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बिहार के सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव, 12वीं पास छात्रों को मिलेगा प्लेसमेंट का मौका

 पटना बिहार के सरकारी स्कूलों में भी प्लेसमेंट की सुविधा मिलेगी। राज्य सरकार 12वीं कक्षा में ऐसे इच्छुक बच्चों को प्लेसमेंट की सुविधा देगी जो आगे पढ़ाई नहीं करना चाहते या फिर जो 12वीं के बाद ही करियर बनाना चाहते हैं। इसके लिए बड़े व्यावसायिक कंपनियों की मदद ली जाएगी। इसमें बड़ी कंपिनयों और बड़े औद्योगिक घरानों से भी सहयोग लिया जाएगा। बिहार सरकार अब सरकारी स्कूलों के 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाई के बाद सीधे रोजगार से जोड़ने की तैयारी में है। इस व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य उन विद्यार्थियों को अवसर देना है, जो इंटरमीडिएट के बाद परिवार की आर्थिक स्थित या अन्य कारणों से कामकाजी दुनिया में प्रवेश करना चाहते हैं। ऐसे बच्चों को विद्यालय से ही प्लेसमेंट की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। अवसर विकसित होंगे प्रस्तावित नई पहल के तहत विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की रुचि, योग्यता और कौशल का आकलन कर उन्हें निजी कंपनियों तथा विभिन्न रोजगार क्षेत्रों से जोड़ा जाएगा। सरकार इसके लिए बड़े व्यावसायिक समूहों और उद्योग जगत का सहयोग लेने की योजना बना रही है। देश की नामी-गिरामी कंपनी और बड़े औद्योगिक घरानों सहित अन्य कंपनियों की भागीदारी से प्लेसमेंट, प्रशिक्षण और अप्रेंटिसशिप के अवसर विकसित किए जाएंगे। कौशल के अभाव में बेहतर प्सेलमेंट नहीं मिलता बिहार में 13 लाख बच्चे सरकारी विद्यालयों में इंटर की पढ़ाई करते हैं। इंटर स्तर पर मेडिकल, इंजीनियरिंग, एनडीए के सात-साथ रेलवे, बैंक में बड़ी संख्या में लड़के जाते हैं। निजी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में बच्चे जाते हैं। लेकिन जानकारी और कौशल के अभाव में उन्हें बेहतर प्सेलमेंट नहीं मिल पाता। इसीलिए सरकार ने यह व्यवस्था शुरू की है। सरकार की बड़े औद्योगिक घरानों और कंपनियों से अपेक्षा होगी कि वे विद्यार्थियों के लिए एंट्री-लेवल रोजगार, प्रशिक्षु पद, ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग और अप्रेंटिसशिप के अवसर उपलब्ध कराएं। विद्यार्थियों के पास दो विकल्प होंगे राज्य में पहले से कौशल विकास और उद्योग-संबद्ध प्रशिक्षण के जरिए युवाओं को रोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जाते रहे हैं। नई व्यवस्था से 12वीं पास विद्यार्थियों के सामने दो स्पष्ट रास्ते होंगे। पहला तो उच्च शिक्षा में दाखिला। दूसरा कौशल प्रशिक्षण के बाद नौकरी या अप्रेंटिसशिप चुनना। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए यह पहल आय का साधन बनाने में उपयोगी हो सकती है। विशेष विद्यालयों का चयन किया जाएगा इस योजना में केवल नौकरी दिलाने पर ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार योग्य बनाने पर भी जोर रहेगा। 12वीं के बाद चयनित युवाओं को संचार कौशल, डिजिटल दक्षता, कार्यस्थल व्यवहार, तकनीकी प्रशिक्षण तथा क्षेत्र-विशेष की जरूरतों के अनुरूप तैयारी कराई जा सकती है। इसके लिए कुछ विशेष सरकारी विद्यालयों का चयन किया जाएगा, जहां 12 वीं के बाद बच्चों को रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा। इन विद्यालयों में बड़ी कंपनियों को भी स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि हम 12 वीं के बाद इच्छुक बच्चों को उनके बेहतर करियर और रोजगार दोनों में मदद करेंगे। जो बच्चे रोजगार चाहते हैं, उनके लिए प्लेसमेंट की योजना बनायी जा रही है। हम विद्यालय के बाद ही उनके लिए रोजगार का प्रबंध करेंगे।

डॉ. राजेश्वरी अम्मा का जीवन निःस्वार्थ सेवा और मानवता की मिसाल: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

रायपुर : निःस्वार्थ सेवा और मानवता की मिसाल है डॉ. राजेश्वरी अम्मा का जीवन : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी सत्य साई संजीवनी अस्पताल में डॉक्यूमेंट्री फिल्म “डॉ. अम्मा” की हुई स्क्रीनिंग रायपुर नवा रायपुर स्थित सत्य साई संजीवनी अस्पताल में माता डॉ. सी. राजेश्वरी जी के प्रेरणादायी जीवन और मानवता की निःस्वार्थ सेवा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म “DR. AMMA – 50 Years of Healing, Humanity & Hope” की स्क्रीनिंग आयोजित हुई। कार्यक्रम में मंत्री रामविचार नेताम एवं वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी शामिल हुए। रायपुर : निःस्वार्थ सेवा और मानवता की मिसाल है डॉ. राजेश्वरी अम्मा का जीवन : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि माता डॉ. सी. राजेश्वरी जी ने अपना संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा के लिए समर्पित किया है। उनका जीवन सेवा, समर्पण और करुणा की प्रेरणादायी गाथा है। डॉक्यूमेंट्री फिल्म के माध्यम से उनके जीवन, कार्यों और समाज के प्रति योगदान को लाखों लोग जान सकेंगे तथा उनसे प्रेरणा प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा करने वाले व्यक्तित्व समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत होते हैं। डॉ. राजेश्वरी अम्मा जी का जीवन यह संदेश देता है कि सेवा का संकल्प समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकता है। वित्त मंत्री चौधरी ने इस पुनीत अवसर पर सत्य साई परिवार सहित डॉक्यूमेंट्री फिल्म के निर्माण और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में राजनांदगांव के पूर्व सांसद अभिषेक सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं सत्य साई परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

सक्रिय जीवनशैली से हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा होगा कम, डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने बताया बचाव का तरीका

