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15 साल बाद उसलापुर रेलवे साइडिंग फिर शुरू, ट्रक मालिकों में उत्साह

15 साल बाद उसलापुर रेलवे साइडिंग फिर शुरू, ट्रक मालिकों में उत्साह आंधी-तूफान के बीच सैकड़ों ट्रक मालिकों की ऐतिहासिक बैठक, संचालन तत्काल शुरू करने का निर्णय वरिष्ठ नेताओं ने संभाला संरक्षक दायित्व, 1 मई को श्रमिक दिवस भव्य रूप से मनाने का ऐलान बिलासपुर  उसलापुर गुड्स शेड वेलफेयर ट्रक ओनर एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक उसलापुर रेलवे साइडिंग में आयोजित हुई, जिसमें खराब मौसम और धूल भरी आंधी के बावजूद सैकड़ों ट्रक मालिकों एवं श्रमिकों ने भाग लेकर एकजुटता का परिचय दिया। बैठक में 15 वर्षों से बंद पड़ी रेलवे साइडिंग को पुनः शुरू करने का सर्वसम्मति से ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। बैठक में वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल, गुलशन ऋषि, प्रशांत नारंग एवं अशोक श्रीवास्तव ने एसोसिएशन के संरक्षक का दायित्व स्वीकार करते हुए संगठन को मजबूती प्रदान करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि ट्रक मालिकों और श्रमिकों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। निर्णय अनुसार, उसलापुर रेलवे साइडिंग पर कार्य तत्काल प्रभाव से प्रारंभ किया जाएगा। सभी ट्रक मालिक एवं श्रमिक अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए नियमित संचालन शुरू करेंगे। यह पहल क्षेत्र के व्यापार और परिवहन व्यवस्था को नई गति देने वाली मानी जा रही है। बैठक के दौरान वक्ताओं ने कहा कि ट्रक मालिक, ड्राइवर और श्रमिक देश की आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ हैं, जो दिन-रात सेवाएं देकर अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, एसोसिएशन द्वारा आगामी 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस को भव्य रूप से मनाने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर श्रमिकों के योगदान को सम्मानित करते हुए एकजुटता का प्रदर्शन किया जाएगा। बैठक में नरेश अग्रवाल, गुलशन ऋषि, प्रशांत नारंग, अशोक श्रीवास्तव, ईश्वर सिंह चंदेल, तेजिंदर सिंह बाली, राशिद अली, जीत सिंह, शाहनवाज, इस्माइल, महावीर सिंह, हरजिंदर सिंह, गुरमीत सिंह राणा, समीम, गुड्डू झा, बलजीत सिंह, विनोद पांडे, धीरज यादव, मनजीत सिंह, शिवकुमार, गुरजीत सिंह बाली एवं लेबर अध्यक्ष राजेश टंडन सहित बड़ी संख्या में ट्रक मालिक एवं श्रमिक उपस्थित रहे।

