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शिक्षकों ने दी चेतावनी, 5 सितंबर को पंजाब में सड़क पर उतरेंगे हजारों टीचर

लुधियाना पंजाब एवं चंडीगढ़ कॉलेज शिक्षक संघ (PCCTU) ने आज पंजाब सरकार के खिलाफ राज्यभर के 136 सहायता प्राप्त कॉलेजों में दो पीरियड का विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण पंजाब में उच्च शिक्षा अस्तित्व के संकट से गुजर रही है। लुधियाना जिले के 22 एडेड कॉलेजों में भी शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष डॉ. चमकौर सिंह ने बताया कि पिछले पांच महीनों से सरकार ने अनुदान जारी नहीं किया है, जिस कारण प्रोफेसरों को बिना वेतन के रहना पड़ रहा है। जिला सचिव डॉ. सुंदर सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश पर निकाली गई नियुक्तियों पर रोक लगाना सरकार का शिक्षा विरोधी रवैया दर्शाता है। वहीं, डॉ. रोहित ने आरोप लगाया कि अनुदान को 95% से घटाकर 75% कर दिया गया है, जिससे कॉलेजों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। डॉ. रमन शर्मा ने कहा कि सरकार सरकारी और सहायता प्राप्त कॉलेजों को खत्म कर निजी संस्थानों को बढ़ावा देना चाहती है, जबकि डॉ. वरुण गोयल ने 7वें वेतन आयोग को लागू न करने और ग्रेच्युटी न देने पर सवाल उठाए। शिक्षक संघ ने ऐलान किया है कि 27 से 29 अगस्त तक सभी कॉलेजों में दो घंटे का धरना दिया जाएगा। इसके बाद 2 सितंबर को जिला स्तरीय कैंडल मार्च और 5 सितंबर को मोहाली में राज्य स्तरीय धरना आयोजित किया जाएगा। 

श्रीराम मंदिर निर्माण में मध्यप्रदेश का भी रहा अहम योगदान

म.प्र. के तांबे का हुआ है उपयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की सराहना भोपाल  अयोध्या में बने भगवान श्रीराम के मंदिर में मध्यप्रदेश का भी योगदान है। यह योगदान इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है। इसकी जानकारी हाल में आयोजित माइनिंग कॉन्क्लेव में हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड के एमडी श्री संजीव कुमार सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि अयोध्या में बने मंदिर में मध्यप्रदेश की खदानों से निकले ताँबे का उपयोग हुआ है। हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड के चेयरमैन श्री सिंह ने कहा कि तांबा एक शाश्वत धातु है। भारत में तांबे के उपयोग का प्राचीन इतिहास रहा है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने 32 टन कॉपर राम मंदिर निर्माण के लिए दान दिया है। कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अपने उद्बोधन में इस तथ्य पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तांबे के साथ मानव जीवन का संबंध रहा है। यह संबंध सोने, चांदी से बढ़कर है। हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड द्वारा 70 हज़ार कॉपर स्ट्रिप और 775 कॉपर वायर की रॉडस् मंदिर में लगे पत्थरों को जोड़ने के लिए आपूर्ति की गई थी। हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड द्वारा सप्लाई की गई इस धातु में 99 प्रतिशत शुद्धता और इलेक्ट्रो रिफ़ाइंड कैटेगरी की है। यह ताँबे का शुद्धतम रूप है, जो हज़ारों साल तक पत्थरों को जोड़ने में कारगर सिद्ध होगा।  

