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पंप संचालकों के लिए राहत की खबर, 2024-25 के लंबित टैक्स मामले स्व-घोषणा से होंगे हल

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने पेट्रोल, डीजल और CNG पंप संचालकों को लंबित टैक्स असेसमेंट के मामलों में राहत दी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के पात्र मामलों में व्यापारियों की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर स्व-घोषणा के जरिए कर निर्धारण पूरा माना जाएगा। वाणिज्यिक कर विभाग ने इसके लिए अधिसूचना जारी की है। यह व्यवस्था मध्यप्रदेश वैट अधिनियम 2002, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम 1956, मोटर स्पिरिट उपकर अधिनियम 2018 और हाई स्पीड डीजल उपकर अधिनियम 2018 के तहत लंबित मामलों पर लागू होगी। निर्धारित फॉर्म में आवेदन करने पर विभाग उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर असेसमेंट पूरा करेगा। किन पंप संचालकों को मिलेगा लाभ यह सुविधा उन्हीं पंजीकृत पेट्रोल पंप संचालकों को मिलेगी, जिन्होंने मध्य प्रदेश में अधिसूचित तेल कंपनियों या पंजीकृत व्यापारियों से टैक्स और उपकर चुकाकर पेट्रोल, डीजल या CNG खरीदा है। साथ ही वर्ष 2024-25 में उनके खिलाफ टैक्स चोरी का मामला नहीं होना चाहिए। इसके अलावा अतिरिक्त कर या ऑडिट से संबंधित लंबित नोटिस का अनुपालन बाकी नहीं होना चाहिए और संबंधित वर्ष के लिए रिफंड का दावा भी नहीं किया गया हो। आवेदन के साथ ये दस्तावेज जरूरी पंप संचालकों को आवेदन के साथ कर और ब्याज जमा करने की चालान कॉपी लगानी होगी। 2 करोड़ रुपए से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबारियों को CA की ऑडिट रिपोर्ट भी देनी होगी। CST में छूट या रियायती दर का लाभ लिया गया है तो फॉर्म-C, F, E आदि मूल दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे। फैसले का मकसद सरकार का कहना है कि यह कदम रिटेल कीमतों पर उपलब्ध ईंधन के डायवर्जन (दूसरी जगह बेचने) और दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है। रिटेल पंपों पर बिकने वाला ईंधन अब मुख्य रूप से आम नागरिकों के उपयोग के लिए ही रहेगा। यह प्रतिबंध फिलहाल 90 दिन तक लागू रहेगा, हालांकि सरकार इसे पहले भी वापस ले सकती है या इसमें संशोधन कर सकती है। क्या होगा असर? बड़े संस्थानों, उद्योगों और व्यावसायिक वाहन मालिकों को ईंधन खरीदने में बदलाव करना पड़ेगा। तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) की थोक और रिटेल बिक्री की निगरानी बढ़ेगी। शेयर बाजार में इन कंपनियों के शेयरों पर भी इस फैसले का असर देखा जा सकता है। कीमतों का संदर्भ यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण घरेलू ईंधन कीमतें बढ़ाई गई हैं। दिल्ली में 15 मई के बाद पेट्रोल की कीमत में करीब 4.75 रुपये प्रति लीटर (लगभग 5%) और डीजल में 4.82 रुपये प्रति लीटर (लगभग 5.49%) की बढ़ोतरी हुई है। ज्ञात हो, मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी आपूर्ति समस्याओं के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें प्रभावित हुई हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम ईंधन के सही उपयोग को सुनिश्चित करने और अनावश्यक दुरुपयोग को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। (इनपुट-एजेंसी)

5 दशक पुरानी खतरनाक इमारत को मशीन से तोड़ना पड़ा भारी, 20 मजदूरों से शुरू हुई मैनुअल तोड़फोड़

