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सक्ति जिले के ठठारी गांव पहुंचे मुख्यमंत्री, चौपाल लगाकर सुनी ग्रामीणों की समस्याएं

रायपुर  सुशासन तिहार के अंतर्गत सक्ती जिले के ग्राम ठठारी के प्रवास पर पहुंचे मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने चतुर्भुज तालाब पार स्थित विशाल बरगद के पेड़ की छांव में जनचौपाल लगाकर ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। खुले वातावरण में आयोजित इस चौपाल में मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं, सुझाव प्राप्त किए तथा शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति का प्रत्यक्ष फीडबैक लिया। जनचौपाल को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य केवल योजनाओं की समीक्षा करना नहीं, बल्कि यह जानना भी है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं। उन्होंने ग्रामीणों से महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, बिजली, पानी तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में शीघ्र ही अत्याधुनिक सीएम हेल्पलाइन शुरू की जाएगी, जिसके माध्यम से नागरिक टोल फ्री नंबर, ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की व्यवस्था होगी तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हाल ही में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त के रूप में प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं के खातों में राशि अंतरित की गई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सम्मान के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी का लाभ लेकर उपभोक्ता बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि  रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से श्रद्धालुओं को तीर्थ यात्रा का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं तथा बस्तर में जनता के सहयोग से शांति और विकास का नया वातावरण स्थापित हुआ है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के समक्ष गांव की आवश्यकताओं, विकास कार्यों तथा विभिन्न योजनाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों और सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने चतुर्भुज विष्णु मंदिर के निकट श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आरती घाट निर्माण की घोषणा की। ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए ठठारी में बैंक शाखा खोलने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने ठठारी को नगर पंचायत बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने हेतु कलेक्टर को निर्देशित करते हुए कहा कि आने वाले समय में ठठारी को नगर पंचायत का दर्जा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य भी स्वीकृत करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और सहभागिता को मजबूत करना है। जब जनप्रतिनिधि और अधिकारी सीधे लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनते हैं, तभी योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना सुनिश्चित होता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित, संवेदनशील और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। बरगद की छांव में सजी यह चौपाल ग्रामीणों के लिए एक यादगार अवसर बन गई, जहां उन्हें अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का अवसर मिला। जनचौपाल में सांसद मती कमलेश जांगड़े, मती संयोगिता युद्धवीर सिंह जूदेव सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

संस्कृत शिक्षा व्यवस्था में सुधार की तैयारी, संचालन के लिए जल्द आएगी SOP

पटना. प्रदेश के संस्कृत स्कूलों के संचालन को ले शिक्षा विभाग मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर रहा है। संस्कृत विद्यालय अब एसओपी के माध्यम से ही संचालित होंगे। इसी क्रम में शिक्षा विभाग ने संस्कृत शिक्षा बोर्ड के दफ्तर को इंटर मीडिएट कांउसिल भवन में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। संस्कृत स्कूलों को ले बन रहे एसओपी के बारे में मिली जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था की जा रही कि सब कुछ डिजिटल मोड में उपलब्ध हो। अभी संस्कृत स्कूलों के बारे में एक जगह सभी जानकारी नहीं है। आसानी से मिलेगी जानकारी कुछ सूचनाएं संस्कृत शिक्षा बोर्ड के पास है और कुछ सचिवालय में। एसओपी के तहत अब संस्कृत स्कूलों को कितना अनुदान मिला और विद्यालय का संचालन कहां हो रहा यह जानकारी सहजता से मिल सकेगी। अभी यह मालूम करने में परेशानी है कि संस्कृत स्कूल बीच में ही कहां-कहां बंद हो गए। जो राजकीय संस्कृत संचालित हो रहे थे उनमें बहुतों के बंद होने की सूचना विभाग को मिलती रहती है पर विभाग के पास इसका विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं रहता। जो एसओपी बनाया जा रहा उसके हिस्से में यह जानकारी भी रहेगी कि कितने संस्कृत विद्यालय सही तरीके से संचालित हो रहे। एसओपी के माध्यम से यह गाइडलाइन उपलब्ध कराया जाएगा कि कब किस विद्यालय को अनुदान मिलना है। संस्कृत स्कूलों के शिक्षकों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया भी इसके माध्यम से नियमित की जाएगी। जिस संस्कृत विद्यालय में शिक्षकों की संख्या छात्रों के लिहाज से काफी कम है वहां आने वाले समय में नियुक्ति की प्रक्रिया भी आरंभ होगी। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जुलाई तक एसओपी के आने की उम्मीद है।  

