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योगी सरकार के निर्देश, 24 घंटे में राहत-मुआवजा; घायलों के उपचार में ढिलाई पर रोक

सीएम योगी के सख्त निर्देश, 24 घंटे में मिले मुआवजा, घायलों के इलाज में न हो लापरवाही प्रदेश में आंधी, वर्षा और आकाशीय बिजली से हुई जनहानि को लेकर प्रशासन गंभीर  सभी जिलाधिकारियों को फील्ड में रहकर राहत कार्यों की निगरानी करने के निर्देश  प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव टीमें सक्रिय लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में आंधी, वर्षा और आकाशीय बिजली से हुई जनहानि को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सीएम ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकारियों को घायलों के त्वरित व समुचित इलाज तथा सभी प्रभावितों को 24 घंटे के भीतर राहत राशि उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। साथ ही जिलाधिकारियों को फील्ड में रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार निगरानी करने और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने को कहा गया है। सीएम ने जताई संवेदना, राहत को लेकर दिए सख्त निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आपदा पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि घायलों का समुचित और तत्काल इलाज सुनिश्चित किया जाए। साथ ही जनहानि, पशुहानि और घायलों को 24 घंटे के भीतर अनुमन्य राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अलर्ट जारी, प्रशासन सतर्क मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान भी कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान घरों में ही रहें और खुले स्थानों, पेड़ों तथा बिजली के खंभों से दूर रहें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को फील्ड में रहकर राहत कार्यों की निगरानी करने और आवश्यक संसाधनों के लिए शासन से समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव टीमें लगातार सक्रिय हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

शिक्षकों को मिला सम्मान और सुरक्षा, यूपी की शिक्षा व्यवस्था हुई मजबूत

शिक्षकों को सम्मान-सुरक्षा का संबल, यूपी में अब सशक्त शिक्षा व्यवस्था मानदेय बढ़ोतरी, तकनीकी प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सुविधाओं से शिक्षामित्रों-अनुदेशकों को मिला नया भरोसा लखनऊ प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए योगी सरकार ने शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के सशक्तीकरण पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लिए गए निर्णयों से शिक्षकों को सम्मान, सुरक्षा और संसाधनों का व्यापक संबल मिला है। इसी क्रम में सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि करते हुए क्रमशः ₹18,000 और ₹17,000 प्रतिमाह करने का निर्णय लिया है, जिसे इसी माह से लागू कर दिया गया है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ ही कार्य के प्रति उत्साह भी बढ़ा है।  योगी सरकार ने निपुण भारत मिशन के तहत 1.43 लाख शिक्षामित्रों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण देकर उनकी में भी दक्षता वृद्धि की है। ‘आई गॉट’ प्लेटफॉर्म पर एआई सहित 4,457 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जा रहा है। ‘मानव संपदा पोर्टल’ के जरिए सेवा संबंधी प्रक्रियाएं भी सरल और पारदर्शी हुई हैं। शिक्षकों को आईआईटी, आईआईएम और इसरो जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का एक्सपोजर दिया जा रहा है, जिससे वे आधुनिक शिक्षा पद्धतियों से जुड़ सकें। उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को हर वर्ष राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया जा रहा है। इसके अलावा शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराकर सामाजिक सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप ‘अरुणोदय’ जैसे नवाचारों के जरिए विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता और आधुनिक कौशल विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि सशक्त शिक्षक ही मजबूत शिक्षा व्यवस्था की नींव हैं और इसी के आधार पर समृद्ध व सशक्त उत्तर प्रदेश का निर्माण संभव है।

लखनऊ में जमीन हुई महंगी: अनंत नगर में दरें बढ़ीं, 200 वर्ग मीटर प्लॉट पर 7 लाख से ज्यादा का अतिरिक्त बोझ

