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विश्व मलेरिया दिवस पर बड़ी पहल: पीएमएसएमए के तहत 480+ गर्भवती महिलाओं की हुई मलेरिया जांच

विश्व मलेरिया दिवस पर बड़ी पहल: पीएमएसएमए के तहत 480+ गर्भवती महिलाओं की हुई मलेरिया जांच मनेन्द्रगढ़/एमसीबी विश्व मलेरिया दिवस (25 अप्रैल) के अवसर पर जिले में स्वास्थ्य विभाग ने एक सराहनीय और व्यापक अभियान चलाते हुए गर्भवती महिलाओं की मलेरिया जांच सुनिश्चित की। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत यह विशेष पहल की गई, जिसका उद्देश्य हर गर्भवती महिला तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से समय रहते बचाव करना था। अभियान के तहत जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं उप-स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला की अनिवार्य रूप से मलेरिया जांच की गई। स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रणनीति बनाकर यह सुनिश्चित किया कि कोई भी महिला जांच से वंचित न रह जाए, विशेषकर वे महिलाएं जो पहले किसी कारणवश जांच नहीं करा पाई थीं। इस दौरान जिले में कुल 480 से अधिक गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई। विकासखंडवार आंकड़ों में खड़गवां में 101, भरतपुर में 118 और मनेन्द्रगढ़ में सर्वाधिक 266 महिलाओं की जांच की गई। राहत की बात यह रही कि सभी जांच रिपोर्ट निगेटिव प्राप्त हुईं, जो जिले में मलेरिया नियंत्रण की मजबूत स्थिति को दर्शाती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान मलेरिया संक्रमण मां और शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे में समय पर जांच और उपचार अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से पीएमएसएमए दिवस पर 100 प्रतिशत जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया, जिसे सफलतापूर्वक हासिल किया गया। अभियान के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने गर्भवती महिलाओं को मलेरिया से बचाव के उपायों के बारे में भी जागरूक किया। उन्हें नियमित रूप से मच्छरदानी के उपयोग, साफ-सफाई बनाए रखने, पानी के ठहराव को रोकने और किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी गई। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे मलेरिया उन्मूलन में सक्रिय सहयोग दें और अपने आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखें। “मलेरिया मुक्त जिला स्वस्थ मां, सुरक्षित भविष्य” के संकल्प के साथ स्वास्थ्य विभाग लगातार जागरूकता, रोकथाम और समयबद्ध जांच के जरिए जिले को मलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

जबलपुर: कॉन्स्टेबल द्वारा वकील को पीटे जाने के 14 दिन बाद FIR, अफसरों पर समझौते का दबाव, हाईकोर्ट में याचिका

