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राज्य स्तर के बाद हर जिले में होगा पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन, हरियाणा सरकार का ऐलान

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार पुलिस विभाग में सुधार को लेकर लगातार प्रयासरत है। हरियाणा में राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण गठित किए जाने के बाद अब सरकार ने सभी जिलों में पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन करने का फैसला किया है। जिला स्तर पर गठित प्राधिकरण के समक्ष इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी की शिकायत की जा सकेंगी। वहीं सरकार की ओर से गठित राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण में महिला सदस्यों की नियुक्ति भी जल्द ही की जाएगी। गौरतलब है कि 1989 बैच के सेवानिवृत्त आइपीएस अधिकारी डॉ. आरसी मिश्रा को हाल ही में राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण का चेयरपर्सन और 2014 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ललित सिवाच को सदस्य बनाया गया है।   अब करीब 11 वर्षों के बाद जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण के गठन पर काम शुरू हो गया है। इससे आमजन इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों के खिलाफ शिकायत कर सकेंगे। जिला स्तरीय पुलिस कंप्लेंट अथारिटी का चेयरमैन सेवानिवृत्त जिला जज हो सकता है। सदस्यों के तौर पर सेवानिवृत्त आइएएस और आइपीएस अधिकारी नियुक्त किए जा सकते हैं।   राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण के पास 500 से अधिक शिकायतें लंबित हैं, जिन पर सुनवाई होनी है। इसके अलावा प्राधिकरण ने 70 मामलों में इंस्पेक्टर और उससे नीचे रैंक के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सुनवाई के बाद गृह विभाग को कार्रवाई के लिए लिख दिया है।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल से मुख्य सचिव ने की सौजन्य भेंट

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल से मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने सोमवार को राजभवन पहुंचकर सौजन्य भेंट की। राज्यपाल  पटेल का मुख्य सचिव ने पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया।    

डिप्टी कलेक्टर पर महिला आरक्षक का आरोप – बार-बार शारीरिक संबंध और तीन बार कराया गर्भपात