लखनऊ राजधानी लखनऊ में अपना फ्लैट लेना और आसान हो गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अपनी अफोर्डेबल हाउसिंग योजना अटल नगर को और अधिक बजट फ्रेंडली बना दिया है। अब लोग यहां 10 वर्ष की आसान किस्तों में फ्लैट ले सकेंगे, वह भी पहले से कम ब्याज दर पर। लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने लोगों की मांग पर इसका आदेश जारी कर दिया। छूट तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि देवपुर पारा स्थित अटल नगर योजना में 12 से लेकर 19 मंजिल के 15 टावरों में कुल 2,496 फ्लैट्स हैं। 30 वर्गमीटर से लेकर 54.95 वर्गमीटर क्षेत्रफल के इन फ्लैटों की कीमत लगभग 9.83 लाख रुपये से शुरू होती है। यहां अधिकांश फ्लैटों का लॉटरी से आवंटन किया जा चुका है। 630 फ्लैटों के लिए 18 अप्रैल से 17 मई, 2026 के मध्य ऑनलाइन पंजीकरण खोला गया है। इसमें 01 बीचके के 539 और 02 बीचके के 91 फ्लैट शामिल हैं। टॉवरों में लगभग 2500 फ्लैट बनाए गए हैं अटलनगर योजना में लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अनंत नगर योजना में जमीन की कीमतें बढ़ा दी हैं। पहले यहां जमीन की कीमत 41150 रुपये प्रति वर्गमीटर थी। जिसे अब बढ़ाकर 44,731 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया है। एक झटके में प्रति वर्ग मीटर की कीमत में 3,581 रुपये का इजाफा किया गया है। 200 वर्ग मीटर प्लॉट पर 7.16 लाख ज्यादा चुकाने होंगे कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर मध्यम वर्ग पर पड़ा है। 200 वर्ग मीटर का भूखंड खरीदने वालों को अब पहले के मुकाबले करीब 7,16,200 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। जिन्हें पहले प्लाट आवंटित हो चुका है, उन्हें पुरानी दर पर ही भूखण्ड मिलेगा। नई बुकिंग कराने वालों का नई दर देनी होगी। व्यावसायिक भूखंड भी हुए महंगे आवासीय के दाम बढ़ने से एलडीए की व्यावसायिक भूखंडों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो गई है। पहले 82,300 रुपये प्रति वर्ग मीटर दर प्रस्तावित थी। लेकिन अब यह बढ़कर 89,462 रुपये हो गयी है। यानी 7,162 का इजाफा हुआ है। छह लेन की सड़क बनेगी लखनऊ। लखनऊ में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सोमवार को योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने अहम प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत आउटर रिंग रोड (किसान पथ) के रैथा अंडरपास से पीएम मित्र पार्क (टेक्सटाइल पार्क) तक 14.280 किलोमीटर लंबाई की छह लेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा आईआईएम लखनऊ से आउटर रिंग रोड रैथा अंडरपास मार्ग को दो लेन चौड़ा किया जाएगा। चौड़ीकरण का काम 8.70 किलोमीटर लंबाई में होगा। लोक निर्माण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक परियोजना की पुनरीक्षित लागत ₹546 करोड़ 51 लाख 83 हजार रुपये आंकी गई है। यह परियोजना पीएम मित्र पार्क को बेहतर कनेक्टिविटी देगी, जिससे औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके अलावा सड़क अवसंरचना में सुधार से यातायात सुगमता बढ़ेगी और आमजन को आवागमन में राहत मिलेगी।

बंगाल में बवंडर, लेकिन असली कमाल सीएम योगी का; स्ट्राइक रेट ने दी झकझोरने वाली जीत