जबलपुर जबलपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में अधिवक्ता के साथ मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस आरक्षक पर घर में घुसकर हमला करने के आरोप के बाद पहले पुलिस की निष्क्रियता और फिर देरी से दर्ज एफआईआर ने पूरे घटनाक्रम को विवादों में ला दिया है। अब मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां 29 अप्रैल को सुनवाई प्रस्तावित है। मामूली विवाद से शुरू हुआ हिंसक घटनाक्रम-समीक्षा टाउन निवासी अधिवक्ता पंकज शर्मा के अनुसार 11 अप्रैल की शाम बच्चों के शोर को लेकर हुए विवाद के बाद मदनमहल थाने में पदस्थ आरक्षक साकेत तिवारी उनके घर पहुंचे और गाली-गलौच करते हुए मारपीट करने लगे। बीच-बचाव करने आई महिलाओं और पड़ोसियों के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। सबूत होने के बावजूद नहीं हुई तत्काल कार्रवाई-घटना के बाद पीड़ित अधिवक्ता सिविल लाइन थाने पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से पूरी घटना की जानकारी दी। आरोप है कि पुलिस ने स्पष्ट सबूत होने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में रुचि नहीं दिखाई और समझौते के लिए दबाव बनाया। कोर्ट की शरण के बाद हरकत में आई पुलिस-कार्रवाई न होने पर अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। इसके बाद 25 अप्रैल को, घटना के लगभग 14 दिन बाद, सिविल लाइन थाने में आरक्षक साकेत तिवारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल-पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता धर्मेंद्र सोनी ने दर्ज एफआईआर की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि एफआईआर जल्दबाजी में और त्रुटिपूर्ण तरीके से दर्ज की गई, जिसमें न तो आवेदक को सूचित किया गया और न ही उनके हस्ताक्षर लिए गए। आरोपी ने खाली किया मकान, दबाव के आरोप-एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी आरक्षक ने अपना किराए का मकान खाली कर दिया। वहीं, पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत वापस लेने के लिए पुलिस द्वारा दबाव बनाया जा रहा था और मना करने पर काउंटर केस की धमकी दी गई। 29 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई-अब इस पूरे मामले पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जस्टिस बी.पी. शर्मा की एकलपीठ 29 अप्रैल को सुनवाई करेगी, जिसमें मारपीट और कथित तौर पर त्रुटिपूर्ण एफआईआर से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। बच्चों के शोर से आगबबूला हुआ आरक्षक सिविल लाइन समीक्षा टाउन में रहने वाले अधिवक्ता पंकज शर्मा 11 अप्रैल की शाम करीब 6:30 बजे घर पर आराम कर रहे थे। बाहर बच्चों का शोर हो रहा था, जिस पर उनकी पत्नी ने उन्हें शांत होकर खेलने के लिए कहा। यह बात पास में ही किराए से रहने वाले पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी को पता चली। वह शहर के मदन महल थाने में पदस्थ है। आरक्षक अधिवक्ता के घर पहुंचा और गाली-गलौच करने लगा। पास खड़े पड़ोसियों ने विवाद को शांत कराने की कोशिश की। इसी बीच अचानक आरक्षक साकेत तिवारी ने वकील पर हमला कर दिया। पड़ोसी वकील को बचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन आरक्षक लगातार हमला करता रहा, जिससे उनके चेहरे पर चोट आई। घटना के बाद अधिवक्ता पंकज शर्मा सिविल लाइन थाने पहुंचे और टीआई को वीडियो फुटेज के जरिए सिपाही साकेत तिवारी की करतूत बताई, लेकिन पुलिस ने इस पर ध्यान नहीं दिया। पीड़ित का कहना था कि कार्रवाई करने के बजाय उल्टा उस पर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा था। वकील बोले- 3 घंटे तक थाने में बैठे रहे अधिवक्ता पंकज शर्मा का कहना था कि बहुत ही मामूली बात पर वर्दी का रौब दिखाते हुए पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी ने उनके साथ मारपीट की। साकेत पड़ोस में प्रकाश सराठे के घर किराए से रहते हैं। वकील पंकज शर्मा का आरोप है कि वे रात में तीन घंटे तक थाने में बैठे रहे, लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने FIR दर्ज नहीं की, बल्कि उस पुलिसकर्मी को भी वहां से अलग कर दिया, जो रिपोर्ट दर्ज करता है, ताकि वह शिकायत न लिख सके। पंकज शर्मा ने घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंपे, जिसमें विवाद होता दिख रहा है। मारपीट की जानकारी मिलते ही साथी अधिवक्ता सिविल लाइन थाने पहुंच गए। सीएसपी और टीआई ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए जांच की बात कही। लगातार शिकायतें कीं, कार्रवाई नहीं हुई अधिवक्ता पंकज शर्मा का कहना है कि पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी के खिलाफ लगातार शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में 23 अप्रैल को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस पर 29 अप्रैल को सुनवाई होनी है। पीड़ित को नहीं दी जानकारी याचिकाकर्ता पंकज शर्मा के वकील धर्मेंद्र सोनी का कहना है कि साकेत तिवारी के खिलाफ जल्दबाजी में जो एफआईआर दर्ज की गई है, उसमें कई खामियां हैं, जिन्हें सुनवाई के दौरान कोर्ट को अवगत कराया जाएगा। उनका कहना है कि जब एफआईआर दर्ज की जा रही थी, तब आवेदक को न तो इसकी जानकारी दी गई और न ही उनके हस्ताक्षर लिए गए। जहां पंकज शर्मा के हस्ताक्षर होना थे, वहां किसी और के हस्ताक्षर कर दिए गए। धर्मेंद्र सोनी ने बताया कि एफआईआर की कंडिका 7 में आरोपी साकेत तिवारी का नाम होना था, वहां उसके अलावा एक और नाम शैलेंद्र सिंह मार्को का भी लिखा है। वह सिविल लाइन थाने में एएसआई के पद पर पदस्थ हैं और उनका इस केस से कोई ताल्लुक नहीं है। अधिवक्ता ने बताया कि जानबूझकर एफआईआर इस तरह लिखी गई है, ताकि बाद में उस पर सवाल खड़े हो सकें।

