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यात्रियों के लिए राहत भरी खबर: इंदौर-मुंबई के बीच 4 मई से शुरू होगी स्पेशल ट्रेन

इंदौर गर्मी की छुट्टियों में इंदौर से मुंबई और मुंबई से इंदौर के लिए आवागमन करने वाले यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर है। यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुए पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल ने मुंबई सेंट्रल और इंदौर जंक्शन के बीच एसी सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। इस ट्रेन के शुरू होने से इंदौर-मुंबई अवंतिका एक्सप्रेस, इंदौर-दौंड एक्सप्रेस और सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन में यात्रियों का दबाव काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। यह विशेष ट्रेन चार मई से 29 जून 2026 तक संचालित रहेगी। दोनों दिशाओं में कुल दूरी तय 826 किमी तय करेगी। कुल 17-17 फेरे दोनों दिशाओं में लगाए जाएंगे। ट्रेन मुंबई सेंट्रल-इंदौर के बीच प्रत्येक रविवार एवं मंगलवार को प्रस्थान रात 11:20 बजे होगी। इसी प्रकार इंदौर-मुंबई सेंट्रल के लिए प्रत्येक सोमवार एवं बुधवार को शाम 05:00 बजे प्रस्थान करेंगी। इंदौर-मुंबई के बीच प्रमुख ठहराव इंदौर से शाम 05:00 बजे चलकर उज्जैन, रतलाम, दाहोद, वडोदरा, सूरत, वापी, बोरीवली, मुंबई सेंट्रल सुबह 07:10 पर पहुंचेगी। इसी प्रकार मुंबई सेंट्रल से रात 11:20 बजे चलकर बोरीवली, वापी, सूरत, वडोदरा, रतलाम, उज्जैन, इंदौर अगले दिन दोपहर 01:00 बजे पहुंचेगी। पहले से चल रही सुपरफास्ट स्पेशल इंदौर से मुंबई के बीच पहले से ही एक सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन चल रही है। मुंबई सेंट्रल-इंदौर सुपरफास्ट स्पेशल 20 अप्रैल से 29 मई तक मुंबई सेंट्रल से प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को 11.20 बजे प्रस्थान करती है और अगले दिन दोपहर 01.00 बजे इंदौर पहुंचती है। इसी प्रकार इंदौर-मुंबई सेंट्रल सुपरफास्ट स्पेशल 21 अप्रैल से 30 मई तक इंदौर से प्रत्येक मंगलवार एवं शनिवार को इंदौर से शाम 05.00 बजे प्रस्थान करती है और अगले दिन सुबह 07.10 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचती है।  

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर में 5 साल में 20 हजार करोड़ का निवेश, विकास की नई दिशा

इंदौर इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन रविवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव के हाथों होने जा रहा है। 20 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में अगले पाँच वर्षों में 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा। इस इंडस्ट्रियल जोन को बैंकिंग, बीमा, फाइनेंस जैसे अन्य सेक्टरों के लिए डिजाइन किया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए पहले चरण में दो हजार करोड़ रुपये की राशि मंजूर हुई है, जिसमें से 327 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।  कॉरिडोर के जरिए आईटी, लॉजिस्टिक्स, फिनटेक, एरोसिटी और ग्रीन इंडस्ट्री जैसे सेक्टर विकसित किए जाएंगे, जिससे बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इस कॉरिडोर से एक लाख से अधिक रोजगार मिलने की संभावना है। इंदौर के नैनोद से पीथमपुर के बीच बनने वाले इस कॉरिडोर की एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। सरकार की कोशिश है कि यहां परंपरागत उद्योगों के बजाय ऐसे उद्योग विकसित हों, जो भारी मशीनों पर निर्भर न हों। इसी कारण डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसी उन्नत इंडस्ट्री के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।   इस कॉरिडोर के लिए सबसे बड़ी चुनौती किसानों से जमीन अधिग्रहण की है। लगभग 60 प्रतिशत किसान अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हुए हैं। 60 से 70 मीटर चौड़ाई में इस कॉरिडोर को विकसित किया जाएगा, जिससे इंदौर से पीथमपुर के बीच की दूरी 10 किलोमीटर तक कम हो जाएगी और आवागमन भी आसान होगा।   कॉरिडोर के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में उद्योगों के लिए सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी। यह इकोनॉमिक कॉरिडोर सुपर कॉरिडोर से भी जुड़ा होगा, जिसे इंदौर विकास प्राधिकरण ने लगभग दस वर्ष पहले विकसित किया था। यहां टीसीएस, इंफोसिस जैसी कंपनियों के स्पेशल इकोनॉमिक जोन हैं और तीन बड़े शैक्षणिक संस्थान भी स्थित हैं।

