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गांव की बदहाल सड़क से परेशान युवाओं ने चंदा जुटाकर खुद रास्ता बनाया

 इटकी  जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के उपेक्षापूर्ण रवैये से तंग आकर इटकी प्रखंड के रानीखटंगा गांव के युवाओं ने आत्मनिर्भरता की एक मिसाल पेश की है। सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहे ग्रामीणों ने खुद ही बीड़ा उठाते हुए श्रमदान किया और लगभग 600 मीटर लंबी कच्ची सड़क का मोरमीकरण कर उसे चलने लायक बना दिया। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में इस ग्रामीण सड़क पर कीचड़ का अंबार लग जाता था, जिससे यहां पैदल चलना भी दूभर हो जाता था। स्थिति इतनी दयनीय थी कि स्कूली बच्चों का आवागमन और बुजुर्गों का घर से बाहर पैदल चलना मुश्किल हो गया था। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग ने कोई सुधि नहीं ली, तो युवाओं ने खुद ही इस समस्या का समाधान निकालने का फैसला किया। समस्या के समाधान के लिए रानीखटंगा के युवाओं ने आपसी सहयोग से चंदा एकत्र किया और मिट्टी मोरम की व्यवस्था की। इसके बाद सभी युवाओं ने हाथों में कुदाल और फावड़ा थाम लिया और मुख्य मार्ग से बाड़ी मस्जिद तक करीब 600 मीटर के रास्ते पर मोरमीकरण का कार्य पूरा किया। अब इस काम चलाऊ सड़क के बन जाने से ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी राहत मिली है। युवाओं के सराहनीय और प्रेरणादायक कार्य को पूरा करने में रानीखटंगा के युवा वर्गों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। श्रमदान करने वालों में मुख्य रूप से सदर अज़हर अंसारी, सेक्रेटरी इमरोज अंसारी, अब्दुल कुद्दूस, अतिकूल अंसारी, फज़ले अंसारी, सरबूल अंसारी और सफी नज़र सहित गांव के अन्य ऊर्जावान युवा शामिल रहे।

प्रकाश पर्व पर रोशनी से जगमगाया गोल्डन टेंपल, हरिमंदिर साहिब में उमड़ी भारी भीड़

अमृतसर. पंजाब के अमृतसर में मौजूद गोल्डन टेंपल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व को लेकर आज धार्मिक समागम करवाए जा रहे हैं। गोल्डन टेंपल को फूलों से सजाया गया है। यहां बड़ी संख्या में लग नतमस्तक होने के लिए पहुंच रहे हैं। गोल्डन टेंपल और श्री अकाल तख्त साहिब व गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब में जलौ सजाएं जाएंगे। हरमंदिर साहिब में तैयारियां किस तरह चल रही हैं। उसे इन तस्वीरों में देखा जा सकता है। अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व को लेकर आज (12 सितंबर) विशेष धार्मिक समागम करवाए जा रहे हैं। गोल्डन टेंपल परिसर को फूलों से खूबसूरती से सजाया गया है। बड़ी संख्या में संगत नतमस्तक होने के लिए पहुंच रही है। पहले प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से गोल्डन टेंपल तक पुरातन परंपरा के अनुसार नगर कीर्तन सजाया। इसमें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, सिंह साहिबान और प्रमुख शख्सियतें शामिल होंगी। वहीं, गोल्डन टेंपल, श्री अकाल तख्त साहिब और गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब में जलौ सजाए जाएंगे। रात को गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में शब्द विचार और कीर्तन समागम होगा। इसके साथ ही गोल्डन टेंपल परिसर में दीपमाला और आतिशबाजी भी की जाएगी। गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े ये तथ्य- बाबा बुड्ढा जी ने बाणी पढ़ने की शुरुआत की थी: सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में दरबार साहिब में पहली बार गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया था। 1430 अंग (पन्ने) वाले इस ग्रंथ के पहले प्रकाश पर संगत ने कीर्तन दीवान सजाए और बाबा बुड्ढा जी ने बाणी पढ़ने की शुरुआत की। बाबा बुड्ढा जी इस ग्रंथ के पहले ग्रंथी बने: पहली पातशाही से छठी पातशाही तक अपना जीवन सिख धर्म की सेवा को समर्पित करने वाले बाबा बुड्ढा जी इस ग्रंथ के पहले ग्रंथी बने। आगे चलकर इसी के संबंध में दशम गुरु गोबिंद सिंह ने हुक्म जारी किया, "सब सिखन को हुकम है गुरु मान्यो ग्रंथ।" गुरु अर्जन देव बोलते गए, भाई गुरदास लिखते गए: 1603 में 5वें गुरु अर्जन देव ने भाई गुरदास से गुरु ग्रंथ साहिब को लिखवाना शुरू करवाया, जो 1604 में संपन्न हुआ। नाम दिया ‘आदि ग्रंथ’। 1705 में गुरु गोबिंद सिंह ने दमदमा साहिब में गुरु तेग बहादुर के 116 शबद जोड़कर पूर्ण किया। 1708 में दशम गुरु गोबिंद सिंह ने हजूर साहिब में फरमान जारी किया था, “सब सिखन को हुकम है गुरु मान्यो ग्रंथ।” समूची मानवता को एक लड़ी में पिरोने का संदेश है गुरु ग्रंथ साहिब: सिखों में जीवंत गुरु के रूप में मान्य श्री गुरु ग्रंथ साहिब केवल सिख कौम ही नहीं, बल्कि समूची मानवता के लिए आदर्श व पथ प्रदर्शक हैं। दुनिया में यह इकलौते ऐसे पावन ग्रंथ हैं, जो तमाम तरह के भेदभाव से ऊपर उठकर आपसी सद्भाव, भाईचारे, मानवता व समरसता का संदेश देते हैं।