रिटायर्ड कर्मचारी का बड़ा खुलासा: नहर मरम्मत में करोड़ों की लूट का आरोप

गरियाबंद जलसंसाधन अनुविभाग फिंगेश्वर में नहरों को क्षतिग्रस्त बता लाखो रुपए मरम्मत के नाम पर फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया है. यह खुलासा रोबा के रहने वाले कृषक याद राम साहू ने किया है. आरटीआई के तहत जानकारी लेकर जब किसान ने अन्य किसानों और अनुभविभाग अफसरों के साथ मौके पर जांच करने निकले तब फर्जीवाड़े का पता चला. किसान द्वारा निकाले गए दस्तावेज के मुताबिक फिंगेश्वर वितरक शाखा नहर और टेल एरिया में भसेरा, पसौद, सीरीकला, रोबा समेत 10 से ज्यादा गांव को सिंचाई करने वाले कुल 9 नहरों को कुल 56 जगह में 1600 मीटर से भी ज्यादा लंबाई का क्षतिग्रस्त बताया गया. इसकी मरम्मत के लिए 4600 प्लास्टिक बोरी में रेत भर कर क्षतिग्रस्त स्थलों का मरम्मत किया गया. मरम्मत से पहले स्थानों की साफ सफाई और अन्य मटेरियल के इस्तेमाल होने का जिक्र किया गया है. इसके एवज में कोरबा के डी क्लास ठेकदार विजय कुमार सहिस और इंडियन इंफ्रा बिल्ड नाम के फर्म को कुल 4.46 लाख का भुगतान किया गया. सारा कार्य वित्तीय वर्ष 2025 खत्म होने के ठीक 1 माह पहले 20 से 25 फरवरी के बीच कराया जाना दर्शाया गया है. किसान को मरम्मत कार्य में काम करने वाले मजदूरों का मस्टररोल नहीं दिया गया, जिन्हें 2 लाख से ज्यादा का भुगतान किया गया है. कार्य फर्जी था इसलिए मस्टरोल तक गायब कर दिया गया है. किसान याद राम ने विभाग के रवैया देख कर सत्यापित दस्तावेजों के साथ मामले की लिखिए शिकायत एसपी से किया है. सिंचाई सुविधा नदारद हुई तो खुली पोल, मरम्मत के नाम पर 1 करोड़ के बंदरबांट का दावा किसान याद राम 4 साल पहले तक सिंचाई विभाग के टाइम कीपर का काम करता था. रिटायरमेंट के बाद किसानी कार्य में लग गया. इस खरीफ सीजन में नहरों से सिंचाई सुविधा मिलना बंद हो गया था. किसानों ने फिंगेश्वर सिंचाई दफ्तर का दो बार घेराव कर दिया. मौजूदा एसडीओ वी. वी. मलैया ने नहर मरम्मत का प्रस्ताव डिविजन कार्यालय भेजा. जल्द मरम्मत का आश्वासन मिला पर मरम्मत के लिए कोई नहीं आए. ऐसे में रिटायर्ड कर्मचारी याद राम को गड़बड़ी की आशंका हुई. उन्होंने नहरों के मरम्मत की जानकारी आरटीआई के तहत मांगी. इसके बाद याद राम ने किसानों के साथ मिलकर अफसरों को माइनर नहरों का मुआयना कर क्षतिग्रस्त स्थान और मरम्मत के लिए भरे गए बोरों की तलाश भी की. इस दौरान ना तो टूट-फूट के कोई प्रमाण मिले और न ही मरम्मत के बोरे. किसान ने इस गड़बड़ी के बाद पूरे फिंगेश्वर उपसंभाग के नहरों के मरम्मत की जानकारी निकलनी चाही लेकिन फिर बड़ा खेल कर दिया गया. सब डिविजन कार्यालय से मरम्मत कार्यों के रिकॉर्ड गायब कर दिए गए. किसानों का दावा है कि अकेले फिंगेश्वर अनुविभाग में नहरों और अन्य सिंचाई योजनाओं के मरम्मत के नाम पर फरवरी 2025 में फर्जी बिल लगाकर 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का गबन किया गया है. किसानों को सच्चाई बताने वाला एसडीओ किए गए दरकिनार मार्च के पहले मरम्मत के बजट को खपाने राजिम के एसडीओ को एक माह के लिए स्पेशल प्रभार सौंपा गया था. मामला सामने आया तो पदस्थ एसडीओ मलैया ने किसानों को न केवल सच्चाई बताई, बल्कि पाई गई गड़बड़ी को लेकर डिविजन कार्यालय में पत्राचार किया. सब डिविजन से गायब मरम्मत कार्य के रिकॉर्ड को लेकर विभाग और एसपी तक पत्राचार कर दिया. पोल खुलते देख डिविजन के अफसरों ने मलैया को ही हटा दिया. हालांकि हाईकोर्ट से स्टे आर्डर लेकर फिर एसडीओ के प्रभार में मलैया मौजूद है, लेकिन उनसे वित्तीय प्रभार छीन लिया गया है. फिंगेश्वर के एसडीओ सिंचाई अनुविभाग वी वी मलैया का इस पूरे मामले पर कहना है कि किसानों ने जानकारी निकाली, उनकी मांग पर स्थल निरीक्षण किसानों के साथ किया गया. मरम्मत कार्य मौके पर नहीं किए गए. माइनर नहरों में इतना क्षतिग्रस्त संभव भी नहीं है, जितना लंबाई क्षतिग्रस्त में बताया गया है उसी तो नहरों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा. जांच के लिए डिविजन कार्यालय से मार्ग दर्शन मांगा गया है, जो अब तक अप्रप्त है.