लखनऊ  पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं, जिसमें टीएमसी का सूपड़ा साफ हो गया. बीजेपी की इस कदर आंधी चली है कि खुद ममता बनर्जी अपनी भवानीपुर सीट तक हार गईं. इस बार के चुनाव में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. खुद पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह से लेकर तमाम दिग्गज नेता चुनाव प्रचार के लिए पश्चिम बंगाल पहुंचे हुए थे. हाालंकि सबकी नजर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर टिकी हुई थी कि सीएम योगी ने जहां-जहां चुनाव प्रचार किया, वहां बीजेपी का क्या हाल रहा. बीजेपी ने उन सीटों पर जीत हासिल की है या फिर हार का सामना करना पड़ा. हालांकि जो नतीजे आए हैं, उससे यह जाहिर है कि सीएम योगी का स्ट्राइक रेट बंगाल चुनाव में भी जबरदस्त रहा है. सीएम योगी ने कुल 22 विधानसभा सीटों पर प्रचार किया था, उनमें से 18 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की है।  जानिए किस सीट पर सीएम योगी ने किया चुनाव प्रचार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोनामुखी, नंदकुमार, कांथी दक्षिण, बाराबनी, रामपुरहाट, बोलपुर, माथाभंगा, धुपगुड़ी, जॉयपुर, गारबेटा, जोरासांको, चकदहा, उदयनारायणपुर, नबद्वीप, कटवा, बागदा, धानेखाली और राजारहाट गोपालपुर विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाएं की. इसके अलावा उन्होंने बांकुड़ा, कल्याणी और दमदम में रोड शो किया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए थे।  किन-किन सीटों पर बीजेपी ने हासिल की जीत सोनामुखी में बीजेपी दिबाकर घरामी, नंदकुमार से बीजेपी के खानरा निर्मल, कांथी दक्षिण से अरूप कुमार दास, बाराबनी से बीजेपी के अरजित रॉय, रामपुरहाच से बीजेपी के धुर्वा साहा, माथाभांगा से बीजेपी के निसिथ प्रामाणिक, धुपगुड़ी से बीजेपी के नरेश रॉय, बांकुडा से बीजेपी के नीलाद्री शेखर दाना, पिंगला से बीजेपी के स्वागत मन्ना, जॉयपुर से बीजेपी के बिस्वजीत महतो, जोरासांको से बीजेपी के विजय झा, चकदहा से बीजेपी के बंकिम चंद्र घोष, नबद्वीप से बीजेपी के श्रुति शेखर गोस्वामी, कटवा से बीजेपी के कृष्णा घोष, बागदा से बीजेपी के सोमा ठाकुर, कल्याणी से बीजेपी के अनुपम बिश्वास, दमदम से बीजेपी के अरजित बख्शी, राजारहाट गोपालपुर से तरुण ज्योति तिवारी जीत गए।  कहां हुई हार धानेखली विधानसभा सीट पर टीएमसी उम्मीदवार असिमा पात्रा ने बीजेपी उम्मीदवार को 13057 वोटों से हराया है. वहीं बोलपुर विधानसभा सीट पर टीएमसी के चंद्रनाथ सिन्हा ने बीजेपी के दिलीप घो, को 13188 वोटों से हरा दिया। 

