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MP के 24 जिलों में बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को मिल रही रफ्तार, RDSS के तहत उपकेंद्रों और ट्रांसफॉर्मर का होगा विस्तार

आरडीएसएस से मजबूत हो रहा विद्युत नेटवर्क, 33/11 केवी उपकेंद्रों और ट्रांसफॉर्मर क्षमता वृद्धि के कार्यों में तेजी पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 24 जिलों में अधोसंरचना विकास को मिल रही गति भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता की विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने और भविष्य की विद्युत मांग को ध्यान में रखते हुए आरडीएसएस योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विद्युत अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। योजना के तहत नए 33/11 केवी उपकेंद्रों के निर्माण, पावर ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता वृद्धि तथा 33 केवी लाइनों के विस्तार के कार्य प्रगति पर हैं। कंपनी के विभिन्न सर्किलों में 31 नए 33/11 केवी उपकेंद्रों का कार्य प्रस्तावित है, जिनमें से 10 उपकेंद्रों का कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष उपकेंद्रों पर भी निर्माण एवं संबंधित कार्य तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं। 332.6 किलोमीटर 33 केवी लाइन का कार्य पूर्ण आरडीएसएस के तहत कंपनी द्वारा विद्युत नेटवर्क के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के लिए कुल 722.6 किलोमीटर 33 केवी लाइन का प्रावधान किया गया है। इसमें से अब तक 332.6 किलोमीटर लाइन का कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष कार्यों को भी प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। नई 33 केवी लाइनों से आगामी समय में विभिन्न क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की क्षमता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। ट्रांसफॉर्मर क्षमता बढ़ाकर भविष्य की मांग के लिए तैयारी योजना के तहत विभिन्न 33/11 केवी उपकेंद्रों में पावर ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता बढ़ाने के कार्य भी किए जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 3.15 एमवीए क्षमता वृद्धि के 78 कार्यों में 60, 5 एमवीए के 17 में से 16, जबकि 3.15 से 5 एमवीए क्षमता वृद्धि के 80 में से 63 कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसी प्रकार 5 से 8 एमवीए के सभी 4, 8 से 10 एमवीए के सभी 5 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। 5 से 10 एमवीए क्षमता वृद्धि के 92 कार्यों में से 73 कार्य भी पूरे किए जा चुके हैं। उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा लाभ आरडीएसएस के अंतर्गत किए जा रहे ये कार्य विद्युत प्रणाली की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ओवरलोडिंग कम करने, वोल्टेज सुधारने, नए क्षेत्रों की बढ़ती विद्युत मांग को पूरा करने तथा आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कंपनी द्वारा उपकेंद्र, ट्रांसफॉर्मर और 33 केवी लाइन के कार्यों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। आगामी चरण में शेष कार्यों को गति देकर मजबूत, आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विद्युत वितरण नेटवर्क तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्य उपलब्धियां एक नजर में       31 नए 33/11 केवी उपकेंद्र प्रस्तावित, 10 पूर्ण        722.6 किमी 33 केवी लाइन में 332.6 किमी कार्य पूर्ण        3.15 एमवीए क्षमता वृद्धि के 60 कार्य पूर्ण        5 एमवीए के 16 कार्य पूर्ण        3.15 से 5 एमवीए के 63 कार्य पूर्ण        5 से 8 एमवीए के सभी 4 कार्य पूर्ण        8 से 10 एमवीए के सभी 5 कार्य पूर्ण        5 से 10 एमवीए के 73 कार्य पूर्ण

पुराने रेलवे क्वार्टर होंगे ध्वस्त, अब G-4 या उससे अधिक मंजिल के बहुमंजिला आवास बनाने की तैयारी

