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गर्मी की वापसी! अगस्त की शुरुआत सूखी, एमपी में थमी बारिश

भोपाल  सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि अभी एक मानसून ट्रफ, एक अन्य ट्रफ और एक साइक्लोनिक सकुर्लेशन सिस्टम की एक्टिविटी है, लेकिन प्रदेश में इसका कोई असर नहीं है। इस वजह से भारी बारिश का दौर थमा हुआ है। 10 अगस्त तक ऐसा ही मौसम बना रहेगा। कहीं-कहीं हल्की बारिश जरूर होगी। शिवपुरी में हल्की बारिश, खजुराहो में पारा 35 डिग्री पर पहुंचा बुधवार को शिवपुरी में ही हल्की बूंदाबांदी हुई। दूसरी ओर, छतरपुर के खजुराहो में पारा 35 डिग्री पर पहुंच गया। ग्वालियर, रतलाम, श्योपुर, उज्जैन, ग्वालियर, दमोह, नौगांव, रीवा, सतना, सिवनी, उमरिया में पारा 33 डिग्री या इससे अधिक दर्ज किया गया। वहीं, नर्मदापुरम, जबलपुर, मंडला, सीधी, टीकमगढ़ में 34 डिग्री के पार रहा। भोपाल में अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री दर्ज किया गया। दो महीने में गिरा 28 इंच, अगस्त में 0.7 इंच ही मौसम विभाग के अनुसार, 1 जून से 31 जुलाई तक प्रदेश में औसत 28 इंच बारिश हो गई, लेकिन 1 से 6 अगस्त के बीच सिर्फ 0.7 इंच पानी ही गिरा। हालांकि, यह कुल कोटे की 77% है। वहीं, अब तक 40 प्रतिशत बारिश ज्यादा हो चुकी है। दूसरे सप्ताह में होगी तेज बारिश अगस्त के दूसरे सप्ताह में तेज बारिश का दौर शुरू होगा, जो आखिरी तक चलता रहेगा। ऐसे में बारिश का कोटा अगस्त में ही पूरा हो जाएगा। हालांकि, अब तक ग्वालियर समेत 9 जिलों में कोटा पूरा हो चुका है, लेकिन इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों की तस्वीर बेहतर नहीं है। पूर्वी हिस्से यानी, जबलपुर, सागर, शहडोल और रीवा संभाग में औसत से 45% और पश्चिमी हिस्से यानी, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में 36% बारिश अधिक हुई है। जुलाई में बने थे बाढ़ के हालात जुलाई में प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ के हालात बने थे। खासकर पूर्वी हिस्से यानी- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में मानसून जमकर मेहरबान रहा। आखिरी दिनों में रायसेन में बेतवा ने विकराल रूप लिया। खेत-मंदिर और पुल डूब गए। वहीं, डैम ओवरफ्लो हो गए। गुना में सबसे ज्यादा पानी गिरा, इंदौर सबसे पीछे इस बार सबसे ज्यादा पानी गुना में गिरा है। यहां 45.8 इंच बारिश हो चुकी है। निवाड़ी में 45.1 इंच, मंडला-टीकमगढ़ में 44 इंच और अशोकनगर में 42 इंच के करीब बारिश हो चुकी है।

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने केंद्र सरकार की नई पहल, मिलेगी डबल सब्सिडी