सीएम योगी ने बढ़ाया मुआवजा, यूपी के लोगों को मिलेगा दोगुना फायदा

लखनऊ  यूपी में किसानों के हित से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है. लंबे समय से बिजली की हाईटेंशन लाइनों से प्रभावित किसानों की जो शिकायतें थीं, अब उन पर सरकार ने ठोस कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुआवजा व्यवस्था को पूरी तरह बदलते हुए किसानों को सीधा आर्थिक लाभ देने का फैसला किया गया है।  अब 765, 400, 220 और 132 केवी की हाईटेंशन लाइनों से प्रभावित जमीन पर पहले से कहीं ज्यादा मुआवजा मिलेगा. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि जहां टावर (खंभे) खड़े किए जाते हैं, उस जमीन के लिए किसानों को अब जमीन की कीमत का 200% यानी दोगुना मुआवजा मिलेगा. वहीं, जिन खेतों के ऊपर से बिजली की लाइनें गुजरती हैं, उस हिस्से (राइट ऑफ वे/कॉरिडोर) के लिए 30% मुआवजा दिया जाएगा।  क्यों जरूरी था यह बदलाव दरअसल, बिजली की बड़ी ट्रांसमिशन लाइनों के लिए जमीन की जरूरत पड़ती है. टावर लगाने के साथ-साथ उनके बीच से गुजरने वाली तारों के नीचे भी जमीन का उपयोग सीमित हो जाता है. किसान उस जमीन पर न तो निर्माण कर सकते हैं और न ही कई बार पूरी तरह खेती कर पाते हैं. पहले इस नुकसान के बदले किसानों को या तो बहुत कम मुआवजा मिलता था या कई मामलों में बिल्कुल नहीं मिलता था. यही वजह थी कि कई परियोजनाओं में स्थानीय स्तर पर विरोध भी देखने को मिलता था. ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि सरकार ने इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू की है, ताकि किसानों के साथ न्याय हो और परियोजनाएं भी बिना रुकावट आगे बढ़ सकें।  पहले क्या था नियम, अब क्या बदला अगर पुराने सिस्टम की बात करें, तो 2018 से पहले टावर के नीचे आने वाली जमीन पर अक्सर कोई स्पष्ट मुआवजा तय नहीं था. कई मामलों में किसानों को उचित भुगतान नहीं मिल पाता था. 2018 में इसमें सुधार किया गया और टावर बेस के नीचे जमीन की कीमत का करीब 85% मुआवजा देने का प्रावधान किया गया. लेकिन इसके बावजूद एक बड़ी कमी बनी रही लाइन के नीचे आने वाली जमीन (कॉरिडोर) के लिए कोई मुआवजा नहीं था. अब नई व्यवस्था में दोनों हिस्सों को शामिल किया गया है. टावर के नीचे जमीन का 200% (दोगुना) मुआवजा दिया जाएगा इसी तरह लाइन कॉरिडोर (तारों के नीचे) 30% मुआवजा दिया जाएगा. यानी अब किसान को उसकी जमीन के हर प्रभावित हिस्से का भुगतान मिलेगा।  कैसे तय होगा मुआवजा  मुआवजा तय करने के लिए जिलाधिकारी द्वारा निर्धारित सर्किल रेट को आधार बनाया जाएगा. इसका मतलब है कि हर जिले में जमीन की जो सरकारी दर तय होती है, उसी के अनुसार भुगतान किया जाएगा. इससे मुआवजा प्रक्रिया पारदर्शी और एकसमान बनेगी. साथ ही विवाद की संभावना भी कम होगी. सरकार के मुताबिक, इस नए फैसले से किसानों को पहले के मुकाबले 21% से 33% तक ज्यादा लाभ मिलेगा. अधिकारियों का कहना है कि योगी सरकार के इस फैसले को अगर सरल भाषा में समझा जाए तो जहां पहले कम या कोई मुआवजा नहीं मिलता था, अब वहां सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा. जमीन का उपयोग भले सीमित हो, लेकिन उसका मुआवजा मिलेगा. लंबे समय से चल रही असंतोष की स्थिति खत्म होगी.  यह फैसला खास तौर पर उन किसानों के लिए राहत लेकर आया है, जिनकी जमीन से होकर बड़ी बिजली लाइनें गुजरती हैं।   क्या होगा इसका असर सरकार का मानना है कि इस फैसले का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे बिजली परियोजनाओं को भी गति मिलेगी. पहले जमीन से जुड़े विवादों और विरोध के कारण कई प्रोजेक्ट्स में देरी होती थी. अब जब किसानों को उचित मुआवजा मिलेगा, तो उनकी सहमति भी आसानी से मिलेगी. इससे ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का काम तेजी से पूरा हो सकेगा, जिसका सीधा फायदा बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मिलेगा. ऊर्जा मंत्री ने बताया कि यह नई व्यवस्था भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है. देश के कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह की मुआवजा नीति लागू की जा रही है. उनका कहना है कि यह फैसला एक तरह से दो अहम जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है एक तरफ किसानों के अधिकार और दूसरी तरफ विकास की जरूरत. अक्सर देखा जाता है कि बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन लेने पर विवाद होता है. लेकिन अगर मुआवजा सही और समय पर मिले, तो यह टकराव काफी हद तक कम हो सकता है. उनका कहना है कि सरकार ने इस फैसले के जरिए यही संदेश देने की कोशिश की है कि विकास के साथ-साथ किसान हितों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।  जमीनी असर कब दिखेगा नई मुआवजा व्यवस्था लागू होने के बाद इसका असर धीरे-धीरे जिलों में दिखाई देगा. जहां भी नई ट्रांसमिशन लाइनें बनेंगी या पुराने मामलों का निपटारा होगा, वहां किसानों को इसका फायदा मिलेगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस नीति को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकता है।   

