवन की शुरुआत के लिए 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक प्रदान किए गए हैं। साथ ही उन्हें नक्सल उन्मूलन नीति के तहत सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और भरोसेमंद वातावरण के कारण अब तक 1770 से अधिक माओवादी मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। डबल इंजन की सरकार का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा और आत्मसमर्पित साथियों को सम्मानजनक पुनर्वास एवं बेहतर जीवन उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही  मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर बदल रहा है और नक्सलवाद का अंधियारा छंट रहा है। यह परिवर्तन बस्तर के उज्ज्वल भविष्य और शांति की ओर बढ़ते कदमों का सशक्त संकेत है।

स्वच्छता अभियान में शामिल हुए ऊर्जा मंत्री खट्टर, एक घंटे तक लगाई झाड़ू

चंडीगढ़  पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर चंडीगढ़ में वीरवार सुबह दो बड़े स्वच्छता अभियान चलाए गए। एक ओर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने सेक्टर-22 की शास्त्री मार्केट में झाड़ू लगाया। दूसरी ओर प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने सेक्टर-15 की मंडी साइट पर सफाई अभियान का नेतृत्व किया। अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि सफाई से पहले किसी भी तरह की गंदगी जानबूझकर न फैलाई जाए। स्वच्छोतस्व कार्यक्रम के बाद केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 2014 में स्वच्छता की मुहिम का आह्वान किया था। 2014 में प्रधानमंत्री ने जब आह्वान किया था, तब उन्होंने कहा था स्वच्छता को लेकर शौचालय बनाने और खुले में शौच मुक्त पर काम करना होगा। 2014 में पीएम ने शुरू किया अभियान मनोहर लाल ने कहा- आजादी के बाद देश में महात्मा गांधी ने भी स्वच्छता का अभियान चलाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में स्वच्छता अभियान की शुरुआत की थी। पिछले 10 साल में देश के गांव और शहरों में सफाई व्यवस्था को लेकर लोग जागरूक हुए हैं। मनोहर लाल ने कहा कि स्वच्छता ही कर्म है और स्वच्छता ही धर्म है। स्वच्छता के प्रति हम समर्पण के नाते एक दिन एक घंटा एक साथ स्वच्छता के लिए काम करें। दिल्ली की डंप साइड एक साल में साफ करेंगे केंद्रीय मंत्री ने कहा, देश मे आज एक साथ करोड़ों लोग स्वच्छता में लगे हैं। उन्होंने कहा शहरी आवास विभाग स्वच्छता कार्यक्रम को लेकर बड़े स्तर पर काम कर रहा है। देश की डंप साइड को हटाना और इसकी प्रोसेसिंग का काम विभाग कर रहा है। कूड़े के ढेर का इस्तेमाल किस तरह उपयोग हो सकता है इस पर काम कर रहे हैं। मनोहर लाल ने कहा दिल्ली की भलस्वा डंप साइट को 1 साल में साफ किया जाएगा। मैंने खुद देश की डंप साइड साफ करने का संकल्प लिया मनोहर लाल ने कहा मैंने खुद इस डंप साइड को विभाग के जरिए साफ करने का संकल्प लिया है। मनोहर लाल ने कहा इस अभियान से अलग-अलग तरीके से लोग जुड़ रहे हैं। मनोहर लाल ने कहा आज के कार्यक्रम में बहुत पत्रकार और छायाकार भी लगे हैं और सभी का साथ जरूरी है। स्वच्छता निरंतर चलने वाला विषय है हम खुद ही रोज कूड़ा करते हैं तो हमें रोज ही सफाई करनी होगी। हर प्रोजेक्ट की टाइमलाइन होती है, लेकिन डंप साइड का अलग प्रोसेस है। प्लास्टिक को लेकर जागरूकता जरूरी दिल्ली में तीन डंप साइड है और सबसे बड़ी डंप साइड मुंबई में है, लेकिन समय के साथ-साथ उनकी प्रोसेसिंग की जाएगी। मनोहर लाल ने कहा स्वच्छता पखवाड़े में सफाई, रक्तदान शिविर और पौधारोपण समेत कई सेवा के कार्य चल रहे हैं। उन्होंने कहा प्लास्टिक को लेकर भी जागरूक होने की जरूरत है। पैकिंग में लेने वाले सामान को हम जूट और कपड़े के थैले में लेना चाहिए। गंदगी में प्लास्टिक सबसे बड़ा अवरोध है और वह नालियों और सीवर लाइन को चौक करता है। प्लास्टिक को किस तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि उसको खत्म किया जाए इस पर काम कर रहे हैं।

