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रेलवे सुरक्षा पर जोर: फिरोजपुर मंडल में चला विशेष पार्सल निरीक्षण अभियान

फिरोजपुर  फिरोजपुर रेल मंडल द्वारा पार्सल के तहत बुक की जा रही वस्तुओं की निगरानी के लिए पार्सल कार्यालयों में एक माह के लिए एक विशेष पार्सल जांच अभियान 17 सितंबर 2025 से शुरू किया गया है। इस अभियान को मंडल रेल प्रबंधक संजीव कुमार के निर्देशन में वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक/एफएस मनु गर्ग एवं वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त ऋषि पाण्डेय की संयुक्त अगुवाई में चलाया जा रहा है। अभियान विशेष रूप से मंडल के फिरोजपुर कैंट, लुधियाना, अमृतसर, जालंधर सिटी, जालंधर कैंट रेलवे स्टेशनों पर चलाया जा रहा है। यह अभियान बुक किये गए पार्सल और लीज पर लिए जाने वाले पार्सल दोनों पर चलाया जा रहा है। इस अभियान में, पार्सल कर्मचारी और आरपीएफ जवान द्वारा संयुक्त रूप से पार्सलों की गहन जांच की जा रही है। जांच के दौरान मिथ्या घोषित वस्तु पाए जाने पर यात्री/पार्टी पर रेलवे नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जा रही है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक  मनु गर्ग ने यात्रियों/पार्सल ग्राहकों से अपील की है कि बुकिंग के समय फॉरवार्डिंग नोट में जिस सामान का जिक्र किया जाता है, वही सामान बुकिंग में होना चाहिए अन्यथा मिथ्या घोषित आइटम अथवा खतरनाक अथवा प्रतिबंधित वस्तुओं का गलत घोषणा प्रस्तुत करने पर उनके खिलाफ रेलवे नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि विशेष पार्सल चेकिंग अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा। फिरोजपुर मंडल रेलयात्रियों को सुरक्षित यात्रा प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध है।

शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से ओबीसी उत्थान की नई राह पर योगी सरकार

