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स्वच्छ परिवहन की ओर बड़ा कदम, दिल्ली में चलेंगी हाइड्रोजन से चलने वाली बसें

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पहली बार, हाइड्रोजन गैस से चलने वाली बसों का संचालन शुरू हो गया है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने दिल्ली मेट्रो को दो ऐसी अत्याधुनिक बसें सौंपी हैं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन 15 मई यानी आज से सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में एक एकीकृत हाइड्रोजन चालित शटल बस सेवा शुरू की। यह पहल आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सहयोग से की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य स्वच्छ, टिकाऊ और आधुनिक शहरी परिवहन को बढ़ावा देना है। यह सेवा अंतिम छोर तक बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने में सहायक होगी। इन बसों में जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और सीसीटीवी प्रणाली लगी होगी। यह वास्तविक समय की निगरानी, सुरक्षा और समयबद्धता सुनिश्चित करेगी। यह शटल सेवा सभी कार्य दिवसों (सोमवार से शुक्रवार, राजपत्रित अवकाशों को छोड़कर) में चलेगी। सेवा का समय सुबह 8:30 बजे से 12:30 बजे तक और दोपहर 3:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक रहेगा। कनेक्टिविटी और मार्ग यह सेवा सेंट्रल सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। इसका लक्ष्य सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में स्थित प्रमुख सरकारी कार्यालयों को भी जोड़ना है। यह सरकारी अधिकारियों और आम जनता को सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। यह सेवा कार्तव्य भवन, विज्ञान भवन, निर्माण भवन, अकबर सड़क और बड़ौदा हाउस जैसे प्रमुख स्थलों को कवर करेगी। नेशनल स्टेडियम, नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट्स और इंडिया गेट भी इस मार्ग में शामिल होंगे। डीएमआरसी बस संचालन, कंडक्टर, टिकटिंग और यात्री सहायता की जिम्मेदारी संभालेगा। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड ड्राइवरों की व्यवस्था करेगा। साथ ही वह हाइड्रोजन ईंधन सहायता भी उपलब्ध कराएगा। सेवा की फ्रीक्वेंसी हर 30 मिनट पर एक बस होगी। एक बस दक्षिणावर्त और दूसरी वामावर्त दिशा में चलेगी। किराया नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड, यूपीआई और नकद भुगतान के माध्यम से लिया जाएगा। इसमें 10 रुपये और 15 रुपये की किफायती स्टेज आधारित टिकट दरें निर्धारित हैं।  

अमर शहीद सुखदेव की जयंती पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि

अमर शहीद सुखदेव की जयंती पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि रायपुर छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रखर नायक और महान क्रांतिकारी अमर शहीद सुखदेव थापर जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया है। साहस और त्याग के अद्वितीय प्रतीक           शहीद सुखदेव जी के बलिदान को याद करते हुए चौधरी ने कहा कि माँ भारती की स्वतंत्रता के लिए सुखदेव जी ने हँसते-हँसते अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनका जीवन देशभक्ति, अदम्य साहस और त्याग का एक कालजयी उदाहरण है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने भगत सिंह और राजगुरु जैसे साथियों के साथ जिस निडरता और अटूट समर्पण का परिचय दिया, वह आज भी भारत के हर युवा के हृदय में राष्ट्रप्रेम की अलख जगाता है।          ओ.पी. चौधरी ने कहा कि शहीद सुखदेव जी का बलिदान केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्र के गौरवशाली अस्तित्व की नींव है। उनकी वीरता हमें राष्ट्र निर्माण के प्रति सदैव समर्पित रहने की प्रेरणा देती है।

वायरल वीडियो मामल,जेडीयू विधायक अनंत सिंह की बढ़ीं मुश्किलें, पुलिस ने जांच तेज की