भूपेश बघेल पर डिप्टी CM अरुण साव का पलटवार, ‘इटालियन चश्मे से पीएम आवास नहीं दिखते’

रायपुर. पीएम आवास पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बहस की चुनौती को लेकर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने तंज कसा है. उन्होंने कहा कि जब आंखों में इटालियन चश्मा हो, जिसने मुख्यमंत्री रहते हुए 18 लाख परिवारों को पीएम आवास से वंचित किया हो, छत्तीसगढ़ के भोले-भाले जनता को ठगने का काम किया हो, वह क्या बहस करेंगे. इस तरह की बातें कहकर गरीबों और जरूरतमंदों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं. उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का सख्त तेवर पर कहा कि राज्य के मुखिया होने के नाते यही कर्तव्य है. जहां लोगों को समस्या हो लोगों के साथ खड़े हो और उनकी मदद भी करें. वही काम हमारे मुख्यमंत्री साय कर रहे हैं. यही विष्णु का सुशासन है. तालाबों के सौंदरीकरण के लिए राशि जारी किए जाने को लेकर अरुण साव ने कहा कि अलग-अलग योजनाओं में केंद्र सरकार तालाब के सौंदरीकरण और जीणोद्धार के लिए राशि आवंटित करती है. इसको लेकर भी लगातार काम होता है, और यह भी एक बड़ा काम है. इसलिए इतनी बड़ी राशि स्वीकृत हुई है. सेवा संकल्प अभियान के लिए मंत्रियों को मिली जिम्मेदारी सेवा संकल्प अभियान को लेकर मंत्रियों को जिम्मेदारी दिए जाने पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री बने तब से अब तक, मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में सेवा कर रहे है. सेवा संकल्प अभियान में 12 अलग-अलग प्रकार की सेवा के काम पूरे देश भर में होंगे. राज्य में भी उसके लिए व्यापक रूप से तैयारी की गई है. सभी 12 योजनाओं के लिए संगठन और सरकार तैयारी कर रही है. सभी लोग अपने जिम्मेदारी को निभाएंगे.

दो साल बाद जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाने वालों को राहत, फिलहाल पुराने नियमों से होगा पंजीयन

