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ग्रामीणों तक पहुंचीं शासकीय योजनाएं, शिविर में ही हुआ समस्याओं का समाधान

रायपुर सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत एर्राबोर में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ शिविर ग्रामीणों के लिए राहत और खुशियों का केंद्र बन गया। कलेक्टर  अमित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त किया। शिविर का उद्देश्य शासन की योजनाओं और सेवाओं को सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाना था। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर उपस्थित रहकर लोगों की समस्याएं सुनीं और त्वरित समाधान की प्रक्रिया शुरू की। शिविर में विद्यार्थियों को जाति प्रमाण पत्र वितरित किए गए। वहीं गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और 6 माह के बच्चों का अन्नप्राशन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इससे कार्यक्रम में सामाजिक और मानवीय जुड़ाव का वातावरण देखने को मिला। ग्रामीणों की सुविधा के लिए शिविर में राशन कार्ड ई-केवाईसी, महतारी वंदन योजना ई-केवाईसी, नया आधार कार्ड पंजीयन एवं अपडेट, बी-1 और किसान किताब वितरण तथा एग्री स्टेक पंजीयन जैसी जरूरी सेवाएं भी मौके पर उपलब्ध कराई गईं। शिविर के दौरान विभिन्न विभागों को कुल 250 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें पंचायत विभाग के 165, कृषि विभाग के 22, विद्युत विभाग के 14 तथा राजस्व और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के 11-11 आवेदन शामिल रहे। सभी आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। कार्यक्रम में स्थानीय सरपंच मती लक्ष्मी कट्टम, पूर्व सरपंच, पंचगण, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सुशासन तिहार के माध्यम से प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास और सहभागिता को नई मजबूती मिली है।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, उम्रदराज और कम पढ़े-लिखे होने पर नंबरदार को नहीं हटाया जा सकता

चंडीगढ़  पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पटियाला जिले के एक गांव में पिछले 10 वर्षों से कार्यरत 7वीं पास नंबरदार (गांव के मुखिया) की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस हर्ष बुंगर की पीठ ने स्पष्ट किया कि पंजाब भूमि राजस्व नियमों के तहत नंबरदार के लिए कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय नहीं है, इसलिए केवल कम पढ़े-लिखे होने के आधार पर किसी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने बदलते दौर में नंबरदार की जिम्मेदारियों को देखते हुए पंजाब सरकार से नियमों में संशोधन कर न्यूनतम योग्यता 'मैट्रिक' (10वीं) तय करने पर विचार करने का अनुरोध किया है। योग्यता और उम्र की तुलना पर कोर्ट का रुख याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि वह 12वीं पास है और वर्तमान नंबरदार से अधिक युवा व शिक्षित है, इसलिए वह इस पद के लिए बेहतर विकल्प है। इस पर जस्टिस हर्ष बुंगर ने कहा कि जब नियमों में कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित ही नहीं है, तो केवल कम शैक्षणिक योग्यता के आधार पर चुने गए उम्मीदवार को अयोग्य नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने उम्र के तर्क को भी खारिज करते हुए कहा कि आयु का महत्व केवल व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और कर्तव्यों के निर्वहन के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया है जिससे यह साबित हो कि वर्तमान नंबरदार अपनी उम्र के कारण काम करने में असमर्थ हैं। इसके अलावा, पिछले 10 वर्षों से उनकी कार्यकुशलता को लेकर कोई शिकायत भी दर्ज नहीं है। पड़ोसी राज्य हरियाणा का दिया हवाला सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की कि नंबरदार के कर्तव्यों को देखते हुए यह बेहद जरूरी है कि उस व्यक्ति को पंजाबी, हिंदी और अंग्रेजी भाषा की बुनियादी समझ हो। उन्होंने पड़ोसी राज्य हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नंबरदार के पद के लिए न्यूनतम योग्यता 'मिडिल पास' (8वीं) तय है, जबकि पंजाब में ऐसा कोई नियम नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा  " यह अदालत इस विचार पर है कि एक नंबरदार द्वारा निभाए जाने वाले कर्तव्यों की प्रकृति को देखते हुए यह वांछनीय होगा कि ऐसे व्यक्ति के पास कम से कम मैट्रिक स्तर की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता हो।" अदालत ने इस आदेश की प्रति राज्य के वकील को भेजने का निर्देश दिया है ताकि इसे संबंधित उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जा सके और पंजाब सरकार इस पद के लिए नियम पुस्तिका में बदलाव करने पर गंभीरता से विचार कर सके।

