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छुट्टियों में राशन स्टॉक पर हरियाणा सरकार की नजर, खराब होने पर जिम्मेदार होगा स्कूल स्टाफ

फतेहाबाद/लुधियाना. भीषण गर्मी के बीच शिक्षा विभाग ने 25 मई से 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिया है। छुट्टियों के साथ ही विभाग ने सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के स्टाक को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। विभाग ने सभी स्कूलों से मिड-डे मील में उपयोग होने वाले गेहूं, चावल, दाल, तेल सहित अन्य सामग्री का पूरा ब्योरा मांगा है। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि लापरवाही के कारण यदि कोई खाद्यान्न खराब हुआ तो संबंधित स्कूल स्टाफ जिम्मेदार माना जाएगा। शिक्षा विभाग के अनुसार अवकाश के दौरान स्कूल बंद रहेंगे, ऐसे में खाद्यान्न की सुरक्षित स्टोरेज सुनिश्चित करना जरूरी होगा। जिन स्कूलों में राशन अधिक मात्रा में बचा हुआ है या खराब होने की आशंका है, वहां से स्टाक तुरंत वापस करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने सभी स्कूल मुखियाओं से स्टाक का रिकॉर्ड निर्धारित समय में उपलब्ध करवाने को कहा है। अधिकारियों का मानना है कि गर्मी के मौसम में खाद्यान्न खराब होने का खतरा अधिक रहता है। बता दें कि पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मिड-डे मील योजना के तहत भोजन दिया जाता है।

UK से पंजाबियों का मोहभंग, महंगाई-वीजा सख्ती ने विदेश जाने का क्रेज किया कम

चंडीगढ़  पंजाब के युवाओं के लिए कभी ब्रिटेन जाना सबसे बड़ा सपना माना जाता था लेकिन हाल ही में जारी रिपोर्ट ने इस ख्वाहिश को झटका दिया है। ब्रिटेन के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की लंदन रिपोर्ट के अनुसार जून 2025 तक एक वर्ष में रिकॉर्ड 74,000 भारतीय ब्रिटेन छोड़कर चले गए। इसमें 51,000 छात्र, 21,000 कामगार और 3,000 अन्य शामिल हैं। यूके के रहने वाले तिरपाल सिंह के मुताबिक ब्रिटेन सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में आव्रजन नियम बेहद सख्त कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय छात्रों और कामकाजी लोगों के लिए अपने परिवार को साथ ले जाना कठिन बना दिया गया है। न्यूनतम वेतन सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे नौकरी पाना मुश्किल हो गया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी न मिलने पर युवाओं को वापस लौटना पड़ रहा है। स्थायी निवास की अवधि बढ़ाने की चर्चाओं ने भी प्रवासियों की चिंता बढ़ा दी है। यूके की रहने वाली पंजाबी मूल की बलजिंदर कौर का कहना है कि महंगाई ने हालात और खराब कर दिए हैं। घरों का किराया, बिजली, गैस, यात्रा और रोजमर्रा के खर्च इतने बढ़ चुके हैं कि मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए वहां टिक पाना कठिन होता जा रहा है।  रिपोर्ट के बावजूद ब्रिटेन में पंजाबी समुदाय की पहचान मजबूत बनी हुई है। लंदन, बर्मिंघम, वॉल्वरहैम्प्टन और ब्रैडफोर्ड जैसे क्षेत्रों में पंजाबी संस्कृति और भाषाई पहचान कायम है। ब्रिटिश संसद में पंजाबी मूल के सांसदों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आम युवाओं के बीच कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, दुबई और यूरोप के अन्य देशों की ओर रुझान बढ़ता जा रहा है। पुराने प्रवासी भी अपने देश और मिट्टी की ओर लौटने लगे हैं। अब पंजाब के गांवों में ब्रिटेन का पासपोर्ट कभी जैसी प्रतिष्ठा नहीं रखता और विदेश की ख्वाहिश पहले जैसी सुनहरी नहीं रही। 

जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में आयोजित होगा जिला स्तरीय कार्यक्रम

