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धार्मिक स्थलों को पर्यटन केंद्र बनाने की योजना, अमरोहा में बड़े प्रोजेक्ट पर तैयारी

 अमरोहा प्रदेश सरकार पर्यटन के विकास पर अधिक जोर दे रही है। उसके द्वारा धार्मिक स्थलों को पर्यटन के रूप में विकसित किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में जनपद के सात धार्मिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव प्रशासन ने विधानसभा वार तैयार किया है। 2225 लाख से उनकी तस्वीर को बदला जाएगा। इस बार एक गुरुद्वारा को भी प्रस्ताव में शामिल किया गया है। सभी के प्रस्ताव मंजूरी के लिए पर्यटन विभाग को भिजवा दिए गए हैं। उसकी मंजूरी मिलने और शासन से धनराशि आवंटित होने के बाद धार्मिक स्थलों पर कार्य शुरू किया जाएगा। धार्मिक स्थलों के प्रति पर्यटक आकर्षित हों और प्रदेश की आय में बढ़ोतरी हो, इसके लिए सरकार द्वारा प्रत्येक जनपद के मुख्य धार्मिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने का कार्य चल रहा है। राज्य योजना अंतर्गत पर्यटन विकास के लिए कार्य किया जा रहा है। इसके लिए पर्यटन विभाग हर वित्तीय वर्ष में जिला प्रशासन से धार्मिक स्थलों के प्रस्ताव मांगता है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में विधानसभा वार सात धार्मिक स्थलों का प्रस्ताव बनाकर विभाग को भेजा गया है। इसमें नौगावां सादात विस क्षेत्र में स्थित वारसपुर कलां का शिव मंदिर, गुरुकुल कन्या चोटीपुरा का वेद मंदिर, खजूरी गांव में स्थित बाबा बालक राम मंदिर, गुरुद्वारा सिंह सभा गुरुनानक दरबार खंडसाल कलां, हसनपुर विस क्षेत्र के ग्राम ढबारसी में स्थित प्राचीन शिव मंदिर, ग्राम बिजनौरा स्थित शिव मंदिर व अमरोहा में वासुदेव मंदिर पर लाइट एवं साउंड शो के प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। जिन पर करीब 2225 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। वर्ष 2025-26 में तीन परियोजनाओं को मिली थी मंजूरी पर्यटन विभाग की राज्य योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 283.27 लाख की तीन परियोजनाओं को मंजूरी मिली थी। इसमें नाैगावां विस क्षेत्र में बाबा लालचंद्र मंदिर जकड़ी, अमरोहा विस क्षेत्र के गांव रेहरा में प्रज्ञा बुद्ध बिहार, हसनपुर में चामुंडा देवी मंदिर शामिल हैं। वर्ष 2023-24 में चार परियोजनाएं हुई थी मंजूर वित्तीय वर्ष 2023-24 में राज्य योजनांतर्गत चार परियोजनाएं मंजूर हुई थी। इनमें हसनपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित शिव मंदिर ग्राम फूलपुर बीझलपुर, नौगावां सादात विधानसभा क्षेत्र में शिव मंदिर मेला स्थल गांव गजस्थल, अमरोहा विस क्षेत्र में वासुदेव मंदिर व मंडी धनौरा क्षेत्र में स्थित प्राचीन शिव मंदिर पत्थरकुटी शामिल हैं। जिन पर पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने के लिए 445.93 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। वर्ष 2024-25 में दो ही परियोजनाओं को मिली थी मंजूरी राज्य योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 में जनपद में 139.80 लाख रुपये की दो ही परियोजनाओं को मंजूरी मिली थी। जिसमें हसनपुर विधानसभा क्षेत्र में मोहल्ला हाेलीवाला स्थित शिवाला मंदिर परिसर, नौगावां सादात विस क्षेत्र में स्थित ग्राम बहलोलपुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर शामिल हैं। धार्मिक स्थलों को पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए प्रस्ताव बनाकर मंजूरी के लिए पर्यटन विभाग को भेजे गए हैं। जिनकी मंजूरी और धनराशि मिलने के बाद उनके विकास का कार्य कराया जाएगा।   अश्वनी कुमार मिश्र, सीडीओ  

‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान से जल संरक्षण बना जनआंदोलन, रोजगार और ग्रामीण समृद्धि को मिली नई गति

रायपुर  जलवायु परिवर्तन, अनिश्चित वर्षा और बढ़ते जल संकट के बीच छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को लेकर एक व्यापक जनअभियान आकार ले रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत संचालित ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के माध्यम से प्रदेशभर में जल संरक्षण, रोजगार सृजन, हरित विकास और आजीविका संवर्धन को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। जल संरक्षण अब केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह जनभागीदारी से संचालित एक व्यापक सामाजिक पहल के रूप में विकसित हो रहा है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 1610 करोड़ रुपये की लागत से एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें तालाब, डबरियां, चेकडैम, जल संवर्धन संरचनाएं, स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच, खेत तालाब और अन्य जल संरक्षण कार्य शामिल हैं। इन परिसंपत्तियों का उद्देश्य वर्षा जल को अधिकतम मात्रा में भूमि में रोकना, भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता को सुदृढ़ करना है। इन कार्यों के माध्यम से प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है, जिनमें 57 प्रतिशत महिलाएं हैं। इस प्रकार जल संरक्षण का यह अभियान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम भी बन रहा है। जल संरक्षण से आजीविका का सृजन राज्य सरकार ने जल संरक्षण को सीधे ग्रामीण आजीविका से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। समाज के संवेदनशील और कमजोर वर्गों की निजी भूमि पर 13,065 आजीविका डबरियों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। इन परिसंपत्तियों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को मत्स्य पालन, बागवानी, सब्जी उत्पादन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों के अवसर मिल रहे हैं। इसी प्रकार ‘नवा तरिया-आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत 624 सामुदायिक तालाब विकसित किए जा रहे हैं। इन जल संरचनाओं को स्वयं सहायता समूहों, विशेषकर महिला समूहों की आजीविका से जोड़ने की पहल की गई है, जिससे जल संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रभावी मॉडल विकसित हो रहा है। पहाड़ियों पर ट्रेंच, मैदानों में जल संचयन प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में ढलान और पहाड़ी भूभागों पर स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच (SCT) का निर्माण किया जा रहा है। ये संरचनाएं वर्षा जल के तेज बहाव को रोककर उसे भूमि में समाहित होने का अवसर देती हैं। इससे मिट्टी का कटाव कम होता है, भू-जल स्तर में सुधार होता है और वृक्षारोपण को आवश्यक नमी उपलब्ध होती है। जल संरक्षण और वृक्षारोपण के इस समन्वित प्रयास से हरित आवरण में वृद्धि हो रही है तथा पर्यावरणीय संतुलन को मजबूती मिल रही है। तकनीक से जल संरक्षण को नई दिशा ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान की एक प्रमुख विशेषता आधुनिक तकनीकों का उपयोग है। कार्यों की वैज्ञानिक योजना और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए GIS आधारित युक्तधारा प्लानिंग, CLART एप तथा वाटरशेड सिद्धांतों का उपयोग किया जा रहा है। भू-जल स्तर की निगरानी के लिए जलदूत प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से खुले कुओं के जल स्तर का नियमित मापन किया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर जल स्तर की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कर जल बजट तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। पारदर्शिता और जनभागीदारी का मॉडल मनरेगा के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली विकसित की गई है। इसके माध्यम से ग्रामीण अपने गांव में स्वीकृत और पूर्ण कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। रोजगार दिवस, आवास दिवस, सामाजिक अंकेक्षण और जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से भी लोगों की भागीदारी और निगरानी को बढ़ावा दिया जा रहा है। भागीदारी से साझेदारी की ओर जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी से जल संरक्षण का यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले चुका है। ग्राम सभाओं, जागरूकता अभियानों और सामुदायिक प्रयासों के माध्यम से जल संरक्षण को लोगों के दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ का ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान आज यह दिखा रहा है कि जल संरक्षण, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़कर ग्रामीण विकास का एक स्थायी और समावेशी मॉडल विकसित किया जा सकता है। यह अभियान केवल पानी बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि गांवों में समृद्धि, आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय संतुलन की नई नींव रख रहा है।