स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 से पहले भोपाल अलर्ट मोड पर, 40 जगहों पर बनीं आकर्षक स्वच्छता पेंटिंग्स

भोपाल भोपाल में स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए टीम अगले 2 दिन के अंदर आ सकती है। टीम के आने से पहले नगर निगम वह सभी कवायदें कर रहा है, जो उसे बेहतर अंक दिला सके। सोमवार को जोन-9 के पंजाबी बाग में एक गली में समुद्र की आकृति की उकेर दी गई। दूसरी ओर, लोगों को बेहतर फीडबैक के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है। हालांकि, इस बार भोपाल को कागजों के साथ जमीन पर भी सफाई साबित करनी होगी। 85 वार्ड, 40 स्कूल और हर कोना होगा स्कैन इस बार सर्वेक्षण टीम का दायरा पहले से कहीं बड़ा है। टीम भोपाल के सभी 85 वार्डों में जाएगी और सफाई व्यवस्था का ग्राउंड लेवल पर निरीक्षण करेगी। इसके अलावा लगभग 40 स्कूलों में भी स्वच्छता की स्थिति जांची जाएगी। बच्चों के आसपास का वातावरण, कचरा प्रबंधन और जागरूकता स्तर भी रैंकिंग का हिस्सा होगा। नगर निगम ने दिए सख्त निर्देश स्वच्छ सर्वेक्षण को देखते हुए नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कचरा ट्रांसफर स्टेशनों की स्थिति सुधारने और मिश्रित कचरा संग्रहण पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। निगम प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे गीला और सूखा कचरा अलग-अलग दें, ताकि शहर को स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग मिल सके। शहर को चमकाने की कोशिश जारी  नगर निगम ने शहर को आकर्षक दिखाने के लिए कई जगहों पर पेंटिंग, 3D आर्ट और स्क्रैप से बनी कलाकृतियां लगाई हैं। लगभग 60 हजार वर्गफीट क्षेत्र को इस तरह सजाया गया है।  इसी वजह से सड़कों की सफाई, नालों की सफाई, सार्वजनिक शौचालयों की सफाई, बैक लेन में पेंटिंग और बाजारों में टाइल्स लगाने का काम शुरू किया गया है। न्यू मार्केट, 10 नंबर मार्केट, पुराना शहर, करोंद, कोलार, बैरागढ़ जैसे बड़े बाजारों में सौंदर्यीकरण और कचरा उठाने के काम को प्राथमिकता दी जा रही है। ये बड़ी चुनौती हालांकि, जमीन पर अब भी कई जगह गंदगी, टूटे डस्टबिन, उखड़ी सड़कें और खुले नाले जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में विजिबल क्लीनलीनेस के लिए तय 1500 अंक भोपाल के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। स्वच्छता रैंकिंग कैसे तय होगी? इस बार सिस्टम पूरी तरह डेटा और ग्राउंड रियलिटी पर आधारित है। रैंकिंग ऑन-ग्राउंड असेसमेंट, सिटीजन फीडबैक, विजिबल क्लीनलीनेस (1500 अंक), ODF/ODF++ और वॉटर प्लस (1000 अंक) और गारबेज फ्री सिटी रेटिंग (1000 अंक) जैसे पैरामीटर्स पर तय होगी। बाजारों में सबसे बड़ी चुनौती  भोपाल के न्यू मार्केट, 10 नंबर मार्केट, पुराना शहर, कोलार, करोंद और बैरागढ़ जैसे बड़े बाजारों में भी सफाई एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। नियम के अनुसार रिहायशी इलाकों में रोज एक बार सफाई, बाजार और स्टेशन और फूड जोन में दिन में दो बार सफाई जरूरी है, लेकिन कई