सक्रिय जीवन शैली हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम में सहायक- डॉ मनीषा श्रीवास्तव भोपाल भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी), भोपाल में 08 सितंबर 2026 को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वर्ष 2026 में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस की थीम “हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन एवं पुनर्वास में फिजियोथेरेपी और शारीरिक गतिविधि की भूमिका” रही। बीएमएचआरसी के सभागार में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, NCAHP (National Commission for Allied and Healthcare Professions) के अध्यक्ष  डॉ. डी. विजय कुमार थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने की। अपने उद्बोधन में डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने विश्व फिजियोथेरेपी दिवस 2026 की थीम के प्रमुख संदेशों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हृदय संबंधी रोग (सीवीडी) विश्व स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हृदय रोग एवं स्ट्रोक की रोकथाम में नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली की महत्वपूर्ण भूमिका है। फिजियोथेरेपिस्ट लोगों को शारीरिक रूप से सक्रिय रहने तथा दीर्घकालिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बेहतर प्रबंधन के लिए प्रेरित एवं प्रशिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि शारीरिक गतिविधि एवं नियमित मूवमेंट व्यक्ति को स्वतंत्र एवं सक्रिय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना चाहिए तथा प्रत्येक आधे घंटे में शरीर को सक्रिय अवस्था में लाने का प्रयास करना चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधि हृदय रोग एवं स्ट्रोक की रोकथाम में सहायक हो सकती है। मुख्य अतिथि डॉ. डी. विजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में “वन हेल्थ, वन नेशन” के दृष्टिकोण के तहत विश्व फिजियोथेरेपी दिवस को समग्र स्वास्थ्य चेतना के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक तक शारीरिक तंदुरुस्ती एवं पुनर्वास संबंधी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने फिजियोथेरेपी के संबंध में विश्वसनीय जानकारी साझा करने, आवश्यकता पड़ने पर उचित चिकित्सा एवं पुनर्वास सेवाएं लेने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने तथा स्वास्थ्य एवं पुनर्वास के क्षेत्र में फिजियोथेरेपी की व्यापक भूमिका के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के विभिन्न जिला चिकित्सालयों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क फिजियोथेरेपी शिविर तथा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों एवं पुनर्वास केंद्रों में फिजियोथेरेपिस्ट की सेवाएं ली जा रही हैं, जिससे स्वास्थ्य एवं पुनर्वास सेवाओं को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने में सहायता मिल रही है। कार्यक्रम में फिजियोथेरेपी विभाग के प्रभारी डॉ. असलम जमाली ने कहा कि प्रत्येक चार में से एक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में स्ट्रोक होने की संभावना रहती है, जबकि अधिकांश स्ट्रोक के जोखिम को प्रभावी जीवनशैली एवं स्वास्थ्य प्रबंधन के माध्यम से कम किया जा सकता है। उन्होंने नियमित व्यायाम एवं शारीरिक सक्रियता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सप्ताह में पांच दिन लगभग 30 मिनट का नियमित व्यायाम स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है। उन्होंने संदेश दिया कि “ज्यादा चलें और सक्रिय रहें, बैठे कम” को दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। नियमित व्यायाम से मांसपेशियां मजबूत होती हैं तथा शारीरिक क्षमता में सुधार होता है।  न्यूरोमेडिसिन के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रचित राज सक्सेना ने “मैनेजमेंट ऑफ स्ट्रोक” विषय पर पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी। उन्होंने स्ट्रोक के उपचार में समय पर चिकित्सा सहायता प्राप्त करने के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने स्ट्रोक के प्रारंभिक उपचार में समय की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। न्यूरो सर्जरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सौरभ गुप्ता ने अपने प्रस्तुतीकरण में सर्जरी के पश्चात मरीज के पुनर्वास में फिजियोथेरेपिस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मरीज को पुनः शारीरिक रूप से सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाने में फिजियोथेरेपिस्ट की सहभागिता भी महत्वपूर्ण होती है। फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. नेहल शाह ने “स्ट्रोक रिहैबिलिटेशन में न्यूरोप्लास्टिसिटी का महत्व” विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि न्यूरोप्लास्टिसिटी के माध्यम से मस्तिष्क के स्वस्थ क्षेत्र स्ट्रोक अथवा चोट के कारण प्रभावित हुए कार्यों की भरपाई एवं पुनर्गठन में सहायता कर सकते हैं। नियमित अभ्यास एवं व्यायाम से नए तंत्रिका मार्गों को मजबूत करने, मस्तिष्क के अनुकूलन को बढ़ावा देने तथा रिकवरी की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है। उन्होंने स्ट्रोक से उबर रहे मरीजों के लिए अर्ली न्यूरो-रिहैबिलिटेशन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।  कार्यक्रम के दौरान हृदय रोग एवं स्ट्रोक की रोकथाम के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से फिजियोथेरेपी के विद्यार्थियों द्वारा नाटक का मंचन किया गया। कार्यक्रम में फिजियोथेरेपी विभाग के चिकित्सकों का सम्मान कर विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए। इस अवसर पर न्यूरो-सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप सोरते, मिनी यूनिट को-ऑर्डिनेटर डॉ. रोमा रस्तोगी, डॉ. अंजलि शर्मा, डॉ. सीमा नवेद, डॉ. महेश राठौर, देवेंद्र सिंह सहित संस्थान के चिकित्सक, अधिकारी-कर्मचारी एवं विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।