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत गंगा दशमीं पर के उपलक्ष्य में सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में 25 मई को कार्यक्रम आयोजित होंगे। राज्य शासन ने समस्त जिलों में गंगा दशमी पर्व पर आयोजित गतिविधियों एवं कार्यक्रम में सहभागिता करने वाले मुख्य अतिथियों की सूची जारी की है। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल रीवा, मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह रतलाम, मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय धार, मंत्री श्री प्रहलाद पटेल नरसिंहपुर, मंत्री श्री राकेश सिंह जबलपुर, मंत्री श्री करण सिंह वर्मा सिवनी, मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह नर्मदापुरम, मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट देवास, मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना मुरैना, मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया झाबुआ, मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत सागर, मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग विदिशा, मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह निवाड़ी, मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर शिवपुरी, मंत्री श्री राकेश शुक्ला भिंड, मंत्री श्री चेतन्य काश्यप भोपाल और मंत्री श्री इंदर सिंह परमार आगर-मालवा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसी प्रकार राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर सीहोर, राज्यमंत्री श्री धर्मेन्द्र भावसिंह लोधी खंडवा, राज्यमंत्री श्री दिलीप जायसवाल मंडला, राज्यमंत्री श्री गौतम टेटवाल उज्जैन, राज्यमंत्री श्री लखन पटेल दमोह, राज्यमंत्री श्री नारायण सिंह पंवार राजगढ़, राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी सतना, राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार अनूपपुर और राज्यमंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल बैतूल के कार्यक्रम में शामिल होंगे। लोकसभा सांसद श्री रोड़मल नागर शाजापुर, लोकसभा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा सीधी, लोकसभा सांसद श्री जनार्दन मिश्रा मऊगंज, लोकसभा सांसद सुधीर गुप्ता मंदसौर, लोकसभा सांसद श्री बंटी विवेक साहू छिंदवाड़ा, लोकसभा सांसद श्री भारत सिंह कुशवाह ग्वालियर और लोकसभा सांसद श्री शंकर लालवानी इंदौर और राज्यसभा सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर नीमच, राज्यसभा सांसद श्रीमती माया सिंह नारोलिया पांढुर्णा के कार्यक्रम में शामिल होंगे। विधायक श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह पन्ना, विधायक श्री जयसिंह मरावी शहडोल, विधायक श्री अर्चना चिटनीस बुरहानपुर, विधायक श्री बालकृष्ण पाटीदार खरगौन, विधायक श्री श्रीकांत चतुर्वेदी मैहर, विधायक श्री श्याम बरडे बड़वानी, विधायक श्री हरिशंकर खटीक टीकमगढ़, विधायक श्री पन्नालाल शाक्य गुना, विधायक श्री जगन्नाथ सिंह रघुवंशी अशोकनगर, विधायक श्री शिवनारायण ज्ञान सिंह उमरिया, विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी रायसेन, विधायक श्री प्रदीप अग्रवाल दतिया, विधायक श्रीमती ललिता यादव छतरपुर, विधायक श्री संजय सत्येन्द्र पाठक कटनी और विधायक श्री रामनिवास शाह सिंगरौली के कार्यक्रम में शामिल होंगे। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गुड्डीबाई आदिवासी श्योपुर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री रूदेश परस्ते डिंडोरी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री गजेन्द्र सहाय हरदा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हजरीबाई खरत आलीराजपुर और नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती भारती सुरजीत ठाकुर बालाघाट के कार्यक्रम में शामिल होंगे।  

वक्फ संपत्तियों पर बड़ा एक्शन! उत्तर प्रदेश में 31 हजार से अधिक रजिस्ट्रेशन निरस्त

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में उम्मीद पोर्टल पर 31 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया. वक्फ संपत्तियों के दस्तावेजों में त्रुटियां और तकनीकी खामियां मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है. बता दें, उम्मीद पोर्टल पर अब तक कुल 31,328 वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन निरस्त किया जा चुका है।  प्रदेश में दर्ज 1,18,302 वक्फ संपत्तियों में से 31,328 का पंजीकरण रद्द हुआ. इनमें से 31,192 संपत्तियों के वक्फ दावों को भी निरस्त कर दिया गया है. जांच के दौरान कई संपत्तियों के खसरा नंबर वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए।  कई मामलों में राजस्व अभिलेखों में दर्ज रकबे में बदलाव पाया गया. दस्तावेजों के मिलान और रिकॉर्ड सत्यापन के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं।  बता दें, वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 'Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency and Development' पोर्टल लॉन्च किया था. इसे संक्षेप में उम्मीद पोर्टल कहा जाता है।  उत्तर प्रदेश ने केंद्र के ‘उम्मीद’ पोर्टल पर वक्फ प्रॉपर्टीज़ के डिजिटल रजिस्ट्रेशन में देश में शीर्ष स्थान हासिल किया. राज्य सरकार ने दिसंबर 2025 तक 92,832 प्रॉपर्टीज़ का प्रोसेस पूरा किया।  केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने 6 जून 2025 को सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि 5 दिसंबर 2025 तक ‘उम्मीद’ पोर्टल पर वक्फ प्रॉपर्टीज का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित किया जाए. हालांकि बाद में डेडलाइन 6 महीने के लिए बढ़ा दी गई, लेकिन उत्तर प्रदेश ने यह काम तय समय से पहले ही पूरा कर लिया। 

