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सुशासन तिहार में मिली चेतावनी पड़ी भारी, एमसीबी DEO मिरे की हुई छुट्टी

मनेंद्रगढ़. छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक व्यवस्था में कसावट लाते हुए राज्य में बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले किए हैं। राज्य शासन द्वारा ‘महानदी भवन’ से जारी इस नवीन आदेश के तहत कई जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और प्राचार्यों के प्रभार में भारी फेरबदल किया गया है। इस पूरी सूची में सबसे बड़ा और संवेदनशील एक्शन मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में देखने को मिला है, जहाँ सुशासन की कसौटी पर खरे न उतरने वाले अधिकारियों पर कड़ा रुख अपनाया गया है। रविशंकर विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में 16 जून से शुरू होगा एडमिशन… खाद-बीज संकट को लेकर कांग्रेस करेगी प्रदर्शन… राजधानी के कई इलाकों में आज शाम जलापूर्ति रहेगी बाधित सुशासन तिहार की फटकार और खराब रिज़ल्ट मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले के जिला शिक्षा अधिकारी आरपी मिरे का तबादला कर दिया गया है। गौरतलब है कि हाल ही में घोषित हुए कक्षा 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षा परिणामों में एमसीबी (MCB) जिला पूरे प्रदेश में सबसे आखिरी पायदान पर रहा था। शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर शासन स्तर पर भारी असंतोष था। ​इसके अलावा, ‘सुशासन तिहार’ के तहत जब मुख्यमंत्री स्वयं एमसीबी जिले के चिरमिरी में मैराथन समीक्षा बैठक ले रहे थे, तब विभागीय लापरवाही और लचर कार्यप्रणाली को लेकर उन्होंने तत्कालीन डीईओ आरपी मिरे को जमकर फटकार भी लगाई थी। मुख्यमंत्री की इसी सख्त नाराजगी और खराब परफॉर्मेंस का सीधा असर इस तबादला आदेश में देखने को मिला है, जहाँ मिरे को हटाकर लोक शिक्षण संचालनालय के विकल्प पर रखा गया है। रविकांत यादव बने प्रभारी डीईओ जिले में पटरी से उतरी स्कूली शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने और सुशासन को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए शासन ने अब रविकांत यादव (विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी) पर भरोसा जताया है। रविकांत यादव को तत्काल प्रभाव से मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले का नया प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया गया है। उनके सामने अब जिले के शैक्षणिक स्तर को सुधारने और आगामी बोर्ड परीक्षाओं में जिले को शीर्ष पर लाने की एक बेहद चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

‘किसानों की जिंदगी बदल रही है’— शिवराज सिंह ने बताए 6 बड़े लाभ, सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी

भोपाल   केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्यप्रदेश के विदिशा से सांसद शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र में विकास और परिवर्तन को लेकर बड़ा दावा किया है। शिवराज ने कहा कि एमपी समेत पूरे देश में किसानों को 6 बड़े फायदे मिल रहे है। जिससे उनका जीवन खुशहाल हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ये जानकारी दी है। बताया कि आज का किसान परंपरागत खेती की सीमाओं से बाहर निकलकर आधुनिक और विकसित खेती पद्दति से आत्मनिर्भर बना है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा – "प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं। किसान कल्याण को केंद्र में रखकर बनाई गई नीतियों ने खेती को परंपरागत सीमाओं से निकालकर आधुनिक, विकसित और आत्मनिर्भर बनाया है। इन 12 वर्षों में कृषि की तस्वीर भी बदली है और तकदीर भी। व्यवस्था भी बदली है और विश्वास भी। खेती भी आगे बढ़ी है और किसान भी। – PM-KISAN के माध्यम से ₹4.3 लाख करोड़ से अधिक की राशि सीधे किसानों के खातों में पहुंची। – MSP पर ₹26 लाख करोड़ से अधिक की खरीद हुई। – 8 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड बने। – 26 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड दिए गए। – PM फसल बीमा योजना के माध्यम से किसानों को सुरक्षा कवच मिला। – e-NAM ने किसान को खेत से बाजार तक नई ताकत दी। अन्न को वैश्विक पहचान मिली, जलवायु अनुकूल फसल किस्में विकसित हुईं और AI आधारित कृषि सेवाएँ गाँव तक पहुंचीं। इन सब प्रयासों के परिणामस्वरूप खाद्यान्न उत्पादन में 71% की वृद्धि हुई। यह केवल योजनाओं की सफलता नहीं है, यह करोड़ों किसानों के जीवन में आए बदलाव की कहानी है। आज किसान के चेहरे पर मुस्कान है, क्योंकि उसकी मेहनत को सम्मान मिला है। आज किसान के मन में विश्वास है, क्योंकि उसका हक सीधे उसके पास पहुंचा है। आज किसान के खेत में उम्मीद लहलहा रही है, क्योंकि बीज से बाज़ार तक उसके साथ मोदी सरकार खड़ी है।"

