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गीडा क्षेत्र और बरहुआं चौराहे पर महीनों से जमा कचरा हटाया गया, सीएम के संज्ञान के बाद तेज हुई कार्रवाई

गोरखपुर यूपी के गोरखपुर में रविवार को हेलीकॉप्टर से जा रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नजर रविवार को कालेसर जीरो प्वाइंट चौराहा और गीडा क्षेत्र के बरहुआं चौराहे के पास महीनों से गिराए गए नगर निगम के कचरे के ढेर पर पड़ गई। मुख्यमंत्री ने इसका कड़ा संज्ञान लिया। उसके बाद नगर निगम ने छह बड़ी जेसीबी, तीन डीसीएम और छह डम्पर की मदद से बरहुआं चौराहे के आस-पास से कचरा जमुआड़ प्लाट पर निस्तारण के लिए भिजवाया। रविवार को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी भाजपा के जिला प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन के लिए पहुंचे। कार्यक्रम खत्म कर सड़क मार्ग से कालेसर जीरो प्वाइंट होते हुए गीडा ऑफिस के पास बने हैलीपेड से हेलिकॉप्टर से रवाना हुए। इस दौरान उनकी नजर कालेसर और बरहुआ सड़क किनारे पड़े कचरे के ढेर पर पड़ी। इस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। उनकी नाराजगी के बाद वहां तुरंत डंपर भेजकर सफाई करवाई गई। मौके पर पहुंचे अपर नगर आयुक्त नगर आयुक्त अजय जैन के निर्देश पर अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार बरहुआं चौराहे पर पहुंचे और कचरा उठा कर तत्काल जमुआड़ प्लाट पर निस्तारण के लिए भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने हिन्दुस्तान को बताया कि सारा डम्प कचरा हटाया जा रहा है। मौके पर उपस्थित सफाई एवं खाद्य निरीक्षक आनंद कुमार ने बताया कि उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद कचरा हटा कर जमुआड़ भेजा जा रहा है। उधर मौके पर उपस्थित ग्राम प्रधान नागेंद्र कुमार यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया कि उनके निर्देश पर तीन माह से दिक्कत झेल रहे नागरिकों को राहत मिली है। नगर निगम का कचरा फ्रेश वेस्ट बायो ट्रामल प्लांट जमुआड में निस्तारित किया जाता है। लेकिन कुछ वाहन चालक इस कचरा को वहां ले जाने के बजाए बरहुआ पॉवर हाउस के आसपास सड़क के किनारे खाली गढ्ढों में पिछले तीन माह से डाल रहे थे। ग्राम प्रधान नागेंद्र कुमार यादव ने बताया कि शिकायत के बाद भी निगम ने कोई सुनवाई नहीं की। लेकिन रविवार को जब अचानक कचरा उठाने निगम की गाड़ियां पहुंचीं तो सभी हैरान रह गए। सीएम की सख्ती के बाद नगर निगम के इस कदम से स्थानीय नागरिकों ने राहत की सांस ली। सभी ने सीएम का आभार व्यक्त किया है। महापौर, डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने बरहुआं और कालेसर जीरो प्वाइंट पर गंदगी का स्वत: संज्ञान लिया था। कड़ी नाराजगी व्यक्त की। तत्काल दोनों स्थानों पर साफ सफाई कराई गई है। आगे ईधर-उधर कचरा न डाला जाए, इसका ध्यान रखा जाएगा।

द्वितीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला में डेटा हार्मोनाइजेशन पर हुआ मंथन