आठ नगर निगमों को मिलेंगे नए मेयर, 7 पद सामान्य और मोगा सीट आरक्षित घोषित

मोगा. पंजाब में हाल ही में संपन्न हुए नगर निगम चुनावों के बाद अब मेयर पदों के चुनाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। स्थानीय निकाय विभाग ने आठ नगर निगमों में मेयर पदों के आरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी कर दिए हैं। विभाग की ओर से जारी पत्र के अनुसार मोगा नगर निगम में मेयर का पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा, जबकि शेष सात नगर निगमों में मेयर पद सामान्य श्रेणी के लिए खुले रहेंगे। स्थानीय निकाय विभाग द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि 26 मई 2026 को अबोहर, बटाला, बरनाला, बठिंडा, कपूरथला, मोगा, पठानकोट और साहिबजादा अजीत सिंह नगर नगर निगमों के आम चुनाव संपन्न हुए थे। चुनाव परिणाम आने के बाद अब मेयर पदों के आरक्षण और चुनाव संबंधी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2017 में लागू किए गए मेयर पदों के आरक्षण संबंधी नियमों के तहत निर्धारित रोस्टर प्रणाली के अनुसार मोगा नगर निगम का मेयर पद पिछड़े वर्ग (BC) के लिए आरक्षित किया गया है। इसके अलावा अबोहर, बटाला, बरनाला, बठिंडा, कपूरथला, पठानकोट और साहिबजादा अजीत सिंह नगर में मेयर पद सामान्य श्रेणी के लिए उपलब्ध रहेगा। मंडलायुक्तों को भेजे गए आदेश इस संबंध में जालंधर, फिरोजपुर, पटियाला, रूपनगर और फरीदकोट के मंडलायुक्तों को पत्र भेजकर आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि नगर निगमों के नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने के बाद मेयर चुनाव के लिए बैठक बुलाई जाए और चुनाव प्रक्रिया नियमानुसार संपन्न कराई जाए। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जहां मेयर पद आरक्षित श्रेणी के लिए निर्धारित किया गया है, वहां संबंधित श्रेणी के पात्र सदस्य को ही मेयर चुना जाना सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया के दौरान सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

हादसों पर रोक की तैयारी, 3814 खतरनाक भवनों को गिराने की कवायद तेज

भिलाई नगर. मानसून 15 जून से दस्तक देने वाला है और शहर के गरीबों के लिए 10-15 साल पहले बने 3814 आवास मौत का साया बन गए हैं। आईएचएसडीपी, वाम्बे, अटल व रैश्ने योजना के आवास अब जर्जर हो चुके हैं। कहीं सीढ़ी धंस गई, कहीं बालकनी – छज्जा टूट कर गिर रहे हैं, तो कहीं दीवारों से सरिए बाहर झांक रहे हैं। आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी ने सर्वे किया। रिपोर्ट में कई मकानों को रहने लायक नहीं, खंडहर की स्थिति बताया है। इसके बाद निगम ने हितग्राहियों को अंतिम नोटिस जारी कर दिया है। पीएम आवास योजना के नोडल अधिकारी ने बताया कि इन जर्जर मकानों को तोड़कर जी प्लस 2 स्तर की बहुमंजिला बिल्डिंग बनाई जाएगी। अभी जहां 12 परिवार रहते हैं, वहां नई बिल्डिंग में 18 से ज्यादा परिवार शिफ्ट हो सकेंगे। निगम अधिकारियों ने हितग्राहियों से पीएम आवास में शिफ्ट होने की अपील की है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन व्यापार एवं निवेश फोरम-2026 के डिजिटल प्लेटफार्म और वेबसाइट का किया शुभारंभ