नई दिल्ली  सत्य निकेतन में खतरनाक घोषित की गई बिल्डिंग की हालत देखकर MCD की टीम के होश उड़ गए। अधिकारियों को डर था कि तोड़ने के दौरान बिल्डिंग भरभराकर गिर सकती है और एक बड़ा हादसा हो सकता है। इसलिए कार्रवाई शुरू करने से पहले ग्राउंड फ्लोर और बराबर वाली बिल्डिंग को लोहे के मोटे गर्डर से सपोर्ट दिया गया है। इसके बाद ही टॉप फ्लोर से तोड़फोड़ शुरू की गई। इस दौरान सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा गया। MCD के सीनियर अधिकारी के मुताबिक, बुधवार को टीम ने कार्रवाई से पहले पूरी बिल्डिंग का मुआयना किया। सत्य निकेतन की यह बिल्डिंग 5 दशक से ज्यादा पुरानी थी। बेसमेंट और 5 मंजिल की बिल्डिंग दो हिस्सों में बनी थी। करीब 2 दशक बाद पुराने स्ट्रक्चर पर बाकी मंजिलें बनाई गई थीं। 4 इंच की दीवारें खड़ी कर एक-एक मंजिल बनाई गई थी। पिलर भी नहीं था। बिल्डिंग गिराने के खतरे से पहले दिया सहारा अधिकारी ने बताया कि बिल्डिंग की हालत देखकर आशंका थी कि ऊपर के लिंटर पर हथौड़े चलाने से कंपन के कारण पूरा स्ट्रक्चर गिर सकता है। इसलिए तोड़ने से पहले इसे मजबूत किया गया। आगे और पीछे निकाले गए छज्जों समेत पूरे ग्राउंड फ्लोर पर मोटे लोहे के गर्डर लगाए गए। लिंटर डालने में इस्तेमाल होने वाली लोहे की शटरिंग भी लगाई गई। बराबर वाली बिल्डिंग इससे सटी हुई है, इसलिए उसे भी गर्डर से सपोर्ट दिया गया। मशीन से नहीं, 20 मजदूरों से हो रही जर्जर बिल्डिंग की तोड़फोड़ दोनों बिल्डिंगों को सुरक्षित करने के बाद MCD ने तोड़ने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारी के अनुसार बिल्डिंग इतनी कमजोर है कि इसे तोड़ने के लिए जेसीबी या दूसरी मशीनरी का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसलिए 20 लेबर को मैनुअल तोड़फोड़ के लिए लगाया गया है। धूल-मिट्टी को रोकने के लिए पानी का छिड़काव भी हो रहा है।

150 वार्डों में 723 प्रत्याशियों की किस्मत दांव पर, 11 सितंबर को मतदान से पहले कड़ी सुरक्षा