रायपुर.  आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय, छत्तीसगढ़ शासन के तत्वावधान में आज “डेटा हार्मोनाइजेशन” विषय पर द्वितीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य शासकीय आंकड़ों के संकलन, प्रबंधन और उपयोग में समन्वय स्थापित करते हुए उनकी गुणवत्ता, एकरूपता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करना था। आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय के अपर संचालक श्री नारायण बुलीवाल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नीति निर्माण, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और साक्ष्य-आधारित निर्णयों के लिए विभिन्न विभागों के आंकड़ों का मानकीकरण एवं समन्वय अत्यंत आवश्यक है। कार्यशाला के दौरान कई तकनीकी एवं नीतिगत सत्र आयोजित किए गए। इनमें डेटा हार्मोनाइजेशन की अवधारणा, आधिकारिक सांख्यिकी के संपूर्ण डेटा जीवन चक्र के प्रबंधन हेतु परिचालन दिशानिर्देश (मास्टर टूल किट), यूनिक आइडेंटिफायर्स एवं वर्गीकरण प्रणाली, तथा भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी NMDS 2.0 दिशानिर्देशों पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं। इसके अलावा Statistical Quality Assessment Framework (SQAF) तथा CHiPS के अंतर्गत विकसित डिजिटल द्वार प्लेटफॉर्म पर भी विशेषज्ञों द्वारा जानकारी साझा की गई। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिभागियों को डेटा गुणवत्ता मूल्यांकन, मानकीकरण और डिजिटलीकरण की आधुनिक प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया। दोपहर सत्र में प्रतिभागियों के लिए एक इंटरैक्टिव अभ्यास आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के बीच डेटा लिंकेज की संभावनाओं पर समूह चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने संभावित डेटा एकीकरण बिंदुओं की पहचान की तथा भविष्य की कार्ययोजना और समय-सीमा पर सहमति व्यक्त की।  कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। यह कार्यशाला राज्य में डेटा आधारित सुशासन को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।

रांची में ईंधन की भारी किल्लत: लंबी कतारें, सीमित पेट्रोल-डीजल और बढ़ी कालाबाजारी

 रांची शहर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत अब गंभीर रूप लेती जा रही है। रविवार को शहर के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिली, जबकि करीब 60 प्रतिशत पेट्रोल पंप बंद रहे। हालात ऐसे हो गए कि कई पंपों पर उपभोक्ताओं को केवल 200 रुपये तक का पेट्रोल और अधिकतम 2000 रुपये तक का डीजल ही दिया गया। इससे आम लोगों के साथ-साथ व्यावसायिक वाहनों के चालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं पेट्रोल पंप बंद होने के कारण शहर में बढ़ते पेट्रोल-डीज की कीमतों को लोगों में असर नहीं पड़ रहा है। लोग बढ़े हुए कीमत पर चर्चा तक नहीं कर रहे है पेट्रोल पंप संचालकों की बड़ी भूमिका वहीं ब्लैक में पेट्रोल चौक-चौराहों पर लगभग 115 से 120 रुपये लीटर बिक रहा है, जबकि रांची में पेट्रोल की कीमत 100.86 रुपये है। वहीं डीजल की कालाबाजारी औद्योगिक क्षेत्रों में जारी है, शहर में पेट्रोल-डीजल की कालाबाजारी को बढ़ावा देने में सबसे बड़ी भूमिका पेट्रोल पंप संचालकों की है। शहर के पेट्रोल पंप संचालक ही दलालों को डब्बा व गैलन में पेट्रोल-डीजल भर-भर कर दे रहे है। चौक-चौराहों पर खुलेआम ब्लैक में बिक रहा पेट्रोल शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर बोतलों और गैलनों में पेट्रोल-डीजल खुलेआम ब्लैक में बिकता नजर आया। कई जगहों पर सामान्य कीमत से अधिक दर पर ईंधन बेचा जा रहा है। ईंधन संकट का फायदा उठाकर कई लोग पेट्रोल और डीजल को पहले से जमा कर अब अधिक कीमत पर बेच रहे हैं। सामान्य दिनों में जहां पेट्रोल निर्धारित दर पर मिलता है, वहीं संकट के बीच बोतल में भरकर 20 से 40 रुपये प्रति लीटर तक अतिरिक्त वसूली की जा रही है। मजबूरी में लोग अधिक कीमत देकर भी पेट्रोल खरीदने को विवश हैं। इधर पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने बताया कि पेट्रोल डिपो से नहीं मिलने के कारण शहर में तेजी से अधिकांश पेट्रोल पंप ड्राई हो रहे है। दोपहर बाद सूने पड़ गए कई पेट्रोल पंप सुबह के समय शहर के कई पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ रही, लेकिन दोपहर बाद अधिकांश पंपों में या तो स्टॉक खत्म हो गया या फिर भीड़ कम हो गई। शाम होते-होते कई पंप निर्धारित समय से पहले ही बंद कर दिए गए। इससे देर शाम यात्रा करने वाले लोगों को और अधिक परेशानी उठानी पड़ी। स्थानीय दुकानदारों और वाहन चालकों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते कालाबाजारी पर रोक नहीं लगाता है तो स्थिति और बिगड़ सकती है। लोगों ने जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग से मांग की है कि पेट्रोल-डीजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ ब्लैक मार्केटिंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।  

