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मान सरकार का बड़ा कदम! पंजाब में ग्रुप C-D भर्ती से खत्म हो सकता है ठेकेदारी सिस्टम

चंडीगढ़  पंजाब कैबिनेट की एक अहम बैठक दोपहर 12 बजे होगी। बैठक में ग्रुप सी और डी में ठेकेदारी सिस्टम खत्म करने पर फैसला लिया जा सकता है। इस मीटिंग में ग्रुप-सी और डी में ठेकेदारी सिस्टम को खत्म करने के फैसले पर मुहर लग सकती है। इसके बाद सरकार अपने सभी विभागों में खुद ही भर्तियां करेगी। पंजाब की मौजूदा सरकार शुरू से ही ठेका मुलाजिमों को लेकर गंभीर रही है। 22 मार्च 2022 को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शपथ ग्रहण करने के कुछ ही दिनों बाद ही ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के 35 हजार कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने की घोषणा की थी। इसके साथ ही उन्होंने मुख्य सचिव को इस संबंध में मसौदा (ड्राफ्ट बिल) तैयार करने के निर्देश दिए थे। फिर 5 सितंबर 2022 को पंजाब कैबिनेट ने संविदा शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को नियमित करने संबंधी कल्याणकारी नीति को औपचारिक मंजूरी दी। वहीं, 21 फरवरी 2023 को पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक में 14,417 संविदा कर्मचारियों की सेवाओं को तत्काल प्रभाव से नियमित करने के प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी प्रदान की गई। पंजाब सरकार ने अपने 4 वर्ष के कार्यकाल में कुल 65,264 युवाओं को पक्की सरकारी नौकरियां देने का दावा किया है। सरकार का दावा है कि उसके कार्यकाल के दौरान औसतन 45 युवाओं को प्रतिदिन सरकारी नौकरी मिली है। सरकारी नौकरियों के साथ-साथ औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देकर राज्य में करीब साढ़े 5 लाख निजी रोजगार के अवसर भी सृजित किए गए हैं।

प्रवीण कंसल और नीरज कंसल ED की गिरफ्त में, रियल एस्टेट घोटाले में बड़ी कार्रवाई

चंडीगढ़ मोहाली के रॉयल एस्टेट के प्रमोटर् प्रवीण कंसल और नीरज कंसल को ईडी ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। पिछले हफ्ते ही ईडी ने रॉयल एस्टेट के चंडीगढ़, मोहाली स्थित कई ठिकानों पर रेड की थी। प्रवीण कंसल और नीरज कंसल पर गलत तरीके से मोहाली में प्रोजेक्ट के सीएलयू लेने का आरोप है। इसके अतिरिक्त जमीन की खरड़ फरोख्त में भी गड़बड़ी की शिकायत है। मोहाली विजिलेंस ने भी प्रवीण कंसल और नीरज कंसल के साथ साथ इंदु कंसल और नायब तहसीलदार तरसेम मित्तल के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया हुआ है। इस केस में सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। हाई कोर्ट ने भी कंपनी के प्रमोटर को कस्टडी में लेकर पूछताछ जय आदेश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ कंपनी के प्रमोटर्स ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। अब सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद रॉयल एस्टेट के प्रमोटर्स गायब हो गए थे। पुलिस उनकी तलाश कर रही थी। कंपनी के प्रमोटर्स के खिलाफ मोहाली में 11 जून को फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा जालसाजी का केस दर्ज हुआ था । यह केस आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ताओं नरेश कुमार गर्ग और प्यारे लाल गर्ग ने आरोप लगाया कि वर्ष 2011 में संपत्ति उनके नाम पर खरीदी गई थी। वर्ष 2013 में बिना उनकी जानकारी और सहमति के उसी संपत्ति को मोतियाज रॉयल सिटी कंपनी)ल के नाम ट्रांसफर कर दिया गया यह ट्रांसफर तथाकथित सप्लीमेंट्री सेल डीड के माध्यम से की गई। नरेश गर्ग ने शिकायत में कहा था कि यह ट्रांसफर फर्जी बोर्ड प्रस्ताव के आधार पर किया गया। आरोपियों (कंपनी के डायरेक्टर्स) ने मिलकर साजिश रची और सरकारी अधिकारी की मिलीभगत से रजिस्ट्री करवाई गई। मोतियाज के प्रमोटर्स पर मुख्य आरोप धोखाधड़ी करके संपत्ति हड़पना और फर्जी दस्तावेज बनाने का है। कंपनी की दलील कंपनी के प्रमोटर्स ने कोर्ट में दलील दी थी कि यह कोई धोखाधड़ी नहीं, बल्कि तकनीकी गलती थी। मूल सेल डीड में गलती से खरीदार के रूप में शिकायतकर्ताओं का नाम आ गया। बाद में बोर्ड ने प्रस्ताव पास कर सुधार किया गया। शिकायतकर्ता इस प्रक्रिया से पूरी तरह अवगत थे। यह सिविल विवाद है, क्रिमिनल केस नहीं कोई पैसा या संपत्ति हड़पने की मंशा नहीं थी। वे जांच में शामिल हो चुके हैं, इसलिए कस्टडी में लेकर पूछताछ की जरूरत नहीं है। वहीं सरकार और शिकायतकर्ता पक्ष ने कहा कि आरोप गंभीर और स्पष्ट साजिश दर्शाते हैं। इससे दस्तावेज़ फर्जी होने का संदेह मजबूत होता है। सरकारी वकील की दलील कानून के अनुसार सप्लीमेंट्री सेल डीड से मालिकाना हक नहीं बदला जा सकता। संपत्ति ट्रांसफर के लिए सभी मालिकों का उपस्थित होना जरूरी है।यहां तक कि सरकारी अधिकारी ने भी नियमों का उल्लंघन किया और अवैध ट्रांजैक्शन को मंजूरी दी। इसलिए गहन जांच के लिए आरोपियों की कस्टोडियल पूछताछ जरूरी है। हाई कोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया गंभीर मामला है। दस्तावेज़ों से धोखाधड़ी और साजिश का मामला बनता है। संपत्ति बिना मालिक की सहमति के ट्रांसफर की गई। मूल दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किए गए। आरोपी बोर्ड प्रस्ताव का असल नहीं दिखा पाए।