SN मेडिकल कॉलेज में मिल रहा नवजीवन, सी-पैप तकनीक से बच रहे प्री-मैच्योर बच्चे

 लखनऊ/आगरा  उत्तर प्रदेश में बेहतर होती स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अब केवल यूपी के नागरिकों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से अपग्रेड हुई स्वास्थ्य इकाइयों, विशेषकर आगरा के सरोजनी नायडू (एसएन) मेडिकल कॉलेज में राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीमार नवजातों को भी नया जीवन मिल रहा है। अत्याधुनिक सी-पैप मशीनों और अनुभवी डॉक्टरों की टीम के चलते आगरा अब पड़ोसी राज्यों के लिए एक बड़े लाइफ-सेविंग हब के रूप में उभरा है। हर साल 200 बाहरी बच्चों को मिल रहा 'नवजीवन' आगरा का एसएन मेडिकल कॉलेज अपनी उन्नत एसएनसीयू (SNCU) इकाई के माध्यम से हर साल राजस्थान के धौलपुर व भरतपुर और मध्य प्रदेश के भिंड व मुरैना जैसे करीब एक दर्जन जिलों के मरीजों को सेवाएं दे रहा है। कॉलेज के बाल रोग विभाग में भर्ती होने वाले कुल मरीजों में से लगभग 10% (करीब 200 बच्चे) दूसरे राज्यों के होते हैं। यहां डॉक्टरों ने 800 से 1000 ग्राम वजन वाले प्री-मैच्योर बच्चों को भी सुरक्षित बचाकर एक मिसाल पेश की है। सी-पैप तकनीक: नवजातों के लिए वरदान सांस लेने में तकलीफ (Respiratory Distress) नवजात मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है। योगी सरकार ने प्रदेश की 48 एसएनसीयू इकाइयों में उन्नत सी-पैप मशीनें स्थापित की हैं। नोडल अधिकारी प्रो नीरज यादव के अनुसार, "सी-पैप तकनीक वेंटिलेटर की तुलना में अधिक सुरक्षित और किफायती है। इससे बच्चों की फेफड़ों तक ऑक्सीजन सही अनुपात में पहुंचती है और 'कंगारू मदर केयर' भी जल्दी शुरू की जा सकती है। सुमन की कहानी: भरोसे की जीत राजस्थान के धौलपुर की रहने वाली सुमन के छठे दिन के नवजात को सांस लेने में गंभीर समस्या थी। स्थानीय स्तर पर सुधार न होने पर वे सीधे आगरा आए। सुमन बताती हैं, "हमें पता था कि आगरा के मेडिकल कॉलेज में बच्चों को नया जीवन मिलता है। 18 अप्रैल को भर्ती करने के बाद मेरा बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है।" यह भरोसा योगी सरकार के स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती का प्रमाण है। राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस-5) के अनुसार उत्तर प्रदेश में एक हजार में से 28 नवजात की मृत्यु विभिन्न कारणों से हो जाती है। इसको कम करने के लिए प्रदेश में इस वक्त 48 एसएनसीयू सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। एसएनसीयू में स्थापित सी-पैप मशीनें नवजातों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक डॉ. मिलिंद वर्धन प्रदेश में नवजात मृत्यु दर को कम करने में सीपैप को गेम-चेंजिंग उपाय के रूप में देखते हैं। खासकर एसएनसीयू के भीतर, जहां सांस लेने में तकलीफ़ नवजात शिशुओं की मृत्यु का मुख्य कारण बनी हुई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि पहले चरण में 48 एसएनसीयू के लिए 350 डाक्टरों, कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है। दूसरे चरण में बाकी बचे सभी 72 यूनिट में ट्रेनिंग व अन्य कार्य किए जाएंगे।

वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी लक्ष्य पर योगी सरकार का नया दांव, एक्सपर्ट मॉनिटरिंग शुरू