‘खादी’ और ‘ग्रामोद्योग उत्पाद’ अब ऑनलाइन, विदेशों में भी पहुंचाए जाएंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश की खादी और उसके उत्पाद अब ग्लोबल होने की ओर बढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के ब्रांड्स की अब पूरे देश के साथ ग्लोबल ब्रांडिंग और ऑनलाइन खरीदी-बिक्री शुरू करने की तैयारी हो गई है। इसके लिए एक ई-कॉमर्स प्लेटफार्म तैयार कराया जा रहा है, इसके साथ इसे केंद्र के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स से भी जोड़ा जाएगा। इसके तहत एक ई-कॉमर्स पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा। इससे प्रदेश की खादी पूरे देश के साथ विदेशों में रहने वालों के लिए भी उपलब्ध हो जाएगी। लोगों में काफी प्रिय हैं ये उत्पाद बोर्ड इसके लिए निजी कंपनियों की मदद लेने जा रहा है। इसे ई-कॉमर्स पोर्टल विकसित करने, उसे ओएनडीसी से जोड़ने सहित उसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी। बोर्ड के कबीरा खादी और विंध्या वैले ब्रांड के उत्पाद प्रदेश में काफी लोकप्रिय हैं, इसलिए इनके क्षेत्र के विस्तार के लिए प्रयास शुरू किए गए हैं।  इसके तहत प्रदेश के खादी वस्त्रों के साथ हैंडीक्राफ्ट्स, कुटीर उद्योगों के सामान, हस्तनिर्मित साज-सज्जा के सामान को देश भर में पहुंचाया जाएगा। अभी बोर्ड द्वारा कई उत्पादन केन्द्र और बिक्री आउटलेट खोले गए हैं लेकिन इनकी पहुंच सीमित है। यह होंगे काम -खादी के सभी उत्पादों का एक कैटालॉग तैयार किया जाएगा। -बोर्ड के अधिकारियों के साथ विक्रय केंद्रों और अन्य संबद्ध लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। -संबंधित कंपनी पोर्टल शुरू होने के बाद तकनीकी सपोर्ट और समस्या आने पर उसका निराकरण भी करेगी। -स्टॉक मैनेजमेंट संबंधी काम भी किया जाएगा। -कस्टमर मैनेजमेंट किया जाएगा, उनके आर्डर से लेकिन एक्सचेंज, ऑर्डर रद्द करना आदि काम ऑनलाइन होंगे। -बिक्री का एनालिसिस भी आसानी से हो सकेगा। कम बिक्री वाले क्षेत्र को बढ़ाने के प्रयास होंगे। ग्लोबल होने की राह पर ये कदम बीते कई सालों में मध्यप्रदेश के कई उत्पादों को सिंगापुर, न्यूयॉर्क, मिलान, वैंकूवर, जापान, बहरीन और कुवैत जैसे देशों में प्रदर्शनियों में शामिल किया गया है। ओडीओपी के तहत राज्य के 38 उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है, और म.प्र. के ODOP उत्पादों का निर्यात सालाना लगभग 15% की दर से बढ़ रहा है। प्रदेश के इंदौर जैसे शहरों से अब सीधे अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक ई-कॉमर्स के माध्यम से खादी उत्पादों की पहुंच बन रही है। विन्ध्या वैली और कबीरा ब्रांड: म.प्र. खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा गुणवत्ता के प्रतीक के रूप में इन ब्रांड्स को स्थापित किया गया है। प्रदेश में दूध उत्पादन के मामले में, सांची ब्रांड ने पहले ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना ली है।