बालोद छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक महिला आरक्षक ने डिप्टी कलेक्टर पर शादी का झांसा देकर बार-बार शारीरिक संबंध बनाने, जबरदस्ती गर्भपात करवाने और आर्थिक शोषण करने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत में महिला ने यह बताया है कि उनका संबंध करीब आठ साल तक चलता रहा। इस दौरान उसने डिप्टी कलेक्टर को लाखों रुपये भी दिए। पीड़िता ने इस मामले की शिकायत डौंडी थाना में की है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। महिला आरक्षक और डिप्टी कलेक्टर की जान-पहचान डौंडी थाना में महिला आरक्षक ने शिकायत में बताया कि वर्ष 2017 में ग्राम अवारी, जिला बालोद निवासी दिलीप उईके के साथ वह डौंडी स्थित आईटीआई में पढ़ाई कर रही थी। एक साथ पढ़ाई करने के कारण हमारी बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। दिलीप ने उससे शादी का वादा किया और उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित करना शुरू किया। स्वजातीय होने के कारण और डौंडी में पढ़ाई के दौरान शारीरिक संबंध बनाने के कारण महिला मार्च 2017 में पहली बार गर्भवती हुई। जब उसने यह बात दिलीप को बताई, तो उसने कहा कि अभी वह पढ़ाई कर रहे हैं, पहले कुछ बन जाए और अपने पैरों पर खड़े हो जाएं, फिर शादी और बच्चे के बारे में सोचा जाएगा। इसके बाद उसने महिला को झांसा देकर जबरदस्ती दवा खिलाकर गर्भपात करवाया। अगस्त 2017 में महिला की पुलिस विभाग में नौकरी लग गई और दिलीप उईके ने आगे की पढ़ाई के लिए दुर्ग साइंस कॉलेज में एडमिशन लिया। शुरुआत में वह हॉस्टल में रह रहे थे, बाद में किराये पर मकान लेकर रहने लगे। महिला की नौकरी लग जाने के कारण और भविष्य में दिलीप के साथ शादी करने की आशा में उसने उसकी पढ़ाई, कोचिंग और अन्य खर्चों के लिए हर माह 4-5 हजार रुपये उसके खाते में ट्रांसफर की। इस दौरान जब भी दोनों की मुलाकात होती, तो दिलीप शादी की बात कहकर महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाता रहा। पीएससी परीक्षा में सफल होने के बाद वर्ष 2020 में दिलीप डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुआ और बीजापुर में पोस्टिंग हुई। नौकरी लगने के बाद जब महिला ने शादी के लिए कड़ा रुख अपनाया, तो उसने महिला को झांसा देते हुए कहा कि अभी नौकरी लगी है, जल्द ही अच्छे से सैटल हो जाऊं, फिर तुमसे शादी करूंगा और लगातार संबंध बनाते रहा। पीड़िता ने बताया कि फरवरी 2023 में दिलीप ने उसके नाम पर मारुति कार (बेजा) खरीदी, जिसका वाहन क्रमांक CG 24T3967 है। फरवरी 2024 में दिलीप ने उसके नाम से लोन की बकाया राशि अपने खाते से महिला के खाते में ट्रांसफर करवाकर कार को अपने नाम पर ट्रांसफर कर लिया। दिसंबर 2024 में वह महिला को अंडमान लेकर गया और 2 दिसंबर से 6 दिसंबर तक फिर से शारीरिक संबंध बनाया। लगभग एक माह बाद महिला को पता चला कि वह फिर से गर्भवती हूं। गर्भावस्था की जानकारी देने पर दिलीप ने मुझे बीजापुर बुलाया। जनवरी 2024 में महिला बीजापुर में दिलीप के शासकीय आवास में लगभग एक सप्ताह रही। उसी दौरान उसने शादी से पहले गर्भवती होने से समाज में होने वाली बदनामी का डर दिखाकर 13 जनवरी 2025 को जबरदस्ती गर्भपात की दवा खिलाई। दवा लेने के कारण महिला की तबीयत खराब हुई। जब महिला ने शादी की मांग की, तो दिलीप ने महिला को मंदिर में शादी का आश्वासन दिया। इसके बाद भी फरवरी और मार्च 2025 में बार-बार शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया और महिला को आर्थिक रूप से भी प्रभावित किया। इस दौरान महिला ने बैंक से लोन लेकर कुल 3,30,000 रुपये दिलीप के खाते में ट्रांसफर किए। मई 2025 में तीसरी बार गर्भवती होने पर भी उसने(दिलीप) शादी का झांसा देकर 15 मई 2025 को जबरदस्ती गर्भपात की दवा खिलाई। बार-बार फोन करने के बावजूद दिलीप ने जवाब नहीं दिया। 2 जून 2025 को दिलीप महिला को उसके घर छोड़कर गया और साफ-साफ कहा कि वह शादी नहीं कर सकता, तुम्हे जो करना है कर लो। इस मामले में महिला आरक्षक की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। इस मामले में सीएसपी दल्लीराजहरा चित्रा वर्मा ने बताया कि डौंडी थाना क्षेत्र के एक गांव से लड़की का आवेदन प्राप्त हुआ है। मामला दर्ज कर बयान लिया जा रहा है। आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। वहीं इस मामले में जब हमने बीजापुर में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर दिलीप उईके के मोबाइल नंबर ***35271 पर फोन लगाया तो उनकी तरफ से भी जवाब नहीं मिला।

