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संस्थान का अजीब फरमान: ट्रेनिंग के दौरान शादी पर लगी रोक

गोपालगंज बिहार में गोपालगंज के हथुआ में स्थित जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि ट्रेनिंग के दौरान कोई भी छात्रा शादी नहीं कर सकती. यदि कोई छात्रा इस नियम का उल्लंघन करती है, तो उसका नामांकन रद्द कर दिया जाएगा।  यह आदेश कॉलेज परिसर में नोटिस के रूप में चस्पा किया गया था, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वायरल होते ही इस फरमान को लेकर लोगों में नाराजगी फैल गई और इसे छात्राओं की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया जाने लगा।  संस्थान की प्राचार्या मानसी सिंह ने इस आदेश को लेकर सफाई भी दी है. उनका कहना है कि नर्सिंग की पढ़ाई पूरी तरह आवासीय होती है, जहां छात्राएं संस्थान की निगरानी में रहकर प्रशिक्षण लेती हैं।  ऐसे में यदि छात्राएं शादी कर लेती हैं, तो उनकी पढ़ाई और प्रशिक्षण प्रभावित हो सकता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि यह नियम कोई नया नहीं है, बल्कि विभागीय दिशा-निर्देशों के तहत पहले से ही लागू है. नामांकन के समय ही छात्राओं से एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कराए जाते हैं, जिसमें यह शर्त शामिल होती है कि वे प्रशिक्षण के तीन वर्षों के दौरान शादी नहीं करेंगी।  हालांकि, यह तर्क लोगों को रास नहीं आया और मामला तूल पकड़ता चला गया. सोशल मीडिया पर इस आदेश को ‘अजीबोगरीब’ बताते हुए आलोचना की जा रही है. कई लोगों ने इसे छात्राओं के व्यक्तिगत जीवन और अधिकारों में दखल बताया है।  मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन ने भी संज्ञान लिया है. गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने कहा है कि वायरल नोटिस की जांच के आदेश दे दिए गए हैं. उन्होंने हथुआ एसडीएम को 24 घंटे के भीतर जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. डीएम ने साफ किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।  इधर, स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी इस मामले में सख्त रुख अपनाया गया है. गोपालगंज के सिविल सर्जन डॉ. बीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी मिलने के बाद तुरंत जांच कराई गई. जांच के बाद प्राचार्य द्वारा जारी आदेश को रद्द कर दिया गया है. साथ ही प्राचार्य से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है. उन्होंने कहा कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  सवाल उठ रहे हैं कि क्या किसी छात्रा के निजी जीवन से जुड़े ऐसे फैसलों पर संस्थान रोक लगा सकता है? क्या इस तरह के नियम संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हैं? फिलहाल प्रशासन जांच में जुटा है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। 

अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के लिए राज्य सरकार ने शुरू किया ऑनलाइन प्रशिक्षण

अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने राज्य सरकार ने उठाये कदम, दिया ऑनलाइन प्रशिक्षण विशेषज्ञों ने संबद्ध अधिकारियों को दिया ऑनलाइन प्रशिक्षण भोपाल आगामी अक्षय तृतीया 20 अप्रैल के अवसर पर होने वाले बाल विवाहों की संभावनाओं को पूरी तरह से रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। विभाग द्वारा 'बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006' के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये प्रदेश भर के नामित बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के लिए एक दिवसीय विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम, शुक्रवार को संचालनालय महिला बाल विकास भोपाल में हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करना और सूचना मिलते ही वैधानिक प्रक्रियाओं को गति देना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की किशोर न्याय समिति के वरिष्ठ सलाहकार एवं अधिवक्ता श्री गुरमुख सिंह लाम्बा तथा यूनिसेफ, मध्यप्रदेश के बाल संरक्षण अधिकारी श्री गोविंद बेनीवाल उपस्थित रहे। विषय विशेषज्ञों ने बाल विवाह प्रतिषेध कानून की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए अधिकारियों को संविधान प्रदत्त उनकी शक्तियों और कर्तव्यों का बोध कराया। वरिष्ठ सलाहकार श्री लाम्बा ने कानूनी प्रावधानों के तहत त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया, वहीं श्री बेनीवाल ने सामाजिक दृष्टिकोण और प्रशासनिक तालमेल के महत्व को रेखांकित किया। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को विस्तृत रूप से बताया गया कि बाल विवाह की सूचना प्राप्त होते ही किस प्रकार निषेधाज्ञा जारी करवाई जाए और यदि विवाह संपन्न हो चुका हो, तो उसे शून्य घोषित कराने की विधिक प्रक्रिया क्या होनी चाहिए। विशेषज्ञों ने पुलिस और जिला प्रशासन के साथ मिलकर की जाने वाली त्वरित कार्रवाइयों और जिला मजिस्ट्रेट द्वारा की जाने वाली विभिन्न वैधानिक प्रक्रियाओं के बारे में भी ओरिएंटेशन किया। प्रशिक्षण में अधिकारियों ने फील्ड में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों और चुनौतियों को साझा किया, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान करते हुए मार्गदर्शन प्रदान किया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अक्षय तृतीया के दौरान निगरानी तंत्र को अत्यंत संवेदनशील और सक्रिय रखा जाएगा जिससे किसी भी मासूम का भविष्य असुरक्षित न हो। इस महत्वपूर्ण ऑनलाइन प्रशिक्षण में विभाग के राज्य और जिला कार्यालयों के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से प्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया।  

डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग में मुख्यमंत्री ने क्रिएटर्स को दी नई पहचान दिखाने की चुनौती

डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग में मुख्यमंत्री का आह्वान: क्रिएटर्स दिखाएं बदलते छत्तीसगढ़ की नई पहचान रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग में देशभर से आए कंटेंट क्रिएटर्स का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल एक राज्य नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और प्रकृति का संगम है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह भूमि भगवान श्रीराम के ननिहाल और माता कौशल्या के मायके के रूप में जानी जाती है। वनवास के 14 वर्षों में से अधिकांश समय भगवान श्रीराम ने यहीं व्यतीत किया, जिसके प्रमाण आज भी प्रदेश के विभिन्न स्थलों पर मिलते हैं। उन्होंने माता शबरी की भक्ति, दंडकारण्य और अबूझमाड़ जैसे ऐतिहासिक-आध्यात्मिक स्थलों का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ की गौरवशाली विरासत को रेखांकित किया। उन्होंने संत गुरु घासीदास जी के “मनखे-मनखे एक समान” के संदेश को याद करते हुए कहा कि सत्य और अहिंसा की यह परंपरा आज भी प्रदेश की आत्मा में समाहित है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कभी नक्सलवाद से प्रभावित रहा छत्तीसगढ़ आज तेजी से बदल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस के परिणामस्वरूप प्रदेश अब नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में निर्णायक सफलता हासिल कर चुका है। उन्होंने बताया कि पहले जहां प्रदेश का बड़ा हिस्सा नक्सल प्रभावित था, वहीं अब विकास की मुख्यधारा गांव-गांव तक पहुंच रही है। मुख्यमंत्री ने बस्तर संभाग को प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की अपार संभावनाओं से परिपूर्ण बताते हुए कहा कि यहां के जलप्रपात, घने वन, संस्कृति और जनजातीय जीवन देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यूनेस्को द्वारा बस्तर के धुड़मारास गांव को विश्व के 20 सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों में शामिल किया जाना प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे अपने प्रभाव का उपयोग करते हुए बस्तर और छत्तीसगढ़ की सकारात्मक छवि देश-दुनिया तक पहुंचाएं। मुख्यमंत्री साय ने उदाहरण देते हुए बताया कि बस्तर के दिव्यांग बालक मड्डा राम का वीडियो वायरल होने पर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर द्वारा उन्हें क्रिकेट किट भेजी गई—यह सोशल मीडिया की ताकत का प्रमाण है। प्रदेश में विकास कार्यों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि नई औद्योगिक नीति के तहत पिछले दो वर्षों में 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। साथ ही, “छत्तीसगढ़ विजन 2047” के माध्यम से राज्य को विकसित बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए संचालित योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “नियद नेल्ला नार योजना” के माध्यम से सड़क, बिजली, पानी, राशन, वनाधिकार पट्टा और दूरसंचार जैसी मूलभूत सुविधाएं सुदूर गांवों तक पहुंचाई गई हैं। बस्तर ओलंपिक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। डिजिटल युग पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया विजन का प्रभाव आज गांव-गांव में दिखाई दे रहा है, जहां आम नागरिक भी डिजिटल भुगतान कर रहा है। उन्होंने क्रिएटर्स से इस परिवर्तन को और आगे बढ़ाने का आह्वान किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी के उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि नक्सलवाद की छाया से बाहर निकलकर उभरता नया छत्तीसगढ़ आज देश के सामने एक सकारात्मक और प्रेरक उदाहरण के रूप में स्थापित हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र को कभी केवल संघर्ष और चुनौतियों के संदर्भ में देखा जाता था, वही आज विकास, शांति और संभावनाओं की नई कहानी लिख रहा है। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स से अपील करते हुए कहा कि वे पूर्वाग्रहों से परे जाकर छत्तीसगढ़ को समझें और यहां हो रहे वास्तविक परिवर्तन, जनजीवन में आए सकारात्मक बदलाव, सांस्कृतिक समृद्धि और विकास की नई गति को अपने मंचों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि आज डिजिटल माध्यम केवल अभिव्यक्ति का साधन नहीं, बल्कि धारणा निर्माण की सबसे प्रभावशाली शक्ति बन चुका है, ऐसे में क्रिएटर्स की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे सच्चाई और सकारात्मकता पर आधारित कंटेंट प्रस्तुत कर समाज में नई सोच और विश्वास का संचार करें। इस अवसर पर विधायक किरण सिंह देव, मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, डॉ. गुरु पासवान, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव एवं जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बंगाली नववर्ष मिलन समारोह में लिया भाग