डेंगू-मलेरिया का प्रकोप बढ़ा, हरियाणा में मामलों में उछाल, रेवाड़ी बना हॉटस्पॉट

चंडीगढ़  हरियाणा में डेंगू और मलेरिया के मामलों में लगातार हो रही वृद्धि ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता को बढ़ा दिया है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में अब तक डेंगू के 792, मलेरिया के 163 और चिकनगुनिया के 6 मामले सामने आ चुके हैं। यह स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के लिए तत्काल प्रभाव से एडवाइजरी जारी कर दी है और सतर्कता बढ़ा दी गई है। हालांकि सरकारी तंत्र पूरी तरह से सक्रिय है लेकिन नागरिकों की जागरूकता और सहयोग इस खतरे को नियंत्रित करने में निर्णायक साबित होगा। अकेले रेवाड़ी में 191 डेंगू के मामले दर्ज पूरे हरियाणा में रेवाड़ी जिला इस समय डेंगू का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन चुका है। अकेले रेवाड़ी में 191 डेंगू के मामले दर्ज किए गए हैं, जो राज्य में किसी भी अन्य जिले से सबसे अधिक हैं। यह संख्या स्थानीय स्तर पर सख्त नियंत्रण उपायों की आवश्यकता को दर्शाती है। अन्य प्रमुख जिलों में मरीजों की संख्या • गुरुग्राम: 53 मामले • करनाल: 56 मामले • रोहतक: 52 मामले विज्ञापन • सोनीपत: 48 मामले • पंचकूला: 30 मामले स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर हेल्थ सर्विस डॉ. कुलदीप ने रेवाड़ी को लेकर खास हिदायतें जारी की हैं। उन्होंने लोगों से लापरवाही न बरतने की अपील करते हुए कहा है कि आसपास पानी जमा न होने दें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें और बुखार होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाँच कराएं। जांच प्रक्रिया में तेजी मामलों की बढ़ती संख्या के जवाब में सरकारी तंत्र ने कार्रवाई की गति बढ़ा दी है। 1. तेज सैंपलिंग: मरीजों के सैंपलों की जांच में तेजी लाने के लिए उन्हें प्रदेश की 27 परीक्षण प्रयोगशालाओं में भेजा जा रहा है। 2. फॉगिंग अभियान: मच्छरों के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए फॉगिंग अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान शहरी क्षेत्रों में नगर परिषदों और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों के माध्यम से हाई रिस्क वाले एरिया में संचालित किया जा रहा है। 3.निरीक्षण और नोटिस: गुरुग्राम जैसे प्रभावित क्षेत्रों में, स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार निरीक्षण और जागरूकता अभियान चला रही हैं। हजारों घरों की जांच के दौरान जहां भी डेंगू का लार्वा पाया गया है, वहां के निवासियों को नोटिस जारी किए गए हैं ताकि वे अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखने के लिए प्रेरित हों। लक्षण पहचानें और बचाव के उपाय अपनाएं मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने नागरिकों को इन मच्छर जनित बीमारियों के लक्षणों को पहचानने और बचाव के उपायों को अपनाने की सलाह दी है। • डेंगू के लक्षण: तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द और जोड़ों में तेज दर्द मुख्य लक्षण हैं। • मलेरिया के लक्षण: इसमें तेज बुखार के साथ सिरदर्द और उल्टी आम लक्षण होते हैं। बचाव के प्रमुख उपाय • जल जमाव रोकें: घरों के आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि यह मच्छरों के प्रजनन के लिए सबसे अनुकूल जगह है। • सुरक्षात्मक पहनावा: पूरी बाजू के कपड़े पहनें और मच्छर भगाने वाली क्रीम या लोशन का उपयोग करें। • मच्छरदानी: रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। स्वास्थ्य विभाग स्पष्ट करता है कि वह इन बीमारियों पर नियंत्रण के लिए पूरी तरह सक्रिय है। विभाग ने नागरिकों से एक बार फिर अपील की है कि वे अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखें और यदि किसी में बीमारी के लक्षण नजर आते हैं, तो बिना देर किए तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें। लोगों के सहयोग और जागरूकता से ही इस बढ़ते खतरे को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है। 