गेटमैन की कमी बनी चुनौती, सरपंच रोज संभालते हैं रेलवे फाटक और देते हैं हरी झंडी

होशियारपुर. पंजाब के होशियारपुर जिले के गांव बसियाला में रेलवे फाटक पर कोई कर्मचारी नहीं है। लेकिन दिन में दो बार जब ट्रेन आती है, वहां एक शख्स मौजूद होता है- गांव का सरपंच गुरदेव सिंह। गढ़शंकर तहसील के बसियाला गांव से गुजरने वाली रेलवे लाइन से रोजाना सैकड़ों लोग गुजरते हैं। यह रास्ता राहों से जैजों दोआबा को जोड़ता है। इस क्रॉसिंग पर फाटक है, पर उसे चलाने वाला सिस्टम नहीं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, रेलवे ने पहले इस रास्ते को बंद कर दिया था। विरोध के बाद रास्ता खोल दिया गया, लेकिन रेलवे ने फाटक नहीं लगाया। तब गांव वालों ने चंदा कर फाटक लगवाया। ग्रामीणों ने रेल अधिकारियों को फाटक पर कर्मचारी तैनात करने के आवेदन दिए, नेताओं से भी मांग की। लेकिन कोई नियुक्ति नहीं हुई। इसलिए अब सरपंच गुरदेव सिंह रोज ट्रेन के समय से पहले फाटक पर पहुंचते हैं। उसे बंद करते हैं और हाथ में हरी झंडी लेकर ट्रेन को गुजरने का संकेत देते हैं। यह उनकी आधिकारिक ड्यूटी नहीं है, लेकिन वे इसे नैतिक ड्यूटी मानते हैं। कोई तैयार नहीं हुआ- सरपंच डर लगता है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए। मैं अपनी दुकान छोड़कर दिन में दो बार यहां आता हूं। आने से पहले फोन पर मुबारकपुर के रेलवे स्टाफ से ट्रेन के आने का पता करता हूं। हम गांव वालों ने एक व्यक्ति को 10 हजार रुपए महीने पर रखा था। वह काम छोड़ गया। उसके बाद से यह जिम्मेदारी मैंने खुद ले ली।

छत्तीसगढ़ ने बनाया रिकॉर्ड: मनरेगा श्रमिकों की 97.11% ई-केवाईसी पूरी, देश में अव्वल

रायपुर. छत्तीसगढ़ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरईजीए) के तहत श्रमिकों के ई-केवाईसी (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) सत्यापन में भारत में पहले स्थान पर है, जिससे डिजिटल शासन और ग्रामीण पारदर्शिता को बढ़ावा मिल रहा है। भारत सरकार द्वारा 27 अप्रैल (सोमवार) को जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने सक्रिय श्रमिकों के लिए 97.11 प्रतिशत की शानदार पूर्णता दर हासिल की है।  इस प्रदर्शन ने तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे औद्योगिक दिग्गजों के साथ-साथ केरल जैसे उच्च साक्षरता दर वाले राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया, जो 97.06% के साथ दूसरे स्थान पर रहा। छत्तीसगढ़ ने छोटे और बड़े दोनों राज्यों को पछाड़कर यह उपलब्धि हासिल की। छत्तीसगढ़ में एमएनआरईजीए के तहत 56.87 लाख से अधिक श्रमिकों का डिजिटल सत्यापन (ई-केवाईसी) सफलतापूर्वक पूरा हो गया है, जो मजदूरी भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डिजिटल प्रक्रिया फर्जी जॉब कार्डों को खत्म करने में मदद करती है और यह सुनिश्चित करती है कि मजदूरी सीधे वास्तविक लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित हो। इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ में वर्तमान सरकार द्वारा प्रभावी निगरानी, ​​रणनीतिक योजना और नेतृत्व के परिणाम के रूप में देखा जा रहा है। सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि एक सुनियोजित राज्यव्यापी अभियान के माध्यम से ई-केवाईसी प्रक्रिया को तेज किया गया, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सिस्टम से जुड़ने में मदद मिली। मुख्यमंत्री विष्णु देव ने कहा, “राज्य सरकार गरीब और श्रमिक समुदायों के हितों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि उन्हें कल्याणकारी योजनाओं का पारदर्शी लाभ मिले। ई-केवाईसी समय पर वेतन भुगतान और श्रमिकों को सीधे लाभ पहुंचाने में मदद कर रहा है।” “यह उपलब्धि अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम स्तर पर काम करने वाली टीमों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। ई-केवाईसी ने न केवल हाजिरी रजिस्टरों में फर्जी उपस्थिति को रोकने में मदद की है, बल्कि वास्तविक लाभार्थियों तक लाभ पहुंचाने में अधिक पारदर्शिता भी लाई है,” उपमुख्यमंत्री और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने दावा किया। राज्य सरकार ने आगे निर्देश दिया कि लंबित मामलों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि राज्य 100 प्रतिशत ई-केवाईसी कवरेज हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके। अधिकारियों ने कहा कि यह उपलब्धि राज्य भर में चलाए गए विशेष अभियानों, ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रमों और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग का परिणाम है।