सलीम की मौत के बाद कासगंज चंदन गुप्ता हत्याकांड में हुई बड़ी घटना

लखनऊ कासगंज के चर्चित चंदन गुप्ता हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दोषी सलीम की लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो गई। लखनऊ जिला कारागार के जेलर ने सलीम की मौत की पुष्टि की है। सलीम को इलाज के लिए लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में भर्ती कराया गया था, जहां पुलिस सुरक्षा में उसका इलाज चल रहा था। बुधवार को उसकी हालत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। सलीम, 2018 में कासगंज में तिरंगा यात्रा के दौरान हुई हिंसा में मारे गए चंदन गुप्ता की हत्या का शामिल था। एनआईए स्पेशल कोर्ट, लखनऊ ने सलीम को अन्य 27 दोषियों के साथ इस मामले में दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कोर्ट का फैसला आने के बाद सलीम ने अन्य दोषियों के साथ आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद से वह जेल में बंद था। गौरतलब है कि कासगंज में 26 जनवरी 2018 को तिरंगा यात्रा निकाली गई थी। चंदन गुप्ता अपने भाई विवेक गुप्ता और अन्य साथियों के साथ तिरंगा यात्रा में शामिल था। जब तिरंगा यात्रा कासगंज के तहसील रोड स्थित जीजीआईसी गेट के पास पहुंची, उसी दौरान विवाद हुआ। आरोप थे कि सलीम, वसीम और नसीम समेत कई लोगों ने रास्ता रोक लिया। जब चंदन ने आपत्ति जताई तो इससे हालात बिगड़ गए और पथराव होने लगा। तिरंगा यात्रा के दौरान गोलीबारी की भी घटना हुई। मुख्य आरोपियों में से एक, सलीम ने चंदन गुप्ता पर गोली चलाई, जिससे उसकी मौत हो गई। हिंसा के कारण शहर में अशांति फैल गई, जिसके कारण एक सप्ताह तक कर्फ्यू लगा रहा और इंटरनेट बंद रहा। मामले में करीब 6 साल की कानूनी लड़ाई के बाद चंदन के परिवार को जनवरी 2025 में न्याय मिला। एनआईए स्पेशल कोर्ट ने चंदन गुप्ता हत्याकांड में 28 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने दो लोगों को इस मामले से बरी भी कर दिया, क्योंकि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे।  

बाबा महाकाल की कृपा से सिंहस्थ-2028 पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ेगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उज्जैन में तीर्थाटन को दिया जायेगा बढ़ावा मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन में मिट्टी गणेश प्रतिमा वितरण कार्यक्रम में हुए शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बाबा महाकाल की कृपा से इस बार उज्जैन में सिंहस्थ-2028 पिछले सभी रिर्काड तोड़ेगा। उज्जैन में तीर्थाटन को बढ़ावा दिया जायेगा और उज्जैन के विकास में किसी प्रकार कि कमी नहीं आने दी जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को उज्जैन में लोकमान्य तिलक गणेश उत्सव महाआयोजन समिति द्वारा आयोजित मिट्टी की गणेश प्रतिमा वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को गणेश चतुर्थी की हार्दिक मंगलकामना दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के प्रारंभ में भगवान श्रीगणेश का पूजन-अर्चन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में श्रीगणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। रिद्ध‍ि सिद्धि दाता शुभ कार्य को सफल बनाते हैं, इसलिए हर मंगल कार्य के आरंभ में श्रीगणेश की वंदना अनिवार्य समझी गई है। हमारी प्रकृति का यही संदेश है कि घर-घर में मिट्टी के श्रीगणेश हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में स्वदेशी के वातावरण के साथ मिट्टी के गणेश के वितरण का उत्सव मनाया जा रहा है। यह हमारे लिए आनन्द का उत्सव है। भगवान की कृपा से देश के विकास के साथ प्रदेश का विकास हो रहा है, यह हमारे लिए गौरव की बात है। उज्जैन शहर का निरंतर सौन्दर्यीकरण कार्य किया जा रहा है। साथ ही सड़क निर्माण, चौड़ीकरण आदि कार्यों के साथ शीघ्र ही शहर में फ्लाईओवर का निर्माण किया जायेगा। पीथमपुर-इंदौर-उज्जैन त‍क मेट्रो ट्रेन भी चलेगी। गोपाल मंदिर चौक का शीघ्र विस्तारीकरण किया जायेगा। विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा ने स्वागत भाषण और कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मूर्ति वितरण कार्यक्रम में लगभग 300 मिट्टी से बनी मुर्त‍ियों का वितरण शहर की विभिन्न समितियों और संगठनों को किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विधायक श्री जैन, महापौर श्री मुकेश ट्टवाल, सभापति श्रीमती कलावती यादव, श्री संजय अग्रवाल आदि ने आत्मीय स्वागत किया और उन्हें श्रीगणेश की प्रतिमा भेंट की। कार्यक्रम में श्री विवेक जोशी, श्री रूप पमनानी, श्री रमेशचंद्र शर्मा, श्री सत्यनारायण खोईवाल, श्री विशाल राजोरिया, श्री शिवेंद्र तिवारी, श्री ओम जैन सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। संचालन श्री जगदीश पांचाल ने किया।

