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3 बिल्डरों को पीछे छोड़ BJP ने जीती बोली, 45 करोड़ में खरीदी बहुमूल्य जमीन

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भाजपा के आलीशान दफ्तर के बाद प्रदेश मुख्यालय बनने का रास्ता साफ हो गया है। यूपी भाजपा ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की नीलामी में तीन बिल्डरों को पछाड़कर 45 करोड़ की बोली लगाई और जीजामई में 5500 वर्ग मीटर की जमीन खरीद ली। एलडीए ने यह जमीन पिछले महीने लखनऊ नगर निगम से 29 करोड़ में ली थी, जिसे बीजेपी ने 45 करोड़ की सबसे ऊंची बोली के साथ खरीद लिया है। एलडीए को इस सौदे से 19 करोड़ का फायदा एक महीने में हो गया। इस नीलामी में तीन बड़े बिल्डर समूहों के साथ भारतीय जनता पार्टी भी शामिल थी। ऑनलाइन नीलामी में भाजपा ने सबसे अधिक कीमत लगाकर भूखंड अपने नाम कर लिया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जुलाई में यहां दफ्तर बनाने के काम की शुरुआत कर सकते हैं। पार्टी इस भूखंड पर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त छह मंजिला प्रदेश मुख्यालय बनाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित भवन में प्रशासनिक कार्यालय, बैठक कक्ष, सम्मेलन सुविधाएं और अन्य आधुनिक व्यवस्थाएं होंगी। सूत्रों के अनुसार, भवन की सबसे ऊपरी मंजिल पर हेलीपैड भी विकसित करने की योजना है। ताकि राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की आवाजाही सुगम हो सके। जमीन वापसी के बाद बदली पूरी रणनीति यह भूखंड पहले नगर निगम ने दीनदयाल उपाध्याय सेवा न्यास को आवंटित किया था। वर्ष 2020 में नगर निगम ने करीब 5500 वर्गमीटर जमीन 90 वर्ष की लीज पर न्यास को दी थी। बाद में इसे फ्रीहोल्ड करने का प्रस्ताव पारित हुआ था, ताकि यहां भाजपा का प्रदेश मुख्यालय बनाया जा सके। लेकिन 7 अप्रैल को न्यास के सदस्य कृष्ण कुमार दीक्षित ने नगर निगम को पत्र भेजकर बजट की कमी का हवाला देते हुए जमीन वापस करने का निर्णय लिया। इसके बाद पूरी प्रक्रिया ने नया मोड़ ले लिया। एलडीए ने डीएम सर्किल रेट के दोगुने पर खरीदी जमीन एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने नगर आयुक्त गौरव कुमार को पत्र भेजकर भूखंड को सर्किल रेट के दोगुने दर पर एलडीए को देने को कहा था। नगर निगम सदन ने भी जमीन एलडीए को देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद एलडीए ने जमीन अपने अधिकार में लेकर नीलामी की प्रक्रिया शुरू की। एलडीए की रणनीति से बढ़ा राजस्व प्रत्यक्ष हस्तांतरण की बजाय नीलामी का रास्ता अपनाने से एलडीए को बड़ा आर्थिक लाभ हुआ। 29 करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन 45 करोड़ रुपये में बिकने से प्राधिकरण को 16 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिला। अधिकारियों का मानना है कि खुली नीलामी प्रक्रिया अपनाने से भविष्य में किसी कानूनी या प्रशासनिक विवाद की संभावना भी कम होगी। अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष के आने की चर्चा भाजपा सूत्रों के अनुसार नए प्रदेश मुख्यालय के शिलान्यास और निर्माण प्रक्रिया को लेकर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी गंभीर है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के जुलाई में इसका शिलान्यास करने की बात कही जा रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। खसरा संख्या 196 राजनीतिक गतिविधियों का नया केंद्र जियामऊ स्थित खसरा संख्या 196 का यह भूखंड अब प्रदेश की राजनीति का नया केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यालय बनने के बाद यहां से भाजपा की संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियों का संचालन होगा, जिससे यह परिसर राजधानी के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक परिसरों में शामिल हो जाएगा।

हाई कोर्ट की राज्य सरकार से जवाब-तलब, पंचायत चुनाव पर OBC आयोग की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

 लखनऊ  पंचायत चुनाव और वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से महत्वपूर्ण जानकारी तलब की है।अदालत ने पंचायत चुनावों से संबंधित पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग से संभावित चुनाव कार्यक्रम के बारे में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति एके चौधरी की अवकाशकालीन पीठ ने स्थानीय अधिवक्ता ओम प्रकाश प्रजापति की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी। याचिका में राज्य सरकार के 25 मई के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा-12 के अनुसार ग्राम प्रधान का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तिथि से केवल पांच वर्ष का होता है। इसके बावजूद समय पर पंचायत चुनाव न कराकर मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया गया, जिससे उनका कार्यकाल अनिश्चितकाल तक बढ़ गया है। यह व्यवस्था कानून के विपरीत है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि यदि किसी कारण से समय पर पंचायत चुनाव नहीं कराए जा सकते, तो पूर्व व्यवस्था के अनुसार एडीओ पंचायत या किसी अन्य सरकारी अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाए। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने चुनाव तैयारियों और आरक्षण प्रक्रिया की स्थिति जानने के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तलब की तथा निर्वाचन आयोग से संभावित चुनाव कार्यक्रम पर स्पष्ट जवाब मांगा है।

मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में 95 वर्षीय राधा की बहादुरी, समय रहते लोगों को किया सतर्क

मुजफ्फरपुर. प्रसाद हॉस्पिटल में हुए दर्दनाक हादसे के बीच मुशहरी प्रखंड के छपरा मेघ गांव की रहने वाली 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला राधा देवी की जांबाजी और सूझबूझ की कहानी हर किसी की जुबान पर है। बीपी और सांस लेने में तकलीफ के बाद उन्हें अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया था। गुरुवार की सुबह जब वह जागी हुई थीं, तभी अचानक आईसीयू में शॉर्ट सर्किट से गाढ़ा धुआं फैलने लगा। ऐसे खौफनाक मंजर में जहां अच्छे-अच्छों के होश उड़ जाते हैं, वहां 95 साल की इस बहादुर दादी ने अद्भुत हिम्मत दिखाई। उन्होंने बिना डरे तुरंत अपने मुंह से ऑक्सीजन मास्क हटाया, हाथ में लगी सलाइन (ग्लूकोज) की सुई खुद ही खींचकर निकाल दी और स्ट्रेचर से उठकर बाहर की तरफ भाग पड़ीं। ऑन ड्यूटी नर्स को दी घटना की जानकारी चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद राधा देवी गिरते-पड़ते आईसीयू से बाहर निकलीं और वहां ड्यूटी पर मौजूद नर्स (मैडम) को अंदर आग लगने की सूचना दी। राधा देवी की इसी चेतावनी के बाद अस्पताल प्रशासन तुरंत हरकत में आया, आनन-फानन में अन्य मरीजों को बाहर निकाला गया और फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया। अगर दादी ने सही समय पर हिम्मत दिखाकर स्टाफ को न जगाया होता, तो हादसा और भी भयावह हो सकता था। बाहर निकलली और मैडम के बतइली "आग लगते ही पूरा अंधेरा हो गइलई। आग कइसे लगलई इ हम कईसे बताऊं? धुआं फैलते हम बाहर निकलली और मैडम के बतइली, तब मैडम अंदर जाकर देखलई।" 3 घंटे तक मां को ढूंढता रहा बेटा घटना के बाद अस्पताल में मची भगदड़ के बीच राधा देवी खुद को बचाते हुए अस्पताल के ही एक दूसरे सुरक्षित कमरे में जाकर बैठ गईं। इधर, बाहर मौजूद उनका बेटा और परिजन इस आशंका से बुरी तरह रोते-बिलखते रहे कि कहीं मां आग की चपेट में न आ गई हों। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत और खोजबीन के बाद जब परिजनों ने राधा देवी को सुरक्षित बैठे देखा, तब जाकर उनकी जान में जान आई। इसके बाद स्वजन उन्हें सुरक्षित घर ले गए। भीषण आग के बाद मची चीख-पुकार यह पूरी घटना शहर के ब्रह्मपुर स्थित नामी-गिरामी प्रसाद हॉस्पिटल की है, जहां गुरुवार की सुबह करीब साढ़े तीन बजे अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई। आग लगते ही पूरे अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को शहर के अन्य विभिन्न अस्पतालों में शिफ्ट करने के लिए एंबुलेंस लगातार सड़कों पर दौड़ती रहीं। हादसे में अब तक 5 मरीजों की मौत इस भीषण अग्निकांड में दम घुटने और झुलसने के कारण अब तक कुल 5 मरीजों की मौत हो चुकी है। पहले चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, लेकिन बाद में गंभीर रूप से झुलसी महिला मरीज चंचला देवी को आसव (ASAV) अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। हादसे में जान गंवाने वाले सभी 5 मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है: 1. मृतका चंचला देवी: हादसे के बाद बेहद गंभीर हालत में इन्हें शहर के आसव (ASAV) अस्पताल में शिफ्ट कराया गया था, जहां इन्होंने अंतिम सांस ली। 2. मृतक उदय कुमार (विशंभरपुर, शिवहर): पेशे से एलआईसी (LIC) एजेंट उदय कुमार की हाल ही में ब्रेन सर्जरी हुई थी। शोर सुनकर जब ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद उनका परिवार ऊपर भागा, तब तक वे दम तोड़ चुके थे। 3. मृतका गीता देवी (दिस्तौलिया, कथैया): शुगर, बीपी और डायलिसिस की मरीज गीता देवी 1 जून को ही अस्पताल में भर्ती हुई थीं। 4. मृतक शशांक (रतनपुरा, औराई): संजय चौधरी के पुत्र शशांक भी आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहे थे, लेकिन आग की भेंट चढ़ गए। 5. मृतक कृष्णनंदन सिंह (78 वर्ष, गोरिगमा डीह, मीनापुर): फेफड़े में पानी की शिकायत के बाद 22 मई से डॉ. संजीव की यूनिट में इलाजरत थे। 4-4 लाख मुआवजे का ऐलान हादसे की भयावहता को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) सुब्रत कुमार सेन और पुलिस अधीक्षक (SP) समेत तमाम आला अधिकारी, सभी डीएसपी और फायर ऑफिसर दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और राहत कार्य की निगरानी की। अस्पताल में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। डीएम सुब्रत कुमार सेन ने सभी 5 मृतकों के आश्रितों को सरकारी नियम के तहत 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि देने की घोषणा की है। साथ ही, अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किए गए सभी मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर कराने और अस्पताल की बिजली वायरिंग व फायर सेफ्टी मानकों की जांच के कड़े निर्देश दिए हैं। बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता विजय कुमार भी टीम के साथ लोड और वायरिंग का जायजा लेने पहुंचे हैं।

