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जैव विविधता, जल संरक्षण और जनभागीदारी का अनूठा संगम

रायपुर छत्तीसगढ़ का पहला रामसर स्थल कोपरा जलाशय आज पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक सहभागिता का प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रहा है। “जैव विविधता के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस 2026” की थीम “स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव” को यह जलाशय वास्तविक रूप में साकार कर रहा है।         सुबह के शांत वातावरण में प्रवासी पक्षियों की मधुर आवाजें और जलाशय के आसपास आजीविका से जुड़े ग्रामीणों की गतिविधियां प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध को दर्शाती हैं। कोपरा जलाशय वर्षों से क्षेत्र के लोगों के लिए जल, मत्स्य पालन, कृषि और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में संरक्षण कार्यों को मिली नई गति मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा जैव विविधता संरक्षण, आर्द्रभूमि विकास और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जल स्रोतों के संरक्षण, वृक्षारोपण, वन्यजीव सुरक्षा और सामुदायिक भागीदारी से जुड़े कई अभियान प्रदेश में संचालित किए जा रहे हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव कोपरा जलाशय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। स्थानीय समुदाय निभा रहे अहम भूमिका वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की जैव विविधता राज्य की अमूल्य धरोहर है और इसके संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कोपरा जलाशय यह संदेश देता है कि जब शासन और समाज मिलकर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेते हैं, तब पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित होता है। प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित आश्रय कोपरा जलाशय हजारों प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। हर वर्ष विभिन्न देशों और राज्यों से आने वाले पक्षी यहां भोजन और विश्राम प्राप्त करते हैं। इसके साथ ही यह जलाशय जलीय जीवों, मछलियों, वनस्पतियों और अनेक सूक्ष्म जीवों के लिए भी महत्वपूर्ण आवास प्रदान करता है। इसी विशेषता के कारण इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता मिली है। स्वच्छता, वृक्षारोपण और बायो-फेंसिंग पर विशेष जोर स्थानीय ग्रामीणों, महिला स्व-सहायता समूहों, युवाओं और विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी से यहां स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, पक्षी संरक्षण और बायो-फेंसिंग जैसे कार्य लगातार किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलने के साथ लोगों में प्रकृति के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हो रही है। जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी महत्वपूर्ण विशेषज्ञों के अनुसार आर्द्रभूमियां प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करती हैं। वे बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण, जल शुद्धिकरण और कार्बन अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में कोपरा जलाशय का संरक्षण जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। सतत विकास का बन रहा राष्ट्रीय मॉडल कोपरा जलाशय आज यह संदेश दे रहा है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की साझा जिम्मेदारी है। स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे-छोटे प्रयास ही वैश्विक स्तर पर बड़े बदलाव की नींव बनते हैं। छत्तीसगढ़ का यह पहला रामसर स्थल आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और सामुदायिक सहभागिता का राष्ट्रीय मॉडल बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।           मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी है। इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और इसके वैश्विक महत्व पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने राज्य के नागरिकों और संरक्षण टीम की सराहना करते हुए अपना संदेश दिया है।             मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि कोपरा जलाशय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर स्थल की मान्यता मिलना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। हमारी सरकार जैव विविधता संरक्षण, आर्द्रभूमि के विकास और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। कोपरा जलाशय इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब शासन की नीतियां और समाज का संकल्प एक साथ मिलते हैं, तो स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे प्रयास भी वैश्विक स्तर पर बड़ा बदलाव ला सकते हैं। हमारी समृद्ध प्रकृति ही हमारी आने वाली पीढ़ियों का सुरक्षित भविष्य है।