भोपाल मध्य प्रदेश में दो साल से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु के मामलों के विलंबित पंजीयन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति साफ हो गई है। आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि आगामी आदेश तक ऐसे मामलों में पूर्ववत प्रक्रिया के तहत ही पंजीयन किया जाएगा। मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी ने सभी कलेक्टरों और अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं। दरअसल, जिलों से शिकायतें मिल रही थीं कि प्रशासनिक मजिस्ट्रेट यानी तहसीलदार 6 अगस्त 2026 के जन्म-मृत्यु संशोधन विधेयक के राजपत्र नोटिफिकेशन का हवाला देकर दो साल से अधिक पुराने मामलों के पंजीयन की अनुमति संबंधी आवेदन स्वीकार नहीं कर रहे हैं। कई लोक सेवा केंद्रों पर भी आवेदन नहीं लिए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इससे लोगों को जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने में परेशानी हो रही थी और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतें बढ़ रही थीं। रजिस्ट्रार जनरल ने अभी कोई नया आदेश नहीं दिया मुख्य रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया है कि रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय, नई दिल्ली की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई नया आदेश या निर्देश जारी नहीं हुआ है। इसलिए 6 अगस्त के राजपत्र नोटिफिकेशन के आधार पर दो साल से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु मामलों का पंजीयन रोकने का कोई आधार नहीं है। धारा 13(3) के तहत पुरानी प्रक्रिया जारी पत्र में कहा गया है कि जन्म-मृत्यु पंजीयन अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) के तहत विलंबित पंजीयन की प्रक्रिया फिलहाल पहले की तरह लागू रहेगी। यानी दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद जन्म या मृत्यु का पंजीयन कराने के लिए मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार ही आवेदन और कार्रवाई की जाएगी। सभी कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अधीनस्थ अधिकारियों को इसकी जानकारी दें, ताकि लोगों के आवेदन अनावश्यक रूप से लंबित न रहें। संशोधन लागू होने के बाद क्या बदलेगा? 2026 के संशोधन में विलंबित पंजीयन की व्यवस्था को और सख्त किया गया है। एक साल से अधिक और दो साल के भीतर सूचना देने पर पंजीयन जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से होगा। अधिकारी को घटना की सत्यता का सत्यापन भी करना होगा और निर्धारित शुल्क लिया जाएगा। वहीं दो साल से अधिक पुराने मामले में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) का आदेश जरूरी होगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट भी पंजीयन का आदेश देने से पहले घटना की सत्यता का सत्यापन करेंगे और निर्धारित शुल्क लिया जाएगा। पहले और अब में अंतर पहले एक साल से अधिक देरी वाले जन्म-मृत्यु पंजीयन में जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की व्यवस्था थी। 2026 के संशोधन में दो साल से अधिक पुराने मामलों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट के स्तर से हटाकर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के स्तर पर कर दिया गया है। इससे दो साल बाद होने वाला पंजीयन अधिक सत्यापन आधारित और सख्त होगा। MP में अभी पुरानी व्यवस्था क्यों? नए प्रावधान के अनुसार संशोधन केंद्र सरकार की ओर से राजपत्र में अधिसूचना जारी होने की तारीख से लागू होगा। मध्यप्रदेश के मुख्य रजिस्ट्रार की ओर से फिलहाल ऐसा कोई नया आदेश नहीं मिलने के कारण राज्य में दो साल से अधिक पुराने मामलों के लिए पुरानी प्रक्रिया ही जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। 2023 के संशोधन में क्या बदला था? 2023 के संशोधन में जन्म-मृत्यु पंजीयन व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए थे। इनमें राष्ट्रीय स्तर पर जन्म-मृत्यु का डेटाबेस तैयार करना, राज्यों का एकीकृत डेटाबेस बनाना, उपलब्ध होने पर माता-पिता और सूचनादाता का आधार नंबर दर्ज करना तथा गोद लिए, सरोगेसी से जन्मे और एकल/अविवाहित मां से जन्मे बच्चों के मामलों में सूचना की व्यवस्था शामिल है। इसके अलावा जन्म प्रमाण-पत्र को जन्मतिथि और जन्मस्थान के प्रमाण के रूप में महत्वपूर्ण बनाया गया। शैक्षणिक प्रवेश, मतदाता सूची और सरकारी नौकरी सहित विभिन्न कामों में जन्म प्रमाण-पत्र के उपयोग का प्रावधान किया गया। इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी जोड़ी गई।

पंजाब में सचिन पायलट का तंज, ‘कॉकरोचों’ को दी राजस्थान जैसी हिम्मत दिखाने की चुनौती