गोपालगंज बिहार की राजनीति में हमेशा चर्चा में रहने वाले मोकामा के जेडीयू विधायक और बाहुबली छवि वाले विधायक अनंत सिंह की परेशानियां एक बार फिर बढ़ गई हैं। उन्हें गोपालगंज वाले निजी कार्यक्रम में हथियारों की जांच कराने के लिए मीरगंज थाने आना होगा। अनंत सिंह को आना होगा मीरगंज थाने गोपालगंज जिले के मीरगंज थाना क्षेत्र में दर्ज वायरल वीडियो मामले में पुलिस ने MLA अनंत सिंह को आज यानी 15 मई को थाने में उपस्थित होकर हथियारों की फॉरेंसिक (FSL) और बैलेस्टिक जांच कराने का नोटिस जारी किया है। इस जांच से यह साफ हो जाएगा कि वीडियो में दिखाए गए हथियार लाइसेंसी थे या अवैध। कोर्ट से भी अनंत सिंह को राहत नहीं इस मामले में गोपालगंज की एडीजे-1 कोर्ट में 12-13 मई को सुनवाई हुई, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। कोर्ट ने मामले को MP-MLA स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया। जिसे बाद में जिला जज की अदालत में ट्रांसफर किया गया। अब इस याचिका पर आगे की सुनवाई भी आज ही यानि 15 मई को होने की संभावना है। कोर्ट का यह फैसला अनंत सिंह के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इन लोगों पर भी मामला है दर्ज मीरगंज थाना में कांड संख्या 247/2026 दर्ज किया गया है। इसमें अनंत सिंह, भोजपुरी गायक गुंजन सिंह, कार्यक्रम के आयोजक गुड्डू राय समेत कुल 9 नामजद आरोपी हैं। पुलिस के अनुसार, आयोजन में सार्वजनिक स्थान पर हथियार प्रदर्शन, शांति भंग और अश्लीलता जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। गोपालगंज पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है और जांच तेज कर दी है। इस मामले में अनंत सिंह ने गोपालगंज कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। क्या है पूरा मामला, जानिए     2-3 मई 2026 को अनंत सिंह मीरगंज थाना के अंतर्गत आने वाले सेमराव (सेमरा) गांव आए थे।     जनेऊ संस्कार (उपनयन संस्कार) कार्यक्रम से जुड़ा है पूरा मामला।     दो दिन के इस कार्यक्रम में अनंत सिंह अपने समर्थकों के साथ पहुंचे थे।     वीडियो में उनके समर्थक हथियार लहराते नजर आ रहे हैं।     साथ ही डांस नृत्य और नोट उड़ाने के वीडियो भी वायरल हुए।     वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैला, जिसके बाद पुलिस ने संज्ञान लिया। अनंत सिंह ने बताया बेबुनियाद और साजिश हालांकि अनंत सिंह ने पूरे मामले को बेबुनियाद और साजिश बताया है। उनका कहना है कि वे केवल कार्यक्रम में शामिल हुए थे और बिहार में ऐसे आयोजन आम हैं। उन्होंने हथियार प्रदर्शन या अश्लीलता से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है। बैलिस्टिक रिपोर्ट बन सकती है केस का टर्निंग पॉइंट पुलिस की FSL और बैलेस्टिक रिपोर्ट इस केस का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। अगर हथियार अवैध पाए गए तो अनंत सिंह पर आर्म्स एक्ट के सख्त प्रावधान लागू हो सकते हैं। वहीं, अगर लाइसेंसी साबित हुए तो भी सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शन का मामला बाकी रहेगा।अनंत सिंह बिहार राजनीति के चर्चित चेहरे रहे हैं। कई आपराधिक मामलों का सामना करने के बावजूद वे लगातार चुनाव जीतते आए हैं। यह नया केस उनकी छवि पर फिर से सवालिया निशान लगा रहा है। कुल मिलाकर 15 मई को उन्हें थाने के साथ-साथ कोर्ट में भी हाजिरी बजानी होगी।  

एडेड स्कूलों में खाली पद भरने की प्रक्रिया तेज, प्रधानाचार्य से लेकर सहायक अध्यापक तक भर्ती