संबल’ योजना से न्याय व्यवस्था को मिलेगी मजबूती, सामुदायिक सहभागिता पर जोर

‘संबल’ से न्याय तक पहुंच और सामुदायिक सहभागिता को मिलेगा नया आयाम पुलिस, सिविल सोसायटी एवं एनजीओ के समन्वय से न्याय सुलभता और जनसुरक्षा को और प्रभावी बनाने पर मंथन मध्यप्रदेश पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) एवं सामुदायिक पुलिसिंग शाखा द्वारा ‘न्याय सुलभता, समाज कार्य और सामुदायिक पुलिस सहभागिता’ पर राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपराध नियंत्रण एवं कानून-व्यवस्था के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को न्याय और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक सहभागिता को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) एवं सामुदायिक पुलिसिंग शाखा के संयुक्त तत्वावधान में आज 08 सितंबर को आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के स्वर्ण जयंती सभागार में ‘संबल—न्याय सुलभता, समाज कार्य एवं सामुदायिक पुलिस सहभागिता’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग पंकज श्रीवास्तव रहे। विशिष्ट अतिथियों में कमिश्नर उच्च शिक्षा विभाग प्रबल शिपहा, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुसुमन श्रीवास्तव, कानूनविद् एवं विशेष वक्ता श्रीमती रचना त्यागी, कोडी इंस्टीट्यूट कनाडा की प्रो. सारिका सिन्हा, मध्यप्रदेश महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर,  पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस भोपाल संजय कुमार तथा उप पुलिस महानिरीक्षक, सामुदायिक पुलिसिंग डॉ. विनीत कपूर उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि मार्च 2026 में मध्यप्रदेश पुलिस की सामुदायिक पुलिसिंग शाखा द्वारा ‘संबल’ नाम से सामुदायिक सुरक्षा पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें आपराधिक न्याय क्षेत्र में कार्यरत समुदाय-आधारित गैर सरकारी संगठनों (NGOs) के कार्यों व अनुभवों को साझा किया गया था। इस पहल में सामाजिक कार्य से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों को भी जोड़ा गया, ताकि पुलिस, आपराधिक न्याय व्यवस्था और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के बीच स्थायी समन्वय एवं सहयोग का मॉडल विकसित किया जा सके। UNFPA के सहयोग से आयोजित वर्तमान सम्मेलन उसी दिशा में एक अगला कदम है, जिसका उद्देश्य पुलिस, आपराधिक न्याय व्यवस्था, विधिक सेवाओं, नागरिक समाज, गैर-सरकारी संगठनों एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय विकसित कर नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों एवं अपराध के पीड़ितों तक न्याय और सहायता की पहुंच को अधिक प्रभावी बनाना है।     सम्मेलन में मध्यप्रदेश के 75 से अधिक गैर-सरकारी संगठनों, बाल संरक्षण से जुड़े पुलिस अधिकारियों, जिला पुलिस प्रमुखों, सामुदायिक पुलिसिंग अधिकारियों, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों, अभियोजन अधिकारियों, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों तथा सामाजिक कार्य एवं विधि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने सहभागिता की। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए मुख्य अतिथि विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग पंकज श्रीवास्तव ने सामुदायिक पुलिसिंग को पुलिसिंग का अभिन्न हिस्सा बनाने तथा पुलिस एवं गैर-शासकीय संगठनों के बीच स्थायी एवं संस्थागत समन्वय तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।   उन्होंने बताया कि मार्च 2026 के कार्यक्रम के बाद प्रदेश में सक्रिय गैर-शासकीय संगठनों की जानकारी संकलित कर पुलिस अधिकारियों एवं इकाइयों तक पहुंचाई गई है, जिससे महिला, बच्चे, बुजुर्ग, मानसिक एवं शारीरिक रूप से कमजोर तथा अन्य जरूरतमंद व्यक्तियों को पुलिस कार्रवाई के साथ आश्रय, उपचार, पुनर्वास एवं अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।            उन्होंने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग अपराध नियंत्रण के साथ-साथ कमजोर एवं वंचित वर्गों की सुरक्षा, सामाजिक सहयोग और विश्वास निर्माण से भी जुड़ी है। स्वास्थ्य, शिक्षा, पुनर्वास, महिला-बाल सुरक्षा एवं मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एनजीओ पुलिस के प्रभावी सहयोगी बन सकते हैं।  उन्होंने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं की स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के लिए एनजीओ के प्रयासों को आंतरिक सुरक्षा एवं विश्वास निर्माण का उदाहरण बताया तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं निराश्रित व्यक्तियों के संरक्षण-पुनर्वास और घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं को सहायता में पुलिस-एनजीओ समन्वय को महत्वपूर्ण बताया। महिला सशक्तिकरण योजनाओं के सामाजिक प्रभाव का अध्ययन कर घरेलू हिंसा एवं महिलाओं के विरुद्ध गंभीर अपराधों में कमी का आकलन करने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने ग्राम एवं नगर रक्षा समितियों तथा प्रशिक्षित नागरिक स्वयंसेवकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए बड़े धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, यातायात एवं जनसुरक्षा में उनकी सहभागिता को आवश्यक बताया। वर्ष 2028 के उज्जैन सिंहस्थ के लिए अभी से प्रशिक्षण, योजना एवं समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस भोपाल संजय कुमार ने कहा कि पुलिस जब थाने या कार्यालय में होती है, तो सामान्यतः उसके सामने किसी विवाद के दो पक्ष होते हैं—पीड़ित और आरोपी। दोनों पक्षों को संतुष्ट करना कठिन होता है। इसके विपरीत, समुदाय के साथ मिलकर कार्य करने से ऐसी कई स्थानीय समस्याओं की जानकारी समय रहते मिल जाती है, जिनका समाधान कम प्रयास में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मोहल्लों में खुले में नशा करना, अवैध शराब की गतिविधियां, महिलाओं के लिए असुरक्षित स्थान, असामाजिक तत्वों का जमावड़ा अथवा किसी स्थान पर लगातार होने वाली दुर्घटनाएं जैसी कई समस्याएं ऐसी होती हैं, जिनकी शिकायत प्रायः थाने या पुलिस कार्यालय तक नहीं पहुंचती। समुदाय के साथ निरंतर संवाद और सहभागिता से पुलिस को इन समस्याओं की जमीनी जानकारी मिलती है और समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है। संजय कुमार ने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग में पुलिस, नागरिक, सिविल सोसाइटी, सामाजिक संगठन तथा आपराधिक न्याय व्यवस्था से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स मिलकर कार्य करते हैं। इससे जमीनी स्तर की समस्याओं को समझने, आपसी गलतफहमियां दूर करने और पुलिस सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलती है। उप पुलिस महानिरीक्षक डॉ. विनीत कपूर ने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं तथा ग्राम एवं नगर रक्षा समितियों, कम्युनिटी सेफ्टी वॉलंटियर्स, विशेष किशोर पुलिस इकाइयों एवं लगभग 93 गैर-शासकीय संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है।  उन्होंने कहा कि न्याय की सुलभता केवल अपराध दर्ज करने तक सीमित नहीं, बल्कि अपराध की संभावना कम करने तथा पीड़ित एवं जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर सहायता उपलब्ध कराने से भी जुड़ी है। डॉ कपूर ने POCSO Act एवं किशोर न्याय व्यवस्था में सपोर्ट पर्सन, चाइल्ड केयर संस्थाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से नागरिक समाज की सहभागिता के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए महिलाओं एवं अन्य वंचित वर्गों के लिए सहयोग तंत्र मजबूत करने तथा बाल … Read more

दुबई में MP को बड़ी निवेश सौगात, तीसरे दिन मिले ₹53 हजार करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव

दुबई में तीसरे दिन 53 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त एमपीआईडीसी को एशिया की सर्वश्रेष्ठ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एजेंसी का ‘Winner Asia’ सम्मान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई दौरे के तीसरे दिन निवेश प्रोत्साहन, औद्योगिक साझेदारी, शहरी विकास, हरित ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और सतत विकास से जुड़े अनेक कार्यक्रमों में भाग लिया। दिनभर आयोजित गतिविधियों में निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकें, शारजाह चैंबर के साथ संवाद, बीईईएएच की अत्याधुनिक सुविधाओं का अवलोकन, एमार समूह की प्रमुख हस्तियों के साथ बैठक, मीडिया संवाद तथा "इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश: इंटरैक्टिव सेशन" प्रमुख रहे। एआईएम कांग्रेस : 2026 में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम को एआईएम इन्वेस्टमेंट अवॉर्ड्स 2026 में विनर एशिया के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार निवेश संवर्धन, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन, नवाचार और सतत विकास में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदान किया जाता है। यह सम्मान यूएई के विदेश व्यापार मंत्री एवं एआईएम कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ेयौदी ने प्रदान किया। निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तीसरे दिन पूर्वान्ह सत्र में विभिन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स एवं उद्योग समूहों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन बैठकें कीं। इन बैठकों का उद्देश्य मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं को क्षेत्रवार प्रस्तुत करना तथा निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाना था। बैठकों में राणा होल्डिंग्स, जेम्स एजुकेशन, क्रेसेंट ग्रुप, प्योर हेल्थ, शराफ ग्रुप, चोइथराम्स, डीपी वर्ल्ड, ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन, वेस्ट ज़ोन, केजीके ग्रुप, विस्टास मीडिया कैपिटल, वीएफएस ग्लोबल तथा एनआईडीआई सर्विसेज/एससीएनईएलएलएलएलसी-एफजेड के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वन-टू-वन बैठकों से प्राप्त हुए 53 हज़ार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मुख्यमंत्री डॉ. यादव की राणा होल्डिंग्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक डॉ. दर्शन सिंह राणा के साथ विस्तृत चर्चा में मध्यप्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, डेटा सेंटर, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, ई-मोबिलिटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। कंपनी ने राज्य में 2,000 मेगावॉट सौर ऊर्जा पोर्टफोलियो, 200 मेगावॉट ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र, 50 मेगावॉट क्षमता के एआई एवं कंप्यूट डेटा सेंटर (जिसे 200 मेगावॉट तक विस्तारित किया जा सकेगा), 30,000 एमटीपीए क्षमता के क्रिटिकल मिनरल्स रिकवरी एवं रीसाइक्लिंग कॉम्प्लेक्स तथा एकीकृत स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग हब स्थापित करने में रुचि प्रदर्शित की। इन प्रस्तावित परियोजनाओं में लगभग 35,200 करोड़ रुपये (4 बिलियन अमेरिकी डॉलर)के निवेश की संभावना है। इससे मध्यप्रदेश में ऊर्जा संक्रमण, उन्नत विनिर्माण और डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में वृहद स्तर परिवर्तन आयेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एनआईडीआई सर्विसेज डीएमसीसी/एससीएनईएलएलके इन्वेस्टर्स के साथ औद्योगिक स्तर के एआई कंप्यूट कैंपस एवं सॉवरेन एआई फैक्ट्री परियोजना पर चर्चा की। कंपनी ने 50 मेगावॉट क्षमता वाले एआई फैक्ट्री प्रोजेक्ट में लगभग 1.5 से 2 बिलियन डॉलर निवेश संबंधी (लगभग 18 हज़ार करोड़)  कॉन्सेप्ट प्रस्तुत किया, जिसे भविष्य में 100 मेगावॉट से अधिक तक विस्तारित किया जा सकता है। वन-टू-वन चर्चा में जेम्स एजुकेशन के चेयरमैन सनी वर्की के साथ अंतर्राष्ट्रीय मानकों अनुसार के-12 स्कूल, शिक्षक प्रशिक्षण, एडटेक और भविष्य उन्मुख शिक्षा परिसरों की स्थापना पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महामहिम बद्र जाफर, विशेष दूत, यूएई तथा क्रेसेंट ग्रुप की लीडरशिप के साथ नवकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, स्टार्टअप निवेश, सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर और दीर्घकालिक निवेश साझेदारी पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने प्योर हेल्थ के प्रतिनिधियों के साथ मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल, डिजिटल हेल्थ, टेलीमेडिसिन, मेडिकल एवं नर्सिंग शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में निवेश संभावनाओं पर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शराफ ग्रुप के साथ मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग, कोल्ड-चेन, सप्लाई चेन नेटवर्क, पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में निवेश संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने चोइथराम्स के साथ खाद्य प्रसंस्करण, रिटेल, कृषि उत्पादों की खरीद, वितरण नेटवर्क और कोल्ड-चेन अवसंरचना के विस्तार पर बातचीत की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डीपी वर्ल्ड के सीईओ रिज़वान सूमार के साथ पवारखेड़ा लॉजिस्टिक्स कॉम्पोजिट हब, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स, निर्यात संवर्धन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से मध्यप्रदेश को जोड़ने के लिये विस्तार से चर्चा की। उन्होंने ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ अवसंरचना, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और हरित विकास परियोजनाओं में दीर्घकालिक निवेश तथा इक्विटी भागीदारी की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वेस्ट ज़ोन के प्रतिनिधियों से वन-टू-वन रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट निवेश तथा मध्यप्रदेश उत्पादों की यूएई बाजार में मार्केटिंग और सेलिंग पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने मध्यप्रदेश में केजीके ग्रुप के साथ डायमंड प्रोसेसिंग, जेम्स एवं ज्वेलरी विनिर्माण, डिजाइन, स्किल डेवलपमेंट और निर्यात आधारित इकाइयों की स्थापना पर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विस्टास मीडिया कैपिटल के साथ फिल्म, एवीजीसी, एनीमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग एवं डिजिटल कंटेंट उत्पादन हब स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार किया। वीएफएस ग्लोबल के साथ भोपाल और इंदौर में वीजा सेवा विस्तार, पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी कौशल विकास कार्यक्रमों पर चर्चा हुई। शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के साथ हुई बैठक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह में चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन हिज हाईनेस अब्दुल्ला सुल्तान अल ओवैस के साथ मीटिंग की। दोनों प्रतिनिधि मंडलों में मध्यप्रदेश और शारजाह के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, एसएमई सहयोग, लॉजिस्टिक्स, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, पर्यटन एवं नवकरणीय ऊर्जा सेक्टर्स में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह के इन्वेस्टर्स को मध्यप्रदेश में निवेश के लिये आमंत्रित करते हुए जीआईएस-2027 में भागीदारी का आमंत्रण दिया। बैठक के बाद चैंबर एवं आईबीपीसी प्रतिनिधियों के साथ राउंड टेबल चर्चा भी हुई। बीईईएएच सस्टेनेबिलिटी एवं इनोवेशन फेसिलिटिज का भ्रमण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह स्थित बीईईएएच के मुख्यालय एवं उसकी विश्वस्तरीय सस्टेनेबिलिटी सुविधाओं का अवलोकन किया। समूह के सीईओ एवं वाइस चेयरमैन खालिद अलहुरैमल के साथ हुई बैठक में वेस्ट-टू-एनर्जी, इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, सर्कुलर इकोनॉमी, स्मार्ट सिटी, हरित ऊर्जा तथा इंदौर मॉडल आधारित सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समूह को मध्यप्रदेश में शहरी स्वच्छता एवं ऊर्जा क्षेत्र की परियोजनाओं में भागीदारी तथा जीआईएस-2027 में शामिल होने का निमंत्रण दिया एमार समूह की लीडरशिप के साथ बैठक एवं डाउनटाउन दुबई का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एमार प्रॉपर्टीज के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक हिज हाईनेस मोहम्मद अलाब्बार से भेंट की। बैठक में इंदौर की एमार कॉन्टिनेंटल सिटी परियोजना का उल्लेख करते हुए मध्यप्रदेश में एमार के योगदान की सराहना की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एमार को इंदौर-पीथमपुर-उज्जैन डेवलपमेंट कॉरिडोर सहित राज्य में एकीकृत मिश्रित उपयोग … Read more