किरायेदार को नहीं मिली राहत, मकान मालिक की आवश्यकता को मानते हुए हाईकोर्ट ने आदेश रखा बरकरार

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए किरायेदार को दुकान खाली करने के आदेश दे दिए हैं। साथ ही किया कि किरायेदार यह तय नहीं कर सकता कि मकान मालिक अपनी जरूरतों को किस प्रकार पूरा करे। यदि मकान मालिक की आवश्यकता वास्तविक और सद्भावनापूर्ण है तो किरायेदार उसे वैकल्पिक व्यवस्था सुझाकर किराये की संपत्ति खाली कराने की मांग को विफल नहीं कर सकता। अदालत ने इसी सिद्धांत को दोहराते हुए लुधियाना स्थित एक दुकान के किरायेदार की बेदखली को बरकरार रखा है। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि किराया नियंत्रक को यह मानकर चलना चाहिए कि मकान मालिक की आवश्यकता वास्तविक है। ऐसे मामलों में किरायेदार यह निर्देश नहीं दे सकता कि मकान मालिक बिना किराये की संपत्ति का कब्जा प्राप्त किए अपनी जरूरतों को अन्य तरीके से पूरा कर ले। लुधियाना का मामला पहुंचा था हाई कोर्ट मामला लुधियाना के ब्राउन रोड स्थित एक दुकान से जुड़ा था। मकान मालिक ने दुकान खाली कराने की मांग यह कहते हुए की थी कि उसका विवाहित पुत्र स्वतंत्र रूप से स्पेयर पार्ट्स का कारोबार शुरू करना चाहता है और इसके लिए उक्त दुकान की आवश्यकता है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पुत्र के पास न तो अपनी कोई अन्य दुकान है और न ही वह किसी अन्य व्यावसायिक परिसर पर कब्जा रखता है। ऐसे में उसकी जरूरत वास्तविक और उचित है। किरायेदार ने दी थी बेदखली आदेश को चुनौती दूसरी ओर किरायेदार ने बेदखली आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि याचिकाकर्ता स्वयं को संपत्ति का मालिक साबित करने में विफल रहा है, इसलिए उसे बेदखली याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है। हालांकि हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि संपत्ति पहले एक पारिवारिक ट्रस्ट के अधीन थी, लेकिन वर्तमान में उसका स्वामित्व पूरी तरह संबंधित मकान मालिक के पास है। दस्तावेजों और जिरह के दौरान दिए गए बयानों से उसके मालिकाना अधिकार पर्याप्त रूप से सिद्ध होते हैं। इसलिए वह किराया प्राप्त करने और किरायेदार के खिलाफ बेदखली की कार्यवाही शुरू करने का हकदार है। ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट, 1949 का हुआ उल्लेख हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि स्वामित्व संबंधी विवाद को अलग भी रख दिया जाए, तब भी किरायेदार का मामला टिक नहीं सकता। अदालत ने ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट, 1949 का उल्लेख कर कहा कि कानून में "मकान मालिक" की परिभाषा में ट्रस्टी भी शामिल है। इसलिए किराया प्राप्त करने वाला ट्रस्टी भी बेदखली याचिका दायर कर सकता है। बेटे की जरूरत को वास्तविक बताया कोर्ट ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि "स्वयं के उपयोग" का अर्थ केवल मकान मालिक के व्यक्तिगत उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके आश्रित परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं को भी इसमें शामिल माना जाएगा। अदालत ने माना कि बेटे के स्वतंत्र व्यवसाय के लिए दुकान की आवश्यकता पूरी तरह वास्तविक है और इसमें किसी प्रकार का दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य नहीं दिखता। इन टिप्पणियों के साथ हाई कोर्ट ने 19 मई 2025 के अपीलीय आदेश में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि न पाते हुए किरायेदार की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी और बेदखली के आदेश को बरकरार रखा। साथ ही लंबित सभी अन्य आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए।

