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भोपाल में 26 सितंबर से शुरू होगा विज्ञान मेला, ISRO निदेशक देंगे युवाओं को खास क्लास

भोपाल राजधानी भोपाल में 12 वें विज्ञान मेले का आयोजन किया जा रहा है. इसमें पहली बार राजधानी के बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय को भी आयोजन में पार्टनर बनाया गया है. अब तक इसका आयोजन विज्ञान भारती और मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के तत्वावधान में किया जाता था. लेकिन इस बार बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय को भी शामिल किया गया है. इसरो निदेशक से संवाद करेंगे युवा वैज्ञानिक मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक अनिल कोठारी ने बताया कि, ''इस बार विज्ञान मेला में जो भी बच्चे सम्मिलित होंगे, उनको देश और प्रदेश के वरिष्ठ वैज्ञानिकों से बात करने का मौका मिलेगा.'' कोठारी ने बताया कि, ''अभी इसरो के निदेशक डॉ. वी. नारायणन ने इस संवाद में शामिल होने की सहमति दी है. इनके अलावा भोपाल में भी 16 शोध संस्थान हैं, उनके वैज्ञानिक भी संवाद में शामिल होंगे.'' 4 दिन तक बीयू परिसर में लगेगा मेला विज्ञान की नवीनतम उपलब्धियों और नवाचारों का भव्य विज्ञान मेला का आयोजन किया जा रहा है. बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय (बीयू) के मैदान एवं ज्ञान विज्ञान भवन परिसर में 12वां विज्ञान मेला 26 से 29 सितंबर तक आयोजित होगा. इस आयोजन में देश के विभिन्न अंचलों से विज्ञानी, शोधकर्ता, विद्यार्थी और शिक्षक शामिल होंगे. इस मेले का उद्देश्य नवाचार और संवाद के माध्यम से समाज के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत करना है. विज्ञान मेले में ये रहेगा खास इस आयोजन में प्रमुख आकर्षण अत्याधुनिक विज्ञान प्रदर्शनी, टेक्नोलॉजी शो और इनोवेशन स्टॉल होंगे. इसमें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थान इसरो, एनटीपीसी, एम्प्री सहित अन्य सस्थानों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी. इसमें सरकारी, निजी, गैर सरकारी संगठन, संस्थान, कंपनियां, सामाजिक संगठन और स्कूल-कालेज सक्रिय रूप से भाग लेंगे. पंजीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है. इच्छुक प्रतिभागी निर्धारित पोर्टल पर पंजीयन कर सकते हैं. कार्यशालाएं, व्याख्यान और विशेष सत्र होंगे इस विज्ञान मेले में कार्यशालाएं, व्याख्यान और विशेष सत्र होंगे. नवाचार संगम में कृषि, पर्यावरण से संबंधित सामाजिक समस्याओं पर तकनीकी समाधान के नवाचार पर आधारित इस प्रतियोगिता में आमंत्रित किए गए हैं. इसमें 315 पंजीकरण हुए हैं. वहीं ज्ञान सेतु में विज्ञान शिक्षक कार्यशाला, उपस्थित विज्ञान शिक्षकों को विज्ञान प्रयोग किट का वितरण किया जाएगा. वहीं भारतीय ज्ञान परंपरा संगोष्ठी में विविध राष्ट्रीय एवं राज्य के शोध एवं शिक्षा संस्थानों से करीब 200 विज्ञानी एवं प्राध्यापक रहेंगे. इस गोष्ठी में भारतीय ज्ञान परंपरा-राष्ट्रीय प्रकोष्ठ के संयोजक आईआईटी इंदौर के प्रोफेसर गंटी सूर्यनारायण मूर्ती का मार्गदर्शन भी मिलेगा. सीधा संवाद कार्यक्रम में 300 विद्यार्थी प्रतिदिन विज्ञानियों से संवाद का अवसर पाएंगे. इसके अलावा स्कूल और कॉलेज विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक एवं विशेष प्रस्तुतियां होंगी.  

भोपाल मेट्रो का किराया तय: ₹20 से ₹80 के बीच, शुरुआती 7 दिन मुफ्त यात्रा और 3 महीने तक डिस्काउंट