खोड़ा में दिल दहला देने वाली वारदात, बच्चे को बुलाकर दिया चाकू; हत्या से इलाके में हड़कंप

गाजियाबाद यूपी के गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र में ईद के मौके पर हुए जानलेवा चाकू हमले के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है. घायल युवक की नोएडा के अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया. पुलिस ने मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।  मृतक युवक की पहचान सूर्या चौहान (17 वर्ष) निवासी नवनीत विहार खोड़ा के रूप में हुई है. परिजनों द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार घटना कल बीती 28 मई 2026 की शाम करीब 3:30 बजे की है. मृतक की मां के मुताबिक, सूर्या चौधरी स्कूल के पास गली में खड़ा था, तभी अरशद, नवाब, फरहान, आतिफ, सारिक समेत अन्य युवकों ने बच्चे को बहला-फुसलाकर बुलाया. अरशद ने पूछा कि क्या उसने कभी बकरी को कटते देखा है, ‘नहीं’ कहने पर बच्चे पर चाकू से वार कर दिया गया. आरोप है कि आरोपियों ने सूर्या को पकड़ लिया और उस पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए।  घटना के दौरान शोर सुनकर मृतक का भाई यश चौहान और उसकी मां मौके पर पहुंचे. परिजनों का आरोप है कि हमलावर सूर्या को गंभीर हालत में छोड़कर फरार हो गए. घायल युवक को तुरंत नोएडा सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।  घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई. हत्या करने वाले आरोपी युवक मुस्लिम समुदाय से है, मृतक युवक और हत्या करने वाले युवक पहले से जानकार और मित्र है और दोनों के बीच कुछ माह पूर्व झगड़ा हुआ था. आरोप है कि उसी का बदला लेने के लिए पहले फोन कर युवक को बुलाया गया और फिर एक बड़े चाकू से कई वार कर उसकी हत्या कर दी गई. ऐसे में घटना को लेकर स्थानीय लोगों और विभिन्न हिंदू संगठनों में भारी रोष है।  एहतियात के तौर पर इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. मौके पर खोड़ा नगर पालिका की पूर्व अध्यक्ष रीना भाटी भी मौजूद रहीं. हिंदू संगठन से जुड़े लोगो की मांग है कि खोड़ा में युवक की मुस्लिम लड़कों द्वारा की गई हत्या में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और गिरफ्तारी के साथ ही उनके घरों पर बुलडोजर की कार्यवाही होनी चाहिए। 

ठनका-आंधी से बिहार बेहाल: आज भी भारी बारिश का अलर्ट, 70 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकती है हवा