दुर्ग पुलिस में बड़ा एक्शन, NDPS मामले में रिश्वत मांगने पर दो सब-इंस्पेक्टर सस्पेंड

दुर्ग. जिले में रिश्वत मांगने के आरोप में दो पुलिस अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में आरोपी पक्ष से कथित रूप से पैसों की मांग करने के आरोप में दो सब इंस्पेक्टरों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में पुरानी भिलाई थाना में पदस्थ एसआई तुलसीराम साहू और खुर्सीपार थाना में पदस्थ एसआई देव लाल साहू शामिल हैं। दोनों को निलंबित कर रक्षित केंद्र दुर्ग अटैच किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने छावनी सीएसपी प्रशांत पैकरा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें तीन दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। महिला को छोड़ने के बदले मांगे थे 50 हजार रुपए जानकारी के अनुसार पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र में एसआई तुलसीराम साहू ने रज्जी कौर नामक महिला को 5.80 ग्राम चिट्टा (मादक पदार्थ) के साथ गिरफ्तार किया था। आरोप है कि महिला को छोड़ने के एवज में उसकी बेटी से 50 हजार रुपए की मांग की गई थी। महिला की बेटी जसबीर का आरोप है कि उसने पहली बार में 20 हजार रुपए देने की बात स्वीकार की थी और राशि भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद उसकी मां को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद भी पैसों की मांग जारी रही। इसी दौरान हुई बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड हो गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ऑडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई ऑडियो वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जांच में ऑडियो को गंभीर मानते हुए एसएसपी विजय अग्रवाल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एसआई तुलसीराम साहू और उनके सहयोगी बताए जा रहे खुर्सीपार थाना में पदस्थ एसआई देव लाल साहू को निलंबित कर दिया। दुर्ग शहर एएसपी सुखनंद राठौर ने बताया कि पुरानी भिलाई थाना में दर्ज एनडीपीएस प्रकरण से जुड़े मामले में आरोपी पक्ष से कथित रूप से पैसों की मांग का ऑडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। शुरुआती जांच में वायरल ऑडियो के आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विभागीय नियमों के विपरीत आचरण पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की गई। साइबर क्राइम कर्मियों पर भी लगाए आरोप आरोपी महिला की बेटी जसबीर ने यह भी आरोप लगाया है कि साइबर क्राइम से जुड़े कुछ लोगों ने भी उससे 2 लाख रुपए की मांग की थी। उसने दावा किया कि एसआई के साथ हुई बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग उसके पास सुरक्षित है। जसबीर ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि जब्ती, गिरफ्तारी और पूछताछ से जुड़े सभी स्थानों के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए। उसका आरोप है कि बरामद किए गए चिट्टे की मात्रा वास्तविक मात्रा से अधिक दर्शाई गई है। तीन दिन में सौंपी जाएगी जांच रिपोर्ट दुर्ग पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। छावनी नगर पुलिस अधीक्षक प्रशांत पैकरा को तीन दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Cyber Fraud का बढ़ता जाल: पंजाब में करोड़ों की ठगी, निवेश और वीजा के नाम पर लोगों को बनाया शिकार