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश तेजी से भारत के नए वैश्विक निवेश एवं निर्यात केंद्र के रूप में उभर रहा है। हमारा मध्यप्रदेश अब वैश्विक व्यापार जगत में भी अपनी सशक्त पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत तथा लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन देशों के बीच बढ़ती परस्पर आर्थिक साझेदारी में मध्यप्रदेश भी अपनी अधिकतम क्षमताओं के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश असीम अवसरों की धरती है। प्रदेश की स्थिर और पारदर्शी नीतियां निवेश और उद्योग फ्रेंडली हैं। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी, ऑटोमोबाइल, फार्मा इंडस्ट्री, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, डिफेंस सेक्टर, और टेक्नॉलजी के क्षेत्र में हम तेजी से प्रगति कर रहे हैं। हमारे पास 1.25 लाख एकड़ से अधिक का रेडी-टू-यूज़ लैंड बैंक उपलब्ध है। आज मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा हब बन चुका है। प्रदेश में 5 लाख किमी से अधिक के सुदृढ़ सड़क नेटवर्क और अत्याधुनिक रेल व हवाई कनेक्टिविटी ने यातायात को सुगम बना दिया है। अगले 5 सालों में हम 6 प्रमुख औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करेंगे, जो मालवा से बुंदेलखंड और निमाड़ से विंध्य तक रोड़ कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लैटिन-अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों के व्यापार प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश में निवेश, उत्पादन और नवाचार के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि हम आपके साथ एक ठोस और दीर्घकालिक साझेदारी के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में होने के कारण व्यापार-व्यवसाय के लिए सबसे अनुकूल स्थान है। राज्य में कानून- व्यवस्था की कोई परेशानी नहीं है। यहां औद्योगिक कुशल श्रमिकों की कोई कमी नहीं है। मध्यप्रदेश सबको अपनाने वाला राज्य है, जो एक बार आता है, यहीं का होकर रह जाता है। मध्यप्रदेश में खुले दिल से निवेश करें, यहां निवेश करना बड़े लाभ का सौदा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को इंदौर में आयोजित भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन व्यापार एवं निवेश मंच – 2026 के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर इस ट्रेड फोरम के उद्घाटन सत्र का विधिवत् आरंभ किया।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन व्यापार एवं निवेश फोरम-2026 के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए डिजिटल प्लेटफार्म और वेबसाइट का रिमोट से शुभारंभ किया।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन देशों के साझा व्यापार-व्यवसाय पर केन्द्रित स्पेशल मैगजीन 'द बिजनेस टायकून्स' का विमोचन भी किया।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विगत वित्त वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश का लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन देशों को निर्यात बढ़कर 3 हज़ार 835 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 19 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। इस उपलब्धि में फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र की विशेष भूमिका रही है।