पढ़ाई का दबाव बना परेशानी, RIMS के छात्र डिप्रेशन से जूझने को मजबूर

रांची. राज्य के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र अक्षित कुजूर की आत्महत्या की घटना ने मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। रिम्स प्रबंधन ने माना है कि मेडिकल छात्रों के बीच तनाव और अवसाद की समस्या लगातार बढ़ रही है। रिम्स के डीन (स्टूडेंट वेलफेयर) डा. शिव प्रिय ने बताया कि एमबीबीएस से लेकर पीजी स्तर तक लगभग हर बैच में कुछ छात्र मानसिक तनाव और डिप्रेशन से गुजर रहे हैं। कई विद्यार्थियों का इलाज रिनपास और सीआइपी जैसे संस्थानों में चल रहा है। ऐसे छात्रों की निगरानी भी की जाती है, लेकिन चुनौती उन मामलों में आती है जहां छात्र अपनी परेशानी साझा नहीं कर पाते। मालूम हो कि पिछले कुछ वर्षों में रिम्स में मेडिकल छात्रों से जुड़ी कई दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं। अक्टूबर 2024 में प्रेम संबंध से जुड़े तनाव में पीजी के छात्र और छात्रा ने हास्टल की छत से कूदकर जान दे दी थी। नवंबर 2023 में भी एक मेडिकल छात्र का जला हुआ शव बरामद हुआ था। पहले भी कई छात्र हास्टल में ही आत्महत्या कर चुके हैं। अभी एक दिन पहले एम छात्र ने हास्टल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि मेडिकल शिक्षा के साथ मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संस्थागत स्तर पर और गंभीर प्रयासों की जरूरत है। पढ़ाई के साथ हर समय बेहतर करने का दबाव डॉ. शिव प्रिय के अनुसार मेडिकल शिक्षा का वातावरण अत्यंत प्रतिस्पर्धात्मक होता है। लगातार बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव छात्रों को मानसिक रूप से प्रभावित करता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल कठिन पढ़ाई ही आत्महत्या या डिप्रेशन का कारण नहीं है। व्यक्तिगत जीवन, भावनात्मक रिश्ते, अकेलापन और पारिवारिक दूरी जैसी बातें भी छात्रों को भीतर से तोड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल छात्रों की उम्र ऐसी होती है जहां भावनात्मक सहारे की जरूरत अधिक होती है। कई बार छात्र अपनी भावनाएं साझा नहीं कर पाते और धीरे-धीरे अवसाद की स्थिति में पहुंच जाते हैं। एनएमसी की गाइडलाइन के तहत होती है निगरानी रिम्स प्रशासन के मुताबिक नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) की गाइडलाइन के अनुसार हर मेडिकल छात्र के साथ एक फैकल्टी मेंटर जोड़ा जाता है, ताकि छात्रों की मानसिक और शैक्षणिक स्थिति पर नजर रखी जा सके। एमबीबीएस में नामांकन के समय छात्रों की काउंसलिंग भी कराई जाती है। हालांकि रिम्स प्रबंधन मानता है कि केवल औपचारिक काउंसलिंग पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से अब संस्थान में नियमित योग और मेडिटेशन क्लास शुरू करने की तैयारी की जा रही है, ताकि छात्रों के तनाव को कम किया जा सके। साथ ही समय-समय पर योग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन उनमें छात्रों की भागीदारी बहुत कम रहती है। रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने कहा कि बच्चों में बढ़ते मानसिक तनाव को देखते हुए अभिभावकों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों से नियमित बातचीत करनी चाहिए और उनके व्यवहार में बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी छात्र के व्यवहार में असामान्यता दिखे तो परिवार को तुरंत पहल करनी चाहिए। जरूरत पड़े तो छात्र को घर ले जाएं या कालेज प्रशासन को जानकारी दें, ताकि समय रहते मदद पहुंचाई जा सके। मौन सबसे बड़ा खतरा : मनोचिकित्सक रिनपास के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा बताते हैं कि मेडिकल छात्रों में अवसाद की सबसे बड़ी वजह अपनी समस्या को भीतर दबाए रखना है। प्रतिस्पर्धा, भविष्य का दबाव और लगातार प्रदर्शन की चिंता छात्रों को मानसिक रूप से कमजोर बना रही है। ऐसे में संस्थानों में नियमित मनोवैज्ञानिक सहायता, खुला संवाद और संवेदनशील माहौल तैयार करना बेहद जरूरी हो गया है। अक्षित कुजूर का हुआ पोस्टमार्टम एमबीबीएस के छात्र अक्षित कुजूर के शव का रविवार को पोस्टमार्टम किया गया। इस बीच छात्र के पिता कोडरमा से रिम्स पहुंचे और उनकी सहमति के बाद पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी की गई। इस बीच उनके पिता की आंखें नम थी और एक ही बात बाेल रहे थे कि उनका सबकुछ चला गया। इस बीच अक्षित कुजूर के मित्रों ने पिता को संभाला। प्रबंधन ने बताया कि अभी पुलिस को सिर्फ सूचना दी गई है, उनके पिता से अनुमति अगर मिलती है तो इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। फिलहाल पुलिस छानबीन में जुटी है और जिस प्रेमिका की बात सामने आ रही है उसकी जांच की जा रही है।