नगर निगम की नई पहल, बैंकें करेंगी कुओं का पुनर्जीवन और जल संवर्धन

इंदौर  इंदौर के पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की दिशा में नगर निगम ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शहर के खस्ताहाल और बदहाल हो चुके कुओं को नया जीवन देने और उनके संपूर्ण कायाकल्प के लिए नगर निगम प्रशासन ने छह प्रमुख बैंकों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इस नई योजना के तहत प्रत्येक चिन्हित बैंक को शहर के 25 से 30 कुओं को संवारने का जिम्मा उठाना होगा। बैंकों को न केवल इन कुओं की साफ-सफाई और मरम्मत करानी होगी, बल्कि उनका गहरीकरण करने के साथ-साथ नगर निगम द्वारा तय किए गए अन्य सभी आवश्यक कार्य भी पूरे कराने होंगे। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी नगर निगम ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी सीएसआर फंड के माध्यम से विभिन्न निजी कंपनियों और बैंकों के सहयोग से शहर के कई ऐतिहासिक तालाबों को संवारने का काम बड़े पैमाने पर किया था।  इस वृहद अभियान की पृष्ठभूमि में नगर निगम की विशेष टीमों द्वारा पिछले दिनों शहर के सभी वार्डों और क्षेत्रों में स्थित कुओं का एक विस्तृत सर्वे किया गया था। इस सर्वे के आधार पर निगम ने एक व्यापक सूची तैयार की थी। इसके बाद शुरुआती चरण में निगम ने अपने संसाधनों से कुछ प्रमुख कुओं को संवारने का काम शुरू भी किया था, लेकिन कई स्थानों पर कुओं के आसपास के हिस्सों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण होने के कारण काम समय पर शुरू नहीं हो सका। वर्तमान में भी स्थिति यह है कि शहर के कई पारंपरिक कुएं मकानों और दुकानों के अवैध कब्जों की जद में आकर बेहद दयनीय स्थिति में पड़े हुए हैं। नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले दिनों विभिन्न राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों के प्रबंधन के साथ सिलसिलेवार बैठकों का दौर चला था, जिसमें सर्वसम्मति से शहर के तालाबों और कुओं के जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी बैंकों को आवंटित करने का निर्णय लिया गया। कनाड़िया, बिजासन और मायाखेड़ी सहित कई तालाबों की भी बदलेगी सूरत इस जल संवर्धन अभियान में देश के कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय बैंक अपनी सहभागिता निभा रहे हैं। तय कार्ययोजना के अनुसार, कुछ चुनिंदा बैंकों को कनाड़िया क्षेत्र के दो प्रमुख तालाबों के साथ-साथ अरंडिया, मायाखेड़ी, हुकमाखेड़ी और प्रसिद्ध बिजासन तालाब को संवारने का विशेष दायित्व दिया गया है। बैंकों को इन तालाबों के जल भराव क्षेत्र को बढ़ाने के लिए उनका गहरीकरण करना होगा, साथ ही तालाबों के किनारों पर मजबूत पाल और आकर्षक पाथ-वे का निर्माण भी कराना होगा। इसके अतिरिक्त पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन जलाशयों के आसपास के खाली हिस्सों में बड़े पैमाने पर सघन पौधारोपण के कार्य भी बैंकों के माध्यम से संपन्न कराए जाएंगे। विभिन्न बैंकों और निजी कॉर्पोरेट फर्मों द्वारा अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के तहत सीएसआर फंड से इन सभी लोक कल्याणकारी कार्यों के खर्च का वहन किया जाता है। पिछले साल भी इंदौर नगर निगम ने इसी रणनीतिक मॉडल पर काम करते हुए बिलावली और लिम्बोदी सहित शहर के कई बड़े तालाबों के आसपास गहरीकरण से लेकर उनके संपूर्ण सौंदर्गीकरण के कार्यों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था, जिसके सकारात्मक परिणाम इस बार देखने को मिल रहे हैं। मध्य क्षेत्र के कुओं पर रहेगा विशेष ध्यान, रहवासियों को मिलेगा सीधा लाभ तालाबों के अलावा इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा शहर के कुओं को फिर से जीवित करना है। बैंकों को जो 25 से 30 कुओं को संवारने का काम आवंटित किया गया है, उनमें सबसे अधिक संख्या इंदौर के घने बसे मध्य क्षेत्र के कुओं की है। निगम के तकनीकी अधिकारियों के मुताबिक, सर्वे के दौरान केवल उन्हीं कुओं को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया गया है, जहां पर जीर्णोद्धार और गहरीकरण के बाद भविष्य में पर्याप्त पानी मिलने की पूरी संभावना मौजूद है। इन कुओं के सक्रिय होने से आसपास के रहवासियों को दैनिक उपयोग के लिए आसानी से पानी मिल सकेगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा और गर्मियों के दिनों में टैंकरों पर निर्भरता भी काफी कम हो जाएगी। आने वाले कुछ ही दिनों में संबंधित बैंकें निविदाएं आमंत्रित कर या अपने स्तर पर एजेंसियों के माध्यम से इन जमीनी कार्यों की विधिवत शुरुआत कराने जा रही हैं। इस पूरे अभियान के दौरान कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नगर निगम के कुशल अधिकारी और इंजीनियर लगातार साइट्स की मॉनिटरिंग और कड़ा निरीक्षण करेंगे। निगम के अधिकारी समय-समय पर बैंकों की कार्यवाहक टीमों को कार्यों की तकनीकी बारीकियों और आवश्यक सुधारों के बारे में दिशा-निर्देश प्रदान करते रहेंगे ताकि जल संरक्षण का यह व्यापक मिशन पूरी तरह सफल हो सके। 