ओबीसी वर्ग के उत्थान के लिए योगी सरकार ने तैयार किया मजबूत खाका   शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से ओबीसी उत्थान की नई राह पर योगी सरकार  2047 तक 7 करोड़ ओबीसी छात्रों को 80,000 करोड़ की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति देने का लक्ष्य – शादी अनुदान योजना में 24 लाख बेटियों को 14,400 करोड़ रुपये का लाभ देने का लक्ष्य, अनुदान बढ़ाकर 60,000 रुपये करने की है तैयारी  – कंप्यूटर प्रशिक्षण से रोजगार के नए अवसर, 11 लाख युवाओं को कौशल विकास का लक्ष्य – छात्रावासों का अनुरक्षण और नए निर्माण से ओबीसी छात्रों की शिक्षा को मिलेगा सहारा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को ‘विकसित यूपी’ के रूप में स्थापित करने का दूरदर्शी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस महत्त्वाकांक्षी विजन की आधारशिला ग्रामीण युवाओं, खासकर पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना, साथ ही ग्राम स्वच्छता और अवसंरचना को मजबूत बनाना है। सरकार का मानना है कि अगले 22 वर्षों में इन क्षेत्रों में व्यापक सुधार से यूपी न केवल 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है, बल्कि भारत की विकास यात्रा में भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है। इस दिशा में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ओबीसी समुदाय के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए ठोस कदम उठा रहा है, जो प्रदेश के 52% से अधिक आबादी वाले इस वर्ग के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। ओबीसी उत्थान में योगी सरकार ने की अभूतपूर्व प्रगति प्रदेश में ओबीसी वर्ग की आबादी 52% से अधिक है, और उनके सशक्तिकरण के बिना ‘विकसित यूपी’ का सपना अधूरा रहेगा। पिछले आठ वर्षों में विभाग ने ओबीसी कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2024-25 में 32,22,499 ओबीसी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति प्रदान की गई, जबकि पिछले आठ सालों में कुल 2,07,53,457 छात्रों को 13,535.33 करोड़ रुपये का लाभ मिला। यह राशि पूर्ववर्ती सरकार के 4,197 करोड़ रुपये के व्यय से चार गुना अधिक है, जो योगी सरकार की ओबीसी समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विभाग का लक्ष्य 2047 तक 7 करोड़ से अधिक ओबीसी छात्रों को 80,000 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति देकर शिक्षा के माध्यम से सामाजिक बराबरी सुनिश्चित करना है। यह कदम ग्रामीण ओबीसी युवाओं को उच्च शिक्षा तक पहुंचाने में मददगार साबित होगा। शादी अनुदान योजना बना है गरीब बेटियों का सहारा ओबीसी समुदाय की गरीब बेटियों के लिए शादी अनुदान योजना एक क्रांतिकारी कदम है। पिछले आठ वर्षों में 1,221 करोड़ रुपये खर्च कर 6,10,483 बेटियों की शादी कराई गई, जबकि पूर्ववर्ती सरकार में यह संख्या महज 2,75,311 और व्यय 344 करोड़ रुपये था। अब अनुदान राशि को 20,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये करने का प्रस्ताव विचाराधीन है, जो ओबीसी परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा। 2047 तक 24 लाख बेटियों को 14,400 करोड़ रुपये का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है, जो न केवल सामाजिक उत्थान को बढ़ावा देगा, बल्कि गरीबी उन्मूलन में भी योगदान देगा। यह योजना ओबीसी बेटियों को आत्मसम्मान और आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में महत्वपूर्ण है।  तकनीकी प्रशिक्षण से युवाओं के लिए खुल रहे रोजगार के द्वार पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा संचालित कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना के तहत पिछले आठ वर्षों में 1,39,698 ओबीसी युवाओं को सीसीसी और ओ-लेवल प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे हजारों को सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार मिला। यह कदम ग्रामीण ओबीसी युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। विभाग का लक्ष्य 2047 तक 11 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करना और 3,850 करोड़ रुपये व्यय करना है। यह पहल न केवल रोजगार सृजन को बढ़ावा देगी, बल्कि ओबीसी समुदाय को डिजिटल युग में आगे बढ़ाने में मदद करेगी। ओबीसी छात्रों के लिए छात्रावासों का विस्तार देगी योगी सरकार ओबीसी छात्रावासों के अनुरक्षण और नए निर्माण को 2047 तक प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि निःशुल्क आवास सुविधा से अधिक से अधिक ओबीसी छात्र लाभान्वित हों। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की कमी को दूर करने के लिए यह कदम अहम है। नई छात्रावास सुविधाएं ओबीसी छात्रों को बेहतर माहौल में पढ़ाई करने का अवसर प्रदान करेंगी, जो ‘विकसित यूपी’ के विजन का अभिन्न हिस्सा है। विभाग का प्रयास है कि हर जिले में ओबीसी छात्रों के लिए आधुनिक छात्रावास बनें, ताकि शिक्षा उनकी पहुंच से बाहर न रहे। यूपी को राष्ट्रीय विकास में अग्रणी राज्य बनाने में ओबीसी वर्ग का विकास अहम ग्रामीण शिक्षा, स्वच्छता और अवसंरचना को मजबूत करने से ओबीसी समुदाय का सशक्तीकरण संभव है। पिछले आठ वर्षों में विभाग ने शिक्षा, विवाह और रोजगार में जो प्रगति की, वह ओबीसी कल्याण की दिशा में मील का पत्थर है। छात्रवृत्ति, शादी अनुदान और तकनीकी प्रशिक्षण जैसी योजनाओं ने ओबीसी युवाओं और बेटियों को नई दिशा दी है। 2047 तक यह प्रयास ओबीसी समुदाय को समृद्ध बनाएगा और यूपी को राष्ट्रीय विकास में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करेगा। पिछड़ा वर्ग कल्याण व दिव्यांग सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ओबीसी समुदाय की भागीदारी के बिना विकास अधूरा है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की इन पहलों से न केवल ओबीसी युवाओं को अवसर मिल रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब ओबीसी समुदाय को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के समान अवसर मिलें। विभाग का यह विजन ओबीसी समुदाय को मुख्यधारा में लाकर यूपी को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में अग्रसर है।  

सीएम योगी के मार्गदर्शन में लखीमपुर खीरी की डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल की पहल पर बाढ़ पीड़ितों की मदद को आगे आए कॉरपोरेट सेक्टर, उद्यमी और स्वयंसेवी संस्थाएं