सोक पिट, वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच, कंटूर ट्रेंच, आजीविका डबरी और नवा तरिया जैसी संरचनाएं बढ़ा रही जल संचयन क्षमता

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन की दिशा में जशपुर जिला एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रहा है। जिले में मनरेगा तथा जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन के लिए विभिन्न नवाचार आधारित संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिससे वर्षा जल संचयन को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण आजीविका को भी नई मजबूती मिल रही है। जशपुर जिले में वर्षा जल के अधिकतम संचयन और भू-जल पुनर्भरण के उद्देश्य से घरों, शासकीय संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी संख्या में सोक पिट बनाए जा रहे हैं। इन संरचनाओं से उपयोग किए गए जल का पुनर्भरण संभव हो रहा है तथा जलभराव की समस्या में भी कमी आ रही है। पहाड़ी एवं ढलान वाले क्षेत्रों में वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच और कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया जा रहा है। ये संरचनाएं वर्षा जल के तीव्र बहाव को नियंत्रित कर मिट्टी के कटाव को रोकने के साथ जल को भूमि में समाहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे भू-जल स्तर में सुधार और पर्यावरणीय संतुलन को भी बढ़ावा मिल रहा है। ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के लिए जिले में आजीविका डबरी निर्माण कार्य तेजी से संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में 495 आजीविका डबरियां निर्माणाधीन हैं। इन डबरियों में वर्षा जल संग्रहित होने से किसानों को रबी एवं ग्रीष्मकालीन फसलों की सिंचाई सुविधा मिलेगी, वहीं सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। जल संरक्षण के क्षेत्र में ‘नवा तरिया’ अभियान भी उल्लेखनीय परिणाम दे रहा है। नए तालाबों के निर्माण और पुराने जलाशयों के जीर्णाेद्धार से जल भंडारण क्षमता में वृद्धि हुई है। इसके सकारात्मक प्रभाव कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन गतिविधियों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। जशपुर जिले में 5 प्रतिशत मॉडल को भी प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक ग्राम के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के कम से कम 5 प्रतिशत हिस्से को जल संरक्षण संरचनाओं से आच्छादित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल से वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और जल उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। कलेक्टर  रोहित व्यास ने जल संरक्षण कार्यों में सभी विभागों और ग्रामीण समुदायों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए कहा है कि जल संरक्षण केवल एक शासकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से संचालित जन आंदोलन है। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। जशपुर जिले में संचालित ये नवाचार आधारित जल संरक्षण प्रयास जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। साथ ही ये पहल कृषि उत्पादन बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर की सहभागिता, रोजगार मांग पंजीयन और जॉब कार्ड अद्यतन के कार्य संपन्न

रायपुर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा ग्रामीण परिवारों को समयबद्ध रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जशपुर जिले की सभी ग्राम पंचायतों में रोजगार दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता करते हुए रोजगार की मांग दर्ज कराई तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। रोजगार दिवस के दौरान ग्राम पंचायतों में विशेष शिविर आयोजित कर ग्रामीणों को मनरेगा के तहत रोजगार प्राप्त करने की प्रक्रिया, जॉब कार्ड निर्माण एवं संशोधन, कार्य मांग पंजीयन, मजदूरी भुगतान प्रणाली तथा योजना के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, रोजगार सहायकों, तकनीकी सहायकों और पंचायत कर्मियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इस दौरान आगामी कार्यों के लिए रोजगार मांग आवेदन प्राप्त किए गए तथा पात्र परिवारों के नवीन जॉब कार्ड बनाने और पुराने जॉब कार्डों के अद्यतन का कार्य भी किया गया। पंचायत स्तर पर प्राप्त शिकायतों और समस्याओं का त्वरित निराकरण करते हुए ग्रामीणों को योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया। जल संरक्षण कार्यों पर विशेष फोकस रोजगार दिवस में मनरेगा के अंतर्गत संचालित जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों की जानकारी भी ग्रामीणों को दी गई। बताया गया कि जिले में सोक पिट, कंटूर ट्रेंच, वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच (WAT), नवा तरिया, आजीविका डबरी, तालाब निर्माण एवं वृक्षारोपण जैसे कार्यों के माध्यम से एक ओर रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और भू-जल संवर्धन को भी बढ़ावा मिल रहा है। इन कार्यों से जल स्तर में सुधार, कृषि उत्पादकता में वृद्धि तथा ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है। मनरेगा के माध्यम से जिले में विकास और आजीविका सशक्तिकरण के दोहरे उद्देश्य को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा रहा है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर कार्यक्रम के दौरान महिलाओं, युवाओं तथा कमजोर वर्गों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को मनरेगा एवं आजीविका संवर्धन से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी देते हुए उन्हें विभिन्न स्वरोजगार और रोजगारोन्मुखी योजनाओं से जोड़ने के प्रयास किए गए। जिला प्रशासन द्वारा नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे रोजगार दिवस का उद्देश्य प्रत्येक इच्छुक ग्रामीण परिवार को समय पर रोजगार उपलब्ध कराना, योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा ग्राम स्तर पर विकास कार्यों में जनभागीदारी को मजबूत करना है। रोजगार दिवस के माध्यम से ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी मिलने के साथ-साथ उनकी समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रभावी मंच उपलब्ध हो रहा है।