केन्द्र सरकार की अभिनव पहल प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना’, केन्द्र और राज्य से मिल रही सब्सिडी  प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना: केंद्र-राज्य की संयुक्त सब्सिडी से बढ़ेगा सोलर अपनाने का रुझान सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने केंद्र सरकार की नई पहल, मिलेगी डबल सब्सिडी प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत सोलर पैनल पर केंद्र और राज्य की विशेष रियायत सरकण्डा निवासी शशांक दुबे का बिजली बिल हुआ शून्य  बिलासपुर प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना एक ऐसी योजना है जिसमें सौर ऊर्जा के माध्यम से घरों तक रोशनी पहुंचाई जा रही है। योजना का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बिजली के लिए आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत हितग्राहियों को केन्द्र सरकार की ओर से 78 हजार रूपए और राज्य सरकार द्वारा 30 हजार तक की सब्सिडी दी जा रही है साथ ही प्रतिमाह 300 यूनिट फ्री बिजली का भी प्रावधान है। योजना के तहत अरविंद नगर सरकण्डा निवासी श्री शशांक शेखर दुबे ने अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाया है जिससे हो रहे बिजली उत्पादन से अब उन्हें महंगे बिजली के बिल से राहत मिल रही है और उनके घर का बिजली बिल शून्य हो गया है। इस महत्वपूर्ण योजना के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का आभार जताया है।     अरविंद नगर सरकण्डा निवासी श्री शशांक शेखर दुबे ने बताया कि जब से उन्होंने अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाया है, उनके घर का बिजली बिल शून्य हो गया है। सोलर पैनल के जरिए छत पर हो रहे बिजली उत्पादन से उनकी प्रतिमाह बिजली पर होने वाले खर्च की बचत हो रही है। श्री दुबे ने बताया कि उनकी छत पर 5 किलोवाट का सोलर पैनल लगा है, जिससे हो रहे बिजली उत्पादन से न केवल प्रतिमाह आने वाले बिजली बिल की अब चिंता नहीं रही, वहीं वे उत्पादक के रूप में भी बिजली की सप्लाई भी कर रहे हैं जो गर्व की बात है। सोलर पैनल लगवाने के बाद उनके घर का बिजली बिल शून्य हो गया है। उन्होंने बताया कि 5 किलोवाट सोलर पैनल लगवाने पर उन्हें लगभग 2 लाख की लागत आई है, जिसमें से केन्द्र सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में 78 हजार रूपए प्राप्त हो गए हैं और राज्य सरकार की ओर से भी जल्द ही 30 हजार रूपए की सब्सिडी मिलने वाली है।     उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत केवल 1 बार निवेश करना है जिसके बाद 25 वर्षाे तक बिजली की आपूर्ति होती रहेगी। लंबे समय के लिए यह एक बेहद किफायती योजना है जिसके लिए बैंक द्वारा कम ब्याज दर पर ऋण की भी सुविधा दी जाती है। उन्होंने बताया कि एक बार सोलर पैनल लगवाने के बाद इस पर किसी प्रकार का मेंटेनेन्स खर्च नहीं है और पैनल लगाने वाली कंपनी द्वारा 5 साल तक निःशुल्क सविर्सिंग की सुविधा दी जाती है। उन्होंने कहा कि यह  पर्यावरण की दृष्टि ये बेहद उपयोगी है। इस माध्यम से हम सौर ऊर्जा कर उपयोग कर बिजली का उत्पादन कर पा रहे हैं, जो ग्रीन एंनर्जी को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वह इस योजना को अपनाकर सौर ऊर्जा का उपयोग करते हुए बिजली के लिए आत्मनिर्भर बनें और पर्यावरण संवर्धन में अपना योगदान दें।     उल्लेखनीय है कि पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत शासन द्वारा शहरी एवं ग्रामीण घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को अपने घरों की छतों पर रूफ टॉप सोलर प्लाण्ट स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उक्त स्थापित प्लाण्ट नेट मीटरिंग द्वारा विद्युत ग्रिड से जुड़ेगा जिससे उपभोक्ता द्वारा अपनी खपत से अधिक उत्पादित बिजली ग्रिड में सप्लाई हो जाती है। इससे न केवल उपभोक्ता के घर का बिजली बिल शून्य हो जाता है, बल्कि ग्रिड में दी गई बिजली के एवज में अतिरिक्त आमदनी भी मिल जाती है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत प्रति माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान की जा रही है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से अधिक आय, कम बिजली बिल और नवीन रोजगारों का सृजन होगा तथा नवीनीकृत ऊर्जा स्त्रोत के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। शासन द्वारा इस योजना में 30 हजार रूपये से लेकर 78 हजार रूपये तक अनुदान भी दिया जाता है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए उपभोक्ता पीएम सूर्यघर डॉट जीओव्ही डॉट इन वेब पोर्टल अथवा पीएम सूर्यघर एप्प में पंजीयन करा सकते हैं। रेहाना/60/1297