जिस मां पर था शक, उसी का घर से कुछ दूर मिला शव, मामले ने लिया नया मोड़

उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर के अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के मुरादाबाद मीरानपुर में चार सगे भाई-बहनों की निर्मम हत्या के सनसनीखेज मामले में रविवार को नया मोड़ सामने आ गया। जिन बच्चों की हत्या का आरोप उनकी मां पर लगाया जा रहा था, उसी महिला का शव भी घटना स्थल से करीब 100 मीटर दूर नाले से बरामद हुआ है। पुलिस ने ड्रोन की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसके दौरान महिला का शव मिला। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। शनिवार को इसी घर के अंदर चारों बच्चों के शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया था और शुरुआती जांच में मां पर ही हत्या का शक जताया गया था, जो घटना के बाद से लापता थी। अब मां का शव मिलने के बाद पूरा मामला और पेचीदा हो गया है। यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या मां ने ही बच्चों की हत्या के बाद आत्महत्या कर ली, या फिर इस वारदात के पीछे कोई तीसरा व्यक्ति है, जिसने बेहद सुनियोजित तरीके से पूरे परिवार को निशाना बनाया और फरार हो गया। क्या कह रही है पुलिस पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर ही घटना की असली वजह निकल कर सामने आएगी। फिलहाल महिला का शव बरामद होने के बाद पूरे इलाके में दहशत और तरह-तरह की चर्चाएं बनी हुई हैं। एक साल से सऊदी अरब में है पति अम्बेडकर नगर के अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के मुरादाबाद मोहल्ले में शनिवार को सामने आई दिल दहला देने वाली इस घटना की पूरे प्रदेश में चर्चा हो रही है। शनिवार को घटना सामने आने के बाद मां के घर में न मिलने पर उसे फरार बताया जाने लगा लेकिन रविवार को मां की लाश मिल गई। बताया जा रहा है कि मृतक बच्चों का पिता मो. नियाज पिछले एक वर्ष से रोजगार के सिलसिले में सऊदी में रह रहा है। मुरादाबाद मोहल्ले में जिस स्थान पर चार बच्चों की सनसनीखेज तरीके से हत्या की गई, दरअसल वह काफी शांत इलाका है। वारदात के बारे में जिसको भी जानकारी हुई वह वहां पहुंचा। हर कोई बच्चों की निर्मम हत्या पर हैरान था। पुलिस के आने के बाद एक के बाद एक बच्चों का शव जब बाहर लाया गया तो हर किसी का कलेजा कांप उठा। गले पर कटे, सिर पर ईंट से कुचलने के निशान पुलिस को मोहल्ले के लोगों से शनिवार को दिन में 3.40 बजे सूचना मिली कि गाजिया खातून के घर पर असमान्य स्थिति है तो पुलिस मौके पर पहुंची। इससे पहले पहुंचे दूध वाले ने दरवाजा खटखटाया था लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने तीन मंजिला मकान के प्रथम तल पर पहुंच कर देखा तो कमरे के अंदर चार शव खून से लथपथ मिले। कुछ के गले पर कटे का निशान था तो बाकी के सिर पर ईंट से कुचलने के निशान थे। चार बच्चों की मौत से पुलिस महकमे में खलबली मच गई।

“जय बिहान” से आत्मनिर्भरता तक: बलरामपुर में महिलाओं की बदलती तस्वीर के साक्षी बने मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय अपने बलरामपुर जिला प्रवास के दौरान ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं और युवाओं से आत्मीय संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया। प्रशिक्षण कक्ष में प्रवेश करते ही मुख्यमंत्री ने “जय बिहान” कहकर अभिवादन किया, जिससे पूरे वातावरण में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। उन्होंने प्रशिक्षण गतिविधियों का अवलोकन करते हुए विशेष रूप से पशु सखियों और ‘लखपति दीदी’ से बातचीत कर उनके अनुभवों को जाना। संवाद के दौरान ग्राम केवली की अनुराधा गुप्ता ने बताया कि बिहान योजना से जुड़कर वे पशु सखी के रूप में गांव में पशुओं का सर्वे, उपचार में सहयोग और जागरूकता का कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने इस बदलाव को नजदीक से महसूस किया और कहा कि कौशल विकास और प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं। उल्लेखनीय है कि RSETI के माध्यम से जिले में अब तक 16 बैचों में 510 प्रशिक्षणार्थियों को स्वरोजगार हेतु तैयार किया जा चुका है। इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में स्व-सहायता समूहों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। यहां उन्होंने विभिन्न समूहों की महिलाओं से संवाद करते हुए उनके उत्पादों और अनुभवों की जानकारी ली। कोमल स्व-सहायता समूह की मती पूर्णिमा बासिन ने बताया कि बैंक लिंकेज और CIF के माध्यम से प्राप्त ऋण से उन्होंने जैविक खेती शुरू की और जीराफूल चावल का उत्पादन कर एक वर्ष में 3 लाख रुपये की बिक्री की है। मुख्यमंत्री ने उनकी इस सफलता की सराहना करते हुए 5 समूहों को 21 लाख रुपये के चेक प्रदान किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की योजनाएं जमीन पर बदलाव की स्पष्ट तस्वीर बनकर सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं और स्थानीय उत्पादों को प्रदेश स्तर तक पहचान मिल रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनपद पंचायत वाड्रफनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत कछिया की सरपंच मती खुशबू सिंह एवं सचिव मती सुनीता मरावी को बाल हितैषी पंचायत श्रेणी में प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर शील्ड एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि जब महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिलता है, तो वे समाज के सबसे महत्वपूर्ण वर्ग—बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए विकास की नई दिशा तय करती हैं।  उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ के गांवों में महिलाओं की यह भागीदारी राज्य को आत्मनिर्भरता और समृद्धि की ओर तेजी से आगे बढ़ाएगी।