ग्रामीण विकास उपविधि 2026 का ड्राफ्ट तैयार, नक्शा शुल्क में बड़ा बदलाव प्रस्तावित

लखनऊ जिला पंचायतों में नक्शा पास करने पर अधिक शुल्क लिए जाने पर आपत्ति जताई गई है। पंचायती राज विभाग नक्शा पास करने के लिए नई भवन निर्माण विकास उपविधि का प्रारूप तैयार करते हुए इस पर सुझाव मांगे हैं। इसमें ज्यादा विकास शुल्क लेने के प्रस्ताव पर आपत्ति है। पिछड़े व बाढ़ प्रभावित जिलों में विकास शुल्क न्यूनतम रखे जाने की मांग की गई है।पंचायती राज विभाग ने इसे लागू करने से पहले हितधारकों बिल्डर, आर्किटेक्ट, जिला पंचायतों व शासन के अधिकारियों से विचार-विमर्श किया। प्रमुख सचिव, पंचायती राज अनिल कुमार की अध्यक्षता में शनिवार को हुई बैठक में बिल्डर व आर्किटेक्ट ने कहा कि जिला पंचायतों का विकास शुल्क अधिक है और इसे कम किया जाए। पिछड़े व बाढ़ प्रभावित जिलों में इसे न्यूनतम रखा जाए। फिलहाल शासन ने मंगलवार तक उन्हें सुझाव देने का समय दिया है। वहीं जिला पंचायतों से गुजरने वाले एक्सप्रेसवे व स्टेट हाईवे जो विकास प्राधिकरणों, नगर निगम व नगर पालिका परिषद की सीमा से तीन किलोमीटर के दायरे में जिला पंचायतों के क्षेत्र में आएंगे, वहां 25 प्रतिशत अधिक विकास शुल्क वसूला जाएगा। वहीं इस उपविधि के अनुसार प्रदेश के जिलों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। ए श्रेणी के जिलों में 750 प्रतिशत वर्ग मीटर, श्रेणी दो के जिलों में 500 रुपये व श्रेणी तीन के जिलों में 250 रुपये प्रति वर्ग मीटर विकास शुल्क का प्रस्ताव है। जिला पंचायतों में नक्शा पास कराने को नई मॉडल भवन उपविधि होगी लागू पंचायती राज विभाग जिला पंचायतों की ओर से नक्शा पास करने के लिए नई भवन निर्माण उपविधि को जल्द लागू करेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में सुनियोजित विकास होने के साथ जिला पंचायतों की आय भी बढ़ेगी। पंचायती राज विभाग की ओर से तैयार की गई इस उपविधि का नाम उत्तर प्रदेश जिला पंचायतों के लिए मॉडल भवन निर्माण एवं विकास उपविधि- 2026 होगा। पंचायती राज विभाग की ओर से तैयार की गई इस प्रस्तावित उपविधि पर हितधारकों की शनिवार को बैठक भी बुलाई गई है। जिसमें इस उपविधि पर चर्चा होगी। बिल्डर, आर्किटेक्ट और जिला पंचायतों के अधिकारियों के साथ बैठक होगी। प्रमुख सचिव, पंचायती राज अनिल कुमार की ओर से इसकी तैयारी की जा रही है। सभी हितधारकों से इस उपविधि पर सुझाव मांगे जाएंगे। आवास विभाग उपविधि की तरह ही पंचायती राज विभाग ने भी अपनी उपविधि तैयार की है। जिला पंचायतें नक्शा पास करने के लिए समन शुल्क, भवन के क्षेत्रफल आदि के आधार पर शुल्क तय होगा। आवासीय और वाणिज्यिक भवनों के नक्शे की स्वीकृति का शुल्क अलग- अलग होगा। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर के मुताबिक प्रस्तावित उपविधि को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी गई है । जिला पंचायतों को नक्शा पास करने से अभी 70 करोड़ की आय हो रही है जो आगे बढ़कर 210 करोड़ रुपए हो जाएगी।

