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पंजाब चुनाव 2027 में होगी नेताओं के व्यक्तिगत जनाधार की परीक्षा

जालंधर  पंजाब की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि पुरानी सियासी विरासत और नए चेहरों के बीच भी दिखाई दे रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव ने पंजाब की राजनीति में ऐसा भूचाल ला दिया था, जिसमें दशकों से सत्ता और संगठन पर प्रभाव रखने वाले बड़े-बड़े राजनीतिक परिवारों के दिग्गज चुनाव हार गए और ऐसे चेहरे विधानसभा पहुंच गए, जिन्हें चुनाव से कुछ समय पहले तक राज्य की राजनीति में बहुत कम लोग जानते थे।  आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा समेत स्थापित राजनीतिक ताकतों को करारा झटका दिया। कांग्रेस 77 से घटकर 18 सीटों पर आ गई, जबकि शिरोमणि अकाली दल महज तीन सीटों तक सिमट गया। 2022 में मिले थे चाैंकाने वाले नतीजे 2022 में पंजाब ने जिन राजनीतिक दिग्गजों को बाहर का रास्ता दिखाया, उनमें पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, बिक्रम सिंह मजीठिया, तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नवजोत सिंह सिद्धू और कई अन्य बड़े नाम शामिल थे। चन्नी को चमकौर साहिब और भदौर दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, जबकि सुखबीर बादल अपनी पारंपरिक जलालाबाद सीट भी नहीं बचा सके। प्रकाश सिंह बादल को भी अपेक्षाकृत नए उम्मीदवार से हार मिली। मजीठिया को अमृतसर ईस्ट में पहली बार चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार जीवनज्योत कौर ने शिकस्त दी। यानी 2022 में लड़ाई सिर्फ पार्टियों की नहीं रही, बल्कि मतदाता ने स्थापित राजनीतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही राजनीतिक पकड़ को भी चुनौती दी। राजनीति विशेषज्ञ प्रोफेसर कुणाल मेहता के अनुसार, “2022 का जनादेश पंजाब की पारंपरिक राजनीतिक विरासत के लिए एक बड़ा झटका था। मतदाताओं ने यह स्पष्ट कर दिया था कि केवल परिवार का नाम और राजनीतिक विरासत अब चुनाव जीतने की गारंटी नहीं है। 2027 में इन राजनीतिक परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी खोई हुई विश्वसनीयता और जनाधार को दोबारा हासिल करने की होगी। अब देखना यह है कि पुरानी विरासत खुद को बदलते पंजाब की राजनीतिक अपेक्षाओं के साथ जोड़ पाती है या नए चेहरे इस बदलाव की प्रक्रिया को आगे ले जाते हैं।” परिवारवाद का स्वरूप बदला पंजाब में परिवारवाद खत्म नहीं हुआ है, बल्कि उसका स्वरूप बदल गया है। बादल परिवार, जाखड़ परिवार, बेअंत सिंह परिवार और दूसरे राजनीतिक घरानों की अगली पीढ़ियां अलग-अलग राजनीतिक मंचों पर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं। कुछ पुराने नेता सत्ता से बाहर हैं, कुछ ने राजनीतिक दल बदल लिए हैं और कुछ नए राजनीतिक गठबंधनों के जरिए अपनी जमीन तैयार कर रहे हैं। 2027 में इन सभी परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या उनकी पारंपरिक पहचान आज भी मतदाता को प्रभावित करती है या पंजाब का वोटर अब उम्मीदवार की व्यक्तिगत कार्यक्षमता, स्थानीय पकड़ और नए राजनीतिक विकल्प को ज्यादा महत्व देता है। 2027 में अलग होंगी परिस्थितियां 2022 के चुनाव ने यह साबित कर दिया था कि पंजाब का मतदाता बड़े नामों को भी हराने का फैसला कर सकता है। लेकिन 2027 में परिस्थितियां अलग होंगी। अब आम आदमी पार्टी के पास पांच साल की सरकार का रिपोर्ट कार्ड होगा और उसे अपने कामकाज तथा वादों का हिसाब जनता को देना होगा। कांग्रेस सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, अकाली दल अपनी खोई हुई पंथक और ग्रामीण जमीन वापस लेने के लिए मैदान में होगा और भाजपा पंजाब में अपने स्वतंत्र राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश करेगी। ऐसे में पुराने राजनीतिक परिवारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे 2022 की हार को भुलाकर मतदाता के बीच अपनी नई स्वीकार्यता पैदा कर सकें। यही वजह है कि 2027 का पंजाब विधानसभा चुनाव केवल आम आदमी पार्टी बनाम कांग्रेस, अकाली दल बनाम भाजपा का मुकाबला नहीं होगा। इसके भीतर एक और बड़ी लड़ाई चलेगी राजनीतिक विरासत बनाम नए चेहरे, पुराने नाम बनाम नई स्वीकार्यता और परिवारवाद बनाम व्यक्तिगत जनाधार। 2022 में जिन नेताओं को जनता ने सत्ता से बाहर किया था, उनके सामने अब वापसी का मौका है, लेकिन इस बार केवल परिवार का नाम पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें जनता को यह विश्वास दिलाना होगा कि वे बदलते पंजाब की नई राजनीतिक जरूरतों को समझते हैं और पुराने राजनीतिक ढर्रे से आगे निकल चुके हैं। पंजाब की राजनीति में इसलिए 2027 का सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होगा कि कौन सा परिवार कितनी सीटें जीतता है, बल्कि यह होगा कि क्या पंजाब का मतदाता 2022 में शुरू हुई राजनीतिक पीढ़ीगत बदलाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है या फिर पुराने राजनीतिक घरानों को अपनी खोई हुई जमीन वापस सौंप देता है। 2022 में बड़े-बड़े सियासी किलों की दीवारें गिर गई थीं; 2027 में फैसला होगा कि वे किले दोबारा खड़े होते हैं या पंजाब की राजनीति में नए चेहरों का दौर स्थायी रूप से स्थापित हो जाता है।   विरासत बचाने की लड़ाई यही वजह है कि 2027 का विधानसभा चुनाव अब पुराने राजनीतिक परिवारों के लिए केवल सत्ता में वापसी का चुनाव नहीं बल्कि अपनी राजनीतिक विरासत बचाने की लड़ाई भी बनता दिखाई दे रहा है। करीब पांच साल बाद वही नेता और उनके राजनीतिक परिवार फिर अपनी जमीन तलाश रहे हैं। सुखबीर सिंह बादल के सामने अकाली दल को दोबारा मजबूत करने के साथ-साथ बादल परिवार की राजनीतिक पकड़ को बचाने की चुनौती है। 2022 की करारी हार के बाद अकाली दल तीन सीटों तक सिमट गया था और अब पार्टी अपने पारंपरिक पंथक तथा ग्रामीण आधार को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 2027 से पहले अकाली दल की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता इस बात का संकेत है कि बादल परिवार अपनी खोई हुई जमीन वापस लेने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। कांग्रेस के सामने बड़ी चुनाैती कांग्रेस के लिए भी स्थिति कम चुनौतीपूर्ण नहीं है। चरणजीत सिंह चन्नी 2022 में मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर मैदान में उतरे थे, लेकिन दोनों सीटों से हार गए। इसके बावजूद उनकी राजनीतिक यात्रा समाप्त नहीं हुई। 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन ने पार्टी को दोबारा उम्मीद दी। अब 2027 में कांग्रेस पुराने चेहरों, नए नेतृत्व और … Read more

