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जमकर बरसात जारी: इंदौर में अगले तीन दिन भी गिरेगी बारिश

इंदौर इंदौर में देर रात से शुरू हुआ बारिश का दौर अभी तक जारी है। इस महीने में लगातार तेज बारिश का यह पहला दौर है, जब शहर पूरी तरह पानी से तरबतर हो गया है। बारिश की वजह से कई इलाकों में पानी भर गया है और कुछ जगह तो सड़के जलमग्न हो गई हैं। सड़कों पर जमा हुए पानी की वजह से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार इंदौर शहर में 24 घंटे के अंदर करीब 127 मिमी से ज्यादा बारिश हुई है। वहीं इंदौर में सबसे ज्यादा बारिश देपालपुर इलाके में होना बताया जा रहा है। यहां करीब 170 मिमी बारिश हुई। पिछले महीने में हुई कम बारिश से शहर के लोग परेशान था, जिसे इस झड़ी ने पूरा कर दिया है।   बुधवार को शहर में बादल छाए और दोपहर में रिमझिम फुहारों के साथ हल्की बारिश रुक-रुककर हुई। शाम चार बजे बाद शहर में तेज बारिश हुई। एयरपोर्ट क्षेत्र में रात 8.30 बजे तक 22 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं रीगल क्षेत्र में रात 10 बजे तक 16 मिमी बारिश दर्ज की गई। भोपाल स्थित मौसम विज्ञानियों के मुताबिक इंदौर में आज मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। वर्तमान में एक द्रोणिका जैसलमेर, कोटा, गुना व दमोह से गुजर रही है। वहीं विदर्भ पर ऊपरी हवा का चक्रवात बना हुआ है। इस वजह से अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से नमी आ रही है। वहीं एक कम दबाव का क्षेत्र उड़ीसा और उससे लगे क्षेत्र झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ होते हुए मप्र की ओर आएगा। इसके प्रभाव से इंदौर में अगले दो से तीन तेज बौछारों से शहर तरबतर होगा। बुधवार को शहर में अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस कम 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान सामान्य एक डिग्री सेल्सियस अधिक 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

फलों से भरी बगिया का तोहफा! ‘एक बगिया मां के नाम’ योजना में महिलाओं को सब्सिडी सीधे खाते में

भोपाल  मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए एक और अच्छी खबर है। लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त का पैसा तो लाभार्थियों के खाते में आने ही वाला है। हालांकि वे मोहन यादव सरकार की एक और योजना का फायदा उठा सकती हैं। प्रदेश में 'एक बगिया मां के नाम' से योजना चल रही है। इस योजना के तहत फलदार पेड़ लगाने के लिए सरकार की ओर से सब्सिडी दी जा रही है। यह पैसा सीधे महिलाओं के खाते में भेजा जा रहा है। महिला सशक्तिकरण को लेकर मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव द्वारा महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत प्रदेश में एक बगिया मां के नाम की योजना शुरू की है। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा अपनी निजी भूमि पर फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। इस काम में मदद के लिए सरकार कंटीले तार की फेंसिंग, पौधे खरीदने, खाद, गड्ढे खोदने के साथ सिंचाई के लिए 50000 लीटर का जल कुंड बनाने के लिए पैसा दिया जा रहा है। इस योजना से जुड़ने के लिए 15 सितंबर तक का समय है। 31,300 महिलाओं को किया जाएगा शामिल 'एक बगिया मां के नाम' योजना का शुरुआती लक्ष्य 31,300 महिलाओं को लाभ पहुंचाने का रखा गया है। हालांकि महिलाओं में इस योजना को लेकर इस कदर जोश है कि 40,406 महिलाओं ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। निजी भूमि पर बगिया बनाने की योजना 15 अगस्त से शुरू हुई है और 15 सितंबर तक चलेगी। इस योजना के तहत 30 लाख फलदार पौधे लगाए जाने का लक्ष्य है। अभी तक कितने आवेदन को मिली मंजूरी मोबाइल एप के जरिए महिलाओं का चयन किया जा रहा है। इस एप को मनरेगा परिषद द्वारा MPSEDC के माध्यम से तैयार किया गया है। अभी तक 10,162 महिलाओं को इस योजना के तहत मंजूरी मिल गई है। मतलब इन महिलाओं के खाते में पैसा आने की राह खुल गई है। इस योजना के लिए मध्य प्रदेश सरकार 1000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस योजना में सभी जिलों के अंतर्गत आने वाले 313 ब्लॉक की 9662 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इन पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 10,162 गांवों में सर्वे कर 40,406 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया है। इस योजना के अंतर्गत हर ब्लॉक से कम से कम 100 हितग्रहियों को चुना जाएगा। साल में दो बार महिलाओं को ट्रेनिंग भी दी जाएगी। योजना के लिए पात्रता इस योजना के तहत चुनी गई महिलाओं को बगिया लगाने के लिए कम से कम 0.5 एकड़ और अधिकतम 1 एकड़ जमीन होनी चाहिए। इससे ज्यादा या कम जमीन पर बाग लगाने वाली महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिलेगा। खंडवा जिला नंबर वन बगिया विकसित करने में वर्तमान में खंडवा जिला सबसे आगे है, जबकि सिंगरौली जिला प्रदेश में दूसरे नंबर है। आज 3 सितंबर तक खंडवा, सिंगरौली, बैतूल, देवास और आगर मालवा जिले टॉप-5 में शामिल थे। वहीं टॉप 5 ब्लॉक की बात करें तो खंडवा, चितरंगी, पंधाना, पुनासा और खालवा शामिल है। कब आएगी लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त मध्य प्रदेश की महिलाओं को हर महीने लाडली बहना योजना के तहत मिलने वाले पैसों का इंतजार रहता है। लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त को लेकर अभी आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। हालांकि 10 सितंबर के बाद पैसा खाते में आ सकता है। इस महीने महिलाओं के खाते में 1250 रुपये ही आएंगे।  