भोपाल  भोपाल में अक्टूबर से लोग मेट्रो ट्रेन में सफर कर सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेट्रो को हरी झंडी दिखाने राजधानी आ सकते हैं। इससे पहले डिपो और गाड़ी को देखने के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की एक टीम 24 सितंबर को भोपाल पहुंचेगी।  मेट्रो की किराया सूची पर भी मंथन किया जा रहा है। अफसरों की मानें तो 7 दिन तक लोग मेट्रो में फ्री सफर कर सकेंगे। वहीं, 3 महीने तक टिकट पर 75%, 50% और 25% की छूट दी जाएगी। छूट खत्म होने के बाद सिर्फ 20 रुपए में मेट्रो का सफर किया जा सकेगा। इसका अधिकतम किराया 80 रुपए होगा। 31 मई को इंदौर में चलाई गई मेट्रो के लिए भी यही मॉडल रहा था। भोपाल में ऑरेंज लाइन के पहले फेज में मेट्रो सुभाषनगर से एम्स तक करीब 6 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। दूसरा फेस सुभाषनगर से करोंद तक है। हालांकि, इसका काम अगले 2 से 3 साल में पूरा हो सकेगा। 15 दिन में काम पूरा करने का टारगेट अगला स्टेशन एम्स है। दरवाजे बाईं तरफ खुलेंगे। कृपया, दरवाजों से हटकर खड़े हों…इस तरह का अनाउंसमेंट आपको अक्टूबर में सुनाई देने लगेगा। मेट्रो के ट्रायल रन के बीच कमर्शियल रन शुरू होगा। हालांकि, अभी एम्स, अलकापुरी और डीआरएम ऑफिस स्टेशन पर गेट लगाने समेत अन्य काम किए जा रहे हैं। इन्हें अगले 15 दिन में पूरा करने का टारगेट है। 30 से 80 किमी प्रति घंटा रहेगी मेट्रो की स्पीड भोपाल के सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (RKMP) और इंदौर के गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर तक मेट्रो कोच को ट्रैक पर दौड़ाकर ट्रायल रन किया जा रहा है। ट्रायल रन में न्यूनतम 30 और अधिकतम 80 किमी प्रतिघंटा रफ्तार रखी जा रही है। बीच-बीच में 100 से 120 किमी की रफ्तार से भी मेट्रो दौड़ाई जा रही है। सिग्नल लग चुके हैं। इनकी टेस्टिंग भी हो रही है। ट्रेन की तर्ज पर मेट्रो में भी टिकट लेनी पड़ेगी मेट्रो का टिकट सिस्टम ऑनलाइन न होकर मैन्युअल ही रहेगा। जैसे आप ट्रेन में टिकट लेकर सफर करते हैं, वैसे ही मेट्रो में भी कर सकेंगे। इंदौर में अभी यही सिस्टम है। भोपाल और इंदौर मेट्रो में ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने वाली तुर्किए की कंपनी 'असिस गार्ड’ से काम छिनने और नई कंपनी के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू किए जाने से यह स्थिति बनेगी। बता दें कि असिस गार्ड का मामला पिछले 4 महीने से सुर्खियों में था। आखिरकार अगस्त में असिस गार्ड का टेंडर कैंसिल कर दिया गया। नई कंपनी के लिए टेंडर भी कॉल किए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन महीने का वक्त लग सकता है। मैन्युअल टिकट ही एक मात्र ऑप्शन अफसरों ने बताया कि असिस गार्ड कंपनी इंदौर में स्टेशनों पर भी सिस्टम लगा रही थी, लेकिन विवाद के बाद इंदौर में मैन्युअल टिकट ही ऑप्शन बचा था। पिछले साढ़े 3 महीने से इंदौर में ट्रेन जैसा ही सिस्टम है। इसमें मेट्रो के कर्मचारी ही तैनात किए गए हैं। यही ऑप्शन अब भोपाल मेट्रो के लिए भी बचा है। दरअसल, 'असिस गार्ड’ के जिम्मे ही सबसे महत्वपूर्ण ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन यानी किराया लेने की पूरी प्रक्रिया का सिस्टम तैयार करने का काम था। जिसमें कार्ड के जरिए किराया लेने के बाद ही गेट खुलना भी शामिल है। यह कंपनी सिस्टम का पूरा मेंटेनेंस भी करती। अब अनुबंध खत्म होने पर नई कंपनी काम करेगी, लेकिन उसे टेंडर और फिर अन्य प्रक्रिया से गुजरने में समय लगेगा। इसलिए मेट्रो कॉर्पोरेशन भोपाल में भी मैन्युअली टिकट सिस्टम ही लागू कर सकता है। अफसरों के अनुसार, मैन्युअली सिस्टम के लिए अमला तैनात किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की विशेष अदालत आज बुलाई गई, जमानत याचिकाओं पर होगी सुनवाई

