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मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज 11 बजे घोषित करेंगे एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं-12वीं के परीक्षा के परिणाम

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को समत्व भवन, भोपाल से एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं, 12वीं एवं विद्यालय पूर्व शिक्षा में डिप्लोमा (डी.पी.एस.ई.) मुख्य परीक्षा 2026 के परीक्षा परिणाम घोषित करेंगे। यह परिणाम 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे जारी किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा विद्यार्थियों की सुविधा के लिए विभिन्न वेबसाइटों पर परिणाम देखने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा छात्र-छात्राएं अपना रिजल्ट मोबाइल ऐप, डिजिलॉकर के माध्यम से भी अपना परीक्षा परिणाम आसानी से देख सकेंगे। विद्यार्थी इन वेबसाइटों पर देख सकेंगे परीक्षा परिणाम https://mpbse.mponline.gov.in https://www.digilocker.gov.in/web/dashboard/issuers https://www.jagranjosh.com https://education.indianexpress.com https://www.fastresult.in https://www.hindustantimes.com/education www.livehindustan.com https://toi.in/mpbseresult_class12 https://toi.in/mpbseresult class10 https://www.tv9hindi.com/education https://www.news9live.com https://www.ndtv.in https://arivihan.com/search-mp-board-result मोबाइल ऐप पर भी देख सकेंगे परिणाम कक्षा 10वीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम विद्यार्थी और अभिभावक मोबाइल पर भी देख सकेंगे। इसके लिए विद्यार्थियों को Google Play Store पर जाकर MPBSE MOBILE App अथवा MP Mobile App Download करना होगा। फिर Know Your Result आप्शन का चयन कर विद्यार्थी को अपना अनुक्रमांक (Roll Number) और आवेदन क्रमांक (Application Number) डालकर (submit) करना होगा। इसके अलावा विद्यार्थी Digilocker के माध्यम से अपना परीक्षा परिणाम देख सकेंगे।  

मंदसौर की महिलाओं ने नारी शक्ति वंदन के तहत महानगरों में बिखेरी मिठास

नारी शक्ति वंदन: मंदसौर की महिलाओं ने घोल दी महानगरों में मिठास ग्राम पिपल्या कराड़िया महाराणा समूह बना स्व-रोजगार की मिसाल आत्मनिर्भरता का रचा मॉडल, दूसरों को भी दिया रोजगार मंदसौर प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी से ग्रामीण आजीविका मिशन सक्रियता से कार्य कर रहा है। मिशन की प्रभावी पहल से मंदसौर जिले के ग्राम पिपल्या कराड़िया की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक कहानी लिखी है। ‘महाराणा स्व-सहायता समूह’ आज न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित कर रहा है। समूह की महिलाएं प्राकृतिक और स्वादिष्ट जूस एवं शेक निर्माण में दक्ष हो चुकी हैं। इनके उत्पादों में लेमन, जीरा, जिंजर लेमन, कच्ची केरी, आंवला जूस के साथ-साथ मिल्क शेक, बादाम शेक, राजभोग और शाही गुलाब शेक शामिल हैं, जो ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत मंदसौर जिले के इस समूह को आगे बढ़ने के लिए वित्तीय सहायता के रूप में 5 लाख का बैंक ऋण, डेढ़ लाख की सामुदायिक निवेश निधि तथा 10 हजार की चक्रीय राशि प्रदान की गई। इस सहयोग ने समूह को अपने व्यवसाय को मजबूती देने और विस्तार करने में महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया। दिल्ली और चंडीगढ़ तक पहुँची उत्पादों की गूंज आजीविका मिशन के मार्गदर्शन और सहयोग से समूह ने स्थानीय स्तर से आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उज्जैन, भोपाल, दिल्ली, नोएडा, सूरत, बड़ौदा, चंडीगढ़ और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों में आयोजित मेलों में सहभागिता कर समूह ने अपने उत्पादों की विशेष पहचान स्थापित की है। ‘महाराणा स्वसहायता समूह’ प्रति माह 25 हजार से 30 हजार की शुद्ध आय अर्जित कर रहा है, जिससे वार्षिक आय लगभग 4 लाख तक पहुंच रही है। यह समूह अपनी 10 महिला सदस्यों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है, वहीं दस अन्य लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी उपलब्ध करा रहा है। ‘महाराणा समूह’ आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरा है, जो यह संदेश देता है कि सही मार्गदर्शन और शासन के सहयोग से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। प्रदेश में इन प्रकल्पों में आगे हैं महिलाएं मध्यप्रदेश में दीदी कैफे संचालन, होम स्टे संचालन, अनेक लघु उद्योगों और व्यवसायों के संचालन के साथ ही टोल टैक्स पर दायित्व निभाकर महिलाएं नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं। लगभग 5 लाख स्व-सहायता समूहों के संचालन में सार्थक भूमिका निभाते हुए 62 लाख से अधिक बहनें आत्मनिर्भर बनी हैं। प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के अभियान को अच्छी सफलता मिली है। जहाँ शहरों की बेटियां पायलट बनकर हवाई जहाज उड़ा रही हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां क्रिकेट सहित विभिन्न खेलों और पर्वतारोहण जैसी साहसिक गतिविधियों में शामिल होकर पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रौशन कर रही हैं।  