जयपुर  नगर निकाय चुनाव परिणामों के बाद राजधानी जयपुर में विजय जुलूस निकालने पर रोक रहेगी। पुलिस आयुक्तालय ने कानून-व्यवस्था और लोक शांति बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी की है। आदेश के अनुसार, नगर निकाय चुनाव-2026 में निर्वाचित किसी भी सदस्य, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की ओर से विजय जुलूस नहीं निकाला जा सकेगा। एडिशनल पुलिस कमिश्नर (कानून एवं व्यवस्था) राजीव पचार ने आदेश जारी किया। कार्यक्रम के अनुसार प्रथम चरण का मतदान 9 सितंबर (हो चुका), द्वितीय चरण 11 सितंबर और मतगणना 14 सितंबर को होगी। अध्यक्ष पद का चुनाव 21 सितंबर तथा उपाध्यक्ष पद का चुनाव 22 सितंबर को प्रस्तावित है। इन चुनावों को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष कराने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं। यह निषेधाज्ञा 13 से 25 सितंबर तक प्रभावी रहेगी। जयपुर पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में किसी भी प्रकार का विजय जुलूस निकालना प्रतिबंधित रहेगा। उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।     2 हजार 256 मतदान केंद्र बनाए गए।     551 केंद्र संवेदनशील और अति संवेदनशील श्रेणी में रखे गए।     मतदान के दौरान सुरक्षा में 9 हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मी होंगे।     प्रत्येक केंद्र पर दो पुलिसकर्मी और संवेदनशील केंद्रों पर पांच होंगे। रैली, रोड शो और सभाओं पर रोक, प्रत्याशियों ने डोर-टू-डोर जनसंपर्क शुरू किया जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए बुधवार शाम छह बजे चुनाव प्रचार थम गया। इसके साथ ही सार्वजनिक रैलियों, रोड शो, सभाओं और अन्य प्रचार गतिविधियों पर रोक लग गई। अंतिम दिन प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक दी। अब गुरुवार को प्रत्याशी और उनके समर्थक डोर-टू-डोर जनसंपर्क से मतदाता तक पहुंच रहे हैं। सार्वजनिक प्रचार के बजाय व्यक्तिगत संपर्क पर जोर दिया जा रहा है। इधर, जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से 11 सितंबर को होने वाले नगर निगम चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। गुरुवार को मतदान दलों को मतदान सामग्री और अंतिम प्रशिक्षण के बाद मतदान केंद्रों के लिए रवाना किया जाएगा। सीकर रोड भिवानी निकेतन कॉलेज से 2256 मतदान केंद्रों के लिए मतदान दल रवाना होंगे। बता दें कि जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में 723 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। प्रचार थमने के साथ प्रत्याशियों का फोकस समर्थकों को बूथ तक पहुंचाने और अंतिम समय में मतदाताओं से संपर्क पर रहेगा। मतदान के साथ प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में बंद हो जाएगी। दो पारियों में पोलिंग पार्टियों की रवानगी पोलिंग पार्टियों की रवानगी के लिए दो पारियों में व्यवस्था की गई है। जयपुर नगर निगम क्षेत्र में आने वाले 10 विधानसभा क्षेत्रों के मतदान दल निर्धारित व्यवस्था के तहत रवाना होंगे। मतदान दलों को ईवीएम, मतदान सामग्री और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के साथ मतदान प्रक्रिया से जुड़ी अंतिम जानकारी भी दी जाएगी। मानसरोवर में पुलिस ने निकाला फ्लैग मार्च निकाय चुनाव शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त माहौल में कराने के लिए जयपुर साउथ पुलिस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में बुधवार को मानसरोवर सर्कल क्षेत्र में पुलिस ने फ्लैग मार्च निकालकर आमजन को सुरक्षा का भरोसा दिलाया। पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया कि मतदाता बिना किसी डर या दबाव के मतदान करें। डीसीपी (साउथ) राजर्षि राज के नेतृत्व में पुलिस बल ने मानसरोवर क्षेत्र में फ्लैग मार्च किया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों का जायजा लिया। स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा व्यवस्था भी जांची गई। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी से क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को लेकर सख्ती का संदेश दिया गया।