प्राइवेट स्कूलों को मिली राहत, नए सत्र में फीस बढ़ाने पर सरकार की अनुमति जरूरी नहीं

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने  शिक्षा निदेशालय (DoE) को बड़ा झटका देते हुए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि दिल्ली के प्राइवेट स्कूल और बिना सरकारी सहायता वाले मान्यता प्राप्त स्कूलों को नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने पर फीस बढ़ाने के लिए शिक्षा निदेशालय से पहले से अनुमति या मंजूरी लेने की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है। एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की बेंच ने साफ किया कि पूर्व अनुमति केवल उसी स्थिति में जरूरी है, जब कोई स्कूल चालू शैक्षणिक सत्र के बीच में अचानक फीस बढ़ाना चाहता हो। कोर्ट ने यह कहा कि किसी स्कूल के खाते में केवल 'सरप्लस फंड' होने का मतलब यह कतई नहीं निकाला जा सकता कि वह स्कूल शिक्षा का व्यावसायीकरण कर रहा है। फीस बढ़ाने की स्वायत्तता पर हाईकोर्ट की मुहर हालांकि, बेंच ने अपने निर्देश में यह भी साफ कर दिया कि DoE को सौंपे गए बयानों में संबंधित स्कूलों द्वारा प्रस्तावित फीस में बढ़ोतरी केवल 2027 के शैक्षणिक सत्र से ही लागू होगी। बेंच ने कहा कि किसी भी स्कूल को पिछले शैक्षणिक सत्रों के लिए फीस या अन्य चार्जेस का कोई भी बकाया पिछली तारीख से मांगने या वसूलने की अनुमति नहीं होगी। DoE का काम स्कूलों के कामकाज को 'माइक्रो-मैनेज' करना नहीं बेंच ने यह साफ किया कि जो स्कूल किसी एकेडमिक सेशन की शुरुआत में फीस बढ़ाते हैं, उन्हें सेशन शुरू होने से पहले DoE को प्रस्तावित फीस का एक स्टेटमेंट जमा करना होगा। हालांकि, जस्टिस भंभानी ने कहा कि प्राइवेट, बिना सरकारी मदद वाले और मान्यता प्राप्त स्कूलों को अपनी वित्तीय आजादी का अधिकार बना रहेगा। शिक्षा निदेशालय का काम स्कूलों के रोजमर्रा के वित्तीय कामकाज को डिक्टेट करना या 'माइक्रो-मैनेज' करना नहीं है। DoE के रेगुलेटरी अधिकार बहुत सीमित हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निजी, बिना सरकारी मदद वाले और मान्यता प्राप्त स्कूलों में फीस तय करने के मामले में DoE के रेगुलेटरी अधिकार बहुत सीमित हैं और वे आम तौर पर दखल देने की इजाजत नहीं देते। कोर्ट ने कहा कि किसी स्कूल के खातों में सिर्फ ज्यादा पैसे होने के आधार पर DoE यह नतीजा नहीं निकाल सकता कि स्कूल कमर्शियलाइजेशन (मुनाफाखोरी) कर रहा है। DoE को 2 महीने में प्रस्तावों पर लेना होगा फैसला हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा कि जहां कोई स्कूल चल रहे एकेडमिक सेशन के दौरान फीस बढ़ाने का प्रस्ताव रखता है, तो उसे अपना प्रस्ताव DoE को उस तारीख से कम से कम दो महीने पहले जमा करना होगा, जिस तारीख से बदली हुई फीस लागू करने की मांग की जा रही है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि DoE को ऐसे प्रस्ताव पर उसी दो महीने के समय में फैसला करना होगा, ऐसा न करने पर प्रस्ताव को मंजूर माना जाएगा। 137 प्राइवेट स्कूलों की याचिका पर आया फैसला यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब दिल्ली के 137 प्राइवेट स्कूलों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इन स्कूलों ने वर्ष 2016-17 से 2022-23 के बीच समय-समय पर फीस बढ़ाने के प्रस्ताव दिए थे, जिन्हें शिक्षा निदेशालय (DoE) ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने सरकार के उन आदेशों को 'गलतफहमी पर आधारित' बताते हुए पूरी तरह से रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने साफ किया कि जिन स्कूलों को सरकारी जमीन 'लैंड क्लॉज' (जमीन आवंटन की शर्त) के तहत मिली है, उन पर भी सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ाने के लिए यही नियम लागू होगा।