अजब-गजब जलवा! डाक सेवाओं में मध्य प्रदेश ने बड़े राज्यों को दी मात

ग्वालियर अब चिट्ठियों का दौर भले कम हो गया हो, लेकिन भरोसे की दौड़ में मध्य प्रदेश ने पूरे देश को पीछे छोड़ दिया है। डाक विभाग की ताज़ा रिपोर्ट (वर्ष 2025-26) ने एक ऐसा सच सामने रखा है, जो बड़े-बड़े राज्यों के माथे पर पसीना ला देगा। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश और आर्थिक पावर हाउस महाराष्ट्र जैसे धुरंधर जिस काम में फुस्स हो गए, वहां एमपी के डाकघरों ने 100 फीसदी का परफेक्ट स्कोर बनाया है। डिजिटल इंडिया के शोर के बीच डाक विभाग के जो आंकड़े सामने आए हैं, उनमें मध्य प्रदेश ने सर्विस क्वालिटी के मामले में पूरे देश में झंडा गाड़ दिया है। ग्वालियर डाक विभाग के प्रवर अधीक्षक एके सिंह ने बताया कि, इस रिपोर्ट ने ये साबित कर दिया है कि, बेहतर मैनेजमेंट हो तो कम संसाधनों में भी शत-प्रतिशत परिणाम दिए जा सकते हैं। एमपी का मैजिक : सभी 10,275 डाकघरों में फुल सर्विस जारी आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में कुल 10, 275 डाकघर संचालित हैं। रोचक तथ्य ये है कि, राज्य के सभी 10,275 डाकघरों में समस्त डाक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ये आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्षेत्रफल में बड़े और डाकघरों की ज्यादा संख्या (17,957) वाले उत्तर प्रदेश में केवल 2,373 डाकघर ही सभी सेवाएं दे पा रहे हैं। विकसित माने जाने वाले महाराष्ट्र में भी 14,037 में से केवल 9,254 डाकघर ही पूर्ण सेवाएं दे रहे हैं। देश का हाल : 1.64 लाख डाकघरों का नेटवर्क पूरे देश की बात करें तो 31 मार्च 2025 तक कुल 1,64,999 डाकघर कार्यरत हैं। इनमें से 1.57 लाख डाकघर वितरण का काम कर रहे हैं। रिपोर्ट का एक और रोचक पहलू रात्रि कालीन डाकघर हैं। पूरे देश में केवल 130 नाइट पोस्ट ऑफिस हैं, जिनमें दिल्ली (23) सबसे आगे है, जबकि मध्य प्रदेश में ऐसे केवल 5 डाकघर ही संचालित हैं। फैक्ट फाइल: टॉप 5 डाकघर वाले राज्य राज्य—-कुल डाकघर——-सभी सेवाएं देने वाले उत्तर प्रदेश—–17,957—–2,373 महाराष्ट्र—-14,037——9,254 तमिलनाडु—–11,829—–11,829 राजस्थान—–11,042—–10,872 मध्य प्रदेश—–10,275—–10,275(100 फीसदी) (नोट : तमिलनाडु और मध्य प्रदेश ही ऐसे बड़े राज्य हैं, जहां सभी सेवाएं देने वाले डाकघरों का अनुपात सबसे बेहतर है।) इसलिए मारक है यह रिपोर्ट -संख्या में भले ही 5वें पर, पर सर्विस में नंबर-1 डाकघरों की कुल संख्या में मप्र देश में 5वें स्थान पर है, लेकिन सभी सेवाएं देने की प्रतिबद्धता में यह राज्यों का सिरमौर है। -नाइट पोस्ट ऑफिस में दिल्ली का बोलबाला रात में जागने वाले डाकघरों के मामले में दिल्ली (23) सबसे आगे है। मध्य प्रदेश में अभी ऐसे केवल 5 केंद्र हैं, जिन्हें बढ़ाने की जरूरत है। -डिलीवरी का जाल प्रदेश के 9,986 डाकघर चिट्ठी -पत्री और पार्सल बांटने के मिशन में 24 गुणा 7 जुटे हैं।