ई-कार्गो वाहन खरीदने पर मिलेगी 5 लाख तक की मदद, नई MSME को ब्याज में भी राहत

चंडीगढ़ हरियाणा में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने एक साथ तीन नई योजनाएं शुरू की हैं। किराये के भवन में चल रहे एमएसएमई को सालाना पांच लाख रुपये तक की प्रतिपूर्ति की जाएगी। ई-कार्गो वाहन खरीदने के लिए सरकार पांच लाख रुपये तक की सहायता देगी। इसी तरह नई एमएसएमई इकाई स्थापित करने के लिए पांच लाख रुपये तक की ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने तीनों पालिसी अधिसूचित कर दी हैं, जिनमें एमएसएमई को लीज रेंट की प्रतिपूर्ति, सेवा क्षेत्र के एमएसएमई के लिए ब्याज माफी और ई-कार्गो वाहनों की खरीद पर वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रविधान है। 25 फीसदी राशि वापस देने का प्रविधान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने उद्यमियों से मिले फीडबैक के आधार पर इन प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के एमएसएमई को लीज पर लिए गए परिसर के किराये की 25 प्रतिशत राशि वापस देने का प्रविधान नीति में किया गया है। यह लाभ तीन वर्ष तक दिया जाएगा। योजना में वे एमएसएमई पात्र होंगी, जिन्होंने पिछले साल एक अप्रैल के बाद वाणिज्यिक उत्पादन या संचालन शुरू किया है। यूनिट के पास कम से कम तीन वर्ष की अवधि की पंजीकृत कामर्शियल लीज डीड होना जरूरी है। जिस परिसर का किराया लिया गया है, वह किसी असंबंधित पक्ष का होना चाहिए। वैध उद्यम रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र भी जरूरी है। इसी तरह सेवा क्षेत्र के नए एमएसएमई का तीन साल तक दो प्रतिशत ब्याज माफ किया जाएगा। यह लाभ टर्म लोन या वर्किंग कैपिटल के लिए लिए गए ऋण में से किसी एक पर मिलेगा। इसमें स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन, कौशल विकास एवं प्रशिक्षण, आइटी, बल्क कूरियर सेवाएं, आरएंडडी सेंटर, टेस्टिंग लैब, इंजीनियरिंग एवं डिजाइन सेवाएं, उपकरण मरम्मत, पर्यावरण सेवाएं और एंटरटेनमेंट पार्क जैसी सेवाओं को शामिल किया गया है। ट्रेडिंग यूनिट इस योजना के दायरे में नहीं आएंगी। तीसरी योजना में एमएसएमई को नए ईवी कार्गो ट्रक या कामर्शियल कार्गो ईवी खरीदने पर एक्स-शोरूम कीमत की 15 प्रतिशत राशि प्रतिपूर्ति के रूप में मिलेगी। एक एमएसएमई को योजना की अवधि में अधिकतम एक वाहन पर लाभ मिलेगा। 250 पात्र एमएसएमई को मिलेगा फायदा वाहन की लोड वहन क्षमता 700 किलोग्राम से 10 हजार किलो तक होनी चाहिए। इस योजना में पहले 250 पात्र एमएसएमई को पहले आवेदन-पहले लाभ के आधार पर सहायता दी जाएगी या बजट उपलब्ध रहने तक लाभ मिलेगा। एक अप्रैल 2026 या उसके बाद खरीदे गए ईवी इस योजना के लिए पात्र होंगे। वाहन हरियाणा की अधिकृत डीलरशिप से खरीदा और हरियाणा में पंजीकृत होना चाहिए तथा फर्म के नाम पर होना जरूरी है। जिन उद्यमों का प्राथमिक कारोबार लाजिस्टिक्स या ट्रांसपोर्टेशन है, उन्हें लाभ नहीं मिलेगा। सेकेंड हैंड वाहन भी योजना में शामिल नहीं हैं।

जहरीली शराब कांड के बाद बड़ा एक्शन, सागर में शराब माफियाओं की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई

 सागर  सागर के बंडा में  जहरीली शराब कांड के आरोपियों पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस कांड से जुड़े आरोपियों की अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो चुकी है। सरकारी अमला संपत्तियों की जांच परख करने गुरुवार सुबह से ही मौके पर पहुंच गया।  तीन विशेष टीमें  तैनात प्रशासन ने तीन अलग-अलग विशेष टीमें गठित की हैं। ये टीमें आपसी समन्वय के साथ चिन्हित स्थानों पर कार्रवाई कर रही हैँ। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।  मकान और गोदाम पर चला बुलडोजर प्रशासन और पुलिस की ओर से खुफिया इनपुट तथा राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के आधार पर आरोपियों की संपत्तियों को चिन्हित किया गया है। बताया जा रहा है कि अवैध अतिक्रमण और कथित अवैध शराब कारोबार से अर्जित संपत्तियों में शामिल मकान और गोदामों को कार्रवाई के दायरे में लिया गया है।   पांच जगहों पर कार्रवाई  प्रशासन की ओर से कुल पांच स्थानों को कार्रवाई के लिए चिन्हित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें जहरीली शराब कांड के मुख्य आरोपी बताए जा रहे चंद्रभान राजपूत, मनीष लोधी और आशीष साहू के मकान, गोदाम और अनधिकृत तरीके से अर्जित अन्य संपत्तियां शामिल हैं। शराब माफियाओं में हड़कंप जहरीली शराब कांड के बाद प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप की स्थिति है। प्रशासन का कहना है कि अवैध शराब का कारोबार कर लोगों की जान से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। चिन्हित संपत्तियों के संबंध में राजस्व रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