शराब खरीदते समय मारपीट: चाकू व बोतल से वार, तीन घायल

रायपुर  गंजपारा शराब भट्ठी में शनिवार शाम शराब की लाइन में धक्का-मुक्की को लेकर विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि आरोपितों ने चाकू और बीयर की बोतल से हमला कर तीन लोगों को घायल कर दिया। पुलिस के अनुसार, छोटा रामनगर कबीर चौक निवासी तेजपाल चौहान शनिवार की शाम करीब पांच बजे अपने दोस्तों गितेश वर्मा और तोषण साहू के साथ गंजपारा शराब भट्ठी शराब लेने पहुंचा था। लाइन में लगे होने के दौरान गंजपारा निवासी अमन सोनी, लक्की गोप, दुर्गेश उर्फ दरवेश और तामू उर्फ तामेश्वर पहुंचे और पहले शराब लेने की बात कहकर तेजपाल को धक्का देकर पीछे करने लगे। मना करने पर आरोपितों ने तेजपाल को गालियां देते हुए चाकू से बांयी जांघ पर वार कर दिया, जिससे वह घायल हो गए और खून बहने लगा। बीच-बचाव करने आए तोषण साहू के सिर पर बीयर की बोतल मार दी, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई। वहीं, गितेश वर्मा को कांच के टुकड़े से मारा गया, जिससे उसे भी चोट आई है।  

भूपेश बघेल को SC से झटका, ED मामले में कानून का पालन अनिवार्य

रायपुर  सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट (पीएमएलए) की धारा 44 के तहत जांच करने के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारों को चुनौती देने वाली छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की याचिका पर विचार करने से सोमवार को इनकार कर दिया। देश की सबसे बड़ी अदालत ने उन्हें हाई कोर्ट जाने की नसीहत दी। जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बघेल की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि इस प्रावधान में कुछ भी गलत नहीं है। पीठ ने साथ ही कहा कि अगर इसका (धारा 44) दुरुपयोग हो रहा है तो पीड़ित पक्ष हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। पीठ की ओर से न्यायमूर्ति बागची ने कहा, 'दुर्भावना कानून में नहीं, बल्कि उसे दुरुपयोग में है।' कांग्रेस नेता ने पीएमएलए की धारा 44 के तहत ईडी को मूल शिकायत के बाद दर्ज की गई अन्य शिकायतों के आधार पर धन शोधन से संबंधित मामले में आगे की जांच के अधिकार को चुनौती दी थी। गौरतलब है कि ईडी छत्तीसगढ़ में बघेल के मुख्यमंत्री कार्यकाल में कथित तौर पर 2,000 करोड़ रुपए की शराब बिक्री से संबंधित धन शोधन के आरोपों की जाच कर रही है। केंद्रीय जांच एजेंसी का दावा है कि संबंधित मामले में अवैध रूप से कमीशन की वसूली की गई, जिससे सरकारी खजाने को काफी नुकसान हुआ।

