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अवैध गुटखा निर्माण पर बड़ी कार्रवाई, छापेमारी में 12 आरोपी दबोचे गए

दुर्ग. जिले के अंडा थाना क्षेत्र के ग्राम कुथरेल और अंडा में दो स्थानों पर पुलिस और खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने छापेमार कार्रवाई की। इस दौरान अवैध गुटखा बनाकर बेचने वालों को पकड़ा गया। आरोपी वासिंग पाउडर की आड़ में गुटखा बनाने का काम कर रहे थे। पुलिस ने लगभग 10 बोरियों में 60 किलो अवैध गुटखा और पैकिंग मशीने जब्त की है। इस मामले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को सूचना मिली थी कि आरोपी वाशिंग पाउडर बनाने की आड़ में सितार गुटखे का नकली गुटखा तैयार कर मार्केट में खपा रहे हैं। जैसे ही टीम ने ग्राम अंडा और कुथरेल के दो ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई की, तब उन्होंने देखा कि आरोपी वाशिंग पाउडर बनाने की आड़ में नकली जर्दायुक्त गुटखा तैयार कर रहे थे। 10 बोरी गुटखा, पैकिंग मशीनें और नकली गुटखा बनाने की सामग्री जब्त पुलिस के अनुसार ये आरोपी पूर्व में छत्तीसगढ़ में अवैध गुटखा कारोबार के मुख्य सरगना गुरूमुख जुमनानी के गुटखा फैक्ट्री में काम कर चुके हैं। इस कार्रवाई के दौरान मौके से 10 बोरियों में 60 किलो गुटखा, तीन पैकिंग मशीनें और नकली गुटखा बनाने की सामग्री जब्त की गई। पुलिस ने गोदामों को किया सील, जांच के लिए भेजा सैंपल पुलिस और खाद्य विभाग की टीम ने गोदामों को सील कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में अब तक 12 लोगों को हिरासत में लिया है। खाद्य विभाग ने जब्त किए गए गुटखे को सैंपलिंग के लिए भेज दिया है। सैंपल रिपोर्ट आने के बाद इसमें कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले पर बड़ा एक्शन, ओवररेटिंग मामले में 4 अधिकारी सस्पेंड

रायपुर. छत्तीसगढ़ में शराब की ओवररेटिंग की शिकायतों पर आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल द्वारा विभिन्न जिलों की मदिरा दुकानों में किए गए औचक निरीक्षण के दौरान निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब बेचने के मामले सामने आने के बाद आबकारी आयुक्त पीएस एल्मा ने 4 आबकारी उपनिरीक्षकों को निलंबित कर दिया है। वहीं 8 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। आबकारी विभाग के अनुसार, रायपुर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बलौदाबाजार-भाटापारा और धमतरी जिलों की मदिरा दुकानों में ओवररेटिंग के मामले पकड़े गए। विभागीय जांच में संबंधित अधिकारियों के क्षेत्राधिकार में गंभीर अनियमितता पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई है। फाफाडीह शराब दुकान में 20 रुपये अधिक वसूले गए विदेशी मदिरा दुकान फाफाडीह (रायपुर) में औचक निरीक्षण के दौरान विक्रेता अश्वन कुमार मेरिया द्वारा ऑल सीजन गोल्डन कलेक्शन रिजर्व व्हिस्की के दो पाव निर्धारित 480 रुपये के बजाय 500 रुपये में बेचे जाने का मामला सामने आया। इस मामले में विक्रेता के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 39(ग) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। मामला आबकारी उपनिरीक्षक कौशल किशोर सोनी के प्रभार क्षेत्र का होने के कारण उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। गंडई में भी मिली ओवररेटिंग की शिकायत खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की कम्पोजिट मदिरा दुकान गंडई में विक्रेता वेदप्रकाश निर्मलकर द्वारा तीन पाव देशी शराब निर्धारित 240 रुपये के बजाय 250 रुपये में बेचे जाने का मामला सामने आया। इसके बाद विक्रेता के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया। इस मामले में वृत्त प्रभारी आबकारी उपनिरीक्षक प्रभाकर सिरमौर को निलंबित किया गया है। वहीं सहायक जिला आबकारी अधिकारी चन्द्रप्रताप सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। हिरमी और कुरूद में भी कार्रवाई बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की कम्पोजिट मदिरा दुकान हिरमी में विक्रेता द्वारा निर्धारित मूल्य से 30 रुपये अधिक वसूले जाने का मामला सामने आया। इस प्रकरण में प्रभारी आबकारी उपनिरीक्षक मनराखन नेताम को निलंबित किया गया है। इसी प्रकार धमतरी जिले की कम्पोजिट मदिरा दुकान कुरूद में दो अलग-अलग मामलों में देशी शराब की बिक्री निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर किए जाने की पुष्टि हुई। इस मामले में आबकारी उपनिरीक्षक पुरुषोत्तम सिन्हा को निलंबित किया गया है। इन आठ अधिकारियों को नोटिस आबकारी विभाग ने जिन 8 जिला आबकारी और सहायक जिला आबकारी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, उनमें निरुपमा लोन्हारे, मुकेश अग्रवाल, जलेश सिंह, अजय सिंह धुर्वे, राजेश कुमार शर्मा, जेबा खान, चंद्रप्रताप सिंह और अल्ताफ खान शामिल हैं। आबकारी आयुक्त ने कहा कि संबंधित अधिकारियों के प्रभार क्षेत्रों में इस प्रकार की गंभीर अनियमितताओं का पाया जाना उनके कर्तव्यों के प्रति लापरवाही, उदासीनता और शिथिल नियंत्रण को दर्शाता है। इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का उल्लंघन मानते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई है।