रेत के अवैध उत्खनन पर प्रदेशव्यापी कार्रवाई जोरों पर, खनिज विभाग का मैदानी अमला खनन क्षेत्रों में लगातार कर रहा है निगरानी

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ खनिज विभाग का अभियान लगातार जारी है। केंद्रीय उड़नदस्ता एवं जिला स्तरीय जांच दल विभिन्न जिलों में खनन क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रही है और अवैध गतिविधि पर त्वरित कार्रवाई भी कर रहा है।  खनिज विभाग के सचिव और संचालक के निर्देश पर केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की संयुक्त टीम मध्यरात्रि को बिलासपुर जिले में औचक निरीक्षण कर बड़ी कार्रवाई की। जांच के दौरान पचपेड़ी तहसील अंतर्गत ग्राम उदईबंध एवं अमलडीहा क्षेत्र में शिवनाथ नदी में मशीनों के माध्यम से अवैध रेत उत्खनन किया जाना पाया गया। मौके पर तीन चैन माउंटेन मशीनें अवैध उत्खनन में संलग्न मिलीं। जांच दल को देखकर मशीन ऑपरेटर मशीनों को मौके पर छोड़कर फरार हो गए। खनिज विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21 के तहत ग्राम उदईबंध में दो तथा अमलडीहा में एक चैन माउंटेन मशीन को जप्त कर सील कर दिया। साथ ही जवाब प्रस्तुत करने हेतु नोटिस जारी कर मशीनों के मुख्य द्वार पर चस्पा किया गया। कार्रवाई के दौरान खनिज विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि शासन को राजस्व हानि पहुंचाने वाली अवैध गतिविधियों के खिलाफ आगे भी कठोर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

