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दुबई में गूंजा मध्यप्रदेश का निवेश मॉडल, वैश्विक उद्योग जगत से मिले CM डॉ. यादव; ₹53 हजार करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव

मध्यप्रदेश निवेशकों का भरोसेमंद साथी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुबई में दुनिया के उद्योग जगत को दिया न्योता मध्यप्रदेश की निवेश क्षमता से रूबरू हुआ वैश्विक उद्योग जगत लगभग 53 हजार करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्ताव प्राप्त भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 6 से 8 सितंबर का दुबई दौरा मध्यप्रदेश की निवेश रणनीति को वैश्विक मंच पर नए विस्तार देने वाला रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशा निवेश के साथ तकनीक, बाजार, निर्यात और रोजगार को जोड़कर मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश एवं विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना है। एआईएम कांग्रेस-2026 में मुख्यमंत्री डॉ यादव ने मध्यप्रदेश को केवल निवेश के गंतव्य के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक कंपनियों और निवेशकों के लिए दीर्घकालिक साझेदार के रूप में प्रस्तुत किया। दुबई प्रवास के दौरान लगभग 53 हजार करोड़ रूपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए है। यूएई के शीर्ष मंत्रियों, तातारस्तान के नेतृत्व, विश्व बैंक और डीपी वर्ल्ड, क्रिसेंट एंटरप्राइज़, जेम्स एजुकेशन, शराफ ग्रुप, चोइथराम्स, राणा होल्डिंग्स, वीएफएस ग्लोबल और BEEAH जैसी कंपनियों के साथ हुई बैठकों में लॉजिस्टिक्स, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, एआई एवं डिजिटल टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी, ई-मोबिलिटी, फार्मा, शिक्षा, पर्यटन, स्वास्थ्य, आधुनिक विनिर्माण और वेस्ट-टू-एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश और तकनीकी साझेदारी की संभावनाएं खुलीं। दुबई ने मध्यप्रदेश में पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र का अध्ययन करने के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने, विमानन संपर्क बढ़ाने तथा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में उच्चस्तरीय निवेशक दल के साथ भागीदारी की दिशा में सहमति जताई, वहीं विश्व बैंक ने एआई और डिजिटल गवर्नेंस परियोजनाओं में सहयोग में रुचि दिखाई। डीपी वर्ल्ड और शराफ ग्रुप के साथ मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स, BEEAH के साथ कचरा प्रबंधन एवं वेस्ट-टू-एनर्जी, GEMS के साथ एजुकेशन और कौशल विकास तथा चोइथराम्स के साथ रिटेल और फूड प्रोसेसिंग की संभावनाओं ने दौरे को ठोस कारोबारी अवसरों से जोड़ा। शारजाह चैंबर के साथ बिजनेस फोरम और यूएई के साथ निवेश राउंडटेबल की पहल के साथ मध्यप्रदेश ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि अब लक्ष्य केवल पूंजी आकर्षित करना नहीं, बल्कि पूंजी, तकनीक, बाजार, रोजगार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मध्यप्रदेश से जोड़ना है। ग्लोबल निवेश मानचित्र पर सशक्त होता मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एआईएम कांग्रेस-2026 में दुनिया के निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश का न्योता दिया और सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया।              25 से अधिक नई नीतियां: निवेश और कारोबार को आसान बनाने के लिए 25 से अधिक नयी नीतियां और 2700 से अधिक अप्रासंगिक कानून समाप्त।              MSME में 1.10 करोड़ रोजगार: प्रदेश में MSME सेक्टर में 1.10 करोड़ से अधिक लोग कार्यरत।              76 हजार करोड़ रूपए से अधिक निर्यात: वर्ष 2026-27 में मध्यप्रदेश से 76 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात।              भविष्य के सेक्टरों पर फोकस: AI, डेटा, ड्रोन, डिफेंस, साइंस सिटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को निवेश के नए क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।              तीन नए आईटी पार्क: रीवा, इंदौर और उज्जैन में तीन नए आईटी पार्क विकसित किए जा रहे हैं।              भूमि-बिजली-पानी की ताकत: पर्याप्त लैंड बैंक, भूमि, सरप्लस बिजली, जल संसाधन और ग्रीन एनर्जी की उपलब्धता को निवेश की बड़ी ताकत बताया।              अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी: भोपाल और इंदौर से अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें; चार नए एयरपोर्ट विकसित करने की तैयारी।              कृषि से ग्लोबल फूड चेन तक: फूड प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, ग्रेडिंग, भंडारण और कृषि निर्यात में यूएई और खाड़ी बाजार को लक्ष्य।              टेक्सटाइल की वैश्विक ब्रांडिंग: चंदेरी और महेश्वरी को आधुनिक टेक्सटाइल पार्क व गारमेंट निर्माण से जोड़ने की योजना।              लॉजिस्टिक्स में बड़े अवसर: डीपी वर्ल्ड के साथ पवारखेड़ा में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब की संभावनाएं।              शराफ ग्रुप का प्रस्ताव: मध्यप्रदेश में रेल-साइडिंग आधारित लॉजिस्टिक्स पार्क के लिए 30–50 मिलियन डॉलर निवेश की संभावना और 300–600 रोजगार का अवसर।              जेम्स एजुकेशन : मध्यप्रदेश के प्रमुख एवं उभरते शहरों में अंतर्राष्ट्रीय K-12 स्कूल और कौशल विकास केंद्रों की संभावनाएं।              क्रिसेंट एंटरप्राइज़ेज़ : लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, ऊर्जा, शहरी अधोसंरचना और तकनीकी सहयोग पर चर्चा।              राणा हॉल्डिंग्स : स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन एनर्जी, ई-मोबिलिटी और कृषि मशीनरी में संभावनाएं।              चोइथराम्स : आधुनिक रिटेल, सुपरमार्केट, फूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और स्थानीय किसानों से सीधी खरीद की संभावना।              बी-आह के साथ हरित साझेदारी: वेस्ट मैनेजमेंट, वेस्ट-टू-एनर्जी, सर्कुलर इकोनॉमी और स्मार्ट सिटी मॉडल में सहयोग।              इंदौर मॉडल का विस्तार: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और बायो-सीएनजी मॉडल को वैश्विक तकनीक से जोड़ने की पहल।              यूएई का पर्यटन दल: होटल, हॉस्पिटैलिटी और पर्यटन निवेश की संभावनाएं तलाशने यूएई का प्रतिनिधिमंडल मध्यप्रदेश आएगा।              विमानन सहयोग: मध्यप्रदेश और यूएई के बीच एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने पर सहमति की दिशा में पहल।              विश्व बैंक से AI सहयोग: एआई और डिजिटल गवर्नेंस परियोजनाओं में वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग की संभावनाएं।              तातारस्तान से साझेदारी: एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, पेट्रोकेमिकल्स, फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स और आधुनिक तकनीक में सहयोग; जीआईएस-2027 का निमंत्रण।              इथियोपिया से आर्थिक सहयोग: कृषि, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, फार्मा, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा में निवेश की संभावनाएं।              रस-अल-खैमा से औद्योगिक सहयोग: सिरेमिक, निर्माण सामग्री, फार्मा, मेडिकल डिवाइस, पर्यटन, फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा में साझेदारी।              शारजाह चैंबर के साथ बिजनेस फोरम: ‘एमपी-शारजाह बिजनेस फोरम’ की पहल और मध्यप्रदेश के एमएसएमई निर्यातकों को खाड़ी के खरीदारों से जोड़ने पर जोर।              ओडीओपी-जीआई की ग्लोबल ब्रांडिंग: चंदेरी, महेश्वरी, बाटिक, जरी-जरदोजी, बेल मेटल और ग्वालियर कारपेट को दुबई में वैश्विक बाजार के सामने प्रदर्शित किया गया।              अरब देशों तक पहुंच: अरब संसद अध्यक्ष … Read more