विभागों ने नियमों में संशोधन शुरू, संविदा कर्मियों के लिए बढ़े अवसर

भोपाल मध्य प्रदेश के डेढ़ लाख से अधिक संविदा कर्मियों की लंबे समय से चली आ रही सीधी भर्ती के रिक्त पदों पर नियुक्ति में 50 प्रतिशत कोटा देने की मांग धीरे-धीरे ही सही मगर पूरी होने जा रही है। इसके लिए सभी विभागों के सेवा भर्ती नियम में संशोधन करके उक्त प्रविधान किया जा रहा है। यानी अब इनमें सीधी भर्ती के रिक्त पदों में से 50 प्रतिशत संविदा कर्मियों से भरे जाएंगे। वर्ष 2023 की संविदा नीति और कार्यान्वयन में देरी यह प्रविधान संविदा नीति में तो पहले ही कर दिया गया था लेकिन विभागों ने भर्ती नियमों में संशोधन नहीं किया। अब नियम संशोधित कर लागू किए जा रहे हैं। संविदा नीति में संशोधन वर्ष 2023 में किया गया। इसमें ही यह प्रविधान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर किया गया था। विधानसभा चुनाव के बाद इस नियम को लागू करने में अधिकारियों ने रुचि नहीं दिखाई। इसके कारण मामला टलता गया और कर्मचारियों में रोष बढ़ता गया।  

संत और सनातन संस्कृति ही समाज को दिखाते हैं सही दिशा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसी देवस्थान की प्राण प्रतिष्ठा और संतों का सान्निध्य कई जन्मों के पुण्य के बाद ही प्राप्त होता है। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमर धरोहर बताते हुए कहा कि ईश्वर संतों के माध्यम से ही समाज को मार्ग भटकने से बचाते हैं। उन्होंने जैन धर्म के "जियो और जीने दो" के मूल मंत्र और अहिंसा के मार्ग पर विशेष बल दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें सिखाती है कि जीवन का प्रत्येक क्षण और व्यवस्था का प्रत्येक कण लोक-कल्याण के लिए सदुपयोग में आना चाहिए। मानवता और जीव मात्र के प्रति करुणा भाव रखना ही हमारी संस्कृति का आधार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर में जैन समाज के 'प्रतिष्ठा महोत्सव' एवं 'लाभार्थी बहुमान समारोह' में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मुख्यमंत्री द्वारा गच्छाधिपति आचार्यदेव मद्विजय हितेश्चन्द्रसूरीश्वरजी महाराज साहिब का भावपूर्ण पूजन-वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मोहनखेड़ा तीर्थ से अपने आत्मीय और गहरे जुड़ाव को भी साझा किया। उन्होंने रोचक ढंग से उल्लेख किया कि आचार्य  ने इस पावन तीर्थ का नाम उनके नाम (मोहन) पर ही रखा है, जो उनके लिए व्यक्तिगत रूप से अत्यंत आनंद और गौरव का विषय है। उन्होंने मोहनखेड़ा तीर्थ को न केवल प्रदेश, बल्कि पूरे देश और दुनिया के लिए श्रद्धा एवं आस्था का एक प्रमुख केंद्र बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और समरसता का संचार होता है। मुख्यमंत्री ने सफल आयोजन के लिए समस्त ट्रस्टी परिवार और आयोजन समितियों को बधाई दी और आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यों में हर संभव सहयोग प्रदान करती रहेगी। आचार्य  हितेश्चन्द्रसूरीश्वरजी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सरल स्वभाव और धर्म के प्रति उनकी अटूट निष्ठा की प्रशंसा की। आचार्य  ने कहा कि जब शासन और साधना का समन्वय होता है, तभी राष्ट्र उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री को आशीर्वाद देते हुए कहा कि जिस प्रकार वे जनसेवा के कार्यों में संलग्न हैं, उसी प्रकार धर्म और संस्कृति के संरक्षण में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण है। आचार्य  ने प्रतिष्ठा महोत्सव के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ऐसे आयोजन आत्मा की शुद्धि और समाज में सद्भावना बढ़ाने का कार्य करते हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को धर्म के मार्ग पर अडिग रहने और जीव मात्र के प्रति करुणा भाव रखने की प्रेरणा दी।    