सड़क हादसा: बस पलटने से 4 साल की बच्ची की मौत, यात्रियों में हड़कंप

धमतरी छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में आज दोपहर यात्री बस पलटने से घटना स्थल पर अफरा-तफरी मच गई. इस हादसे में 4 साल की बच्ची रागिनी निषाद की मौत हो गई. वहीं 6 यात्री घायल हुए हैं. यह हादसा नगरी-सिहावा रोड पर हुआ. घटना की सूचना पर केरेगांव पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया. जानकारी के अनुसार, डीआरडी कंपनी की बस धमतरी से नगरी जा रही थी. इस दौरान केरेगांव थाना क्षेत्र के खड़ादाह गांव के पास स्टेट हाइवे पर बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई. स्थानीय नागरिकों ने घायल यात्रियों को बस से बाहर निकाला. घायलों में टीकाराम साहू (58) और उनकी पत्नी कुमारी बाई (54) शामिल हैं, जो ग्राम बेलौदी के निवासी हैं. उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. परिवार में पसरा मातम इसके अलावा 108 एंबुलेंस से ग्राम बासनवाही की कलेसिया निषाद और बच्ची रागिनी निषाद को भी अस्पताल लाया गया. डॉक्टरों ने जांच के बाद रागिनी को मृत घोषित कर दिया. कलेसिया निषाद ने बताया कि वह अछोटा गांव में अपने रिश्तेदार के यहां गई थी और अपनी नातिन के साथ घर लौट रही थी. बच्ची की मौत से परिवार में मातम पसर गया है. केरेगांव पुलिस घटना की जांच कर रही है.

NHAI का बड़ा कदम: दिल्ली की सड़कों पर मिलेगी स्मूद ड्राइविंग, UER-II का विस्तार शुरू

 नई दिल्ली दिल्ली-NCR में बढ़ते ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने के लिए NHAI एक नया मार्ग विकसित कर रहा है। यह प्रोजेक्ट UER-II का 17 किलोमीटर लंबा विस्तार होगा, जो अलीपुर से शुरू होकर NH-709B (दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे) पर ट्रोनिका सिटी तक जाएगा। दिल्ली की रिंग रोड, NH-44, NH-48 और बरापुल्ला एलिवेटेड कॉरिडोर पर दबाव कम होगा। हरियाणा और राजस्थान से देहरादून की ओर जाने वाले ट्रैफिक के लिए तेज और सुगम रास्ता मिलेगा। राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में सड़कों की जाम समस्या में राहत मिलेगी। कितना बड़ा है ये प्रोजेक्ट? सितंबर को NHAI ने इस प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंसी सर्विसेज के लिए बोली मंगाई। इसमें 5 महीने में फिजिबिलिटी स्टडी और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी। इस स्टडी का खर्च 2.32 करोड़ रुपये होगा। अनुमान है कि इस 17 किलोमीटर लंबे हाईवे को बनाने में 3350 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत आएगी। यह प्रोजेक्ट न केवल भव्य है, बल्कि दिल्ली-एनसीआर की ट्रैफिक समस्या का स्थायी समाधान भी साबित हो सकता है। क्या-क्या होगा खास? NHAI की योजना में इस हाईवे को बनाने से पहले हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखा जाएगा। पहले चरण में ट्रैफिक एनालिसिस, रास्ते के विकल्प और इलाके की टोपोग्राफी तय की जाएगी। लेन कॉन्फिगरेशन और बिजली-पानी की लाइनों, जंगल की मंजूरी जैसी पहलुओं पर भी निगरानी होगी। प्रोजेक्ट का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव भी जांचा जाएगा, ताकि स्थानीय लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। दूसरे चरण में कॉरिडोर का स्ट्रक्चरल डिजाइन, मिट्टी और पानी की जांच, चौराहों का डिजाइन, ड्रेनेज प्लान, ट्रैफिक साइनेज, लागत अनुमान और टोल स्कीम का निर्धारण इस हाईवे का निर्माण न केवल मजबूत होगा, बल्कि यह स्मार्ट और पर्यावरण के अनुकूल भी होगा। आवारा पशुओं का भी ध्यान राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने हाईवे पर आवारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान निकालते हुए सुरक्षित पशु आश्रय बनाने की योजना शुरू की है। योजना के तहत हाईवे के आसपास ऐसे स्थान विकसित किए जाएंगे, जहां पशुओं के लिए चारा भंडारण, खाने की जगह और केयरटेकर्स के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। एनएचएआई का कहना है कि इस कदम से न केवल सड़क हादसों में कमी आएगी, बल्कि पशुओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। आवारा पशु अक्सर हाईवे पर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं, और इस पहल से उनकी सुरक्षा के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा भी बढ़ेगी। स्थानीय विरोध और चुनौतियां इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्तरी दिल्ली के कुछ गांवों में विरोध भी हो रहा है। मुंडका-बक्करवाला खंड पर टोल प्लाजा को लेकर स्थानीय लोग नाराज हैं। एनएचएआई को इन मुद्दों को सुलझाने के लिए कदम उठाने होंगे, ताकि प्रोजेक्ट सुचारू रूप से आगे बढ़ सके। एनएचएआई के मुताबिक, इस विस्तार के पूरा होने के बाद UER-II दिल्ली के उत्तर, पश्चिम, दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम हिस्सों के साथ-साथ गुरुग्राम तक जाने वाले ट्रैफिक के लिए एक अहम बायपास बन जाएगा। यह द्वारका एक्सप्रेसवे के साथ मिलकर दिल्ली की रिंग रोड को बायपास करेगा। भविष्य में UER-II का दूसरा 65 किलोमीटर लंबा पूर्वी विस्तार ट्रोनिका सिटी से गाजियाबाद होते हुए नोएडा तक जाएगा।