लखनऊ  प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और शिक्षकों के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया तेज हो गई है। शिक्षा निदेशालय ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज को 23,213 रिक्त पदों का अधियाचन भेज दिया है। इससे प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों को शिक्षक भर्ती का इंतजार खत्म होने की उम्मीद जगी है। शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) कार्यालय प्रयागराज की ओर से आयोग को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि प्रदेश के 4512 अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में संस्था प्रधान (प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक) और अध्यापकों के सीधी भर्ती के रिक्त पदों का विवरण उपलब्ध कराया गया है। जनपदीय अधिकारियों से निर्धारित प्रारूप पर 4479 विद्यालयों का अधियाचन प्राप्त हुआ है, जिसके आधार पर समेकित सूचना आयोग को भेजी गई है। अलग से हो रही ऑनलाइन अपलोड करने की प्रक्रिया पत्र में यह भी कहा गया है कि एनआइसी लखनऊ द्वारा संशोधित एवं विकसित ई-अधियाचन पोर्टल पर इन रिक्त पदों को आनलाइन अपलोड करने की कार्यवाही अलग से की जा रही है। माध्यमिक विद्यालयों में बड़ी संख्या में पद खाली होने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई विषय संभालने पड़ रहे हैं। भर्ती होने से शिक्षकों की कमी दूर होगी, विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई मिल सकेगी और स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही लंबे समय से भर्ती का इंतजार कर रहे युवाओं को रोजगार का अवसर भी मिलेगा। यह अधियाचन शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) कार्यालय की ओर से 14 मई को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजा गया है। इतने पदों पर होगी भर्ती     प्रधानाचार्य : 1502 पद     प्रधानाध्यापक : 1003 पद     प्रवक्ता : 2705 पद     सहायक अध्यापक : 16,114 पद     संबद्ध प्राइमरी के सहायक अध्यापक : 1889 पद  

सरकारी धन गबन मामले में CBI की कार्रवाई तेज, चंडीगढ़-पंचकूला में तलाशी अभियान

चंडीगड़ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने हरियाणा में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े 590 करोड़ के सरकारी धन गबन मामले में चंडीगढ़ और पंचकूला में कई स्थानों पर तलाशी ली। यह कार्रवाई 14 मई को की गई, जिसमें सरकारी धन के दुरुपयोग और धोखाधड़ी से जुड़े अहम दस्तावेज व डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। सीबीआई के अनुसार, हरियाणा सरकार ने इस मामले की जांच एजेंसी को सौंपी थी। आरोप है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के लोक सेवकों के साथ मिलीभगत कर सरकारी धन का गबन किया। जांच में सामने आया है कि धोखाधड़ी के जरिए सरकारी राशि को गलत तरीके से निजी लाभार्थियों तक पहुंचाया गया।   सीबीआई ने इस मामले में कुल सात स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इनमें आवासीय परिसरों के अलावा ज्वैलर्स के शोरूम, संदिग्ध लाभार्थियों के ठिकाने और जांच से जुड़ी अन्य निजी संस्थाओं के परिसर शामिल रहे। तलाशी के दौरान वित्तीय रिकॉर्ड, लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एजेंसी के मुताबिक, इस घोटाले में अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीबीआई कई वित्तीय लेनदेन और संदिग्ध नेटवर्क की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है तथा जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। सीबीआई ने कहा कि सरकारी धन के कथित गबन से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जांच जारी रहेगी।  