MP में मानसून का आखिरी दौर, 4.3 इंच बारिश से पूरा होगा सीजन का कोटा

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई का समय नजदीक आ रहा है, लेकिन बारिश का आंकड़ा अभी सामान्य से पीछे है। ऐसे में सितंबर के आखिरी दौर में सक्रिय होने वाला मौसम तंत्र प्रदेश के लिए अहम रहेगा। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिससे प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश बढ़ने की संभावना है। तंत्र मजबूत रहा तो मानसून का सामान्य कोटा पूरा हो सकता है। प्रदेश में मंगलवार तक 33 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है, जबकि पूरे मानसून सीजन का सामान्य औसत 37.3 इंच है। यानी सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए अब करीब 4.3 इंच बारिश और चाहिए। फिलहाल प्रदेश में सामान्य से करीब 6% कम बारिश हुई है। 17 से 19 सितंबर तक बढ़ेगी बारिश की गतिविधि मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, 17 से 19 सितंबर के बीच पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां ज्यादा व्यापक हो सकती हैं। वहीं, 18 से 21 सितंबर के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। इसके बाद 19 सितंबर के बाद बनने वाला नया सिस्टम प्रदेश में बारिश का एक और दौर ला सकता है। इसकी ताकत और सक्रियता पर यह निर्भर करेगा कि मानसून के विदा होने से पहले प्रदेश में कितनी बारिश होती है।मंगलवार को पश्चिमी हिस्से में निम्न दाब क्षेत्र सक्रिय रहा। मानसून ट्रफ की गतिविधियां भी बनी रहीं, लेकिन इसका असर प्रदेश में तेज बारिश के रूप में नहीं दिखा। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन में धूप खिली रही। मैहर में शाम के समय तेज बारिश हुई। 17 से 19 सितंबर तक पश्चिमी मध्य प्रदेश में वर्षा गतिविधि के अधिक व्यापक होने की संभावना है। 18 से 21 सितंबर तक पूर्वी हिस्से में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। मंगलवार को पश्चिमी हिस्से में एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) एक्टिव रहा। मानसून ट्रफ की एक्टिविटी भी देखने को मिली, लेकिन प्रदेश के किसी भी जिले में तेज बारिश नहीं हुई। भोपाल में धूप खिली रही। इंदौर, उज्जैन में भी ऐसा ही मौसम रहा। अब तक कोटे की 88.5% बारिश बता दें कि मानसूनी सीजन को अब 14 दिन बाकी बचे हैं। मंगलवार तक प्रदेश में 33 इंच यानी, 88.5% बारिश हुई है। भोपाल, ग्वालियर सहित 18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इन जिलों में अब जो भी बारिश होगी, वह बोनस रहेगी। 18 जिलों में भोपाल, राजगढ़्र, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया भी शामिल हैं। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत 37 जिलों में कम बारिश हुई है। आलीराजपुर में तो सामान्य की आधी बारिश भी नहीं हुई, जबकि निवाड़ी में 49% पानी ज्यादा गिर चुका है। 88.5% बारिश पूरी, 14 दिन बाकी मानसून सीजन खत्म होने में अब करीब 14 दिन बाकी हैं। 1 जून से 30 सितंबर तक चलने वाले मानसूनी सीजन में प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का 88.5% कोटा पूरा हो चुका है।18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं। इन जिलों में आगे होने वाली बारिश  सामान्य आंकड़े से अतिरिक्त होगी। वहीं इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिले सामान्य बारिश से पीछे हैं। अलीराजपुर में सामान्य की आधी बारिश भी नहीं हो सकी है। इसके उलट निवाड़ी में सामान्य से 49% ज्यादा पानी गिर चुका है।  जून की कमी ने बिगाड़ा पूरा हिसाब इस मानसून में सबसे बड़ी कमी जून में रही। जून में प्रदेश में सामान्य से 14% कम बारिश हुई। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से आंकड़े में सुधार हुआ, लेकिन इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक आया। जुलाई के आखिरी सप्ताह में मजबूत मौसम सिस्टम सक्रिय हुआ और बारिश बढ़ी, फिर भी पूरे जुलाई में सामान्य से 13% कम बारिश दर्ज हुई। अगस्त में अच्छी बारिश हुई, लेकिन शुरुआती महीनों की कमी पूरी नहीं हो सकी। यही वजह है कि मानसून सीजन खत्म होने में दो सप्ताह से भी कम समय बचा है और प्रदेश अभी भी सामान्य बारिश से 6% पीछे है। मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य बारिश 37.3 इंच मानी जाती है। इसके मुकाबले अब तक 33 इंच पानी गिर चुका है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 38 से 39 इंच के बीच है। 

संगीतमय होगा विद्यालय का माहौल, संगीत-तकनीक के संगम से तैयार होंगी 12 प्रेरणादायक प्रार्थनाएं

