samacharsecretary.com

कौशल विकास से बढ़ेगी आर्थिक रफ्तार, ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य पर योगी सरकार का जोर

कौशल विकास से तेज होगी आर्थिक रफ्तार, ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य पर योगी सरकार का फोकस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उद्योग आधारित प्रशिक्षण और आईटीआई सशक्तीकरण पर जोर युवाओं को रोजगारोन्मुख कौशल योगी सरकार की प्राथमिकता लखनऊ  उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देने के लिए योगी सरकार कौशल विकास को केंद्र में रखकर तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश सचिवालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभागीय योजनाओं की प्रगति और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी योजनाओं का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रदेश के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि योगी सरकार का फोकस युवाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित करना है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के सशक्तीकरण को लेकर बैठक में विशेष जोर दिया गया। टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से आधुनिक प्रशिक्षण मॉडल विकसित करने और उद्योग आधारित स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता को उद्योगों की मांग के अनुरूप बनाना समय की जरूरत है, जिससे युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा जा सके। इसके साथ ही डेलॉइट के प्रतिनिधियों ने बदलते औद्योगिक परिदृश्य, नई तकनीकों और भविष्य उन्मुख कौशल पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इसमें बताया गया कि आने वाले समय में टेक्नोलॉजी आधारित स्किल्स की मांग तेजी से बढ़ेगी, जिसके लिए प्रशिक्षण प्रणाली को अपडेट करना जरूरी है। मंत्री ने कहा कि कौशल विकास को नई दिशा देकर प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना ही प्रदेश की आर्थिक प्रगति की कुंजी है। उन्होंने अधिकारियों को नवाचार, तकनीकी उन्नयन और उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने दोहराया कि योगी सरकार युवाओं को सशक्त बनाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

योगी सरकार के प्रयासों से स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं में अभूतपूर्व प्रगति

नव निर्माण के 9 वर्ष: गुड गवर्नेंस से बदली यूपी की तस्वीर, ‘ईज ऑफ लिविंग’ में हुआ बड़ा सुधार योगी सरकार के प्रयासों से स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं में अभूतपूर्व प्रगति पेंशन, आवास, मुफ्त राशन, मेडिकल कॉलेज, स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल सुविधाओं के आंकड़े बता रहे बदलाव की पूरी कहानी हर व्यक्ति तक पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं, डिजिटल सेवाओं से समय व श्रम में हुई भारी कमी शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए अब नहीं रही प्रदेशवासियों को यूपी से बाहर जाने की जरूरत लखनऊ उत्तर प्रदेश में बीते नौ वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सुशासन (गुड गवर्नेंस) को केंद्र में रखकर ‘ईज ऑफ लिविंग’ को मजबूत करने की दिशा में व्यापक काम हुआ है। योजनाओं की प्रगति और उपलब्ध आंकड़े इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। सरकार के द्वारा किए गए इन सभी प्रयासों का समेकित प्रभाव यह है कि उत्तर प्रदेश में अब स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के लिए लोगों को बाहर जाने की आवश्यकता कम हुई है। योजनाओं की ठोस प्रगति और पारदर्शी क्रियान्वयन ने प्रदेश को ‘ईज ऑफ लिविंग’ के मामले में एक नए स्तर पर पहुंचाया है, जिससे उत्तर प्रदेश एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राज्य के रूप में तेजी से उभर रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में वर्ष 2017 के बाद बड़ा विस्तार देखने को मिला है। जहां पहले सीमित संसाधन और अव्यवस्थित ढांचा था, वहीं अब सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 81 हो गई है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज’ के तहत हर जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का कार्य तेजी से चल रहा है। प्रदेश में वर्तमान में 13,600 एमबीबीएस और 6,866 पीजी सीटों पर प्रवेश हो रहा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत 5.64 करोड़ लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड प्रदान किए गए हैं, जिससे उन्हें 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के अंतर्गत 1.32 लाख से अधिक विद्यालयों में 19 बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। डीबीटी के माध्यम से 1.30 करोड़ से अधिक छात्रों को यूनिफॉर्म, जूते, बैग आदि के लिए धनराशि सीधे खातों में भेजी गई है। साथ ही डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देते हुए हजारों स्कूलों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब स्थापित की गई हैं। कौशल विकास के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) के तहत करीब 26 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना से कारीगरों और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं ने करोड़ों लोगों के जीवन को स्थिरता दी है। वर्तमान में 67.50 लाख वृद्धजन, 26.81 लाख निराश्रित महिलाएं और 11.57 लाख दिव्यांगजन पेंशन का लाभ ले रहे हैं। पेंशन राशि को 300 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये प्रतिमाह किया गया है और अप्रैल 2026 से इसे 1500 रुपये करने का निर्णय लिया गया है। पिछले नौ वर्षों में 62 लाख से अधिक आवास गरीबों को उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं 15 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न वितरण से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 1.86 करोड़ परिवारों को निशुल्क गैस कनेक्शन दिए गए हैं। डीबीटी के माध्यम से 31 विभागों की 191 योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है।  महिला सशक्तीकरण की दिशा में भी ठोस परिणाम सामने आए हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत 26.81 लाख बेटियां, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से 60 लाख माताएं लाभान्वित हुई हैं। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 5.20 लाख से अधिक बेटियों के विवाह संपन्न कराए गए हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन से 1.06 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं, जबकि 18.55 लाख महिलाएं ‘लखपति’ श्रेणी में पहुंच चुकीं हैं। डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव हुआ है। ई-साथी ऐप पर 24 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। 2066 ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी दी गई है, जबकि प्रोजेक्ट गंगा के तहत 20 लाख घरों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने का कार्य जारी है। इससे करीब 10 हजार रोजगार अवसर भी सृजित हुए हैं।