झारखंड के 14 कोषागारों में फर्जी निकासी, 200 से ज्यादा कर्मचारी जांच के घेरे में

 रांची  झारखंड में वेतन निकासी के नाम पर एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है. महालेखाकार (AG) की ऑडिट रिपोर्ट में राज्य के 33 में से 14 कोषागारों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पकड़ी गई है. जांच में पुष्टि हुई है कि 200 से अधिक पुलिसकर्मियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों ने सिस्टम की तकनीकी खामियों का सहारा लेकर एक ही महीने में दो-दो बार वेतन और एरियर की निकासी की. इस फर्जीवाड़े से सरकारी खजाने को कुल 31.47 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसमें से केवल दोहरा वेतन भुगतान ही 7.67 करोड़ रुपये का है. डीएसपी स्तर के अधिकारी भी शामिल घोटाले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें कानून के रखवाले ही आरोपी पाए गए हैं. महालेखाकार द्वारा जारी सूची में डीएसपी स्तर के अधिकारी- नौशाद आलम, राजेश यादव, मणिभूषण प्रसाद और मुकेश कुमार महतो के नाम शामिल हैं. इन अधिकारियों ने अपनी विभिन्न पदस्थापनाओं के दौरान नियम विरुद्ध तरीके से दोहरा वेतन और एरियर उठाया है. इनके अलावा बड़ी संख्या में सिपाही, सहायक शिक्षक और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी भी इस फेहरिस्त में शामिल हैं. इन 14 जिलों के कोषागारों में हुई गड़बड़ी महालेखाकार ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर जिन 14 कोषागारों में फर्जी निकासी की पुष्टि की है, उनमें हजारीबाग, बोकारो, रांची, देवघर, पलामू, गोड्डा, जमशेदपुर, तेनुघाट, गुमला, चाईबासा, महेशपुर, खूंटी, सरायकेला और रामगढ़ शामिल हैं. ऑडिट के अनुसार, कुल 614 कर्मचारियों ने इस पूरे खेल को अंजाम दिया है. सिपाही से लेकर शिक्षक तक ने की लूट जांच रिपोर्ट में सिपाही बिरसा राकेश कुमार चौधरी, अशोक संजय, चंदन कुमार तिवारी, अरविंद यादव, शंकर राम और सुरेंद्र राम के नाम प्रमुखता से दर्ज हैं. इन्होंने तकनीकी लूपहोल का फायदा उठाकर दोहरा भुगतान प्राप्त किया. महालेखाकार ने इस मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और राशि की वसूली की सिफारिश की है.

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की विशेष शिक्षा सहायक शिक्षक परीक्षा स्थगित

रांची झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने झारखंड इंटरमीडिएट एवं स्नातक प्रशिक्षित विशेष शिक्षा सहायक शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा की तिथि बढ़ा दी है। आयोग ने इसके पीछे तकनीकी कारण बताया है। पहले यह परीक्षा पांच मई से सात मई तक आयोजित होनेवाली थी, लेकिन अब यह 20 मई से 23 मई तक रांची स्थित केंद्रों पर सीबीटी मोड में आयोजित की जाएगी। आयोग ने सोमवार को इसकी सूचना जारी करते हुए कहा कि अभ्यर्थियों को उनके द्वारा दी जाने वाली परीक्षा की तिथि की सूचना शीघ्र ही उनके पंजीकृत मोबाइल में एसएमएस तथा ईमेल के माध्यम से दी जाएगी। आयोग ने अभ्यर्थियों को नियमित रूप से वेबसाइट देखने के भी निर्देश दिए हैं। अगले माह जारी होगा एएनएम नियुक्ति परीक्षा का परिणाम झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने झारखंड एएनएम नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा का अंतिम माॅडल उत्तर जारी कर दिया है। अभ्यर्थी इसे एक मई मध्यरात्रि तक इसे आयोग की वेबसाइट पर जारी लिंक के माध्यम से देख सकते हैं। आयोग मई माह में इस परीक्षा का परिणाम जारी करेगा। इससे पहले आयोग ने परीक्षा का औपबंधिक माडल उत्तर जारी करते हुए उसपर एक से सात अप्रैल तक आपत्तियां मांगी थी। प्राप्त आपत्तियों की विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा के बाद आयोग ने अंतिम माडल उत्तर जारी किया। यह परीक्षा 18 एवं 19 मार्च को हुई थी।