जगह यह सिस्टम अभी भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। बैक लेन और गलियों पर खास फोकस शहर की बैक लेन यानी पीछे की गलियां भी इस बार स्कोरिंग का बड़ा हिस्सा हैं। यहां सफाई और रखरखाव के लिए 200 अंक तय किए गए हैं। कई जगहों पर इन गलियों में रंगीन पेंटिंग और सफाई अभियान चल रहे हैं, लेकिन स्थायी सुधार अभी बाकी है। दीवारें साफ, लेकिन नीचे कचरा 150 अंकों वाले इस पैरामीटर में सार्वजनिक जगहों को साफ रखना जरूरी है खासतौर पर पान-गुटखे के निशान और खुले में गंदगी से मुक्त रखना। लेकिन हकीकत यह है कि कई जगह बैरिकेड्स और दीवारें खुद अनचाही गंदगी पॉइंट बन चुकी हैं। 3 करोड़ की पेंटिंग का काम  शहर में वॉल पेंटिंग, म्यूरल्स और आर्टवर्क पर करीब 3 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके साथ गड्ढामुक्त सड़क और ग्रीनरी बढ़ाने की कोशिश भी हो रही है। शहर में कुछ जोन में सफाई पूरी हो चुकी है। भानपुर में 50 करोड़ रुपए की लागत से एसटीपी प्रोजेक्ट भी चल रहा है, जो भविष्य की दिशा तय करेगा। आदमपुर कचरा खंती- बड़ी चुनौती भोपाल के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द आदमपुर कचरा खंती है। यहां जमा पुराना कचरा (legacy waste) आज भी वैसा ही है। कचरे का पहाड़, गंदा पानी का रिसाव और बार-बार आग लगने की घटनाएं। यह सब मिलकर शहर की रैंकिंग को हर साल नीचे खींचते हैं। अंतिम दौर में इन कामों पर फोकस जानकारी के अनुसार, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में विजिबल क्लीनलीनेस यानी जमीन पर दिखने वाली सफाई पर विशेष फोकस किया है। नई गाइडलाइंस के तहत शहरों की रैंकिंग 10 मुख्य इंडिकेटर्स के आधार पर तय होगी। इसी वजह से निगम बैक लेन से लेकर नालों और कचरा पॉइंट तक सुधार कार्यों में जुटा है। सोमवार को पंजाबी बाग की बैक लेन का काम पूरा किया गया। मंगलवार को भी कई जगहों पर पेंटिंग को अंतिम रूप दिया जाएगा। ऐसे तय होगी रैंकिंग     ऑन-ग्राउंड असेसमेंट और 10,500     सिटीजन फीडबैक     विजिबल क्लीनलीनेस 1,500     ODF/ODF++/वाटर प्लस 1,000     कचरा मुक्त शहर स्टार रेटिंग 1,000 ये कारण- सर्वेक्षण और चुनौती बाजारों में कचरा बड़ी चुनौती आवासीय क्षेत्रों और पार्कों में रोज एक बार, जबकि व्यावसायिक स्थलों, बस-रेलवे स्टेशनों, पर्यटन स्थलों और स्ट्रीट फूड जोन में दिन में दो बार सफाई जरूरी होगी। इस पैरामीटर के लिए सबसे ज्यादा 300 अंक हैं। कई मार्केट में अब भी कचरा और गंदगी बड़ी समस्या बनी हुई है। गंदगी पर कट सकते हैं नंबर घरों और दुकानों के पीछे की गलियों यानी बैक लेन की सफाई और रखरखाव के लिए 200 अंक तय हैं। शहर के कई इलाकों में बैक लेन में रंगीन पेंटिंग और सफाई अभियान जारी है। बैरिकेड्स बिगाड़ रहे सफाई स्कोर सार्वजनिक स्थलों और दीवारों को पान-गुटखे के धब्बों और खुले में पेशाब के निशानों से मुक्त रखने पर 150 अंक मिलेंगे। निर्माण कार्यों के दौरान लगाए गए बैरिकेड्स पीकदान बन चुके हैं। निगम ने एजेंसियों को इन्हें साफ करने की चेतावनी दी है, लेकिन हालात नहीं सुधरे हैं।