19.1 करोड़ की इंडिया-इजराइल परियोजना में तेजी, गंगावली में सोलर पंप, इंटेक पाइप व नेचुरल एसटीपी का काम पूरा

इंडिया-इजराइल परियोजना: बुंदेलखंड में जल संकट का समाधान निकाल रहा योगी सरकार का आधुनिक जल प्रबंधन मॉडल 19.1 करोड़ की इंडिया-इजराइल परियोजना में तेजी, गंगावली में सोलर पंप, इंटेक पाइप व नेचुरल एसटीपी का काम पूरा जलाशय से खेत तक पहुंचेगा पानी, बूंद-बूंद के बेहतर इस्तेमाल का मॉडल तैयार, 31 दिसंबर तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य 8.5 हेक्टेयर में दिखेगी कम पानी में बेहतर खेती की तकनीक, गंगावली मॉडल का 24 गांवों तक विस्तार करने की तैयारी 72 प्रशिक्षण सत्रों से किसानों को मिलेंगे आधुनिक सिंचाई और खेती के गुर, हर सत्र में हिस्सा लेंगे 100 किसान लखनऊ  बुंदेलखंड में जल संकट और सीमित जल संसाधनों के बीच योगी सरकार जल संरक्षण, सिंचाई दक्षता और आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देने के लिए इंडिया-इजराइल बुंदेलखंड वाटर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रही है। झांसी के विकासखंड बड़ागांव स्थित ग्राम गंगावली में करीब 19.1 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे मिनी पायलट प्रोजेक्ट में कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे हो चुके हैं। जलाशय का अर्थवर्क और जियोमेम्ब्रेन लाइनिंग, सोलर पंप की स्थापना, नहर से जलाशय तक इंटेक पाइप और इंटेक वेल, पीयूएफ पैनल आधारित भवनों समेत कई प्रमुख काम पूरे किए जा चुके हैं। अब अगले चरण में माइक्रो इरिगेशन, ग्रीनहाउस, सिंचाई ऑटोमेशन और किसान प्रशिक्षण जैसे कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। जल संरक्षण से आधुनिक खेती तक एक ही मॉडल नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक, भूगर्भ जल विभाग डॉ राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य बुंदेलखंड की स्थानीय जल उपलब्धता और कृषि परिस्थितियों के अनुसार ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिसमें उपलब्ध पानी का अधिकतम और वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किया जा सके। परियोजना में जल संरक्षण, जल भंडारण, सौर ऊर्जा, माइक्रो इरिगेशन, आधुनिक कृषि तकनीक और किसान प्रशिक्षण को एक साथ जोड़ा गया है। इसके तहत जलाशय, नहर से पानी लाने की व्यवस्था, पाइपलाइन, सोलर पंप, ड्रिप-स्प्रिंकलर, प्राकृतिक एसटीपी, कृषि मशीनरी और आधुनिक खेती की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसका मकसद किसानों को सीमित पानी में बेहतर सिंचाई और खेती का व्यावहारिक मॉडल उपलब्ध कराना है। नेचुरल एसटीपी का भी निर्माण गंगावली में परियोजना की प्रगति अब जमीन पर दिखाई देने लगी है। जलाशय क्षेत्र की डिमार्केशन और फेंसिंग का कार्य पूरा हो चुका है। जलाशय का अर्थवर्क और जियोमेम्ब्रेन लाइनिंग भी पूरी हो गई है। पीयूएफ पैनल आधारित भवनों का निर्माण पूरा होने के साथ वहां सीसीटीवी की व्यवस्था भी की जा चुकी है। इसके अलावा सोलर पंप स्थापित किया गया है। नहर से जलाशय तक इंटेक पाइप और जलाशय में इंटेक वेल का निर्माण भी पूरा हो चुका है। गांव से आने वाले अपशिष्ट जल को जलाशय में पहुंचने से रोकने और उसके उपचार के लिए नेचुरल एसटीपी का निर्माण किया गया है। जलाशय के आसपास सड़क का काम अभी प्रगति पर है। 8.5 हेक्टेयर में होगा आधुनिक खेती का प्रदर्शन मिनी पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीब 8.5 हेक्टेयर क्षेत्र में आधुनिक कृषि गतिविधियों का प्रदर्शन प्रस्तावित है। अगले चरण में ड्रिप और स्प्रिंकलर आधारित माइक्रो इरिगेशन सिस्टम को स्थापित और क्रियाशील किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रीनहाउस, टनल, पाइपलाइन और सिंचाई ऑटोमेशन-एससीएडीए व्यवस्था को भी क्रियाशील किया जाएगा। इससे किसानों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि फसल की जरूरत के अनुसार कितनी मात्रा में पानी दिया जाए और कम पानी में बेहतर उत्पादन कैसे हासिल किया जा सकता है। परियोजना में पानी की खपत, सिंचाई दक्षता, फसल उत्पादन, लागत और जल उत्पादकता जैसे मानकों पर तकनीकों के परिणामों का मूल्यांकन भी किया जाएगा। किसानों को खेत पर मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण परियोजना में केवल आधारभूत ढांचा तैयार करने के बजाय किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। प्रस्तावित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 72 प्रैक्टिकल ट्रेनिंग सेशन आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक सत्र में करीब 100 किसानों की भागीदारी का प्रावधान है। प्रशिक्षण में किसानों को वाटर बजटिंग, फर्टिगेशन, क्रॉप प्लानिंग, सिंचाई संचालन और कृषि मशीनरी के इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी। इससे किसान उपलब्ध पानी के आधार पर फसल क्षेत्र तय करने और सिंचाई का बेहतर प्रबंधन करने में सक्षम होंगे। 24 गांवों तक पहुंचेगा गंगावली का मॉडल डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि गंगावली में तैयार हो रहे मिनी पायलट प्रोजेक्ट के अनुभवों को आगे बड़े क्षेत्र में लागू करने की भी तैयारी है। अगले चरण में बड़ागांव विकासखंड में पाहुज नहर के डाउनस्ट्रीम स्थित 24 अन्य गांवों में विस्तृत प्रदर्शनात्मक प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। इससे गंगावली में सफल रहने वाली उपयोगी तकनीकों को दूसरे गांवों तक पहुंचाने का रास्ता तैयार होगा। 31 दिसंबर तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियांता व वैयक्तिक सहायक निदेशक अनुपम ने कहा कि परियोजना के वर्तमान निर्माण एवं क्रियान्वयन चरण को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके बाद ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस के साथ परियोजना को जून 2029 तक संचालित करने का प्रस्ताव है। वहीं विस्तारित डेमोंस्ट्रेशन और किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम अक्टूबर 2026 से मई 2029 तक प्रस्तावित है।

लाड़ली बहना योजना: 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को मिलेंगे ₹1500, 40वीं किस्त से पहले ऐसे देखें लिस्ट में नाम