नई सड़क से जुड़े बदलाव: गुजरात और MP के बीच 4-लेन हाईवे, 14 गांव प्रभावित

उज्जैन  एमपी में 70 किलोमीटर का नेशनल हाईवे अभी उज्जैन से बदनावर के नागेश्वर धाम तक बना है। अब दूसरे चरण का कार्य बदनावर से टिमरवानी तक 80 किमी का काम शुरू होने वाला है। यह मार्ग भी 552 डी के अंतर्गत ही आएगा तथा इसका निर्माण भी नेशनल हाईवे द्वारा किया जाएगा। इसके टेंडर हो चुके हैं अक्टूबर माह में इस रोड़ का कार्य शुरू हो जाएगा। 1900 करोड़ी की लागत से बन रहा यह नेशनल हाईवे गुजरात से जुड़ेगा तथा इसके बनने से उज्जैन से टिमरवानी की दूरी भी कम हो जाएगी व आवागमन भी सुगम हो होगा। इसका निर्माण सिंहस्थ के पहले किया जाएगा। ताकि गुजरात से आने वाले श्रद्धालुओं को इसका फायदा मिल सके तथा भैंसोला में बन रहा पीएम मेगा टेक्सटाईल पार्क भी इस रोड़ से जुड जाए। 14 गांव की जमीन होगी अधिग्रहित फोरलेन निर्माण के लिए बदनावर तहसील के पश्चिम क्षेत्र की करीब 14 गांवों की भूमि अधिग्रहण की तैयारी शुरू हो गई है। इसके निर्माण के लिए कुल 155.579 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित करेंगे। इसमें सरकारी व निजी भूमि शामिल हैं। भूमि अधिग्रहण के लिए सूची भी प्रकाशित हो चुकी है। इससे संबंधित गांवों के किसानों में भी हलचल तेज हो गई है। यह फोरलेन उज्जैन से सीधा दिल्ली मुंबई एट लेन एक्सप्रेस वे से सीधा जुड़ जाएगा।  तहसीलदार सुरेश नागर के मुताबिक, बदनावर से टिमरवानी तक फोरलेन सड़क बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बदनावर तहसील के 14 गांवों की भूमि से यह फोरलेन निकलेगा। इसके लिए ग्राम व भूमि प्रस्तावित है। संबंधित गांवो के हल्का पटवारी व राजस्व अमले को भूमि की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया है। औद्योगिक इकाइयों को मिलेगा फायदा अभी तक मालवांचल से गुजरात जाने के लिए इंदौर-अहमदाबाद मार्ग ही प्रमुख है। अब इस मार्ग के फोरलेन बनाए जाने से यातायात इस पर अधिक डायवर्ट होगा। इससे समय की बचत होगी। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बदनावर के लोग भी गुजरात इसी मार्ग से होकर जाते हैं। भैंसोला में बड़ा पीएम मेगा टेक्सटाइल पार्क बन रहा है, जबकि छायन में कपड़ा कारखाना शुरू हो चुका है। इसी तरह दोतरिया में भी एक फैक्टरी की नींव रखी जा चुकी है। इन उद्योगों के लिए आवागमन में भी इस मार्ग के चौड़ीकरण से यातायात सुगम होगा।

एक बगिया मां के नाम’: पर्यावरण सुधार और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की पहल

पर्यावरण और महिलाओं का विकास साथ-साथ, 'एक बगिया मां के नाम' योजना का असर भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एक बगिया माँ के नाम परियोजना मध्यप्रदेश में पर्यावरण सुधार के साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बन रही है। राज्य शासन ने महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत प्रदेश में 'एक बगिया मां के नाम' परियोजना प्रारंभ की है। इसके अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा अपनी निजी भूमि पर फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। माँ की बगिया विकसित करने के प्रति समूह की महिलाओं में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है। अब तक 10 हजार 162 महिलाओं को 'माँ की बगिया' स्वीकृति की चुकी है। परियोजना के अंतर्गत प्रदेश सरकार द्वारा 1000 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा रही है। इसके अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को पौधों की सुरक्षा से लेकर कटीले तार की फेंसिंग, पौधे खरीदने, खाद, गड्‌ढे खोदने के साथ ही सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर का जल कुंड बनाने के लिए राशि भी उपलब्ध कराई जा रही है। फलोद्यान की बगिया विकसित करने में वर्तमान में सिंगरौली जिला सबसे आगे है। खंडवा जिला प्रदेश में दूसरे नंबर है। 40 हजार से अधिक पंजीयन योनजा का लाभ लेने के लिए स्व-सहायता समूह की महिलाओं का चयन एक बगिया मां के नाम ऐप से किया जाता है। ऐप का निर्माण मनरेगा परिषद द्वारा कराया गया है। परियोजना के अंतर्गत प्रदेश समूह की 31 हजार 300 महिलाओं को लाभांवित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। ऐप पर 40 हजार 406 महिलाओं ने 'एक बगिया मां के नाम' पर पंजीयन कराया है, जो निर्धारित लक्ष्य से अधिक है। 9 हजार 662 ग्राम पंचायतें हैं शामिल एक बगिया मां के नाम परियोजना में प्रदेश के सभी जिलों के अंतर्गत आने वाले 313 ब्लॉक की 9 हजार 662 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इन पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 10 हजार 162 गांवों में सर्वे कर 40 हजार 406 महिलाओं का पंजीयन किया गया है। परियोजना के अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक से न्यूनतम 100 हितग्राहियों का चयन किया गया है। वर्ष में दो बार महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।  ड्रोन से निगरानी एक बगिया मां के नाम परियोजना अंतर्गत किए जा रहे पौधरोपण कार्य की मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक डेव्हलेपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा ड्रोन के माध्यम से मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे चयनित जमीन, गड्‌ढे सहित पौधों की यथास्थिति के बारे में आसानी से जानकारी प्राप्त हो सकेगी। अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग प्रदेश में पहली बार पौधरोपण के लिए सिपरी सॉफ्टवेयर की मदद ली जा रही है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से पौधरोपण के लिए जमीन का चयन वैज्ञानिक पद्धति से किया गया है। जलवायु के साथ ही किस जमीन पर कौन सा फलदार पौधा उपयोगी है, पौधा कब और किस समय लगाया जाएगा, पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी कहाँ पर उपलब्ध है, यह सब वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से पता लगाया जा रहा है। 30 लाख फलदार पौधे लगाए जाएंगे “एक बगिया मां के नाम’’ परियोजना अंतर्गत प्रदेश की 31 हजार 300 स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निजी जमीन पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाएं जाएंगे, जो समूह की महिलाओं की आर्थिक समृद्धि का आधार बनेंगे। डैशबोर्ड से पर्यवेक्षण पौधरोपण का कार्य सही ढंग से हो रहा है या नहीं, इसके पर्यवेक्षण के लिए अलग से एक डैशबोर्ड बनाया गया है। इसके माध्यम से प्रतिदिन जिलों में हो रहे कार्यों की निगरानी की जा रही है। प्रदर्शन के आधार पर प्रथम 3 जिले, 10 जनपद पंचायत व 25 ग्राम पंचायतों को पुरस्कृत किया जाएगा। न्यूनतम 0.5, अधिकतम 1 एकड़ जमीन होना अनिवार्य एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने के लिए चयनित हुई महिला के पास बगिया लगाने के लिए भूमि भी निर्धारित की गई है। चयनित महिला के पास न्यूनतम 0.5 या अधिकतम एक एकड़ जमीन होना अनिवार्य है। 

क्रांतिकारी तकनीक! IIT इंदौर ने बनाया ऐसा उपकरण जो बिना सूरज और बैटरी के बनाएगा बिजली

 इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी (आईआईटी) अपनी तकनीकी क्षमता और नई खोजों के चलते देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में प्रसिद्ध और चर्चित रहता है। इंदौर आईआईटी की चर्चा एक बार फिर हुई है। इस बार जो खोज यहां की गई है, वो आने वाले समय में ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है। यहां के प्रोफेसरों की निगरानी में छात्रों ने ऐसा उपकरण तैयार किया है, जो सूरज की रोशनी के बिना, किसी भी प्रकार की बैटरी या किसी अन्य मशीन के बिना ही बिजली उत्पादन करने में सक्षम है। बिजली उत्पादन के लिए इस उपकरण को सिर्फ पानी और हवा की आवश्यक्ता होगी। यानी ये सिर्फ इन दो चीजों की सहायता से बिजली पैदा करता है। आईआईटी इंदौर की सस्टेनेबल एनर्जी एंड एन्वायरन्मेंटल मटेरियल्स लैब में तैयार इस उपकरण को खास तरह के मेम्ब्रेन से बनाया गया है। इसमें ग्रैफीन ऑक्साइड और ज़िंक-इमिडाज़ोल नामक पदार्थ का इस्तेमाल हुआ है। जब इस मेम्ब्रेन को पानी में आंशिक रूप से डुबो दिया जाता है तो पानी धीरे-धीरे ऊपर की ओर चढ़ने लगता है और वाष्पित होता है। इसी प्रक्रिया के दौरान मेम्ब्रेन के दोनों सिरों पर पॉजिटिव और नेगेटिव आयन अलग हो जाते हैं और वहां से स्थिर बिजली पैदा होने लगती है। खारे या गंदे पानी से भी बिजली बना देगा इतना ही नहीं, यह उपकरण साफ पानी के साथ-साथ खारे या गंदे पानी में भी लंबे समय तक काम करता रहता है। परीक्षण के दौरान पाया गया कि सिर्फ तीन गुणा दो सेंटीमीटर के एक छोटे से मेम्ब्रेन से 0.75 वोल्ट तक बिजली पैदा की जा सकती है। अगर ऐसे कई मेम्ब्रेन को जोड़ा जाए तो बिजली की मात्रा और बढ़ाई जा सकती है। यही वजह है कि इसे उन जगहों पर बेहद उपयोगी माना जा रहा है, जहां बिजली आसानी से उपलब्ध नहीं होती। जंगलों और खेतों में लगे सेंसर हों, ब्लैकआउट के समय रोशनी की जरूरत हो या फिर दूर-दराज़ के क्लीनिकों में छोटे मेडिकल उपकरणों को चलाना हो, यह तकनीक हर स्थिति में मददगार साबित हो सकती है। जानें इसकी खूबियां इसकी सबसे बड़ी खूबी तो ये है कि, ये हल्का है, आसानी से कहीं भी ले जाने में बेहद आसान है। घर के अंदर या बाहर, दिन और रात हर समय काम करने में भी सक्षम है। आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास जोशी के अनुसार, जल वाष्पीकरण जैसी सामान्य प्रक्रिया को ऊर्जा उत्पादन का साधन बनाना समाज के लिए बड़ा योगदान है। उनका मानना है कि यह तकनीक ग्रामीण और वंचित इलाकों में जीवन को आसान बना सकती है और स्वच्छ ऊर्जा का नया रास्ता दिखाती है। शांत तरीके से बिजली बनाएगा उपकरण वहीं इस शोध का नेतृत्व कर रहे प्रोफेसर धीरेंद्र राय का कहना है कि ये ऐसा सेल्फ-चार्जिंग स्रोत है, जो पानी और हवा से चलता है। जब तक वाष्पीकरण जारी रहेगा, ये उपकरण लगातार शांत तरीके से बिजली बनाता रहेगा। उनकी टीम अब इसे और सस्ता और बड़े पैमाने पर बनाने की दिशा में काम करने जा रही है, ताकि इस तकनीक को जल्द से जल्द देश के उन गांवों तक पहुंचाया जा सके जहां अबतक मौजूदा बिजली पहुंचा पाना संभव नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि, भविष्य में इस उपकरण का इस्तेमाल और भी रोचक तरीकों से किया जा सकेगा। भारतीय वैज्ञानिकों का दम शोधकर्ताओं की मानें तो आने वाले समय में ये तकनीक ऊर्जा बनाने वाले स्मार्ट कपड़ों या खुद से चलने वाली दीवारों जैसी नई संभावनाओं के रूप में भी सामने आ सकती है। ये खोज साफ दिखाती है कि, भारतीय वैज्ञानिक अब ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर लोगों की जिंदगियों में बदलाव लाने का कारण है।

लाड़ली बहना योजना अपडेट: 28वीं किस्त का भुगतान, इस बार कितना मिलेगा और कब?

भोपाल  लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है. इसके तहत हर महीने लाड़ली बहनों के खाते में 1250 रुपए ट्रांसफर किए जाते हैं. पिछले महीने रक्षाबंधन के अवसर पर तो यह राशि बढ़ाकर 1500 रुपए ट्रांसफर की गई थी. वहीं, अब लाड़ली बहनों को सितंबर में मिलने वाली किस्त का इंतजार है. आइए जानते हैं कब आ सकती है लाड़ली बहना की सितंबर वाली किस्त और अब कब मिलेंगे 1500 रुपए… कब से मिलेंगे 1500 रुपए दरअसल, लाड़ली बहनों को मिलने वाली 1250 रुपए की राशि बहुत जल्द 1500 रुपए होने वाली है. इस बात का ऐलान खुद सीएम मोहन यादव ने किया है. उन्होंने कहा कि दिवाली के दौरान पड़ने वाले भाई दूज से उनकी राशि बढ़ा दी जाएगी. इसके बाद से उनके खाते में हर महीने 1500 रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे. सीएम मोहन ने दी जानकारी मध्यप्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग के सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो शेयर हुआ है. जिसमें सीएम मोहन ने इस बात की जानकारी दी है कि इस बार दीपावली 18 अक्टूबर को है यानी की एक महीने बाद लाड़ली बहना योजना की किस्त में 250 रूपये की बढ़ोत्तरी कर दी जाएगी. वहीं, कल बुंदलेखंड में एक कार्यक्रम के दौरान भी सीएम मोहन ने कहा था कि भाई दूज पर उन्हें 1500 रुपए दिए जाएंगे. कब आएगी सितंबर वाली किस्त लाड़ली बहनों के खाते में अक्टूबर से तो बढ़कर पैसे आएंगे ही, लेकिन इससे पहले उन्हें सितंबर में आने वाली किस्त का बेसब्री से इंतजार है. अब तक इस योजना की 27 किस्त जारी की जा चुकी है. वहीं, 28वीं किस्त आने वाली है. पिछने महीने  27वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले 7 अगस्त को जारी की गई थी. हालांकि, आमतौर पर हर महीने लाड़ली बहना की किस्त 10 से 15 तारीख के बीच आती है. ऐसे में संभावना है कि इस बार भी लाड़ली बहनों की किस्त इसी टाइम पर जारी हो सकती है. हालांकि अभी इसकी तारीखों को लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं है. हम यहां आपको संभावित तिथि के बारे में बताएं हैं.  दिवाली बाद बहनों को मिलेंगे हर माह 1500 रुपए मोहन सरकार ने ऐलान किया है कि दिवाली के बाद भाई दूज से योजना की राशि में 250 रु का इजाफा किया जाएगा । इसके बाद बहनों को हर माह 1250 की जगह 1500 रुपए मिलेंगे। इसके अलावा अगले तीन साल में 2028 तक 3000 रुपए बहनों के खाते में भेजने का लक्ष्य है। वर्तमान में योजना के तहत 1250 रूपये प्रति माह की राशि लाड़ली बहनों को दी जा रही है। अबतक 27 किस्तें बहनों के खाते में भेजी जा चुकी है और अब 28वीं किस्त का इंतजार है। आमतौर पर हर महीने की 10 से 15 तारीख के बीच किस्त जारी की जाती है, ऐसे में संभावना है कि इस बार भी इसी टाइम पर पैसे जारी हो सकती है। हालांकि अभी फाइनल तारीख को लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी सामने नहीं आई है। वर्तमान में लाड़ली बहना योजना में मिलते है हर माह 1250 रू     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से अगस्त 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 27 किश्तों का अंतरण किया गया है।प्रदेश की लाड़ली बहनों को अब तक 41 हजार करोड़ से अधिक का लाभ मिल चुका है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। लाड़ली बहना योजना में ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने 1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैं जिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष,     संचालक या सदस्य हो।जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।     जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन हो।जिनके परिवार के नाम पर कोई चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) रजिस्टर्ड हो। लाभार्थी सूची में ऐसे चेक करें अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

शिक्षकों को मिलेगा सम्मान, राज्यपाल और CM डॉ. यादव करेंगे पुरस्कार वितरण

श्रेष्ठ कार्य करने वाले शिक्षकों के लिए खास अवसर, राज्यपाल और CM डॉ. यादव करेंगे सम्मानित प्रशासन अकादमी के स्वर्ण जयंती सभागार में होगा गरिमापूर्ण आयोजन भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 5 सितम्बर शिक्षक दिवस पर भोपाल में होने वाले राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में श्रेष्ठ कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित करेंगे। साथ ही कक्षा एक से कक्षा 8 तक के 55 लाख विद्यार्थियों के बैंक खातों में शाला गणवेश की 330 करोड़ रूपये की राशि का अंतरण सिंगल क्लिक के माध्यम से किया जायेगा। समारोह शुक्रवार को प्रात: 10:30 बजे भोपाल के स्वर्ण जयंती सभागार, आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित होगा। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, जनजातीय कार्य, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन मंत्री कुवर विजय शाह, खेल एवं युवा कल्याण सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग और राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण श्रीमती कृष्णा गौर भी उपस्थित रहेंगी। स्कूल शिक्षा मंत्री ने दी बधाई स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिये चयनित शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा है कि जिन शिक्षकों का उनके श्रेष्ठ कार्यों की वजह से सम्मान हो रहा है, उनसे प्रदेश के अन्य शिक्षकों को भी प्रेरणा मिलेगी। सम्मानित होने वाले शिक्षक शिक्षक दिवस पर सम्मानित शिक्षकों में प्राथमिक, माध्यमिक श्रेणी के 8 और उच्चतर माध्यमिक श्रेणी के 6 शिक्षक शामिल हैं। गत वर्ष 2024 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को भी सम्मानित किया जायेगा। पुरस्कृत शिक्षकों को 25 हजार रुपये की सम्मान निधि, शॉल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया जायेगा। जिन प्राथमिक शिक्षकों को सम्मानित किया जायेगा, उनमें शासकीय प्राथमिक शाला बिसोनिया, गुना के जितेन्द्र शर्मा, शासकीय उ.मा.वि. क्रमांक-2, शाजापुर के दिलीप जायसवाल, ई.पी.ई.एस., भाटीवाड़ा, सिवनी के दिलीप कटरे, शासकीय प्राथमिक विद्यालय, बसिया, दमोह के श्रीकांत कुर्मी, शासकीय उ.मा.वि., रुस्तमपुर, खण्डवा की माध्यमिक शिक्षक श्रीमती श्रद्धा गुप्ता, शासकीय माध्यमिक विद्यालय, सतौआ, दमोह के मोहन सिंह गौंड, शासकीय माध्यमिक शाला, चंदेसरा, उज्जैन के अपूर्व शर्मा और शासकीय माध्यमिक शाला, उबालाद, अलीराजपुर के उच्च श्रेणी शिक्षक धनराज वाणी शामिल हैं। ये चयनित शिक्षक कक्षा-1 से 8 की कक्षाओं में विद्यार्थियों को पढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। कक्षा-9 से 12 में चयनित शिक्षक राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिये कक्षा-9 से 12 में पढ़ाने वाले चयनित शिक्षकों में माध्यमिक शिक्षक शासकीय उत्कृष्ट उ.मा.वि., बाग, जिला धार की श्रीमती राधा शर्मा, शासकीय उ.मा.वि., मेडिकल कॉलेज, जबलपुर के डॉ. नरेन्द्र कुमार उरमलिया, शासकीय उ.मा. संभागीय ज्ञानोदय विद्यालय, तिलीवार्ड, सागर के महेन्द्र कुमार लोधी, शासकीय उ.मा.वि., जावरा, रतलाम की उच्च माध्यमिक शिक्षक श्रीमती विनीता ओझा और माध्यमिक शिक्षक शासकीय हाई स्कूल, पांदा, जिला राजगढ़ डॉ. सरिता शर्मा को सम्मानित किया जायेगा। वर्ष 2024 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक वर्ष 2024 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों को राज्य स्तरीय समारोह में शॉल-श्रीफल, स्मृति चिन्ह और 5 हजार रुपये सम्मान निधि भेंट कर सम्मानित किया जायेगा। इनमें शासकीय माध्यमिक शाला लिधौरा, ब्लॉक बटियागढ़, दमोह के माधव प्रसाद पटेल और शासकीय हाई स्कूल, मंदसौर की शिक्षक श्रीमती सुनीता गोधा शामिल हैं। जिला स्तर पर भी होगा शिक्षक सम्मान समारोह प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित होगा। समारोह में जिले में श्रेष्ठ कार्य करने वाले शिक्षकों का सम्मान किया जायेगा। समारोह में गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहेंगे। पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिन पर शिक्षक दिवस पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन 5 सितम्बर को देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। शिक्षक दिवस उन समर्पित शिक्षकों का सम्मान और सराहना करने का दिन है, जिनका व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। शिक्षक मार्गदर्शक और प्रेरक की भूमिका निभाते हैं।  

भाजपा नेता की गिरफ्तारी: मैहर में शराब तस्करी का पर्दाफाश, कार और शराब बरामद

मैहर सतना जिला के कोठी मंडल के भाजपा युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष अभिनव गौतम को बुधवार की रात मैहर जिला के रामनगर थाना क्षेत्र में आठ पेटी अवैध शराब व कफ सिरप के साथ पकड़ गया है। यह पूरी कार्रवाई रामनगर थाना पुलिस द्वारा कि गई है। दरअसल रामनगर थाना पुलिस ने शराब तस्करी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें भाजपा युवा मोर्चा कोठी मंडल अध्यक्ष अभिनव गौतम भी शामिल है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक कार और आठ पेटी अवैध शराब जब्‍त की है। सभी आरोपितों को न्यायालय में पेश कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी को बचाने के लिए एक बड़े भाजपा नेता ने पुलिस पर भारी दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन रामनगर पुलिस ने दबाव को नजरअंदाज करते हुए कार्रवाई पूरी की। भाजपा नेत्री का बेटा व स्वयं भी युवा मोर्चा का पदाधिकारी पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में भाजपा नेत्री मधु गौतम का बेटा अभिनव गौतम भी है, जो वर्तमान में युवा मोर्चा कोठी मंडल अध्यक्ष के पद पर है। उसके साथ तीन अन्य साथी भी पकड़े गए हैं। इनमें राजेश गुप्ता नाम का व्यक्ति भी शामिल है, जिसके खिलाफ पूर्व में धारा 34/2 के तहत मामला दर्ज हुआ था, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों के तीखे आरोप वहीं, इस पूरे मामले पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भाजपा पर तीखे आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि भाजपा के बड़े नेताओं के संरक्षण में अपराध फल-फूल रहा है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि गिरफ्तारी के बावजूद भाजपा संगठन ने अब तक अपने युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष पर कोई कार्यवाही नहीं की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध शराब का कारोबार क्षेत्र में लगातार फल-फूल रहा है और इसमें कई प्रभावशाली लोग सीधे या परोक्ष रूप से शामिल हैं। पुलिस की कार्रवाई को लोगों ने सराहा है, लेकिन यह भी अपेक्षा जताई कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। 

सरकारी मेडिकल कॉलेज में काउंसलिंग पर रोक, आरक्षण के खिलाफ आदेश को समर्थन मिला

लखनऊ  इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच की दो सदस्य खंडपीठ ने चार सरकारी मेडिकल कॉलेज में नए सिरे से काउंसलिंग के निर्णय पर रोक लगा दी है। दो सदस्य खंडपीठ ने एकल पीठ के आरक्षण के खिलाफ के फैसले पर सहमति जताई है। न्यायमूर्ति राजन राय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने दो सितंबर को राज्य सरकार की ओर से दाखिल विशेष अपील पर सुनवाई पूरी करने के बाद आदेश सुरक्षित कर लिया था। मेडिकल कॉलेजों में 79 प्रतिशत से अधिक सीटें आरक्षित हो गई थीं, इसके खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने नए सिरे से काउंसलिंग कराने का फैसला सुनाया था। अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन व सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कालेजों में आरक्षण के संबंध में पारित शासनादेशों को रद करने के एकल पीठ के निर्णय के विरुद्ध राज्य सरकार की ओर से दाखिल विशेष अपील पर हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद आदेश सुरक्षित कर लिया था।   उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेज में नए सिरे से काउंसलिंग कराने के एकल पीठ के निर्णय पर दो सदस्य खंडपीठ ने रोक लगा दी है, हालांकि न्यायालय ने कहा है कि 50% से अधिक आरक्षण देने के विरुद्ध एकल पीठ का निर्णय सही है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार एक सप्ताह में इस बात का शपथ पत्र दे कि अगले सत्र से 50% की आरक्षण सीमा को लांघा नहीं जाएगा। न्यायालय ने आदेश दिया है कि एससी-एसटी वर्ग के जिन छात्रों को आरक्षण की सीमा से बाहर जाकर अम्बेडकर नगर, कन्नौज, जालौन व सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले दिए गए हैं, उन्हें इस वर्ग के लिए दूसरे सरकारी मेडिकल कोलेजों में अभी तक रिक्त चल रहे, 82 सीटों पर समायोजित किया जाएगा। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि सरकार अगले सत्र से 50% की आरक्षण सीमा को न पार करने सम्बन्धी शपथ पत्र नहीं देती, तो यह अंतरिम आदेश लागू नहीं होगा। अपीलार्थी की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता जे एन माथुर ने न्यायालय को बताया कि एकल पीठ के आदेश के बाद चारों जिलों के मेडिकल कालेजों में फिर से काउंसलिंग करनी पड़ेगी तथा इसका असर बाकी राज्यों के जिलों पर भी पड़ सकता है। पुनः काउंसलिंग से शीट पाए हुए अभ्यर्थी बाहर हो जाएंगे तथा उनका रास्ता और भी कालेजों में बंद हो जाएगा, क्योंकि बाकी जगह प्रवेश लगभग हो चुका है। एकल पीठ ने यह पाते हुए कि दिनांक 20 जनवरी 2010, 21 फरवरी 2011, 13 जुलाई 2011, 19 जुलाई 2012, 17 जुलाई 2013 व 13 जून 2015 के शासनादेशों के जरिए आरक्षित वर्ग के लिए 79 प्रतिशत से अधिक सीटें सुरक्षित की गई हैं, उक्त शासनादेशों को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने साथ ही उक्त कालेजों में आरक्षण अधिनियम, 2006 का सख्ती से अनुपालन करते हुए नए सिरे से सीटें भरने का आदेश दिया है। याची के अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने दलील दी थी कि उक्त मेडिकल कालेजों में राज्य सरकार के कोटे की कुल 85-85 सीटें हैं जबकि सिर्फ सात-सात सीटें अनारक्षित श्रेणी के लिए रखी गई हैं। वहीं, महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा व ट्रेनिंग की ओर से दलील दी गई थी कि इंदिरा साहनी मामले में शीर्ष अदालत यह स्पष्ट कर चुकी है कि 50 प्रतिशत की सीमा अंतिम नहीं है, इससे अधिक आरक्षण दिया जा सकता है। हालांकि, एकल पीठ इस दलील से सहमत नहीं हुई व कहा कि उक्त सीमा सिर्फ नियमों का पालन करते हुए ही बढ़ाई जा सकती है।