हरियाणा में अंगदान को लेकर युवाओं में उत्साह, 18-45 आयु वर्ग सबसे आगे

रोहतक. हरियाणा के युवाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे केवल खेल मैदानों और सेना में ही नहीं, बल्कि मानवता की सेवा में भी सबसे आगे हैं। प्रदेश में अंगदान के लिए सबसे ज्यादा पंजीकरण युवाओं ने कराया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों ने सबसे अधिक संख्या में अंगदान का संकल्प लिया है। इससे साफ है कि नई पीढ़ी अब सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए जीवन बचाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हरियाणा के युवाओं ने यह संदेश दिया है कि म्हारे गाबरू बड़े दिलदार, केवल कहावत नहीं, बल्कि मानवता की मिसाल है। अब जरूरत है कि यह अभियान गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचे, ताकि और ज्यादा लोग जीवनदान के इस महादान से जुड़ सकें। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत संचालित नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (नोटो) के मुताबिक सोमवार तक हरियाणा में कुल 7,998 लोगों ने अंगदान के लिए पंजीकरण कराया है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है और प्रदेश में जागरूकता का संकेत मानी जा रही है। दिल, लीवर और फेफड़ों के लिए सबसे ज्यादा संकल्प हरियाणा के लोगों ने सबसे ज्यादा हृदय, लीवर और फेफड़ों के दान के लिए पंजीकरण कराया है। इससे स्पष्ट है कि लोग अब अंगदान के महत्व को समझ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार पहले लोग अंगदान को लेकर भ्रांतियों और डर के कारण पीछे हटते थे, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। परिवार स्वयं जानकारी ले रहे हैं और अंगदान की प्रक्रिया समझना चाहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस विषय पर जागरूकता बढ़ी है। युवाओं ने दिखाई सबसे ज्यादा रुचि आंकड़ों के अनुसार 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग में सबसे अधिक 2,946 युवाओं ने अंगदान का संकल्प लिया है। वहीं 30 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 3,025 लोगों ने पंजीकरण कराया है। इसका अर्थ है कि कुल पंजीकरण का सबसे बड़ा हिस्सा युवाओं और मध्यम आयु वर्ग से है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं में शिक्षा, इंटरनेट मीडिया जागरूकता और स्वास्थ्य संबंधी समझ बढ़ने से अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई है। हरियाणा में अंगदान पंजीकरण में पुरुषों की संख्या महिलाओं से काफी अधिक है। आंकड़ों के अनुसार 5,225 पुरुषों ने अंगदान का संकल्प लिया है, जबकि 2,773 महिलाओं ने भी इसमें भागीदारी दिखाई है। हालांकि सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में यह संख्या और मजबूत होगी। अंग     पंजीकरण संख्या हृदय     6050 लीवर     6166 फेफड़े     5750 पैंक्रियाज     5373 आंत     5279 किडनी     2654 परिवार को अपनी इच्छा बताना भी जरूरी बतौर विशेषज्ञ पंडित भगवत दयाल शर्मा हेल्थ विवि के कुलपति डा. एचके अग्रवाल का कहना है कि एक अंगदाता 8 लोगों की जान बचा सकता है और कई अन्य लोगों को नई जिंदगी दे सकता है। यही कारण है कि युवाओं का बढ़ता रुझान आने वाले समय में हजारों मरीजों के लिए उम्मीद बन सकता है। एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद हृदय, लीवर, फेफड़े, किडनी सहित कई अंग जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित होते हैं। विशेष बात यह है कि केवल पंजीकरण काफी नहीं है। परिवार को अपनी इच्छा बताना भी जरूरी है। कई बार मृत्यु के बाद अंतिम निर्णय परिवार की सहमति से होता है। इसलिए युवाओं को अपने माता-पिता और परिजनों से इस विषय पर खुलकर बातचीत करनी चाहिए। उम्रवार आंकड़ों से समझिये बढ़ती पंजीकरण की रफ्तार आयु वर्ग     पंजीकरण संख्या 18-30 वर्ष     2946 30-45 वर्ष     3025 45-60 वर्ष     1411 60 वर्ष से ऊपर     611 पंजीकरण में पुरुष सबसे आगे श्रेणी     पंजीकरण महिलाएं     2773 पुरुष     5225

