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19 मई 2026 तक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कर्मचारियों (नियमित/संविदा) के सेवा संबंधी मामलों में विस्तार करते हुए कार्मिकों के स्वयं के व्यय पर स्थानान्तरण की सुविधा को और अधिक सरल बनाते हुए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई है। कंपनी ने अपने कार्यक्षेत्र के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं लाइन स्टॉफ को स्वयं अथवा परिवार में किसी सदस्य की गंभीर बीमारी, पति/पत्नी के शासकीय सेवा में अन्यत्र स्थान पर कार्यरत होने पर/शासकीय अनुदान प्राप्त संस्था में कार्यरत होने पर, आपसी स्थानान्तरण तथा अन्य कारणों से उनके स्वयं के व्यय पर स्थानान्तरण के लिये ऑनलाइन आवेदन की सुविधा प्रदान की है। उप महाप्रबंधक स्‍तर तक के अधिकारी/कर्मचारी स्थानांतरण के लिये ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे एवं ऐसे अधिकारी कर्मचारी जिनकी एक ही स्थान पर पदस्थापना की अवधि 01 वर्ष से कम है उनके आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। स्थानान्तरण के लिये ऑनलाइन आवेदन करने की लिंक कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in पर इंटरनल यूज एप्लीकेशन के अन्तर्गत ‘’Employee Transfer Module’’ के नाम से उपलब्ध है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक (मा.सं. एवं प्रशा.)  राकेश शर्मा ने कहा है कि इस नई व्यवस्था से कंपनी कार्मिकों को अन्य दफ्तरों में जाए बिना स्थानान्तरण के आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। ऑनलाइन प्रक्रिया में आवेदन में दिये गये विकल्प स्थानों पर कार्मिक स्वयं के व्यय पर अपना स्थानान्तरण करा सकेंगे। कंपनी ने कहा है कि कार्मिक 05 मई 2026 से 19 मई 2026 तक अपने स्थानान्तरण के लिये आवेदन कर सकते हैं। कोई भी कार्मिक एक ही बार ऑनलाइन स्थानांतरण आवेदन प्रस्तुत (सबमिट) कर सकेगा एवं स्थानांतरण के लिये केवल ऑनलाईन आवेदन ही स्वीकार किये जायेंगे, किसी भी स्थिति में ऑफलाईन आवेदन स्वीकार नहीं किये जायेंगे।  

8.12 लाख किसानों से 44.16 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का हुआ उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 8 लाख 12 हजार किसानों से 44 लाख 16 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है की तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जाता है। मंत्री  राजपूत ने बताया है कि अभी तक 14 लाख 78 हजार किसानों द्वारा गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए गए हैं। किसानों के हित में गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की गई। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 7383.01 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाए आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इस हेतु समस्त आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ की भर्ती जूट बारदाने के साथ साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूँ का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके।  

मुख्यमंत्री ने मांगा तबादला नीति का हिसाब, मंत्री बोले- सिस्टम ही उल्टा चल रहा है

भोपाल प्रदेश में अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले पर लगा प्रतिबंध जल्द ही हटने वाला है। मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों से पूछा कि तबादला नीति का क्या हुआ? इसे जल्द लाएं। मुख्यमंत्री के इतना कहते ही खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत बोले कि यह तो उलटी गंगा बह रही है। दरअसल, तबादले पर रोक हटाने की मांग मंत्रीगण करते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री ने यह बात रखी तो मंत्रियों को संतोष हुआ कि मुख्यमंत्री ने उनके मन की बात उनके बोले बिना ही सुन ली। फिलहाल तय किया गया है कि अगली कैबिनेट की बैठक में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा तबादला नीति 2026 का प्रारूप प्रस्तुत किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, अनौपचारिक चर्चा में मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रशासनिक आधार पर तो तबादले होते ही हैं, स्वैच्छिक तबादलों पर भी ध्यान दिया जाए।  

मतांतरण छोड़ 50 लोगों ने अपनाया हिंदू धर्म, तेंदुआ धाम में भावुक दृश्य

जांजगीर-चांपा शिवरीनारायण के समीप स्थित श्री राम मिलेंगे आश्रम तेंदुआ धाम में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के दौरान सोमवार को जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज के सान्निध्य में एक विशेष कार्यक्रम में लगभग 50 लोगों ने सनातन संस्कृति के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त करते हुए पुनः घर वापसी का संकल्प लिया। इस आयोजन में अखिल भारतीय घर वापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण और अपनी जड़ों से पुनः जुड़ने का सशक्त प्रतीक बनकर सामने आया। सांस्कृतिक पुनर्जागरण और श्रद्धा का अद्भुत संगम कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, विश्वास और सनातन परंपराओं के प्रति समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला। उपस्थित लोगों ने भावुक माहौल में अपने पूर्वजों की संस्कृति को अपनाने और उसे आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। घर वापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव और अन्य वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन संस्कृति केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समृद्ध और व्यापक परंपरा है, जो समाज को एकता, नैतिकता और सकारात्मक दिशा प्रदान करती है। 'शबरी की निष्ठा' रामकथा में जुटे दिग्गज ज्ञात हो कि श्री राम मिलेंगे आश्रम तेंदुआ धाम में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज के सान्निध्य में 27 अप्रैल से 5 मई तक ‘शबरी की निष्ठा’ विषय पर नौ दिवसीय रामकथा का आयोजन किया गया है। इसी क्रम में सोमवार को सनातन संस्कृति से भटके हुए लोगों के लिए घर वापसी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डबरा मठ कोटमी सोनार के महंत सर्वेश्वर दास जी महाराज, समाजसेवी अंजू गबेल, आश्रम के संचालक डॉ. अशोक हरिवंश सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। क्षेत्र में नई चेतना और सामाजिक समरसता का संचार शिवरीनारायण क्षेत्र के ग्राम गोधना, कुरियारी, तुस्मा, कटौद सहित आसपास गांव के लोग बड़ी संख्या में मतांतरित हो चुके हैं। क्षेत्र के भोले-भाले लोगों को लालच देकर ईसाई बनाया गया है। रामकथा के दौरान हुए इस घर वापसी के आयोजन ने क्षेत्र में नई चेतना का संचार करते हुए सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकजुटता का संदेश दिया, जो उपस्थित जनसमूह के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।

घर बैठे गन्ना खेती की पूरी जानकारी, 32 हजार किसान ऐप से जुड़े

जगदीशपुर  बिहार की पहली चीनी मिल मझौलिया शुगर इंडस्ट्री है, जो घर बैठे गन्ना किसानों को सरकार की योजनाएं एवं गन्ना की उन्नतशील खेती के लिए देश के नामवर कृषि वैज्ञानिकों के सुझाव पहुंचाने की तैयारी में है। इसके लिए चीनी मिल ने बीते मार्च में एक मोबाइल एप्लिकेशन (ऐप) लांच किया। एप का नाम जयश्री किसान परिवार रखा है। महज एक महीनों में इस एप से चीनी मिल रिजर्व क्षेत्र के 32 हजार किसान जुड़ गए हैं। पेराई सत्र 2025- 26 में इस चीनी मिल में कुल 34 हजार किसान रजिस्टर्ड थे। मतलब, मात्र दो हजार किसान ऐसे शेष हैं, जिनके मोबाइल में जयश्री किसान परिवार एप नहीं है। चीनी मिल के अधिकारियों का मानना है कि ये वे किसान है , जिनके पास एंड्रायड मोबाइल नहीं है। अन्यथा यह ऐप इतना उपयोगी है कि सभी किसान इससे जुड़ने को आतुर हैं। ऐप में किसानों के लिए ये सुविधाएं चीनी मिल के चीफ केन मैनेजर अखिलेश सिंह ने बताया कि ऐप के माध्यम से किसान घर बैठे ही अपने गन्ना सर्वे, चालान, भुगतान, नए प्रभेद (वैरायटी) की जानकारी समेत विभिन्न सुविधाओं का लाभ ले सकेंगे। ऐप से किसानों को गन्ना फसल से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। गन्ना रोगों की पहचान और उनके निदान के उपाय भी देश के नामवर गन्ना विशेषज्ञ देंगे। जिससे किसानों को समय पर सही मार्गदर्शन मिल सकेगा। साथ ही, किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए भी इसमें विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे उन्हें मिल या कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एप किसानों के लिए वन स्टाप समाधान यह एप किसानों के लिए वन-स्टाप समाधान साबित होगा। गन्ना सर्वे से लेकर पेमेंट तक की पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल हो जाएगी। विशेषज्ञों के परामर्श से किसान कम लागत में गन्ने का बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे। किसान अमित कुमार ने कहा कि ऐप से पेराई सीजन 2026- 27 में भुगतान की जानकारी मिलेगी, जो बड़ी सुविधा है। किसान पवन सिंह ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों का भरोसा मजबूत होगा। अब किसी तरह की जानकारी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। किसान अभय प्रसाद ने इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि गन्ना रोग और नई किस्मों की जानकारी समय पर मिलने से फसल उत्पादन में सुधार होगा। किसान धीरेन्द्र ओझा ने कहा कि यह एप किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित होगा।     मिल का उद्देश्य किसानों को पारदर्शी और सरल व्यवस्था उपलब्ध कराना है। जयश्री किसान परिवार ऐप के जरिए किसानों के बेहतर उत्पादन के साथ साथ मिल प्रबंधन और किसानों के बीच के विश्वास का रिश्ता भी मजबूत होगा।     उदयवीर सिंह, यूनिट हेड, मझौलिया चीनी मिल।  

बस्तर में इनोवेशन को मिलेगा बढ़ावा, महाकुंभ 1.0 से नई पहल – मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने जगदलपुर में शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल सही मंच, मार्गदर्शन और अवसर की है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म मिल रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने बस्तर के समग्र विकास के लिए तैयार रोडमैप का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें रोजगार, शिक्षा, स्टार्टअप और अधोसंरचना का विशेष ध्यान रखा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि “नियद नेल्ला नार योजना” का विस्तार कर इसे “नियद नेल्ला नार 2.0” के रूप में 10 जिलों में लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को इनोवेशन हब बनाने के उद्देश्य से “नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30” लागू की गई है। इस नीति के तहत युवाओं को आइडिया से लेकर व्यवसाय विस्तार तक हर स्तर पर सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता जैसी सुविधाओं से स्टार्टअप को बढ़ावा मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। विकसित छत्तीसगढ़ का मार्ग विकसित बस्तर से होकर जाता है। उन्होंने कहा कि बस्तर में आदिवासी कला, लघु वनोपज, जैविक कृषि, पर्यटन और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें तकनीक, ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स से जोड़कर नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर में पर्यटन के बढ़ने से होमस्टे, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प और वनोपज की मांग बढ़ेगी, जिससे गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विश्वास जताया कि बस्तर का युवा उद्यमिता के माध्यम से विकसित बस्तर, विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा। कार्यक्रम में नवाचार करने वाले बेस्ट आइडिया और बेस्ट स्टार्टअप के विजयी प्रतिभागियों को  प्रोत्साहन राशि, प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि उद्यमिता और स्वरोजगार को अपनाकर युवा आगे बढ़ें, ताकि अपने घर-परिवार को खुशहाल बना सकें। उच्च शिक्षा मंत्री  वर्मा ने कहा कि इस इनोवेशन महाकुंभ के माध्यम से युवाओं को एक मंच मिला है, जिससे वे अपने नवाचार को आगे बढ़ाने के साथ ही आत्मनिर्भर बन सकेंगे। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि स्वयं का व्यवसाय या स्वरोजगार स्थापित कर नौकरी देने वाले बनें और अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनें। इस अवसर पर सांसद बस्तर  महेश कश्यप एवं विधायक जगदलपुर  किरण देव ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नवाचार के जरिये उद्यमिता एवं स्वरोजगार अपनाकर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सहभागिता निभाने के लिए युवाओं से आह्वान किया। कार्यक्रम के आरंभ में शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर के कुलपति प्रोफेसर मनोज वास्तव ने इनोवेशन महाकुंभ आयोजन के उद्देश्य और विश्वविद्यालय की स्थापना सहित संस्थान के विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों एवं नवोन्मेषी प्रयासों के बारे में विस्तारपूर्वक अवगत कराया। इस अवसर पर विधायक चित्रकोट  विनायक गोयल, छत्तीसगढ़ ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष  निवास मद्दी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष  रूपसिंह मंडावी, जिला पंचायत अध्यक्ष मती वेदवती कश्यप, महापौर  संजय पांडेय सहित अन्य  जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहे बीजापुर से राजमिस्त्री बने रमेश पासपुल, आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर  जनपद पंचायत बीजापुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत संतोषपुर, जो कभी लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहा, आज बदलाव और विकास की नई पहचान बनता जा रहा है। ‘‘नियद नेल्लनार योजना‘‘ के शुरू होने के बाद गांव में बुनियादी सुविधाओं और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस बदलाव की कहानी के केंद्र हैं संतोषपुर निवासी  रमेश पासपुल। कभी स्थायी रोजगार के अभाव में आर्थिक तंगी से जूझ रहे रमेश का जीवन आज पूरी तरह बदल चुका है। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच आय का कोई निश्चित साधन न होने से उनका भविष्य अनिश्चित नजर आता था। परिस्थितियां तब बदलीं जब  ‘‘नियद नेल्लनार योजना‘‘  के तहत उन्हें राजमिस्त्री (मेसन) का प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की बारीकियों, तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कौशल में दक्षता हासिल की। यह प्रशिक्षण उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। प्रशिक्षण के बाद वित्तीय वर्ष 2024-25 में रमेश को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की स्वीकृति मिली। पहली किश्त प्राप्त होते ही उन्होंने अपने घर का निर्माण स्वयं शुरू किया और निर्धारित समय-सीमा में इसे पूरा कर लिया। उनके कार्य की गुणवत्ता देखकर गांव के अन्य हितग्राहियों ने भी अपने-अपने आवास निर्माण के लिए उन्हें बुलाने लगे, जिससे उनके लिए नियमित आय का साधन तैयार हो गया। आज रमेश पासपुल एक कुशल राजमिस्त्री के रूप में गांव में पहचान बना चुके हैं। वे न केवल आत्मनिर्भर बने, बल्कि अन्य ग्रामीणों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। उनकी बढ़ती मांग ने उनके जीवन में स्थिरता और खुशहाली ला दी है। रमेश की यह प्रेरक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सही दिशा में मिला प्रशिक्षण और अवसर किसी भी व्यक्ति के जीवन को नई दिशा दे सकता है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र से निकलकर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ना आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने अपने परिश्रम और शासन की योजनाओं के सहयोग से इसे संभव कर दिखाया। यह कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन की सशक्त मिसाल है।

SN मेडिकल कॉलेज में मिल रहा नवजीवन, सी-पैप तकनीक से बच रहे प्री-मैच्योर बच्चे

 लखनऊ/आगरा  उत्तर प्रदेश में बेहतर होती स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अब केवल यूपी के नागरिकों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से अपग्रेड हुई स्वास्थ्य इकाइयों, विशेषकर आगरा के सरोजनी नायडू (एसएन) मेडिकल कॉलेज में राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीमार नवजातों को भी नया जीवन मिल रहा है। अत्याधुनिक सी-पैप मशीनों और अनुभवी डॉक्टरों की टीम के चलते आगरा अब पड़ोसी राज्यों के लिए एक बड़े लाइफ-सेविंग हब के रूप में उभरा है। हर साल 200 बाहरी बच्चों को मिल रहा 'नवजीवन' आगरा का एसएन मेडिकल कॉलेज अपनी उन्नत एसएनसीयू (SNCU) इकाई के माध्यम से हर साल राजस्थान के धौलपुर व भरतपुर और मध्य प्रदेश के भिंड व मुरैना जैसे करीब एक दर्जन जिलों के मरीजों को सेवाएं दे रहा है। कॉलेज के बाल रोग विभाग में भर्ती होने वाले कुल मरीजों में से लगभग 10% (करीब 200 बच्चे) दूसरे राज्यों के होते हैं। यहां डॉक्टरों ने 800 से 1000 ग्राम वजन वाले प्री-मैच्योर बच्चों को भी सुरक्षित बचाकर एक मिसाल पेश की है। सी-पैप तकनीक: नवजातों के लिए वरदान सांस लेने में तकलीफ (Respiratory Distress) नवजात मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है। योगी सरकार ने प्रदेश की 48 एसएनसीयू इकाइयों में उन्नत सी-पैप मशीनें स्थापित की हैं। नोडल अधिकारी प्रो नीरज यादव के अनुसार, "सी-पैप तकनीक वेंटिलेटर की तुलना में अधिक सुरक्षित और किफायती है। इससे बच्चों की फेफड़ों तक ऑक्सीजन सही अनुपात में पहुंचती है और 'कंगारू मदर केयर' भी जल्दी शुरू की जा सकती है। सुमन की कहानी: भरोसे की जीत राजस्थान के धौलपुर की रहने वाली सुमन के छठे दिन के नवजात को सांस लेने में गंभीर समस्या थी। स्थानीय स्तर पर सुधार न होने पर वे सीधे आगरा आए। सुमन बताती हैं, "हमें पता था कि आगरा के मेडिकल कॉलेज में बच्चों को नया जीवन मिलता है। 18 अप्रैल को भर्ती करने के बाद मेरा बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है।" यह भरोसा योगी सरकार के स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती का प्रमाण है। राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस-5) के अनुसार उत्तर प्रदेश में एक हजार में से 28 नवजात की मृत्यु विभिन्न कारणों से हो जाती है। इसको कम करने के लिए प्रदेश में इस वक्त 48 एसएनसीयू सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। एसएनसीयू में स्थापित सी-पैप मशीनें नवजातों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक डॉ. मिलिंद वर्धन प्रदेश में नवजात मृत्यु दर को कम करने में सीपैप को गेम-चेंजिंग उपाय के रूप में देखते हैं। खासकर एसएनसीयू के भीतर, जहां सांस लेने में तकलीफ़ नवजात शिशुओं की मृत्यु का मुख्य कारण बनी हुई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि पहले चरण में 48 एसएनसीयू के लिए 350 डाक्टरों, कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है। दूसरे चरण में बाकी बचे सभी 72 यूनिट में ट्रेनिंग व अन्य कार्य किए जाएंगे।

वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी लक्ष्य पर योगी सरकार का नया दांव, एक्सपर्ट मॉनिटरिंग शुरू

लखनऊ  उत्तर प्रदेश को 'वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' बनाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब जिला स्तर पर 'एक्सपर्ट मॉनिटरिंग' का दांव चला है। कैबिनेट के ताजा फैसले के अनुसार, अब प्रदेश के हर जिले में 'ओटीडी सीएम फेलो' की तैनाती की जाएगी। ये फेलो न केवल विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत परखेंगे, बल्कि डेटा के आधार पर जिले की आर्थिक प्रगति का नया रोडमैप भी तैयार करेंगे। डेटा और विशेषज्ञों से बदलेगी जिलों की तस्वीर इस योजना के तहत प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली OTD सेल को मजबूती देने के लिए दो विशेषज्ञों की नियुक्ति होगी।     आर्थिक विकास फेलो: जो निवेश, पर्यटन और स्थानीय उत्पादों (DDP) को बढ़ावा देने पर केंद्रित रहेंगे।     डेटा विश्लेषक फेलो: जिनका काम विकास योजनाओं की ऑनलाइन रिपोर्टिंग और KPI आधारित सटीक समीक्षा करना होगा। इन विशेषज्ञों के आने से कृषि, उद्योग और रोजगार जैसे क्षेत्रों में सरकारी फाइलों के बजाय वास्तविक आंकड़ों के आधार पर निर्णय लिए जा सकेंगे। नियोजन विभाग के डैशबोर्ड के जरिए होने वाली यह मॉनिटरिंग पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाएगी। आकर्षक मानदेय और चयन की प्रक्रिया योगी सरकार ने इस फेलोशिप के लिए योग्य युवाओं को जोड़ने हेतु मानकों को काफी कड़ा और आकर्षक रखा है।     पारिश्रमिक: चयनित युवाओं को ₹50,000 प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।     सुविधाएं: इसके अलावा लैपटॉप, यात्रा भत्ता और आवासीय सुविधा/भत्ता भी प्रदान किया जाएगा।     योग्यता: 40 वर्ष तक की आयु के परास्नातक युवा इसके पात्र होंगे।     चयन: स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन द्वारा लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर चयन होगा। कैबिनेट के अन्य बड़े फैसले: एक नजर में 1. न्याय प्रणाली का 'डिजिटल अवतार' नई न्याय संहिताओं को लागू करते हुए यूपी सरकार ने तीन नए नियम तय किए हैं। अब मोबाइल डेटा और वीडियो जैसे डिजिटल सबूतों को ई-साक्ष्य प्रबंधन के तहत वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखा जाएगा। साथ ही, अब अदालती समन व्हाट्सएप या ईमेल पर मिल सकेंगे। सबसे बड़ा बदलाव छोटे अपराधों को लेकर है, जहाँ अब अपराधी को जेल भेजने के बजाय सामुदायिक सेवा (जैसे पौधारोपण या गो-सेवा) का विकल्प दिया जाएगा। यह वीडियो भी देखें 2. सरकारी स्कूलों में 'स्किल की पाठशाला' छात्रों को भविष्य की तकनीक से लैस करने के लिए 150 राजकीय विद्यालयों में ड्रीम स्किल लैब्स खोली जाएंगी। टाटा नेल्को के सहयोग से बनने वाली इन लैब्स में छात्रों को रोबोटिक्स और मॉडर्न डिजाइनिंग सिखाई जाएगी, जिससे उन्हें सीधे प्लेसमेंट के अवसर मिलेंगे। 3. नोएडा-यमुना क्षेत्र के लिए 'पावर बूस्ट' औद्योगिक क्रांति को गति देने के लिए यीडा (YEIDA) के सेक्टर-28 में ₹653 करोड़ की लागत से हाईटेक बिजली उपकेंद्र बनाने की मंजूरी दी गई है। यह गैस इंसुलेटेड उपकेंद्र डेटा सेंटर, फिल्म सिटी और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।  

रांची में वेतन भुगतान ठप, सत्यापन प्रक्रिया बनी बड़ी वजह

 रांची झारखंड में सामने आए ट्रेजरी घोटाले के बाद सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर व्यापक असर पड़ा है। राज्य के कई प्रमुख विभागों में कर्मियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है, जिसकी सबसे बड़ी वजह अब शुरू की गई सख्त सत्यापन प्रक्रिया बताई जा रही है। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक कर्मचारी का ब्योरा दोबारा जांचा जा रहा है और शपथ पत्र लेना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे भुगतान में विलंब हो रहा है। सबसे अधिक असर स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे अहम क्षेत्रों पर पड़ा है। रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में डाक्टरों और अन्य कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पाया है। इसके अलावा राज्य के विभिन्न सरकारी स्कूलों के शिक्षक भी वेतन भुगतान में देरी से जूझ रहे हैं। वहीं, 108 एम्बुलेंस सेवा के काल सेंटर में कार्यरत कर्मियों को भी वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल जैसी स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। सत्यापन प्रक्रिया से बढ़ी देरी सरकारी सूत्रों के अनुसार, ट्रेजरी से जुड़े अनियमितताओं के सामने आने के बाद सरकार ने पूरे भुगतान सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए सभी कर्मचारियों का पुन सत्यापन शुरू किया है। इसके तहत कर्मचारियों को अपना व्यक्तिगत व सेवा संबंधी विवरण फिर से जमा करना पड़ रहा है, साथ ही एक शपथ पत्र भी देना अनिवार्य किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में समय लग रहा है, जिसके कारण वेतन निर्गमन बाधित हो गया है। मालूम हो कि हाल ही में ट्रेजरी सिस्टम में गड़बड़ियों और अनियमित भुगतान के मामलों ने सरकार को सतर्क कर दिया। आशंका जताई गई कि कुछ मामलों में फर्जी या गलत तरीके से भुगतान हुआ है, जिसके बाद पूरे सिस्टम की समीक्षा और जांच शुरू की गई। इसी कड़ी में ट्रेजरी से भुगतान की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोककर व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। कर्मचारियों पर बढ़ा आर्थिक दबाव इधर, समय पर वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि नियमित सेवाएं देने के बावजूद यदि समय पर वेतन नहीं मिलेगा तो कामकाज प्रभावित होना स्वाभाविक है। शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों ने भी बच्चों की फीस, बैंक लोन और दैनिक खर्चों को लेकर चिंता जताई है। कई कर्मचारियों का कहना है कि वे पूरी ईमानदारी से काम कर रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें वेतन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में अन्य सरकारी विभागों में भी वेतन भुगतान प्रभावित हो सकता है। फिलहाल सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सत्यापन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता न हो सके। इससे संबंधित अधिकारियों ने बताया कि कर्मचारियों का वेतन रोका नहीं गया है, बल्कि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही भुगतान किया जाएगा।