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में पहली बार 10 जज केवल जमानत याचिकाओं की सुनवाई करने के लिए बैठेंगे. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने एक प्रशासनिक आदेश दिया है, जिसे हाई कोर्ट की वेबसाइट पर देखा जा सकता है. इसमें शनिवार को 10 जज अपनी-अपनी अदालत में बैठेंगे. वे केवल जमानत याचिकाओं की सुनवाई करेंगे. एमपी हाई कोर्ट में फिलहाल जमानत याचिकाओं के 3000 से ज्यादा मामले लंबित हैं. इन्हीं मामलों में लोगों को न्याय देने के लिए हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था की है. हमारी न्याय व्यवस्था की प्रक्रिया में जमानत का प्रावधान है. जस्टिस अचल कुमार पालीवाल, जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल, जस्टिस देवनारायण मिश्रा, जस्टिस दीपक खोत, जस्टिस अजय कुमार निरंकारी, जस्टिस हिमांशु जोशी, जस्टिस रामकुमार चौबे, जस्टिस रत्नेशचंद्र सिंह बिसेन, जस्टिस बीपी शर्मा और जस्टिस प्रदीप मित्तल कल 20 सितंबर को केवल जमानत याचिकाएं सुनेंगे. जबलपुर की मुख्य पीठ में फिलहाल जमानत याचिकाओं के लंबित हैं 3000 से ज्यादा मामले मान लीजिए किसी के खिलाफ किसी थाने में कोई एफआईआर दर्ज होती है. जिसके बाद पुलिस आरोपी को पकड़ती है. पकड़ने के बाद पुलिस आरोपी के ऊपर लगे आरोप का एक चालान तैयार करती है, जिसे कोर्ट में पेश किया जाता है. धाराओं के आधार पर यह तय होता है कि उसे कौन सी कोर्ट जमानत दे सकती है. गंभीर धाराओं में मामला हाईकोर्ट तक पहुंचता है. जमानत की प्रक्रिया में आरोपी को अपने किसी ऐसे जानकार को पेश करना होता है, जिसके पास कोई स्थाई संपत्ति हो. स्थाई संपत्ति के कागजात के आधार पर आरोपी को जमानत दे दी जाती है. जमानत में यह शर्त होती है कि आरोपी को हर पेशी पर कोर्ट में आना होगा. इसके बाद ट्रायल चलती है. आरोपी पर लगे आरोप को गवाह और सबूत के आधार पर सिद्ध किया जाता है और इसके बाद सजा होती है या आरोपी बेगुनाह साबित होता है. जुर्म तय नहीं होने तक आरोपी को जेल में बंद रखना सही नहीं न्याय व्यवस्था की प्रक्रिया सरल है लेकिन सबूत और गवाह को इकट्ठा करने में काफी समय लगता है. इतने दिनों तक किसी भी आरोपी को जेल में बंद रखना सही नहीं है, क्योंकि अब तक यह तय नहीं होता कि उसने ही जुर्म किया है. इसलिए हमारी न्याय व्यवस्था जमानत का प्रावधान देती है. इसमें आरोपी को अपने परिचय के किसी ऐसे आदमी को कोर्ट में लेकर आना होता है जिसके पास कोई स्थाई संपत्ति हो. संपत्ति के कागजात के आधार पर आरोपी को जमानत मिल जाती है लेकिन उसे समय-समय पर कोर्ट में आना पड़ता है. इसके बाद यदि उसे सजा होती है तो वह जेल जाता है और आरोप सिद्ध नहीं होने पर वह जेल से छूट जाता है. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लगभग पेंडिंग हैं चार लाख 80 हजार केस यह प्रक्रिया सुनने में या पढ़ने में जितनी सरल लगे लेकिन उतनी सरल है नहीं. क्योंकि हमारी अदालतों में लाखों केस पेंडिंग हैं. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लगभग चार लाख 80 हजार केस पेंडिंग हैं. ऐसी स्थिति में यदि किसी आरोपी को पुलिस ने पकड़ा और उसे जेल भेज दिया गया. यदि वह जमानत के लिए हाई कोर्ट में जमानत याचिका लगाता है. लेकिन हाई कोर्ट में महज 41 जज हैं और रोज उनके पास सैकड़ो मामले होते हैं. ऐसी स्थिति में जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को जमानत याचिका पर सुनवाई ही नहीं हो पाती. स्पेशल कोर्ट से हजारों लोगों को मिलेगा जमानत का फायदा एमपी हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील एडवोकेट दीपक ने बताया कि यह प्रक्रिया यदि लगातार चलती रही तो हजारों लोगों को जमानत का फायदा मिलेगा और न्याय की प्रक्रिया तेज होगी. इसके साथ ही जिलों को भी राहत मिलेगी. क्योंकि हमारी जेलों में भी अभी क्षमता से ज्यादा कैदी बंद है.  

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्देश पर ग्वालियर में सड़क सुधार का बड़ा अभियान, 42 सड़कें होंगी मरम्मत