खनिज व्यापार में बड़ा सुधार: छत्तीसगढ़ सरकार ने शुरू किया ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ सिस्टम

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने खनिज कारोबार को पारदर्शी बनाने और राजस्व बढ़ाने के लिए बड़ा डिजिटल कदम उठाया है। ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ पोर्टल लागू होने के बाद अब खदान संचालकों को रॉयल्टी पर्ची के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। ई-रॉयल्टी और ई-ट्रांजिट पास की सुविधा 24 घंटे ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी और मानवीय हस्तक्षेप कम होने से गड़बड़ियों पर भी रोक लगेगी। खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद के अनुसार, नई व्यवस्था से खदानों की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो गई है। इससे अवैध उत्खनन, ओवरलोडिंग और बिना परमिट खनिज परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा। अब हर लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा, जिसे कभी भी जांचा जा सकेगा। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) फंड की निगरानी को भी डिजिटल किया गया है। ‘DMF 2.0’ पोर्टल के जरिए अब सभी प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृतियां ऑनलाइन होंगी, जिससे यह स्पष्ट रहेगा कि पैसा किस योजना में और किस उद्देश्य से खर्च किया गया। हर साल करीब 2 हजार करोड़ रुपए के इस फंड में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की गई है। रेत खदानों को लेकर भी सरकार ने ‘वन स्टेट-वन पॉलिसी’ लागू की है। अब खदानों का आबंटन ई-टेंडरिंग के जरिए किया जा रहा है और अब तक करीब 200 नई खदानों की नीलामी हो चुकी है। इससे रेत की उपलब्धता बढ़ने और कीमतों पर नियंत्रण की उम्मीद है। बस्तर संभाग में आदिवासी परिवारों को राहत देते हुए टिन की खरीदी दर 640 रुपए से बढ़ाकर 2800-2900 रुपए प्रति किलो कर दी गई है। साथ ही अब भुगतान सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खातों में किया जा रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और आय में सीधा फायदा मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर लागू इस डिजिटल सिस्टम से खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।

Madhya Pradesh में UCC की दिशा में कदम, रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में 60 दिन में तैयार होगा ड्राफ्ट

भोपाल  भोपाल से बड़ी खबर सामने आ रही है. मध्यप्रदेश में अब ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) को लेकर हलचल तेज हो गई है. राज्य सरकार ने इसे लागू करने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठा लिया है. रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनी कमेटी विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है. सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है. इस 6 सदस्यीय समिति की कमान सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है. 60 दिन में तैयार होगा ड्राफ्ट यह कमेटी अपनी रफ्तार से काम करेगी. इसे अगले 60 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट और ‘UCC ड्राफ्ट बिल’ तैयार कर सरकार को सौंपना होगा. इस दौरान समिति उत्तराखंड और गुजरात में अपनाए गए मॉडलों का भी गहराई से अध्ययन करेगी. इन कानूनों पर रहेगा फोकस समिति का मुख्य काम विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे कानूनों की समीक्षा करना है. इसके अलावा, लिव-इन रिलेशनशिप और दत्तक ग्रहण (Adoption) से जुड़े नियमों पर भी विशेष अध्ययन किया जाएगा. इसका उद्देश्य राज्य के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है. महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को प्राथमिकता इस पूरी प्रक्रिया में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. समिति केवल बंद कमरों में काम नहीं करेगी, बल्कि आम लोगों की राय जानने के लिए जनसुनवाई और परामर्श बैठकें भी आयोजित करेगी. विशेषज्ञों से ली जाएगी राय समिति सामाजिक और धार्मिक संगठनों के साथ-साथ विधि विशेषज्ञों से भी सुझाव मांगेगी. प्रशासनिक और क्रियान्वयन से जुड़े हर पहलू की बारीकी से जांच की जाएगी, ताकि कानून को सही ढंग से लागू किया जा सके. 6 सदस्यीय समिति में कौन? जारी आदेश के अनुसार, 6 सदस्यीय समिति की अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई होंगी. शत्रुघ्न सिंह (सेवानिवृत्त भा.प्र.से), अनूप नायर (कानूनविद), गोपाल शर्मा (शिक्षाविद), बुधपाल सिंह (सामाजिक कार्यकर्ता) और अजय कटेसरिया (अपर सचिव सामान्य प्रशासन विभाग).