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, प्लास्टिक उत्पाद एवं जंबो बैग, कृषि आधारित उत्पाद तथा विनिर्माण क्षेत्र प्रदेश की निर्यात क्षमता के प्रमुख आधार बनकर उभरे हैं। ब्राजील, मेक्सिको, चिली, डोमिनिकन रिपब्लिक, अर्जेंटीना, पेरू और कोलंबिया जैसे देशों के साथ मध्यप्रदेश का व्यापारिक विनिमय लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।     मुख्यमंत्री ने कहा कि ये आंकड़े लैटिन अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों में ‘मेड इन इंडिया’ के साथ ‘मेड इन एमपी’ उत्पादों को मिल रहे स्नेह, अपनत्व, विश्वास और दिनों-दिन बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने अपने सुशासन और नेतृत्व क्षमता के बल पर मालवा को नई पहचान दिलवाई थी। उन्होंने कहा कि इंदौर प्राचीन काल में भी उन्नत व्यापार और व्यवसाय की सुगमता के कारण बड़ा व्यावसायिक केन्द्र हुआ करता था। पहले यहां सिल्क मार्ग से दुनियाभर में व्यापार होता था। भारत और लैटिन अमेरिका की परंपराओं में नजदीकियां दिखाई पड़ती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश आज भारत के सबसे तेज़ी से विकसित होते औद्योगिक राज्यों में से एक है। हम सच्चे अर्थों में ‘वोकल फॉर लोकल’ की अवधारणा को आगे बढ़ा रहे हैं, इसलिए मध्यप्रदेश की आर्थिक प्रगति अब ‘लोकल से ग्लोबल’ हो रही है। अब हम वैश्विक मूल्य श्रृंखला का भी एक मजबूत हिस्सा बन चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस तरह लैटिन अमेरिका की प्राचीन संस्कृतियों ने मदर अर्थ (Pachamama – पचमामा) को पूजा, वैसे ही हम पंच तत्वों और प्रकृति के कण-कण को पूजते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे उत्सवों का उल्लास, संगीत, अनुराग, पारिवारिक ताना-बाना और हमारी जनजातीय कलाओं की जीवंतता सबमें बड़ी समानताएं हैं। यह बताते हैं कि हमारे जीवन मूल्य और हमारे संस्कार मूलत: एक हैं, समान हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि आजादी के अमृतकाल में हमारा भारत अपनी क्षमता, योग्यता और विशेषताओं के साथ दुनियाभर में व्यापार, व्यवसाय और सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए कटिबद्ध है।     भारत और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच सहयोग के इस महान मंच की मेजबानी का अवसर मध्यप्रदेश को मिला है। आज हम सिर्फ़ देशों को नहीं, महाद्वीपों को जोड़ने वाली दीर्घकालिक साझेदारियों की नींव रख रहे हैं। यह मंच भारत, लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन देशों के बीच नई आर्थिक साझेदारी, नई संभावनाओं और नए विश्वास का सेतु है। भारत का हरेक राज्य अपनी क्षमताओं और विशेषताओं के साथ विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की सिद्धि में तत्पर है। मध्यप्रदेश भी इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर और पीथमपुर का विशेष ज़िक्र करते हुए कहा कि ये दोनों ही क्षेत्र आज फार्मास्यूटिकल्स का ग्लोबल हब बन चुके हैं। यहां निर्मित दवाएं ब्राजील, पेरू और चिली जैसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रही हैं, जिससे प्रदेश की औद्योगिक क्षमता और गुणवत्ता को वैश्विक मान्यता मिल रही है। ब्राजील की औद्योगिक जरूरतों के लिए मध्यप्रदेश सबसे भरोसेमंद और सप्लाई चेन पार्टनर की भूमिका निभा सकता है। पेरू के साथ इंजीनियरिंग मशीनों की सप्लाई के लिए मध्यप्रदेश एक भरोसेमंद पार्टनर बन सकता है। हम क्यूबा के विश्व प्रसिद्ध बायोटेक एवं फार्मा अनुसंधान के साथ मिलकर चिकित्सा क्षेत्र में नए नवाचार करने के लिए पूरी तरह तत्पर हैं। ब्राज़ील, मेक्सिको, चिली, डोमिनिकन रिपब्लिक, अर्जेंटीना, पेरू और कोलंबिया के साथ मध्यप्रदेश का निरंतर बढ़ता व्यापार … Read more

उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियां तेज, नमामि गंगे मिशन और विकास परियोजनाओं की होगी कड़ी परीक्षा

उज्जैन तीन साल की लंबी प्रतीक्षा और कड़े संघर्ष के बाद आखिरकार शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने वाले ''नमामी गंगे मिशन'' को केंद्र सरकार से हरी झंडी तो मिल गई है, लेकिन अब प्रशासन और निर्माण एजेंसी के सामने इससे भी बड़ी अग्निपरीक्षा शुरू होने जा रही है। गाजियाबाद (उत्तरप्रदेश) की ‘सोमवंशी एनवायरो फर्म’ को 81 करोड़ रुपये का टेंडर मंजूर होने के बाद, अब सबसे बड़ा संकट सिंहस्थ-2028 की समय-सीमा के भीतर इस पूरी परियोजना को धरातल पर उतारने का है। टेंडर की शर्तों के मुताबिक, इस पूरी परियोजना को पूरा करने के लिए 18 महीने का समय निर्धारित है। लेकिन तकनीकी और वित्तीय उलझनों के कारण जो परियोजना दो साल पहले शुरू हो जानी थी, उसमें तीन साल की भारी देरी हो चुकी है। इस लेती-लतीफी के कारण अब प्रशासन के पास समय बहुत कम बचा है। वर्तमान में उज्जैन शहर के भीतर सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों को लेकर सड़क चौड़ीकरण, नए घाटों का निर्माण, पुल, सीवरेज नेटवर्क और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े दर्जनों विकास कार्य एक साथ समानांतर रूप से चल रहे हैं। ऐसे में अलग-अलग निर्माण एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय बैठाना और बिना किसी बाधा के समयबद्ध तरीके से काम को अंजाम देना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा। यदि इस बार भी काम समय पर पूरा नहीं हुआ, तो सिंहस्थ से पहले शिप्रा शुद्धिकरण का मुख्य लक्ष्य सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है। एमआईसी कब करेगी मंजूर केंद्र सरकार ने तो ठेकेदार तय करने को स्वीकृति दे दी मगर एमआइसी यानी महापौर परिषद से स्वीकृति मिलना अभी बाकी है। ये स्वीकृति कब मिलेगी, स्वीकृति उपरांत कार्य आदेश कब जारी होगा, कब भूमि पूजन होगा, ये अभी तय नहीं हो सका है। 92.78 करोड़ की थी प्रशासनिक स्वीकृति, 81 करोड़ में हुआ टेंडर लॉक शिप्रा नदी में मिलने वाले भैरवगढ़ और पीलियाखाल क्षेत्र के दूषित पानी को रोकने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने 24 मई 2023 को ही 92 करोड़ 78 लाख रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दे दी थी। जून 2023 में महापौर परिषद (एमआइसी) से हरी झंडी मिलने के बाद चार फर्मों ने निविदा में भाग लिया, लेकिन कड़ी परीक्षण प्रक्रिया के चलते पूर्व के सभी प्रस्ताव निरस्त करने पड़े। इसके बाद इसी साल फरवरी में संशोधित दरों के साथ फिर से टेंडर बुलाए गए, जिसमें अब गाजियाबाद की कंपनी का चयन किया गया है। पीएलसी-स्काडा आधारित मानिटरिंग और 15 साल का मेंटेनेंस इस हाईटेक परियोजना के तहत पीलियाखाल क्षेत्र में 22.06 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और भैरवगढ़ क्षेत्र में 2.38 एमएलडी क्षमता का एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित होगा। बता दे कि अभी भैरवगढ़ क्षेत्र में बाटिक प्रिंट इकाइयों का केमिकल युक्त पानी सीधे शिप्रा में मिलता है, प्लांट लगने के बाद नहीं मिलेगा। योजना अनुसार दो सीवेज पंपिंग स्टेशन, दो एफ्लुएंट पंपिंग स्टेशन, 1420 मीटर राइजिंग मेन और 3500 मीटर एफ्लुएंट पाइपलाइन बिछाई जाएगी। जल की शुद्धता की रियल-टाइम जांच के लिए अत्याधुनिक पीएलसी-स्काडा आधारित मानिटरिंग सिस्टम लगेगा। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए यह प्लांट सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं से लैस होगा। खास बात यह है कि निर्माण पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसी ही अगले 15 वर्षों तक इसके संचालन और रख-रखाव का पूरा जिम्मा संभालेगी। सिंहस्थ-2028 के लिहाज से क्या बदलेगा नालों पर रोक: भैरवगढ़ की रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों और पीलियाखाल का गंदा पानी अब सीधे शिप्रा नदी में नहीं मिलेगा। शुद्ध जल: सीवेज का पूर्ण उपचार होने से नदी की जल गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार होगा। आस्था का सम्मान: सिंहस्थ महाकुंभ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को आचमन और स्नान के लिए स्वच्छ व अविरल शिप्रा जल मिल सकेगा।

मध्य प्रदेश में घटा स्कूल नामांकन, 109% से 76% पर पहुंचा आंकड़ा; NITI Aayog रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