इंदौर में बनेगी 30 मंजिला ऊंची बिल्डिंग, शॉपिंग मॉल, होटल-रेस्टोरेंट और स्टार्टअप पार्क की सुविधा

इंदौर  सुपर कॉरिडोर पर करीब 8.2 हेक्टेयर जमीन पर स्टार्टअप पार्क के लिए सरकार ने अनुमति दे दी है। इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) पीपीपी मॉडल पर आइटी कंपनियों व स्टार्टअप के लिए इको सिस्टम तैयार कर रहा है। स्टार्टअप पार्क करीब 90 मीटर ऊंचा, यानी 30-32 मंजिल का होगा। यह प्रदेश की सबसे ऊंची इमारत होगी। इनमें देशभर की बड़ी आइटी व कॉर्पोरेट कंपनियों को जगह दी जाएगी। उन्हें एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं मिलेंगी। स्टार्टअप पार्क से 10 हजार युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है। पिछले दिनों बैठक में नगरीय प्रशसन विभाग के एसीएस संजय दुबे ने इस योजना को मंजूरी दी। 90 मीटर ऊंची विश्वस्तरीय सुविधाओं वाली बिल्डिंग का निर्माण पीपीपी आधार पर आइडीए के सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े ने बताया, पार्क के लिए हाईराइज बिल्डिंग मंजूरी मिली है। 90 मीटर ऊंची विश्वस्तरीय सुविधाओं वाली बिल्डिंग का निर्माण पीपीपी आधार पर होगा। 2 साल में निर्माण का लक्ष्य है। 15 दिन में टेंडर जारी होगा। पहले चरण में शॉपिंग मॉल, रेस्टोरेंट, स्टार्टअप ऑफिस, कॉर्पोरेट ऑफिस, दूसरे चरण में आइटी बिल्डिंग आइडीए की योजना के अनुसार, करीब 1200 करोड़ से सुपर कॉरिडोर पर 8.2 हेक्टेयर जमीन पर स्टार्टअप पार्क बनेगा। अलग अलग फेज में निर्माण होगा। पहले चरण में तल मंजिल पर शॉपिंग मॉल, रेस्टोरेंट, स्टार्टअप ऑफिस, कॉर्पोरेट ऑफिस होंगे। दूसरे चरण में आइटी बिल्डिंग व तीसरे चरण में कन्वेंशन सेंटर तथा 5 स्टार होटल बनाने का प्रस्ताव है। आइडीए ने मूल डिजाइन तैयार की है। इसमें बड़े शहरों की तरह ट्विन बिल्डिंग बनाने की योजना है। हालांकि, पीपीपी मॉडल पर काम होगा। एजेंसी भी अलग डिजाइन भी बना सकती है। लाखों खर्च कर बनाई योजना रद्द, अब नए तरीके से काम आइडीए ने करीब तीन साल पहले स्टार्टअप पार्क की योजना बनाई थी। तब इसे आइडीए ही बनाने की तैयारी में था। जिसे इसकी डिजाइन बनाने का काम दिया, उसने बंगलूरु, हैदराबाद और पुणे आदि बड़े शहरों में आइटी और स्टार्टअप कंपनियों के लिए सुविधाओं का सर्वे कर योजना बनाई। बाद में आइडीए ने पीपीपी मॉडल पर स्टार्टअप बनाने की योजना बनाई। ऐसी सुविधाएं पार्किंग के लिए 3 बेसमेंट। 4 फ़्लोर पर शॉपिंग मॉल, 1 फ़्लोर पर सर्विस। पार्क में देशी-विदेशी 100 से अधिक कंपनियों को मिलेगी जगह। 1000 आइटी प्रोफशनल्स को यहां नौकरी मिलेगी। सभी सुविधाएं विकसित होने पर 10 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार पार्क बनाने वाली कंपनी से प्रीमियम राशि लेकर ऑफिस बेचकर आय का विकल्प दे सकता है आइडीए।

महिलाओं की राजनीतिक सहभागिता और लोकतांत्रिक अधिकारों को नई ऊंचाइयां मिलेंगी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

रवीन्द्र भवन में 15 अप्रैल को होगा राज्य स्तरीय कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों की उत्कृष्ट उपलब्धि प्राप्त महिलाएं होंगी शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में महिलाओं की राजनीतिक सहभागिता और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को नई ऊंचाइयां देने के लिए राज्य सरकार द्वारा ऐतिहासिक पहल की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' की मूल भावना को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से प्रदेश भर में 10 से 25 अप्रैल तक "नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा" मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में 15 अप्रैल को शाम 4 बजे रवीन्द्र भवन में राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम होगा। इस दौरान "महिला नेतृत्व की यात्रा" विषय पर एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जो महिला शक्ति के गौरवशाली इतिहास और भविष्य की संभावनाओं को दर्शाएगी। इस गरिमामयी समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव शामिल होंगे और शासन व्यवस्था में महिलाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करने और नीति-निर्माण की प्रक्रियाओं में उनकी भूमिका को सुदृढ़ करने पर विशेष विमर्श करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस अवसर पर प्रदेश की महिलाओं को संबोधित भी करेंगे और सरकार के उस संकल्प को दोहराएंगे, जिसके तहत मध्यप्रदेश की लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की आवाज और अधिक मुखर होगी। कार्यक्रम में महिला सशक्तीकरण की दिशा में सक्रिय प्रदेश की अग्रणी महिला नेत्रियां शामिल होंगी। समारोह में महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिभा बागरी और श्रीमती राधा सिंह सहित प्रतिष्ठित शिक्षाविद सुशोभा पेठणकर की विशेष रूप से उपस्थिति रहेगी। जमीन से लेकर शिखर तक का प्रतिनिधित्व समारोह में विभिन्न क्षेत्रों की उत्कृष्ट उपलब्धि प्राप्त महिलाओं को आमंत्रित किया गया है। इसमें पद्मसे सम्मानित विभूतियां, महिला चिकित्सक, वकील, कलाकार और इंजीनियर शामिल होंगी। साथ ही, समाज की मुख्यधारा को गति देने वाली लाड़ली बहना, लाड़ली लक्ष्मी, स्व-सहायता समूहों की सदस्य, मैदानी स्तर पर कार्य करने वाली पर्यवेक्षक एवं परियोजना अधिकारी और महिला मीडिया प्रतिनिधि भी इस कार्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनेंगी। गांव-गांव तक फैलेगी चेतना की लहर पखवाड़े के दौरान केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में जन-जागरूकता के अभियान चलाए जा रहे हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाएं आयोजित हो रही हैं। जिनमें 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के महत्व पर ग्रामीण महिलाओं के साथ संवाद हुआ। साथ ही प्रत्येक विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र में 'नारी शक्ति पदयात्रा' और शिक्षण संस्थानों में 'युवा संवाद' जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से युवा पीढ़ी को इस सामाजिक बदलाव से जोड़ा जा रहा है। शासन का मानना है कि महिलाओं की निर्णय क्षमता में वृद्धि होने से न केवल सामाजिक चेतना आएगी, बल्कि जन-विश्वास भी और अधिक गहरा होगा।  

एमपी ने एचपीवी टीकाकरण में दिखाया नेतृत्व, 5 लाख का हुआ वैक्सीनेशन, पश्चिम बंगाल में एक भी किशोरी को नहीं लगी वैक्सीन

 भोपाल  सर्विकल कैंसर से बचाव के लिए ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) रोधी टीकाकरण अभियान में मध्य प्रदेश ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। 28 फरवरी से शुरू हुए विशेष अभियान के तहत 14 से 15 वर्ष की किशोरियों को टीका लगाने का लक्ष्य तय किया गया था। प्रदेश में इस आयुवर्ग की अनुमानित संख्या आठ लाख है, जिनमें से 12 अप्रैल तक पांच लाख 86 हजार यानी 73 प्रतिशत किशोरियों को टीका लगाया जा चुका है। खास बात यह है कि केंद्र द्वारा निर्धारित छह लाख टीकाकरण का लक्ष्य भी प्रदेश ने समय रहते पूरा कर लिया है, जबकि अन्य बड़े राज्य इस मामले में काफी पीछे हैं। देवास टीकाकरण अभियान के तहत 12457 बालिकाओं ने लगवाया टीका जिले में कलेक्टर ऋतुराज सिंह के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। जिले में 10 स्थानों पर यह टीकाकरण किया जा रहा है।  मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ सरोजिनी जेम्स बेक ने बताया कि जिला चिकित्सालय देवास सहित स्वास्थ्य केंद्रों में 14 वर्ष की बेटियों को टीका लगाया जा रहा है। अब तक देवास जिले में अभियान के दौरान 12457 बालिकाओं ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव का टीका लगवाया है।  जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सुनील तिवारी ने बालिकाओं के अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे अपनी किशोरी बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण अवश्य कराएं और उन्हें सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित भविष्य प्रदान करने में सहयोग करें। MP के कई जिलों ने 90% से अधिक लक्ष्य हासिल किया एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान में जिला स्तर पर भी बेहतर प्रगति देखने को मिल रही है। डिंडोरी और राजगढ़ ने 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है, जबकि खंडवा (98.47%) और बालाघाट (96.50%) भी लक्ष्य के बेहद करीब हैं। सागर में 92.86% और खरगोन में 91.11% टीकाकरण दर्ज किया गया है। भोपाल संभाग के रायसेन (89.26%) और नर्मदापुरम (87.82%) में भी अच्छी प्रगति हुई है। कटनी में 83.41% और मुरैना में 82.87% कवरेज दर्ज किया गया है। खास बात यह है कि सागर जिले में एक सप्ताह में 10,537 टीकाकरण कर तेजी दिखाई गई। अन्य राज्यों की स्थिति कमजोर यू-विन पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 10 अप्रैल तक गुजरात में 36 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 34 प्रतिशत, कर्नाटक में 24 प्रतिशत और महाराष्ट्र में मात्र तीन प्रतिशत टीकाकरण हो सका है। वहीं उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य एक प्रतिशत लक्ष्य भी हासिल नहीं कर पाए हैं। इससे स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश ने इस अभियान को गंभीरता से लागू कर बेहतर परिणाम हासिल किए हैं। कई विभागों के समन्वय से मिली गति स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस सफलता के पीछे विभिन्न विभागों की संयुक्त भागीदारी अहम रही। स्कूल शिक्षा विभाग ने जागरूकता अभियान चलाया, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने किशोरियों को टीकाकरण केंद्रों तक पहुंचाने में सहयोग किया, जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग ने अभिभावकों को प्रेरित किया। इसके अलावा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने पीडीएस दुकानों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का काम किया। शुरुआती धीमी गति के बाद इसी समन्वय से अभियान ने रफ्तार पकड़ी। अब नियमित टीकाकरण के रूप में जारी रहेगा अभियान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों का कहना है कि विशेष अभियान को जल्द ही समाप्त कर इसे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके तहत जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, सिविल अस्पतालों और चयनित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में निर्धारित दिनों पर टीका लगाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किशोरियां लाभान्वित हो सकें। टीकाकरण से 70-80 प्रतिशत तक बचाव संभव एम्स भोपाल के पूर्व स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय हलदर के अनुसार, सर्विकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस है। एचपीवी टीका और नियमित पेप्समीयर जांच से इस बीमारी से 70 से 80 प्रतिशत तक बचाव संभव है। वर्तमान में एक डोज का टीका लगाया जा रहा है। निजी अस्पतालों में इसकी कीमत 1900 से 3000 रुपये के बीच है, जबकि शासकीय स्तर पर यह निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। देश के टॉप स्टेट में शामिल है एमपी राज्य स्तर पर एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान का कुल लक्ष्य 8 लाख 3 हजार 684 किशोरियों को टीका लगाने का है। अब तक 2 लाख 8 हजार 873 का टीकाकरण हो चुका है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 25.99 प्रतिशत है। राष्ट्रीय स्तर पर एमपी का प्रदर्शन बेहतर है। टॉप स्टेट्स में प्रदेश शामिल है। हालंकि, शहरी क्षेत्रों के आंकड़े इस प्रदर्शन को कमजोर बना रहे हैं। इन जिलों का प्रदर्शन भी चिंताजनक रिपोर्ट में कई जिले ऐसे भी हैं जहां स्थिति बेहद चिंताजनक है। रीवा (9.59%), धार (7.93%), शिवपुरी (7.88%) और इंदौर (3.96%) जैसे जिलों में टीकाकरण 10 प्रतिशत से भी नीचे है। इन जिलों में जागरूकता की कमी, टीकाकरण को लेकर हिचक और अभियान की कमजोर मॉनिटरिंग को संभावित कारण माना जा रहा है। हर साल सवा लाख महिलाएं आ रहीं चपेट में भारत में हर साल करीब 1.25 लाख महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की चपेट में आती हैं और लगभग 75 हजार महिलाओं की मौत हो जाती है। यह बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है और शुरुआती चरण में अक्सर लक्षण नहीं दिखते। डॉक्टरों का कहना है कि किशोरावस्था में वैक्सीनेशन भविष्य में इस बीमारी से बचाव का सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। ऐसे करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन अभिभावक यू-विन डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए स्लॉट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा सीधे नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर भी संपर्क किया जा सकता है। भोपाल में यह सुविधा 18 केंद्रों पर उपलब्ध है, जिनमें एम्स भोपाल, जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। टीकाकरण के समय उम्र का प्रमाण, मोबाइल नंबर और अभिभावक की सहमति जरूरी होगी।