ऑनलाइन दवा सप्लाई के खिलाफ पंजाब के केमिस्ट एकजुट, कल रहेगा बंद

मोगा. ऑल इंडिया आर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट की ओर से घोषित देशव्यापी हड़ताल का पंजाब समर्थन कर रहा है। जिसके चलते कल, मंगलवार, राज्य में दवा दुकानें बंद रहेंगी। मोगा डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट एसोसिएशन की विशेष बैठक के दौरान यह फैसला लिया गया। बैठक में एसोसिएशन के प्रधान राजीव गर्ग और दीपक कुमार दीपू सहित बड़ी संख्या में दवा कारोबारी मौजूद रहे। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई ऑनलाइन दवा बिक्री व्यवस्था अब स्थानीय दवा कारोबारियों के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है। उन्होंने बताया कि कोविड काल के दौरान ऑनलाइन माध्यम से दवाइयां उपलब्ध करवाने के लिए योजना लागू की गई थी, लेकिन महामारी समाप्त होने के बाद भी इसे बंद नहीं किया गया। इससे छोटे और मध्यम स्तर के मेडिकल स्टोर संचालकों का कारोबार लगातार प्रभावित हो रहा है। दीपक कुमार दीपू ने आरोप लगाया कि बड़ी कंपनियां ऑनलाइन माध्यम से दवाइयां 40 प्रतिशत तक कम कीमत पर बेच रही हैं, जबकि स्थानीय दुकानदारों को बहुत कम मार्जिन मिलता है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कंपनियों को ज्यादा कमीशन मिलने के कारण छोटे कारोबारी आर्थिक दबाव में आ गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ड्रग विभाग की गाइडलाइन स्थानीय दुकानदारों के लिए बेहद सख्त हैं, जबकि ऑनलाइन माध्यम से प्रतिबंधित गोलियां तक सप्लाई की जा रही हैं। इसके बावजूद ऑनलाइन कारोबारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। दूसरी ओर यदि कोई स्थानीय केमिस्ट नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई कर दी जाती है। दवा कारोबारियों ने कहा कि किराया, बिजली बिल और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में बिक्री घटने के कारण कई दुकानदार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली कई दवाइयां घटिया गुणवत्ता की होती हैं, जिससे लोगों की सेहत पर भी खतरा बढ़ रहा है। ऑनलाइन फार्मेसी पर रोक की मांग एसोसिएशन ने सरकार के सामने कई मांगें भी रखीं। इनमें ऑनलाइन फार्मेसी पर रोक लगाने, बिना लाइसेंस जन-औषधि केंद्रों पर दवाइयां रखने पर कार्रवाई, ड्रग लाइसेंस पोर्टल की तकनीकी खामियां दूर करने, दवा दुकानों में पुलिस दखल बंद करने और एच-वन रजिस्टर व्यवस्था खत्म करने जैसी मांगें शामिल हैं। केमिस्ट एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। बुधवार को जिलेभर में मेडिकल स्टोर बंद रहने के कारण लोगों को दवाइयों की खरीद में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

पंजाब हाई कोर्ट सख्त, ऑनलाइन नामांकन प्रक्रिया पर चुनाव आयुक्त को जारी हुआ नोटिस

चंडीगढ़. पंजाब में स्थानीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों के दौरान नामांकन प्रक्रिया में हिंसा, अव्यवस्था और उम्मीदवारों के साथ कथित उत्पीड़न के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका अब अवमानना कार्रवाई तक पहुंच गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब के राज्य चुनाव आयुक्त राज कुमार चौधरी (आईएएस सेवानिवृत्त) को नोटिस जारी हुआ है।  उन्हें ये नोटिस अदालत के आदेशों की कथित जानबूझकर अवहेलना के मामले में जारी कर जवाब तलब किया है। यह आदेश जस्टिस विकास बहल की अदालत ने अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिका हाई कोर्ट के वकील निखिल थम्मन ने दायर की है। अदालत ने नोटिस जारी करते हुए राज्य चुनाव आयुक्त से पूछा है कि पूर्व आदेशों का पालन न करने पर उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। अगली सुनवाई 27 मई 2026 तय की गई है।  वैकल्पिक ऑनलाइन नामांकन प्रणाली की मांग याचिकाकर्ता का आरोप है कि पंजाब में नगर निगम, नगर परिषदों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों के लिए वैकल्पिक ऑनलाइन नामांकन प्रणाली लागू करने संबंधी उनकी प्रतिनिधित्व याचिका पर हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद निर्धारित समयसीमा में निर्णय नहीं लिया गया। इससे अदालत के आदेशों की अवहेलना हुई। दरअसल, इससे पहले दायर जनहित याचिका में निखिल थम्मन ने स्थानीय चुनावों में नामांकन दाखिल करने के दौरान बार-बार सामने आने वाली हिंसा, नामांकन पत्र फाड़ने, उम्मीदवारों को शारीरिक रूप से रोकने, धमकाने और चुनावी अराजकता की घटनाओं को मुद्दा बनाया था। 60 दिनो में निर्णय लेने के दिए थे आदेश याचिका में मांग की गई थी कि भारत निर्वाचन आयोग की “सुविधा” प्रणाली की तर्ज पर पंजाब में भी वैकल्पिक ऑनलाइन नामांकन पोर्टल शुरू किया जाए, ताकि जमीनी लोकतंत्र को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भयमुक्त बनाया जा सके। 6 फरवरी 2026 को मुख्य न्यायाधीश शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयोग को 14 दिसंबर 2025 की प्रतिनिधित्व याचिका पर 60 दिनों के भीतर स्पीकिंग ऑर्डर पारित कर निर्णय लेने और उसे याचिकाकर्ता को सूचित करने का निर्देश दिया था। अब याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि स्पष्ट न्यायिक आदेश के बावजूद आयोग ने समयसीमा के भीतर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की, जिससे उन्हें अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।