रेल यात्रियों के लिए बड़ी खबर! चंडीगढ़ स्टेशन पर 36 दिन ब्लॉक, 12 ट्रेनें कैंसिल

अबोहर. चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के उन्नयन कार्य के चलते रेल यात्रियों की परेशानी बढ़ने वाली है। रेलवे ने स्टेशन पर 36 दिनों के लिए पावर और ट्रैफिक ब्लॉक को मंजूरी दी है। यह ब्लॉक तीन चरणों में 10 सितंबर से 15 अक्टूबर तक रहेगा। इस दौरान फुट ओवरब्रिज के निर्माण और उसे स्थापित करने के साथ स्टेशन के मौजूदा ढांचे को हटाने सहित कई जरूरी कार्य किए जाएंगे। रेलवे के आदेश के अनुसार पहला ब्लॉक 10 से 21 सितंबर, दूसरा 22 सितंबर से तीन अक्टूबर और तीसरा चार से 15 अक्टूबर तक रहेगा। इस अवधि में स्टेशन की विभिन्न रेल लाइनों पर यातायात और बिजली से जुड़े कार्य किए जाएंगे। 12 ट्रेन सेवाएं रहेंगी रद्द ब्लॉक के कारण रेलवे ने 12 ट्रेन सेवाओं को रद्द करने का फैसला लिया है। इनमें फिरोजपुर-चंडीगढ़ ट्रेन संख्या 14630 भी शामिल है। यह ट्रेन नौ सितंबर से 15 अक्टूबर तक रद्द रहेगी। वहीं चंडीगढ़-फिरोजपुर ट्रेन संख्या 14629 को 10 सितंबर से 16 अक्टूबर तक रद्द किया गया है। इसके अलावा चंडीगढ़-अमृतसर ट्रेन संख्या 14541 और अमृतसर-चंडीगढ़ ट्रेन संख्या 14542 समेत अन्य ट्रेन सेवाएं भी प्रभावित रहेंगी। रेलवे के अनुसार ब्लॉक के कारण कुल 442 फेरे रद्द किए गए हैं। श्रीगंगानगर, अबोहर और फाजिल्का के यात्रियों पर असर फिरोजपुर-चंडीगढ़ ट्रेन सेवा रद्द होने का सीधा असर श्रीगंगानगर, अबोहर और फाजिल्का क्षेत्र के यात्रियों पर पड़ेगा। श्रीगंगानगर से चलकर फिरोजपुर पहुंचने वाली संबंधित रेल सेवा आगे चंडीगढ़ के लिए रवाना होती है। ऐसे में इसके रद्द रहने से इस क्षेत्र के यात्रियों को चंडीगढ़ आने-जाने में परेशानी होगी। इसके अलावा अमृतसर रूट भी इससे प्रभावित रहने वाला है। लंबे समय तक ट्रेनें रद्द रहने के कारण यात्रियों को वैकल्पिक रेल सेवाओं या दूसरे परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ सकता है। रेलवे ने यात्रियों से सफर शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी जांचने की अपील की है।

‘हनुमान अंश’ फिल्म देखेंगे CM विष्णु देव साय, आज होगा खास फिल्म शो

रायपुर. 7 अगस्त को एक फिल्म रिलीज हुई 'हनुमान अंश' जिसने देखते ही देखते बॉक्स ऑफिस पर कई धुरंधरों को पछाड़ दिया, क्योंकि इस फिल्म ने अपने बजट से ज्यादा की कमाई कर डाली. फिल्म की इतना चर्चा हो रही है कि अब छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय भी फिल्म हनुमान अंश देखने जा रहे हैं. वो आज शाम को एक निजी मॉल में फिल्म देखेंगे, उनके मंत्री भी इस फिल्म को देखने जाएंगे. महज 2 करोड़ बजट मे बनी ये फिल्म कई रिकॉर्ड अपने नाम कर रही है. ऐसा माना जा रहा है कि शायद वो इस फिल्म को टैक्स फ्री कर दें.  सीएम योगी से मिली हनुमान अंश की टीम  फिल्म 'हनुमान अंश' की टीम ने हाल ही में लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष मुलाकात की. इस प्रतिनिधिमंडल में फिल्म के निर्माता, लेखक-निर्देशक विशाल चतुर्वेदी, मुख्य अभिनेता शोभिनव और फिल्म से जुड़े अन्य प्रमुख कलाकार एवं टीम सदस्य शामिल थे. मुलाकात के दौरान विशाल चतुर्वेदी और शोभिनव ने मुख्यमंत्री को फिल्म की विषयवस्तु और उसकी आध्यात्मिक यात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 'हनुमान अंश' श्रद्धेय संत बाबा नीम करोली के जीवन, उनकी आध्यात्मिक साधना और भगवान हनुमान के प्रति उनकी अटूट भक्ति को केंद्र में रखकर बनाई गई है. मुख्यमंत्री योगी ने फिल्म से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों की सराहना की और पूरी टीम को फिल्म की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं. विचारों के इस सकारात्मक आदान-प्रदान और आत्मीय बातचीत ने इस मुलाकात को कलाकारों और निर्माताओं के लिए एक यादगार अनुभव बना दिया.