नक्सल क्षेत्र में स्वास्थ्य क्रांति, मिनपा हेल्थ सेंटर ने बदली सेवाओं की तस्वीर

रायपुर  अत्यंत सुदूर, पहुंचविहीन एवं संवेदनशील क्षेत्र सुकमा जिले का मिनपा स्वास्थ्य केंद्र आज सेवा, संघर्ष और समर्पण की प्रेरणादायी मिसाल बन चुका है। जो स्वास्थ्य सेवाएं वर्ष 2022 में सीमित संसाधनों और झोपड़ीनुमा अस्थायी व्यवस्था से प्रारंभ हुई थीं, वही आज राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) मूल्यांकन तक पहुंचकर एक नई उपलब्धि दर्ज कर रही हैं। उस समय क्षेत्र की भौगोलिक कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को गांव तक पहुंचाना बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लगातार गांव-गांव पहुंचकर हेल्थ कैंप संचालित किए और उपचार के साथ-साथ जनमानस में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का वातावरण तैयार किया। मितानिन, एएनएम, सीएचओ, सुपरवाइजर, सेक्टर मेडिकल ऑफिसर सहित मैदानी स्वास्थ्य अमले की सतत मेहनत एवं जिला प्रशासन के सहयोग से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत हुआ। वर्षों की इसी निरंतर मेहनत और सेवा भावना का परिणाम है कि दिनांक 15 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक (NQAS) मूल्यांकन दल द्वारा मिनपा स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण एवं मूल्यांकन सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। मिनपा की यह यात्रा केवल एक अस्पताल के विकास की कहानी नहीं, बल्कि विषम परिस्थितियों में भी जनसेवा के संकल्प को जीवंत रखने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के समर्पण का प्रेरक उदाहरण है।  