आर्थिक अपराध पर हाईकोर्ट सख्त, Anwar Dhebar की जमानत अर्जी खारिज

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मैनपावर सप्लाई घोटाले में आरोपी अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आर्थिक अपराध सामान्य अपराध नहीं होते, बल्कि ये समाज और देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली सुनियोजित साजिश होते हैं। मामला CSMCL में कर्मचारियों के ओवरटाइम भुगतान में गड़बड़ी से जुड़ा है। ED की जांच में 28.80 लाख रुपए नकद मिले थे। आरोप है कि कर्मचारियों के ओवरटाइम के पैसे में भ्रष्टाचार किया गया। जांच के आधार पर ACB ने धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है। अनवर ढेबर पर आरोप है कि उन्होंने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर CSMCL के कामकाज और पैसों के फैसलों में दखल दिया। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, संस्था को मैनपावर सप्लाई करने वाली निजी एजेंसियों के बिल तब तक पास नहीं किए जाते थे, जब तक वे तय रकम कमीशन के रूप में नहीं देती थीं। शुरुआत में कमीशन तय दर पर लिया जाता था, लेकिन बाद में अनवर ढेबर के निर्देश पर इसे बढ़ाकर बिल राशि का एक-तिहाई या उससे ज्यादा कर दिया गया। आरोप है कि चुनाव के नाम पर अवैध वसूली और बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए थे। इस मामले में निगम के तत्कालीन अधिकारियों और कुछ निजी लोगों पर पैसे पहुंचाने वाले माध्यम के तौर पर काम करने का आरोप है। वे एजेंसियों से रकम लेकर अनवर ढेबर तक पहुंचाते थे। ED ने 29 नवंबर 2023 को ट्रैप कार्रवाई के दौरान ईगल हंटर सॉल्यूशंस एजेंसी के कर्मचारियों को 28.80 लाख रुपए की रिश्वत देते हुए पकड़ा था। इसी कार्रवाई में मिले सबूतों के आधार पर अनवर ढेबर को 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया। अनवर ढेबर ने इस मामले में जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि यह कस्टडी का एवरग्रीनिंग है। उन्हें राजनीतिक द्वेष के चलते फंसाया गया है। यह भी कहा गया कि एक ही मामले में बार-बार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा रही हैं, ताकि याचिकाकर्ता को जेल से बाहर आने का मौका न मिले। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे मामलों में केवल इसलिए राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि आरोपी प्रभावशाली है या सीधे तौर पर धन की वसूली उसके पास से नहीं हुई है। जब मामला जनता के पैसे और सरकारी खजाने की लूट से जुड़ा हो, तो कोर्ट को अलर्ट रहना चाहिए। ऐसे घोटाले न केवल देश के आर्थिक ढांचे को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि सरकारी व्यवस्था में जनता के विश्वास को भी चोट पहुंचाते हैं। कोर्ट ने ढेबर को इस मामले का मुख्य साजिशकर्ता और फायदा लेने वाला बताया है।

झारखंड प्रशासन अलर्ट: ड्रग्स नेटवर्क खत्म करने के लिए तेज निगरानी और कार्रवाई का प्लान