छात्रों-शिक्षकों को बड़ी राहत, बिहार सरकार ने स्कूलों में पुरानी हाफ-डे व्यवस्था लौटाने का लिया फैसला

पटना बिहार के सरकारी स्कूलों के समय और कार्यदिवसों को लेकर पिछले कई महीनों से चल रहे विवाद पर अब सम्राट सरकार पूर्णविराम लगाने जा रही है. राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों और शिक्षकों के हित में एक और बड़ा कदम उठाते हुए शनिवार को आधे दिन के कार्यदिवस वाली पुरानी व्यवस्था फिर से बहाल करने का निर्णय लिया है. सूत्रों के अनुसार, नए निर्णय के के तहत अब बिहार के सभी सरकारी स्कूलों में शनिवार को ‘हाफ डे’ यानी आधे दिन की पढ़ाई होगी. बताया जा रहा है कि शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक और नए शेड्यूल की गहन समीक्षा के बाद इस प्रस्ताव पर अंतिम सहमति बन गई है, और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी जल्द ही इस नई व्यवस्था की आधिकारिक घोषणा करेंगे।  पौने छह लाख शिक्षकों और करोड़ों छात्रों को मिलेगी राहत बता दें कि पिछले कुछ समय से राज्य के पौने छह लाख सरकारी शिक्षक और विभिन्न शिक्षक संघ लगातार यह मांग उठा रहे थे कि शनिवार को फुल डे की जगह हाफ डे की व्यवस्था दोबारा शुरू की जाए. खासकर मई महीने की इस भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच पूरे दिन स्कूल संचालन से बच्चों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा था. इस नई व्यवस्था के लागू होने से न केवल प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के करोड़ों छात्र-छात्राओं को राहत मिलेगी, बल्कि मानसिक तनाव से जूझ रहे शिक्षकों को भी वीकेंड पर अपने जरूरी कार्यों को निपटाने का समय मिल सकेगा।  31 मई तक जारी हो जाएगी आधिकारिक अधिसूचना शिक्षा विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस नए स्कूल शेड्यूल और समय सारिणी यानी टाइम टेबल (Time Table) को लेकर ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है. विभाग आगामी 31 मई तक इस संबंध में विधिवत अधिसूचना जारी कर देगा. सम्राट सरकार का यह फैसला इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सरकार लगातार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ शिक्षकों और छात्रों के अनुकूल माहौल तैयार करने की कोशिशों में जुटी है. माना जा रहा है कि जून महीने में स्कूल खुलने के साथ ही यह व्यवस्था पूरी तरह से जमीन पर प्रभावी हो जाएगी।   

शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ा फैसला, मेरिट आधार पर होगा चयन