रिकॉर्ड गेहूं खरीद: पंजाब में 100 LMT पार, ₹21,000 करोड़ से अधिक की पेमेंट जारी

चंडीगढ़. चंडीगढ़. राज्य की मंडियों में गेहूं की आवक और खरीद दोनों ही 100 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) के आंकड़े को पार कर गए हैं। अब तक 1,03,49,917.17 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है, जबकि 1,00,15,024.35 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक्क के कुशल नेतृत्व में विभाग द्वारा राज्यभर की मंडियों में बारदाना, पीने के साफ पानी के साथ-साथ स्वच्छता संबंधी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। इसके कारण गेहूं की आवक, खरीद और लिफ्टिंग में तेजी आई है तथा समय पर भुगतान सुनिश्चित किया गया है, जिससे किसान, आढ़ती और मजदूरों सहित सभी हितधारकों के हितों की रक्षा हुई है। किसानों को किए गए भुगतान के संबंध में, 48 घंटे के भीतर खरीदी गई गेहूं के लिए 21,422.09 करोड़ रुपये की राशि उनके खातों में ट्रांसफर कर दी गई है। आज यहां अनाज भवन में मीडिया से बातचीत करते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने बताया कि सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद 100 लाख मीट्रिक टन के आंकड़े को पार कर गई है और वर्तमान समय में मंडियों से 103 लाख मीट्रिक टन गेहूं की सरकारी खरीद की जा चुकी है। किसानों को अदायगी के संबंध में उन्होंने बताया कि किसानों के खातों में 22,815 करोड़ रुपये की राशि जमा करवाई जा चुकी है। अब तक 6,28,674 किसान अपनी उपज मंडियों में ला चुके हैं। उन्होंने आगे बताया कि उठाई भी तेजी से की जा रही है और 47.37 लाख मीट्रिक टन गेहूं की उठाई हो चुकी है, जो कि 72 घंटों के नियमों के अनुसार 56.6 प्रतिशत है। इसके अलावा सुचारू और निर्विघ्न खरीद सुनिश्चित करने के लिए राज्य भर में कुल 2885 खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं और इनमें से 1864 नियमित किए गए हैं जबकि 1021 अस्थायी हैं। मंत्री ने आगे बताया कि इस बार उपज बहुत ज्यादा रही है, जिसके कारण पंजाब में बंपर फसल हुई है। इससे 124 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को सफलतापूर्वक पूरा करने में बहुत मदद मिलेगी। अधिक जानकारी देते हुए कटारूचक्क ने बताया कि वह नियमित अंतरालों पर राज्य भर की मंडियों का दौरा कर रहे हैं और किसी भी किसान ने मंडियों में किए गए प्रबंधों के बारे में कोई शिकायत नहीं की है। इसके साथ ही बारदाने, साफ-सफाई, पीने का पानी और लकड़ी के क्रेट जैसी सभी जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।

खजुराहो में पारा 46 पार, 10 साल का रिकॉर्ड टूटा; एमपी में भीषण गर्मी, लू और आंधी-बारिश का अलर्ट जारी