 रांची  जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में आयोजित डिस्ट्रीक्ट एनसीओआरडी कमिटी (नारकोटिक्स कंट्रोल को-ऑर्डिनेशन) की महत्वपूर्ण बैठक में जिले में बढ़ते नशीले पदार्थों के कारोबार, तस्करी और दुरुपयोग पर सख्त रणनीति बनाने पर जोर दिया गया। बैठक में प्रशासन, पुलिस और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने संयुक्त कार्रवाई की रूपरेखा तय की। उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जिले के सभी थाना क्षेत्रों में ड्रग हाट स्पाट्स की तत्काल पहचान कर विशेष निगरानी बढ़ाई जाए। साथ ही एनडीपीएस एक्ट के लंबित मामलों की तेज जांच और अभियोजन सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया डी-एडिक्शन सेंटर से जोड़ने का लक्ष्य बैठक में स्कूलों, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में नियमित जागरूकता अभियान चलाने तथा नशे की गिरफ्त में आए युवाओं की पहचान कर उन्हें डी-एडिक्शन सेंटर से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया। मेडिकल दुकानों, फार्मेसी और रसायनिक दुकानों की सघन जांच कर प्रतिबंधित दवाओं की अवैध बिक्री रोकने के निर्देश भी दिए गए। गैर कानूनी रूप से संचालित नशा मुक्ति केंद्रों पर कार्रवाई उपायुक्त ने सीमावर्ती इलाकों और परिवहन मार्गों पर चेकपोस्ट मजबूत करने तथा इंटर-स्टेट ड्रग तस्करी रोकने के लिए पड़ोसी जिलों के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया। ड्रग तस्करों की संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया तेज करने और उनके नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में जिले में गैर कानूनी रूप से संचालित नशा मुक्ति केंद्रों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। वहीं अफीम की खेती रोकने के लिए पंचायत स्तर पर व्यापक अभियान चलाने की योजना बनाई गई, जिसमें मुखिया, प्रधान, समाजसेवी और जेएसएलपीएस को जोड़ा जाएगा। उपायुक्त ने अफीम की खेती से जुड़े लोगों की पहचान कर उनकी पुरानी गतिविधियों के आधार पर निगरानी रखने तथा दोबारा इस अवैध कार्य में शामिल होने से रोकने के निर्देश दिए। साथ ही ड्रग्स बेचने वालों पर कड़ी नजर रखते हुए कठोर कार्रवाई करने को कहा गया। बैठक में गौतम गोस्वामी, कुमार रजत, डॉ. प्रभात कुमार सहित कई अधिकारी उपस्थित थे। नशा मुक्त रांची के लक्ष्य को हासिल करना उद्देश्य उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा, रांची जिला युवा बहुल है। हमारी आने वाली पीढ़ी को नशीले पदार्थों के खतरे से बचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रशासन और पुलिस पूर्ण समन्वय के साथ काम कर नशा मुक्त रांची के लक्ष्य को हासिल करेंगे। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि ड्रग तस्करी, अवैध ड्रग्स बिक्री, गांजा या अफीम की खेती अथवा किसी भी नशीले पदार्थ से जुड़ी गतिविधि की जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस, स्थानीय थाना या मादक पदार्थ निषेध सूचना केंद्र के टोल फ्री नंबर 1933 पर सूचना दें। गुमनाम सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

Bhojshala मामले में हाई कोर्ट का अहम निर्णय, मंदिर परिसर घोषित; मुस्लिम पक्ष को अलग भूमि मिलेगी

धार. मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला परिसर को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मामले में जज ने फैसला पढ़ते हुए भोजशाला परिसर को मंदिर माना है। कोर्ट के फैसले में परिसर को मां वाग्देवी के मंदिर के रूप में माना गया है। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष को अलग से जमीन दी जाएगी। फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा बढ़ी फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी तरह सतर्क और हाई अलर्ट पर हैं। मामले पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने अंतरसिंह की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि दोनों पक्षों में सौहार्द बना रहे, इस तरह की व्यवस्था का आदेश दिया जाए। मंदिर पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इस फैसले के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिला। भोजशाला का फैसला हिंदू पक्ष में आते ही इंदौर के हाईकोर्ट गेट 3 के सामने समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। कड़ी सुरक्षा में हुई नमाज धार की ऐतिहासिक भोजशाला में शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच में नमाज हुई। शांतिपूर्ण तरीके से नमाज हो चुकी है और अधिकांश मुस्लिम अपने इलाकों में पहुंच चुके हैं। प्रशासन ने बीती रात से ही अधिक मात्रा में पुलिस बल बुला लिया था। दूसरी ओर अब भोजशाला के बाहर ज्योति मंदिर पर बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग एकत्रित हो रहे हैं। युगल पीठ ने सुरक्षित रख लिया था फैसला इससे पहले छह अप्रैल से चली नियमित सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति आलोक कुमार अवस्थी और न्यायमूर्ति वीके शुक्ला की युगल पीठ ने बीती 12 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद के साथ ही अरशद वारसी और शोभा मेनन ने पक्ष रखा था। मंदिर पक्ष की ओर से विष्णु शंकर जैन और मनीष गुप्ता ने तर्क प्रस्तुत किए थे। फैसले से पहले आइसक्रीम पार्टी आयोजित महत्वपूर्ण फैसला आने से ठीक पहले हाई कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा एक आइसक्रीम पार्टी आयोजित की गई है। गौरतलब है कि हाई कोर्ट में हर साल ग्रीष्म अवकाश शुरू होने के ठीक पहले अंतिम कार्य दिवस पर अभिभाषक संघ द्वारा आइसक्रीम पार्टी आयोजित की जाती है। हाई कोर्ट और जिला कोर्ट में ग्रीष्म अवकाश शनिवार से शुरू हो रहे हैं, जो लगभग एक माह के होंगे। अवकाश में आपराधिक और अर्जेंट मामलों की सुनवाई हो सकेगी। क्या है पूरा विवाद? यह विवाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) संरक्षित भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र मानता था, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता था। वहीं जैन समुदाय के एक पक्ष का दावा था कि यह मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल था। चार साल से चल रही थी सुनवाई दरअसल, हिंदू पक्ष की ओर से हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर भोजशाला को मंदिर घोषित करने तथा हिंदू समाज को वर्षभर 24 घंटे पूजा-अर्चना का अधिकार देने की मांग की गई थी। इस मामले में पिछले चार वर्षों से सुनवाई चल रही थी।