चंडीगढ़   पंजाब में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। पिछले चार महीनों के दौरान मोहाली और राज्य के विभिन्न जिलों में साइबर ठगों ने 30.14 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया है। इस अवधि में ऑनलाइन धोखाधड़ी के 13 बड़े मामले सामने आए हैं, जिनमें निवेश, वीजा, नौकरी, प्रॉपर्टी और हनी ट्रैप जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाया गया। मामलों की शिकायत मिलने के बाद मोहाली साइबर क्राइम थाना, स्टेट क्राइम और स्टेट साइबर क्राइम पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। साइबर अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए विशेषज्ञ टीमों को लगाया गया है। क्रिप्टो निवेश के नाम पर 19.84 करोड़ की ठगी सबसे बड़ा मामला लुधियाना के व्यवसायी जगदीप सिंघाल से जुड़ा है। साइबर ठगों ने उन्हें क्रिप्टोकरेंसी में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर 19.84 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया। आरोपियों ने सोशल मीडिया के जरिए संपर्क कर उनका विश्वास जीता और एक फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट के माध्यम से निवेश करवाया। जांच में पता चला है कि ठगी की रकम 15 अलग-अलग बैंकों के 75 फर्जी खातों के जरिए निकाली गई। फर्जी निवेश कंपनी बनाकर 3.62 करोड़ की धोखाधड़ी होशियारपुर निवासी तरनजीत सिंह भल्ला से भी निवेश के नाम पर 3.62 करोड़ रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने ‘अटालिया’ नामक कंपनी में निवेश कराने के लिए सेबी और आरबीआई के कथित दस्तावेज दिखाए तथा हर महीने 3 प्रतिशत और सालाना 36 प्रतिशत रिटर्न का झांसा दिया। जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी तो उसे जान से मारने की धमकियां भी दी गईं। नौकरी, वीजा और हनी ट्रैप के जरिए भी ठगी साइबर ठगों ने रेलवे में टिकट कलेक्टर की नौकरी दिलाने, बैंक ऋण से राहत दिलाने और पैसे दोगुने करने के नाम पर भी लोगों से लाखों रुपये ऐंठे। हनी ट्रैप के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक युवक को इंस्टाग्राम पर फर्जी महिला प्रोफाइल के जरिए जाल में फंसाया गया और अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उससे 4.50 लाख रुपये वसूल लिए गए। वहीं, एक महिला को इंस्टाग्राम लिंक भेजकर निवेश का झांसा दिया गया और उससे 70 हजार रुपये की ठगी कर ली गई। प्रॉपर्टी और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म फ्रॉड भी सामने आए खरड़ में एक दंपती ने सोशल मीडिया पर कोठी बेचने का विज्ञापन देकर छह लोगों से करीब 1.5 करोड़ रुपये का बयाना लिया। बाद में संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति के नाम रजिस्ट्री करवा दी गई। इसी तरह एचएसबीएस कैपिटल नामक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए चार लोगों से 27.88 लाख रुपये की ठगी की गई। शुरुआत में कुछ लाभ दिखाकर विश्वास जीता गया और बाद में निवेशकों की रकम ब्लॉक कर दी गई। विदेश भेजने के नाम पर भी ठगी जॉर्जिया, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के वर्क वीजा दिलाने के नाम पर भी कई लोगों को निशाना बनाया गया। आरोपियों ने दर्जनों युवाओं से लाखों रुपये वसूल लिए, लेकिन न तो वीजा मिला और न ही रकम वापस की गई। पुलिस ने जारी की एडवाइजरी पुलिस अधिकारियों ने लोगों से ऑनलाइन निवेश, सोशल मीडिया ऑफर और डिजिटल लेन-देन के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले संबंधित कंपनी की वैधता की जांच अवश्य करें और असामान्य रूप से अधिक रिटर्न के दावों पर भरोसा न करें। पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

जनभागीदारी के दम पर हरियाली की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़, पर्यावरण संरक्षण को मिली नई दिशा

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी से पर्यावरणीय समृद्धि की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ रायपुर,    प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और भविष्य की संरक्षक भी है। स्वच्छ वायु, निर्मल जल, घने वन और समृद्ध जैव विविधता किसी भी सभ्य समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के इस दौर में पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, जो हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है। प्राकृतिक संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य के विशाल वन क्षेत्र, समृद्ध जैव विविधता