वैश्विक तनाव का पंजाब पर असर, कच्चा माल महंगा होने से अमृतसर में ठप पड़ रही मशरूम खेती

अमृतसर  ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज में बाधा का असर अब पंजाब के मशरूम उद्योग पर भी साफ दिखने लगा है। हर वर्ष मई में शुरू होने वाली मिल्की मशरूम की खेती इस बार संकट में है। उर्वरक, कंपोस्ट और ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से अधिकांश उत्पादकों ने खेती शुरू ही नहीं की। हालात यह हैं कि अमृतसर जिले के जंडियाला गुरु, मानांवाला, वेरका और अजनाला जैसे प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में केवल 20 प्रतिशत किसानों ने ही इस बार मशरूम उत्पादन का जोखिम उठाया है। मशरूम उत्पादक जागीर सिंह का कहना है कि युद्ध जैसे हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। इसका सीधा असर नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों, कंपोस्ट और परिवहन लागत पर पड़ा है। उर्वरक एवं कंपोस्ट के दाम तीन गुना तक बढ़े पिछले कुछ सप्ताह में उर्वरक एवं कंपोस्ट के दाम तीन गुना तक बढ़ चुके हैं। जिन किसानों को पहले एक ट्राली कंपोस्ट 12 से 15 हजार रुपये में मिल जाती थी, उन्हें अब इसके लिए 35 से 40 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। उधर, जंडियाला गुरु के मशरूम उत्पादक सरबजीत सिंह का कहना है कि मिल्की मशरूम की खेती नियंत्रित वातावरण पर निर्भर करती है। इसमें तापमान, नमी और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए लगातार बिजली की आवश्यकता होती है, लेकिन डीजल और बिजली की लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च अत्यधिक बढ़ गया है। उस पर प्लास्टिक पैकेजिंग और परिवहन भी महंगा हो चुका है। ऐसे में छोटे उत्पादकों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो गया है। होर्मुज मार्ग प्रभावित होने से मानांवाला क्षेत्र में उर्वरकों की सप्लाई प्रभावित हुई है। कई कंपनियों ने समय पर माल पहुंचाने में असमर्थता जताई है, जबकि कुछ ने सीधे दाम बढ़ा दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि हालात सामान्य नहीं हुए तो आने वाले महीनों में मशरूम उत्पादन और घट सकता है। उल्लेखनीय है कि अमृतसर से उत्पादित मशरूम देश सहित विदेश में भी भेजा जाता है। अमृतसर का जलवायु मशरूम उत्पादन के लिए अनुकूल है। यही कारण है कि अमृतसर स्थित खालसा कालेज में मशरूम उत्पादन के लिए एक वर्षीय डिप्लोमा भी शुरू किया गया है। मांग के मुकाबले उत्पादन बेहद कम रहेगा इस बार इस बार मांग के मुकाबले उत्पादन कम होगा। पंजाब में होटल इंडस्ट्री, रेस्टोरेंट, फास्ट फूड कारोबार और घरों में मशरूम की मांग अधिक है। वेजीटेरियन लोगों के लिए मशरूम पहली पसंद है। खासकर मिल्की व बटन मशरूम की मांग गर्मियों में अधिक रहती है। लेकिन इस बार उत्पादन कम होने से बाजार में भारी कमी देखने को मिल रही है। आने वाले दिनों में मशरूम के दाम में 30 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। पहले स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उत्पादन होने से आपूर्ति सामान्य बनी रहती थी, लेकिन इस बार कई यूनिट बंद पड़े हैं। जिन किसानों ने उत्पादन शुरू भी किया है, वे सीमित मात्रा में मशरूम तैयार कर रहे हैं ताकि नुकसान का जोखिम कम रहे। मशरूम उद्योग पूरी तरह आयात आधारित कच्चे माल पर निर्भर नहीं है, लेकिन उर्वरक, रसायन और ईंधन की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का सीधा असर इसकी लागत पर पड़ता है। निकट भविष्य में उपभोक्ताओं को महंगे मशरूम खरीदने पड़ सकते हैं। होटल और कैटरिंग व्यवसाय में यदि आपूर्ति कम रही तो मेन्यू की लागत बढ़ाना मजबूरी बन जाएगी। वास्तविक स्थिति यह है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब आम लोगों की थाली तक पहुंचने लगा है। कभी सस्ती और पौष्टिक मानी जाने वाली मशरूम जल्द ही उपभोक्ता की पहुंच से दूर होने की संभावना है।  

आज दवा संकट नहीं! हड़ताल के बावजूद इन जगहों पर खुली रहेंगी मेडिकल सुविधाएं और दवा दुकानें