उज्जैन की आघ्यात्मिक धरोहर पूरे विश्व को दे रही है दिशा: केंद्रीय पर्यटन मंत्री श्री शेखावत

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उज्जैन देश की आत्मा है। देश की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र है और इस ऊर्जा का मूल आधार स्वयं बाबा महाकाल हैं। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल सम्पूर्ण चराचर जगत को गतिमान रखने वाली नैसर्गिक ऊर्जा के केंद्र हैं। उनके आशीर्वाद से ही यह शहर आज देश की धार्मिक आस्था और परम्पराओं के संवाहक के रूप में प्रसिद्धि पाकर “द बेस्ट रिलीजिएस एण्ड स्पिरिचुअल डेस्टिनेशन” बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन का यह गौरवशाली स्वरूप ऐसे ही नहीं बना। इसके पीछे एक लंबी कहानी है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा श्री महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद से उज्जैन शहर की पहचान, आकर्षण और आस्था विश्वव्यापी हो गए हैं। अब यहां देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक बड़ी संख्या में आ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को उज्जैन के होटल अंजुश्री में दूसरे ग्लोबल स्पिरिचुअल टूरिज्म कॉन्क्लेव 'रूहMantic' के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दीप प्रज्ज्वलन कर इस कॉन्क्लेव का विधिवत् शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत ने उज्जैन में कॉन्क्लेव के दौरान फेथ एंड फ्लो पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन काल गणना की नगरी है। आज भारत का समय है और पूरी दुनिया भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रही है। पहले दुनिया के जो देश भारत से प्रतियोगिता कर रहे थे, आज वे सभी खुद को भारत के अनुगामी हैं। उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण ने अनेक कलाएं और विद्या ग्रहण कीं। आत्म चिंतन के लिए भारत से अच्छा दुनिया में कोई स्थान नहीं है। आज देश की सीमाएं हो सकती हैं, लेकिन धर्म और संस्कृति की कोई सीमा नहीं हैं। भारतीय संस्कृति ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान तक फैली हुई है। उज्जैन में एक हजार बीघा जमीन पर बाबा महाकाल का मंदिर बना हुआ है। हम विभिन्न स्वरूपों में ईश्वर की आराधना करते हैं। श्रीआनंदपुर धाम में निरंकारी भाव से गुरु महाराज की भक्ति की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ईश्वर ने हमें प्रकृति के साथ मिलकर चलने की सीख दी है। भगवान की भक्ति के साथ शरीर की क्षमताओं का उपयोग करें। पर्यटन के साथ तीर्थाटन के माध्यम से जनकल्याण की कल्पना इस आयोजन के माध्यम से की गई है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारत में आध्यात्मिक पर्यटन को गति प्रदान करने की दृष्टि दी है। देवी अहिल्या बाई ने काशी में बाबा विश्वनाथ का मंदिर बनाया। उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने 2000 साल पहले मंदिर बनवाया था, जो बाबर के काल में गिरा दिया गया था। देश का पुराना संसद भवन मुरैना के मंदिर और नया भवन विदिशा के बीजापुर मंदिर के डिजाइन पर बना है, ये हमारे लिए गर्व की बात है। हमारे देवालय भी लोकतंत्र का आधार हो सकते हैं। उन्होंने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि इस कॉन्क्लेव में तिरुपति बालाजी ट्रस्ट, शिरडी साईंबाबा ट्रस्ट, काशी विश्वनाथ ट्रस्ट से भी