दिनदहाड़े अपहरण और फिरौती, बारां की कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल

बारां बारां में ग्लास व्यापारी के अपहरण के मामले में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने प्रशासन को फटकार लगाई है. उन्होंने पुलिस एसपी से बात कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए. पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मामले में चिंता जाहिर करते हुए पुलिस प्रशासन को चेताया. प्रकरण शहर के ग्लास व्यापारी सतीश गौड़ के अपहरण से जुड़ा है. व्यापारी को अगवा कर फिरौती की डिमांड की गई थी. इस मामले ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं, व्यापारियों में भी गुस्सा देखने को मिल रहा है. व्यापारी को बंधक बनाकर खेत में रखा जानकारी के अनुसार, व्यापारी सतीश गौड़ को दिनदहाड़े कार में अगवा कर खेत में बंधक बनाकर रखा गया. बदमाशों ने बंदूक की नोक पर मारपीट की और उनका वीडियो बनाकर पहले 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी. बाद में आरोपियों ने 6 लाख रुपये नकद और 8 लाख रुपये के चेक लेकर व्यापारी को छोड़ दिया. मामले के सामने आने के बाद व्यापारियों में भारी आक्रोश है. सांसद दुष्यंत सिंह ने भी लिया संज्ञान घटना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सांसद दुष्यंत सिंह ने संज्ञान लिया है. दोनों नेताओं ने एसपी अभिषेक अंदासु से बात कर जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. राजे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अपराधियों के खिलाफ किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी. पुलिस ने भी मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है.

राजभवन से लेकर जिलों तक बदली जिम्मेदारी, गोपाल मीणा बने नए सचिव

पटना बिहार सरकार ने रविवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा के चार वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया है। इस फेरबदल में राजभवन से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों की जिम्मेदारी बदली गई है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव राज्यपाल के सचिवालय में हुआ है, जहाँ प्रधान सचिव के पद पर नई तैनाती की गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। राजभवन में चोंग्यू की विदाई बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के तहत 1997 बैच के आईएएस अधिकारी और राज्यपाल के प्रधान सचिव रॉबर्ट एल. चोंग्यू को राजभवन से स्थानांतरित कर दिया गया है। अब उनको अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रधान सचिव की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह 2007 बैच के आईएएस अधिकारी गोपाल मीणा को राज्यपाल का नया सचिव नियुक्त किया गया है। गोपाल मीणा इससे पहले राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में सचिव के पद पर तैनात थे। आईएएस अधिकारी गोपाल मीणा, राजभवन की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ सामान्य प्रशासन विभाग के जांच आयुक्त के अतिरिक्त प्रभार में भी  रहेंगे।  मो. सोहैल बने सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में सचिव के पद पर तैनात 2007 बैच के आईएएस अधिकारी मो. सोहैल का भी तबादला कर दिया गया है। उन्हें अब  सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव पद पर तैनात किया गया है। गोपाल मीणा की तरह मो. सोहैल भी जांच आयुक्त के अपने अतिरिक्त प्रभार को पूर्ववत संभालते रहेंगे। यह खबर भी पढ़ें-Bihar: मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद पहली बार JDU दफ्तर में नीतीश, कैबिनेट विस्तार पर डिप्टी सीएम ने क्या कहा? लखीसराय को मिले नए डीएम सरकार ने जिला स्तर पर भी बदलाव करते हुए 2013 बैच के आईएएस अधिकारी शैलेन्द्र कुमार को लखीसराय का नया समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी बनाया गया है। वह अब तक कृषि विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थे।  