रांची में नई योजन,बिना नक्शा बने मकानों को नियमित करने का मिलेगा मौका

रांची नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने आम लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित समय के अंदर अपने अवैध बने भवनों को नियमित करने के लिए आवेदन कर दें ताकि समय पर काम पूरा हो सके। वह गुरुवार को प्रोजेक्ट भवन में झारखंड अनधिकृत निर्मित भवन नियमितीकरण नियमावली, 2026 के तहत ऑनलाइन पोर्टल का उद्घाटन करने के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक क्षण है जहां आम लोगों को मौका प्रदान किया जा रहा है कि वे भवनों का नियमितीकरण करा सकेंगे। सरकार ने आम लोगों को राहत प्रदान करने के लिए यह योजना लांच की है। अब लोग घर बैठे पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर अपना मकान नियमित करा सकेंगे। सुदिव्य कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर आम लोगों को राहत देते हुए अनियमित मकानों के नियमितीकरण के लिए यह अवसर प्रदान किया गया है। नगर विकास विभाग ने अथक प्रयासों के बाद इस योजना को मूर्तरूप दिया है। अब आनलाइन पोर्टल का शुभारंभ हो चुका है। लोग अब पोर्टल के माध्यम से अपने मकानों के नियमितीकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। और अपने मकानों को नियमित करा सकेंगे। योजना को सफल बनाने के लिए आम लोगों का सहयोग जरूरी है। सरकार की नीतियों के अनुपालन में जनता की भागीदारी महत्वपूर्ण है। भवन नियमितीकरण का उद्देश्य अनियमितीकरण को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि जो लोग बिना नक्शा और मास्टर प्लान के मकान बना लिए हैं, उन लोगों के लिए एक मौका दिया गया है। सरकार ने इसके लिए नियमावली को बहुत ही सरल बनाया है। नियमित करने में लगने वाली राशि को भी तीन किस्तों में भुगतान का प्रविधान कर लोगों को राहत देने का काम किया है। व्यवस्थित शहरीकरण ही उद्देश्य : सुनील कुमार प्रधान सचिव सुनील कुमार ने कहा कि सरकार नगरीय क्षेत्रों के विकास को गंभीरता से ले रही है । शहर की सूरत बदल रही है। रांची में तीन फ्लाइओवर बन कर तैयार है। सिरमटोली कनेक्टिंग फ्लाइओवर पर भी काम चल रहा है। अरगोड़ा, करमटोली और हरमू में तीन नए फ्लाइओवर की स्वीकृति मिल चुकी है। जमशेदपुर और धनबाद में भी फ्लाईओवर बन रहे हैं। मुख्यमंत्री का निर्देश है कि शहरीकरण अव्यवस्थित ढंग से ना हो। रोड, फुटपाथ, टाउनहाल, नाली आदि व्यवस्थित हों। शहरों में उन्नत बस स्टैंड की दिशा में काम जारी है। निकायों का राजस्व बढ़ाने पर फोकस है। टाउन प्लानर, इंजीनियर आदि की नियुक्ति सरकार ने की है। उन्होंने नियमितीकरण की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए कहा कि दो माह के अंदर आनलाइन आवेदन करना है और छह माह के अंदर नियमितीकरण का निर्णय ले लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जी 2 और 300 वर्गमीटर से कम में बने मकानों का ही नियमितीकरण होगा। योजना से आम लोगों को राहत सूडा निदेशक सूरज कुमार ने कहा कि भवन नियमितीकरण नियमावली -2026 सरकार का ऐतिहासिक कदम है। किसी कारण से लोगों ने अपना मकान बिना नक्शा पास कराए बना लिया है। ऐसे अनधिकृत भवनों के नियमितीकरण का निर्णय सरकार ने लिया है, ताकि झारखंड के नागरिकों को राहत पहुंचाई जाय।इस योजना का लाभ अधिक से अधिक लोग उठाएं। इसके लिए पोर्टल पर जाकर आनलाइन आवेदन करें।उन्होंने पोर्टल आवेदन करने की विधि का लाइव डेमोस्ट्रेशन भी दिया। इस अवसर पर नगर विकास विभाग के विशेष सचिव ज्ञानेंद्र कुमार, अपर सचिव जुल्फिकार अली, धनबाद नगर आयुक्त आशीष सहित नगर विकास एवं राज्य शहरी विकास अभिकरण के पदाधिकारीगण और फिक्की के पदाधिकारी उपस्थित थे।  