भोपाल  मध्य प्रदेश की 1.25 करोड़ से ज्यादा लाडली बहना योजना की लाभार्थियों के लिए सितंबर महीने की किस्त को लेकर इंतजार खत्म होने वाला है. दरअसल, राज्य सरकार से जुड़े सूत्रों और अधिकारियों के मुताबिक योजना की 40वीं किस्त 15 सितंबर 2026 तक बहनों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए भेज दी जाएगी. इस बार भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ही योजना के तहत मिलने वाली 1500 रुपये की राशि हर लाडली बहनों के खाते में ट्रांसफर करेंगे।  मुख्यमंत्री के विदेश दौरे से लौटते ही तय होगी तारीख मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने दुबई दौरे से 9 सितंबर को भोपाल वापस लौटेंगे. सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री के लौटने के बाद एक विशेष राज्य स्तरीय कार्यक्रम की तारीख तय की जाएगी, जिसमें बटन दबाकर 1.25 करोड़ से अधिक बहनों के खातों में एक साथ करोड़ों रुपये की राशि अंतरित की जाएगी।  पिछले महीने सभी बहनों को मिले थे 1750 रुपये रक्षाबंधन के मौके पर अगस्त महीने में मोहन सरकार ने बहनों को विशेष उपहार देते हुए 1750 रुपये की राशि जारी की थी. हालांकि, सितंबर महीने से नियमित रूप से मिलने वाले 1500 रुपये की किस्त भेजी जाएगी. मध्य प्रदेश कैबिनेट ने लाडली बहना योजना को अगले 5 वर्षों तक बिना किसी रुकावट के जारी रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, यानी ये योजना बिना किसी रुकावट के अगले पांच साल तक चलती रहेगी. इस पर सरकार 1,14,365 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च करेगी।  लाभार्थियों की लिस्ट में ऐसे चेक करें अपना नाम लाडली बहनों के किस्त का समय नजदीक आते ही महिलाओं को इस बात को लेकर चिंता बढ़ जाती है, कि कहीं उसका नाम कट तो नहीं गया है. दरअसल कई राज्य सरकार अपने यहां अपात्र महिलाओं की पहचान कर उनके नाम लाभार्थी सूची से हटा रही है. ऐसे लाडली बहना योजना की लाभार्थी आपका नाम स्वीकृत सूची में चेक कर सकती हैं. अगर आप भी अपना नाम चेक करना चाहते हैं तो मध्य प्रदेश सरकार के आधिकारिक पोर्टल cmladlibahna.mp.gov.in या https://cmladlibahna.mp.gov.in पर जाकर दो तरीकों से चेक कर सकती हैं।  फाइनल सूची में ऐसे चेक करें नाम     मध्य प्रदेश सरकार की अधिकारिक वेबसाइट cmladlibahna.mp.gov.in पर जाएं.      मुख्य मेन्यू में दिए गए अंतिम सूची विकल्प पर क्लिक करें.     अपना पंजीकृत मोबाइल नंबर और स्क्रीन पर दिख रहा कैप्चा कोड दर्ज करें.     ओटीपी प्राप्त करें पर क्लिक करें और मोबाइल पर आए ओटीपी को वेरीफाई करें.     अपना जिला, स्थानीय निकाय जैसे जनपद या नगर निगम फिर ग्राम पंचायत या वार्ड चुनें.     स्क्रीन पर आपके क्षेत्र की पूरी लिस्ट खुल जाएगी, इसमें अपना नाम देखें. आवेदन और पेमेंट की स्थिति वाले लिंक पर जाकर अपना नाम चेक करें     होमपेज पर आवेदन एवं भुगतान की स्थिति वाले विकल्प पर क्लिक करें.     अपना 9 अंकों का समग्र सदस्य क्रमांक या ऑनलाइन पंजीयन क्रमांक दर्ज करें.     कैप्चा कोड भरकर पंजीकृत मोबाइल पर आया ओटीपी दर्ज करें और सबमिट करें.      आपके आवेदन का स्टेटस, स्वीकृति और  किस्त के भुगतान की पूरी जानकारी स्क्रीन पर दिख जाएगी। 

चमकेगी बच्चों की प्रतिभा, 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों में होगा उपलब्धियों का सम्मान