‘ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान’ पहुंचे मुख्यमंत्री: ‘पशु सखियों’ का बढ़ाया मनोबल

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज सुशासन तिहार के अंतर्गत बलरामपुर  जिला प्रवास के दौरान 'ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान'  (RSETI) पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पशु सखियों से आत्मीय संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।  मुख्यमंत्री  साय ने प्रशिक्षण कक्ष का अवलोकन करते हुए विभिन्न गतिविधियों की जानकारी ली और प्रशिक्षणार्थियों से ‘जय बिहान’ कहकर आत्मीय अभिवादन किया। उन्होंने विशेष रूप से  पशुपालन का प्रशिक्षण ले रही पशु सखियों से संवाद करते हुए उनके अनुभवों को जाना और उनके प्रयासों की सराहना की। इस दौरान विकासखण्ड रामचन्द्रपुर के बगरा क्लस्टर अंतर्गत ग्राम केवली की अनुराधा गुप्ता ने मुख्यमंत्री को बताया कि वे बिहान योजना से जुड़कर पशु सखी के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वे गांव में पशुओं का सर्वे कर पशु चिकित्सकों को सहयोग प्रदान करती हैं तथा ग्रामीणों को पशुपालन से संबंधित आवश्यक जानकारी एवं बीमारियों के प्रति जागरूक करती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान द्वारा प्रदान किए जा रहे प्रशिक्षण से उन्हें अपने कार्य को और अधिक दक्षता के साथ करने में सहायता मिल रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास और स्वरोजगार को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि RSETI जैसे संस्थान न केवल प्रशिक्षण के केंद्र हैं, बल्कि ये ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। उल्लेखनीय है कि जिला बलरामपुर-रामानुजगंज में संचालित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से अब तक 16 बैचों में कुल 510 प्रशिक्षणार्थियों को विभिन्न उद्यमी क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। इन प्रशिक्षणों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं को स्वरोजगार एवं सूक्ष्म उद्यमिता के लिए तैयार किया जा रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

राज्यमंत्री गौर ने ढाई लाख और दो लाख लीटर की क्षमता वाली टंकियों का किया भूमिपूजन

भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने रविवार को गोविंदपुरा क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 2 पानी की टंकियों के निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। राज्यमंत्री  गौर की इस पहल से मिसरोद स्थित फॉर्च्यून डिवाइन सिटी के पास 2.5 लाख लीटर क्षमता तथा प्रताप नगर, बरखेड़ा पठानी के पास 2 लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकियों की स्थापना होगी। 2 करोड़ 70 लाख रूपये की लागत से इन टंकियों का निर्माण कार्य किया जाएगा। राज्यमंत्री  कृष्णा गौर ने कहा कि इससे क्षेत्रवासियों को नर्मदा जल की नियमित आपूर्ति हो सकेगी। उन्होंने कहा कि प्यासे को पानी पिलाना हमारी संस्कृति में पुण्य का कार्य माना गया है और इसी भावना के साथ क्षेत्र के नागरिकों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के लिए यह पहल की गई है। राज्यमंत्री  गौर ने बताया कि बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए नई पानी की टंकियों का निर्माण आवश्यक हो गया था। अमृत फेस-2 योजना के अंतर्गत क्षेत्र में कुल 18 टंकियों का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे भविष्य में जल संकट की समस्या से राहत मिलेगी। राज्यमंत्री  गौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य 18 माह के भीतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि गोविंदपुरा क्षेत्र में विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी और आगे भी नागरिकों को ऐसी महत्वपूर्ण सौगातें मिलती रहेंगी। कार्यक्रम में  मोनिका ठाकुर, श्री रामबाबू पाटीदार, श्री प्रताप वारे, श्री जितेंद्र शुक्ला, श्री भागीरथ पाटीदार, श्री नीरज सिंह, श्री प्रताप सिंह बेस,  सरिता सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।  