भोपाल  मध्य प्रदेश में आज  यानी 20 मई को दवा दुकानों की हड़ताल रहेगी। भोपाल में 3 हजार से ज्यादा मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में यह बंद बुलाया है। भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ ने बताया कि जिले के सभी रिटेल और थोक दवा व्यवसायी इस बंद का समर्थन करेंगे और 20 मई को अपनी दुकानें बंद रखेंगे। एसोसिएशन का कहना है कि यह मुद्दा सीधे आम लोगों की सेहत से जुड़ा है। घर-घर पहुंच रही ऑनलाइन दवाओं की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर अभी स्पष्ट सिस्टम नहीं है, जो गंभीर चिंता का विषय है। अस्पतालों के मेडिकल बंद से मुक्त एसोसिएशन के अध्यक्ष धाकड़ ने बताया कि ऑनलाइन दवा व्यापार की आड़ में नकली, एक्सपायरी एवं गलत दवाओं के वितरण की संभावनाएं बढ़ रही हैं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। उन्होंने भोपाल की जनता से इस बंद के कारण होने वाली असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है तथा नागरिकों से अपील की है कि वे 20 मई से पूर्व ही अपनी नियमित उपयोग की आवश्यक दवाओं का संग्रह कर लें। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स को इस बंद से मुक्त रखा गया है, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट व ड्रगिस्ट और मध्य प्रदेश केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर सभी प्राइवेट मेडिकल दुकानें  आज बंद रहेंगी । हड़ताल की वजह से मरीजों को जरूरी दवाइयों के लिए परेशान होना पड़ सकता है, ऐसे में एक दिन पहले पर्याप्त डोज लेकर रख सकते हैं। दवा बाजार की हड़ताल में यहां मिलेगी दवाइयां इस हड़ताल में इमरजेंसी के लिए प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों की मेडिकल खुली रहेंगी। प्रदेशभर में संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर भी दवाइयां मिलेंगी। जयारोग्य अस्पताल, जिला अस्पताल, प्राइवेट अस्पतालों की मेडिकल दुकानों को हड़ताल से दूर रखा गया है। देशभर में ऑनलाइन और ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स पर दवा बिक्री के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स ने 20 मई को देशव्यापी बंद का ऐलान किया है। संगठन का दावा है कि इस दौरान दिल्ली में करीब 15 हजार और देशभर में लगभग 7 से 8 लाख मेडिकल स्टोर बंद रह सकते हैं। हालांकि, आपातकालीन दवा सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है। कारोबार हो रहा प्रभावित केंद्रीय औषधि मानक संगठन नियंत्रण (CDSCO) के सूत्रों का कहना है कि कई राज्य स्तरीय रिटेल फार्मेसी एसोसिएशनों ने इस हड़ताल से दूरी बना ली है और दवाओं की उपलब्धता सामान्य बनाए रखने का भरोसा दिया है। दिल्ली रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन केमिस्ट अलायंस (RDCA) के अध्यक्ष संदीप नांगिया ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी छूट और तेज डिलीवरी देकर छोटे मेडिकल स्टोर्स के कारोबार को प्रभावित कर रहे हैं। दवा दुकानों की हड़ताल से कौन-कौन बाहर? हालांकि, सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि इस हड़ताल का असर सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि कई राज्य स्तरीय फार्मेसी एसोसिएशनों ने इसका समर्थन नहीं किया है. सूत्रों के मुताबिक, सभी बड़े फार्मेसी चेन, अस्पतालों के मेडिकल स्टोर, जन औषधि केंद्र और AMRIT फार्मेसी स्टोर मंगलवार को खुले रहेंगे।  सूत्रों ने बताया कि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, केरल, छत्तीसगढ़, सिक्किम और लद्दाख समेत कई राज्यों के फार्मेसी संगठनों ने लिखित रूप से भरोसा दिया है कि वे हड़ताल में शामिल नहीं होंगे और दवाओं की सप्लाई सामान्य बनी रहेगी।  ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर बिक रही नकली दवाएं कोरोना काल में अधिसूचना जीआरएस 220 ई के जरिए नियमों को दरकिनार किया जा रहा है, जिसे तुरंत वापस ली जाए। अवैध रूप से ई-कॉर्पोरेट्स द्वारा बाजार में कब्जा किया जा रहा है। यह मूल्य निर्धारण में मनमानी कर रहे हैं, जिसे रोका जाना चाहिए। ऑनलाइन फार्मेसियों और प्लेटफार्मों पर मिलावटी या नकली दवाएं बेची जा रही हैं। इन्होंने हड़ताल से बनाई दूरी कई केमिस्ट असोसिएशन की ओर से 20 मई को प्रस्तावित भारत बंद और हड़ताल को लेकर दवा कारोबारियों के संगठन ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन (AICDF) ने खुद को इससे अलग कर लिया है। संगठन ने कहा कि इस बंद का समर्थन नहीं करेंगे। दावा है कि इससे अव्यवस्था बढ़ेगी और व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ेगा। AICDF के अध्यक्ष कैलाश गुप्ता ने बताया कि बंद बुलाने वाले ने संगठनों का उद्देश्य व्यापारियों के हितों की रक्षा से ज्यादा बाजार में दबाव बनाना प्रतीत होता है।  