मेहनत और प्रतिभा को सम्मान देगी योगी सरकार, विद्यालयों के वार्षिकोत्सव में मिलेगा पुरस्कार चमकेगी बच्चों की प्रतिभा, 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों में होगा उपलब्धियों का सम्मान  खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रतियोगिताओं के प्रतिभावान विद्यार्थियों का होगा सम्मान मेधावी बच्चों के साथ उनके अभिभावकों और सहयोगी एसएमसी सदस्यों को भी किया जाएगा सम्मानित   लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार परिषदीय विद्यालयों के बच्चों की प्रतिभा को पहचान, प्रोत्साहन और सम्मान से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रही है। योगी सरकार का जोर है कि पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाला बच्चा हो, नियमित विद्यालय आने वाला हो, खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा दिखाने वाला हो या सांस्कृतिक एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं में आगे रहने वाला; हर उपलब्धि को मंच मिले और हर प्रतिभा को प्रोत्साहन मिले। इसी उद्देश्य से वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट के अंतर्गत प्रदेश के 1,31,918 परिषदीय विद्यालयों में वार्षिकोत्सव के अंतर्गत पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किए जाएंगे।   वार्षिकोत्सव के अंतर्गत पुरस्कार वितरण समारोह 15 फरवरी 2027 से 15 मार्च 2027 के मध्य आयोजित किए जाएंगे। समारोह में ग्राम पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधि, विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य, अभिभावक और अन्य संबंधित लोगों को आमंत्रित किया जाएगा। कार्यक्रम में उपस्थित होने के लिए अध्यापकों द्वारा व्यक्तिगत रूप से तथा बच्चों द्वारा निर्मित निमंत्रण कार्ड के माध्यम से आमंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं।  योगी सरकार की इस पहल से बच्चों की मेधा, मेहनत, नियमितता और बहुआयामी प्रतिभा को पहचान मिलने के साथ उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। पढ़ाई, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रतियोगिताओं में उपलब्धि हासिल करने वाले बच्चों को सार्वजनिक मंच पर सम्मानित करने से परिषदीय विद्यालयों में उपलब्धि आधारित सकारात्मक वातावरण को और मजबूती मिलेगी। मेहनत और प्रतिभा के आधार पर बच्चों का सम्मान विद्यालय स्तर पर प्रत्येक कक्षा से विगत परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले एक छात्र और एक छात्रा को पुरस्कृत किया जाएगा। प्रत्येक कक्षा से सर्वाधिक उपस्थिति वाले एक छात्र और एक छात्रा को भी सम्मानित किया जाएगा। विभिन्न खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले एक छात्र-छात्रा को भी पुरस्कृत किया जाएगा। इसके अलावा ऐसे अभिभावकों को सम्मानित किया जाएगा, जिनके बच्चे ने विगत परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त किए हों अथवा विद्यालय में सर्वाधिक दिन उपस्थित रहे हों। विद्यालय की गतिविधियों एवं कार्यक्रमों में सहयोग करने वाले विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों को भी सम्मानित किया जाएगा। समारोह में उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं के उत्साहवर्धन और प्रोत्साहन के लिए यथासंभव टॉफी, चॉकलेट एवं रचनात्मक सामग्री का वितरण भी किया जा सकता है।  पुरस्कार में बच्चों के उपयोग की सामग्री पुरस्कार वितरण के लिए लंच बॉक्स, पानी की बोतल, ड्राइंग नोटबुक, कंपास एवं वाटर कलर, स्टेशनरी-ज्योमैट्रिक बॉक्स, पेंसिल, रबर, कटर एवं स्केल सहित पेन आदि सामग्री क्रय की जा सकती है। कहानी की किताब तथा महापुरुषों के जीवन चरित्र पर आधारित पुस्तकों को भी पुरस्कार के रूप में दिया जा सकता है। अभिभावकों के लिए शॉल, मोमेंटो तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हरित पौधे भी सम्मान सामग्री के रूप में दिए जा सकते हैं।  स्कूल स्तर से राज्य स्तर तक होगा अनुश्रवण पुरस्कार वितरण कार्यक्रम के प्रभावी आयोजन के लिए विभिन्न स्तरों पर अनुश्रवण की व्यवस्था की गई है। डायट, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा कम से कम दो ब्लॉक के कुल चार विद्यालयों में कार्यक्रम का अनुश्रवण किया जाएगा। सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) द्वारा कम से कम दो जनपदों के कुल चार विद्यालयों में कार्यक्रम का अनुश्रवण किया जाएगा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा कम से कम दो ब्लॉक के कुल चार विद्यालयों में पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का अनुश्रवण किया जाएगा। प्रत्येक एसआरजी एवं एआरजी द्वारा कम से कम तीन विद्यालयों में कार्यक्रम का अनुश्रवण किया जाएगा। खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा विकासखंड के कम से कम पांच विद्यालयों में तथा प्रत्येक एआरपी द्वारा कम से कम तीन ब्लॉक के कुल छह विद्यालयों में पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का अनुश्रवण किया जाएगा।  