रायपुर बैठक में सीएम साय का निर्देश – गुणवत्तापूर्ण कार्य समय सीमा में पूरे हों

रायपुर : अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों को गंभीरता से लेकर पूरी गुणवत्ता के साथ समय सीमा में पूर्ण कराएं कलेक्टर्स : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों को गंभीरता से लेकर पूरी गुणवत्ता के साथ अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का बजट 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ किया गया अनुसूचित जाति वर्ग के पांच युवाओं को हर साल पायलट बनाने दी जाएगी आर्थिक सहायता गिरौधपुरी धाम के विकास के लिए 2 करोड़, अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के कोचिंग के लिए 50 लाख रुपए की दी गई स्वीकृति रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज जांजगीर-चांपा जिले के जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की बैठक में प्राधिकरण के बजट को 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपये करने की स्वीकृति दी गई। मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों को सभी कलेक्टर्स गंभीरता से लें और उन्हें उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अब प्राधिकरण की बैठक हर वर्ष समय पर आयोजित होगी और कार्यों की गहन समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संविधान की मंशा के अनुरूप अनुसूचित जाति समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक उत्थान के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए हम बाबा गुरु घासीदास जी के ‘मनखे-मनखे एक समान’ के संदेश को आत्मसात कर समाज में सम्मान और समानता की भावना को सशक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचे, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जांजगीर-चांपा जिले को इस बैठक के लिए विशेष रूप से इसलिए चुना गया क्योंकि यह अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य अपनी स्थापना के 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, और अब समय आ गया है कि हम विकास की दिशा में नए कीर्तिमान स्थापित करें।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की संकल्पना के अनुरूप राज्य में विकास के कार्य हुए हैं। अनुसूचित जाति समाज के समुचित विकास के लिए प्राधिकरण एक सशक्त माध्यम है, जिसके माध्यम से सरकार ठोस प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने गिरौधपुरी धाम के विकास के लिए 2 करोड़ रुपये, अजा वर्ग के विद्यार्थियों हेतु कोचिंग व्यवस्था के लिए 50 लाख रुपये, प्रत्येक वर्ष अनुसूचित जाति वर्ग के 5 युवाओं को पायलट प्रशिक्षण हेतु सहायता, तथा जोड़ा जैतखंभ के निर्माण में सीमेंट के साथ-साथ लकड़ी के उपयोग हेतु राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। साथ ही, दिल्ली में संचालित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में सीट संख्या बढ़ाकर 200 करने की जानकारी दी और विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु इसका लाभ लेने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने आगामी समय में सभी जिला मुख्यालयों में 'नालंदा परिसर' के निर्माण की भी बात कही। मुख्यमंत्री साय ने बैठक के दौरान प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों के वर्षों से लंबित रहने पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही प्राधिकरण के कार्यों की राशि कम हो, लेकिन उनका सामाजिक महत्व अत्यंत बड़ा है। इन कार्यों का समय पर पूर्ण न होना चिंता का विषय है। बैठक को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अनुसूचित जाति समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की सोच समाज के वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में स्पष्ट है। उन्होंने सभी लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए और सभी समाज को साथ लेकर छत्तीसगढ़ के समग्र विकास का संकल्प दोहराया। अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब ने मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में समाज के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों हेतु आभार प्रकट किया। उन्होंने गिरौधपुरी धाम में रोपवे निर्माण, मेला आयोजन के दौरान बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, जोक नदी के पास स्नान हेतु आवश्यक व्यवस्था, ठहरने की सुविधा, जोड़ा जैतखंभ में लकड़ी के उपयोग, बाराडेरा धाम में ऐतिहासिक तालाब का संरक्षण और सौंदर्यीकरण, विद्यार्थियों के लिए स्मार्ट क्लास की व्यवस्था जैसी मांगें बैठक में रखीं। उन्होंने बजट वृद्धि और मांगों की स्वीकृति के लिए भी आभार व्यक्त किया। बैठक में प्राधिकरण के स्वरूप, कार्यक्षेत्र, अनुमोदित कार्यों की समीक्षा, बजट प्रावधानों की जानकारी, एवं वित्तीय वर्ष 2020 से 2025 तक स्वीकृत कार्यों की प्रगति सहित नागरिक सुविधाओं, सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों, और शैक्षणिक सुविधा विस्तार जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं प्राधिकरण सदस्यों के प्रस्तावों के आधार पर 49 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के विकास एवं हितग्राही मूलक कार्यों का अनुमोदन किया गया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब, मंत्री दयाल दास बघेल, लखन लाल देवांगन, श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, टंकराम वर्मा, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, विधायक पुन्नूलाल मोहले, डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, दिलीप लहरिया, श्रीमती शेषराज हरवंश, श्रीमती उतरी गणपत जांगड़े, श्रीमती कविता प्राण लहरे, श्रीमती हर्षिता स्वामी बघेल सहित रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग संभाग के आयुक्त, आईजी, एवं 17 जिलों के कलेक्टर उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि अनुसूचित जाति प्राधिकरण का कार्यक्षेत्र संपूर्ण राज्य है जिसमें प्रदेश के 17 अनुसूचित जाति बाहुल्य जिले – जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, मुंगेली, रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, गरियाबंद, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, महासमुंद, राजनांदगांव, खैरागढ़ सहित अन्य वे जिले भी शामिल हैं, जिनमें अनुसूचित जाति जनसंख्या 25 प्रतिशत से अधिक है। बैठक में जांजगीर-चांपा जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सत्यलता आनंद मिरी, बिलासपुर से राजेश सूर्यवंशी, गरियाबंद से गौरीशंकर कश्यप, अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद एवं बसव राजू, पुलिस महानिदेशक अरुणदेव गौतम, विभागीय सचिव श्रीमती शहला निगार, रोहित यादव, कमलप्रीत सिंह, श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, आर. प्रसन्ना, श्रीमती शम्मी आबिदी सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

विश्व स्तनपान सप्ताह में शिशु पोषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर हुआ मंथन