लुधियाना राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और हाल ही में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी बनाए गए सचिन पायलट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) शासित पंजाब में भी स्कूलों का ऑडिट उसी तरह किया जाना चाहिए, जैसे दूसरे राज्यों में किया जा रहा है। पायलट की यह टिप्पणी पंजाब के लुधियाना में CJP की ओर से तीन सरकारी स्कूलों के किए गए ऑडिट के बाद आई है। CJP के सह-संयोजक सौरव दास के नेतृत्व में टीम ने एक सरकारी ‘स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’, एक सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल और एक सरकारी प्राथमिक स्कूल का दौरा किया था। लुधियाना के स्कूलों में क्या मिला? सौरव दास ने गुरुवार को एक वीडियो पोस्ट किया था। इसके मुताबिक, ‘स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ में बेहतर बुनियादी सुविधाएं मौजूद थीं। वहां स्विमिंग पूल, बैडमिंटन कोर्ट, दिव्यांगों के लिए रैंप और AI लैब जैसी सुविधाएं थीं। वहीं, बाकी दो स्कूलों में कई समस्याएं सामने आईं। दास ने यह भी कहा कि तीनों स्कूलों में शौचालयों की स्थिति को और बेहतर किया जा सकता है। इसके बाद सौरव दास और उनकी टीम ने पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से भी मुलाकात की। दास के मुताबिक, मंत्री ने शिकायतों पर कार्रवाई का भरोसा दिया। AAP के संस्थापक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी दास को कमियां सामने लाने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि इन्हें तुरंत दूर किया जाएगा। सोशल मीडिया पर उठे सवाल हालांकि, CJP के इस ‘ऑडिट’ को सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने निशाने पर लिया। आरोप लगाया गया कि पंजाब में AAP की सरकार होने के कारण CJP ने यहां नरमी बरती। सोशल मीडिया यूजर्स ने इसकी तुलना उन दूसरे राज्यों के स्कूलों से की, जिन्हें CJP ने अपने ऑडिट के लिए चुना था। पायलट ने राजस्थान का उदाहरण दिया सचिन पायलट ने अपने गृह राज्य राजस्थान का उदाहरण देते हुए CJP से पंजाब में भी उसी तरह की सख्ती बरतने को कहा। राजस्थान में CJP ने 21 अगस्त को एक ऐसे स्कूल से ऑडिट शुरू करने की योजना बनाई थी, जो कथित तबेले में चल रहा था। संगठन के मुताबिक, सह-संयोजक आशुतोष रांका के नेतृत्व में पहुंची CJP की टीम पर कुछ स्थानीय लोगों ने हमला किया था। CJP का दावा था कि ये लोग BJP से जुड़े थे। पायलट ने क्या कहा? सचिन पायलट ने कहा कि पंजाब या कहीं भी स्कूलों का ऑडिट किया जाना स्वागत योग्य है। लेकिन उन्होंने CJP से एक खास अनुरोध किया। पायलट के मुताबिक, पंजाब का ऑडिट भी उसी नजर, उन्हीं सवालों और उसी साहस के साथ किया जाना चाहिए, जिस तरह दूसरे राज्यों की सरकारों का ऑडिट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब को कोई विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए और AAP को भी कोई ‘दोस्ताना छूट’ नहीं मिलनी चाहिए। AAP नेताओं ने पायलट को दिया पलटवार पायलट के बयान के बाद AAP नेताओं ने उन्हें पंजाब के स्कूलों की तुलना कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश के स्कूलों से करने की चुनौती दी। AAP नेता और दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि पंजाब में ऐसे 1,000 बेहतरीन स्कूल दिखाए जा सकते हैं और पायलट को हिमाचल प्रदेश के ऐसे 1,000 स्कूल दिखाने चाहिए। उन्होंने पंजाब और हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों का एक साथ ऑडिट कराने की चुनौती देते हुए पूछा कि क्या पायलट इसके लिए तैयार हैं। AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग धांडा ने भी BJP शासित राजस्थान के जर्जर स्कूलों के बचाव को लेकर पायलट पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि इस रिश्ते को क्या नाम दिया जाए। धांडा ने कहा कि अगर पायलट हिमाचल प्रदेश के 1,000 स्कूलों की सूची दें तो AAP पंजाब के 1,000 स्कूलों की सूची देगी। उन्होंने दोनों राज्यों के स्कूलों का साथ जाकर ऑडिट करने की भी बात कही। CJP ने राजस्थान के शिक्षा मंत्री को लेकर क्या कहा? इस बीच CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने एक यूजर को टैग करते हुए कहा कि उन्होंने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से कई बार उनके कार्यकाल में बनाए गए 10 सबसे शानदार स्कूल दिखाने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। रांका ने कहा कि अगर किसी को ऐसे स्कूलों के बारे में जानकारी है तो वह बताए, CJP वहां जाकर उन्हें देखेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अच्छे स्कूल भी दिखाए जाने चाहिए। पहले भी CJP पर उठे हैं सवाल CJP इससे पहले भी उन राज्यों को लेकर आलोचना का सामना कर चुकी है, जिन्हें उसने अपने ऑडिट के लिए चुना। BJP नेता रविशंकर प्रसाद ने हाल में आरोप लगाया था कि CJP पंजाब और कांग्रेस शासित राज्यों पर चुप है, जबकि BJP शासित राज्यों को निशाना बना रही है।