 भोपाल मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब शिक्षक भर्ती के लिए अलग से चयन परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। उम्मीदवारों को केवल शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करनी होगी और उसी के आधार पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस नई व्यवस्था की तैयारी शुरू कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मप्र कर्मचारी चयन मंडल (ESB) के लिए “कनिष्ठ सेवा संयुक्त परीक्षा नियम-2026” का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। संभावना है कि यह नियम अगले एक माह के भीतर लागू कर दिए जाएंगे। जुलाई व अगस्त में माध्यमिक व प्राथमिक पात्रता परीक्षा से इसकी शुरुआत होगी। दोहरी परीक्षा प्रणाली होगी समाप्त अब तक उच्च माध्यमिक, माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पहले पात्रता परीक्षा और उसके बाद चयन परीक्षा आयोजित की जाती थी। इस व्यवस्था के कारण अभ्यर्थियों को दो बार आवेदन करना पड़ता था और अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ती थी। नई प्रणाली लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया आसान हो जाएगी और केवल एक परीक्षा के आधार पर भर्ती की जाएगी। वर्ष 2018 में आयोजित उच्च माध्यमिक और माध्यमिक शिक्षक भर्ती में भी एकल परीक्षा प्रणाली अपनाई गई थी। उस समय करीब 21 हजार पदों पर भर्ती की गई थी। हालांकि बाद में शिक्षक भर्ती-2023 और प्राथमिक शिक्षक भर्ती-2024 में फिर दो चरणों वाली परीक्षा प्रणाली लागू कर दी गई थी। अब विभाग फिर से पुरानी एकल परीक्षा व्यवस्था लागू करने जा रहा है। सरकारी शिक्षकों के लिए स्कोर कार्ड की वैधता दो वर्ष नई व्यवस्था के तहत सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए जारी स्कोर कार्ड की वैधता दो वर्ष तक रहेगी। यदि इस अवधि में अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं मिलती है तो उसे दोबारा परीक्षा देनी होगी। भर्ती के लिए विभागीय पोर्टल पर रिक्त पदों की जानकारी जारी की जाएगी और मेरिट के आधार पर चयन किया जाएगा। निजी स्कूलों में भी पात्रता परीक्षा अनिवार्य निजी स्कूलों में भी अब केवल पात्रता परीक्षा पास अभ्यर्थियों की ही नियुक्ति की जाएगी। हालांकि निजी विद्यालय किसी भी वर्ष की पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण उम्मीदवार को नियुक्त कर सकेंगे। निजी स्कूलों के लिए स्कोर कार्ड की वैधता आजीवन रहेगी। अभ्यर्थियों को आर्थिक राहत नई व्यवस्था से अभ्यर्थियों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा। पहले सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को पात्रता परीक्षा और चयन परीक्षा दोनों के लिए अलग-अलग 500 रुपये शुल्क देना पड़ता था। हर वर्ष लगभग पांच से छह लाख अभ्यर्थी इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। अब एक ही परीक्षा होने से समय और धन दोनों की बचत होगी। स्कोर सुधारने का मिलेगा मौका ईएसबी अधिकारियों के अनुसार नई प्रणाली में अभ्यर्थियों को भविष्य में अपने स्कोर में सुधार करने का अवसर भी मिलेगा। उम्मीदवार चाहें तो दोबारा परीक्षा देकर बेहतर अंक प्राप्त कर सकते हैं। अब शिक्षक भर्ती के लिए सिर्फ पात्रता परीक्षा होगी। चयन परीक्षा नहीं होगी। आजीवन वैध रहेगा, लेकिन अभ्यर्थी चाहें तो अपने स्कोर में सुधार के लिए दोबारा परीक्षा दे सकते हैं।- केके द्विवेदी, संचालक, स्कूल शिक्षा विभाग  

