samacharsecretary.com

सीएम योगी की मंशा के अनुरूप उपस्थिति का तैयार होगा रोस्टर, आय- जाति- निवास प्रमाणपत्र व खतौनी आदि के लिए होगा त्वरित निस्तारण

लखनऊ योगी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में आम नागरिकों को राजस्व संबंधी सेवाएं अधिक सुगम और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप अब प्रत्येक जनपद में लेखपालों की ग्राम सचिवालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। इसको लेकर राजस्व परिषद की ओर से सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी किया गया है। पत्र में रोस्टर तैयार कर 1 जुलाई से नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।  ग्रामीणों को नहीं लगाने पड़ेंगे तहसीलों के बार-बार चक्कर  राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लगातार प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवाओं को गांव स्तर तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में प्रत्येक जनपद में लेखपालों की ग्राम सचिवालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों में पहले से स्थापित ग्राम सचिवालयों का उद्देश्य विभिन्न विभागों की सेवाओं को ग्रामीणों तक एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। पंचायतीराज विभाग के पूर्व आदेशों के अनुरूप ग्राम सचिवालयों में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था की गई है। अब इसी व्यवस्था को और प्रभावी बनाते हुए लेखपालों की नियमित उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि राजस्व विभाग से संबंधित कार्यों का त्वरित निस्तारण हो सके। बता दें कि ग्राम सचिवालयों के माध्यम से पंचायत सहायकों द्वारा संचालित ऑनलाइन सेवाओं में राजस्व विभाग की कई महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। इनमें आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, हैसियत प्रमाणपत्र, खतौनी की नकल सहित लगभग दस प्रमुख सेवाएं शामिल हैं। इन सेवाओं के समयबद्ध निस्तारण में लेखपाल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में ग्राम सचिवालय में उनकी नियमित उपलब्धता से ग्रामीणों को तहसील के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता काफी हद तक कम होगी। ग्राम स्तर पर लेखपालों के बैठने के लिए कोई निश्चित व्यवस्था नहीं होने से लोग होते थे परेशान  राजस्व परिषद ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि लेखपाल केवल प्रमाण पत्रों से जुड़े कार्य ही नहीं करते, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की मजबूत कड़ी के रूप में भी कार्य करते हैं। तहसील दिवस, थाना दिवस, वरासत, स्वामित्व योजना, किसान सम्मान निधि, राहत एवं पुनर्वास, आपदा प्रबंधन, भूमि विवादों का निस्तारण, कृषि गणना, जनगणना, फसल गिरदावरी, प्राकृतिक आपदाओं की रिपोर्ट, अवैध कब्जों की जांच, खनन संबंधी सत्यापन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े सत्यापन तथा धान-गेहूं क्रय केंद्रों के सत्यापन जैसे अनेक महत्वपूर्ण दायित्व भी लेखपाल निभाते हैं। इसके अलावा विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन में भी लेखपालों की रिपोर्ट और सत्यापन की आवश्यकता पड़ती है। वहीं ग्राम पंचायत स्तर पर लेखपालों के बैठने के लिए कोई निश्चित व्यवस्था नहीं होने के कारण आम जनता को असुविधा का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों को कई बार लेखपाल से मिलने के लिए तहसील या अन्य स्थानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है। इस समस्या को समाप्त करने के उद्देश्य से अब प्रत्येक जनपद में रोस्टर बनाकर लेखपालों की ग्राम सचिवालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है। 1 जुलाई से लागू होगी व्यवस्था राजस्व परिषद ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे अपने-अपने जनपदों में लेखपालों के बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें और उनकी उपस्थिति का रोस्टर निर्धारित करें। यह व्यवस्था 1 जुलाई से प्रभावी रूप से लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था से ग्राम सचिवालय ग्रामीणों के लिए 'वन स्टॉप सर्विस सेंटर' के रूप में विकसित होंगे। इससे न केवल आमजन को राहत मिलेगी, बल्कि राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली भी अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।

योगी सरकार का बड़ा फैसला, बेरोजगारी भत्ता और रोजगार गारंटी योजना एक जुलाई से शुरू