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विद्यालयी शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के साथ विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन और रचनात्मकता को भी नई दिशा दे रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा श्री पार्थ सारथी सेन शर्मा की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में प्रदेश के बेसिक एवं माध्यमिक विद्यालयों की प्रार्थना सभा को अधिक प्रभावी, संगीतमय और व्यवस्थित स्वरूप देने की पहल आगे बढ़ाई जा रही है। इसके अंतर्गत 12 प्रेरणादायक प्रार्थनाओं की संगीतबद्ध वीडियो सामग्री तैयार की जाएगी।  इसी क्रम में बुधवार को राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान (एसआईईटी), निशातगंज के सभागार में संगीत शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की कार्यशाला संपन्न हुई। एसआईईटी के निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र के निर्देशन में हुई कार्यशाला में चयनित प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस पहल से विद्यालयों को एक व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण संगीतमय प्रार्थना सामग्री उपलब्ध कराने के साथ संगीत, तकनीक, अनुशासन और प्रेरक मूल्यों को विद्यालयी वातावरण से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।   सभी विद्यालयों तक पहुंचेंगी संगीतमय प्रार्थनाएं एसआईईटी के निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र ने बताया कि प्रदेश के सभी विद्यालयों की प्रार्थना सभा में प्रेरणादायक और संगीतमय प्रार्थनाएं हों, यही पहल का मुख्य उद्देश्य है। लखनऊ मंडल की टीम के सहयोग से 12 प्रार्थनाओं की रीयल टाइम शूटिंग और रिकॉर्डिंग की जाएगी। संगीत शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के साथ प्रार्थनाओं को स्टूडियो में रिकॉर्ड करने के बाद तकनीकी रूप से संपादित कर अंतिम वीडियो सामग्री तैयार की जाएगी। स्टूडियो तकनीक का लाइव डेमो कार्यशाला में स्टूडियो रिकॉर्डिंग एवं कराओके तकनीक का लाइव डेमो, लिरिक्स डिस्प्ले सिस्टम और ऑडियो मिक्सिंग तकनीक का प्रस्तुतिकरण किया गया। शिक्षकों को रिकॉर्डिंग प्रक्रिया की जानकारी देने के साथ समूह गायन का अभ्यास भी कराया गया। कार्यशाला में 12 प्रेरणादायक प्रार्थनाओं का परिचय और विद्यालयों में इनके क्रियान्वयन की योजना पर भी चर्चा हुई।  डिजिटल मंचों पर उपलब्ध होगी सामग्री डॉ. मुकेश चंद्र ने बताया कि रिकॉर्डिंग और संपादन के बाद तैयार अंतिम वीडियो सामग्री को यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम सहित अन्य डिजिटल मंचों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे विद्यालय और शिक्षक अपनी आवश्यकता के अनुसार इनका उपयोग प्रार्थना सभा में कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि हर बच्चे में संभावना होती है और शिक्षक का कार्य उसकी योग्यता को पहचानकर निखारना है। विद्यार्थियों को सही दिशा में निरंतर प्रयास करने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि देश की सेवा पढ़कर करेंगे, पढ़ाकर करेंगे और अच्छा इंसान बनाकर करेंगे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का दायित्व पढ़ना और अपने ज्ञान को दूसरे विद्यार्थियों तक पहुंचाना भी है। एसआईईटी का प्रयास विद्यार्थियों के लिए उपयोगी अध्ययन सामग्री को डिजिटल और वीडियो सामग्री के रूप में तैयार कर उन तक पहुंचाना है। 12 प्रेरणादायक प्रार्थनाओं की होगी रिकॉर्डिंग इस पहल के अंतर्गत ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’, ‘हमको मन की शक्ति देना’, ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’, ‘तेरी है जमीन तेरा आसमान’, ‘ओ पालनहारे’, ‘तुम्हीं हो माता पिता तुम्हीं हो’, ‘तू प्यार का सागर है’, ‘ज्योति से ज्योति जगाते चलो’, ‘बादल पे पांव है’, ‘इंसाफ की डगर पे’, ‘हम होंगे कामयाब’ और ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं’ जैसी 12 प्रेरणादायक प्रार्थनाओं को संगीतबद्ध कर वीडियो रूप में तैयार किया जाएगा। कार्यशाला के बाद संगीत शिक्षकों एवं छात्राओं को एसआईईटी स्टूडियो का भ्रमण कराया गया और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। लखनऊ मंडल के संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार ने रीयल टाइम रिकॉर्डिंग को लेकर सुझाव दिए। विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार उपस्थित रहे, जबकि प्रशासनिक अधिकारी अजीत सिंह ने कार्यशाला का संचालन किया।