इंदौर से शुरू होगा 9वां राष्ट्रीय पोषण माह, 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक चलेगा अभियान; ये है थीम

हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम पर 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक होगा राष्ट्रीय पोषण माह महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया बुधवार को इंदौर में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का करेंगी शुभारंभ पोषण मेले, रेसिपी प्रदर्शनी से लेकर बच्चों की शारीरिक माप और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के शत-प्रतिशत लाभ तक चलेंगे विशेष अभियान भोपाल  प्रदेश में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का आयोजन 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम पर किया जाएगा। महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया बुधवार को 9वें राज्य स्तरीय पोषण माह का इंदौर से शुभारंभ करेंगी। महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया बुधवार को इंदौर में एक माह तक चलने वाले इस अभियान में स्थानीय एवं मौसमी खाद्य पदार्थों, पर्याप्त प्रोटीन, आहार विविधता, बच्चों के पोषण एवं प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल के साथ प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) का शत-प्रतिशत लाभ दिलाने पर विशेष जोर रहेगा। जिला, परियोजना, सेक्टर और आंगनवाड़ी स्तर पर गतिविधियों का आयोजन कर अधिक से अधिक समुदाय को इससे जोड़ा जाएगा। पोषण मेले में दिखेगी स्थानीय खाद्य विविधता पोषण माह के दौरान पंचायत भवनों, स्कूलों और सामुदायिक भवनों में पोषण मेले एवं रेसिपी प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। इनमें टेक होम राशन (THR), गर्म पका भोजन (HCM), क्षेत्रीय पौष्टिक व्यंजन, स्थानीय दालें, चना, मूंगफली, सोया, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, मिलेट्स और मौसमी सब्जियों से तैयार व्यंजनों का प्रदर्शन किया जाएगा। ‘Know Your Protein—अपने प्रोटीन को पहचानें’ अभियान के माध्यम से परिवारों को प्रोटीन के विभिन्न स्थानीय स्रोतों और संतुलित आहार के महत्व की जानकारी दी जाएगी। आंगनवाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष के बच्चों को स्थानीय एवं विविधतापूर्ण ताजा नाश्ता और गर्म पका भोजन उपलब्ध कराने के साथ उसकी गुणवत्ता, मात्रा और स्वच्छता की निगरानी में मातृ सहयोगिनी समितियों, पंचायतों और समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। आंगनवाड़ी केंद्रों पर साप्ताहिक मेन्यू बोर्ड प्रदर्शित किए जाएंगे और समुदाय को उपलब्ध भोजन एवं निर्धारित मेन्यू की जानकारी दी जाएगी। 11 सितंबर से बच्चों की शारीरिक माप, कुपोषित बच्चों की पहचान पोषण माह के दौरान 11 सितंबर से शारीरिक माप दिवसों का आयोजन कर जन्म से 6 वर्ष तक के बच्चों का वजन, लंबाई/ऊंचाई सहित आवश्यक शारीरिक माप लेकर पोषण ट्रैकर में प्रविष्टि की जाएगी। गंभीर तीव्र कुपोषण, मध्यम तीव्र कुपोषण और गंभीर रूप से कम वजन वाले श्रेणी के बच्चों की पहचान कर उन्हें आवश्यक पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाएगा। नवीन चिन्हित बच्चों का c-MAM प्रोटोकॉल में पंजीयन कर साप्ताहिक फॉलोअप किया जाएगा। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के दौरान कुपोषित बच्चों की स्वास्थ्य जांच तथा आवश्यकता वाले बच्चों का समय पर रेफरल सुनिश्चित किया जाएगा। पोषण पुनर्वास केन्द्र से उपचार के बाद लौटे बच्चों का भी नियमित फॉलोअप किया जाएगा। 6 से 60 माह के गंभीर तीव्र कुपोषण बच्चों की भूख की जांच कर आवश्यकता अनुसार उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाएगा। पहले 1000 दिनों और बाल विकास पर विशेष फोकस अभियान में गर्भावस्था से बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिनों तक पर्याप्त पोषण, स्तनपान, शिशु देखभाल और संवेदनशील पालन पोषण पर विशेष परामर्श दिया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा संशोधित गृह भेंट मॉड्यूल के अनुसार 0 से 3 वर्ष के बच्चों वाले परिवारों से संपर्क कर बच्चों के वृद्धि-विकास, प्रारंभिक उद्दीपन और खेल आधारित गतिविधियों के संबंध में अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा। बाल चौपाल, कहानी, गीत, चित्रकला, रोल-प्ले, पपेट शो, कविता और खेल आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के संज्ञानात्मक, भाषा, मोटर तथा सामाजिक-भावनात्मक विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा। अभिभावकों को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट बच्चों के साथ बात करने, खेलने, कहानी सुनाने और गाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। PMMVY के शत-प्रतिशत लाभ के लिए चलेगा विशेष अभियान राष्ट्रीय पोषण माह में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के शत-प्रतिशत हितग्राहियों को लाभान्वित करने के लिए विशेष नामांकन एवं संतृप्ति अभियान चलाया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पात्र गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की पहचान कर उनका पोर्टल पर समय सीमा में पंजीयन सुनिश्चित करेंगे। लंबित नेशनल पेमेंटस कॉपरेशन ऑफ इंडिया, फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम, सत्यापन, स्वीकृति और डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर से संबंधित प्रकरणों का निराकरण प्राथमिकता से किया जाएगा। पहले बच्चे की द्वितीय किश्त के लिए समय पर टीकाकरण की पोर्टल पर प्रविष्टि कराने तथा दूसरे प्रसव में बालिका जन्म होने पर पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन हेतु प्रेरित किया जाएगा। पीएमएमवीवीई की पात्रता, आवश्यक दस्तावेज, किश्त एवं आवेदन प्रक्रिया की जानकारी गांव-गांव और आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचाई जाएगी। योजना से लाभान्वित महिलाओं की सफलता की कहानियों के माध्यम से भी जन-जागरूकता बढ़ाई जाएगी।  ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ बनेगा जनभागीदारी का अभियान पोषण माह को केवल विभागीय गतिविधि तक सीमित न रखते हुए इसे जनभागीदारी का अभियान बनाया जाएगा। पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, मातृ सहयोगिनी समितियों, आशा कार्यकर्ताओं, स्कूल शिक्षकों, विद्यार्थियों, स्थानीय रसोइयों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं को अभियान से जोड़ा जाएगा। समुदाय को आंगनवाड़ी केंद्रों की स्वच्छता, रखरखाव, कूड़ेदान एवं आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने में श्रमदान और सहयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। आंगनवाड़ी केंद्रों के बाहर बच्चों की ऊंचाई के अनुरूप दर्पण लगाने जैसे छोटे-छोटे नवाचारों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। ‘खेलो, सीखो और बढ़ो’ जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के प्रारंभिक विकास में परिवार और समुदाय की भूमिका मजबूत की जाएगी। किशोरी बालिकाओं के लिए किशोरावस्था में पोषण की आवश्यकता पर विशेष परामर्श सत्र भी आयोजित होंगे। विभागों के समन्वय से होगा व्यापक आयोजन राष्ट्रीय पोषण माह की गतिविधियां महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, कृषि, आयुष, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, खेल एवं युवा कल्याण, पर्यावरण एवं वन, उद्यानिकी, नगरीय आजीविका मिशन, जनसंपर्क तथा जनजातीय कार्य विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के समन्वय से आयोजित की जाएंगी। अभियान की गतिविधियों की जन आंदोलन डैशबोर्ड पर समयबद्ध प्रविष्टि की जाएगी। प्रत्येक गतिविधि की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें भी अपलोड की जाएंगी, जिससे अभियान की गतिविधियों की प्रभावी मॉनिटरिंग और मूल्यांकन किया जा सके।  