योगी सरकार का बड़ा निर्णय: रामनवमी पर दो दिन का अवकाश

योगी सरकार का बड़ा फैसला, रामनवमी पर दो दिन का अवकाश 26 के साथ अब 27 मार्च को भी रहेगी छुट्टी प्रदेशभर के मंदिरों में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया फैसला लखनऊ रामनवमी के अवसर पर प्रदेश सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए अवकाश को एक दिन और बढ़ा दिया है। अब 26 मार्च के साथ-साथ 27 मार्च को भी सार्वजनिक अवकाश रहेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह फैसला प्रदेशभर के मंदिरों में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया है। लगातार दो दिन की छुट्टी से श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना और दर्शन में सुविधा मिलेगी। साथ ही व्यवस्थाओं को भी बेहतर ढंग से संभाला जा सकेगा। प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर रामनवमी के दौरान हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी अयोध्या समेत प्रदेशभर में मंदिरों में भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए अवकाश बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। अतिरिक्त अवकाश से यातायात को सुव्यवस्थित करने में मिलेगी मदद प्रदेश सरकार के इस कदम को आस्था के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। अतिरिक्त अवकाश से यातायात, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने में भी मदद मिलेगी। प्रदेश सरकार पहले ही 26 मार्च को अवकाश घोषित कर चुकी थी, जिसे अब बढ़ाकर 27 मार्च तक कर दिया गया है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मिली अग्रिम जमानत, यौन शोषण मामले में कोर्ट का फैसला