सुनील यादव का अलग अंदाज, घोड़े पर सवार होकर पहुंचे दफ्तर, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

 साहिबगंज पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट के बीच पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर अब छोटे शहरों और कस्बों तक दिखाई देने लगा है. झारखंड के साहिबगंज में सोमवार को एक अनोखी तस्वीर देखने को मिली, जब जिला परिषद उपाध्यक्ष सुनील यादव घोड़े पर सवार होकर सदर प्रखंड सह अंचल कार्यालय पहुंचे. उनके इस अलग अंदाज को देखकर कार्यालय परिसर में मौजूद लोग हैरान रह गए. देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जुट गई और हर कोई इस अनोखी पहल की चर्चा करने लगा. लग्जरी गाड़ियों के शौकीन हैं सुनील यादव जिला परिषद उपाध्यक्ष सुनील यादव जिले में अपने अलग और आकर्षक अंदाज के लिए पहले से चर्चित रहे हैं. आमतौर पर वे लग्जरी गाड़ियों के काफिले के साथ नजर आते हैं. बताया जाता है कि उनके पास कई महंगी गाड़ियां हैं और वे अक्सर थार वाहन से चलते हैं. लेकिन सोमवार को उन्होंने पूरी तरह अलग संदेश देने की कोशिश की. चारपहिया या दोपहिया वाहन के बजाय वे घोड़े पर सवार होकर ब्लॉक कार्यालय पहुंचे. लोगों के लिए यह दृश्य बिल्कुल नया था, इसलिए आसपास के लोग मोबाइल निकालकर वीडियो और तस्वीरें बनाने लगे. पीएम मोदी की अपील से हुए प्रेरित सुनील यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल की बचत और ऊर्जा संरक्षण को लेकर दिए गए संदेश से प्रेरित होकर उन्होंने यह कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि देशहित में ईंधन की बचत करना आज समय की जरूरत बन गई है. लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल खपत न केवल आर्थिक बोझ बढ़ा रही है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है. देशहित की शुरुआत खुद से करनी होगी: सुनील यादव ब्लॉक परिसर में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए सुनील यादव ने कहा कि अगर समाज में बदलाव लाना है तो उसकी शुरुआत खुद से करनी होगी. उन्होंने कहा कि उनका घोड़े पर सवार होकर कार्यालय पहुंचना केवल दिखावा नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करने का प्रयास है. उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी पहल मिलकर बड़े बदलाव का रास्ता तैयार करती हैं. यदि लोग अनावश्यक वाहन उपयोग कम करें और वैकल्पिक उपाय अपनाएं, तो इससे ईंधन की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी. सोशल मीडिया पर भी छाया मामला सुनील यादव ने अपनी इस पहल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा किए. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि “जब देशहित की बात हो, तो पहल खुद से शुरू करनी चाहिए.” उनकी पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं. कई लोगों ने इसे पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत की दिशा में सकारात्मक कदम बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे अलग अंदाज में प्रचार पाने की कोशिश भी कहा. इलाके में चर्चा का विषय बनी पहल साहिबगंज में इस पहल की चर्चा सिर्फ प्रशासनिक हलकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आम लोगों के बीच भी यह बड़ा विषय बन गया. जिले के कई लोग इसे एक प्रतीकात्मक संदेश मान रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा यदि इस तरह के संदेश दिए जाएं तो आम लोगों में भी जागरूकता बढ़ेगी. खासकर ऐसे समय में, जब ऊर्जा संकट और पर्यावरण संरक्षण वैश्विक मुद्दे बन चुके हैं. पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश सुनील यादव ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए अब हर व्यक्ति को जिम्मेदारी समझनी होगी. उन्होंने लोगों से अपील की कि जहां संभव हो, वहां सार्वजनिक परिवहन, साइकिल या अन्य वैकल्पिक साधनों का उपयोग करें. उन्होंने कहा कि यदि आज से ही ईंधन बचाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की आदत विकसित की जाए, तो आने वाली पीढ़ियों को बेहतर और सुरक्षित भविष्य दिया जा सकता है. झारखंड और बिहार में भी हो रही चर्चा जिला परिषद उपाध्यक्ष की यह पहल अब साहिबगंज से निकलकर झारखंड और बिहार के कई हिस्सों में चर्चा का विषय बन चुकी है. लोग इसे अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं, लेकिन इतना तय है कि इस कदम ने ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