स्तनपान को प्रोत्साहन स्वास्थ्य के साथ सामाजिक और आर्थिक निवेश स्तनपान: स्वास्थ्य लाभ के साथ सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण का आधार विश्व स्तनपान सप्ताह में शिशु पोषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर हुआ मंथन भोपाल  स्तनपान में निवेश करना न केवल एक स्वास्थ्य प्राथमिकता है, बल्कि यह एक सामाजिक एवं आर्थिक निवेश भी है, जो दीर्घकालिक रूप से समाज के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। यह एक प्रमाणित तथ्य है कि समुचित स्तनपान से शिशु मृत्यु दर में वांछित कमी लाई जा सकती है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए विश्व स्तनपान सप्ताह पर एनएचएम कार्यालय, भोपाल में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना ने की। संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अरुणा कुमार, संचालक आईईसी डॉ. रचना दुबे, सहित विभिन्न विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे। मिशन संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने कहा कि शासकीय चिकित्सालयों की भांति निजी चिकित्सालयों को भी मातृ-शिशु हितैषी संस्थान के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। बैठक में स्तनपान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, इसके विकल्प के प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने तथा निजी स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण, निगरानी तंत्र और सहयोगात्मक नीति-संशोधन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का प्रमुख उद्देश्य इन्फेंट मिल्क सब्सीट्यूट(आईएमएस) अधिनियम के प्रभावी प्रवर्तन एवं नीति निर्माण में सुधार के साथ-साथ शिशु एवं बाल आहार व्यवहारों को प्रोत्साहित करना था। साथ ही शासकीय तंत्र के सहयोग से निजी क्षेत्र को सशक्त बनाते हुए शिशु पोषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया। बैठक में गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल से डॉ. मंजूषा गोयल (विभागाध्यक्ष, शिशु रोग), डॉ. शबाना सुल्तान (विभागाध्यक्ष, स्त्री एवं प्रसूति रोग) तथा डॉ. शिखा मलिक (विभागाध्यक्ष, शिशु रोग) उपस्थित रहीं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल से डॉ. ज्योतीनाथ मोदी (प्राध्यापक, स्त्री एवं प्रसूति रोग) ने सहभागिता की। इसके अतिरिक्त, डॉ. पंकज शुक्ला (भारतीय चिकित्सक संघ), डॉ. महेश महेश्वरी (भारतीय शिशु रोग अकादमी के अध्यक्ष), डॉ. श्वेता आनंद (संयुक्त सचिव, शिशु रोग अकादमी), डॉ. आभा जैन (स्त्री रोग विशेषज्ञ महासंघ की अध्यक्ष), डॉ. रणधीर सिंह (मध्यप्रदेश नर्सिंग होम संघ के अध्यक्ष), डॉ. मनीष शर्मा (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भोपाल) तथा डॉ. राकेश श्रीवास्तव (सिविल सर्जन, जयप्रकाश चिकित्सालय, भोपाल) भी उपस्थित रहे। यूनिसेफ, मध्यप्रदेश से सुपुष्पा अवस्थी (पोषण विशेषज्ञ), डॉ. प्रशांत कुमार (स्वास्थ्य विशेषज्ञ), सुझिमली बरुआ एवं सुमोनिका मोर्या (सामाजिक व्यवहार परिवर्तन विशेषज्ञ), तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से डॉ. हिमानी यादव (उपसंचालक, शिशु स्वास्थ्य) एवं राज्य स्तरीय सलाहकारों ने भी सहभागिता की।  

राज्यमंत्री पटेल ने मिलावटखोरों पर सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश

भोपाल  लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने आगामी त्यौहारों के मद्देनज़र मिलावटी खाद्य सामग्री की संभावित बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रदेशभर में सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिलों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सतर्क रहते हुए मिलावटखोरों के विरुद्ध तत्काल और कठोर कार्रवाई करने के लिए कहा है। राज्य मंत्री पटेल ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी एवं गणेश चतुर्थी जैसे आगामी त्यौहारों के दौरान दूध, मिठाइयों और अन्य खाद्य सामग्री में मिलावट की आशंका बढ़ जाती है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर खतरा उत्पन्न होता है। उन्होंने निर्देश दिए कि दूध एवं उससे बने उत्पादों के साथ-साथ फल-सब्जियों में केमिकल व कार्बाइड के उपयोग की भी कड़ी निगरानी की जाए। मिलावटी सामग्री पाए जाने पर तत्काल जब्ती और संबंधित खाद्य कारोबारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। राज्यमंत्री पटेल ने मिलावट के विरुद्ध जन-जागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया है, जिससे नागरिक सजग रहें और उन्हें सुरक्षित व शुद्ध खाद्य सामग्री प्राप्त हो सके।  