भारत के Sujit Kalkal ने रचा इतिहास, वर्ल्ड नंबर-1 बनकर ओलंपिक की राह की मजबूत दावेदारी

चरखी दादरी. जिले के गांव इमलोटा निवासी पहलवान सुजीत कलकल लगातार सफलता के नए अध्याय लिखते जा रहे हैं। वे एक के बाद एक सफलता हासिल कर देश के लिए मेडल हासिल कर रहे हैं। उनके इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग की नई रैंकिंग में वे टॉप पर पहुंचे है और दुनिया के नंबर वन पहलवान बन गए हैं। खेल प्रेमियों में उनकी इस उपलब्धि से खुशी का माहौल है। उन्होंने इसे जिला दादरी व देश-प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया। उल्लेखनीय है कि भारतीय युवा पहलवान सुजीत कलकल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए वर्ल्ड रेसलिंग रैंकिंग में नंबर-वन स्थान हासिल कर देश का नाम रोशन किया है। 65 किलोग्राम भारवर्ग में खेलते हुए सुजीत कलकल ने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर बड़े नामी पहलवानों को मैट पर पछाड़ते हुए अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप सहित बड़ी प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल हासिल किए। नंबर वन पहलवान बने सुजीत उसी का परिणाम है, जिसने उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पहलवानों की सूची में सबसे ऊपर पहुंचा दिया। उनकी इस खेल उपलब्धि पर खेल प्रेमियों और कुश्ती जगत से जुड़े लोगों ने खुशी जाहिर की है। कोचों और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सुजीत इसी तरह प्रदर्शन करते रहे, तो आने वाले दिनों में देश की झोली में अनेक गोल्ड मेडल डालने का काम करेंगे। सुजीत कलकल का नंबर-वन बनना न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह भारतीय कुश्ती के बढ़ते स्तर और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी मजबूती का भी प्रतीक है। उनकी इस उपलब्धि से देशभर के युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और वे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होंगे। लगातार जीत चुके हैं 6 गोल्ड मेडल: कोच सुजीत कलकल के पिता एवं कोच दयानंद कलकल ने बताया कि सुजीत शानदार लय में चल रहे हैं। उन्होंने बीते करीब एक साल के दौरान जिस भी इंटरनेशनल चैंपियनशिप में शिरकत की है उसमें गोल्ड मेडल हासिल किया है। उन्होंने बताया कि डबल लेग होल्ड, फीतले बांधना व भारंदाज उनके प्रमुख दांव-पेंज हैं। जिनके दम पर वे लगातार जीत हासिल करते हुए लगातार छह गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। उन्होंने बताया कि 2025 में सीनियर वर्ल्ड रैंकिंग में दो बार गोल्ड मेडल, अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड, वर्ल्ड सीनियर रैंकिंग चैंपियनशिप में दो गोल्ड और अब सीनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड सहित लगातार छह गोल्ड मेडल हासिल किए हैं। उम्मीद है कि वे जीत के इस सफर को जारी रखेंगे और अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए मेडल हासिल कर देश, प्रदेश व दादरी जिले का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने कहा कि सुजीत ने अपने खेल प्रदर्शन से साबित कर दिया है कि वे ओलिंपिक में मेडल जीतने का मादा रखते हैं। देश को सुजीत से बड़ी उम्मीदें: योगेश जिला कुश्ती संघ के सचिव योगेश इमलोटा ने कहा कि सुजीत कलकल ने जिस प्रकार का प्रदर्शन किया है उससे देश के खेल प्रेमियों को इस युवा पहलवान से बड़ी उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि वे लगातार जीत हासिल कर जिस लय में आगे बढ़ रहे हैं उसको देखकर कहा जा सकता है कि ओलिंपिक का पदक अब उनसे दूर नहीं हैं। उन्होंने जिला कुश्ती संघ की ओर से सुजीत को नंबर वन रैंकिंग हासिल करने पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि यह देश, प्रदेश व जिले के लिए गर्व की बात है।