सेक्टर-56 से पचगांव तक दौड़ेगी मेट्रो, 35.25 किमी रूट पर बनेंगे 28 स्टेशन

गुरुग्राम  गुरुग्राम में प्रस्तावित सेक्टर-56 से पचगांव मेट्रो कॉरिडोर को तेज रफ्तार और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ विकसित करने की तैयारी है। 35.25 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की डिजाइन स्पीड 90 किलोमीटर प्रति घंटे होगी और इसमें 28 स्टेशन प्रस्तावित हैं। कॉरिडोर को रैपिड मेट्रो, आरआरटीएस और हरियाणा आर्बिटल रेल कॉरिडोर (एचओआरसी) समेत भविष्य की रेल आधारित प्रणालियों से बेहतर तरीके से जोड़ने की योजना है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने शुक्रवार को प्रस्तावित कॉरिडोर की समीक्षा की और संशोधित डीपीआर को तय समय पर अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। परियोजना को अगले 15 से 20 वर्षों की शहरीकरण, आबादी वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। प्रस्तावित कॉरिडोर मध्यम क्षमता वाली मेट्रो के रूप में विकसित किया जाएगा। इसकी डिजाइन स्पीड 90 किलोमीटर प्रति घंटे रखी गई है। मेट्रो में सीबीटीसी सिग्नलिंग प्रणाली प्रस्तावित है। तेज डिजाइन स्पीड और आधुनिक सिग्नलिंग के साथ कॉरिडोर को गुरुग्राम में सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क मजबूत करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे गुरुग्राम-मानेसर-पचगांव क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर करने और सड़क यातायात कम करने की योजना है। RRTS और रैपिड मेट्रो से जुड़ेगा प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर को मौजूदा और प्रस्तावित रेल आधारित परिवहन नेटवर्क के साथ एकीकृत करने की योजना है। इसमें रैपिड मेट्रो और आरआरटीएस के साथ हरियाणा आर्बिटल रेल कॉरिडोर को भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा भविष्य में विकसित होने वाली रेल आधारित प्रणालियों के साथ भी बेहतर एकीकरण को ध्यान में रखा जाएगा। इससे सेक्टर-56 से पचगांव तक तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों को व्यापक सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है। 35.25 किमी रूट पर 28 स्टेशन सेक्टर-56 से शुरू होने वाला कॉरिडोर सेक्टर-61, 65, 66, 50 और 49 से होते हुए खेड़कीदौला पहुंचेगा। इसके बाद ग्लोबल सिटी और न्यू गुरुग्राम के सेक्टर-84, 86 और 90 से होते हुए आईएमटी मानेसर और पचगांव तक जाएगा। पूरे 35.25 किलोमीटर लंबे रूट पर 28 स्टेशन प्रस्तावित हैं। कॉरिडोर के जरिये प्रमुख आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों को सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। अगले 15 साल की जरूरतों पर जोर मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने परियोजना तैयार करते समय अगले 15 से 20 वर्षों की शहरीकरण प्रक्रिया, आबादी वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि डीपीआर के स्तर पर ही सभी योजना संबंधी मुद्दों का समाधान किया जाए, ताकि आगे चलकर परियोजना में देरी न हो। संशोधित डीपीआर को तय समय पर अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के एसीएस अनुराग अग्रवाल, निदेशक जे गणेशन, शहरी स्थानीय निकाय आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा, एचएसआईआईडीसी के एमडी विनय प्रताप सिंह, एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक एवं एचएमआरटीसी के एमडी मुकुल कुमार समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।  

झारखंड में वेतन घोटाले पर CID का शिकंजा, 22.46 लाख की निकासी मामले में जल्द दाखिल होगी चार्जशीट