मंत्रीपरमार ने जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज द्वारा विकसित ‘सनातन कैलेंडर एआई’ एवं ‘अंतर्-गीता’ मोबाइल ऐप का किया विमोचन

भोपाल  भारतीय ज्ञान परम्परा में ज्ञान और विज्ञान का समृद्ध भंडार निहित है। इस ज्ञान को आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। परम्परा, ज्ञान और तकनीक का समन्वय नवाचार के साथ-साथ युवाओं को अपनी गौरवशाली विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन सकता है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्रीइन्दर सिंह परमार ने कही। मंत्रीपरमार ने बुधवार को भोपाल में मंत्रालय स्थित प्रतिकक्ष में जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज, जबलपुर द्वारा विकसित ‘सनातन कैलेंडर एआई’ एवं ‘अंतर्-गीता’ मोबाइल ऐप का विमोचन किया। भारतीय ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की अभिनव पहल मंत्रीपरमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान नहीं है, बल्कि इसमें जीवन को सार्थक एवं संतुलित बनाने वाले ज्ञान और अनुभव का व्यापक भंडार है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से इस ज्ञान को सरल, सहज और युवाओं के अनुकूल स्वरूप में प्रस्तुत करना नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  परमार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल तकनीकी दक्षता प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, ज्ञान परंपरा और मूल्यों से जोड़ते हुए भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाना भी है। जब तकनीक का उपयोग भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए किया जाता है, तो नवाचार का स्वरूप और अधिक सार्थक हो जाता है। ‘सनातन कैलेंडर एआई’ में पंचांग एवं धार्मिक ज्ञान की डिजिटल सुविधा जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज द्वारा विकसित ‘सनातन कैलेंडर एआई’ के माध्यम से पंचांग, व्रत-पर्व, पूजा-विधि एवं धार्मिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। इसके माध्यम से भारतीय परंपराओं और धार्मिक ज्ञान से संबंधित जानकारी को डिजिटल माध्यम से सहज एवं सुगम रूप में उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। ‘अंतर्-गीता’ से नई पीढ़ी तक पहुंचेगा गीता का जीवनोपयोगी ज्ञान ‘अंतर्-गीता’ मोबाइल ऐप के माध्यम से मद्भगवद्गीता के जीवनोपयोगी ज्ञान को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। आधुनिक डिजिटल माध्यम के जरिए गीता के जीवन-दर्शन एवं संदेश को युवाओं के लिए अधिक सहज और संवादात्मक बनाने की दिशा में यह अभिनव पहल है। मंत्रीपरमार ने इस नवाचारी प्रयास के लिए जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज की पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास शिक्षा, तकनीक और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय को नई दिशा देने के साथ विद्यार्थियों में नवाचार एवं अनुसंधान की भावना को भी प्रोत्साहित करेंगे।  परमार ने कहा कि प्रदेश के तकनीकी शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी प्रयोगों के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने वाली ऐसी पहलें इसी उद्देश्य को सार्थक करती हैं। इस अवसर पर जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजीव चांडक, अनुसंधान एवं विकास अधिष्ठाता डॉ. कमल कुमार कुशवाहा, कंप्यूटर विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. सौरभ सिंह, छात्र अभय बैरागी एवं छात्रा अविशा गुप्ता सहित टीम के अन्य सदस्य उपस्थित थे।    