प्रयागराज यौन शोषण के मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदनंद ब्रह्मचारी को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत उनके खिलाफ दर्ज मामले में अग्रिम जमानत दे दी। यह आदेश न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद की अग्रिम जमानत याचिका पर दिया है। कोर्ट ने शिकायतकर्ता और याची दोनों को इस संबंध में मीडिया के सामने कोई बयान नहीं देने का निर्देश भी दिया है। आपको बता दें कि आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट के आदेश के क्रम में अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉस्को एक्ट व बीएनएस की धाराओं में मुकदमा दर्ज़ किया गया। इस पर गिरफ्तारी से बचने के लिए अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई है। पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत के आदेश पर झूंसी थाने में अविमुक्तेश्वरानंद व उनके शिष्य मुकुंदानंद समेत तीन अज्ञात के खिलाफ दर्ज मुकदमे की विवेचना के क्रम में पुलिस ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वालों का मेडिकल परीक्षण करवाया। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराने की बात स्वीकार की। पुलिस सूत्रों का कहना है कि उम्र के साथ उनके द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप से संबंधित जांच भी की गई है। पुलिस के मुताबिक इस बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि इस परीक्षण के बाद अभी फोरेंसिक जांच होना बाकी है, निष्कर्ष उसी से निकाला जा सकता है। पुलिस ने बताया कि गुरुवार को ही दोनों का मजिस्ट्रेट के सामने कलमबंद बयान भी हुआ है, जिसके बाद दोनों प्रयागराज से वापस चले गए। बयान में क्या निकला, इस बारे में अधिकृत तौर पर कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट व पोस्टमार्टम प्रभारी डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि फॉरेंसिक चिकित्सा में 25 साल से कम उम्र की वास्तविक जानकारी के लिए दांत का एक्स-रे किया जाता है। साथ ही भौतिक रूप से दांतों की गिनती की जाती है। वहीं, 25 साल से अधिक उम्र के लोगों में गुस्ताफसन विधि का प्रयोग किया जाता है।  

रामनवमी पर डबल छुट्टी! योगी सरकार ने 27 मार्च को भी किया अवकाश घोषित

लखनऊ रामनवमी पर योगी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। पहले से घोषित 26 मार्च के सार्वजनिक अवकाश के साथ अब 27 मार्च को भी छुट्टी घोषित कर दी गई है। मंदिरों में रामनवमी के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।   हर साल इस पर्व पर बड़ी संख्या में लोग पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए मंदिरों में पहुंचते हैं, जिससे व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में अतिरिक्त अवकाश से लोगों को सुविधा मिलेगी और भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस निर्णय के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि सरकार आस्था और परंपराओं के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। लगातार दो दिन की छुट्टी से श्रद्धालुओं को न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने का अवसर मिलेगा, बल्कि यात्रा और दर्शन भी अधिक सहज हो सकेंगे।

पेट्रोल-डीजल की कमी की खबरों पर सरकार का जवाब, यूपी में सब कुछ सामान्य, गाइडलाइन जारी

लखनऊ गैस और ईंधन की किल्लतों के बीच उत्तर प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को लेकर सरकार ने स्पष्ट संदेश जारी किया है। कहा, प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सामान्य और पर्याप्त है। उपभोक्ताओं से अनावश्यक बुकिंग और अफवाह से बचने की अपील की है, ताकि सप्लाई सिस्टम सुचारू बना रहे। पेट्रोल की किल्लत की अफवाह के बीच आई एडवाइजरी पेट्रोल खत्म होने की अफवाह के बीच बुधवार को लोगों में टंकी फुल कराने की होड़ दिखी जिसके बाद इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की ओर से पेट्रोल डीजल की कमी न होने की एडवाइजरी जारी की गई। आईओसी की तरफ से बताया गया कि प्रदेश में पेट्रोल डीजल का पर्याप्त स्टॉक है। वहीं, हुसैनगंज में पेट्रोल खत्म होने से तीन घंटे पेट्रोल पंप बंद रहा जो टैंकर आने के बाद चालू हो गया। इंडियन ऑयल के राज्य प्रमुख व राज्य स्तरीय समन्वयक (तेल उद्योग) संजय भंडारी की ओर से जारी एडवाइजरी में बताया गया कि प्रदेश में 13,166 पेट्रोल पंप चल रहे हैं। इन पेट्रोल पंपों पर अगले पांच दिनों का पेट्रोल एवं डीजल स्टॉक मौजूद है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तीनों कंपनियों लगभग 16-17 दिन का अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध है। इस तरह जिले भर में 20-22 दिनों का पेट्रोल व डीजल स्टॉक मौजूद है जो कि सामान्य संचालन स्तर से अधिक है। इसलिए बिना किसी अफवाह में आए उपभोक्ता जरूरत के मुताबिक ही पेट्रोल डीजल की खरीद करें। सप्लाई चेन में कोई बाधा नहीं है। 25 दिन बाद ही सिलिंडर बुकिंग की अपील संजय भंडारी ने बताया कि प्रदेश में कुल 4,143 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स कार्यरत हैं जो करीब 4.85 करोड़ उपभोक्ताओं को समय पर गैस आपूर्ति कर रहे हैं। 36 एलपीजी बॉटलिंग प्लांट के जरिये यह व्यवस्था की जा रही है। तीनों ऑयल कंपनियों के पास अगले चार दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। यह निर्धारित ऑप्टिमम स्तर के अनुरूप है। इसके अलावा प्रदेश में 10 से 11 लाख बुकिंग हो रही हैं जिसके मुकाबले 7 लाख सिलिंडरों की डिलीवरी की जाती है। यह व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है। सिलिंडर मिलने के 25 दिन बाद ही बुकिंग कराएं।  