भोपाल में बिना अनुमति कमर्शियल गतिविधियों पर गिरेगी गाज, हाईकोर्ट ने दिया 7 दिन का समय

भोपाल  भोपाल के रिहायशी इलाकों में आवासीय भूखंडों पर चल रहे मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिए हैं शहर में आवासीय और लो-डेंसिटी क्षेत्रों में अवैध निर्माण व गैर-कानूनी व्यावसायिक गतिविधियों पर संकट गहरा गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मॉल, होटल व व्यावसायिक संचालकों को वैधानिक अनुमति पत्र नगरनिगम को दिखाने का निर्देश दिया है। जिस पर निगम विधि पूर्वक उनकी पड़ताल करेगा। दूसरी ओर, शहर के लो-डेंसिटी इलाकों में तय सीमा से 10 गुना तक ज्यादा अवैध निर्माण हो चुके हैं। नगर निगम की नोटिस व सीलिंग कार्रवाई के बीच अफसर अब मास्टर प्लान के जरिए इन्हें नियमित करने का रास्ता तलाश रहे हैं, जिससे मास्टर प्लान का ड्राफ्ट फिर अटक गया है। मास्टरप्लान नियमित करने की प्लानिंग शहर के जिन क्षेत्रों को 2005 के मास्टर प्लान में लो-डॅसिटी तय कर निर्माण की लिमिट तय कर रखी है, वहां बेशुमार व बड़े निर्माण हो गए है। अब इन निर्माणों को मास्टर प्लान के रास्ते नियमित कराने की कोशिश की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आवासीय परिसरों से व्यावसायिक गतिविधि बंद कराने नगर निगम नोटिस और सीलिंग कर रहा है। दोनों ही पक्ष इसके लिए मास्टर प्लान को लागू करने की मांग कर रहे है। प्लानिंग एरिया के लो-डेंसिटी क्षेत्रों को नियमित करने बीते पंद्रह दिन से टीएंडसीपी और नगरीय प्रशासन के अफसर बैठकें कर रहे हैं। गौरतलब है कि लो-डेंसिटी एरिया में 10 हजार वर्गफीट जमीन पर 0.06 एफएआर से महज 600 वर्गफीट तक के निर्माण की अनुमति है, जबकि यहां दस गुना ज्यादा 6000 से 8000 वर्गफीट तक निर्माण हो गए। ये हैं लो-डेंसिटी के नियम ग्राम बैरागढ़ चिचली, नीलबड़ व मिंडोरी में लो-डेंसिटी तय है। इनमें 48 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर डेंसिटी तय है। इनमें निर्माण के लिए कम से कम 1000 वर्गमीटर यानि 10 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल जरूरी है। यहां निर्माण की अनुमति पर 0.06 एफएआर तय है। यानि 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट पर 600 वर्गफीट निर्माण ही हो सकता है। इससे अधिक अवैध है। इसमें भी जमीन पर कुल अनुमति का छह फीसदी ही निर्मित किया जा सकता है। कार्रवाई का रास्ता साफ कोर्ट के आदेश के बाद रिहायशी क्षेत्रों में बिना वैध अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की स्थिति साफ हो गई है। अब संबंधित पक्षों को अपने व्यावसायिक उपयोग की वैध अनुमति साबित करने के लिए दस्तावेज निगम के सामने रखने होंगे। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह रिहायशी इलाकों को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अब नगर निगम के सामने कार्रवाई करने के लिए स्पष्ट न्यायिक निर्देश हैं। ट्रैफिक-पार्किंग की समस्या से जूझ रहे रहवासी रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे लोगों को भी कोर्ट के आदेश से कार्रवाई की उम्मीद है। रहवासी लवनीश भाटी ने कहा कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, अब कोर्ट के आदेश के बाद जमीन पर कार्रवाई की उम्मीद है। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने भी फैसले का स्वागत करते हुए नगर निगम से रिहायशी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की मांग की है। समिति का कहना है कि जिनके पास वैध अनुमति नहीं है, उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। ये हैं स्थिति -कलियासोत कैचमेंट में साक्षी ढाबे के पास से अंदर के के क्षेत्र में निर्मित वीआइपी कॉलोनी में 600 वर्गफीट की जगह 6000 वर्गफीट के बंगले बना लिए। मामला कोर्ट में चला गया। -चार इमली, श्यामला हिल्स पर अवैध तौर पर बंगले बन गए। -नरसिंहगढ़ रोड पर लो-डेंसिटी में 12 बड़ी कॉलोनियां बन गईं। -मिंडोरी और संबंधित क्षेत्र में बड़े मकान, रेस्टोरेंट विकसित हो गए। -केरवा डेम से लगी जमीन लो-डेंसिटी है, लेकिन इसकी ओर जाने वाली रोड किनारे अवैध तौर पर कॉलोनियां विकसित हो गईं। कोर्ट ने कहा-कागजात दिखाएं नगर निगम करेगा सभी के परीक्षण आवासीय क्षेत्र के मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर अनुमति और वैधानिकता की जांच नगरनिगम भोपाल करेगा। हाईकोर्ट में सोमवार को 42 याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी। वहीं, मंगलवार को दस नम्बर, कलियासोत और बड़ा तालाब के 50 मीटर दायरे में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने सम्बंधी आदेश और शो-कॉज नोटिस को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। शोकॉज नोटिस की याचिकाओं का निराकरण करते हुए कोर्ट ने नगर निगम को याचिकाकर्ताओं के जवाब का विधि के अनुसार परीक्षण कर कारण सहित आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे। मकानों को तोड़ने के मामले में दलीलें पूरी नहीं हो सकीं। एकलपीठ ने मकान तोड़ने पर लगी रोक बरकरार रखते हुए अगली सुनवाई 15 सितंबर निर्धारित की है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत हाईकोर्ट के रुख का स्थानीय रहवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने इसे शहर के आवासीय इलाकों को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। उनका कहना है कि अब अनुमति के नाम पर टालमटोल या बहानेबाजी नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि असली परीक्षा भोपाल नगर निगम की है, जिसे यह साबित करना होगा कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई प्रभावशाली व्यक्ति। शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई रहवासी लवनीश भाटी और संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण पैदा हो रही ट्रैफिक, पार्किंग, अत्यधिक शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई। रहवासियों का कहना हैं कि वे वर्षों से इन दिक्कतों को झेल रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी।