लखनऊ  यूपी में कल यानी एक जुलाई से रोजगार और काम को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यूपी की योगी कैबिनेट ने काम नहीं तो बेरोजगारी भत्ता देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी दी है। राज्य सरकार यूपी में एक जुलाई से मनरेगा के स्थान पर विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गांरटी मिशन ग्रामीण (वीबी जीरामजी) योजना लागू करने जा रही है। इस योजना की खास बात यह होगी कि पंजीकरण के बाद मजदूरों को 15 दिनों में काम न दिया गया तो उसे 16वें दिन से दैनिक बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। इतना ही नहीं 15 दिनों तक भुगतान न होने की स्थिति में मजदूर को 0.05 प्रतिशत की दर से विलंब मुआवजा भी दिया जाएगा। ग्राम विकास विभाग के इस प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दी गई। कैबिनेट मंजूरी के साथ ही एक जुलाई से यूपी में इस योजना लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। इस योजना में कुल खर्च का 60% केंद्र और 40% राज्य सरकार देगी। योजना ग्रामीण क्षेत्र के मजदूरों को रोजगार देने की गारंटी देगी। योजना को चार श्रेणियों में बांटा गया है। जल संबंधी काम, मूल ग्रामीण अवसंरचना (विकास कार्य), आजीविका देना व मौसम संबंधी घटनाओं व आपदाओं से निपटने के लिए विशेष तैयारी करना है। जिला मध्यवर्ती और ग्राम स्तर की पंचायतें योजना के नियोजन, कार्यान्वयन और निगरानी के लिए प्रमुख प्राधिकरण होंगी। एक साल में 125 दिन का काम ग्रामीण क्षेत्र के अकुशल शारीरिक रूप से काम करने वालों को योजना में एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन का रोजगार दिया जाएगा। मास्टर रोल बंद होने की तारीख से 15 दिनों के अंदर मजदूरी का भुगतान किया जाएगा। ऐसा न होने पर 0.05 प्रतिशत रोजाना के हिसाब से विलंब मुआवजा दिया जाएगा। खेती के लिए व्यस्तम मौसम में 60 दिन आरक्षित रखा जाएगा। इस दौरान वीबी जीरामजी योजना के तहत कोई काम नहीं किया जाएगा। प्रदेश स्तर और जिलों में बनेगी संचालन समिति मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद होगा। मुख्य सचिव या राज्य सरकार द्वारा नामित अपर मुख्य सचिव के पद से अनिम्न स्तर के किसी अधिकारी की अध्यक्षता में संचालन समिति गठित होगी। जिलों में डीएम कार्यक्रम समन्वयक और पंचायत स्तर पर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कार्यक्रम अधिकारी होगा। वह रोजगार की मांग के अवसरों के साथ भुगतान कराने का जिम्मेदार होगा। ग्राम पंचायत का काम व उत्तरदायित्व मुख्यत: परिवारों का पंजीकरण और ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी करना, काम के आवेदन प्राप्त करना और विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करना होगा। मुफ्त मेडिकल और दुर्घटना बीमा का भी लाभ कार्यस्थल पर उपस्थिति बायोमेट्रिक से दर्ज होगी। योजना में काम के दौरान किसी तरह की दुर्घटना होने पर जरूरत के अनुसार मुफ्त उचार मिलेगा। मौत या निशक्त होने पर प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से पैसा दिया जाएगा। सभी कामों के लिए जिला स्तर पर सामग्री की लागत 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। वार्ड, ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर शिकायतें प्राप्त करने के लिए हर सप्ताह कम से कम एक दिन किसी को नामित किया जाएगा। हर श्रमिक को सुनवाई का मौका दिया जाएगा। अधिनियम में किसी भी प्रावधान के उल्लंघन पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा।

पहली बार यूपी पहुंचेंगे नितिन नवीन, संगठन में नई धार और चुनावी रणनीति पर रहेगा फोकस