शिप्रा यात्रा को लेकर BJP की बड़ी तैयारी, CM मोहन यादव करेंगे सहभागिता

उज्जैन उज्जैन में प्रतिवर्ष गंगा दशहरा होने वाली शिप्रा तीर्थ परिक्रमा में 26 मई को सीएम मोहन यादव शिप्रा नदी के तट पर होने वाले कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसको लेकर भाजपा नगर द्वारा मंडलों की महत्वपूर्ण बैठक मंडल में तय हुआ कि शिप्रा तीर्थ परिक्रमा 25 मई को प्रातः 9:00 बजे रामघाट से मां क्षिप्रा एवं धर्म ध्वजा के पूजन के साथ प्रारंभ होगी। परिक्रमा का समापन 26 मई गंगा दशहरा के अवसर पर शाम 5:00 बजे मां क्षिप्रा को चुनरी अर्पित कर किया जाएगा। जिला मीडिया प्रभारी दिनेश जाटवा ने बताया कि क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा विगत कईं वर्षों से मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी के नेतृत्व में आयोजित की जा रही है। यात्रा की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा 23 वर्ष पहले मां शिप्रा के संरक्षण के लिए की गई थी। इस वर्ष 25 मई को यात्रा का शुभारम्भ मोक्षदायिनी मां शिप्रा के राम घाट पर पूजन से होगा। यात्रा वापस 26 मई को पहुंचेगी यात्रा जिले में नर्सिंह घाट, लालपुल से त्रिवेणी होकर शहर के मार्गों से निकलकर वापस रामघाट 26 मई को पहुंचेगी। साथ ही 26 मई ,गंगा दशहरा को यात्रा के समापन अवसर पर राम घाट पर गंगा दशहरा उत्सव आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष भी परिक्रमा को सफल, भव्य बनाने तथा श्रद्धालुओं की सेवा हेतु कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा की तैयारी एवं व्यवस्थाओं के संदर्भ में भाजपा नगर द्वारा मंडलों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। सीएम मां शिप्रा को 300 फीट लंबी चुनरी करेंगे अर्पित मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार एवं महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि गंगा दशमी के अवसर पर आयोजित शिप्रा तीर्थ परिक्रमा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मां शिप्रा को 300 फीट लंबी चुनरी अर्पित करेंगे। मैथिली ठाकुर और इंडियन नेवी बैंड की प्रस्तुति 26 मई को आयोजित मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भारतीय नौसेना (इंडियन नेवी) बैंड की प्रस्तुति होगी। इसके अलावा मुंबई के केशवम् बैंड द्वारा भजन जैमिंग और प्रसिद्ध लोक गायिका Maithili Thakur अपने साथियों के साथ भजनों की प्रस्तुति देंगी। भारत भवन में होगा ‘सदानीरा समागम’ भोपाल स्थित भारत भवन में 27 मई से दो जून तक आयोजित होने वाले सदानीरा समागम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। इस अवसर पर इसरो हैदराबाद के भू-विज्ञान समूह के निदेशक डॉ. ईश्वर चंद्र दास विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।  जल संरक्षण में बना जनभागीदारी का रिकॉर्ड मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार और वीर भारत न्यास के न्यासी श्रीराम मिवारी ने बताया, "मध्य प्रदेश में जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर चल रहे अभियान के तहत अब तक 1 लाख 77 हजार से अधिक कार्य पूरे किए जा चुके हैं. तालाब, कुएं, बावड़ियां और नदियों के संरक्षण के साथ लोगों को जल बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है. यह अभियान अब केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का बड़ा आंदोलन बन चुका है।  उज्जैन की शिप्रा परिक्रमा से होगी शुरुआत श्रीराम तिवारी के अनुसार, मुख्य आयोजन से पहले 25 और 26 मई को उज्जैन में शिप्रा तीर्थ परिक्रमा निकाली जाएगी. यह यात्रा रामघाट से शुरू होकर शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों से गुजरेगी. इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मां शिप्रा को 300 फीट लंबी चुनरी अर्पित करेंगे. इस दौरान लोकगायिका मैथिली ठाकुर, भारतीय नौसेना बैंड और कई प्रसिद्ध कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे. आयोजकों के अनुसार, पिछले 22 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा अब जल संरक्षण आंदोलन की प्रेरणा बन रही है।  भारत भवन में जुटेंगे देश-विदेश के विशेषज्ञ तिवारी ने बताया कि भोपाल के भारत भवन में होने वाले सदानीरा समागम में देश-विदेश के वैज्ञानिक, पर्यावरणविद्, नीति विशेषज्ञ और संस्कृति जगत की हस्तियां शामिल होंगी. इसमें फिजी, नेपाल, मैक्सिको, सूरीनाम, त्रिनिदाद एवं टोबैगो सहित 9 देशों के राजदूत और सांस्कृतिक प्रतिनिधि भी भाग लेंगे. इस कार्यक्रम में इसरो के वैज्ञानिकों से लेकर कार्पाेरेट संस्थानों के प्रतिनिधि भी जल संरक्षण पर अपने विचार रखेंगे।  पंचमहाभूतों पर होगा गहन मंथन सदानीरा समागम में जल, पृथ्वी, वायु, आकाश और अग्नि तत्वों पर अलग-अलग वैचारिक सत्र आयोजित किए जाएंगे. इसमें मैग्सेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह सहित कई विशेषज्ञ जल संकट, भूगर्भीय जल, पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण पर चर्चा करेंगे. आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन केवल सांस्कृतिक मंच नहीं बल्कि जल और प्रकृति को लेकर गंभीर चिंतन का अवसर होगा।  संस्कृति, फिल्म और लोककला का अनूठा संगम श्रीराम तिवारी ने आगे बताया, "हर शाम भारत भवन में नृत्य-नाटिकाएं, लोकगीत, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियां होंगी. इस दौरान प्रवाह फिल्म समारोह के तहत जल संकट और पर्यावरण पर आधारित डाक्यूमेंट्री फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा. इसके अलावा जल, जंगल और जीवन विषय पर चित्रकला कार्यशालाएं, प्रदर्शनियां और जल विषयक पुस्तकों का लोकार्पण भी होगा। 