और जल संसाधन इसकी पर्यावरणीय पहचान हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर अनेक योजनाओं का सफल संचालन कर रही है। हरियाली से समृद्धि की ओर छत्तीसगढ़ में वृक्षारोपण को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय से भी जोड़ा गया है। ’हरियाली प्रसार योजना’ और ’किसान वृक्ष मित्र योजना’ के माध्यम से किसानों को कृषि वानिकी के लिए पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा उन्हें अपनी भूमि पर वृक्ष लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे एक ओर हरित क्षेत्र का विस्तार हो रहा है तो दूसरी ओर किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संचालित ”एक पेड़ मां के नाम“ अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनभावनाओं से जोड़ने का कार्य किया है। इस अभियान के माध्यम से लाखों नागरिक अपनी मां के सम्मान में पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। यह पहल पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप प्रदान कर रही है। शहरों को मिल रही हरित पहचान तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। इस दिशा में ’ऑक्सीवन योजना’ के तहत शहरों में ऑक्सीजन पार्क और हरित क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। वहीं पर्यावरण वानिकी योजना’ के माध्यम से सड़क किनारे वृक्षारोपण, पर्यावरण पार्कों का निर्माण तथा सार्वजनिक स्थलों का हरित विकास किया जा रहा है। ये प्रयास न केवल प्रदूषण नियंत्रण में सहायक हैं, बल्कि नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता भी प्रदान कर रहे हैं। जल संरक्षण बना जनआंदोलन जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए जल संरक्षण आज सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस दिशा में कई अभिनव पहलें की हैं। ’मोर गांव मोर पानी’ और ’मोर गांव मोर तरिया’ जैसे अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की नई चेतना पैदा कर रहे हैं। परंपरागत तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, चेक डैम निर्माण और जल पुनर्भरण संरचनाओं के विकास से भूजल स्तर में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में ’भूजल एवं जल संरक्षण कार्यक्रमों’ के तहत जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष बल दिया जा रहा है। जल सुरक्षा की यह सोच आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य की नींव रख रही है। नदियों और आर्द्रभूमियों का संरक्षण प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए ’नदी तट वृक्षारोपण योजना’ के अंतर्गत नदी किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। इससे मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण, भूजल संवर्धन और जैव विविधता संरक्षण में मदद मिल रही है। इसी प्रकार आर्द्र भूमि (वेटलैंड) जलवायु अनुकूलन परियोजना के तहत महानदी जलग्रहण क्षेत्र में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। यह पहल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और प्राकृतिक जल तंत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नई पीढ़ी को पर्यावरण का प्रहरी बनाने की पहल पर्यावरण संरक्षण की सफलता जन-जागरूकता और जनभागीदारी पर निर्भर करती है। इसी उद्देश्य से ’राष्ट्रीय हरित कोर योजना (नेशनल ग्रीन कॉर्प्स)’ तथा ’ईको-क्लब कार्यक्रमों’ के माध्यम से स्कूलों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण संबंधी कार्यक्रमों के जरिए बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जा रही है। पर्यावरण संरक्षण : सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। एक पौधा लगाना, जल की बचत करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना और स्वच्छता बनाए रखना ऐसे छोटे-छोटे कदम हैं जो बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। छत्तीसगढ़ आज हरियाली, जल संरक्षण और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल के माध्यम से इसी संतुलित दृष्टिकोण को साकार कर रहा है। यदि हम सभी प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझें और पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पृथ्वी सौंप सकेंगे। धरती हमें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि हमने इसे आने वाली पीढ़ियों से उधार लिया है। इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है। •  डॉ. दानेश्वरी संभाकर     उपसंचालक, जनसंपर्क  