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में बीजेपी सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए अपने कील-कांटे दुरुस्त करने में जुट गई है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की टीम का गठन हो गया है और वो अपनी ब्रिगेड के साथ सियासी तानाबाना बुनने में जुट गए तो सीएम योगी अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा कर सियासी माहौल बनाने में जुटे हैं. इसी मिशन को धार देने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन यूपी के दो दिवसीय दौरे पर पहुंच रहे। सूबे की सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए बीजेपी ने अपने तरकश से तीर चलाने शुरू कर दिए हैं, जिससे विपक्ष के दांव को फेल किया जा सके. बीजेपी ने अपनी चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए 'मिशन मोड' में पूरी तरह से उतर चुकी है।  मिशन-2027  को धार देने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 3 और 4 जुलाई को लखनऊ के दौरे पर रहेंगे. नितिन नवीन का यह दौरा उस समय हो रहा है, जब पंकज चौधरी के नेतृत्व में प्रदेश कार्यकारिणी का गठन कर दिया गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि टीम पंकज को चुनावी मंत्र देने के लिए नितिन नवीन लखनऊ का दौरा हो रहा है?  नितिन नवीन का लखनऊ दौरा  उत्तर प्रदेश में बीजेपी की नई कार्यकारिणी गठित होने और नितिन नवीन के पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनका यूपी का पहला दौरा हो रहा है. इसीलिए राजनीतिक गलियारों में इस दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव के बाद यह शीर्ष नेतृत्व का पहला बड़ा दौरा है।  नितिन नवीन का दो दिनों लखनऊ दौरा काफी अहम है. तीन और चार जुलाई को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीति नवीन उत्तर प्रदेश के संगठन की समीक्षा करेंगे नवगठित राज्य संगठन के साथ पहली बैठक होगी. नितिन नवीन के लखनऊ दौरे पर सीएम योगी आदित्यनाथ और  दोनों उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य और बृजेश पाठक सहित सभी मंत्री विधायक सांसद और संगठन के सभी लोग मौजूद रहेंगे।  नितिन नवीन का यूपी दौरा क्यों अहम नितिन नवीन का दो दिवसीय लखनऊ प्रवास केवल एक औपचारिक दौरा नहीं है बल्कि उनका मुख्य फोकस आगामी विधानसभा चुनावों के लिए रोडमैप तैयार करना है. इसीलिए उनके यूपी प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री से लेकर दोनों डिप्टीसीएम सहित सभी मंत्री और बीजेपी के सभी सांसद और विधायक को लखनऊ में रहने के दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं।  बीजेपी अध्यक्ष 3 और 4 जुलाई को वे राज्य के वरिष्ठ नेताओं, क्षेत्रीय प्रभारियों और संबद्ध संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ सिलसिलेवार बैठकें करेंगे. इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों डिप्टीसीएम के साथ आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी उनकी मुलाकात की संभावना है. ऐसे में साफ है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना ही उनके एजेंडे में सबसे ऊपर है।  नवीन नई टीम को देंगे चुनावी मंत्र बीजेपी उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों को धार देने में जुट गई है. इसके लिए हाल ही में प्रदेश इकाई में व्यापक फेरबदल किया है. यूपी अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में नई टीम का गठन हो चुका है, जिसमें 19 उपाध्यक्ष, आठ महासचिव और 19 सचिवों को जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसके अलावा यूपी के सभी 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष को बदल दिया गया है।  प्रदेश संगठन के गठन के बाद अब बारी टीम पंकज को 'एक्टिव मोड' में लाने की है. जानकारों का कहना है कि नितिन नवीन अपने इस दौरे के जरिए परखेंगे कि नई टीम जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी है और कार्यकर्ताओं के साथ उनका तालमेल कैसा है.लखनऊ दौरे के दौरान नितिन नवीन सिर्फ संगठन के लोगों से ही नहीं मिलेंगे बल्कि सरकार के साथ भी बैठक करेंगे।  जमीनी कार्यकर्ताओं से लेंगे फीडबैक बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन का यूपी में सिर्फ बड़े नेताओं से मुलाकात ही नहीं करेंगे बल्कि उनके साथ मंथन भी करेंगे. नितिन नवीन सूबे में क्षेत्रीय स्तर के संगठन मंत्रियों और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ भी बैठकें करेंगे.  वह जानना चाहते हैं कि यूपी की जनता के बीच इस समय क्या माहौल है और विपक्ष के दांव काट ढूंढने के लिए क्या किया जाना चाहिए।  नितिन नवीन के दो दिवसीय दौरे का आखिरी मकसद साल 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए एक मजूबत रोडमैप तैयार करना है ताकि बीजेपी यूपी में सत्ता की हैट्रिक लगा सके. 2024 के चुनाव में हुए नुकसान को देखते हुए बीजेपी कोई भी रिस्क लेने के मूड में नहीं है. ऐसे में अब देखना है कि नितिन नवीन क्या सियासी मंत्र देते हैं और किस तरह की रणनीति के धार देने का काम करते हैं? 

प्रयागराज से वाराणसी तक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का सर्वे जल्द शुरू, चार महीने में तैयार होगी डीपीआर