अंबाला रेलवे की पुरानी और जर्जर कालोनियों में रहने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। रेलवे बोर्ड ने 50 साल से अधिक पुराने और असुरक्षित घोषित किए जा चुके रेलवे क्वार्टरों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह आधुनिक बहुमंजिला आवास बनाने की योजना तैयार की है। अब एकल मंजिल या कम ऊंचाई वाली कालोनियों के बजाय जमीन का बेहतर उपयोग करते हुए जी-4 या उससे अधिक मंजिल के भवन बनाए जा सकेंगे। इसके लिए रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों और केंद्रीय संगठनों को असुरक्षित रेलवे कालोनियों की प्राथमिकता सूची तैयार कर कार्ययोजना भेजने के निर्देश दिए हैं। नई आवास नीति के तहत रेलवे का जोर कम जमीन में अधिक कर्मचारियों के लिए आवास उपलब्ध कराने पर है। स्थानीय भवन नियमों के अनुसार बहुमंजिला भवनों का निर्माण किया जाएगा। इससे दशकों पुराने छोटे और जर्जर क्वार्टरों की जगह कर्मचारियों को सुरक्षित और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने का रास्ता साफ होगा। अमृत भारत स्टेशन योजना से भी जोड़े जा सकेंगे प्रोजेक्ट रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुसार इन आवासीय पुनर्निर्माण परियोजनाओं के लिए राशि वर्क्स प्रोग्राम के प्लान हेड-51 यानी कर्मचारी सुविधाओं के तहत उपलब्ध कराई जाएगी। जहां संभव होगा, इन परियोजनाओं को स्टेशन पुनर्विकास और अमृत भारत स्टेशन योजना से भी जोड़ा जा सकेगा। नए रेलवे क्वार्टर कर्मचारियों को सौंपने से पहले उन्हें एचआरएमएस के एस्टेट माड्यूल पर दर्ज करना भी अनिवार्य होगा। इससे आवासों के आवंटन और रेलवे की संपत्तियों के प्रबंधन को डिजिटल तरीके से संचालित किया जा सकेगा। नाम न छापने की शर्त पर मंडल के एक अधिकारी ने बताया कि बोर्ड द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार कंडम आवासों का सर्वे शुरू कर दिया गया है। अंबाला मंडल की पुरानी कालोनियों को भी मिल सकता है लाभ रेलवे बोर्ड के फैसले से अंबाला मंडल की पुरानी रेलवे कालोनियों के पुनर्निर्माण की उम्मीद भी बढ़ी है। मंडल स्तर पर पुराने और असुरक्षित आवासीय भवनों की स्थिति का आकलन कर प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव तैयार किए जा सकते हैं। हालांकि, अंबाला मंडल की कौन-कौन सी कालोनियां पहले चरण में शामिल होंगी, यह संबंधित जोनल रेलवे की प्राथमिकता सूची और स्वीकृत कार्ययोजना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। रेलवे बोर्ड ने जोनल रेलवे को आगामी पिंक बुक और वर्क्स प्रोग्राम में ऐसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल करने के निर्देश दिए हैं। ये होंगे फायदे – नई व्यवस्था में टाइप-2 और टाइप-3 रेलवे क्वार्टरों का कवर्ड एरिया बढ़ाया जाएगा। – इन्हें आधुनिक दो और तीन कमरों वाले आवास के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। – कर्मचारियों को पुराने छोटे कमरों की बजाय पहले से अधिक जगह वाले और सुविधाजनक आवास मिल सकेगी। – तीन से अधिक मंजिल वाले भवनों में लिफ्ट की व्यवस्था अनिवार्य होगी। – छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र, आधुनिक रसोई की फिटिंग और वाहनों के लिए अलग पार्किंग की व्यवस्था प्रमुख चुनौतियां – पुराने क्वार्टरों को तोड़ने से पहले वहां रह रहे कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करनी होगी। – बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए पर्याप्त बजट, निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित समय में काम पूरा करना चुनौती होगी। – कालोनियों को चरणबद्ध तरीके से खाली कराने के दौरान कर्मचारियों को अस्थायी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।  

75 दिन तक चलेगा बस्तर दशहरा, UNESCO धरोहर सूची में शामिल कराने की तैयारी; बलराम मांझी बने समिति के उपाध्यक्ष

आस्था, परंपरा और भव्यता के रंग में सजेगा ऐतिहासिक बस्तर दशहरा 75 दिवसीय पर्व को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का संकल्प, बलराम मांझी बने दशहरा समिति के नए उपाध्यक्ष रायपुर,  ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम विश्वप्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा पर्व 2026 इस वर्ष भी पूरी भव्यता, आस्था और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया जाएगा। पर्व की तैयारियों, पूजा विधान, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न आयोजनों को लेकर मंगलवार को कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में बस्तर दशहरा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बस्तर सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने की। बैठक में बस्तर राजपरिवार के कमलचंद भंजदेव, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना, दंतेवाड़ा से मां दंतेश्वरी के पुजारी जिया बाबा सहित समस्त मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरीन, पुजारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं टेम्पल स्टेट समिति के सदस्य उपस्थित रहे। बलराम मांझी निर्विरोध नहीं, बहुमत से चुने गए नए उपाध्यक्ष बैठक की शुरुआत औपचारिक प्रक्रियाओं के साथ हुई। इसके बाद बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन कराया गया। बचेली परगना के बीरो मांझी ने अर्जुन मांझी के नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि सोनाबाल परगना के समुन्द मांझी ने बलराम मांझी के नाम का प्रस्ताव किया। सदस्यों द्वारा हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें स्पष्ट बहुमत के आधार पर बलराम मांझी को बस्तर दशहरा समिति का नया उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया। नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष बलराम मांझी ने देवसराय सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के संबंध में सुझाव दिए। केवल पर्व नहीं, विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत बैठक को संबोधित करते हुए सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, जनभागीदारी और विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने पर्व की व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए एनएमडीसी प्रबंधन से सीएसआर मद के अंतर्गत प्रतिवर्ष कम से कम डेढ़ करोड़ रुपये की स्थायी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग करने की बात कही। उन्होंने बताया कि बस्तर दशहरा के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार को लेकर केंद्रीय मंत्रियों से सकारात्मक चर्चा हुई है। सांसद ने कहा कि 75 दिनों तक चलने वाले इस विशिष्ट पर्व की मौलिकता और परंपरागत स्वरूप को बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पर्व अवधि के दौरान समानांतर आयोजनों की अनुमति नहीं देने, देवस्थलों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा प्रमुख पूजा विधान स्थलों पर सुरक्षा रेलिंग और पक्की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का साझा संकल्प बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1423 से निरंतर चली आ रही यह परंपरा मैसूर और कुल्लू दशहरा से भी प्राचीन है। उन्होंने बस्तर दशहरा को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए सामूहिक प्रयास और साझा संकल्प को दोहराया। उन्होंने मावली परघाव के लिए संबंधित स्थलों एवं मार्गों की विशेष साफ-सफाई, देवी-देवताओं और आंगा देव के सम्मानपूर्वक आगमन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही मांझी-चालकी से पर्व के दौरान पारंपरिक वेशभूषा एवं पगड़ी धारण करने का आग्रह किया। भंजदेव ने मेंबर-मेंबरीन के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए मेंबरीन के मासिक मानदेय में वृद्धि करने का प्रस्ताव भी दशहरा समिति के समक्ष रखा। 1.21 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित बैठक में दशहरा समिति के सचिव एवं तहसीलदार ने बस्तर दशहरा पर्व के लिए एक करोड़ 21 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया। उन्होंने पर्व के दौरान संपन्न होने वाले विभिन्न पूजा विधानों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी समिति के सदस्यों को दी। बैठक में पूजा स्थलों, मार्गों, देवस्थलों, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा तथा श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। पर्व की विशिष्ट परंपराओं को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रशासनिक समन्वय के साथ आयोजन को सफल बनाने पर विशेष जोर दिया गया। शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए प्रशासन तैयार कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने बस्तर दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और भव्य रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक तैयारियों और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने पर्व से जुड़े सभी प्रमुख स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण करने तथा सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को प्रभावी बनाए रखने पर जोर दिया। बैठक में मौजूद मांझी-चालकी, पुजारी, मेंबर-मेंबरीन और समिति के सदस्यों ने भी विभिन्न पूजा विधान एवं आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं के संबंध में सुझाव दिए। इस प्रकार बैठक में बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा, जनभागीदारी, धार्मिक आस्था और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं के समन्वय के साथ वर्ष 2026 के पर्व को भव्य एवं गरिमापूर्ण ढंग से आयोजित करने की रूपरेखा पर व्यापक चर्चा हुई।

रेलवे की बड़ी कार्रवाई की तैयारी, हरियाणा में 50 साल पुराने मकानों पर चलेगा बुलडोजर

अंबाला. रेलवे की पुरानी और जर्जर कालोनियों में रहने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। रेलवे बोर्ड ने 50 साल से अधिक पुराने और असुरक्षित घोषित किए जा चुके रेलवे क्वार्टरों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह आधुनिक बहुमंजिला आवास बनाने की योजना तैयार की है। अब एकल मंजिल या कम ऊंचाई वाली कालोनियों के बजाय जमीन का बेहतर उपयोग करते हुए जी-4 या उससे अधिक मंजिल के भवन बनाए जा सकेंगे। इसके लिए रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों और केंद्रीय संगठनों को असुरक्षित रेलवे कालोनियों की प्राथमिकता सूची तैयार कर कार्ययोजना भेजने के निर्देश दिए हैं। नई आवास नीति के तहत रेलवे का जोर कम जमीन में अधिक कर्मचारियों के लिए आवास उपलब्ध कराने पर है। स्थानीय भवन नियमों के अनुसार बहुमंजिला भवनों का निर्माण किया जाएगा। इससे दशकों पुराने छोटे और जर्जर क्वार्टरों की जगह कर्मचारियों को सुरक्षित और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने का रास्ता साफ होगा। अमृत भारत स्टेशन योजना से भी जोड़े जा सकेंगे प्रोजेक्ट रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुसार इन आवासीय पुनर्निर्माण परियोजनाओं के लिए राशि वर्क्स प्रोग्राम के प्लान हेड-51 यानी कर्मचारी सुविधाओं के तहत उपलब्ध कराई जाएगी। जहां संभव होगा, इन परियोजनाओं को स्टेशन पुनर्विकास और अमृत भारत स्टेशन योजना से भी जोड़ा जा सकेगा। नए रेलवे क्वार्टर कर्मचारियों को सौंपने से पहले उन्हें एचआरएमएस के एस्टेट माड्यूल पर दर्ज करना भी अनिवार्य होगा। इससे आवासों के आवंटन और रेलवे की संपत्तियों के प्रबंधन को डिजिटल तरीके से संचालित किया जा सकेगा। नाम न छापने की शर्त पर मंडल के एक अधिकारी ने बताया कि बोर्ड द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार कंडम आवासों का सर्वे शुरू कर दिया गया है। अंबाला मंडल की पुरानी कालोनियों को भी मिल सकता है लाभ रेलवे बोर्ड के फैसले से अंबाला मंडल की पुरानी रेलवे कालोनियों के पुनर्निर्माण की उम्मीद भी बढ़ी है। मंडल स्तर पर पुराने और असुरक्षित आवासीय भवनों की स्थिति का आकलन कर प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव तैयार किए जा सकते हैं। हालांकि, अंबाला मंडल की कौन-कौन सी कालोनियां पहले चरण में शामिल होंगी, यह संबंधित जोनल रेलवे की प्राथमिकता सूची और स्वीकृत कार्ययोजना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। रेलवे बोर्ड ने जोनल रेलवे को आगामी पिंक बुक और वर्क्स प्रोग्राम में ऐसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल करने के निर्देश दिए हैं। ये होंगे फायदे – – नई व्यवस्था में टाइप-2 और टाइप-3 रेलवे क्वार्टरों का कवर्ड एरिया बढ़ाया जाएगा। – इन्हें आधुनिक दो और तीन कमरों वाले आवास के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। – कर्मचारियों को पुराने छोटे कमरों की बजाय पहले से अधिक जगह वाले और सुविधाजनक आवास मिल सकेगी। – तीन से अधिक मंजिल वाले भवनों में लिफ्ट की व्यवस्था अनिवार्य होगी। – छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र, आधुनिक रसोई की फिटिंग और वाहनों के लिए अलग पार्किंग की व्यवस्था प्रमुख चुनौतियां – – पुराने क्वार्टरों को तोड़ने से पहले वहां रह रहे कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करनी होगी। – बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए पर्याप्त बजट, निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित समय में काम पूरा करना चुनौती होगी। – कालोनियों को चरणबद्ध तरीके से खाली कराने के दौरान कर्मचारियों को अस्थायी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।

गैस सिलेंडर बुकिंग का बदला नियम, ग्रामीणों के लिए 45 दिन की सीमा खत्म

जयपुर  केंद्र सरकार ने राजस्थान समेत देश भर के रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा फैसला लिया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों के घरेलू एलपीजी उपभोक्ता भी शहरवासियों की तरह 25 दिनों के अंतराल पर अपना गैस सिलेंडर बुक करा सकेंगे। पहले ग्रामीण इलाकों के लिए यह सीमा 45 दिनों की तय की गई थी। राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने दी जानकारी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा पर्यटन राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया, सरकार ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) जैसी प्रमुख तेल विपणन कंपनियों को इस नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी जंग और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण होर्मुज से होने वाली तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई थी। इससे देश में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ गया था। ऐसे में सरकार ने घरेलू गैस की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और जमाखोरी व कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए रिफिल बुकिंग के बीच अंतर बढ़ा दिया था। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन बाद अगली LPG बुकिंग की अनुमति थी। सरकार ने कई सख्त कदम उठाए एलपीजी गैस की कमी से निपटने और आपूर्ति नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने मार्च में 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत कई सख्त कदम उठाए थे। इसी अस्थायी मांग प्रबंधन रणनीति के तहत शहरी क्षेत्रों में एलपीजी रिफिल का अंतराल 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तय कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया था कि प्रोपेन (C3) और ब्यूटेन (C4) जैसी गैसों का उपयोग प्राथमिकता से घरेलू LPG के उत्पादन में किया जाए, ताकि आम जनता को रसोई गैस की किल्लत का सामना न करना पड़े। मंत्रालय ने की समीक्षा सोमवार यानी 7 सितंबर को पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा ओएमसी के अध्यक्षों और प्रबंध निदेशकों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया कि अब स्थिति में काफी सुधार हुआ है। सुरेश गोपी ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से मंत्रालय द्वारा जारी पत्र की प्रति साझा करते हुए लिखा, वर्तमान में एलपीजी आपूर्ति की बेहतर होती स्थिति और रिफिल बैकलॉग (बकाया ऑर्डर) में आई भारी कमी को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने मौजूदा रिफिल बुकिंग अंतराल की समीक्षा की है। अब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के सभी घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए 25 दिनों का एक समान रिफिल बुकिंग अंतराल लागू करने का निर्णय लिया गया है। व्यावसायिक एलपीजी पर पहले ही हट चुकी हैं पाबंदियां घरेलू LPG की बुकिंग के नियमों में ढील देने से पहले जून में सरकार ने कमर्शियल LPG की सप्लाई पर लगी पाबंदियां भी हटा दी थीं। तेल कंपनियों को युद्ध से पहले जितनी मात्रा में गैर-घरेलू LPG की सप्लाई होती थी, उसे फिर से सामान्य स्तर पर शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही, उद्योगों का काम प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें संकट से पहले होने वाली खपत की 50% तक LPG सप्लाई की अनुमति दे दी गई थी। वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते भारत में एलपीजी की कीमतों में भी वृद्धि देखी गई थी। मार्च में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद जून में 29 रुपए की और वृद्धि हुई। आपूर्ति की स्थिति सुधरने और बुकिंग अंतराल घटने से देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अब अगला सिलेंडर बुक करने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