रांची खूंटी के स्पेशलाइज्ड इंडिया रिजर्व बटालियन-2 (एसआईआरबी-2) के खाते से 22.46 लाख रुपये की अवैध निकासी मामले में सीआइडी अपनी पहली चार्जशीट करने की तैयारी में है। इस मामले में एक लेखापाल सह सिपाही शुभम कुमार की गिरफ्तारी हुई थी। आने वाले 14 सितंबर को शुभम कुमार की गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में सीआईडी दो दिनों के भीतर चार्जशीट कर देगी। सीआइडी ने अब तक की जांच में पाया है कि सिपाही शुभम कुमार ने वर्ष 2019 से 2021 के बीच करीब 28 बार में कुल 22.46 लाख रुपये स्थानांतरित की थी। खूंटी पुलिस ने ही उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था उसका दूसरा सहयोगी सिपाही अजित कुमार अब भी फरार है। आरोपित शुभम कुमार ने अस्थाई आइडी बनाकर अवैध वेतन की राशि को विभिन्न खातों में स्थानांतरित की है। अवैध निकासी के मामले में सबसे पहले खूंटी थाने में 21 मई 2026 को कांड संख्या 72/26 में खूंटी के कोषागार पदाधिकारी शिव कुमार सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। तब वहां के अनुसंधान पदाधिकारी खूंटी के थानेदार अशोक कुमार सिंह ने ही मुख्य आरोपित सह लेखापाल सिपाही शुभम कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सीआइडी ने इस केस को 13 जुलाई को टेकओवर करते हुए कांड संख्या 15/2026 में केस री-रजिस्टर्ड की थी। इसके बाद से ही आरोपित शुभम कुमार के विरुद्ध सीआईडी ने साक्ष्य संकलित किया, ताकि उसके विरुद्ध निर्धारित अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल की जा सके। सात जिलों में अवैध वेतन निकासी मामले की जांच कर रही है CID सीआईडी झारखंड के सात जिलों में अवैध वेतन निकासी मामले की जांच कर रही है। सबसे पहला मामला बोकारो में आया था। इसके बाद एक-एक कर छह और जिलों में अवैध वेतन निकासी का मामला सामने आया। इन जिलों में हजारीबाग, पश्चिमी सिंहभूम, रांची, रामगढ़, देवघर व खूंटी में मामला सामने आया है। बोकारो में जिला कोषागार से 11 करोड़, हजारीबाग में 31 करोड़, पश्चिमी सिंहभूम में 27 लाख की अवैध निकासी का मामला उजागर हो चुका है। वहीं, रांची में 2.94 करोड़, रामगढ़ में 35 लाख व देवघर में 99.06 लाख रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आ चुका है। इन जिलों से गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। सीआईडी इन सभी जिलों से जुड़े मामले की जांच कर रही है।

जयपुर की हॉट सीटों पर किसका कब्जा? मतदान के बाद भाजपा-कांग्रेस के दिग्गजों की किस्मत EVM में बंद