साइबर अपराध पीड़ित महिलाओं-बच्चों को बड़ी राहत, इंदौर के नए सेंटर में तकनीकी- कानूनी सहायता मुफ्त

महिलाओं-बच्चों के लिए इंदौर में शुरू हुआ साइबर वेलनेस सेंटर साइबर अपराध और डिजिटल नुकसान के पीड़ितों को मिलेगी मुफ्त तकनीकी और कानूनी सहायता – महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया  इंदौर साइबर अपराध, ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल नुकसान का सामना कर रही महिलाओं और बच्चों को अब इंदौर में एक ही स्थान पर काउंसलिंग से लेकर कानूनी और तकनीकी सहायता तक मिल सकेगी। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने बुधवार को केंद्र का उद्घाटन किया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अहान फाउंडेशन के प्रोजेक्ट रिस्पॉन्सिबल नेटिज़्म और कोगटा फाउंडेशन के सहयोग से साइबर वेलनेस सेंटर का  इंदौर में शुभारंभ किया गया है। केंद्र का उद्देश्य साइबर घटनाओं के पीड़ितों और सर्वाइवर्स को तत्काल, मुफ्त और संवेदनशील सहायता उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश में डिजिटल सुरक्षा और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार के लिए मजबूत सहायता तंत्र तैयार करना है। केंद्र में साइबर नुकसान से प्रभावित लोगों को मुफ्त काउंसलिंग, मनो-सामाजिक एवं भावनात्मक सहायता, तकनीकी और कानूनी मार्गदर्शन तथा साइबर घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज कराने में सहयोग मिलेगा। इसके अलावा महिलाओं, बच्चों और समुदायों के लिए साइबर वेलनेस, डिजिटल रेजिलिएंस और साइबर अधिकारों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि महिलाओं और बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने में सक्षम बनाने के लिए सरकार, सामाजिक संस्थाओं और समुदाय को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं है, बल्कि इससे जुड़े मामलों में पीड़ितों को मानसिक और भावनात्मक सहारे की भी जरूरत होती है।  

