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लंबरदार पद पर अब तय होगी न्यूनतम योग्यता, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा नियम

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब में गांवों के लंबरदारों की नियुक्ति को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार से इस पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने पर विचार करने को कहा है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा नियमों में शैक्षणिक योग्यता निर्धारित न होने के कारण केवल कम पढ़ा-लिखा होना किसी उम्मीदवार को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हर्ष बांगर की पीठ ने पटियाला जिले के एक गांव में नियुक्त सातवीं पास लंबरदार की नियुक्ति को बरकरार रखा। इस नियुक्ति को एक अधिक शिक्षित और कम उम्र के उम्मीदवार ने चुनौती दी थी। 12वीं पास था याचिकाकर्ता याचिकाकर्ता 12वीं पास था और उसका तर्क था कि चयनित उम्मीदवार न केवल कम शिक्षित है बल्कि उम्र में भी अधिक है, इसलिए उसे लंबरदार नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए था। हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि पंजाब भूमि राजस्व नियमों में लंबरदार पद के लिए किसी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता का प्रावधान नहीं है। ऐसे में केवल कम शैक्षणिक योग्यता के आधार पर चयनित उम्मीदवार को अयोग्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि लंबरदार को गांव स्तर पर प्रशासनिक कार्य, राजस्व संबंधी जिम्मेदारियां तथा सरकारी अधिकारियों के साथ समन्वय जैसे कार्य करने होते हैं। ऐसे में यह उचित होगा कि उसके पास पंजाबी, हिंदी और अंग्रेजी की बुनियादी समझ हो तथा कम से कम मैट्रिक स्तर तक की शिक्षा हो। पीठ ने अपने आदेश में हरियाणा का उदाहरण भी दिया, जहां लंबरदार पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता ‘मिडिल पास’ निर्धारित है। अदालत ने कहा कि पंजाब सरकार को भी वर्तमान परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को देखते हुए इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उम्र संबंधी दलील खारिज अदालत ने उम्र संबंधी दलील को भी खारिज करते हुए कहा कि केवल अधिक उम्र होना नियुक्ति रद्द करने का आधार नहीं बन सकता। उम्र का महत्व तभी है जब उससे व्यक्ति की कार्य करने की क्षमता प्रभावित होती हो। मामले में ऐसा रिकॉर्ड या शिकायत पेश नहीं की गई जिससे यह साबित हो कि चयनित लंबरदार अपने दायित्व निभाने में असमर्थ है। हाई कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित व्यक्ति पिछले करीब दस वर्षों से लंबरदार के रूप में कार्य कर रहा है और उसके कामकाज को लेकर कोई शिकायत सामने नहीं आई। इसी आधार पर अदालत ने नियुक्ति में हस्तक्षेप से इन्कार करते हुए आदेश की प्रति पंजाब सरकार को भेजने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में नियमों में आवश्यक बदलाव पर विचार किया जा सके।