MP Board Result 2026: 10वीं और 12वीं के नतीजे आज, सीएम मोहन यादव से होगी आधिकारिक घोषणा

भोपाल  माध्यमिक शिक्षा मंडल एमपी बोर्ड की कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों का इंतजार खत्म होने वाला है। जानकारी के अनुसार, छात्रों का रिजल्ट आज यानी 15 अप्रैल को जारी होगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव भोपाल में स्थित सीएम हाउस से 11 बजे परिणाम घोषित करेंगे। छात्र छात्राएं बोर्ड की विभिन्न आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट देख सकते हैं।   प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 10वीं और 12वीं का रिजल्ट एक साथ जारी करेंगे. छात्र अपना रिजल्ट एमपी बोर्ड की बेवसाइट पर भी देख सकेंगे. इसके अलावा मोबाइल ऐप पर भी रिजल्ट को देखा जा सकेगा। मोबाइल ऐप से देख सकेंगे रिजल्ट छात्र अपना रिजल्ट डिजिलॉकर के जरिए भी देख सकेंगे. इसके अलावा छात्र एमपी बोर्ड की मोबाइल ऐप पर जाकर भी रिजल्ट देख सकेंगे. इसके लिए स्टूडेंट्स को गूगल प्ले स्टोर से एमपी बोर्ड का मोबाइल ऐप एमपीबीएसई या फिर एमपी मोबाइल ऐप डाउनलोड करना होगा. इसके बाद 'नो योर रिजल्ट' पर सिलेक्ट कर अपना रोल नंबर और आवेदन क्रमांक डालना होगा. इसे डालते ही रिजल्ट सामने होगा।  16 लाख स्टूडेंट्स बैठे थे परीक्षा में एमपी बोर्ड की परीक्षा में प्रदेश में 16 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया था. इसमें करीबन 9 लाख 7 हजार स्टूडेंट्स कक्षा 10वीं में बैठे थे, जबकि 7 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने 12वीं कक्षा की परीक्षा दी थी. परीक्षा के लिए प्रदेशभर में 3856 एग्जाम सेंटर बनाए गए थे. दोनों ही परीक्षाएं फरवरी माह में शुरू हुई थीं. बारहवीं की 10 फरवरी से 7 मार्च तक परीक्षाएं चली थीं, जबकि कक्षा 10वीं की 13 फरवरी से 6 मार्च तक परीक्षा चली थीं।  मध्यप्रदेश में देर रात बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, 26 IAS के तबादले, भोपाल, सागर सहित 14 जिलों के कलेक्टर बदले रिजल्ट बेहतर आने की उम्मीद इस बार एमपी बोर्ड का रिजल्ट 2025 के मुकाबले 21 दिन पहले जारी होने जा रहा है. 2025 में 6 मई को एमपी बोर्ड का रिजल्ट जारी किया गया था. एमपी बोर्ड का रिजल्ट इस बार पिछले साल के मुकाबले कुछ बेहतर आने के संकेत मिल रहे हैं. हालांकि, बोर्ड के रिजल्ट में उतार-चढ़ावा आता रहा है।  इन विभिन्न आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते है Result     mpbse.nic.in     mpresults.nic.in     mpbse.mponline.gov.in     mpbse मोबाइल ऐप या mpmobile ऐप के जरिए भी रिजल्ट देखा जा सकता है। कैसे चेक करें रिजल्ट?     सबसे पहले एमपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं     होमपेज पर कक्षा 10वीं या 12वीं का रिजल्ट लिंक दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें     अब आपके सामने लॉगिन पेज खुलेगा, जिसमें रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि जैसी जानकारी भरकर लॉगिन करें      इसके बाद आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखेगा      भविष्य के लिए रिजल्ट का प्रिंटआउट जरूर निकाल लें   एमपी बोर्ड का रिजल्ट और पिछले कुछ सालों के आंकड़े     साल 2025 में कक्षा 10वीं का रिजल्ट 76.22 फीसदी और 12वीं का 74.48 फीसदी रहा था.     साल 2024 में कक्षा 10वीं का रिजल्ट 58.10 फीसदी और 12वीं का 64.49 फीसदी रहा था.     साल 2023 में कक्षा 10वीं का रिजल्ट 63.29 फीसदी और 12वीं का 55.28 फीसदी रहा था.