भोपाल /जबलपुर  मध्य प्रदेश में गर्मी ने इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. पर्यटन स्थल खजुराहो में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो पिछले 10 सालों में सबसे अधिक बताया जा रहा है. इस भीषण गर्मी ने न सिर्फ आम जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि स्वास्थ्य और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है. हालात ऐसे हैं कि दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हैं. मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटों में कुछ इलाकों में बारिश और तेज हवाओं के कारण तापमान में गिरावट संभव है. इससे लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है।  तेज गर्मी के बीच मौसम में बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, 1 मई तक प्रदेश में गर्मी के साथ कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है। यह बदलाव साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ के सक्रिय होने के कारण होगा। साथ ही, 28 अप्रैल से लू के प्रभाव में कुछ कमी आने के आसार हैं। मंगलवार को छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। वहीं, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं और बारिश हो सकती है। बीते सोमवार को प्रदेश के कई शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। खजुराहो (46.0 डिग्री) और नौगांव (45.5 डिग्री) के अलावा श्योपुर और दतिया समेत 13 शहरों में पारा 44 डिग्री से ऊपर दर्ज हुआ। राजधानी भोपाल और ग्वालियर में 43.4 डिग्री, इंदौर में 42.0 डिग्री, उज्जैन में 42.4 डिग्री और जबलपुर में 42.7 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। खजुराहो में अब तक 10 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है और अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो ऑल-टाइम रिकॉर्ड भी टूट सकता है। यहां 29 अप्रैल 1993 को अधिकतम तापमान 46.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। गर्मी को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। दिनभर पर्याप्त पानी पीने, शरीर को हाइड्रेट रखने, दोपहर में धूप से बचने और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। इन जिलों में लू का अलर्ट मंगलवार को जिन जिलों में लू का अलर्ट है, उनमें छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट शामिल हैं। 12 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में गरज-चमक और आंधी के साथ बारिश होने की संभावना है। 13 शहरों में पारा 44 डिग्री के पार सोमवार को खजुराहो (46.0 डिग्री) और नौगांव (45.5 डिग्री) के अलावा श्योपुर और दतिया समेत कुल 13 शहरों में अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा दर्ज किया गया। भोपाल और ग्वालियर में 43.4 डिग्री, इंदौर में 42.0 डिग्री, उज्जैन में 42.4 डिग्री और जबलपुर में पारा 42.7 डिग्री रहा। खजुराहो में ऑल-टाइम रिकॉर्ड टूटने का डर खजुराहो में 10 साल का रिकॉर्ड तो टूट ही चुका है, अब ओवरऑल रिकॉर्ड टूटने की भी आशंका है। मौसम विभाग के मुताबिक, खजुराहो में 29 अप्रैल 1993 को दिन का तापमान 46.9 डिग्री सेल्सियस रहा था। यदि गर्मी का दौर इसी तरह जारी रहा तो यह रिकॉर्ड भी टूट सकता है। दमोह में आंधी-बारिश से दीवार गिरी, दबने से महिला की मौत दमोह में सोमवार शाम आंधी-बारिश से एक कच्ची दीवार गिर गई। इसमें दबने से पड़ोस में रहने वाली 48 वर्षीय रागिनी पटैरिया नाम की महिला की मौत हो गई। महिला घर के पास रखे कंडे ढंकने गई थी, तभी यह हादसा हुआ। घटना रनेह थाना क्षेत्र के महुआ खेड़ा गांव की है। गर्मी से बचाव के लिए एडवाइजरी गर्मी का असर बढ़ते ही मौसम विभाग ने लोगों के लिए बचाव एडवाइजरी भी जारी की है। लोगों से कहा गया है कि वे दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें। दोपहर के समय लंबे समय तक धूप में न रहें। हलके वजन और रंग के सूती कपड़े पहनें। बच्चे और बुजुर्ग खासतौर पर अपना ध्यान रखें। अप्रैल में पड़ती है तेज गर्मी मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह दिसंबर-जनवरी में सर्दी और जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है, उसी तरह गर्मी के दो प्रमुख महीने अप्रैल और मई हैं। अप्रैल में तेज गर्मी पड़ती है।