राजस्थान के मोकलवास में दर्दनाक हादसा: मलबे में दबे मजदूर की तलाश में रेस्क्यू जारी

 जयपुर राजस्थान के नीमकाथाना जिले के मोकलवास में गुरुवार शाम उस वक्त हड़कंप मच गया, जब झरिंड़ा स्थित एक क्रेशर खदान में भीषण भूस्खलन के कारण पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा भरभरा कर नीचे आ गिरा. इस हादसे में 4 मजदूर भारी पत्थरों और मशीनों के नीचे दब गए. राहत की बात यह रही कि 3 मजदूरों को तुरंत सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन 1 मजदूर अब भी करीब 12 घंटों से खान के भीतर फंसा हुआ है. शुक्रवार सुबह होते ही प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन में पूरी ताकत झोंक दी है. अंधेरे और मौसम ने बढ़ाई मुश्किलें मलबे के नीचे दबे चौथे मजदूर दयालचंद का रात भर पता नहीं चल सका. रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती रात का घना अंधेरा और खराब मौसम रहा. संसाधनों की कमी और दोबारा भूस्खलन के खतरे को देखते हुए बचाव कार्य को बीच में रोकना पड़ा, जिसके कारण दयालचंद पूरी रात मलबे के नीचे ही फंसा रहा. प्रतापगढ़ का निवासी है फंसा हुआ मजदूर मलबे में फंसे मजदूर की पहचान प्रतापगढ़ जिले के निवासी के रूप में हुई है. दयालचंद खदान में मशीनरी संचालन का कार्य कर रहा था, तभी अचानक गिरी चट्टानों ने उसे और मशीनों को अपनी चपेट में ले लिया. परिजनों और स्थानीय प्रशासन की सांसें अब शुक्रवार सुबह शुरू हुए इस अंतिम दौर के रेस्क्यू पर टिकी हैं. NDRF की टीम मौके पर पहुंची हादसे की गंभीरता को देखते हुए नीमकाथाना एडीएम (ADM) भागीरथमल साख और एएसपी (ASP) लोकेश मीणा भारी पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर डटे हुए हैं. रेस्क्यू को गति देने के लिए NDRF की टीम भी झरिंड़ा गांव पहुंच चुकी है. आधुनिक कटर और भारी मशीनों की मदद से विशालकाय पत्थरों को हटाने का काम अब युद्धस्तर पर किया जा रहा है.