झारखंड में बड़ी कार्रवाई, 220 लंबित वारंटों का हुआ निष्पादन

 रांची रांची पुलिस ने ऑपरेशन प्रहार के तहत बीते दो दिनों में जिलेभर में व्यापक अभियान चलाकर 100 से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 220 से ज्यादा लंबित वारंटों का निष्पादन किया गया। इसे रांची पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक माना जा रहा है। यह अभियान एसएसपी राकेश रंजन निर्देश पर पुलिस अधीक्षक नगर, यातायात और ग्रामीण के नेतृत्व में चलाया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य अपराध नियंत्रण, लंबित वारंटों के निष्पादन और संगठित अपराध पर प्रभावी कार्रवाई करना था। इसके लिए विशेष रणनीति तैयार की गई थी। देर रात तक चले इस अभियान में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस टीमों ने लगातार छापेमारी की। इस दौरान फरार अपराधियों, वारंटियों और संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। कई ऐसे आरोपित भी पुलिस के हत्थे चढ़े, जो लंबे समय से फरार चल रहे थे और लगातार पुलिस को चकमा दे रहे थे। अपराधियों के संभावित ठिकानों पर एक साथ दबिश ऑपरेशन प्रहार में जिले के सभी पुलिस अधीक्षक, उपाधीक्षक, थाना प्रभारी सहित बड़ी संख्या में पुलिस पदाधिकारी और जवान शामिल रहे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार अभियान के दौरान कई संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी गई तथा अपराधियों के संभावित ठिकानों पर एक साथ दबिश दी गई। रांची पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अपराध और संगठित गिरोहों के खिलाफ आगे भी इसी तरह का अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि जिले में कानून व्यवस्था मजबूत बनी रहे और आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा कायम हो सके।

वन विभाग की कार्रवाई पर बवाल, उदंती अभ्यारण के उपनिदेशक पर हमला

गरियाबंद. छत्तीसगढ़ के गरियाबंद से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंचे उपनिदेशक और उनकी टीम पर अतिक्रमणकारियों ने हमला कर दिया है। डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन के साथ भी धक्का-मुक्की की गई है। घटना के बाद मौके पर भारी पुलिसबल तैनात किया गया है। घटना उदंती अभ्यारण के कोर जोन अंतर्गत सीतानदी रेंज के जैतपुरी गांव की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, अभ्यारण्य प्रशासन ने पिछले दिनों कोर क्षेत्र में अतिक्रमण के मामलों को लेकर 166 अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। सभी के विरुद्ध वन अपराध का मामला दर्ज कर नोटिस तमिल किया गया था। कुछ ने जवाब दिया था पर बयान दर्ज नहीं हुआ था। मामले में दो नोटिस के बाद आरोपियों ने अग्रिम जमानत याचिका लगाया था, जो खारिज हो गया। 5 आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद तनाव की स्थिति निर्मित हुई। सोमवार को टीम उसके बयान दर्ज करने जैतपुरी गांव पहुंची थी। इस दौरान ग्रामीणों और वन विभाग की टीम के बीच विवाद की स्थिति बन गई। आरोप है कि कार्रवाई का विरोध करते हुए कुछ लोगों ने डिप्टी डायरेक्टर और वन कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की की। हालांकि तनावपूर्ण माहौल के बीच वन अमले ने स्थिति को संभाला। घटना के बाद वन प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस से मदद मांगी है। मामले को लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है। वरुण जैन ने कहा कि स्थिति को कंट्रोल में ले लिया गया है।