ग्रामीण सड़कों के विकास पर अटकी योजना, 319 सड़कें जमीन विवाद में फंसीं

 पटना  ग्रामीण इलाके में बनने वाली सड़कें भी राष्ट्रीय उच्च पथ (NH) और स्टेट हाईवे (SH) के निर्माण से जुड़ी आधारभूत समस्या को झेल रही हैं। यह समस्या जमीन की उपलब्धता से संबंधित है। ग्रामीण कार्य विभाग के एक आकलन के अनुसार अगले पांच वर्षों में बिहार के ग्रामीण इलाके में सड़क निर्माण को 3600 करोड़ रुपए अकेले जमीन अधिग्रहण मद में खर्च कर करने होंगे। इस राशि का आकलन प्रति वर्ष 10 प्रतिशत की वृद्धि को जोड़कर किया गया है। 319 सड़कों के लिए जमीन की जरूरत ग्रामीण कार्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में 319 सड़कों का मामला जमीन अधिग्रहण के पेच में फंसा है। इनमें 51 स्थायी पट्टा से संबंधित मामले हैं। इस बारे में ग्रामीण कार्य विभाग का कहना है कि अलग-अलग विभागों से समन्वय कर समस्या का समाधान कराया जाएगा। समस्या समाधान के लिए हर माह संबंधित विभागों के साथ संयुक्त रूप से साइट मीटिंग आयोजित की जाएगी। यह भी योजना बन रही कि जहां तक संभव हो वैसी परियाेजनाएं प्राथमिकता के आधार पर ली जाएं जिसमें किसी तरह के जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं पड़े। फाॅरेस्ट क्लियरेंस का भी पेच जिस तरह से एनएच और एसएच का निर्माण फारेस्ट क्लियरेंस में अटक जाता है उसी तरह का मामला ग्रामीण कार्य विभाग के भी सामने आ रहा। इस बारे में मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में 47 सड़कों का मामला वन स्वीकृति हासिल नहीं होने की वजह से अटका पड़ा है। बहुत से मामले ऐसे हैं जहां एलायनमेंट के तहत बिजली पोलों को हटाया जाना है। इस बारे में जानकारी दी गई कि बिजली के जाे पोल संबंधित सड़क के एलायनमेंट के बाहर हैं उसके लिए किसी तरह का शुल्क देय नहीं होगा। इसी तरह पुराने जर्जर बिजली पोल के स्थानांतरण के लिए नई दर का भुगतान नहीं होगा। नए प्रोजेक्ट में कमिश्नर व डीएम की अनुशंसा आवश्यक ग्रामीण कार्य विभाग ने तय किया है कि अतिरिक्त परियोजनाओं के समावेशन के प्रस्तावों की गहन जांच और स्क्रीनिंग की जाएगी। प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारी की विधिवत अनुशंसा संबंधित प्रस्ताव पर दर्ज होगी। इसके बाद ही सड़क निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।  