लापरवाही पड़ी भारी! जल जीवन मिशन में गड़बड़ी पर 26 इंजीनियरों पर गिरी गाज

लखनऊ प्रदेश के हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए मिशन मोड में कार्य कर रहे ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने काम में लापरवाही बरतने वाले इंजीनियरों-कर्मचारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जल जीवन मिशन परियोजना के कार्यों में लेटलतीफी, लापरवाही करने वाले 26 इंजीनियरों पर निलंबन, विभागीय कार्रवाई, कारण बताओ नोटिस जैसी कार्रवाइयों की गाज गिरी है। नमामि गंगे विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, और जूनियर इंजीनियर रैंक के 12 इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है।  वहीं, चार अधिशासी अभियंताओं के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा परियोजना के कार्यों में धीमी प्रगति को लेकर तीन अधिशासी अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही विभिन्न योजनाओं से शिकायत मिलने के बाद सात इंजीनियरों का तबादला कर दिया गया है। हाल के दिनों में लेटलतीफी के मामले में जल निगम कर्मियों के खिलाफ यह सबसे बड़ी कार्रवाई है। नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए मिशन मोड पर काम कर रही है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर कर्मचारी अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं करते हैं, तो बर्खास्तगी का भी एक्शन लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जनहित से जुड़े कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता एवं उत्तरवायित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। किसी भी स्तर पर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। जल निगम ग्रामीण विभाग ने जिन कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है, उसमें लखीमपुर खीरी के अधिशासी अभियंता अविनाश गुप्ता, जौनपुर के अधिशासी अभियंता सौमित्र श्रीवास्तव, गाजीपुर के अधिशासी अभियंता मो. कासिम हाशमी, चंदौली के कार्यवाहक अधिशासी अभियंता अमित राजपूत, चंदौली के सहायक अभियंता सीताराम यादव, बिजनौर के सहायक अभियंता अकबर हसन, औरैया के जूनियर इंजीनियर अनुराग गोयल, हाथरस के कुलदीप कुमार सिंह, आजमगढ़ के राजेन्द्र कुमार यादव, बरेली के रूप चन्द्र, बाराबंकी के जूनियर इंजीनियर अवनीश प्रताप सिंह और कुशीनगर के कार्यवाहक खंडीय लेखाकार धर्मप्रकाश महेश्वरी शामिल हैं। जल निगम ग्रामीण विभाग ने चार इंजिनियरों के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक जांच के आदेश दिए हैं। इसमें औरैया के अधिशासी अभियंता अमन यादव, मैनपुरी के अधिशासी अभियंता अंकित यादव, प्रयागराज के अधिशासी अभियंता प्रवीण कुट्टी, और शामली के कार्यवाहक अधिशासी अभियंता फूल सिंह यादव शामिल हैं। इसके अलावा, तीन गाजियाबाद के अधिशासी अभियंता भारत भूषण, आगरा में तैनात अमित कुमार और मीरजापुर में तैनात राजेश कुमार गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सहायक अभियंता विपिन कुमार वर्मा को प्रतापगढ़ से चंदौली स्थानांतरित कर दिया गया है। रामपुर में तैनात मो. असजद को रामपुर से चंदौली, प्रदीप कुमार मिश्रा को बाराबंकी से बिजनौर, उदयराज गुप्ता को चंदौली से रामपुर, अमित कुमार को शामली से बाराबंकी, चन्द्र बोध त्यागी को मैनपुरी से आजमगढ, और जूनियर इंजीनियर अजय कुमार को कौशांबी से आजमगढ़ स्थानांतरित कर दिया गया है।