भोपाल  मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा को लेकर एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। नीति आयोग द्वारा जारी वर्ष 2024–25 के ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश पिछले एक दशक में प्राथमिक स्कूली बच्चों के दाखिले के मामले में देश के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो गया है। 30 फीसदी गिरा आंकड़ा आंकड़े बताते हैं कि एक दशक पहले मध्य प्रदेश का प्राइमरी स्कूल एनरोलमेंट रेशियो करीब 109.3% हुआ करता था, जो अब लगभग 30 फीसदी गिरकर महज 76.3% पर सिमट गया है। देश के किसी भी बड़े राज्य में यह गिरावट सबसे बड़ी और चौंकाने वाली है। इस मामले में मध्य प्रदेश की स्थिति केवल बिहार (77.2%), गुजरात (79.6%), उत्तर प्रदेश (83.1%) और राजस्थान (88.3%) जैसे राज्यों के समकक्ष या उनसे भी बदतर हो चुकी है। लाखों बच्चों ने छोड़ी पढ़ाई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में इस स्तर की गिरावट का मतलब है कि लाखों बच्चे औपचारिक प्राथमिक शिक्षा प्रणाली से बाहर हो चुके हैं। इसके पीछे स्कूलों तक पहुंच की कमी, बीच में पढ़ाई छोड़ना, परिवारों का पलायन या फिर डेटा एंट्री में लापरवाही जैसे गंभीर कारण हो सकते हैं। मध्य प्रदेश देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में से एक है, इसलिए यहां प्रतिशत में मामूली बदलाव का असर भी लाखों बच्चों पर पड़ता है। इस भारी गिरावट के असली कारणों की पहचान करना बेहद जरूरी है। अगर बच्चे सच में स्कूल छोड़ रहे हैं, तो हमें मिड-डे मील को मजबूत करने, मुफ्त परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर और कैश ट्रांसफर जैसी योजनाओं पर तुरंत काम करना होगा। मेघालय ने बनाया इतिहास इसके विपरीत, देश के छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस मोर्चे पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। पूर्वोत्तर का मेघालय 180.7% के साथ देश में सबसे आगे है, जबकि मणिपुर, मिजोरम, गोवा और तेलंगाना जैसे राज्यों में नामांकन दर 100 प्रतिशत से भी ऊपर है, जो दिखाता है कि वहां तय उम्र से ज्यादा के बच्चे भी स्कूलों का रुख कर रहे हैं। इस गंभीर गिरावट पर मध्य प्रदेश पेरेंट्स एसोसिएशन ने नीतिगत दखल की मांग की है।

जयपुर एयरपोर्ट पर हड़कंप: 19 वर्षीय युवती में इबोला जैसे लक्षण, सैंपल पुणे भेजा गया

जयपुर  राजस्थान की राजधानी जयपुर में इबोला संक्रमण का एक संदिग्ध मामला सामने आने से चिकित्सा महकमे में हड़कंप मच गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शारजाह से जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची एक 19 वर्षीय युगांडा की युवती में इबोला से मिलते-जुलते लक्षण पाए गए हैं। राजस्थान में इस खतरनाक बीमारी का यह पहला संदिग्ध मामला है। रूटीन स्क्रीनिंग में सामने आया मामला स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, युवती शुक्रवार को एयर अरबिया की फ्लाइट से शारजाह से जयपुर पहुंची थी। एयरपोर्ट पर रूटीन थर्मल और मेडिकल स्क्रीनिंग के दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों को उसमें संदिग्ध लक्षण दिखे। एहतियात के तौर पर युवती को तुरंत राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे विशेष रूप से तैयार आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों का कहना संक्रमण की पुष्टि नहीं, केवल संदेह RUHS के प्रिंसिपल डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने स्पष्ट किया है कि अभी तक युवती में इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। मरीज की ट्रेवल हिस्ट्री और शुरुआती लक्षणों को देखते हुए इसे केवल एक संदिग्ध मामला मानकर इलाज और निगरानी की जा रही है। एहतियात के तौर पर मानक आइसोलेशन, निगरानी और कांटेक्ट-ट्रेसिंग (संपर्क में आए लोगों की पहचान) से जुड़े सभी प्रोटोकॉल एक्टिव कर दिए गए हैं। महीने भर से बीमार है युवती स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि युवती ने पिछले करीब एक महीने से पेट दर्द और भूख न लगने (लॉस ऑफ ऐपेटाइट) की शिकायत की है। इसके अलावा वह सिरदर्द से भी पीड़ित है। फिलहाल उसे अस्पताल के क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा गया है। RUHS अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा, "मरीज के लक्षण इबोला की ओर इशारा जरूर करते हैं, लेकिन सिर्फ लक्षणों के आधार पर बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।" जांच के लिए पुणे भेजे गए सैंपल डॉक्टरों के मुताबिक, प्रोटोकॉल के तहत मरीज का पहला ब्लड सैंपल जांच के लिए पुणे की एक विशेष प्रयोगशाला (NIV) में भेज दिया गया है। वहीं, दूसरा सैंपल नियम के अनुसार 48 घंटे बाद भेजा जाएगा। दोनों जांच रिपोर्ट आने तक युवती को सख्त क्वारंटाइन में ही रखा जाएगा। पहली रिपोर्ट शनिवार शाम या रविवार सुबह तक आने की उम्मीद है। सह-यात्रियों के लिए भी एडवाइजरी जारी प्रशासन अब उन मेडिकल स्क्रीनिग की भी जांच कर रहा है, जो युवती की शारजाह से रवानगी के वक्त हुई थी। इसके साथ ही, उक्त फ्लाइट में युवती के साथ यात्रा करने वाले अन्य यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी गई है। उनसे अपने स्वास्थ्य की निगरानी करने और किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत रिपोर्ट करने को कहा गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भारत में अब तक इबोला का एक भी कन्फर्म मामला सामने नहीं आया है, इसलिए लोग पैनिक (घबराएं) न करें और जांच रिपोर्ट का इंतजार करें। यदि रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो युवती को 21 दिनों तक पूरी तरह आइसोलेशन में रखकर निर्धारित गाइडलाइंस के तहत इलाज दिया जाएगा।  