झारखंड में नक्सलवाद को झटका: महिलाओं समेत 10 माओवादी पुलिस के सामने किया आत्मसमर्पण

चाईबासा झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में 4 महिलाओं समेत 10 माओवादियों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और मुख्यधारा में लौट आए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि चाईबासा में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के इन माओवादियों ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग गुप्ता, पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमित रेणु तथा झारखंड पुलिस, झारखंड जगुआर और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष हथियार डाले। जिन माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, उनमें भाकपा (माओवादी) के पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो का क्षेत्रीय समिति सदस्य रैंडो बोइपाई उर्फ ​​क्रांति बोइपाई भी शामिल है। एक अधिकारी ने बताया कि इन माओवादियों ने राज्य सरकार की आकर्षक आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी भादंसं, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और सीएलए अधिनियम के तहत दर्ज कई मामलों में वांछित हैं। इस घटनाक्रम को एक ‘बड़ी उपलब्धि' बताते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘इन नक्सलियों के आत्मसमर्पण से झारखंड में, खासकर पश्चिमी सिंहभूम जिले में, माओवादी गतिविधियां कमजोर होंगी।'' झारखंड पुलिस ने माओवादियों से हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की है अन्यथा परिणाम भुगतने की धमकी दी है। बोइपाई के अलावा आज आत्मसमर्पण करने वाले अन्य माओवादियों में गार्डी कोड़ा (20), जॉन उर्फ ​​जोहान प्युरिटी (20), निरसो सिदु उर्फ ​​आशा उर्फ ​​निरशा (20), घोनार देवगम (18), गोमेया कोड़ा उर्फ ​​टार्जन (20), कैरा कोड़ा (20), कैरी कायम उर्फ ​​गुलाची (22), सावित्री गोप उर्फ ​​मुतरी गोप (18) और प्रदीप सिंह मुंडा शामिल हैं। एक अधिकारी ने बताया कि पश्चिमी सिंहभूम में 2022 से 9,631 माओवादी विरोधी अभियानों में 10 माओवादी मारे गए हैं और 175 गिरफ्तार किए गए हैं।  

बिहार में युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम

पटना बिहार सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुख बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में उद्योग विभाग, बिहार सरकार और भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के संस्थान टीआरटीसी, पटना की ओर से नि:शुल्क रोजगारोन्मुखी कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर, पटना में आयोजित होगा और 6 अक्टूबर से शुरू होगा। यह प्रशिक्षण पूरी तरह से नि:शुल्क और आवासीय होगा। प्रशिक्षण की अवधि तीन महीने की होगी, जिसमें चयनित अभ्यर्थियों को प्रतिदिन 8 घंटे की कक्षाएं दी जाएंगी। प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक और प्रायोगिक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों से 1000 रुपये कैश ऑन मनी के रूप में शुल्क लिया जाएगा, जिसे प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वापस कर दिया जाएगा। साथ ही, प्रशिक्षण के दौरान रहने और खाने की पूरी व्यवस्था संस्थान की ओर से की जाएगी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र भी बिना किसी बाधा के प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में युवाओं को कई रोजगारोन्मुखी कोर्स में शिक्षा दी जाएगी। इसमें शामिल हैं –     सर्टिफिकेट कोर्स इन सीएनसी लेथ     सर्टिफिकेट कोर्स ऑन सीएनसी मिलिंग     सर्टिफिकेट कोर्स इन टूल एंड डाई मेकिंग     एसी और फ्रिज रिपेयरिंग कोर्स प्रवेश के लिए शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है। कोर्स संख्या 1 से 3 के लिए उम्मीदवारों का बारहवीं, आईटीआई या डिप्लोमा पास होना अनिवार्य है। वहीं, कोर्स संख्या 4 (एसी और फ्रिज रिपेयरिंग) के लिए बारहवीं या आईटीआई (इलेक्ट्रीशियन ट्रेड) पास होना जरूरी है। उम्मीदवारों की आयु सीमा न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष निर्धारित की गई है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बिहार के युवाओं को तकनीकी शिक्षा देकर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उम्मीदवार निजी उद्योगों, सरकारी योजनाओं, स्टार्टअप्स और स्वरोजगार के क्षेत्र में कदम बढ़ा सकेंगे। बिहार सरकार ने युवाओं से अपील की है कि वे इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और कौशल विकास के जरिए अपने करियर को नई ऊंचाई दें।