8.56 करोड़ खर्च फिर भी नहीं थमा डॉग बाइट संकट, भोपाल में एक भी शेल्टर नहीं

भोपाल  सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा और खतरनाक कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन भोपाल में इसका पालन आसान नहीं दिख रहा। निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में करीब 1.20 लाख आवारा कुत्ते हैं, लेकिन शहर में एक भी डॉग शेल्टर नहीं है। अगले कुछ महीनों में इसके बनने की उम्मीद भी नहीं है। आवारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन पर निगम पिछले पांच साल में 8.5 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है। फिर भी रोजाना डॉग बाइट के शिकार करीब 81 लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। 15 शिकायतें निगम में रोज आ रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। रात के समय कई इलाकों में बाइक सवारों और पैदल लोगों का निकलना मुश्किल हो रहा है। शेल्टर होम होगा आवारा श्वानों का ठिकाना सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई श्वान खतरनाक या रेबीज से संक्रमित पाया जाता है, तो उसे इंजेक्शन देकर समाप्त किया जा सकता है। साथ ही अदालत ने नवंबर 2025 में जारी पुनर्वास और नसबंदी संबंधी निर्देशों को प्रभावी बताते हुए कहा है कि इनका पालन नहीं करने वाले अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई हो सकती है। 810 नो डॉग जोन बनने थे, पर यहां से एक भी कुत्ता नहीं हटा पिछले साल भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और खेल परिसरों समेत 810 सार्वजनिक जगहों को ‘नो-डॉग जोन’ के रूप में चिह्नित किया था। दावा था कि यहां से कुत्तों को हटाया जाएगा, लेकिन शेल्टर होम नहीं होने के कारण अब तक एक भी कुत्ता नहीं हटाया गया। शहर में सवा लाख से ज्यादा आवारा श्वान नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार भोपाल में आवारा श्वानों की संख्या सवा लाख से अधिक है। इसके मुकाबले हर साल केवल 20 से 25 हजार श्वानों की ही नसबंदी हो पाती है। वर्ष 2024-25 में निगम ने 21,452 श्वानों की नसबंदी और 26,427 श्वानों का एंटी-रेबीज टीकाकरण किया, जिस पर करीब 2.35 करोड़ रुपये खर्च हुए। वहीं वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 23,363 श्वानों की नसबंदी और 29,766 श्वानों का टीकाकरण किया जा चुका है। इस पर 2.56 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। इसके बावजूद शहर में श्वानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हिंसक और संक्रमित श्वानों पर नियंत्रण की कार्रवाई तेज होने की संभावना जताई जा रही है। इन इलाकों में ज्यादा खतरा अशोका गार्डन, अयोध्या बायपास, पिपलानी, कोहेफिजा, शाहजहांनाबाद, करोंद, मीनाल रेसीडेंसी, पटेल नगर, छोला, बैरागढ़, लालघाटी-हलालपुर रोड, रेलवे स्टेशन, आईएसबीटी और न्यू मार्केट के आसपास रात में कुत्तों के झुंड सबसे ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। कई जगह फुटपाथों पर कुत्तों के डेरों के कारण पैदल निकलना मुश्किल हो रहा है। 600 कुत्तों की क्षमता, डॉग सवा लाख जानकारी के अनुसार नगर निगम के पास फिलहाल अरवलिया, आदमपुर छावनी और कजलीखेड़ा में तीन एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर हैं। तीनों की कुल क्षमता सिर्फ 600 कुत्तों की है। यहां रोज 20 से 25 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण हो रहा है। ये सेंटर केवल नसबंदी के लिए हैं, जबकि कोर्ट के निर्देश के मुताबिक स्थायी डॉग शेल्टर एक भी नहीं है। अब तक इतनी नसबंदी पिछले 5 साल में नगर निगम ने नसबंदी और टीकाकरण पर 8.56 करोड़ रुपए खर्च किए। इस दौरान 81,207 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का दावा किया गया, लेकिन शहर में डॉग बाइट और आवारा कुत्तों की शिकायतें लगातार बढ़ती रहीं। इंदौर में अप्रैल में हर दिन 146 केस इंदौर में अप्रैल के 24 दिनों (24 अप्रैल तक) में डॉग बाइट के 3493 मामले सामने आए हैं। यानी औसतन करीब 146 केस प्रतिदिन दर्ज किए गए हैं। जनवरी में 5198, मार्च में 5109 मामले आए थे। वहीं दिसंबर में 5471 केस थे। शहर में तीन एबीसी सेंटर संचालित फिलहाल भोपाल में कजलीखेड़ा, अरवलिया गोशाला के पीछे और आदमपुर कचरा खंती क्षेत्र में एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। प्रत्येक सेंटर की क्षमता करीब 150 श्वानों की है। नगर निगम की टीमें रोजाना शहर के अलग-अलग इलाकों से 50 से 65 आवारा श्वानों को पकड़कर नसबंदी और उपचार के लिए इन केंद्रों तक पहुंचा रही हैं। एमपी में डॉग बाइट के इतने आंकड़े पूरे मध्यप्रदेश में कुत्तों के काटने का खतरा बना रहता है। कई इलाके ऐसे हैं, जहां कुत्तों के डर से बच्चे घरों के बाहर खेलने तक नहीं जाते। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के 2024 के आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश में 10.09 लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। इनमें से 6 लाख से अधिक बड़े शहरों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में हैं। 9 लोगों की रेबीज से मौत भी हुई केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 से जनवरी 2025 तक प्रदेश में करीब 3.39 लाख डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं। इनमें 2022 में 66,018, 2023 में 1,13,499, 2024 में 1,42,948 और 2025 (जनवरी) में 16,710 मामले दर्ज हुए। इसी अवधि में कम से कम 9 लोगों की रेबीज से मौत भी हुई है। देशभर के आंकड़ों से तुलना करें तो मध्यप्रदेश डॉग बाइट मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल है, जहां हर साल मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। 2022 में जहां करीब 21.89 लाख मामले देशभर में थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 37.15 लाख से अधिक हो गई। गर्मी में क्यों बढ़ते हैं कुत्तों के हमले पशु चिकित्सक एसआर नागर के मुताबिक गर्मी का मौसम कुत्तों के व्यवहार को आक्रामक बना देता है। कुत्तों के शरीर में स्वेट ग्लैंड (पसीना निकालने वाले छिद्र) नहीं होते, इसलिए वे इंसानों की तरह शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाते। इस वजह से उनमें चिड़चिड़ापन और आक्रामकता बढ़ जाती है। अगर उन्हें खाने-पीने की कमी हो या किसी तरह का खतरा महसूस हो, तो वे तुरंत हमला कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल से जून के बीच तापमान बढ़ने के साथ डॉग बाइट के मामलों में और तेजी आ सकती है। इस दौरान कुत्तों के खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें पर्याप्त पानी देना और तेज धूप से बचाना … Read more