योगी सरकार ने खीरी में पेश की जनसहभागिता की मिसाल, 5 हजार सीएसआर स्पेशल किट बनीं बाढ़ पीड़ितों का संबल   सीएम योगी के मार्गदर्शन में लखीमपुर खीरी की डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल की पहल पर बाढ़ पीड़ितों की मदद को आगे आए कॉरपोरेट सेक्टर, उद्यमी और स्वयंसेवी संस्थाएं  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप बाढ़ पीड़ितों को सरकारी सहायता के साथ उपलब्ध करायी जा रही स्पेशल किट  – 45 लाख रुपये की लागत से तैयार की गयी किट, जरूरत पड़ने पर और भी किट की जाएंगी तैयार – किट में मच्छरदानी, छाता, बैटरी सहित टॉर्च, सेनेटरी पैड और गर्म पानी के थर्मस का किया जा रहा वितरण  – एक किट की कीमत है करीब 9 सौ रुपये, पिछले वर्ष भी सीएसआर स्पेशल किट बाढ़ पीड़ितों को की गयी थीं वितरित      लखनऊ/लखीमपुर खीरी   कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।                           ये पंक्तियां याेगी सरकार के लखीमपुर खीरी जिला प्रशासन पर पूरी तरह से चरितार्थ होती हैं। यहां पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप आपदा में जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला, जहां पर जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी द्वारा बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 5 हजार सीएसआर स्पेशल किट का वितरण किया जा रहा है। यह किट योगी सरकार द्वारा सरकारी वित्तीय सहायता, मुआवजा और राहत किट के अतिरिक्त वितरित की जा रही है। इस किट को जिलाधिकारी की पहल पर 45 लाख रुपये की लागत से कॉरपोरेट सेक्टर, उद्यमियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से तैयार किया गया। इसी के साथ खीरी पूरे प्रदेश में ऐसा पहला जिला हैं, जहां पर बाढ़ पीड़ितों के लिए सीएसआर स्पेशल किट वितरित की जा रही है। एक किट की लागत करीब 900 रुपये है। बता दें कि पिछले वर्ष भी आपदा की घड़ी में सीएम योगी के मार्गदर्शन में सीएसआर स्पेशल किट का वितरण किया गया था।  निराश्रित महिलाओं, दिव्यागों और 70 वर्ष से ऊपर के वृद्धजनों को उपलब्ध करायी जा रही किट जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा अापदा के समय प्रदेशवासियों के साथ खड़े रहते हैं। उनके द्वारा न केवल आपदा की घड़ी में पीड़ितों को हर संभव मदद उपलब्ध करायी जाती है बल्कि वह खुद पीड़ितों पर दर्द साझा करने के लिए उनसे मुलाकात कर कुशलक्षेम पूछते रहते हैं। इसी क्रम में सीएम योगी की दूरदर्शी सोच को आत्मसात करते हुए सरकारी सहायता के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों में 5 हजार सीएसआर स्पेशल किट का वितरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किट को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए जिले की पांच बाढ़ प्रभावित तहसीलों के सभी बाढ़ प्रभावित गांव में निराश्रित महिलाओं, दिव्यांगों और 70 वर्ष से ऊपर के वृद्धजनों को चिन्हित किया गया है। इसके साथ ही हर जरूरतमंद को स्पेशल किट का वितरण किया जा रहा है। जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने गुरुवार को सदर तहसील में विधायक योगेश वर्मा के साथ जरूरतमंदों को सीएसआर स्पेशल किट वितरित की।  बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए जरूरत पड़ने पर और भी स्पेशल किट करायी जाएगी तैयार जिलाधिकारी ने बताया कि जिले की निघासन, धौरहरा, गोला गोकर्णनाथ औा पलिया तहसीलों में चिन्हित दिव्यांगजन, निराश्रित महिला एवं 70 वर्ष से अधिक उम्र वाले वृद्धजनों को स्पेशल सीएसआर किट का वितरण किया गया। उन्होंने बताया कि फिलहाल बाढ़ पीड़ितों को पांच हजार स्पेशल किट उपलब्ध करायी जा रही है। वहीं जरूरत पड़ने पर और भी सीएसआर स्पेशल किट को बनवाया जाएगा। किट में मच्छरदानी, छाता, बैटरी सहित टॉर्च, सेनेटरी पैड (2 पैकेट) और गर्म पानी रखने के लिए 2 लीटर की थर्मस शामिल है।   

नहर प्रबंधन सुधार की दिशा में कदम, हरियाणा सरकार ने पुराने आदेश वापस लिए

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने किसानों की सुविधा और नहर जल प्रबंधन को दुरुस्त करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने जून 2020 में जारी उन आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनके तहत जुई, सिवानी और हिसार जल सेवाएं प्रभागों से कुछ नहर तंत्र लोहारू डिवीजन में स्थानांतरित किए गए थे। पिछले पांच वर्षों में इस व्यवस्था के चलते कई व्यवहारिक कठिनाइयाँ सामने आईं। नहरों के केवल टेल हिस्से लोहारू डिवीजन में रहे, जबकि हेड हिस्से अपने मूल प्रभागों के पास ही थे। इस विभाजन से नहर जल का कुशल प्रबंधन नहीं हो पाया और खासतौर पर टेल एंड पर बसे किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ा। सरकार ने किसानों की समस्याओं को देखते हुए नहरों को उनके मूल प्रभागों को लौटा दिया है। इस कदम से हेड से लेकर टेल तक बेहतर नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। पानी की आपूर्ति निष्पक्ष और भरोसेमंद ढंग से टेल एंड गांवों तक पहुँचेगी। फील्ड स्टाफ भी किसानों की शिकायतों के समाधान में अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार रहेगा। विभाग पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ और कार्य की दोहराव भी समाप्त हो जाएगी। किसानों की सुविधा सर्वोपरि सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसानों को सुविधा में कोई कमी न आए। वर्ष 2023 में सरकार ने गांव खेड़ा, ब्लॉक सिवानी, जिला भिवानी में 17.54 करोड़ रुपये की लागत से एकीकृत कार्यालय परिसर, नहर विश्राम गृह और स्टाफ आवासीय भवन को मंजूरी दी थी। यह परियोजना अब 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी है और जल्द ही इसमें तीनों अहम कार्यालय—एसडीओ सिवानी (लोहारू डिवीजन, एलडब्ल्यूएस सर्किल), एसडीओ माइकाड़ा (माइकाड़ा डिवीजन) और एसडीओ सिवानी (सिवानी डिवीजन, वाईडब्ल्यूएस सर्किल)—एक ही छत के नीचे काम करेंगे। इससे किसानों को रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। क्या कहती हैं मंत्री श्रुति चौधरी सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा कि यह फैसला हमारी सरकार की किसानों के प्रति प्रतिबद्धता और नहर जल प्रबंधन को सुधारने का प्रमाण है। हम जमीनी हालात को देखते हुए पुराने फैसलों की समीक्षा करने से हिचकिचाते नहीं हैं। नहर प्रबंधन को सही दिशा देने के साथ-साथ हम आधुनिक ढांचे में भी निवेश कर रहे हैं ताकि हर किसान को सेवाएं आसानी और बिना किसी झंझट के मिल सकें। किसानों के लिए राहत सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल नहर प्रबंधन सुचारू होगा बल्कि किसानों तक समय पर पानी पहुंचच पाएगा। प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी और किसानों की संतुष्टि भी सुनिश्चित होगी। खासकर टेल एंड के किसान इस निर्णय से सीधा लाभ उठाएंगे और जल वितरण व्यवस्था में सुधार का अनुभव करेंगे।