आईपीएस अधिकारियों के तबादले से पुलिस महकमे में हलचल, अब मुख्यालय में करेंगे कार्य

 भोपाल  प्रदेश सरकार ने शनिवार रात डेढ़ बजे एक साथ 62 आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए। इसमें चार माह पहले जनवरी 2026 में उप पुलिस महानिरीक्षक पद पर पदोन्नत होने के बाद भी एसपी बने रहे सात पुलिस अधीक्षकों को मुख्यालय में बैठा दिया। वहीं, पांच पुलिस अधीक्षकों को उनके बेहतर प्रदर्शन के आधार पर दोबारा जिलों की कमान सौंपी गई है। पदोन्नत अधिकारियों के प्रभार में फेरबदल सिंगरौली में बैंक डकैती के बाद मनीष खत्री को हटाया गया तो गुरुकरण सिंह ने आठ माह में ही वापसी की है। उन्हें रीवा जैसे महत्वपूर्ण जिले में पदस्थ किया है। 2020 बैच के अधिकारियों पर भरोसा जताते हुए उन्हें कप्तानी दी गई है। आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची बहुप्रतीक्षित थी। इसका कारण यह था कि जनवरी में दस अधिकारियों को उप पुलिस महानिरीक्षक पद पर पदोन्नत किया गया था लेकिन इनकी पदस्थापना में परिवर्तन नहीं किया गया। इनमें सात पुलिस अधीक्षक थे। इनके स्थान पर दूसरे अधिकारियों को पदस्थ करने का प्रस्ताव दो-तीन बार बना लेकिन किसी न किसी कारण से मामला टल रहा था। मुख्यमंत्री की बैठक और कड़ा निर्णय शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और 'एक बार में ही घर भर के बदल डालूंगा' की तर्ज पर तबादले करने का निर्णय लिया गया। इसमें उप पुलिस महानिरीक्षक पद पर पदोन्नत हुए खंडवा के पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार राय, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रेडियो रियाज इकबाल, एसपी रेल भोपाल राहुल लोढ़ा, एसपी रेल जबलपुर सिमाला प्रसाद, पुलिस अधीक्षक भिंड असित यादव, डीसीपी भोपाल विवेक सिंह, पुलिस अधीक्षक रीवा शैलेंद्र सिंह चौहान, उपायुक्त इंदौर कुमार प्रतीक, पुलिस अधीक्षक झाबुआ शिवदयाल और पुलिस अधीक्षक धार मयंक अवस्थी शामिल हैं। मुख्यालय में पदस्थापना और नए कप्तानों की नियुक्ति इनमें अधिकतर को पुलिस मुख्यालय में पदस्थ किया है। मयंक को इंदौर तो शैलेंद्र चौहान को भोपाल में पदस्थ किया है। वहीं, 17 अप्रैल 2026 को बैढ़न स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में हुई डकैती पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री पर भारी पड़ी। उन्हें पुलिस मुख्यालय में बैठाया गया है। उधर, चार माह पहले आईपीएस संवर्ग में आए आशीष खरे को डिंडौरी, विक्रांत मुराब अनूपपुर, सुरेंद्र कुमार जैन मऊगंज और राजेश रघुवंशी को मंडला का पुलिस अधीक्षक बनाया है। 2020 बैच के मयूर खंडेलवाल को दतिया, सोनाक्षी सक्सेना सीहोर, आनंद कलादगी सिंगरौली और कृष्ण लालचंदानी को सिवनी की कमान सौंपी है। यह भी पढ़ें- इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर: किसान बनेंगे करोड़पति, सरकार लौटाएगी 60% विकसित भूखंड, सीएम ने किया पहले चरण का शिलान्यास इन पुलिस अधीक्षकों पर फिर जताया भरोसा     सूरज कुमार वर्मा: दतिया से भिंड     यांगचेन डोलकर भुटिया: इंदौर देहात से शिवपुरी     रजत सकलेचा: मंडला से छतरपुर     अगम जैन: छतरपुर से खंडवा     देवेंद्र कुमार पाटीदार: बुरहानपुर से झाबुआ     दिलीप कुमार सोनी: मऊगंज से आगर मालवा