संघर्ष से सफलता तक,झारखंड की दिव्यानी बनीं रांची की पहली महिला फुटबॉल स्टार

रांची झारखंड के रांची जिले की प्रतिभाशाली फुटबॉल खिलाड़ी दिव्यानी लिंडा ने अपने संघर्ष, समर्पण और मेहनत के दम पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. ये रांची की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं, जिन्हें AFC U-17 Women’s Asian Cup में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है. इस वर्ष झारखंड से एक साथ 4 खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जो राज्य के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है. संघर्ष से सफलता तक का सफर दिव्यानी लिंडा चंद्र पंचायत के चंदरा गांव की निवासी हैं. सीमित संसाधनों, खेल मैदान की कमी और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया. कठिन परिस्थितियों में भी उनका आत्मविश्वास और मेहनत उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा, जिसका परिणाम आज पूरे देश के सामने है. स्टार वॉरियर्स से बनी पहचान दिव्यानी Star Warriors Football Club, कांके ब्लॉक में संचालित क्लब की प्रमुख खिलाड़ी हैं. उनकी इस उपलब्धि से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरा कांके क्षेत्र और क्लब गौरवान्वित हुआ है. कोच अनवरूल हक उर्फ बबलू का अहम योगदान दिव्यानी की सफलता के पीछे उनके कोच अनवरूल हक (बबलू) का विशेष योगदान रहा है, जो क्लब के संस्थापक भी हैं. उन्होंने दिव्यानी की प्रतिभा को पहचान कर उसे निखारा और हर कठिन समय में मार्गदर्शन दिया. झारखंड का गौरव दिव्यानी लिंडा झारखंड की दूसरी खिलाड़ी बन चुकी हैं, जिन्हें इतने बड़े एशियाई स्तर के टूर्नामेंट में खेलने का अवसर मिला है. वहीं, रांची की पहली खिलाड़ी बनकर उन्होंने एक नया इतिहास स्थापित किया है. प्रेरणा की मिसाल दिव्यानी की सफलता हर उस युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखता है. बधाई और शुभकामनाएं इस उपलब्धि पर स्टार वॉरियर्स फुटबॉल क्लब के संरक्षक जगदीश सिंह (जग्गू), कांके उप प्रमुख अजय कुमार बैठा, कोषाध्यक्ष सह पंचायत समिति सदस्य रेशमी तिर्की और देवेंद्र स्वामी प्रकाश, छोटू टोप्पो, सुरेन्द्र उरांव, डॉ. शहनवाज कुरैशी, समंदर लाल, रामेंद्र कुमार, राणा मिश्रा, नुरुल हक, एकरामुल अंसारी सहित अन्य सदस्यों ने दिव्यानी को बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं.

बलबीर सिंह सीचेवाल का बड़ा खुलासा, ‘आप छोड़ने वाले सांसदों ने मुझे भी बुलाया था, पर मैंने मना कर दिया’