बंगाली नववर्ष मिलन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय प्रदेश के विकास में बंगाली समाज की अहम भूमिका – मुख्यमंत्री साय रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  मुख्यमंत्री निवास में आयोजित बंगाली समाज के नववर्ष मिलन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने समाज के सभी लोगों को बंगाली नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में बंगाली समाज का सदैव महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विशेष रूप से मत्स्य पालन एवं उन्नत कृषि के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में बंगाली समाज की बड़ी भूमिका रही है। साथ ही, स्वास्थ्य सेवाओं में भी समाज के लोग उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पश्चिम बंगाल की भूमि सदैव महान विभूतियों की जन्मस्थली रही है, जहां रविंद्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जैसे महापुरुषों ने जन्म लिया। उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद अपने युवाकाल में लंबे समय तक रायपुर में रहे। उनके निवास स्थल को सरकार विरासत के रूप में संरक्षित कर रही है तथा राजधानी का विमानतल उनके सम्मान में स्वामी विवेकानंद विमानतल के नाम से जाना जाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में बंगाली समाज की अहम भूमिका रहेगी।  उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी इस अवसर पर बंगाली नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बंगाल का इतिहास अत्यंत समृद्ध रहा है। उन्होंने रामकृष्ण परमहंस, मेघनाद साहा, स्वामी विवेकानंद और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसी महान विभूतियों का स्मरण करते हुए इस विरासत को सहेजने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में विधायक किरण सिंह देव ने भी समाज के प्रतिनिधियों को नववर्ष की बधाई दी। इस अवसर पर अखिलेश सोनी, प्रबल प्रताप जूदेव, पूर्व न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी, प्रवीण सेन, विवेक वर्धन सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

राजस्थान में ‘बहू-बेटी’ का फर्क खत्म, नौकरी पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