राजस्थानी खोबा रोटी: देसी घी से भरपूर कुरकुरी और हेल्दी पारंपरिक रेसिपी

रोटी भारतीय खाने का अहम हिस्सा है जो हर घर में लगभग रोज बनाई जाती है. आमतौर पर लोग गेहूं की नॉर्मल रोटी खाते है. लेकिन भारत में रोटियों की कई ऐसी अनगिनत वैराइटी हैं जो अपने स्वाद के लिए जानी जाती हैं. इन्हीं में से एक है राजस्थान की मशहूर खोबा रोटी जो खाने में टेस्टी होने के साथ-साथ काफी हेल्दी भी होती है. यह रोटी नॉर्मल रोटी से थोड़ी मोटी होती है और इसके ऊपर बने खूबसूरत डिजाइन इसे खास बनाते हैं. खास बात यह है कि इसे घर पर भी बहुत आसानी से बनाया जा सकता है. आइए जानते हैं कि घर पर आसानी से राजस्थानी खोबा रोटी कैसे बना सकते हैं और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है. इंग्रेडिएंट्स (ingredients) 4 कप गेहूं का आटा ½ छोटा चम्मच सौंफ पाउडर ½ छोटा चम्मच अजवाइन ¼ छोटा चम्मच हल्दी पाउडर ¼ कप घी (मोयन के लिए) नमक स्वादानुसार शुद्ध देसी घी (रोटी में भरने और सेकने के लिए) पानी जरूरत के मुताबिक खोबा रोटी बनाते कैसे हैं? खोबा रोटी बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े बर्तन में 4 कप गेहूं का आटा लें. इसमें सौंफ पाउडर, अजवाइन, नमक और हल्दी पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें. अब इसमें 1/4 कप घी का मोयन डालें और हाथों से अच्छे से मिक्स करें, ताकि घी आटे में अच्छी तरह मिल जाए.  इसके बाद थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए नरम और लचीला आटा गूंथ लें. ध्यान रखें कि आटा न ज्यादा सख्त हो और न ही ज्यादा नरम. आटा तैयार होने के बाद इसे 10-15 मिनट के लिए ढककर रख दें, ताकि मसाले और घी अच्छी तरह सेट हो जाएं. अब आटे की एक बड़ी लोई लें और इसे मोटा बेलें. इसकी मोटाई लगभग आधा इंच रखें. बेलने के बाद चाकू या कांटे की मदद से रोटी पर हल्के-हल्के छेद कर दें. इससे रोटी अंदर तक अच्छी तरह पकती है और कुरकुरी बनती है.  अब तवे पर थोड़ा सा घी लगाकर रोटी डालें. जब रोटी एक तरफ से हल्की पक जाए तो इसे पलट दें. इसके बाद गैस कम कर दें और उंगलियों या चिमटा की मदद से रोटी की ऊपरी सतह पर छोटे-छोटे पिंच बनाते हुए पारंपरिक खोबा डिजाइन तैयार करें. ये डिजाइन रोटी को खास लुक देने के साथ घी को अंदर तक सोखने में भी मदद करती है. अब रोटी को दोनों तरफ से धीमी आंच पर सुनहरा और खस्ता होने तक सेंकें. चाहें तो पारंपरिक स्वाद के लिए इसे तवे से उतारकर सीधे गैस पर भी हल्का सा सेंक सकते हैं. रोटी तैयार होने के बाद इसके खोबों में ऊपर से देसी घी डालें, ताकि घी पूरी तरह अंदर तक चला जाए. अब गरमागरम खोबा रोटी तैयार है. इसे पंचमेल दाल, गट्टे की सब्जी, लहसुन की चटनी या फिर गुड़ और घी के साथ परोसें. इसका कुरकुरा स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को बेहद पसंद आएगा.  

रेलवे मेंटेनेंस के चलते चार दिन नहीं चलेगी बिलासपुर-गेवरारोड मेमू ट्रेन

बिलासपुर. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल के चांपा-गेवरारोड सेक्शन के मध्य स्थित मड़वारानी स्टेशन में अधोसंरचना विकास के अंतर्गत अतिरिक्त लूप लाइन की कमीशनिंग हेतु प्री-नॉन इंटरलॉकिंग तथा नॉन इंटरलॉकिंग कार्य किया जाएगा. इसके वजह से बिलासपुर-गेवरारोड-बिलासपुर मेमू पैसेंजर 21 मई से 24 मई तक नहीं चलेगी. भविष्य में इस सेक्शन की परिचालन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी. इस दौरान 21 से 24 मई तक गाड़ी संख्या 68734/68733 बिलासपुर-गेवरारोड-बिलासपुर मेमू पैसेंजर रद्द रहेगी. 21 से 24 मई तक गाड़ी संख्या 68732/68731 बिलासपुर-कोरबा-बिलासपुर मेमू पैसेंजर रद रहेगी. देवरी अंडरब्रिज पर 5 दिन बंद रहेगा सड़क यातायात बिलासपुर. बिलासपुर मंडल क्षेत्राधिकार के अंतर्गत रेलवे अंडरब्रिज में लोगों को बेहतर सड़क आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने हेतु रेल प्रशासन प्रतिबद्ध है. रेलवे प्रशासन द्वारा सारागांव-बाराद्वार स्टेशनों के मध्य किमी 655.862 से 655.867 में स्थित देवरी रेल अंडरब्रिज को 20 मई (बुधवार) से 24 मई (रविवार) तक पूर्णतः बंद कर रोड मरम्मत एवं अन्य आवश्यक कार्य करने का निर्णय लिया गया है. इसके फलस्वरूप यह रेल अंडरब्रिज 20 मई (बुधवार) से 24 मई (रविवार) तक सड़क आवागमन हेतु पूर्णतः बंद रहेगी. इस अवधि में सड़क यातायात के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में पास में ही स्थित रेल अंडरब्रिज संख्या 54 (सोननदी ब्रिज) तथा भारत माला अंडरब्रिज का उपयोग किया जा सकता है. 