लखनऊ  उत्तर प्रदेश को 'वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' बनाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब जिला स्तर पर 'एक्सपर्ट मॉनिटरिंग' का दांव चला है। कैबिनेट के ताजा फैसले के अनुसार, अब प्रदेश के हर जिले में 'ओटीडी सीएम फेलो' की तैनाती की जाएगी। ये फेलो न केवल विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत परखेंगे, बल्कि डेटा के आधार पर जिले की आर्थिक प्रगति का नया रोडमैप भी तैयार करेंगे। डेटा और विशेषज्ञों से बदलेगी जिलों की तस्वीर इस योजना के तहत प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली OTD सेल को मजबूती देने के लिए दो विशेषज्ञों की नियुक्ति होगी।     आर्थिक विकास फेलो: जो निवेश, पर्यटन और स्थानीय उत्पादों (DDP) को बढ़ावा देने पर केंद्रित रहेंगे।     डेटा विश्लेषक फेलो: जिनका काम विकास योजनाओं की ऑनलाइन रिपोर्टिंग और KPI आधारित सटीक समीक्षा करना होगा। इन विशेषज्ञों के आने से कृषि, उद्योग और रोजगार जैसे क्षेत्रों में सरकारी फाइलों के बजाय वास्तविक आंकड़ों के आधार पर निर्णय लिए जा सकेंगे। नियोजन विभाग के डैशबोर्ड के जरिए होने वाली यह मॉनिटरिंग पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाएगी। आकर्षक मानदेय और चयन की प्रक्रिया योगी सरकार ने इस फेलोशिप के लिए योग्य युवाओं को जोड़ने हेतु मानकों को काफी कड़ा और आकर्षक रखा है।     पारिश्रमिक: चयनित युवाओं को ₹50,000 प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।     सुविधाएं: इसके अलावा लैपटॉप, यात्रा भत्ता और आवासीय सुविधा/भत्ता भी प्रदान किया जाएगा।     योग्यता: 40 वर्ष तक की आयु के परास्नातक युवा इसके पात्र होंगे।     चयन: स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन द्वारा लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर चयन होगा। कैबिनेट के अन्य बड़े फैसले: एक नजर में 1. न्याय प्रणाली का 'डिजिटल अवतार' नई न्याय संहिताओं को लागू करते हुए यूपी सरकार ने तीन नए नियम तय किए हैं। अब मोबाइल डेटा और वीडियो जैसे डिजिटल सबूतों को ई-साक्ष्य प्रबंधन के तहत वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखा जाएगा। साथ ही, अब अदालती समन व्हाट्सएप या ईमेल पर मिल सकेंगे। सबसे बड़ा बदलाव छोटे अपराधों को लेकर है, जहाँ अब अपराधी को जेल भेजने के बजाय सामुदायिक सेवा (जैसे पौधारोपण या गो-सेवा) का विकल्प दिया जाएगा। यह वीडियो भी देखें 2. सरकारी स्कूलों में 'स्किल की पाठशाला' छात्रों को भविष्य की तकनीक से लैस करने के लिए 150 राजकीय विद्यालयों में ड्रीम स्किल लैब्स खोली जाएंगी। टाटा नेल्को के सहयोग से बनने वाली इन लैब्स में छात्रों को रोबोटिक्स और मॉडर्न डिजाइनिंग सिखाई जाएगी, जिससे उन्हें सीधे प्लेसमेंट के अवसर मिलेंगे। 3. नोएडा-यमुना क्षेत्र के लिए 'पावर बूस्ट' औद्योगिक क्रांति को गति देने के लिए यीडा (YEIDA) के सेक्टर-28 में ₹653 करोड़ की लागत से हाईटेक बिजली उपकेंद्र बनाने की मंजूरी दी गई है। यह गैस इंसुलेटेड उपकेंद्र डेटा सेंटर, फिल्म सिटी और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।  