ग्वालियर शहर की बदहाल सड़कों से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। नगर निगम अब 32.55 करोड़ रुपये खर्च कर शहर की 42 सड़कों का कायाकल्प करने जा रहा है। इन सड़कों का निर्माण डामर और सीसी से किया जाएगा। जल्द ही इन सड़कों पर काम शुरू हो जाएगा। शहर की प्रमुख सड़कों के साथ-साथ गलीमोहल्लों की सड़कें भी गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। लोग रोज हादसों के खतरे के बीच सफर करने को मजबूर हैं। इसी बदहाल स्थिति से निपटने के लिए निगम ने यह कदम उठाया है। निगम ग्रामीण क्षेत्र में 9 किलोमीटर लंबी 8 सड़कें 7.19 करोड़ रुपये की लागत से बनाएगा। ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र में 10.50 किलोमीटर लंबी 10 सड़कें 8.69 करोड़ रुपये की लागत से बनेंगी। दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में 11 किलोमीटर लंबी 10 सड़कों का निर्माण 11.26 करोड़ रुपये से किया जाएगा। वहीं पूर्व विधानसभा क्षेत्र में 8 किलोमीटर लंबी 14 सड़कों को 5.41 करोड़ रुपये में डामरीकरण से बनाया जाएगा। सड़क पर ठेकेदार की जिम्मेदारी तय इन सड़कों के कार्यों की विस्तृत योजना बनाई गई है, जिसमें सड़कों की लंबाई, उनकी संख्या और अनुमानित लागत, अधिकारी व ठेकेदार की जिम्मेदारी भी तय की गई है। इतना ही नहीं, इन सड़कों को बनाने के बाद ठेकेदार द्वारा इनमें बोर्ड भी लगाया जाएगा, जिसमें उस सड़क के निर्माण की राशि, ठेकेदार और गारंटी पीरियड सहित अन्य सभी पैरामीटर को दर्शाया जाएगा। सड़क के तय मानकों की जांच के बाद ही ठेकेदार का भुगतान किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्देश केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्देश पर रेड, यलो और ग्रीन जोन में सड़कों को बांटने की कवायद नगर निगम ने शुरू कर दी है। गुरुवार को दक्षिण व पूर्व की 12 सड़कोंं को चिह्नित किया है। यह सड़कें पूरी तरह से खराब हैं। रेड जोन में इन्हें शामिल किया जा सकता है। इसमें हजीरा चौराहा से बिरला नगर पुल 283 लाख, हजीरा चौराहा से चार शहर का नाका 59.65, नौ नंबर पुलिया से 50 क्वाटर तक 46.16, लक्ष्मीपुरम में डामरीकरण एवं नाली निर्माण 225, पप्पू राय जिम से गिर्राज मंदिर तक डामरीकरण व नाला निर्माण 160 व शील नगर कशिश वाटिका के सामने मुख्य मार्ग तक डामरीकरण 100 लाख सहित कुल 873.81 करोड़ के विकास कार्य को लिस्ट तैयार की है साथ ही दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में मांढरे की माता से कस्तूरबा तिराहा तक 3.43 करोड़, महाराज बाड़ा से सराफा होकर गस्त का ताजिया तक 1.02 करोड़, माधौगंज थाना से हेमसिंह की परेड 68 लाख रुपए खर्च होंगे। वहीं पारख जी का बाड़ा से जूता मार्केट दही मंडी 59 लाख, छप्पर वाला पुल से शान-ओ-शौकत तक 31 लाख और नहर पट्टर रोड 26 लाख सहित 6 करोड़ 32 लाख रुपए का प्रस्ताव तैयार किया गया है। हालांकि अभी यलो और ग्रीन जोन वाली सड़कों को चिह्नित करने की बात अफसरों द्वारा बताई जा रही है। ये टीम करेगी जांच सड़कों की जांच के लिए अपर आयुक्त, अधीक्षण यंत्री, सीसीओ व जेडओ लेवल पर टीम भी गठित की जाएगी, जो कि रोजाना निरीक्षण कर रिपोर्ट आयुक्त को देगी। बारिश से जर्जर सड़कें बनाने का प्रस्ताव तैयार बारिश से जर्जर हुई ग्वालियरशहर की सड़कों को बनाने के लिए 30 करोड़ से अधिक राशि का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें चारों विधानसभा की सड़कें को शामिल किया है। जल्द ही सड़कों का कार्य शुरू कराया जाएगा। शासन से भी सड़कों के संबंध में राशि की मांग की गई है। -संघप्रिय, आयुक्त नगर निगम

अपने ही गढ़ में डर से जी रहे माओवादी, जानिए वो 5 बड़े कारण जिन्होंने तोड़ दिया नक्सलियों का हौसला