एक पेड़ माँ के नाम अभियान में पर चल रहा है पौध रोपण कार्यक्रम

भोपाल  प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में 'एक पेड़ माँ के नाम 2.0' पौध रोपण अभियान 5 जून 2025 से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा चलाया गया है। अभियान में अब तक करीब 9 लाख 90 हजार पौध रोपित किये जा चुके हैं। लगाए गये पौधों को मिशन लाइफ पोर्टल पर प्रदर्शित भी किया गया है। प्रदेश में विद्यालयों के आस-पास और परिसर में पूरी योजना के साथ पौध रोपण के निर्देश दिये गये है। विद्यालयों के प्राचार्यों को लगाए गये पौधों की सुरक्षा के समुचित उपाय किये जाने के निर्देश दिये गए है। प्रदेश में 92 हजार से अधिक शासकीय स्कूल हैं जहां ये अभियान चलाया जा रहा है। पौध रोपण कार्यक्रम आगामी 30 सितम्बर तक विद्यालयों में ईको क्लब के माध्यम से संचालित होगा। मिशन लाइफ का गठन शासकीय विद्यालयों में क्लब फॉर मिशन लाइफ का गठन किया गया है। इसके अंतर्गत 15 हजार से अधिक ईको क्लब का गठन किया गया है। ईको क्लब के माध्यम से पर्यावरण से जुड़े विषयों, निबंध प्रतियोगिता और जल शक्ति अभियान गतिविधियाँ प्रमुख रूप से आयोजित की जा रही हैं। राज्य स्तरीय शालेय खेल कैलेण्डर जारी लोक शिक्षण संचालनालय ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिये शालेय खेल कैलेण्डर जारी किया है। कैलेण्डर में राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताएँ और स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के द्वारा राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं की तिथियाँ घोषित की गई हैं। इस संबंध में संभागीय संयुक्त संचालक लोक शिक्षण और समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किये गये है। खेल प्रतियोगिताएँ 8 सितम्बर से शुरू होंगी जो 10 दिसम्बर तक 2025 निर्धारित तिथियों के अनुसार चलेंगी। इन प्रतियोगिताओं में बॉक्सिंग, जूडो, व्हालीबॉल, फुटबॉल, टेनिस, किक्रेट, जिमनास्टिक, मलखंब, कराते, शतरंग, कबड्डी, तलवार बाजी, एथलेटिक्स, बास्केट वॉल, हॉकी के साथ अन्य खेल भी शामिल किये गये हैं। ये खेल प्रतियोगिताएँ आयु वर्ग के हिसाब से बालक और बालिकाओं के लिये होगी। राज्य स्तरीय जवाहर लाल नेहरू हॉकी प्रतियोगिता प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जवाहर लाल नेहरू हॉकी शालेय प्रतियोगिता की तिथियाँ भी तय कर दी गई है। जूनियर हॉकी टूर्नामेन्ट(15 वर्ष से कम आयु वर्ग) 8 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक, नेहरू बालिका हॉकी टूर्नामेंट (17 वर्ष से कम आयु वर्ग) 19 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक और नेहरू बालक हॉकी टूर्नामेंट (17 वर्ष से कम आयु वर्ग) 26 नवम्बर से 6 दिसम्बर 2025 तक तथा इससे जुड़ी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता सिवनी में 24 से 30 अगस्त 2025 तक होंगी। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किये गये हैं।  

55 हजार से अधिक बच्चे हुए गुम, MP के बाणगंगा और लसूड़िया में सबसे ज्यादा मिसिंग केस