गंगा की बाढ़ में डूबा भागलपुर का सिल्क हब, जीआई टैग वाले तीन उत्पादों पर खतरा

पटना बिहार के रेशमी शहर की आर्थिक रीढ़ बाढ़ के थपेड़ों से टूट गई है। भागलपुर में गंगा की उफनाती लहरों और बाढ़ की विभीषिका ने न केवल लाखों लोगों को बेघर किया है, बल्कि यहां की पहचान माने जाने वाले तीन वैश्विक ब्रांड (तसर सिल्क, कतरनी धान और जर्दालू आम) के वजूद पर भी गहरा संकट खड़ा कर दिया है। बता दें कि तसर सिल्क, कतरनी धान और जर्दालू आम को जीआई टैग दिया गया है। कृषि और उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार की बाढ़ से भागलपुर की अर्थव्यवस्था को ऐसा झटका लगा है, जिससे उबरने में सालों लग सकते हैं। नाथनगर और चंपानगर के सिल्क हब इस समय पानी में पूरी तरह डूबे हुए हैं। आर्थिक मामलों के स्थानीय जानकार अधिवक्ता राजेश सर्राफ ने बताया कि भागलपुर का सिल्क उद्योग लगभग 50 फीसदी घरेलू और 50 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर है। पावरलूम मशीनों और कच्चे माल के पानी में डूबने से करोड़ों का नुकसान हुआ है। नाथनगर स्थित बुनकर समाज के इनायत अंसारी बताते हैं कि विदेशों से मिले ऑर्डर की समय पर डिलीवरी नहीं होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हमारी साख खतरे में है। यदि बुनकरों का बनारस या कोलकाता पलायन शुरू हुआ, तो इस पारंपरिक क्लस्टर को भारी क्षति पहुंचेगी। दूसरी ओर, जिले की कृषि अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ कतरनी धान और जर्दालू आम के बागों को भी प्रकृति का कहर झेलना पड़ रहा है। सुल्तानगंज के आभा रतनपुर निवासी कृषक एवं निर्यातक मनीष कुमार सिंह बताते हैं, बाढ़ का पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहने के कारण कतरनी धान के नाजुक पौधे पूरी तरह सड़ जाएंगे। इस अनूठे सुगंधित चावल का अंतरराष्ट्रीय बाजार ठप होने के कगार पर है। जर्दालू आम के बगीचे में जलभराव पर चिंता जताते हुए वो कहते हैं कि बगीचों में जलभराव सबसे खतरनाक होता है। पीरपैंती के आम उत्पादक पप्पू यादव कहते हैं कि बगीचे में एक सप्ताह से अधिक दिनों तक पानी जमा रह गया तो पेड़ सूख जाएंगे। इससे आम की उत्पादकता में कमी आएगी। सिल्क बुनकरों को विशेष राहत पैकेज मिले : चैंबर भागलपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष रामगोपाल पोद्दार बताते हैं कि बुनकर और किसान कर्ज के बोझ तले दबे हैं। सरकार को इस संकट से निपटने के लिए सिल्क बुनकरों के लिए विशेष राहत पैकेज और किसानों के लिए फसल बीमा का त्वरित भुगतान सुनिश्चित करना होगा, तभी इन जीआई टैग उत्पादों को बचाया जा सकता है। सरकारी आंकड़े में (सालाना) सिल्क: 100 करोड़ कतरनी धान की पैदावार : 2000 एकड़ कतरनी धान का कारोबार: 30 करोड़ जर्दालू आम की प्रतिवर्ष पैदावार-बाजार : 10,000 मीट्रिक टन