जयपुर राजस्थान में अब अनुकंपा नियुक्ति को लेकर 'बहू और बेटी' के बीच का कानूनी फर्क खत्म हो गया है. हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक आदेश में स्पष्ट कर दिया कि ससुर की मौत के बाद उनकी बहू भी उतनी ही हकदार है, जितनी एक बेटी होती है. जस्टिस रवि चिरानियां की एकल पीठ ने सुंदरी देवी की याचिका पर फैसला सुनाते हुए विभाग की उन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया, जो बहू को परिवार का हिस्सा मानने से कतरा रही थीं. कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग की सुस्ती और आपत्तियों पर सख्त नाराजगी जताते हुए साफ कहा कि बहू को नौकरी से रोकना कानून की मूल भावना के खिलाफ है. डिवीजन बेंच के फैसले का दिया हवाला सुनवाई के समय अदालत ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली को आइना दिखाया. कोर्ट ने याद दिलाया कि साल 2023 में ही डिवीजन बेंच यह तय कर चुकी है कि बहू को बेटी के समान ही माना जाए. जब कानूनी रूप से बहू अनुकंपा नियुक्ति के लिए पूरी तरह योग्य है, तो विभाग का तकनीकी अड़ंगे लगाना समझ से परे है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब न्यायपालिका पहले ही इस मुद्दे पर स्थिति साफ कर चुकी है, तो प्रशासन को इसमें नई आपत्ति करने का कोई अधिकार नहीं है. बेटे की बीमारी और मौत ने बढ़ाई मुश्किलें इस मामले के पीछे एक परिवार के संघर्ष की लंबी कहानी है. याचिकाकर्ता के वकील आरसी गौतम ने कोर्ट को बताया कि सुंदरी देवी के ससुर सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) में तैनात थे और 19 नवंबर 2016 को ड्यूटी के दौरान ही उनकी मौत हो गई. उस समय मृतक के इकलौते बेटे यानी सुंदरी के पति एक गंभीर हादसे का शिकार होकर बिस्तर पर थे. ऐसे में बहू ने ही परिवार को संभालने के लिए अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन किया, जिसे विभाग ने ठंडे बस्ते में डाल दिया. इस बीच 25 मई 2020 को सुंदरी के पति का भी निधन हो गया, जिससे पूरे परिवार के गुजर-बसर का संकट खड़ा हो गया. 30 दिन की नियुक्ति पत्र सौंपने के आदेश हाईकोर्ट ने सुंदरी देवी के हक में फैसला देते हुए पीडब्ल्यूडी विभाग को अल्टीमेटम दिया है. अदालत ने कहा कि विभाग बिना किसी बहानेबाजी के अगले 30 दिनों में याचिकाकर्ता को नियुक्ति पत्र सौंपे. कोर्ट ने कड़ी हिदायत दी है कि अब किसी भी तरह की तकनीकी अड़चन नहीं आनी चाहिए और प्रक्रिया में एक दिन की भी देरी बर्दाश्त नहीं होगी. 45 दिन में पेश करनी होगी रिपोर्ट अदालत ने इस मामले में सीधे अधिकारियों की जवाबदेही तय की है. कोर्ट ने आदेश दिया कि 45 दिनों के भीतर इस फैसले पर अमल की रिपोर्ट (Compliance Report) पेश की जाए. जस्टिस चिरानियां ने सख्त चेतावनी दी कि यदि आदेश लागू करने में लापरवाही हुई, तो जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी. इस फैसले ने उन हजारों महिलाओं के लिए उम्मीद जगाई है जो ससुराल में रहकर पूरे परिवार का सहारा बनी हुई हैं.

सफलता की मिसाल: ड्रोन के साथ हौसलों को नई उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा

सफलता की कहानी: ड्रोन के साथ अपने हौसलों को उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा आर्थिक तंगी से उभरकर आत्मनिर्भर बनीं और आजीविका मिशन से मिली पहचान भोपाल सरकार द्वारा संचालित आजीविका मिशन ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इस मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से महिलाएं अब अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। रायसेन जिले के सांची विकासखण्ड के ग्राम रतनपुर गिरधारी निवासी श्रीमती सरूपी मीणा आजीविका मिशन से जुड़कर आज आर्थिक रूप में ना सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत भी हैं। श्रीमती सरूपी मीणा द्वारा सांची में रूरल मार्ट का संचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने ड्रोन दीदी के नाम से भी अपनी अलग पहचान बनाई है। आर्थिक तंगी से उभरकर आत्मनिर्भर बनीं सरूपी मीणा श्रीमती सरूपी मीणा ने बताया कि वे 10वीं तक शिक्षित थीं। उनके पति कृषि कार्य करते थे, जिससे बड़ी मुश्किल से परिवार का भरण-पोषण हो पाता था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपनी आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सकीं, जबकि उनकी इच्छा पढ़ाई जारी रखने की थी। कुछ वर्ष पहले आजीविका मिशन के कर्मचारियों ने गांव में भ्रमण कर महिलाओं को स्व-सहायता समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उस समय सरूपी मीणा बेरोजगार थीं और आगे बढ़ने के अवसर तलाश रही थीं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत शुरू की और समूह से ऋण लेकर अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू की। साथ ही, उन्होंने समूह निर्माण और सर्वे कार्य सीआरपी (कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) के रूप में काम करना शुरू किया, जिससे उन्हें मानदेय मिलने लगा। समूह से प्राप्त ऋण और मानदेय के सहयोग से उन्होंने एक किराना दुकान प्रारंभ की। इसके अलावा, उन्हें बैंक सखी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला, जिससे उनके समूह का सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) भी स्वीकृत हुआ। इन सभी कार्यों से उनकी मासिक आय 4 से 5 हजार रुपये तक पहुंच गई। बाद में उन्होंने सीएससी सेंटर का संचालन भी शुरू किया, जिससे उनकी आय में और वृद्धि हुई। निरंतर मेहनत और लगन के चलते श्रीमती सरूपी मीणा ने अपनी शिक्षा जारी रखते हुए स्नातक तक की पढ़ाई पूर्ण कर ली। आजीविका मिशन से मिली पहचान, ड्रोन तकनीक से बढ़ी आय श्रीमती सरूपी मीणा की लगन और मेहनत के कारण उन्हें सांची में रूरल मार्ट का संचालन करने का अवसर मिला। वह रूरल मार्ट में दीदी समूहों के उत्पादों का विक्रय एवं अन्य सामग्री का विक्रय करने का कार्य करती है। इसके अतिरिक्त श्रीमती सरूपी मीणा को वर्ष 2023-24 में नमो ड्रोन योजना का भी लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि नमो ड्रोन योजना में चयनित होने के बाद उन्हें ग्वालियर में ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद उन्हें निःशुल्क ड्रोन दिया गया। कम्पनी से आए इंजीनियर ने भी उन्हें ड्रोन चलाने का पूरा प्रशिक्षण दिया। जिसके बाद वह खेतों में ड्रोन से कीटनाशकों का छिड़काव करने लगी। इस प्रकार उन्हें प्रतिवर्ष लगभग तीन लाख रू की आमदनी हो जाती है। श्रीमती सरूपी मीणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देते हुए कहती हैं कि आजीविका मिशन महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ ही समाज में उनका मान-सम्मान भी बढ़ा है।  

गुना में मंत्री विश्वास कैलाश सारंग का भव्य स्वागत: ऐतिहासिक पहल

गुना में मंत्री विश्वास कैलाश सारंग का भव्य स्वागत: ऐतिहासिक पहल गुना आज गुना अल्पप्रवास पर पधारे मध्यप्रदेश शासन के खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग जी का गुना बायपास पर भव्य एवं ऐतिहासिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता श्री विश्वनाथ सिंह सिकरवार के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने गर्मजोशी के साथ उनका अभिनंदन किया। मंत्री  सारंग जी के आगमन पर कार्यकर्ताओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों, पुष्प वर्षा एवं जयकारों के साथ उनका स्वागत किया गया, जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय हो गया। इस स्वागत कार्यक्रम में प्रमुख रूप से  मनीष कृष्णानी, शेरा राजावत, देवकीनंदन सोनी, सरदार रंजीत सिंह, सतेंद्र सिकरवार, मुनेश धाकड़, विकास राठौर, अमित जाट, जगदीश नामदेव, भूपेंद्र सोलंकी, रोहन सेन, प्रदीप कुशवाह सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान  सारंग जी ने सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का यह स्नेह और समर्थन उन्हें प्रदेश के विकास के लिए और अधिक समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देता है।

गंगा एक्सप्रेसवे से मेरठ से प्रयागराज 6 घंटे में, PM मोदी इस दिन कर सकते हैं उद्घाटन