सीएम सम्राट चौधरी से गूगल प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात, निवेश और टेक सहयोग पर चर्चा

पटना  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बुधवार को नई दिल्ली स्थित बिहार भवन में गूगल इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट चंदू थोटा के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। उस दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कृषि से संबंधित क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने गूगल को बिहार में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) स्थापित करने हेतु आमंत्रित किया। दोनों पक्षों ने बिहार के डिजिटल विकास को गति देने के लिए सुदृढ़ साझेदारी की दिशा में कार्य करने पर सहमति जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीसीसी नीति के अंतर्गत गूगल के लिए बिहार में बेहतरीन अवसर है। उल्लेखनीय है कि यह नीति राज्य को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए एक प्रमुख तकनीकी और अनुसंधान हब बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है। इसका मुख्य लक्ष्य बिहार में आधुनिक तकनीकों (एआइ, क्लाउड कंप्यूटिंग आदि) के केंद्रों की स्थापना को बढ़ावा देना और स्थानीय युवाओं के लिए उच्च-स्तरीय रोजगार सृजित करना है। मौके पर सूचना प्रावैधिकी विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह भी उपस्थित रहे। कंपनियों के अनुकूल नीति बिहार जीसीसी नीति-2026 के अंतर्गत राज्य में जीसीसी स्थापित करने वाली पात्र कंपनियों को पूंजीगत व्यय के 30 प्रतिशत (अधिकतम 50 करोड़ रुपये) तक की सब्सिडी का प्रविधान है। राज्य के मूल निवासियों को रोजगार देने वाली कंपनियों को कर्मचारियों के वेतन पर सब्सिडी मिलेगी। प्रति इकाई अधिकतम 200 कर्मचारियों तक यह सहायता पहले वर्ष में 50 प्रतिशत, दूसरे वर्ष में 40 प्रतिशत और तीसरे वर्ष में 30 प्रतिशत तक होती है। कंपनियों के कार्यालयों के किराये पर भी वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। नवाचार को बढ़ावा देने के लिए पेटेंट फाइलिंग फीस का शत प्रतिशत (पांच वर्षों में 50 लाख रुपये तक) और अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन का 50 प्रतिशत (पांच वर्षों में 25 लाख रुपये तक) वापस किया जाएगा। पटना और दानापुर नगर निगम क्षेत्रों के बाहर जीसीसी स्थापित करने वाली कंपनियों को अतिरिक्त 10 प्रतिशत प्रोत्साहन मिलेगा। जीसीसी क्या है जीसीसी वस्तुत: बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा दूसरे देशों में स्थापित की गई रणनीतिक शाखाएं हैं। इनका मुख्य उद्देश्य बाहरी वेंडर्स पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं का केंद्र बनाकर वैश्विक प्रतिभा, कम लागत और तकनीकी नवाचार (एआइ, क्लाउड कंप्यूटिंग, आरएंडडी और डेटा विश्लेषण आदि) का लाभ उठाना है

5 राज्यों में फैला ड्रग नेटवर्क ध्वस्त, सिरसा में एएनटीएफ ने पकड़ी करोड़ों की खेप