1 दिसंबर से घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक, परिवार के सभी सदस्यों का नाम दर्ज करना जरूरी

लखनऊ  जनगणना-2027 के दूसरे चरण की तैयारियां उत्तर प्रदेश में तेज हो गई हैं। 16 से 30 नवंबर तक लोग घर बैठे स्व-गणना कर सकेंगे। इसके बाद एक दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक प्रगणक घर-घर जाकर परिवारों का ब्योरा दर्ज करेंगे। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे परिवार के सभी सदस्यों का नाम जरूर दर्ज कराएं। नाम छूटने पर सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। मंगलवार को लखनऊ के बख्शी का तालाब स्थित दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान में मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण शुरू हुआ। निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने बताया कि जनगणना का उद्देश्य किसी घर या व्यक्ति को छूटने से बचाना और दोहरी गणना रोकना है। स्व-गणना के बाद परिवार को एक आईडी मिलेगी, जिसे प्रगणक के पहुंचने पर दिखाना होगा। ऑनलाइन सुविधा का लाभ न उठा पाने वाले परिवारों का ब्योरा प्रगणक मौके पर दर्ज करेंगे। 5 जनवरी 2027 की मध्यरात्रि को जनगणना का संदर्भ समय माना जाएगा। 5 से 9 जनवरी तक पुनरीक्षण राउंड में जन्म और मृत्यु की जानकारी अपडेट की जा सकेगी। इसको गंभीरता से करें… अधिकारियों ने जनगणना प्रक्रिया में लगे अफसरो व कर्मियों से कहा कि किराएदार, प्रवासी मजदूर, निर्माण स्थलों पर रहने वाले श्रमिक, छात्रावासों के छात्र, झुग्गी-बस्ती के परिवार, नवविवाहित महिलाएं और हाल में जन्मे बच्चों के नाम छूटने का खतरा अधिक रहता है। परिवारों को नवजात, बुजुर्ग और दिव्यांग सदस्यों का नाम विशेष रूप से जांचना चाहिए। सही जानकारी ही दें प्रदेश में 4,78,783 गणना ब्लॉक हैं। करीब 5,63,000 प्रगणक और पर्यवेक्षक लगाए जाएंगे। 305 मास्टर ट्रेनर 7,500 फील्ड ट्रेनरों को प्रशिक्षण देंगे। अधिकारियों ने नागरिकों से सही जानकारी देने और संदिग्ध व्यक्ति को ब्योरा न देने की अपील की है।

मध्यप्रदेश की बेटी अब विश्व मंच पर दिखाएगी दम

भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य ताइक्वांडो अकादमी की प्रतिभाशाली खिलाड़ी मान्या मिश्रा का चयन ISF जिम्नेसियाड वर्ल्ड स्कूल गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में हुआ है। मान्या अंडर-63 किलोग्राम भारवर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। यह प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता 3 से 8 दिसंबर 2026 तक रियो डी जेनेरियो, ब्राजील में आयोजित होगी। SGFI चयन ट्रायल में शानदार प्रदर्शन मान्या मिश्रा ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम में स्थान बनाया। उनका चयन 14 एवं 15 सितंबर 2026 को रायपुर में आयोजित SGFI चयन ट्रायल के माध्यम से हुआ। प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का गौरव हासिल किया है। विश्व मंच पर दिखाएंगी प्रतिभा ISF जिम्नेसियाड वर्ल्ड स्कूल गेम्स विश्व स्तर की स्कूली खेल प्रतियोगिता है, जिसमें विभिन्न देशों के युवा खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। ब्राजील में आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में मान्या भारत की ओर से ताइक्वांडो स्पर्धा में अपना कौशल प्रदर्शित करेंगी। खेल मंत्रीविश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई खेल एवं युवा कल्याण मंत्रीविश्वास कैलाश सारंग ने मान्या मिश्रा के भारतीय टीम में चयन पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों का राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। मान्या का चयन अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणादायी है। मंत्रीसारंग ने विश्वास व्यक्त किया कि मान्या अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश और मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेंगी।    

विश्वकर्मा जयंती व पीएम मोदी के जन्मदिवस पर कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे मुख्यमंत्री