प्रयागराज  विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए प्रयागराज में 210 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इससे तीन तहसीलों के हजारों किसानों को फायदा मिलेगा। वहीं, इस संबंध में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर प्राथमिक सर्वे रिपोर्ट सोमवार को जिला प्रशासन को प्राप्त हो गई। अब विस्तृत सर्वे के दौरान अधिग्रहित की जाने वाली भूमि पर आने वाले काश्तकारों का आकलन किया जाएगा, जिसके बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। विंध्य एक्सप्रेसवे प्रयागराज जिले की सोरांव, फूलपुर और हंडिया तहसीलों से होकर गुजरेगा। यूपीडा ने पूर्व में प्रशासन को भेजी रिपोर्ट में इन तीनों तहसीलों के 73 गांवों में भूमि की आवश्यकता बताई थी। इसके आधार पर संबंधित एसडीएम से सर्वे कराकर आवश्यक भूमि का विवरण मांगा गया। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार हंडिया तहसील में 78 हेक्टेयर, फूलपुर में 68 हेक्टेयर और सोरांव में 64 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। प्रशासन का अनुमान है कि भूमि अधिग्रहण की जद में 400 से 500 काश्तकार आ सकते हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह संख्या फिलहाल अनुमानित है। लेखपालों की विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद प्रभावित किसानों और भूमि का अंतिम आंकड़ा स्पष्ट हो सकेगा। ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के लिए सावन में शुरू होगा सर्वे का काम चित्रकूट से प्रयागराज होते हुए वाराणसी तक प्रस्तावित 294 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण का सर्वे सावन माह में शुरू होगा। इस परियोजना के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने भोपाल की कंसल्टेंट कंपनी नित्या नायारा का चयन किया है। अगस्त के पहले सप्ताह से एजेंसी चित्रकूट से सर्वे का कार्य शुरू करेगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को दो हिस्सों में बांटा गया है। चित्रकूट से प्रयागराज तक सर्वे और भूमि अधिग्रहण की जिम्मेदारी एनएचएआई को सौंपी गई है, जबकि प्रयागराज से वाराणसी तक का कार्य सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय कराएगा। एनएचएआई के प्रयागराज डिप्टी मैनेजर प्रखर सिंह के अनुसार, भूमि अधिग्रहण और एलाइनमेंट का कार्य करीब चार महीने तक चलेगा। सर्वे के दौरान प्रयागराज की सदर तहसील, कौशाम्बी की मंझनपुर तहसील और चित्रकूट तक प्रस्तावित मार्ग का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इसमें यह तय किया जाएगा कि फोरलेन कॉरिडोर के निर्माण के लिए कितनी भूमि की आवश्यकता होगी। सर्वे पूरा होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर एनएचएआई मुख्यालय को मंजूरी के लिए भेजी जाएगी। परियोजना के पूरा होने से चित्रकूट, प्रयागराज और वाराणसी के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा और यात्रा अधिक तेज व सुगम बनने की उम्मीद है।  

योगी सरकार के प्रयासों से UP में आर्द्रभूमियों का संरक्षण तेज, पर्यावरण संरक्षण को मिली नई रफ्तार

योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहा आर्द्रभूमियों का संरक्षण 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियां हो चुकी हैं अधिसूचित, 36 जिलों से नए प्रस्ताव मिले जल संरक्षण, पर्यावरण और जैव विविधता को बचाने के लिए सरकार चला रही विशेष अभियान लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के संरक्षण और विकास पर लगातार काम कर रही है। वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत प्रदेशभर में आर्द्रभूमियों की पहचान, सीमांकन और अधिसूचना की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है।      मुख्य सचिव के समक्ष हुए प्रस्तुतीकरण के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में से 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियों को अब तक अधिसूचित किया जा चुका है। इनमें कानपुर नगर सहित गोरखपुर, बाराबंकी, महाराजगंज, प्रयागराज, आगरा, सहारनपुर, कुशीनगर, उन्नाव और अन्य जिले शामिल हैं। इन आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2750 हेक्टेयर है। वहीं 36 जिलों से 44 नई आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने के प्रस्ताव भी सरकार को प्राप्त हुए हैं। इसलिए जरूरी हैं आर्द्रभूमियां आर्द्रभूमियां केवल तालाब या झील नहीं होतीं, बल्कि ये प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने, भूजल स्तर बनाए रखने, सिंचाई में मदद करने, बाढ़ और सूखे के प्रभाव को कम करने, मछली पालन और अन्य आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के सुरक्षित आवास के रूप में भी काम करती हैं। इसके अलावा ये पर्यावरण को संतुलित रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। सीमांकन और संरक्षण पर विशेष जोर योगी सरकार आर्द्रभूमियों की सीमाओं का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण भी करा रही है ताकि उन पर अतिक्रमण न हो और उनका संरक्षण बेहतर ढंग से किया जा सके। प्रदेश के सभी 75 जिलों में 14,562 स्थानों पर सीमा निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी सरकार राज्य की प्रमुख आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी प्रयास कर रही है। इसके लिए रामसर साइट के मानकों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेज, मानचित्र, फोटोग्राफ और अन्य तकनीकी जानकारी तैयार की जा रही है, ताकि उत्तर प्रदेश की अधिक से अधिक आर्द्रभूमियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

UP में इको क्लब्स को बड़ी सौगात, योगी सरकार ने ₹65.64 करोड़ की फंडिंग को दी मंजूरी