जयपुर मतदान पूरा होने के साथ ही अब शहर की निगाहें उन 'हॉट सीटों' के नतीजों पर टिक गई है, जहां से दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस के बड़े चेहरे अपनी किस्मत आजमा रहे है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि इन हॉट सीटों पर जीत दर्ज करने वालों में से किसी एक के सिर जयपुर के नए महापौर का ताज सज सकता है। वार्ड 76 भाजपा के पुनीत कर्णावट और कांग्रेस के प्रदीप जैन के बीच टक्कर है। हालांकि, यहां महज 54.85% मतदान दर्ज हुआ है। इस कम मतदान प्रतिशत ने प्रत्याशियों के गणित को उलझा दिया है। वार्ड 43 सांगानेर क्षेत्र के वार्ड 43 में भाजपा के शैलेन्द्र भार्गव और कांग्रेस के आशीष शर्मा के बीच सीधा मुकाबला है। यहां मतदाताओं का रुझान सुस्त रहा और कुल 53.65% ही वोटिंग हो सकी। वार्ड 112 : सबसे हॉट मुकाबला सबसे चर्चित वार्ड 112 में मतदाताओं ने खुलकर मतदान किया है। यहां 67.82% मतदान हुआ है। भाजपा से सुनील कोठारी और कांग्रेस से आशीष शर्मा आमने-सामने हैं। वार्ड 110 पूर्व महापौर और भाजपा की ज्योति खंडेलवाल वार्ड 110 से मैदान में हैं, जहां उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस की सुनीता मेठी से है। इस वार्ड में 64.49% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। वार्ड 135 वार्ड 135 शहर की चर्चित सीटों में से एक है। यहां भाजपा के विमल कुमार अग्रवाल का मुकाबला कांग्रेस के रवि कुमार शर्मा से है। इस सीट पर 71.13% मतदान हुआ है। इन वार्डों में 74 प्रतिशत से अधिक मतदान वार्ड संख्या    विधानसभा    कुल मतदाता    पड़े वोट    मतदान प्रतिशत वार्ड 150    आमेर    8,799    7,365    83.70% वार्ड 148    आमेर    19,234    15,762    81.95% वार्ड 149    आमेर    19,858    15,881    79.97% वार्ड 126    आदर्श नगर    14,572    11,599    79.60% वार्ड 117    आदर्श नगर    19,801    15,743    79.51% वार्ड 1    विद्याधर नगर    13,776    10,811    79.48% वार्ड 146    हवामहल    14,809    11,598    78.32% वार्ड 61    बगरू    13,686    10,617    77.58% वार्ड 51    सांगानेर    17,181    12,891    75.03% वार्ड 128    आदर्श नगर    15,977    11,688    73.16% इन वार्डों में 50 फीसदी भी नहीं पड़े वोट वार्ड संख्या    विधानसभा    कुल मतदाता    पड़े वोट    मतदान प्रतिशत वार्ड 100    सिविल लाइंस    16,607    6,714    40.43% वार्ड 66    बगरू    19,163    9,060    47.28% वार्ड 42    सांगानेर    13,325    6,369    47.80% वार्ड 90    सिविल लाइंस    23,789    11,511    48.40% वार्ड 41    सांगानेर    17,639    8,632    48.94% वार्ड 75    मालवीय नगर    11,821    6,006    50.81% वार्ड 123    आदर्श नगर    11,501    5,921    51.49%

मुंबई में राष्ट्रीय BOCW सम्मेलन का आगाज, निर्माण श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर होगी चर्चा

निर्माण श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर मंथन, मुंबई में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन BOCW शुरू मुंबई में राष्ट्रीय BOCW सम्मेलन का आगाज, निर्माण श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर होगी चर्चा निर्माण श्रमिकों के कल्याण पर केंद्रित राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू, मुंबई में दो दिन होगा मंथन रायपुर,   भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकारों (BOCW) के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक हितों को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से मुंबई में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ('National Conference on BOCW') का शुभारंभ हुआ। 11 और 12 सितंबर 2026 तक आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के निर्माण श्रमिकों के सुरक्षित, सम्मानजनक और समृद्ध भविष्य पर विस्तृत चर्चा की जा रही है।        इस राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया, केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती शोभा करंदलाजे, मध्यप्रदेश के श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और छत्तीसगढ़ के श्रम सचिव हिम शिखर गुप्ता सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए।       सम्मेलन में छत्तीसगढ़ राज्य का प्रतिनिधित्व भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह तथा मंडल सचिव गिरीश रामटेके ने किया। सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों ने श्रमिक हित में लागू की गई कल्याणकारी योजनाओं, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों और नए नवाचारों के अनुभवों को साझा किया। साथ ही निर्माण श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भविष्य की रणनीतियों पर रणनीति तैयार की जा रही है। यह आयोजन देश के निर्माण श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

बिना काम कराए राशि आहरण से मृतकों के जॉब कार्ड पर भुगतान तक, पंचायतों में मिलीं गंभीर अनियमितताएं