गृह विभाग की नई गाइडलाइन: जनगणना में महिला का नाम बताने के लिए परिवार को नहीं किया जा सकेगा बाध्य

 भोपाल  मध्य प्रदेश में आगामी जनगणना को लेकर गृह विभाग ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इन निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि जनगणना कार्य में लगे कर्मचारी किसी परिवार के सदस्य को महिला का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। जनगणना के दौरान गलत जानकारी देने या कार्य में बाधा डालने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है, तो दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की सजा और आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। दो चरणों में होगी जनगणना राज्य में जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी। पहला चरण एक से 30 मई के बीच होगा, जिसमें मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। दूसरा चरण फरवरी 2027 से शुरू होगा, जिसमें जनसंख्या से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया के लिए गृह विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। कर्मचारियों को दिए गए विशेष अधिकार दिशा-निर्देशों के अनुसार, जनगणना कर्मचारी केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सभी प्रश्न पूछ सकेंगे और नागरिकों का उत्तर देना अनिवार्य होगा। साथ ही, कर्मचारी घर, परिसर या अन्य स्थानों में प्रवेश कर आवश्यक जानकारी एकत्र कर सकेंगे, बशर्ते वह स्थान प्रतिबंधित श्रेणी में न आता हो। जनगणना अधिकारियों को प्रवेश से नहीं रोक सकेंगे नोटिफिकेशन में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जनगणना अधिकारियों को अपने घर, अहाते, जलयान या अन्य स्थानों में प्रवेश करने से नहीं रोक सकेगा। बशर्ते वह स्थान परंपरागत रूप से प्रतिबंधित न हो। साथ ही अधिकारियों को जरूरी आंकड़े दर्ज करने से भी नहीं रोका जा सकेगा। गृह विभाग ने चेतावनी दी है कि अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देता है या जनगणना कार्य में बाधा उत्पन्न करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में एक हजार रुपए तक का जुर्माना है। साथ ही तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। कई विभागों का अमला होगा तैनात जनगणना कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने राजस्व, पुलिस, नगरीय निकाय, पंचायत और शिक्षा विभाग सहित कई विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात करने का फैसला किया है। दस्तावेज जांच और जानकारी लेने के अधिकार अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियुक्त अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में आवश्यक जानकारी एकत्र करने, दस्तावेजों की जांच करने और जनगणना से जुड़े कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए अधिकृत होंगे। जरूरत पड़ने पर वे किसी भी व्यक्ति से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। संबंधित अभिलेखों का निरीक्षण भी कर सकेंगे। जनगणना फॉर्म में 29 कॉलम, केवल SC-ST की डिटेल 2011 तक जनगणना फॉर्म में कुल 29 कॉलम होते थे। इनमें नाम, पता, व्यवसाय, शिक्षा, रोजगार और माइग्रेशन जैसे सवालों के साथ केवल SC और ST कैटेगरी से ताल्लुक रखने को रिकॉर्ड किया जाता था। अब जाति जनगणना के लिए इसमें एक्स्ट्रा कॉलम जोड़े जा सकते हैं। बाधा डालने पर होगी कार्रवाई यदि कोई व्यक्ति जनगणना कार्य में बाधा उत्पन्न करता है या कर्मचारियों को जानकारी एकत्र करने से रोकता है, तो उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में एक हजार रुपये तक का जुर्माना और तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। अभिलेखों की जांच का भी अधिकार कर्मचारियों को संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों का निरीक्षण करने का अधिकार भी दिया गया है, ताकि जनगणना प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पूरा किया जा सके।