कोट: योगी सरकार बच्चों की प्रतिभा को पहचान देने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और अन्य क्षेत्रों में बेहतर करने वाले बच्चों को सम्मानित करने से उनमें आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा मजबूत होगी। यह पहल परिषदीय विद्यालयों के बच्चों की प्रतिभा को उचित मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कोट: बच्चों की उपलब्धियों को सम्मान देना उनके भीतर सीखने और बेहतर करने की प्रेरणा को मजबूत करता है। पुरस्कार वितरण समारोह के माध्यम से शैक्षिक उपलब्धि, नियमित उपस्थिति, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक बच्चे की प्रतिभा को पहचान मिले और उसे आगे बढ़ने के लिए सकारात्मक वातावरण उपलब्ध हो। मोनिका रानी, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश

विवाह से लेकर प्रेम तक, अनिरुद्धाचार्य ने ‘लव क्लास’ में बताई रिश्तों की राह

करनाल. श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज श्रद्धालुओं के धार्मिक सवालों के साथ उनके पारिवारिक और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े प्रश्नों का भी सहज अंदाज में जवाब दे रहे हैं। कथा के दौरान एक दंपती का सवाल-जवाब खासा रोचक रहा। पति ने अपनी पत्नी के रहते दूसरी शादी करने की इच्छा जता दी। बातचीत में उसने बताया कि उसके पांच बच्चे हैं। उसका बड़ा बेटा 21 वर्ष का है और उसकी शादी भी हो चुकी है। इतना ही नहीं वह बेटा करीब दो माह पहले पिता बन चुका है और परिवार में पोते का भी आगमन हो चुका है। इसके बावजूद पति ने दूसरी शादी की इच्छा जताई। इस पर महाराज ने उसे समझाते हुए पत्नी के साथ प्रेम से रहने की बात कही। महाराज ने पहले पति से पत्नी के प्रति अपने व्यवहार पर विचार करने को कहा और फिर उससे पत्नी से माफी मांगने के लिए कहा। इसके बाद उन्होंने पति से पत्नी की ओर देखकर आइ लव यू बोलने को कहा। पति ने पत्नी से आइ लव यू कहा, इसके बाद पत्नी से भी यही बात कहने के लिए कहा गया तो उसने भी पति को आइ लव यू कहा। इस प्रसंग के जरिए महाराज ने दंपती को आपसी प्रेम, समझ और परिवार को साथ लेकर चलने की सीख दी। प्रेम के लिए परिवार से दूर हुई युवती का सवाल एक युवती ने अंतरजातीय प्रेम विवाह से जुड़े सवाल पर अपनी परेशानी बताई। उसने कहा कि परिवार की असहमति के बावजूद वह अपने प्रेमी के साथ रहने लगी और अब परिवार उसे वापस आने के लिए कह रहा है। इस पर महाराज ने धर्म, परिवार और निर्णय के प्रति जिम्मेदारी से सोचने की बात कही। उन्होंने कहा कि जीवन के महत्वपूर्ण फैसले जल्दबाजी में नहीं बल्कि उनके परिणामों को समझकर लेने चाहिए। कारोबार छूटा तो बोले- भगवान में मन नहीं लगता एक व्यक्ति ने बताया कि कभी उसका बड़ा फर्नीचर कारोबार था, लेकिन पत्नी को ब्रेन हेमरेज होने के बाद परिस्थितियां बिगड़ गईं। अब वह छोटे-मोटे काम कर गुजारा कर रहा है और उसका भगवान में मन नहीं लगता। इस पर महाराज ने कहा कि पहले अपने काम में मन लगाएं। मेहनत और कर्म से परिस्थितियों को बदलने का प्रयास करें। उन्होंने सफलता के समय अहंकार से बचने की सीख देते हुए कहा कि समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। माया के पीछे भागता इंसान एक श्रद्धालु ने पूछा कि जब इंसान जानता है कि एक दिन सब कुछ छोड़कर जाना है, फिर भी मोह-माया क्यों नहीं छोड़ पाता। महाराज ने इसे ईश्वर की माया बताते हुए कहा कि मनुष्य को संसार में रहते हुए अपने कर्म करने चाहिए, लेकिन भगवान को भूलना नहीं चाहिए। उन्होंने समझाया कि धन-संपत्ति और सांसारिक वस्तुएं यहीं रह जाती हैं, इसलिए इनके पीछे भागते हुए जीवन का उद्देश्य नहीं भूलना चाहिए। सभी को मनुष्य बनाकर भेजा धर्म और मजहब को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि ईश्वर ने मनुष्य बनाकर भेजा है। समाज ने अपनी-अपनी पहचान और पंथ बनाए हैं। उन्होंने लोगों को आपसी भेदभाव और विवाद से दूर रहकर मानवता को प्राथमिकता देने का संदेश दिया। कथा के दौरान श्रद्धालु लगातार अपने जीवन से जुड़े सवाल लेकर पहुंचे और महाराज ने उनके जवाब देकर उन्हें कर्म, परिवार, प्रेम और संयम के साथ जीवन जीने की सीख दी।

