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आरक्षण पर दोगलापन? योगी के मंत्री संजय निषाद का UGC पर हमला

लखनऊ यूपी की योगी सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) से जुड़े विरोध प्रदर्शन पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश में कोई भी कानून अचानक नहीं आ जाता है। इसके पीछे एक लंबी और संवैधानिक प्रक्रिया होती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनरल कैटेगरी को 10 प्रतिशत आरक्षण मिला तब विरोध नहीं हुआ। मंत्री संजय निषाद ने कहा कि किसी भी कानून के निर्माण से पहले संबंधित आयोगों का गठन किया जाता है, उनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार होती है और विशेषज्ञों की राय ली जाती है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और संवैधानिक प्रावधानों का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। UGC को लेकर हो रहे विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि हर फैसले का उद्देश्य समाज के व्यापक हित को ध्यान में रखकर किया जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब आयोग की रिपोर्ट के आधार पर जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला लिया गया था, तब देश में इसका व्यापक विरोध नहीं हुआ। उस समय भी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया गया था, जिसे सभी ने स्वीकार किया। संजय निषाद ने कहा कि सरकार की मंशा किसी वर्ग के साथ अन्याय करने की नहीं होती, बल्कि सभी को समान अवसर देने की होती है। उन्होंने अपील की कि किसी भी मुद्दे पर विरोध करने से पहले तथ्यों और प्रक्रिया को समझना जरूरी है। मंत्री ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन संवाद और संवैधानिक मर्यादाओं के दायरे में रहकर ही अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार द्वारा लिए गए फैसले देश के शिक्षा तंत्र और समाज के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में होंगे।  

तोगड़िया का बड़ा बयान: शंकराचार्य–योगी विवाद पर बोले ‘परिवार में तकरार सामान्य’

अयोध्या अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया अयोध्या पहुंचे। उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपतराय ने रामलला का दर्शन कराया। इसके पहले तीर्थ क्षेत्र भवन रामकोट में पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर कहा कि शंकराचार्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूजनीय हैें। भाइयों में तकरार हो जाती है लेकिन फिर सब ठीक हो जाएगा।   प्रवीण तोगड़िया ने मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए कहा कि 500 सालों की प्रतीक्षा के बाद राम मंदिर निर्माण का होना देशवासियों के लिए प्रसन्नता और गर्व की बात है। उन्होंने अयोध्या वासियों को इसका श्रेय देते हुए कहा कि विभिन्न संगठनों व पूरा देश इस लड़ाई में अंतिम 40 साल में साथ खड़ा हुआ और गिलहरी की तरह अपनी भूमिका निभाई। साढ़े चार सौ साल तक यह लड़ाई अवध के लोगों ने लड़ी। यहां के पूर्वजों ने इस लड़ाई के लिए संकल्प लेकर नंगे पाव रहे और उपानह (पदवेश) का त्याग कर दिया। शंकराचार्य और योगी दोनों पूजनीय उन्होंने एक सवाल पर कोई टिप्पणी किए बिना कहा कि शंकराचार्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोनों हमारे लिए पूजनीय है। भाईयों में आपस में तकरार हो जाती है लेकिन फिर सब ठीक हो जाएगा। वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने चारों धाम यात्रा में गैर हिन्दूओं का प्रवेश वर्जित कर बहुत पुण्य का काम किया है। उन्होंने मांग की कि हिंदू मंदिरों के बाहर फूल व पूजा सामग्री भी बेचने से भी गैर हिन्दूओं को वंचित किया जाना चाहिए। इसी तरह से एसआईआर मामले पर उनका कहना था कि हिन्दुस्थान में किसी घुसपैठिए व बांग्लादेशी को रहने का अधिकार नहीं है। उन्हें बाहर किया जाना चाहिए। इसके अलावा यूजीसी के संशोधित प्रावधानों पर कहा कि बंटेंगे तो कटेंगे इसलिए हिन्दू समाज में जाति के आधार पर किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।  

हर जिले की पहचान एक उत्पाद से जोड़कर संतुलित आर्थिक विकास को दी गति

निर्यात, रोजगार व आय वृद्धि के आंकड़ों ने ओडीओपी को साबित किया सफल मॉडल लखनऊ,  उत्तर प्रदेश का ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) मॉडल आज देश के विकास विमर्श का केंद्र बन चुका है। वर्ष 2018 की यह पहल अब सिर्फ केवल एक सरकारी योजना नहीं,  बल्कि जिला आधारित आर्थिक बदलाव का सशक्त उदाहरण बन गई है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की इस विशिष्ट योजना ने प्रमाणित कर दिया कि यदि स्थानीय जरूरतों और पारंपरिक शक्तियों के अनुरूप नीति बनाई जाए, तो उसका असर धरातल पर स्पष्ट परिलक्षित होता है। ओडीओपी मॉडल की सफलता का प्रभाव प्रदेश के निर्यात आंकड़ों में भी स्पष्ट दिखता है। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश का निर्यात 88 हजार करोड़ रुपये था, जिसमें ओडीओपी निर्यात की हिस्सेदारी 58 हजार करोड़ थी। यह निर्यात वर्ष 2024 में बढ़कर 186 हज़ार करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें ओडीओपी निर्यात की हिस्सेदारी 93 हजार करोड़ है। यह उल्लेखनीय वृद्धि ओडीओपी को मिले समर्थन का स्पष्ट उदाहरण है। अब उत्तर प्रदेश का ओडीओपी मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए ब्लूप्रिंट के रूप में देखा जा रहा है। जिला आधारित उत्पाद रणनीति ने निर्यात को जमीनी स्तर तक मजबूत किया और छोटे उत्पादक भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ सके हैं। ओडीओपी योजना की मूल अवधारणा हर जिले की एक विशिष्ट पहचान तय करने की रही है। उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में स्थानीय पारंपरिक कला उद्योग या उत्पाद को चिन्हित कर उसे सरकारी संरक्षण में बाजार तक पहुंच और ब्रांडिंग का सहारा दिया गया। मुरादाबाद के पीतल, बनारस की बुनकरी, फिरोजाबाद के कांच, कन्नौज के इत्र और भदोही के कालीन जैसे उत्पादों को इसी सोच के माध्यम से नई पहचान हासिल हुई है। योगी सरकार के इस मॉडल ने असंतुलित क्षेत्रीय विकास की बड़ी समस्या का समाधान किया, जिसे वर्षों से नजरअंदाज किया जा रहा था। पहले औद्योगिक विकास कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित रहता था, लेकिन ओडीओपी के बाद छोटे जिले व कस्बे भी आर्थिक गतिविधियों के केंद्र बनने लगे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े और पलायन पर भी प्रभावी नियंत्रण लगा। प्रदेश सरकार के आंकड़ों के अनुसार ओडीओपी के चलते कारीगरों व छोटे उद्यमियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ओडीओपी स्किल डेवलपमेंट व टूलकिट वितरण योजना के तहत बड़ी संख्या में कारीगरों को प्रशिक्षण दिया गया है। आधुनिक टूलकिट प्रशिक्षण और आसान वित्तीय सहायता ने पारंपरिक काम को आधुनिक बाजार से जोड़ा। प्रदेश में अब तक 1.25 लाख से अधिक टूलकिट्स का वितरण किया जा चुका है। इससे स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया और उनकी पहुंच केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रही, वे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच बना रहे हैं। ओडीओपी मार्जिन मनी योजना के माध्यम से अब तक 6,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे सूक्ष्म,  लघु व मध्यम उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। ग्रामीण व अर्धशहरी क्षेत्रों में उद्यमिता को नई गति मिली है। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2025 में ओडीओपी को विशेष मंच दिया गया। इस आयोजन में ओडीओपी पवेलियन में 466 स्टॉल लगाए गए, जिनसे करीब 20.77 करोड़ रुपये की बिजनेस लीड/डील सामने आईं। इसी तरह प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान 6,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में ओडीओपी प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें जीआई टैग वाले प्रदेश के 44 ओडीओपी उत्पाद प्रदर्शित किए गए।

लोक कलाकारों ने बिखेगी नृत्य व गायन से माटी की खुशबू

लखनऊ,  राजधानी लखनऊ में ‘यूपी दिवस-2026’ के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय भव्य सांस्कृतिक उत्सव में कलाकारों ने राज्य की समृद्ध कला, संस्कृति, लोक परंपराओं व विकास यात्रा को विविध रूप से प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर 24 से 26 जनवरी तक चले इस मुख्य कार्यक्रम में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान लाखों की संख्या में प्रदेशवासियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को जनोत्सव में बदल दिया। इस अवसर पर लोक कलाकारों के अलावा ओशन बैंड के रॉक फ्यूज़न तथा विनीत सिंह व प्रतिभा सिंह बघेल की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। मुख्य समारोह में जहां विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियों ने प्रदेश की विकास यात्रा को दर्शाया, वहीं संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रमों ने प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच पर उतारा। वाराणसी के सौरव-गौरव मिश्रा ने कथक नृत्य की शास्त्रीय लय प्रस्तुत की तो पूरन महाराज के तबला वादन ने मंच को झंकृत कर दिया। बनारस की श्वेता दुबे और आजमगढ़ के शीतला मोहन मिश्रा के मधुर गायन ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया तो लखनऊ के विशाल गुप्ता ने शास्त्रीय नृत्य की छटा बिखेरी। उन्नाव के चंद्र भूषण ने नाटक का मंचन कर तालियां बटोरीं तो प्रसिद्ध इंडियन ओशन बैंड के रॉक व फ्यूज़न म्यूजिक ने खासकर युवा श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। यूपी दिवस के दूसरे दिन,  25 जनवरी का मुख्य आकर्षण रही मुंबई के विनीत सिंह की सुगम संगीत की प्रस्तुति, जिसने श्रोताओं की जमकर वाहवाही बटोरी। इसके अलावा दिनभर चले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में झांसी के वीरेंद्र सिंहल ने बुंदेली और लखनऊ की रंजना अग्रहरी ने लोक गायन से मंच पर मिट्टी की खुशबू बिखेरी। वाराणसी के गणेश पाठक के भजन गायन ने भक्ति रस की वर्षा की, झांसी की वंदना कुशवाहा ने राई लोकनृत्य और वाराणसी के राहुल-रोहित मिश्रा की कथक जोड़ी ने लय-ताल का जादू बिखेरा। दिल्ली के हरीश तिवारी ने शास्त्रीय गायन और लखनऊ के इल्मास खान ने तबला वादन से लोगों का दिल जीत लिया। यूपी दिवस समारोह के समापन दिवस, 26 जनवरी को प्रसिद्ध गायिका प्रतिभा सिंह बघेल के भजन एवं सुगम संगीत ने श्रोताओं की जमकर प्रशंसा हासिल की। मथुरा की सुधा पाल ने लोक नृत्य तथा  दिल्ली की देविका एस. मंगलामुखी ने कथक नृत्य प्रस्तुत कर आम जनमानस को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा से परिचित कराया। लखनऊ के अजय पांडेय के लोक गायन और कौशांबी के छेदीलाल के बिरहा गायन ने लोक जीवन के विविध भावों को व्यक्त किया। रायबरेली के शिव व शिवांग के गायन के साथ विभिन्न घरानों की नृत्य एवं गायन प्रस्तुतियों ने उत्सव का शानदार समापन सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यूपी दिवस समारोह का मुख्य आकर्षण मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाएं ओडीओसी (एक जिला-एक व्यंजन) और ओडीओपी (एक जिला-एक उत्पाद) के उत्पाद रहे। ओडीओसी के व्यंजनों ने यूपी के स्थानीय स्वाद से लोगों का मन लुभाया तो ओडीओपी के उत्पादों ने प्रदेश की पारंपरिक कारीगरी व शिल्प से जनता को परिचित कराया। इसके साथ ही संस्कृति विभाग की ओर से बसाए गए ‘कला गांव’ ने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण परिवेश का जीवंत रूप प्रदर्शित किया। यहां रामायण के पात्रों का रूप धारण किए हुए कलाकारों, कठपुतली नाच, रस्सी पर करतब करते कलाकारों और खाट पर चाय की व्यवस्था ने लोगों को आंचलिक उत्तर प्रदेश का अनुभव प्रदान किया। नृत्य-संगीत की इन प्रस्तुतियों ने न केवल लोगों का मनोरंजन किया, बल्कि उन्हें उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता, प्रतिभाओं व धरोहरों से भी परिचित कराया। इस आयोजन से प्रदेशवासियों को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गौरव करने का सुनहरा अवसर मिला।

जनता दर्शन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुनीं 200 लोगों की समस्याएं

गोरखपुर,  सोमवार देर शाम गोरखपुर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में रात्रि प्रवास करने के बाद मंगलवार सुबह जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात की। उन्होंने समस्या लेकर आए लोगों की बात ध्यान से सुनी, उनके प्रार्थना पत्र को पढ़ा। फिर आत्मीयता से बोले, ‘घबराइए मत, समस्या का समाधान कराया जाएगा।’ जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और उसका त्वरित, गुणवत्तापूर्ण व पारदर्शी निराकरण कराएं। मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन में आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने के निर्देश दिए। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री खुद चलकर पहुंचे। अपनेपन के भाव में ‘कहां से आए हैं, क्या बात है’, कहते हुए एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। भरोसा दिया कि सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कराएंगे। किसी को भी परेशान होने या घबराने की आवश्यकता नहीं है। प्रार्थना पत्रों को उन्होंने अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिप्रद होना चाहिए। कुछ लोगों द्वारा जमीन कब्जाने की शिकायत पर उन्होंने कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। गंभीर बीमारियों में इलाज के लिए मिलेगी भरपूर आर्थिक मदद हर बार की तरह जनता दर्शन में कई लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि इलाज में धन की कमी बाधक नहीं होगी, सरकार भरपूर आर्थिक मदद देगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज के लिए अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी। जनता दर्शन में परिजनों के साथ आए बच्चों को सीएम योगी आदित्यनाथ ने खूब प्यार दुलार किया। उन्हें स्कूल जाने व पढ़ने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने बच्चों को मिष्ठान्न भी दिए। गोशाला में सीएम योगी ने की गोसेवा गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। उन्होंने मंदिर की गोशाला में पहुंचकर गोसेवा की। गोशाला में सीएम योगी ने गोवंशों का नाम लेकर पुकारा। पास आने पर उन्हें खूब दुलारा और अपने हाथों से रोटी-गुड़ खिलाया। मंदिर की गोशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पहुंचने पर एक मोर भी उनके पास आ जाता है। मुख्यमंत्री इस मोर को 'पुंज' नाम से पुकारते हैं। उन्होंने मोर पर भी अपना स्नेह लुटाया। अपने हाथों से रोटी के छोटे टुकड़े कर मोर को खिलाए।

यमुना पर तीन प्रमुख बांध प्रोजेक्ट्स को मिली गति, केंद्र का फैसला दिल्ली के जलसंकट को सुलझाएगा

लखनऊ  कई दशकों से ठंडे बस्ते में पड़े यमुना और उसकी सहायक नदियों पर प्रस्तावित तीन बड़े बांध प्रोजेक्ट अब फिर से रफ्तार पकड़ने जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने लखवार, रेणुकाजी और किशाऊ बांध परियोजनाओं की समीक्षा कर इन्हें पुनर्जीवित करने का फैसला लिया है। अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं के पूरा होने से यमुना नदी में जल प्रवाह बेहतर होगा और राजधानी दिल्ली की पीने के पानी की जरूरतें अगले 25 वर्षों तक पूरी की जा सकेंगी। इन परियोजनाओं को लेकर हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और जल मंत्री प्रवेश वर्मा के साथ बैठक हुई थी। बैठक में यमुना के पुनर्जीवन और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में टिकाऊ जल उपलब्धता सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई। अधिकारियों का कहना है कि इन तीनों बांधों से मिलने वाला पानी दिल्ली की दीर्घकालिक जल समस्या का समाधान बन सकता है। दिल्ली में पानी की कमी, बढ़ती मांग वर्तमान में दिल्ली में औसतन 900 मिलियन गैलन प्रतिदिन (MGD) पानी का उत्पादन होता है, जबकि कुल मांग 1,113 MGD है। इसका मतलब है कि राजधानी को करीब 200 MGD पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, दिल्ली के कम से कम 10 प्रतिशत घरों में आज भी पाइप से पानी की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है। दिल्ली को कितना पानी मिलेगा      परियोजनाएं पूरी होने के बाद दिल्ली को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।     लखवार बांध से दिल्ली को लगभग 135 MGD पानी मिलेगा।     रेणुकाजी परियोजना से 275 MGD पानी मिलने की संभावना है।     किशाऊ परियोजना से 372 MGD पानी दिल्ली को उपलब्ध कराया जा सकेगा। इन तीनों परियोजनाओं से कुल मिलाकर पानी की आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे मौसमी और अनियमित जल स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। अधिकारियों के अनुसार, अगले 5 से 7 वर्षों में इन परियोजनाओं से दिल्ली को पानी मिलना शुरू हो सकता है। पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) में सुधार इन बांधों से केवल पानी की मात्रा ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि यमुना में ई-फ्लो (पर्यावरणीय प्रवाह) भी सुधरेगा। ई-फ्लो का मतलब नदी में पानी की वह मात्रा, समय और गुणवत्ता है, जो स्वस्थ जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और उस पर निर्भर मानव जीवन के लिए जरूरी होती है। अतिरिक्त 1,000 क्यूसेक पानी मिलने से यमुना की जल गुणवत्ता और प्रवाह की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है। परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति     लखवार परियोजना (उत्तराखंड): अब तक करीब 12.6 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसे 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।     रेणुकाजी परियोजना (हिमाचल प्रदेश): यह फिलहाल टेंडर प्रक्रिया के चरण में है और इसके 2032 तक पूरा होने की उम्मीद है।     किशाऊ परियोजना (उत्तराखंड–हिमाचल सीमा): यह अभी अंतरराज्यीय समझौते और मंजूरी के चरण में है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2033 रखा गया है। कई राज्यों को होगा फायदा इन परियोजनाओं से केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को भी लाभ मिलेगा। जल बंटवारा राज्यों की लागत भागीदारी के आधार पर किया जाएगा। इसके अलावा, इन बांधों से 760 मेगावाट से अधिक जलविद्युत उत्पादन की क्षमता भी विकसित की जाएगी। पहले क्यों रुकी थीं परियोजनाएं अधिकारियों के मुताबिक, इन परियोजनाओं के लंबे समय तक अटके रहने के पीछे कई कारण रहे:-     फंड की कमी     राज्यों के बीच विवाद     पर्यावरण और वन संबंधी मंजूरियों में देरी अब केंद्र सरकार के सक्रिय हस्तक्षेप के बाद इन बाधाओं को दूर करने की कोशिश की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये तीनों परियोजनाएं तय समयसीमा में पूरी हो जाती हैं, तो न केवल दिल्ली की जल आपूर्ति मजबूत होगी, बल्कि यमुना नदी के पुनर्जीवन की दिशा में भी यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।  

बरसाना होली उत्सव का कार्यक्रम जारी, 24 फरवरी लड्डू और 25 को लठामार होली

मथुरा विश्व प्रसिद्ध बरसाना की होली का कार्यक्रम तय हो चुका है। 24 फरवरी से 26 फरवरी तक बरसाना और नंदगांव राधा-कृष्ण प्रेम की जीवंत लीला के साक्षी बनेंगे। श्रीजी मंदिर में लड्डू होली से उत्सव का शुभारंभ होगा। अगले दिन राधारानी के आंगन में लाठियों की गूंज उठेगी और तीसरे दिन नंदगांव में प्रेम रस की लीला होगी। देश-विदेश के श्रद्धालु इस दिव्य उत्सव में शामिल होंगे।   बरसाना की होली केवल तीन दिनों का पर्व नहीं, बल्कि चालीस दिवसीय परंपरा है। वसंत पंचमी पर श्रीजी मंदिर में होली का डांडा गढ़ते ही उत्सव शुरू हो जाता है। मंदिर में समाज गायन फाल्गुन पूर्णिमा तक चलता है और महाशिवरात्रि को लठामार होली की प्रथम चौपाई निकलते ही राधारानी के आंगन की लीला का विधिवत शुभारंभ हो जाता है। बरसाना-नंदगांव की लठामार होली कोई साधारण उत्सव नहीं, बल्कि विक्रम संवत 1569 से चली आ रही भक्ति और प्रेम की परंपरा है। रसिक संत नारायण भट्ट द्वारा शुरू की गई यह लीला आज भी उसी उल्लास और मर्यादा के साथ निभाई जाती है।   कार्यक्रम के अनुसार, 24 फरवरी को लड्डू होली के साथ फाल्गुन महोत्सव अपने मुख्य चरण में प्रवेश करेगा। प्रसाद हाथों में पड़ते ही फाग की तान गूंज उठेगी और पूरा धाम गुलाल में रंग जाएगा। 25 फरवरी को बरसाना की लठामार होली होगी। रंगीली गली में हुरियारिन घूंघट ओढ़े लाठियां थामेंगी। नंदगांव के हुरियारे ढाल सजाकर राधा के आंगन में पहुंचेंगे। पहली लाठी की थाप के साथ जय राधे का उद्घोष गूंजेगा। 26 फरवरी को यही लीला नंदगांव में सजेगी। बरसाने की गोपियां नंदगांव की गलियों में फाग गीतों, ढोल-नगाडों की धुन पर थिरकेंगी। उधर, श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर मंदिर सेवायत, आयोजन समितियां और प्रशासन तैयारियों में जुट गए हैं।   मंदिर सेवायत रास बिहारी गोस्वामी ने बताया कि वसंत पंचमी पर श्रीजी मंदिर में होली का डांडा गढ़ते ही चालीस दिवसीय होली उत्सव की शुरुआत होती है। इसी दिन से मंदिर में समाज गायन चलता है और महाशिवरात्रि को प्रथम चौपाई निकलते ही लठामार होली शुरू होती है। ब्रजाचार्य पीठ के प्रवक्ता घनश्याम भट्ट ने कहा कि लठामार होली राधा-कृष्ण प्रेम की परंपरा को दर्शाती है।

Live-in रिलेशनशिप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- ‘रिश्ते टूटने पर पुरुष दुष्कर्म के आरोपों में फंस रहे’

इलाहाबाद  इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) और दुष्कर्म कानूनों को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पश्चिमी विचारधारा के प्रभाव में युवाओं के बीच बिना विवाह किए साथ रहने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। जब ऐसे संबंध समाप्त होते हैं, तो कई मामलों में दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज करा दी जाती है। पुराने कानूनों में फंस रहे पुरुष: कोर्ट न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा (प्रथम) की बेंच ने कहा कि चूंकि कानून महिलाओं के पक्ष में बनाए गए हैं, इसलिए पुरुषों को उन प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया जा रहा है, जो उस समय बने थे जब लिव-इन रिलेशनशिप की अवधारणा अस्तित्व में ही नहीं थी। आजीवन कारावास की सजा रद्द कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश (POSCO Act), महाराजगंज की ओर से मार्च 2024 में अपीलकर्ता चंद्रेश को दी गई आजीवन कारावास की सजा और दोषसिद्धि आदेश को रद्द कर दिया। अपीलकर्ता को IPC की विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया गया था। पीड़िता बालिग पाई गई अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी ने शिकायतकर्ता की नाबालिग बेटी को शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर बेंगलुरु ले जाकर शारीरिक संबंध बनाए। हालांकि, हाई कोर्ट ने पाया कि पीड़िता बालिग थी। अस्थि परीक्षण रिपोर्ट में उसकी उम्र लगभग 20 वर्ष पाई गई, जिस पर ट्रायल कोर्ट ने उचित विचार नहीं किया था। सबूतों में पाई गईं गंभीर खामियां कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत विद्यालय रिकॉर्ड किशोर न्याय नियमों के अनुसार वैध दस्तावेज नहीं थे। पीड़िता की मां (गवाह-1) की ओर से बताई गई उम्र में भी विरोधाभास पाया गया। एफआईआर में उम्र 18½ वर्ष बताई गई थी। पीड़िता ने अपने बयान में स्वीकार किया कि वह स्वेच्छा से घर छोड़कर पहले गोरखपुर और फिर बेंगलुरु गई थी।

ममता कुलकर्णी छोड़ेंगी महामंडलेश्वर का पद? किन्नर अखाड़े को लेकर बयान से मचा हलचल

प्रयागराज  आध्यात्मिक दुनिया में महामंडलेश्वर, जगद्गुरु और शंकराचार्य जैसे बड़े-बड़े पदों की संख्या जिस तेजी से बढ़ी है, इस बीच किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी ने आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में अपने पद को लेकर ऐसी बात कह दी, जिसने लोगों के बीच हलचल तेज कर दी। उन्होंने कहा है कि महामंडलेश्वर का पद अब उन्हें एक गंभीर आध्यात्मिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मजाक जैसा लगने लगा है। आईएएनएस से बात करते हुए ममता कुलकर्णी ने कहा, ''जब मैं इस आध्यात्मिक यात्रा में गहराई से उतरीं, तब मुझे कई सच्चाइयों का एहसास हुआ। बाहर से जो दुनिया बहुत पवित्र और ज्ञान से भरी हुई दिखाई देती है, अंदर जाकर देखने पर वैसी नहीं लगती। आज हर तरफ ऐसे लोग घूम रहे हैं, जो खुद को महामंडलेश्वर या जगद्गुरु घोषित कर रहे हैं, लेकिन उनके पास न तो सही ज्ञान है और न ही आत्मज्ञान। केवल वस्त्र पहन लेने या कोई पद पा लेने से कोई संत नहीं बन जाता।'' ममता कुलकर्णी ने धार्मिक ग्रंथों का उदाहरण देते हुए आत्मज्ञान की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ''वेदों और उपनिषदों में भी सिखाया गया है कि केवल मंत्रों को याद कर लेना या शास्त्रों का ज्ञान होना ही सब कुछ नहीं है। असली ज्ञान वह है, जिससे व्यक्ति अपने भीतर की सच्चाई को समझ सके।'' ममता ने श्वेतकेतु और उनके पिता उद्दालक ऋषि के संवाद का जिक्र करते हुए कहा कि जब चारों वेद कंठस्थ करने के बाद भी आत्मज्ञान नहीं मिला, तो वह ज्ञान अधूरा था। आज भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा, ''मैंने अपने आध्यात्मिक सफर में बहुत कम सच्चे संत देखे हैं। दस में से नौ लोग ऐसे मिले, जो झूठे थे और केवल पद और पहचान के पीछे भाग रहे थे। इसी अनुभव के चलते मुझे अब महामंडलेश्वर का पद एक हास्य विनोद जैसा लगने लगा है। जब हर दूसरे दिन नए महामंडलेश्वर बनाए जा रहे हों, तो ऐसे में पदों की गंभीरता अपने आप खत्म हो जाती है।'' किन्नर अखाड़े के संस्थापक रहे ऋषि अजय दास पर भी ममता कुलकर्णी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें धर्म, वेद और परंपरा की बुनियादी समझ भी नहीं है, लेकिन वे बड़े-बड़े मंचों से उपदेश देते हैं। नाच-गाने को लेकर टिप्पणियां करते हैं। भारतीय परंपरा में नृत्य और संगीत को कभी तुच्छ नहीं माना गया। भगवान शिव का नटराज स्वरूप और श्रीकृष्ण की लीलाएं इसके उदाहरण हैं।" ममता कुलकर्णी ने कहा कि वह महामंडलेश्वर का पद छोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रही हैं। उन्होंने कहा, "मुझे अंदर से संकेत मिल रहा है कि मुझे भी अपने इस पद को अभी छोड़ना चाहिए, क्योंकि जब चारों ओर नकली लोग भरे हों, तो ऐसे पद पर बने रहने का कोई अर्थ नहीं रह जाता। सत्य के लिए किसी विशेष वस्त्र या पद की जरूरत नहीं होती। सच्चा गुरु वही होता है, जो तपस्वी हो, अहंकार से दूर हो और दिखावे से परे जीवन जीता हो।"

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आंगनवाड़ी केंद्र भवनों के निर्माण में आई तेज़ी

प्रदेश में 2775 में से 2581 आंगनवाड़ी केंद्र भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण शेष 194 केंद्रों का निर्माण कार्य शीघ्र होगा पूरा प्रारम्भिक शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आंगनवाड़ी केंद्र किए जा रहे सुदृढ़ लखनऊ, उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आंगनवाड़ी केंद्र भवनों के निर्माण, सुदृढ़ीकरण और सुविधाओं के विस्तार की दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश में प्रस्तावित 2775 आंगनवाड़ी केंद्र भवनों में से 2581 का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जबकि शेष 194 केंद्रों का निर्माण कार्य भी शीघ्र पूरा किया जा रहा है। निर्माण, मरम्मत और आधुनिकीकरण का कार्य तेज राज्य सरकार द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधायुक्त बनाने के उद्देश्य से निर्माण, मरम्मत और आधुनिकीकरण का कार्य तेज़ी से कराया जा रहा है, जिससे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को पोषण, स्वास्थ्य और प्रारम्भिक शिक्षा से जुड़ी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें। महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल महिला एवं बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव, महिला कल्याण लीना जोहरी ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है। नए भवनों में अनिवार्य सुविधाएं उपलब्ध उन्होंने बताया कि नए आंगनवाड़ी भवनों में बच्चों के अनुकूल कक्ष, पोषण कक्ष, बैठक स्थल, शौचालय तथा सुरक्षित पेयजल जैसी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। किराये के भवनों से पक्के भवनों में हो रहा स्थानांतरण किराये के भवनों में संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से नए पक्के भवनों में स्थानांतरित किया जा रहा है। इन भवनों में साफ-सुथरे कमरे, रसोईघर, शौचालय, पेयजल, खेल सामग्री और बच्चों के बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। कुपोषण से लड़ाई को मिलेगी मजबूती योगी सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव और शहरी वार्ड स्तर पर सुरक्षित, आधुनिक और सुसज्जित आंगनवाड़ी केंद्र उपलब्ध हों, जिससे कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई को मजबूती मिले और बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास को बढ़ावा मिल सके। डिजिटल निगरानी व्यवस्था को भी किया जा रहा सुदृढ़ इसके साथ ही पोषण ट्रैकर और डिजिटल पंजीकरण जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं, ताकि लाभार्थियों की निगरानी अधिक प्रभावी और पारदर्शी ढंग से की जा सके। बुनियादी ढांचे से बढ़ा भरोसा और सहभागिता नए आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण से बच्चों की नियमित उपस्थिति में वृद्धि हुई है और अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत हुआ है। साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बेहतर और सुरक्षित वातावरण में कार्य करने की सुविधा मिल रही है।