मेरठ  गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से मेरठ से प्रयागराज तक का सफर करने की सोच रहे हैं, तो मेरठवासियों का यह सपना इसी महीने पूरा होने होनी की संभावना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर आम जनता के लिए इसे सौंप दिया जाए, जिसको लेकर अब अंतिम तैयारी का दौर शुरू हो गया है. ऐसे में लोकल 18 टीम की ओर से भी मेरठ के बिजौली मार्ग पर गंगा एक्सप्रेस पर ग्राउंड रिपोर्ट का जायजा लिया।  गंगा एक्सप्रेसवे की खासियत की बात की जाए, तो मेरठ से प्रयागराज जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि वर्तमान समय में मेरठ से प्रयागराज जाने मे लगभग 12 घंटे का समय लग जाता है, जिस कारण उन्हें काफी दिक्कत का सामना भी करना पड़ता है. ऐसे में गंगा एक्सप्रेसवे की शुरुआत होने के बाद मात्र 6 से 7 घंटे में ही प्रयागराज तक की दूरी को तय कर सकते हैं।  इन जिलों से होकर गुजरेगा हाइवे आधुनिक सुविधाओं के माध्यम से इस हाइवे को तैयार किया गया है, जहां आधुनिक स्पीड के माध्यम से सफर करते हुए यात्री प्रयागराज तक पहुंच पाएंगे. खास बात यह है कि सिर्फ प्रयागराज ही नहीं, बल्कि इसके माध्यम से अन्य जनपदों की दूरी भी कम होगी. इस नेशनल हाइवे के माध्यम से लगभग 12 जिले जुड़ते हुए नजर आएंगे. इसमें मेरठ से शुरू होकर हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ से होते हुए प्रयागराज तक पहुंचेंगे।  औद्योगिक क्रांति को भी मिलेगी उड़ान उन्होंने बताया कि इस हाइवे के माध्यम से सिर्फ वाहन चालक ही नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र को भी एक नई उड़ान मिलेगी. गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे ही औद्योगिक क्षेत्र भी डेवलप किया जाएगा, जिसको लेकर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं. इससे आने वाले समय में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे ही विभिन्न ऐसी इकाइयों को स्थापित किया जाए, जिसके माध्यम से युवाओं को भी रोजगार मिल सके।  6 से 7 घंटे में पहुचेंगे प्रयागराज बताते चलें कि मेरठवासी इसके शुभारंभ का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि अभी उन्हें प्रयागराज जाने के लिए नौचंदी ट्रेन या फिर बस का ही सहारा लेना पड़ता है, जिसमें लगभग 12 घंटे से अधिक का समय लगता है. वहीं अगर अपनी गाड़ी से भी जाते हैं, तो उसमें भी काफी समय लग जाता है, लेकिन 594 किलोमीटर के इस गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से सफर को मात्र 6 से 7 घंटे में ही पूरा कर पाएंगे।  दरअसल मेरठवासी इस बात का स्वागत भी कर रहे हैं. मेरठ के रहने वाले हिमांशु कहते हैं कि उन्हें प्रयागराज जाने के लिए अभी अन्य माध्यमों का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन अब वह अपनी गाड़ी से भी जब इसका शुभारंभ हो जाएगा, तो सफर करेगे. इसी तरीके से स्टूडेंट सुजीत ने बताया कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में जाने के लिए कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होती है, लेकिन अब राहत मिलेगी। 

यूपी में कैबिनेट और बीजेपी संगठन में बदलाव की तैयारी, योगी की टीम में होंगे बड़े बदलाव