बिजली उत्पादन में बड़ी कामयाबी! जल विद्युत इकाइयों ने अगस्त में लक्ष्य को 42 मिलियन यूनिट से पछाड़ा

पॉवर जनरेटिंग कंपनी की जल विद्युत इकाइयों ने पकड़ी रफ्तार, अगस्त में लक्ष्य से 42 मिलियन यूनिट अधिक उत्पादन भोपाल प्रदेश में मानसून की अच्छी बारिश का मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) की जल विद्युत इकाइयों को सीधा लाभ मिला है। कंपनी के जल विद्युत गृहों ने अगस्त में निर्धारित 339 मिलियन यूनिट के मुकाबले 380.90 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन कर लक्ष्य से करीब 42 मिलियन यूनिट अधिक उत्पादन दर्ज किया। इस दौरान जल विद्युत इकाइयों का प्लांट उपलब्धता कारक 83.40 प्रतिशत रहा। ‘रेडीनेस फर्स्ट’ रणनीति से वित्तीय वर्ष में भी लक्ष्य पार म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी के अंतर्गत प्रदेश में संचालित 10 जल विद्युत गृहों की कुल स्थापित क्षमता 915 मेगावाट है। चालू वित्तीय वर्ष में अगस्त माह के अंत तक 963 मिलियन यूनिट के निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 983 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हो चुका है। यानी कंपनी की जल विद्युत इकाइयां अब तक निर्धारित लक्ष्य से 20 मिलियन यूनिट आगे चल रही हैं। कंपनी ने चालू वित्तीय वर्ष में जल विद्युत गृहों के संचालन की रणनीति को ‘रेडीनेस फर्स्ट’ दृष्टिकोण पर केंद्रित किया है। इसके तहत मशीनरी, टरबाइन, जनरेटर और सहायक प्रणालियों के आवश्यक अनुरक्षण एवं तकनीकी परीक्षण समय रहते पूरे किए गए, जिससे मानसून के दौरान उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सके। 83.40 प्रतिशत रहा प्लांट फेक्टर अगस्त माह के अंत तक कंपनी की जल विद्युत इकाइयों का प्लांट उपलब्धता फेक्टर 83.40 प्रतिशत रहा। यह मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित 83.77 प्रतिशत वार्षिक मानक के करीब है। बेहतर उपलब्धता ने जल विद्युत गृहों को उपलब्ध जल के अनुरूप अधिकतम क्षमता से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कंपनी द्वारा जल विद्युत गृहों की मशीनरी और महत्वपूर्ण प्रणालियों की निगरानी के साथ-साथ आवश्यक अनुरक्षण कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे उत्पादन के दौरान तकनीकी व्यवधान की संभावना को न्यूनतम रखा जा सके। समय पर तैयारी और तकनीकी अनुशासन से बढ़ी उत्पादन क्षमता कंपनी के डायरेक्टर टेक्निकल सुबोध निगम ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में विश्वसनीयता केवल स्थापित क्षमता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि समय पर की गई तैयारी, तकनीकी दक्षता और परिचालन अनुशासन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। संभावित मौसमीय परिस्थितियों का पूर्व आकलन कर जल विद्युत गृहों को उच्च स्तर की निगरानी में संचालित किया गया, जिससे उपलब्ध जल संसाधनों का प्रभावी उपयोग संभव हुआ। मुख्य अभियंता जल विद्युत राजेन्द्र पटेल ने बताया कि सभी जल विद्युत गृहों में प्राथमिकता उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम, कुशल और किफायती उपयोग सुनिश्चित करने की है। इसके साथ ही इकाइयों को उनकी तकनीकी क्षमता के अनुरूप उपलब्ध रखने पर लगातार निगरानी की जा रही है।  

सनटेक सिटी मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, मोहाली SSP को भेजा समन