सरकारी फंड घोटाला मामला: CBI ने दिल्ली-NCR सहित 6 ठिकानों पर की कार्रवाई

 चंडीगढ़   हरियाणा और चंडीगढ़ के सरकारी विभागों के 661 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच कर रही सीबीआई  ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर में छह जगहों पर छापे मारे। जांच के दायरे में हरियाणा के कुछ वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, बैंक अधिकारी और एक निजी कंपनी भी हैं। सीबीआई के मुताबिक यह मामला हरियाणा सरकार के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों नगर निगम चंडीगढ़ और क्रेस्ट चंडीगढ़ के सरकारी फंड में गड़बड़ी से जुड़ा है। आरोप है कि सरकारी धन को गलत तरीके से खातों के जरिए दूसरी जगह भेजकर हड़प लिया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक हरियाणा कैडर के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के घरों के अलावा नोएडा स्थित वीपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक के ठिकानों पर की गई। जांच में सामने आया है कि कुछ अधिकारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर खाते खुलवाने, सरकारी पैसे के ट्रांसफर और बाद में उसे अन्य खातों में भेजने में मदद की। इसके बदले उन्हें फायदा मिलने के भी आरोप हैं। सीबीआई ने बताया कि वीपम कंसल्टेंसी के खाते में भी कथित तौर पर घोटाले का पैसा पहुंचा था, जिसे बाद में कंपनी के निदेशक के निजी खाते में ट्रांसफर किया गया। तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और संपत्ति से जुड़े कागजात बरामद किए गए हैं। यह जांच सीबीआई ने हरियाणा विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो से एक मामला अपने हाथ में लेने और चंडीगढ़ पुलिस के आर्थिक अपराध थाने में दर्ज दो मामलों को अपने अधीन लेने के बाद शुरू की थी। तीनों मामलों में आपराधिक साजिश, सरकारी धन के गबन और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच चल रही है। सीबीआई पहले ही इस मामले में पंचकूला की विशेष अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इसमें हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के अधिकारियों की भूमिका का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि सरकारी धन को IDFC फर्स्ट बैंक और AU फाइनेंस बैंक में रखे खातों से सुनियोजित तरीके से दूसरी जगह भेजा गया। सीबीआई का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। मामले में जल्द ही अतिरिक्त चार्जशीट भी दाखिल की जाएगी।

ट्रेनों में अपराधियों पर नजर रखने के लिए पुलिस ने शुरू किया हाई-टेक सिस्टम

 रामपुर प्लेटफार्म के साथ ट्रेनों में सक्रिय अपराधियों की कुंडली अब कंप्यूटर पर एक क्लिक करते ही खुल जाएगी। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) इन दिनों यक्ष एप में डाटा अपलोड कर अपडेट कर रही है। इस एप में अपराधियों के नाम-पता, फोटो, फिंगर प्रिंट और वॉयस सैंपल के साथ गिरोह का विवरण होगा। रामपुर में जीआरपी थाना प्रभारी ईश्वर चंद ने बताया कि प्रदेश स्तर पर लांच हुआ यक्ष एप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युक्त है। अनुभाग के सभी अपराधियों के नाम, संपूर्ण पता, थाना, उनकी फोटो (सभी प्रकार से खींची हुई), उनके फिंगर प्रिंट के अलावा उनकी आवाज के सैंपल आदि, इसमें अपडेट किए जा रहे हैं। इससे अपराधी अब कहीं भी अपराध करेगा तो उसकी फोटो अपलोड करते ही उसकी पूरी कुंडली ऑनलाइन सामने आ जाएगी। उन्होंने बताया कि एप के जरिये अपराधियों की निगरानी करना जीआरपी के लिए आसान होगा। बीट पुलिसिंग के जरिये अपराधियों की वर्तमान गतिविधियों को एप पर अपडेट करने का काम अंतिम चरण में है। समय-समय पर अपडेट करनी होगी जानकारी थाना प्रभारी ईश्वर चंद ने बताया कि एप पर दी जाने वाली जानकारी समय-समय पर अपडेट की जाएगी। इसकी भी एप में सुविधा दी गई है। यदि अपराधी की मौत हो जाती है या फिर मामले में वह दोषमुक्त हो जाता है तो तत्काल ऐसे अपराधी का डेटा हटा दिया जाएगा। 358 अपराधी पर रहेगी पूरी निगरानी थाना प्रभारी ने बताया कि यक्ष एप पर अभी 358 अपराधी ऐसे हैं, जिनके बारे में जानकारी का डाटा अपलोड किया गया है। इन सभी की इस यक्ष एप से निगरानी की जाएगी। इसके साथ ही उन अपराधियों के बारे में भी जानकारी एकत्र की जा रही है, जिनके संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल रही है। ऐसे अपराधियों को एप पर अनुपस्थित किया गया है। पुलिस लगातार उनकी जानकारी कर रही है। क्या बोले एसपी रेलवे एसपी रेलवे आशुतोष शुक्ला ने बताया कि जीआरपी भी अब यक्ष एप पर अपराधियों का डाटा फीड कर रही है। इससे अपराधियों पर नजर रखी जा सकेगी। इस एप में अपराधियों के नाम-पता, फोटो, फिंगर प्रिंट और वॉयस सैंपल के साथ गिरोह का पूरा विवरण है।