‘उनके हिस्से का प्रेम’ और ‘लेखक बनाने वाले’ में दिखा प्रेम, महत्वाकांक्षा और बाजार का व्यंग्य

‘उनके हिस्से का प्रेम’ और ‘लेखक बनाने वाले’ में दिखा प्रेम, महत्वाकांक्षा और बाजार का व्यंग्य टैगोर नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन ‘संभव’ आर्ट ग्रुप, दिल्ली ने किया संतोष चौबे की दो चर्चित कहानियों का मंचन भोपाल  टैगोर नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन मंगलवार को रवीन्द्र भवन में कथाकार संतोष चौबे की दो चर्चित कहानियों ‘उनके हिस्से का प्रेम’ और ‘लेखक बनाने वाले’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। प्रख्यात रंग निर्देशक देवेन्द्र राज अंकुर के निर्देशन में हुई इन प्रस्तुतियों को दिल्ली के ‘संभव’ आर्ट ग्रुप ने मंच पर साकार किया। इसके अलावा कार्यक्रम में रंगसंवाद पत्रिका का विमोचन भी किया गया। वहीं मंच का संचालन अविजित सोलंकी ने किया। आयोजन टैगोर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, विश्वरंग फाउंडेशन और रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।  पहली प्रस्तुति ‘उनके हिस्से का प्रेम’ में एक संस्थान के बॉस के प्रेम संबंधों को अनूठे रंगमंचीय प्रयोग के माध्यम से सामने लाया गया। कहानी में ऑफिस की मेज, कलम, शीशा, कुर्सी और डायरी जैसे निर्जीव दिखाई देने वाले उपकरण उसके प्रेम संबंधों के साक्षी और पड़ताल करने वाले पात्रों की तरह उभरते हैं। इन वस्तुओं के माध्यम से बॉस के आधे-अधूरे प्रेम संबंधों की कहानी जिस तरह दर्शकों के सामने आती है, वह प्रस्तुति का विशेष आकर्षण रही। दूसरी प्रस्तुति ‘लेखक बनाने वाले’ में लेखकीय महत्वाकांक्षा और उसके बाजारू दोहन पर व्यंग्य किया गया। कहानी का मुख्य पात्र बैंक में नौकरी करने वाला व्यक्ति है, जो लिखता रहता है और लेखक बनने की इच्छा रखता है। अखबार में दिल्ली के एक ‘लेखक बनाओ केंद्र’ का विज्ञापन देखकर वह वहां पहुंचता है। केंद्र उससे पैसे लेकर उसकी एक सामान्य कविता को तैयार करवाने और उसकी झूठी प्रशंसा करने का प्रयास करता है। इस अनुभव से निराश और आक्रोशित होकर वह वहां से लौटता है और महसूस करता है कि लेखक बनाने के नाम पर ऐसे केंद्र लोगों की भावनाओं और लेखकीय आकांक्षा को पैसा कमाने का जरिया बना रहे हैं। कहानी इसी विडंबना और धोखे को व्यंग्यात्मक ढंग से सामने रखती है। दोनों प्रस्तुतियों में संतोष चौबे की कहानियों की विशिष्ट संवेदना और व्यंग्य को देवेन्द्र राज अंकुर की रंगमंचीय दृष्टि के माध्यम से प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया गया। वस्तुओं को कथानक का हिस्सा बनाना और सामान्य जीवन की स्थितियों के भीतर छिपे सामाजिक द्वंद्व को मंच पर उभारना इन प्रस्तुतियों की खास विशेषता रही। लेखक : संतोष चौबे कवि, कथाकार और उपन्यासकार संतोष चौबे हिंदी के उन विरल साहित्यकारों में हैं, जो साहित्य और विज्ञान दोनों क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय रहे हैं। उनके छह कथा-संग्रह—‘हल्के रंग की कमीज’, ‘रेस्त्रां में दोपहर’, ‘नौ बिंदुओं का खेल’, ‘बीच प्रेम में गांधी’, ‘प्रतिनिधि कहानियां’ तथा ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’—और चार उपन्यास—‘राग केदार’, ‘क्या पता कामरेड मोहन’, ‘जल तरंग’ तथा ‘सपनों की दुनिया में ब्लेकहोल’—प्रकाशित एवं चर्चित हैं। उनके कविता-संग्रहों में ‘कहीं और सच होंगे सपने’, ‘कोना धरती का’, ‘इस अ-कवि समय में’ और ‘घर बाहर’ शामिल हैं। उनकी कहानियों का मंचन भारत भवन और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली सहित विभिन्न मंचों पर हो चुका है तथा उनकी रचनाएं देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। निर्देशक : देवेन्द्र राज अंकुर दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से निर्देशन में विशेषज्ञता प्राप्त देवेन्द्र राज अंकुर देशभर की अनेक व्यावसायिक एवं शौकिया नाट्य मंडलियों के साथ निर्देशन कर चुके हैं। ‘संभव’ ग्रुप के संस्थापक सदस्य और ‘कहानी का रंगमंच’ के प्रणेता अंकुर अध्यापक, कैंप निर्देशक और नाट्य निर्देशक के रूप में देशभर की कार्यशालाओं से जुड़े रहे हैं। उन्होंने विभिन्न भाषाओं के नाटकों का हिंदी में अनुवाद किया है और रंगमंच विषयक लेखन भी किया है। रंग आलोचना पर उनकी सात से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। टैगोर फेलोशिप प्राप्त प्रो. अंकुर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक रह चुके हैं। रंगमंच के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मंच पर अमिताभ श्रीवास्तव, अमित सक्सेना, प्रकाश झा, गौरी देवल, रचिता वर्मा एवं सहज हरजाई मंच परे संगीत संचालन: आदित्य पटेल प्रकाश परिकल्पना एवं संचालन: राघव प्रकाश एवं राहुल चौहान लेखक: संतोष चौबे निर्देशन: देवेन्द्र राज अंकुर