 जयपुर राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार कार्रवाई करते हुए नशे के खिलाफ अपने अभियान में एक और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई में मणिपुर से उत्तर भारत के रास्ते राजस्थान लाई जा रही करीब 90 किलोग्राम अवैध अफीम के दूध की खेप जब्त की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत 4.50 करोड़ रुपये आंकी गई है। हरियाणा के सिरसा जिले में हरियाणा पुलिस के सहयोग से अंजाम दी गई यह कार्रवाई हाल के वर्षों में एएनटीएफ की सबसे बड़ी और प्रभावशाली कार्रवाइयों में गिनी जा रही है। राजस्थान को नशामुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का कहर अब नशे के सौदागरों पर वज्र बनकर टूटा है। एएनटीएफ महानिरीक्षक पुलिस श्री विकास कुमार ने बताया कि  उत्तर-पूर्वी राज्यों से उत्तर भारत में आ रही नशे की बड़ी खेपों को रोकने के लिए 'मणिपुर मॉड्यूल' पर तकनीकी अन्वेषण शुरू किया गया था। महीनों की अथक मेहनत और 5 राज्यों में फैले जाल को काटकर एएनटीएफ ने यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। दो महीने तक पकाई खिचड़ी: साए की तरह पीछे लगी रही एएनटीएफ एएनटीएफ को मणिपुर और उत्तर-पूर्वी राज्यों से राजस्थान में भारी मात्रा में मादक पदार्थ लाए जाने का इनपुट मिल रहा था। आईजी श्री विकास कुमार ने अपनी विशेष खुफिया टीमों को तीन बार मणिपुर भेजा, जहां टीमों ने 10-10 दिन कैंप कर पूरे इलाके का सर्वे किया। इस दौरान पाली निवासी सुखराम विश्नोई रडार पर आया, जो लगातार मणिपुर और राजस्थान के चक्कर काट रहा था। इस बार जब सुखराम मणिपुर गया, तो एएनटीएफ की टीमें साए की तरह उसके पीछे लग गईं। शातिर सुखराम लगातार अपने फोन, गाड़ियां और रास्ते बदलता रहा, लेकिन एएनटीएफ का इरादा नहीं बदल सका। मौज-मस्ती, भगवत भक्ति और पुलिस की पहेली मणिपुर से नशे का सौदा फाइनल कर सुखराम अपने ऐश-ओ-आराम के ठिकाने लखनऊ उत्तर प्रदेश पहुंचा। वहां उसने अपनी एक महिला मित्र को बुलाया और उसके साथ नैनीताल तथा प्रसिद्ध कैंची धाम की यात्रा कर जीवन के आनंद लेता रहा। एएनटीएफ इस पहेली को सुलझाने में जुटी रही कि जिस गाड़ी में करोड़ों का नशा होने का शक है, उससे यह जोड़ा खुलेआम घूम कैसे रहा है? आखिरकार, महिला मित्र बस से जयपुर के लिए रवाना हुई और सुखराम अपनी मिजोरम नंबर की कार से अलग रास्ते से जयपुर की तरफ बढ़ा। फोन बदले, गाड़ियां बदलीं, रास्ते बदले… लेकिन नहीं टूटा पुलिस का पीछा जयपुर के नजदीक नाकाबंदी कर एएनटीएफ ने सुखराम को दबोच लिया, लेकिन पूरी कार खंगालने पर भी एक ग्राम अफीम नहीं मिली। दरअसल, सुखराम ने टोल नाके पर पुलिस को देखकर अपने सारे मोबाइल और तकनीकी उपकरण रिसेट कर दिए थे। एएनटीएफ की तकनीकी विंग ने जब सुखराम के रिसेट उपकरणों से डेटा रिकवर किया, तो उसमें एक संदिग्ध ट्रक के फास्टैग कार्ड की डिटेल मिली। गहनता से जांच करने पर पता चला कि इस ट्रक का फास्टैग भुगतान सुखराम खुद कर रहा था और वह ट्रक मणिपुर से असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और यूपी होते हुए हरियाणा की सीमा में दाखिल हो चुका था। श्रीनगर और जम्मू का 'कोड