रायपुर  छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाका कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था लेकिन अब यहां फोर्स की गतिविधियां बढ़ गई हैं। फोर्स नक्सलियों के उन ठिकानों में पहुंच गई है जिसे सबसे सुरक्षित माना जाता था। जिसके बाद माओवादी संगठन बैकफुट पर हैं।  नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी ने सरकार के सामने सरेंडर करने और हथियार डालने को लेकर लेटर लिखा है। यह लेटर CPI (माओवादी) के द्वारा जारी किया गया है। जो लेटर सामने आया है उस लेटर के सत्यता की जांच की जा रही है। आइए जानते हैं वो पांच कारण जिस कारण से नक्सलियों ने हथियार छोड़ने का फैसला किया है। ताबड़तोड़ एनकाउंटर से टूटी कमर छत्तीसगढ़ में बीते डेढ़ सालों में सुरक्षाबल के जवानों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। सुरक्षाबल के जवानों बस्तर और नक्सल प्रभावित जिलों में लगातार एनकाउंटर कर रहे हैं। एनकाउंटर के कारण नक्सलियों की रीढ़ टूट गई है। सुरक्षाबल के जवान केवल बस्तर ही नहीं उस सभी जिलों में कार्रवाई कर रहे हैं जहां नक्सली गतिविधियों की जानकारी मिल रही हैं। छत्तीसगढ़ में इस साल अलग-अलग मुठभेड़ों में 244 नक्सली मारे जा चुके हैं। इनमें से 215 नक्सली बस्तर संभाग में मारे गए। जबकि 27 गरियाबंद जिले में मारे गए। इसके अलावा दुर्ग संभाग के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में दो नक्सली मारे गए हैं। आपूर्ति को किया प्रभावित छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबल के जवानों ने नक्सलियों के उन ठिकानों पर भी धावा बोला जो उनके लिए सुरक्षित माने जाते हैं। सुरक्षाबल के जवानों ने नक्सलियों की आपूर्ति को प्रभावित किया है। जिस कारण से नक्सली संगठनों तक हथियार और राशन नहीं पहुंच पा रहा है। सुरक्षाबलों ने माओवादियों द्वारा छिपाए गए भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद बरामद किया है। हथियारों की बरामदगी माओवादियों के खिलाफ बड़ा झटका मानी जा रही है। जवानों ने माओवादियों द्वारा छिपाए गए हथियारों, विस्फोटक सामग्री और रसद के बड़े डंप का पता लगाकर उन्हें जब्त किया है। जवानों ने नक्सलियों के ठिकानों से बीजीएल लांचर, मजल लोडिंग बंदूक, बीजीएल सेल, बैरल पाइप, बैटरी, इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, डायरेक्शनल माइंस, पिठ्ठू बैग, बीजीएल पोच, माओवादी वर्दी, केरिपु पैटर्न की कॉम्बैट ड्रेस, बेल्ट, बेडशीट, माओवादी साहित्य, पटाखे और राशन सामग्री बरामद की है। नियद नेल्लानार योजना का प्रभाव छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ जहां सुरक्षाबल के जवान नक्सलियों के साथ सीधे तौर पर मुकाबला कर रहे हैं वहीं, सरकार भी रणनीति तौर पर बड़ी तैयारी कर रही है। नक्सल प्रभावित गांवों में विकास पहुंचाने के लिए सरकार ने नियद नेल्लानार योजना की शुरुआत की है। इस योजना का लाभ बस्तर जिले के नक्सल प्रभावित लोगों को मिल रहा है। जिस कारण से ग्रामीणों ने नक्सलियों के खिलाफ आवाज उठाई है। जिन इलाकों में विकास नहीं पहुंचा था वहां जिला प्रशासन, सुरक्षाबल के जवान के माध्यम से सरकार योजनाएं तेजी से पहुंच रही हैं। लोगों के आधारकार्ड बनाए जा रहे हैं। उनको अलग-अलग योजनाओं का लाभ मिल रहा है जिससे नक्सलवाद के खिलाफ उनका मोहभंग हुआ है और सुरक्षाबल के जवानों को सहयोग दे रहे हैं। बड़े लीडरों के मारे जाने से संगठन कमजोर छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबल के जवानों ने रणनीति बदली है। जवानों ने नक्सलियों के टॉप लीडरों को टारगेट करते हुए ऑपरेशन शुरु किए हैं। सुरक्षाबल के जवानों ने नक्सलियों के कई टॉप लीडरों को मार गिराया है। जिन लीडरों को मारा गया है उनमें माओवादी संगठन का महासचिव भी शामिल है। सुरक्षाबल के जवानों ने सेंट्रल कमेटी मेंबर मोडेम बालकृष्ण, डेढ़ करोड़ के इनामी बसवाराजू, सेंट्रल कमेटी मेंबर जयराम उर्फ चलपति, सेंट्रल रीजनल ब्यूरो रेणुका जैसे नक्सलियों का एनकाउंटर किया है। नक्सली संगठनों को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब पालित ब्यूरो का मेंबर और डेढ़ करोड़ रुपये का इनामी बसवाराजू मारा गया है। माओवादी विचारधारा छोड़ रहे हैं नक्सली एक तरफ जहां नक्सलियों के खिलाफ जवान सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं वहीं, दूसरी तरफ बड़ी संख्या में माओवादी सरेंडर भी कर रहे हैं। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को नई सरेंडर पॉलिसी के तहत नई शुरुआत करने का मौका दिया जा रहा है। जिसके बाद बस्तर इलाके में बड़े पैमाने पर नक्सली सरेंडर कर रहे हैं। नक्सलियों के सरेंडर और नए कैडरों की भर्ती में कमी के कारण भी नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ में 2023 में नई सरकार के गठन के बाद से अभी तक 1704 माओवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं।  

मान सरकार का कड़ा रुख: नियम तोड़ने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज

चंडीगढ़ पंजाब सरकार के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज अधिकारियों को नदियों की दरारों को भरने के काम में और तेजी लाने के निर्देश दिए। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ यहां एक आपात बैठक के दौरान, कैबिनेट मंत्री ने चल रहे कार्यों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने राज्य भर के बांधों की दरारों को भरने और संवेदनशील हिस्सों को मजबूत करने के लिए किए गए कार्यों की भी जानकारी ली। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि अब तक दर्ज की गई 44 दरारों में से ज्यादातर को भर दिया गया है, जबकि बाकी दरारों को भरने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगर भविष्य में पानी का बहाव तेज होता है, तो विभाग ऐसी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहे। उन्होंने आगे कहा कि इस मुश्किल घड़ी में यह बेहद जरूरी है कि विभाग के सभी संसाधन इन कार्यों के लिए जुटाए जाएं और इनके पूरा होने तक कड़ी निगरानी रखी जाए। बरिंदर कुमार गोयल ने अधिकारियों को हिदायत की कि इन बांधों और अन्य विभागीय संपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि उनकी समय पर मरम्मत सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन सुरक्षा उपायों के लिए धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने नदियों के किनारे रहने वाले लोगों, कृषि भूमि और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई। बैठक में प्रमुख सचिव कृष्ण कुमार, मुख्य इंजीनियर (ड्रेनेज) हरदीप सिंह मेंदीरत्ता, मुख्य इंजीनियर (नहरां) शेर सिंह, मुख्य इंजीनियर (मुख्यालय) जतिंदर पाल सिंह, मुख्य इंजीनियर (डिजाइन) विजय कुमार गर्ग और अन्य अधिकारी उपस्थित थे। 

रास्ते में रुके कांग्रेस कार्यकर्ता, पुलिस के साथ हुई विवादित भिड़ंत

मथुरा  यूपी के मथुरा में कांग्रेस कार्यकर्ता की पुलिस के साथ तकरार हो गई। कांग्रेस कार्यकर्ता सीएम योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन देने जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ता के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी। सीएम को इसलिए ज्ञापन देने जा रहे थे कांग्रेस कार्यकर्ता  दरअसल, मथुरा जिले में पिछले दिनों आई भयंकर बाढ़ से किसानों और आम नागरिकों की स्थिति को अत्यंत दयनीय बना दिया। बाढ़ की वजह से फसलों का भारी नुकसान हुआ। पूरे क्षेत्र में कृषि भूमि फैसले पशुधन मकान एवं अन्य संपत्तियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। यह आपदा जनजीवन के लिए संकट बनकर सामने आई है। प्रभावित किसान और आमजनों के लिए विभिन्न मांगों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए। ये थी मांगे… कांग्रेस कार्यकर्ता जिला कांग्रेस कमेटी मथुरा के अध्यक्ष मुकेश धनगर के नेतृत्व में सीएम योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। इसमें बाढ़ आपदा से प्रभावित किसानों का कर्जा माफ करने, डीएपी यूरिया खाद्य उपलब्ध कराने के साथ ही उनकी तमाम मांगे थीं। लेकिन, रास्ते में ही पुलिस ने उन्हें रोक लिया और पुलिस के साथ उनकी तीखी नोकझोंक हो गई। इसके बाद क्वालिटी चौराहा पर सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन दिया गया।

रोजगारपरक उद्योग लगाने पर सरकार करेगी हर संभव मदद: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

नवम्बर में बनारस में होगी इंडस्ट्रियल समिट भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि औद्योगिक निवेश से विन्ध्य एवं त्योंथर को विकास की नई गति मिलेगी। उद्योगपति रोजगारपरक उद्योग लगायें सरकार उनकी हर संभव मदद करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बनारस से आये उद्यमियों के आग्रह पर घोषणा की कि नवम्बर माह में काशी विश्वनाथ की नगरी में इंडस्ट्रियल समिट का आयोजन होगा। बनारस के उद्यमियों ने भी विन्ध्य क्षेत्र में एक हजार करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीवा जिले के चाकघाट में उद्यमियों से वन-टू-वन चर्चा के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के अनुरूप हम स्वदेशी के मूलमंत्र को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। आप सभी उद्यमी अपने उद्योग स्थापित करने के लिये आगे आयें, राज्य शासन द्वारा आपको हर संभव मदद दी जायेगी। उन्होंने कहा कि औद्योगिक निवेश में मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में हम देश में उच्चतम स्तर पर होंगे। उन्होंने उद्यमियों को पराली से संबंधित व फूड प्रोसेसिंग से संबंधित उद्यम के साथ अन्य क्षेत्र में भी उद्योग स्थापना के लिये आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीवा जिले में मऊगंज व त्योंथर विधानसभा क्षेत्रों में पर्याप्त भूमि की उपलब्धता है। औद्योगिक क्षेत्र विकास की योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा कि यदि उद्यमी स्वयं अपने पूंजी निवेश से परिसर बनाकर उद्योग स्थापित करते हैं तो उन्हें हम पूरी सुविधा व मदद देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने त्योंथर में कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट के भूमिपूजन की बधाई दी और अपेक्षा की कि इससे स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा। पराली की समस्या से निजात मिलेगी तथा जैविक विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के जन्म-दिवस के अवसर पर 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री अपने जन्म-दिवस पर मध्यप्रदेश में उपस्थित रहे और उन्होंने पीएम मित्र पार्क के माध्यम से इंडस्ट्रियल क्षेत्र को सौगात दी, जो रोजगार उपलब्धता में मील का पत्थर साबित होगा। बनारस रामनगर में उद्योगपति करेंगे एक हजार करोड़ का निवेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्यमियों को प्रदेश में निवेश के लिये आमंत्रित किया। बनारस रामनगर के 17 उद्योगपतियों और प्रतिनिधियों ने कहा कि रीवा जिले में एक हजार करोड़ का निवेश करेंगे। उद्यमियों के वन-टू-वन चर्चा में रामनगर उद्योग एसोशियेसन ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अंगवस्त्रम व काशी विश्वनाथ मंदिर की प्रतिकृति भेंट की। डी.एस. मिश्रा अध्यक्ष रामनगर उद्योग संघ वाराणसी, राकेश जायसवाल, दिलीप सिंह अध्यक्ष म.प्र. चावल संघ तथा सूक्ष्म एवं लघु उद्यम योजनान्तर्गत उद्यमी अमित गौतम ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से संवाद किया। उद्यमियों ने कहा कि प्रदेश की आकर्षक उद्योग नीति से उत्साहित होकर हम प्रदेश में निवेश करेंगे और यह क्षेत्र उद्योग के क्षेत्र में ऊंची उड़ान भरेगा। सांसद श्री जनार्दन मिश्रा, विधायक त्योंथर श्री सिद्धार्थ तिवारी, पूर्व महापौर श्री वीरेन्द्र गुप्ता, डॉ. अजय सिंह, पूर्व सांसद श्री देवराज सिंह, कमिश्नर श्री बीएस जामोद सहित बड़ी संख्या में बनारस, प्रयागराज, मिर्जापुर और रीवा से आये उद्यमी शामिल हुए।