सपोर्ट विंग्स की ‘न्यू माइंड, न्यू इंडिया’ पहल, भोपाल में 45 से अधिक बच्चों को शिक्षा और सुरक्षा के प्रति किया जागरूक

 सपोर्ट विंग्स की 'न्यू माइंड, न्यू इंडिया' पहल, भोपाल में 45 से अधिक बच्चों को शिक्षा और सुरक्षा के प्रति किया जागरूक भोपाल  युवाओं के नेतृत्व में सामाजिक बदलाव की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए सपोर्ट विंग्स ने 6 सितंबर 2026 को भोपाल के न्यू अंबेडकर नगर, कोलार रोड में 'न्यू माइंड, न्यू इंडिया' पहल का सफल आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा, जागरूकता, शिक्षा और समग्र कल्याण को बढ़ावा देना था। इस कार्यक्रम में सपोर्ट विंग्स के 15 वालंटियर्स ने 45 से अधिक बच्चों के साथ समय बिताया। बच्चों के साथ इंटरैक्टिव गतिविधियों, शैक्षिक संवाद और जागरूकता सत्रों के माध्यम से उन्हें कई महत्वपूर्ण विषयों के बारे में सरल और बाल-सुलभ तरीके से जानकारी दी गई। बच्चों को व्यक्तिगत सुरक्षा, गुड टच और बैड टच, व्यक्तिगत सीमाओं और आत्म-जागरूकता जैसे अहम विषयों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों में सीखने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने पर भी जोर दिया गया। वालंटियर्स द्वारा बच्चों को पढ़ाई से जुड़ी सामग्री वितरित की गई और उनके लिए नींबू पानी, व्हाइट सॉस पास्ता, समोसे और बिस्किट सहित भोजन और जलपान की व्यवस्था भी की गई। खेल, बातचीत और मित्रवत संवाद के माध्यम से वालंटियर्स ने एक खुशनुमा और स्वागत भरा माहौल बनाया, जहां बच्चे खुलकर भाग ले सके, सीख सके और अपनी बात कह सके। इस पहल ने बच्चों को अधिक आत्मविश्वासी, जागरूक और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा के बारे में खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस पहल के बारे में सपोर्ट विंग्स की डायरेक्टर राजलक्ष्मी बानिक ने कहा, “हर बच्चे को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए जहां वह सीख सके, आगे बढ़ सके और आत्मविश्वास महसूस कर सके। 'न्यू माइंड, न्यू इंडिया' के माध्यम से हमारा लक्ष्य सीखने और जागरूकता को बच्चों के लिए रोचक बनाना है, साथ ही उन्हें अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा और आत्म-मूल्य को समझने के लिए प्रेरित करना है। हमें विश्वास है कि आज के छोटे और सकारात्मक प्रयास कल एक उज्जवल और आत्मविश्वासी भविष्य का निर्माण करेंगे।” यह कार्यक्रम शिक्षा, जागरूकता, देखभाल और सामुदायिक जुड़ाव को एक साथ लाने वाला एक सार्थक अनुभव रहा, जो बच्चों और वालंटियर्स दोनों के लिए यादगार बना। सपोर्ट विंग्स के बारे में: सपोर्ट विंग्स एक युवा-नेतृत्व वाला संगठन है जो भारत के 80 से अधिक शहरों में सक्रिय है। यह संगठन लीडरशिप प्रोग्राम, इंटर्नशिप, वालंटियरिंग के अवसरों और समुदाय-आधारित पहलों के माध्यम से युवाओं को सशक्त बना रहा है, ताकि वे जिम्मेदार चेंजमेकर बन सकें।