वर्ड' एएनटीएफ की हनुमानगढ़, गंगानगर और नागौर की टीमें तुरंत उस ट्रक के पीछे लग गईं। इसी बीच जम्मू में बैठे मुख्य सूत्रधार मगनलीप (काल्पनिक नाम) ने सुखराम के पकड़े जाने के डर से ट्रक ड्राइवर को कोड वर्ड में निर्देश दिया- "रात तक श्रीनगर (जोधपुर) पहुंचना था पर अब जम्मू ही रुकना पड़ेगा, आगे नहीं जाएंगे।" इसका मतलब था कि पुलिस के डर से अब माल राजस्थान नहीं बल्कि रास्ते में ही ठिकाने लगाया जाएगा। इसके बाद ट्रक अचानक राजस्थान सीमा से ठीक पहले हरियाणा के सिरसा इलाके में रुक गया। महिला इंस्पेक्टर का जांबाज नेतृत्व और सिरसा पुलिस की मुस्तैदी इस क्रिटिकल मोड़ पर आईजी विकास कुमार ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने रात के करीब 03:30 बजे हरियाणा के सिरसा एसपी श्री दीपक सारण को फोन किया। मुस्तैदी दिखाते हुए सिरसा एसपी ने तत्काल अपनी फोर्स को राजस्थान एएनटीएफ की टीम के साथ अटैच किया। इस पूरे धरपकड़ ऑपरेशन की कमान एएनटीएफ की महिला इंस्पेक्टर श्रीमती किरणजीत कौर (हनुमानगढ़ टीम प्रभारी) के हाथ में थी, जो पिछले 36 घंटों से बिना खाए-पिये और बिना सोए पूरी मुस्तैदी से अपने कर्तव्य को अंजाम दे रही थीं। संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर संदिग्ध ट्रक को ढूंढ निकाला। ट्रक के नीचे वेल्डिंग कर बनाया था गुप्त कमरा शुरुआती जांच में ट्रक पूरी तरह खाली मिला और ड्राइवर अनजान बनता रहा। लेकिन जब एएनटीएफ की टीम ने ट्रक के निचले हिस्से (चेसिस) की बारीकी से जांच की, तो दंग रह गए। तस्करों ने ट्रक के नीचे लोहे की पत्तियों से वेल्डिंग कर और नट-बोल्ट लगाकर एक गुप्त कमरेनुमा केबिन बना रखा था। जब कटर से उस तहखाने को तोड़ा गया, तो उसके अंदर से 95 पोटलियों में पैक 88.970 किलोग्राम अवैध अफीम बरामद हुई। मौके से आरोपी किशनाराम विश्नोई पुत्र छोगा राम उम्र 44 साल निवासी शिवपुरा जिला पाली को गिरफ्तार किया गया और मुख्य सूत्रधार सुखराम विश्नोई को हिरासत में लिया गया। क्यों रखा गया 'ऑपरेशन जमुहार' नाम? पांच राज्यों में फैले इस नेटवर्क को ध्वस्त करने वाले इस मेगा ऑपरेशन का नामकरण (ज-मु-हा-र) इन राज्यों के शुरुआती अक्षरों को मिलाकर किया गया: ° *ज* – जम्मू (जहां मुख्य सूत्रधार बैठा था) ° *म* – मणिपुर (जहां से नशे की खेप चली) ° *उ* – उत्तर प्रदेश (ट्रांजिट पॉइंट – लखनऊ) ° *हा* – हरियाणा (जहां माल को दबोचा गया) ° *र* – राजस्थान (जहां नशे की सप्लाई होनी थी) ° *शाब्दिक अर्थ:* 'जमुहार' का शाब्दिक अर्थ मुख्य फसल को नुकसान पहुंचाने वाली 'जहरीली घास' होता है, जो मणिपुर से लाए जा रहे अफीम के इस जहर के लिए बिल्कुल सटीक बैठता है। मुख्यालय में किया जाएगा जांबाज टीम को सम्मानित एएनटीएफ महानिरीक्षक श्री विकास कुमार ने बताया कि हाल ही के दिनों की यह सबसे बड़ी और प्रभावशाली कार्रवाई है। 36 घंटों तक बिना आराम किए इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने वाली महिला निरीक्षक किरणजीत कौर और उनकी पूरी टीम को विशेष कार्यक्रम आयोजित कर एएनटीएफ मुख्यालय, जयपुर में सम्मानित किया जाएगा। एएनटीएफ की आमजन से अपील महानिरीक्षक … Read more