कांग्रेस का रणनीतिक फैसला: मौजूदा विधायकों का टिकिट सुरक्षित, 17 सीटों पर प्रत्याशी घोषित

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कांग्रेस ने अपनी 17 सीटिंग सीटों पर प्रत्याशी तय कर दिए हैं। पार्टी के मौजूदा विधायकों का टिकट नहीं काटा जाएगा। कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की नई दिल्ली में शुक्रवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। बिहार में कांग्रेस के अभी 17 विधायक हैं। आगामी चुनाव में उन्हें दोबारा टिकट दिया जाना तय हो गया है। कांग्रेस मुख्यालय में हुई इस मीटिंग में प्रत्याशियों के चयन समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई। यह बैठक स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अजय माकन की अध्यक्षता में हुई। इसमें बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान, विधान परिषद में दल के नेता मदन मोहन झा समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे। इससे पहले गुरुवार को पटना में प्रदेश चुनाव समिति की बैठक हुई थी। इस बैठक में प्रदेश चुनाव समिति ने कांग्रेस आलाकमान को उम्मीदवार तय करने के लिए अधिकृत किया था। इसके बाद टिकट की फाइल पटना से दिल्ली ट्रांसफर हो गई। दिल्ली में शुक्रवार को हुई स्क्रीनिंग कमेटी की मीटिंग पर कई सीटों पर संभावित प्रत्याशियों पर चर्चा की गई। 2020 में कांग्रेस ने 70 में से 19 सीटों पर जीत दर्ज की पिछले विधानसभा चुनाव मे कांग्रेस ने महागठबंधन में रहकर 70 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। उनमें से पार्टी को 19 सीटों पर ही जीत मिल पाई थी। बाद में कांग्रेस के दो विधायक पाला बदलकर एनडीए में चले गए थे, इनमें बिक्रम से सिद्धार्थ सौरव और चेनारी से मुरारी प्रसाद गौतम का नाम शामिल है। यानी अब विधानसभा में पार्टी के 17 विधायक ही बचे हैं। कांग्रेस के 17 सीटिंग विधायकों के नाम यहां देखें-     अररिया – अविदुर रहमान     किशनगंज- इजाहरुल हुसैन     कसबा- मोहम्मद आफाक आलम     कदवा- शकील अहमद खान     मनिहारी- मनोहर प्रसाद सिंह     मुजफ्फरपुर- बिजेंद्र चौधरी     महाराजगंज – विजय शंकर दुबे     राजापाकर- प्रतिमा दास     खगड़िया- छत्रपति यादव     भागलपुर- अजीत शर्मा     जमालपुर- अजय कुमार सिंह     बक्सर- संजय कुमार तिवारी     राजपुर- विश्वनाथ राम     करगहर- संतोष मिश्रा     कुटुंबा- राजेश राम     औरंगाबाद- आनंद शंकर सिंह     हिसुआ- नीतू कुमारी  