राज्यपाल पटेल ने राजा शंकरशाह- कुंवर रघुनाथशाह का किया पुण्य स्मरण

राज्यपाल  पटेल ने राजा शंकरशाह- कुंवर रघुनाथशाह का किया पुण्य स्मरण बलिदान दिवस कार्यक्रम राजभवन में मना भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने जनजातीय महानायक राजा शंकरशाह- कुंवर रघुनाथशाह के बलिदान दिवस पर उनका पुण्य स्मरण किया। उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। बलिदान दिवस कार्यक्रम का आयोजन राजभवन के बेंक्वेट हॉल में गुरुवार को किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, राज्यपाल के अपर सचिव  उमाशंकर भार्गव सहित राजभवन के अन्य अधिकारी-कर्मचारियों ने भी क्रांतिवीरों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।                       

मांगों को लेकर वेरका मिल्क व कैटलफीड आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन CM आवास घेराव की तैयारी में

चंडीगढ़  वेरका मिल्क और कैटलफीड प्लांट आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन ने चंडीगढ़ वेरका प्लांट के गेट पर रैली की और पंजाब सरकार व मिल्कफेड प्रबंधन के खिलाफ  नारेबाजी की। यूनियन के प्रधान रूपिंदर सिंह ने बताया कि इसी तरह की रैलियां वेरका के अन्य प्लांटों में भी आयोजित की गईं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से यूनियन की मांगें लंबित हैं और प्रबंधन पिछली बैठकों में स्वीकार की गई मांगों को भी लागू नहीं कर रहा है। जायज मांगों को मानने की बजाय पंजाब सरकार की शह पर यूनियन नेताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। रूपिंदर सिंह ने बताया कि 15 सितंबर को चंडीगढ़ में प्रबंध निदेशक राहुल गुप्ता के साथ हुई बैठक के दौरान यूनियन नेताओं को मुकदमे दर्ज करने और जेल भेजने की धमकियाँ दी गई थीं। इसके विरोध में सूबा कमेटी ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। यूनियन ने घोषणा की कि 28 सितंबर को शहीद भगत सिंह की जयंती के अवसर पर “ठेका संघर्ष मोर्चा” के बैनर तले पंजाब के मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यूनियन ने 6 अक्टूबर 2025 से लगातार तीन दिन तक विरोध प्रदर्शन करने का भी ऐलान किया। प्रधान रूपिंदर सिंह ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी जायज़ माँगें स्वीकार नहीं होतीं, तब तक यह शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस दौरान किसी भी प्लांट को नुकसान होता है तो उसकी ज़िम्मेदारी पंजाब सरकार और वेरका प्रबंधन की होगी। इस अवसर पर पवित्र सिंह, रविंदर सिंह, इंदरजीत सिंह, हरमिंदर सिंह सहित बड़ी संख्या में सदस्य मौजूद थे।

कूनो की रानी धीरा पहुंची गांधी सागर, जहां पहले से हैं दो नर चीते — जंगल में रोमांच बढ़ा

मंदसौर  प्रोजेक्ट चीता के तहत मध्य प्रदेश में चीतों की संख्या बढ़ाने की कवायद लगातार चल रही है. कूनो नेशनल पार्क के बाद मंदसौर के गांधी सागर अभ्यारण्य को चीतों के नए आशियाने के रूप में स्थापित किया जा रहा है. इसी के तहत बुधवार को यहां पर कूनो की मादा चीता 'धीरा' का छोड़ा गया. धीरा के आने से यहां चीतों की संख्या 3 हो गई. करीब 5 महीने पहले यहां पर 2 नर चीतों को छोड़ा गया था. यह कदम कूनो के बाहर चीतों के प्राकृतिक संबंध और प्रजनन को बढ़ावा देने के लिए उठाया जा रहा है. गांधी सागर अभ्यारण्य में धीरा को शिफ्ट किया गया चीता प्रोजेक्ट के तहत कूनो नेशनल पार्क के बाद गांधी सागर अभ्यारण्य चीतों का दूसरा आश्रय स्थल है. इसको चीतों के लिए अनुकूल स्थान माना गया है. बीते अप्रैल माह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यहां पर 2 नर चीतों 'प्रभाष' और 'पावक' को छोड़ा था. इस अभ्यारण्य में चीतों में प्रजनन बढ़ाने के उद्देश्य से साढ़े 7 वर्षीय मादा चीता धीरा को छोड़ा गया. बुधवार की सुबह कुनो राष्ट्रीय उद्यान से शुरू हुए इस ऑपरेशन में वन विभाग की टीम, वेटरनरी विशेषज्ञ और फील्ड स्टाफ हर चरण पर बारीकी से नजर रख रहे. धीरा को विशेष रूप से तैयार एयर-कंडीशंड वाहन से 7 घंटे में 300 किलोमीटर की यात्रा कर गांधी सागर लाया गया. इस चीता को उसी बाड़ा भाग-2 में छोड़ा गया है, जहां दोनों नर चीता को छोड़ा गया था. 3 महीने तक धीरा पर रखी जाएगी नजर गांधी सागर अभ्यारण क्षेत्र के अधीक्षक के अमित राठौर ने बताया कि "मादा चिता धीरा को रावली कुड़ी इलाके में सुरक्षित छोड़ दिया गया है. अगले 3 महीने तक यहां लगे सीसीटीवी कैमरे के जरिए इसकी निगरानी की जाएगी." इस अवसर पर मध्य प्रदेश शासन के कई अधिकारी मौजूद रहे. गांधी सागर अभ्यारण्य में चीतों की यह बढ़ती संख्या परियोजना के सफल क्रियान्वयन और प्रदेश में वन्य जीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है. दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों में से एक है धीरा भारत सरकार की अति महत्वाकांक्षी परियोजना 'चीता प्रोजेक्ट' के तहत 2022 में नामीबिया से 8 चीते (5 नर 3 मादा) लाए गए थे. इसके बाद फरवरी 2023 में साउथ अफ्रीका के वॉटरबर्ग बायोस्फीयर रिजर्व से 12 चीते और लाए गए. धीरा भी उन्हीं 12 अफ्रीकी चीते में से एक है. सभी चीतों को कूनो नेशनल पार्क में बसाया गया था. इनमें से अभी तक 9 की मौत हो चुकी है. जबकि अभी तक यहां पर 26 शावकों ने जन्म लिया, जिनमें से भी 10 की मौत हो गई. अभी प्रदेश में 27 चीते मौजूद हैं. इसमें 24 चीते कूनो और 3 चीते गांधी सागर अभ्यारण्य में मौजूद हैं. इस चीते प्रोजेक्ट के 3 साल भी पूरे हो गए हैं. 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन पर कूनो में पहली बार चीतों को छोड़ा था.  

कस्टम मिलिंग घोटाले में बड़ी कार्रवाई: भिलाई में ED की रेड, राइस मिलर सुधाकर के ठिकानों पर दस्तावेजों की पड़ताल

दुर्ग   भिलाई के हुडको में ईडी की टीम ने दबिश दी है.बताया जा रहा है कि मामला कस्टम मिलिंग घोटाला से जुड़ा है.सुबह 6 बजे ईडी की चार सदस्यीय टीम हुडको निवासी सुधाकर रावके के घर पहुंची.जहां टीम ने घर के अंदर जाकर घोटाले से जुड़े दस्तावेजों को खोजना शुरु किया. ईडी की टीम सुधाकर के घर पर मौजूद है और दस्तावेजों की जांच की जा रही है. पूर्व आईएएस आलोक शुक्ला के घर भी दबिश : वहीं पूर्व आईएएस आलोक शुक्ला के तालपुरी स्थित आवास पर भी ईडी की टीम पहुंची है.बताया जा रहा है कि टीम ने कुछ डिजिटल साक्ष्य भी इकट्ठा किए हैं.ईडी से जुड़े सूत्रों की माने तो छत्तीसगढ़ के अलग-अलग 10 जिलों में ईडी की टीम कार्रवाई कर रही है. ये घोटाला 140 करोड़ से अधिक का बताया जा रहा है. पहले भी भिलाई में पड़ा था छापा : इससे पहले भी 3 सितंबर को कस्टम मिलिंग घोटाला को लेकर भिलाई, दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर सहित कई जगहों पर एक साथ ईडी की रेड जारी है. कृषि कारोबार से जुड़े व्यापारियों के घरों और दफ्तरों में ईडी ने दबिश देकर अहम दस्तावेजों को इकट्ठा किया था. रायपुर में ईडी की दबिश : 3 सितंबर को ही तीन कृषि कारोबारी के ठिकानों पर दबिश दी गई. जिसमें शंकर नगर चौपाटी के पास, दूसरा महावीर नगर और तीसरा अमलीडीह के विस्टा कॉलोनी में रेड की कार्रवाई हुई. इस कार्रवाई में जानकारी मिली थी कि विक्रेताओं, ठेकेदारों और कथित बिचौलियों के कम से कम 18 परिसरों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है. आरोप है कि छत्तीसगढ़ के बीज निगम के माध्यम से डीएमएफ निधि की राशि का दुरुपयोग किया गया है. क्या है कस्टम मिलिंग घोटाला ?: आपको बता दें कि कस्टम मिलिंग के एवज में प्रति क्विंटल 20 रुपए की वसूली की जाती थी.जिसका मास्टर माइंड राइस मिल एसोसिएशन के पूर्व कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर और मार्कफेड के पूर्व एमडी मनोज सोनी थे.दोनों के खिलाफ ईडी ने 3500 पेज का चालान पेश किया है. जिसमें 35 पेज की समरी भी शामिल है. सूची में अफसरों के नाम गृह विभाग के उपसचिव आरपी चौहान द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सुरेश कुमार भगत को पीटीएस मैनपाट से अजाक क्राइम सरगुजा, ओमप्रकाश कुजूर को बिलासपुर से मैनपुर, तूलसिंह पट्टावी को बालोद से अबिकापुर, नोहरलाल मण्डावी को सारंगढ़ बिलाईगढ़ से मोहला मानपुर चौकी अंबागढ़, यशकरण द्वीप ध्रुव को दुर्ग से धमतरी, शशिकला उईके को बस्तर से बेमेतरा, सुशील मलिक को जिला गरियाबंद से डीएसपी जिला गरियाबंद, कमलेश्वर कुमार भगत को बलरामपुर से क्राइम बलरामपुर, बृजेश कुमार तिवारी सक्ती से पुलिस मुख्यालय रायपुर। रमाकांत साहू एटीएस मुयालय से सीएसपी सिविल लाइन रायपुर, चंद्रशेखर ध्रुव को एसीबी-ईओडब्ल्यू से आईजी सरगुजा रेंज, इंद्रभूषण सिंह को महासमुंद से राज्य पुलिस अकादमी चंद्रखुरी रायपुर, विपीन रंगारी को दुर्ग से नगरी धमतरी, चुन्नू तिग्गा को पुलिस मुयालय से महासमुंद, हरविंदर सिंह को मुंगेली से डीएसपी अधीक्षक मुंगेली हैं। रीना नीलम कुजूर को बलौदाबाजार भाटापारा से सूरजपुर, क्रिसेन्सिया तिर्की को बलौदाबाजार से राज्य पुलिस अकादमी चंद्रखुरी रायपुर, लता चौरे रायपुर से पीटीएस माना रायपुर, प्रमोद कुमार किस्पोट्टा को सूरजपुर से बलरामपुर, गोपाल सिंह धुर्वे बलौदाबाजार से पुलिस मुयालय रायपुर, गंगा धुर्वे पीटीएस माना से डीएसपी पीटीएस माना रायपुर, सत्यपा तारम को सक्ती से जांजगीर चांपा, मीना चौधरी को पीटीएस माना से पीटीएस राजनांदगांव। स्वाति मिश्रा को छग लोक आयोग रायपुर से डॉयल 112 रायपुर, कुमारी चंद्राकर सरगुजा से रायपुर, मंजूलता राठौर रायपुर से गरियाबंद, श्रुति चक्रवर्ती रायपुर से बालोद, संतोषी ग्रेस को बेमेतरा से सारंगढ़-बिलाईगढ़, आशा तिर्की जशपुर से डीएसपी जशपुर, वैजन्तीमाला तिग्गा को पुलिस मुयालय से दुर्ग हैं। वहीं, किरण गुप्ता को रायपुर, रोशनी वासनिक कुजूर को पीएचक्यू से एसआईए रायपुर, उषा सौंधिया कोरबा से बलौदाबाजार, विवेक शर्मा को सक्ती से बिलासपुर, माया शर्मा डॉयल 112 रायपुर से बालोद, ममता शर्मा अली को दुर्ग से खैरागढ़ -छुईखदान-गंडई, सत्यकला रामटेके को जांजगीर चांपा से गौरेला- पेण्ड्रा- मरवाही, योगिताबाली खपर्डे को बलौदाबाजार से जांजगीर, प्रमिला मण्डावी सामा को रायपुर से कबीरधाम। कविता धुर्वे को बस्तर से कांकेर, भारती मरकाम को बिलासपुर से दुर्ग, लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल को बालोद से पुलिस मुयालय रायपुर और सहायक सेनानी रुस्तम सारंग को अमलेश्वर से भिलाई, नरेश नेहरू को बलरामपुर से बालोद, तेलेस्फोर मिंज को बिलासपुर से बालोद, यादराम बघेल को दुर्ग से एसटीएफ बघेरा, विकास कुजूर को बलरामपुर से कोरबा, मनोज गुप्ता को माना से कबीरधाम, नीलकिशोर अवस्थी को माना से राजभवन। डीएसपी फिंगररप्रिंट अजय साहू को रायपुर से पीएचक्यू, राकेश कुमार को पीएचक्यू से फिंगरप्रिंट शाखा पीएचक्यू, विद्या जौहर को रायपुर से पीएचक्यू फिंगरप्रिंट के साथ ही डीएसपी (रक्षित) सीमा अहिरवार को पीएचक्यू से भिलाई, अनिल कुमार को पीएचक्यू से अंबिकापुर और संजय शुक्ला को पीएचक्यू से विशेष शाखा पीएचक्यू में स्थानांतरित किया गया है। कस्टम मिलिंग के एवज में मिलने वाली रकम का भुगतान 20 रुपए प्रति क्विंटल देने पर ही बिल का भुगतान होता था. इस रकम के कलेक्शन का काम राइस मिल एसोसिएशन के पूर्व कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर करते थे. रकम देने वाले मिलर्स की सूची तैयार करने के बाद उन्हें ही कस्टम मिलिंग की रकम जारी होती थी.