पटना  बिहार में आज भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। पटना समेत राज्य के 15 जिलों में झमाझम बारिश के साथ वज्रपात और तेज आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। अन्य जिलों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है। आईएमडी की ओर से राज्य भर में खराब मौसम के दुष्प्रभाव से बचने की चेतावनी दी गई है। बीते 24 घंटों में खराब मौसम ने कम से कम 21 लोगों की जान ले ली। 18 की मौत ठनका की चपेट में आने से हुई जबकि तीन लोग आंधी के शिकार बन गए। आज सूर्योदय का वक्त 05:00 AM तो सूर्यास्त शाम 06:43 PM बजे बताया गया है। हवा मेंनमी का स्तर 41 % है, वहीं वायुमंडलीय दबाव 1008 के स्तर पर है। अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 26 डिग्री सी के आसपास रहेगा। धूप निकलने पर उमस भी बढ़ेगा। मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार आज 30 मई शनिवार को राज्य के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, मुजफ्फरपुर,दरभंगा, शिवहर, सीतामढ़ी, भोजपुर, सारण, गोपालगंज, गया, सिवान, जहानाबाद, औरंगाबाद, रोहतास, नवादा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में बारिश के साथ 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की भी संभावना है बीते 24 घंटों में बिहार का मौसम खतरनाक रहा है। बेमौसम बारिश ने बिहार में कहर बरपाया। शुक्रवार को मौसम के बुरे प्रभाव से कम से कम 21 लोगों के मौत की खबर है। आंधी से सैंकड़ों की संख्या में पेड़ और बिजली के पोल गिर गए जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। कई ट्रेनें ट्रैक पर फंसी रहीं तो चार विमानों को डायवर्ट करना पड़ा। आठ डिग्री तक अधिकतम तापमान में आई कमी मौसमविदों के मुताबिक मौसम में आए बदलाव से आठ डिग्री तक अधिकतम तापमान में कमी आई है। सर्वाधिक कमी पटना में 8.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुई। सीवान के जीरादेई में 8.3 डिग्री, अरवल में 6.6 डिग्री, औरंगाबाद में 8.1 डिग्री, गया में 7.9 डिग्री, डेहरी में 7.8 डिग्री, वैशाली में 6.4 डिग्री, दरभंगा में 3.6 डिग्री, सुपौल में 2.3 डिग्री, भागलपुर में 1.5 डिग्री, शेखपुरा में 5.3 डिग्री, सबौर में 8.2 डिग्री, मधुबनी में दो डिग्री, नालंदा में 7.5 डिग्री, छपरा में 5.6 डिग्री की कमी आई है। शुक्रवार को राज्य में सर्वाधिक अधिकतम तापमान कैमूर में 34.5 डिग्री दर्ज किया गया। तापमान में गिरावट से भीषण गर्मी से बिहार वासियों को राहत मिली।

सिर्फ 5 रुपये में किसानों को बड़ी सौगात, 1.10 लाख से ज्यादा स्थाई कृषि पंप कनेक्शन जारी

मात्र 5 रुपये में 1 लाख 10 हजार से अधिक किसानों को मिला नया स्थाई कृषि पंप कनेक्शन भोपाल  राज्‍य शासन द्वारा घोषित 'किसान कल्याण वर्ष 2026' के अंतर्गत किसानों को सिंचाई पम्‍प कनेक्‍शन आसानी से उपलब्‍ध कराए जा रहे हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी के कार्यक्षेत्र में किसानों को अब मात्र 5 रूपये के प्रारंभिक शुल्‍क में नए बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से अब तक 01 लाख 10 हजार 478 कृषि पम्‍प कनेक्‍शन उपलब्‍ध करा दिये गये हैं। भोपाल रीजन के 8 जिलों के 9 हजार 305 गावों में 85 हजार 362 कृषि पम्‍प उपभोक्‍ताओं ने तथा ग्‍वालियर रीजन के 8 जिलों के 7 हजार 284 गावों में 25 हजार 116 कृषि पम्‍प उपभोक्‍ताओं ने 5 रूपये में नवीन कनेक्‍शन योजना का लाभ उठाया है। कंपनी द्वारा कृषि पम्पों के कनेक्शनों की संख्या बढ़ाए जाने के लिए ऐसे कृषक जिनके खेत विद्युत की उपलब्ध लाइन के समीप स्थित हैं, उनको प्रारंभिक शुल्‍क 5 रूपये में स्थाई कृषि पंप कनेक्शन प्रदान किये जा रहे हैं। कनेक्‍शन की शेष शुल्‍क राशि का भुगतान मासिक देयकों के साथ किश्‍तों में लिया जा रहा है। कंपनी ने कहा है कि आवेदक 5 रूपये में नवीन कनेक्‍शन के संबंध में किसी भी जानकारी के लिए नजदीकी विद्युत केन्‍द्र/जोन अथवा कंपनी के कॉल सेन्‍टर नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं।  