संतोष चौबे को मानद डॉक्टरेट की उपाधि

संतोष चौबे को मानद डॉक्टरेट की उपाधि शिक्षा, विज्ञान संचार और सामाजिक उद्यमिता में योगदान के लिए बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 21 सितंबर को प्रदान की जाएगी मानद उपाधि भोपाल  शिक्षा, सामाजिक उद्यमिता, साहित्य, विज्ञान संचार और भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संतोष चौबे को बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय, गढ़वा, झारखंड द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में 21 सितंबर 2026 को उन्हें यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। समारोह विश्वविद्यालय के गुरुपद संभवन रामजी ऑडिटोरियम में आयोजित होगा। विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल और गवर्निंग बॉडी ने शिक्षा, साहित्य, सामाजिक उद्यमिता, विज्ञान संचार और रचनात्मक लेखन के क्षेत्र में चौबे के विशिष्ट योगदान को मान्यता देते हुए इस सम्मान के लिए उनका चयन किया है। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह उपाधि उनके उल्लेखनीय योगदान और उपलब्धियों के प्रति सम्मान और सराहना का प्रतीक है। शिक्षा और सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में चार दशक से अधिक का योगदान संतोष चौबे ने वर्ष 1985 में ऑल इंडिया सोसायटी फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर टेक्नोलॉजी (आईसेक्ट) की स्थापना की। इसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण भारत के बीच डिजिटल विभाजन को कम करना तथा शिक्षा और तकनीक की पहुंच को व्यापक बनाना था। उनके नेतृत्व में आईसेक्ट ने ग्रामीण, आदिवासी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शिक्षा, कौशल एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण, तकनीकी शिक्षा और वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में व्यापक कार्य किया। एनआईटी, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियर चौबे ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव और सशक्तीकरण के माध्यम के रूप में आगे बढ़ाया। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनके मार्गदर्शन में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय बिलासपुर, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय वैशाली, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय खंडवा, एआईएसईसीटी विश्वविद्यालय हजारीबाग और स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों का विकास हुआ। इन संस्थानों में शिक्षा को कौशल विकास, शोध, नवाचार, उद्यमिता और उद्योगोन्मुखी शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। हिंदी में विज्ञान संचार के अग्रणी हस्ताक्षर संतोष चौबे की पहचान एक प्रतिष्ठित विज्ञान लेखक और विज्ञान संचारक के रूप में भी रही है। उनकी वर्ष 1986 में प्रकाशित पुस्तक ‘कंप्यूटर: एक परिचय’ ने हिंदी में तकनीकी शिक्षा और कंप्यूटर जागरूकता के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने साहित्य और विज्ञान के बीच संवाद को मजबूत करते हुए कविता, कथा, उपन्यास और लोकप्रिय विज्ञान लेखन के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया है। साहित्य की विविध विधाओं में सक्रिय कवि, कथाकार और उपन्यासकार संतोष चौबे हिंदी के उन साहित्यकारों में हैं, जिन्होंने साहित्य और विज्ञान दोनों क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय भूमिका निभाई है। उनके छह कथा-संग्रह—‘हल्के रंग की कमीज’, ‘रेस्त्रां में दोपहर’, ‘नौ बिंदुओं का खेल’, ‘बीच प्रेम में गांधी’, ‘प्रतिनिधि कहानियां’ तथा ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’—प्रकाशित एवं चर्चित हैं। उनके चार उपन्यास ‘राग केदार’, ‘क्या पता कामरेड मोहन’, ‘जल तरंग’ और ‘सपनों की दुनिया में ब्लेकहोल’ प्रकाशित हुए हैं। उनके कविता-संग्रहों में ‘कहीं और सच होंगे सपने’, ‘कोना धरती का’, ‘इस अ-कवि समय में’ और ‘घर बाहर’ शामिल हैं। उनकी कहानियों का मंचन भारत भवन और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली सहित विभिन्न मंचों पर हो चुका है और उनकी रचनाएं देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। भारतीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है। विश्वविद्यालय की मानद उपाधि के लिए तैयार प्रशस्ति-पत्र में उनके साहित्यिक और वैज्ञानिक लेखन के साथ भारतीय भाषाओं एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित शिक्षा, विज्ञान, नवाचार, सामाजिक उद्यमिता और साहित्य के क्षेत्र में संतोष चौबे के योगदान को विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से मान्यता मिली है। उन्हें राष्ट्रीय नवाचार पुरस्कार, श्वाब फाउंडेशन सोशल एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर अवॉर्ड और राष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

ग्रेटर नोएडा में जाम से मिलेगी राहत, हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क और जेवर एयरपोर्ट तक एलिवेटेड रोड

ग्रेटर नोएडा  ग्रेटर नोएडा में बढ़ते औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के बीच यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारी है. ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही को अलग करने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने और मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छह लेन की एलिवेटेड रोड बनाने की योजना पर चर्चा हुई है।  ग्रेटर नोएडा की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए GNIDA ने हापुड़ बाईपास तक करीब 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने का प्रस्ताव दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, इस सड़क के निर्माण से नोएडा-ग्रेटर नोएडा और गंगा एक्सप्रेसवे के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और दोनों के बीच सफर का समय घटकर करीब 30 से 45 मिनट रह सकता है।  प्रस्ताव के तहत मौजूदा कनेक्टिविटी को करीब 15 किलोमीटर तक आगे बढ़ाकर ग्रेटर नोएडा को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों और आवागमन को गति मिलने की उम्मीद है।  लॉजिस्टिक्स हब से एयरपोर्ट तक एलिवेटेड रोड GNIDA ने मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब (MMLH) से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छह लेन की एलिवेटेड रोड बनाने का भी प्रस्ताव रखा है. यह सड़क वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के समानांतर बनाई जाएगी।  इस कॉरिडोर को मुख्य रूप से मालवाहक वाहनों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल करने की योजना है. इससे लॉजिस्टिक्स हब से निकलने वाले सामान को सीधे एयरपोर्ट के एयर कार्गो टर्मिनल तक पहुंचाया जा सकेगा. इससे माल परिवहन में समय की बचत होने के साथ शहर की सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।  मास्टर प्लान 2041 में बदलाव की तैयारी ये सभी प्रस्ताव ग्रेटर नोएडा मास्टर प्लान 2041 में संशोधन की योजना का हिस्सा हैं. इसका मुख्य उद्देश्य शहर में मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग करना है. सोमवार को लखनऊ में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा की गई. बैठक में औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार भी मौजूद रहे।  GNIDA के मुताबिक, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब ग्रेटर नोएडा की आने वाली प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं, इनके विकसित होने के बाद क्षेत्र में माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने और लॉजिस्टिक्स हब से एयरपोर्ट के बीच यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होने की उम्मीद है।  कुल मिलाकर, प्रस्तावित सड़क और एलिवेटेड कॉरिडोर ग्रेटर नोएडा में फ्रेट ट्रैफिक को यात्री यातायात से अलग करने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। इससे औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक्स हब, गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी को नया बूस्ट मिल सकता है।