पर्यावरण संरक्षण को नई गति, योगी सरकार ने इको क्लब्स के लिए जारी की ₹65.64 करोड़ की लिमिट – प्रत्येक परिषदीय विद्यालय को ₹5,000 की दर से उपलब्ध कराई गई लिमिट – इको क्लब्स के गठन, कार्य एवं दायित्व, मासिक गतिविधि कैलेंडर और सुझावात्मक गतिविधियां भी जारी – जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, ई-वेस्ट प्रबंधन और सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान पर रहेगा विशेष फोकस लखनऊ योगी सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को नई गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में समग्र शिक्षा अंतर्गत 'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' की गतिविधियों के क्रियान्वयन हेतु लगभग ₹65.64 करोड़ (₹6563.95 लाख) की लिमिट जारी कर दी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों को ₹5,000 प्रति विद्यालय की दर से लिमिट उपलब्ध कराई जाएगी। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों, सहायक लेखा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों एवं जिला समन्वयकों को निर्देश दिए हैं कि जारी की गई लिमिट का तीन दिन के भीतर विद्यालयों को हस्तांतरण सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही इको क्लब्स के उद्देश्य, गठन, अधिसूचना, कार्य एवं दायित्व, मासिक गतिविधि कैलेंडर तथा सुझावात्मक गतिविधियों के अनुरूप समयबद्ध क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाए।  निर्धारित मदों में होगा लिमिट का उपयोग प्रत्येक विद्यालय को उपलब्ध कराई गई ₹5,000 की लिमिट का उपयोग निर्धारित मदों में किया जाएगा। इसमें इको क्लब की गतिविधियां, जागरूकता कार्यक्रम, पौधरोपण, कम्पोस्ट निर्माण, आवश्यक शिक्षण सामग्री, स्टेशनरी तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अन्य गतिविधियां शामिल हैं। विद्यालयों को निर्धारित वित्तीय मानकों का पालन करते हुए व्यय करना होगा तथा सभी खर्च के अभिलेख सुरक्षित रखना होगा। अभिभावकों, स्थानीय निकायों तथा समुदाय की भागीदारी पर विशेष बल योगी सरकार ने विद्यालय प्रबंधन समिति, अभिभावकों, स्थानीय निकायों तथा समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों को विद्यालय परिसर से बाहर समाज तक पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा गया है। सभी विद्यालयों को इको क्लब गठन, गतिविधियों, फोटो, वीडियो तथा प्रगति रिपोर्ट निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी एवं जिला स्तर के अधिकारी नियमित समीक्षा करेंगे। प्रत्येक विद्यालय में गठित होगा इको क्लब निर्देशों के अनुसार सभी पात्र प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ का गठन किया जाएगा। प्रधानाध्यापक क्लब के संरक्षक होंगे, जबकि एक शिक्षक को प्रभारी बनाया जाएगा। विभिन्न कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को क्लब से जोड़कर उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। क्लब की अधिसूचना जारी होगी, उसका पंजीकरण निर्धारित पोर्टल पर कराया जाएगा तथा विद्यालय स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक गतिविधि का अभिलेखीकरण और समय-समय पर उसकी समीक्षा भी की जाएगी। मिशन लाइफ के सात विषयों पर होगा विशेष फोकस इको क्लब्स के माध्यम से विद्यार्थियों को लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (मिशन लाइफ) के सात प्रमुख विषयों से जोड़ा जाएगा। इनमें स्वस्थ एवं सतत जीवनशैली अपनाना, टिकाऊ खाद्य प्रणाली को बढ़ावा देना, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, कचरा कम करना एवं पुनर्चक्रण, ई-वेस्ट प्रबंधन तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाना शामिल है। उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार को बढ़ावा देना है। मासिक कैलेंडर के अनुसार चलेंगी गतिविधियां आदेश के साथ जुलाई से मार्च तक का विस्तृत गतिविधि कैलेंडर भी साझा किया गया है। जुलाई में पौधरोपण एवं हरित परिसर, अगस्त में किचन गार्डन और कम्पोस्ट निर्माण, सितंबर में ई-वेस्ट प्रबंधन, अक्टूबर में कचरा पृथक्करण एवं पुनर्चक्रण, नवंबर में ऊर्जा संरक्षण, दिसंबर में जल संरक्षण, जनवरी में सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान तथा फरवरी और मार्च में स्वच्छता, जैव विविधता संरक्षण एवं विश्व जल दिवस से संबंधित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त पोस्टर, निबंध, चित्रकला, प्रश्नोत्तरी, रैली, शपथ, प्रदर्शनी और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों तथा समुदाय को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। विद्यालय स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त गतिविधियां भी आयोजित कर सकेंगे।