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही सीएम योगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर 'आशीर्वाद का दीया' भी प्रज्ज्वलित करेंगे। इसके साथ ही सीएम योगी अन्य कार्यक्रमों में भी उपस्थित रहेंगे।  विश्वकर्मा जयंती पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में समारोह का करेंगे उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 के अंतर्गत विश्वकर्मा स्वरोजगार व स्वदेशी मेला 2026 पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इस दौरान सीएम योगी मार्जिन मनी ऋण पोर्टल के शुभारंभ के साथ ही विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक व टूलकिट का भी वितरण करेंगे। मुख्यमंत्री के साथ एमएसएमई विभाग के कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी व राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा भी मौजूद रहेंगे। जनभवन में राज्यपाल संग 'गंगासागर नमो नमः' का लोकार्पण करेंगे मुख्यमंत्री राज्यपाल महामहिम आनन्दी बेन पटेल के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनभवन में शाम को 'गंगासागर नमो नमः' का लोकार्पण करेंगे। इस दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक भी उपस्थित रहेंगे। जनभवन में गंगोत्री से गंगा सागर थीम पर प्रतिकृति का निर्माण किया गया है, जिसमें चारों धाम की प्रतिकृति भी है। इसमें प्रयागराज, काशी के घाट व मंदिर आदि की छवि भी दिखेगी। राज्यपाल व मुख्यमंत्री प्रयागराज से लाए गए गंगाजल को यहां अर्पित करेंगे। राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर प्रज्ज्वलित करेंगे 'आशीर्वाद का दीया' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर आयोजित सेवा संकल्प अभियान के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शाम को राष्ट्र प्रेरणा स्थल भी जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस (17 सितंबर) और उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष के सेवा, समर्पण और राष्ट्रनिर्माण के कार्यों के प्रति आभार जताने, उनके दीर्घ व स्वस्थ जीवन की मंगलकामना के लिए मुख्यमंत्री यहां 'आशीर्वाद का दीया' भी प्रज्ज्वलित करेंगे।

नवा रायपुर में राज्य निर्वाचन आयुक्तों के 32वें अखिल भारतीय सम्मेलन का राज्यपालरामेन डेका ने किया शुभारंभ

रायपु छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्तअजय सिंह ने बताया कि हर वर्ष अलग-अलग राज्यों में होने वाले राज्य निर्वाचन आयुक्तगणों के सम्मेलन के क्रम में 32वां सम्मेलन इस वर्ष 16-17 सितम्बर को छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर अटल नगर में हो रहा है। इस सम्मेलन का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किया जा रहा है। सम्मेलन का शुभारंभ आज माननीय राज्यपाल द्वारा किया गया। सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर मेजबान छत्तीसगढ़ के निर्वाचन आयुक्तअजय सिंह, राज्य निर्वाचन आयुक्तगण की स्थाई समिति के अध्यक्षविजय देव एवं संयोजकसुधांशु पांडे तथा प्रदेश के मुख्य सचिवविकासशील उपस्थित रहे। शुभारंभ सहारोह के इस विशेष अवसर पर राज्यपालरमेन डेका ने छत्तीसगढ़ स्थानीय निकाय निर्वाचन वार्षिकी 2026 Year Book के प्रथम संस्करण का विमोचन भी किया। उद्घाटन उपरांत आज सम्मेलन में देशभर से विभिन्न राज्यों के पधारे राज्य निर्वाचन आयुक्तगण ने स्थानीय लोकतंत्र विशेषकर त्रिस्तरीय पंचायतों व नगरीय निकायों को और अधिक सशक्त, पारदर्शी, समावेशी, विश्वसनीय एवं सहभागी बनाने हेतु निर्वाचन के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया एवं कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्तगण और विषय-विशेषज्ञों के द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया । सम्मेलन के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्तगण द्वारा स्थानीय निकाय निर्वाचन के संचालन में सामने आने वाली चुनौतियों, अनुभवों और नवाचारों को साझा करने के क्रम में छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा "राज्य गठन उपरांत नक्सल प्रभावित बस्तर में पिछले 25 वर्षों में स्थानीय लोकतंत्र की प्रगति" विषय पर छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्तअजय सिंह के निर्देशन में तैयार प्रस्तुति आयोग की सचिव श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी द्वारा प्रस्तुत की गई। बस्तर में स्थानीय लोकतंत्र की यात्रा को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। भौगोलिक दुर्गमता, विस्तृत वन क्षेत्र, सीमित संचार सुविधाओं तथा लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित बस्तर संभाग की परिस्थितियों के बीच स्थानीय निर्वाचन कराना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं लोकतांत्रिक चुनौती रहा है। छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकायों के निर्वाचन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया गया कि प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बल, निर्वाचन कर्मियों तथा स्थानीय समुदाय के समन्वित प्रयासों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निरंतर सुदृढ़ किया गया है। वर्ष 2025 में नगरीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचन एक साथ राज्यभर में, बस्तर संभाग सहित, शांतिपूर्वक एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराने तथा पुनर्मतदान की आवश्यकता न पड़ने का उल्लेख किया गया। मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान एवं केरलम की ओर से सूचना प्रोद्योगिकी के उपयोग के संबंध में 'EVM sharing tracking policy and it's challenges and EMS SOFTWARE' 'Panchayat Delimitation 2026: Transforming Delimitation through Technology A New Era of Paperless Delimitation', 'Digitalising Elections in India', 'Re-engineering elections in the Digital Era: The Kerala Story' विषयों पर प्रस्तुतियां दी गई। सम्मेलन में लोकतांत्रिक निर्वाचन विषय से जुड़े प्रिंसटन यूनिवर्सिटी न्यू जर्सी अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विषय विशेषज्ञ ने भी हिस्सा लिया और उन्होंने भारत के राज्यों में होने वाले स्थानीय निर्वाचनों का तुलनात्मक एवं समेकित अध्ययन का सार प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रस्तुत किया। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, हैदराबाद एवं भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड, बेंगलूरु के ईलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के विषय विशेषज्ञ ने भी सम्मेलन में अपने संस्थानों की अद्यतन जानकारी प्रस्तुत करते हुए बताया कि निर्वाचन में उपयोग होने वाली इलेक्ट्रानिक वोति वोटिंग मशीन हर प्रकार से सुरक्षित है और इसमें लगातार नवाचार करते हुए राज्य निर्वाचन आयोगों के अनुकूल इसका विकास एवं उत्पादन किया जा रहा है।