बड़ी जिम्मेदारी! Rinku Singh को मिला रीजनल स्पोर्ट्स ऑफिसर पद, जानें वेतन और कामकाज

नई दिल्ली स्‍टार क्रिकेटर रिंकू सिंह अब क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी बन गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उन्‍हें जल्‍द नियुक्ति पत्र देंगे। आईपीएल 2026 की तैयारियों में जुटे रिंकू मंगलवार को नियुक्ति पत्र नहीं ले सके। वह जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपना नियुक्ति पत्र प्राप्त करेंगे। इससे पहले मंगलवार को रिंकू सिंह को दोहरी खुशखबरी मिली थी। उन्हें आईपीएल 2026 सीजन से पहले कोलकाता नाइट राइडर्स की उप-कप्तानी सौंपी गई। फिर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें क्षेत्रीय खेल अधिकारी नियुक्त किया गया। केकेआर के अहम प्‍लेयर हैं रिंकू रिंकू सिंह अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और शानदार फील्डिंग के दम पर केकेआर के लिए अहम खिलाड़ी रहे हैं। वह 2026 टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा थे। भारत ने अहमदाबाद में खेले गए फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड को हराकर अपना तीसरा टी20 विश्व कप खिताब जीता था। इससे पहले भारत ने 2007 और 2024 में भी यह खिताब जीता था। सीएम ने की तारीफ मुख्यमंत्री योगी ने रिंकू की तारीफ करते हुए कहा, "उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने सरकारी सेवा में खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी है। अब तक हमने विभिन्न पुलिस पदों के लिए 500 से अधिक खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र दिए हैं। क्रिकेट और एशियाई खेलों में उनके प्रदर्शन के लिए रिंकू सिंह को क्षेत्रीय खेल अधिकारी के रूप में नियुक्ति पत्र दिया गया है। वह पहले से ही एक शिविर का हिस्सा हैं, इसलिए वह वहां गए हैं। आज यहां कई अन्य खिलाड़ियों को भी नियुक्ति पत्र मिले हैं।" रिंकू सिंह को क्षेत्रीय खेल अधिकारी के रूप में कौन-कौन से पद मिलेंगे? क्षेत्रीय खेल अधिकारी (RSO) द्वितीय श्रेणी का राजपत्रित अधिकारी होता है। वह खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने, खेल स्टेडियमों की देखरेख करने और नई प्रतिभाओं को निखारने के लिए जिम्मेदार होता है। क्षेत्रीय खेल अधिकारी के रूप में रिंकू सिंह का वेतन कितना होगा? क्षेत्रीय खेल अधिकारी के रूप में रिंकू का वेतन 70,000 रुपये से 80,000 रुपये के बीच हो सकता है। 5 सिक्‍स लगाकर बने स्‍टार आईपीएल 2023 के अंतिम ओवर में गुजरात टाइटंस के यश दयाल को लगातार पांच छक्के लगाकर केकेआर को रोमांचक जीत दिलाने के बाद रिंकू रातों रात स्टार बन गए। तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक, एशिया कप और हाल ही में टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं। रिंकू के अलावा उत्तर प्रदेश सरकार हॉकी खिलाड़ी राजकुमार पाल, भाला फेंक खिलाड़ी अजीत सिंह, धावक सिमरन और पैरालिंपिक स्वर्ण पदक विजेता प्रवीण कुमार सहित 6 अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं को रोजगार देने जा रही है। 

गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण अभियान –CM योगी

लखनऊ में आयोजित गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा के कार्यकर्ताओं के सम्मान समारोह में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण अभियान – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मानव का सेवा भाव ही उसे सभी जीवों में ईश्वर की सबसे श्रेष्ठ कृति बनाता है उपचार से भी अधिक महत्वपूर्ण बचाव और जागरूकता है, इस सेवा यात्रा ने स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है – सीएम योगी मुख्यमंत्री ने मातृ-शिशु मृत्यु दर नियंत्रण के बारे में जागरूकता फैलाने को भी अभियान से जोड़ने की सलाह दी अपने कर्तव्य को निष्ठा से निभाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है – सीएम योगी आदित्यनाथ लखनऊ,  गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान बताते हुए इसकी सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के उपेक्षित और दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री मंगलवार को राजधानी में गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा के कार्यकर्ता सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन (एनएमओ) के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने 2019 से इस सेवा यात्रा को निरंतर विस्तार देते हुए आज इसे एक बड़े जन-आंदोलन का रूप देने की दिशा में कार्य किया है। यह यात्रा विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की नेपाल सीमा से सटे सात जिलों महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत में संचालित हो रही है, जहां जनजातीय समुदायों और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी रही है। लगभग 550 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल सीमा के इन इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसे स्वयंसेवक समर्पण के साथ निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने मानव के सेवा भाव की व्याख्या करते हुए कहा कि “प्राणिनामार्थ नाशनम्” का भाव यह है कि मनुष्य अन्य जीवों की तुलना में ईश्वर की श्रेष्ठ कृति माना गया है, क्योंकि वही अन्य प्राणियों की सेवा कर सकता है और अपने सेवा भाव से दूसरों को प्रेरित भी कर सकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि वे यही कार्य कर रहे हैं और उनकी जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस यात्रा के माध्यम से न केवल इलाज किया जा रहा है, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “उपचार से अधिक महत्वपूर्ण बचाव है” और जागरूकता के जरिए कई गंभीर बीमारियों को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में त्वचा रोग, जलजनित बीमारियां, एनीमिया और तपेदिक जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं, जिनके प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है। साथ ही उन्होंने अभियान के कार्यकर्ताओं को मातृ-शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए जागरूकता फैलाने के कार्य को भी अभियान से जोड़ने की सलाह दी और कहा कि यदि मां और बच्चा स्वस्थ हैं, तो समाज भी स्वस्थ रहता है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2007-08 के नेपाल के खूनी संघर्ष का प्रसंग साझा करते हुए बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले थारू समुदाय के लोगों ने किस प्रकार अपनी राष्ट्रभक्ति और आत्मसम्मान का परिचय देते हुए माओवादी प्रभाव से दूरी बनाए रखी और भारत की मुख्यधारा से जुड़े रहे। उन्होंने इस कार्य के लिए पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा चलाए जा रहे अभियानों की भी सराहना की। साथ ही बताया कि वर्तमान में सरकार और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। सीएम योगी ने बताया कि वर्ष 2017 के बाद राज्य सरकार ने वनटांगिया गांवों और अत्यंत पिछड़े समुदायों के जीवन स्तर में सुधार के लिए व्यापक कार्य किए हैं। इन गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा देकर वहां पक्के मकान, बिजली, पानी, स्कूल, आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही पात्र लोगों को पेंशन, राशन कार्ड और आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार केवल थारू ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अन्य जनजातियों मुसहर, कोल, सहरिया, बुक्सा, चेरो आदि को भी विकास योजनाओं से जोड़ते हुए उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि वह अगले दिन बहराइच के भरतापुर गांव का दौरा करेंगे, जहां थारू जनजातीय समुदाय के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाकर उन्हें जमीन, आवास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई समाज एकजुट होकर किसी कार्य में पूरी निष्ठा के साथ जुटता है, तो उसके परिणाम भी व्यापक और सकारात्मक होते हैं। इसी का परिणाम है कि स्वास्थ्य सेवा यात्रा का यह अभियान, जो वर्ष 2019 में छह जिलों में 27 हजार मरीजों तक सीमित था, अब सात जिलों में लगभग 2.66 लाख लोगों तक पहुंच चुका है। उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं की सेवा भावना और समर्पण का परिणाम बताते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे अपने दायित्वों को केवल अस्पतालों तक सीमित न रखें, बल्कि समाज के जरूरतमंद वर्गों तक स्वयं पहुंचें। प्रत्येक चिकित्सक को महीने में कम से कम एक दिन ऐसे सेवा कार्यों के लिए समर्पित करना चाहिए। इससे न केवल समाज को लाभ मिलेगा, बल्कि चिकित्सकों को भी विविध अनुभव प्राप्त होंगे। राष्ट्रभक्ति की परिभाषा स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदारी और समर्पण ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है। चाहे छात्र हो, शिक्षक, सरकारी कर्मचारी या चिकित्सक हर व्यक्ति अपने कार्य को निष्ठा से निभाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है। राज्य सरकार ने भी इसे विस्तार देते हुए अधिक से अधिक लोगों तक इसका लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है। मातृ मृत्यु … Read more

निराश्रित महिलाओं, वृद्ध और दिव्यांगजनों को दी जाने वाली पेंशन राशि में पिछले 9 वर्षों में हुई पांच गुना की वृद्धि

मिशन ज़ीरो पॉवर्टी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से यूपी में समावेशी विकास को मिली नई रफ्तार निराश्रित महिलाओं, वृद्ध और दिव्यांगजनों को दी जाने वाली पेंशन राशि में पिछले 9 वर्षों में हुई पांच गुना की वृद्धि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से 26.81 लाख, जबकि लखपति महिला योजना से 18.55 लाख महिलाएं हुईं लाभान्वित दिव्यांगजनों के लिए प्रदेश में चलाए जा रहे हैं 21 विशेष विद्यालय, जिनमें से 16 में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण के उद्देश्य से प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम को किया गया पूरे राज्य में विस्तारित लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समावेशी विकास के विजन को सफल बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले 9 वर्षों में गरीब, वंचित और कमजोर वर्गों के सशक्तीकरण के लिए अनेक महत्त्वाकांक्षी योजनाएं लागू की हैं। इनमें योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “मिशन ज़ीरो पॉवर्टी” ने विशेष रूप से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। जिसके सफल क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले 9 वर्षों में लगभग 6 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से मुक्ति दिलाने में सफलता हासिल की है। साथ ही सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदेश की महिला, वृद्ध, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर और अल्पसंख्यक समुदाय के समुचित विकास को सुनिश्चित करने के कई सार्थक प्रयास किए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश से गरीबी के समूल उन्मूलन के उद्देश्य से गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर, 2024 से “मिशन ज़ीरो पॉवर्टी” को लागू किया है। इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में गरीब परिवारों की पहचान कर उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। “मिशन ज़ीरो पॉवर्टी” के तहत प्रदेश में अब तक 13.57 लाख परिवारों को चिन्हित किया जा चुका है, जिन्हें 17 विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि इन परिवारों को ऐसे आर्थिक कार्यों से जोड़ा जाए, जिससे उन्हें दीर्घकाल में न्यूनतम ₹1.25 लाख की स्थायी वार्षिक आय प्राप्त हो सके। योगी सरकार ने प्रदेश में समावेशी विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। इस दिशा में प्रदेश की निराश्रित महिलाओं, वृद्धजनों और दिव्यांगजनों को दी जाने वाली पेंशन राशि में पिछले 9 वर्षों में लगभग पांच गुना वृद्धि की जा चुकी है। योगी सरकार के पहले वर्ष 2017 में जहां मात्र ₹300 प्रतिमाह पेंशन दी जाती थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर ₹1000 प्रतिमाह किया गया है, जिसे अप्रैल 2026 से ₹1500 प्रतिमाह किए जाने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में प्रदेश के 67.50 लाख से अधिक वृद्धजनों, 26.81 लाख निराश्रित महिलाएं और 11.57 लाख दिव्यांगजन नियमित पेंशन का लाभ उठा रहे हैं। इसके साथ ही कुष्ठ रोगियों की पेंशन भी ₹2500 से बढ़ाकर ₹3000 प्रतिमाह की जा चुकी है।  गरीबों के लिए आवास और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना भी सरकार की प्राथमिकता रही है। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में 62 लाख से अधिक लोगों को मुफ्त आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। वहीं 15 करोड़ गरीबों को 35 किलोग्राम खाद्यान्न, एक किलोग्राम दाल या साबुत चना, एक किलोग्राम आयोडाइज्ड नमक और एक किलोग्राम रिफाइंड तेल का निःशुल्क वितरण किया जा रहा है। अंत्योदय कार्डधारकों को प्रति माह एक किलोग्राम चीनी भी दी जा रही है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 1.86 करोड़ से अधिक परिवारों को निःशुल्क गैस कनेक्शन दिए गए हैं और होली तथा दीपावली पर दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर भी वितरित किए जा रहे हैं। योगी सरकार की समावेशी विकास की योजनाओं ने आधी आबादी, महिलाओं के जीवन को भी बेहतर बनाने की कई सार्थक पहल की हैं। इस दिशा में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत 26.81 लाख बेटियां लाभान्वित हुईं हैं, जबकि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत 1.05 लाख बच्चों को सहायता मिली है। मिशन वात्सल्य के तहत एक लाख से अधिक बच्चों को उनके अभिभावकों से मिलाया गया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से 60 लाख माताओं को लाभ मिला है। जबकि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से अब तक 5.20 लाख से अधिक बेटियों के विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 9.43 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 1.06 करोड़ से अधिक महिलाओं को जोड़ा गया है। लखपति महिला योजना के तहत 35 लाख से अधिक महिलाओं की पहचान की गई है, जिनमें से 18.55 लाख महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। स्वयं सहायता समूहों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत 2,682 उचित मूल्य की दुकानों का आवंटन किया गया है और 60 हजार समूहों की महिलाओं के माध्यम से ड्राई राशन का वितरण किया जा रहा है। यही नहीं, औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है। इसका परिणाम है कि 2017 में जहां महिला श्रम बल भागीदारी लगभग 13 प्रतिशत थी, वह बढ़कर करीब 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यही नहीं, प्रदेश में दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए भी पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके तहत कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण योजना के तहत वर्ष 2024-25 तक 3,84,543, जबकि वर्ष 2025-26 में 17,454 दिव्यांगजन लाभान्वित हुए हैं। वहीं 1,679 कॉक्लियर सर्जरी तथा 845 श्रवण बाधित बच्चों के कॉक्लियर इम्प्लांट जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। साथ ही प्रदेश में 21 विशेष विद्यालय संचालित हैं, जिनमें से 16 में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था है। वहीं मानसिक रूप से दिव्यांगों के लिए लखनऊ में ममता स्कूल और आजमगढ़ में समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय का निर्माण किया गया है। सरकारी नौकरियों में 4 प्रतिशत और शैक्षणिक संस्थानों में 5 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। अन्य पिछड़ा वर्ग की युवतियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से चलाई जा रही विवाह अनुदान योजना के तहत वर्ष 2025-26 तक कुल 6,47,863 लाभार्थियों को ₹1,295.72 करोड़ की विवाह अनुदान राशि प्रदान की गई। जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना के माध्यम से 9 वर्षों में 1,01,139 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण के लिए योगी सरकार ने ट्रांसजेंडर समुदाय के वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धाश्रम की सुविधा उपलब्ध कराई है। साथ … Read more