यूपी में दो बेटियों वाले परिवारों को राहत, सरकार भरेगी दूसरी बेटी की ट्यूशन फीस

लखनऊ  यूपी की योगी सरकार उन परिवारों को बड़ी राहत देने जा रही है जिनकी दो बेटियां पढ़ाई कर रही हैं। अगर दो बेटियां एक ही विद्यालय, महाविद्यालय अथवा संस्थाओं में पढ़ रही हैं तो एक की ट्यूशन फीस सरकार की तरफ से माफ किए जाने या उसकी भरपाई किए जाने की तैयारी है। इसका आदेश जल्द ही जारी हो जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से इस संबंध में की गई घोषणा को शासन स्तर से अमली जामा पहनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। सभी बोर्ड के स्कूलों में मिलेगी राहत महिला कल्याण एवं बाल विकास पुष्टाहार विभाग ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक तथा जिला विद्यालय निरीक्षकों से इस संबंध में प्रदेश में अलग-अलग बोर्डों के स्कूलों में पढ़ रहीं ऐसी बच्चियों का विवरण मांगा है। इसके तहत यूपी बोर्ड से लेकर सीबीएसई एवं आईसीएसई स्कूलों के कक्षा 9 से 12 तक की बच्चियों का सारा विवरण तलब किया गया है। वहीं दूसरी तरफ पहली जुलाई को इस संबंध में उच्च स्तरीय बैठक भी बुलाई गई है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक एवं जिला विद्यालय निरीक्षकों को शासन की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि यदि शासन द्वारा निर्धारित आय सीमा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की एक से अधिक बच्चियां किसी विद्यालय, महाविद्यालय अथवा संस्था में अध्ययन कर रही है तो दूसरी बच्ची का ट्यूशन फीस या तो संस्था को प्रोत्साहित करते हुए माफ कराई जाएगी या उसकी प्रतिपूर्ति राज्य सरकार की ओर से की जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के क्रियान्वयन के लिए शासन स्तर पर पहली जुलाई को उच्च स्तरीय बैठक भी बुलाई गई है जिसमें बेसिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा के प्रतिनिधियों के अलावा महिला कल्याण, एवं वित्त विभाग के शीर्ष अधिकारी भी रहेंगे। शिक्षा से जुड़े विभागों से मांगे गए विवरण व डाटा शिक्षा से जुड़े विभागों के प्रतिनिधियों को प्रयागराज, मेरठ, सहारनपुर एवं लखनऊ के यूपी बोर्ड, सीबीएसई तथा आईसीएसई के संचालित स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों द्वारा कक्षा- 9,10,11 एवं 12 के विद्यार्थियों से ली जाने वाली ट्यूशन फीस का समस्त विवरण व डाटा के साथ पहली जुलाई की बैठक में आने को कहा गया है। अगले महीने के अन्त तक लिया जाना है निर्णय जानकारों की मानें तो पहली जुलाई को होने वाली बैठक में ही इस मामले को अन्तिम रूप दिए जाने की तैयारी है ताकि इसे अगले महीने के तीसरे या चौथे सप्ताह में कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जा सके। कैबिनेट की मंजूरी के साथ ही एक़ ही परिवार की दो बच्चियों में से एक के ट्यूशल फीस माफ करने के आदेश जारी कर दिए जाएंगे।

तुष्टिकरण छोड़कर श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्ष में खुलकर बोलें सपा अध्यक्ष: सीएम योगी

रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने का देर-सबेर सार्वजनिक पश्चाताप करेंगे अखिलेश: सीएम योगी मुरादाबाद नगर, मुरादाबाद देहात एवं कुंदरकी विधानसभा क्षेत्रों, नगर निगम व मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की 365 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 63 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुष्टिकरण छोड़कर श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्ष में खुलकर बोलें सपा अध्यक्ष: सीएम योगी कुंदरकी उप चुनाव में जनता ने बता दिया कि अब बाबर का नहीं, रामराज ही चलेगा: मुख्यमंत्री गुरु जम्भेश्वर मंदिर कॉरिडोर का होगा विकास, लाइनपार क्षेत्र का नाम बदलकर 'दाऊ दयाल खन्ना नगर' किया जाएगा मुरादाबाद  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि क्या उन्हें कुछ सद्बुद्धि आई है या जनता की आंख में धूल झोंक रहे हैं। वह कह रहे हैं कि उनकी सरकार बनी तो अयोध्या को चमकाएंगे, जबकि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार पहले ही अयोध्या का अभूतपूर्व विकास कर चुकी है। वहां अब उनके सहयोग की कोई आवश्यकता नहीं। लेकिन, इस बात के लिए धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने आखिरकार अयोध्या को स्वीकार किया। यह भाजपा की वैचारिक विजय है। देर-सवेर सपा मुखिया भी भगवान श्रीराम का संकीर्तन करते दिखाई देंगे और रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने के पाप का सार्वजनिक पश्चाताप करेंगे। मुख्यमंत्री सोमवार को मुरादाबाद में मुरादाबाद नगर, मुरादाबाद देहात एवं कुंदरकी विधानसभा क्षेत्रों, नगर निगम व मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की 365 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 63 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दानवीर भामाशाह जी की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और व्यापारी कल्याण दिवस पर व्यापारियों को सम्मान पत्र वितरित किए। सीएम ने कार्यक्रम स्थल में लगे स्टाल्स का निरीक्षण किया। उन्होंने एक नन्ही बच्ची को गोद में लेकर चम्मच से दूध पिलाकर दुलारा और उसे खिलौना भी दिया। सीएम योगी ने नगर निगम की कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्ष में बोलें अखिलेश यादव मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या को डबल इंजन सरकार पहले ही नई पहचान दे चुकी है। फोरलेन सड़क संपर्क, रेलवे की डबल लाइन, महर्षि वाल्मीकि के नाम पर एयरपोर्ट, निषादराज के नाम पर रैन बसेरे, माता शबरी के नाम पर भोजनालय और राम की पैड़ी जैसे कार्य सरकार ने कराए हैं। अब समय मथुरा-वृंदावन और बांके बिहारी क्षेत्र के विकास का है। अखिलेश यादव वास्तव में धार्मिक आस्था का सम्मान करना चाहते हैं तो उन्हें खुलकर मथुरा-वृंदावन और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्ष में बोलना चाहिए। तुष्टिकरण से उबरना चाहिए। तभी जनता उनके बदले हुए रुख पर विश्वास करेगी। समाजवादी पार्टी की सोच बाबरी वाली मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा की बाबरी सोच है। यह समाज को जाति, क्षेत्र व भाषा के नाम पर बांटने का काम करती है। संभल का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि यदि समाज जागरूक रहता तो वहां के प्राचीन हरिहर मंदिर, 67 तीर्थों और 19 प्राचीन कुओं पर किसी प्रकार का अतिक्रमण या क्षति नहीं होती। समाज को अपनी विरासत और संस्कृति की रक्षा के लिए सदैव सजग रहना चाहिए। बाबर का नहीं, रामराज ही चलेगा मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में दंगे, कर्फ्यू व उपद्रव नहीं होते। कुंदरकी विधानसभा उपचुनाव में जनता ने साबित कर दिया कि अब बाबर का नहीं, रामराज ही चलेगा। लोगों ने विकास व सुशासन के पक्ष में मतदान किया और भाजपा प्रत्याशी ठाकुर रामवीर सिंह को विजयी बनाया। पहले सरकारी धन कब्रिस्तानों की बाउंड्री बनाने और तुष्टीकरण की राजनीति पर खर्च होता था, जबकि आज वही धन मंदिरों के पुनरुद्धार, धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण, रामायण वाटिका, संविधान वाटिका और सेना के शौर्य को सम्मानित करने वाले कार्यों पर लगाया जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम, नैमिषारण्य, विदुर कुटी और मथुरा-वृंदावन सहित अनेक धार्मिक स्थलों का अभूतपूर्व विकास किया गया है। प्रदेश में विरासत और विकास दोनों साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। नो कर्फ्यू, नो दंगा यूपी में सब चंगा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब "नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा” की स्थिति है। सरकार अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। कोई बेटी की सुरक्षा से खिलवाड़ करेगा, व्यापारी का अपहरण करेगा, नौजवान की नौकरी में सेंध लगाएगा या किसान के अधिकारों का हनन करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। समाजवादी पार्टी की साइकिल पंक्चर हो चुकी मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा की राजनीतिक जमीन लगातार कमजोर हुई है। जनता ने विकास व सुशासन को चुना है। अराजकता व तुष्टीकरण की राजनीति को नकार दिया। सपा की साइकिल अब पंक्चर हो चुकी है, उसकी गति समाप्त हो गई है। अब उसके आगे बढ़ने की कोई संभावना नहीं बची है। यदि विपक्ष राम का नाम लेता है तो यह भी सकारात्मक परिवर्तन है और इससे उसका भविष्य में भला ही होगा। गुरु जम्भेश्वर मंदिर कॉरिडोर का होगा विकास मुख्यमंत्री ने मुरादाबाद के लिए महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि सरकार गुरु जम्भेश्वर के प्राचीन मंदिर के कॉरिडोर विकास का कार्य करेगी। यह स्थल प्रदेश की धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है और सरकार इसके संरक्षण एवं विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी। गुरु जम्भेश्वर के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना और मंदिर परिसर के समग्र विकास से मुरादाबाद की नई पहचान बनेगी। लाइनपार क्षेत्र का नाम होगा दाऊ दयाल खन्ना नगर मुख्यमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के वरिष्ठ नेता और मुरादाबाद की विभूति दाऊ दयाल खन्ना को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए घोषणा की कि लाइनपार क्षेत्र का नाम बदलकर 'दाऊ दयाल खन्ना नगर' किया जाएगा। वर्ष 1983 में गठित श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति में उनके पूज्य गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ अध्यक्ष थे, जबकि दाऊ दयाल खन्ना महासचिव के रूप में पूरे आंदोलन से जुड़े रहे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को समर्पित किया। सरकार उनके योगदान को सम्मान देने के लिए यह निर्णय ले रही है। दानवीर भामाशाह का जीवन त्याग व राष्ट्रभक्ति की मिसाल मुख्यमंत्री ने कहा कि दानवीर भामाशाह का जीवन त्याग, राष्ट्रभक्ति और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। हल्दीघाटी युद्ध के बाद जब महाराणा प्रताप के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया और उनके पास संसाधन नहीं बचे। तब भामाशाह ने अपनी … Read more

मुरादाबाद में CM योगी का अनोखा अंदाज, दो अनजान बच्चियों के हाथों कराया ‘श्री राम वाटिका’ का लोकार्पण