गोबरानवापारा में रेत के अवैध उत्खनन-भण्डारण पर खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई, 2 पोकलेन जब्त-सील

रायपुर कलेक्टर डॉ गौरव सिंह के आदेशानुसार तथा उप-संचालक (खनिज प्रशासन) श्री राजेश मालवे के नेतृत्व में खनिज विभाग के अमले द्वारा 18 एवं 19 मई 2026 को गोबरानवापारा क्षेत्र में रेत के अवैध उत्खनन एवं अवैध भण्डारण के विरुद्ध सघन जांच अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई की गई। सहायक खनि अधिकारी, खनि निरीक्षक एवं खनिज अमले द्वारा की गई जांच में ग्राम लखना रेत खदान में स्वीकृत क्षेत्र के बाहर तथा पर्यावरणीय शर्तों का उल्लंघन कर 02 चेन माउंटेड पोकलेन मशीनों से रेत का अवैध उत्खनन किया जाना पाया गया। कार्रवाई करते हुए दोनों पोकलेन मशीनों को मौके पर ही जब्त कर सीलबंद किया गया तथा अवैध उत्खनन कार्य तत्काल बंद कराया गया। इसी क्रम में तहसील गोबरानवापारा के ग्राम नवागांव, जौंदा, जौंदी तथा डगनिया में महानदी से रेत लाकर श्री अनिल कुमार साहू, श्री गोविंद साहू, श्री ईश्वर पटेल, श्री प्रताप सेन, श्री त्रिलोकी साहू, श्री अजय साहू तथा श्री मनीष ठाकुर द्वारा बिना वैध अनुमति के रेत का अवैध भण्डारण किया जाना पाया गया। खनिज विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 के प्रावधानों के तहत संपूर्ण अवैध रेत को जब्त कर लिया गया है एवं संबंधित अवैध भण्डारणकर्ताओं को जवाब-तलब हेतु नोटिस जारी किया गया है। उप-संचालक खनिज श्री राजेश मालवे ने बताया कि जिले में खनिज रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भण्डारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए खनिज अमले द्वारा उक्त क्षेत्रों में लगातार गश्त कर सतत कार्रवाई की जा रही है। अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