महिलाओं-बच्चों के लिए खुशखबरी! यूपी के सभी जिलों में फ्री सुविधा की शुरुआत, मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर फोकस

लखनऊ  यूपी के सभी 75 जिलों में एक साथ सीएम योगी के आदेश पर एक बड़ा अभियान शुरू हुआ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर और केजीएमयू में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में बटन दबाकर 75 जिलों में एक साथ स्वास्थ्य शिविरों की शुरुआत की. खास बात यह रही कि इन शिविरों का केंद्रबिंदु महिलाएं और बच्चे है. 75 जिलों में एक साथ 20,000 से अधिक स्वास्थ्य शिविर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पूरे प्रदेश के 75 जनपदों में कुल 20,324 स्वास्थ्य शिविरों की शुरुआत की गई है. इन शिविरों में रक्तचाप, मधुमेह, रक्त जांच, एनीमिया, ओरल कैंसर, स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों की निःशुल्क जांच की जाएगी. यह सिर्फ जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उपचार और परामर्श की सुविधाएं भी वहीं पर उपलब्ध कराई जाएंगी. कार्यक्रम के दौरान यह भी घोषणा हुई कि पूरे अभियान के अंतर्गत 507 रक्तदान शिविर लगाए जाएंगे. मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस अभियान का हिस्सा बनें और रक्तदान कर किसी की जान बचाने के पुण्य से जुड़ें. मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर जोर न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक योगी ने कहा कि यह अभियान खासतौर से गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व देखभाल, बच्चों के टीकाकरण और कुपोषण दूर करने पर केंद्रित है. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की कोशिश है कि किसी भी गर्भवती महिला या बच्चे को समय पर इलाज और देखभाल से वंचित न रहना पड़े. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बच्चों को गोद में लेकर अन्नप्राशन संस्कार कराया, गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की और स्वयं पोषाहार वितरण भी किया. यह दृश्य कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा, जहां मुख्यमंत्री ने मातृत्व और बचपन के सम्मान को अपनी संवेदनाओं से जोड़ा. आंगनबाड़ी बहनों के लिए बड़ी सौगात मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए मानदेय वृद्धि और स्मार्ट फोन वितरण की घोषणा की. उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी बहनों ने कोरोना काल से लेकर पोषण अभियान तक जिस समर्पण से काम किया है, वह काबिल-ए-तारीफ है. उनकी मेहनत और सेवा का सम्मान करते हुए सरकार ने उनके मानदेय में वृद्धि करने और हर कार्यकर्ता को स्मार्ट फोन देने का निर्णय लिया है. योगी ने कहा कि इससे न केवल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की कार्यकुशलता बढ़ेगी, बल्कि समय पर मानदेय और प्रशिक्षण से वे और आत्मनिर्भर बनेंगी. महिलाओं के सशक्तिकरण पर फोकस मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, मातृ वंदना योजना, कन्या सुमंगला और नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे कदम आज के भारत को एक नई पहचान दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि यूपी सरकार ने पिछले 8 वर्षों में बेटियों की निशुल्क शिक्षा से लेकर कन्या सुमंगला योजना के तहत 25,000 रुपये का पैकेज, और सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत हर बेटी की शादी पर 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है. सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश की 1.89 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों और 10 लाख महिला स्वयं-सहायता समूहों की मदद से 1 करोड़ से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं. वहीं THR प्लांट्स से जुड़ी 60,000 महिलाएं प्रतिमाह लगभग 8,000 रुपये की आय अर्जित कर रही हैं. स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव सीएम योगी ने बताया कि पिछले आठ सालों में प्रदेश में 41 नए मेडिकल कॉलेज बने हैं. हाल ही में अमेठी में मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन इसका उदाहरण है. उन्होंने कहा कि शिशु मृत्यु दर 45 से घटकर 37 और मातृ मृत्यु दर 141 तक आ गई है. उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि एनीमिया के स्तर में 5.1% सुधार, स्टंटिंग में 6.6% सुधार, अल्पवजन में 7.4% सुधार, और कुपोषण में 0.6% सुधार दर्ज किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जब नीयत साफ और नीति स्पष्ट हो, तो परिणाम आने में देर नहीं लगती. इंसेफेलाइटिस पर विजय सीएम योगी ने बड़ी उपलब्धि गिनाते हुए कहा कि प्रदेश से इंसेफेलाइटिस पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है. यह वही बीमारी है जिसने 40 सालों में 50,000 से अधिक मासूम बच्चों की जान ले ली थी. अब सरकार का ध्यान मलेरिया, डेंगू, कालाजार और टीबी उन्मूलन पर केंद्रित है. सामुदायिक प्रयासों को मिली सराहना मुख्यमंत्री ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिला स्वयं-सहायता समूहों की भूमिका को सराहा. उन्होंने कहा कि 10 लाख ग्रामीण और 1 लाख शहरी महिला समूहों ने लगभग 1 करोड़ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अहम योगदान दिया है. योगी ने रक्तदान शिविरों और पोषण पोटली वितरण जैसे सामुदायिक प्रयासों की भी तारीफ की और कहा कि यही सहयोग उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर और सशक्त राज्य बनाएगा.