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने रविवार को बड़ा दावा करते हुए कहा कि पार्टी छोड़ने वाले सांसदों ने उन्हें भी अपने साथ आने का न्यौता दिया था लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया। सीचेवाल ने कहा कि राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने उन्हें फोन कर आजाद समूह में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था।  सीचेवाल ने सात सांसदों के एक साथ पार्टी छोड़ने पर दुख जताते हुए इसे आम आदमी पार्टी के साथ बेवफाई करार दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इन नेताओं को राज्यसभा में भेजकर पंजाब के मुद्दे उठाने का मौका दिया लेकिन अब उन्होंने अचानक पार्टी छोड़ दी।  राघव चड्ढा और संदीप पाठक के फैसले पर भी उन्होंने हैरानी जताई। कहा कि इन नेताओं ने पंजाब में सत्ता का पूरा आनंद लिया और अब पार्टी को अलविदा कह दिया। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने रविवार को बड़ा दावा करते हुए कहा कि पार्टी छोड़ने वाले सांसदों ने उन्हें भी अपने साथ आने का न्योता दिया था लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया। सीचेवाल ने कहा कि राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने उन्हें फोन कर आजाद समूह में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था।   सीचेवाल ने सात सांसदों के एक साथ पार्टी छोड़ने पर दुख जताते हुए इसे आम आदमी पार्टी के साथ बेवफाई करार दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इन नेताओं को राज्यसभा में भेजकर पंजाब के मुद्दे उठाने का मौका दिया लेकिन अब उन्होंने अचानक पार्टी छोड़ दी।  राघव चड्ढा और संदीप पाठक के फैसले पर भी उन्होंने हैरानी जताई। कहा कि इन नेताओं ने पंजाब में सत्ता का पूरा आनंद लिया और अब पार्टी को अलविदा कह दिया। हमने पंजाब के साथ कोई गद्दारी नहीं की, दस गुना ज्यादा कम करेंगे : साहनी आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद विक्रमजीत साहनी ने आप के आरोपों पर कहा कि हम गद्दार नहीं हैं। हम 10 गुना ज्यादा काम करेंगे। वर्ष 2022 पंजाब विधानसभा चुनाव में सांसद राघव चड्ढा और संदीप पाठक का अहम रोल था लेकिन पिछले कुछ समय से उन्हें साइड लाइन कर दिया गया। राघव चड्ढा और पाठक को साइडलाइन करने से बढ़ा असंतोष सांसद साहनी ने एक टीवी चैनल पर इंटरव्यू के दौरान कहा कि आप के दिल्ली चुनाव हारने के बाद नई टीम ने मोर्चा संभाल लिया। चड्ढा को संसद में उपनेता के पद से हटाने के बाद रोष बढ़ गया। दोनों प्रमुख नेताओं को नजरअंदाज करना गलती थी। बाकी सांसदों में भी इसे लेकर असंतोष था। साहनी ने कहा कि वह इसे लेकर आप प्रमुख केजरीवाल से भी मिले थे। केजरीवाल ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए बोल दिया था।   साहनी ने कहा कि वे इस्तीफा देने लगे थे लेकिन अपने करीबियों के साथ विचार विमर्श के बाद ही इस्तीफा न देने का फैसला लिया और इस दौरान सहमति बनी कि भाजपा ही पंजाब का भला कर सकती है। इसके बाद ही पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा पंजाब को जो मिलना चाहिए था वो सही समन्वय के कारण मिल नहीं पा रहा है।   पिछले चार साल से चुनावी मोड ही चल रहा है और राज्य और केंद्र सरकार दोनों एक दूसरे को कोस रहे रहे हैं। युवा पीढ़ी खेती नहीं करना चाहती है तो ऐसे हालात में पंजाब का क्या हो सकता है, क्योंकि केंद्र सरकार पंजाब के लिए बहुत कुछ करना चाहती है।   साहनी ने कहा कि फ्रेट सब्सिडी देने के लिए केंद्र तैयार है लेकिन आंकड़ों के साथ प्रस्ताव तो देना ही होगा। चुनाव के बारे में अभी कुछ नहीं कहना चाहता हूं, क्योंकि पंजाब के लोग समझदार हैं और 2027 विधानसभा चुनाव में उचित फैसला लेंगे।  

बिजली कटौती पर सरकार सख्त, मंत्री Arora ने गिनाए संकट के कारण और दिया राहत का भरोसा