चांदी महंगी होने पर बदली योजना, दुल्हन के खाते में बढ़कर भेजे जाएंगे 64 हजार रुपये

लखनऊ मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में राज्य सरकार ने बदलाव करते हुए पायल और बिछिया उपहार की जगह भी दुल्हन के खाते में धनराशि ट्रांसफर की जाएगी। ये बदलाव चांदी की कीमतों में उछाल आने के बाद किया गया है सरकार ने अब विवाह करने वाली कन्याओं को दी जाने वाली चांदी की पायल और बिछिया के बदले भी नकद राशि देने का फैसला किया है। इसके लिए समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव प्रवीण मिश्र द्वारा शासनादेश जारी कर दिया गया है। क्या है मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रति युगल एक लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। पूर्व में इसमें से 60 हजार रुपये की राशि दुल्हन के खाते में भेजी जाती थी और 25 हजार रुपये से पायल, बिछिया सहित अन्य उपहार दिए जाते थे। जबकि 15 हजार रुपये की राशि आयोजन पर खर्च की जाती है। लेकिन पिछले कुछ समय से चांदी की कीमतों में भारी उछाल आ रहा है। जिसके बाद चांदी की पायल और बिछिया नहीं देने का निर्णय लिया गया है। इसके बजाय चार हजार रुपये की राशि दुल्हन के खाते में भेजी जाएगी। क्यों हुआ बदलाव इस तरह से दुल्हन के खाते में कुल 64 हजार रुपए भेजे जाएंगे। उपहार सामग्री पर 21 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत पहले निर्धारित वजन (30 ग्राम चांदी की पायल और 10 ग्राम चांदी की बिछिया) के लिए 4 हजार रुपए निर्धारित थे, लेकिन चांदी की बढ़ती कीमतों के बाद 4 हजार रुपए में ये सब खरीद पान मुश्किल है। ऐसे में सरकार ने 4 हजार रुपए सीधे दुल्हन के खाते में भेजने का निर्णय लिया है। इस नए फैसले के बाद अब कन्या के बैंक खाते में 60 हजार की जगह कुल 64 हजार भेजे जाएंगे। बाकि योजना में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।

ढिकली गांव में सांपों का कुनबा बरामद, मां के साथ 22 नवजात रसेल वाइपर रेस्क्यू

उदयपुर राजस्थान के उदयपुर शहर के ढिकली गांव से गुरुवार को एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां एक ट्यूबवेल के चेंबर से रसेल वाइपर प्रजाति के सांपों (Russells Viper Snakes) का पूरा कुनबा बरामद किया गया है. चेंबर के भीतर एक साथ इतने जहरीले सांपों की मौजूदगी की खबर फैलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. सूचना मिलते ही वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर (WARC) की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और एक रेस्क्यू अभियान चलाया. जब टीम ने चेंबर से सांपों को बाहर निकालकर गिनना शुरू किया तो गिनती 1, 2, 3, 4 करते हुए सीधे 23 पर जाकर रुकी. इस सफल रेस्क्यू के बाद सामने आया कि इन सांपों में 22 नवजात बच्चे और उनकी मां शामिल है. अंडे नहीं, सीधे बच्चों को जन्म देती है रसेल वाइपर प्रजाति इस रेस्क्यू के बाद वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर के संभागीय अध्यक्ष डॉ. चमन सिंह चौहान ने सांपों की इस प्रजाति के बारे में एक विशेष जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि रसेल वाइपर सांपों की अन्य सामान्य प्रजातियों की तरह अंडे नहीं देता, बल्कि यह सीधे बच्चों को जन्म देता है. जीव विज्ञान के अनुसार, इस प्रजाति का प्रजनन काल सामान्यतः नवंबर महीने के आसपास होता है और इसके बाद जून-जुलाई के महीनों में बच्चे जन्म लेते हैं. यही वजह है कि जून के महीने में इस ट्यूबवेल चेंबर के भीतर एक साथ इतने सारे नवजात बच्चे अपनी मां के साथ पाए गए. वन्य जीवों को नुकसान न पहुंचाने की विशेष अपील रेस्क्यू के बाद वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर की टीम ने स्थानीय लोगों से एक अपील भी की. विशेषज्ञों ने कहा है कि यदि कभी भी किसी के घर या आसपास कोई वन्य जीव या सांप दिखाई दे, तो लोग घबराकर उसे खुद पकड़ने या जान से मारने का प्रयास बिल्कुल न करें. ऐसी किसी भी स्थिति में तुरंत रेस्क्यू टीम को सूचित करना चाहिए ताकि वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से उनके प्राकृतिक आवास में भेजा जा सके.