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने संगठन से लेकर सरकार तक में बड़े फेरबदल की तैयारी कर ली है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के बाद यूपी के राजनीतिक  कॉरिडोर में योगी के मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज हो गई है।  बिहार के सियासी इतिहास में पहली बार बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनने के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी संगठन और मंत्रिमंडल विस्तार कीप्लानिंग कर ली गई है. गुरुवार को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महमंत्री धर्मपाल सिंह ने पहले राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी एल संतोष के साथ बैठक की और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ मुलाकात की।   पंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह की दिल्ली में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के साथ मुलाकात को उत्तर प्रदेश में सियासी बदलावों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है. इस बार कैबिनेट विस्तार में कई मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है तो कुछ नए चेहरों को भी मौका दिया जा सकता है. ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ की पसंदीदा नेताओं की लॉटरी लग सकती है?  यूपी में होने जा रहा कैबिनेट विस्तार उत्तर प्रदेश में कैबिनिट विस्तार को लेकर काफी समय से कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन पिछले एक हफ्ते में यूपी बीजेपी की ओर से एक बड़ी एक्सरसाइज देखने को मिली है. पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह का बीजेपी के टॉप लीडरशिप के साथ गुरुवार को हुई बैठक में यूपी में बड़े सांगठनिक बदलाव के साथ-साथ मंत्रिमंडल विस्तार पर यह चर्चा हुई है।  यूपी में माना जा रहा है कि जल्द ही संगठन के नए स्वरूप के साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार भी हो जाएगा. बीजेपी अपने प्रमुख कार्यकर्ताओं और नेताओं को निगम आयोग और बोर्ड में समायोजन करना चाहती है ताकि मंत्रिमंडल विस्तार के पहले सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संतुष्ट किया जा सके. पिछले दिनों यूपी के कई नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत में मनोनीत सदस्य बनाए गए हैं, जिनके शपथ ग्रहण भी करा दिए गए हैं।  मंत्रियों की खंगाली जा रही कुंडली यूपी में अब मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी कयास तेज हो गए हैं. माना जा रहा है कि योगी मंत्रिमंडल में दर्जन भर फेर बदल हो सकता है. योगी सरकार के कई मंत्रियों के चार साल के कामकाज की सियासी कुंडली खंगाली गई है, जिसमें मंत्री के काम काज का भी आकलन किया गया है. ऐसे में कई पुराने मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह पर नए चेहरों को मंत्री बनाया जाए सकता है।  योगी की पसंद का रखा जाएगा ख्याल माना जा रहा है कि बीजेपी शीर्ष नेतृत्व को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मंत्रिमंडल विस्तार में अपनी पसंद और नापसंद से अवगत करा दिया है. इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पसंद के चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है. यूपी में अभी  6 मंत्रियों की जगह खाली है जबकि आधे दर्जन लोगों को बदला जा सकता है. इस तरह करीब एक दर्जन मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिसके जरिए बीजेपी 2027 के सियासी समीकरण को साधने का दांव चल सकती है।  UP में एक महीने से हो रही एक्सरसाइज उत्तर प्रदेश में बीजेपी 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगातर इतिहास रचना चाहती है. इसके लिए पिछले एक महीने में उत्तर प्रदेश बीजेपी में मंथन के लिए कई बैठकें हो चुकी हैं. संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुख्यमंत्री और दोनों मुख्यमंत्री की मुलाकात के अलावा विनोद तावड़े चार दिन पहले लखनऊ आकर सभी भाजपा के पूर्व अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर चुके हैं।  विनोद तावड़े की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात हो चुकी है. यही नहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भी कई बैठके हो चुकी है.दिल्ली में बैठे प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री की शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात को अब आखिरी दौर की चर्चा चल रही है. ऐसे में यूपी में यह बदलाव कभी भी हो सकते हैं।  क्षेत्रीय और जातीय बैलेंस बनाने का प्लान संगठन में रहे कुछ अन्य मजबूत चेहरों को भी योगी कैबिनेट में जगह मिल सकती है. कुछ राज्यमंत्रियों का कद बढ़ाकर स्वतंत्र प्रभार का दर्जा दिया जा सकता है. बोर्ड और निगमों में भी कई चेहरों का समायोजन हो सकता है. माना जा रहा है कि पश्चिम की भागीदारी बढ़ सकती है, क्योंकि पूरब से ही मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष हैं।  यूपी में ब्राह्मण समुदाय की नाराजगी को देखते हुए, उन्हें सत्ता और संगठन में मौका दिया जा सकता है. ऐसे में ये हो सकता है कि कुछ ब्राह्मण चेहरों को भी सरकार स संगठन तक जगह दी जाए. 2027 के यूपी चुनाव को देखते हुए भी सरकार से संगठन तक बदलाव में सामाजिक समीकरणों और जातीय गणित साधने की रणनीति भी देखने को मिल सकती है।  सत्ता और संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली कैबिनेट में फिलहाल अभी 54 मंत्री हैं जबकि अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं. इस तरह योगी सरकार में 6 मंत्री के पद खाली है. 2027 के विधानसभा चुनाव के देखते हुए पार्टी योगी कैबिनेट विस्तार कर सियासी समीकरण को साधने की कवायद करना चाहती है।    योगी कैबिनेट विस्तार के जरिए बीजेपी यूपी में अपने सियासी समीकरण को साधने का दांव चल सकती है. 2024 के लोकसभा चुनाव में बिगड़े जातीय समीकरण को दुरुस्त करने के लिए बीजेपी ने संगठन की कमान ओबीसी की कुर्मी जाति से आने वाले केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को सौंपी. अब उन्हें यूपी में अपनी टीम गठित करनी है. ऐसे में 2027 के लिहाज से टीम बनानी है ताकि सत्ता की हैट्रिक लग गए। 