टोल पर नहीं लगेगी लंबी लाइन! NHAI ने फरीदाबाद-बदरपुर को बैरियर फ्री बनाने की तैयारी शुरू की

फरीदाबाद दिल्ली-आगरा हाईवे पर फरीदाबाद बॉर्डर स्थित बदरपुर टोल टैक्स प्लाजा अगले छह महीनों में बैरियर फ्री होने जा रहा है। एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने इसके लिए पूरी तैयारी शुरू कर दी है। इस बदलाव के बाद वाहनों को बिना रुके ही टोल टैक्स का भुगतान करना संभव होगा, जिससे ट्रैफिक की गति बढ़ेगी और लंबी लाइनें समाप्त होंगी। कैसे काम करेगा हाईटेक सिस्टम एनएचएआई ने बताया कि बैरियर फ्री व्यवस्था के तहत हाईटेक कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक टोल वसूली सिस्टम लगाए जाएंगे। टोल की वसूली इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हो जाएगी वाहन जब टोल प्लाजा से गुजरेंगे, तो उनके रजिस्ट्रेशन नंबर को कैमरे द्वारा स्कैन किया जाएगा और टोल की वसूली इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हो जाएगी। इसके लिए वाहन मालिकों को डिजिटल टोल पास या ई-टोल वॉलेट का इस्तेमाल करना होगा। इस तकनीक के लागू होने से प्लाजा पर ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी। इसके अलावा, यह प्रणाली पारदर्शिता बढ़ाने और नकद लेनदेन से होने वाली परेशानियों को भी समाप्त करने में मदद करेगी। एनएचएआई की तैयारी एनएचएआई अधिकारियों ने बताया कि बैरियर फ्री सिस्टम लगाने के लिए पहले से ही आवश्यक सर्वे और तकनीकी तैयारी शुरू कर दी गई है। छह महीनों में पूरा किया जाएगा     उच्च तकनीक कैमरे, सेंसर और डिजिटल टोल प्रणाली की स्थापना का काम क्रमिक रूप से अगले छह महीनों में पूरा किया जाएगा।     अधिकारी यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि नए सिस्टम की टेस्टिंग पूरी तरह से हो और कोई तकनीकी गड़बड़ी न हो।     सड़क सुरक्षा और सुविधा में सुधार विशेषज्ञों का कहना है कि बैरियर फ्री टोल प्लाजा न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि सड़क सुरक्षा में भी मदद करेगा।     टोल प्लाजा पर अक्सर लंबी कतारों और अचानक ब्रेकिंग के कारण दुर्घटनाएं होती रही हैं। यात्रियों को होगा ये लाभ बैरियर फ्री प्रणाली से वाहनों की गति नियंत्रित रूप से बनी रहेगी और यह जोखिम कम होगा। यात्रियों के लिए लाभ ट्रक, बस और निजी वाहन चालक लंबे समय से टोल प्लाजा पर जाम और देरी से परेशान थे। बैरियर फ्री व्यवस्था लागू होने के बाद अब उन्हें बिना रुके ही टोल का भुगतान करने की सुविधा मिलेगी। इससे समय की बचत होगी और लॉन्ग-डिस्टेंस ट्रैवल को आसान बनाया जा सकेगा। भविष्य की योजनाएं एनएचएआई ने संकेत दिया है कि इस तरह के बैरियर फ्री टोल सिस्टम को अन्य हाईवे प्लाजा पर भी लागू करने की योजना है। इसका उद्देश्य पूरे देश में डिजिटल और स्मार्ट टोलिंग सिस्टम को बढ़ावा देना है, जिससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात सुगम और सुरक्षित बन सके।  