गोरखपुर में स्वास्थ्य सेवाओं के बदलाव का जिक्र, योगी बोले- अब दिख रहा नया यूपी

गोरखपुर  सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी में माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी खत्म हो गया। साढ़े नौ साल पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहते थे। अब यह चिंता खत्म हो चुकी है। अब हम नए युग में नए गोरखपुर और नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि सरकार प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में दस-दस बेड की डायलिसिस यूनिट की सुविधा शुरू कर रही है। सीएम योगी बुधवार पूर्वाह्न इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर की तरफ से संचालित चैरिटेबल ब्लड बैंक के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने फीता काटकर चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन किया और सेंटर का भ्रमण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं, उपकरणों और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उद्घाटन समारोह के मंच से पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में आए सकारात्मक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए सीएम योगी ने कहा कि साढ़े नौ साल पहले गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र था। स्थिति यह थी कि एक ही बेड पर चार-चार मरीज तक भर्ती रहते थे। तीसरी मंजिल पर इंसेफेलाइटिस वार्ड था और वहां पंखे, शौचालय और अन्य जरूरी सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने कहा कि पहले जो बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्वयं अस्वस्थ था, आज वही सुपर स्पेशियलिटी सेंटर और इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर में एम्स भी स्थापित हो चुका है। महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हो गई है। दो एम्स भी संचालित हैं। एमबीबीएस की सीटें 4600 से बढ़कर 13500 से अधिक हो चुकी हैं और पीजी की सीटें दोगुनी हुई हैं। नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा का भी विस्तार किया जा रहा है। कभी दुर्दांत माफिया थे जिलों की पहचान मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक समय प्रदेश के प्रत्येक जिले की पहचान किसी न किसी दुर्दांत माफिया से जुड़ गई थी। डॉक्टर उनके शिकार बनते थे। गोरखपुर में डॉक्टरों का अपहरण होता था, उनसे रंगदारी मांगी जाती थी, धमकी भरे फोन आते थे और उनके चेंबर में घुसकर मारपीट की जाती थी। इन घटनाओं के खिलाफ उन्हें चिकित्सकों के साथ सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आज गोरखपुर के साथ पूरे प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी और नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब प्रदेश की पहचान माफिया से नहीं बल्कि 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' के लक्ष्य से बन रही है।   बनाया नहीं जा सकता खून, रक्तदान संवेदना का प्रतीक रक्तदान के महत्व को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, दवाएं और संसाधन तो उपलब्ध कराए जा सकते हैं लेकिन खून बनाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि रक्तदान उस संवेदना का प्रतीक है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति किसी जरूरतमंद को नया जीवन देता है। उन्होंने इस बात पर चिंता भी जाहिर की कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाती है। सीएम ने कहा कि इसके लिए चिकित्सकों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को प्रेरित करना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर समय-समय पर रक्तदान की अपील और जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश जरूरी सीएम योगी ने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी आगाह किया। कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो संक्रमण का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। ऐसी गतिविधियों को शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाने के साथ चिकित्सकों को जागरूकता कार्यक्रमों से भी जुड़ना चाहिए। सीएम ने की आईएमए के सामाजिक सरोकारों की सराहना अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने आईएमए के सामाजिक सरोकारों की मुक्तकंठ से सराहना की। कहा कि आईएमए केवल प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की संस्था मात्र ही नहीं है। इसने गोरखपुर में निशुल्क ओपीडी के बाद चैरिटेबल ब्लड सेंटर शुरू करके उसने सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी संस्था की वास्तविक पहचान इससे होती है कि वह अपनी विशेषज्ञता का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने में कितना योगदान देती है। उन्होंने कहा कि 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में आईएमए ने निशुल्क ओपीडी शुरू की थी। इसके बाद आईएमए ने अपने कार्यालय के लिए भूमि मांगी तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूखंड उपलब्ध कराने में मदद की गई। आईएमए ने इस भूखंड का बेहतर उपयोग करते हुए चैरिटेबल ब्लड सेंटर स्थापित किया है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में योगदान देगा। गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का उल्लेख कर चैरिटी का मॉडल बताया सीएम योगी ने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के सानिध्य में गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय की शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि पहले 10 बेड से अस्पताल शुरू करने की चर्चा हुई थी, लेकिन गोरखपुर के चिकित्सकों के सहयोग से शुरुआत में ही इसे 100 बेड का अस्पताल बनाया गया। इस चिकित्सालय ने दिखाया कि चैरिटी में भी अस्पताल, ब्लड बैंक और आईसीयू सफलतापूर्वक संचालित हो सकते हैं। यहां ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित हुईं। उन्होंने कहा कि जिस डायलिसिस के लिए कभी लोगों को लखनऊ या बीएचयू जाना पड़ता था, आज गोरखपुर में गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध है। सीएम ने बताया कि सरकार ने प्रदेश के जिला अस्पतालों में भी निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था करने का कार्य प्रारंभ कर दिया है। स्वास्थ्य सेवाओं की उत्कृष्टता के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। बताया कि आईआईटी कानपुर के सहयोग से मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा एसजीपीजीआई लखनऊ में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम हो रहा है। कार्यक्रम को इन्होंने भी किया संबोधित समारोह को महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह ने भी संबोधित किया। आभार ज्ञापन आईएमए गोरखपुर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. डीके सिंह … Read more