डिजिटल इश्क का भारी नुकसान: डॉक्टर की बीवी ने ऑनलाइन ठगी में गंवाए करोड़ों

ग्वालियर मध्य प्रदेश के ग्वालियर डिजिटल इश्क के चक्कर में पड़ी 34 साल की एक शादीशुदा महिला के साथ जो हुआ, वो सभी के लिए एक चेतावनी है। इश्क और इमोशंस के नाम पर एक अनजान युवक ने एक महिला को इस कदर अपने प्रेमजाल में फंसाया कि उसने अपनी लाखों रुपये के साथ अपनी इज्जत भी दांव पर लगा दी। महिला के पति डॉक्टर हैं। डिजिटल प्लैटफार्म पर हुई दोस्ती मे महिला इस कदर अंधी हो गई कि उसने अपना न्यूड वीडियो तक बनाकर उस अनजान युवक को भेज दिया। उसके बाद ठग ने उसे गिफ्ट भेजने के बहाने उससे 3.76 लाख रुपये भी ठग लिए। इसके बाद जब उस न्यूड वीडियो के नाम पर ब्लैकमेलिंग शुरू की तब महिला थाने पहुंची। पीड़ित महिला द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, एक महीने पहले उसके पास 923007507684 से वॉटसऐप कॉल आया था। कॉल करने वाले ने अपना नाम विपिन और खुद को एक एनआरआई बताया था। उसने महिला से कहा था कि वह उससे दोस्ती करना चाहता है। उस दिन के बाद से अपने डॉक्टर पति से छुपकर महिला और युवक के बीच नियमित और लम्बी-लम्बी बातचीत शुरू हो गईं, जो कुछ दिनो में प्रेम से भरी चर्चाओं में बदल गई। कथित विपिन ने महिला को लंदन आने के लिए कहा, लेकिन पीड़िता ने इससे इनकार कर दिया। फोन पर परवान चढ़े इस डिजिटल इश्क में आरोपी विपिन ने पीड़िता से उसके फोटो मांगने शुरू कर दिए। पीड़िता ने भी आरोपी युवक पर विश्वास कर उसे अपने कई फोटो भेज दिए। इतना ही नहीं, महिला ने आरोपी युवक की डिमांड पर अपना न्यूड वीडियो बनाकर उसके वॉटसऐप नंबर पर भेज दिया। गिफ्ट भेजने के नाम पर ली आधार कार्ड की कॉपी वीडियो भेजने के बाद आरोपी युवक ने पीड़ित महिला से गिफ्ट भेजने के नाम पर उसके आधारकार्ड की कॉपी भी वॉट्सऐप पर ले ली। इसके बाद आरोपी युवक ने महिला को बताया कि उसने एक पार्सल भेजा है, उसे तुम ले लेना। पार्सल पर एड्रेस और फोन नंबर भी लिखा होना बताया। अगले दिन महिला के नंबर पर 9459316606 से कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा कि आपका पार्सल आया है और वह एयरपोर्ट से बोल रहा है। इस पार्सल को लेने के लिए 15 हजार रुपये जीएसटी के चुकाने होंगे। लिहाजा महिला ने 15 हजार का पेमेंट कर दिया। इसके बाद युवक ने डॉलर चेंज करने के नाम पर 46 हजार, गाड़ी आगे बढ़वाने के नाम पर 1 लाख 20 हजार, परमिट कार्ड बनवाने के नाम पर 1 लाख 15 हजार व सामान की रसीद बनवाने के नाम पर 80 हजार पेमेंट अलग-अलग अकाउंट नंबरों व मोबाइल नंबरों पर करने को कहा। पीड़िता ने उसकी बातों में आकर आरोपी विपिन को फोनपे के जरिये 3 लाख 76 हजार का पेमेंट कर दिया। 17 सितंबर को फिर से आरोपी युवक विपिन ने महिला को फोन किया और 2 लाख 85 हजार रुपये देने की मांग की। महिला ने जब और रुपये देने से इनकार किया तो युवक अपने असली रूप में आ गया, उसने कहा कि पार्सल वाले युवक से बात कर लो। जब महिला ने उससे बात की तो उसने सीधी धमकी दी कि पैसे देने पड़ेंगे, अगर नहीं दिए तो तुम्हारा न्यूड वीडियो वायरल कर देंगे। यकीन दिलाने के लिए अनजान युवक ने वह वीडियो भी महिला को भेजा जो उसने विपिन को भेजा था। वह महिला जब पूरी तरह आर्थिक और मानसिक तौर पर टूट गई तब वह साहस जुटाकर पुलिस के पास पहुंची। पीड़ित महिला की शिकायत पर क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।आशंका जताई जा रही है कि यह अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड गैंग हो सकता है। इस मामले में सीएसपी रॉबिन जैन का कहना है कि क्राइम ब्रांच टीम मामले की जांच कर रही है। जैन ने कहा कि सोशल मीडिया या फोन पर अनजान लोगों से दोस्ती करना खतरनाक हो सकता है। किसी भी प्रकार के निजी वीडियो या फोटो साझा करने से पहले पूरी तरह पड़ताल कर लेना जरूरी है। अगर किसी से ब्लैकमेलिंग का सामना हो तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें।