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मुख्यमंत्री ने की नागरिकों से अपील, जनपद स्तर पर अवश्य शिकायत करें

जनपद स्तर पर समस्याओं का निस्तारण सुनिश्चित करें अधिकारी: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने की नागरिकों से अपील, जनपद स्तर पर अवश्य शिकायत करें     निवेशकों की समस्याओं के समाधान में विलंब स्वीकार नहीं, संबंधित विभाग निस्तारण में लाएं तेजी: मुख्यमंत्री बच्चों से बोले सीएम- मन लगाकर पढ़ो, खूब खेलो और खिलते रहो  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। उन्होंने यहां आए हर फरियादी से स्वयं मुलाकात की, उनकी समस्याओं को सुना और निस्तारण के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अनुरोध किया कि लखनऊ आने से पहले अपनी समस्याओं को लेकर जनपद व मंडल स्तर पर तैनात अधिकारियों से जरूर मुलाकात करें। वहां भी हर अधिकारी आमजनों की समस्याओं के उचित निराकरण के लिए प्रतिबद्ध है। यदि किन्हीं कारणों से वहां समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा हो, तो अवश्य लखनऊ आएं। सीएम योगी ने कहा कि हर परेशान व्यक्ति की समस्या का निदान सरकार की प्राथमिकता है। अधिकारी हर हाल में जनपद स्तर पर ही पीड़ितों की समस्याओं का निस्तारण करें।  उद्यमियों की समस्याओं पर मुख्यमंत्री सख्त, त्वरित निस्तारण के दिए निर्देश मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान कुछ उद्यमियों ने अपनी समस्याएं रखीं। मुख्यमंत्री ने हर एक प्रार्थना पत्र को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों, विशेषकर उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) एवं जिला प्रशासन को तत्काल और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में निवेश का बेहतरीन इकोसिस्टम तैयार किया गया है और सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम सहित कई पारदर्शी व्यवस्थाएं लागू की हैं। यदि किसी उद्यमी को किसी भी स्तर पर परेशानी होती है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निवेश और उद्योग विकास में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। प्राइमरी विद्यालयों में फिजिकल एजुकेशन अनिवार्य करने की मांग पर सकारात्मक संकेत ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में एक नागरिक ने बेसिक शिक्षा परिषद के सभी प्राथमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों को अनिवार्य किए जाने की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने इस सुझाव को गंभीरता से लेते हुए उन्हें आश्वासन दिया कि संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में खेल और शारीरिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके साथ ही अवैध कब्जों और पुलिस से जुड़े मामलों में भी अधिकारियों को निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मन लगाकर पढ़ो, खूब खेलो और खिलते रहो  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभिभावकों के साथ आए बच्चों को देखकर उनका हालचाल जाना और हंसी ठिठोली भी की। मुख्यमंत्री ने बच्चों से पूछा कि किस क्लास में पढ़ते हो। बच्चों ने भी मुख्यमंत्री के प्रश्नों का उत्तर दिया, फिर सीएम योगी ने सभी बच्चों से कहा कि मन लगाकर पढ़ाई करो। खूब खेलो और खेलकर खिलते रहो। सीएम ने बच्चों को चॉकलेट दी और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद भी दिया।

33 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनने की दिशा में अग्रसर

संडे स्पेशल हर महीने लाख तक कमाने लगीं हैं लखपति दीदियां 33 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनने की दिशा में अग्रसर सरकार ने प्रदेश की महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर, लखपति दीदी परिवार का बनीं सहारा लखनऊ उत्तर प्रदेश में महिलाएं अब आर्थिक स्वावलंबन के माध्यम से सफलता की नई कहानियां गढ़ रहीं हैं। लखपति दीदी योजना से कई महिलाएं हर महीने एक लाख रुपये तक की कमाई कर रहीं हैं। पिछले नौ साल में महिला सशक्तीकरण के लिए प्रदेश सरकार ने तत्परता से योजनाओं का क्रियान्वयन किया है जिससे यह उपलब्धि हासिल हो पायी। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 33 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनने की दिशा में अग्रसर हैं। बढ़ी कमाई, परिवार का बनीं सहारा आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल हैं आजमगढ़ जिले की हुस्नआरा खातून जो तैबा स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं । वे रेशमी साड़ी निर्माण के काम से जुड़ीं हैं। लखपति दीदी योजना के माध्यम से जब एक लाख 15 हजार रुपये की सहायता मिली तो जैसे ठहरी हुई रफ्तार को पंख लग गए। आज वे प्रतिमाह लगभग एक लाख रुपये तक कमा रहीं हैं। वे कहती हैं कि अब उनका कारोबार बारह गुना तक बढ़ चुका है। उनका परिवार सम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीवनयापन कर रहा है। आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन को मिला बल प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक संसाधन, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने का जो व्यापक ढांचा तैयार हुआ, उसने हजारों परिवारों की तकदीर बदल दी। लखपति दीदी योजना के अंतर्गत ही आजमगढ़ की शशिकला राजभर ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ऋण प्राप्त किया। इससे अदिति फास्ट फूड के नाम से अपना स्टॉल शुरू किया। आज वे प्रतिदिन लगभग 2000 रुपये का कारोबार कर रही हैं। वे बताती हैं कि पहले रोजगार की तलाश में थी, आज वे दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुकीं हैं। यह परिवर्तन दर्शाता है कि योजनाएं जब सही दिशा और निगरानी के साथ लागू होती हैं तो परिणाम समाज की संरचना को बदल देते हैं। लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का लेनदेन महिला सशक्तीकरण का सबसे मजबूत स्तंभ वित्तीय सहायता है जिसमें प्रदेश सरकार ने खासी प्रगति हासिल की है। आजमगढ़ की सरोज मौर्या इसकी जीवंत तस्वीर हैं। पढ़ाई के साथ वे बीसी सखी के रूप में कार्य कर रहीं हैं और गांवों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचा रही हैं। उनके बताया कि पहले ग्रामीण महिलाएं बैंक जाने से हिचकतीं थीं। अब वे घर के पास ही जमा-निकासी, पेंशन वितरण और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाएं पा रहीं हैं। इस पहल ने महिलाओं को न केवल रोजगार दिया बल्कि उन्हें आर्थिक निर्णयों में सहभागी भी बनाया। बीसी सखियों ने प्रदेश में अब तक लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय लेनदेन किया है और 107 करोड़ रुपये से अधिक का लाभांश अर्जित किया है। यह आंकड़ा बताता है कि महिलाएं अब आर्थिक गतिविधियों की मुख्य धुरी बन चुकी हैं। नौ लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन प्रदेश में नौ लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है। 63,519 ग्राम संगठन और 3272 संकुल स्तरीय संघ सक्रिय हैं जिनसे 99 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। लखपति महिला योजना के तहत 18 लाख से अधिक महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। यह केवल सरकारी उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रमाण है।  कारोबार शुरू करने के लिए मिलती है पूंजी लखपति दीदी योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को लघु उद्योग और स्वरोजगार शुरू करने के लिए आसान, ब्याज मुक्त और चरणबद्ध पूंजी उपलब्ध कराया जाता है। इससे महिलाओं को छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने में सहायता मिलती है।

महाशिवरात्रि पर प्रयागराज में माघ मेले का समापन, 44 दिनों में 22 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई पवित्र डुबकी

महाशिवरात्रि पर प्रयागराज में माघ मेले का समापन, 44 दिनों में 22 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी ने भगवान शिव का किया रुद्राभिषेक, प्रदेशवासियों के लिए की मगंलकामना काशी विश्वनाथ धाम में पुष्प वर्षा से किया गया शिवभक्तों का स्वागत लखनऊ प्रयागराज के पावन संगम तट पर लगे धर्म-कर्म, त्याग और समर्पण के माघ मेले का समापन रविवार को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर हुआ। हर हर महादेव के जयघोष और ऊं नम: शिवाय के मंत्रोच्चार से संगम नगरी गूंज उठी। गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी ने रुद्राभिषेक-जलाभिषेक कर प्रदेशवासियों के सुखमय जीवन की प्रार्थना की। काशी विश्वनाथ धाम में पुष्पवर्षा से शिवभक्तों का स्वागत हुआ। देश-विदेश के 63 मंदिरों से आई भेंट को भगवान श्री विश्वेश्वर को अर्पित किया गया।  माघ मेले में 22 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी प्रयागराज में माघ मेले में महाशिवरात्रि स्नान पर्व पर 40 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में पुण्य की डुबकी लगाई। 44 दिन चले माघ मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 22 करोड़ को पार कर गई। ये अब तक किसी भी माघ मेले का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ माघ मेले के आयोजन और तैयारियों पर नजर रखे हुए थे और महाशिवरात्रि पर भी लगातार खबर ले रहे थे। गोरखपुर में मुख्यमंत्री ने भगवान शिव का किया रुद्राभिषेक गोरखपुर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में भगवान शिव का रुद्राभिषेक कर प्रदेशवासियों के आरोग्यमय, सुखमय, समृद्धमय व शांतिमय जीवन की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री ने अंधियारी बाग स्थित प्राचीन मानसरोवर मंदिर और भरोहिया के पितेश्वरनाथ शिव मंदिर में भी दर्शन, पूजन व दुग्धाभिषेक-जलाभिषेक किया और चराचर जगत के कल्याण की प्रार्थना की।   काशी में गूंजा “हर-हर महादेव” और “बोल बम” का जयघोष महाशिवरात्रि पर काशी आस्था, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रही। श्रद्धा की डोर से बंधे लाखों शिवभक्त भगवान भोलेनाथ के विवाहोत्सव के साक्षी बनने उमड़े। भक्तों ने श्रद्धापूर्वक बेलपत्र, गंगाजल और दूध बाबा पर अर्पित किया। काशी “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से गुंजायमान रही। श्री विश्वेश्वर के लिए देश-विदेश के कुल 63 मंदिरों से भेंट आई। यह भेंट भगवान श्री विश्वेश्वर की मध्याह्न भोग आरती में अर्पित कर श्रद्धालुओं के मध्य वितरित की गई। शाम छह बजे तक 5,20,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में हाज़िरी लगाई।  रामनगरी में शिवभक्तों का लगा तांता   महाशिवरात्रि के अवसर पर अयोध्या में लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। प्राचीन नागेश्वर नाथ मंदिर और क्षीरेश्वर नाथ मंदिर सहित अन्य प्रमुख शिवालयों पर शिवभक्तों का तांता लगा रहा। इस दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पूरे अयोध्या धाम को पांच जोन और 12 सेक्टर में बांटा गया। प्रत्येक जोन और सेक्टर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

बीज उत्पादक व विक्रेता अप्रैल से साथी पोर्टल के माध्यम से करें व्यवसाय: कृषि विभाग

नकली बीजों पर लगेगी नकेल, गुणवत्ता का पूरा ब्यौरा देगा साथी पोर्टल  बीज उत्पादक व विक्रेता अप्रैल से साथी पोर्टल के माध्यम से करें व्यवसाय: कृषि विभाग  हर जिले में मास्टर ट्रेनर तैनात, बीज व्यवसाइयों को देंगे प्रशिक्षण बीज उत्पादक संस्थाओं, एफपीओ और बीज कंपनियों को किया जा रहा प्रशिक्षित 70 प्रतिशत विक्रेता पोर्टल पर पंजीकृत, शेष भी 15 दिन के भीतर करा लें पंजीकरणः अपर कृषि निदेशक लखनऊ डबल इंजन सरकार किसानों तक उच्च गुणवत्ता वाले बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बीज वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने बीज व्यवसाइयों से अनुरोध किया है कि अप्रैल से साथी पोर्टल पर संपूर्ण जानकारी अपडेट करें। बीज के उत्पादन से लेकर किसान तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया साथी पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी तरीके से ट्रैक की जाएगी। यह प्रक्रिया बीज की मिलावट रोकने, नकली बीजों पर अंकुश लगाने और किसानों को सही गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिलेगी। केंद्र व महाराष्ट्र सरकार की टीम ने दिया प्रशिक्षण  उत्तर प्रदेश में कृषि विभाग ने इसके लिए व्यापक प्रशिक्षण अभियान भी चलाया। कृषि निदेशालय में चले प्रशिक्षण में केंद्रीय टीम व महाराष्ट्र कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। दो दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने किया। डॉ. सोनू कुमार चौधरी, वरिष्ठ तकनीकी सहायक (सीड) भारत सरकार,  अर्चना व अविनाश विजयकुमार पेडगांवकर, वरिष्ठ निदेशक (आईटी) एन.आई.सी, निलाद्रि बिहारी मोहंती संयुक्त निदेशक व उनकी टीम के सदस्य कोमित व सुदीप ने प्रशिक्षण प्रदान किया। महाराष्ट्र की उप निदेशक (कृषि) डॉ. प्रीति सवाईराम ने उनके राज्य में साथी पोर्टल की सफलता की कहानी बताई। उन्होंने इसके विभिन्न चरणों, कार्यों व किसानों को होने वाले लाभ की भी जानकारी दी। हर जनपद से आए तीन-तीन व्यवसायी, लौटकर देंगे ट्रेनिंग  अपर कृषि निदेशक (बीज एवं प्रक्षेत्र) अनिल कुमार पाठक ने बताया कि बीज उत्पादक संस्थाओं, कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) और बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित कर मास्टर ट्रेनर बनाया जा रहा है। अब ये प्रशिक्षक जनपद स्तर पर थोक व फुटकर विक्रेताओं को प्रशिक्षित करेंगे जिससे नई प्रणाली का सही ढंग से संचालन हो सकेगा। उनकी जिम्मेदारी होगी कि वे स्थानीय स्तर पर सभी विक्रेताओं और उत्पादकों को नई प्रक्रिया में प्रशिक्षित करें ताकि अप्रैल से यह व्यवस्था पूरी तरह लागू की जा सके। लगभग 70 प्रतिशत विक्रेता पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। शेष 30 फीसदी विक्रेता भी 15 दिन के भीतर पोर्टल पर पंजीकरण करा लें। किसी भी समस्या पर स्थानीय जिला कृषि अधिकारी से भी निराकरण करा सकते हैं।  बीज से जुड़ी सारी जानकारी देगा साथी पोर्टल साथी (सीड ऑथेंटिकेशन, ट्रेसेबिलिटी एंड होलिस्टिक इन्वेंटरी) पोर्टल को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य बीज उत्पादन, प्रमाणीकरण और वितरण की गुणवत्ता में पारदर्शिता लाना और किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इसके माध्यम से बीज के उत्पादन से लेकर किसान तक पहुंचने तक की पूरी प्रक्रिया को ट्रैक किया जा सकता है। बीज पैकेट पर लगे टैग के क्यूआर कोड को स्कैन करके किसान बीज के स्रोत, बीज का उत्पादन करने वाली एजेंसी/फर्म, उसके प्रमाणीकरण की पूरी जानकारी एवं उसकी गुणवत्ता की जांच कर सकते हैं। दो चरणों में तैयार किए गए मास्टर ट्रेनर पहले दिन बीज उत्पादक संस्थाओं, कृषक उत्पादक संगठन एवं बीज कंपनियों और फर्मों को प्रशिक्षण दिया गया। दूसरे दिन जिलों के थोक एवं रिटेलर बीज विक्रेताओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण में हिस्सा लेने वाले प्रतिनिधि मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य करेंगे। वे अपने-अपने जनपदों में अन्य डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर को साथी पोर्टल के संबंध में प्रशिक्षित करेंगे।

यूपी बजट 2026-27 में संरचनात्मक निवेश से लाखों प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष अवसरों की तैयारी

औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स और डेटा सेंटर बनेंगे रोजगार के बड़े इंजन यूपी बजट 2026-27 में संरचनात्मक निवेश से लाखों प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष अवसरों की तैयारी इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से रोजगार की श्रृंखला होगी सक्रिय, एमएसएमई और वस्त्रोद्योग में बढ़े प्रावधान से नई नौकरियों की उम्मीद एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट में बढ़ेंगे अवसर डेटा सेंटर व एआई मिशन से हाई-स्किल जॉब्स का होगा विस्तार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से युवाओं के लिए खुलेंगे नए करियर विकल्प लखनऊ  प्रदेश सरकार के बजट 2026-27 में औद्योगिक क्लस्टरों के विस्तार, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण और डेटा सेंटर इकोसिस्टम के विकास को जिस पैमाने पर प्राथमिकता दी गई है, वह प्रदेश में बड़े स्तर पर रोजगार सृजन की ठोस रणनीति की ओर स्पष्ट संकेत कर रहा है। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास योजनाओं के लिए ₹27,103 करोड़ का प्रावधान कियी गया है जो कि पिछले वर्ष के बजट से 13 प्रतिशत अधिक है। यह साफ दर्शाता है कि योगी सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित औद्योगिक विस्तार को रोजगार वृद्धि का मुख्य आधार बना रही है। बजट में किए गए ये निवेश निर्माण से लेकर उत्पादन, लॉजिस्टिक्स संचालन और डिजिटल सेवाओं तक रोजगार की बहु-स्तरीय श्रृंखला तैयार करने की योजना का हिस्सा हैं। औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और डेटा सेंटर के जरिये सरकार का लक्ष्य प्रदेश में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों का सृजन कर विकास और रोजगार को समानांतर गति देना है। औद्योगिक क्लस्टर: उत्पादन से लेकर रोजगार की पूरी चेन औद्योगिक क्लस्टर मॉडल की सबसे बड़ी ताकत उसकी बहु-स्तरीय रोजगार क्षमता है। एक एंकर यूनिट स्थापित होते ही उसके आसपास कच्चे माल की आपूर्ति, पैकेजिंग, मशीनरी रखरखाव, परिवहन, वेयरहाउसिंग और सर्विस सेक्टर की दर्जनों सहायक इकाइयां विकसित होती हैं। यही कारण है कि बजट 2026-27 में एमएसएमई सेक्टर के लिए ₹3,822 करोड़ (19% वृद्धि) और वस्त्रोद्योग के लिए ₹5,041 करोड़ का प्रावधान केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि रोजगार विस्तार की संरचनात्मक रणनीति का हिस्सा है। सरकार ने वस्त्रोद्योग क्षेत्र में वर्ष 2026-27 के लिए 30,000 नए रोजगार सृजन का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है, जो इस सेक्टर को प्रत्यक्ष नौकरी सृजन का प्रमुख केंद्र बनाता है।  विशेषज्ञों का मानना है कि क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास में हर एक प्रत्यक्ष रोजगार के साथ कई अप्रत्यक्ष रोजगार जुड़ते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में व्यापक गतिशीलता आती है। इसके साथ ही सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन के लिए ₹575 करोड़ तथा निवेश प्रोत्साहन नीति के क्रियान्वयन हेतु ₹1,000 करोड़ का प्रावधान बड़े और वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है। बड़े उद्योगों की स्थापना से दीर्घकालिक, स्थायी और कौशल आधारित रोजगार अवसरों का मजबूत आधार तैयार होगा। लॉजिस्टिक्स हब: सड़क से सप्लाई चेन तक रोजगार की नई राह इसी तरह एक्सप्रेसवे और औद्योगिक कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर बढ़ा निवेश केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश को राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स मानचित्र पर मजबूत स्थिति दिलाने की रणनीति का हिस्सा है। जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए ₹1100 करोड़, आगरा-लखनऊ से गंगा एक्सप्रेसवे लिंक हेतु ₹1250 करोड़ और विन्ध्य एक्सप्रेसवे व अन्य कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए ₹500-500 करोड़ के प्रावधान से माल परिवहन की लागत और समय दोनों में कमी आएगी। बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा असर लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ता है। जहां सड़क पहुंचती है, वहां वेयरहाउस, ट्रांसपोर्ट कंपनियां, कोल्ड स्टोरेज और वितरण केंद्र भी विकसित होते हैं। यह सेक्टर स्वभाव से श्रमप्रधान है। ड्राइवर, लोडिंग-अनलोडिंग स्टाफ, वेयरहाउस ऑपरेटर, सप्लाई चेन मैनेजर, डेटा ऑपरेटर और आईटी सपोर्ट कर्मियों तक रोजगार के विविध अवसर पैदा होते हैं। इसके साथ ही छोटे ट्रांसपोर्टर, पैकेजिंग इकाइयां, मरम्मत कार्यशालाएं और स्थानीय सेवा प्रदाता भी इस आर्थिक गतिविधि से जुड़ते हैं, जिससे अप्रत्यक्ष रोजगार की एक विस्तृत श्रृंखला बनती है।  डेटा सेंटर और एआई: तकनीक से खुलेंगे नए करियर के दरवाजे बजट में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए ₹2,059 करोड़ का प्रावधान है जो पिछले वर्ष के बजट से 76% अधिक है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तेजी से डिजिटल और तकनीक-आधारित दिशा दी जा रही है। ‘उत्तर प्रदेश एआई मिशन’ के लिए ₹225 करोड़ और साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर हेतु ₹95.16 करोड़ की व्यवस्था केवल तकनीकी ढांचा मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के लिए उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर तैयार करने की पहल है। प्रदेश में पांच गीगावॉट क्षमता के पांच डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने की योजना के लिए ₹100 करोड़ का प्रारंभिक बजट प्रस्तावित है। यह राशि आने वाले वर्षों में आईटी सेक्टर को नई ऊंचाई दे सकती है। डेटा सेंटर स्थापित होने पर केवल आईटी इंजीनियर या डेटा विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि नेटवर्क मैनेजर, क्लाउड आर्किटेक्ट, साइबर सुरक्षा विश्लेषक, सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर और तकनीकी सपोर्ट स्टाफ जैसे अनेक प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी। इसके अलावा डेटा सेंटर के संचालन के लिए निरंतर बिजली आपूर्ति, कूलिंग सिस्टम, सुरक्षा, फायर सेफ्टी और मेंटेनेंस सेवाओं की जरूरत होती है। इनसे जुड़े तकनीकी और सहायक क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होंगे। बहुस्तरीय रोजगार मॉडल को बढ़ावा इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया गया निवेश केवल सड़क, भवन या औद्योगिक परिसर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह रोजगार की एक पूरी श्रृंखला को जन्म देता है। शुरुआत निर्माण चरण से होती है, जहां इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ, मशीन ऑपरेटर और बड़ी संख्या में श्रमिकों को तत्काल काम मिलता है। इसके बाद जब औद्योगिक इकाइयां उत्पादन शुरू करती हैं, तो फैक्ट्री कर्मियों, सुपरवाइजर, तकनीकी स्टाफ और प्रबंधन पेशेवरों के लिए स्थायी रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। इसी के साथ लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, परिवहन और वितरण सेवाएं सक्रिय होती हैं, जो सप्लाई चेन के हर स्तर पर नई नौकरियां जोड़ती हैं। इतना ही नहीं, इन गतिविधियों से स्थानीय बाजार, छोटे व्यवसाय, मरम्मत सेवाएं, पैकेजिंग और सहायक उद्योग भी लाभान्वित होते हैं, जिससे अप्रत्यक्ष रोजगार का दायरा और व्यापक हो जाता है।

डेंगू, मलेरिया और एईएस/जेई पर किया प्रभावी प्रहार, डिजिटल सर्विलांस पोर्टल से मॉनीटरिंग हुई मजबूत

योगी सरकार ने संचारी रोग नियंत्रण में रचा इतिहास, मृत्यु दर में आई उल्लेखनीय कमी  डेंगू, मलेरिया और एईएस/जेई पर किया प्रभावी प्रहार, डिजिटल सर्विलांस पोर्टल से मॉनीटरिंग हुई मजबूत वर्ष 2017 के मुकाबले 2025 में 89 प्रयोगशालाएं हो रहीं संचालित, 86 सेंटिनल और तीन एपेक्स प्रयोगशालाएं शामिल – एईएस से होने वाली मौतों में 99 प्रतिशत और जेई में 98 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई लखनऊ  योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों के दौरान संचारी रोगों के नियंत्रण को लेकर कई व्यापक और परिणामकारी कदम उठाए हैं। योगी सरकार ने डेंगू, मलेरिया तथा एईएस/जेई जैसे गंभीर रोगों पर प्रभावी प्रहार करते हुए जांच, उपचार और मॉनीटरिंग व्यवस्था को मजबूत बनाया। साथ ही डिजिटल सर्विलांस, प्रयोगशालाओं के विस्तार और त्वरित उपचार व्यवस्था से मृत्यु दर में ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है। 16 संक्रामक रोगों की 34 हजार से अधिक लैब में हो रही जांच स्वास्थ्य सचिव रितु माहेश्वरी ने बताया कि प्रदेश में एकीकृत डिजिटल सर्विलांस पोर्टल (आईडीएसपी) विकसित कर रोगों की निगरानी को सशक्त किया गया है। पोर्टल पर कुल 34,334 लैब पंजीकृत हैं, जिनमें 31,885 सरकारी तथा 2,439 गैर-सरकारी लैब शामिल हैं। इन लैबों के माध्यम से 16 संक्रामक रोगों और 6 वैक्सीन प्रिवेंटेबल डिजीज की नियमित जांच की जा रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए समयबद्ध सूचना उपलब्ध होने से रोगों की पहचान और नियंत्रण की कार्रवाई तेज हुई है। यही वजह है कि डेंगू की जांच सुविधाओं में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। वर्ष 2017 में जहां 29 जनपदों में मात्र 36 प्रयोगशालाएं संचालित थीं, वहीं वर्ष 2025 तक प्रदेश के सभी जनपदों में 89 प्रयोगशालाएं क्रियाशील हो चुकी हैं। वर्तमान में 86 सेंटिनल प्रयोगशालाएं और तीन एपेक्स प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। इससे डेंगू की उन्नत जांच सुविधा प्रदेशभर में उपलब्ध कराई जा रही है। जांच और उपचार व्यवस्थाओं में सुधार से डेंगू की मृत्यु दर जहां वर्ष 2017 में 0.91 थी, जो वर्ष 2025 में घटकर 0.06 रह गई है। इस अवधि में मृत्यु दर में लगभग 94 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। एईएस से होने वाली मौतों में 99 प्रतिशत और जेई में 98 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई सचिव ने बताया कि मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में भी प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2017 में सूचित मलेरिया रोगियों की संख्या 32,342 थी, जो वर्ष 2025 में घटकर 14,688 रह गई। इस प्रकार कुल रोगियों में लगभग 55 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं जांचों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। वर्ष 2017 में 46.69 लाख मलेरिया जांचें की गई थीं, जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.54 करोड़ तक पहुंच गया है। यानी जांचों की संख्या में 229 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी तरह एईएस/जेई नियंत्रण कार्यक्रम के तहत भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2017 से लेकर 2025 तक एईएस रोगियों की संख्या में 85 प्रतिशत की कमी आई है। एईएस से होने वाली मौतों की संख्या में 99 प्रतिशत तथा रोग मृत्यु दर में 94 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसी प्रकार जेई के रोगियों की संख्या में 96 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि जेई से होने वाली मृत्यु में 98 प्रतिशत और रोग मृत्यु दर में 76 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह उपलब्धि विशेष रूप से पूर्वांचल के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां कभी एईएस/जेई गंभीर चुनौती बने हुए थे। ब्लॉक स्तरीय इंसेफलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर से इलाज की क्षमता हुई सुदृढ़ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 में सूबे की कमान संभालने के बाद दिमागी बुखार के समूल उन्मूलन को उच्च प्राथमिकता देते हुए प्रभावित जिलों में व्यापक प्रयास सुनिश्चित किए। इसमें गोरखपुर और बस्ती मंडल के सभी सघन चिकित्सा इकाइयों में वेंटिलेटर सुविधा स्थापित की गई। इसके अतिरिक्त पीआईसीयू, ब्लॉक स्तरीय इन्सेफलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर, वेंटिलेटर, सेंटिनल तथा एपेक्स प्रयोगशालाओं की स्थापना कर उपचार क्षमता को सुदृढ़ किया गया। इससे गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध हो सका। योगी सरकार ने संचारी रोगों की रोकथाम के लिए केवल चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार ही नहीं किया, बल्कि जागरूकता अभियानों, स्वच्छता कार्यक्रमों और सामुदायिक सहभागिता पर भी विशेष बल दिया। गांव-गांव सर्वे, लार्वा निरोधक छिड़काव, फॉगिंग तथा आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर संपर्क अभियान चलाए गए। डिजिटल मॉनिटरिंग के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों की त्वरित पहचान कर नियंत्रण उपायों को प्रभावी बनाया गया, जिससे संचारी रोगों पर पूरी तरह से नियंत्रण पाया गया।

बजट पर आर्थिक विशषज्ञों की राय

बजट पर आर्थिक विशषज्ञों की राय  लखनऊ  बजट में एमएसएमई क्षेत्र के लिए 3,822 करोड़ रुपये का प्रावधान है। यह बीते साल से 19 प्रतिशत अधिक है। इससे उत्तर प्रदेश के नए उद्यमियों को काफी संबल मिलेगा। बजट में ऋण गारंटी को लेकर बैंकों के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इससे बड़ी जमानत के बिना भी छोटे उद्यमियों को ऋण लेने में आसानी होगी। शरद कोहली, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ  उत्तर प्रदेश के बजट में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास योजनाओं के लिए इस बार पिछले वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक धनराशि है। अब ₹27,103 करोड़ तय किए गए हैं। औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और डेटा सेंटर के जरिये सरकार लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों का सृजन कर रही है। प्रो मेनका सिंह, अर्थशास्त्री, दिल्ली यूनिवर्सिटी   देश के कुल मोबाइल फोन उत्पादन का 65 प्रतिशत उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है। भारत की 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेन्ट्स इकाइयां प्रदेश में स्थित हैं। प्रदेश का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 44,744 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस बार के बजट में इस क्षेत्र को बढ़ाना देने के ज्यादा धन दिया गया है। प्रो दीप्ति तनेजा, अर्थशास्त्री, दिल्ली यूनिवर्सिटी