ग्वालियर-नागपुर सिक्सलेन कॉरिडोर से बदलेगी तस्वीर, 9 जिलों को मिलेगा बड़ा फायदा

सागर  ग्वालियर और नागपुर शहरों को सिक्सलेन हाइवे से जोड़ने के लिए नए कारीडोर का सर्वे तेजी से चल रहा है. इस कॉरिडोर को केंद्र सरकार द्वारा सहमति मिलने के बाद सरकार द्वारा फिजिबिलिटी सर्वे कराया जा रहा है. जिसमें ये देखा जाएगा कि इस कॉरिडोर पर कैसा ट्रैफिक रहेगा. फिलहाल ये तय किया गया है कि 40 हजार करोड़ की लागत से 569 किमी लंबा सिक्सलेन हाइवे बनाया जाएगा, जो मध्य प्रदेश के 9 जिलों से गुजरेगा. इन सभी जिलों में सिक्सलेन कॉरिडोर के किनारे इंडस्ट्रियल क्लस्टर की स्थापना की जाएगी, जो इन जिलों के व्यवसाय में पंख लगाएंगे।  भूतल परिवहन मंत्रालय की सहमति के बाद सर्वे कार्य शुरु ग्वालियर से नागपुर की कनेक्टिविटी अभी तक सीधे तौर पर नहीं है. ऐसे में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय ने ग्वालियर, बैतूल, नागपुर कारीडोर के लिए सहमति दे दी है. फिलहाल जो प्रस्ताव है, उसके तहत 40 हजार करोड़ की लागत से 569 किमी लंबा सिक्स लेन कॉरिडोर बनाया जाएगा. ये कॉरिडोर ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी, अशोकनगर, विदिशा, भोपाल, रायसेन, नर्मदापुरम और बैतूल से होते हुए नागपुर तक जाएगा. ग्वालियर से शुरू होकर यह मार्ग नागपुर तक पहुंचेगा।  फिजिबिलिटी सर्वे और डीपीआर की तैयारी फिलहाल इस कारीडोर के लिए NHAI (National Highways Authority of India) द्वारा फिजिबिलिटी सर्वे किया जा रहा है. जिसका उद्देश्य ये है कि इस कॉरिडोर पर ट्रैफिक की स्थिति क्या होगी और क्या लाभ होगा. इसी आधार पर जल्द ही कॉरिडोर के अलाइनमेंट और डीपीआर को अंतिम रुप दिया जाएगा. फिलहाल इस बात पर भी मंथन चल रहा है कि इसे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे की तरह बनाया जाए. ये अभी जो सड़क हैं, उसी का चौड़ीकरण सिक्सलेन के रूप में किया जाए।  ब्लैक स्पाॅट खत्म करने का होगा काम प्रस्तावित ग्वालियर बैतूल नागपुर कॉरिडोर के निर्माण की शुरूआत से ही यातायात सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है. एनएचएआई कॉरिडोर के सिवनी जिले से गुजरने वाले हिस्से में लखनादौन और खवासा के बीच ब्लैक स्पॉट खत्म करने के लिए काम कर रहा है. इन ब्लैक स्पाॅट पर अंडरपास, ओवरब्रिज और पुलों का निर्माण किया जाएगा. अंडरपास के जरिए लोकल ट्रैफिक को अलग से रास्ता दिया जाएगा।  सफर में 6-7 घंटे कम लगेगा वक्त इस कॉरिडोर के बनने से ग्वालियर और नागपुर के बीच यात्रा में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा. फिलहाल ग्वालियर से नागपुर जाने में 22 से 24 घंटे लगते हैं. सिक्सलेन कारीडोर के बाद ये वक्त महज 16 से 18 घंटे रह जाएगा. इसके साथ ही सफर सुरक्षित हो जाएगा।  हर जिले में इंडस्ट्रियल क्लस्टर से व्यवसाय को लगेगे पंख पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह का कहना है कि, ''ये कॉरिडोर मध्य प्रदेश के जिन 9 जिलों से गुजर रहा है, वहां कॉरिडोर के किनारे इंडस्ट्रियल क्लस्टर बनाए जाएंगे. जिनका उद्देश्य लाजिस्टिक हब तैयार करना है. इस कॉरिडोर से पर्यटन व्यावसाय को पंख लगने के अलावा, खनिज, फल, अनाज, दवाईयां और प्लास्टिक व्यावसाय को पंख लगेगे. उद्यमियों की लागत और सफर में लगने वाला समय कम होगा. इस हाइवे की ग्वालियर-आगरा हाइवे और नागपुर पुणे मुंबई हाइवे से कनेक्टिविटी आसान हो  जाएगी। 