प्रतिनिधि पधारे हैं। इनसे हमें मध्यप्रदेश को धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में और आगे ले जाने के लिए इन सभी के सुझाव और अनुभव भी प्राप्त होंगे। उज्जैन की आध्यात्मिक धरोहर वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक पर्यटन को दे रही है नई दिशा केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि उज्जैन की आध्यात्मिक धरोहर न केवल भारत की सांस्कृतिक धारा को समृद्ध कर रही है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा दे रही है। उन्होंने कहा कि पर्यटन नीति में हमने देश की सांस्कृतिक ताकत बढ़ाने वाले धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन केन्द्रों के विकास के लिए बड़े प्रावधान किए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन भारत की संस्कृति और पर्यटन को विश्व पटल पर नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि विश्व में अनेक संस्कृतियों का जन्म हुआ, लेकिन भारतीय संस्कृति आज भी जीवंत है। हमारी संस्कृति ने 2000 साल तक आक्रमण झेला, 200 साल की गुलामी तक झेली, लेकिन आज भी भारतीय संस्कृति समृद्ध है। आज से ढाई हजार साल पहले दुनिया में जब मानव अपना वजूद खोज रहा था, तब भारत में तीर्थाटन की परंपरा थी। उन्होंने बताया कि तीर्थाटन हमारे संस्कारों में हैं। उनकी दादी बैलगाड़ी से तीर्थाटन करने जाया करती थीं। केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने केरल से पर्सिया तक 24 हजार किलोमीटर की यात्रा कर भारतीय संस्कृति से दुनिया का परिचय कराया। उन्होंने कहा कि देश में ब्रिटिश काल में लेखकों ने भारतीय विविधता की अपने तरीके से व्याख्या की, परन्तु आज भी भारत एक और अखंड भारत है। इसका उदाहरण प्रयागराज महाकुंभ है, जहां हर मत, पंथ, संप्रदाय के लोग एक मंच पर आए और विश्व शांति का संदेश दिया। सैकड़ों साल पहले जब इंफ्रास्ट्रक्चर इतना डेवलप नहीं था, तब भी लोग केदारनाथ और बद्रीनाथ तीर्थाटन के लिए जाते थे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी है। उज्जैन में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। पहले जितने लोग साल भर में आते थे, उतने अब एक से डेढ़ हफ्ते में आ जाते हैं। पर्यटन संभावनाएं विकसित करने राज्यों के बीच चल रही है प्रतियोगिता केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज पर्यटन संभावनाएं विकसित करने के लिए राज्यों के बीच प्रतियोगिता चल रही है। मध्यप्रदेश हार्ट ऑफ इंक्रेडिबल इंडिया है। मध्यप्रदेश के पास टूरिज्म सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश ने अपने टूरिज्म सेक्टर को प्रापरली एक्सपलोर कर इस मामले में राजस्थान को भी पीछे छोड़ दिया है। श्री शेखावत ने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे प्रचीन परंपरा और विरासत है। देश में घरेलू पर्यटन बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आज देश सांस्कृतिक पुर्नजागरण से गुजर रहा है। भारतवासियों का देश के प्रति नजरिया बदल गया है। नई पीढ़ियों के बच्चे अब दूसरे देशों में जाने की इच्छा नहीं रखते हैं। हमारे देशवासियों ने अपनी परंपरा और संस्कृति पर गर्व करना शुरू कर दिया है। भारत बहुत जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। उन्होंने कहा कि … Read more

छत्तीसगढ़ में निवेश बढ़ाने पर सियोल में सीएम साय और ATCA प्रतिनिधिमंडल की विशेष वार्ता