एफपीपीसीए वसूली पर विवाद, नियामक आयोग ने कॉर्पोरेशन को फिर भेजा नोटिस

लखनऊ प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं से जून माह में 10 फीसदी ईंधन अधिभार शुल्क वसूला जा रहा है। इस मामले में नियामक आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने पॉवर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को दोबारा नोटिस जारी किया है। उन्हें 19 जून तक इस वसूली का आधार बताने वाली रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। विद्युत उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 10 प्रतिशत ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) की वसूली हो रही है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इसके विरोध में नियामक आयोग में याचिका दायर की। आयोग ने 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार को नियम विरुद्ध बताया। उसने पॉवर कॉर्पोरेशन को नोटिस भेजकर दस्तावेज मांगे थे। सप्ताह भर बाद भी कॉर्पोरेशन जवाब नहीं दे पाया। प्रबंध निदेशक ने जवाब के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा। वर्मा ने इस पर आपत्ति जताई और वसूली रोकने की मांग की। इसके बाद नियामक आयोग ने बुधवार को प्रबंध निदेशक को फिर नोटिस भेजा। आयोग की सख्त टिप्पणी आयोग ने अपने नए आदेश में स्पष्ट किया है कि एफपीपीसीए के आंकड़े यूपीपीसीएल के पास होने चाहिए। यूपीईआरसी विनियमों के तहत यह जानकारी वेबसाइट पर भी सार्वजनिक होनी चाहिए थी। कॉर्पोरेशन ने आयोग द्वारा मांगी गई मूल सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराईं। वह अन्य राज्यों में लागू व्यवस्था का अध्ययन करने की बात कर रहा है। जबकि आयोग ने केवल उत्तर प्रदेश में 10 प्रतिशत एफपीपीसीए के आंकड़ों का आधार पूछा था। बिना आंकड़े वसूली अवैध अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि कॉर्पोरेशन के पास एफपीपीसीए निर्धारण के आवश्यक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं से की जा रही वसूली अवैध है। यह स्वयं संदेह के घेरे में आ जाती है। यह स्थिति अत्यंत गंभीर है क्योंकि लाखों उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है। उन्होंने आयोग से तत्काल 10 प्रतिशत की वसूली पर रोक लगाने की मांग की। पारदर्शिता और जवाबदेही परिषद अध्यक्ष ने बताया कि आयोग ने यूपीपीसीएल को 19 जून तक सभी मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने को कहा है। आयोग का यह आदेश इस बात का संकेत है कि नियामक संस्था मामले को गंभीरता से ले रही है।  उपभोक्ताओं से अतिरिक्त धनराशि वसूलने से पहले सभी गणनाएं और नियामकीय प्रक्रियाएं स्पष्ट होनी अनिवार्य हैं।  यदि नियमानुसार अभिलेख वेबसाइट पर प्रकाशित नहीं किए गए, तो यह नियामकीय प्रावधानों का उल्लंघन है। आयोग ने 1 जून को ही इस आदेश को गैर कानूनी बताया था।  