मुरादाबाद में दिखा सीएम योगी का वात्सल्य: दो अनजान बच्चियों के हाथों कराया 'श्री राम वाटिका' का लोकार्पण मुरादाबाद विकास और विरासत के संगम के बीच मुरादाबाद में एक भावुक नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब करोड़ों रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का लोकार्पण किया, तो सबसे खास और भावुक पल 'श्री राम वाटिका' के उद्घाटन का रहा। इस भव्य वाटिका का लोकार्पण किसी राजनेता या अधिकारी ने नहीं, बल्कि वहां मौजूद दो नन्ही बच्चियों वांची और आची ने मुख्यमंत्री के सानिध्य में किया। मुख्यमंत्री और नन्ही बच्चियों का पुराना है स्नेह का नाता मुख्यमंत्री के साथ फीता काटने वाली छह वर्षीय वांची और उसकी छोटी बहन आची का सीएम योगी से यह स्नेहिल जुड़ाव नया नहीं है। दरअसल, इसके पीछे एक बेहद भावुक कहानी है। मुरादाबाद के रहने वाले इन बच्चियों के पिता अमित कुमार अपनी बेटी वांची के स्कूल एडमिशन को लेकर तीन महीने से परेशान चल रहे थे। इसके बाद, जून 2025 में उन्होंने ‘जनता दर्शन’ में बेटी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर अपनी गुहार लगाई थी। महज तीन घंटे में दूर की थी पिता की परेशानी बच्चों के प्रति विशेष स्नेह रखने वाले मुख्यमंत्री ने न केवल उनकी फरियाद सुनी थी, बल्कि महज तीन घंटे के भीतर उनकी समस्या का समाधान भी कर दिया था। सीएम के त्वरित निर्देश पर आरटीई के तहत उसी दिन सोमवार दोपहर को वांची का एडमिशन मुरादाबाद के प्रतिष्ठित 'सीएल गुप्ता वर्ल्ड स्कूल' में हो गया था।  सुरक्षा घेरे के बीच बेटियों को दिया सम्मान श्री राम वाटिका के लोकार्पण के दौरान जब मुख्यमंत्री का काफिला पहुंचा, तो उनसे मिलने यह दोनों बच्चियों भी पहुंची थी। एक पल की भी देरी किए बिना, मुख्यमंत्री ने पूरे वात्सल्य के साथ उन दोनों बहनों को अपने पास बुलाया और उन्हीं नन्हे हाथों से इस भव्य श्री राम वाटिका का फीता कटवाकर इसे जनता को समर्पित कर दिया। बच्चियों के चेहरों की मुस्कान और इस अनूठे पल ने वहां मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया।

यमुना एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक सड़क हादसा, ट्रक में घुसी वोल्वो; 4 की मौत, 19 लोग घायल

 मथुरा मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर एक भीषण सड़क हादसे की जानकारी सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि लखनऊ से नोएडा की तरफ जा रही एक वोल्वो बस आगे चल रहे ट्रेलर से टक्करा गई, जिसमें चार यात्रियों की मौत हो गई और उन्नीस लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।  पुलिस ने बताया कि मथुरा स्थित राया थाना क्षेत्र यमुना एक्सप्रेस-वे माइलस्टोन 112 के पास सड़क हादसे की सूचना मिली थी. मौके पर पहुंची टीम ने आस-पास के लोगों के साथ मिलकर तुरंत राहत कार्य शुरू कर दिया. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सभी 19 घायल यात्रियों को एम्बुलेंस के जरिए जिला अस्पताल भिजवाया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है।  पुलिस ने बताया कि हादसे में 4 लोगों की मौत हो गई है. पुलिस टीम ने मृतकों के शव को कब्जे में ले लिया और उनकी पहचान के लिए जांच शुरू कर दी है। आमने-सामने हुई बस और ट्रक की भिड़ंत सीओ महावन संजीव कुमार ने बताया कि राया थाना क्षेत्र में बिहार नंबर की बस और राजस्थान नंबर के ट्रक के बीच टक्कर हुई। टक्कर के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया सूचना मिलते ही पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंची। एंबुलेंस की मदद से घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। हादसे में करीब 20 से 25 यात्री घायल बताए जा रहे हैं। एक यात्री की हालत बेहद नाजुक बताई गई है। मृतकों की पहचान में जुटी पुलिस पुलिस के अनुसार चार लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान की जा रही है। वहीं हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस दुर्घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ये हादसा उस वक्त हुआ, जब लखनऊ से नोएडा की ओर जा रही एक तेज रफ्तार बस अचानक सामने चल रहे ट्रेलर (ट्रक) से टकरा गई. हादसे के वक्त बस में सवार करीब 65 यात्रियों सवार थे जो अपनी-अपनी सीटों पर  सो रहे थे, तभी जोरदार धमाके के साथ बस के आगे का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और मौके पर चीख-पुकार मच गई।