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने आयुष की उत्कृष्ट पद्धतियां अपनाएगा मध्यप्रदेश

भोपाल  मध्यप्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने तथा सामान्य प्रसव को प्रोत्साहित करने के लिए आयुष सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं जनोपयोगी बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में तमिलनाडु एवं केरल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में संचालित आयुष सेवाओं और अपनाई जा रही उत्कृष्ट पद्धतियों का अध्ययन कर उन्हें मध्यप्रदेश की परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 मई 2026 को आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में प्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने तथा सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तमिलनाडु एवं केरल में संचालित आयुष सेवाओं का अध्ययन करने के लिए विभागीय दल भेजने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशों के अनुपालन में आयुष विभाग के चार सदस्यीय दल ने तमिलनाडु एवं केरल का अध्ययन भ्रमण किया। दल ने दोनों राज्यों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुष चिकित्सा की भूमिका, सेवाओं के संचालन की व्यवस्थाओं तथा प्रभावी एवं उत्कृष्ट पद्धतियों का अध्ययन किया। अध्ययन भ्रमण से लौटने के बाद बुधवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में दल द्वारा उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार के समक्ष अध्ययन के निष्कर्षों एवं अनुशंसाओं का प्रस्तुतीकरण किया गया। मध्यप्रदेश की परिस्थितियों के अनुरूप बनेगी कार्ययोजना मंत्री श्री परमार ने अध्ययन के निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। आयुष चिकित्सा पद्धतियों की संभावनाओं का प्रभावी उपयोग करते हुए गर्भवती माताओं एवं नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए। श्री परमार ने निर्देश दिए कि तमिलनाडु एवं केरल में अपनाई जा रही आयुष क्षेत्र की उत्कृष्ट पद्धतियों (बेस्ट प्रैक्टिसेज) का मध्यप्रदेश की भौगोलिक, सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के अनुरूप अध्ययन कर व्यावहारिक एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। मंत्री श्री परमार ने कहा कि कार्ययोजना में ऐसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जाए, जिनके माध्यम से गर्भावस्था के दौरान आवश्यक आयुष सेवाओं की उपलब्धता बढ़े, माताओं को स्वास्थ्य संबंधी उचित मार्गदर्शन मिले तथा सामान्य प्रसव को प्रोत्साहन देने के लिए प्रभावी सहयोग प्रदान किया जा सके। श्री परमार ने अध्ययन से प्राप्त अनुभवों को केवल रिपोर्ट तक सीमित न रखते हुए चरणबद्ध तरीके से मैदानी स्तर पर लागू करने तथा इसकी प्रभावशीलता की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए। अनुभवों का उपयोग प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में होगा अध्ययन दल द्वारा दोनों राज्यों में संचालित आयुष सेवाओं की व्यवस्थाओं, उपचार पद्धतियों और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से संबंधित कार्यप्रणाली का अवलोकन किया गया। इन अनुभवों और अनुशंसाओं का उपयोग मध्यप्रदेश में आयुष सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जाएगा। बैठक में आयुष विभाग के प्रमुख सचिव श्री शोभित जैन एवं आयुक्त आयुष श्रीमती आर. उमा माहेश्वरी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।