बुजुर्गों के कल्याण और संरक्षण के लिए सरकार लगातार कर रही पहल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को नई दिशा और गति प्रदान की गई है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित योजनाएं और पहलें इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार उनके सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा एवं अधिकारों के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है। बदलते सामाजिक परिवेश में जहां पारिवारिक संरचना में निरंतर परिवर्तन हो रहा है, वहीं वरिष्ठजनों की देखभाल और उनके अधिकारों की रक्षा एक महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरा है। इस दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। कानूनी संरक्षण: अधिकारों की मजबूत नींव वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकार दिलाने के लिए माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। यह अधिनियम वरिष्ठजनों को यह अधिकार देता है कि यदि वे स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं, तो वे अपने बच्चों या संबंधितों से भरण-पोषण प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश में इस अधिनियम के तहत प्रत्येक अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय को भरण-पोषण अधिकरण तथा जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय को अपील अधिकरण घोषित किया गया है। इससे वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्राप्त हो रहा है। इसके अतिरिक्त, सामाजिक न्याय विभाग के जिला अधिकारियों को भरण-पोषण अधिकारी के रूप में नामित किया गया है, जो इस व्यवस्था को प्रभावी रूप से संचालित करते हैं। अधिनियम के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा या परित्याग को दंडनीय अपराध माना गया है, जिससे समाज में उनके प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही, भरण-पोषण हेतु मासिक राशि निर्धारित करने का प्रावधान भी वरिष्ठजनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है। संस्थागत व्यवस्था: आश्रय और देखभाल प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आश्रय और देखभाल की सुदृढ़ व्यवस्था की गई है। विभिन्न संस्थाओं एवं स्थानीय निकायों के माध्यम से संचालित वरिष्ठ आश्रमों में जरूरतमंद वरिष्ठजनों को आश्रय, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं एवं मनोरंजन की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इसी कड़ी में भोपाल में विकसित “संध्या छाया” वरिष्ठजन निवास एक महत्वपूर्ण पहल है। यह आधुनिक एवं सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर वरिष्ठजनों को सुरक्षित, आरामदायक एवं गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करता है। यहां वातानुकूलित कक्ष, लाइब्रेरी, फिजियोथेरेपी, चिकित्सा सुविधाएं एवं मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराए गए हैं। यह पहल दर्शाती है कि राज्य शासन वरिष्ठजनों को केवल आश्रय ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण जीवन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। योजनाएं और कार्यक्रम: समग्र विकास की दिशा भारत सरकार की अटल वयो अभ्युदय योजना के माध्यम से भी राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण हेतु विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इस योजना के तहत स्वास्थ्य देखभाल, पोषण, आजीविका, सामाजिक सहभागिता एवं जागरूकता जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वरिष्ठजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अंतर-पीढ़ी संवाद, सामूहिक गतिविधियां और कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे न केवल उनकी सक्रियता बनी रहती है, बल्कि समाज में उनके अनुभवों का लाभ भी नई पीढ़ी को मिलता है। हेल्पलाइन और सहायता तंत्र: हर समय साथ वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए Elder Line 14567 जैसी पहल अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है। यह टोल-फ्री हेल्पलाइन वरिष्ठजनों को जानकारी, परामर्श, भावनात्मक सहयोग एवं आपात स्थिति में सहायता प्रदान करती है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से वरिष्ठजन अपनी समस्याएं साझा कर सकते हैं और उन्हें त्वरित समाधान प्राप्त होता है। यह सेवा न केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि उन्हें यह विश्वास भी दिलाती है कि शासन हर समय उनके साथ खड़ा है। सम्मान और सामाजिक स्वीकृति वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान को बढ़ावा देने के लिए राज्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर “शतायु सम्मान” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठजनों को सम्मानित किया जाता है। यह पहल समाज में वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान और प्रेरणा का वातावरण तैयार करती है। नवाचार और सुधार राज्य शासन द्वारा समय-समय पर नियमों में संशोधन कर व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उदाहरण के लिए, शासकीय कर्मचारियों द्वारा माता-पिता की उपेक्षा करने पर उनके वेतन से भरण-पोषण भत्ता काटकर सीधे माता-पिता के खाते में जमा करने का प्रावधान एक महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम है। यह व्यवस्था न केवल वरिष्ठजनों के अधिकारों की रक्षा करती है, बल्कि परिवारों में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को भी बढ़ावा देती है। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम एक समग्र, संवेदनशील और प्रभावी तंत्र के रूप में उभरकर सामने आए हैं। कानूनी संरक्षण, संस्थागत व्यवस्थाएं, योजनाएं, हेल्पलाइन सेवाएं और सम्मान कार्यक्रम—इन सभी प्रयासों ने मिलकर वरिष्ठजनों के जीवन को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाया है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मध्यप्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के संरक्षण और उनके कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयास न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। आने वाले समय में इन पहलों के माध्यम से वरिष्ठजनों के जीवन में और अधिक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे, जो एक संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  