‘एक जनपद एक व्यंजन’ से वैश्विक पहचान की ओर बढ़ेगा उत्तर प्रदेश का पारंपरिक स्वाद

लखनऊ योगी सरकार अब प्रदेश की समृद्ध पाक परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाने जा रही है। “एक जनपद एक व्यंजन” (ओडीओसी) योजना के माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक जिले के विशिष्ट पारंपरिक व्यंजनों का चिन्हांकन कर उन्हें संगठित, सुरक्षित, ब्रांडेड और बाजारोन्मुख बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल स्वाद और परंपरा को संरक्षित करना ही नहीं, बल्कि स्थानीय उद्यमिता, रोजगार और निर्यात को भी बढ़ावा देना है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में योगी कैबिनेट ने योजना को स्वीकृति दी है।  तैयार किए जाएंगे "स्टैंडर्ड रेसिपी मैन्युअल” योजना के तहत जिलाधिकारियों, संबंधित विभागों, प्रतिष्ठित संस्थानों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और जिला उद्योग केंद्रों से प्राप्त सुझावों के आधार पर जनपदवार व्यंजनों की पहचान की गई है। सरकार इन व्यंजनों को आधुनिक मानकों के अनुरूप विकसित कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है। पारंपरिक व्यंजनों की गुणवत्ता, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (CFTRI) और राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से जनपदवार और व्यंजनवार “स्टैंडर्ड रेसिपी मैन्युअल” तैयार किए जाएंगे। इससे व्यंजनों का स्वाद और गुणवत्ता एक समान बनी रहेगी तथा उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। साथ ही इन व्यंजनों के नए वैरिएंट विकसित करने पर भी विशेष बल दिया जाएगा। स्मार्ट पैकेजिंग, इको-फ्रेंडली पैक, क्यूआर कोड, बारकोड और न्यूट्रीशन लेबलिंग जैसी सुविधाएं योगी सरकार व्यंजनों को एक्सपोर्ट रेडी बनाने के लिए आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी फोकस कर रही है। भारतीय पैकेजिंग संस्थान (IIP) जैसे संस्थानों के सहयोग से स्मार्ट पैकेजिंग, इको-फ्रेंडली पैक, क्यूआर कोड, बारकोड और न्यूट्रीशन लेबलिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता और पोषण संबंधी पूरी जानकारी मिल सकेगी तथा प्रदेश के पारंपरिक व्यंजन बड़े बाजारों तक पहुंच पाएंगे। योजना के तहत स्थानीय उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। पैकेजिंग, डिजाइनिंग, गुणवत्ता सुधार और फूड प्रोसेसिंग के लिए प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से नि:शुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इससे ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा पारंपरिक व्यंजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देंगे। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड निर्माण योगी सरकार “एक जनपद एक व्यंजन” की अवधारणा का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड निर्माण भी करेगी। प्रदेश के प्रमुख आयोजनों में “स्वाद यूपी का” थीम के अंतर्गत व्यंजनों की विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी। साथ ही लघु फिल्मों, डिजिटल प्रचार और ब्रांडिंग अभियानों के माध्यम से लोगों को उत्तर प्रदेश के पारंपरिक स्वाद से जोड़ने की रणनीति तैयार की जा रही है। योगी सरकार की यह पहल केवल खानपान तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन, रोजगार और निर्यात से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि “एक जनपद एक व्यंजन” योजना आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के पारंपरिक स्वाद को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

लगभग 200 सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी विश्लेषण एवं 150 पुलिसकर्मियों की सतत मेहनत से मिली कामयाबी