विपक्ष का सरकार पर दबाव: हरियाणा में टूटी फसल, मकान और दुकानों का मुआवजा चाहिए

चंडीगढ़ हरियाणा में विपक्ष ने वर्षा से खराब हुई फसल, टूटे मकान और दुकानों का मुआवजा देने की आवाज उठाई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि पंजाब के बाद लगभग पूरा हरियाणा भी अब बाढ़ और जलभराव की चपेट में आ चुका है। गांव, खेत, गलियां, सड़कें, हाईवे और शहर सब जलमग्न हो गए हैं। तमाम प्रभावित लोग सरकारी मदद के लिए गुहार लगा रहे हैं। सरकार को तुरंत विशेष गिरदावरी की प्रक्रिया शुरू कर फसलों को हुए नुकसान का 100 प्रतिशत मुआवजा देना चाहिए। साथ ही मकानों व दुकानों को हुए नुकसान का मुआयना कर जल्द मुआवजे का ऐलान करना चाहिए। हुड्डा ने कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार सक्रिय होकर बाढ़ प्रभावित स्थानों पर राहत कार्य शुरू कराए। अब तक जो भी कार्य किए जा रहे हैं, वे नाकाफी हैं, जिसके चलते जलभराव लगातार बढ़ता जा रहा है। भूपेंद्र हुड्डा ने चंडीगढ़ में जारी एक बयान में कहा कि मुश्किल की इस घड़ी में कांग्रेस के तमाम नेता, कार्यकर्ता, विधायक और सांसद लगातार अपनी क्षमतानुसार राहत कार्यों में लगे हुए हैं। ऐसे में अधिकारियों को चाहिए कि जो भी जमीनी जानकारी कांग्रेसजन प्रशासन तक पहुंचाएं, उसका तुरंत संज्ञान लेते हुए मुस्तैदी के साथ समाधान किया जाए। हुड्डा ने तमाम सक्षम लोगों से भी आगे आकर हाथ बंटाने की अपील की है। तमाम लोग आर्थिक या राहत सामग्री के तौर पर बाढ़ पीड़ित लोगों की मदद कर सकते हैं। मुश्किल की इस घड़ी में एक-दूसरे का साथ देना ही इंसानियत और भाईचारा है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में अधिक बारिश होने की संभावना है, जो चिंता बढ़ाने वाली बात है। इससे निपटने के लिए सरकार को बाढ़ प्रभावित इलाकों में जल निकासी के लिए वाटर पंप, मोटर और जनरेटर की व्यवस्था तुरंत करनी चाहिए। साथ ही लोगों के लिए खाने के सामान व पीने के पानी की सप्लाई सुनिश्चित करें और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की व्यवस्था की जाए।