छुट्टियों की झड़ी! 15 से 18 अगस्त तक स्कूल-कॉलेजों में ताला

उज्जैन अगस्त महीने में लगातार छुट्टियां मिल रही हैं। जिसके चलते आप कहीं परिवार के साथ कहीं घूमने जाने का प्लान बना सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि मध्यप्रदेश के उज्जैन में ये छुट्टियां और भी खास होने वाली हैं, क्यों कि अगले हफ्ते 15 अगस्त से 18 अगस्त तक लगातार छुट्टियां पड़ रही हैं। चार दिन लगातार मिलेगी छुट्टी इस हफ्ते की बात करें 9 अगस्त को रक्षाबंधन और 10 अगस्त को रविवार है। इसमें दो दिन की लगातार छुट्टी मिल रही है। ऐसे ही अगले हफ्ते 15 को स्वतंत्रता दिवस, 16 को जन्माष्टमी, 17 को रविवार और सोमवार उज्जैन में बाबा महाकाल की राजसी सवारी के चलते उज्जैन तहसील में अवकाश घोषित रहेगा।   बाकी लोगों को मिलेंगी एकसाथ तीन छुट्टी उज्जैन जिले के बाहर के लोगों को एक साथ तीन छुट्टियां मिलेंगी। जिसमें लोग अपने परिवार के साथ तीन दिन का वीकेंड मनाने जा सकते हैं। 

स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी की भीड़ ने बढ़ाई रेलवे की चुनौती, फुल हुईं सभी प्रमुख ट्रेनें

इंदौर अगस्त से त्योहारी सीजन शुरू हो रहा है। त्योहारी सीजन में ट्रेनों पर दबाव बढ़ गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए शुरू की गई तेजस एक्सप्रेस में अब सीटें फुल होना शुरू हो गई हैं। कुछ ट्रेनों में टिकटों की बुकिंग बंद हो गई है। वहीं, बसों के किराए में भी 20 फीसदी बढ़ोतरी हो गई है। भाई-बहन के त्योहार रक्षाबंधन पर बड़ी संख्या में यात्रियों का एक शहर से दूसरे शहरों, गांवों, कस्बों में आना-जाना होता है। अगस्त में रक्षाबंधन का त्योहार 9 अगस्त (शनिवार) और 10 अगस्त (रविवार) को आ रहा है। दो दिन की छुट्टी आ रही है। 8 अगस्त की छुट्टी ले ली जाए तो तीन दिन का सप्ताहांत मिल जाएगा। इसी तरह 15 अगस्त को राष्ट्रीय अवकाश एवं 16 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी जैसे बड़े राष्ट्रीय त्योहार आ रहे हैं।   तीन दिन का वीकेंड मिल रहा है 17 अगस्त को रविवार होने से यात्रियों को तीन दिन का सप्ताहांत मिल रहा है। इन त्योहारों का सप्ताह के अंतिम दिनों में आने से ट्रेनों पर दबाव बढ़ गया है। फिर आगामी महीनों में गणेश चतुर्थी, नवदुर्गा, दशहरा एवं दीपावली जैसे महत्वपूर्ण त्योहार आएंगे। पश्चिम रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा एवं विशेष रूप से यात्रा की मांग को ध्यान में रखते हुए मुंबई सेंट्रल और इंदौर स्टेशनों के बीच विशेष किराए पर सुपरफास्ट तेजस स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया है। यह ट्रेन 23 जुलाई से 29 अगस्त तक चलेगी। त्योहारी सीजन में इस ट्रेन में किराया ज्यादा होने के बाद भी यात्रियों में रुझान बढ़ने लगा है। इसमें थर्ड एसी किराया 1803, सेकंड एसी 2430 और फर्स्ट 3800 रुपए है। बसों के किराए में बढ़ोतरी इंदौर से मुंबई, पुणे, नागपुर सहित अन्य शहरों तक चलने वाली बसों में यात्रियों का आवागमन लगातार बढ़ रहा है। इसके कारण कई बस संचालकों ने किराए में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। बसों में आमतौर पर 1500 से 2000 रुपए किराया लगता है, जो त्योहारी सीजन में बढ़कर 2500 से 3000 रुपए तक हो गया है।