सीधी के डायल-112 हीरोज दादा से बिछड़कर रास्ता भटके मासूम को सुरक्षित परिजन से मिलाया

भोपाल  सीधी जिले के थाना जमोड़ी क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता और तत्पर कार्यवाही से दादा से बिछड़कर घर की राह भटके 06 वर्षीय मासूम को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय रहते की गई मदद से परिजनों की चिंता दूर हुई और मासूम सकुशल अपने परिवार तक पहुँच सका। 21 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना जमोड़ी क्षेत्र अंतर्गत तेंदुआ तिराहा के पास एक छोटा बालक अकेला मिला है, जो अपने घर का रास्ता भटक गया है। सूचना मिलते ही तत्काल जमोड़ी थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक  राजू यादव एवं पायलट  मनीष सिंह बघेल ने मौके पर पहुंचकर बालक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। डायल-112 जवानों ने बालक से बातचीत कर जानकारी प्राप्त की, जिस पर बालक ने बताया कि वह अपने दादा जी के साथ घर से निकला था, लेकिन भीड़ में उनका साथ छूट जाने से रास्ता भटक गया। बालक द्वारा बताए गए गाँव एवं पिता के नाम के आधार पर डायल-112 जवानों ने तत्काल संबंधित क्षेत्र में संपर्क कर परिजनों की जानकारी प्राप्त की और उन्हें थाने बुलाया। डायल-112 टीम द्वारा आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत बालक को परिजनों के सुपुर्द किया। अपने बच्चे को सकुशल पाकर परिजनों ने डायल-112 सेवा एवं पुलिस जवानों का आभार व्यक्त किया। डायल112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बच्चों और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।।  

एमपीपीएससी परीक्षाओं के संचालन के प्रारूप नियमों पर 5 जून तक सुझाव आमंत्रित

भोपाल  राज्य शासन ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं को संचालित करने के लिये नवीन प्रारूप नियमों को तैयार किया है और इन्हें लागू करने से पहले 5 जून 2026 तक सुझाव आमंत्रित किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव श्री अजय कटेसरिया ने बताया कि राज्य शासन द्वारा "मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग परीक्षा नियम 2026" अधिसूचित किया जाना प्रस्तावित है। प्रस्तावित नियमों के प्रारूप विभाग की वेबसाइट gad.mp.gov.in पर उपलब्ध है। प्रस्तावित नियमों के संबंध में यदि किसी व्यक्ति, संस्था या हितधारक को कोई आपत्ति या सुझाव देना हो तो वे 5 जून 2026 तक लिखित रूप में अपने सुझाव ई-मेल sogad1@mp.gov.in पर प्रेषित कर सकते हैं। साथ ही सुझाव gad.mp.gov.in पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से भी विभाग को दिए जा सकते है। निर्धारित समयावधि के बाद प्राप्त होने वाले सुझावों पर विचार नही किया जाएगा।  

एमपी ट्रांसको ने भिंड में ऊर्जीकृत किया अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर भिंड जिले की पारेषण क्षमता में हुई वृद्धि – मंत्री तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्य प्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी ने 132 केवी सब स्टेशन भिंड की क्षमता वृद्धि करते हुए 50 एमवीए क्षमता का एक अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जीकृत किया है।इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से सब स्टेशन की ट्रांसफार्मेशन कैपेसिटी बढ़कर 153 एम वी ए की हो गई है। इस सब स्टेशन में यह तीसरा ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जीकृत किया गया है, इससे सब स्टेशन में बढ़ते लोड का उचित प्रबंधन किया जा सकेगा। एमपी ट्रांसको भिंड जिले में अपने 8 सब स्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण का कार्य करती है, जिसमें 132 केवी सबस्टेशन भिंड के अलावा 220 केवी सब स्टेशन मालनपुर, 220 केवी सबस्टेशन मेहगांव एवं 132 केवी सब स्टेशन लाहर, प्रतापपुरा, रान, गोहद एवं गोरमी शामिल है। इस ट्रांसफार्मर के स्थापित होने से भिंड जिले की ट्रांसफारमेशन केपैसिटी बढ़कर 1619 एम वी ए की हो गई।  

ग्राम कुशहा की चौपाल में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुनी ग्रामीणों की समस्याएं

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के तहत कोरिया जिले के सोनहत ब्लॉक के ग्राम कुशहा में आकस्मिक प्रवास के दौरान ग्रामीणों से आत्मीय संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। आम और पीपल के पेड़ों की छांव में आयोजित चौपाल में मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए स्थानीय फल तेंदू, सतालू, चार और लीची का स्वाद लिया तथा ग्रामीण संस्कृति और परंपराओं की सराहना की। मुख्यमंत्री  साय ने ग्रामीणों से बिजली, पानी, शिक्षा, राशन, आवास और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि 1 मई से 10 जून तक प्रदेशभर में सुशासन तिहार के अंतर्गत क्लस्टरवार जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहां अधिकारियों द्वारा समस्याओं का मौके पर समाधान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं का तत्काल समाधान संभव नहीं है, उनका निराकरण एक माह के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। ग्रामीणों ने पेयजल और मोबाइल नेटवर्क की समस्या से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। इस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए तथा जल्द ही मोबाइल टॉवर स्थापना की दिशा में पहल करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर एवं स्टाफ की उपलब्धता, प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना तथा राशन वितरण व्यवस्था की जानकारी भी ग्रामीणों से प्राप्त की। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें समय पर राशन और तेंदूपत्ता बिक्री का पारिश्रमिक मिल रहा है। चौपाल में ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क एवं पुलिया निर्माण तथा गांव में हायर सेकेंडरी स्कूल खोलने की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने सभी मांगों के समाधान का भरोसा दिलाया। इस अवसर पर विधायक  भईया लाल राजवाड़े, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव  रजत बंसल, कलेक्टर मती रोक्तिमा यादव, पुलिस अधीक्षक  रवि कुमार कुर्रे सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।