पंचायतों में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई, पांच सचिव निलंबित बिना काम कराए राशि आहरण से लेकर मृतकों के जॉब कार्ड पर भुगतान तक मिलीं अनियमितताएं, 11 लोगों पर कार्रवाई मुरैना  जिले की ग्राम पंचायतों में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही, वित्तीय अनियमितता और निर्माण कार्यों में गड़बड़ी सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ के निर्देश पर हुई जांच के बाद पांच पंचायत सचिवों को निलंबित किया गया है। वहीं सरपंच, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जिला पंचायत के सीईओ कमलेश कुमार भार्गव के अनुसार इमलिया, शहदपुर, अगरोता, रंछोरपुरा, भदावली, बर्रेण्ड, ऐसाह और टिकटोली दूमदार सहित अन्य पंचायतों में जांच के दौरान अनियमितताएं सामने आईं। प्रशासन ने संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की है। – मृतक के जॉब कार्ड पर भुगतान, सरपंच पर धारा 40 की कार्रवाई ग्राम पंचायत इमलिया में मृतक के जॉब कार्ड और परिवार के सदस्यों की पुष्टि किए बिना राशि का भुगतान किए जाने का मामला सामने आया। इस पर तत्कालीन रोजगार सहायक मधु रामपुरे और रोजगार सहायक व प्रभारी पंचायत सचिव आदिराम मावई को शासकीय कार्य से विरत किया गया। वहीं अनियमित भुगतान और अपूर्ण निर्माण कार्यों के मामले में सरपंच गुड्डी पत्नी राकेश बघेल के खिलाफ मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 40 के तहत कार्रवाई की गई है। – बिना निर्माण राशि निकालने पर सचिव निलंबित ग्राम पंचायत शहदपुर में मृत व्यक्ति के जॉब कार्ड पर डिमांड डालने और निर्माण कार्यों के नाम पर राशि आहरित करने के आरोप में रोजगार सहायक विनोद कुमार को शासकीय कार्य से विरत किया गया। वहीं बर्रेण्ड और वर्तमान में हुसेनपुर पंचायत में बिना निर्माण कार्य कराए राशि निकालने के मामले में तत्कालीन पंचायत सचिव महेश चन्द्र जाटव को निलंबित किया गया है। – मृत व्यक्ति को पेंशन का लाभ दिलाने का मामला ग्राम पंचायत अगरोता में एक मृत व्यक्ति के संबंध में दो अलग-अलग मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाने और उनके आधार पर नियम विरुद्ध शासकीय पेंशन का लाभ दिलाने के आरोप में पंचायत सचिव रामाधार सिंह जाटव को निलंबित किया गया है। – निर्माण कार्यों में लापरवाही पर भी गिरी गाज रंछोरपुरा पंचायत में तालाब और पत्थर नाली का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप नहीं कराने पर तत्कालीन पंचायत सचिव नीरज कर्ण को निलंबित किया गया। रोजगार सहायक गजेन्द्र सिंह धाकड़ को भी शासकीय कार्य से विरत किया गया है। भदावली में जनसुनवाई नहीं करने, मुख्यालय पर अनुपस्थित रहने और हितग्राहीमूलक योजनाओं में लापरवाही के आरोप में पंचायत सचिव विनोद कुमार तोमर को निलंबित किया गया। – सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें नहीं सुलझाईं, सचिव निलंबित अम्बाह की ग्राम पंचायत ऐसाह में सीएम हेल्पलाइन शिकायतों का निराकरण नहीं कराने, मुख्यालय पर उपस्थित नहीं रहने, जनप्रतिनिधियों से अनुचित भाषा का प्रयोग करने और नोटिस का जवाब नहीं देने के आरोप में पंचायत सचिव दिनेश शर्मा को निलंबित किया गया है। वहीं टिकटोली दूमदार में निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की कमी और तकनीकी मापदंडों की अनदेखी के मामले में क्षेत्रीय उपयंत्री मातादीन शाक्य को शासकीय कार्य से विरत किया गया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पंचायतों में शासकीय राशि के उपयोग, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और हितग्राहीमूलक योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारी-कर्मचारी, पंचायत प्रतिनिधि अथवा अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। – इमलिया पंचायत की जांच पर उठे सवाल, पहले क्लीनचिट फिर कार्रवाई जांच करते अधिकारी  इमलिया पंचायत में अनियमितताओं को लेकर अब पूर्व की जांच पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि जनपद पंचायत मुरैना की ओर से पूर्व में कराई गई जांच में पंचायत को क्लीनचिट दे दी गई थी। इसके बाद जिला पंचायत स्तर पर टीम गठित कर दोबारा जांच कराई गई, जिसमें पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और सरपंच की भूमिका में अनियमितताएं पाए जाने पर कार्रवाई की गई है। अब सवाल यह है कि एक ही मामले की दो जांचों में इतना बड़ा अंतर कैसे आया? क्या जनपद पंचायत की पहली जांच में गंभीर तथ्यों की अनदेखी हुई थी या फिर जिला पंचायत की जांच के निष्कर्षों पर सवाल खड़े होते हैं? यदि पहली जांच में पंचायत को क्लीनचिट दी गई थी तो उस जांच में शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की भी समीक्षा क्यों न हो? कहीं ऐसा तो नहीं कि जिम्मेदारों को बचाने के लिए पहली जांच को प्रभावित किया गया हो? हालांकि इस संबंध में किसी मिलीभगत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में दोनों जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।