हरियाणा में यमुनानगर का ग्रीन रिकॉर्ड, 60 लाख से अधिक पौधारोपण के साथ शीर्ष पर पहुंचा

यमुना नगर. विश्व पर्यावरण दिवस पर हरियाणा की हरियाली की तस्वीर में यमुनानगर सबसे आगे दिखाई देता है। वन विभाग की डिजिटल वृक्ष गणना में जंगलों से बाहर हरियाणा में 60.94 लाख पेड़ दर्ज किए गए, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक हैं। प्रदेश के 4.01 करोड़ पेड़ों में 14.86 प्रतिशत पेड़ अकेले यमुना नगर में हैं, यानी प्रदेश के कुल पेडों में हर सातवां पेड़ यमुनानगर जिले का है। वन क्षेत्र मामले में भी जिला दूसरे स्थान पर है। हालांकि बढ़ता प्रदूषण, गिरता भूजल, अवैध खनन व वनों पर बढ़ती तस्करी भविष्य की चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं, पर इस बीच भी कलेसर नेशनल पार्क, वन्यजीव अभयारण्य व किसानों की कृषि वानिकी यमुनानगर को हरियाणा की हरित पहचान बना रहे हैं। कलेसर व किसानों ने दिलाई पहचान वन विभाग द्वारा कराई गई डिजिटल वृक्ष गणना के अनुसार प्रदेश में जंगलों से बाहर 4.01 करोड़ पेड़ हैं। इनमें सबसे अधिक 60 लाख 94 हजार 153 पेड़ यमुनानगर में दर्ज किए गए हैं। इसके बाद अंबाला में 34,08,972, सिरसा में 33,18,033 और फरीदाबाद में 5,72,416 पेड़ हैं। इसके बाद कुरुक्षेत्र, पलवल और गुरुग्राम का स्थान है। पेड़ों की संख्या में यमुनानगर के आगे रहने की उपलब्धि के पीछे 25 हजार एकड़ में फैला कलेसर नेशनल पार्क व वन्यजीव अभयारण्य बड़ी वजह हैं। शिवालिक की तलहटी स्थित यह क्षेत्र हरियाणा की सबसे समृद्ध जैव विविधता वाला वन क्षेत्र है। दूसरी ओर किसानों ने निजी भूमि पर पापलर, सफेदा व शीशम के बड़े स्तर पर रोपण कर कृषि वानिकी को नई ऊंचाई दी है। यही कारण है कि यमुनानगर को देश की प्लाईवुड राजधानी के रूप में पहचान मिली। किसान संघ के महामंत्री रामबीर चौहान का कहना है कि किसानों की भागीदारी के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी। 10.94% वन क्षेत्र से प्रदेश में दूसरा नंबर भारतीय वन सर्वेक्षण की इंडिया स्टेट आफ फारेस्ट रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा का कुल वन क्षेत्र 1559 वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 3.53 प्रतिशत है। वन क्षेत्र के मामले में पंचकूला 47.4 प्रतिशत वन क्षेत्र के साथ पहले स्थान पर है। यमुनानगर 10.94 प्रतिशत वन क्षेत्र के साथ दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में हर वर्ष बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाए जाते हैं। विभिन्न योजनाओं के तहत हर साल 2.2 से 2.5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा जाता है। हालांकि पौधों को जीवित रखना अभी भी चुनौती बना हुआ है। औसतन 65 से 70 प्रतिशत पौधे ही जीवित रह पाते हैं। सड़कों व नहरों किनारे यह दर कई बार 50 से 55 प्रतिशत तक सिमट जाती है। इसी कारण पौधरोपण करने वाली एजेंसियों को पांच वर्ष तक रखरखाव की जिम्मेदारी दी जा रही है। बढ़ रहे वाहन और गिर रहा भूजल स्तर प्रदेश में हर साल सात से आठ लाख नए वाहन पंजीकृत हो रहे हैं। कुल वाहनों की संख्या एक करोड़ से अधिक हो चुकी है। सर्दियों में जींद, बहादुरगढ़, धारूहेड़ा व गुरुग्राम जैसे शहर गंभीर वायु प्रदूषण का सामना करते हैं। दूसरी ओर प्रदेश में 19,487 तालाब होने के बावजूद भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। राज्य के 143 ब्लाकों में 85 से 88 ब्लाक ओवर एक्सप्लाइटेड श्रेणी में पहुंच चुके हैं। महेंद्रगढ़ में भूजल स्तर 52 मीटर से अधिक गहराई तक पहुंच चुका है। यमुनानगर की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। जिले में औसत भूजल स्तर 14 से 16 मीटर के बीच है, पर यहां भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञ बोले- उपलब्धि बड़ी, खतरे गंभीर पर्यावरणविद् डा. रविश चौहान ने कहा कि यमुनानगर का पेड़ों की संख्या में प्रदेश में पहले स्थान पर होना एक आंकड़ा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है। कलेसर के जंगल व किसानों की कृषि वानिकी ने जिले को विशेष पहचान दी है। लेकिन अवैध खनन, खैर कटान, भूजल दोहन व बढ़ता प्रदूषण चिंता का विषय हैं। यदि संरक्षण व संवर्धन साथ-साथ नहीं चले तो आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। श्रेणी / सूचक    आंकड़े और महत्वपूर्ण जानकारी प्रदेश में कुल पेड़ (जंगलों से बाहर)            4.01 करोड़ यमुना नगर में कुल पेड़ (जंगलों से बाहर)     60.94 लाख (प्रदेश के कुल पेड़ों का बड़ा हिस्सा) वन क्षेत्र (Forest Area) में पहला स्थान        पंचकूला वन क्षेत्र (Forest Area) में दूसरा स्थान        यमुनानगर यमुनानगर का कुल वन क्षेत्र प्रतिशत            10.94% हरियाणा का कुल वन क्षेत्र                           1,559 वर्ग किमी हर साल पौधारोपण का लक्ष्य                        2.2 से 2.5 करोड़ पौधे पौधों के जीवित रहने की दर                         65% से 70% प्रदेश में कुल तालाबों की संख्या                    19,487 ओवर एक्सप्लाइटेड ब्लॉक (अति-दोहित क्षेत्र)   85 – 88 ब्लॉक महेंद्रगढ़ में भूजल स्तर                                  52 मीटर से अधिक गहरा सालाना पंजीकृत होने वाले नए वाहन                7 से 8 लाख