भोपाल पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के निर्देशानुसार मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा राज्य में गुम एवं अपहृत बालक-बालिकाओं की शीघ्र दस्तयाबीहेतु सघन और सतत अभियान निरंतर चलाया जा रहा है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में 02 वर्षीय अपहृत बालिका को मात्र 36 घंटे के भीतर झारखंड राज्य से सकुशल दस्तयाब कर सिंगरौली पुलिस ने संवेदनशीलता, तत्परता एवं तकनीकी दक्षता का उत्कृष्ट परिचय दिया है। पुलिस की त्वरित एवं समन्वित कार्यवाही से बालिका को सुरक्षित उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया, जिससे परिवार के साथ-साथ आमजन में भी पुलिस के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। प्रकरण में थाना बैढ़न में 16 मईको फरियादी द्वारा सूचना दर्ज कराई गई थी कि वह अपनी 02 वर्षीय पुत्री के साथ बस स्टैण्ड बैढ़न में सोया हुआ था। देर रात नींद खुलने पर उसकी पुत्री वहां नहीं मिली। आसपास काफी तलाश करने के बाद भी बच्ची का पता नहीं चलने पर अज्ञात व्यक्ति द्वारा बहला-फुसलाकर ले जाने की आशंका व्यक्त की गई। सूचना पर थाना बैढ़न में प्रकरण पंजीबद्ध कर तत्काल जांच प्रारंभ की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सिंगरौली  षियाज के.एम. के निर्देशन में विशेष एसआईटी गठित की गई। उप पुलिस अधीक्षक सु रोशनी पटेल सहित थाना एवं चौकी प्रभारियों के नेतृत्व में लगभग 150 पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों की 10 विशेष टीमों को बालिका की तलाश में लगाया गया। पुलिस अधीक्षक द्वारा अपहृता एवं आरोपी की जानकारी देने पर 10हजार रूपएके ईनाम की घोषणा भी की गई। अपहृत बालिका की तलाश हेतु जिले सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों एवं सीमावर्ती राज्यों के पुलिस थानों को रेडियो संदेश प्रसारित किए गए। बैढ़न, विंध्यनगर, मोरवा, बरगवां एवं माड़ा क्षेत्र में रेलवे स्टेशन, बस स्टैण्ड, अस्पतालों, डैम, नदियों एवं सुनसान स्थानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया गया। पुलिस द्वारा लगभग 200 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का परीक्षण किया गया तथा बालिका के फोटो पम्पलेट सार्वजनिक स्थानों, ऑटो एवं बसों में चस्पा कर सोशल मीडिया एवं समाचार पत्रों के माध्यम से प्रसारित किए गए। सीसीटीवी फुटेज के तकनीकी विश्लेषण करने पर पुलिस को एक संदेही व्यक्ति को बालिका के साथ बैढ़न से बिलौजी एवं आगे माजन मोड़ की ओर जाते हुए देखा गया। संबंधित बस चालक, परिचालकों एवं ऑटो चालकों से पूछताछ की गई, जिसके आधार पर पुलिस टीम को जानकारी मिली कि संदेही व्यक्ति निवासी ग्राम मासीआतो थाना बालूमार जिला लातेहार (झारखंड) है, जो बालिका को लेकर अपने गांव चला गया है। सूचना प्राप्त होते ही पुलिस की विशेष टीमें तत्काल झारखंड रवाना की गईं। पुलिस टीम द्वारा आरोपी को उसके निवास स्थान से गिरफ्तार कर 02 वर्षीय अपहृत बालिका को सकुशल दस्तयाब कर परिजनों के सुपुर्द किया। मध्यप्रदेश पुलिसआमजन से अपील करती है कि किसी भी बालक/बालिका के गुम होने अथवा संदिग्ध परिस्थिति में दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी थाना एवं डायल-112 को सूचना दें, ताकि समय रहते त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, गुम एवं अपहृत बालक-बालिकाओं की शीघ्र दस्तयाबी तथा “मुस्कान अभियान” के तहत इस प्रकार की विशेष कार्यवाहियां आगे भी निरंतर जारी रहेंगी।  

अब तक 90 लाख मीट्रिक टन से अधिक हुआ गेहूँ का उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 12 लाख 30 हजार 426 किसानों से 90 लाख 8 हजार 469 मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है की तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जा रहा है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 18 हजार 707 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जित गेहूँ में से 78 लाख 52 हजार 546 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। मंत्री  राजपूत ने बताया है कि गेहूँ उपार्जन 23 मई 2026 तक किया जायेगा। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है।  

हर प्रशिक्षण बैच में 5% सीटें दिव्यांगजनों के लिए अनिवार्य रूप से आरक्षित

लखनऊ उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा समाज के वंचित एवं विशेष जरूरत वाले वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। योगी सरकार की इस पहल के तहत प्रदेश में संचालित सभी अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रत्येक बैच में दिव्यांगजनों के लिए 5 प्रतिशत सीटें अनिवार्य रूप से आरक्षित की गई हैं। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया  कि भारत सरकार के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप एसिड अटैक पीड़ितों को दिव्यांगजन की श्रेणी में शामिल किए जाने के दृष्टिगत उन्हें कौशल प्रशिक्षण में विशेष प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कोई एसिड अटैक पीड़ित महिला प्रशिक्षण प्राप्त करने की इच्छुक एवं पात्र है, तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पंजीकृत किया जाना सुनिश्चित किया जाए। कौशल विकास केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान लौटाने का सशक्त जरिया है। उन्होंने कहा कि मिशन का लक्ष्य है कि प्रशिक्षण एवं रोजगार के माध्यम से इन महिलाओं को समाज में समान अवसर एवं नई पहचान मिल सके। मिशन निदेशक पुलकित खरे की पहल पर प्रदेश के सभी जनपदों की जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों (डीपीएमयू) को निर्देशित किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में गठित होने वाले प्रशिक्षण बैचों में आरक्षित सीटों पर पात्र लाभार्थियों का चयन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महिला कल्याण तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के जिला प्रोबेशन अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जनपदवार एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं का विवरण तैयार कर अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को इस योजना से जोड़ा जा सके। उन्होंने सभी संबंधित विभागों एवं अधिकारियों से निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाएं इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकें।