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‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना में बढ़ा लाभ, वैकल्पिक फसलों पर मिलेंगे ₹10 हजार तक

 चंडीगढ़  लगातार गिरते भू-जलस्तर से जूझ रहे हरियाणा में अब प्रदेश सरकार ने किसानों को धान की सीधी बिजाई या फिर कम पानी लेने वाली फसलों को लगाने के लिए प्रोत्साहित करने को 'मेरा पानी-मेरी विरासत' तथा 'फसल विविधीकरण और जल संरक्षण' योजना का विस्तार किया है। दोनों योजनाओं में पंजीकरण कराने वाले किसानों की प्रोत्साहन राशि पांच वर्षों तक हर साल बढ़ती जाएगी। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी को मंजूरी प्रदान की है, जिसके बाद कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार ने अधिसूचना जारी कर दी है। मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत धान की बजाय वैकल्पिक फसलें लगाने वाले किसानों को पहले साल 8000 रुपये, दूसरे वर्ष 8300 रुपये, तीसरे वर्ष 8800 रुपये, चौथे वर्ष 9400 रुपये और पांचवें साल 10,000 रुपये दिए जाएंगे। इतना ही नहीं, दालें, तिलहन और कपास लगाने पर दो हजार रुपये का बोनस अलग से मिलेगा। इसी तरह धान की सीधी बिजाई पर पहले साल 4500, दूसरे साल 4700, तीसरे साल 5000, चौथे साल 5400 और पांचवें साल 6000 रुपये मिलेंगे। बढ़ी प्रोत्साहन राशि का लाभ उठाने के लिए मेरी फसल-मेरा ब्याेरा पोर्टल पर किला नंबर वही दर्ज होना चाहिए। मेरा पानी-मेरी विरासत योजना में पहली बार धान की बजाय खेत में मक्का, कपास, खरीफ की दालें (अरहर, मूंग, मोठ, उड़द, ग्वार, सोयाबीन), खरीफ के तिलहन (तिल, अरंडी, मूंगफली), चारे की फसलें, कृषि-वानिकी (पापुलर और सफेदा) तथा खरीफ की प्याज सहित बागवानी फसलें व सब्जियां लगाने पर किसानों के बैंक खातों में आठ हजार रुपये डाले जाएंगे। इसके बाद किसान जैसे-जैस वैकल्पिक फसलें लगाते रहेंगे, उनकी प्रोत्साहन राशि बढ़ती जाएगी। वे किसान भी लाभान्वित होंगे, जिन्होंने धान लगाने की बजाय अपने खेतों को खाली छोड़ा है। फिलहाल योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिन्होंने पिछले साल धान उगाया था और इस साल उसी खेत में स्वीकृत वैकल्पिक फसलों में से कोई एक फसल लगाई है। वे किसान, जिन्होंने पिछले चार वर्षों में से किसी भी वर्ष उसी खेत में वैकल्पिक फसलें उगाई थीं, वे पात्र नहीं होंगे। जिस किसानों ने पिछले खरीफ सीजन में मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत फसल विविधीकरण अपनाया था, वह इस साल भी योजना का लाभ उठा सकेंगे, बशर्ते कि उसी खेत में मंजूर की गईं वैकल्पिक फसलें उगाएं। यदि कोई किसान किसी बाद के वर्ष में उस 'किला नंबर' पर वैकल्पिक फसलें लगाना बंद कर देता है, तो वह उस विशिष्ट वर्ष में प्रोत्साहन के लिए पात्र नहीं होगा। यदि किसान एक साल के अंतराल के बाद उसी किला नंबर पर वैकल्पिक फसल अपनाता है, तो इसे नया नामांकन माना जाएगा और उसे प्रति एकड़ 8000 रुपये का शुरुआती वर्ष का प्रोत्साहन मिलेगा। डीएसआर मशीन पर मिलेगी 40 हजार रुपये तक सब्सिडी धान की सीधी बिजाई के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डीएसआर मशीन पर सब्सिडी कीमत की 50 प्रतिशत या 40 हजार रुपये (जो भी कम हो) के हिसाब से दी जाएगी। सभी लाभार्थियों के बैंक खातों में यह राशि डीबीटी के माध्यम से डाली जाएगी। हरी खाद लगाने पर प्रति एकड़ मिलेंगे एक हजार रुपये किसानों को खेतों में हरी खाद तैयार करने के लिए एक हजार रुपये प्रति एकड़ दिए जाएंगे। ढैंचा, गर्मी की मूंग, उड़द, लोबिया, मोठ, अरहर और सोयाबीन तथा ग्वार लगाने पर यह प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।  

रांची में झमाझम बारिश से मौसम सुहाना, कई इलाकों में गरज-चमक का अलर्ट

 रांची झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार को मौसम का मिजाज अचानक बदला नजर आया। दिनभर आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच कई इलाकों में बारिश हुई। रांची मौसम केंद्र की ओर से जारी दैनिक मौसम बुलेटिन के अनुसार पिछले 24 घंटे में राजधानी में 60.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। राज्य के प्रमुख शहरों में रांची में सबसे अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। बारिश के बावजूद राजधानी का तापमान सामान्य से ऊपर बना रहा। रांची में सोमवार को अधिकतम तापमान 31.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.3 डिग्री अधिक है। वहीं न्यूनतम तापमान 23.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.2 डिग्री अधिक है। पिछले 24 घंटे की तुलना में अधिकतम तापमान में 0.5 डिग्री की गिरावट हुई, जबकि न्यूनतम तापमान में 1.6 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 13 तक बारिश के आसार मौसम विभाग ने राज्य में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। Jharkhand Weather Forecast के अनुसार 13 सितंबर तक राज्य में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ वर्षा हो सकती है। इससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम खराब होने पर खुले स्थानों, पेड़ के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचना सुरक्षित रहेगा। बारिश ने राजधानी के मौसम को किया सुहाना रांची में हुई अच्छी बारिश के बाद मौसम में ठंडक महसूस की गई। सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे और बीच-बीच में बारिश होती रही। कई इलाकों में बारिश का असर सामान्य जनजीवन पर भी देखने को मिला। हालांकि बारिश के बाद तापमान में बड़ी गिरावट नहीं हुई और अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर ही रहा। मौसम विभाग के आंकड़ों से स्पष्ट है कि पिछले 24 घंटे में रांची में हुई बारिश राज्य के अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में काफी अधिक रही। इससे राजधानी में मानसून की सक्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है। जमशेदपुर में 33.4 डिग्री तापमान राज्य के अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो जमशेदपुर में अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.8 डिग्री अधिक रहा। न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री रहा। यहां पिछले 24 घंटे में 1.4 मिलीमीटर बारिश हुई। डालटनगंज में अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री, जबकि न्यूनतम 25.9 डिग्री सेल्सियस रहा। यहां 2.6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। बोकारो में अधिकतम तापमान 31.1 डिग्री और न्यूनतम 25.1 डिग्री रहा। बोकारो में 10.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। चाईबासा का पोटो सबसे गर्म, तापमान 35.8 डिग्री राज्य में सबसे अधिक अधिकतम तापमान चाईबासा-पोटो में 35.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से 5.4 डिग्री अधिक रहा। यहां न्यूनतम तापमान 24.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि बारिश नहीं हुई। इससे स्पष्ट है कि एक ओर रांची में भारी बारिश हुई, वहीं पश्चिमी सिंहभूम के कुछ हिस्सों में गर्मी का असर बना रहा। कई जिलों में हुई हल्की बारिश स्वचालित मौसम केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, बहारागोड़ा में 7 मिलीमीटर और सिमडेगा के बानो में एक मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं बोकारो, देवघर, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, पाकुड़, सरायकेला, दुमका और पश्चिमी सिंहभूम के जगन्नाथपुर में बारिश दर्ज नहीं हुई। राजधानी पर मौसम विभाग की नजर रांची में 60.6 मिलीमीटर बारिश और तापमान सामान्य से ऊपर रहने से राजधानी के मौसम में बदलाव साफ दिखाई दिया। आने वाले दिनों में भी बादल और बारिश का दौर बना रहने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए राजधानीवासियों को गरज-चमक के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत है। विशेषकर तेज बारिश और वज्रपात की स्थिति में खुले स्थानों पर जाने से बचना सुरक्षित रहेगा।

चंडीगढ़ में बिजली बिलों की मनमानी पर सख्ती, प्रशासक ने बनाई कमेटी; मंजूरी के बिना नहीं बढ़ेंगी दरें

चंडीगढ़  चंडीगढ़ में बिजली बिल की शिकायतों को लेकर प्रशासक गुलाब चंद कटारिया एक्शन मोड में आ गए हैं। वह जल्द ही इस मामले में मीटिंग करने जा रहे हैं। यह बात उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मीडिया से कही।प्रशासक ने  बताया कि कंपनी के साथ बिजली वितरण को लेकर एमओयू हुआ है। हालांकि मैंने महसूस किया है कि बिजली बिल को लेकर शिकायतें आ रही हैं। हम इनके साथ बैठकर चर्चा करेंगे। जल्द ही मीटिंग कर शिकायतों का निपटारा करेंगे। उन्होंने कहा कि आज चाहे अस्पताल हो या पढ़ाई, हर चीज के लिए बिजली जरूरी है। आजकल व्यक्ति किसी और चीज के रुकने से रुक सकता है, लेकिन अगर बिजली की सप्लाई रुक जाती है तो काफी दिक्कत होती है। उम्मीद है कि बिजली व्यवस्था में और सुधार होगा। प्रोजेक्ट को लेकर डर हमारे मन में भी था प्रशासक ने कहा कि चंडीगढ़ देश का पहला शहर है, जहां बिजली वितरण का काम प्राइवेट सेक्टर को दिया गया था। जब हमने यह काम उन्हें सौंपा था तो हमारे मन में भी डर था। जनता के मन में भी अविश्वास था। मुलाजिम तो नाराज थे। उन्हें समझाया गया कि आपको किसी तरह की हानि नहीं होगी। इसके बाद फरवरी 2025 में हमने प्रोजेक्ट शुरू किया। हिंदुस्तान में पहला प्रयोग हम ही कर रहे अब तक बिजली वितरण को लेकर कोई बड़ी शिकायत नहीं आई। कभी-कभी कुछ शिकायतें जरूर आई हैं। देश के प्रधानमंत्री ने यह प्रोजेक्ट हमें दिया था। हमने इन्हें (कंपनी को) कहा था कि अगर आप असफल हो जाएंगे तो पावर जेनरेशन भी असफल हो जाएगा। हिंदुस्तान में यह पहला प्रयोग हम ही कर रहे हैं। पीयू जैसे हादसे अब नहीं होंगे उन्होंने कहा कि जब ऊपर तार चलते हैं तो कई तरह के फॉल्ट आ सकते हैं। बिजली जाने और उसे रिस्टोर करने में समय लगता है। अब लाइन को अंडरग्राउंड किया जा रहा है। चार लाइनों से अपने सेंटर को जोड़ दिया गया है। मान लीजिए किसी एक लाइन में फॉल्ट आ जाए तो कम से कम असर पड़ेगा। तारें बाहर रहने की वजह से नुकसान भी होते हैं। लाइन को 12 करोड़ रुपए खर्च कर बदलना है कुछ समय पहले पंजाब यूनिवर्सिटी में एक बच्ची की करंट लगने से मौत हो गई थी। कंपनी ने 18 किलोमीटर की लाइन को 12 करोड़ रुपए खर्च कर बदलना है। उम्मीद है कि इससे बिजली व्यवस्था में और सुधार होगा।

टीकमगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष उपचुनाव पर लगी रोक, नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले निर्वाचन आयोग का बड़ा फैसला

टीकमगढ़  टीकमगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष के उपचुनाव को राज्य निर्वाचन आयोग ने आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी विवेक श्रोतिय ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। आयोग के आदेश के बाद 8 सितंबर से शुरू होने वाली नामांकन प्रक्रिया भी रद्द कर दी गई है। हालांकि, ग्रामीण पंचायतों के निर्वाचन पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यथावत होंगे। आज से शुरू होनी थी नामांकन प्रक्रिया कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने बताया कि नगर पालिका अध्यक्ष उपचुनाव के लिए मंगलवार से नामांकन फार्म वितरण की प्रक्रिया शुरू होनी थी। आयोग के निर्देश के बाद इसे रोक दिया गया है। अब नगरीय निकाय उपचुनाव के लिए नया कार्यक्रम जारी किया जाएगा। वित्तीय गड़बड़ी के बाद खाली हुआ था पद दरअसल, टीकमगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार को वित्तीय गड़बड़ियों के चलते अयोग्य घोषित किया गया था। उनके चुनाव लड़ने पर 6 साल के लिए रोक भी लगाई गई है। अध्यक्ष पद खाली होने के बाद डिप्टी कलेक्टर अंजली शर्मा को नगर पालिका का प्रभारी अध्यक्ष बनाया गया था। 31 जुलाई को जारी हुआ था चुनावी कार्यक्रम राज्य निर्वाचन आयोग ने 31 जुलाई को टीकमगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष के उपचुनाव की तारीखों का ऐलान किया था। इसके बाद कलेक्टर ने 1 सितंबर को नगरीय चुनाव की आचार संहिता लागू कर दी थी। पिछले एक सप्ताह से भाजपा और कांग्रेस में अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों ने अपनी दावेदारी जताना शुरू कर दी थी। 18 सितंबर तक होना था नामांकन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अध्यक्ष पद के लिए नाम निर्देशन का काम 8 सितंबर से 18 सितंबर तक होना था। नाम-निर्देशन पत्र प्राप्त करने की अंतिम तारीख 15 सितंबर तय की गई थी। 18 सितंबर को नाम वापसी की अंतिम तारीख थी। इसी दिन नाम वापसी के बाद चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सूची तैयार कर चुनाव चिह्नों का आवंटन किया जाना था। 29 सितंबर को होना था मतदान नगर पालिका अध्यक्ष के उपचुनाव के लिए 29 सितंबर को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होना था। इसके बाद 3 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से मतगणना और चुनाव परिणाम की घोषणा की जानी थी। चुनाव कार्यक्रम स्थगित होने के बाद अध्यक्ष पद के लिए तैयारी कर रहे दावेदारों को झटका लगा है। आयोग के आदेश में क्या कहा- कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी पत्र में बताया गया कि राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव ने नगरीय निकायों के उप निर्वाचन वर्ष 2026 (पूर्वार्द्ध) को आगामी आदेश तक स्थगित करने की जानकारी दी है। मध्यप्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम 1994 के नियम 23 सहपठित नियम 11-क के तहत उपचुनाव को नए सिरे से री-शेड्यूल किया जाएगा। नए कार्यक्रम का इंतजार आयोग के निर्देश के बाद जिले में नगरीय निकाय उप निर्वाचन की सूचना जारी नहीं की गई है। अब राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से नया कार्यक्रम जारी होने के बाद ही नामांकन और चुनाव की प्रक्रिया दोबारा शुरू होगी। फिलहाल अध्यक्ष पद के दावेदारों को नई तारीखों का इंतजार करना होगा।

बिलासपुर में उपद्रव के आरोपियों पर पुलिस का शिकंजा, 5 आरोपियों का निकाला जुलूस

बिलासपुर. रक्षाबंधन की रात दो लोगों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते गुटों के टकराव और पथराव में बदल गया. घटना में कुछ लोगों को पत्थर लगे. सूचना मिलते ही पुलिस रात में ही सक्रिय हो गई. एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर पुलिस ने ड्रोन कैमरों और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से घटना में शामिल संदिग्धों की पहचान शुरू की. अब तक तीन चरणों में कुल 29 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. पहले चरण में पुलिस ने दंगा फसाद, पथराव और विभिन्न धाराओं में 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया. इनमें मौला बख्श, शेख अजरुद्दीन, मोहम्मद जाहिद, शफीक अहमद, शकील उर्फ सोनू, मोहम्मद लाइक, रेहान अली उर्फ इरानी, मुहम्मद जुनैद, शेर खान, मो. अजहर कुरैशी, विजेद्र अनंत, अब्दुल रज्जाक, अरबाज खान, सोहेल खान, नुमान अली, शेख सुल्तान, मोहम्मद मुस्तकीन, राजू यादव उर्फ नान, राकेश यादव और छत्रपाल साहू शामिल हैं. दूसरे चरण में पुलिस ने अक्षय सिंह, अभय शर्मा, मोहनीश गोस्वामी और सतानंद साहू को गिरफ्तार किया. इन चारों को पुलिस ने जुलूस के रूप में सड़क पर ले जाकर कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की. कार्रवाई के तीसरे चरण में आज पुलिस ने आज सन्नी ध्रुव 18 साल, दुर्गेश पुरी गोस्वामी 19 साल, अभिजित नेताम 19 साल, करण कश्यप उर्फ बडू 23 साल, कन्हैया मरावी 19 साल सभी निवासी तिफरा कुंदरापारा के रहने वाले है. वहीं पुलिस की तीन चरणों में हुई कार्रवाई में अब तक 29 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. आज पांच आरोपियों को खुले सड़क पर जुलूस के रूप में ले जाने के बाद अब पुलिस की जांच का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव रामसिंह की गिरफ्तारी है.

13 जिलों में सैलाब का तांडव, 29 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में; तस्वीरों में देखिए बिहार का हाल

 पटना बिहार में बाढ़ का दायरा लगातार फैलता जा रहा है. राज्य के 13 जिलों में करीब 29 लाख 13 हजार से ज्यादा आबादी सैलाब के बीच घिरी हुई है. पानी ने कहीं गांवों का संपर्क पूरी तरह काट दिया है, तो कहीं सड़कें डूबने से आवाजाही ठप हो चुकी है. कई इलाकों में लोगों के घरों और आंगनों तक दरिया बह रहा है. प्रशासन एक तरफ सुरक्षित ठिकानों तक राहत सामग्री पहुंचाने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ बीमार लोगों तक इलाज पहुंचाने की मशक्कत चल रही है।  यह विकराल संकट पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल तक फैला हुआ है. इन जिलों के 77 प्रखंडों (ब्लॉक) की 438 ग्राम पंचायतों में जिंदगी ठहर सी गई है. हालांकि प्रयागराज से वाराणसी तक गंगा के धीमे पड़ने से कुछ इलाकों में जलस्तर घटने की हल्की उम्मीद भी जगी है।  पटना में गंगा का पानी घटा, कई नदियां अब भी उफान पर पटना में गंगा का जलस्तर 50.58 मीटर के रिकॉर्ड स्तर से घटकर 50.40 मीटर पर आ गया है. इलाहाबाद से वाराणसी तक गंगा के जलस्तर में आई गिरावट से पटना में भी आगे राहत की उम्मीद है. हालांकि पुनपुन नदी अभी खतरे के निशान से 2.93 मीटर ऊपर बह रही है।  कटिहार में गंगा और कोसी के संगम पर बना दबाव 35 पंचायतों के करीब साढ़े तीन लाख लोगों को घेरे हुए है. खगड़िया के चौथम प्रखंड समेत दियारा इलाकों में बागमती का पानी नई मुसीबतें खड़ी कर रहा है. उधर गोपालगंज में गंडक बैराज से सवा लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में निगरानी कड़ी कर दी गई है।  भागलपुर में ढाई फीट पानी, मुंगेर में घरों तक पहुंचा बाढ़ का पानी भागलपुर में नेशनल हाईवे-80 पर करीब ढाई फीट पानी बह रहा है, जिसके चलते गाड़ियों के पहिए पूरी तरह थम गए हैं. अकेले इस जिले में सवा दो लाख से ज्यादा लोग सैलाब से घिरे हैं. यही हाल मुंगेर के बरियारपुर का भी है, जहां गंगा खतरे के निशान से सवा मीटर ऊपर बहने से सैकड़ों घरों में दरिया समा चुका है. वहीं, सीवान के दरौली में भी सरयू नदी लाल निशान से आधा मीटर ऊपर बहकर निचले इलाकों को डुबो रही है।  पानी का यह दबाव भोजपुर के आरा तक पहुंच चुका है. बड़हरा इलाके में गंगा का फैलाव बढ़ते ही हालात बेकाबू हो गए, जहां धमार गांव में डूबने से 32 साल के एक युवक की जान चली गई. इसके अलावा, सारण में माही नदी का जमींदारी बांध टूटने से आफत और बढ़ गई है. तेज बहाव के साथ पानी सीधा रिहायशी बस्तियों की ओर रुख कर रहा है।  दूसरी तरफ शेखपुरा में भी सैलाब का असर साफ दिखने लगा है. यहां हरोहर नदी का पानी पांच पंचायतों में फैलने से घरों के अलावा स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र डूब चुके हैं, जिससे आम लोगों की जिंदगी पूरी तरह बेपटरी हो गई है।  बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्कूल-पंचायत भवनों में इलाज पानी से घिरे लोगों को इलाज के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने भी व्यवस्था शुरू की है. प्रभावित इलाकों में स्कूलों और पंचायत भवनों में इलाज की सुविधा दी जा रही है. यहां डॉक्टरों और नर्सों की तैनाती के साथ जरूरी दवाइयों का इंतजाम किया गया है. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को मौके पर ही इलाज देने की कोशिश की जा रही है. इस दौरान प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है।  बिहार में गंगा, कोसी, गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. ऐसे में प्रशासन की नजर जलस्तर पर बनी हुई है. लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के साथ राहत सामग्री और जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने का काम जारी है। 

‘सिर्फ यादव जी और खान साहब ही चाहिए क्या PC में?’ अखिलेश से ओपी राजभर के तीखे सवाल

‘सत्ता में तो कब्रिस्तान दिख रहा था, आज सम्राट अशोक की बात कर रहे हो’- अखिलेश पर बरसे ओपी राजभर ‘सिर्फ यादव जी और खान साहब ही चाहिए क्या PC में?’ अखिलेश से ओपी राजभर के तीखे सवाल 'आपके सामने ही आजम खान ने उड़ाया था बाबा साहब का मजाक, तब किस नशे में थे?’ अखिलेश पर ओपी राजभर का हमला लखनऊ समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने जोरदार हमला बोला है। उन्होंने अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में अगर कोई पत्रकार तीखा सवाल कर दे तो तिलमिला जाते हैं। पीसी में भी सिर्फ यादव जी और ख़ान साहब ही चाहिए क्या? ओपी राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट पर एक पोस्ट के जरिए सवाल किया कि “क्या मित्र अखिलेश यादव जी, एसी में बैठकर अपने खासम-खास यूट्यूबर्स के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते है और गलती से कोई ढ़ंग का पत्रकार कड़ा सवाल पूछ दें तो 'मिसरा जी-मिसरा जी' करने लगते हैं। क्या पीसी में भी सिर्फ यादव जी और ख़ान साहब ही चाहिए क्या?  राजभर ने 8 सितंबर को हुई अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस को लेकर कहा, “आपकी प्रेस कॉन्फ्रेंस देखी। इसमें आप बहुत लंबा चौड़ा फेंक रहे थे कि सरकार आई तो सम्राट अशोक की जयंती पर अवकाश देंगे, बौद्ध स्थल वर्ल्ड क्लास बना देंगे।” सत्ता में थे तो क़ब्रिस्तान पर ख़र्च कर रहे थे- राजभर राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि अशोक-बुद्ध जी का नाम लेते हुए यह भी बता दिये होते कि जब आप सत्ता में थे तब आपको कब्रिस्तान दिख रहा था। तब तो जनता के सारे पैसे तो क़ब्रिस्तान में ख़र्च कर रहे थे। ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि जब सपा सरकार थी तब बहुजन महापुरुषों के नाम पर बने जिलों और संस्थानों का नाम मिटाए जा रहे थे। यूपी कैबिनेट मंत्री राजभर ने कहा कि आपकी सरकार में भीम नगर, फुले नगर, कांशीराम नगर, रमाबाई नगर, संत रविदास नगर का नाम बदला गया। आंबेडकर जी के नाम पर चलने वाली सब योजना हटा दी गई। राजभर ने आरोप लगाया, “आप मंच पर बैठे रहे और आपके आजम खान बाबा साहब की प्रतिमा का मजाक उड़ाते रहे, तब आप किस नशे में थे? उन्होंने कहा कि यूपी जनता आपसे सवाल पूछ रही है कि आपने सत्ता में रहते बहुजनों के लिए क्या, जवाब ज़रूर दीजिए। इससे पहले राजभर बोल चुके हैं अखिलेश पर हमला बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए हमला बोला है। इससे पहले उन्होंने अखिलेश यादव की राजनीति पर सवाल खड़े किए थे। राजभर ने कहा था कि आखिर अखिलेश यादव कबतक हवाबाजी करेंगे और एसी और पीसी से ही चुनाव लड़ेंगे? उन्होंने तंज कसते हुए सपा प्रमुख को जमीन पर आने की बात कही थी। इससे पहले राजभर ने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा था कि आइए जमीन पर उतरिए और दो-दो हाथ हो जाएं। एकतरफा चुनाव में मजा नहीं आता है।'

Major improvements in the power system under the Yogi government! Significant drop in distribution and AT&C losses.

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने और बिजली वितरण में होने वाले नुकसान को कम करने के प्रयासों का असर आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020-21 में 20.63 प्रतिशत रही वितरण हानि वर्ष 2025-26 में घटकर 13.04 प्रतिशत रह गई। इसी अवधि में एटीएंडसी हानि भी 31.19 प्रतिशत से घटकर 17.83 प्रतिशत पर आ गई। कृषि फीडरों को छोड़कर प्रदेश में फीडरों की संख्या 18,351 से बढ़कर 21,463 हो गई है। इनमें लाभकारी फीडरों की संख्या 5,772 से बढ़कर 8,104 पहुंच गई। इसमें 2,332 अतिरिक्त फीडर लाभकारी श्रेणी में आए हैं। लाभकारी फीडरों की हिस्सेदारी भी 31 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत हो गई है। डिस्कॉमवार प्रदर्शन में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम 53 प्रतिशत लाभकारी फीडरों के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। केस्को 39 प्रतिशत, दक्षिणांचल और मध्यांचल 37-37 प्रतिशत तथा पूर्वांचल 22 प्रतिशत पर रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक कुशल, जवाबदेह और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में लगातार सुधार हुआ है। हाई लॉस क्लस्टर मॉडल से वसूली और नए कनेक्शन में तेजी योगी सरकार के नेतृत्व में बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए लागू हाई लॉस क्लस्टर मॉडल के तहत प्रदेश में 703 क्लस्टर, 1703 फीडर, 42.21 लाख उपभोक्ता और 76,839 वितरण ट्रांसफार्मरों को कवर किया गया। यह कुल उपभोक्ताओं का करीब 11 प्रतिशत है। अभियान के तहत 654 करोड़ 31 लाख रुपये की बकाया वसूली की गई है, जबकि 1,01,548 नए विद्युत संयोजन जारी किए गए हैं। दक्षिणांचल डिस्कॉम में भी सुधार उल्लेखनीय रहा। यहां वितरण हानि 25.64 प्रतिशत से घटकर 14.78 प्रतिशत और एटीएंडसी हानि 31.03 प्रतिशत से घटकर 19.57 प्रतिशत रह गई। थ्रू-रेट 3.65 रुपये प्रति यूनिट से बढ़कर 4.06 रुपये हो गया। दक्षिणांचल में वर्ष 2025-26 में 105 करोड़ रुपये तथा चालू वित्तीय वर्ष में जुलाई तक 155 करोड़ रुपये की वसूली की गई। हाई लॉस फीडरों पर कार्रवाई का असर तालबेहट टाउन-2 ललितपुर में एटीएंडसी हानि 63 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत, मणिकापुर सीरी कासगंज में 87 से 53 प्रतिशत और राल मथुरा में 83.62 से 47.82 प्रतिशत तक आ गई। आगरा, मथुरा, चित्रकूट, राठ और कोसी के टॉप-10 हाई लॉस फीडरों का घाटा 22.53 करोड़ से घटकर 17.89 करोड़ रुपये रह गया, जो करीब 21 प्रतिशत की कमी है। फीडर स्तर पर मॉनिटरिंग से बढ़ा वित्तीय अनुशासन अधिकारियों के अनुसार, यह सुधार योगी सरकार और यूपीपीसीएल अध्यक्ष के मार्गदर्शन और लगातार मॉनिटरिंग का परिणाम है। फीडर स्तर पर दैनिक समीक्षा, डेटा आधारित निगरानी और फील्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने से विद्युत विभाग में वित्तीय अनुशासन मजबूत हुआ है और राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।  

दिल्ली बिल्डिंग हादसे के बाद पहली बार DC रैंक के अधिकारी पर गिरी गाज, MCD ने किया सस्पेंड

नई दिल्ली  सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार और सुपरिटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह सहित पांच अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। MCD के इतिहास में पहली बार किसी डिप्टी कमिश्नर रैंक के अधिकारी को सस्पेंड किया गया है। सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में सस्पेंड किए गए साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। वह करीब तीन साल पहले डेपुटेशन पर MCD में आए थे। पहले उन्हें सिविल लाइन जोन का डिप्टी कमिश्नर बनाया गया था। उनके कार्यकाल में ही जनवरी 2025 को बुराड़ी इलाके में पांच मंजिला बिल्डिंग ध्वस्त हुई थी। इस हादसे में भी 7-8 लोगों की मौत हुई थी। उन्हें करीब आठ महीने पहले साउथ जोन का डिप्टी कमिश्नर बनाया गया था। बुराड़ी में भी इनके रहते गिरी थी 5 मंजिला इमारत सस्पेंड किए गए सुपरिटेंडेंट इंजीनियर रणवीर सिंह को साल 2019 में 56जे के तहत नौकरी से निकाल दिया गया था। वह लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद कुछ महीने पहले ही बहाल हुए थे, उन्हें साउथ जोन में तैनात किया गया था। एग्जिक्यूटिव इंजीनियर ललित कुमार गोयल अभी कुछ महीने पहले ही असिस्टेंट इंजीनियर से प्रमोट होकर एग्जिक्यूटिव इंजीनियर बने थे। अप्रैल 2026 से वह साउथ जोन के बिल्डिंग विभाग दो में तैनात थे। सस्पेंड होने वाले असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार लगभग तीन साल से बिल्डिंग विभाग दो में तैनात हैं। PMO ने तुरंत रिपोर्ट मांग ली थी MCD के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद PMO ने रिपोर्ट मांग ली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित स्टाफ को घर से बुलाकर बिल्डिंग हादसे की डिटेल रिपोर्ट तैयार कर रविवार रात में ही पीएमओ को भेजी गई। इसके बाद अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लिया गया। यह मामला सीनियर स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

राजस्थान में निकाय चुनाव का पहला चरण आज, 57.52 लाख मतदाता करेंगे 20,623 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला

जयपुर राजस्थान के 39 जिलों के 5 हजार 393 वार्डों में नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण के लिए बुधवार को सुबह 7 से शाम 6 बजे तक मतदान होगा। इन 168 नगरीय निकाय क्षेत्रों में सोमवार शाम रैलियों, सभाओं, रोड शो और जुलूस का चुनावी शोर थम गया, अब घर-घर जाकर प्रचार हो सकेगा। प्रशिक्षण के बाद मंगलवार को मतदान दल रवाना होंगे, जो शाम तक संबंधित मतदान केंद्र पहुंचकर अगले दिन होने वाले मतदान की तैयारियां शुरू कर देंगे। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के समान मतदाताओं तक पर्ची नहीं पहुंचने व बुजुर्ग मतदाताओं को होम वोटिंग सुविधा न मिलने से मतदान प्रतिशत में कमी का अंदेशा है। वहीं, 35 वर्ष आयु तक के 40% से अधिक मतदाताओं का जोश मतदान बढ़ाने में मदद करेगा। उधर, पहले चरण में 40 वर्ष तक के युवा प्रत्याशी 49% से अधिक जिनका जोश भी चुनाव मैदान में दिखाई देगा। पहले चरण में 39 जिलों के 5 हजार 393 वार्डों में मतदाता अपने पार्षद चुनेंगे, जबकि प्रदेशभर के कुल वार्डों की संख्या 10 हजार 245 है। पहले चरण में प्रदेश के चार नगर निगमों सहित 168 नगरीय निकायों में मतदान होगा, जिनमें से पाली, भरतपुर, भीलवाड़ा और अलवर नगर निगम शामिल हैं। 10 में से जयपुर नगर निगम सहित 6 नगर निगमों में 11 सितंबर को मतदान होगा। दोनों चरणों की मतगणना 14 सितंबर को होगी। पहला चरण: 20 हजार 623 प्रत्याशी और 7 हजार 683 मतदान केंद्र मतदाताओं को निर्धारित पहचान दस्तावेज लाना होगा। पहले चरण के चुनाव में 57 लाख 52 हजार 278 मतदाता, 20 हजार 623 प्रत्याशियों के लिए 7 हजार 683 मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदाताओं का गणित     1 करोड़ 44 लाख 3 हजार 853 कुल मतदाता     कुल निकाय 309     पुरुष मतदाता 73 लाख 98 हजार 415     महिला मतदाता 70 लाख 04 हजार 927     511 थर्ड जेंडर     27.24% मतदाता बढ़े वर्ष 2019 की तुलना में वोट मैनेजमेंट पर जोर: भाजपा बूथ पर, कांग्रेस निर्दलीयों के साथ जोड़ रही समीकरण पहले चरण का प्रचार थमते ही भाजपा और कांग्रेस ने चुनावी रणनीति का फोकस वोट मैनेजमेंट पर कर दिया है। भाजपा ने कमजोर बूथों की पहचान कर कार्यकर्ताओं का नेटवर्क सक्रिय किया है। उधर, कांग्रेस 50 से 100 वोट काटने की क्षमता रखने वाले निर्दलीयों से संपर्क साध रही है। कंट्रोल रूम एक्टिव, बागियों और निर्दलीयों पर नजर प्रचार अभियान थमने के साथ ही भाजपा ने रणनीति का फोकस 'वोटिंग और प्रत्याशी मैनेजमेंट' पर कर दिया है। अब समर्थक मतदाताओं को घर से बूथ तक पहुंचाने पर जोर रहेगा। कमजोर बूथों की पहचान से लेकर मतदान के दिन कार्यकर्ताओं की सक्रियता तक की मॉनिटरिंग की जा रही है। निर्दलीय और बागियों की सूची भी तैयार की है, जिन्हें संगठन 'आगे' मान रहा है। जिला संगठनों ने यह सूची प्रदेश संगठन को भेज दी है। सोमवार से इनके साथ संपर्क का दौर भी तेज किया गया है। पार्टी इसे निकायों में बहुमत का आंकड़ा जुटाने की संभावित रणनीति के तौर पर देख रही है। कांग्रेसः बागियों को साध रहे, पोस्ट-पोल मैनेजमेंट की तैयारी राजस्थान में पहले चरण का मतदान समाप्त होते ही कांग्रेस ने अब चुनावी प्रबंधन का अगला चरण शुरू कर दिया है। पार्टी ने ऐसे निर्दलीय प्रत्याशियों की सूची पर काम शुरू किया है, जो खुद जीत की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी के वोट काटने की क्षमता रखते हैं। कांग्रेस की रणनीति अब ऐसे उम्मीदवारों को अपने पक्ष में लाने और दूसरे चरण में पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान का माहौल मजबूत करने की है। कांग्रेस का मानना है कि निकाय चुनाव में मुकाबला कई वार्डों में बेहद करीबी है। ऐसे में 50 से 100 या इससे अधिक वोट लेने वाला निर्दलीय भी नतीजे को प्रभावित कर सकता है। पार्टी अब प्रभावित खासतौर पर कांग्रेस विचारधारा से जुड़े ऐसे उम्मीदवारों से संपर्क कर रही है। जिला स्तर के नेताओं को इनसे बातचीत की जिम्मेदारी दी गई है। जिलाध्यक्ष, विधायक और वरिष्ठ नेताओं को इन लोगों से संपर्क साधने की जिम्मेदारी दी जा रही है।