छत्तीसगढ़ औद्योगिक नीति 2024–30 के अंतर्गत ICCK के साथ होगा ज्ञान व निवेश सहयोग रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने दक्षिण कोरिया प्रवास के दौरान सियोल में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सेंटर एसोसिएशन (ATCA) के चेयरमैन श्री ली जे जेंग एवं वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। ATCA एक सशक्त औद्योगिक नेटवर्क है, जिसमें आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, फार्मा और टेक्सटाइल क्षेत्र की 60 से अधिक प्रमुख कंपनियाँ शामिल हैं। मुख्यमंत्री साय ने ATCA प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार निवेशकों के लिए एक अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने श्री ली जे जेंग और उनके साथ आए वरिष्ठ अधिकारियों को आमंत्रित किया कि वे अपने आगामी भारत दौरे के दौरान छत्तीसगढ़ अवश्य आएँ और राज्य में उपलब्ध निवेश व सहयोग की संभावनाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन करें। ATCA ने छत्तीसगढ़ की कंपनियों के साथ बी2बी साझेदारी में रुचि दिखाई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी और एम्स जैसे राष्ट्रीय संस्थान मौजूद हैं, जो विश्वस्तरीय प्रतिभा उपलब्ध कराते हैं। राज्य का ‘प्लग एंड प्ले’ इंफ्रास्ट्रक्चर और सशक्त लॉजिस्टिक्स नेटवर्क छत्तीसगढ़ को ATCA के अनुसंधान एवं विकास केंद्रों और भारत में उनके विस्तार का स्वाभाविक हब बनाता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से विकसित हो रहा है और यहाँ उद्योग-अनुकूल नीतियाँ, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन, कुशल मानव संसाधन तथा मज़बूत बुनियादी ढाँचा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, फार्मा और टेक्सटाइल जैसे उभरते क्षेत्रों में ATCA कंपनियाँ यहाँ आकर निवेश करें और साझेदारी के नए आयाम स्थापित करें। इससे प्रदेश के युवाओं को बड़े पैमाने पर रोज़गार मिलेगा और स्थानीय उद्योगों को भी नई ताक़त मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने दक्षिण कोरिया प्रवास के दौरान सियोल में आयोजित छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में भाग लिया, जिसका आयोजन इंडियन चेम्बर ऑफ कॉमर्स इन कोरिया (ICCK) के सहयोग से किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए असीम संभावनाओं की धरती है। उन्होंने उल्लेख किया कि दक्षिण कोरिया भारत के शीर्ष तीन इस्पात निर्यात गंतव्यों में शामिल है और छत्तीसगढ़, देश का अग्रणी इस्पात उत्पादक राज्य होने के नाते, इस सहयोग को और गहरा करने तथा निवेश के नए अवसर प्रदान करने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संसाधनों से समृद्ध है, जो ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।  राज्य में प्रचुर मात्रा में लिथियम उपलब्ध है, जो ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) क्रांति और नई पीढ़ी के उद्योगों को गति देने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि  छत्तीसगढ़ वैश्विक ऊर्जा संक्रमण का स्वाभाविक केंद्र बन सकता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने ICCK को नॉलेज पार्टनर के रूप में शामिल करने की घोषणा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ औद्योगिक नीति 2024–30 के तहत तकनीक, स्किलिंग और वैश्विक सहयोग को एक नई दिशा दी जाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कोरिया की नवाचार क्षमता और छत्तीसगढ़ के संसाधनों के मिलन से विकास का एक नया युग लिखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रत्येक निवेशक को “सिंगल विंडो क्लियरेंस” से लेकर भूमि आवंटन, आवश्यक अनुमतियों और सहयोगी नीतियों तक हर स्तर पर सहयोग प्रदान कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दक्षिण कोरिया कंपनियों की भागीदारी से छत्तीसगढ़ के औद्योगिक परिदृश्य में नए अवसरों का सृजन होगा और दक्षिण कोरिया-भारत औद्योगिक सहयोग को एक नई ऊँचाई मिलेगी।

स्कूली बच्चों की परिवहन सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई

•    विद्यालयों के लिए आखिरी मौका पटना, पटना जिले में स्कूली बच्चों की परिवहन सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरतने वाले विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। पटना जिला परिवहन कार्यालय(डीटीओ) ने इसके पहले विद्यालयों को आखिरी मौका दिया है। डीटीओ ने विगत जुलाई माह में दो हजार से अधिक क्षमता वाले 1,140 विद्यालयों को बाल परिवहन समिति का गठन करने और वाहन संबंधी जानकारी साझा करने के संबंध में ई-मेल भेजा था। लेकिन, सिर्फ 85 विद्यालयों ने ही इसका जवाब भेजा है। शेष विद्यालयों की अनदेखी के बाद अब डीटीओ ने 1 सितम्बर से कार्रवाई शुरू करने का फैसला लिया है। पटना डीटीओ ने स्कूलों से वाहनों की संख्या (बस, मिनी बस, ओमिनी वैन, वैन इत्यादि), मालिक का नाम, कॉन्ट्रैक्ट की जानकारी और वाहन पंजीकरण नंबर मांगा था। इसके साथ ही दो हजार से अधिक संख्या वाले विद्यालयों में बाल परिवहन समिति के तहत एक परिवहन प्रभारी की नियुक्ति करने का निर्देश दिया गया था। यह कदम ‘विद्यालय वाहन परिचालन विनियम 2020’ के तहत उठाया गया है। बाल परिवहन समिति का गठन बाल परिवहन समिति के अध्यक्ष स्कूल के प्रधानाघ्यापक होंगे। समिति में दो अभिभावक, शिक्षक संघ के एक प्रतिनिधि, यातायात पुलिस निरीक्षक, मोटरयान निरीक्षक, शिक्षा विभाग के एक प्रतिनिधि और स्कूल बस मालिकों के एक प्रतिनिधि शामिल को भी रखना अनिवार्य होगा। स्कूल के परिवहन प्रभारी समिति के सदस्य सचिव होंगे। समिति का काम स्कूली वाहनों की मानक परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करना होगा, जिसके लिए हर तीन महीने में एक बैठक आयोजित होगी। पटना डीटीओ ने दिया आखिरी मौका पटना डीटीओ उपेन्द्र कुमार पाल ने विद्यालयों को कहा कि जिन स्कूलों ने गलत ई-मेल आईडी साझा किया है, वह तुरंत सुधारे करें। जानकारी साझा ना करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। स्कूली बच्चों की परिवहन सुरक्षा को गंभीरता से लें। स्कूली वाहनों के लिए मानक सरकार की ओर से स्कूल बस या अन्य स्कूली वाहनों के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं। •    वाहन स्कूल प्रबंधन, प्रधानाचार्य, निदेशक या अन्य पदाधिकारी के नाम पर पंजीकृत होना चाहिए। •    वाहन की बॉडी सुनहरे पीले रंग की हो, जिसपर स्कूल का नाम स्पष्ट अक्षरों में लिखा हो। •    किराए या लीज वाले वाहनों पर ‘ऑन स्कूल ड्यूटी‘ लिखना अनिवार्य। •    वाहन की अधिकतम गति सीमा 40 कि.मी. प्रति घंटा। •    वाहन में एक प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स, अग्निशामक यंत्र, जीपीए., व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन लगाना अनिवार्य होगा। •    वाहन में स्कलू बैग रखने की उचित व्यवस्था। •    दिव्यांग बच्चों लिए विशेष सुविधाएं। •    स्कूली बस में दो आपातकालीन गेट (एक दाहिनी ओर और दूसरा बस के पीछे) और बस की खिड़कियां ग्रिल युक्त होनी चाहिए।

रायपुर रेलवे स्टेशन पर शुरू हुई नई व्यवस्था, TTE करेंगे टिकट जारी

रायपुर रेलवे स्टेशन में अब आपको अनारक्षित टिकट (जनरल टिकट) लेने के लिए लंबी लाईनों में लगने की जरूरत नहीं है. क्योंकि रायपुर रेलवे स्टेशन में अब आपको टिकट काउंटर के स्टॉफ ही नहीं बल्कि टीटीई भी हाईटेक तरीके से टिकट देते हुए नजर आएंगे. रायपुर रेलवे स्टेशन में DRM ने 5 टीटीई स्टॉफ को मोबाइल यूटीएस टिकटिंग के उपकरण दिए. इस उपकरण के माध्यम से टीटीई सीधे यात्रियों को टिकट दे सकेंगे. हालांकि ये टिकट यात्री टिकट काउंटर के पास ही ले सकेंगे, उन्हें ये सुविधा ट्रेन के अंदर या प्लेटफार्म में उपलब्ध नहीं होगी. सीनियर डीसीएम (Sr.DCM) अवधेश त्रिवेदी का कहना है कि इस सुविधा का लाभ यात्रियों को मिलेगा और आने वाले समय में अनारक्षित केंद्र को आरक्षण केंद्र में मर्ज करने के निर्देश रेल मंत्रालय से मिले है. उन्होंने बताया कि अनारक्षित टिकट केंद्र की जगह आने वाले दिनों में वहां यात्री सुविधाओं के लिए एटीवीएम मशीनें भी लगाई जाएगी, जहां से भी अनारक्षित टिकट ले सकेंगे.