भोपाल  मध्य प्रदेश में गुमशुदा बच्चों को लेकर एमपी विधानसभा से बड़ी जानकारी सामने आई है, जो हैरान करने वाली भी है. क्योंकि पिछले चार साल में मध्य प्रदेश से 55 हजार से ज्यादा बच्चों के गुमशुदा होने के आंकड़े मिले हैं. यह जानकारी कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री सचिन यादव के सवाल के जवाब में मिली है. सरकार की तरफ से यह माना गया है कि 2021 में 4 जुलाई से 2025 तक 59 हजार 365 बच्चे मध्य प्रदेश से गुमशुदा हुए हैं, जिनमें लड़कियों की संख्या ज्यादा है. यह आंकड़े हैरान करने वाले हैं, इनमें सबसे ज्यादा बच्चे भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों से गायब हुए हैं. जबकि इसमें कई दूसरे बड़े जिले भी शामिल हैं.  53 हजार को खोजा गया  बता दें कि मध्य प्रदेश में पिछले चार साल में 48,274 लड़कियां और 11,091 लड़के गुमशुदा हुए हैं. जिससे यह आंकड़े चौंकाने वाले जरूर है. हालांकि सरकार की तरफ से यह जानकारी भी दी गई जो बच्चें गुमशुदा हुए थे, उनमें से 53 हजार बच्चों को पुलिस ने खोज निकाला है, जो कुल बच्चों का 90 फीसदी है. लेकिन 6035 बच्चों की तलाश अभी भी पुलिस को जारी है.  इंदौर में तो वह हमारे पास बहुत अच्छे से रह रही थी। 8वीं के बाद उसने पढ़ाई नहीं की। मैं अपने बच्चे का एडमिशन कराने स्कूल गई थी। पिता काम पर गए थे। उसने कुछ बोला भी नहीं और चली गई। हमारी बेटी कहीं भी रहे, बस हमें ये पता चल जाए कि वह वहां ठीक है। अगर वह दूसरी जगह भी रहना चाहती है तो हमे कोई दिक्कत भी नहीं है। दूसरी बार उसे कहा ढूंढें, कहां जाएं, किससे पूछें। सबसे बड़ी दिक्कत तो ये है कि ढूंढें तो ढूंढें कहां। मोबाइल नंबर भी नहीं है। हमारे सामने किसी से बात भी नहीं करती थी…। प्रदेश में सबसे ज्यादा गुमशुदगी के मामले इंदौर से प्रदेश का ये पहला मामला नहीं है जब कोई बच्ची अचानक ही घर से लापता हुई हो और वर्षों तो उसका कोई सुराग न मिले। दरअसल, विधानसभा में कांग्रेस विधायक सचिन यादव द्वारा पूछे गए सवाल में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। विधायक यादव के सवालों पर मिले जवाब के मुताबिक मप्र में बीते साढे़ चार सालों में करीब 58 हजार से ज्यादा बच्चे गुम हुए हैं। इनमें 47 हजार बेटियां और 11 हजार बेटे गायब हुए हैं। बच्चों के गुम होने की जो जानकारी विधानसभा में दी गई है। उसमें ये सामने आया है कि सबसे ज्यादा बच्चे इंदौर से गायब हो रहे हैं। इंदौर शहर के जिन थानों से बच्चे गायब हो रहे हैं उनमें, बाणगंगा थाना क्षेत्र से सबसे ज्यादा 449 बेटियां गुम हुई हैं। दूसरे नंबर पर लसूडिया से 250, चंदन नगर से 220, आजाद नगर से 178, द्वारका पुरी से 168 बेटियां गुम हुई हैं। बच्चियों के गुम होने के मामले में धार जिला दूसरे नंबर पर है। सचिन यादव ने लगाया था सवाल  मध्य प्रदेश में बच्चों के गुमशुदा होने से जुड़ा सवाल कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने लगाया था. उन्होंने कहा 'चार साल में 60 हजार से ज्यादा बच्चे मध्य प्रदेश में गुमशुदा हुए हैं, जिसमें 48 हजार के करीब बेटियां हैं. अकेले भोपाल में 2500 से 3000 के बीच यह आंकड़े हैं. कांग्रेस विधायक ने कहा कि यह चिंता का विषय हैं और प्रशासनिक तंत्र पर भी सवाल खड़े करता है.  