समावेशी शिक्षा की ओर बड़ा कदम, प्रशस्त 2.0 के तहत 2.04 लाख शिक्षकों ने पूरा किया सेन्सिटाइजेशन

प्रशस्त 2.0 से समावेशी शिक्षा को नई ताकत, 2.04 लाख शिक्षक सेन्सिटाइजेशन वीडियो देखकर हुए ऑनबोर्ड – 2,03,823 शिक्षक प्रशस्त 2.0 से जुड़े, रामपुर में 44.38%, झांसी में 39.27% और पीलीभीत में 31.95% शिक्षक हुए ऑनबोर्ड – लगभग 40 मिनट के 10 वीडियो से स्क्रीनिंग से पहले होगा शिक्षकों का सेन्सिटाइजेशन – सभी बोर्डों के सरकारी, परिषदीय, प्राइवेट एडेड और प्राइवेट अनएडेड विद्यालयों के शिक्षक होंगे शामिल लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार समावेशी शिक्षा को मजबूत करने के लिए शिक्षकों को बच्चों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने पर विशेष जोर दे रही है। इसी दिशा में प्रशस्त (PRASHAST) 2.0 के माध्यम से बच्चों की स्क्रीनिंग से पहले शिक्षकों को सेन्सिटाइजेशन वीडियो से जोड़ने का अभियान गति पकड़ रहा है।  आंकड़ों के अनुसार अब तक 2,03,823 शिक्षक प्रशस्त 2.0 पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं तथा वीडियो देख रहे हैं, इनमें रामपुर में 44.38 प्रतिशत, झांसी में 39.27 प्रतिशत, पीलीभीत में 31.95 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 28.42 प्रतिशत और बलिया में 24.74 प्रतिशत शिक्षकों की सहभागिता दर्ज हुई है। इसके अलावा फतेहपुर, मथुरा, गोंडा, सीतापुर, बरेली और बस्ती की भी अच्छी सहभागिता रही। यह डिजिटल पहल शिक्षक को संवेदनशील, सजग और सक्षम बनाकर विद्यालयों में अधिक सहयोगी वातावरण तैयार करने तथा दिव्यांग बच्चों की समावेशी शिक्षा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।   40 मिनट में 10 वीडियो से संवेदनशीलता प्रशस्त एप एवं पोर्टल पर लगभग 40 मिनट के कुल 10 सेन्सिटाइजेशन वीडियो उपलब्ध हैं। राज्य के सभी बोर्डों के सरकारी/परिषदीय, प्राइवेट एडेड और प्राइवेट अनएडेड विद्यालयों के शिक्षकों को ये वीडियो देखना अनिवार्य किया गया है। बच्चों की स्क्रीनिंग से पहले शिक्षकों में आवश्यक संवेदनशीलता और समझ विकसित करना इस प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य है। सभी शिक्षकों को जोड़ने के निर्देश राज्य स्तर से सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को संबंधित शिक्षकों को सेन्सिटाइजेशन वीडियो देखने के लिए निर्देशित करते हुए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशस्त 2.0 के माध्यम से सरकारी और परिषदीय विद्यालयों के साथ प्राइवेट एडेड एवं प्राइवेट अनएडेड विद्यालयों को भी एक समान प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। इससे बच्चों की स्क्रीनिंग से पहले शिक्षक स्तर पर संवेदनशीलता और समझ को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। शिक्षक की समझ से बेहतर होगा बच्चों का सहयोग योगी सरकार की शिक्षा नीति में प्रत्येक बच्चे की आवश्यकता को समझकर उसके अनुरूप शैक्षिक सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर है। प्रशस्त 2.0 इसी दृष्टिकोण को शिक्षक की क्षमता और संवेदनशीलता से जोड़ता है। सेन्सिटाइजेशन वीडियो के माध्यम से शिक्षक बच्चों को बेहतर समझने और स्क्रीनिंग प्रक्रिया को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए तैयार होंगे। कोट: प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों को बच्चों की विविध आवश्यकताओं को समझने और उनके प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर मिल रहा है। सेन्सिटाइजेशन वीडियो के माध्यम से शिक्षक बच्चों की विशिष्ट आवश्यकताओं की स्क्रीनिंग प्रक्रिया को अधिक समझदारी और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ा सकेंगे। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक विद्यालय में समावेशी और सहयोगी वातावरण मजबूत हो। श्रीमती मोनिका रानी, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश

पंजाब दौरे से पहले एक्टिव कांग्रेस, सचिन पायलट ने राहुल-प्रियंका से की मुलाकात; चुनावी रणनीति पर चर्चा

चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की। पंजाब का प्रभारी बनाने के बाद राहुल और प्रियंका के साथ पायलट की पहली मुलाकात है। इसे पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि बैठक में पंजाब कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, चुनावी रणनीति और पार्टी नेताओं के बीच चल रही गुटबाजी पर भी चर्चा हुई। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के इसी महीने पंजाब दौरे पर आने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी के दौरे से पहले सचिन पायलट अगले सप्ताह पंजाब और चंडीगढ़ पहुंचेंगे। अपने पहले दौरे के दौरान वह प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और प्रमुख पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। पायलट की इस बैठक के बाद ही राहुल गांधी के पंजाब दौरे का कार्यक्रम अंतिम रूप लेने की संभावना है। राहुल गांधी के सितंबर के अंत में पंजाब आने की संभावना जताई जा रही है। पायलट के पंजाब दौरे का कार्यक्रम अगले दो-तीन दिनों में अंतिम हो सकता है। पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भी सोमवार को नई दिल्ली में पायलट से मुलाकात कर चुके हैं। वड़िंग ने भी कहा था कि पायलट का पंजाब दौरा करीब एक सप्ताह के भीतर प्रस्तावित है। गुटबाजी खत्म करना पायलट के सामने बड़ी चुनौती पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से गुटबाजी पार्टी के लिए चुनौती बनी हुई है। प्रदेश कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच राजनीतिक मतभेद लगातार चर्चा में रहे हैं। करीब दो महीने पहले कांग्रेस हाईकमान की ओर से विधानसभा चुनाव से जुड़ी समितियों के गठन के बाद चन्नी और उनके समर्थक विधायकों-सांसदों ने वड़िंग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। वड़िंग को प्रदेश प्रधान पद से हटाने की मांग भी उठी थी। इसके बाद कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी सौंपते हुए सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी नियुक्त किया। अब पायलट के सामने विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के साथ ही प्रदेश कांग्रेस के विभिन्न धड़ों के बीच समन्वय कायम करने की चुनौती है। ऐसे में राहुल गांधी के पंजाब दौरे से पहले पायलट का प्रदेश में पहुंचकर नेताओं के साथ बैठक करना संगठनात्मक रूप से अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि राहुल गांधी के दौरे से पहले पंजाब कांग्रेस में आपसी तालमेल और चुनावी तैयारियों को लेकर स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए।

दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना बनी शंभू बारी के परिवार का सहारा

दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना बनी शंभू बारी के परिवार का सहारा प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता से जरूरत के समय मिल रहा संबल, प्रधानमंत्री आवास और महतारी वंदन योजना का भी मिला लाभ रायपुर,  शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के अंतिम छोर पर खड़े परिवारों के जीवन में आर्थिक सुरक्षा और स्थायित्व का आधार बन रही हैं। योजनाओं का प्रभाव तब और अधिक सार्थक दिखाई देता है, जब एक परिवार को आजीविका के साथ आवास और सामाजिक सुरक्षा का लाभ एक साथ मिलता है। सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत पतरापारा निवासी शंभू बारी का परिवार इसका उदाहरण है। भूमिहीन कृषि मजदूर शंभू बारी को दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है। सीमित आय और अनिश्चित रोजगार के बीच मिलने वाली यह सहायता परिवार के लिए जरूरत के समय महत्वपूर्ण सहारा बनी है। शंभू बारी बताते हैं कि इस राशि का उपयोग वे घरेलू जरूरतों, बीमारी के समय उपचार और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करने में करते हैं। भूमिहीन परिवार को मिला पक्के आवास का सहारा शंभू बारी का परिवार लंबे समय तक स्वयं के पक्के मकान के अभाव में कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करता रहा। शासन की पहल से उन्हें भूमि उपलब्ध कराई गई और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत पक्का आवास भी मिला। अब उनका परिवार अपने सुरक्षित और पक्के घर में रह रहा है। उनके लिए यह केवल एक मकान नहीं, बल्कि वर्षों से देखे जा रहे सुरक्षित आशियाने के सपने का साकार रूप है। महतारी वंदन योजना से परिवार की महिलाओं को आर्थिक संबल परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महतारी वंदन योजना भी सहायक बन रही है। शंभू बारी की पत्नी को योजना के अंतर्गत प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो रही है। नियमित रूप से मिलने वाली यह राशि घरेलू जरूरतों और छोटे-छोटे खर्चों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है। कई योजनाओं का लाभ बना मजबूत जीवन का आधार शंभू बारी कहते हैं कि अलग-अलग योजनाओं से मिले लाभ ने उनके परिवार की परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव लाया है। भूमिहीन कृषि मजदूर के रूप में मिलने वाली वार्षिक आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला पक्का घर और पत्नी को मिल रही महतारी वंदन योजना की राशि ने परिवार को आर्थिक सहारा देने के साथ भविष्य के प्रति भरोसा भी बढ़ाया है। शंभू बारी ने कहा, “दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना से हमें साल में 10 हजार रुपये मिलते हैं। यह राशि हमारे जरूरी कामों में बहुत मदद करती है। प्रधानमंत्री आवास योजना से हमें पक्का घर मिला है और मेरी पत्नी को महतारी वंदन योजना से हर महीने एक हजार रुपये मिल रहे हैं। इन योजनाओं से हमारे परिवार को बहुत सहारा मिला है।” शंभू बारी ने इन जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं ने उनके जैसे जरूरतमंद परिवारों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि पक्के आवास और सम्मानजनक जीवन की मजबूत नींव भी प्रदान की है। शंभू बारी के परिवार की कहानी यह दर्शाती है कि जब शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचता है, तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के जीवन में स्थायी बदलाव की राह खुलती है। भूमिहीन परिवार को आर्थिक सहायता के साथ पक्का आवास और महिला सदस्य को नियमित आर्थिक सहयोग मिलना, समावेशी और संवेदनशील शासन व्यवस्था की सार्थक तस्वीर प्रस्तुत करता है।

शरिया कोर्ट के तलाक आदेश पर CG हाईकोर्ट सख्त, कहा- कानूनी दर्जा तय करने का अधिकार नहीं

बिलासपुर. मुस्लिम महिला के वैवाहिक अधिकारों से जुड़े एक मामले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई निजी धार्मिक संस्था या स्वयं को शरिया कोर्ट बताने वाला संगठन कानून से स्थापित अदालत का दर्जा नहीं प्राप्त कर सकता. ऐसी संस्थाएं न तो किसी महिला के वैवाहिक दर्जे का न्यायिक निर्धारण कर सकती हैं और न ही विवाह विच्छेद की कानूनी घोषणा कर सकती हैं. हाईकोर्ट ने रायपुर के इदारा-ए-शरिया इस्लामी कोर्ट द्वारा 18 जनवरी 2022 को जारी उस आदेश को कानूनी अधिकार से रहित घोषित कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता महिला को उसके पति से तलाकशुदा बताया गया था. जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि इदारा-ए-शरिया का आदेश किसी वैधानिक न्यायिक व्यवस्था से जारी नहीं हुआ है. इसलिए उससे न विवाह समाप्त हो सकता है और न किसी पक्ष के कानूनी अधिकार, स्थिति या दायित्व में बदलाव हो सकता है. बता दें, कि याचिकाकर्ता टिकरापारा रायपुर निवासी निरोश अब्बासी, पत्नी मोहम्मद आबिद खान के पहले पति की वर्ष 2015 में मृत्यु हो गई थी. इसके बाद 18 जुलाई 2020 को उनका विवाह मोहम्मद आबिद खान से हुआ. विवाह के बाद बच्चों के नए परिवार में समायोजन को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ. याचिकाकर्ता के अनुसार इसी विवाद के बाद उन्हें तलाक देने की प्रक्रिया शुरू की गई. पति ने कहा कि उन्होंने तलाक-ए-हसन तीन चरणों में 31 अगस्त, 30 सितंबर और 30 अक्टूबर 2021 को संचार के माध्यम से घोषित किया था. याचिकाकर्ता ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ उत्पीड़न, क्रूरता और दुर्व्यवहार की शिकायत की थी. वन स्टाप सखी सेंटर में काउंसिलिंग भी हुई, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हुआ. इसके बाद सात अक्टूबर 2021 को उन्होंने पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत की. महिला थाना रायपुर में एक नवंबर 2021 को एफआइआर दर्ज की गई, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए और 34 के तहत अपराध दर्ज हुआ. हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विश्व लोचन मदन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि दारुल कजा या फतवा जारी करने वाली संस्थाओं को कानून से स्थापित न्यायालय का दर्जा प्राप्त नहीं है. उनके निर्णय बाध्यकारी नहीं होते और उन्हें कानूनी प्रक्रिया से लागू नहीं कराया जा सकता. इसी आधार पर हाई कोर्ट ने कहा कि इदारा-ए-शरिया किसी व्यक्ति के वैवाहिक दर्जे का न्यायिक निर्धारण नहीं कर सकता. धार्मिक संस्था अपनी धार्मिक राय दे सकती है, लेकिन वह राय कानूनी अधिकारों पर बाध्यकारी नहीं हो सकती. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश का एफआइआर या पक्षकारों के अन्य वैधानिक उपायों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा. आपराधिक मामले और अन्य कानूनी अधिकारों का निर्धारण संबंधित सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुसार करेंगे. कोर्ट ने याचिका आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए इदारा-ए-शरिया इस्लामी कोर्ट के 18 जनवरी 2022 के आदेश को कानूनी अधिकार से रहित घोषित किया.