दिल्ली फायर हादसा केस में बड़ी कार्रवाई: एक और आरोपी गिरफ्तार, 21 की मौत की जांच तेज

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस ने मालवीय नगर अग्निकांड में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा, पुलिस ने कुछ अन्य लोगों को अपनी हिरासत में लिया है। फिलहाल, पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, शनिवार को गिरफ्तार आरोपी की पहचान कुक केशव नेगी के रूप में हुई है, जो दिलशाद गार्डन का रहने वाला है। दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि आग लगने में कुक की लापरवाही थी। जांच के दौरान अधिकारियों को कथित तौर पर सुरक्षा नियमों के कई उल्लंघन और इमारत के फायर सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर में भी गंभीर कमियां मिली थीं। तीन आरोपी पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार इस मामले में पुलिस होटल के मालिक लवकेश बजाज के अलावा अन्य आरोपी स्वीटी सरकार और पुष्पो सरकार को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। मालिक बजाज बाद में चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। अग्निकांड में 21 लोगों की मौत बता दें कि इस घटना में कई विदेशी नागरिकों समेत कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई थी। इन 21 लोगों में से 9 भारतीय थे, जबकि 12 विदेशी नागरिक थे, जो बांग्लादेश, लाइबेरिया, नाइजीरिया और मोजाम्बिक के रहने वाले थे। इमारत से 47 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। साकेत स्थित मैक्स हॉस्पिटल के बयान के मुताबिक, दक्षिण दिल्ली के इस अस्पताल में अभी कुल 15 मरीज भर्ती हैं। इनमें से 13 विदेशी हैं। वेंटिलेटर पर मौजूद सभी मरीज स्थिर हैं और उनमें सुधार के संकेत दिख रहे हैं। दिल्ली अग्निशमन सेवा के अनुसार, आग की लपटों ने इमारत के बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और ऊपर की 5 मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे गर्मी और धुएं के कारण काफी नकसान हुआ। दिल्ली पुलिस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि रेस्टोरेंट में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी थी। जांच टीम को घटना के दौरान किसी भी एलपीजी सिलेंडर में धमाका होने का कोई सबूत नहीं मिला। सूत्रों ने दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच के आधार पर बताया कि आग इतनी तब फैलती है, जब इंटरनल वायरिंग में शॉर्ट सर्किट हुआ हो। सूत्रों के अनुसार, होटल के बेसमेंट और टॉप फ्लोर पर 2 किचन बने हुए थे। दोनों किचन के अंदर एलपीजी सिलेंडर रखे हुए थे। इन सिलेंडरों में कोई ब्लास्ट नहीं हुआ।

छोटी रकम का बड़ा केस: 19 साल बाद खत्म हुआ 7,299 रुपये का यात्रा भत्ता विवाद

 चंडीगढ महज 7,299 रुपये के यात्रा भत्ता (टीए) बिल को लेकर शुरू हुआ विवाद 19 वर्ष तक अदालतों में चलता रहा, लेकिन आखिरकार पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार की नियमित द्वितीय अपील को खारिज करते हुए इस लंबे कानूनी विवाद पर विराम लगा दिया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब मूल वाद की राशि 25 हजार रुपये से कम हो तो सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 102 के तहत नियमित द्वितीय अपील सुनवाई योग्य नहीं होती। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने यह फैसला हरियाणा सरकार और उसके अधिकारियों द्वारा दायर अपील पर सुनाया 7299 यात्रा भत्ता बिलों का नहीं किया भुगतान मामले की शुरुआत उस समय हुई जब रोहतक के ओपी खन्ना ने अपने लंबित टीए बिलों के भुगतान के लिए दीवानी मुकदमा दायर किया। रिकॉर्ड के अनुसार दिसंबर 1999 से अप्रैल 2002 के बीच विभिन्न सरकारी दौरों से संबंधित 7,299 रुपये के यात्रा भत्ता बिलों का भुगतान नहीं किया गया था। खन्ना ने दावा किया कि बिलों का भुगतान अनुचित रूप से रोका गया है और उन्होंने राशि के साथ ब्याज की भी मांग की। दूसरी ओर हरियाणा सरकार का पक्ष था कि संबंधित टीए बिलों को बजट की अनुपलब्धता तथा स्थानीय यात्रा भत्ता और किलोमीटर संबंधी दावों पर उठाई गई आपत्तियों के कारण रोका गया था। विभाग ने यह भी कहा कि मामले को उद्योग निदेशक, हरियाणा के पास स्पष्टीकरण और मार्गदर्शन के लिए भेजा गया था तथा उठाई गई आपत्तियों की जानकारी कर्मचारी को दे दी गई थी। रोहतक की अदालत में दायर की अपील वर्ष 2006 में सिविल जज (जूनियर डिवीजन), रोहतक ने ओपी खन्ना का मुकदमा खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने जिला जज, रोहतक की अदालत में अपील दायर की प्रथम अपीलीय अदालत ने 1 फरवरी 2007 को निचली अदालत का फैसला पलटते हुए खन्ना के पक्ष में निर्णय दिया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट में नियमित द्वितीय अपील दाखिल कर दी। सरकार की ओर से दलील दी गई कि चूंकि मूल विवादित राशि 10 हजार रुपये से कम थी, इसलिए प्रथम अपील ही सुनवाई योग्य नहीं थी। वहीं न्याय मित्र अंकुर मित्तल ने अदालत को बताया कि सीपीसी की धारा 102 स्पष्ट रूप से कहती है कि 25 हजार रुपये से कम राशि वाले मामलों में दूसरी अपील नहीं की जा सकती। इसलिए सरकार की यह अपील प्रारंभिक स्तर पर ही अस्वीकार्य है। कई गुना अधिक रकम मुकदमेबाजी में खर्च की हाई कोर्ट ने सरकारी विभागों द्वारा बेहद छोटी रकम के मामलों में वर्षों तक मुकदमेबाजी करने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि कई बार सरकारी विभाग विवादित राशि से कई गुना अधिक रकम मुकदमेबाजी पर खर्च कर देते हैं। इससे न केवल सार्वजनिक धन की बर्बादी होती है, बल्कि न्यायालयों का बहुमूल्य समय भी ऐसे मामलों में खर्च होता है। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि मूल वाद की राशि मात्र 7,299 रुपये थी, जो 25 हजार रुपये की वैधानिक सीमा से काफी कम है। ऐसे में सीपीसी की धारा 102 के स्पष्ट परविधान के कारण नियमित द्वितीय अपील सुनवाई योग्य नहीं है। अदालत ने इसी आधार पर हरियाणा सरकार की अपील को खारिज कर दिया।