अब हर घर में स्मार्ट मीटर: बिजली उपभोक्ताओं को मिलेगा सटीक बिल और रीयल टाइम डेटा

चित्तौड़गढ़ अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (एवीएनल) की ओर से चित्तौड़गढ़ जिले में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है। वहीं, इसे लेकर आरोप भी लग रहे हैं कि मीटर तेजी से दौड़ेगा। इन सब के बीच निगम ने बड़ा दावा किया है। निगम अधिकारियों का कहना है कि निगम और उपभोक्ता के लिए स्मार्ट मीटर बहुत उपयोगी है। सोलर एनर्जी का प्रोडक्शन बढ़ रहा है। ऐसे में सोलर एनर्जी और सरकार के जनरेशन प्लांट से बिजली की आपूर्ति को को कम-ज्यादा करना जरूरी है। स्मार्ट मीटर लगाकर बिजली की आपूर्ति एवं खपत को सोलर एनर्जी एवं ग्रिड की आपूर्ति से कम ज्यादा किया जाएगा। ऐसा नहीं करने पर ग्रिड फेल होने का खतरा रहेगा। जानकारी में सामने आया कि एवीएनएल की ओर से जिले में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इसका विरोध भी हुआ है। कांग्रेस के नेताओं का भी विरोध में बयान सामने आया था। वहीं, जिले में वृहद स्तर पर स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य जारी है। इसे लेकर अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड चित्तौड़गढ़ के अधिशासी अभियंता ऋषभ भार्गव ने बताया कि जिले में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य शुरू हो गया है। स्मार्ट मीटर लगाना समय की मांग हैं। इससे निगम के साथ उपभोक्ताओं का भी फायदा है। निगम के पास स्टाफ की भी कमी है, जिससे रीडिंग में भी निगम को आसानी रहेगी। उपभोक्ता की गलत बिलिंग की शिकायत का भी निस्तारण होगा। वहीं निगम को आर्थिक फायदा भी होगा। निगम की बिजली को लेकर रियल डेटा की आवश्यकता अधिशासी अभियंता ऋषभ भार्गव ने बताया कि समय के साथ चीजों को बदलना जरूरी है। आने वाले समय में सोलर एनर्जी का प्रोडक्शन बढ़ेगा। इसका प्रोडक्शन कितना हो रहा इसकी जानकारी स्मार्ट मीटर से चलेगी। इसमें प्रोडक्शन बढ़ेगा तो सरकार के जनरेशन प्लांट हैं तो उनकी सप्लाई को कम किया जा सकेगा। ऐसा नहीं करते हैं तो ग्रिड फेल होने का खतरा है और सभी तरफ अंधेरा हो जाएगा। वहीं, स्मार्ट मीटर से उपभोक्ता को भी रियल डेटा मिलेगा। उपभोक्ता 24 घंटे में बिजली की खपत देख सकता है। इसके लिए मोबाइल में ऐप डाउनलोड होगा। केवल दुष्प्रचार, मीटर एक मेजरमेंट यूनिट अधिशासी अभियंता भार्गव ने बताया कि स्मार्ट मीटर को लेकर जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं वह केवल दुष्प्रचार है। बिजली मीटर केवल एक मेजरमेंट यूनिट है। कोई सा भी मीटर लगाओ तो वह बिजली खपत की गणना ही करेगा। स्मार्ट मीटर समय की मांग भी है। 27 माह, 3.50 लाख उपभोक्ताओं के लगेंगे मीटर अधिशासी अभियंता ने बताया कि चित्तौड़गढ़ जिले में कृषि उपभोक्ताओं को छोड़ शेष सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर लगेंगे। जिले में 3 लाख 58 हजार उपभोक्ता हैं। जीनस पावर नाम की कंपनी यह कार्य कर रही है। इसमें 27 माह का समय दिया गया है। इसके अलावा 10 साल का रख रखाव भी इसी कंपनी को करना है। 10 में कार्य शुरू, 7 में हो रहा सर्वे अधिशासी अभियंता भार्गव ने बताया कि एवीएनएल के हिसाब से चित्तौड़गढ़ जिला 17 उपखंड में बंटा हुआ है। इसमें से 10 में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य शुरू हो गया है तथा 7 में सर्वे किया जा रहा है। जिले में अब तक करीब 5 हजार 500 उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य पूरा हो चुका है। इसमें भी शहर में सबसे अच्छी प्रोग्रेस हैं।

रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी: जनरल कोच में भी मिलेगा ताजा खाना, कीमत होगी बेहद कम