मध्यप्रदेश की नई ट्रांसफर पॉलिसी जारी, लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई; महिलाओं और रिटायरमेंट के करीब कर्मचारियों को राहत

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने तबादला नीति-2026 लागू करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। नई नीति के तहत अब तय लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को निर्धारित समय सीमा से पहले भी हटाया जा सकेगा। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने कैबिनेट की मंजूरी के बाद आदेश जारी कर 1 जून से 15 जून तक तबादलों की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी ट्रांसफर आदेश केवल ऑनलाइन जारी होंगे। 15 जून के बाद जारी किए गए तबादला आदेश मान्य नहीं माने जाएंगे। नई नीति का असर लाखों सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों पर पड़ेगा। खराब प्रदर्शन पर समय से पहले होगा तबादला नई व्यवस्था में प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कार्यपालिक अधिकारियों को एक जिले में तीन साल पूरा होने पर बाहर भेजा जा सकेगा। तृतीय श्रेणी कर्मचारियों पर भी यही नियम लागू होगा।हालांकि सरकार ने साफ किया है कि तीन साल की अवधि अनिवार्य शर्त नहीं होगी। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी का प्रदर्शन खराब पाया जाता है या वह विभागीय लक्ष्य पूरे नहीं कर पाता है, तो प्रशासनिक आधार पर उसका तबादला पहले भी किया जा सकेगा। महिलाओं और सेवानिवृत्ति के करीब कर्मचारियों को राहत नई तबादला नीति में महिला कर्मचारियों को विशेष राहत दी गई है। अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को गृह जिले में पदस्थ करने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय बचा है, उनका सामान्य परिस्थितियों में तबादला नहीं किया जाएगा। पति-पत्नी को एक ही स्थान पर पदस्थ करने के लिए भी आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। तीन साल से पहले भी हो सकेगा तबादला नई नीति के तहत प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कार्यपालिक अधिकारियों को एक ही जिले में तीन वर्ष पूरे होने पर जिले से बाहर स्थानांतरित किया जा सकेगा। वहीं तृतीय श्रेणी कर्मचारियों का भी एक स्थान पर तीन वर्ष या उससे अधिक समय पूरा होने पर तबादला किया जा सकेगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि तीन वर्ष की अवधि तबादले की अनिवार्य शर्त नहीं होगी। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी पिछले वित्तीय वर्ष के निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं कर पाया है तो उसका तबादला तय अवधि से पहले भी किया जा सकेगा। प्रशासनिक आधार पर ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। ई-ऑफिस के माध्यम से ही मंत्रियों को देना होगा अनुमोदन तबादले राज्य और जिला स्तर पर होंगे। पति-पत्नी (दंपती) की पदस्थापना एक स्थान पर रखी जाएगी। गंभीर बीमारी से पीड़ित शासकीय सेवकों को भी तबादले में रियायत दी जाएगी। मंत्री व प्रभारी मंत्रियों की अनुशंसा पर तबादले होंगे। मंत्री का अनुमोदन ई-ऑफिस के माध्यम से ही होगा। इतना ही नहीं विभाग अपनी सुविधा के अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के अनुमोदन व मुख्यमंत्री की अनुशंसा से तबादला नीति बना सकेंगे। स्वयं के व्यय वाले तबादलों में दो स्थितियां शामिल नहीं होंगी। इन्हें तबादला नीति से बाहर रखा गया है। पहला कि ऐसे शासकीय सेवक जो अति गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, लकवा, हृदयाघात से पीड़ित हैं और मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर स्थानांतरित किए जाते हैं उनका इस तबादला नीति में समावेश नहीं किया जाएगा। वहीं पति-पत्नी व स्वयं बीमारी से पीड़ित शासकीय सेवक भी तबादला नीति की निर्धारित सीमा से बाहर रखा गया है। तबादला प्रतिबंध अवधि के दौरान केवल विभागीय मंत्री के प्रशासकीय अनुमोदन पर ही तबादले होंगे। न्यायिक और प्रशासनिक सेवाओं पर लागू नहीं होगी नीति पद या संवर्ग की संख्या 200 तक है तो 20 प्रतिशत तबादले ही किए जाएंगे। वहीं 201 से 1000 संख्या तक 15 प्रतिशत, 1001 से 2000 तक 10 प्रतिशत और 2001 से अधिक होने पर पद या संवर्ग में कार्यरत संख्या के आधार पर स्थानांतरण किए जाएंगे। तबादले ई-ऑफिस के माध्यम से होंगे। इनमें स्वैच्छिक तबादले भी होंगे। यह नीति मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा एवं मध्य प्रदेश मंत्रालय पर लागू नहीं होगी। सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे अमले को राहत जिले के भीतर जिला संवर्ग/राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का जिला कलेक्टर द्वारा प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से तबादला किया जाएगा। गृह विभाग में उप पुलिस अधीक्षक के कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों, कर्मचारियों का स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड द्वारा और जिले के भीतर पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से होगा। जिले के भीतर डिप्टी कलेक्टर/संयुक्त कलेक्टर अनुभाग परिवर्तन एवं तहसीलदार, नायब तहसीलदार की पदस्थापना प्रभारी मंत्री के परामर्श से की जाएगी। जिन अधिकारियों/कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय शेष हो, सामान्यतः उनका स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। श्रृंखलाबद्ध तबादलों पर रोक सरकार ने विभागों को निर्देश दिए हैं कि केवल अवधि पूरी होने के आधार पर तबादले न किए जाएं। न्यायालयीन आदेश, गंभीर शिकायत, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति से वापसी और रिक्त पदों की आवश्यकता जैसे मामलों में ही तबादला प्रक्रिया अपनाई जाएगी।साथ ही रिक्त पदों को भरने के नाम पर एक के बाद एक किए जाने वाले श्रृंखलाबद्ध तबादलों पर भी रोक लगा दी गई है। पुलिस विभाग में अलग व्यवस्था लागू पुलिस विभाग में उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के अधिकारियों और कर्मचारियों की पदस्थापना का निर्णय पुलिस स्थापना बोर्ड करेगा। जिले के भीतर पदस्थापना पुलिस अधीक्षक प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद करेंगे।वहीं उप पुलिस अधीक्षक और उससे वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद किए जाएंगे। गंभीर बीमारियों और दिव्यांग कर्मचारियों को छूट नई नीति में गंभीर बीमारियों से पीड़ित कर्मचारियों को भी राहत दी गई है। कैंसर, डायलिसिस और ओपन हार्ट सर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर छूट दी जाएगी।इसके अलावा 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग कर्मचारियों का सामान्य परिस्थितियों में तबादला नहीं किया जाएगा। ऑनलाइन ट्रांसफर सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता सरकार ने सभी स्थानांतरण आदेश ऑनलाइन जारी करना अनिवार्य किया है। आदेश में कर्मचारी का एम्पलाई कोड दर्ज करना जरूरी होगा।तबादले के बाद पुराने स्थान से वेतन निकाले जाने पर इसे वित्तीय अनियमितता माना जाएगा। वहीं जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, गबन या नैतिक अपराधों की जांच लंबित है, उन्हें कार्यपालिक पदों पर पदस्थ नहीं किया जाएगा। रिक्त पदों के लिए श्रृखलाबंद तबादलों पर रोक सरकार ने विभागों को यह भी निर्देश … Read more