338 गांवों को मिलेगा सिंचाई जल, किसानों को बड़ा लाभ

 जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व एवं जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा ‘अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना‘ को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए युद्धस्तर पर कार्य करवाए जा रहे हैं। वागड़ अंचल के किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही इस परियोजना से जनजाति बहुल क्षेत्र में कृषि व्यवस्था एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। लगभग 2 हजार 500 करोड़ रुपए लागत की परियोजना से बांसवाड़ा जिले की 3 विधानसभा क्षेत्रों (बांसवाड़ा, बागीदौरा एवं कुशलगढ़) की 6 तहसीलों बांसवाड़ा, बागीदौरा, कुशलगढ़, सज्जनगढ़, आनंदपुरी एवं गांगड़तलाई के 338 गांवों की लगभग 42 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को लिफ्ट सिंचाई प्रणाली से जल उपलब्ध होगा। परियोजना से लगभग 3.5 लाख आबादी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होगी। 102 किमी मुख्य नहर लम्बाई, 22.50 किमी सुरंगें परियोजना में आधुनिक इंजीनियरिंग टेक्नोलाॅजी से नहर नेटवर्क एवं विभिन्न संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना की कुल मुख्य नहर लंबाई 102 किलोमीटर है। इसमें 22.50 किलोमीटर लंबाई में सुरंगे/कट एंड कवर संरचनाएं, एक्वाडक्ट तथा नदी को पार करते हुए साइफन निर्मित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही लगभग 230 अन्य नहरी महत्वपूर्ण संरचनाए यथा सुपरपासेज, ड्रेनेज साइफन, रोड ब्रिज, एस्केप कम क्रॉस रेगुलेटर, हेड रेगुलेटर इत्यादि भी परियोजना में शामिल हैं। प्रेशर प्रणाली आधारित कमांड क्षेत्र होगा विकसित परियोजना के तहत अत्याधुनिक प्रेशर प्रणाली आधारित कमांड क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। इससे खेत तक वैज्ञानिक एवं नियंत्रित सिंचाई स्काड़ा प्रणाली से सुनिश्चित हो सकेगी। सिंचित क्षेत्र में प्रत्येक 200 हेक्टेयर के ‘चक स्तर‘ पर लगभग 200 डिग्गियों का निर्माण प्रस्तावित है। मुख्य नहर प्रणाली से इन डिग्गियों तक पानी एमएस व डीआई पाइपलाइन पहुंचाया जाएगा। इसके बाद डिग्गियों से लगभग 5 हजार कि.मी. लंबाई का भूमिगत एचडीपीई पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे प्रेसराइज्ड इरिगेशन प्रणाली से खेतों तक पानी पहुंचेगा। इस आधुनिक सिंचाई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक लगभग 1.25 से 1.50 हेक्टेयर क्षेत्र पर हाइड्रेंट विकसित किए जाएंगे। इन हाइड्रेंट पॉइंट्स तक भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क बिछेगा, जहां से किसान सीधे सिंचाई के लिए जल प्राप्त कर सकेंगे। इस प्रणाली से खेत स्तर तक समान जल वितरण, न्यूनतम जल हानि तथा अधिक दक्ष सिंचाई सुनिश्चित होगी। आधुनिक माइक्रो एवं प्रेसराइज्ड इरिगेशन प्रणाली के जरिए कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव हो सकेगी। किसानों को निरंतर बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। स्काडा प्रणाली से ऑटोमाइज होगी माॅनिटरिंग परियोजना में अत्याधुनिक स्काड़ा (पर्यवेक्षक नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण) प्रणाली भी विकसित की जा रही है। इससे सम्पूर्ण प्रेशर प्रणाली आधारित तंत्र का संचालन एवं मॉनिटरिंग पूर्णतः ऑटोमाइज्ड होगी। इस प्रणाली से जल वितरण को समान रूप से सुनिश्चित करने, दबाव एवं प्रवाह को स्वचालित रूप से नियंत्रित करने तथा रियल टाइम डेटा मॉनिटरिंग एवं संचालन नियंत्रण की सुविधा उपलब्ध होगी। इस प्रणाली से पम्पिंग स्टेशन, रिलीफ वाल्व, हाइड्रेंट एवं विभिन्न शाखाओं में जल प्रवाह की सतत निगरानी संभव होगी। वर्तमान में नहर की 42 किलोमीटर में काम किया जा रहा है। इनटेक स्ट्रक्चर एवं स्लूइस बैरल का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। टनल कार्य, एक्वाडक्ट, साइफन, कट एंड कवर के साथ नहर से डिग्गी तक भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क निर्माण कार्य भी विभिन्न स्थानों पर निरंतर जारी है। नियमित माॅनिटरिंग से मिली गति परियोजना की नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जा रही है। समयबद्ध और पारदर्शिता से कार्यों को पूर्ण करने के लिए निर्माण एजेंसियों को विभागीय निर्देश दिए गए हैं। इस परियोजना के लिए 78 गांवों की लगभग 270 हेक्टेयर निजी भूमि का नियमानुसार अधिग्रहण किया जा रहा है। अब तक 67 गांवों की 211 हेक्टेयर भूमि के लिए लगभग 47 करोड़ रुपए राशि के अवार्ड पारित हो चुके हैं। लगभग 15 करोड़ रुपए मुआवजा राशि वितरित की गई है। शेष अधिग्रहण एवं वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रियाएं भी तेजी से हो रही हैं। सिंचाई के लिए वर्षभर मिलेगा जल जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि आगामी वर्षों में यह परियोजना बांसवाड़ा जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली मुख्य सिंचाई परियोजनाओं में शामिल होगी। इसके पूर्ण होने के बाद क्षेत्र के किसानों को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी। मक्का, गेहूं, दलहन, तिलहन एवं बागवानी फसलों का रकबा बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि इससे भू-जल स्तर सुधार, जल संरक्षण एवं ग्रामीण क्षेत्र के समग्र विकास को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही, यह परियोजना वागड़ क्षेत्र के जनजाति बहुल इलाकों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी।