कोर कमेटी बैठक में MLC चुनाव पर मंथन, भाजपा ने 60-70 नामों पर की चर्चा

 पटना अगले महीने खाली हो रही विधान पार्षद की सीटों में से भाजपा की झोली में कम से कम चार आएंगी। इन सीटों पर प्रत्याशियों के चयन को लेकर सोमवार को बिहार भाजपा की कोर कमेटी की बैठक हुई। प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे। लगभग घंटे भर चली बैठक में सांगठनिक गतिविधियों पर चर्चा हुई। हर दो महीने पर होने वाली कोर कमेटी की बैठक में विधान पार्षद के संभावित उम्मीदवारों पर मंथन हुआ। बैठक में यह बात आई कि रिक्त हो रही नौ विप सीटों में भाजपा को चार, जदयू को तीन, लोजपाआर को एक और विपक्ष के हिस्से में एक सीट आएगी। भाजपा के खाते में आने वाली चार सीटों पर पार्टी नेताओं ने लगभग 60-70 नामों पर मंथन किया। हालांकि किसी भी नाम पर अंतिम सहमति नहीं बनी। पार्टी की परिपाटी के अनुसार एक सीट के लिए तीन उम्मीदवारों के नाम भेजे जाएंगे। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के स्तर पर ही लिया जाएगा। वहीं प्रदेश भाजपा कमेटी का गठन होना है। कोर कमेटी की बैठक में प्रदेश कमेटी में शामिल होने वाले पदाधिकारियों के नामों पर भी मंथन हुआ। पीएम नरेन्द्र मोदी को देश की गद्दी संभाले हुए 12 साल होने को है। पार्टी की ओर से इस उपलक्ष्य में राज्यव्यापी कार्यक्रम चलाए जाएंगे। आने वाले दिनों में योग दिवस का भी आयोजन होना है। इस कार्यक्रम को लेकर भी पार्टी की ओर से जल्द ही कार्यक्रम घोषित किए जाएंगे। इसके अलावा जिला स्तर पर पार्टी का प्रशिक्षण शिविर चल रहा है। इसे मंडल स्तर तक किया जाना है। बैठक में प्रशिक्षण शिविर को लेकर भी मंथन हुआ। बैठक में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल, सांसद राधामोहन सिंह, डॉ. संजय जायसवाल, पूर्व मंत्री मंगल पांडेय, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेन्द्र, प्रदेश संगठन महामंत्री भीखू भाई दलसानिया, बिहार भाजपा सह प्रभारी दीपक प्रकाश मौजूद थे।