चंडीगढ़. पंजाब में अचानक बढ़ी गर्मी ने बिजली व्यवस्था पर सीधा असर डाला है। भीषण लू और तापमान में लगातार बढ़ोतरी के कारण बिजली की मांग में तेजी से उछाल दर्ज किया गया है। विभाग के अनुसार इस तरह की मांग पहले कभी अप्रैल महीने में देखने को नहीं मिली, जिससे पूरे तंत्र पर दबाव बढ़ गया है।  बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने बताया कि पहले से तय कार्यक्रम के तहत मरम्मत कार्य चल रहे थे। इसी वजह से कई स्थानों पर नियोजित बिजली कट लगाए गए, जिससे उपभोक्ताओं को कटौती अधिक महसूस हुई। 17 अप्रैल के बाद पैदा हुई स्थिति का यही सबसे बड़ा कारण है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ऐसे नियोजित कट चार घंटे से ज्यादा नहीं होंगे और व्यवस्था को सामान्य रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। खेती के मौसम ने भी बिजली की मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस समय फसलों की कटाई के साथ-साथ आलू और टमाटर जैसी फसलों की खेती के लिए लगातार बिजली की जरूरत रहती है। किसानों को तय समय पर बिजली उपलब्ध कराना जरूरी होने के कारण ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव बन गया है। हालात पर विभाग रख रहा नजर विभाग के अनुसार राज्य में करीब छह हजार करोड़ रुपये की लागत से प्रसारण और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने का काम चल रहा है। लेकिन अचानक बढ़ी मांग के कारण इस काम की गति भी प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद अधिकारियों का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। राहत के तौर पर उद्योगों को रात के समय खुले प्रावधान के तहत सीधे बिजली खरीदने की अनुमति दी गई है, ताकि दिन के समय ग्रिड पर लोड कम किया जा सके और आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। अनावश्यक बिजली उपकरणों के इस्तेमाल से बचें विभाग का दावा है कि राज्य में जरूरत के अनुसार बिजली उपलब्ध कराई जा रही है और प्रदेश अभी भी बिजली के मामले में आत्मनिर्भर स्थिति में है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी तैयारियां पहले से थीं, लेकिन अप्रैल में इतनी अधिक मांग अप्रत्याशित रही। उपभोक्ताओं से भी अपील की गई है कि वे अधिक खपत वाले समय में अनावश्यक बिजली उपकरणों का इस्तेमाल न करें, ताकि सभी को सुचारु रूप से बिजली मिल सके। बिजली की अधिकतम मांग में 12% की बढ़ोतरी अप्रैल की शुरुआत में: बिजली का इस्तेमाल पिछले साल के मुकाबले 7% से 21% तक कम था। पिछले 10 दिनों में: भारी गर्मी की वजह से बिजली के इस्तेमाल और इसकी डिमांड में जबरदस्त उछाल आया है। बड़ी छलांग: अधिकतम मांग 15 अप्रैल को लगभग 7900 MW थी, जो 25 अप्रैल तक बढ़कर 12000 MW के पार पहुंच गई है। स्थिति को सुधारने के लिए उठाए गए कदम बिजली कटौती का समय तय: लोगों को परेशानी न हो, इसलिए बिजली कटौती को ज्यादा से ज्यादा 4 घंटे तक ही सीमित रखा गया है। दूसरे राज्यों से बिजली का लेनदेन: दूसरे राज्यों के साथ 1500-2000 MW बिजली के लिए बातचीत आखिरी दौर में है; ये समझौते जल्द ही पूरे कर लिए जाएंगे। हाइड्रो पावर प्लांट फिर से शुरू: 2025 की बाढ़ में सरकारी हाइड्रो यूनिट्स को नुकसान पहुँचा था। मरम्मत का काम 10 मई तक पूरा हो जाएगा, जिससे ग्रिड में 300 MW बिजली और जुड़ जाएगी। अतिरिक्त बिजली की खरीदारी: ग्रिड के लिए लगभग 1500 MW एक्स्ट्रा बिजली अलग-अलग राज्यों और प्राइवेट कंपनियों से खरीदी जा रही है। केंद्र सरकार से मदद: गर्मियों के पीक महीनों में राहत देने के लिए पंजाब केंद्र सरकार के कोटे से लगभग 2000 MW बिजली लेने की तैयारी कर रहा है। शॉर्ट-टर्म टेंडर: बाजार में कम समय वाले टेंडर निकाले गए हैं ताकि बिना किसी देरी के तुरंत फालतू बिजली खरीदी जा सके। चार्ज में छूट: अगले 2 महीनों के लिए शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक 'व्हीलिंग चार्ज' और 'क्रॉस सब्सिडी' में छूट दी गई है।