अब डुप्लीकेट वोटिंग पर लगेगी लगाम, AI से होगी मतदाताओं की पहचान

 लखनऊ पंचायत चुनाव की तारीखें भले ही अभी घोषित न हुईं हों लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की तैयारियों में जुटा हुआ है। इस बार के चुनाव में बड़ा तकनीकी बदलाव भी देखने को मिलेगा। फर्जी वोटिंग रोकने व कोई भी मतदाता दोबारा वोट न डाल सकें, इसके लिए आयोग ने ''फेशियल रिकाग्निशन सिस्टम'' (एफआरएस) बनवाया है। इस नई व्यवस्था के तहत मतदान केंद्रों पर वोट डालने आने वाले मतदाताओं के फोटो पहचान पत्र व उनकी फोटो खींची जाएगी। यह फोटो सीधे सर्वर पर अपलोड होगी। अगर कोई भी दोबारा वोट डालने आया तो सिस्टम सतर्क कर देगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त आरपी सिंह ने बताया कि इस तकनीक के लागू होने से किसी भी व्यक्ति द्वारा दूसरे के नाम पर वोट डालने की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी। यदि कोई मतदाता फर्जी तरीके से मतदान करने का प्रयास करता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा और मौके पर मौजूद पीठासीन अधिकारी उसे पकड़ सकेंगे। इसके लिए आयोग एक विशेष मोबाइल एप तैयार करवाया है। पीठासीन अधिकारियों के मोबाइल फोन में यह एप इंस्टाल किया जाएगा, जिसमें मतदाता पहचान पत्र और लाइव फोटो अपलोड कर एआइ से सत्यापन किया जाएगा। चुनाव ड्यूटी के दौरान पीठासीन अधिकारी के फोन पर न तो कोई काल आ सकेगी और न वे इससे कोई काल कर सकेंगे। आयोग पीठासीन अधिकारियों को मोबाइल डाटा के लिए 200 रुपये भी देगा। मतदान के दौरान जैसे ही मतदाता की फोटो ली जाएगी, एप तुरंत एआइ का इस्तेमाल कर जांच करेगा कि वह पहले कहीं और वोट तो नहीं डाल चुके है। इससे डुप्लीकेट वोटिंग पर पूरी तरह अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। इस पायलट प्रोजेक्ट का परीक्षण मंगलवार को शाहजहांपुर की नगर पंचायत कटरा व कुशीनगर की नगर पंचायत फाजिलनगर के अध्यक्ष पद के उपचुनाव में करीब 50 हजार मतदाताओं पर सफलतापूर्वक किया गया। अब इसे पंचायत चुनावों में 2.20 लाख पोलिंग बूथों पर व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी है। वर्तमान में पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने का कार्य चल रहा है। आयोग का दावा है कि इस नई तकनीक से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी, साथ ही फर्जी मतदान पर पूरी तरह लगाम लग सकेगी।

काशी विश्वनाथ धाम बना वैश्विक आस्था केंद्र, योगी सरकार के प्रयासों से बढ़ा पर्यटन

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 'सांस्कृतिक पुनर्जागरण' का असर धरातल पर दिखने लगा है। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा है जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। अकेले मार्च के महीने में लगभग 65 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। यह आंकड़ा न केवल उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन की नई ऊंचाई को दर्शाता है, बल्कि योगी सरकार द्वारा सुधारी गई सुरक्षा और सुगम दर्शन व्यवस्था पर मुहर भी लगाता है। संकरी गलियों से भव्य कॉरिडोर तक का सफर कभी तंग गलियों और भारी भीड़ के बीच घंटों इंतजार के लिए जानी जाने वाली काशी आज अपने नए और दिव्य स्वरूप 'काशी विश्वनाथ धाम' के कारण दुनिया भर के पर्यटकों की पहली पसंद बन गई है। योगी सरकार ने कॉरिडोर के माध्यम से मंदिर का गंगा से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित किया है, जिससे श्रद्धालुओं को अब एक ही परिसर में आध्यात्म और सुकून का अनुभव होता है। व्यवस्थाओं में आए प्रमुख बदलाव     स्मार्ट कतार प्रबंधन: डिजिटल निगरानी और सुव्यवस्थित क्यू (Queue) सिस्टम के कारण अब लाखों की भीड़ होने पर भी दर्शन सहजता से हो रहे हैं।     बुनियादी सुविधाएं: परिसर में आधुनिक पेयजल केंद्र, स्वच्छ शौचालय, विश्रामालय और बुजुर्गों व दिव्यांगों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।     गंगा क्रूज और कनेक्टिविटी: घाटों का सौंदर्यीकरण और गंगा में क्रूज संचालन ने पर्यटकों के लिए काशी दर्शन को और भी रोमांचक बना दिया है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला 'बूस्टर डोज' श्रद्धालुओं की इस रिकॉर्ड संख्या ने वाराणसी की स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है। होटलों की बुकिंग से लेकर हस्तशिल्प, बनारसी साड़ी उद्योग और नाविकों तक, हर क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से काशी आज आस्था और आधुनिकता का वैश्विक केंद्र बन गई है। रोप-वे परियोजना और स्मार्ट सिटी के कार्यों ने काशी की भव्यता में चार चांद लगा दिए हैं। यह वीडियो भी देखें सुरक्षा और स्वच्छता का नया मानक योगी सरकार ने मंदिर के आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से कड़ा किया है, जिससे विदेशी पर्यटक भी खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। साथ ही, 'स्वच्छ भारत मिशन' के तहत घाटों और मंदिर परिसर की नियमित सफाई ने काशी की वैश्विक छवि को निखारा है।  