‘डॉक्टर’ बनकर चला रहा था फर्जीवाड़ा का धंधा, 12वीं पास आरोपी गिरफ्तार

कानपूर उत्तर प्रदेश के कानपुर में फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट तैयार करने वाले बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद जांच में एक के बाद एक चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं. फरवरी में पुलिस ने शहर में फर्जी मार्कशीट तैयार करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था. अब इसी मामले की जांच के दौरान पुलिस ने ऐसे सरगना को गिरफ्तार किया है, जो हैदराबाद से बैठकर बड़े पैमाने पर इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था. 12वीं पास था 'डॉक्टर मनीष कुमार' पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान मनीष कुमार के रूप में हुई है, जो खुद को 'डॉक्टर मनीष कुमार' बताता था, जबकि जांच में सामने आया कि उसकी शैक्षणिक योग्यता केवल 12वीं तक है. आरोप है कि वह 'ग्लोबल बुक ऑफ एक्सीलेंस अवॉर्ड यूके लंदन' नाम से देश के अलग-अलग शहरों में कार्यक्रम आयोजित कर खुद की अलग पहचान बना रहा था. वह मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में कई कार्यक्रम कर चुका था, जहां समाजसेवियों और अन्य लोगों को सम्मानित करने के नाम पर अपनी पहुंच और प्रभाव बढ़ा रहा था. फर्जी मार्कशीट गिरोह से संपर्क पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के मुताबिक, मनीष मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला था. बाद में वह बिहार में रहा और फिर हैदराबाद जाकर कंपनी और कॉल सेंटर संचालित करने लगा. जांच में पता चला कि उसका संपर्क कानपुर में पकड़े गए फर्जी मार्कशीट गिरोह से था. पुलिस के अनुसार, मनीष ने 80 से अधिक फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट तैयार कर लोगों तक पहुंचाए थे. बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क के जरिए दस्तावेज तैयार करने के बदले 80 से 90 हजार रुपये तक वसूले जाते थे. पुलिस का दावा है कि यह पूरा काम व्हाट्सएप के माध्यम से संचालित किया जाता था, जहां लोगों से डिटेल लेकर नकली दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते थे. देश के कई राज्यों तक फैला नेटवर्क जांच में यह भी सामने आया कि उन्नाव में अर्जुन यादव नाम के युवक को फ्रेंचाइजी दी गई थी, जो कोचिंग सेंटर संचालित करता था. पुलिस ने मनीष कुमार और अर्जुन यादव को गिरफ्तार कर लिया है. पूछताछ के दौरान कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं. पुलिस का मानना है कि इस गिरोह का नेटवर्क देश के कई राज्यों तक फैला हुआ था और जांच अभी जारी है.

मोहाली में किसानों का हल्लाबोल, ट्रैक्टर मार्च से गूंजीं सड़कें; गमाडा के खिलाफ बढ़ा विरोध

मोहाली ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) द्वारा विकास कार्यों के नाम पर की जा रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के खिलाफ इलाके के किसानों का गुस्सा भड़क गया है। पुआध इंसाफ मोर्चा की अगुवाई में आज सैकड़ों किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ सड़कों पर उतर आए। किसानों द्वारा सरकार की भूमि अधिग्रहण की कथित मारू नीतियों के खिलाफ यह विशाल ट्रैक्टर मार्च निकाला जा रहा है, जिससे ट्राईसिटी और विशेषकर मोहाली शहर में राजनीतिक व प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। यह रोष मार्च नजदीकी गांव दैड़ी के फ्लाईओवर से जोरदार नारेबाजी के साथ शुरू हुआ। ट्रैक्टरों पर सवार किसान एयरपोर्ट रोड से होते हुए मोहाली के फेज-8 स्थित गमाडा के मुख्य दफ्तर 'पुड्डा भवन' की तरफ बढ़ रहे हैं। किसानों के इस बड़े प्रदर्शन को देखते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। किसान नेताओं ने दी तीखे संघर्ष की चेतावनी इस ट्रैक्टर मार्च में किसानों के हक के लिए लड़ने वाले प्रमुख संगठन 'किसान मजदूर मोर्चा' के वरिष्ठ नेता मनजीत सिंह राय और दिलबाग सिंह गिल विशेष तौर पर शामिल हुए। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी किसानों ने पंजाब सरकार और गमाडा प्रशासन के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार विकास की आड़ में किसानों को उजाड़ने और बर्बाद करने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी कीमती जमीनों का बनता उचित मुआवजा और हक नहीं दिया जा रहा है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन ने उनकी मांगों की तरफ तुरंत ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में इस संघर्ष को और तेज किया जाएगा।

ड्रोन सर्वे और GIS मैपिंग से बदलेगी चंडीगढ़ की तस्वीर, ‘नक्शा प्रोजेक्ट’ अंतिम चरण में