क्योंकि राजधानी भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में भी सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं.  भोपाल-इंदौर में सबसे ज्यादा मिसिंग  बता दें कि भोपाल और इंदौर में सबसे ज्यादा बच्चों के गायब होने की बात सामने आई है. भोपाल में 2,980 बच्चे गायब हुए हैं, जिनमें 1,804 लड़कियां और 1,174 लड़के शामिल हैं. वहीं इंदौर की बात की जाए तो यहां चार साल में 4,574 बच्चे गायब हुए हैं, जिनमें 3,560 लड़कियां और 1,014 लड़के शामिल हैं. जबकि दूसरे जिलों में भी यह आंकड़े बढ़े हैं. ऐसे में प्रदेश के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है.  बता दें कि कई गुमशुदा बच्चों की पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज हुई हैं. लेकिन विधानसभा के मानसून सत्र में निकलकर आई यह जानकारी हैरान करने वाली जरूर है. बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बीजेपी और कांग्रेस विधायकों के बीच इस बार तीखी तकरार दिख रही है.   जानिए इंदौर से लापता बच्ची के परिवार की हालत लसूडिया थाना क्षेत्र के राहुल गांधी नगर में रहने वाले एक परिवार की 16 साल की बेटी घर से अचानक लापता हो गई। परिवार ने इंदौर के साथ ही जिस गांव में वे रहते थे, वहां भी उसकी तलाश की, लेकिन बेटी का पता नहीं चला। हालत ये हो गई कि बेटी के गम में माता-पिता का खाना और काम पर जाना तक छूट गया था। उसे लापता हुए 1 महीना हो गए। मजबूरी में माता-पिता दोनों ही अपने-अपने काम पर जाने तो लगे, लेकिन उनकी आंखें हमेशा बेटी को तलाशती रहती हैं। पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से मना किया लापता बच्ची के पिता ने बताया कि उनकी बेटी की उम्र 16 साल है। उसके लापता होने का बाद उसे जहां-जहां संभव हो सकता था वहां उसकी तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। रिश्तेदारों के यहां भी पूछ लिया। जब उसका कहीं पता नहीं चला तो मैं पुलिस की मदद लेने के लिए थाने गया। अब जानिए किस जिले के किन 5 थाना क्षेत्रों से सबसे ज्यादा बेटियां गुम हुईं ग्वालियर जिला: (कुल गुम हुए बच्चे- 1857,लड़कियां-1268, लड़के-589) ग्वालियर जिले में सबसे ज्यादा ग्वालियर थाने से 106 बच्चियां गुम हुई हैं। दूसरे नंबर पर डबरा से 90, मुरार से 88 जनकगंज से 86, बहोड़ापुर से 72 बच्चियां गुम हुई हैं। शिवपुरी जिला: (गुम हुए कुल बच्चे- 960, बेटियां- 764 बेटे- 196) शिवपुरी जिले में पिछोर थाने से सबसे ज्यादा 88 बच्चियां गुम हुई हैं। कोतवाली थाना क्षेत्र से 80, करेरा से 55, बैराड़ से 49 कोलारस और देहात थाना क्षेत्रों से 46- 46 बेटियां गुम हुई हैं। गुना जिला; (कुल गुम हुए बच्चे: 795, बेटियां – 662, बेटे – 133) गुना जिले में सबसे ज्यादा 98 बच्चियां कैंट थाना क्षेत्र से गुम हुई हैं। दूसरे नंबर पर कोतवाली से … Read more