कम लागत, बेहतर उत्पादन और मिट्टी की सुरक्षा का नया विकल्प : नैनो उर्वरक

रायपुर खेती में बढ़ती लागत, मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से पैदा हो रही चुनौतियों के बीच अब नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए एक उपयोगी और लोकप्रिय विकल्प बन गई है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि किसान संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से इनका उपयोग करें तो इससे खेती की लागत कम करने, उत्पादन बेहतर बनाने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाए रखने के लिए उर्वरकों के उपयोग के तौर-तरीकों में बदलाव जरूरी होगा। यही कारण है कि अब किसानों के बीच नैनो उर्वरकों को लेकर रुचि बढ़ रही है। छत्तीसगढ़ सहित देश के अधिकांश धान उत्पादक क्षेत्रों में सामान्यतः प्रति एकड़ 2 से 3 बोरी यूरिया और 1 बोरी डीएपी का उपयोग किया जाता है। मौजूदा कीमतों के अनुसार एक बोरी यूरिया की कीमत लगभग 270 रुपये और एक बोरी डीएपी की कीमत लगभग 1350 रुपये है। इस प्रकार केवल यूरिया और डीएपी पर प्रति एकड़ करीब 1900 से 2200 रुपये तक खर्च हो जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल का प्रभाव लगभग एक बोरी पारंपरिक यूरिया के बराबर माना जाता है। फसल में दो चरणों में छिड़काव के जरिए पारंपरिक यूरिया की जरूरत को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यदि किसान 2 बोरी ठोस यूरिया की जगह 2 बोतल नैनो यूरिया का उपयोग करते हैं तो अनुमानित खर्च 100 रुपये प्रति एकड़ बचत होती है। दो बोरी पारंपरिक यूरिया का मूल्य लगभग 540 रुपये है। इसके स्थान पर 2 बोतल नैनो यूरिया| लगभग 450-500 में आता है। यानि सीधे खाद लागत में बचत के साथ-साथ परिवहन, भंडारण और मजदूरी खर्च में भी कमी आती है। इसी प्रकार कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि 50 किलो डीएपी की पूरी मात्रा उपयोग करने के बजाय यदि किसान 25 किलो डीएपी के साथ 500 मिली नैनो डीएपी का उपयोग करें तो प्रति एकड़ लगभग 75 से 150 रुपये तक की बचत होती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार पारंपरिक यूरिया का बड़ा हिस्सा मिट्टी, पानी और वातावरण में नष्ट हो जाता है। इसके विपरीत नैनो यूरिया के सूक्ष्म कण सीधे पौधों द्वारा तेजी से अवशोषित किए जाते हैं। इससे पौधों को संतुलित पोषण मिलता है। विशेषज्ञों के मुताबिक संतुलित उपयोग की स्थिति में इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आए है।फसल की बढ़वार बेहतर होती है। पौधों की हरियाली लंबे समय तक बनी रहती है। दानों का भराव मजबूत होता है।उत्पादन की गुणवत्ता सुधरती है। उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है। कई कृषि परीक्षणों में 5 से 8 प्रतिशत तक उत्पादन वृद्धि के संकेत भी मिले हैं। कृषि क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि लगातार अधिक मात्रा में रासायनिक खाद के उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। नैनो उर्वरकों का संतुलित उपयोग मिट्टी में पोषक तत्वों के संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसके अलावा रासायनिक अवशेष कम होते हैं।भूजल प्रदूषण घटता है।मिट्टी की जैविक सक्रियता बेहतर बनी रहती है।पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है।इसी कारण वैज्ञानिक खेती में अब संतुलित उर्वरक उपयोग पर अधिक जोर दिया जा रहा है । वैज्ञानिक सलाह के अनुसार संतुलित रूप से नैनो उर्वरकों का उपयोग बढ़ाते हैं तोआयातित उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी है।विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी। देश में उर्वरक उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। उत्पादन इकाइयों में रोजगार बढ़ेगा। कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेगा। कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में पारंपरिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। रायपुर जिले की समितियों में वर्तमान मे यूरिया की उपलब्धता  9,102 मीट्रिक टन और कुल भंडारित यूरिया की मात्रा 10,732 मीट्रिक टन है, जब कि डीएपी की उपलब्धता 3,092 मीट्रिक टन और कुल भंडारित डीएपी की मात्रा 3,927 मीट्रिक टन है। इसके साथ ही कृषि सेवा केंद्रों और समितियों के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की उपलब्धता भी बढ़ाई जा रही है ताकि किसान आवश्यकता और उपयोगिता के आधार पर इन विकल्पों का इस्तेमाल कर सकें। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक तकनीकों का समन्वय ही खेती को अधिक लाभकारी बनाएगा। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी विकल्प माना जा रहा है, जो कम लागत, बेहतर उत्पादन और मिट्टी की सुरक्षा तीनों मोर्चों पर किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