सिद्धार्थनगर हादसा: तेज आंधी में 32 लाख की टंकी टूटकर हवा में लटकी

 सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के खुनियाव ब्लॉक के रमवापुर विशुनपुर गांव में जल जीवन मिशन योजना के तहत बनाई जा रही एक पेयजल टंकी आंधी के कारण क्षतिग्रस्त हो गई. यह हादसा 5 मई को दोपहर करीब 12 बजे उस समय हुआ जब मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के कर्मचारी टंकी के ऊपरी हिस्से में जिंक एलम मटेरियल की बोल्टिंग कर रहे थे. अचानक आए तेज हवा के दबाव के कारण निर्माणाधीन टॉप रूफ टूटकर नीचे की ओर लटक गया. मौसम विभाग की चेतावनी के चलते मजदूर पहले ही नीचे उतर आए थे, जिससे इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।  32 लाख की लागत से बन रही थी टंकी हैदराबाद की मेघा इंजीनियरिंग कंपनी द्वारा बनाई जा रही इस पेयजल टंकी की कुल लागत 32.41 लाख रुपये बताई जा रही है. डेढ़ लाख लीटर की स्टोरेज क्षमता वाली यह टंकी निर्माणाधीन अवस्था में थी।  कंपनी को जिले में ऐसी करीब 150 टंकियां बनाने का जिम्मा मिला हुआ है. स्थानीय लोगों ने जब टंकी के ऊपरी हिस्से को टूटते देखा, तो गांव में अफरातफरी मच गई, हालांकि मजदूरों की सूझबूझ से एक बड़ा हादसा होने से टल गया।  इंजीनियर ने बताया कैसे हुआ हादसा जल जीवन मिशन के अधिशाषी अभियंता संजय कुमार जायसवाल ने बताया कि टंकी का आरसीसी निर्माण पहले ही पूरा हो चुका था. वर्तमान में कंटेनर में जिंक एलम का काम लेयर दर लेयर चल रहा था. दो लेयर का काम पूरा होने के बाद आज बोल्टिंग की प्रक्रिया जारी थी. करीब 15-16 मीटर की ऊंचाई पर हवा का दबाव इतना अधिक था कि बोल्टिंग पूरी न होने की वजह से ढांचा भार नहीं सह सका. अब इसे दोबारा मानक के अनुसार तैयार कराया जाएगा।  सुरक्षा के मद्देनजर काम रोकने के आदेश घटना की सूचना मिलते ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया. मौसम विभाग द्वारा जारी खराब मौसम के अलर्ट को देखते हुए अधिशाषी अभियंता ने जिले में चल रहे सभी टंकी निर्माण कार्यों को फिलहाल रोकने के आदेश दिए हैं. इंजीनियर जायसवाल के अनुसार, जिले में लगभग 100 ऐसी टंकियां सुरक्षित रूप से पूर्ण हो चुकी हैं, लेकिन निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करना और खराब मौसम में काम न करना अब अनिवार्य कर दिया गया है।