100 साल के अधिकतम बाढ़ स्तर के आधार पर फ्लड प्लेन जोन तय करेगा सिंचाई विभाग

 गाजीपुर गंगा की धारा की अविरलता और स्वच्छता बनाए रखने के लिए सिंचाई विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पिछले 100 वर्षों में आई बाढ़ के अधिकतम स्तर का सीमांकन कर नदी के किनारे चेतावनी पिलर लगाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यह है कि लोग बाढ़ क्षेत्र में निर्माण न करें और नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित न हो। यह कार्य नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर किया जा रहा है। एनजीटी ने गंगा के फ्लड प्लेन जोन (एफपीजेड) को चिह्नित करने के लिए 100 वर्षों में बाढ़ के अंतिम पहुंच बिंदु का निर्धारण करने का आदेश दिया था। इसी के तहत सिंचाई विभाग पत्थर के पिलर स्थापित कर रहा है, जिन पर ‘100 वर्ष’, पिलर संख्या और एफपीजेड अंकित किया जा रहा है। वाराणसी से बलिया सीमा तक गंगा के दोनों किनारों पर लगभग एक हजार पिलर लगाए जा रहे हैं। गाजीपुर में दोनों तरफ मिलाकर लगभग 175 किलोमीटर क्षेत्र में यह कार्य किया जा रहा है और इस पर करीब 50 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस पहल से लोगों को बाढ़ क्षेत्र की स्पष्ट जानकारी मिलेगी और अवैध निर्माण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम न केवल बाढ़ के खतरे को कम करेगा, बल्कि गंगा नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को भी संरक्षित करेगा। पिलर लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है और इसे समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्य के माध्यम से स्थानीय निवासियों को बाढ़ के संभावित खतरों के बारे में जागरूक किया जाएगा। पिलर पर अंकित जानकारी से लोग यह समझ सकेंगे कि बाढ़ के समय किन क्षेत्रों में रहना सुरक्षित नहीं है। इससे अवैध निर्माण पर भी अंकुश लगेगा, जो कि नदी के किनारे अव्यवस्थित तरीके से हो रहा है। गंगा नदी भारतीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके संरक्षण के लिए उठाए गए इस कदम को व्यापक रूप से सराहा जा रहा है। स्थानीय प्रशासन ने भी इस पहल का समर्थन किया है और इसे गंगा की स्वच्छता और अविरलता के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। गंगा नदी के किनारे चेतावनी पिलर लगाने का कार्य न केवल बाढ़ प्रबंधन के लिए आवश्यक है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे न केवल नदी की धारा को सुरक्षित रखा जाएगा, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी बाढ़ के खतरों से बचाने में मदद मिलेगी।इस पहल से गंगा नदी के किनारे रहने वाले लोगों को एक नई दिशा मिलेगी, जिससे वे सुरक्षित और संरक्षित रह सकेंगे।