रायबरेली रेल यात्रा करने वालों के लिए अच्छी खबर! अब सिर्फ एसी कोच ही नहीं, जनरल कोच के यात्रियों को भी ट्रेन में सफर के दौरान ताजा और पौष्टिक खाना मिलेगा। केवल 80 रुपये खर्च कर आप ट्रेन में ही गर्मागरम शाकाहारी थाली का स्वाद ले सकेंगे। यह सुविधा रायबरेली से शुरू हो रही है और आगे देशभर में लागू की जाएगी। रेलवे यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अब जनरल कोच में यात्रा करने वाले यात्री भी ट्रेन में ही पौष्टिक और स्वादिष्ट खाना पा सकेंगे। पहले यह सुविधा सिर्फ एसी कोच तक सीमित थी, लेकिन अब भारतीय रेलवे की सहयोगी संस्था आईआरसीटीसी (IRCTC) और टच स्टोन फाउंडेशन के बीच हुए समझौते के तहत जनरल कोच के यात्रियों को भी यह सेवा दी जा रही है। यह सुविधा सबसे पहले रायबरेली से शुरू की गई है, और जल्द ही इसे अन्य स्टेशनों व ट्रेनों में भी विस्तार दिया जाएगा। इस नई व्यवस्था में यात्रियों को 80 रुपये में शाकाहारी थाली मिलेगी, जिसमें पूरी न्यूट्रिशन का ध्यान रखा गया है। इस थाली में क्या-क्या मिलेगा? यात्रियों को 2 पराठे या 4 रोटियां (100 ग्राम), 150 ग्राम चावल, 150 ग्राम दाल या सांभर, 100 ग्राम मौसमी सब्जी और 80 ग्राम दही परोसा जाएगा। यह खाना न केवल स्वादिष्ट होगा, बल्कि पूरी तरह से संतुलित और ताजगी से भरपूर भी होगा। रेलवे ने यह भी सुनिश्चित किया है कि खाना पर्यावरण अनुकूल थालियों में परोसा जाए, ताकि प्लास्टिक के उपयोग को कम किया जा सके। यह पहल न केवल खाने की गुणवत्ता को बढ़ाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक होगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, स्टेशन पर मिलने वाले स्टैंडर्ड वेज मील की कीमत 70 रुपये है, लेकिन अगर यात्री ट्रेन में बैठकर खाना मंगवाते हैं, तो उन्हें सिर्फ 80 रुपये खर्च करने होंगे। यह सेवा खासतौर पर जनरल कोच में सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए वरदान साबित होगी, जो अब तक स्टेशनों पर उतरकर खाने की तलाश करते थे या फिर सफर में कम गुणवत्ता वाले खाने पर निर्भर रहते थे। अब उन्हें सफर के दौरान ही संतुलित, साफ-सुथरा और गर्म भोजन मिलेगा, जिससे उनकी यात्रा अधिक आरामदायक और सुरक्षित बनेगी।

एम्स भोपाल तक सीमित नहीं रहेगी सुविधा, अब मेडिकल कॉलेजों में भी होंगे ब्रेन-डेड मरीजों से अंगदान