मठाधीश की तरह आचरण? चुनाव अधिकारी महेश तिवारी पर लापरवाही का आरोप, नोटिस जारी

मठाधीश बन गए चुनाव अधिकारी महेश तिवारी.. चुनाव अधिकारी महेश तिवारी पर लापरवाही के आरोप, निर्वाचन प्रक्रिया पर उठे सवाल.. सहायक पंजीयक, फर्म्स एवं संस्थाएं बिलासपुर ने जारी किया नोटिस… बिलासपुर  बिलासपुर प्रेस क्लब के निर्वाचन 2025 को लेकर चुनाव अधिकारी महेश तिवारी पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। सहायक पंजीयक, फर्म्स एवं संस्थाएं बिलासपुर ने जारी पत्र में स्पष्ट किया है कि निर्वाचन संबंधी मामले में प्रस्तुत शिकायतों पर चुनाव अधिकारी की ओर से समय-सीमा में जवाब नहीं दिया गया। पत्र में उल्लेख किया गया है कि प्रेस क्लब के निर्वाचन प्रक्रिया में विभिन्न आपत्तियों और शिकायतों को लेकर 09 से 12 सितंबर तक स्मरण पत्र भेजे गए थे, लेकिन नियमानुसार तय अवधि में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इस पर सहायक पंजीयक कार्यालय ने कड़ी नाराज़गी जताते हुए इसे गंभीर त्रुटि माना है। कार्यालय से जारी आदेश में कहा गया है कि निर्वाचन अधिकारी की यह लापरवाही पूरी निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करती है। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में ऐसे मामलों में लापरवाही पाई जाती है, तो विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी और उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी स्वयं निर्वाचन अधिकारी की होगी। गौरतलब है कि प्रेस क्लब के चुनाव को लेकर पहले ही कई तरह की शिकायतें उठ चुकी हैं। अब निर्वाचन अधिकारी पर लगे इन आरोपों ने चुनाव की निष्पक्षता पर नई बहस छेड़ दी है। प्रेस क्लब बिलासपुर के चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से कराने के लिए सहायक रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं संस्थाएं, बिलासपुर ने निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिए हैं।पंजीकृत नियमावली और अधिनियम की धारा 27 के अनुसार चुनाव कराना जरूरी है।पहले प्राप्त शिकायत आवेदन पत्रों का निराकरण करना होगा, तभी चुनाव की कार्यवाही पूरी की जा सकेगी।चुनाव में पद वही होंगे जो पंजीकृत विधान में दर्ज हैं। वर्ष 2023 की सदस्यों की सूची, नियमावली और शिकायत पत्र निर्वाचन अधिकारी को भेज दिए गए हैं। जिसका अब तक निराकरण नहीं हुआ है, चुनाव अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर चुनाव कराते हैं, तो आगे कोई भी कार्रवाई इसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे। मतलब साफ है – चुनाव से पहले सभी आपत्तियों का समाधान और नियमों का पालन करना अनिवार्य है।