खाखर गांव में छापेमारी, 8.700 किलो गीली अफीम और 370 किलो डोडा जब्त

 चतरा  चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र अंतर्गत रिमी पंचायत के खाखर गांव में पुलिस ने एक बड़ी और सफल कार्रवाई को अंजाम दिया है. एसपी सुमित कुमार अग्रवाल को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव के अमारिक गंझु, मनोज गंझु, सरजू गंझु समेत अन्य तस्कर अपने घरों में भारी मात्रा में मादक पदार्थ छिपाकर रखे हुए हैं और इसे बाहरी व्यापारियों को बेचने की फिराक में हैं. सूचना की गंभीरता को देखते हुए सिमरिया एसडीपीओ शुभम कुमार खंडेलवाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने खाखर गांव में दबिश दी. करोड़ों का माल और अहम दस्तावेज बरामद मंगलवार को समाहरणालय स्थित कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एसपी सुमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि विशेष टीम ने जब आरोपियों के एक-एक घर की तलाशी ली, तो वहां से भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद हुए. छापेमारी में कुल 8.700 किलोग्राम गीली अफीम, 370 किलोग्राम डोडा और 109 किलोग्राम पोस्ता दाना जब्त किया गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी जा रही है. इसके अलावा, पुलिस ने मौके से आरोपियों के आधार कार्ड समेत अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए हैं, जिससे उनकी पहचान पुख्ता हो गई है. तस्कर फरार, गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज हालांकि, पुलिस की आहट पाते ही सभी नामजद आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहे. इस मामले में लावालौंग थाना कांड संख्या 23/26 के तहत एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है. एसपी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं. पुलिस की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से अवैध मादक पदार्थ के कारोबारियों में भारी दहशत का माहौल बना हुआ है. कार्रवाई में शामिल रही बड़ी टीम नशे के खिलाफ इस बड़े अभियान में एनडीपीएस थाना प्रभारी शमी अंसारी, लावालौंग थाना प्रभारी चंदन कुमार, अवर निरीक्षक विधायक प्रसाद यादव सहित जिला पुलिस के कई जवान शामिल थे. चतरा पुलिस की इस उपलब्धि को जिले में नशा मुक्ति अभियान की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है.

भदोही की पप्पू देवी ने मशरूम उत्पादन से खड़ी की 10 लाख सालाना कमाई

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के 'राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन' ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में खुशहाली की नई इबारत लिखनी शुरू कर दी है। पारंपरिक खेती की सीमाओं को तोड़ते हुए अब प्रदेश की महिलाएं उद्यमिता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। इसका सबसे ताज़ा और प्रेरक उदाहरण भदोही जिले की पप्पू देवी ने पेश किया है, जिन्होंने मशरूम उत्पादन को अपनी आय का मुख्य जरिया बनाकर सालाना 8 से 10 लाख रुपये तक की कमाई सुनिश्चित की है। पारंपरिक खेती से अलग चुनी नई राह भदोही जैसे जिले में, जहाँ खेती का अर्थ मुख्य रूप से गेहूं और धान तक सीमित माना जाता था, वहां पप्पू देवी ने अपनी मेहनत और सरकारी योजनाओं के तालमेल से एक नया मॉडल खड़ा किया है। उन्होंने अपनी जमा-पूंजी और 50 हजार रुपये के ऋण के साथ मशरूम उत्पादन का काम शुरू किया। आज उनका यह छोटा सा उद्यम एक सफल मुनाफे वाले व्यवसाय में तब्दील हो चुका है। रोजगार प्रदाता बनीं पप्पू देवी पप्पू देवी की यह सफलता केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने साथ गांव की अन्य स्थानीय महिलाओं को भी जोड़ा है, जिससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। उनके इस मॉडल को देखकर क्षेत्र के अन्य स्वयं सहायता समूह (SHG) भी मशरूम उत्पादन की ओर प्रेरित हो रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा खास बात यह है कि पप्पू देवी की यह सफलता सिर्फ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने तक सीमित नहीं है। वे अब अपने गांव की अन्य स्थानीय महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा रहीं हैं। उनका यह मॉडल स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और ग्रामीण महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गया है। महिला उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई मजबूती पप्पू देवी का मानना है कि अगर महिलाओं को सही ट्रेनिंग और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो वे स्वरोजगार के क्षेत्र में बड़ी सफलता प्राप्त कर सकतीं हैं। योगी सरकार के इस प्रयास से प्रदेश में महिला उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिल रही है।