समावेशी विकास और जनकल्याण के पथ पर तेजी से बढ़ रहा मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश समावेशी विकास, नवाचार और जनकल्याण के दृढ़ संकल्प के साथ निरंतर बढ़ रहा आगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में बताई गईं मध्यप्रदेश की उपलब्धियां भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में गुरूवार को नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में सभी वर्गों के विकास के लिए किए जा रहे विशेष प्रयत्नों से अवगत करवाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि काउंसिल की बैठक में 'विकसित भारत @2047' के संकल्प को साकार करने के लिए केंद्र और राज्यों की साझी भागीदारी, समन्वित प्रयासों तथा विकास के विभिन्न आयामों पर व्यापक और सार्थक चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश भी विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए सुशासन, समावेशी विकास, नवाचार और जनकल्याण के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब देंगे विकास को गति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में जानकारी दी कि प्रदेश को नक्सलवाद का खात्मा केंद्र सरकार द्वारा तय की गई समय-सीमा से पहले करने में सफलता मिली है। प्रदेश के जो क्षेत्र नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहां विकास की गति तेज की जाएगी। युवाओं के विकास पर विशेष रूप से जोर रहेगा। इसके साथ ही प्रदेश में बहनों और बेटियों की उन्नति, कृषक कल्याण, नए मेडीकल कॉलेजों के माध्यम से उपचार कार्य को गुणवत्तापूर्ण बनाते हुए बेहतर कार्य हो रहा है। इसी तरह आरोग्य मंदिर सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन में भी मध्यप्रदेश अग्रसर है। नदी जोड़ो परियोजनाओं के क्रियान्वयन की तैयारी की गई है। पीएममहाविद्यालयों के माध्यम से युवाओं को अनेक संकायों और विषयों के अध्ययन से जोड़ा गया है। कौशल विकास और औद्योगिकीकरण के प्रयास तेज हुए हैं। देश में सबसे पहले पीएम मित्र पार्क की धार जिले में स्थापना हुई है, यहां शीघ्र ही इकाइयों द्वारा रिकार्ड समय में कार्य प्रारंभ हो रहा है। भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के वेस्ट को निष्पादित करने के साथ ही प्रदेश में जनकल्याण की दृष्टि से अनेक नए कार्य प्रारंभ करने पर ध्यान दिया जा रहा है। नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की इस बैठक में मुख्यत: 'मूलभूत मानव पूंजी और भविष्य के लिए तैयार कौशल', 'उत्पादक रोजगार, उद्यमिता और विकेंद्रीकृत विकास', 'स्वास्थ्य, पोषण और कल्याण' एवं 'सभी के लिए समानता और गरिमा' से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में देश में उद्यमिता को बढ़ावा देने, कौशल विकास को बढ़ाने और स्थायी रोजगार के अवसर सृजित करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।  

शहीद पथ पर यात्रियों को मिलेगी आइकॉनिक फुट ओवरब्रिज की सौगात

लखनऊ राजधानी लखनऊ में शहीद पथ पर लुलु मॉल के पास स्काई वॉक (फुट ओवरब्रिज) बनेगा। 100 मीटर लंबा व 05 मीटर चौड़ा यह फुट ओवरब्रिज नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन देगा। आईकॉनिक डिजाइन इसे अलग बनाएगी। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने पीपीपी मोड पर फुट ओवरब्रिज के निर्माण के लिए एक निजी कंपनी के साथ करार किया है। इसके निर्माण में लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिसका पूरा खर्च कंपनी द्वारा किया जाएगा। इसके रूफ टॉप पर ओपन एयर रेस्टोरेंट और नीचे ग्रीन एरिया होगा। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई एक अहम बैठक में परियोजना का प्रेजेंटेशन दिया गया। जिसमें फुट ओवरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए हरी झंडी दे दी गयी है। उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि इससे शहीद पथ जैसे व्यस्त मार्ग पर पैदल यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक एवं बाधारहित आवागमन उपलब्ध होगा। फुट ओवरब्रिज में सीढ़ियों के अलावा लिफ्ट का भी प्रावधान किया गया है। उपाध्यक्ष ने बताया कि लोक निर्माण विभाग, ट्रैफिक पुलिस, लेसा व लुलु मॉल प्रबंधन के साथ बैठक करके फुट ओवरब्रिज का निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिये गये हैं। निर्माण के दौरान ट्रैफिक में रुकावट न आए इसके लिए चरणबद्ध निर्माण पद्धति अपनाएंगे। रूफ टॉप पर ओपन एयर रेस्तरां, नीचे हरित क्षेत्र ग्राउंड फ्लोर पर लगभग 1200 वर्गमीटर क्षेत्रफल में आकर्षक ग्रीन एरिया होगा। जिसमें कियोस्क, सार्वजनिक उपयोग के लिए इंटरैक्टिव स्पेस, शौचालय और पार्किंग की सुविधा होगी। इसके अलावा ग्राउंड फ्लोर, मेजेनाइन फ्लोर तथा प्रथम तल पर कॉमर्शियल स्पेस विकसित किया जाएगा। फुट ओवरब्रिज के रूफ टॉप पर ओपन एयर रेस्टोरेंट और एलईडी स्क्रीन होगी। एंटी-स्किड फ्लोरिंग समेत कई खासियत होंगी उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि फुट ओवरब्रिज की डिजाइन में सुरक्षा को सर्वाच्च प्राथमिकता दी गयी है। इसमें एंटी-स्किड फ्लोरिंग, मजबूत रेलिंग, सीसीटीवी निगरानी, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, स्पष्ट साइनेज, अग्निरोधी विद्युत फिटिंग तथा भूकंपरोधी डिजाइन का प्रावधान किया गया है। फायर सेफ्टी उपकरण, पब्लिक एड्रेस सिस्टम आदि होंगे। कैसरबाग में बस पोर्ट की तैयारी तेज वहीं, लखनऊ के सबसे पुराने बस स्टेशन, कैसरबाग को एयरपोर्ट की तर्ज पर बस पोर्ट बनाने के लिए चार निवेशकों ने और खाली पड़े जानकीपुरम बस अड्डे की जमीन पर हाईटेक बस अड्डा बनाने के लिए पांच निवेशकों ने दावेदारी ठोंकी है। इसका खुलासा टेंडर प्रक्रिया के टेक्निकल बिड खुलने के बाद हुआ है। यूपी के 49 बस अड्डों को पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर विकसित करने के लिए आमंत्रित की गई टेंडर प्रक्रिया में 13 बस अड्डों के लिए निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई है। बाकी 36 बस अड्डों के लिए एक माह बाद दोबारा टेंडर जारी किया जाएगा। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के अधिकारियों ने बताया कि पहले फेज में यूपी के 23 बस अड्डों को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। दूसरे फेज में 49 बस अड्डों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। अभी टेक्निकल बिड खुली है। इन बस अड्डों की 55 प्रतिशत जमीन पर बस पोर्ट और 45 प्रतिशत जमीन पर शॉपिंग मॉल बनेगा, जहां यात्रियों को शॉपिंग करने, सिनेमा देखने और फूड कोर्ट में खान-पान के अलावा बेहतर वीआईपी वेटिंग लाउंज जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन 13 बस अड्डों पर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। ये सुविधाएं मिलेंगी 1. एसी स्मार्ट लाउंज, अत्याधुनिक प्रतीक्षालय और साफ-सुथरे टॉयलेट की सुविधा। 2. उड़ानों की तरह बसों के आने-जाने का समय, देरी व प्लेटफॉर्म नंबर की लाइव सूचना 3. यात्रियों के लिए मनोरंजन, खान-पान, शॉपिंग मॉल, कैफे, रेस्तरां और रिटेल सुविधा 4. रोडवेज बसों के अलावा निजी व लग्जरी वोल्वो बसों की भी सुविधा परिसर से मिलेगी 5. मल्टीलेवल पार्किंग में कार, टैक्सी, दोपहिया वाहन आदि के लिए अलग जगह क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन के अनुसार मुख्यमंत्री की मंशा है कि बस अड्डे एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित हों। इसी क्रम में मुख्यालय से टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसमें लखनऊ क्षेत्र के कैसरबाग और जानकीपुरम बस अड्डे को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने के लिए शामिल किया गया है।

बेगूसराय हादसे से पुलिस महकमे में शोक, तीन थानेदारों सहित 4 लोगों ने गंवाई जान

बेगूसराय बिहार के बेगूसराय जिले से एक बडे़ हादसे की खबर सामने आई है. यहां साहेबपुर कमाल में हुए एक हादसे में मधेपुरा पुलिस के तीन अधिकारी सहित 4 लोगों की मौत हो गई. ये सभी लोग पटना से प्रशिक्षण लेकर लौट रहे थे. बीती रात साहेबपुर कमाल के बखड्डा के पास एनएच 31 पर पुलिस अधिकारियों की कार ने एक ट्रक को पीछे से तेज टक्कर मार दी. इससे कार में सवार मधेपुरा पुलिस के तीन अलग-अलग थानों के SHO और गाड़ी के ड्राइवर की मौत हो गई. बीती रात तेज रफ्तार कार ने ट्रक में जबरदस्त टक्कर मार दी. हादसा इतना तेज था कि कार के अगले हिस्से के परखच्चा निकल गया. इस हादसे के बाद मौके पर अफरातफरी का माहौल हो गया. सूचना मिलते ही बेगूसराय की एसपी मनीष कुमार एवं सदर डीएसपी आनंद पांडेय सहित भारी संख्या में पुलिस घटनास्थल पर पहुंचे।  रतवारा, बेलारी और आरर थाना प्रभारी की मौत मृतकों की पहचान साजन पासवान रतवारा थाना प्रभारी, नीरज कुमार बेलारी थाना प्रभारी, ज्ञानेंद्र अमरेंद्र आरर थाना प्रभारी एवं ज्योतिष कुमार प्राइवेट कार चालक के रूप में की गई है. बताया जा रहा है कि पटना से एकदिवसीय प्रशिक्षण लेकर एक ही गाड़ी पर सवार होकर मधेपुरा जिला लौट रहे थे. तभी तेज रफ्तार कार अनियंत्रित हो गया और ट्रक से पीछे से टकरा गया।  दो की मौके पर ही मौत, दो ने हॉस्पिटल में तोड़ा दम हादसा इतना जबरदस्त था कि दो थाना प्रभारी ज्ञानेंद्र अमर एवं नीरज कुमार और ड्राइवर नीरज कुमार की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. जबकि एक थाना प्रभारी साजन पासवान को स्थानीय लोगों ने घायल अवस्था में उसे जगह से उठाकर आनन-फानन में सदर अस्पताल बेगूसराय लाया जहां इलाज के दौरान कुछ ही देर के बाद मौत हो गई।  इस तीन पुलिस अधिकारी समेत चार कि मौत की खबर लगते ही पुलिस महकमे में खलबली मच गई. हालांकि इस घटना की सूचना मिलते ही बेगूसराय के एसपी मनीष कुमार घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच पड़ताल में जुटी।  SP ने बताया कि मृतकों में तीन सर्विंग SHO, एक प्राइवेट ड्राइवर  घटना के संबंध में बेगूसराय एसपी मनीष कुमार ने बताया कि देर रात ये एक्सीडेंट हुआ है. इसमें चार लोगों की मौत हो गई है. जिसमें तीन पुलिस मधेपुरा पुलिस के सर्विंग SHO हैं और एक जो ड्राइवर जो गाड़ी से लौटते एक्सीडेंट हुआ है. इन्वेस्टिगेशन जारी है. पोस्टमार्टम के बाद जो भी वैधानिक प्रक्रिया है, उसे फॉलो किया जा रहा है। 

ब्रिक्स प्रतिनिधियों के सम्मान में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विशेष आयोजन, कृषि मंत्रियों संग हुई अहम चर्चा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों से मुलाकात इन्दौर में अतिथियों और प्रतिनिधियों के सम्मान में दिया रात्रि भोज इन्दौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल कृषि मंत्रियों एवं अन्य विदेशी प्रतिनिधियों एवं अतिथियों से मुलाकात की। उन्होंने अतिथियों का देश के दिल मध्यप्रदेश की औद्योगिक राजधानी इन्दौर में स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी के सम्मान में रात्रि भोज भी दिया। अतिथियों के स्वागत के साथ मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा और पर्यटन वैभव को प्रदर्शित करने वाले रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। सांस्कृतिक संध्या में प्रदेश की लोक कला, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना पर आधारित प्रस्तुतियों ने देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों का मन मोह लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम द्वारा से मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटन स्थलों की विशेषताओं को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया गया। रात्रि भोज एवं सांस्कृतिक आयोजन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी राम सिलावट, कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, सांसद शंकर लालवानी तथा सुकविता पाटीदार, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, जिला पंचायत अध्यक्ष के श्रीमती रीना सतीश मालवीय, विधायक श्रीमती मालिनी गौड़, सुउषा ठाकुर, रमेश मेंदोला, मधु वर्मा तथा गोलू शुक्ला, सावन सोनकर, प्रताप करोसिया, सुमित मिश्रा, श्रवण सिंह चावड़ा, सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 

रेल यात्रियों को झटका! VIP कोटे के विस्तार से ग्वालियर की कई ट्रेनों में टिकट मिलना हो सकता है मुश्किल

ग्वालियर ग्वालियर से सफर करने वाले आम रेल यात्रियों के लिए आने वाले दिन और भी मुश्किल भरे हो सकते हैं। एक तरफ जहां नियमित ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट और नो-रूम के कारण आम जनता का सफर बेपटरी हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ रेलवे प्रशासन आम यात्रियों को राहत देने के बजाय इमरजेंसी (आपातकालीन) कोटे का दायरा और बढ़ाने की तैयारी में है। इसमें रेलवे का तर्क है कि वीआइपी लोगों को अचानक आना-जाना पड़ता है, इसलिए यह कोटा बढ़ाया जा रहा है। लेकिन इस कदम से सीधा फायदा सिर्फ रसूखदारों को मिलेगा, जबकि दो-दो महीने पहले टिकट बुक कराकर कतार में खड़ा आम आदमी कंफर्म सीट के लिए तरसता रह जाएगा। कैंसर मरीजों को राहत, लेकिन आम जनता पर दोहरी मार इस पूरे मामले में राहत की बात सिर्फ इतनी है कि रेलवे इस कोटे के तहत आम आदमी की श्रेणी में आने वाले कैंसर मरीजों को प्राथमिकता देता है। बीमारी की गंभीरता को देखते हुए रेलवे का यह कदम सराहनीय है, लेकिन इसकी आड़ में वीआइपी सीटों की संख्या बढ़ाए जाने से सामान्य और स्लीपर क्लास के मध्यमवर्गीय यात्रियों का हक मारा जाना तय है। ग्वालियर से इन ट्रेनों पर असर ग्वालियर से शुरू होने वाली और यहां से गुजरने वाली लगभग 50 ट्रेनों में इमरजेंसी कोटा लागू है। वीआइपी कोटा बढऩे से जिन प्रमुख ट्रेनों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, उनमें शामिल हैं। वंदे भारत, शताब्दी एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस, पंजाब मेल, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, मंगला एक्सप्रेस, केरला एक्सप्रेस, स्वर्ण जयंती, चंबल एक्सप्रेस, ताज एक्सप्रेस, बरौनी एक्सप्रेस, रतलाम इंटरसिटी और बुंदेलखंड एक्सप्रेस आदि शामिल है। सीटों से ज्यादा आवेदन रेलवे की वीआइपी पेटी सुबह होते ही आवेदनों से भर जाती है। रेल प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि कोटा सीमित है, जबकि सिफारिशों का दबाव उम्मीद से कहीं ज्यादा है। सुबह 10 बजे तक रेलवे कार्यालय में माननीयों के प्रतिनिधियों की कतार लग जाती है। कई बार अंतिम क्षणों तक झांसी संपर्क करना पड़ता है। इन्हें मिलता है कोटा रेलवे के अनुसार ट्रेनों में कोटा न्यायाधीश, सांसद, विधायक, मंत्री, कैंसर मरीज, एमसीओ (मिलिट्री), सीआरपीएफ और पुलिस आदि को प्राथमिकता के आधार पर दिया जाता है। इसमें से कुछ का कोटा तो लगभग हर एक दो दिन में लगता ही है। मंजूरी मिलते ही बढ़ाया जाएगा इमरजेंसी कोटा हमारे यहां से निकलने वाली कुछ ट्रेनों में भारी मांग को देखते हुए कोटा बढ़ाने का प्रस्ताव बनाकर रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद कुछ चुनिंदा ट्रेनों में इमरजेंसी कोटा बढ़ जाएगा। -अमन वर्मा, सीनियर डीसीएम (झांसी मंडल)

धर्म बदलवाने का दबाव और हैवानियत की हदें, पति-पत्नी की साजिश का सनसनीखेज मामला आया सामने

कैमूर बिहार के कैमूर में धर्मांतरण के लिए रची गई खौफनाक साजिश का खुलासा हुआ है. दरअसल कैमूर में एक मुस्लिम कपल ने धर्मांतरण के लिए एक महिला को निशाना बनाकर बेहद घिनौनी साजिश रची. महिला को कथित तौर पर नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब आरोपी महिला के साथ दुष्कर्म कर रहा था, तब उसकी पत्नी मोबाइल फोन से पूरी घटना का वीडियो बना रही थी. इसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर महिला पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया और ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू हुआ।  क्या है पूरा मामला? मामला कैमूर जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है. पीड़ित महिला की शिकायत के अनुसार आरोपी एकराम अंसारी ने उसे नशीला पदार्थ दिया, जिससे वह अचेत हो गई. आरोप है कि बेहोशी की हालत का फायदा उठाकर आरोपी ने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए. इस दौरान आरोपी की पत्नी शाहिदा बेगम मौके पर मौजूद रही और उसने मोबाइल फोन से पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया। वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग का खेल! पीड़िता का आरोप है कि घटना के बाद आरोपी दंपति ने वीडियो को हथियार बना लिय. महिला को धमकी दी गई कि यदि उसने उनकी बात नहीं मानी और धर्म परिवर्तन नहीं किया तो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा. लगातार मिल रही धमकियों और दबाव से परेशान होकर महिला ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।  पुलिस ने खोला साजिश का राज शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. जांच के दौरान सामने आया कि कथित दुष्कर्म और वीडियो रिकॉर्डिंग की घटना में पति-पत्नी दोनों की भूमिका थी. पुलिस अधिकारियों के अनुसार महिला को नशीला पदार्थ दिए जाने, दुष्कर्म और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने के आरोपों की जांच की गई, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए आरोपी दंपति को गिरफ्तार कर लिया गया।  दोनों आरोपी गिरफ्तार पुलिस ने आरोपी एकराम अंसारी और उसकी पत्नी शाहिदा बेगम को गिरफ्तार कर लिया है. अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है. इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और मोबाइल फोन की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जा सके।  इलाके के लोग हैरान! वहीं इस घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है. स्थानीय लोग इस वारदात को लेकर स्तब्ध हैं. नशीला पदार्थ, दुष्कर्म, वीडियो रिकॉर्डिंग, ब्लैकमेलिंग और धर्म परिवर्तन के दबाव जैसे गंभीर आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है. पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

LPG से मुक्ति की ओर भोपाल, चार इमली समेत 4 प्रमुख कॉलोनियों में PNG नेटवर्क का विस्तार

भोपाल  मध्य प्रदेश में पिछले तीन महीनों से चल रही एलपीजी (घरेलू गैस सिलेंडर) की भारी किल्लत से आम जनता परेशान है। राजधानी भोपाल में भी यह संकट लगातार बना हुआ है और गैस एजेंसियों पर सिलेंडरों की बुकिंग को लेकर लोग चक्कर काट रहे हैं। बुधवार को ही एक गैस एजेंसी पर सिलेंडर न मिलने को लेकर उपभोक्ताओं ने भारी हंगामा किया। इस बड़े संकट से निपटने के लिए अब खाद्य विभाग भोपाल को 'सिलेंडर फ्री' बनाने की एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत जिन इलाकों में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की पाइपलाइन बिछ चुकी है, वहां भविष्य में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। चार बड़ी कॉलोनियों से होगी शुरुआत फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि भोपाल में 'थिंक गैस' कंपनी के जरिए घरों तक सीधे पाइपलाइन से गैस पहुंचाने का काम किया जा रहा है। यह लाइन मिसरोद से शुरू होकर होशंगाबाद रोड के दोनों तरफ की कॉलोनियों को कवर कर रही है। वर्तमान में बावड़ियाकलां, सलैया, अयोध्या बायपास, अवधपुरी और साकेत नगर के अधिकांश घरों में कनेक्शन दिए जा चुके हैं। अब विभाग ने योजना बनाई है कि जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछ रही है, वहां पहले शत-प्रतिशत (100%) घरों को कनेक्शन दिया जाए और उसके बाद ही अगली कॉलोनी में काम शुरू हो। इसके लिए पहले चरण में चार बड़ी कॉलोनियों— बावड़ियाकलां की केराल केनसिप, अवधपुरी की सौम्या पार्कलैंड, अयोध्या बायपास की सागर लैक व्यू होम्स और सलैया की आकृति ग्रीन को चुना गया है। 172 कॉलोनियों के सामने से गुजर रही है लाइन अधिकारियों के मुताबिक, थिंक गैस कंपनी ने होशंगाबाद रोड के दोनों ओर समेत कुल 172 कॉलोनियों के मुख्य रास्तों पर गैस लाइन बिछा दी है। यहां रहने वाले लोग कंपनी के पास आवेदन करके अपने घरों में कनेक्शन लगवा रहे हैं और कटारा हिल्स समेत कई अन्य इलाकों से भी लोग इसके लिए तेजी से फॉर्म भर रहे हैं। विभाग अब चार-चार कॉलोनियों का समूह बनाकर फोकस कर रहा है ताकि काम जल्दी पूरा हो सके। एक तय समय सीमा के बाद इन इलाकों में एलपीजी सिलेंडरों की होम डिलीवरी हमेशा के लिए बंद कर दी जाएगी। मंत्री और अफसरों के बंगलों में भी बिछेगी पाइपलाइन भोपाल के दो सबसे बड़े और वीआईपी इलाके 'चार इमली' और '74 बंगला' में भी इस समय भूमिगत (अंडरग्राउंड) गैस पाइपलाइन बिछाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। आपको बता दें कि इन दोनों क्षेत्रों में मध्य प्रदेश के 75 फीसदी से ज्यादा मंत्रियों, सीनियर आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों के सरकारी बंगले हैं। इन इलाकों के अधिकांश हिस्सों में लाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है और कुछ ही दिनों में बंगलों के भीतर कनेक्शन देने की शुरुआत हो जाएगी। अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते गहराया संकट दरअसल, वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े सैन्य टकराव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसी का असर है कि मध्य प्रदेश और भोपाल में पिछले कई महीनों से घरेलू गैस की भारी किल्लत देखी जा रही है। भोपाल में इस समय हर दिन 12 से 14 हजार सिलेंडरों की बुकिंग हो रही है, जबकि कंपनियों की तरफ से सप्लाई केवल 9 से 10 हजार सिलेंडरों की ही हो पा रही है। इस किल्लत की चपेट में आम जनता के साथ-साथ कई बड़े मंत्री और अफसर भी आ गए थे, जिसके बाद वीआईपी इलाकों में भी पाइपलाइन बिछाने के काम में तेजी लाई गई है। होशंगाबाद रोड पर सबसे ज्यादा 43 हजार कनेक्शन वर्तमान में पीएनजी पाइपलाइन का सबसे बड़ा जाल होशंगाबाद रोड पर फैला हुआ है, जहां करीब 43 हजार घरों में गैस पाइपलाइन के जरिए खाना बन रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस योजना को पुराने शहर (ओल्ड सिटी) की तरफ भी ले जाया जाएगा ताकि वहां के बड़े इलाकों को कवर करके घर-घर गैस पहुंचाई जा सके। इसके अलावा घरों के साथ-साथ शहर के सभी बड़े होटलों, रेस्टोरेंटों, व्यावसायिक संस्थानों और बहुमंजिला इमारतों (मल्टीस्टोरी बिल्डिंग) को भी अनिवार्य रूप से पीएनजी लाइन से जोड़ा जाएगा। 90 दिनों में कनेक्शन लेना होगा अनिवार्य सरकार ने इस योजना को लेकर एक नई और सख्त गाइडलाइन भी जारी कर दी है। इसके नियम के मुताबिक, जिन इलाकों में गैस की अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछ जाएगी, वहां के निवासियों को 90 दिनों के भीतर पीएनजी कनेक्शन लेना अनिवार्य होगा। यदि कोई तय समय के भीतर नया कनेक्शन नहीं लेता है, तो उसका पुराना एलपीजी सिलेंडर वाला कनेक्शन सरकारी आदेश के तहत ब्लॉक या काट दिया जाएगा। PNG को लेकर केंद्र सरकार ने गाइडलाइन भी जारी की गैस संकट के बीच ही भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 'अनिवार्य वस्तु अधिनियम, 1955' के तहत एक नया आदेश जारी किया था। इस नए नियम का मकसद देशभर में गैस पाइपलाइन बिछाने और उनके विस्तार के काम को रफ्तार देना है। अब पाइपलाइन के काम में जमीन मिलने या मंजूरी मिलने में होने वाली देरी खत्म हो गई है। जिससे रिहायशी इलाकों (Residential areas) तक गैस इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से पहुंच सकेगा। नए एक्ट के 4 नियम समझें 1. सोसाइटियों और RWA की मनमानी खत्म     कई बार हाउसिंग सोसाइटियों या RWA (रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) के विरोध की वजह से पाइपलाइन का काम रुक जाता था। अब ऐसा नहीं होगा।     अगर कोई कंपनी पाइपलाइन के लिए रास्ता मांगती है तो सोसाइटी को 3 दिन के भीतर मंजूरी देनी होगी।     अगर सोसाइटी ने मना किया या देरी की तो वहां रहने वाले सभी घरों की PNG सप्लाई पर रोक लगाई जा सकती है। 2. छोटे इलाकों को 10 दिन में मंजूरी मिलेगी     पाइपलाइन बिछाने के लिए अब सरकारी विभागों को फाइलों को लटकाने की इजाजत नहीं है।     छोटे नेटवर्क के लिए 10 दिन और बड़ी लाइनों के लिए 60 दिन में मंजूरी देना अनिवार्य है।     अगर विभाग तय समय में जवाब नहीं देता, तो उसे 'डीम्ड क्लियरेंस' यानी 'ऑटोमैटिक मंजूरी' मान लिया जाएगा और काम शुरू कर दिया जाएगा। 3. जमीन और मुआवजे का झंझट खत्म अगर पाइपलाइन किसी की निजी जमीन … Read more

NCR में बड़ा बदलाव संभव! हरियाणा के 5 जिलों की किस्मत का फैसला करेगी 16 जून की बैठक

चंडीगढ़  दिल्ली और आसपास के राज्यों के करोड़ों लोगों के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की सीमाओं से जुड़ी एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। हरियाणा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का दायरा अब बहुत जल्द बड़े स्तर पर सिकुड़ने वाला है। आगामी 16 जून को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (एनसीआरपीबी) की एक अहम बैठक होने जा रही है। यहां करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी जिलों का बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से बाहर हो सकता है।  दरअसल, केंद्र सरकार और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड रीजनल प्लान-2041 के तहत एनसीआर की सीमाओं की समीक्षा कर रहे हैं। प्रस्ताव के अनुसार, एनसीआर की सीमा दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर के दायरे तक सीमित की जा सकती है। इस बदलाव का सबसे अधिक असर हरियाणा पर पड़ने की संभावना है। वर्तमान में हरियाणा के 14 जिले पूरी तरह या आंशिक रूप से एनसीआर में शामिल हैं। इनका कुल क्षेत्रफल 25 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक है। नया प्रस्ताव लागू होने पर यह क्षेत्र घटकर करीब 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर रह सकता है। इससे करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी जैसे जिलों के बड़े हिस्से एनसीआर की सीमा से बाहर हो सकते हैं। इस मुद्दे को सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उठाया था। उनका तर्क था कि दिल्ली से काफी दूर स्थित जिलों को एनसीआर में बनाए रखना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने एनसीआर के मौजूदा ढांचे की समीक्षा की आवश्यकता पर कई बार जोर दिया था। अब उनकी इसी सोच को रीजनल प्लान-2041 के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। क्या है हरियाणा सरकार का दिया गया सुझाव? हरियाणा सरकार ने यह भी सुझाव दिया है कि राज्य के 11 राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर चौड़े कॉरिडोर को एनसीआर में शामिल रखा जाए . इससे सड़क और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े क्षेत्रों को फायदा मिल सकता है . माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से पानीपत और करनाल के कुछ हिस्सों को राहत मिल सकती है। राज्य सरकार का कहना है कि एनसीआर में शामिल जिलों पर कई अतिरिक्त नियम और प्रतिबंध लागू होते हैं। वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का असर उन क्षेत्रों पर भी पड़ता है, जो दिल्ली के प्रभाव क्षेत्र से काफी दूर हैं। इससे उद्योग, निर्माण कार्य और अन्य आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।  यदि एनसीआर की सीमा में बदलाव होता है, तो इसका असर केवल एनसीआर का दर्जा खत्म होने तक सीमित नहीं रहेगा। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग, परिवहन परियोजनाओं, रेल कनेक्टिविटी, निवेश योजनाओं और रियल एस्टेट सेक्टर पर भी प्रभाव पड़ सकता है।अब सभी की नजर 16 जून को होने वाली एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक पर टिकी है, जहां इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय की दिशा तय हो सकती है।