चंडीगढ़. 15 जून तक प्रशासन की ओर से शुरू किया गया नक्शा प्रोजेक्ट (नेशनल जियोस्पेशियल नालेज आधारित लैंड सर्वे आफ अर्बन हैबिटेशन्स) का काम पूरा हो जाएगा।इस पायलट प्रोजेक्ट में पांच गांव बुड़ैल, अटावा, कजहेड़ी, पलसौरा और सारंगपुर और 15 सेक्टर (सेक्टर 2 से 17) शामिल हैं। ड्रोन सर्वे पूर्ण हो चुका है तथा संपत्तियों की फील्ड वेरिफिकेशन की जा रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत इमारतों का प्रशासन की ओर से डिजिटल सर्वे किया जा रहा है ।सर्वे के दौरान अधिकृत टीमें घर-घर जाकर संपत्ति स्वामित्व से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है। यह परियोजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा भूमि प्रशासन के आधुनिकीकरण के लिए उन्नत भू-स्थानिक तकनीकों के उपयोग के तहत शुरू की गई है। यह डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम पर आधारित है और ड्रोन सर्वेक्षण, उच्च-रिज़ाल्यूशन इमेजरी तथा जीआईएस मैपिंग के माध्यम से भूमि पार्सलों की सटीक सीमांकन और उन्हें प्रापर्टी का मालिकाना विवरण से जोड़ने का कार्य करती है। प्रशासन के अनुसार शहरी गांवों में अक्सर पुराने मैनुअल रिकार्ड, आपस में ओवरलैपिंग दावे और अस्पष्ट सीमाओं के कारण संपत्ति विवाद उत्पन्न होते रहे हैं। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद मालिकाना हक में पारदर्शिता और कानूनी स्पष्टता आएगी। अधिकारियों के अनुसार रिकॉर्ड से संपत्ति विवाद कम होंगे तथा खरीद-फरोख्त और लीज प्रक्रियाएं तेज, सुरक्षित और धोखाधड़ी से मुक्त बनेंगी। साथ ही बैंक और वित्तीय संस्थानों को मालिकाना सत्यापन में आसानी होगी, जिससे ऋण स्वीकृति प्रक्रिया भी सरल होगी। पायलट प्राेजेक्ट के बाद बाकी शहर के अन्य एरिया का सर्वे किया जाएगा । प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल 30.61 वर्ग किमी पहले सर्वे में लिए प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल 30.61 वर्ग किमी है ।जिसमे एक लाख 47 हजार जनसंख्या रहती है । प्रशासन के अनुसार शहर की सभी इमारतों और उनके आकार-प्रकार का अब डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए 20 टीमें गठित काम कर रही है। जो कि इन सेक्टरों में आ रही है सर्वे टीम शहर की हर इमारत की तस्वीर लेगी और उसके क्षेत्रफल, ऊंचाई और उपयोग की जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जाएगी। अब तक यह रिकार्ड मैनुअल तरीके से रखा जाता था जिससे विवाद और रिकॉर्ड की कमी जैसी समस्याएं सामने आती थीं। डिजिटल रिकार्ड तैयार होने के बाद किसी भी संपत्ति विवाद की पुष्टि मिनटों में हो सकेगी।प्रशासन के पास प्रत्येक इमारत का सही डेटा रहेगा।

मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में शामिल होंगे योगी आदित्यनाथ, CM साय ने किया स्वागत

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में शामिल होने पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री साय ने उन्हें राजकीय गमछा भेंट कर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति के अनुरूप उन्हें सम्मान दिया। बता दें कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक का आयोजन आज बस्तर में किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय, विकास और प्रशासनिक विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच विभिन्न समसामयिक मुद्दों, राज्यों के बीच आपसी समन्वय तथा क्षेत्रीय विकास से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। बैठक में सुशासन, विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

सेहत के लिए साथ आएं सभी दल, सुखना लेक पर CM सैनी ने विपक्ष से भी की अपील

चंडीगढ़. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए विशेष सहयोग के आह्वान का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। इसी कड़ी में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक अनूठी पहल करते हुए साइकिल से सफर तय किया और जनता के बीच 'स्वस्थ भारत, स्वस्थ हरियाणा' का संदेश दिया। मुख्यमंत्री सैनी सुबह-सुबह चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना लेक पहुंचे। वहां उन्होंने न केवल मॉर्निंग वॉक की, बल्कि सैर पर आए आम नागरिकों और युवाओं से मुलाकात भी की। मुख्यमंत्री ने लोगों से बातचीत करते हुए उन्हें स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया। विपक्ष से भी मिलकर साथ आने की अपील इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए आम जनता से सहयोग की अपील की है। उन्होंने विपक्ष को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के इस राष्ट्रव्यापी आह्वान पर विपक्ष को भी राजनीति से ऊपर उठकर जनता के साथ मिलकर 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने में साथ आना चाहिए। हरियाणा सरकार ने जारी की SOP मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक स्तर पर उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देते हुए कहा, "हरियाणा में भी हमने केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार अपनी राज्य सरकार के स्तर पर SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी कर दी है।" पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की बचत को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने अब वर्चुअल मीटिंग के साथ-साथ 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम करने) जैसे विकल्पों को भी अपनाने का फैसला किया है, जिससे यातायात और प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।

भिखारी ठाकुर के नाम पर संग्रहालय की तैयारी, बिहार की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा

पटना बिहार में राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय स्थापित करने की तैयारी सरकार के स्तर पर चल रही है। साथ ही भोजपुरी के शेक्सपीयर भिखारी ठाकुर के नाम से संग्रहालय भी बनाने की तैयारी है। सम्राट चौधरी सरकार के कला संस्कृति विभाग ने दोनों ही प्रस्तावों को जमीन पर उतारने का मन बना लिया है। कला विश्वविद्यालय की योजना जमीन पर उतरी तो बिहार इस उपलब्धि को पाने वाला देश का 17वां राज्य बन जाएगा। दिल्ली, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे कला उन्नत प्रदेशों में पहले से ही इस तरह के कला विषयक विश्वविद्यालय हैं। गौरतलब है कि बिहार में चाक्षुष कला (फाइन आटर्स) की पढ़ाई तो पटना आर्ट कॉलेज में स्नातक स्तर तक की होती है, लेकिन प्रदर्श (मंचीय कला) आटर्स के शिक्षण के लिए कोई कॉलेज या विश्वविद्यालय नहीं है। शहनाई के जादूगर को समर्पित बिस्मिल्लाह खान महाविद्यालय भी अभी जमीन पर उतरना बाकी है। ऐसे में कला संस्कृति विभाग ने राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय खोलने का सैद्धांतिक निर्णय ले लिया है। जल्द ही विभाग प्रस्ताव बनाकर शीर्षस्तर पर इसकी मंजूरी लेने की पहल करेगा। कला संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी ने सोमवार को हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय में सभी संबंधित विषयों और कलाओं के विशेषज्ञ और शिक्षक होंगे, ताकि यहां पर कलाकार रंगमंच, नृत्य और संगीत तथा इनकी उपविधाओं में विधिवत प्रशिक्षित होकर डिग्री पा सकें । उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर का होगा, जिससे विभिन्न राज्यों के विद्यार्थी भी यहां आकर उच्च कोटि की शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। बिहार में कला के क्षेत्र में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। ऐसे में यहां विश्वविद्यालय स्थापित होने से यहां की प्रतिभाओं को उचित सम्मान और पहचान मिलेगी। चुनौतियां भी कम नहीं राष्ट्रीय कला विवि खोलने की राह में कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। खासतौर से सुयोग्य प्रशिक्षक और कला की समझ रखने वाले प्रशासक की तलाश आसान नहीं होगी। कला विश्वविद्यालय के फायदे कला संस्कृति मंत्री डॉक्टर प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय स्थापित होने से कलाकारों का पलायन थमेगा। राज्य की कला प्रतिभा अपने यहां ही विकसित होगी। हमारी कलाओं का संरक्षण होगा। दूसरे राज्य से भी कला विद्यार्थी प्रदेश में शिक्षा ग्रहण करने आएंगे तो बिहार की ब्रांडिंग भी होगी। रंगमंच, नृत्य और संगीत में उच्चशिक्षा के लिए फिलहाल बिहार के कलाकार दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों पर आश्रित हैं। केवल संगीत और नृत्य में हर साल हजारों बच्चे यूपी और हरियाणा समेत अन्य राज्यों के बोर्ड से परीक्षा देते हैं और राज्य का अच्छा-खासा पैसा बाहर जाता है। रंगमंच में भी लम्बे समय से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की तर्ज पर ड्रामा स्कूल खोलने की मांग उठती रही है। नए विश्वविद्यालय के खुलने से रंगमंच समेत तीनों विधाओं में कलाकारों का विस्थापन रुकेगा।