कृषि मंत्री ने हरियाणा विधानसभा को बताया धान फसल में वायरस की स्थिति

चंडीगढ़ हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने विधानसभा में बताया कि राज्य सरकार ‘सदर्न राइस ब्लैक-स्ट्रीक्ड ड्वार्फ वायरस’ (एसआरबीएसडीवी) को लेकर सतर्क है और कृषि वैज्ञानिक स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। राणा ने यह भी बताया कि किसानों को इस वायरस के प्रति जागरूक किया जा रहा है। कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए राणा ने मंगलवार को सदन को बताया कि प्रदेश में लगभग 40 लाख एकड़ में धान की बुआई हुई है, जिनमें से करीब 92,000 एकड़ में यह वायरस पाया गया है। उन्होंने बताया कि एसआरबीएसडीवी वायरस के संक्रमण से होने वाला रोग है जो धान की फसल को प्रभावित करता है और यह देश के कई धान उत्पादक क्षेत्रों में चिंता का विषय बना हुआ है। मंत्री ने कहा कि यह बीमारी ‘व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर’ (डब्ल्यूबीपीएच) नामक कीट के माध्यम से फैलती है, जो धान के पौधों का रस चूसकर वायरस को संक्रमित पौधों से स्वस्थ पौधों तक पहुंचाता है। राणा ने कहा कि जैविक खेती और ‘डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस’ (डीएसआर) के मामलों में इस वायरस से क्षति की कोई रिपोर्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसान कृषि वैज्ञानिकों की सलाह और सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार धान की बुआई करें तो ऐसी बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस वायरस के कारण संक्रमित पौधों की सामान्य वृद्धि रुक जाती है, उनकी ऊंचाई सामान्य से काफी कम रह जाती है, पत्तियां गहरा हरा रंग धारण कर लेती हैं, नई कोंपलों का विकास धीमा हो जाता है या रुक जाता है और जड़ें भूरी होकर अविकसित रह जाती हैं, जिससे पौधों की पानी और पोषक तत्व सोखने की क्षमता घट जाती है। मंत्री ने कहा कि राज्य में इस वायरस का पहला मामला खरीफ 2022 सीजन में सामने आया था। उस वर्ष कुछ ही मामले मिले थे, लेकिन चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू), हिसार और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से चलाए गए जागरूकता अभियानों और त्वरित कार्रवाई के चलते फसलों को बड़े नुकसान से बचा लिया गया। राणा ने बताया कि खरीफ 2023 और 2024 में इस वायरस का कोई प्रकोप सामने नहीं आया, जिसका श्रेय प्रभावी रोकथाम उपायों और किसानों में बढ़ी हुई जागरूकता को दिया गया। उनके अनुसार, खरीफ 2025 से पहले भी किसानों को सतर्क किया गया और एहतियात दोहराए गए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में यह बीमारी दोबारा उभरी और इसके पहले मामले कैथल जिले से सामने आए और बाद में अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, जींद और पंचकूला जिलों से भी मामलों का पता चला। राणा ने कहा कि इन क्षेत्रों के किसानों ने अपने खेतों में पौधों की असामान्य रूप से छोटी ऊंचाई की शिकायत की। इसके बाद एचएयू हिसार के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण किया, जिसमें सामने आया कि यह बीमारी सबसे अधिक हाइब्रिड धान की किस्मों में पाई गई, उसके बाद परमल (गैर-बासमती) और फिर बासमती किस्मों में भी इसका पता चला। मंत्री ने बताया कि यह समस्या मुख्य रूप से उन खेतों में देखी गई, जहां 25 जून से पहले धान की रोपाई की गई थी। उन्होंने कहा कि इस वायरस की पुष्टि के लिए एचएयू के वैज्ञानिकों ने संक्रमित पौधों के नमूने एकत्र किए और जांच की जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि पौधे ‘सदर्न राइस ब्लैक-स्ट्रिक्ड ड्वार्फ वायरस’ से संक्रमित थे। बचाव के उपायों की जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि इस वायरस से सुरक्षा के लिए एचएयू ने किसानों के लिए परामर्श जारी किया है।