महाशिवरात्रि पर गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में सीएम योगी ने किया देवाधिदेव महादेव का रुद्राभिषेक

मुख्यमंत्री ने रुद्राभिषेक-जलाभिषेक कर की प्रदेशवासियों के सुखमय जीवन की प्रार्थना महाशिवरात्रि पर गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में सीएम योगी ने किया देवाधिदेव महादेव का रुद्राभिषेक मानसरोवर और भरोहिया स्थित पितेश्वरनाथ शिव मंदिर में दर्शन-पूजन कर किया दुग्धाभिषेक-जलाभिषेक गोरखपुर  देवाधिदेव महादेव भोले शंकर की उपासना के पावन पर्व महाशिवरात्रि पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने सुबह गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में भगवान शिव का रुद्राभिषेक कर प्रदेशवासियों के आरोग्यमय, सुखमय, समृद्धमय व शांतिमय जीवन की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री ने अंधियारी बाग स्थित प्राचीन मानसरोवर मंदिर और भरोहिया के पितेश्वरनाथ शिव मंदिर में भी दर्शन, पूजन व दुग्धाभिषेक-जलाभिषेक किया और चराचर जगत के कल्याण की प्रार्थना की।   रविवार सुबह जनता दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में मठ के प्रथम तल पर स्थित शक्ति मंदिर में भगवान भोले शंकर का दुग्ध, दही, घी, मधु और शर्करा से पंच स्नान कराया। इसके बाद विधि विधान से रुद्राभिषेक किया। मठ के पुरोहित एवं वेदपाठी ब्राह्मणों ने शुक्ल यजुर्वेद संहिता के रुद्राष्टाध्यायी के महामंत्रों द्वारा रुद्राभिषेक का अनुष्ठान पूर्ण कराया। रुद्राभिषेक के बाद मुख्यमंत्री ने महादेव भगवान शिव से चराचर जगत के मंगल की प्रार्थना की।  गोरक्षपीठ में रुद्राभिषेक करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अंधियारी बाग के प्राचीन मानसरोवर मंदिर भी गए। यहां उन्होंने भोलेनाथ का दर्शन पूजन किया। भगवान शिव को पूजन सामग्री अर्पित कर, पंचस्नान कराकर दूध और जल से उनका अभिषेक किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए पूजन, अभिषेक का अनुष्ठान हवन और आरती के साथ पूर्ण हुआ। इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास आदि भी उपस्थित रहे।  इसी क्रम में महाशिवरात्रि पर सीएम योगी रविवार दोपहर बाद भरोहिया स्थित पितेश्वरनाथ शिव मंदिर पहुंचे। यहां बाबा पितेश्वरनाथ का दर्शन, पूजन व विधि विधान से जलाभिषेक कर संपूर्ण मानव जाति के कल्याण, सुख-समृद्धि एवं शांति की प्रार्थना की। पांडवकालीन मान्यता वाले पितेश्वरनाथ मंदिर का गोरक्षपीठ से गहरा नाता है। गोरक्षपीठाधीश्वर हर महाशिवरात्रि यहां जलाभिषेक करने आते हैं। जलाभिषेक करने के बाद मुख्यमंत्री ने भरोहिया में शिव मंदिर के सामने स्थित गुरु गोरखनाथ विद्यापीठ के परिसर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और लोगों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। बच्चों से बातचीत कर उन्हें आशीर्वाद दिया। स्थानीय खिलाड़ियों के साथ फोटो खिंचवाई और उनका उत्साहवर्धन किया। भरोहिया में मुख्यमंत्री के आगमन पर विधायक फतेह बहादुर सिंह, भरोहिया के ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि संजय सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।

शंकराचार्य मुद्दे पर सियासी घमासान, अखिलेश ने योगी सरकार को घेरा

लखनऊ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा सीएम योगी को लेकर दिए गए बयान से मैं सहमत हूं। राजधानी लखनऊ में पार्टी ऑफिस में पत्रकारों को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि कोई मुख्यमंत्री, जो अपने आप को योगी कह रहे हों, पूजनीय शंकराचार्य को लेकर ऐसा कह सकते हैं क्या? इतना व्यवहार खराब हो सकता है? अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि हम शंकराचार्य से 100 प्रतिशत सहमत हैं। रविवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल हो गए। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सिद्दीकी को सपा की सदस्यता ग्रहण कराई। उनके साथ उनकी पत्नी और 7 अन्य नेताओं ने भी रविवार को समाजवादी पार्टी का दामन थामा। नसीमुद्दीन सिद्दीकी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। मायावती का साथ छोड़ने के बाद उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन की थी। पिछले महीने उन्होंने कांग्रेस से भी इस्तीफा दे दिया था। सिद्दीकी ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि मैं अलग-अलग दलों में रहते हुए भी हमेशा मुलायम सिंह यादव से प्रभावित रहा। इसी तरह मैंने हमेशा अखिलेश यादव को ही अपना नेता माना। पिछले महीने, नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को इस्तीफा भेजकर पार्टी छोड़ने का कारण व्यक्तिगत बताया था। अपने लिखित इस्तीफा पत्र में सिद्दीकी ने कहा कि वे 'अपरिहार्य कारणों' से अपनी प्राथमिक सदस्यता और सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों का त्याग कर रहे हैं। नसीमुद्दीन सिद्दीकी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बसपा से की और मायावती सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला।

अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दीपोत्सव से रूस के कलाकारों को मिली प्रेरणा

एवगेनी बनेंगे राम, दारिया निभाएंगी सीता का किरदार, मुरात लक्ष्मण और दिमित्री बनेंगे हनुमान दोनों देशों के बीच संबंधों को मिलेगी नई गति, 20 फरवरी को रामलीला में पहुंचकर मॉस्को और आसपास के लोग होंगे भाव विभोर लखनऊ, अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राममंदिर से जुड़े विकास कार्यों और दीपोत्सव समेत किए जा रहे अभूतपूर्व आयोजनों की ख्याति अब सात समंदर पार तक पहुंच रही है। योगी सरकार के सांस्कृतिक विजन और अयोध्या में हुए आध्यात्मिक नवजागरण से प्रेरित होकर रूस की राजधानी मॉस्को में 20 फरवरी को भव्य रामलीला का आयोजन होगा। यह रामलीला अयोध्या में विगत दिनों हुए दीपोत्सव से प्रेरणा लेकर दिव्य और भव्य रूप में आयोजित की जा रही है। इसे भारत-रूस सांस्कृतिक संबंधों के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। रूस में भारत के दूतावास और जवाहरलाल नेहरू सांस्कृतिक केंद्र (JNCC) के सहयोग से होने वाली इस रामलीला में रूस के कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। राम की भूमिका में एवगेनी, सीता के रूप में दारिया, लक्ष्मण के रूप में मुरात और हनुमान के रूप में दिमित्री मंच पर भारतीय आस्था की सजीव प्रस्तुति देंगे। रूसी दर्शकों में विशेष उत्सुकता रूसी-भारतीय मैत्री संस्था ‘दिशा’ इस आयोजन की मुख्य संचालक है। डॉ. रामेश्वर सिंह के नेतृत्व में यह संस्था वर्षों से नाट्य प्रस्तुतियों, सांस्कृतिक उत्सवों और शैक्षिक पहल के जरिए भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक सेतु का निर्माण कर रही है। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सत्य, मर्यादा और आदर्श जीवन का सार्वभौमिक संदेश है। यही वजह है कि रूसी दर्शकों में भी इसके प्रति विशेष उत्सुकता देखी जा रही है। अयोध्या में दीपोत्सव की भव्यता से मिली प्रेरणा उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से अयोध्या का दीपोत्सव वैश्विक पहचान बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लाखों दीपों से जगमगाती अयोध्या की तस्वीरों ने दुनिया भर के सांस्कृतिक संगठनों और कलाकारों को प्रभावित किया है। योगी सरकार ने रूस के कलाकारों की टीम को अयोध्या दीपोत्सव में मंच प्रदान किया। यह टीम रामलीला प्रस्तुत कर पहले ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी है। अयोध्या की आध्यात्मिक आभा और आयोजन की भव्यता देखकर रूस से यहां आए आयोजक और कलाकार इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मॉस्को में भी उसी भाव को साकार करने का निर्णय लिया। दोनों देशों के बीच भावनात्मक जुड़ाव भारत-रूस सांस्कृतिक संबंधों में रामलीला की परंपरा का इतिहास भी उल्लेखनीय रहा है। 1960 के दशक में सोवियत अभिनेता पद्मश्री गेनादी मिखाइलोविच पेचनिकोव ने मॉस्को में रामलीला का मंचन कर दोनों देशों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को नई ऊंचाई दी थी। यह पहल दोनों देशों के लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अयोध्या की प्रेरणा से मॉस्को की रामलीला आयोजन का नेतृत्व कर रहे रामेश्वर सिंह ने बताया कि रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार के विशेष सहयोग से यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू किया गया दीपोत्सव और सांस्कृतिक नवजागरण अब वैश्विक प्रभाव दिखा रहा है। मॉस्को की रामलीला अयोध्या की प्रेरणा से आयोजित की जा रही है। 20 फरवरी को भाव-विभोर होगा रूस 20 फरवरी को मॉस्को में होने वाली रामलीला के लिए भव्य मंच सज्जा, पारंपरिक वेशभूषा और संगीत की विशेष तैयारी की जा रही है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रूसी नागरिक, भारतीय समुदाय और सांस्कृतिक जगत की हस्तियां शामिल होंगी। जब मंच पर श्रीराम की लीला सजीव होगी तो पूरा वातावरण भारतीय संस्कृति की भक्ति, मर्यादा और आदर्शों से सराबोर नजर आएगा। यह आयोजन नाट्य प्रस्तुतियों, उत्सवों और शैक्षिक पहल के माध्यम से दोनों देशों की एकता की सशक्त मिसाल पेश करेगा।