गुना के डायल-112 हीरोज घायल हिरण के शावक को सुरक्षित वन विभाग के सुपुर्द किया

भोपाल  गुना जिले के थाना म्याना क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं मानवीय कार्रवाई से घायल हिरण के एक शावक को सुरक्षित संरक्षण प्रदान करते हुए वन विभाग के सुपुर्द किया गया। समय पर की गई इस कार्यवाही से वन्यजीव को उपचार एवं आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराई जा सकी। 07 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना म्याना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जमरा जंगल के पास एक हिरण का शावक घायल अवस्था में है, जिसे कुत्ते ने काट लिया है तथा पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही म्याना थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक  देवदत्त वर्मा एवं पायलट  राजेश राजपूत ने मौके पर पहुँचकर पाया कि वन क्षेत्र से अपने झुंड से बिछड़कर आया हिरण का शावक घायल हो गया था। डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं संवेदनशीलता का परिचय देते हुए घायल हिरण के शावक को सुरक्षित संरक्षण में लिया तथा एफआरव्ही वाहन की सहायता से उपचार एवं देखभाल हेतु फॉरेस्ट चौकी पहुँचाकर वन विभाग के अधिकारियों के सुपुर्द किया, जहाँ उसका उपचार किया जा रहा है। डायल-112 जवानों की मानवीय एवं संवेदनशील कार्यवाही से एक वन्यजीव को समय पर उपचार एवं संरक्षण उपलब्ध कराया जा सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा मानव जीवन के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी समान रूप से संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।