मध्य प्रदेश में ट्रांसफर सीजन शुरू, स्कूल शिक्षा विभाग ने मांगी स्कूलवार पदों की जानकारी

भोपाल  प्रदेश  में तबादलों का काउंटडाउन शुरू हो गया है। सरकार द्वारा लंबे समय से एक ही जगह पर जमे अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाने की तैयारी तेज कर दी गई है। खासतौर पर राजस्व विभाग और पुलिस महकमे में बड़े स्तर पर फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। विभागीय स्तर पर अधिकारियों की सूचियां तैयार होना शुरू हो गई हैं। तीन साल या उससे अधिक समय से एक ही जिले और अनुभाग में पदस्थ अधिकारियों की जानकारी जुटाई जा रही है। इससे एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों सहित कई अधिकारी प्रभावित होंगे। तबादले की अवधि नजदीक आने के साथ प्रदेश के अलग-अलग विभागों के विभागाध्यक्षों ने विभागीय तबादला नीति जारी करने के साथ जिलों में पदस्थ अलग-अलग कैडर के अफसरों का ब्यौरा जुटाना शुरू कर दिया है। लोक निर्माण और जल संसाधन विभाग ने इंजीनियरों की वर्तमान पोस्टिंग, पदनाम और अतिरिक्त प्रभार की जानकारी मांगी है तो स्कूल शिक्षा विभाग ने हर विद्यालय में पदस्थ एक-एक शिक्षक का ब्यौरा पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने संविदा कर्मचारियों के तबादले के लिए 2 जून तक ऑनलाइन आवेदन बुला लिए हैं, तो पीएचक्यू ने आरक्षक से सब इंस्पेक्टर तक के तबादले पांच जून तक करने की डेडलाइन तय कर दी है। मोहन कैबिनेट के फैसले के बाद 22 मई को सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के कर्मचारी अधिकारियों के राज्य और जिला संवर्ग स्तर पर तबादले की पॉलिसी जारी कर दी है। इसमें तबादले की अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर विभागों को ऑनलाइन आवेदन मंगाने के लिए कहा गया है। साथ ही यह भी साफ किया गया है कि अगर कोई अधिकारी कर्मचारी सरकार द्वारा तय टारगेट को अचीव नहीं कर पाता है तो उसे प्रशासनिक आधार पर तीन साल की अवधि के पहले भी स्थानांतरित किया जा सकता है। जल संसाधन विभाग ने मांगी इंजीनियरों की पदस्थापना, अतिरिक्त प्रभार की जानकारी जल संसाधन विभाग ने आयुक्त कमांड क्षेत्र और विकास संचालनालय, आयुक्त भू अर्जन और पुनर्वास बाणसागर रीवा, सभी मुख्य अभियंता, परियोजना संचालक, अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि विभाग के प्रथम, द्वितीय, तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के नाम, पदनाम, पदस्थापना स्थल, जहां से वेतन निकलता है वहां की जानकारी के साथ गृह जिला, सेवानिवृत्ति तिथि, जिन पदों के अतिरिक्त प्रभार में हैं उस पद और कार्यालय का नाम तथा तारीख की जानकारी शासन को भेजें। स्कूल शिक्षा विभाग ने तबादले के पहले मांगा हर टीचर की पोस्टिंग का ब्यौरा उधर स्कूल शिक्षा विभाग ने भी एजुकेशन 3.0 पोर्टल पर हर विद्यालय में विषय वार पदस्थ शिक्षकों का ब्यौरा एंट्री करने के लिए कहा है। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है कि विद्यालय वार और विषय वार एंट्री कराएं और जिन शिक्षकों की मृत्यु हो गई है या रिटायर हो गए हैं, उनके नाम विद्यालय में पदस्थ शिक्षकों की सूची से हटाएं ताकि जब विभाग द्वारा तबादले की कार्यवाही की जाए तो यह स्थिति न बने कि विद्यालय में पहले से पर्याप्त शिक्षक पदस्थ हों और अतिरिक्त पदस्थापना हो जाए या फिर पद भरे होने की जानकारी पोर्टल पर हो जबकि वास्तव में टीचर न हों तो वहां पोस्टिंग न हो पाए। लोक शिक्षण आयुक्त इसकी जिलावार समीक्षा 30 मई को करेंगे। जनगणना में लगे शिक्षकों के तबादले फरवरी 2027 तक नहीं होंगे लोक शिक्षण आयुक्त ने एक अन्य निर्देश जारी कर कहा है कि जिन शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगी है उनके तबादले फरवरी 2027 तक नहीं होंगे। ऐसे शिक्षकों की संख्या 58 हजार से अधिक है जो जनगणना ड्यूटी में लगे हैं। इसलिए एक जून 2026 तक ऐसे सभी शिक्षकों की जानकारी एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर एंट्री करने के लिए कहा गया है जो जनगणना में लगे हैं। एनएचएम ने 2 जून तक मांगा संविदा कर्मचारियों की डिटेल दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने भी इस पर काम शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की अपर मिशन संचालक दिशा नागवंशी ने एनएचएम में काम करने वाले संविदा कर्मचारियों के स्वैच्छिक स्थानांतरण के ऑनलाइन प्रस्ताव 2 जून तक मांगे हैं। इसके लिए संविदा तबादले की पॉलिसी भी जारी कर दी गई है। ऑनलान आवेदन 27 मई से लेने का सिलसिला पोर्टल पर शुरू हुआ है और 2 जून की रात 12 बजे तक आवेदन किए जा सकेंगे। इसके बाद तबादले किए जाएंगे। निर्देशों में कहा गया है कि तबादले के लिए तीन माह की सार्थक एप की उपस्थिति भी अपलोड करनी होगी। आवेदन सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र से ग्रामीण क्षेत्र और शहरी क्षेत्र से शहरी क्षेत्र के लिए किए जा सकेंगे। रिक्त पद पर तबादले के लिए कम से कम और अधिकम 5 संस्थाओं की एंट्री आवेदन में करनी होगी। ऐसे कर्मचारी जिनकी नियुक्त दो साल के भीतर हुई है तथा दो साल में जिनका तबादला हो चुका है, उनके तबादले पर प्रतिबंध रहेगा। 5 जून तक आरक्षक से एसआई तक के तबादले करेंगे पुलिस आयुक्त-एसपी इसी तरह गृह विभाग के अंतर्गत पुलिस मुख्यालय ने भोपाल, इंदौर के पुलिस आयुक्त, एसपी रेल समेत सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों से कहा है कि किसी एक थाने में आरक्षक से लेकर सब इंस्पेक्टर तक के कर्मचारी की एक पद पर पदस्थापना पांच साल से अधिक नहीं होना चाहिए। साथ ही एक बार पोस्टिंग के बाद संबंधित कर्मचारी की पदस्थापना दोबारा उसी थाने में नहीं होनी चाहिए। अलग-अलग पदों पर पदस्थापना के मामले में किसी भी कर्मचारी की पोस्टिंग में तीन साल का अंतर होना चाहिए। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि आरक्षक से लेकर सब इंस्पेक्टर तक के कर्मचारी को एक ही पुलिस अनुविभाग में दस साल से अधिक समय तक नहीं रहना चाहिए। पुलिस मुख्यालय ने इस आधार पर पांच जून तक तबादला करके सूची मुख्यालय को भेजने कहा है। सूत्रों के मुताबिक राज्य शासन जल्द ही तबादला नीति जारी कर सकता है। इसके पहले ही विभागों में अंदरखाने हलचल बढ़ गई है। कई अधिकारी अपने पसंदीदा जिलों में पदस्थापना के लिए राजनीतिक संपर्क साधने में जुट गए हैं। नेताओं और जनप्रतिनिधियों के यहां सिफारिशी पत्रों का दौर भी शुरू हो गया है। राजधानी भोपाल से लेकर जिला मुख्यालयों तक तबादलों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजस्व … Read more