जनगणना में गलत नाम भरने पर नहीं मिलेगा सुधार का मौका, सावधानी से भरें फार्म

भोपाल  जनगणना 2027 के तहत गुरुवार से स्वगणना का पोर्टल एसईडॉटसेंससडॉटजीओवीडॉटइन se.census.gov.in खुल गया है। यहां स्वगणना के प्रति खासा उत्साह रहा, लेकिन ऑनलाइन फार्म में तकनीकी दिक्कतें आने से लोगों को परेशान होते भी देखा गया। तीसरे पेज पर जैसे ही घर की लोकेशन जियो टैगिंग से करने का बॉक्स आया, फार्म अटक गया। यहां दर्ज किए पते के आधार पर खुद ही जियो टैगिंग के लिए मैप खुलता है। इसमें लोग बार- बार सटीक लोकेशन को लेकर प्रयास करते रहे। स्व गणना में नाम भरने में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है अन्यथा गलत नाम ही जुड़ जाएगा। इसमें स्पष्ट बताया जा रहा है कि नाम सुधारने का दूसरा मौका नहीं मिलेगा। लोकेशन को लैटिट्यूड- लॉन्गिट्यूड में बताकर कंफर्म करने का पूछा जा रहा है। इसमें लोग भ्रमित हो रहे हैं। अरेरा कॉलोनी में रहने वाले अवधेश सिंह ने बताया कि आधे से पौन घंटे तक टैगिंग की कोशिश की। लोकेशन में दिक्कत आई। काम पर जाना था, इसलिए फिर नहीं किया। अब शुक्रवार को फिर कोशिश करेंगे। ऐसे समझें जनगणना की टाइम लाइन स्व गणना के लिए 30 अप्रैल 2026 तक पार्टल खुला रहेगा। प्रगणक घर-घर जाकर मकान सूचीकरण का काम 1 मई से शुरु करेंगे। यह कार्य 30 मई 2026 तक होगा। पोर्टल पर राज्य का चयन कर परिवार के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। यहां ऑनलाइन मैप पर घर की जियो टैंगिंग होगी। स्व गणना के तहत ऑनलाइन पोर्टल पर खुद की डिटेल जमा करेंगे तो आखिर में 11 अंकों की एक विशिष्ट स्व गणना पहचान संख्या बनेगी। ये मोबाइल और ई-मेल पर भी प्राप्त होगी। जनगणना के दौरान इसकी जरूरत पड़ेगी। किसी भी व्यक्ति को अपने परिवार की महिला सदस्य का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। फार्म में नाम बिल्कुल सही दर्ज करें, उसे सुधारने का दूसरा मौका नहीं मिलेगा स्व गणना में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसमें स्पष्ट बताया जा रहा है कि फार्म में नाम बिल्कुल सही दर्ज करें, उसे सुधारने का दूसरा मौका नहीं मिलेगा। गलत नाम ही जनगणना में जुड़ जाएगा। सुबह फार्म खुल रहा था, लेकिन दोपहर बाद इसमें बाधा आने लगी। बताया जा रहा है देशभर से लोग इसे ओपन करने की प्रक्रिया करने लगे, जिससे ये अटकता रहा। जिला प्रशासन के संबंधित अफसरों के अनुसार एक बैठक में 20 से 22 मिनट में फार्म भरा जा सकता है। थोड़े धैर्य के साथ काम करेंगे तो दिक्कत नहीं होगी। एक बार लोकेशन को सर्च करने के बाद उसे पुख्ता करने के लिए पूछा जाता है।