भीषण गर्मी में ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत: भरतपुर के कई गाँवों में खराब हैंडपंप हुए दुरुस्त

भीषण गर्मी में ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत: भरतपुर के कई गाँवों में खराब हैंडपंप हुए दुरुस्त मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में पड़ रही भीषण गर्मी और गहराते जल संकट के बीच लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) ने पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए कमर कस ली है। प्रशासन की सक्रियता से ग्रामीण क्षेत्रों में बंद पड़े हैंडपंपों को युद्ध स्तर पर सुधारा जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। इन गाँवों में हुआ त्वरित सुधार विभागीय टीम ने हाल ही में विकासखंड भरतपुर के ग्राम पंचायत घाघरा, बेला और लरकोडा का दौरा किया। यहाँ लंबे समय से खराब और बंद पड़े हैंडपंपों का न केवल निरीक्षण किया गया, बल्कि मौके पर ही उनकी मरम्मत कर उन्हें दोबारा चालू किया गया। प्राथमिकता पर पेयजल आपूर्ति भीषण गर्मी की तीव्रता को देखते हुए प्रशासन ने खराब हैंडपंपों को प्राथमिकता के आधार पर सुधारने के निर्देश दिए है। (PHE) विभाग की इस मुस्तैदी से ग्रामीणों को अब स्वच्छ पेयजल के लिए दूर नहीं भटकना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की इस संवेदनशीलता और तत्परता की सराहना की है। जिलेभर में अभियान जारी प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जिले के अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी हैंडपंप सुधार का कार्य निरंतर प्रगति पर है। विभाग का लक्ष्य है कि इस भीषण तपिश में किसी भी ग्रामीण को पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े।

ज्ञान भारतम् अभियान: एमसीबी जिले में पांडुलिपि सर्वे शुरू, 1850 की दुर्लभ हस्तलिखित धरोहर का डिजिटलीकरण

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले में प्राचीन पांडुलिपियों (हस्तलिखित ग्रंथों) के संरक्षण हेतु व्यापक सर्वे अभियान प्रारंभ कर दिया गया है। इस पहल के तहत तीन मास्टर ट्रेनर एवं 137 सर्वेक्षकों की नियुक्ति कर सभी ग्राम पंचायतों में सर्वे कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने जिला स्तरीय समिति का गठन करते हुए सभी सर्वेक्षकों की ऑनलाइन बैठक ली। उन्होंने अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सर्वे के दौरान कम से कम 60–70 वर्ष या उससे अधिक प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों की पहचान की जाएगी। ऐसे ग्रंथ पुस्तकालयों, मंदिरों एवं निजी संग्रहों में विशेष रूप से मिल सकते हैं, खासकर उन परिवारों में जहां पीढ़ियों से पुरानी धरोहरें सुरक्षित रखी गई हैं। इसी क्रम में चिरमिरी निवासी व्याख्याता प्रदीप कुमार बेहरा के निवास पर विशेष पहल की गई। यहां ज्ञान भारतम् अभियान के जिला नोडल अधिकारी डॉ. विनोद पांडेय, चिरमिरी नगर निगम के महापौर रामनरेश राय एवं रितेश श्रीवास्तव की उपस्थिति में लगभग वर्ष 1850 की उड़िया भाषा की 6 दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया गया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने श्री बेहरा के द्वारा संरक्षित इस अमूल्य विरासत की सराहना की। महापौर ने आम नागरिकों से अपील की कि वे अपने पास उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों की जानकारी देकर इस अभियान में सक्रिय सहयोग करें। वहीं कलेक्टर ने भी पांडुलिपि संरक्षण के लिए श्री बेहरा को बधाई देते हुए इसे सांस्कृतिक धरोहर बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।