चंडीगढ़. एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने सनटेक सिटी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट मामले में जानकारी मुहैया करवाने के लिए मोहाली के SSP को समन भेजा है। सूत्रों के मुताबिक न्हें 10 सितंबर को पेश होकर जरूरी डिटेल्स देने को कहा गया है। यह समन डायरेक्टरेट की तरफ से प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के सेक्शन 54 के तहत जांच रिकॉर्ड शेयर करने की बार-बार रिक्वेस्ट के बाद जारी किया गया है। ED ने पहले 27, 29 और 31 अगस्त को पुलिस जांच की डिटेल्स मांगी थीं। हांलाकि SSP ऑफिस ने कोई जानकारी शेयर नहीं की गई। ED ने इससे पहले 1 जुलाई, 21 जुलाई, 14 अगस्त, 24 अगस्त और 25 अगस्त को पत्र और ईमेल के जरिए मोहाली पुलिस को अपनी जांच के नतीजे भेजे थे। इस बीच नए केस रजिस्टर करने की मांग की गई थी। नए अपराध रजिस्टर करने की रिक्वेस्ट पर अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। शिकायत में आरोप है कि न्यू चंडीगढ़ में सनटेक सिटी प्रोजेक्ट के लिए जमीन की तबदीली की मंजूरी लेने के लिए फर्जी सहमति पत्रों के जरिए किसानों से उनकी जमीन की असली कीमत ठगी गई। यह मामला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में भी उठाया गया था। 2022 की FIR के आधार पर सहगल को ED पहले ही मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान गिरफ्तार कर चुका है और लगभग 348 करोड़ रुपये के कथित जुर्म का मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में पूर्व मुख्य सचिव अनुराग वर्मा से भी रिकॉर्ड तलब किए गए हैं। अब इस मामले में आगे की जांच और कार्रवाई के लिए SSP को तलब किया गया है। 

अब स्कूल में ही NEET-JEE की कोचिंग, CG में शिक्षकों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

दुर्ग. जिले के शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत ऐसे मेधावी विधार्थी जो आर्थिक कारणों से नीट/जेईई जैसे परीक्षाओं में कोचिंग के अभाव में चयनित होने से वंचित हो जाते हैं, ऐसे विद्यार्थियों के लिए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के नेतृत्व व मार्गदर्शन में जिले में एक अभिनव प्रयास किया जा रहा है। चयन परीक्षा के माध्यम से कक्षा 11वीं एवं 12वीं विज्ञान के 40-40 विद्यार्थियों’ का चयन नीट एवं जेईई कोचिंग के लिए किया गया है। कोचिंग कक्षाओं का संचालन जिले के चयनित विषय विशेषज्ञ व्याख्याताओं के माध्यम से किया जाना है। इस हेतु चयनित विशेषज्ञ व्याख्याताओं के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन 8 सितंबर को जेआरडी स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय दुर्ग में किया गया। प्रशिक्षकों ने प्रशिक्षण के दौरान स्पष्ट किया कि यदि हम वास्तव में अपने कार्य का परिणाम देखना चाहते है, तो हमें केवल एप्रोच के साथ क्लास में जाने के बजाए पूरी तैयारी के साथ जाना होगा, यदि एक घंटे की क्लास लेनी है तो दो घंटे की क्लासेस की तैयारी होनी चाहिए। बच्चों की मानसिकता को परखते हुए पहले किस टॉपिक को डील किया जाना है इस बात को विशेष ध्यान देना होगा। कार्यशाला में मौजूद डॉ. केवी राव, संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग दुर्ग ने सभी प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि हमें एक मूल मंत्र याद रखना होगा कि इस पूरे प्रोसेस में हम जितना इंवॉल्व होंगे उतना ही बेहतर परिणाम दे पाएंगे। इससे एक उत्कृष्ट शिक्षक के रूप में पहचान बना पाएंगे।

सत्य निकेतन हादसे के बाद एक्शन में CM रेखा गुप्ता, दिल्ली के कई इलाकों में होगी बुलडोजर कार्रवाई