बेटियों के सपनों को मिली उड़ान, लाड़ली लक्ष्मी योजना बनी उच्च शिक्षा का मजबूत सहारा

बेटियों के टूटने नहीं दिए ख्वाब: मध्यप्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना बनी उच्च शिक्षा का संबल भोपाल अगर सरकार से यह मदद न मिलती, तो गरीबी के आगे मेरे घुटने टिक जाते और मेरी पढ़ाई हमेशा के लिए बंद हो जाती। आज मैं कॉलेज जा रही हूँ, तो सिर्फ इसलिए क्योंकि मेरे सिर पर 'लाड़ली लक्ष्मी योजना' का हाथ है।" यह भावुक कर देने वाले शब्द मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले की प्रतिभा बुरेडिया के हैं। यह महज एक बच्ची की जुबानी नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'लाड़ली लक्ष्मी योजना' की सफलता की वह जीवंत कहानी है, जो आज प्रदेश की लाखों बेटियों की जिंदगी में रोशनी बिखेर रही है। आर्थिक तंगहाली और मजबूरियों के अंधेरे को चीरकर अपनी किस्मत खुद लिखने वाली दो बेटियों-प्रतिभा बुरेडिया और ओशीन खान की दास्तान आज राष्ट्रीय पटल पर उन सभी परिवारों के लिए एक मिसाल है, जो तंगहाली के कारण बेटियों की पढ़ाई बीच में ही छुड़वा देते हैं। मजदूर की बेटियों को मिला हौसलों का आसमान अशोकनगर के वार्ड क्रमांक 21 की रहने वाली प्रतिभा के पिता राजेंद्र रजक मजदूरी करते हैं। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले इस परिवार के लिए दो वक्त की रोटी के साथ बच्चों को पढ़ाना एक बड़े पहाड़ जैसा था। प्रतिभा बताती हैं कि जब वह कक्षा 12वीं में थीं, तो घर की माली हालत देखकर उन्हें लगा कि अब पढ़ाई का सफर यहीं थम जाएगा। ठीक ऐसी ही कहानी वार्ड क्रमांक 18 की ओशीन खान की भी है। मध्यमवर्गीय मजदूर परिवार से आने वाली ओशीन के पिता अमजद खान पर पूरे परिवार और बच्चों की शिक्षा का भारी बोझ था। लेकिन, दोनों ही बेटियों के सपनों के आड़े गरीबी नहीं आ सकी, क्योंकि बचपन में ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से उनका पंजीयन लाड़ली लक्ष्मी योजना में हो चुका था। कदम-कदम पर मिली आर्थिक सुरक्षा की गारंटी योजना के तहत इन बेटियों को स्कूल से लेकर कॉलेज तक हर मोड़ पर वित्तीय सहारा मिला। प्रतिभा को कक्षा 6वीं में ₹2,000 की राशि, कक्षा 9वीं में ₹4,000, कक्षा 11वीं में ₹6,000 और कक्षा 12वीं (वर्ष 2025) में ₹6,000 की छात्रवृत्ति मिली। इस वित्तीय सहायता के दम पर दोनों बेटियों ने साल 2025 में न सिर्फ 12वीं की परीक्षा शानदार अंकों से उत्तीर्ण की, बल्कि कॉलेज की दहलीज पर भी कदम रख दिया। वर्तमान में प्रतिभा को कॉलेज के प्रथम वर्ष के लिए ₹12,500 की किश्त मिल चुकी है, वहीं ओशीन को स्नातक स्तर पर दो किश्तों में कुल ₹25,000 की सहायता मिल रही है। ₹1.43 लाख की वित्तीय सुरक्षा: बाल विवाह पर लगाम, शिक्षा को उड़ान मध्यप्रदेश सरकार की यह योजना केवल एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का एक बड़ा आंदोलन बन चुकी है। योजना के अंतर्गत पात्र बालिकाओं को जन्म से लेकर 21 वर्ष की आयु पूरा होने तक कुल 1,43,000 रूपये की वित्तीय सहायता राशि चरणबद्ध तरीके से प्रदान की जाती है। बेटियों के जन्म के प्रति रूढ़िवादी समाज की सोच को बदलकर उसे प्रोत्साहित करना। बालिकाओं की शिक्षा को बिना किसी बाधा के उच्च स्तर तक ले जाना। बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर पूरी तरह रोक लगाना (क्योंकि योजना का लाभ तभी मिलता है जब बेटी की शादी 18 वर्ष से कम उम्र में न हुई हो)। मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार आज जब ये बेटियाँ हाथ में कॉलेज की किताबें लेकर आगे बढ़ रही हैं, तो उनके चेहरों पर एक नया आत्मविश्वास है। प्रतिभा और ओशीन कहती हैं, "यह योजना हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। बेटियों को बोझ समझने वाली सोच को इस योजना ने जड़ से खत्म कर दिया है। हम माननीय मुख्यमंत्री जी का तहे दिल से आभार व्यक्त करती हैं, जिन्होंने हमारे सपनों को मरने नहीं दिया।" मध्यप्रदेश से निकलकर आ रही ये सफलता की कहानियाँ इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि अगर सरकारें संवेदनशील हों और नीतियां जमीन पर सही ढंग से लागू हों, तो देश की कोई भी 'लाड़ली' अपनी उड़ान भरने से वंचित नहीं रह सकती।  

16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्याखेट पर रोक, छोटे असंबद्ध तालाबों को मिलेगी छूट

16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्याखेट पर प्रतिबंध, नदियों से असंबद्ध छोटे तालाबों को छूट नदियों और उससे जुड़े जलाशयों में मछली पकड़ने पर रोक, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई भोपाल  मध्यप्रदेश में मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन को बढ़ावा देने और जलीय पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक की अवधि को 'बंद ऋतु' (क्लोज सीजन) घोषित किया गया है। इन दो महीने की अवधि में प्रदेश की समस्त नदियों और उनसे जुड़े जलाशयों में मत्स्याखेट पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। गुरुवार को संचालनालय मत्स्योद्योग ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस अवधि में यदि कोई भी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन कर अवैध रूप से मत्स्याखेट या परिवहन करते हुए पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रतिबंध से ऐसे छोटे तालाब या अन्य जल स्रोत जिनका किसी भी नदी से कोई संबंध नहीं है और जिन्हें 'निर्दिष्ट जल' की परिभाषा के अंतर्गत नहीं लाया गया है, उन पर यह नियम लागू नहीं होंगे। इन निजी या स्थानीय छोटे तालाबों में सामान्य दिनों की तरह मत्स्य पालन और आखेट किया जा सकेगा। मछुआ समुदाय को समय रहते जानकारी मिलने से मछुआरे अनजाने में होने वाली किसी भी परेशानी से बच सकेंगे और नियमों का पालन कर प्राकृतिक रूप से मत्स्य बीज उत्पादन में सहयोग कर सकेंगे।