यूपी विधानसभा में CM योगी का बयान: सपा की करतूतों से हर कोई वाकिफ

लखनऊ  उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर करारा प्रहार किया. सदन में बोलते हुए उन्होंने कहा, "सपा और लोकतंत्र एक ही नदी के दो अलग-अलग छोर हैं. इन्हें लोकतंत्र पर भरोसा कब से हो गया? लोकतंत्र की बात करना इन्हें शोभा नहीं देता. संभल में इन्होंने क्या किया, ये सबको पता है. संभल हो, बहराइच हो या गोरखपुर, सपा की करतूतों से सब वाकिफ हैं. इन्होंने अपने कार्यकाल में कुछ नहीं किया. अगर एनडीए सरकार विकास करना चाहती है, तो आपको (समाजवादी पार्टी) बुरा लग रहा है… हम पूरे प्रदेश के व्यापारियों को साथ लेकर काम कर रहे हैं." मुख्यमंत्री योगी ने आगे कहा कि सपा शासनकाल में व्यापारियों पर गुंडा टैक्स लगाया जाता था. इसी वजह से व्यापारी आपसे नाराज़ हैं और समाजवादी पार्टी को इसका खामियाजा बार-बार भुगतना पड़ रहा है. व्यापारियों के विकास के लिए कदम उठाने के बजाय इन्होंने (समाजवादी पार्टी ने) उनके रास्ते में रोड़े ही अटकाए हैं. समाजवादी पार्टी से ये उम्मीद नहीं की जा सकती कि वो सुरक्षा की बात करेगी और अच्छे विकास का समर्थन करेगी." वहीं, मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री ने कहा था- "इस मानसून सत्र के दौरान बाढ़, जलभराव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी. स्वास्थ्य, शिक्षा और इन सभी मुद्दों पर सरकार ने पिछले 8.5 वर्षों में जो कुछ भी किया है, उस पर भी चर्चा होगी. विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के विजन को लेकर 13-14 अगस्त को 24 घंटे की चर्चा होगी. चर्चा के बाद, हम सदन में एक विस्तृत कार्ययोजना की भी घोषणा करेंगे कि कैसे सरकार नीति आयोग के मार्गदर्शन में विशेषज्ञों की मदद से इस विजन डॉक्यूमेंट में आम जनता के साथ-साथ हर वर्ग के नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करेगी और उस कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए, सरकार अगले 25 वर्षों की कार्ययोजना के साथ अपना विजन सदन के पटल पर रखेगी." सपा ने किया प्रदर्शन  वहीं, विधानसभा सत्र की शुरुआत के साथ ही विपक्ष ने जमकर प्रदर्शन किया. सपा विधायकों ने विधानसभा के गेट पर खड़े होकर नारेबाजी की. उन्होंने बैनर-पोस्टर आदि के जरिए सरकार पर हमला बोला. इस बीच प्रश्नकाल में विपक्ष के हंगामे के चलते स्पीकर सतीश महाना ने 15 मिनट के लिए हाउस को स्थगित कर दिया.   दरअसल, सदन शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने खुद गोरखपुर में व्यापारियों से मिलने के लिए पुलिस द्वारा रोके जाने का मुद्दा उठाया, इसके अलावा बहराइच और संभल में ना जाने को लेकर भी सीएम योगी के सामने सवाल रखा. इसके जवाब में सीएम योगी ने पूरी समाजवादी पार्टी को ही लपेट लिया और उसपर तीखा हमला बोला.  

मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा में दिखे अनोखे नजारे, सदस्यों का निराला अंदाज, सदस्यों ने दिखाए अजब-गजब रूप

लखनऊ  उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र आज 11 अगस्त से शुरू हो चुका है, ये सत्र 16 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान सत्ता पक्ष की ओर से कई अहम विधायी मुद्दों पर चर्चा की तैयारी की गई है तो वहीं विपक्ष की ओर से भी सत्ता पक्ष को घेरने की पूरी तैयारी है। इस बार यूपी विधानसभा का सत्र बेहद खास होने जा रहा है, एक दिन सदन लगातार 24 घंटे तक चलेगा। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र 2025 की शुरुआत से पहले दिन विधान भवन प्रांगण में सदस्य विभिन्न अंदाज में दिखे। समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने पोस्टर के साथ विरोध जताना शुरु किया तो भारतीय जनता पार्टी के सदस्य भी उनको देने उतरे। विपक्षी दल के सदस्यों ने किया हंगामा विधान भवन प्रांगण में सोमवार को समाजवादी पार्टी के साथ विपक्षी दल से सदस्यों ने हंगामा शुरु किया गया तो भारतीय जनता पार्टी के सदस्य भी उनके विरोध में सामने आ गए। मानसून सत्र के पहले दिन सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों में पोस्टर वार होने लगा। सदन में और विधानसभा से बाहर मुख्य द्वार पर प्रतिपक्ष में सपा विधायक नारेबाजी और हंगामा करते रहे। निराले अंदाज में विधानसभा पहुंचे सदस्य समाजवादी पार्टी के विधानसभा और विधान परिषद सदस्य सोमवार को विधान भवन में विभिन्न रंग रूप में दिखे। कोई काले कपड़े पहने था तो कोई अलग स्टाइल के कपड़े धारण करके आया था। किसी ने तिरछी टोपी पहनी थी तो कोई अंगौछा धारण करके सरकार का विरोध कर रहा था। विधायक अतुल प्रधान का अलग अंदाज मेरठ की सरधना सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान का एक अलग अंदाज देखने को मिला। सपा विधायक आज कांवड़ लेकर विधानसभा परिसर पहुंचे। इस कांवड़ में एक तरफ लिखा था ‘हमें चाहिए पाठशाला’ और दूसरी तरफ था- ‘हमें नहीं चाहिए मधुशाला’। उत्तर प्रदेश में गांवों में बेसिक शिक्षा के स्कूल बच्चों की नींव हैं। स्कूल मर्जर पर उठाए सवाल अतुल प्रधान ने इस दौरान यूपी में स्कूल मर्जर को लेकर सवाल उठाए और कहा कि सरकारी स्कूलों को बंद करने का नियम किसने बनाया है। 2019 में पहले बंद करने का काम किया। आखिर सरकारी स्कूलों में कौन पढ़ता है। यहां गरीब-मजदूर छोटा-मोटा व्यापार करने व्यापार करने वालो के बच्चे पढ़ते हैं। A फॉर अखिलेश व D फॉर डिम्पल के लगे पोस्टर मानसून सत्र के पहले दिन पोस्टर वार देखने को मिला। सपा की पीडीए पाठशाला पर भाजपा हमलावर हुई। भाजपा एमएलसी व प्रदेश महामंत्री सुभाष यदुवंश ने भाजपा मुख्यालय के बाहर समाजवादी पार्टी के दफ्तर के बाहर पोस्टर लगाया। इसमें पीडीए पाठशाला में A फॉर अखिलेश व D फॉर डिम्पल पढ़ाने पर माफी मांगने को कहा। पोस्टर में लिखा सपा के पीडीए पाठशाला का काला सच।