नई दिल्ली सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एमसीडी को अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने का निर्देश दिया है। मंगलवार को 17 इमारतों को ध्वस्त किए जाने के बाद बुधवार को दिल्ली के कई इलाकों में बुलडोजर ऐक्शन लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि नगर निगम के सभी वरिष्ठ अधिकारी ग्राउंड पर रहें। उन्होंने दिल्ली के सभी पीजी-हॉस्टल का सघन निरीक्षण करने को कहा है और अवैध निर्माण पर तेजी से कार्रवाई करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी आदेश दिया है कि जो भी निर्माण अवैध पाया जाता है उसके लिए दोषी अधिकारियों की पहचान की जाए। बिल्डिंग रिकॉर्ड खंगाला जाए और यह पता लगाया जाए कि किस वर्ष और किसके अधिकार क्षेत्र में उसका निर्माण किया गया था। ताबड़तोड़ चल रही है कार्रवाई सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली नगर निगम ने खतरनाक और अवैध भवनों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार को निगम ने अलग-अलग इलाकों में 17 इमारतों को ध्वस्त किया और पांच संपत्तियों को सील कर दिया। इसके अलावा 9 लोगों को कारण बताओ नोटिस, दो को सीलिंग नोटिस और 15 को ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया गया है। किन इलाकों में कार्रवाई मंगलवार को एमसीडी ने सैदुलाजाब, लक्ष्मी नगर, विश्वास नगर, मुखर्जी नगर, जामिया नगर, शाहीन बाग, तिलक नगर, करमपुरा, करोलबाग, रमेश नगर, मानसरोवर गार्डन, चांदनी चौक और नेहरू विहार समेत कई इलाकों में कार्रवाई की। इन इलाकों में बड़ी संख्या में अवैध इमारतों का निर्माण किया गया है। किसी मकान का नक्शा पास नहीं कराया गया है तो कई को तय मापदंड से अधिक ऊंचा बनाया गया है। कई इमारतों का ढांचा बेहद कमजोर पाया गया है। बड़े पैमाने पर जारी किए गए हैं नोटिस सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शीर्ष सरकारी और एमसीडी अधिकारियों के साथ बैठक की और अधिकारियों को पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास वाले इलाकों में निरीक्षण अभियान चलाने के निर्देश दिए। खासतौर पर उन मकानों का निरीक्षण करने को कहा गया है, जिनमें प्रथम दृष्टया ऊंचाई और मंजिल संबंधी नियमों का उल्लंघन किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, एक से 8 सितंबर के बीच नगर निकाय ने 48 संपत्तियों के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की और 15 संपत्तियों को सील किया। इसी अवधि के दौरान, निगम ने अनधिकृत निर्माण के लिए 90 कारण बताओ नोटिस, सीलिंग के लिए 124 कारण बताओ नोटिस और 66 तोड़फोड़ आदेश जारी किए। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक जून से 31 अगस्त के बीच एमसीडी ने 959 संपत्तियों के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की और 456 संपत्तियों को सील किया। इस अवधि के दौरान अनधिकृत निर्माण के लिए 1,461 कारण बताओ नोटिस, सीलिंग के लिए 590 कारण बताओ नोटिस और 687 तोड़फोड़ आदेश जारी किए गए।

बच्चों के बेहतर पोषण पर जोर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से बोलीं बेबी रानी मौर्य- विकसित भारत की मजबूत नींव रखें

आंगनबाड़ी बहनें बच्चों के पोषण का ध्यान रख विकसित भारत की नींव रखें : बेबी रानी मौर्य   केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी बोलीं, योगी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने जनविश्वास को बनाया विकास की आधारशिला   देश के 14 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र स्वस्थ और सशक्त भारत के संकल्प को बढ़ा रहे आगे    वाराणसी नौवें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश की महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि इस वर्ष पोषण माह की थीम ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ है। आंगनबाड़ी बहनों पर बच्चों के पोषण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। वे बच्चों के पोषण और प्रारंभिक विकास का ध्यान रखकर विकसित भारत की मजबूत नींव रखने का कार्य कर रही हैं।   बेबी रानी मौर्य ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर हॉट कुक्ड मील, सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही, पोषण के साथ प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य की चिंता जैसे आयामों को धरातल पर उतारा जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के लिए किताबें और खिलौने भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।   केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि पोषण माह अभियान कुपोषण से मुक्ति के साथ स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2018 में पोषण अभियान की शुरुआत की थी। आज पोषण का यह संकल्प जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ रहा है। सरकार की नीतियां जब जनता के जीवन से जुड़ती हैं तो वे संस्कृति का हिस्सा बन जाती हैं।   उन्होंने कहा कि देशभर में 14 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र स्वस्थ और सशक्त भारत के संकल्प की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने जनविश्वास को विकास की आधारशिला बनाया है। एक समय उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय थी, लेकिन 2017 के बाद प्रदेश सरकार ने महिला सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया।   केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री एवं मध्य प्रदेश के धार से सांसद सावित्री ठाकुर ने बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी को नमन करते हुए कहा कि पिछले आठ वर्षों में पोषण अभियान के अंतर्गत देशभर में 150 करोड़ से अधिक जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की गई हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। वहीं, सुकन्या समृद्धि योजना बच्चियों के भविष्य को सुरक्षित करने का कार्य कर रही है।   विभिन्न प्रदेशों की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने साझा किए अनुभव कार्यक्रम में विभिन्न प्रदेशों से आईं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा किए। गांधीनगर, गुजरात से आईं भावना ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति अब काफी बेहतर हुई है। लोगों का भरोसा बढ़ा है और वे अपने बच्चों को केंद्रों पर भेज रहे हैं। गर्भवती महिलाएं पोषाहार को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सलाह लेती हैं। बच्चों के जन्म के बाद भी अभिभावक उनके खानपान को लेकर मार्गदर्शन लेते हैं। कई बच्चे घर पर खाना खाने में आनाकानी करते थे, लेकिन केंद्र पर उनकी जरूरत को समझकर भोजन दिया गया तो वे चाव से खाने लगे।   तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई से आईं आर. शंकरी ने बताया कि जन्म से छह माह तक शिशुओं के स्वास्थ्य और विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। बच्चों का बेहतर विकास देखकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को खुशी होती है कि उनके प्रयास से देश का भविष्य बेहतर हो रहा है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषण और बाल विकास के क्षेत्र का ‘फ्रंटलाइन वॉरियर’ बताया।   गोरखपुर के बसियाखोर आंगनबाड़ी केंद्र की संध्या सिंह ने बताया कि बच्चों का समय-समय पर वजन और लंबाई मापी जाती है। इससे उनके पोषण की स्थिति का पता चलता है। कुपोषण की ओर बढ़ रहे बच्चों की विशेष निगरानी की जाती है और उनके अभिभावकों से मिलकर खानपान एवं देखभाल के बारे में जानकारी दी जाती है।