NCR प्लान-2041: दिल्ली का बोझ घटाने को नए ग्रीनफील्ड शहरों का खाका तैयार

नई दिल्ली  दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती आबादी और दबाव को कम करने के लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) ने बड़ा खाका तैयार किया है। अगले सप्ताह मंजूरी के लिए रखे जाने वाले रीजनल प्लान-2041 में 5 से 8 नए ग्रीनफील्ड स्मार्ट टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही दिल्ली समेत एनसीआर के प्रमुख शहरों को महज 30 मिनट की दूरी पर लाने की योजना है। NCRPB की योजना के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के एनसीआर क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए नए स्मार्ट शहर बसाए जाएंगे। इन टाउनशिप में आधुनिक नागरिक सुविधाएं, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट मॉडल अपनाया जाएगा। दिल्ली का बोझ कम करने पर फोकस रीजनल प्लान-2041 प्लान में मौजूदा शहरों और बस्तियों के पुनर्विकास के साथ-साथ नए ग्रीनफील्ड शहर बसाने का सुझाव दिया गया है। इन शहरों को आत्मनिर्भर और स्व-संपूर्ण बनाया जाएगा ताकि रोजगार, आवास और अन्य सुविधाओं के लिए लोगों को दिल्ली पर निर्भर न रहना पड़े। योजना में उत्तर प्रदेश सरकार के यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एरिया (YEIDA) को 20 लाख आबादी वाले ग्रीनफील्ड शहर के रूप में विकसित करने और हरियाणा में कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे के आसपास प्रस्तावित पंचग्राम परियोजना का भी जिक्र किया गया है। रीजनल प्लान-2041 की बड़ी बातें     NCR में 5-8 नए स्मार्ट ग्रीनफील्ड शहर बसाने का प्रस्ताव     दिल्ली से प्रमुख एनसीआर शहरों की दूरी 30 मिनट करने की योजना     हाई-स्पीड रेल और हेली-टैक्सी नेटवर्क पर जोर     YEIDA और हरियाणा के पंचग्राम को नए विकास केंद्र के रूप में शामिल किया गया     अगले 15 सालों में 20 लाख करोड़ रुपये निवेश की जरूरत     2030 तक दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर बन सकता है दिल्ली-एनसीआर दिल्ली से जुड़ेंगे एनसीआर के प्रमुख शहर रीजनल प्लान-2041 का सबसे महत्वाकांक्षी प्रस्ताव 30 मिनट NCR है। इसके तहत दिल्ली और NCR के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय 30 मिनट तक सीमित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए हाई-स्पीड और सीमित स्टॉपेज वाली मास ट्रांजिट रेल प्रणाली, सुपरफास्ट ट्रेनें और हेली-टैक्सी जैसी सुविधाओं की संभावनाएं तलाशने का प्रस्ताव है। योजना के अनुसार अन्य रेल सेवाओं से NCR के किसी भी हिस्से तक 60 मिनट और कार से 2 से 3 घंटे के भीतर पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। 2030 तक बनेगा दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर प्लान के अनुसार, साल 2030 तक दिल्ली-एनसीआर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला शहरी क्षेत्र बन सकता है। जो कि जापान की राजधानी टोक्यो को भी छोड़ देगा। अनुमान है कि अगले 15 वर्षों में 3 करोड़ से अधिक अतिरिक्त लोगों को बसाने और मौजूदा आबादी के लिए बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की आवश्यकता होगी।  

46 डिग्री तापमान के बीच सक्रिय हुआ नया पश्चिमी विक्षोभ, कई जिलों में येलो अलर्ट

 जयपुर राजस्‍थान में भीषण गर्मी के बीच आज से नया पश्च‍िमी व‍िक्षोभ एक्‍ट‍िव हो रहा है, ज‍िससे आंधी-बार‍िश का दौरा फ‍िर से शुरू होने का अनुमान है. इसकी वजह से तापमान में कमी होगी. लोगों को गर्मी से राहत म‍िलने की उम्‍मीद है. मौसम विभाग ने यह जानकारी दी. बुधवार सुबह राज्‍य के पूर्वी भाग में कहीं-कहीं हल्‍की बार‍िश र‍िकॉर्ड हुई है. जबक‍ि पश्‍च‍िमी राजस्‍थान में भीषण गर्मी रही. श्रीगंगानगर में 46 डिग्री पारा श्रीगंगानगर में सबसे अध‍िक तापमान 46 ड‍िग्री सेल्‍स‍ियस के पार पहुंच गया. गर्मी से लोगों को बुरा हाल हो रहा है. दोपहर 12 बजे तक सड़क पर इक्‍का-दुक्‍का वाहन ही नजर आते हैं. पश्‍च‍िमी राजस्‍थानके बीकानेर और जोधपुर में गर्मी से राहत म‍िलने की उम्‍मीद नहीं है. ज्‍यादातर इलाकों में मौसम शुष्‍क रहेगा. अधिकतम तापमान 44-46 डिग्री दर्ज होने का अनुमान है. कुछ जगहों पर लू चलेगी. 20-30 क‍िलोमीटर प्रत‍ि घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी. आंधी-बारिश का दौर फिर बढ़ेगा नए पश्‍चिमी व‍िक्षो से आज कुछ ज‍िलों में आंधी-बार‍िश की गत‍िव‍िधियां फ‍िर बढ़ेंगी. 11 से 14 जून के दौरान बीकानेर, जयपुर, अजमेर, भरतपुर संभाग के कुछ भागों में 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे के रफ्तार से तेज आंधी चलेगी.  साथ ही कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है.  जैसलमेर: आंधी और हवाओं से मिली थोड़ी राहत, लेकिन दोपहर में फिर बढ़ेगी तपिश,11 से 14 जून के बींच आंधी बारिश का अलर्ट है. आंधी बारिश का येलो अलर्ट राजस्थान में आंधी-बारिश का येलो अलर्ट है. डीग, भरतपुर और धौलपुर जिलों में कहीं-कहीं हल्के से मध्यम मेघगर्जन गरज-चमक के साथ अचानक तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना है. 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी. मौसम विभाग ने लोगों को अलर्ट किया है.