बस्तर दशहरा की तैयारी तेज, भूमिगत बिजली लाइन से रथ परिक्रमा मार्ग होगा जगमग

जगदलपुर बस्तर के विश्व प्रसिद्ध दशहरा पर्व में अब रथ परिक्रमा मार्ग अंधेरे में नहीं, बल्कि रोशनी से जगमगाएगा. 07 करोड़ 16 लाख रुपये की लागत से भूमिगत विद्युत लाइन बिछाने के बहुप्रतीक्षित कार्य का आज टाऊन हॉल स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार में भूमिपूजन किया गया. इस कार्य के तहत सिरहासार चौक से लालबाग आमागुड़ा चौक तक भूमिगत केबल डाली जाएगी, जिससे दशहरा के दौरान रथ परिक्रमा मार्ग पर बिजली कटने की समस्या हमेशा के लिए खत्म होगी. रथ परिक्रमा के ऐतिहासिक मार्ग दंतेश्वरी मंदिर, सिरहासार चौक, गोलबाजार, टेकरी हनुमान मंदिर, बाहर-भीतर रैनी, स्टेट बैंक चौक, सिटी कोतवाली, लालबाग और कुम्हड़ाकोट अब निरंतर बिजली सप्लाई के साथ रथ के भव्य संचालन के साक्षी बनेंगे. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव ने बताया कि यह बस्तरवासियों की वर्षों पुरानी मांग थी, जिसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वीकार कर स्वीकृति प्रदान की. उन्होंने विभाग को समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि इस वर्ष के दशहरा पर्व में ही लोग बिना रुकावट रोशनी का आनंद ले सकें. महापौर संजय पांडे ने इसे जगदलपुर के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम बताया और कहा कि इस परियोजना से न केवल दशहरा की गरिमा बढ़ेगी, बल्कि शहर की आधारभूत सुविधाओं में भी स्थायी सुधार होगा. भूमिपूजन कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, निगम अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति ने इस पल को और खास बना दिया. बस्तर दशहरा की सांस्कृतिक भव्यता में यह परियोजना अब नई रोशनी और नई ऊर्जा का संचार करेगी.