मात्र 5 रुपये में 1 लाख 10 हजार से अधिक किसानों को मिला नया स्थाई कृषि पंप कनेक्शन

भोपाल राज्‍य शासन द्वारा घोषित 'किसान कल्याण वर्ष 2026' के अंतर्गत किसानों को सिंचाई पम्‍प कनेक्‍शन आसानी से उपलब्‍ध कराए जा रहे हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी के कार्यक्षेत्र में किसानों को अब मात्र 5 रूपये के प्रारंभिक शुल्‍क में नए बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से अब तक 01 लाख 10 हजार 478 कृषि पम्‍प कनेक्‍शन उपलब्‍ध करा दिये गये हैं। भोपाल रीजन के 8 जिलों के 9 हजार 305 गावों में 85 हजार 362 कृषि पम्‍प उपभोक्‍ताओं ने तथा ग्‍वालियर रीजन के 8 जिलों के 7 हजार 284 गावों में 25 हजार 116 कृषि पम्‍प उपभोक्‍ताओं ने 5 रूपये में नवीन कनेक्‍शन योजना का लाभ उठाया है। कंपनी द्वारा कृषि पम्पों के कनेक्शनों की संख्या बढ़ाए जाने के लिए ऐसे कृषक जिनके खेत विद्युत की उपलब्ध लाइन के समीप स्थित हैं, उनको प्रारंभिक शुल्‍क 5 रूपये में स्थाई कृषि पंप कनेक्शन प्रदान किये जा रहे हैं। कनेक्‍शन की शेष शुल्‍क राशि का भुगतान मासिक देयकों के साथ किश्‍तों में लिया जा रहा है। कंपनी ने कहा है कि आवेदक 5 रूपये में नवीन कनेक्‍शन के संबंध में किसी भी जानकारी के लिए नजदीकी विद्युत केन्‍द्र/जोन अथवा कंपनी के कॉल सेन्‍टर नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं।  

पड़ोसी देशों में बढ़ी मध्यप्रदेश के बंगला पान की मांग, सरकार ने बनाई स्पेशल एक्शन प्लान

प्रदेश के बंगला पान की महक पड़ोसी देशों तक पान की खेती को प्रोत्साहित करने 10 जिलों के लिये बनी विशेष कार्य योजना भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में किसान कल्याण के लिये निरंतर कार्य किये जा रहे। इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे है। आज मध्यप्रदेश का पान अपनी विशिष्ट सुगंध, कोमलता और स्वाद के कारण देश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। प्रदेश के छतरपुर, रीवा, मंदसौर, नरसिंहपुर और टीकमगढ़ जैसे जिलों में पान की खेती वर्षों से की जा रही है, जो आज किसानों की आय का एक मजबूत आधार बनती जा रही है। विशेष रूप से छतरपुर का “बंगला पान” अपनी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है, जिसकी मांग पड़ोसी देशों- पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका तक फैली हुई है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पान की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कार्य योजना लागू की गई है, जिसके तहत 10 जिलों को शामिल करते हुए 1 करोड़ 3 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना में किसानों को प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, उन्नत किस्मों की रोपाई सामग्री और बरोज निर्माण के लिए सहायता प्रदान की जा रही है। छतरपुर में उगाया जाने वाला बंगला पान अपनी पतली बनावट, हल्की मिठास और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता के कारण निर्यात के लिए उपयुक्त माना जाता है। यही वजह है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर रीवा जिले के महसांव क्षेत्र के 2 गांवों में उत्पादित पान की पहचान भी विशेष है। यहां का पान उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों—वाराणसी, प्रयागराज और लखनऊ—तक बड़े पैमाने पर भेजा जाता है, वहां इसे अत्यंत पसंद किया जाता है। मध्यप्रदेश में पान की खेती मुख्यतः चौरसिया समाज द्वारा परंपरागत रूप से की जाती रही है। यह समाज पीढ़ियों से इस व्यवसाय से जुड़ा है और अपने अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर उच्च गुणवत्ता का पान तैयार करता है। पान की खेती में “बरोज” नामक संरक्षित ढांचे का उपयोग किया जाता है, जिसमें तापमान और नमी को नियंत्रित कर पौधों की विशेष देखभाल की जाती है। यह प्रक्रिया श्रमसाध्य होती है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप उत्कृष्ट गुणवत्ता का पान प्राप्त होता है। वर्तमान समय में पान उत्पादकों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों के बढ़ते प्रचलन ने पारंपरिक पान की मांग को प्रभावित किया है। युवा पीढ़ी में इन उत्पादों की ओर झुकाव बढ़ने से पान की खपत में कुछ कमी आई है, जिससे किसानों की आय पर भी असर पड़ा है। इसके बावजूद, पारंपरिक पान की सांस्कृतिक और धार्मिक उपयोगिता आज भी बनी हुई है, जो इसकी स्थिर मांग को बनाए रखती है। पान का भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान है। यह न केवल स्वाद और ताजगी का प्रतीक है, बल्कि पूजा-पाठ, विवाह समारोह और अतिथि सत्कार में भी इसका महत्वपूर्ण उपयोग होता है। इस सांस्कृतिक महत्व के कारण पान की प्रासंगिकता आज भी बरकरार है। मध्यप्रदेश का पान न केवल स्थानीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना रहा है। यदि पान उत्पादकों को उचित प्रोत्साहन, विपणन सुविधा और जागरूकता मिले, तो यह क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।