भोपाल  एमपी के सभी ट्रॉमा सेंटर और मेडिकल कॉलेजों में ब्रेन-डेड मरीजों के अंग दान करने की व्यवस्था होगी। साथ ही ब्रेन डेड मरीज के परिवारों से अंगदान की मंजूरी के लिए जरूरी काउंसलिंग के लिए स्थायी काउंसलर की नियुक्ति भी की जाएगी।दरअसल, अंगदान को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) की गाइडलाइन आई है। प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इनमें से कई का पालन पहले से किया जा रहा है। अब सरकारी अस्पतालों में ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। NOTTO से जारी निर्देश में कहा गया कि प्रदेश के सभी ट्रॉमा सेंटर्स में अंग एवं ऊतक प्राप्ति (ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन) की व्यवस्था विकसित की जाए। उन्हें THOTA अधिनियम के तहत अंग प्राप्ति केंद्र के रूप में पंजीकृत किया जाए। साथ ही, मेडिकल कॉलेजों में भी चरणबद्ध तरीके से यह सुविधाएं विकसित की जाएं। हर साल 11 सौ ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन, MP की हिस्सेदारी 0.7% भारत में हर साल 11 सौ के करीब ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन होते हैं। जिसमें तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात की हिस्सेदारी 82% से अधिक है। वहीं, मध्यप्रदेश की 0.7 प्रतिशत, राजस्थान की 0.6 प्रतिशत और छत्तीसगढ की 0.3 प्रतिशत हिस्सेदारी रहती है। इसकी दो बड़ी वजह हैं, इनमें पहली सरकारी अस्पतालों में ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशनकी व्यवस्था ना होना और दूसरी जागरूकता की कमी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इसको लेकर हाल में सरकार का विजन स्पष्ट किया है। जिसका एक उदाहरण यह कि इस 15 अगस्त को प्रदेश के सभी अंगदाताओं का राजकीय सम्मान किया जाएगा। ऑर्गन वेटिंग लिस्ट में महिलाओं को प्राथमिक्ता नई गाइडलाइन के अनुसार, हर राज्य में अब ऑर्गन वेटिंग लिस्ट में महिलाओं को अतिरिक्त अंक देने का प्रावधान किया जाएगा। इसके अलावा, यदि किसी पूर्व दिवंगत दाता के निकट संबंधी को अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो, तो उसे प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, NOTTO ने साफ किया है कि नई गाइडलाइन का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, अंगदान में पारदर्शिता लाना और लैंगिक असमानता को दूर करना है। यही वजह है कि जन-जागरूकता को बढ़ाने के लिए राज्य स्तर पर ब्रांड एम्बेसडर भी नियुक्त किए जाएं। इन गाइडलाइन का प्रदेश में पहले से हो रहा पालन     मृतक दाता के परिवार के सदस्यों को राज्य और जिला स्तर पर सार्वजनिक समारोहों जैसे 15 अगस्त, 26 जनवरी, राज्य स्थापना दिवस आदि पर सम्मानित किया जाना।     आपातकालीन कर्मियों और एम्बुलेंस स्टाफ को सड़क दुर्घटना या स्ट्रोक से पीड़ित संभावित दाताओं की पहचान और अस्पताल के अंग दान समन्वयक को समय पर सूचित करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाना। ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन वाला एम्स अकेला सरकारी संस्थान मध्यप्रदेश में फिलहाल ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन की व्यवस्था राजधानी के 3 समेत कुल 6 अस्पतालों में ही मौजूद है। इनमें एम्स भोपाल यह सुविधा वाला अकेला सरकारी अस्पताल है। इसके साथ, भोपाल और इंदौर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में यह व्यवस्था शुरू करने का काम अब तक कागजों में ही सीमित है। किडनी ट्रांसप्लांट में भोपाल आगे भोपाल के दो प्रमुख सरकारी अस्पताल, एम्स और हमीदिया में किडनी ट्रांसप्लांट रफ्तार पकड़ रहा है। एक तरफ एम्स में 11 किडनी ट्रांसप्लांट हुए, जिसमें से 3 कैडेवरिक ऑर्गन (यानी ब्रेन डेड मरीज से मिली किडनी) ट्रांसप्लांट थे। वहीं, गांधी मेडिकल कॉलेज में 10 किडनी ट्रांसप्लांट हुए और यह सभी लाइव थे। यानी, परिजनों ने अपनों को नया जीवन देने के लिए अपनी किडनी दान की। इसके अलावा, भोपाल का बंसल अस्पताल 400 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है। इन दोनों कैटेगरी (सरकारी और निजी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट) में भोपाल प्रदेश में सबसे आगे हैं। लेकिन, देश में देखें तो टॉप 10 में भी नहीं है। देश के अन्य राज्यों की तुलना में प्रदेश काफी पीछे मध्य प्रदेश स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (SOTTO) की कंवीनर डॉ. कविता कुमार ने कहा कि अंगदान के मामले में मध्यप्रदेश अभी शुरुआती दौर में है, जैसे एक छोटा बच्चा चलना सीख रहा हो। इस क्षेत्र में अभी काफी काम बाकी है। सबसे अहम है कि अंगदान पर ज्यादा चर्चा हो और सही जानकारी लोगों तक पहुंचे। जब लोग इसके बारे में बात करेंगे, तो जागरूकता बढ़ेगी। उन्हें इसके फायदे समझ में आएंगे। एक बार जब लोग जान जाएंगे कि अंगदान से कितने लोगों की जान बच सकती है, तब राज्य में अंगदान का ग्राफ तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने आगे कहा, सरकारी अस्पतालों में ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन शुरू होना जरूरी है। इसके लिए अलग से मैनपावर, पर्याप्त स्पेस और एक बड़े सेटअप की जरूरत होती है। गांधी मेडिकल कॉलेज के पास मैनपावर और जगह तो है, लेकिन ऑर्गन रिट्रीवल के लिए आवश्यक मशीनें और जांच की सुविधा अभी विकसित करनी है। अच्छी बात यह है कि सरकार इस दिशा में काफी सक्रिय है। हमें भरोसा है कि जल्द ही प्रदेश में अंगदान की स्थिति बेहतर होगी और इसका ग्राफ ऊपर जाएगा। आठ अंगों को दान कर सकते हैं लोग     18 या उससे ‎अधिक उम्र के बाद ‎जीवित डोनर या तो‎ एक किडनी या लीवर ‎का केवल एक हिस्सा‎दान कर सकता है।     ‎किसी भी उम्र का ब्रेन‎स्टेम मृत डोनर 8‎ महत्वपूर्ण अंगों को‎ दान कर सकता है। ‎इनमें हार्ट, 2 फेफड़े,‎ लीवर, 2 किडनी,‎ पैंक्रियाज और छोटी‎ आंत, कॉर्निया, हड्डी,‎ त्वचा और हार्ट वाल्व ‎शामिल हैं।‎ लिविंग ऑर्गन डोनेशन     सबसे पहले डोनर के कुछ मेडिकल टेस्ट किए जाते हैं। यह जानने के लिए व्यक्ति डोनेशन के लिए उपयुक्त है।     इन टेस्ट में सबसे महत्वपूर्ण दो पहलू हैं। डोनर और रिसीवर की कंपैटिबिलिटी और डोनर की मेडिकल कंडीशन यानी उसका शारीरिक रूप से स्वस्थ होना।     सारे टेस्ट रिजल्ट पॉजिटिव होने और डॉक्टर के सर्टिफिकेट के बाद डोनर की बॉडी से डोनेट किया जा रहा हिस्सा सर्जिकली रिमूव किया जाता है और उसे रिसीवर की बॉडी में ट्रांसप्लांट किया जाता है।     डोनर को भी ऑर्गन डोनेशन के बाद कई हफ्तों में मेडिकल सुपरविजन में रखा जाता है। ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन किसी भी कारण से हुई आकस्मिक मृत्यु के बाद … Read more