CM डॉ. यादव ने शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन से की मुलाकात, MP में बड़े निवेश की उम्मीद

दुबई विजिट "तीसरा दिन" मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन से की भेंट, एमपी में बड़े निवेश की संभावना शारजाह और मध्यप्रदेश के बीच आर्थिक साझेदारी सुदृढ़ करने पर गहन विचार-विमर्श मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह के प्रतिनिधिमंडल को जीआईएस 2027 के लिए किया आमंत्रित फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, टेक्सटाइल, फार्मा और रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश के व्यापक अवसर उपलब्ध भोपाल  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित 'एनुअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग' (एआईएम कांग्रेस-2026) के दौरान शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री एवं एक्सपो सेंटर के चेयरमैन अब्दल्ला सुल्तान अल ओवैस से सौजन्य भेंट की। बैठक में मध्यप्रदेश और शारजाह के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को प्रगाढ़ करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओवैस को अगले साल होने वाली 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस-2027') में सहभागिता के लिये मध्यप्रदेश आमंत्रित किया। व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल और बी-2-बी फोरम का प्रस्ताव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह चैंबर के साथ एक सुव्यवस्थित और रणनीतिक आर्थिक साझेदारी विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने चेयरमैन ओवैस से मध्यप्रदेश में एक उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने का आग्रह किया। साथ ही, दोनों क्षेत्रों के उद्यमियों के बीच सेक्टर-आधारित बी-2-बी बैठकों के आयोजन हेतु 'मध्यप्रदेश-शारजाह बिजनेस फोरम' का प्रस्ताव भी रखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य के एमएसएमई और निर्यातकों को खाड़ी देशों के प्रमुख खरीदारों व वितरकों से जोड़ने के लिए शारजाह चैंबर से सहयोग का आह्वान किया। बैठक में शारजाह की अग्रणी कंपनियों को प्रदेश के फूड पार्क, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, नवकरणीय ऊर्जा और पर्यटन परियोजनाओं में पूंजी निवेश के लिए आमंत्रित किया गया। मध्यप्रदेश में निवेश-अनुकूल नीतियां और सुदृढ़ इंफ्रॉस्ट्रक्चर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी रणनीतिक केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, प्रतिस्पर्धी लागत, विशाल औद्योगिक लैंड बैंक, विश्वस्तरीय इंफ्रॉस्ट्रक्चर और देश के बड़े बाजारों से उत्कृष्ट कनेक्टिविटी के साथ देश का प्रमुख निवेश केंद्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी नीतियों, त्वरित सिंगल-विंडो सिस्टम और उद्योग-अनुकूल वातावरण के माध्यम से निवेशकों को संपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है। शारजाह का विस्तृत व्यापारिक नेटवर्क और कनेक्टिविटी मध्यप्रदेश के स्थानीय उत्पादों के निर्यात, कौशल संवर्धन, रोजगार सृजन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में मील का पत्थर सिद्ध होगी। शारजाह-भारत के मजबूत आर्थिक संबंध शारजाह-भारत के व्यापारिक संबंधों को भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी और सीईपीए का समर्थन प्राप्त है। चैंबर ने भारत में मुंबई सहित, ट्रेड मिशन और बिज़नेस फोरम आयोजित किए हैं। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, ज्वेलरी, एसएमई, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, फूड इंडस्ट्रीज़, टूरिज़्म और रियल एस्टेट शामिल हैं। गौरतलब है कि अब्दल्ला सुल्तान अल ओवैस मई 2014 से शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और एक्सपो सेंटर शारजाह के चेयरमैन हैं। वे यूएई फेडरेशन ऑफ चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के वाइस चेयरमैन भी हैं। उन्हें सरकार, उद्योग, बैंकिंग, फूड प्रोडक्शन, एजुकेशन, एग्रीकल्चर और द्विपक्षीय बिज़नेस संस्थाओं में नेतृत्व का व्यापक अनुभव है।