उत्तर प्रदेश में पंचायत मतदाताओं की संख्या 12.58 करोड़ पहुंची, बलिया में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

लखनऊ  राज्य निर्वाचन आयोग ने बुधवार को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया। प्रदेश में कुल 29.01 लाख मतदाता बढ़ गए हैं। इसके साथ ही अब कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 12.58 करोड़ हो गई है। मतदाता सूची का अनंतिम प्रकाशन 23 दिसंबर को हुआ था। दावे-आपत्तियों के निस्तारण के लिए आयोग ने पांच बार तारीख भी बढ़ाई थी। कुल 169 दिन बाद आयोग ने मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया है। आयोग ने पहली बार सभी मतदाताओं को स्टेट वोटर नंबर (एसवीएन) जारी किया गया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में 12.29 करोड़ मतदाता थे। इसके बाद 23 दिसंबर को जारी अनंतिम मतदाता सूची में कुल 12.69 करोड़ मतदाता हो गए थे। इसके बाद कुल 2.32 करोड़ नाम जोड़े गए और 2.03 करोड़ नाम काटे गए। ऐसे में कुल मतदाताओं की संख्या 12.58 करोड़ हो गई है। मतदाता वृद्धि के मामले में बलिया प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है, यहां 1,60,376 मतदाताओं की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद लखीमपुर खीरी में कुल 1,38,223, देवरिया में 1,26,771, सिद्धार्थनगर में 1,23,162 और कुशीनगर में 1,20,011 मतदाता बढ़े हैं। शीर्ष दस जिलों में शाहजहांपुर, प्रयागराज, गोंडा और जौनपुर भी शामिल हैं। इससे स्पष्ट है कि पूर्वांचल और तराई क्षेत्र के जिलों में मतदाताओं की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, पुनरीक्षण अभियान के दौरान नए मतदाताओं को जोड़ने, मृत व स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने तथा दावे-आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की गई है, जो आगामी पंचायत चुनाव का आधार बनेगी। गौरतलब है कि पिछले दिनों हाई कोर्ट ने पंचायत चुनाव समय पर न होने पर नाराजगी जताते हुए आयोग से अगली सुनवाई में चुनाव की तारीख मांगी है। ऐसे में अब पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज होने की संभावना है। गाजीपुर में सबसे अधिक घटे मतदाता मतदाताओं की संख्या में कमी वाले जिलों में गाजीपुर सबसे ऊपर रहा है, जहां 94,757 मतदाता कम हुए हैं। मैनपुरी में 93,207 और आजमगढ़ में 60,347 मतदाता कम हुए हैं। आगरा में 23,294, एटा में 23,429, कानपुर देहात में 10,759 और हापुड़ में 366 मतदाता घटे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापक पुनरीक्षण अभियान के दौरान मृत, स्थानांतरित और पात्रता खो चुके मतदाताओं के नाम हटाने के कारण आंकड़ों में यह बड़ा अंतर देखने को मिला है। कई स्थानों पर गांव के परिवार अब शहर में रहने लगे हैं। ऐसे में उनके नाम गांव की मतदाता सूची से काटे गए हैं। सर्वाधिक मतदाता वाले टॉप 10 जिले जिला          जनसंख्या जौनपुर          36,97,376 आजमगढ़       35,76,287 प्रयागराज      34,95,203 सीतापुर          31,18,029 गोरखपुर         29,63,142 लखीमपुर खीरी     28,87,290 हरदोई              28,73,247 गाजीपुर           28,11,268 बलिया           26,97,200 गोंडा               26,74,509 सबसे कम मतदाता वाले 10 जिले जिला                       जनसंख्या गौतमबुद्धनगर              2,09,562 महोबा                          5,88,137 चित्रकूट                        7,00,457 हमीरपुर                      7,28,518 हापुड़                         7,47,201 शामली                        7,48,921 बागपत                         8,11,402 ललितपुर                       8,57,275 श्रावस्ती                        8,58,977 औरैया                          9,57,338